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तृणमूल सांसद ने लालच देकर हज़ारों निवेशकों को ठगा, बाद में कम्पनी में लटकाए ताले

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद कँवर दीप सिंह के ख़िलाफ़ निवेशकों से धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। ये मामला तृणमूल सांसद सहित 7 लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया है। आरोपितों ने निवेशकों को रकम दुगुना करने का झाँसा दे ठगा। निवेश के एवज में निवेशकों को घर और ज़मीन देने का झाँसा दिया। मामले में तृणमूल संसद की रियल एस्टेट कम्पनी के निदेशक सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुचेता खेमका, जयप्रकाश सिंह, बृजमोहन महाजन, छत्रसाल सिंह और नन्द किशोर सिंह को भी आरोपित बनाया गया है।

आरोपितों ने वर्ष 2010 में कानपुर के मॉल रोड इलाक़े में अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी और अलकेमिस्ट इंफ्रा टाउनशिप लिमिटेड के नाम से कम्पनियाँ खोली। उन्होंने निवेशकों को लालच दिया कि उनके द्वारा दी गई रक़म का कई गुना उन्हें वापस मिलेगा। कम्पनी की तरफ से उन्हें ज़मीन और फ्लैट देने का लालच भी दिया गया।

आरोपितों द्वारा खोली गई कंपनियों को हज़ारों निवेशक मिले। लेकिन, जब वादे के अनुसार निवेशकों के रुपए लौटाने का समय आया तब तृणमूल संसद व अन्य आरोपितों ने कम्पनी में ताला लटका दिया। कई निवेशकों ने न सिर्फ़ अपने रुपए लगाए थे, बल्कि अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इसमें रुपए निवेश करने को मनाया था। पुलिस को अब तक 100 ऐसे निवेशकों के फोन आ चुके हैं, जिन्होंने अपने साथ ठगी होने की बात कही है।

पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। पवन मिश्रा ने इस मामले की तहरीर दी थो, जो ख़ुद तृणमूल राज्यसभा सांसद केडी सिंह द्वारा धोखाधड़ी का शिकार रहे हैं। केडी सिंह तहलका मैगजीन के भी मुख्य निवेशक थे और नारद स्कैम में भी उन पर मामला चल रहा है।

लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम की नई चाल को काटने के लिए कितने तैयार हैं आप?

आप राजदीप सरदेसाई या शेखर गुप्ता हों तो आप 2014 के पहले के दिनों की वापसी चाहेंगे। वे दिन, जब आपकी जो मर्ज़ी आए सच-झूठ लिख दें, लोकतंत्र के राजे-महाराजे प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आपसे इंटरव्यू कराने के लिए लालायित हों, भारतीय मीडिया के आप तुर्रमखाँ हों और वैश्विक मीडिया आपके पीछे हो, फिल्म स्टार आपसे मिलने के लिए ऐसे बेचैन हों जैसे यह उनका ऑडिशन है। आप अपने महलों में चढ़ के बैठे हों और किराने की दुकान, किताबों की दुकान, ट्रैफिक स्टॉप, मॉल या मेट्रो जैसी ‘छोटी-मोटी’ चीज़ों से आपका कोई साबका न पड़ा हो।

लेकिन फिर हवा पलट गई। सत्ता के केंद्र पर ‘राइट-विंग’ काबिज़ हो गया। उनके मीडिया, जिनमें स्वराज्य और ऑपइंडिया सबसे बड़े हैं, लेकिन इकलौते नहीं, ने बुलबुले में छेद करने शुरू कर दिए। झूठ और असहिष्णुता पर पड़े नकाब उठने लगे। उनका हिन्दू-विरोधी स्टांस सार्वजनिक हो गया। उनके गढ़े मिट्टी के पुतले, जैसे ‘वीर’ टीपू सुल्तान, ‘महान’ मुगल, ‘शांतिप्रिय’ अशोक गलने लगे। रोमिला थापर, शेल्डन पोलॉक, ऑड्रे ट्रश्के, इरफ़ान हबीब को वो मिलने लगा, जिसके वे लायक थे। अमर्त्य सेन और रघुराम राजन का आभामंडल फीका होकर बुझ गया। फिल्म अभिनेताओं और निर्देशकों की ‘निष्पक्षता’ का नाटक खत्म हो गया और लेखक तथा अकादमिक जगत के लोग बिकाऊ निकले। कानूनी दाँव-पेंच आजमाने और उनपर हुकुम सुनाने वाले भी मिट्टी के माधो निकले।

