बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बासंती थाने इलाके में TMC कार्यकर्ता की पत्नी से गैंगरेप और बाद में हत्या करने के आरोप में तृणमूल के तीन नेताओं पर मामला दर्ज हुआ है। इन नेताओं की पहचान जफर शेख, अब्दुल शेख और सफीक लश्कर के रूप में हुई है।
मृतका का पति भी सत्ताधारी दल टीएमसी का कार्यकर्ता है। उसने तृणमूल कॉन्ग्रेस के यूथ विंग के स्थानीय नेताओं पर पत्नी के साथ रेप और उसकी हत्या का आरोप लगाया है। उसके मुताबिक बासंती क्षेत्र में लंबे समय से तृणमूल के दो गुटों में रस्साकशी चल रही थी। इसकी वजह से वह घर छोड़कर कहीं और रह रहा था। शनिवार की रात तृणमूल यूथ विंग के स्थानीय कार्यकर्ता उसकी तलाश में पहुँचे और उसकी पत्नी से बदसलूकी की।
जब महिला ने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया और बाद में गला घोंटकर हत्या कर दी। मृतका के पति ने स्थानीय नेताओं जफर शेख, अब्दुल शेख और सफीक लश्कर पर मामला दर्ज करवाया है।
वहीं, तृणमूल यूथ विंग के नेताओं ने अपने ऊपर लगाए आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया है और महिला के पति पर संदेह जताते हुए उसे ही घटना के पीछे दोषी बताया है। उनका कहना है कि पति-पत्नी में लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके कारण हो सकता है टीएमसी कार्यकर्ता ने ही अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारा हो।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस घटना की जाँच कर रही है। अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
भू-माफिया सपा सांसद आज़म खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अब उन पर मकानों का फर्जी आवंटन पत्र बाँटने का आरोप लगा है। पीड़ितों ने आज़म खान पर कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत फर्जी आवंटन पत्र देने का आरोप लगाया है।
15 से 20 परिवारों का आरोप है कि साल 2016 में सपा सांसद आज़म खान ने ‘कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना’ के अंतर्गत सपा कार्यालय से मकानों के आवंटन पत्र बाँटे थे। जबकि, सरकारी ऑफिस में इन मकानों के आवंटन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित परिवारों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह से की। उन्होंने पीड़ितों की शिकायत के बाद जाँच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 3 दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट आ जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
Azam Khan की फिर बढ़ी मुश्किलें, मकानों के फर्जी पत्र बांटने का आरोप https://t.co/QXjuWsfxLw
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जेपी गुप्ता ने भी इस बारे में रविवार (सितंबर 1, 2019) को बताया कि जिला प्रशासन में कुछ लोगों द्वारा शिकायतें आईं हैं कि आज़म खान ने कांशीराम योजना के अंतर्गत उन्हें फर्जी आवंटन पत्र दिए। जेपी गुप्ता ने कहा कि वो इस मामले की जाँच करेंगे और यदि जाँच में सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाँच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है।
गौरतलब है कि, इससे पहले शनिवार (अगस्त 31, 2019) को आज़म खान और इनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ रामपुर जिले में घर खाली करने के लिए मजबूर करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित ने पुलिस से की गई शिकायत में दावा किया था कि अक्टूबर 15, 2016 को 15 से 20 लोगों का एक समूह उसके घर में घुसा और उसे खाली करने के लिए कहा। घर खाली न करने पर जाने से मारने की धमकी भी दी। इस मामले में पुलिस ने आज़म खान और उनके साथियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 427, 323, 504 ,506, 395 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया था।
आज़म खान पर मदरसे से किताबें चुरा कर जौहर यूनिवर्सिटी में रखने, सिंचाई विभाग की ज़मीन हड़पने, शत्रु सम्पत्ति को फर्जीवाड़ा कर फ़र्ज़ी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित किए जाने समेत कई मामले दर्ज हैं।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बेटियों के जबरन धर्मांतरण ख़िलाफ़ दिल्ली में सिख समुदाय आग-बबूला है। हाल ही में पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की 19 साल की बेटी को गुंडे उनके घर से घसीटते हुए उठा ले गए थे।
