Home Blog Page 5544

प्यार, धोखा और लालच: कृष्णा का हत्यारा निकला ज्योति का तीसरा आशिक मुख़्तार, शर्ट के 4 बटन ने सुलझाई गुत्थी

एक हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी और राज़ खुला भी तो शर्ट के बटन से। मामला मुंबई से सटे नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन का है। पुलिस को एक व्यक्ति की लाश मिली। उसकी पहचान के लिए पुलिस ने उसकी शर्ट का इस्तेमाल किया, जिस पर टेलर का पता लिखा हुआ था। पुलिस जब दुकान पर पहुँची, तब टेलर ने शर्ट देखते ही बता दिया कि उक्त व्यक्ति का नाम कृष्णा है। हालाँकि, वह पूरा नाम नहीं बता पाया लेकिन उसे इतना पता था कि कृष्णा किसी मुस्लिम के होटल में काम करता है।

शर्ट देख टेलर कृष्णा की पहचान इसलिए कर पाया क्योंकि वह कॉलर के नीचे के 3-4 बटन हमेशा अलग रंग के लगाता था। जब पुलिस हत्या के तह तक पहुँची तो उसे प्यार, धोखा और लालच से भरी एक कहानी मिली। इस दौरान पुलिस को ज्योति नामक युवती का पता चला, जो उत्तर प्रदेश के महराजगंज के किसी पुलिस वाली की बहन है। उसका किसी लड़के के साथ अफेयर था। दोनों भाग कर लखनऊ आए लेकिन उस लड़के को लगा कि ज्योति का भाई उसे छोड़ेगा नहीं।

ज्योति का बॉयफ्रेंड डर के मारे लखनऊ से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद फूट-फूट कर रो रही ज्योति को कृष्णा साहनी का साथ मिला। ज्योति को कृष्णा से भी प्यार हो गया। दोनों आकर मुंबई रहने लगे। एक दिन अचानक से कृष्णा को पता चला कि ज्योति के ऊपर यूपी में 30,000 रुपए का इनाम रखा गया है। उसके मन में लालच घर कर गया और उसने यूपी पुलिस को फोन कर ज्योति का पता बता दिया। उसने पुलिस को कहा कि वो रुपए लेकर आए और ज्योति को ले जाए। नशे की हालत में उसने ये बात ज्योति को भी बताई।

ज्योति अपने साथ हुए धोखे के कारण गुस्से से लाल हो गई। इसके बाद कृष्णा को भी अपनी ग़लती का एहसास हुआ और वह ज्योति को लेकर किसी दूसरे एरिया में शिफ्ट हो गया ताकि पुलिस उन्हें न ढूँढ पाए। वो लोग जहाँ शिफ्ट हुए, वहीं नए किरदार की एंट्री हुई। उसका नाम था मुख़्तार, जो वहाँ आता-जाता रहता था। कृष्णा के धोखे को ज्योति भूली नहीं थी। उसे अब मुख़्तार से प्यार हो गया। जब कृष्णा किसी काम से पुणे गया तो मुख़्तार की सलाह पर ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई।

कृष्णा जब लौटा तो उसने ज्योति को न पाकर आश्चर्य हुआ। जब उसे पता चला कि ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई है तो उसने बिल्डिंग के लोगों से ज्योति का नया पता लिया। कृष्णा सीधा ज्योति के घर जा धमका और उससे सेक्स की डिमांड की। शराब के नशे में उसने ज्योति के साथ गाली-गलौज भी किया। वह नशे में वहीं पर सो गया। तब ज्योति ने मुख़्तार को कॉल किया। मुख़्तार ने वहाँ पहुँच कर सीधे सोते हुए कृष्णा के चेहरे पर हथौड़े से तगड़ा वार किया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

