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जिस सामागुरी में 60% मुस्लिम, वहाँ गोमांस बाँटकर जीतती थी कॉन्ग्रेस? MP रकीबुल हुसैन के दावे से खड़ा हुआ सवाल: असम में CM सरमा गोमांस पर प्रतिबंध लगाने को तैयार, क्या साथ आएगा ‘हाथ’

CM सरमा ने पूछा है कि क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है, और अगर ऐसा है तो क्या कॉन्ग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

क्या कॉन्ग्रेस अब तक सामागुरी में गोमांस बाँट कर जीत रही थी? यह प्रश्न असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पूछा है। उन्होंने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस माँग करे कि राज्य में गोमांस बैन हो जाए तो वह एक्शन लेने को तैयार हैं। उन्होंने यह बयान कॉन्ग्रेस के आरोपों के बाद दिया है। भाजपा पर कॉन्ग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि वह सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती है।

कॉन्ग्रेस के आरोपों के बाद CM सरमा ने कहा कि वह राज्य में गोमांस पर बैन लगाने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा सहमत हों। उन्होंने कहा कि अगर रिपुन बोरा सहमत हों तो अगली विधानसभा की बैठक में ही गोमांस पर बैन लगा दिया जाएगा।

CM सरमा ने कहा कि गर गोमांस पर बैन लग गया तो ना भाजपा-कॉन्ग्रेस और ना ही कोई अन्य पार्टी इसे वोटरों को पेश कर पाएगी। उन्होंने कहा कि इस बैन के बाद हिन्दू-मुस्लिम और ईसाई कोई भी गोमांस भी नहीं खा पाएँगे। CM सरमा ने रकीबुल हसन पर भी प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने रकीबुल हुसैन से कहा है कि वह गोमांस पर बैन लगाने को पत्र लिखें।

CM सरमा ने पूछा है कि क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है, और अगर ऐसा है तो क्या कॉन्ग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

रकीबुल हुसैन ने इससे पहले भाजपा के सामागुरी जीतने पर आरोप लगाया था कि उसने गोमांस बाँट कर यह जीत हासिल की है। रकीबुल हुसैन इस सीट पर पिछले लगभग ढाई दशक से विधायक थे। वह लोकसभा चुनाव में धुबरी के सांसद बन गए थे। इस सीट पर उपचुनाव में उनके बेटे तंजील हुसैन को कॉन्ग्रेस ने उतारा था।

तंजील हुसैन को हालिया उपचुनाव में करारी शिकस्त भाजपा ने दी थी। भाजपा के दिप्लु रंजन सरमा ने यहाँ तंजील को 24500 वोटों से हराया था। तंजील की यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह सीट मुस्लिम बहुल है। इस सीट पर 60% से अधिक मुस्लिम वोटर हैं। यहाँ एक 1996 में ही गैर मुस्लिम उम्मीदवार जीत सका था।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सामागुरी में बीजेपी की जीत को असम की राजनीति में ‘मील का पत्थर’ करार दिया था। हार के बाद कॉन्ग्रेस के रकीबुल हुसैन ने कभी गोमांस तो कभी वोटिंग में गड़बड़ी के आरोप लगाए। हालाँकि, उनकी इन बातों CM सरमा ने ही पूछ लिया कि क्या वह गोमांस बैन किए जाने का समर्थन करते हैं।

गौरतलब है कि असम के भीतर गोमांस को अलग तरह का क़ानून है। असम में गोमांस खाया जा सकता है लेकिन उन इलाकों में गाय नहीं काटी जा सकती जहाँ पर 5 किलोमीटर के दायरे में हिन्दू, जैन या सिख रहते हैं। साथ ही में वैष्णव मठों के भी आसपास गोवध नहीं हो सकता।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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