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श्रीनगर सचिवालय से हटा राज्य का झंडा, पहली बार लहराया सिर्फ़ तिरंगा

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 का पावर खत्म किए जाने के बाद श्रीनगर सचिवालय से राज्य का झंडा हटा दिया गया है। अब वहाँ सिर्फ़ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहरा रहा है। मीडिया खबरों की मानें तो पिछले हफ्ते तक दोनों झंडे एक साथ लगे हुए थे, लेकिन अब वहाँ सिर्फ़ तिरंगा अकेले अपनी शोभा बढ़ा रहा है।

इंडिया टुडे के मुताबिक उनसे खास बातचीत में वहाँ के अधिकारियों ने बताया है कि अब सभी सरकारी दफ्तरों पर तिरंगा ही लगाया जाएगा। क्योंकि जम्मू-कश्मीर से संसद ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया है, इसलिए राज्य को जो विशेषाधिकार मिलते थे, वह खत्म हो चुके हैं।

अब ‘एक प्रधान, एक विधान, एक निशान’ की नीति के तहत वहाँ भारतीय संविधान लागू होगा। सरकारी इमारतों पर तिरंगा लहराएगा और आईपीसी का पालन होगा। अभी तक जहाँ राज्य से बाहरी व्यक्ति के लिए वहाँ जमीन खरीदने की मनाही थी, वहीं अब वहाँ ऐसा नहीं होगा। अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद लोग वहाँ जमीन भी खरीद पाएँगे और अपने कारोबार का विस्तार भी कर पाएँगे।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त को लिए गए फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को 2 अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया है। जिससे जम्मू-कश्मीर का चेहरा पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल अब केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे। इसके अलावा वहाँ विधानसभा का कार्यकाल भी 6 नहीं 5 साल का होगा।

पेशी के बाद हिरासत में भेजे गए अनंत सिंह, पटना का बेऊर जेल नया ठिकाना, खाना खाने से किया मना

बिहार में पटना ज़िले के मोकामा से बाहुबली निर्दलीय विधायक अनंत कुमार सिंह को रविवार (अगस्त 25, 2019) को बाढ़ अनुमंडल अदालत में पेश किया गया। रविवार को अवकाश होने के बावजूद अनंत सिंह की कोर्ट में पेशी हुई। जिसके बाद कोर्ट ने उनको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही अनंत सिंह को बेउर जेल भेज दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बता दें कि, अनंत सिंह को उनके घर से 16 अगस्त को 1 एके-47 राइफल, एक मैग्जीन और दो ग्रेनेड बरामद होने संबंधित मामले में आज कोर्ट में पेश किया गया था।

बाढ़ कोर्ट में अनंत सिंह को प्रभारी एसीजेएम पंकज तिवारी की अदालत में पेश किया गया। अदालत से बेउर जेल ले जाने के क्रम में अनंत सिंह ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कांतेश कुमार मिश्र ने बताया कि नियमित अदालत नहीं होने के कारण पूछताछ के लिए विधायक का रिमांड माँगने के लिए आज (अगस्त 25, 2019) आवेदन नहीं किया जा सका। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सोमवार (अगस्त 26, 2019) को पुलिस इसके लिए प्रयास करेगी।

वहीं, अनंत सिंह ने प्रशासन की तरफ से दिए गए खाने को खाने से मना कर दिया है। अनंत सिंह को खाने में 300 ग्राम आटा से बनी 4 रोटियाँ, 300 ग्राम चावल, 150 ग्राम दाल और हरी सब्जी दिया गया, लेकिन उन्होंने जेल का खाना खाने से इनकार कर दिया। विधायक होने के नाते वो जेल प्रशासन से विशेष सुविधा की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, अनंत कुमार सिंह ने शुक्रवार (23 अगस्त) को दिल्ली की साकेत कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। कुछ दिनों पहले विधायक अनंत सिंह ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि वो पुलिस के समक्ष नहीं बल्कि कोर्ट में सरेंडर करेंगे, क्योंकि उन्हें न्यायालय पर भरोसा है। अब अनंत सिंह का नया ठिकाना पटना का बेऊर जेल होगा। अनंत सिंह का इस जेल से पुराना नाता रहा है और वह पहले भी इस जेल में कैद हो चुके हैं।

जब अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस ने जेटली, सुषमा और अनंत को J&K की सीमा पर गिरफ़्तार करवाया था…