इसके बाद पीड़िता से जबरन इस्लाम क़बूल करवाकर उसका निक़ाह हाफ़िज़ सईद के आतंकी संगठन के जमात-उद-दावा के मोहम्मद हसन से करवा दिया था। इस घटना से आहत सिख समुदाय ने पाकिस्तान में सिख परिवारों की सुरक्षा की माँग करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया है। बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ भी शामिल हुईं, उन्होंने भी अपने हाथों में बैनर और पोस्टर्स लेकर इस मुद्दे पर अपना विरोध जताया।
Delhi: Members of Sikh community protest against forceful conversion of minorities in Pakistan. They are also demanding the safety of Sikh families residing there. A Sikh girl was allegedly abducted and converted to Islam in Pakistan. pic.twitter.com/ZEe292vgi3
इसी मामले में सिख समुदाय ने काशी में भी अपना विरोध दर्ज किया। इस दौरान गुरुद्वारे में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की गई। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदाय की रक्षा की माँग की और पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने का अनुरोध किया।
सिख धर्म के धर्मगुरु अरजन देव की गद्दी दिवस के मौक़े पर गुरुद्वारा गुरुबाग पर सैकड़ों की संख्या में सिख समुदाय के लोग उपस्थित हुए। अरदास और शबद कीर्तन के बाद भारी संख्या में सिख समुदाय के लोगों ने मेन गेट पर आकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाजी की और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धर्म परिवर्तन का पुरज़ोर विरोध किया।
बीते रविवार (1 सितंबर) को भी ऐसी ही घटना सामने आई, जिसमें एक हिंदू लड़की को सिंध प्रांत के सुक्कुर स्थित उसके कॉलेज से ही अगवा कर लिया गया। इसके बाद उसका जबरन धर्म परिवर्तन कर उसे इस्लाम क़बूल करवाया गया। ख़बर यह भी है कि लड़की को सियालकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी के कार्यकर्ता मिर्ज़ा दिलावर बेग के घर पर रखा गया है।
ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत ने फेसबुक पोस्ट करके इस मामले की जानकारी दी। फेसबुक की इस पोस्ट के अनुसार पाकिस्तान में बीते दो महीने में इस तरह की यह तीसरी घटना है।
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर जबरन इस्लाम क़बूल करवाने का सिलसिला पुराना है। ऐसे ज़्यादातर मामलों में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। बीते दिनों ख़बर आई थी कि इसके कारण पाकिस्तान में सिखों की आबादी 15 साल में 40 हजार से घटकर 8 हजार हो गई है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर बयानबाजी को लेकर एआईएमआईएम के अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को असम के शीर्ष मुस्लिम संगठन ने फटकार लगाई है। इस संगठन से राज्य मूल निवासियों के 21 संगठन संबद्ध है। संगठन ने ओवैसी से गलत सूचना देकर लोगों को भड़काने से बाज आने को कहा है। वहीं, इमरान खान को इस मसले पर अपना मुॅंह बंद रखने की नसीहत दी है।
शीर्ष संस्था के अध्यक्ष सैयद मुमीन-उल-औवाल ने हैदराबाद के सांसद ओवैसी से भी कहा कि वे असम के लोगों को NRC के मुद्दे पर गलत जानकारी देने की कोशिश न करें, जैसा उन्होंने शनिवार (31 अगस्त) को किया था।
“इमरान ख़ान को असम के मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है। खान को असम पर बोलने का हक़ नहीं है। उन्हें अपना मुँह बंद रखना चाहिए। हम अपने हिंदू भाइयों के साथ शांति से पीढ़ियों से असम में रह रहे हैं।”
औवाल ने मीडिया द्वारा ग़लत ख़बरों के प्रचार-प्रसार को भी फ़टकार लगाते हुए कहा उन्हें झूठी ख़बरे नहीं फैलानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें सरकार पर पूरा भरोसा है और राज्य अब पूरी तरह से शांत है।”
ग़ौरतलब है कि शनिवार को ओवैसी ने कहा था कि उन्हें संदेह है कि नागरिक संशोधन विधेयक के ज़रिए बीजेपी एक बिल ला सकती है, जिसमें वो सभी ग़ैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने की कोशिश कर सकती।