लेफ़्ट-लिबरलों का इकोसिस्टम जनाक्रोश के सैलाब में डूबने लगा। मोदी को गरीबों ने जिता दिया, दक्षिणपंथी विचार की आवाज़ को सोशल मीडिया पर मंच मिला। तब इस लेफ़्ट- इकोसिस्टम ने हर विरोधी पर “भक्त” और “ट्रोल” का ठप्पा लगाना शुरू कर दिया, अपने नेरेटिव के विरोधियों को ‘फेक न्यूज़ वाला’ बताने लगे।

लुटियंस मीडिया अपनी ज़मीन बचाने के लिए डिबेट और सेमिनार करने लगे। लेकिन तब भी वे विश्वसनीयता खोते ही रहे। 2019 के बाद तो उनके खुद के लिए इसे नकारना मुश्किल हो गया।

अब जबकि इनकी समझ में आ गया है कि संख्या बल इनके साथ कभी नहीं होना है, तो एक नया खेल शुरू हो गया है। सोशल मीडिया राइट-विंग के ही पक्ष में समर्थक बढ़ा रहा है। “फेक न्यूज़” चिल्लाने से काम नहीं बनना है तो अब इन्होंने अपने अख़बारों और अन्य समाचार माध्यमों के साथ गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसे माध्यमों को जोड़कर नया प्रपंच शुरू किया है। “फेक न्यूज़” का रोना रोने की बजाय उसी शराब को नई बोतल में डालकर “मिसइंफॉर्मेशन” का लेबल लगा दिया है। अब ‘स्थानीय’ गिरोह को वैश्विक लेफ़्ट-लिबरलों के नेटवर्क के सरगनाओं का साथ मिल रहा है।

The Hindu ने आज अपने पहले पन्ने पर सीना ठोंक के घोषणा की है कि वह BBC और अन्य वैश्विक मीडिया आउटलेटों के साथ मिलकर “मिसइंफॉर्मेशन” से लड़ेगा। इसके लिए वह “पाठकों की रक्षा” का हवाला दे रहा है। BBC ने इस नए प्रपंच की शुरुआत इस साल के “Trusted News Summit” से कर दी थी। इसमें भागीदारी करने वाले थे European Broadcasting Union (EBU), फेसबुक, फाइनेंशियल टाइम्स, गूगल, AFP, माइक्रोसॉफ्ट, रॉयटर्स, ट्विटर, BBC और The Hindu। अब यह सब एक दूसरे को “इत्तला” कर देंगे जहाँ कहीं इनमें से किसी को “मिसइंफॉर्मेशन” दिखे।

यह अब तक इंटरनेट पर प्रभुत्व जमाए राइट-विंग के लिए चुनौती है। अभी तक तो हम खाली परेश रावल के ट्वीट डिलीट करने और वैसे ही ‘अपराध’ पर शेहला रशीद को हाथ न लगाने, ट्विटर इंडिया के सीईओ (2014-18) के पाकिस्तान-समर्थक होने आदि के बारे में शक भर ही करते थे। अब तो इन सब ने खुल कर हाथ मिला लिया है।

तो अब इंटरनेट-वीर कर क्या सकते हैं? पहले तो अपनी संख्या को मज़बूती से पकड़ कर रखना होगा। ट्विटर का हर छठा यूज़र भारतीय है। यह पिछले दो सालों में बढ़ा ही होगा। इस एकता को बना कर रखना होगा और आशा है कि सरकार इस एकता को सकारात्मक नज़र से देखेगी।

लेकिन इसके अलावा शायद समय आ गया है कि भारत अपना खुद का सोशल मीडिया/माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफार्म लेकर आए, जैसे चीन का Sina Weibo है। यह इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर का मिश्रण है। इससे अपने देश के लोगों का डाटा भी सुरक्षित रहेगा और प्रतिस्पर्धी के आ जाने से वैश्विक प्लेटफार्म भी अपने-आप सीधे हो जाएँगे।

लेफ़्ट-लिबरलों का इकोसिस्टम अपनी चाल चल चुका है। जवाब में आप क्या कर रहे हैं?

