Home Blog Page 5543

10 साल पहले गोदान, कर्ज चुकाने के लिए 600 Km दूर बाढ़ पीड़ित गाँव को मंदिर ने लिया गोद

हिन्दू धर्म में मंदिर और समाज, दोनों एक-दूसरे के पूरक रहे हैं और एक-दूसरे के मददगार साबित होते रहे हैं। जब मंदिर पर विपत्ति आई तो लोगों ने एकजुट होकर उसकी रक्षा की। जब लोगों पर विपत्ति आई तो मंदिर और मठ आगे आए। यह कहानी है कर्नाटक के बेलगावी जिला स्थित सुदूरवर्ती गाँव शेगुनासी की, जहाँ इस वर्ष भयंकर बाढ़ आई। लेकिन, उनके लिए मदद सरकार से नहीं बल्कि ऐसी जगह से पहुँची कि 10 साल पुराना इतिहास फिर से जिन्दा हो गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, शेनुगासी से 600 किलोमीटर दूर कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले में बिक्कलहल्ली नामक गाँव स्थित है। दोनों गाँवों के बीच एक अनोखा सम्बन्ध देखने को मिला। इतनी ज्यादा दूरी होने के कारण दोनों गाँवों का सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश भी अलग है। शेगुनासी के पास स्थित मुगलखोड़ गाँव के एक किसान ने एक दशक पहले बिक्कलहल्ली के एक मंदिर को एक जोड़ी बछड़े दान में दिए थे। उन्होंने इसकी एवज में कोई रुपया-पैसा नहीं लिया था।

आज उसी दान की वजह से बिक्कलहल्ली के लोगों ने बाढ़ पीड़ित शेगुनासी गाँव की मदद करने का फ़ैसला लिया है। जिस मंदिर को उक्त किसान ने बैल दान की थी, उस मंदिर के फंड से शेगुनासी गाँव के 200 परिवारों की मदद की जा रही है। गाँव के लोगों ने पहले किसान वेंकटेश कलप्पानावर का नाम नहीं सुना था लेकिन अब उनके ही चर्चे हैं। दान के बाद से ही मंदिर की किस्मत पलट गई और लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आने लगे और आसपास के लोगों के जीवन में भी खुशहाली आई।

बिक्कलहल्ली की जनता ने इन सबका श्रेय कृषक वेंकटेश से दान में मिले बछड़ों को दिया। जिस मंदिर में मुश्किल से 100 श्रद्धालु आते थे, आज वहाँ पूर्णिमा और अमावस्या के मौके पर 3,000 से भी अधिक लोग दर्शन हेतु आते हैं। आज जब उत्तरी कर्नाटक बाढ़ से पीड़ित है, बिक्कलहल्ली के लोगों ने शेगुनासी और मुगलखोड़ के लोगों के पास पहुँच कर उनकी ज़रूरतों को समझा और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया।

योगमुनेश्वर मंदिर के प्रमुख मंजुनाथ एक सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि मुगलखोड़ में बाढ़ से उतनी क्षति नहीं हुई थी, इसीलिए बिक्कलहल्ली के लोगों ने शेगुनासी गाँव को गोद लेने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि कृषक वेंकटेश ने जब बैल दान किए, तब उनकी अर्थित स्थित अच्छी नहीं थी। बावजूद इसके उन्होंने रुपए लेने से इनकार कर दिया। मंदिर अपने फण्ड से तब तक शेगुनासी गाँव की मदद करेगा, जब तक चीजें सामान्य नहीं हो जाती।

वेंकटेश फिलहाल बंगलौर में एक कॉन्ट्रैक्ट मजदूर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने एक बार आए सूखे की वजह से खेती को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बछड़ों को दान किया था, तब वे मात्र 6 महीने के थे। बिक्कलहल्ली गाँव के लोगों ने उनका काफ़ी ख्याल रखा है।

17 साल में वकील बने जेठमलानी नहीं रहे, नानावती से लेकर अफजल गुरु तक रहे मुवक्किल

जाने-माने वकील राम जेठमलानी का रविवार को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। नई दिल्ली के अपने आवास पर सुबह पौने आठ बजे उन्होंने अंतिम सॉंस ली। उनकी तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं थी। 14 सितंबर को उनका 96वां जन्मदिन आने वाला था।

