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जमीन पर बनाया तिरंगा, छात्रों से कहा इस पर लात देकर चलो: महिला पत्रकार को ‘इंडियन एजेंट’ बताकर घेरा, इंडो-बांग्ला बस पर फेंके पत्थर… बांग्लादेश में हदें पार कर रहे इस्लामी कट्टरपंथी

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के साथ भारत के खिलाफ घृणा का स्तर बढ़ता ही जा रहा हैं। इस्लामी कट्टरपंथी सड़कों पर भारतीयों को निशाना बना रहे हैं, प्रशासन द्वारा हिंदू पुजारियों को पकड़ा जा रहा है, पुलिस द्वारा हिंदू पत्रकारों की आवाज दबाई जा रही है और बांग्लादेशी छात्र शैक्षणिक संस्थानों में खुलेआम तिरंगे का अपमान कर रहे हैं।

तिरंगे का अपमान

बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसी तमाम तस्वीरें सामने आई हैं जहाँ दिख रहा है कि जमीन पर तिरंगे को पेंट करवाकर उस पर छात्रों को चलवाया जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए जा रहे हैं कि वो तिरंगे को लात मारते हुए चलें। वहीं इस्कॉन के प्रतीक और इजरायली झंडे को भी अपमानित किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तस्वीरें मुख्यत: बोगुरा पॉली टेक्निक इंस्टीट्यूट, बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीयूईटी), ढाका यूनिवर्सिटी (गणित भवन) और नोआखली साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से सामने आई हैं हैं।

प्रोफेसरों ने खुद माना है कि बांग्लादेशी छात्र भारत को अपमानित करने के लिए ऐसे काम कर रहे हैं। इन तस्वीरों को देखने के बाद भारतीयों में खासी नाराजगी है। कल ही कोलकाता के टॉप डॉक्टर ने ऐसी एक तस्वीर देख ऐलान किया था कि अगर बांग्लादेश में ये सब हो रहा है तो वो भी बांग्लादेशियों का कभी इलाज नहीं करेंगे।

बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार गिरफ्तार

गौरतलब है कि बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के जाने के बाद से लगातार हिंदुओं पर अलग-अलग तरह से अत्याचार की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इस साल अगस्त में कथित छात्र प्रदर्शन के दौरान एक 17 साल के लड़के की मौत हो गई थी। अब उस मामले में ही बांग्लादेश की पुलिस ने हिंदू पत्रकार मुन्नी साहा को गिरफ्तार किया है। उन्हें इंडियन एजेंट बताते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें जनता टावर स्थित दफ्तर के बाहर घेर लिया था और बाद में पुलिस बुलाकर उन्हें अरेस्ट करवाया। उनके ऊपर हत्या का केस लगाया गया है।

बस पर बांग्लादेशियों ने किया हमला

इसी तरह मालूम हो कि बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं और भारतीयों के खिलाफ घृणा दिखाते हुए एक बस को भी निशाना बनाया है। यह घटना बांग्लादेश के ब्राह्मणबारिया जिले की बिस्वा रोड से सामने आई है।

यहाँ बांग्लादेश के रास्ते कोलकाता से त्रिपुरा चलने वाली बस पर हमला किया गया। इस संबंध में त्रिपुरा के परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी ने बताया कि एक अंतर्राष्ट्रीय पैसेंजर बस त्रिपुरा से कोलकाता जा रही थी। इसी बीच बिस्वा रोड पर एक किनारे पर चल रही बस को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई जिससे यात्री काफी घबरा गए। सीएम ने इस पर कहा- ऐसी घटनाओं के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता और न इनके होने पर इन्हें स्वीकार किया जा सकता है।

संभल में कड़ी सुरक्षा, जामा मस्जिद से लेकर गलियों-बाजारों का न्यायिक आयोग की टीम ने लिया जायजा: कहाँ से आए पत्थरबाज, किसने मुस्लिम भीड़ से करवाई हिंसा… सबकी पड़ताल