(वरिष्ठ पत्रकार आशीष शुक्ला के मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित लेख का अनुवाद मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है।)

जबरन बीफ डिलीवर करवाने वाले जोमैटो ने तकनीक के नाम पर ली 541 की बलि

फूड एग्रीगेटर कम्पनी जोमैटो ने अपने 541 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। जोमैटो ने तकनीक का बहाना बना कर ऐसा किया। कम्पनी का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के कारण उसे मानव संसाधन में कटौती करनी पड़ी है। कस्टमर, मर्चेंट और डिलीवरी कस्टमर सपोर्ट टीम से निकाले गए सदस्य जोमैटो के गुरुग्राम स्थित दफ्तर में कार्यरत थे।

जोमैटो अपने बैक-एन्ड सपोर्ट से ग़ैर-ज़रूरी चीजों को निकालने में लगा हुआ है और इसके तहत ये कार्रवाई की गई है। जोमैटो द्वारा अपने सपोर्ट टीम से 541 लोगों को हटाने का अर्थ है कि कम्पनी ने कुल कर्मचारियों में से 10% को निकाल बाहर किया। पिछले महीने 100 कर्मचारियों को निकाला गया था, जिससे यह आँकड़ा करीब 650 हो जाता है।

जोमैटो का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उसने अपने सपोर्ट सिस्टम के तकनीक में काफ़ी सुधार किया है। टेक्नोलॉजी इंटरफेस में सुधार के कारण अब उसके पास सपोर्ट सम्बंधित शिकायतें कम आ रही हैं। इससे विभिन्न कार्यों के लिए हायर किए गए कई कर्मचारियों की ज़रूरत ही नहीं रही है। जोमैटो ने कहा कि उनका कारोबार लगातार प्रगति पर है और अब बस उसके 7.5% ऑर्डरों को ही सपोर्ट की ज़रूरत है।

इससे पहले 2015 के शुरुआती दिनों में जोमैटो ने 300 कर्मचारियों को निकाल बाहर किया था। जोमैटो दुनिया भर में 10,000 और भारत में 500 शहरों में अपनी सेवाएँ दे रहा है। इससे पहले ख़बर आई थी कि पश्चिम बंगाल के हावड़ा में ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाली कंपनी जोमैटो के फूड डिलीवरी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उनका आरोप था कि कंपनी उनकी इच्छा के विरुद्ध उनको बीफ (गोमांस) और पोर्क (सूअर का मांस) डिलीवर करने के लिए मजबूर कर रही है।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले जोमैटो के एक ग्राहक ने खाने की डिलीवरी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि खाना पहुँचाने वाला मुस्लिम था और श्रावण के महीने में वह गैर-हिन्दू के हाथ से खाना स्वीकार नहीं करना चाहता था। इस पर जवाब देते हुए जोमैटो ने कहा था कि खाने का कोई मज़हब नहीं होता, बल्कि खाना अपने आप में मज़हब होता है।

पनौती PM मोदी की उत्तेजना के कारण भटका इसरो वैज्ञानिकों का ध्यान: सपा प्रवक्ता IP सिंह

विपक्षी दल के नेता किस कदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंध विरोध करने की मानसिकता से ग्रसित हैं इसकी झलक सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने दिखाई है। उन्होंने चंद्रयान-2 के लैंडर से इसरो के संपर्क टूटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया है। इसके लिए पीएम मोदी की किसी नीति पर सवाल खड़े करने की बजाय उन्हें ‘पनौती’ बता दिया।

सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने ट्विटर पर लिखा:

“नाटकबाज प्रधामंत्री की उत्तेजना से हमारे वैज्ञानिकों का ध्यान भटका होगा। जश्न तो सफलता मिलने के बाद मनाया जाता है। पूरी दुनिया भर में उपहास उड़ा होगा। ऐसा लगता है कि इसरो की स्थापना दो गुजरातियों ने मिल कर की थी। मीडिया को इतनी उत्तेजना नहीं फैलानी चाहिए थी। पनौती बंगलौर भी पहुँच गए थे।”

