महाराष्ट्र सरकार ने कल यानी मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए 23 प्रवासियों को प्रमाण पत्र के साथ देश की नागरिकता दी। जानकारी के मुताबिक ये लोग कई साल पहले लंबी अवधि के वीजा पर भारत आए थे।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री दीपक केसारकर ने बताया कि जिन लोगों को नागरिकता के प्रमाण पत्र मुहैया करवाए गए हैं वे सभी पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में पैदा हुए लोग थे और बँटवारा होने के बाद भारत आ गए थे। ये लोग लंबी अवधि के वीजा पर जलगाँव में ही रह रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिन लोगों को नागरिकता प्रदान की गई है। उनमें से अधिकतर सिंधी और पंजाबी समुदाय से संबंध रखते हैं। इन्हें केंद्र सरकार द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद ही नागरिकता के प्रमाण पत्र दिए गए हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि इस फैसले से जलगाँव, औरंगाबाद, अमरावती व कोल्हापुर जिले में रहने वाले कई लोगों को लाभ मिला है। कई वर्षों से भारत में रह रहे इन लोगों ने भारतीय नागरिकता देने की माँग की थी। जिसे नागरिकता देने के चौथे चरण में पूरा कर दिया गया।
गृह राज्यमंत्री (शहर) डॉ रणजीत पाटील ने कहा कि पिछले कई साल पहले पाकिस्तान से भारत आए और अब यहीं रहने वाले नागरिकों (प्रवासी) द्वारा भारतीय नागरिकता की माँग की जा रही थी। जिसे पूरा करना उनके लिए खुशी की बात है।
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में बुधवार (सितंबर 11, 2019) को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में लश्कर ए तैयबा के के टॉप आतंकी आसिफ को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों को सोपोर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी।
इसके तुरंत बाद सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), सीआरपीएफ और पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के जवानों द्वारा इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया। तभी इलाके में छिपे आतंकी ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हो गई।
Jammu & Kashmir: The LeT terrorist Asif was responsible for recent shootout and injuries to three family members of a fruit trader in Sopore. The injured also included a young girl Asma Jan. He was also responsible for shooting at a migrant labour Shafi Alam in Sopore https://t.co/6r8r7RuvJE
पुलिस के अनुसार इसमें लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों में शामिल आतंकी आसिफ को मार गिराने में सफलता मिली। पुलिस ने उसके पास से हथियार व गोला बारूद बरामद किया है।
जानकारी के मुताबिक, आतंकी आसिफ सोपोर में कई नापाक गतिविधियों में शामिल रहा है। बता दें कि, आसिफ ने हाल में सोपोर में फायरिंग की थी, जिसमें फल विक्रेता के परिवार के तीन सदस्य घायल हो गए थे। इसमें आसमा जान नाम की एक बच्ची भी शामिल थी। इसके अवाला, आतंकी आसिफ सोपोर में प्रवासी मजदूर शफी अलाम को गोली मारने के लिए भी जिम्मेदार था।
गौरतलब है कि, इससे पहले सोपोर में पुलिस ने 9 सितंबर को लश्कर-ए-तैयबा के 8 आतंकियों को गिरफ़्तार किया था। ये सभी किसी बड़े आतंकी हमले की फ़िराक़ में थे। ये आतंकी राज्य के व्यापारियों को भी लगातार धमका रहे थे। वहीं, कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ कर रहे 5 पाकिस्तानी आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया था, जिसका वीडियो भी सेना ने जारी किया था।
आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। बता दें कि, चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा टीडीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों के विरोध में ‘चलो आत्मकूरु’ नामक एक रैली का ऐलान किया था। जिसमें हजारों टीडीपी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कथित हमलों के पीड़ितों को भी बुलाया गया था।