पिछले एक वर्ष में भाजपा के तीन ऐसे बड़े नेताओं का निधन हो गया, जो पार्टी के लिए संकटमोचक की भूमिका में थे। अनंत कुमार, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज- तीनों ने ही केंद्रीय मंत्री के रूप में मोदी कैबिनेट की शोभा बढ़ाई। जहाँ अनंत कुमार बिना मोदी सरकार का कार्यकाल पूरा हुए दुनिया को अलविदा कह गए, सुषमा और जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से दूसरी बार बनी मोदी सरकार का हिस्सा बनने से मना कर दिया। अनंत कुमार के रूप में भाजपा के पास कर्नाटक में एक बहुत बड़ा चेहरा था। सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय को ह्यूमन टच देकर मोदी सरकार की साख बढ़ाई। जेटली ऑल राउंडर थे और पार्टी के लिए सभी किरदारों में फिट बैठे।

ये तो रही इन तीनों नेताओं की बात। अब बात जम्मू कश्मीर की। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म किए जाने व राज्य का पुनर्गठन करने के बाद विपक्षी दलों ने नाराज़गी जताई। कश्मीर में ख़ूनख़राबा जैसी वारदातें न होने को लेकर अधिकतर विपक्षी दल व गिरोह विशेष के पत्रकार आश्चर्य में हैं। कश्मीर की सड़कों पर ख़ून देखने व हिंसा भड़काने के अदि रहे नेताओं को राज्य की शांति नहीं पच रही है क्योंकि उन्हें मोदी सरकार पर आरोप लगाने का मौक़ा ही नहीं मिल रहा है। इसीलिए नेताओं ने रट लगाना शुरू कर दिया कि वहाँ सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी विपक्षी नेताओं का एक जत्था लेकर श्रीनगर पहुँचे ताकि अपनी आँखों से देख सकें कि घाटी में सब ठीक है या नहीं। अफ़सोस कि इन सभी नेताओं को श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस दिल्ली भेज दिया गया। राहुल गाँधी को एयरपोर्ट से निकलने नहीं दिया गया तो वे वहाँ तैनात पुलिस अधिकारियों को कहने लगे कि राज्यपाल ने उन्हें बुलाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ आए नेताओं को बस यहाँ के स्थानीय निवासियों से बातचीत करनी है। हालाँकि, अधिकारियों पर उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ।

इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद भी श्रीनगर जाने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन उन्हें भी एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया था। इस बार भी सीताराम येचुरी और मनोज झा जैसे नेताओं के साथ वह राहुल गाँधी के प्रतिनिधिमंडल में मौजूद थे। इन नेताओं को सरकार, राज्यपाल और सुरक्षा बलों की बातों पर भरोसा नहीं है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने साफ़ कर दिया कि राहुल गाँधी का यह दौरा पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने पार्टियों को देशहित में राजनीति से ऊपर उठ कर सोचने की सलाह दी।

हमनें यहाँ अनंत कुमार, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की बात की। उसके बाद हमनें देखा कि कैसे राहुल गाँधी को जम्मू कश्मीर के नाम पर राजनीति करने का मौक़ा न देते हुए श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया। अब बात भाजपा की एकता यात्रा की, जो जनवरी 2011 में हुई थी। भाजपा की एकता यात्रा को जम्मू कश्मीर के लखमपुर सीमा पर रोक दिया गया था। उस समय अरुण जेटली राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष थे तो सुषमा स्वराज लोकसभा में यही ज़िम्मेदारी निभा रही थीं। अनंत कुमार बैंगलोर साउथ से 5 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके थे।

भाजपा के तीनों बड़े नेताओं को जम्मू कश्मीर पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। उन्हें पुलिस ने जम्मू कश्मीर में घुसने नहीं दिया। भाजपा युवा मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष अनुराग ठाकुर भी उनके साथ थे। ठाकुर अभी केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री हैं। उस समय सुषमा स्वराज ने पूछा था कि आखिर भाजपा नेताओं को किस अपराध के तहत गिरफ़्तार किया गया है? एक शांतिपूर्ण मार्च के बदले गिरफ़्तारी को लेकर भाजपा के नेतागण नाराज़ थे। क्या आपको पता है उस समय जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री कौन था? उमर अब्दुल्ला। वही उमर अब्दुल्ला जो अभी अपने पिता फारुख अब्दुल्ला सहित गिरफ़्तार हैं।

