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Article 370: यूरोपियन पार्लियामेंट भी साथ, कहा- आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने में मिलेगी मदद

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने का मामला यूरोपियन पार्लियामेंट (ईपी) में भी उठा। दुनिया भर के देशों की तरह ही ईपी ने भी भारत सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्य टॉमस चेकोवस्की ने इसे भारत का आतंरिक मामला बताते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म होने से कश्मीर में आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने में मदद मिलेगी। टॉमस ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को प्रधानमंत्री मोदी का आतंकियों के खिलाफ बड़ा फैसला बताया।

ईपी के मासिक अखबार ET टुडे में रविवार (सितंबर 1, 2019) को प्रकाशित खबर के मुताबिक, चेकोवस्की ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से कुछ आतंकी संगठन कश्मीर घाटी में आतंक फैला रहे हैं। ये सशस्त्र समूह जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संगठनों से जुड़े या संबद्ध व्यक्तियों पर हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। हाल में कम से कम राजनीतिक दल के 6 कार्यकर्ता और एक अलगाववादी नेता की हत्या में भी ये शामिल रहे हैं।

टॉमस ने आगे कहा कि कश्मीर में अक्टूबर 2018 में स्थानीय चुनावों के दौरान आतंकी हमलों की घटनाएँ सबसे ज्यादा हुई। जो नेता चुनावों में हिस्सा ले रहे थे, उन्हें धमकियाँ मिल रही थी। उन्होंने कहा कि ज्यादातर पाकिस्तानी आतंकी संगठन पीओके से ही संचालित हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट का कहना है कि 1990 से लेकर अब तक कश्मीर में कई आतंकी संगठनों का उदय हुआ है। वर्तमान समय में चार बड़े आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हरकत उल-मुजाहिद्दीन की सक्रियता सबसे ज्यादा है। इन सभी आंतकी संगठनों को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है। 

विशाल डडलानी और तहसीन पूनावाला को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जैन मुनि का उड़ाया था मजाक

जैन मुनि का मजाक उड़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने संगीतकार व आम आदमी पार्टी के समर्थक विशाल डडलानी और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला को जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

हाई कोर्ट ने 1 मई, 2019 को दोनों के खिलाफ हरियाणा पुलिस के FIR को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उन्होंने कोई आपराधिक अपराध नहीं किया था।

ख़बर के अनुसार, अगस्त 2016 में, हरियाणा पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के अपराध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295-A, 153-A और 509 के तहत अंबाला छावनी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

अगस्त 2016 में डडलानी ने हरियाणा विधानसभा को संबोधित करते हुए कुछ नग्न साधु के ‘कोलोस्डल आइडियल’ पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी। जैन समुदाय के लोग उनके इस ट्वीट पर आक्रोशित हो गए। स्थिति को क़ाबू में करने के लिए AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को माफ़ी तक माँगनी पड़ी थी। इस बीच, कॉन्ग्रेस समर्थक और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला ने भी जैन भिक्षु पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

तरुण सागर का बीते साल निधन हो गया था। वे दिगंबर समुदाय के जैन भिक्षु थे। ऐसे भिक्षु कपड़े नहीं पहनते हैं। बाद में डडलानी ने भी माफ़ी माँग ली थी। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जैन साधु से मुलाक़ात कर माफ़ी माँगी थी। वहीं, पूनावाला ने अपने ट्वीट पर कोई अफ़सोस न जताते हुए तर्क दिया कि उन्होंने कोई आपराधिक अपराध नहीं किया।

बीवी और अब्बू के अवैध संबंधों से परेशान युवक ने दिया तीन तलाक, कहा- नए कानून के तहत सजा भी मंजूर

उत्तरप्रदेश के जौनपुर से ट्रिपल तलाक का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अभी तक ट्रिपल तलाक से जुड़ी हर शिकायत में जहाँ हमें महिला के पीड़ित और दुखी होने की खबर मिलती थी, वहीं इस बार मुस्लिम युवक ने अपने इस कदम के पीछे अपनी आप बीती सुनाई है। साथ ही युवक ने कहा है कि वो अपनी बीवी को तीन तलाक देने के लिए सजा भुगतने को भी तैयार है।