इसके बाद मुख़्तार ने सारे सबूत मिटाए और नायलॉन के एक बैग में लाश को पैक कर दिया। लाश को उसने ज्योति और अपने एक दोस्त सूरज के साथ मिल कर नाले में फेंक दिया। पुलिस को ज्योति के बारे में उसी होटल से पता चला था, जहाँ कृष्णा काम करता था। ज्योति के घर में नया-नया पेंट किया हुआ दीवाल देख कर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खँगाली और फिर हत्या का पर्दाफाश हुआ।

पूजा-पाठ और नारियल फोड़ने की वजह से मिली असफलता: चन्द्रयान-2 पर ‘सबसे बड़े दलित नेता’

अपने आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ बताने वाले उदित राज ने चंद्रयान-2 को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे ट्विटर पर उन्हें लोगों ने न सिर्फ़ लताड़ा बल्कि उनकी योग्यता पर भी सवालिया निशान लगाया। चंद्रयान-2 के लैंडर का इसरो से कनेक्शन टूटने के बाद जहाँ भारतीयों ने इसरो के वैज्ञानिकों का ढाँढस बँधाया, उदित राज इसमें भी धर्म घुसा कर राजनीति करने से बाज नहीं आए। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के पूर्व सांसद ने अपनी ट्वीट में लिखा:

“हमारे इसरो के वैज्ञानिकों ने अगर नारियल फोड़ने और पूजा पाठ पर विश्वास जताने की बजाय अगर वैज्ञानिक शक्ति और आधार पर विश्वास किया होता तो अब तक मिली आंशिक असफलता का मुँह ना देखना पड़ता।”

बता दें कि जुलाई में इसरो अध्यक्ष के. सिवन और उपाध्यक्ष उमा महेश्वरन ने नेल्लोर स्थित चेंगलम्मा माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर चंद्रयान-2 की सफलता के लिए आशीर्वाद माँगा था। इसके बाद उन्होंने चित्तूर स्थित तिरुमला मंदिर में पूजा की थी। इस दौरान के सिवन सहित इसरो के अन्य वैज्ञानिकों ने भगवान तिरुपति के सामने चंद्रयान-2 प्रतिकृति भेंट की थी।

बता दें कि उदित राज अपनेआप को सबसे बड़ा दलित नेता बताते रहे हैं। भाजपा में टिकट नहीं मिलने पर आम चुनावों से पहले वे कॉन्ग्रेस में चले गए थे। कई लोगों ने पूर्व सांसद से उनकी शैक्षिक योग्यता जाननी चाही। लोगों ने ट्विटर पर उदित राज से पूछा कि उन्होंने किस विषय से स्नातक किया था कि उनका बेसिक ज्ञान भी इतना कमजोर है? कुछ लोगों ने कहा कि देश में उदित राज जैसे नेताओं के रहते पाकिस्तान की क्या ज़रूरत है?

इससे पहले ईवीएम को लेकर उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट पर ही धाँधली का आरोप लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग बिक चुका है। सुप्रीम कोर्ट के अलावा वह राष्ट्रपति पद पर भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा हमेशा गूँगे-बहरों को ही राष्ट्रपति बनाती है।

अंग्रेजों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक: केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान

केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक को अंग्रेजों की देन बताया है। राज्यपाल नियुक्त होने के बाद एशियानेट न्यूज़ को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक एक लोकतान्त्रिक देश और गणतांत्रिक समाज में केवल एक तरह के “अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक” हैं- जो क़ानून को माने, वह बहुसंख्यक है और जो कानून के खिलाफ है, वह अल्पसंख्यक है। इस इंटरव्यू की यह क्लिप सोशल मीडिया के कई हलकों में चर्चित हो रही है।