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नंवबर 2024) को हुई हिंसा की जाँच अब शुरू हो चुकी है। इसके लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग बनाया गया है। यह टीम रविवार (1 दिसंबर 2024) को संभल पहुँची और सबसे पहले जामा मस्जिद में जाँच की। इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आयोग को दो महीने में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोग की टीम मुरादाबाद से रवाना होकर सुबह संभल पहुँची। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ इस 3 सदस्यीय टीम ने उन जगहों का दौरा किया, जहाँ 24 नवंबर को हिंसा हुई थी। टीम ने पैदल ही बाजार और गलियों में जाकर घटनास्थल की गहराई से पड़ताल की। इसी दौरान टीम जामा मस्जिद भी पहुँची और जरूरी सबूत जुटाए।

जाँच के दौरान सुरक्षा के सख्त इंतजाम थे। हर जगह पुलिस तैनात थी। जाँच दल में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा, पूर्व डीजीपी अमित मोहन प्रसाद और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन शामिल हैं। इनके साथ मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय सिंह और डीआईजी मुनिराज भी थे। स्थानीय डीएम और एसपी ने टीम को हिंसा के दिन की घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

न्यायिक आयोग की जाँच कुछ खास बिंदुओं पर केंद्रित है। न्यायिक आयोग पड़ताल कर रहा है कि 24 नवंबर की हिंसा अचानक भड़की या इसके पीछे कोई सोची समझी साजिश थी? इसी के साथ आयोग यह भी जानने का प्रयास करेगा कि घटना के समय प्रशासनिक स्तर पर तो कोई लापरवाही नहीं हुई। हिंसा की असल वजह के साथ आयोग यह भी जाँचेगा कि दोबारा ऐसा न हो उसके लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या तैयारियाँ की गईं हैं।

जाँच फिलहाल जारी है और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों से भी पूछताछ हो रही है। आयोग दो महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे सरकार को सौंपा जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘मोदी को मार डालो… निज्जर को किसने मारा, भारत सरकार…’: कनाडा में मंदिर के बाहर खालिस्तानियों ने लगाए आपत्तिजनक नारे, वाणिज्य दूतावास के काम को किया बाधित

खालिस्तान समर्थकों ने 30 नवंबर 2024 को कनाडा के ऑन्टोरियो प्रांत के स्कारबोरो में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर भारत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कोर्ट के रोक के बावजूद ये विरोध प्रदर्शन हुए। खालिस्तानियों ने ऐसे समय में विरोध प्रदर्शन किया, भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारी कनाडा में रहने वाले बुजुर्ग भारतीय नागरिकों को सहायता के लिए वार्षिक शिविर आयोजित कर रहे थे।

इस शिविर में बुजुर्ग भारतीय नागरिकों को जीवन प्रमाण पत्र दिया जा रहा था। यह प्रमाण पत्र भारत सरकार से पेंशन पाने के लिए एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हालाँकि, ये शिविर खालिस्तान समर्थकों के निशाने पर आ गए हैं। इसके जरिए ये भारत सरकार के प्रयासों को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले कनाडा में कई स्थानों पर सुरक्षा के कारण कई शिविर रद्द कर दिए गए थे।

मंदिर के बाहर प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने खालिस्तानी झंडे लहराए और उसके समर्थन में नारे लगाए। लाउडस्पीकर पर नारे और भाषण के जरिए इस शिविर में आए बुजुर्ग लोगों को डराने की कोशिश की गई, ताकि भारत सरकार के प्रयासों में बाधा पहुँचाई जा सके। इन शिविरों में हिंदू, सिख, मुस्लिम और ईसाई सहित विभिन्न धर्म के बुजुर्ग पेंशनभोगियों को सेवा प्रदान की जाती है।

इस प्रदर्शन को कवर कर रहे नेशनल टेलीग्राफ के पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने इसका एक वीडियो साझा किया है। अपनी रिपोर्ट में बोर्डमैन ने कहा है, “ये खालिस्तानी जिस चीज का विरोध कर रहे हैं, वह साधारण रिवर्स रेमिटेंस है – भारतीय पेंशनभोगियों द्वारा कमाया गया पैसा कनाडा में भेजा जा रहा है। उनका उद्देश्य भारत-कनाडा संबंधों को अस्थिर करना और यहां सामाजिक सद्भाव को बाधित करना है।”

कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने आगे कहा, “ये समूह (खालिस्तान समर्थक) विदेशी शक्तियों, विशेष रूप से पाकिस्तान और चीन से प्रभावित हैं, और अराजकता फैलाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।” उन्होंने अपनी रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों को जमकर लताड़ लगाई।