जम्मू कश्मीर के नेता मिल कर जनता को उकसा सकते थे, इसीलिए सरकार ने समय रहते इन नेताओं को हिरासत में ले लिया। लेकिन, उस समय उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री रहते क्या कहा था? उन्होंने कहा था कि भाजपा नेताओं के राज्य में घुसने का अर्थ हुआ अलगाववादियों को उकसाना और यह सही नहीं है। अरुण जेटली ने इसे राज्य सरकार द्वारा अलगाववादियों के समक्ष आत्मसमर्पण करार दिया था। ये वो समय था जब जम्मू कश्मीर को लेकर होने वाले हर छोटे-बड़े निर्णयों पर पाकिस्तान का गुणगान करने वाले उन अलगाववादियों की छाप रहती थी, जिनमें से अधिकतर आज टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए की गिरफ़्त में हैं।

उस वक़्त अरुण जेटली ने दो घटनाओं का जिक्र किया था। पहले घटना में दिल्ली में कुछ लोग जमा हो गए। सभी अलगाववादी थे, जिन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए और भड़काऊ भाषण दिए। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं जब भाजपा के नेताओं ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने के इरादे से कश्मीर में घुसने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया और गिरफ़्तार कर लिया गया। इन नेताओं में अरुण जेटली, अनंत कुमार और सुषमा स्वराज शामिल थीं। आज ये तीनों ही नेता हमारे बीच नहीं हैं। पिछले एक वर्ष के भीतर इन तीनों का जाना न सिर्फ़ भाजपा बल्कि देश के लिए बड़ी क्षति है।

अब यह जानना ज़रूरी है जनवरी 2011 में भाजपा नेताओं को गिरफ़्तार करवाने वाली जम्मू कश्मीर सरकार का कॉन्ग्रेस भी हिस्सा थी। उस समय राज्य में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस की गठबन्धन वाली सरकार चल रही थी। केंद्र में भी कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। ऐसे में, आज जब सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इन कॉन्ग्रेसी नेताओं को जम्मू कश्मीर में नहीं जाने दिया जा रहा है तो इतनी हाय-तौबा क्यों? सवाल यह है कि जब अलगाववादियों के डर से विपक्षी नेताओं को राज्य में घुसने नहीं दिया जाता था, तब यही कॉन्ग्रेस सत्ता भोग रही थी। आज जब पार्टी विपक्ष में है और राज्य में पूरी तरह शांति है तो इसमें खलल डालने की कोशिश क्यों?

2011: भाजपा की एकता यात्रा के दौरान अरुण जेटली, अनंत कुमार और सुषमा स्वराज (तीनों ही हमारे बीच नहीं रहे), साथ में अनुराग ठाकुर

जम्मू कश्मीर में ख़ूनख़राबा क्यों नहीं हो रहा है ताकि हमे मोदी सरकार को घेरने का मौक़ा मिले? विपक्षी दलों के मन में बस एक यही सवाल है। भाजपा के तीनों दिवंगत नेताओं को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि राज्य में शांति बनी रहे और जो भी नेता या अलगाववादी इस शांति में खलल डालने या जनता को उकसाने की कोशिश करें, उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया जाए। अरुण जेटली ने भी अपने आखिरी ब्लॉग में जम्मू कश्मीर को लेकर सरकार द्वारा लिए गए निर्णय का स्वागत किया था। सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया था कि उन्हें जीते जी जम्मू कश्मीर पर लिए गए ऐतिहासिक निर्णय के साक्षी बनने का मौक़ा मिला।

कॉन्ग्रेस उस पाप में बराबर की हिस्सेदार थी क्योंकि तीनों भाजपा नेताओं को गिरफ़्तार कर जबरन पंजाब भेजने का निर्णय अब्दुल्ला सरकार ने केंद्र से विचार-विमर्श के बाद ही लिया था। अंतर इतना ही है कि तब अलगाववादियों और आतंकियों के डर से ऐसा किया गया था, आज सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विपक्षी नेताओं को वापस भेजा गया है। कॉन्ग्रेस ने जो बोया है, उसे पूरी तरह काटना अभी बाकी है। अभी तो पार्टी शुरू हुई है।

‘यदि राहुल गाँधी घूमने और मौज-मस्ती के लिए जम्मू-कश्मीर जाना चाहते हैं तो व्यवस्था करवा देंगे’

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कॉन्ग्रेस नेता घूमने और मौज-मस्ती के लिए जम्मू कश्मीर जाना चाहते हैं, तो इसके लिए व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वो पर्यटन विभाग से इसकी व्यवस्था करने के लिए निवेदन करेंगे। 

