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नारदा स्टिंग मामला: TMC के 3 सांसदों पर CBI ने कसा शिकंजा, स्पीकर की मंजूरी मिलते ही दाखिल होगी चार्जशीट

नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई ने टीएमसी के 3 सांसदों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से संपर्क किया है। दरअसल, सीबीआई ने टीएमसी के तीनों सांसदों सौगत राय, काकोली घोष दस्तिदार और प्रसून बनर्जी के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अनुमति माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई का कहना है कि इन तीनों सांसदों समेत 10 आरोपितों को समन जारी किया गया है और बताया गया है कि इनसे पूछताछ के दौरान इनके वॉयस सैंपल लिए जाएँगे।

इन नेताओं की लिस्ट में एक नाम 48 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी का भी है जो पश्चिम बंगाल में तामलुक लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद थे और अभी वह राज्य सरकार में परिवहन मंत्री हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से अनुमति मिलने के बाद इन सांसदों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल होगी।

गौरतलब है कि नारदा केस टीएमसी के कुछ नेताओं पर हुए एक स्टिंग से जुड़ा हुआ मामला है, जिसमें पार्टी के 7 सांसद, तीन मंत्री और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी कथित तौर पर नारदा न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल से पैसे लेते नजर आए थे। इस दौरान सैमुएल इन नेताओं से एक कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में मिले थे।

साल 2014 में हुआ ये स्टिंग 2016 में नारदा न्यूज डॉट कॉम नामक वेबसाइट पर दिखाया गया था। फिर साल 2017 में इन टीएमसी नेताओं के ख़िलाफ़ केस दर्ज हुआ था, जिसमें बंगाल के कई मंत्रियों के नाम शामिल किए गए थे।

18 वर्षों से फरार मोस्ट वांटेड उग्रवादी निकला JMM का बड़ा नेता, 2009 में BSP से भी लड़ चुका है चुनाव

राँची के नामकुम से पलामू पुलिस ने एक लाख के इनामी टीएसपी उग्रवादी प्रशांत ठाकुर उर्फ़ संदीप ठाकुर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि उग्रवादी प्रशांत न केवल इस समय झामुमो युवा मोर्चा का केंद्रीय उपाध्यक्ष है बल्कि वह 2009 में बसपा के टिकट से विश्रामपुर विधानसभा में चुनाव भी लड़ चुका है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने झामुमो नेता प्रशांत को नामकुम स्थित अमेठिया नगर के गुलमोहर अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर-103 से गिरफ्तार किया। पुलिस उसे गिरफ्तार करने यहाँ बुधवार रात पहुँची थी। गिरफ्तारी के बाद उसे नामकुम थाने अपने साथ लेकर आया गया।

जानकारी के मुताबिक 18 वर्षों से फरार चल रहे प्रशांत ठाकुर की झारखंड पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस को लंबे समय से तलाश थी। लेकिन नाम बदलकर अपनी लोकेशन बदलते रहने के कारण वह पकड़ में नहीं आ रहा था।

पलामू के डीआइजी विपुल शुक्ला की मानें तो प्रशांत ठाकुर गढ़वा के रंका थाना क्षेत्र के बांडु कल्याणपुर का मूल निवासी है। लेकिन पिछले 5 साल से वह नामकुम में नाम बदल कर किराए पर रह रहा था। जहाँ लोगों को उसकी पहचान संदीप ठाकुर के रूप में पता थी।

अपनी जाँच में पुलिस ने प्रशांत के मोबाइल के लोकेशन की लगातार छानबीन की और लोकेशन का मालूम चलते ही बुधवार उसके फ्लैट पर जाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। डीआईजी ने बताया कि उग्रवादी प्रशांत छत्तीसगढ़ व झारखंड में टीएसपी संगठन का काम करता था।

इन दोनों ही राज्यों में उसका नाम मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में था। उस पर फिलहाल रामगढ़ थाने में बीड़ी पता व्यवसायी के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज है। इसके साथ ही उस पर पलामू में 4, गढ़वा में 2 और छत्तीसगढ़ के बलरामपुर स्थित रामचंद्रपुर थाना में मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ रेड वारंट भी निकला हुआ था।