उन्होंने कहा था कि असम में कई लोगों ने उन्हें बताया है कि लोगों के माता-पिता के नाम लिस्ट में हैं, लेकिन बच्चों के नाम नहीं हैं। साथ ही कहा था कि अभी तक बीजेपी दावा कर रही थी कि राज्य में 40 लाख से ज्यादा अवैध रूप से रह रहे हैं। लेकिन लिस्ट में सिर्फ 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। इनमें से करीब 3 लाख लोग ऐसे हैं जो दस्तावेज़ जमा नहीं कर पाए हैं। उनके दस्तावेज़ जमा कर देने के बाद यह आंकड़ा और भी कम हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि आख़िर 40 लाख लोग कहाँ गए। वहीं, एनआरसी का जिक्र करते हुए इमरान खान ने शनिवार को मोदी सरकार पर मुस्लिमों के सफाये का आरोप लगाया था।
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के पीछे की वजह आतंकवाद का खात्मा करना बताया था। सरकार ने कहा था कि वो देश से आतंकवाद की जड़ को समाप्त करना चाहती थी, इसलिए प्रदेश से 370 को निष्क्रिय किया जा रहा है। सरकार का आतंकवाद की समाप्ति की दिशा में उठाया गया कदम सार्थक होता दिखाई दे रहा है।
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की संख्या पहले से काफी कम हो गई है। कभी घाटी में हजारों की संख्या में सक्रिय रहने वाले आतंकियों की संख्या घटकर महज 150 से 200 के बीच रह गई है। यह जानकारी प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार फारूक खान ने रविवार (सितंबर 1, 2019) को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए दी। इस दौरान खान ने कहा कि आतंकियों को या तो जेल जाना होगा या फिर कड़ी सजा झेलनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से ही पाकिस्तान ने कश्मीर की शांति भंग करने की कोशिश की है। इसलिए पाकिस्तान से कुछ अच्छा होने की उम्मीद करना सबसे बड़ी गलती होगी। प्रदेश के हर नागरिक को उससे सावधान रहने की आवश्यकता है। फारूक खान कहा कि पिछले कुछ दशक से आतंकवाद से लड़ने में स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों की काफी मदद की है। उन्होंने कहा, “वे हमारे आँख-कान हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कहाँ क्या हो रहा है।”
फारूक खान ने कहा कि स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों को आतंकियों से लड़ने में हमेशा मदद की है और वो आगे भी लगातार अपना सहयोग देते रहेंगे। लोगों के सहयोग के बिना आतंकवाद से नहीं लड़ा जा सकता। उनके सहयोग के कारण ही आतंकवादियों की संख्या पहले के हजारों से घटकर 150 से 200 के बीच रह गई है।
खान ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर कहा कि अब वहाँ पर हालात पूरी तरह से सामान्य हो रहे हैं। संचार की थोड़ी बहुत समस्या है, लेकिन 75 फीसदी लैंडलाइन फोन और कुछ इलाकों में मोबाइल सेवा बहाल हो चुकी है। जल्द ही सब जगह संचार नेटवर्क काम करेगा। आने वाले दिनों में पाबंदियों में और छूट दी जाएगी। राज्य के लोगों को डरने की आवश्यकता नहीं है। राज्य का पुनर्गठन होने से लोगों को फायदा मिलेगा। सरकार बहुत जल्द 50 हजार नौकरियाँ देने जा रही है। हर एक भर्ती पूरी तरह से पारदर्शी होगी।
वहीं हिरासत में लिए गए लोगों के रिश्तेदारों द्वारा उनसे मिलने न दी जाने की बात को खान ने पूरी तरह से स्वार्थी तत्वों का झूठा प्रचार करार देते हुए कहा कि जेल को नियमावली एवं कानून के अनुसार हिरासत में लिए गए व्यक्तियों से उनके रिश्तेदारों को मिलने दिया जाता है।
मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पहले से ही खींचतान मची हुई है। अब प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री उमंग सिंघार ने अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है। वन मंत्री सिंघार ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से राज्य की कमलनाथ सरकार को चला रहे हैं।
गंधवानी में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने कहा, ”माननीय दिग्विजय सिंह जी पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं। यह जगजाहिर है। पूरे प्रदेश की जनता जानती है। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता जानते हैं। जब वह सरकार ही चला रहे हैं तो उन्हें मंत्रियों से मिलने के लिए चिट्ठी लिखने की आवश्यकता ही नहीं है। जब वो सरकार ही चला रहे हैं तो फिर चिट्ठी लिखने की क्या आवश्यकता है?”
कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री के बयान को राज्य के मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने हाथों हाथ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट में मंत्री के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह हैं मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री, आप उन्हीं से सुन लीजिए…”
अब तो स्वयं साक्षात मंत्री जी कह रहे हैं तो सवाल अहम हो जाता है। क्या संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रख दिया। क्या शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री से परे सत्ता के सूत्र किसी अन्य के पास हैं तो संवैधानिक संकट है ? अराजकता है ? लोकतंत्र का अपमान है ? महामहिम @GovernorMP संज्ञान लें। https://t.co/d07jX7nikQ
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने भी ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा, “अब तो स्वयं साक्षात मंत्री जी कह रहे हैं तो सवाल अहम हो जाता है। क्या संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रख दिया। क्या शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री से परे सत्ता के सूत्र किसी अन्य के पास हैं तो संवैधानिक संकट है? अराजकता है? लोकतंत्र का अपमान है ? महामहिम राज्यपाल संज्ञान लें।”
सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह की चिट्ठी वायरल। @digvijaya_28 ने मध्य प्रदेश के सभी मंत्रियों को लिखा पत्र। 31अगस्त से पहले मंत्रियों से मिलने का मांगा समय। खुद के द्वारा ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए लिखी गई सिफारिशों को लेकर मिलने का मांगा समय। pic.twitter.com/aqMRrPgpAs
बता दें कि, दिग्विजय की तरफ से चिट्ठी में लिखा गया है, “मेरे द्वारा माह जनवरी 2019 से 15 अगस्त 2019 तक स्थानांतरण सहित विविध विषयों से संबंधित आवदेन पत्र आवश्यक कार्यवाही हेतु आपकी ओर अग्रेषित किए थे। मेरे द्वारा आपको पृथक से पत्र लिखकर मेरे पत्रों पर की गई कार्यवाही से अवगत कराने एवं यदि किसी प्रकरण में कार्यवाही संभव नहीं है तो उसकी जानकारी देने का भी अनुरोध किया था। मेरे द्वारा आपको प्रेषित पत्रों पर की गई कार्यवाही के बारे में जानने के लिए मैं आपसे 31 अगस्त 2019 के पहले भेंट करना चाहता हूँ। कृप्या 31 अगस्त से पहले मुझे भेंट के लिए समय प्रदान करने का कष्ट करें।”
गौरतलब है कि, दिग्विजय ने शनिवार (सितंबर 1, 2019) को बजरंग दल के तार ISI से जुड़े होने की बात कही थी। हालाँकि, बाद में कॉन्ग्रेस ने दिग्विजय सिंह के बयान से किनारा कर लिया था और अपने बयान के लिए उन्हें खुद सबूत पेश करने के लिए कहा था।
कर्नाटक के विजयपुरा के निवासी उस समय हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि उनके जिले के एक हिस्ट्रीशीटर को इंडोनेशिया के एक विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया है।
इंडोनेशिया के कानून एवं मानवाधिकार मंत्रालय के तहत पंजीकृत एएसआईएएन यूनिवर्सिटी ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए महादेव साहूकार भैरागौंड को मानद उपाधि से सम्मानित किया। भैरागौंड भैरवनाथ शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष हैं। बताया जाता है कि यह संस्था 1,500 ग़रीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करती है।
ग़ौरतलब है कि भैरागौंड पर 6 मामले दर्ज हैं। इनमे 3 हत्या के और एक हत्या की कोशिश से जुड़ा है। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत दो और अवैध बालू खनन का एक मामला भी उसके खिलाफ चल रहा है। सारे मामले चाडचन पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं। फ़िलहाल, हत्या के एक मामले में वह ज़मानत पर बाहर है। यह मामला 2017 में दर्ज किया गया था। जब न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने विश्वविद्यालय से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया।
कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी एक और कानूनी मुश्किल में फॅंस गईं हैं। उन पर पंजाब के बठिंडा की अदालत में केस दर्ज किया गया है। मामला पंजाब में लाइब्रेरी की जगह पर जोनल दफ्तर खोलने से जुड़ा है। बठिंडा कोर्ट ने इस मामले में उन्हें और पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ समेत अन्य आरोपितों को समन जारी करते हुए 6 तारीख को पेश होने का आदेश दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बठिंडा निवासी और सिविल लाइन क्लब के पूर्व प्रधान जगजीत सिंह धालीवाल एवं शिवदेव सिंह ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा एक निजी क्लब में मालवा कॉन्ग्रेस भवन खोले जाने के खिलाफ स्थाई रोक लगाने की माँग की थी।
इस याचिका में कहा गया था कि सिविल लाइन क्लब में गुरुनानक लाइब्रेरी 1971 में बनी थी और 1977 में इसके पास स्पोर्ट्स हाल एवं सिविल लाइन क्लब बनाया गया था। लेकिन अब गुरुनानक देव लाइब्रेरी एवं सिविल लाइन क्लब की इमारत पर कुछ कॉन्ग्रेसियों ने कब्जा कर लिया है।
इस याचिका में आरोप था कि कुछ लोग यहाँ कॉन्ग्रेस का जोनल दफ्तर बनाना चाहते हैं। जिसके लिए 2 सितंबर को यहाँ आधारशिला रखी जाएगी। लेकिन अब ताजा जानकारी के अनुसार इस याचिका पर शनिवार को सोनिया गाँधी एवं सुनील जाखड़ सहित 12 लोगों को समन जारी किए गए हैं और मामले की सुनवाई की तारीख 6 सितंबर तय की गई है।
कहते हैं अति सर्वत्र वर्जयेत। यानी कोई भी चीज अत्यधिक हो तो उसके नतीजे बेहद भयंकर होते हैं। अब प्लास्टिक कचरे का ही मसला ले लीजिए। इसका इस्तेमाल बढ़ते-बढ़ते उस स्तर पर पहुॅंच गया है जिससे हमारी पारिस्थितिकी का संतुलन ही चरमरा गया है।
भारत में वैसे प्लास्टिक की आमद 60 के दशक में हुई। पर इसके चलन ने जोर पकड़ा खुली अर्थव्यवस्था के आगमन से। भारत के बाजार को खोलने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जाता है। उनके वित्त मंत्री रहते ही 1990 के दशक में देश में खुली अर्थव्यवस्था का दौर आया। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरा पैदा करने की बीमारी भी बढ़ती गई। नतीजतन, खुली अर्थव्यवस्था से पहले देश में जहॉं सालाना 9 लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन हो रहा था, वह आज करीब 94.6 लाख टन तक पहुँच चुका है।
एक शोध के मुताबिक भारत में सालाना 94.6 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसका 40 प्रतिशत प्लास्टिक इकट्ठा ही नहीं होता, जबकि 43 प्रतिशत प्लास्टिक का उपयोग पैकेजिंग के लिए होता है।
इसी साल 19 जुलाई को लोकसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्ययन का जिक्र किया था। इसके हवाले से उन्होंने बताया कि इस देश के मुख्य शहरों में रोजाना करीब 4059 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इस कचरे का भंडार लगाने वाले प्रमुख शहरों में दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और बेंगलुरु शुमार हैं। राज्यमंत्री ने बताया कि देश में हर रोज 25,940 टन प्लास्टिक कूड़ा पैदा करता है। यह अनुमान देश के केवल 60 प्रमुख शहरों से जुटाए गए आँकड़ों पर ही आधारित है।
प्लास्टिक के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात जो जानने वाली है वो ये कि इससे बना एक बैग पूर्ण रूप से नष्ट होने में 1000 वर्षों का समय लेता है। अपने इस लंबे जीवन में न तो वह सड़ता है और न गलता है। अमूमन इसके अधिकतर अंश का इस्तेमाल रिसाइकलिंग के लिए भी नहीं हो पाता है। नतीजा ये होता है कि हानिकारक पदार्थों से निर्मित प्लास्टिक पर्यावरण में मौजूद जीव-जंतुओं के लिए अभिशाप बन जाता है और काल बनकर उनकी जान लेने लगता है।
आँकड़ो की मानें तो भारत में हर साल 1000 गायें प्लास्टिक के सेवन के कारण मरती हैं। समंदर में प्लास्टिक के कचड़े से सालाना 1 मिलियन समुद्री जीव-जंतु मर जाते हैं। 1 मिलियन यानी 10 लाख। ये वैश्विक आँकडा है। जिसकी पुष्टि यूनेस्को ने की है।
प्लास्टिक से होने वाला नुकसान तस्वीरों में साफ़ है