उन्होंने कहा कि कनाडा में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इन शिविरों में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई… हर धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग आते हैं। उन्होंने कहा, “इन शिविरों में भारत सरकार की कोई साजिश नहीं है। मैंने सिखों, हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों को शांतिपूर्वक अपनी पेंशन लेते देखा है। प्रदर्शनकारियों के दावे निराधार और हरकतें खतरनाक हैं, क्योंकि वे मंदिरों जैसे स्थानों के खिलाफ हिंसा भड़काते हैं।”

एक वीडियो में खालिस्तान समर्थकों को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौत की कामना करते हुए नारे लगाते हुए सुना जा सका है। खालिस्तानियों ने ‘मोदी को मार डालो’ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाते लगाए। वहीं, एक दूसरे वीडियो में खालिस्तानियों को ‘निज्जर को किसने मारा, भारत सरकार’ के नारे लगाते हुए सुना गया।

सुरक्षा के लिए कोर्ट ने उठाया कदम

इन शिविरों के आसपास बढ़ते तनाव के बीच ऑन्टोरियो में सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने शिविर के दौरान प्रदर्शनकारियों को मंदिर के 100 मीटर के दायरे में इकट्ठा होने से रोकने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा, “प्रशासनिक कांसुलर सेवाओं और पूजा के लिए मंदिर में आने वाले बुजुर्गों को डराना उनके और उस समुदाय के लिए नुकसानदेह है, जिसका प्रतिनिधित्व मंदिर करता है।”

अदालत ने टोरंटो पुलिस और ऑन्टोरियो प्रांतीय पुलिस सहित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को गिरफ्तार करने तथा वस्तुओं और संरचनाओं को हटाने का अधिकार दिया है। इससे पहले वैंकूवर में खालसा दीवान सोसाइटी के रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारे को भी ऐसा ही आदेश दिया गया था, जिसने पुलिस सुरक्षा में वाणिज्य दूतावास शिविर की शांतिपूर्वक मेजबानी की थी।

कनाडा में सुरक्षा चुनौतियाँ

इन शिविरों के कारण कनाडा में भारतीय राजनयिक प्रयासों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। बता दें कि नवंबर की शुरुआत में ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में एक वाणिज्य दूतावास शिविर पर खालिस्तानी समर्थकों ने हमला कर दिया था। इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। इस घटना के बाद भारतीय वाणिज्य दूतावास ने ओकविले में वैष्णो देवी मंदिर सहित कई शिविरों को रद्द कर दिया था।

इसके अलावा, हिंसा की धमकियों के कारण कुछ स्थानों पर वाणिज्य दूतावास शिविरों को स्थानांतरित करना पड़ा या आयोजन को पूरी तरह से रद्द करना पड़ा। टोरंटो में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएँ व्यक्त करते हुए कहा था, “यहां तक ​​कि न्यूनतम सुरक्षा गारंटी भी प्रदान नहीं की जा रही है, जिससे यह उपस्थित लोगों और आयोजकों के लिए असुरक्षित हो रहा है।”

बता दें कि ब्रैम्पटन और सरे में हिंदू मंदिरों पर खालिस्तानियों ने 3 नवंबर को हमला कर दिया था। उस समय स्थानीय लोगों की मदद के लिए एक वाणिज्य दूतावास शिविर चल रहा था। ब्रैम्पटन में खालिस्तानियों को हिंदू सभा मंदिर परिसर में लाठी लेकर घुसते हमला करते देखा गया। भारतीय उच्चायोग ने संभावित खतरों के बीच कनाडाई पुलिस से सहायता माँगी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।

सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरपंथियों ने चलाया TMD (काफिरों को मार डालो) का ट्रेंड, बांग्लादेश में एक और हिंदू संत को बिना वारंट के पुलिस ने पकड़ा

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 29 नवंबर 2024 को वहाँ चट्टोग्राम पुलिस ने एक और हिंदू पुजारी श्री श्याम दास प्रभु को गिरफ्तार किया। ये जानकारी इस्कॉन के राधारमण दास ने अने सोशल मीडिया पर साझा की। 25 नवंबर को देशद्रोह के आरोप में चिन्मॉय दास की गिरफ्तारी के बाद ये दूसरी कार्रवाई है।