वे क्रिमिनल मामलों के देश के सबसे बेहतरीन वकील में शुमार थे। वे देश के कानून मंत्री भी रहे। अविभाजित भारत के पाकिस्तान स्थित शिकारपुर में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी के पिता और दादा भी वकील थे। लिहाजा वकालत के पेशे को लेकर आकर्षण बचपन से ही था। 17 साल की उम्र में उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की। उन दिनों प्रैक्टिस करने की न्यूनतम उम्र 21 साल थी। लेकिन, जेठमलानी की प्रतिभा को देख इस उम्र सीमा में छूट दी गई।

उन्होंने सात दशक तक वकालत की और साल 2017 में इससे संन्यास ले लिया था। एक वकील होने के नाते जेठमलानी ने देश के कई बहुचर्चित केस भी लड़े हैं। इनमें कई काफी विवादित भी रहे। 1959 में नानावती के पक्ष में अदालत में दलीलें पेश कर वे वकालत की दुनिया के सितारे बने। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्यारों के पक्ष में मद्रास हाई कोर्ट में 2011 में केस लड़ा। स्टॉक मार्केट घोटाला केस में उन्होंने हर्षद मेहता और केतन पारेख का केस भी लड़ा। उनका सबसे विवादित केस अफजल गुरु की फाँसी का बचाव करना था। बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड में उन्होंने मनु शर्मा का केस भी लड़ा था। राम जेठमलानी ने चारा घोटाला मामले में आरोपित लालू प्रसाद यादव के साथ ही आसाराम, जयललिता और जगन रेड्डी की भी पैरवी की थी।

इसके अलावा, दाऊद इब्राहिम ने भी मुंबई बम ब्लास्ट के बाद मदद के लिए राम जेठमलानी के पास फोन किया था। जेठमलानी ने 2015 में कहा था कि दाऊद को भारत लाया जा सकता था, लेकिन महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम शरद पवार की वजह से ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा था कि उनकी बात दाऊद से हुई है। दाऊद ने उन्हें बताया था कि उसने बम ब्लास्ट नहीं कराया है और वो भारत आने के लिए भी तैयार है, बशर्ते उसके साथ सही सलूक किया जाए।


प्रणय रॉय बोले- वैज्ञानिक पर चिल्लाने वाले पल्लव ने इसरो के लिए बहुत किया है, लोगों ने कहा- रॉकेट को रस्सी से खींचा करते थे

एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय ने इसरो वैज्ञानिक पर चिल्लाने वाले पत्रकार पल्लव बागला का बचाव किया है। बता दें कि चंद्रयान-2 के लैंडर से कनेक्शन टूटने के बाद इसरो वैज्ञानिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। इसी दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने वैज्ञानिक के साथ अभद्रता करते हुए ज़ोर से चिल्ला कर सवाल पूछा। पल्लव बागला ने अजीब लहजे में पूछा कि इसरो प्रमुख के. सिवन प्रेस को सम्बोधित करने क्यों नहीं आए? पल्लव का कहना था कि ऐसे मौक़ों पर इसरो प्रमुख ही मीडिया से बात करने आते हैं।

कई मामलों में सेबी और इनकम टैक्स की रडार पर चढ़े प्रणय रॉय ने पल्लव बागला का बचाव करते हुए लिखा कि पल्लव से ग़लती हुई है, बहुत बड़ी गलती हुई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि पल्लव ने एनडीटीवी से भी माफ़ी माँग ली है। इसके बाद प्रणय रॉय ने जो लिखा, वह कॉन्ग्रेस की नेहरू विरासत को चुनौती देता है। जैसा कि विदित है, भारत की हर सफलता के पीछे कॉन्ग्रेस नेहरू का हाथ निकाल ले आती है।

ठीक इसी तरह, एनडीटीवी के मालिक ने अपने पत्रकार का बचाव करते हुए लिखा कि पल्लव ने इसरो के लिए काफ़ी कुछ किया है, उन्होंने भारत में विज्ञान के लिए काफ़ी कुछ किया है। प्रणय रॉय के अनुसार, इसरो वैज्ञानिक पर अभद्रतापूर्वक चिल्लाने वाले पल्लव ने अपने सभी आलोचकों से ज्यादा इसरो और विज्ञान के लिए कार्य किया है।