31 अगस्त को दीवानी न्यायालय पहुँचकर शिकायत दर्ज कराने वाले इस शख्स ने पुलिस को बताया कि पिता और पत्नी को आपत्तिजनक अवस्था में देखने के बाद उसके पास ट्रिपल तलाक के अलावा कोई और चारा नहीं बचा था। और अब वह इसके लिए नए कानून के तहत सजा भुगतने को भी तैयार है। युवक की मानें तो उसे सबसे बड़ी सजा उसकी पत्नी ने दे दी है।

जनसत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम युवक की शादी 12 साल पहले हुई थी। लेकिन पिछले कई सालों से वह सऊदी अरब में रहकर पैसे कमाता था। कुछ समय पहले बीमार पड़ने की वजह से वह वापस जौनपुर लौट आया। घरवापसी पर उसे कई लोगों ने बताया कि उसकी पत्नी का उसके पिता से अवैध संबंध हैं।

हालाँकि, उस समय उसने अपने पड़ोसियों की नहीं मानीं। लेकिन बीते 25 अगस्त को वो किसी काम से वाराणसी गया और काम जल्दी खत्म होने के कारण रात में ही घर वापस आ गया। घर आकर उसने देखा कि उसकी पत्नी उसके अब्बू के साथ आपत्तिजनक अवस्था में हैं। जिसके बाद उसने अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया।

इस घटना के बाद इस शख्स ने एसपी को प्रार्थना पत्र लिखकर अपनी पत्नी और पिता के ख़िलाफ़ केज दर्ज करने का आग्रह भी किया और कहा कि ट्रिपल तलाक पर बने नए कानून के तहत वह सजा भुगतने को भी तैयार है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में युवक की पत्नी और पिता के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज होने के बाद भी उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे परेशान होकर अब इस शख्स ने पुलिस कप्तान से मदद माँगी हैं।

‘नेपाल से हिंदू राजशाही उखाड़ने का राजीव गॉंधी ने बनाया प्लान, माओवादियों से की थी मिन्नतें’

हिन्दू राष्ट्र रहे नेपाल की राजशाही को उखाड़ फेंकने में राजीव गाँधी के सरकार की अहम भूमिका थी। भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ने नेपाल में एक गुप्त ऑपरेशन चलाया था जिसका उद्देश्य पड़ोसी राष्ट्र में राजशाही हटाकर लोकतंत्र की स्थापना करना था। रॉ के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर अमर भूषण ने अपनी पुस्तक ‘इनसाइड नेपाल’ में लिखा है कि रॉ ने इस बात की पूरी कोशिश की थी कि नेपाल में अराजक तत्व राजशाही-विरोधी अभियान का फ़ायदा नहीं उठाएँ।

जनता ने राजतंत्र की अधिकारों में कटौती करने एवं लोकतंत्र की स्थापना के लिए बड़ा अभियान चलाया था। राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली सरकार चाहती थी कि भारत इस कार्य में नेपाल की जनता का सहयोग करे। रॉ ने नेपाल के सभी राजनीतिक दलों व संगठनों के बीच एकता बनाए रखने के लिए मेहनत की। गुप्त ऑपरेशन के लिए रॉ के ईस्टर्न ब्यूरो के चीफ के रूप में भूषण ने भी अपना नाम जीवनाथन रख लिया था। इसी नाम से उन्होंने कई बहुत से लोगों को राजशाही के ख़िलाफ़ अभियान के लिए प्रशिक्षित किया

नेपाल के राजा बीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव पर कोई दबाव काम नहीं कर रहा था। इसके लिए भारत सरकार ने कूटनीतिक तरीके भी अपनाए लेकिन सब बेकार। इसके बाद भारत सरकार ने नेपाल में खाद्य पदार्थों की सप्लाई रोने का निर्णय लिया, ताकि राजा पर दबाव डाल कर जनता के प्रति जिम्मेदार बनाने के प्रयासों को बल मिले। नेपाल के राजा मदद के लिए चीन तक पहुँच गए थे। भारत कभी नहीं चाहता था कि पड़ोसी देशों में साम्राज्यवादी चीन का प्रभाव मजबूत हो।