94% डॉक्टर और 3442 सर्जरी के आँकड़ों के साथ IAS अधिकारी ने विदेशी प्रोपेगेंडा मीडिया को मारा ‘तमाचा’

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से कश्मीर को लेकर विदेशी मीडिया द्वारा लगातार भड़काऊ रिपोर्टिंग की जा रही है। रिपोर्टिंग के नाम पर प्रोपेगेंडा को फैलाया जा रहा है। 5 अगस्त के बाद से इन विदेशी मीडिया ने ये दिखाने की हर संभव कोशिश की कि कश्मीर जल रहा है, कश्मीर में लोग मर रहे हैं, उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिसकी वजह से लोगों की जानें जा रही हैं… और तमाम तरह के फलान-ढिमकान टाइप के झूठ इनके द्वारा फैलाए जा रहे हैं।

इन विदेशी मीडिया के प्रोपेगेंडा को श्रीनगर के जिलाधिकारी शाहिद चौधरी ने साफ तौर पर नकार दिया है, वो भी पूरे साक्ष्य के साथ। उन्होंने विदेशी मीडिया के तमाम दावों का खंडन करते हुए कहा कि वो आधिकारिक और व्यक्तिगत तौर पर सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि कश्मीर में कोई स्वास्थ्य सेवा संकट नहीं है। 94 फीसदी डॉक्टर फिलहाल ड्यूटी पर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घृणित और भड़काऊ रिपोर्टिंग करने से बेहतर है कि इस तरह की बातें उनके संज्ञान में लाया जाए। उन्होंने ऐसे मसले पर व्यक्तिगत ध्यान देने का आश्वासन दिया है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो इस बात को भी जानते हैं कि विदेशी मीडिया द्वारा प्रकाशित किए गए मनगढ़ंत कहानियों (रिपोर्टिंग) को पढ़ने के बाद लोगों के उनके आधिकारिक कथन पर विश्वास करने की संभावना कम है। इसीलिए वो आधिकारिक और व्यक्तिगत तौर पर सभी को आश्वस्त कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से स्थानीय अधिकारी की बातों पर विश्वास करने की अपील की और साथ ही उनके सारे सवालों का जवाब देने के लिए उपलब्ध रहने का भी भरोसा जताया। 

विदेशी मीडिया द्वारा फैलाया गया प्रोपेगेंडा

उन्होंने कहा कि जब वो दिल्ली, लंदन और वॉशिंगटन से कथित स्वास्थ्य संकट की इस तरह की रिपोर्टिंग पढ़ते हैं, तो ये उन्हें अंदर तक झकझोर देती है और वो सच्चाई का पता लगाने के लिए व्यक्तिगत तौर पर मैदान में निकल जाते हैं। उनका कहना है कि कठिनाईयों से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन सच्चाई को बरकरार रखना चाहिए, उसे इस तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए।

इतना ही नहीं, उन्होंने 5 अगस्त के बाद के सर्जरी के कुछ विवरण भी साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि एलडी हॉस्पिटल में 1168, एसएमएचएस हॉस्पिटल में 682, बोन एंड ज्वाइंट हॉस्पिटल में 800, सुपरस्पेशियलिटी में 382 और एसकेआईएसएस में 410 सर्जरी हुई है। यानी कि 5 अगस्त के बाद से अब तक कुल 3442 सर्जरी हुई है। शाहिद चौधरी ने कहा कि यह इस वर्ष के मासिक औसत के अनुरूप है।

वहीं, जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने एक विदेशी मीडिया की उस खबरों को सिरे से खंडन कर दिया, जिसमें दवा और डॉक्टरों की कमी से कई मरीजों की मौत का दवा किया गया था। इम्तियाज ने इसे पूरी तरह से प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्टिंग में जो भी दावा किया जा रहा है, वो बिल्कुल झूठा है। इम्तियाज ने बताया कि कश्मीर में दवाईयों की कोई कमी नहीं है। सभी अस्पताल सामान्य और सुचारू रुप से चल रहे हैं। किसी तरह की भयानक स्थिति नहीं है कश्मीर में।