Andhra Pradesh: Telugu Desam Party (TDP) leader Nara Lokesh, son of TDP Chief Chandrababu Naidu, argues with police. He was later put under house arrest. pic.twitter.com/Slv3LPeBRD
पुलिस का कहना है कि टीडीपी ने इस राजनीतिक रैली के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। जिसके बाद आंध्र प्रदेश पुलिस ने पार्टी को रैली की इजाजत दिए जाने से इनकार कर दिया और नरसरावपेटा, सत्तेनापल्ले, पलनाडू और गुराजला में धारा 144 लागू कर दी गई। पुलिस ने राज्य में टीडीपी के कई नेताओं को भी नजरबंद कर दिया।
TDP Chief & former Andhra Pradesh Chief Minister Chandrababu Naidu to sit on a hunger strike from 8 am to 8 pm today https://t.co/91bxQ1PG9P
टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू सुबह 9 बजे आत्मकूरु के लिए निकलने वाले थे लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसके विरोध में उन्होंने अपने घर पर ही सुबह 8 बजे से लेकर रात के 8 बजे तक, यानी कि 12 घंटे तक भूख हड़ताल का ऐलान किया। उन्होंने टीडीपी काडर से भी भूख हड़ताल रखने को कहा। इस ऐलान के बाद समर्थक नायडू के घर जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
Amaravati: Telugu Desam Party (TDP) Chief N Chandrababu Naidu isn’t being allowed to meet media. He has been put under preventive custody at his house in view of party’s ‘Chalo Atmakur’ rally today called against alleged political violence by YSRCP. #AndhraPradeshhttps://t.co/punDvy6pFT
टीडीपी काडर ने रैली की इजाजत न देने और नायडू को नजरबंद किए जाने के बाद उनके घर पर जमकर नारेबाजी की। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की झड़प भी हुई जिसके बाद टीडीपी युवा ईकाई के अध्यक्ष देविनानी अविनाश के साथ ही कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उधर, सीनियर टीडीपी नेता अय्यन्ना पत्रादू को विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन पर हिरासत में ले लिया गया। विशाखापट्नम ईस्ट के विधायक वेलागपुडी रामकृष्ण बाबू और पूर्व विधायक पीला गोविंद को गिरफ्तार कर पुन्नामी गेस्ट हाउस भेज दिया गया।
Krishna District, Andhra Pradesh: Former TDP MLA Tangirala Sowmya house arrested at Nandigama town after Sowmya and other TDP leaders sat on protest in front of her house for party’s ‘Chalo Atmakur’ rally against YSRCP. https://t.co/7OaEgaVDfs
विशाखापट्नम ईस्ट के विधायक वेलागपुडी रामकृष्ण बाबू और पूर्व विधायक पीला गोविंद को गिरफ्तार कर पुन्नामी गेस्ट हाउस भेज दिया गया। पूर्व मंत्री और टीडीपी नेता भूमा अखिला प्रिया को हिरासत में ले लिया गया।
Krishna District, Andhra Pradesh: TDP MLC YVB Rajendra Prasad has also been put under house arrest in Uyyuru https://t.co/iycM04m5kp
हरियाणा के फरीदाबाद में 16 साल की एक लड़की का वसीम नामक युवक द्वारा अपहरण करने के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई और बाद में उसे फरीदाबाद के ही एक फार्महाउस में दफना दिया गया। लेकिन शिकायत होने के बावजूद भी पुलिस ने मामले की तफ्तीश करना उचित नहीं समझा।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फरीदाबाद की एक लड़की पिछले 10 दिन से लापता चल रही थी। लेकिन पुलिस शिकायत होने के बावजूद भी सक्रियता नही दिखा रही थी और न ही शक के आधार पर उनके पड़ोसी आरोपित वसीम से पूछताछ कर रही थी।
ऐसे में बच्ची के परिवार ने खुद ही मामले की छानबीन करनी शुरू की। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खँगाले और एक कार के नंबर के आधार पर वसीम को पुलिस के हवाले किया।
पूछताछ हुई तो वसीम ने अपहरण की बात कबूली। साथ ही ये भी बताया कि लड़की का अपहरण करते वक्त ही उसकी हत्या कर दी थी। वसीम ने बताया कि उसने हत्या के बाद लड़की के शव को जंगल में ले जाकर 3 फुट गहरे गड्ढे में दफनाया था। जिसके बाद वसीम की निशान देही पर परिजनों ने पुलिस की मदद से लड़की का शव यमुना किनारे से बरामद किया।