एक ट्विटर यूजर ने प्रणय रॉय से सहमति जताते हुए लिखा कि हाँ, पल्लव ने इसरो वालों से भी ज्यादा रॉकेट लॉन्च लिए हैं लेकिन दीवाली पर। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि पल्लव अब कभी ऐसा कमेंट नहीं करेंगे। भले मामला विक्रम की चाँद पर लैडिंग का हो या फिर प्रणय रॉय की जेल में लैंडिंग का।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि एनडीटीवी के पत्रकार पल्लव बागला नेहरू के ज़माने से ही मोटर में डीजल भरते थे और बैलगाड़ी चलाते थे। लोगों ने तो यहाँ तक लिखा कि वे बाहुबली की तरह रॉकेट को रस्सी से भी खींचा करते थे।

प्रणय रॉय के अलावा एनडीटीवी की निधि राजदान ने भी पल्लव बागला का समर्थन किया। एनडीटीवी की एग्जीक्यूटिव एडिटर ने लिखा कि ‘हत्यारी भीड़’ के साथ मिल कर पल्लव बागला को हटाए जाने की माँग करना अनुचित है। ऐसा उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि बागला का व्यवहार पागलपन भरा है। सिंघवी ने इसरो वैज्ञानिक की तारीफ की, जिन्होंने मुस्कुराते हुए पल्लव के दुर्व्यवहार को झेला।

इसरो से बोला नासा: चंद्रयान-2 की यात्रा हमारे लिए प्रेरणा, मिलकर सौरमंडल की सैर करेंगे

चंद्रयान—2 भले चॉंद पर लैंड करने में कामयाब नहीं हुआ हो। लेकिन, इसरो के इस मिशन को दुनिया भर से सराहना मिल रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस सफर को अपने लिए प्रेरणा बताते हुए भविष्य में सौर मंडल पर मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।

अमेरिका में दक्षिण और मध्य एशिया की कार्यवाहक सहायक सचिव एलिस जी वेल्स ने इसरो को चंद्रयान-2 के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत का इस तरह का मिशन एक बड़ा कदम है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत अपनी अंतरिक्ष आकांक्षाओं को अवश्य पूरा करेगा।

यूएस ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स के पेज पर पोस्ट किए गए ट्वीट में वेल्स ने कहा, “हम चंद्रयान-2 के इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए बधाई देते हैं। यह मिशन भारत को बहुत आगे तक ले जाएगा और यह वैज्ञानिक आँकड़ों को जुटाने का प्रयास आगे भी जारी रखेगा। हमें उम्मीद है कि भारत अंतरिक्ष आकांक्षाओं को जरूर हासिल करेगा।”

वहीं, नासा ने ट्वीट कर कहा, “अंतरिक्ष में शोध करना मुश्किल काम है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इसरो के चंद्रयान-2 मिशन को उतारने के प्रयास की सराहना करते हैं। आपने अपनी यात्रा से हमें प्रेरित किया है और भविष्य में हम सौर मंडल पर मिलकर काम करेंगे ।”

गौरतलब है कि, भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। 

इसरो प्रमुख के. सिवन ने एक साक्षात्कार में बताया कि ऑर्बिटर का तय जीवनकाल महज़ एक साल का है, लेकिन उसमें काफी अतिरिक्त ईंधन मौजूद है। इसके चलते ऑर्बिटर लगभग 7-7.5 साल तक चन्द्रमा की परिक्रमा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विक्रम लैंडर से फ़िलहाल सम्पर्क टूटा हुआ है। फिर भी उम्मीदें कायम हैं। अगले 14 दिनों में सम्पर्क फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जाएँगे।

प्यार, धोखा और लालच: कृष्णा का हत्यारा निकला ज्योति का तीसरा आशिक मुख़्तार, शर्ट के 4 बटन ने सुलझाई गुत्थी

एक हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी और राज़ खुला भी तो शर्ट के बटन से। मामला मुंबई से सटे नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन का है। पुलिस को एक व्यक्ति की लाश मिली। उसकी पहचान के लिए पुलिस ने उसकी शर्ट का इस्तेमाल किया, जिस पर टेलर का पता लिखा हुआ था। पुलिस जब दुकान पर पहुँची, तब टेलर ने शर्ट देखते ही बता दिया कि उक्त व्यक्ति का नाम कृष्णा है। हालाँकि, वह पूरा नाम नहीं बता पाया लेकिन उसे इतना पता था कि कृष्णा किसी मुस्लिम के होटल में काम करता है।