अब भी भ्रम का चादर न हटा हो तो इस घटना पर गौर करिए। कुछ महीने पहले फिलीपींस में एक शार्क खून की उल्टियाँ करते करते मर गई। जाँच हुई तो पता चला वो भूख से तड़प कर मरी है। अब सवाल उठेगा भूख से तड़पकर? तो हाँ, भूख से तड़पकर उस शार्क की मौत हुई। जाँच में उसके पेट से लगभग 88 पाउंड यानी 40 किलो प्लास्टिक मिला। इसी प्लास्टिक ने उसकी जान ली।
प्लास्टिक फँसने के कारण ही समुद्र की सबसे विशालकाय जीव के पेट में सूजन आई और वो चाहकर भी कुछ खा पी नहीं पाई। नतीजा सिर्फ़ मौत। उस शार्क जैसे अनेकों समुद्री जीव इससे भी भयानक परिस्थिति में मरते हैं। लेकिन फिर भी मनुष्य अपनी आदतों से बाज नहीं आता। जानकारी के मुताबिक दुनिया भर के समुद्र में इस समय 100 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक मौजूद है। जो न केवल जीव-जंतुओं के लिए घातक साबित हो रहा है, बल्कि बड़े स्तर पर जल, थल और वायु को भी दूषित कर रहा है। लेकिन इसे वहाँ तक पहुँचाने वाले लोग कौन हैं? हम और सिर्फ़ हम।
हम चाहते न चाहते हुए भी प्लास्टिक का इस्तेमाल अपने जीवन में धड़ल्ले से करते हैं, अगर हम अपनी ओर से ऐसा करने से बचते हैं तो बाजार हमसे ऐसा करवाता है। कपड़े के थैले को प्लास्टिक बैग से रिप्लेस कर दिया जाता है, दूध की डोलची प्लास्टिक थैली में तब्दील हो जाती है। हर चीज को मिनिमाइज करके छोटे-छोटे प्लास्टिक रैपर्स में बदल दिया जाता है और दिन पर दिन इसे रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली महत्तवपूर्ण वस्तु बना दिया जाता है।
हालाँकि, प्लास्टिक का निर्माण सेल्लूलोज, कोल, प्राकृतिक गैस, नमक और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक उत्पादों से ही होता है, लेकिन भी फिर भी इसकी गैर-जैविक (non biodegradable) प्रकृति के कारण ये किन्ही भी मायनों में पर्यावरण के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। एक बार के लिए संभव है इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर या तोड़कर छिन्न-भिन्न कर दिया जाए लेकिन पर्यावरण को नुकसान किए बिना इसको नष्ट करना न मुमकिन है। इससे निकलने वाले जहरीले पदार्थ जैसे डायऑक्सिन, विनाइल क्लोराइड, एथिलीन डाइक्लोराइड, सीसा, कैडमियम आदि उस खाने और बोतल के पानी में भी घुलते हैं, जिसका हम नियमित तौर से उपयोग करते हैं। प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन हमारे पीने के पानी और खाने को प्रभावित करते हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। कई रिसर्च भी इस बात का प्रमाण दे चुके हैं।
प्लास्टिक की उपयोगिता को किन्हीं भी हालातों में जस्टिफाई नहीं किया जा सकता। क्योंकि वास्तविकता में अब भारत या दुनिया का कोई भी देश इस स्थिति में है ही नहीं। इसके विकल्प ढूँढना अब हमारे लिए चुनाव की बात नहीं है, बल्कि खुद के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बहुत बड़ी जरूरत है। एक शोध के अनुसार अगर समय रहते अभी भी रोकथाम नहीं हुई तो 2050 तक समुद्रों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगी।
पानी की बोतलों से लेकर, चिप्स, बिस्कुट के पैकेट तक इस समय समुद्र और पर्यावरण को दूषित करने का काम कर रहे हैं। और ऐसे में हमारे लिए शर्म की बात ये है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावा करता है कि दुनियाभर से समुद्र में फेंके जाने वाले कूड़े का 60 प्रतिशत हम भारतीयों द्वारा डंप किया जाता हैं। सोचिए हमारी स्थिति क्या है? हम इसके कारण, प्रभाव और रोकथाम सबसे वाकिफ़ हैं। लेकिन फिर भी हम खुद में सुधार नहीं कर पा रहे, हम जानते है कि अपनी लापरवाहियों से हम पारिस्थितिकी और अपनी भावी पीढ़ी को अंधकार में झोंक रहे हैं। लेकिन फिर भी हम इस विषय कठोर कदम उठाने से बचते हैं।
इन्हीं परिस्थितियों को सुधारने के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में प्लास्टिक के सिंगल यूज़ को बंद करने का आह्वान किया। उन्होंने 25 अगस्त को भी मन की बात के जरिए अपने इस प्रण को दोहराया और सबको साफ इशारा कर दिया कि इस बार वह प्लास्टिक के कारण पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमो में कोताही नहीं बरतने वाले। उन्होंने प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ युद्ध छेड़ने का ऐलान किया। जिसके बाद माना जा रहा है कि दिल्ली समेत देश भर में जल्द ही प्लास्टिक के सिंगल इस्तेमाल पर बैन होगा।