इसके बाद भारत सरकार ने रॉ प्रमुख एके वर्मा को यह कार्य सौंपा। उन्होंने अपने सबसे विश्वस्त अधिकारी जीवनाथन को यह दायित्व दिया। इसके बाद जीवनाथन नेपाल में राजशाही के पर कतर कर लोकतंत्र की स्थापना का प्रयासों में जुट गए। जीवनाथन ने सरकार को भरोसा दिलाया कि जो काम कूटनीतिज्ञ और राजनयिक न कर सके, वह कार्य रॉ कर दिखाएगी। इससे पहले रॉ की ईस्टर्न यूनिट को कभी महत्व नहीं मिला था।

रॉ ने माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड को लुभाने के लिए सारी ताक़तें लगा दीं ताकि वह राजशाही के ख़िलाफ़ लड़ाई में बाकी राजनीतिक दलों का साथ दें। प्रचंड आगे चल कर 2 बार (अगस्त 2016 – जून 2017, अगस्त 2008 – मई 2009) नेपाल के प्रधानमंत्री भी बने। कई बैठकों के उपरांत रॉ प्रचंड को मनाने में कामयाब हुआ था, क्योंकि वह छिप कर रहते थे और उन तक पहुँचना मुश्किल होता था। इस प्रक्रिया में महीनों लग गए।

जीवनाथन के साथ हुई एक बैठक में प्रचंड ने सवाल भी पूछा था कि नेपाल राजशाही के अंतर्गत रहे या फिर लोकतंत्र के, इससे भारत को आख़िर क्या मतलब है? खैर, ऑपरेशन ख़त्म होते ही जीवनाथन गायब हो गए। उन्होंने अपने अंतर्गत कार्य कर रहे लोगों से साफ़ कह दिया कि वे ऐसा समझें कि कोई जीवनाथन था ही नहीं। नेपाल के कई नेता जीवनाथन को खोजते हुए भटक रहे थे लेकिन जीवनाथन तो कोई था ही नहीं।

ममता के बंगाल में हिंसा के ख़िलाफ़ BJP ने किया बंद का आह्वान, TMC कार्यकर्ताओं ने जमकर मचाया उत्पात

पश्चिम बंगाल में भाजपा सांसद अर्जुन सिंह पर हुए हमले के बाद पार्टी ने आज बैराकपुर में बंद बुलाया। उन्होने इस घटना के विरोध प्रदर्शन में सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 12 घंटों के बंद का आह्वान किया। इस दौरान वहाँ से टीएमसी कार्यकर्ताओं और भाजपा समर्थकों के बीच आपसी भिडंत की खबरे आई। जिसमें 25 भाजपा समर्थकों के घायल होने की सूचना है। इन घायलों को फिलहाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इनका इलाज जारी है।

पुलिस ने इस बंद के दौरान अब तक उत्तर 24 परगना में 13 भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि टीएमसी के उत्पात पर अभी पुलिस द्वारा लिए एक्शन की कोई खबर नहीं आई है। भाजपा ने पुलिस की इस तरह की कार्रवाई का कड़ा विरोध भी किया है।

गौरतलब है कि कल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में भाजपा सांसद की कार पर हुए हमले के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। इस हमले में सिंह के सिर पर गंभीर चोटें भी आई है, जिस कारण वह अस्पताल में भर्ती हैं। आज बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकर ने खुद अपोलो अस्पताल में उनसे जाकर मुलाकात भी की।

इस घटना के बाद भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ममता सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तर 24 परगना जिले में भाजपा कार्यालय पर कब्जा करने का प्रयास और भाजपा सांसद अर्जुन सिंह और विधायक पवन सिंह के साथ हुई हिंसा अत्यंत निंदनीय हैं। ऐसे अवैध तरीकों का सहारा लेकर, टीएमसी पश्चिम बंगाल में फिर से लोकतंत्र की हत्या कर रही हैं।