बताया जा रहा है कि श्री श्याम दास प्रभु को उस वक्त पकड़ा गया जब वो चिन्मॉय दास से मिलने जेल गए थे। उन्हें बिन किसी आधिकारिक वारंट के गिरफ्तार किया गया और सफाई दी गई कि इस प्रकार किसी को भी हिरासत में लेकर बाद में छोड़ा जा सकता है।

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ प्रशासन हिंदुओं को पकड़कर उन्हें सताने में लगा है तो वहीं सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथी हिंदुओं को मारने का आह्वान खुलेआम कर रहे हैं। जानकारी सामने आई है कि इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर एक ऐसे हैशटैग- ‘टोटल मलाऊँ डेथ’ के साथ पोस्ट साझा कर रहे हैं जिसका मतलब है कि सारे हिंदुओं को मार डाला जाए। (मलाऊँ शब्द का इस्तेमाल गैर मुस्लिमों/काफिरों के लिए किया जाता है।)

देख सकते हैं कि इस हैशटैग के भीतर 200000 से ज्यादा पोस्ट साझा हो चुके हैं और इसे करने वाले सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही हैं। उनके लिए ‘मलाऊँ’ का अर्थ काफिर जैसा होता है जहाँ वो हिंदुओं को मारने का समर्थन करते हैं।

मालूम हो कि ये हैशटैग पहली बार सोशल मीडिया पर नहीं चलाया गया। अक्सर हिंदूविरोधी मानसिकता के लोगों को लामबंद करने के लिए इस तरह के हैशटैग चलाकर नफरत फैलाने का काम होता रहा है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेशी इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी घृणा को देखने के बाद लोगों ने स्थिति पर चिंता जताई है और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से आग्रह किया है कि वो स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाएँ वरना हालात हाथ से निकल जाएँगे। लेकिन, अभी तक सरकार का हिंदू विरोधी घटनाओं के बाद जो रवैया रहा है उसे देख लगता है कि उन्होंने ऐसी घटनाओं के खिलाफ अपनी आँख मूंदी हुई हैं। उन्हें न हिंदुओं के खिलाफ होती हिंसा दिख रही है और न रोते-बिलखते हिंदुओं की आवाज सुनाई पड़ रही है। इस्लामी कट्टरपंथी अब भी हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं। इस्कॉन को बंद करने की माँग कर रहे हैं। न्याय माँगने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है। वहीं जो अन्याय कर रहे हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

संभल की मस्जिद में 13 साल की लड़की से रेप की कोशिश, मौलाना के भाई ने बनाया बंधक: चीखती-चिल्लाती रही पीड़िता, करता रहा गंदी हरकत

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक मस्जिद में नाबालिग बच्ची को बंधक बना कर रेप की कोशिश की गई है। पीड़िता की चीख पुकार सुन कर राहगीरों ने उसे बचाया। बच्ची की माँ ने इस मामले में मस्जिद के मौलाना और उसके नाबालिग भाई के खिलाफ तहरीर दी गई है। घटना शुक्रवार (29 नवंबर 2024) की है। पुलिस ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर उसके भाई को भी कस्टडी में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला संभल जिले के थानाक्षेत्र गुन्नौर का है। यहाँ ढलान वाली नाम से एक मस्जिद है। मस्जिद का मौलाना आसपास के बच्चों को दीनी तालीम देता है। इसी तालीम को हासिल कर रहा एक छात्र शुक्रवार को मस्जिद गया था। छात्र की 13 वर्षीया नाबालिग बहन अपने भाई से मिलने शाम लगभग 7 बजे मस्जिद पहुँची। आरोप है कि इसी दौरान बच्ची को मौलाना के नाबालिग भाई ने दबोच लिया।

पीड़िता ने छूटने की कोशिश की, तो उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। यहाँ बच्ची के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी गईं। इधर लड़की के लापता होते ही परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। तलाश के दौरान लोगों को मस्जिद के अंदर से पीड़िता की चीख-पुकार सुनाई दी। पीड़िता के परिजन उस कमरे तक पहुँच गए जिसमें लड़की को बंधक बनाया गया था। दरवाजा खोला गया तो अंदर मौलाना का नाबालिग भाई पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालात में मिला।