बैलेंस शीट बढ़कर हुआ ₹41 लाख करोड़: 2018-19 की RBI की रिपोर्ट, निवेश का अहम योगदान

आर्थिक मंदी की आहट के बीच वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान RBI की बैलेंस शीट में 13.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह अब 36.17 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 41 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इस वृद्धि में निजी और विदेशी निवेशों का अहम योगदान है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गुरुवार (29 अगस्त) को जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में यह इस जानकारी दी गई। वित्त वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) के दौरान बैंक के बैलेंश शीट में वृद्धि दर्ज की गई। बता दें कि RBI का वित्त वर्ष जुलाई से जून तक होता है।

RBI ने भारत सरकार के परामर्श से मौजूदा ईसीएफ (इकॉनमिक कैपिटल फ्रेमवर्क) की समीक्षा के लिए बिमल जालान की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति ने 526.37 अरब रुपए की आय को कंटिजेंसी फंड से वापस निकालने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में चलन में मौजूद मुद्रा 17 फीसदी बढ़कर 21.10 लाख करोड़ रुपए पहुँच गई है।

डिजिटल भुगतान के संदर्भ में केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के सरकार के कई प्रयासों के बावजूद अर्थव्यवस्था में चलन में आई मुद्रा मार्च, 2019 में 17 फीसदी की वृद्धि के साथ 21.10 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि 500 रुपए के नोट की सबसे अधिक माँग है और वर्तमान मुद्रा व्यवस्था में प्रचलित नोटो में 500 रुपए के नोट की हिस्सेदारी 51 फीसदी है।  

RBI की इस वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, “चूंकि रिज़र्व बैंक का वित्तीय लचीलापन वांछित सीमा के भीतर था, इसलिए 526.37 अरब रुपए के अतिरिक्त जोखिम प्रावधान को आकस्मिक निधि (सीएफ) से वापस लिया गया।”

इसके बाद RBI के पास कुल 1,234.14 अरब रुपए अधिशेष था, जिसे मिलाकर कुल 1,759.87 अरब रुपए वो केंद्र सरकार को हस्तांतरित करेगी, जिसमें से 280 अरब रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। हाल ही में, RBI ने सरकार को कुल 1.76 लाख करोड़ रुपए का अधिशेष देने की घोषणा की थी। 

ग़ौरतलब है कि RBI द्वारा यह रिपोर्ट हर साल जारी की जाती है। इसमें केंद्रीय बैंक के कामकाज और संचालन के विश्लेषण के अलावा अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार के लिए सुझाव दिए जाते हैं। RBI के अनुसार, रिजर्व बैंक की घरेलू स्रोत से आय 30 जून, 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 132.07 फीसदी बढ़कर 1,18,078 करोड़ रुपए रही, जो इससे पूर्व वित्त वर्ष में 50,880 करोड़ रुपए रही थी। आय बढ़ने का मुख्य कारण ब्याज आय है। इसके अलावा, प्रतिभूतियों, तरलता समायोजन सुविधा/ सीमांत स्थायी सुविधा परिचालन के तहत शुद्ध ब्याज आय में वृद्धि हुई है।

कॉन्ग्रेसी महिला ने पूछा – फिर से किसे वोट दोगे – 82% ने कहा, ‘मोदी-मोदी’; खुद की पार्टी को सिर्फ 12%

कॉन्ग्रेस के चोटी के नेता तो दूर की बात, उसके आम सदस्य भी अभी तक इस सच्चाई को स्वीकारने की बजाय कि देश की जनता उनकी रीति-नीति को सिरे से नकार चुकी है, बार-बार इसी का प्रदर्शन कर रहे हैं कि वे बस मोदी से नाराज़गी के बल-बूते सत्ता में वापसी का ख्वाब पाले बैठे हैं। इसका सबूत है कॉन्ग्रेस की सदस्या और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ऐंड्रिया “रिया” डिसूज़ा का वह ट्विटर-पोल, जिसमें सवाल पूछा गया है कि देश में पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ है, उसे देखते हुए अगर उन्हें फिर से अपना वोट देने का मौका मिले तो किसे वोट देना चाहेंगे। बाकायदा विकल्प भी दिए गए कॉन्ग्रेस, भाजपा, नोटा और अन्य पार्टियों में।