प्लास्टिक के बिना जीवन मुश्किल भले लगे, लेकिन असंभव नहीं है। भारत के कई राज्यों ने इस इस दिशा में कदम उठाकर कामयाबी हासिल भी की है। 1998 में सिक्किम पहला राज्य था जिसने डिस्पोसेबल प्लास्टिक बैग और प्लास्टिक बोटल को बैन करने के लिए कदम उठाया और प्लास्टिक बैग फ्री राज्य होने का तमगा हासिल किया।
इसके बाद आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड ने भी प्लास्टिक बैन पर कदम उठाए। दिल्ली में भी साल 2017 में इसे लेकर फैसला आया लेकिन पूर्ण रूप से कार्यान्वित नहीं हो पाया। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय पर एक बार दोबारा जिक्र छेड़ने के बाद ये मुद्दा गर्माया हुआ है और पिछले एक हफ्ते से लगातार खबरे आ रही हैं कि बड़ी-बड़ी कंपनियाँ और उत्तरप्रदेश जैसे राज्य इस विषय पर तत्काल प्रभाव से एक्शन ले रहे हैं। दिल्ली की दुकानों पर भी उनके आह्वान का असर देखने को मिल रहा है। अब देखना है कि 2 अक्टूबर से हम इस रास्ते कितने प्रभावी तरीके से आगे बढ़ पाते हैं।
यूॅं तो कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को दुनिया में कोई भाव नहीं मिल रहा फिर भी पड़ोसी मुल्क अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा। उसने रविवार (सितंबर 1, 2019) को मालदीव की राजधानी माले में दक्षिण एशिया की संसदों के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के दौरान भी कश्मीर राग अलापने की कोशिश की। लेकिन, भारत ने पूर्वी पाकिस्तान के नरसंहार और आतंकियों को पनाह देने की उसकी हरकत उजागर कर उसकी बोलती बंद कर दी।
भारत ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को मदद बंद करनी चाहिए। मालदीव में दोनों देशों के बीच बहस की शुरुआत पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के बयान से हुई। सतत विकास लक्ष्य पर चर्चा के दौरान उन्होंने कश्मीर का मसला उठाने की कोशिश की ।
भारत ने फौरन नियमों का हवाला दिया जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने सूरी को भारतीय प्रतिनिधि एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को बोलने देने के लिए कहा। लेकिन सूरी ने इसे अनसुना कर दिया, जिसे लेकर हंगामा हुआ।
भारत के आंतरिक मामले को उठाने और मंच का राजनीतिक इस्तेमाल करने की मंशा को लेकर हरिवंश ने पाकिस्तान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “हम भारत के आंतरिक मामले को इस मंच पर उठाए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हैं। इस सम्मेलन के मुख्य विषय के दायरे से बाहर के मुद्दे उठा कर पाक इस मंच को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह सीमा पार आतंकवाद को सभी तरह का समर्थन बंद करे। पाकिस्तानी सीनेटर कुर्रातुलैन मारी ने कहा कि महिलाओं एवं युवाओं के लिए एसडीजी मानवाधिकारों के बगैर हासिल नहीं किया जा सकता।
इस पर, हरिवंश ने पलटवार करते हुए कहा कि अपने ही लोगों का नरसंहार करने वाले देश (पाक) को मानवाधिकारों के मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “दुनिया जानती है कि कैसे पाकिस्तान ने अपने ही देश के एक हिस्से में नरसंहार किया, जिसे अब स्वतंत्र बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है…मैं पूछना चाहता हूँ कि इस देश को इस देश को मानवाधिकार से जुडे़ मुद्दों को उठाने का क्या अधिकार है?”
इसके बाद उपसभापति ने कश्मीर मुद्दे पर बोलना शुरू किया और पाकिस्तान की बखिया उधेड़ दी। उन्होंने कहा, “चूँकि इन्होंने कश्मीर के मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया, इसलिए मैं बताना चाहूँगा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के हमारे हिस्से पर कब्जा किया हुआ है, जिसे pok के रूप में जाना जाता है। “