डरी-सहमी पीड़िता ने बताया कि उसके साथ रेप की भी कोशिश की गई थी। बच्ची की माँ ने मामले की शिकायत पुलिस में की। शिकायत में उन्होंने मस्जिद के मौलाना को भी अपने भाई के साथ घिनौनी करतूत में शामिल बताया है। पुलिस ने यह केस पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज कर लिया है। आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर उसके नाबालिग भाई को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ महिला ने बंधक बनाने और बार-बार रेप करने का दर्ज कराया मुकदमा: इसके पहले दोनों का वायरल हुआ था वीडियो

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा पर एक महिला ने बंधक बनाने, मारपीट करने और बलात्कार का मामला दर्ज कराया है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के सभापति रह चुके संदीप शर्मा और पीड़ित महिला के व्यक्तिगत फोटो और वीडियो पहले वायरल हो चुके हैं। शिकायत मिलने के बाद मुख्यालय के सदर थाना पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

जब आरोपित और पीड़िता के फोटो और वीडियो वायरल हुए थे, तब पीड़िता ने चित्तौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह और एक महिला एवं एक पुरुष के खिलाफ वायरल करने की थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित महिला ने तीनों लोगों पर उसका निजी फोटो-वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया था। वीडियो में संदीप शर्मा महिला की माँग में सिंदूर और गले में चेन पहनाते हुए नजर आए थे।

निजी फोटो वायरल मामले की जाँच कर रही सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम 10 दिन पहले महिला का बयान दर्ज करने के लिए चित्तौड़गढ़ आई थी। इस टीम के साथ क्राइम ब्रांच से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी चित्तौड़गढ़ पहुँचे थे। टीम ने महिला से संपर्क करके बयान देने के लिए कहा तो पीड़िता ने मानसिक हालत ठीक नहीं होने की बात कहकर बयान देने से मना कर दिया था।

बता दें कि चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा लगभग डेढ़ महीने पहले ही सभापति पद से हटे हैं। शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को पीड़ित महिला ने थाने में शिकायत देकर कहा कि संदीप शर्मा ने उसे बंधक बनाया और दिल्ली, गोवा, मुंबई के होटलों में ले जाकर मारपीट की और उसका रेप किया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि नेतागिरी का डर दिखाकर संदीप शर्मा ने उसे सेंथी में स्थित एक होटल में दो माह तक बंधक बना कर रखा। महिला ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया और इसकी अश्लील वीडियो भी बना लिए गए। महिला ने आरोप लगाया कि उसने संदीप शर्मा से वीडियो डिलीट करने के लिए कहा तो वह चले गए और फोन बंद कर लिया।

इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय विनय चौधरी और थाना अधिकारी गजेंद्र सिंह ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है। इस मामले की जाँच जिला मुख्यालय के सदर थाना अधिकारी गजेंद्र सिंह द्वारा की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस वक्त पीड़ित महिला संदीप शर्मा के खिलाफ थाने में शिकायत देने के लिए आई थी, उस वक्त संदीप शर्मा भी वहाँ मौजूद थे।

इस साल अक्टूबर में वायरल हुए फोटो और वीडियो को संदीप शर्मा ने फेक बताया था। लगभग 52 साल के कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा इस वीडियो में 24 साल की पीड़ित महिला साथ में दिख रहे थे। उनका यह फोटो-वीडियो सोशल मीडिया साइट्स पर वायरल हुआ था। कहा जाता है कि पीड़िता पहले चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करती थी। बाद में उसे हटा दिया गया था। 

तब नगर परिषद में प्रतिपक्ष के भाजपा नेता छोटू सिंह ने आरोप लगाया था कि संदीप शर्मा पर पिछले 3 साल में भ्रष्टाचार के लगभग दो दर्जन मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने शर्मा पर 20 मामले में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। लव अफेयर का मामला सामने पर छोटू सिंह ने संदीप शर्मा को चरित्रहीन बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। 

मिशनरी के अनाथ आश्रम में रहती थी हिंदू लड़की, ईसाई लड़के ने कर लिया अगवा: NCPCR के पूर्व अध्यक्ष बोले- धर्मांतरण का था इरादा, इसलिए संस्था ने नहीं कराई FIR