इस मामले में बता दें कि परिजनों के अलावा इलाके के विधायक ललित नागर भी पुलिस से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 10 दिनों में 5 बार उन्होंने इलाके के एसएचओ से बच्ची को ढूँढने की बात कही थी। लेकिन पुलिस फिर भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि वह प्रदेश पुलिस डीजीपी तक इस मामले की शिकायत करेंगे और आरोपित पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई करवाएंँगे। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने मंगलवाार (सितंबर 10, 2019) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। कृपाशंकर ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिलकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपा। मल्लिकार्जुन खड़गे महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस प्रभारी हैं।
Congress leader Kripashankar Singh resigns from the party. He submitted his resignation to Congress Maharashtra in-charge Mallikarjun Kharge in Delhi, today. pic.twitter.com/HUMR8BSzSZ
इस्तीफे की वजह बताते हुए कृपाशंकर सिंह ने कहा कि वह कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के रुख से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी है क्योंकि मैं जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध करने संबंधी पार्टी के रूख से सहमत नहीं हूँ।” कृपाशंकर सिंह कॉन्ग्रेस की मुंबई इकाई के प्रमुख रह चुके हैं और वो 15 वर्षों तक कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे थे।
बता दें कि, 3 सितंबर को जब कृपाशंकर ने अपने घर पर गणपति की स्थापना की थी तो दर्शन के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे कृपाशंकर के घर आए थे। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के दो बड़े नेताओं का कॉन्ग्रेस के बड़े नेता के घर आना राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया था। मंगलवार को कृपाशंकर के इस्तीफे ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। हालाँकि, सिंह का कहना है कि उचित समय पर वो अपने राजनीतिक रुख का खुलासा करेंगे।
गौरतलब है कि, इससे पहले फिल्मों से राजनीति में आई उर्मिला मातोंडकर ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उर्मिला मातोंडकर लोकसभा चुनाव के समय कॉन्ग्रेस से जुड़ी थीं और उत्तरी मुंबई सीट से चुनाव लड़ा था। हालाँकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उर्मिला ने पार्टी छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर की तुच्छ राजनीति को बताया। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा था, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”
कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुहर्रम के मौक़े पर समुदाय विशेष के बंधुओं को सलाम पहुँचाया। हालाँकि, उनके सलाम देने का तरीका बिलकुल आम था लेकिन मुहर्रम के मौक़े को ‘पावन अवसर’ लिखने के कारण लोग सोशल मीडिया पर उनकी चुटकी लेने लगे और देखते ही देखते दिग्विजय सिंह केवल ट्विटर पर ही नहीं पूरे सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे।
मंगलवार को मुहर्रम के मौक़े पर उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा,“सभी मुस्लिम भाईयो और बहनों को मुहर्रम के पावन अवसर पर हमारी सलाम।” दिग्विजय के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया और कुछ लोग तो इसे वोट की राजनीति तक बताने लगे। वहीं, कुछ लोगों ने समझाने का प्रयास किया कि पावन अवसर जैसे शब्दों का प्रयोग कब किया जाता है और मुहर्म क्या है?
किसी ने लिखा मुस्लिमों का दिल ऐसे जीतना संभव नहीं। जालीदार टोपियाँ लगाकर सेवईंयाँ बहुत खाईं हैं, अब खुद को कोड़े भी मारो तो जानें।
ईद पर जालीदार टोपी लगा कर सेवईयां तो बहुत खाने जाते हो, अब खुद को कोड़े भी मारो तो जाने
लोगों ने दिग्विजय सिंह को समझाया, “जब कोई मरता है तो उसे हर्षोल्लास से नहीं मनाया जाता, क्या तुम पावन अवसर कहकर इसे मनाना चाहते हो? दिग्गी तुम सेकुलर बनने के चक्कर में 10 कोड़े भी खा लोगे।”
#Muharram is not celebrated, it is observed . When somebody dies, do you celebrate his death and called it पावन अवसर ?