बता दें कि, राहुल गाँधी 8 विपक्षी दलों के 11 नेताओं के साथ शनिवार (अगस्त 24, 2019) को श्रीनगर पहुँचे थे, मगर उन्हें एयरपोर्ट से बाहर नहीं जाने दिया गया और फिर वापस दिल्ली भेज दिया गया। राउत ने जम्मू कश्मीर प्रशासन के इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अगर इन लोगों को वहाँ जाने दिया होता तो वहाँ के हालात बिगड़ सकते थे।

संजय राउत ने केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो ये तो नहीं बता सकते कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के फैसले से किसके सपने पूरे हुए, लेकिन वो इतना जरूर कह सकते हैं कि पूरा देश यही चाहता था और इस फैसले के लिए वो गृह मंत्री का शुक्रिया अदा करते हैं।

दरअसल, कॉन्ग्रेस, सीपीआई, डीएमके, आरजेडी, टीएमसी, एनसीपी, और जेडीएस जैसे विपक्षी दलों के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद जमीनी हकीकत देखने के लिए वहाँ गए थे। इसमें राहुल गाँधी, गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, सीताराम येचुरी, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन, तिरुचि शिवा और डी राजा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे।

सैफई रैगिंग मामले में 7 MBBS छात्र हुए निलंबित, लगाया गया 25-25 हजार रुपए का जुर्माना

सैफई मेडिकल कॉलेज रैंगिंग मामले में मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की सख्ती के बाद प्रशासन द्वारा 7 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। ये सभी निलंबित छात्र 2018 बैच के हैं। इनपर अपने जूनियर्स की रैंगिग करते हुए उनके सिर मुंडवाने का इल्जाम है। सभी आरोपित छात्रों पर कार्रवाई करते हुए 25-25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।

इसके साथ ही मामले की सूचना समय पर न देने के कारण संस्थान कर्मियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हुई है। 2018 बैच के सभी 150 छात्रों पर भी 5,000 का जुर्माना लगाया गया है। विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट्स वेल्फेयर के डीन को हटाने और सुरक्षाकर्मियों पर लिए एक्शन के अलावा हॉस्टल के प्रबंधक को भी बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी यूनिवर्सिटी के कुलपति को समन भेजा गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने सैफई मेडिकल कॉलेज के कुलपति को नोटिस जारी कर MBBS छात्रों के साथ हुई रैगिंग के संबंध में 24 घंटों के भीतर जवाब माँगा था। साथ ही एमसीआई ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर 24 घंटों के भीतर वो जवाब नहीं दे पाते तो उन्हें 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा।

बता दें कि बीते दिनों सैफई मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले एमबीबीएस के नए छात्रों (फर्स्ट ईयर) के सिर के बाल मुंडवाकर परेड कराए जाने के मामला सामने आया था। मामला प्रकाश में उस समय आया जब ये सभी छात्र सिर झुकाए अपने कॉलेज पहुँचे। घटना का पता चलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इस मामले को ‘परंपरा’ बताकर खारिज करना चाहा। खुद वहाँ के डीन ने कहा कि छात्रों ने अपनी मर्जी से ही सिर के बाल मुड़वाए हैं, वैसे भी ये परंपरा है जो सभी जूनियर छात्र अपनी मर्जी से अपनाते हैं। फिर भी रैगिंग जैसी कोई बात सामने आती है तो वे कार्रवाई करेंगे।

इस्लामिक देशों ने 5 साल में PM मोदी को दिए 6 ‘सर्वोच्च’ सम्मान, PAK के मुँह पर करारा तमाचा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में यूएई में सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘जायद’ से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान यूएई के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया गया। इस सम्मान के मिलने के साथ ही इस्लामिक देशों से प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाले सम्मानों की संख्या 5 वर्ष के अंदर 6 हो गई।

खास बात यह है कि ये सम्मान प्रधानमंत्री को उस समय मिला है जब भारत लगातार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दरकिनार कर रहा है। ये सम्मान दर्शाता है कि मोदी के कार्यकाल में मुस्लिम देशों के साथ भारत के रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार के कुछ शीर्ष सूत्रों ने इन सम्मानों को पाकिस्तान के मुँह पर तमांचा करार दिया है। जो अपनी लाख कोशिशों के बाद भी भारत को अलग-थलग करने में नाकामयाब रहा। खासकर मुस्लिम देशों से।