शर्ट देख टेलर कृष्णा की पहचान इसलिए कर पाया क्योंकि वह कॉलर के नीचे के 3-4 बटन हमेशा अलग रंग के लगाता था। जब पुलिस हत्या के तह तक पहुँची तो उसे प्यार, धोखा और लालच से भरी एक कहानी मिली। इस दौरान पुलिस को ज्योति नामक युवती का पता चला, जो उत्तर प्रदेश के महराजगंज के किसी पुलिस वाली की बहन है। उसका किसी लड़के के साथ अफेयर था। दोनों भाग कर लखनऊ आए लेकिन उस लड़के को लगा कि ज्योति का भाई उसे छोड़ेगा नहीं।

ज्योति का बॉयफ्रेंड डर के मारे लखनऊ से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद फूट-फूट कर रो रही ज्योति को कृष्णा साहनी का साथ मिला। ज्योति को कृष्णा से भी प्यार हो गया। दोनों आकर मुंबई रहने लगे। एक दिन अचानक से कृष्णा को पता चला कि ज्योति के ऊपर यूपी में 30,000 रुपए का इनाम रखा गया है। उसके मन में लालच घर कर गया और उसने यूपी पुलिस को फोन कर ज्योति का पता बता दिया। उसने पुलिस को कहा कि वो रुपए लेकर आए और ज्योति को ले जाए। नशे की हालत में उसने ये बात ज्योति को भी बताई।

ज्योति अपने साथ हुए धोखे के कारण गुस्से से लाल हो गई। इसके बाद कृष्णा को भी अपनी ग़लती का एहसास हुआ और वह ज्योति को लेकर किसी दूसरे एरिया में शिफ्ट हो गया ताकि पुलिस उन्हें न ढूँढ पाए। वो लोग जहाँ शिफ्ट हुए, वहीं नए किरदार की एंट्री हुई। उसका नाम था मुख़्तार, जो वहाँ आता-जाता रहता था। कृष्णा के धोखे को ज्योति भूली नहीं थी। उसे अब मुख़्तार से प्यार हो गया। जब कृष्णा किसी काम से पुणे गया तो मुख़्तार की सलाह पर ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई।

कृष्णा जब लौटा तो उसने ज्योति को न पाकर आश्चर्य हुआ। जब उसे पता चला कि ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई है तो उसने बिल्डिंग के लोगों से ज्योति का नया पता लिया। कृष्णा सीधा ज्योति के घर जा धमका और उससे सेक्स की डिमांड की। शराब के नशे में उसने ज्योति के साथ गाली-गलौज भी किया। वह नशे में वहीं पर सो गया। तब ज्योति ने मुख़्तार को कॉल किया। मुख़्तार ने वहाँ पहुँच कर सीधे सोते हुए कृष्णा के चेहरे पर हथौड़े से तगड़ा वार किया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

इसके बाद मुख़्तार ने सारे सबूत मिटाए और नायलॉन के एक बैग में लाश को पैक कर दिया। लाश को उसने ज्योति और अपने एक दोस्त सूरज के साथ मिल कर नाले में फेंक दिया। पुलिस को ज्योति के बारे में उसी होटल से पता चला था, जहाँ कृष्णा काम करता था। ज्योति के घर में नया-नया पेंट किया हुआ दीवाल देख कर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खँगाली और फिर हत्या का पर्दाफाश हुआ।

पूजा-पाठ और नारियल फोड़ने की वजह से मिली असफलता: चन्द्रयान-2 पर ‘सबसे बड़े दलित नेता’

अपने आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ बताने वाले उदित राज ने चंद्रयान-2 को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे ट्विटर पर उन्हें लोगों ने न सिर्फ़ लताड़ा बल्कि उनकी योग्यता पर भी सवालिया निशान लगाया। चंद्रयान-2 के लैंडर का इसरो से कनेक्शन टूटने के बाद जहाँ भारतीयों ने इसरो के वैज्ञानिकों का ढाँढस बँधाया, उदित राज इसमें भी धर्म घुसा कर राजनीति करने से बाज नहीं आए। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के पूर्व सांसद ने अपनी ट्वीट में लिखा:

“हमारे इसरो के वैज्ञानिकों ने अगर नारियल फोड़ने और पूजा पाठ पर विश्वास जताने की बजाय अगर वैज्ञानिक शक्ति और आधार पर विश्वास किया होता तो अब तक मिली आंशिक असफलता का मुँह ना देखना पड़ता।”

बता दें कि जुलाई में इसरो अध्यक्ष के. सिवन और उपाध्यक्ष उमा महेश्वरन ने नेल्लोर स्थित चेंगलम्मा माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर चंद्रयान-2 की सफलता के लिए आशीर्वाद माँगा था। इसके बाद उन्होंने चित्तूर स्थित तिरुमला मंदिर में पूजा की थी। इस दौरान के सिवन सहित इसरो के अन्य वैज्ञानिकों ने भगवान तिरुपति के सामने चंद्रयान-2 प्रतिकृति भेंट की थी।

बता दें कि उदित राज अपनेआप को सबसे बड़ा दलित नेता बताते रहे हैं। भाजपा में टिकट नहीं मिलने पर आम चुनावों से पहले वे कॉन्ग्रेस में चले गए थे। कई लोगों ने पूर्व सांसद से उनकी शैक्षिक योग्यता जाननी चाही। लोगों ने ट्विटर पर उदित राज से पूछा कि उन्होंने किस विषय से स्नातक किया था कि उनका बेसिक ज्ञान भी इतना कमजोर है? कुछ लोगों ने कहा कि देश में उदित राज जैसे नेताओं के रहते पाकिस्तान की क्या ज़रूरत है?

इससे पहले ईवीएम को लेकर उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट पर ही धाँधली का आरोप लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग बिक चुका है। सुप्रीम कोर्ट के अलावा वह राष्ट्रपति पद पर भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा हमेशा गूँगे-बहरों को ही राष्ट्रपति बनाती है।

अंग्रेजों की देन है अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक: केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान

केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक को अंग्रेजों की देन बताया है। राज्यपाल नियुक्त होने के बाद एशियानेट न्यूज़ को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक एक लोकतान्त्रिक देश और गणतांत्रिक समाज में केवल एक तरह के “अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक” हैं- जो क़ानून को माने, वह बहुसंख्यक है और जो कानून के खिलाफ है, वह अल्पसंख्यक है। इस इंटरव्यू की यह क्लिप सोशल मीडिया के कई हलकों में चर्चित हो रही है।

आरिफ़ मोहम्मद खान ने कहा कि जब तक अंग्रेज़ों की दी हुई महज़बी अल्पसंख्यक-मज़हबी बहुसंख्यक की शब्दावली जीवित रखेंगे, तब तक “मुस्लमानों में मोदी का डर” जैसी भ्रांतियाँ बनी रहेंगी। उन्होंने उपनिषदों को उद्धृत करते हुए कहा कि उपनिषदों में बताया गया है कि “द्वय”, पराएपन की भावना डर पैदा करती है। साथ ही कुरान में से मौलाना अली की एक आयत के ज़रिए बताया कि जिससे इंसान अनभिज्ञ होता है, उससे डर पैदा होता है। अपने राज्यपाल के कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा कि वे लोगों के साथ अपना विश्वास, कि अपने अंदर victimhood की प्रवृत्ति पैदा करना पाप है, गुनाह है, केरल के लोगों के साथ बाँटेंगे।

उच्चायुक्त के साथ मिल भारतीयों ने लंदन से पाकिस्तानी गंदगी की साफ़

ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रूचि घनश्याम के नेतृत्व में शनिवार (सितंबर 06, 2019) को भारतीय लोगों ने हाई कमिशन और उसके आसपास की सफाई की। यह गंदगी 3 सितंबर को पाकिस्तानियों ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगाई थी।

भारतीय लोगों ने पाकिस्तानियों द्वारा इसी तरह का प्रदर्शन और गंदगी 14 सितंबर को करने की आशंका भी जताई है।

इस विरोध-प्रदर्शन में अण्डे और टमाटर का इस्तेमाल करने वाले दो पाकिस्तानियों को CCTV कैमरा में पहचान कर नगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पाकिस्तान के नागरिक और सरकार लगातार कश्मीर मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने के लिए बयानबाजी और नाटक कर रहे हैं।

एक ओर जहाँ पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह विश्व के अन्य बड़े नेता और संगठनों के पास जाकर भारत के इस कदम की शिकायत करेगा, वहीं तमाम बड़े नेता, संगठन और देश यह बात कह चुके हैं कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है और उसमें अन्य किसी के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