आरिफ़ मोहम्मद खान ने कहा कि जब तक अंग्रेज़ों की दी हुई महज़बी अल्पसंख्यक-मज़हबी बहुसंख्यक की शब्दावली जीवित रखेंगे, तब तक “मुस्लमानों में मोदी का डर” जैसी भ्रांतियाँ बनी रहेंगी। उन्होंने उपनिषदों को उद्धृत करते हुए कहा कि उपनिषदों में बताया गया है कि “द्वय”, पराएपन की भावना डर पैदा करती है। साथ ही कुरान में से मौलाना अली की एक आयत के ज़रिए बताया कि जिससे इंसान अनभिज्ञ होता है, उससे डर पैदा होता है। अपने राज्यपाल के कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा कि वे लोगों के साथ अपना विश्वास, कि अपने अंदर victimhood की प्रवृत्ति पैदा करना पाप है, गुनाह है, केरल के लोगों के साथ बाँटेंगे।

उच्चायुक्त के साथ मिल भारतीयों ने लंदन से पाकिस्तानी गंदगी की साफ़

ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रूचि घनश्याम के नेतृत्व में शनिवार (सितंबर 06, 2019) को भारतीय लोगों ने हाई कमिशन और उसके आसपास की सफाई की। यह गंदगी 3 सितंबर को पाकिस्तानियों ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगाई थी।

भारतीय लोगों ने पाकिस्तानियों द्वारा इसी तरह का प्रदर्शन और गंदगी 14 सितंबर को करने की आशंका भी जताई है।

इस विरोध-प्रदर्शन में अण्डे और टमाटर का इस्तेमाल करने वाले दो पाकिस्तानियों को CCTV कैमरा में पहचान कर नगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पाकिस्तान के नागरिक और सरकार लगातार कश्मीर मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने के लिए बयानबाजी और नाटक कर रहे हैं।

एक ओर जहाँ पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह विश्व के अन्य बड़े नेता और संगठनों के पास जाकर भारत के इस कदम की शिकायत करेगा, वहीं तमाम बड़े नेता, संगठन और देश यह बात कह चुके हैं कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है और उसमें अन्य किसी के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

प्रधानमंत्री प्रेरणा के स्रोत, चंद्रयान-2 पर उम्मीदें अभी कायम: इसरो प्रमुख सिवन

चंद्रयान-2 मिशन को 3,84,000 किलोमीटर की यात्रा में चाँद की सतह से महज़ दो किलोमीटर पहले तक ले जाने वाले इसरो प्रमुख के. सिवन ने दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कहा है कि वे प्रधानमंत्री मोदी को उनकी संस्था के लिए प्रेरणा और समर्थन का स्रोत मानते हैं। उन्होंने मिशन के आखिरी कदम पर गड़बड़ा जाने पर प्रधानमंत्री मोदी की हौसलाअफ़ज़ाई को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण ने उन्हें उत्साह दिया। उन्होंने मोदी के “विज्ञान में नतीजे नहीं प्रयोग देखते हैं” की विशेष तारीफ की।

सात साल तक चल सकता है ऑर्बिटर

सिवन ने बताया कि हालाँकि ऑर्बिटर का तय जीवनकाल महज़ एक साल का है, लेकिन उसमें काफी अतिरिक्त ईंधन मौजूद है। इसके चलते ऑर्बिटर लगभग 7-7.5 साल तक चन्द्रमा की परिक्रमा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विक्रम लैंडर से फ़िलहाल सम्पर्क टूटा हुआ है। फिर भी उम्मीदें कायम हैं। अगले 14 दिनों में सम्पर्क फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जाएँगे।

दोपहर में भी किया था ट्वीट

इसरो प्रमुख ने इसके पहले उन्हें गले लगाने वाले मोदी के वीडियो को दोपहर में भी ट्वीट किया था। उस समय उन्होंने लिखा था कि वे यह पल कभी नहीं भूलेंगे। दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा कि मोदी के भाषण के अंश “विज्ञान में नतीजे नहीं देखने चाहिए, बल्कि प्रयोग देखने चाहिए और प्रयोग से नतीजे निकलते हैं” को उन्होंने विशेष तौर पर नोट किया था।

जाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में डाल दो

भीमा कोरेगॉंव हिंसा मामले की जॉंच के लिए गठित आयोग के सामने कुछ अर्बन नक्सलियों ने बयान देने से इनकार कर दिया। इससे पहले इन्होंने आयोग के सामने पेश होकर बयान देने की इच्छा जताई थी। लेकिन, पेशी के दौरान बयान देने की बात से पलट गए। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस जय नारायण पटेल ने उन्हें दोबारा जेल भेज देने के निर्देश दिए।

आयोग के सामने अर्बन नक्सल सुरेंद्र गाडलिंग ने यह कहते हुए बयान देने से इनकार कर दिया कि इससे ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई पर असर पड़ेगा। गाडलिंग ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में उसकी दलीलों पर कोई असर न पड़े, इसीलिए वह जाँच आयोग को बयान नहीं देगा। हालाँकि, इससे पहले वकील सुरेंद्र गाडलिंग बयान देने को राजी था।

गाडलिंग को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए 6 सितम्बर की तारीख दी गई थी। उसके अलावा एक अन्य अर्बन नक्सल सुधीर धावले को भी 7 सितम्बर को पेश होने को कहा गया था। न सिर्फ़ गाडलिंग बल्कि धावले ने भी बयान दर्ज कराने से मना कर दिया है। दोनों फिलहाल पुणे स्थित यरवदा जेल में बंद हैं। इन्हें पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

पुणे पुलिस ने गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत गाडलिंग व धवले सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। इससे पहले गाडलिंग ने कहा था कि वह कुछ तथ्यों को सामने लाने के लिए बयान देना चाहता है। गाडलिंग द्वारा बयान देने से मना करने पर उसे वापस यरवदा जेल में भेज दिया गया है। आश्चर्य की बात यह भी है कि एल्गार परिषद मामले में एक अन्य आरोपी सुधीर धावले ने भी एक आवेदन दाखिल किया था और आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था, लेकिन अब उसने भी मना कर दिया है।

धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी। आरोप है कि इन अर्बन नक्सलियों ने हिंसा भड़काने के लिए एक कार्यक्रम का सहारा लिया था।

तृणमूल सांसद ने लालच देकर हज़ारों निवेशकों को ठगा, बाद में कम्पनी में लटकाए ताले

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद कँवर दीप सिंह के ख़िलाफ़ निवेशकों से धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। ये मामला तृणमूल सांसद सहित 7 लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया है। आरोपितों ने निवेशकों को रकम दुगुना करने का झाँसा दे ठगा। निवेश के एवज में निवेशकों को घर और ज़मीन देने का झाँसा दिया। मामले में तृणमूल संसद की रियल एस्टेट कम्पनी के निदेशक सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुचेता खेमका, जयप्रकाश सिंह, बृजमोहन महाजन, छत्रसाल सिंह और नन्द किशोर सिंह को भी आरोपित बनाया गया है।

आरोपितों ने वर्ष 2010 में कानपुर के मॉल रोड इलाक़े में अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी और अलकेमिस्ट इंफ्रा टाउनशिप लिमिटेड के नाम से कम्पनियाँ खोली। उन्होंने निवेशकों को लालच दिया कि उनके द्वारा दी गई रक़म का कई गुना उन्हें वापस मिलेगा। कम्पनी की तरफ से उन्हें ज़मीन और फ्लैट देने का लालच भी दिया गया।

आरोपितों द्वारा खोली गई कंपनियों को हज़ारों निवेशक मिले। लेकिन, जब वादे के अनुसार निवेशकों के रुपए लौटाने का समय आया तब तृणमूल संसद व अन्य आरोपितों ने कम्पनी में ताला लटका दिया। कई निवेशकों ने न सिर्फ़ अपने रुपए लगाए थे, बल्कि अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इसमें रुपए निवेश करने को मनाया था। पुलिस को अब तक 100 ऐसे निवेशकों के फोन आ चुके हैं, जिन्होंने अपने साथ ठगी होने की बात कही है।

पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। पवन मिश्रा ने इस मामले की तहरीर दी थो, जो ख़ुद तृणमूल राज्यसभा सांसद केडी सिंह द्वारा धोखाधड़ी का शिकार रहे हैं। केडी सिंह तहलका मैगजीन के भी मुख्य निवेशक थे और नारद स्कैम में भी उन पर मामला चल रहा है।

लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम की नई चाल को काटने के लिए कितने तैयार हैं आप?

आप राजदीप सरदेसाई या शेखर गुप्ता हों तो आप 2014 के पहले के दिनों की वापसी चाहेंगे। वे दिन, जब आपकी जो मर्ज़ी आए सच-झूठ लिख दें, लोकतंत्र के राजे-महाराजे प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आपसे इंटरव्यू कराने के लिए लालायित हों, भारतीय मीडिया के आप तुर्रमखाँ हों और वैश्विक मीडिया आपके पीछे हो, फिल्म स्टार आपसे मिलने के लिए ऐसे बेचैन हों जैसे यह उनका ऑडिशन है। आप अपने महलों में चढ़ के बैठे हों और किराने की दुकान, किताबों की दुकान, ट्रैफिक स्टॉप, मॉल या मेट्रो जैसी ‘छोटी-मोटी’ चीज़ों से आपका कोई साबका न पड़ा हो।

लेकिन फिर हवा पलट गई। सत्ता के केंद्र पर ‘राइट-विंग’ काबिज़ हो गया। उनके मीडिया, जिनमें स्वराज्य और ऑपइंडिया सबसे बड़े हैं, लेकिन इकलौते नहीं, ने बुलबुले में छेद करने शुरू कर दिए। झूठ और असहिष्णुता पर पड़े नकाब उठने लगे। उनका हिन्दू-विरोधी स्टांस सार्वजनिक हो गया। उनके गढ़े मिट्टी के पुतले, जैसे ‘वीर’ टीपू सुल्तान, ‘महान’ मुगल, ‘शांतिप्रिय’ अशोक गलने लगे। रोमिला थापर, शेल्डन पोलॉक, ऑड्रे ट्रश्के, इरफ़ान हबीब को वो मिलने लगा, जिसके वे लायक थे। अमर्त्य सेन और रघुराम राजन का आभामंडल फीका होकर बुझ गया। फिल्म अभिनेताओं और निर्देशकों की ‘निष्पक्षता’ का नाटक खत्म हो गया और लेखक तथा अकादमिक जगत के लोग बिकाऊ निकले। कानूनी दाँव-पेंच आजमाने और उनपर हुकुम सुनाने वाले भी मिट्टी के माधो निकले।

लेफ़्ट-लिबरलों का इकोसिस्टम जनाक्रोश के सैलाब में डूबने लगा। मोदी को गरीबों ने जिता दिया, दक्षिणपंथी विचार की आवाज़ को सोशल मीडिया पर मंच मिला। तब इस लेफ़्ट- इकोसिस्टम ने हर विरोधी पर “भक्त” और “ट्रोल” का ठप्पा लगाना शुरू कर दिया, अपने नेरेटिव के विरोधियों को ‘फेक न्यूज़ वाला’ बताने लगे।

लुटियंस मीडिया अपनी ज़मीन बचाने के लिए डिबेट और सेमिनार करने लगे। लेकिन तब भी वे विश्वसनीयता खोते ही रहे। 2019 के बाद तो उनके खुद के लिए इसे नकारना मुश्किल हो गया।