सपा प्रवक्ता की इस ट्वीट को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें जम कर लताड़ा। लोगों ने उनसे पूछा कि जब पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने में लगा है, एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता द्वारा इस तरह का बयान देना अजीब है।

आईपी सिंह ने इससे पहले कहा था कि बेरोजगारी और भूखमरी से ध्यान हटाने के लिए भाजपा चंद्रयान-2 मिशन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी लोगों को जाग कर चंद्रयान-2 मिशन की लैंडिंग देखने को इसलिए बोल रहे हैं ताकि कोई आर्थिक तबाही के बारे में सवाल न पूछे। हालाँकि, उन्हीं की पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसरो के वैज्ञानिकों की सराहना की है।

हम सब राम के वंशज: प्रमाण देने 2 हज़ार रघुवंशियों ने किया अयोध्या के लिए कूच

अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान जब से सुप्रीम कोर्ट ने राम के वंशजों के बारे में पूछा है कई लोग उनका वंशज होने का दावा कर चुके हैं। अभी तक दावा करने वाले लोगों में ज्यादातर भाजपा-कॉन्ग्रेस के नेता, राजे-रजवाड़े से जुड़े लोग ही थे। अब मध्य प्रदेश के रघुवंशी समाज के करीब 2 हज़ार लोगों ने खुद को श्री राम का वंशज बताते हुए प्रदेश के शिवपुरी से अयोध्या की ओर प्रस्थान कर दिया है।

अखंड रघुवंशी समाज कल्याण के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर सिंह रघुवंशी ने आज तक से बात करते हुए दावा किया कि यह आंदोलन और यात्रा सुप्रीम कोर्ट द्वारा श्री राम के वंशजों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में है। वे लोग संदेश देना कहते हैं कि श्री राम के वंशज पूरे देश भर में रहते हैं।

करीब 100 गाड़ियों में सवार 2,000 लोग मध्य प्रदेश के 15 जिलों से इकट्ठे हुए हैं और झांसी, कानपुर और लखनऊ से होते हुए रविवार सुबह तक अयोध्या पहुँच जाएंगे। वहाँ यह काफिला सरयू नदी में स्नान करने के बाद रामलला के दर्शन करेगा। इन सभी ने जन्मभूमि स्थल पर श्री राम का भव्य मंदिर जल्द से जल्द बनाने की माँग की है।

9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान सवाल पूछा था कि क्या श्री राम के कोई वंशज अभी भी हैं। इसके बाद भाजपा नेत्री राजकुमारी दीया कुमारी, राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव और मेवाड़ राजघराने के अरविंद सिंह मेवाड़ ने खुद को भगवान राम का वंशज बताया था।

गणेश विसर्जन में जल-प्रदूषण से बचें: PM मोदी की सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (7 सितंबर, 2019) को लोगों से गुज़ारिश की है कि वे गणेश विसर्जन के समय जल-प्रदूषण से बचते हुए प्लास्टिक और अन्य कचरों को समुद्र में न जाने दें। पीएम मोदी ने यह बात मुंबई के विले पार्ले उपनगरीय इलाके में भगवान गणपति के दर्शन के दौरान कही। प्रधानमंत्री इस समय एक-दिनी महाराष्ट्र दौरे पर हैं, जहाँ अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं।

“सुराज्य हमारा जन्मसिद्ध कर्त्तव्य है”

पीएम मोदी ने मुंबई मेट्रो की तीन नई लाइनों के लोकार्पण के बाद बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जिओ वर्ल्ड सेंटर में जनसभा को सम्बोधित भी किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “जैसे लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, वैसे ही अब जबकि हम आज़ादी के 75 वर्षों की तरफ बढ़ रहे हैं, तो हमें कहना चाहिए कि ‘सुराज्य’ हमारा कर्त्तव्य है।” प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने पहले मेट्रो कोच का भी विमोचन किया।