चिदंबरम को घर में ही बंद करें, तिहाड़ न भेजें: SC से कपिल सिब्बल की फ़रियाद

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि पूर्व वित्त मंत्री 74 साल के हैं उनको तिहाड़ जेल न भेजा जाए। उन्होंने कहा कि उनके लिए घर में नजरबंदी ही अच्छी होगी, उनको गिरफ्तारी से छूट दी जाए और जमानत के लिए आवेदन करने दिया जाए। वहीं CBI का कहना है कि इस पर फैसला ट्रायल कोर्ट को करना चाहिए और पी चिदंबरम को किसी भी तरह का संरक्षण न मिले।

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम मामले में आज बड़ा दिन है। INX मीडिया केस में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 2 सितंबर तक सीबीआई हिरासत में भेजा था, जो आज खत्म हो रही है। सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई कस्टडी के खिलाफ चिदंबरम द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई होगी। आज पी चिदंबरम को सीबीआई ने कोर्ट में पेश किया।

सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम को अंतरिम जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट जाने को कहा है। ट्रायल कोर्ट सीबीआई कस्टडी को भी बढ़ा सकती है। हालाँकि, सीबीआई ने इसका विरोध किया और कहा कि सीबीआई सिर्फ सोमवार तक कस्टडी के लिए राजी हुई थी।

अब सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि अगर अंतरिम याचिका खारिज हो तो कस्टडी तीन दिन के लिए बढ़ जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। ऐसे में इसे चिदंबरम के लिए राहत माना जा रहा है, क्योंकि अगर सीबीआई कस्टडी बढ़ती है तो पी चिदंबरम को तिहाड़ नहीं जाना होगा।

आरोप है कि चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए रिश्वत लेकर आईएनएक्स को 2007 में 305 करोड़ रुपए लेने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाई थी। जिन कंपनियों को फायदा हुआ, उन्हें चिदंबरम के सांसद बेटे कार्ति चलाते हैं। सीबीआई ने 15 मई 2017 को केस दर्ज किया था। 2018 में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। एयरसेल-मैक्सिस डील में भी चिदंबरम आरोपी हैं। इसमें सीबीआई ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी।

कमलनाथ राज में कॉन्ग्रेसियों की गुंडई: घर में घुस युवती से अश्लील हरकत, पिस्टल दिखा दी जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है। अब कॉन्ग्रेस के नेता भी गुंडागर्दी पर उतर गए हैं। एक युवती ने कॉन्ग्रेस नेताओं पर घर में घुस अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि पिस्टल दिखा कॉन्ग्रेस नेता ने जान से मारने की धमकी भी दी।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ घर में घुसने, छेड़छाड़ और मारपीट करने समेत कई अन्य मामलों में केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दिया है।

मामला इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है। टीआई नीरज मेढ़ा ने बताया कि घटना शनिवार (अगस्त 31, 2019)  की है। देर रात स्वर्ण सिंह दहीवाल उर्फ सोंटा और अनमोल संधू 22 वर्षीय एक युवती के घर में जबरन घुस गए और बंदूक दिखाकर धमकी दी। आरोप है कि दोनों ने युवती के पिता और भाई की कनपटी पर बंदूक रख जान से मारने की धमकी दी और उनके सामने ही युवती को अश्लील शब्द कहते हुए उसके साथ गंदी हरकत भी की।