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक ईसाई मिशनरी संस्था पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें धर्मान्तरण की साजिश और नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण का मामला सामने आया है। यह आरोप राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के पूर्व अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने लगाए हैं। प्रियांक ने दावा किया है कि एक ईसाई लड़के ने इस अनाथ आश्रम में रह रही एक हिन्दू लड़की का अपहरण किया था, और इस घटना के पीछे धर्मान्तरण की साजिश हो सकती है। उनका यह भी कहना था कि इस घटना में यौन शोषण का भी पहलू हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नर्मदापुरम के इटारसी क्षेत्र में स्थित “जीवोदय बाल देखरेख संस्था” से जुड़ा हुआ है, जो ईसाई मिशनरी संस्था द्वारा संचालित है। इस संस्था को सिस्टर क्लारा एनीमोट्टी संचालित करती हैं, जो इस विवाद के केंद्र में हैं। इस संस्था पर शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के पूर्व चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रियांक कानूनगो ने बताया कि जीवोदय संथा में पल रही OBC समुदाय की हिन्दू लड़की का एक ईसाई लड़के ने अपहरण कर लिया। अपहरण का मकसद पीड़िता का यौन शोषण बताया गया है। इस अपहरण के पीछे धर्मान्तरण की साजिश की आशंका जताते हुए प्रियांक कानूनगो ने अपहरण के बाद जीवोदय संस्था द्वारा FIR न दर्ज कराने पर सवाल खड़े किए हैं। अपहरण के 2 दिनों के बाद पीड़िता को गैरकानूनी ढंग से बरामद कर लिया जाता है।

प्रियांक ने आगे बताया कि बरामदगी के बाद एक पंचनामा बनवा कर पीड़िता को आरोपित की बहन मोना मसीह के हवाले कर दिया जाता है। इस पंचनामे का स्क्रीनशॉट भी प्रियांक कानूनगो ने शेयर किया है। दावा है कि मोना मसीह के पास पीड़िता 4 दिनों तक रही। इसके बाद अपहरण का आरोपित पीड़िता को अपने घर ले कर चला गया। आरोप है कि जिले के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सब जानते हुए संस्था को बचाने और मामले को दबाने की कोशिश की।

चित्र साभार- X/प्रियांक कानूनगो

प्रियांक कानूनगो ने आरोप लगाया कि इस दौरान नर्मदापुरम के स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने मिशनरी संस्था को क्लीन चिट दे दी, जिससे यह मामला और भी संदिग्ध हो गया। प्रियांक ने इसे मानव तस्करी और धर्मान्तरण के रैकेट का हिस्सा बताया और आरोप लगाया कि प्रशासन ने संस्था को बचाने की कोशिश की। उन्होंने बच्चों के अधिकारों पर अक्सर बयानबाजी करने वाले संगठनों को चर्च के टुकड़ों पर पलने वाला बताया है और उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं।

इसके बाद सिस्टर क्लारा का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इन आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। सिस्टर क्लारा ने अपनी संस्था को पूरी तरह से पाक-साफ बताया और इस लापरवाही का दोष चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) पर मढ़ा। उनका कहना था कि अगर कोई गलती हुई है, तो इसके लिए CWC जिम्मेदार है, न कि उनकी संस्था।

पुलिस ने अब इस मामले में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जीवोदय संस्था की सुपरवाइजर को इस मामले में नामजद किया गया है, और पुलिस ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जाँच शुरू कर दी है।

SHO गौरव सिंह के मुताबिक, मिले सबूतों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अब आगे की जाँच जारी है और पुलिस ने सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

16 साल से कम है उम्र तो अब सोशल मीडिया पर नहीं कर सकेंगे ‘तमाशा’, यूज किया तो देना होगा ₹275 करोड़ तक जुर्माना: ऑस्ट्रेलिया ने लगाया है जो प्रतिबंध उसके बारे में जानिए सब कुछ

ऑस्ट्रेलिया ने हाल में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के बाद वो ऐसा फैसला लेने वाला पहला देश बन गया। उन्होंने इस कानून को बनाने के लिए संसद में बिल पारित किया, जिसको संसद में पक्ष-विपक्ष दोनों का समर्थन मिला और नया कानून बना।