अब जबकि इनकी समझ में आ गया है कि संख्या बल इनके साथ कभी नहीं होना है, तो एक नया खेल शुरू हो गया है। सोशल मीडिया राइट-विंग के ही पक्ष में समर्थक बढ़ा रहा है। “फेक न्यूज़” चिल्लाने से काम नहीं बनना है तो अब इन्होंने अपने अख़बारों और अन्य समाचार माध्यमों के साथ गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसे माध्यमों को जोड़कर नया प्रपंच शुरू किया है। “फेक न्यूज़” का रोना रोने की बजाय उसी शराब को नई बोतल में डालकर “मिसइंफॉर्मेशन” का लेबल लगा दिया है। अब ‘स्थानीय’ गिरोह को वैश्विक लेफ़्ट-लिबरलों के नेटवर्क के सरगनाओं का साथ मिल रहा है।

The Hindu ने आज अपने पहले पन्ने पर सीना ठोंक के घोषणा की है कि वह BBC और अन्य वैश्विक मीडिया आउटलेटों के साथ मिलकर “मिसइंफॉर्मेशन” से लड़ेगा। इसके लिए वह “पाठकों की रक्षा” का हवाला दे रहा है। BBC ने इस नए प्रपंच की शुरुआत इस साल के “Trusted News Summit” से कर दी थी। इसमें भागीदारी करने वाले थे European Broadcasting Union (EBU), फेसबुक, फाइनेंशियल टाइम्स, गूगल, AFP, माइक्रोसॉफ्ट, रॉयटर्स, ट्विटर, BBC और The Hindu। अब यह सब एक दूसरे को “इत्तला” कर देंगे जहाँ कहीं इनमें से किसी को “मिसइंफॉर्मेशन” दिखे।

यह अब तक इंटरनेट पर प्रभुत्व जमाए राइट-विंग के लिए चुनौती है। अभी तक तो हम खाली परेश रावल के ट्वीट डिलीट करने और वैसे ही ‘अपराध’ पर शेहला रशीद को हाथ न लगाने, ट्विटर इंडिया के सीईओ (2014-18) के पाकिस्तान-समर्थक होने आदि के बारे में शक भर ही करते थे। अब तो इन सब ने खुल कर हाथ मिला लिया है।

तो अब इंटरनेट-वीर कर क्या सकते हैं? पहले तो अपनी संख्या को मज़बूती से पकड़ कर रखना होगा। ट्विटर का हर छठा यूज़र भारतीय है। यह पिछले दो सालों में बढ़ा ही होगा। इस एकता को बना कर रखना होगा और आशा है कि सरकार इस एकता को सकारात्मक नज़र से देखेगी।

लेकिन इसके अलावा शायद समय आ गया है कि भारत अपना खुद का सोशल मीडिया/माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफार्म लेकर आए, जैसे चीन का Sina Weibo है। यह इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर का मिश्रण है। इससे अपने देश के लोगों का डाटा भी सुरक्षित रहेगा और प्रतिस्पर्धी के आ जाने से वैश्विक प्लेटफार्म भी अपने-आप सीधे हो जाएँगे।

लेफ़्ट-लिबरलों का इकोसिस्टम अपनी चाल चल चुका है। जवाब में आप क्या कर रहे हैं?

(वरिष्ठ पत्रकार आशीष शुक्ला के मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित लेख का अनुवाद मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है।)

जबरन बीफ डिलीवर करवाने वाले जोमैटो ने तकनीक के नाम पर ली 541 की बलि

फूड एग्रीगेटर कम्पनी जोमैटो ने अपने 541 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। जोमैटो ने तकनीक का बहाना बना कर ऐसा किया। कम्पनी का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के कारण उसे मानव संसाधन में कटौती करनी पड़ी है। कस्टमर, मर्चेंट और डिलीवरी कस्टमर सपोर्ट टीम से निकाले गए सदस्य जोमैटो के गुरुग्राम स्थित दफ्तर में कार्यरत थे।