नई दुनिया में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

जानकारी के मुताबिक, सोंटा कॉन्ग्रेस का महामंत्री है और पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है। उसके खिलाफ हत्या, मारपीट और सूदखोरी के कई केस दर्ज हैं। वहीं, सोंटा का साथी अनमोल कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ा हुआ है। अनमोल संधु भी नामी बदमाश है। जिस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। युवती का कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और पैसा  होने की वजह से आरोपितों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। कई लोग इनसे प्रताड़ित हो चुके हैं। हालाँकि, पुलिस ने अनमोल को पिछले वर्ष उसे रासुका के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह स्वर्ण सिंह उर्फ सोंटा की फैक्ट्री पर काम करती थी। लेकिन वेतन नहीं मिलने के कारण उसने काम छोड़ दिया था। उसके बाद से ही स्वर्ण सिंह उसे परेशान कर रहा है। आरोपित कभी उसे बीच सड़क पर रोक लेता है, तो कभी फोन करके परेशान करता है। पीड़िता ने बताया कि सोंटा उस पर शादी का दबाव भी बना रहा था।

पीड़ित युवती ने इसकी शिकायत स्वर्ण सिंह की पत्नी से भी की थी, लेकिन उसने युवती को परेशान करना बंद नहीं किया। शनिवार की रात जब सोंटा अपने साथी अनमोल के साथ युवती के घर में घुसकर गुंडागर्दी की तो परिजनों ने आरोपित की इस हरकत का वीडियो बना लिया और फिर पुलिस से इसकी शिकायत की।

सोंटा के ऊपर पुलिस थाने से खुद से जुड़े मामलों की फाइलें गायब करवाने का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि सोंटा ने पुलिस के साथ सांठगांठ कर फाइलें गायब करवा दी। पीड़ित युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने कई जगहों पर छापे मारे हैं। फिलहाल जाँच जारी है।

PM उज्ज्वला योजना: 8 करोड़ घरों में मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन पहुँचाने का लक्ष्य 6 महीने पहले पूरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की अनेकों कल्याणकारी योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना है। इस योजना के तहत ग़रीबों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करना शामिल है। ख़बर के अनुसार, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस योजना के तहत 8 करोड़ घरेलू कनेक्शन का जो लक्ष्य रखा गया था, सरकार उसे तय समय-सीमा के 6 महीने पहले ही पूरा कर लेगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत मार्च 2020 तक 8 करोड़ ग़रीब परिवारों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया था। 26 अगस्त को योजना के तहत 7,96,81,650 से अधिक कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। इससे यह साफ़ पता चलता है कि सरकार अपने लक्ष्य को छ: महीने पहले ही प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। आगे संभावना है कि इस योजना का विस्तार कर जल्द ही अन्य वंचित परिवारों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएँ।

उज्ज्वला योजना मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, 2019 की सत्ता में बाजेपी की वापसी में इस योजना का अहम योगदान माना जाता है। 

इससे पहले फरवरी में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना के तहत मार्च 2020 की समय-सीमा के तहत 5 करोड़ कनेक्शन से बढ़ाकर 8 करोड़ घरेलू कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए अतिरिक्त रुपए आवंटित किए गए थे। मई 2016 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले में पिछले विधानसभा चुनाव से नौ महीने पहले पीएमयूवाई की शुरुआत की थी। इस योजना ने एक दशक से अधिक समय बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सत्ता में वापसी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अधिकारियों ने कहा कि मोदी सरकार ने इस योजना के लिए शुरू में 8,000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, और 2016-17 के वित्तीय वर्ष से शुरू होने वाले तीन वर्षों में 5 करोड़ कनेक्शन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके आगे उन्होंने बताया कि कथित तौर पर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि 8 करोड़ का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया जाएगा। भारत सरकार ने योजना के तहत तेल विपणन कंपनियों को 10,675 करोड़ रुपए रीइम्बर्स किए।

छत्तीसगढ़: CM भूपेश बघेल के पिता करेंगे सत्याग्रह, कहा- मंत्रियों और विधायकों की भी नहीं सुन रहे अधिकारी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल ही प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रतिपक्ष की भूमिका में उतर आए हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश के अधिकारी मंत्री और विधायकों तक की बात नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अफसरों के खिलाफ वे मंगलवार (सितंबर 3, 2019) को बेमेतरा में सत्याग्रह करेंगे।