सोशल मीडिया बैन के नियम

इस नए कानून के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में अब से नाबालिग बच्चे (16 साल से कम उम्र के बच्चे) सोशल मीडिया साइट्स जैसे एक्स (पूर्व में ट्विटर), टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि नहीं चला पाएँगे। और अगर वो इन नियमों का पालन नहीं करते या इस मामले में कुछ गड़बड़ करते पाए जाते हैं तो उन पर 32.5 मिलियन डॉलर (लगभग 275 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अभिभावकों के अनुरोध पर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लिया फैसला

खास बात ये है कि यह कानून माता-पिता की सहमति या पहले से मौजूद खातों के लिए कोई छूट नहीं देता। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि युवा लोग अधिक खेल गतिविधियों में भाग लें और फोन से दूर रहें।

उन्होंने बताया कि कैसे वो माता-पिता जिन्होंने फोन के दुष्परिणामों के कारण अपने बच्चों को गँवाया, वो उन्हें फोन करक आपबीती बताते थे और वो सब सुनना असहनीय हो जाता था। उन्होंने कहा- “ये हमारी जिम्मेदारी थी कि इस मामले पर हम एक्शन लें। हमारी सरकार ने वही किया भी। मैं बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ सभी को।”

कैसे किया जाएगा बच्चों को सोशल मीडिया से दूर

ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के बाद हर जगह इस फैसले पर चर्चा हो रही है। सवाल हो रहे हैं कि आखिर बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना कैसे संभव होगा। तो, इसके लिए जानकारी सामने आई है कि ऑस्ट्रेलिया हर इंटरनेट यूजर के लिए एक डिजिटल आईडी बनाएगा जिसके बिन इस्तेमाल के कोई इंटरनेट नहीं चला पाएगा।

सोशल मीडिया पर लोग माँग कर रहे हैं कि ऐसा फैसला हर जगह लागू होना चाहिए। हाँ, इसी बीच कुछ आलोचक ऐसे भी हैं जो इस विधेयक की प्रक्रिया पर चिंता जताते दिखे। मगर, अच्छी बात ये देखने को मिली कि ऑस्ट्रेलिया की 77% आबादी बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के समर्थन में थी।

कानून लागू होने में लगेगा 1 साल तक का समय

जानकारी के लिए बता दें कि इस कानून को लागू करने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को एक वर्ष का समय दिया गया है। जनवरी 2025 से इस कानून का परीक्षण चरण शुरू होगा, जिसके बाद इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा। यह कदम युवा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालाँकि कुछ स्थानीय इस फैसले के विरोध में अपनी नाराजगी जता रहे हैं।

लोगों का क्या है नए कानून पर कहना

सोशल मीडिया बैन पर कानून बनने के बाद जहाँ एक पक्ष का कहना है कि ये फैसला ऐसा है जैसे लोकतंत्र खत्म हो गया हो। उनका कहना है कि सरकार आखिर कैसे इस तरह के नियमों को बना सकती है। कैसे बच्चों से उनके अधिकार छीने जा सकते हैं। वहीं दूसरे पक्ष का कहना ये है कि ये सोशल मीडिया पर इस प्रकार प्रतिबंध लगना बिलकुल सही फैसला है। ये बच्चों के लिए कहीं से कहीं तक ठीक नहीं था। उसपर बहुत सी चीजें आती हैं जो एक उम्र के बच्चों को नहीं देखनी चाहिए थी तो ये फैसला बिलकुल ठीक है।

छत्तीसगढ़ के जिस गाँव को वामपंथी आतंकियों ने अंधेरे में कर रखा था कैद, उसे BJP सरकार ने पहली बार बिजली से किया रोशन: सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से कराया मुक्त

आजादी के 78 साल के बाद छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित एक गाँव में बिजली पहुँची है। राज्य के सुदूर इलाके में बसा छुटवाही नाम का यह गाँव एक साल पहले तक नक्सलियों के कब्जे में था। यहाँ गुरुवार (28 नवंबर 2024) को पहली बार बिजली पहुँची। इस गाँव तक सड़क भी नहीं है। सरकार ने अगले साल तक यहाँ सड़क बनाने की योजना बनाई है।