एएनआई की खबर के मुताबिक इन सूत्रों ने कहा है कि पाकिस्तान को अब एहसास होगा कि ये नया भारत है जो विश्व के साथ जुड़ा भी हुआ है और साथ ही सुनिश्चित भी करता है कि आतंक फैलाने वाले अलग-थलग हों।

उल्लेखनीय है कि भारत में आर्टिकल 370 निष्प्रभावी होने के बाद पाकिस्तान लगातार विश्व के कई देशों से अपना रोना रो चुका है, लेकिन उसे किसी भी ओर से कोई आस नहीं दिखाई दी। ऐसे में अब जब बहरीन में उन्हें ‘द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ़ द रेनेसां’ , यूएई में जायद, फिलिस्तान में ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ , अफ़गानिस्तान में आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड, सउदी अरब में किंग अब्दुल्लाजीज शैश अवार्ड और मालदीप में रुल ऑफ निशान इज्जुद्दिओं से सम्मानित किया गया है तो लगता है मुस्लिम देशों से भारत देशों के सम्बंध पहले के मुकाबले बेहतर हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत राजनयिक ने इस्लामिक देशों से सुधरते रिश्तों के बारे में बात करते हुए इसे भारत के लिए बेहतर परिणाम वाला बताया। उनके मुताबिक इस्लामिक देशों से सुधरते रिश्तों के कारण हज कोटा के निवेश में भी ठोस बढ़त देखने को मिलेगी और वेस्ट एशिया में फँसे कई कैदियों की आजादी को सुनिश्चित करके उन्हें उनके परिजनों ने मिलवाया जा सकेगा। क्योंकि प्रधानमंत्री हर सम्मान मिलने के बाद कहते आए है कि ये किसी एक इंसान के लिए नहीं है बल्कि देश की 130 करोड़ जनता के लिए है।

भारत के खिलाफ पाक कर रहा India Today की पत्रकार के श्रीनगर एयरपोर्ट पर ड्रामे के वीडियो का इस्तेमाल

इंडिया टुडे की पत्रकार मौसमी सिंह ने शनिवार (अगस्त 24, 2019) को श्रीनगर एयरपोर्ट पर बड़ा हंगामा करते हुए पुलिसकर्मियों पर बदतमीजी का आरोप लगाया। मौसमी सिंह के इस ड्रामे का सहारा लेकर अब पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर अपने नैरेटिव को भुनाना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तानी मीडिया ने इंडिया टुडे पर मौसमी सिंह द्वारा पोस्ट किए गए उस क्लिप का इस्तेमाल किया है, जिसमें ये दिखाया गया है कि कश्मीर में हिंसा हो रही है। हालाँकि, यह पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। पाकिस्तान ने इस वीडियो का इस्तेमाल करके यह दिखाने का झूठा प्रयास किया है कि कश्मीर में अत्यधिक बल का उपयोग किया जा रहा है।

वैसे, इंडिया टुडे ने जो पोस्ट शेयर किया है, उसमें कोई पुलिसकर्मी मौसमी सिंह के साथ बदतमीजी करते हुए नहीं दिखाई दे रहा है। बता दें कि, श्रीनगर एक रक्षा हवाई अड्डा है और यह सामान्य सी बात है कि वहाँ वीडियोटेप करना प्रतिबंधित है। यही बात जब सुरक्षाकर्मियों ने मौसमी को बताने की कोशिश की, तो वो भड़क गई और उन पर बदतमीजी का आरोप लगाया। 

श्रीनगर का शेख उल-आलम हवाई अड्डा भारतीय वायु सेना के स्वामित्व वाला एक रक्षा हवाई अड्डा है। इस तरह का एक और रक्षा हवाई अड्डा महाराष्ट्र के पुणे में है, जहाँ यात्रियों को हवाई अड्डे पर अपने मोबाइल फोन के कैमरे का उपयोग करने से मना करने के निर्देश जारी किए गए हैं, और यदि कोई ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है, तो अधिकारी उनके फोन को जब्त कर सकते हैं। देश भर के सभी रक्षा हवाई अड्डों के परिसर में कैमरों के उपयोग पर प्रतिबंध है और यात्रियों से इस नियम के पालन करने की उम्मीद की जाती है।