नंदकुमार बघेल ने शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह के विभाग में 20 हजार तबादलों के आवेदन लंबित हैं। अधिकारी ब्लैकमेलिंग के लिए मनमानी कर रहे हैं। बघेल ने ऐसे अधिकारियों से साफ तौर पर कहा है कि अगर वो स्थानांतरण नहीं कर सकते, तो उसे भी स्पष्ट बताएँ।

खुद को कॉन्ग्रेसी मानने तक से इनकार करते हुए बघेल ने कहा कि वे पिछड़ा वर्ग समाज के उत्थान के लिए प्रतिपक्ष की भूमिका में काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि, नंदकुमार बघेल अंबिकापुर के सर्किट हाउस में पिछड़ा वर्ग के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे थे। यहाँ टॉयलेट इस्तेमाल करने के दौरान उनका पैर फिसल गया। सिर में उन्हें हल्की चोट भी आई।

उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के अधिकारी किसी की नहीं सुन रहे हैं। इन अधिकारियों को लेकर पूर्व सीएम रमन सिंह आए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व टीएस सिंहदेव को चाहिए कि ऐसे अकड़बाज अधिकारियों को तत्काल बाहर निकालें।

चर्च ने बेंगलुरु मेट्रो को बेच दी सेना की ज़मीन, 60 करोड़ रुपए डकारे

कर्नाटक के बेंगलुरु में चर्च द्वारा सेना की ज़मीन बेचने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने चर्च ऑफ साउथ एशिया (CSI) के ख़िलाफ़ सेना की ज़मीन अवैध तरीके से बेंगलुरु मेट्रो को बेचने और 60 करोड़ रुपए का मुआवज़ा प्राप्त करने की शिक़ायत की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

ख़बर के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने कब्बन पार्क थाने में 20 अगस्त को सीएसआइ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। शिक़ायत में रक्षा मंत्रालय ने सीएसआइ पर अपनी 7,426 वर्गमीटर ज़मीन को धोखे से बेचने का आरोप लगाया है। बता दें कि यह ज़मीन ऑल सेंट चर्च कॉम्प्लेक्स में स्थित है। रक्षा मंत्रालय का आरोप है कि सीएसआई ने बिना उन्हें सूचित किए ज़मीन राज्य सरकार की बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) को बेच दी। दरअसल, बीएमआरसीएल उस ज़मीन पर भूमिगत स्टेशन का निर्माण कर रही है और ऊपर की ज़मीन का इस्तेमाल पार्किंग आदि के लिए करना चाहती है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में छपी ख़बर का स्क्रीनशॉट

इस मामले पर बेंगलुरु (मध्य) के पुलिस उपायुक्त चेतन सिंह राठौर ने कहा, “हम लोग रक्षा मंत्रलय की उस शिक़ायत की जाँच कर रहे हैं, जिसमें उसने कहा है कि सीएसआइ ने काफ़ी पहले लीज़ पर दी गई उसकी ज़मीन का एक हिस्सा बेचकर मुआवज़ा हासिल कर लिया है।” इसके आगे उन्होंने कहा,

“हमने दोनों पक्षों से ज़मीन के मालिकाना हक़ से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा है। दस्तावेज़ बताते हैं कि वर्ष 1860 के दौरान ब्रिटिश शासन में इस सार्वजनिक संपत्ति के मालिक मैसूरु के वोडेयार शासक थे।”

राठौर ने बताया,

“प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि दोनों पक्षों ने ज़मीन के मालिकाना हक़ को लेकर शहर के दीवानी न्यायालय में वाद दाखिल किया है। इस मामले में कार्रवाई शुरू करने से पहले हम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे।”

वहीं, बीएमआरसीएल के प्रवक्ता का कहना है कि ज़मीन खरीद से पहले आपत्ति के लिए नोटिस जारी किया गया था। उधर, चर्च के अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटिश शासन में ईस्ट इंडिया कंपनी छावनी क्षेत्र की ज़मीन की मालिक थी। उन्होंने दावा किया कि संबंधित ज़मीन ब्रिटिश काल में ही उन्हें दे दी गई थी।