छुटवाही गाँव बीजापुर जिले में स्थित है। यह बीजापुर मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर है। दो महीने पहले सुरक्षाबलों ने इस इलाके को माओवादियों से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए बड़े पैमाने पर नक्सल विरोधी अभियान था। इस दौरान यहाँ कई मुठभेड़ों को अंजाम दिया गया था। इलाके को नक्सलियों से मुक्त कराने के बाद यहाँ एक सुरक्षा शिविर स्थापित किया गया था।

बीजापुर के जिलाधिकारी संबित मिश्रा ने कहा, “आजादी के बाद पहली बार हम ग्रामीणों को बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम हुए हैं, क्योंकि बीजापुर में नए सुरक्षा शिविर बनने से हम यहाँ तक पहुँच पा रहे हैं। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यहाँ बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है, ताकि गाँवों तक हमारी पहुँच बने। अगले साल तक हम उन्हें सड़क से जोड़ने का प्रयास करेंगे।”

जिलाधिकारी संबित मिश्रा ने आगे बताया, “नियाद नेल्लनार योजना के तहत बिजली के अलावा हम उन्हें मोबाइल टावर, स्कूल, आँगनवाड़ी केंद्र, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जल जीवन मिशन के तहत पानी की आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं।” तमाम तरह की चुनौतियों को पूरा करते हुए भारी सुरक्षा घेरे में इंजीनियर और कर्मचारियों ने बिजली के खंभे और ट्रांफॉर्मर आदि स्थापित किए।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि बीजापुर के 100 से अधिक गाँवों में अभी भी बिजली कनेक्शन नहीं है। अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे सुरक्षाबल आगे बढ़ेंगे और गाँवों को माओवादियों से मुक्त कराएँगे, वैसे-वैसे प्रशासन वहाँ के निवासियों को बिजली-सड़क सहित केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत अन्य लाभ प्रदान करने में समर्थ हो पाएगा।

बता दें कि इस साल छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने 210 माओवादियों को मार गिराया है। 1 नवंबर 2000 को राज्य के गठन के बाद से एक साल में माओवादियों को हुई ये सबसे बड़ी क्षति है। इस अवधि में राज्य के बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा में 17 सुरक्षाकर्मी और 62 नागरिक मारे गए हैं। बस्तर क्षेत्र में बीजापुर सहित सात जिले आते हैं।

हिंदू लड़की को प्यार में फँसाकर गोमांस खिलाने की कोशिश, नमाज पढ़ने को किया मजबूर: साबिर अंसारी गिरफ्तार, दो बार गर्भपात भी कराया

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक हिन्दू लड़की ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, दो बार गर्भपात कराने और गोमांस खाने व नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित साबिर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।

इंस्टाग्राम से शुरू हुई बातचीत, शादी का वादा कर बनाए संबंध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रंगनाथ नगर थानाक्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने बताया कि तीन साल पहले उसकी साबिर अंसारी से इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। उसने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की, जिसके बाद बातचीत शुरू हो गई। जल्द ही साबिर ने प्रेमजाल में फंसा लिया और शादी का वादा करने लगा।

कुछ ही दिनों के अंदर लड़की और साबिर में फोन पर बातें होने लगीं। दोनों ने मिलने-जुलने लगे। इस दौरान साबिर और पीड़िता के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। जब भी लड़की विरोध करती, साबिर शादी का झाँसा देकर उसे चुप करवा देता। पीड़िता का दो बार गर्भपात कराया गया। साबिर ने उसे नमाज़ पढ़ने और गोमांस खाने के लिए भी मजबूर किया।

साबिर कर रहा था कहीं और निकाह, तब लड़की ने दर्ज कराई शिकायत

कुछ समय बाद लड़की को पता चला कि साबिर का निकाह कहीं और हो रहा है। यह जानने के लिए वह साबिर के घर गई, जहाँ उसे धमकी दी गई कि अगर उसने मुँह खोला तो जान से मार दिया जाएगा। दी गई। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद वे थाने पहुँचे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर साबिर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने इस तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

महिला थाना प्रभारी रश्मि सोनकर ने बताया कि केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87, 64(1), 64(2)m और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। गुरुवार (28 नवंबर 2024) को रंगनाथ क्षेत्र के बवाली टोला में दबिश के दौरान पुलिस ने साबिर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।