एक यूजर ने तो उनकी इस गलती को उनके बुढ़ापे का असर बताया और कहा कि टोपी लगाकर रोजा खुलवाने जाने वालों को समुदाय विशेष के त्यौहार का भी मालूम नहीं है। ये पावन नहीं मातम है।
ये बुढापे का असर है कि डोज ज्यादा हो गयी है……… टोपी लगाकर रोजा खुलवाने जाने वालों को मुसलमानों के त्यौहार का भी मालूम नहीं है। ये पावन नहीं मातम है
गौरतलब है कि इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार मुहर्रम को मातम का महीना कहा जाता है। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे पावन पर्व बताकर खुद ही आफत मोल ले ली। इसकी वजह से उन्हें लोगों की ऐसी तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी। वास्तव में ये दिन कर्बला में मारे गए मुहम्मद के नवासो के बलिदान का दिन है। इस दिन शोक मनाया जाता है न कि सलाम किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार का अगला एजेंडा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है। जितेंद्र सिंह ने मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीओके के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, “यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है, बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प है। यह एक स्वीकार्य रुख है।” उन्होंने कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य गुलाम कश्मीर में तिरंगा लहराना है।
#WATCH Union Min Jitendra Singh:Next agenda is retrieving parts (PoK) of Jammu&Kashmir & making it a part of India. It’s not only my or my party’s commitment,but it’s a part of unanimously passed resolution of Parliament in 1994 by Congress govt headed by PM Narasimha Rao (10.09) pic.twitter.com/jcpfNYyafN
इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताते हुए पाकिस्तान को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने का राग अलापने वाला पाकिस्तान अब खुद पूरी दुनिया में एक्सपोज हो गया है। दुनिया भर के देशों में वो भारत का दुष्प्रचार करने में जुटा हुआ है, लेकिन हर बार उसे मुँह की खानी पड़ी है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है। भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं।
कश्मीर की तत्कालीन स्थिति के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहाँ सिर्फ कुछ पाबंदियाँ लगी हुई हैं। सिंह ने पत्रकारों से कहा, “हमें ऐसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है। कश्मीर बंद नहीं है। वहाँ कर्फ्यू नहीं है। अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को ‘कर्फ्यू पास’ के साथ बाहर निकलना होता।”
इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्र विरोध गतिविधियों में शामिल होने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अब ये मानसिकता बदलनी होगी कि वो कुछ भी गलत करके निकल जाएँगे। अब इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया लेकिन वहाँ भारत ने क़रारा जवाब देकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसकी पोल खोल दी। सुरक्षा परिषद के बाद अब मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान की किरकिरी हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर ने कहा कि दुनिया ख़ूब समझती है कि जो देश आतंकवाद का मुख्य केंद्र है, वह ग़लत नैरेटिव फैलाता रहता है।