जोमैटो अपने बैक-एन्ड सपोर्ट से ग़ैर-ज़रूरी चीजों को निकालने में लगा हुआ है और इसके तहत ये कार्रवाई की गई है। जोमैटो द्वारा अपने सपोर्ट टीम से 541 लोगों को हटाने का अर्थ है कि कम्पनी ने कुल कर्मचारियों में से 10% को निकाल बाहर किया। पिछले महीने 100 कर्मचारियों को निकाला गया था, जिससे यह आँकड़ा करीब 650 हो जाता है।

जोमैटो का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उसने अपने सपोर्ट सिस्टम के तकनीक में काफ़ी सुधार किया है। टेक्नोलॉजी इंटरफेस में सुधार के कारण अब उसके पास सपोर्ट सम्बंधित शिकायतें कम आ रही हैं। इससे विभिन्न कार्यों के लिए हायर किए गए कई कर्मचारियों की ज़रूरत ही नहीं रही है। जोमैटो ने कहा कि उनका कारोबार लगातार प्रगति पर है और अब बस उसके 7.5% ऑर्डरों को ही सपोर्ट की ज़रूरत है।

इससे पहले 2015 के शुरुआती दिनों में जोमैटो ने 300 कर्मचारियों को निकाल बाहर किया था। जोमैटो दुनिया भर में 10,000 और भारत में 500 शहरों में अपनी सेवाएँ दे रहा है। इससे पहले ख़बर आई थी कि पश्चिम बंगाल के हावड़ा में ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाली कंपनी जोमैटो के फूड डिलीवरी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उनका आरोप था कि कंपनी उनकी इच्छा के विरुद्ध उनको बीफ (गोमांस) और पोर्क (सूअर का मांस) डिलीवर करने के लिए मजबूर कर रही है।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले जोमैटो के एक ग्राहक ने खाने की डिलीवरी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि खाना पहुँचाने वाला मुस्लिम था और श्रावण के महीने में वह गैर-हिन्दू के हाथ से खाना स्वीकार नहीं करना चाहता था। इस पर जवाब देते हुए जोमैटो ने कहा था कि खाने का कोई मज़हब नहीं होता, बल्कि खाना अपने आप में मज़हब होता है।

पनौती PM मोदी की उत्तेजना के कारण भटका इसरो वैज्ञानिकों का ध्यान: सपा प्रवक्ता IP सिंह

विपक्षी दल के नेता किस कदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंध विरोध करने की मानसिकता से ग्रसित हैं इसकी झलक सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने दिखाई है। उन्होंने चंद्रयान-2 के लैंडर से इसरो के संपर्क टूटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया है। इसके लिए पीएम मोदी की किसी नीति पर सवाल खड़े करने की बजाय उन्हें ‘पनौती’ बता दिया।

सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने ट्विटर पर लिखा:

“नाटकबाज प्रधामंत्री की उत्तेजना से हमारे वैज्ञानिकों का ध्यान भटका होगा। जश्न तो सफलता मिलने के बाद मनाया जाता है। पूरी दुनिया भर में उपहास उड़ा होगा। ऐसा लगता है कि इसरो की स्थापना दो गुजरातियों ने मिल कर की थी। मीडिया को इतनी उत्तेजना नहीं फैलानी चाहिए थी। पनौती बंगलौर भी पहुँच गए थे।”

सपा प्रवक्ता की इस ट्वीट को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें जम कर लताड़ा। लोगों ने उनसे पूछा कि जब पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने में लगा है, एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता द्वारा इस तरह का बयान देना अजीब है।

आईपी सिंह ने इससे पहले कहा था कि बेरोजगारी और भूखमरी से ध्यान हटाने के लिए भाजपा चंद्रयान-2 मिशन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी लोगों को जाग कर चंद्रयान-2 मिशन की लैंडिंग देखने को इसलिए बोल रहे हैं ताकि कोई आर्थिक तबाही के बारे में सवाल न पूछे। हालाँकि, उन्हीं की पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसरो के वैज्ञानिकों की सराहना की है।