इस ‘मध्यावधि चुनाव’ का नतीजा वही निकला जो कोई भी इंसान बिना देखे, सड़क पर रोक कर भी आप पूछिए तो बता देगा। इस सर्वे में भाजपा 82% वोट लेकर विजयी रही, और कॉन्ग्रेस महज़ 12% मत ही जुटा पाई। झुठलाने को इसे भी “IT सेल वालों ने रेड मार दी” कहकर झुठलाने की भरसक कोशिश की गई, ठीक उसी तरह जैसे कॉन्ग्रेस दीवार पर लिखी लोकसभा नतीजों की इबारत को आखिरी समय तक EVM पर सवाल उठाकर झुठलाने की कोशिश करती रही। जैसे राहुल गाँधी के खुद ही नतीजों की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफ़ा देने (जो उनके राजनीतिक करियर के चुनिंदा अनुकरणीय लमहों में से है) के बाद भी कॉन्ग्रेसी आज तक राहुल गाँधी के अलावा हर किसी को हार के ज़िम्मेदार ठहरा कर सच्चाई झुठलाते ही रहे हैं।

विकल्पहीन एंटी-इंकम्बेंसी पंचतंत्र वाले अंडकोष जैसी है

पंचतंत्र में एक कहानी है, जिसमें सियार दंपत्ति सांड के अंडकोषों को पक कर बस गिरने ही जा रहे माँस-पिण्ड समझकर अपनी बनी-बनाई शिकार को छोड़ कर सांड के पीछे भटकने लगते हैं। वे सांड का न जाने कब तक पीछा यही सोच कर करते रहते हैं कि अंडकोष अब गिरे-तब गिरे। अंत में हार कर जब वे वापस लौटते हैं तो पता चलता है कि नदी किनारे की उनकी शिकार की जगह पर किसी और शिकारी ने कब्ज़ा कर लिया है। कॉन्ग्रेस पार्टी वही सियार दंपत्ति है।

कॉन्ग्रेस के पूरे लोकसभा चुनाव अभियान में साफ दिखा कि वह अपना कोई वैकल्पिक, सकारात्मक नीतिगत विकल्प (‘न्याय’ जैसी वाहियात योजनाओं के अलावा) लाने की बजाय केवल “कुछ-न-कुछ प्रतिशत जनता तो मोदी से इतनी नाराज़ होगी ही कि हमें वोट दे बैठे” के भरोसे थी। इसीलिए उसकी 52 सीटें भी बहुत लोगों को बहुत ज़्यादा ही लगीं। इस पोल से साफ़ पता चल रहा है कि यही उम्मीद अभी भी जारी है- कब मोदी कोई बड़ी गलती करे, और कब हमें बैठे-ठाले उससे नाराज़ लोगों के वोट मिलें!

विकल्पहीन एंटी-इंकम्बेंसी कितनी खोखली होती है, भाजपा यह जानती है। इसकी भुक्तभोगी रह चुकी है। 2008 के 26/11 हमलों के कुछ ही समय बाद हुए चुनावों में वह इसी तरह हारी थी- लालकृष्ण आडवाणी ने अपना चुनाव अभियान बिना किसी रीति-नीति के केवल 26/11 के वक्त की गई मनमोहन सरकार की चूकों के लिए जनता की नाराज़गी के भरोसे ही टिका रखा था, इसलिए वह भी झटका खाए, और पार्टी भी। लेकिन हैरानी की बात है कि 2009 में दुश्मन की हार की कीमत पर मिला यह सबक न कॉन्ग्रेस को 2019 चुनावों के पहले समझ में आया था, न ही लग रहा है कि अभी भी समझ में आया है।

मंदिर का प्रसाद चाहिए तो AADHAAR कार्ड दिखाओ, MP के मंदसौर में जिला कलेक्टर का फरमान

मध्य प्रदेश के मंदसौर स्थित चर्चित पशुपतिनाथ मंदिर में भंडारे के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने ऐसा स्थानीय लोगों को भंडारे से दूर रखने के लिए किया है। इस तरह भंडारे के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करने वाला यह देश का पहला मंदिर बन गया है।