विजय ठाकुर ने साफ़ कर दिया कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय भारत की संसद ने लिया। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में मूलभूत सुविधाएँ सेवाएँ धीरे-धीरे और आसान की जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार सामाजिक-आर्थिक बराबरी को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील निर्णय ले रही है।
India calls Pakistan epicentre of terrorism, rejects its false narrative on J-K
जेनेवा में यूएनएचआरसी के मुख्यालय में बोलते हुए ठाकुर ने स्पष्ट कर दिया कि ताज़ा निर्णय के बाद से सभी प्रगतिशील फैसले जम्मू कश्मीर और लद्दाख में भी समान रूप से लागू होंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जानकारी दी कि इससे लिंगभेद ख़त्म होगा, महिलाओं को उनके अधिकार मिलेंगे और शिक्षा-सूचना के क्षेत्र में उचित विकास होगा।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि राज्य (पाकिस्तान) समर्थित आतंकवाद का भारत को काफ़ी नुकसान हुआ है। भारत ने कहा, “यह सही समय है जब सब मिल कर उन आतंकियों के ख़िलाफ़ सामूहिक रूप सें निर्णायक क़दम उठाते हुए कार्रवाई करें।” भारत ने साफ़ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर पर जो भी निर्णय लिया गया है वो सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए लोकतान्त्रिक रूप से संवैधानिक दायरे में रह कर किया गया।
दिल्ली में लाखों बच्चों की जान ख़तरे में है। एक आरटीआई के माध्यम से पता चला है कि राज्य की 35% स्कूलों के पास फायर एनओसी नहीं है। अर्थात, ये स्कूल आग लगने से बचने के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। दिल्ली में 5773 सरकारी स्कूल हैं, जिसमें से 2011 के पास फायर एनओसी नहीं है। नियम है कि फायर एनओसी लेने के बाद हर तीसरे वर्ष इसे रिन्यू कराना होता है। दिल्ली में कई तो वैसे भी स्कूल हैं, जिन्होंने लगभग पिछले एक दशक से फायर एनओसी को रिन्यू ही नहीं कराया है।
साउथ दिल्ली में 32% ऐसे स्कूल हैं, जहाँ अगर आग लग जाए तो बड़ा ख़तरा हो सकता है क्योंकि इनके पास इस आग के ख़तरे ने निपटने के लिए इंतजाम हैं ही नहीं। साउथ वेस्ट दिल्ली के 31% और वेस्ट दिल्ली के 42% स्कूलों के पास फायर एनओसी नहीं है। सेन्ट्रल दिल्ली की तो स्थित और भी दयनीय है, जहाँ लगभग आधे (48%) स्कूल बिना फायर एनओसी लिए संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह वेस्ट दिल्ली के 29% और ईस्ट दिल्ली के 30% स्कूलों के पास फायर एनओसी नहीं है।
आपको सूरत के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग वाली ख़बर तो याद ही होगी। मई 2019 के अंतिम सप्ताह में हुई इस त्रासद घटना में 22 छात्रों की मौत हो गई थी। संस्थान के संचालक को गिरफ़्तार किया गया था और बिल्डर भाग खड़ा हुआ था। उसके बाद शिक्षा संस्थानों में आग से बचने के लिए उचित इंतजाम होने की बहस छिड़ गई थी। दिल्ली में जिस तरह के हालात हैं, अगर इन्हें संभालने के लिए किसी अनहोनी का इंतजार किया गया तो वह मासूम छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ होगा।
फायर एनओसी तभी दी जाती है जब स्कूल कुछ तय मानकों पर खरे उतरें, इसके लिए बिल्डिंग में ऊपर जाने के लिए 1.5 मीटर से लम्बी सीढ़ी होनी चाहिए। अगर 45 से ज्यादा क्लास हैं तो सभी में 2 दरवाजे होने ही होने चाहिए। 300 स्क्वायर मीटर में आग बुझाने के उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए। 5 हजार लीटर की टंकी और स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था भी होनी चाहिए। बिजली के तार फायर प्रूफ होने चाहिए और एग्जिट किधर है, ये साफ़-साफ़ लिखा होना चाहिए।
दिल्ली के 35% स्कूलों में फायर एनओसी नहीं: ABP न्यूज़ की ख़बर