ये पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने इस तरह से वीडियो का इस्तेमाल किया है। इससे पहले पाकिस्तान ने भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के पावर को खत्म करने के फैसले पर निशाना साधने के लिए कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद सहित विपक्षी नेताओं के वीडियो को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था। वहीं, आईएनएक्स मीडिया घोटाले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के गिरफ्तार होने के बाद भी पाकिस्तान उनके समर्थन में आया था। पाकिस्तान के सीनेटर ने दावा किया था कि उन्हें इसलिए गिरफ्तार किया गया, क्योंकि उन्होंने कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के मोदी सरकार के कदम का विरोध किया था। इसके अलावा, पाकिस्तान के पैनेलिस्टों ने भारत में अपने प्रचार को आगे बढ़ाने के लिए राहुल गाँधी, ममता बनर्जी और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय जैसे नेताओं में अपना विश्वास दिखाया है।

वैसे मौसमी सिंह भी अपनी रिपोर्टिंग से इतर दूसरी चीजों के लिए पहली बार सुर्खियों में नहीं आई हैं। इससे पहले वो 2019 के चुनाव के दौरान प्रियंका वाड्रा को लेकर बेहद उत्साहित होती हुई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को निर्देश देती हुई कैमरे में कैद हुई थी। इसके आलावा मौसमी सिंह कॉन्ग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर के बचाव में भी नजर आ चुकी है। जब मणिशंकर अय्यर ने रिपब्लिक भारत की रिपोर्टर के साथ बदतमीजी की और गालियाँ दी तो मौसमी सिंह ने न केवल मणिशंकर का बचाव किया बल्कि उसे रिपोर्टिंग करने से भी रोक दिया। वायरल वीडियो में मौसमी सिंह को मणिशंकर अय्यर का पक्ष लेते हुए देखा गया और साथी पत्रकार से कहा गया कि वे वहाँ अपने एजेंडे को न रखें।

पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, कई नेताओं की उपस्थिति में बेटे रोहन ने दी मुखाग्नि

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके बेटे रोहन जेटली ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। भाजपा के संकटमोचक रहे जेटली का अंतिम संस्कार रिंग रोड में यमुना किनारे स्थित निगमबोध घाट पर किया गया। इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहे।

दिल्ली पुलिस ने दिवंगत नेता के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण अडवाणी भी अरुण जेटली की अंतिम क्रिया के दौरान उपस्थित रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले अरुण जेटली उन गिने-चुने नेताओं में से थे, जिन्होंने मोदी और वाजपेयी- दोनों दिग्गज प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री की भूमिका निभाई। निगमबोध घाट पर उपस्थित अन्य नेताओं में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे। इससे पहले जेटली का पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय में दर्शनार्थ रखा गया था। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि अपने अंतिम दिनों में भी जेटली उनसे मुस्कुरा कर ही मिले थे।

बाबा रामदेव सहित अन्य हस्तियों ने भाजपा मुख्यालय पहुँच कर अरुण जेटली के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए।

जायद मेडल तो बहानेबाजी है, फ्यूल ख़त्म होने वाली ख़बर जो छिपानी है: पाक सांसदों ने रद्द किया UAE दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनियाभर में अवॉर्ड्स मिल रहे हैं। पाकिस्तान को अंतरिक्ष से भी लताड़ ही नसीब हो रहा है। मोदी कई देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं जबकि इमरान ख़ान ट्विटर पर आरएसएस को गाली देने में लगे हुए हैं। कभी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आवास को शादी के मंडप में बदल दिया जाता है तो कभी पाकिस्तान का राजनयिक कुवैत के अधिकारी की घड़ी चोरी करते हुए पकड़ा जाता है। चोरी-चकारी में लगे पाकिस्तानियों की हालत यह है कि जब वो विदेश यात्रा पर भी जाते हैं तो उन्हें होटल के कर्मचारियों से मिल कर ही संतुष्ट होना पड़ता है।

पाकिस्तानी सीनेट के अध्यक्ष सादिक़ संजरानी एक संसदीय दल के साथ यूएई के दौरे पर जाने वाले थे। सभी पाकिस्तानी सांसदों ने कई दिनों से सिर्फ़ इसीलिए खाना नहीं खाया था ताकि वे यूएई पहुँच कर भर पेट खा सकें। कई सांसदों को तो यूएई के आलीशान होटलों के कमरों और उसमे परोसे जाने वाले व्यंजनों के सपने भी आ रहे थे। लेकिन हाय रे किस्मत! संजरानी ने अचानक से बम फोड़ दिया। उन्होंने यूएई का दौरा रद्द कर दिया और सभी सांसदों का सपना धरा का धरा रह गया। हालाँकि, दौरा रद्द होने की असली वजह उन्होंने छिपा ली।