प्रधानमंत्री प्रेरणा के स्रोत, चंद्रयान-2 पर उम्मीदें अभी कायम: इसरो प्रमुख सिवन

चंद्रयान-2 मिशन को 3,84,000 किलोमीटर की यात्रा में चाँद की सतह से महज़ दो किलोमीटर पहले तक ले जाने वाले इसरो प्रमुख के. सिवन ने दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कहा है कि वे प्रधानमंत्री मोदी को उनकी संस्था के लिए प्रेरणा और समर्थन का स्रोत मानते हैं। उन्होंने मिशन के आखिरी कदम पर गड़बड़ा जाने पर प्रधानमंत्री मोदी की हौसलाअफ़ज़ाई को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण ने उन्हें उत्साह दिया। उन्होंने मोदी के “विज्ञान में नतीजे नहीं प्रयोग देखते हैं” की विशेष तारीफ की।

सात साल तक चल सकता है ऑर्बिटर

सिवन ने बताया कि हालाँकि ऑर्बिटर का तय जीवनकाल महज़ एक साल का है, लेकिन उसमें काफी अतिरिक्त ईंधन मौजूद है। इसके चलते ऑर्बिटर लगभग 7-7.5 साल तक चन्द्रमा की परिक्रमा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विक्रम लैंडर से फ़िलहाल सम्पर्क टूटा हुआ है। फिर भी उम्मीदें कायम हैं। अगले 14 दिनों में सम्पर्क फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जाएँगे।

दोपहर में भी किया था ट्वीट

इसरो प्रमुख ने इसके पहले उन्हें गले लगाने वाले मोदी के वीडियो को दोपहर में भी ट्वीट किया था। उस समय उन्होंने लिखा था कि वे यह पल कभी नहीं भूलेंगे। दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा कि मोदी के भाषण के अंश “विज्ञान में नतीजे नहीं देखने चाहिए, बल्कि प्रयोग देखने चाहिए और प्रयोग से नतीजे निकलते हैं” को उन्होंने विशेष तौर पर नोट किया था।

जाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में डाल दो

भीमा कोरेगॉंव हिंसा मामले की जॉंच के लिए गठित आयोग के सामने कुछ अर्बन नक्सलियों ने बयान देने से इनकार कर दिया। इससे पहले इन्होंने आयोग के सामने पेश होकर बयान देने की इच्छा जताई थी। लेकिन, पेशी के दौरान बयान देने की बात से पलट गए। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस जय नारायण पटेल ने उन्हें दोबारा जेल भेज देने के निर्देश दिए।

आयोग के सामने अर्बन नक्सल सुरेंद्र गाडलिंग ने यह कहते हुए बयान देने से इनकार कर दिया कि इससे ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई पर असर पड़ेगा। गाडलिंग ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में उसकी दलीलों पर कोई असर न पड़े, इसीलिए वह जाँच आयोग को बयान नहीं देगा। हालाँकि, इससे पहले वकील सुरेंद्र गाडलिंग बयान देने को राजी था।

गाडलिंग को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए 6 सितम्बर की तारीख दी गई थी। उसके अलावा एक अन्य अर्बन नक्सल सुधीर धावले को भी 7 सितम्बर को पेश होने को कहा गया था। न सिर्फ़ गाडलिंग बल्कि धावले ने भी बयान दर्ज कराने से मना कर दिया है। दोनों फिलहाल पुणे स्थित यरवदा जेल में बंद हैं। इन्हें पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

पुणे पुलिस ने गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत गाडलिंग व धवले सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। इससे पहले गाडलिंग ने कहा था कि वह कुछ तथ्यों को सामने लाने के लिए बयान देना चाहता है। गाडलिंग द्वारा बयान देने से मना करने पर उसे वापस यरवदा जेल में भेज दिया गया है। आश्चर्य की बात यह भी है कि एल्गार परिषद मामले में एक अन्य आरोपी सुधीर धावले ने भी एक आवेदन दाखिल किया था और आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था, लेकिन अब उसने भी मना कर दिया है।

धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी। आरोप है कि इन अर्बन नक्सलियों ने हिंसा भड़काने के लिए एक कार्यक्रम का सहारा लिया था।