“पहले 100 दिन में कई ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय”

पीएम ने दावा किया कि उनकी राजग सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले सौ दिनों के भीतर कई सारे ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय लिए हैं। इसके अलावा उन्होंने “एक देश एक शपथ” का विचार भी सुझाया। उन्होंने जल प्रदूषण रोकने और वातावरण की सुरक्षा के लिए single-use प्लाटिक के इस्तेमाल को रोकने पर ज़ोर दिया। साथ ही, गणेश विसर्जन पर प्लास्टिक और कई सारे अन्य कचरों को समुद्र में जाने से रोकने की अपील की।

गौरतलब कि प्रधानमंत्री पहले भी single-use प्लास्टिक के प्रयोग को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने लालकिले से भी 15 अगस्त को इसके प्रयोग को रोकने की बात की थी। खबर यह भी आ रही है कि मोदी इसके खिलाफ 11 सितंबर को मथुरा से एक अभियान की भी शुरुआत कर सकते हैं। कई पेय-पदार्थ कंपनियों ने इसकी भी आशंका जताई है कि गाँधी-जयंती (2 अक्टूबर) के दिन इसपर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा भी हो सकती है।

तेलंगाना के सबसे बड़े मंदिर को मिला नया ‘भगवान’: उकेरी गई KCR की तस्वीरें, TRS का चुनाव चिह्न

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अब ‘भगवान’ बन गए हैं। कम से कम यदाद्रि भुवनगिरि स्थित लक्ष्मी नरसिंह मंदिर में उकेरी गई तस्वीरों को देख कर तो ऐसा ही लगता है। इसे तेलंगाना में लोग यदाद्रि मंदिर के नाम से भी जानते हैं। मंदिर के खम्भों पर मुख्यमंत्री केसीआर की तस्वीरें उकेरी जाने के बाद से विपक्षी पार्टियाँ टीआरएस प्रमुख पर हमलावर हो उठी हैं। भाजपा विधायक राजा सिंह ने कहा कि अगर इन प्रतिमाओं को नहीं हटाया गया तो जनता इन्हें हटाने का तरीका जानती है।

विधायक राजा सिंह ने एक वीडियो ट्वीट कर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। मंदिर में न सिर्फ़ केसीआर बल्कि उनकी पार्टी टीआरएस के चुनाव चिह्न कार भी खम्भों पर उकेरी गई है। भाजपा विधायक ने केसीआर को माफ़ी माँगने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मंदिर को अपने पैसों से नहीं बनवा रहे हैं, बल्कि यह जनता का पैसा है।

यादगिरिगुट्टा स्थित लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर तेलंगाना का सबसे विशाल मंदिर है और इसे ‘तेलंगाना का तिरुपति’ भी कहा जाता है। तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद मुख्यमंत्री केसीआर ने यादगिरिगुट्टा का नाम यदाद्रि रख दिया और पहाड़ पर स्थित इस मंदिर के विकास के लिए 1,800 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया।

इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस भी खफा है। कॉन्ग्रेस नेता गुडुर नारायण रेड्डी ने कहा कि केसीआर अपने आप को भगवान की तरह पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में केसीआर की तस्वीरें उकेरने वाला कृत्य निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वे अपने पॉकेट से रुपया निकाल कर मंदिर का विकास नहीं कर रहे हैं बल्कि ये जनता का पैसा है। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि केसीआर को याद रखना चाहिए कि वे एक राजा नहीं हैं बल्कि जनता के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा:

“कोई भी मंदिर की पवित्रता से खिलवाड़ नहीं कर सकता। ख़ुद की तुलना भगवान से करने का हक़ किसी को नहीं है। टीआरएस का चुनाव चिह्न कार चाप को उकेरा जाना असंवैधानिक है। यह धर्म को राजनीति से मिलाने की एक साज़िश है। केसीआर ने अपनी मन्नतों के लिए कई मंदिरों में जनता के करोड़ों रुपए उड़ा दिए हैं। आप धार्मिक हैं तो ठीक है लेकिन यह सब अपने रुपयों से कीजिए। आप भगवान नहीं हैं बल्कि एक साधारण व्यक्ति हैं, जिस पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हुए हैं।”