हुआ यूँ कि शनिवार (अगस्त 24, 2019) को यूएई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सबसे बड़े सिविलियन अवॉर्ड जायद मैडल से सम्मानित किया। ख़ुद क्राउन प्रिंस ने मोदी के गले में ‘ऑर्डर ऑफ़ जायद’ नामक स्वर्ण मैडल पहनाया। अबुधाबी में हुई इस हलचल से इस्लामाबाद में भूकंप आ गया, जहाँ पाकिस्तानी मंत्रीगण इस बात पर बहस कर रहे थे कि संसदीय दल को यूएई जाने के लिए ख़र्चे का बंदोबस्त कैसे किया जाएगा? अब यूएई से ही रुपए माँग कर यूएई जाना संभव तो है नहीं क्योंकि यूएई चीन नहीं है।

इसी बैठक के दौरान इस्लामाबाद में झटके महसूस किए गए। बस पाकिस्तान ने इसी भूकंप का बहाना बना कर अपनी समस्या भी सुलझा ली। बात ये थी कि पाकिस्तान का संसदीय दल भी तैयार था और उनके यूएई जाने के लिए एक चीनी विमान का बंदोबस्त भी कर लिया गया था लेकिन उस विमान में फ्यूल नहीं था। ऑपइंडिया सटायर विभाग के ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सचिव के नौकर को फोन किया तो उसने फ्यूल देने के लिए एक बड़ी शर्त रख दी।

चीन की शर्त यह थी कि वह यूएई जाने और वहाँ से आने के लिए पाकिस्तानी सांसदों के विमान को फ्यूल तभी मुहैया कराएगा जब उसे तत्काल 10,000 गदहे मुहैया कराए जाएँगे। इमरान ख़ान ने बुझे मन से जनरल बाजवा को अपना दुखड़ा सुनाया। बाजवा ने साफ़-साफ़ कह दिया कि उनके पास थोड़ा-बहुत फ्यूल है तो लेकिन उसका उपयोग लश्कर और जमात के लोग करने वाले हैं। “नहीं, नहीं। घुसपैठ की कोशिशें और आतंकवादी प्रक्रियाओं में रुकावट नहीं आनी चाहिए।“- इमरान ख़ान ने ऐसा कह कर निकल लिया।

पाकिस्तान के कई अधिकारी और नेता मिल कर भी 100 से अधिक गदहे नहीं पकड़ पाए। अंत में पाकिस्तानी सीनेट के अध्यक्ष ने बुझे मन से अपना यूएई दौरा कैंसल करने की घोषणा की। अब मीडिया के सवालों का जवाब तो देना था। और आजकल इमरान ख़ान अपने घर के खाने में निकलने वाली खामी को भी कश्मीर से जोड़ते हैं। जब तक वह अपना घर-परिवार से लेकर पाकिस्तान के अन्य मुद्दों को कश्मीर से जोड़ कर उसके लिए पीएम मोदी और संघ को गालियाँ नहीं देते हैं, तब तक उन्हें खाना नहीं पचता है।

इसीलिए पाकिस्तानियों ने इस मुद्दे को भी मोदी से जोड़ा। पाकिस्तान ने यूएई से नाराज़गी जताई कि उसने पीएम मोदी को इतना बड़ा सम्मान क्यों दिया? बस इसी ख़बर का बहाना बना कर पाकिस्तानी सांसदों ने अपना यूएई दौरा रद्द कर दिया। इससे फ्यूल वाली बात भी छिप गई और गदहे वाली बात भी। दस किलो टमाटर की एवज में एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि फ्यूल ख़त्म होने और चीन द्वारा गदहों की माँग को छिपाने के लिए ये पूरी साज़िश रची गई। 5 किलो अतिरिक्त टमाटर देने पर उसने बताया कि यूएई द्वारा पीएम मोदी को मैडल दिए जाने के बाद पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान भी चीन से मैडल की माँग कर रहे हैं और इसके लिए वह कितने भी गदहे देने को तैयार हैं।

खैर, इमरान ने यूएई में कार्यरत सभी पाकिस्तानी राजनयिकों को बता दिया है कि इस बार चोरी ऐसी करनी है कि किसी को पता भी न चले। और हाँ, उन्हें आगाह कर दिया गया है कि पाकिस्तानी राजनयिक द्वारा कुवैती अधिकारी की घड़ी चोरी किए जाने का वीडियो वायरल हो चुका है, इसीलिए ये काम अब होशियारी से कैमरे से बचते हुए करना पड़ेगा। हो सकता है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपनी चौथी शादी की भी घोषणा जल्द ही करें और इस बार उनकी पत्नी विदेशी होगी।