दरअसल, मंदिर की प्रबंध समिति ने कलेक्टर मनोज पुष्प के आदेश पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 1 अगस्त 2019 से नियमित भंडारे की व्यवस्था की थी। जानकारी के मुताबिक, 1500 साल पुरानी अष्टमुखी प्रतिमा के दर्शन के लिए सामान्य दिनों में रोजाना देशभर से औसतन 300 से 500 लोग पहुँचते हैं और पूरे सावन महीने में 1 लाख से अधिक श्रद्धालु यहाँ आते हैं। इन श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर भंडारे की व्यवस्था की गई थी, लेकिन बाहर से आए श्रद्धालुओं को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा था।

मंदिर समिति के प्रबंधक राहुल रुनवाल का कहना है कि भंडारे में 300 लोगों के लिए बना भोजन रोज डेढ़ घंटे में ही खत्म होने लगा। जब मंदिर समिति ने पड़ताल की तो पता चला कि आसपास के स्थानीय लोग ही भोजन चट कर जाते हैं। कुछ लोगों ने तो अपने घरों में खाना ही बनाना बंद कर दिया है। इसके बाद मंदसौर के जिलाधिकारी मनोज पुष्प के आदेश पर भंडारा (प्रसाद) का आनंद लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया।

यह व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर में भोजन करने वाले लोगों की संख्या आधी रह गई है। कलेक्टर मनोज पुष्प ने बताया कि फ्री भोजन व्यवस्था बाहरी श्रद्धालुओं के लिए है। इसका लाभ स्थानीय लोग लेने लगे थे। इससे व्यवस्था बिगड़ रही थी। उन्होंने बताया कि अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं है तो वो अपने साथी का आधार कार्ड भी दिखा सकता है। साथ ही जिलाधिकारी का कहना है कि आस-पास के लोग मंदिर के भंडारा का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन उनकी वजह से मंदिर में भीड़ हो जाती है और दूर से आए श्रद्धालु इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसलिए आधार कार्ड का प्रवाधान लाया गया है। 

हालाँकि, मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग के प्रवक्ता ने मंदिर में भंडारे का लाभ उठाने के लिए किसी भी तरह के कार्ड की अनिवार्यता या आवश्यकता को नकार दिया है। उन्होंने बताया कि बाहर से आने वाले तीर्थयात्री और श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन कराने की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए भोजन का प्रबंध किया जाता है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं को सुबह 11 बजे से 2 बजे के बीच और शाम को 6 बजे से 9 बजे तक भोजन कराया जाता है।   

मदरसे में चल रहा था 15 अगस्त का प्रोग्राम, कपड़े बदलते लड़कियों को CCTV में देख रहा था टीचर सुलेमान

मदरसों के अंदर बड़े पैमाने पर बाल शोषण के कई मामले सामने आए हैं। ऐसी ही एक शर्मसार कर देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की है। यहाँ मदरसे के एक शिक्षक ने छात्राओं को कपड़े बदलते हुए देखने के लिए मदरसे में लगे CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया।

ख़बर के अनुसार, बरवन छतर दास गाँव के मुस्तफा दारुल उलूम मदरसा में हुए इस घृर्णित कृत्य की रिपोर्ट हाटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत की गई है। दरअसल, मदरसे में बीते 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मदरसे में पढ़ने वाली छात्राओं ने इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सुरजीत सिंह, पवन सिंह, सुबोध गौड़, किशन सिंह आदि द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक़, सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राएँ मदरसे के जिस कमरे में कपड़े बदल रही थीं, उस कमरे का सीसीटीवी कैमरा अध्यापक सुलेमान अंसारी ने चालू कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, सुलेमान अंसारी काफ़ी देर तक कैमरा चालू करके छात्राओं को कपड़े बदलते देखता रहा। उसकी इस हरक़त पर जब एक बच्चे की नज़र पड़ी तो उसने इसकी सूचना छात्राओं को दे दी। इसके वाद वो सभी छात्राएँ सुलेमान अंसारी के पास पहुँची और विरोध जताया। इस पर अंसारी ने उन्हें डराया-धमकाया कि अगर उन्होंने इस बात पर विरोध प्रकट किया तो वो मदरसे से उनका नाम काट देगा और उन्हें मदरसे से बाहर निकाल देगा।