अफ़सोस की बात है कि दिल्ली के हजारों स्कूल इस मानकों को पूरा नहीं करते। इसका अर्थ है कि अगर वहाँ सूरत जैसी घटना होती है तो काफ़ी भयंकर क्षति होगी। इससे अच्छा क्या अभी से ही स्कूलों को एनओसी दिलाने के लिए उचित इंतजाम नहीं किए जा सकते? दिल्ली के स्कूलों की पोल तब खुली, जब पैरेंट्स एसोसिएशन ने एक आरटीआई दाखिल कर इस सम्बन्ध में सवाल पूछे। 2000 से अधिक स्कूलों में फायर एनओसी का न होने का मतलब है कि 2 लाख बच्चे ख़तरे की जद में आ जाते हैं।
कई स्कूल फायर एनओसी को रिन्यू नहीं कराते। असल में जब स्कूल छोटा होता है तो वे फायर एनओसी ले लेते हैं लेकिन जैसे ही उनका स्ट्रक्चर बढ़ता जाता है, फायर एनओसी लेने के लिए मानक भी कठिन हो जाते हैं और इसीलिए वे लापरवाही बरतते हैं। दिल्ली सरकार ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही, यह एक बड़ा सवाल है।
बेगूसराय में एक प्राइवेट ट्यूटर द्वारा 6 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया है। दलित परिवार से आने वाली छात्रा को मुस्लिम समुदाय से आने वाले एक शिक्षक ने हवस का शिकार बनाया। इस बात का पता परिवार को तब चला जब पीड़ित बच्ची ने ट्यूशन जाने से मना कर दिया। उसके बाद अपनी माँ के पूछने पर उसने असली वजह बताई। इसकी शिकायत घटना के 7 दिन बाद दर्ज कराई गई। एसपी का कहना है कि इतने दिन बाद शिकायत आने से कुछ अहम सबूतों के गायब होने का ख़तरा रहता है।
पुलिस द्वारा सबूत मिटने की आशंका से इस बात को बल मिलता है कि दोषी सज़ा से ही बच जाए। ये घटना खोदावंदपुर की है। मामला दो समुदायों के बीच का होने के कारण क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। बच्ची ने अपनी माँ को बताया था कि उसके पेट में दर्द रहता है और फिर उसने शिक्षक के कुकृत्यों के बारे में बताया। आरोपित का नाम मोहम्मद मुर्तुजा है। बच्ची कुछ दिनों से उसके पास पढ़ने जाने में आनाकानी कर रही थी। परिवार द्वारा सख्ती करने के बाद उसने सारी बात बताई।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। बजरंग दल ने इस घटना के सम्बन्ध में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से दोषी को सज़ा देने की माँग की। पुलिस आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। अपने ख़िलाफ़ मामला दर्ज होते ही आरोपित परिजनों सहित घर छोड़ कर फरार हो गया है। पीड़ित बच्ची के बयान से पता चला कि शिक्षक मुर्तुजा होमवर्क कराने के बहाने कमरे में ले जाता था और वहाँ उसका यौन शोषण करता था।
Predictably, no other English publication wrote about this case. Here are two local reports pic.twitter.com/OGRl7muOXZ
पीड़िता की माँ की शिकायत के बाद गाँव में पंचायत भी बैठी। पंचायत में न्याय नहीं मिलने पर आक्रोशित परिजन थाना पहुँचे। पीड़ित बच्ची को मेडिकल टेस्ट के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है। पुलिस अभी तक आरोपित को गिरफ़्तार नहीं कर पाई है, इसीलिए लोग आक्रोशित हैं। पीड़िता के चाचा ने स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा को बताया कि मुर्तुजा इससे पहले भी कई छात्रों का यौन शोषण कर चुका है लेकिन अपनी इज्जत के कारण पीड़ित परिवारों ने मामले को दबा दिया।
मुर्तुजा के रिश्तेदार अख्तर के घर पर जब पीड़िता गई तो उसने पीड़ित परिवार को सलाह दी कि इस मामले को दबा कर रखो क्योंकि इससे ‘उन लोगों पर ही कींचड़ उछलेगा।’ मुर्तुजा ने गाँव के द्वारा दी जाने वाली किसी भी सज़ा को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद गाँव में पंचायत बैठी, जिसमें सिर्फ़ हिन्दू ही शामिल हुए। कोई भी मुस्लिम वहाँ नहीं पहुँचा। पीड़िता व उसके परिजन अभी भी न्याय के इन्तजार में हैं।