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पीएम आवास को विवाह भवन बना देने वाले इमरान ख़ान किसी विदेशी लड़की से इसीलिए शादी करना चाहते हैं ताकि दहेज़ में कुछ रुपए और संपत्ति आए। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में नई जान फूँकने में मदद मिलेगी। इमरान हर वो कोशिश करेंगे, जिससे पाकिस्तान में टमाटरों के दाम कम हों। वैसे, पाकिस्तान के सांसदों ने जब सुना कि यूएई दौरा रद्द हो गया है तो कइयों को हार्ट अटैक आते-आते बचा है। खैर, ऑपइंडिया के ख़ुफ़िया सूत्र ट्रक में टमाटर लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में हैं और जैसे ही कोई नई जानकारी मिलेगी, आप तक पहुँचाई जाएगी।

‘गालीबाज ट्रोल’ स्वाति चतुर्वेदी ने फिर फैलाई फेक न्यूज़, PM मोदी की तस्वीर को फोटोशॉप कर अरबी परिधान में दिखाया

फेक न्यूज़ फैलाने को लेकर हमेशा ट्रोल होने वाली पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की काली करतूत एक बार फिर सामने आई है। इस बार स्वाति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोशाक को लेकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। बता दें कि, स्वाति ने शनिवार (अगस्त 24, 2019) को प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ करके उसे ट्विटर पर पोस्ट किया। जिसमें पीएम मोदी को यूएई की यात्रा के दौरान अरबी पोशाक ‘बिष्ट या घुटरा’ पहने दिखाया गया है।

स्वाति चतुर्वेदी द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट

स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने और उनका मजाक उड़ाने की नियत से इस तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल पर ‘offered without comments’ कैप्शन के साथ शेयर किया। तस्वीर में लाल रंग के घेरे में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने बिष्ट पहनी हुई है। हालाँकि, विदेश मंत्रालय द्वारा पोस्ट की गई मूल तस्वीर में आप देख सकते हैं कि पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान मोदी जैकेट के साथ अपने सामान्य परिधान पहने हैं। इस तस्वीर को देखने के बाद स्वाति के झूठे दावे बेबनियाद साबित हो जाते हैं।

दरअसल, स्वाति पीएम की तस्वीर को फोटोशॉप करके ये दिखाना चाहती थी कि वो अपने देश में तो हिन्दू विश्वास का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान उन्होंने खुशी-खुशी अरबी पोशाक को अपनाया।

मगर स्वाति की काली करतूत ज्यादा देर तक छुपी न रह सकी और काफी लोगों ने इनकी करतूत का पर्दाफाश कर दिया। जिसके बाद स्वाति चतुर्वेदी ने ये कहते हुए अपना पोस्ट हटा लिया कि वो तस्वीर फोटोशॉप थी।

स्वाति चतुर्वेदी, ने हमेशा ही प्रासंगिक बने रहने के लिए सरकार के खिलाफ झूठे प्रचार और फर्जी खबरों का सहारा लिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद भी स्वाति चतुर्वेदी ने गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित फर्जी पोस्ट शेयर किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह संसदीय सत्र में सो रहे थे। हालाँकि, बाद में यह खबर भी फर्जी साबित हुई।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबर फैलाने के मामले में स्वाति चतुर्वेदी का पुराना इतिहास रहा है। इससे पहले, उन्होंने ठुकराए हुए प्रेमी के हाथों हिंसा की शिकार लड़की को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की हिंसा के रूप में दिखाया था और राष्ट्रीय स्तर के एक राजनेता के बयान को भी राष्ट्रीय चैनल पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया था।

इसके अलावा उन्होंने अमित शाह के भाषण को लेकर भी झूठ फैलाया था और कन्हैया कुमार पर हमले को लेकर बीजेपी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाई थी। इतना ही नहीं, जब खुद की इन करतूतों की वजह से उनकी विश्वसनीयता कम होने लगी, उनके पाठकों का विश्वास उन पर से उठने लगा तो उन्होंने इसके लिए ऑपइंडिया को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि ऑपइंडिया ने उनके द्वारा वर्षों से फैलाए जा रहे फर्जी खबरों का पर्दाफाश कर दिया।