इस बात की ख़बर जब छात्राओं के परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने सुलेमान अंसारी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया और उन्होंने उससे अपने किए की माफ़ी माँगने को कहा। बजाए अपनी ग़लती मानने के सुलेमान अंसारी झगड़े पर उतारू हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने सुलेमान अंसारी और मदरसे के प्रबंधन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-354 ग के तहत मुक़दमा दर्ज किया है।

‘2 सितंबर तक CBI की गिरफ्त में ही रहने दो’ – क्यों पलटे चिदंबरम, तिहाड़ जेल का क्या है इसमें कनेक्शन?

कुछ दिन पहले तक सीबीआई की पकड़ से बचने के लिए तरह-तरह की युक्तियाँ जुगाड़ने वाले पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक आप्रत्याशित आवेदन के जरिए 2 सितंबर तक खुद सीबीआई की गिरफ्त में रहने की इच्छा जताई है।

जानकारी के अनुसार आज शुक्रवार (30 अगस्त) को उनकी सीबीआई रिमांड में रहने की 8 दिन की अवधि खत्म हो गई है। जिसके बाद उनकी पेशी निचली अदालत में होनी है। कहा जा रहा है कि उन्हें पेशी के बाद सीबीआई रिमांड पर न भेजकर सीधे तिहाड़ में डाला जाएगा, जिससे बचने के लिए वह उपाय खोज रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चिदंबरम का कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट सीबीआई रिमांड पर भेजने के आदेश के खिलाफ उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती तब तक वह सीबीआई कस्टडी में ही रहना चाहते हैं। हालाँकि, उनकी इस बात पर सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें कहा है कि वह अपनी बात को निचली अदालत में रखें। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सॉलिसिटर तुषार मेहता ने उनके इन ऑफर का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने पूछा है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्यों दखल दे? ये तो स्पेशल कोर्ट को तय करना चाहिए कि किसे कब तक हिरासत में रखना है और कब न्यायिक हिरासत में भेजना है।

गौरतलब है कि सोमवार को यानी 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में पी चिदंबरम को सीबीआई रिमांड में भेजने के लिए निचली अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ डाली गई याचिका पर सुनवाई होनी है। जिसका पी चिदंबरम और उनके वकील इंतजार करने को कह रहे हैं। लेकिन आज सीबीआई रिमांड के लिए माँग बढ़ाने की बात करने वाले चिदंबरम और उनके वकील कपिल सिब्बल की ये माँग इसलिए सवालिए घेरे में है क्योंकि अभी कुछ दिन पहले सिब्बल कोर्ट में इस बात पर बिफर गए थे कि सीबीआई चिदंबरम की 5 दिन की कस्टडी क्यों बढ़वा रही है। उन्होंने इस दौरान कहा था कि उनके मुवक्किल को हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं हैं क्योंकि उनसे बार-बार एक ही सवाल पूछे जा रहे हैं। और ऐसा सिर्फ उन्हें नीचा दिखाने के लिए किया जा रहा है।

‘मुझे PCC चीफ बनाओ वरना मेरे पास और भी विकल्प हैं’ – सिंधिया का अल्टीमेटम, मुश्किल में कॉन्ग्रेस

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के सामने एक नई समस्या आ गई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी हाईकमान को उन्हें मध्य प्रदेश इकाई का प्रमुख बनाने का अल्टीमेटम दे डाला है। उन्होंने अपने इस अल्टिमेटम में कॉन्ग्रेस को चेताया है कि अगर उनके इस अल्टीमेटम को जल्द से जल्द अमल में न लाया गया तो वो अन्य विकल्प के बारे में सोचेंगे। यहाँ अन्य विकल्प का मतलब पार्टी बदलने से है। सिंधिया के इस अल्टीमेटम से राजनीतिक गलियारे में अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वो बीजेपी के साथ लगातार सम्पर्क में हैं।