यदाद्रि टेम्पल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YTDA) ने इस क़दम का बचाव करते हुए कहा कि यह बिना राज्य सरकार के दबाव के किया गया है। टेम्पल अथॉरिटी ने कहा कि सभी मंदिरों में विभिन्न समयकाल से जुड़ी चीजें होती हैं। उसने कहा कि मंदिरों में उस कालखंड की संस्कृति और समाज को दर्शाते हुए कई प्रतीक मिलते हैं। टेम्पल अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा राव ने कहा कि कार का चिह्न इसलिए उकेरा गया है ताकि भविष्य के लोगों को पता चले कि ऐसी कोई चीज हुआ करती थी।

राव ने पूछा कि वहाँ भाजपा का चुनाव चिह्न कमल और टीडीपी का चिह्न साइकल भी है तो कार से क्या दिक्कत है? टेम्पल अथॉरिटी ने यह भी कहा कि इंदिरा गाँधी, महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू की भी तस्वीरें कई धार्मिक स्थलों पर मिलती हैं। टीआरएस अभी इस मुद्दे पर चुप है। कॉन्ग्रेस नेता विजयशंति श्रीनिवास ने कहा कि केसीआर मध्ययुग काल के किसी राजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

‘दरगाह झूठी मान्यताओं का अड्डा’ – इस बात से आहत हुई लोगों की भावनाएँ, डॉक्टर गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर अक्सर धार्मिक भावनाएँ आहत होने की खबरें देखने को मिलती हैं। इस बार मामला गुजरात से मजहबी भावनाएँ आहत होने का आया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस केस में गोधरा पुलिस ने बृहस्पतिवार की रात सुजात वली नाम के एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को दरगाहों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर मजहब विशेष के लोगों की भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। कुछ दिन पहले ही डॉक्टर सुजीत वली का एक विडियो वायरल हुआ था।

उस विडियो में डॉक्टर वली दरगाहों को झूठी मान्यताओं का अड्डा कह रहे थे। हालाँकि, गिरफ्तारी के बाद उन्हें शुक्रवार (सितम्बर 06, 2019) को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

जाँच अधिकारी एचसी रथवा ने कहा- “विडियो एविडेन्स के आधार पर हमने डॉक्टर वली को गिरफ्तार किया और उन्हें अदालत में पेश किया। उन्हें आज जमानत पर रिहा कर दिया गया। उन्होंने बाद में माफी माँगते हुए एक वीडियो भी पोस्ट किया।”

पिछले रविवार (सितंबर 01, 2019) को सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद 100 से अधिक लोगों ने मार्च निकाला और डॉक्टर वली के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वली ने पहले भी इसी तरह का कंटेंट अपलोड किया था और इस बार उन्हें दंडित किया जाना चाहिए ताकि वह दोबारा ऐसा न करें।

पाक में अब 15 साल की ईसाई लड़की का धर्मांतरण, स्कूल प्रिंसिपल ने मदरसा ले जाकर बदलवाया धर्म

पाकिस्तान से जबरन धर्म परिवर्तन की ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं। सिख और हिंदू लड़की के बाद अब 15 साल की एक ईसाई लड़की के जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित ईसाई लड़की जिस स्कूल में पढ़ती थी वहाँ की प्रिंसिपल ने ही उसका धर्म परिवर्तन करवाया है। घटना लाहौर के पंजाब प्रांत की है। ईसाई लड़की के पिता मुख्तार मसीह का कहना है कि स्कूल प्रिंसिपल उनकी बेटी फैजा को लाहौर से करीब 50 किमी दूर शेखपुरा जिले के एक मदरसे में लेकर गई और उसके जबरन धर्म परिवर्तन कराया। प्रिंसिपल का नाम सलीमा बीबी है।