पिछले साल, मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीत के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ राज्य इकाई प्रमुख का पद छोड़ देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सीएम और प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी (PCC) प्रमुख – दोनों पदों पर क़ब्ज़ा जमाए रखा। इस संदर्भ में बातचीत के बावजूद, श्री सिंधिया को उप मुख्यमंत्री नामित नहीं किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में, श्री सिंधिया गुना के अपने परिवार के गढ़ से हार गए थे। इतने के बाद भी सिंधिया को लगता है कि पार्टी की ओर से उन्हें कुछ प्राप्त होना चाहिए। हाल ही में, पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया। लेकिन, सिंधिया की नज़र मध्य प्रदेश के पीसीसी प्रमुख के पद पर टिकी रहीं। पिछले हफ्ते, राज्य की एक मंत्री, सुश्री इमरती देवी ने सिंधिया का समर्थन करते हुए कहा था कि श्री सिंधिया को राज्य इकाई प्रमुख नियुक्त किया जाना चाहिए।

बता दें कि मध्य प्रदेश में इस पद के दावेदार केवल सिंधिया ही नहीं हैं बल्कि कॉन्ग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह भी इस कतार में खड़े हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह उनका समर्थन कर रहे हैं। इन सबके मद्देनज़र राज्य इकाई में संभावित बदलाव को लेकर जल्द ही कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ की बैठक होने की उम्मीद है।

सिख लड़की ने मर्जी से क़बूला इस्लाम और किया निकाह या… 2:17 मिनट का वीडियो देख खुद फैसला कीजिए

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और निक़ाह की ख़बरों के बाद अब एक सिख लड़की को जबरन इस्लाम क़बूल करवाने का मामला सामने आया है। पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की बेटी पिछले तीन दिनों से लापता थी। इसके बाद गुरुवार (29 अगस्त) को लड़की के धर्मांतरण और निक़ाह की बात सामने आई।

दरअसल, अगवा (लड़की के परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार) की गई सिख लड़की के निक़ाह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो साफ़तौर पर डरी-सहमी दिख रही है। वो इसलिए क्योंकि अपनी शादी के अवसर पर एक लड़की के चेहरे पर जो ख़ुशी का भाव होता है, वो उसके चेहरे से ग़ायब है। भले ही इस वीडियो में उसका चेहरा सामने है, लेकिन अल्फ़ाज़ उसके नहीं हैं। इस वीडियो में एक मौलवी उसे उसके इस्लामी नाम आइशा से बुलाता नज़र आ रहा है।

इस मामले पर शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में लड़की के मजबूर परिजन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मदद की गुहार लगाते दिख रहे हैं। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि मनमोहन सिंह नाम का एक शख़्स जो ख़ुद को लड़की का भाई बता रहा है, उसने कहा कि उसकी बहन को धमकी दी गई थी कि अगर उसने इस्लाम क़बूल नहीं किया तो उसके भाई और पिता को गोली मार दी जाएगी।

लड़की के भाई ने आगे कहा कि वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ़ (क़मर जावेद) बाजवा से गुजारिश करते हैं कि लड़की को वापस लाने में हमारी मदद करें। इस वीडियो को शेयर करते हुए सिरसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया है।

मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा शेयर किए एक अन्य वीडियो में लड़की के भाई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि रात के समय उनकी छोटी बहन को गुंडे घसीटकर ले गए, ज़बरदस्ती इस्लाम क़बूल करवाया। इस मामले को लेकर जब परिजन पुलिस स्टेशन गए तो वहाँ उनकी न तो किसी ने कोई बात ही सुनी और न ही किसी तरह की कोई मदद की। 

घर आने पर वही गुंडे वापस उनके घर आए और उन्हें डराया-धमकाया और उन्हें कोई कार्रवाई न करने के लिए कहा। ऐसा न करने पर सभी को इस्लाम क़बूल करवाने की धमकी दी गई। सुरेंद्र सिंह ने इमरान ख़ान और चीफ़ जस्टिस से इंसाफ़ की माँग की और कहा कि अगर उनकी छोटी बहन को सुरक्षित वापस नहीं लाया गया तो वो 31 अगस्त को गवर्नर हाउस के सामने पूरे परिवार के साथ आत्मदाह कर लेगा।