दरअसल, जब बुधवार (सितंबर 4, 2019) को फैजा स्कूल से अपने घर नहीं पहुँची तो उसके पिता मुख्तार स्कूल पहुँचे। वहाँ जब उन्होंने अपनी बेटी के बारे में पूछताछ की, तो एक क्लास टीचर ने उन्हें बताया कि प्रिंसिपल उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराने के लिए मदरसा ले गई है। जिसके बाद लड़की के पिता ने उसे पास के तीन मदरसों में तलाशा। उन्हीं में से एक मदरसे में बच्ची उन्हें दिखाई दी, लेकिन मदरसे के कर्मचारियों नें उन्हें अपनी बच्ची से नहीं मिलने दिया।

मुख्तार की शिकायत पर पुलिस ने मदरसे में छापा मारकर लड़की को बरामद कर लिया और उसे शेखपुरा के एक शेल्टर होम में शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारी मुहम्मद नवाज ने बताया कि पिता की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेकर बच्ची को बरामद कर लिया गया है। लेकिन फिलहाल किसी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है। जाँच जारी है।

लड़की ने अभिभावकों ने बताया कि जब वो स्कूल में अरबी पढ़ रही थी तो उसकी स्कूल टीचर ने उससे कहा कि उसने अपने आप धर्मांतरण किया है। बच्ची के पिता ने बताया कि प्रिंसिपल ने उन्हें भी धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए कहा था और बदले में उनकी जरूरतों के हिसाब से पैसा देने की बात कही थी। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि, 3 सितंबर को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो हिंदू लड़की को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था। इससे पहले एक सिख युवती को भी अगवा कर उसका धर्म परिवर्तन करवाने के बाद उसकी मोहम्मद हसन से शादी करवा दी गई, जो कि हाफ़िज़ सईद के आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा का सदस्य है।

सबरीमाला पर कब्जे की तैयारी में केरल की वामपंथी सरकार, 150 मंदिरों के लिए बना रही नया विधान

सबरीमाला में भक्तों की भावना को पुलिस के इस्तेमाल से कुचलने वाली केरल की वामपंथी सरकार क्या इस मंदिर पर शिंकजा कसने की तैयारी कर रही है? क्या उसकी नजर मंदिर की कमाई पर है? यह सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है, क्योंकि केरल की सरकार सबरीमाला श्राइन के 150 से अधिक मंदिरों के लिए नया नियम-कानून तैयार कर रही है। राज्य सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है।

राज्य सरकार की इस कवायद पर कई लोगों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। त्रावणकोर देवासम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पी. गोपालकृष्णन ने कहा है कि मंदिरों और उनके राजस्व पर कब्ज़ा करने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। हालॉंकि, केरल सरकार के मंत्री के. सुरेंद्रन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर के शासन-व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर महिलाओं के प्रवेश को लेकर काफी चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद लाखों श्रद्धालु (जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं) सड़क पर उतरे थे। केरल की वामपंथी सरकार ने इस विरोध-प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया था। हालाँकि, राज्य सरकार का कहना है कि नए नियम-क़ायदों का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।

केरल सरकार के वकील जी. प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि न सिर्फ़ सबरीमाला, बल्कि त्रावणकोर देवासम बोर्ड के अंतर्गत आने वाले सबरीमाला हॉल श्राइन के 150 से अधिक मंदिरों के लिए एक नया विधान बनाया जा रहा है। बोर्ड 1240 मंदिरों का शासन-प्रबंध देखता है।

मंदिरों के लिए नियम-क़ानून बनाने की प्रक्रिया ड्राफ्टिंग के अंतिम चरण में है। जी. प्रकाश ने यह भी बताया कि इसका सबरीमाला मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा-पाठ या प्रवेश करने से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार इसे मुख्य रूप से शासन-प्रबंधन से सम्बंधित क़दम बता रही है।

इसके अलावा बोर्ड ने निर्णय लिया है कि सभी 1,240 मंदिरों के लिए पूजा सम्बंधित साजो-सामान की सेंट्रलाइज्ड यानी केंद्रीकृत ख़रीद की जाएगी और उन्हें सभी मंदिरों में बाँटा जाएगा। इससे पहले मंदिर पूजा साजो-सामान की ख़रीद के लिए टेंडर जारी करते थे और बोली लगाया जाता था। अब बोर्ड इसके लिए स्टोर्स की स्थापना करने जा रहा है, जिसका प्रबंधन उसके कर्मचारी करेंगे।