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कमलनाथ राज में कॉन्ग्रेसियों की गुंडई: घर में घुस युवती से अश्लील हरकत, पिस्टल दिखा दी जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है। अब कॉन्ग्रेस के नेता भी गुंडागर्दी पर उतर गए हैं। एक युवती ने कॉन्ग्रेस नेताओं पर घर में घुस अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि पिस्टल दिखा कॉन्ग्रेस नेता ने जान से मारने की धमकी भी दी।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ घर में घुसने, छेड़छाड़ और मारपीट करने समेत कई अन्य मामलों में केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दिया है।

मामला इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है। टीआई नीरज मेढ़ा ने बताया कि घटना शनिवार (अगस्त 31, 2019)  की है। देर रात स्वर्ण सिंह दहीवाल उर्फ सोंटा और अनमोल संधू 22 वर्षीय एक युवती के घर में जबरन घुस गए और बंदूक दिखाकर धमकी दी। आरोप है कि दोनों ने युवती के पिता और भाई की कनपटी पर बंदूक रख जान से मारने की धमकी दी और उनके सामने ही युवती को अश्लील शब्द कहते हुए उसके साथ गंदी हरकत भी की।

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जानकारी के मुताबिक, सोंटा कॉन्ग्रेस का महामंत्री है और पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है। उसके खिलाफ हत्या, मारपीट और सूदखोरी के कई केस दर्ज हैं। वहीं, सोंटा का साथी अनमोल कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ा हुआ है। अनमोल संधु भी नामी बदमाश है। जिस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। युवती का कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और पैसा  होने की वजह से आरोपितों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। कई लोग इनसे प्रताड़ित हो चुके हैं। हालाँकि, पुलिस ने अनमोल को पिछले वर्ष उसे रासुका के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह स्वर्ण सिंह उर्फ सोंटा की फैक्ट्री पर काम करती थी। लेकिन वेतन नहीं मिलने के कारण उसने काम छोड़ दिया था। उसके बाद से ही स्वर्ण सिंह उसे परेशान कर रहा है। आरोपित कभी उसे बीच सड़क पर रोक लेता है, तो कभी फोन करके परेशान करता है। पीड़िता ने बताया कि सोंटा उस पर शादी का दबाव भी बना रहा था।

पीड़ित युवती ने इसकी शिकायत स्वर्ण सिंह की पत्नी से भी की थी, लेकिन उसने युवती को परेशान करना बंद नहीं किया। शनिवार की रात जब सोंटा अपने साथी अनमोल के साथ युवती के घर में घुसकर गुंडागर्दी की तो परिजनों ने आरोपित की इस हरकत का वीडियो बना लिया और फिर पुलिस से इसकी शिकायत की।

सोंटा के ऊपर पुलिस थाने से खुद से जुड़े मामलों की फाइलें गायब करवाने का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि सोंटा ने पुलिस के साथ सांठगांठ कर फाइलें गायब करवा दी। पीड़ित युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने कई जगहों पर छापे मारे हैं। फिलहाल जाँच जारी है।

PM उज्ज्वला योजना: 8 करोड़ घरों में मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन पहुँचाने का लक्ष्य 6 महीने पहले पूरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की अनेकों कल्याणकारी योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना है। इस योजना के तहत ग़रीबों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करना शामिल है। ख़बर के अनुसार, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस योजना के तहत 8 करोड़ घरेलू कनेक्शन का जो लक्ष्य रखा गया था, सरकार उसे तय समय-सीमा के 6 महीने पहले ही पूरा कर लेगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत मार्च 2020 तक 8 करोड़ ग़रीब परिवारों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया था। 26 अगस्त को योजना के तहत 7,96,81,650 से अधिक कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। इससे यह साफ़ पता चलता है कि सरकार अपने लक्ष्य को छ: महीने पहले ही प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। आगे संभावना है कि इस योजना का विस्तार कर जल्द ही अन्य वंचित परिवारों को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएँ।

उज्ज्वला योजना मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, 2019 की सत्ता में बाजेपी की वापसी में इस योजना का अहम योगदान माना जाता है। 

इससे पहले फरवरी में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना के तहत मार्च 2020 की समय-सीमा के तहत 5 करोड़ कनेक्शन से बढ़ाकर 8 करोड़ घरेलू कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए अतिरिक्त रुपए आवंटित किए गए थे। मई 2016 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले में पिछले विधानसभा चुनाव से नौ महीने पहले पीएमयूवाई की शुरुआत की थी। इस योजना ने एक दशक से अधिक समय बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सत्ता में वापसी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अधिकारियों ने कहा कि मोदी सरकार ने इस योजना के लिए शुरू में 8,000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, और 2016-17 के वित्तीय वर्ष से शुरू होने वाले तीन वर्षों में 5 करोड़ कनेक्शन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके आगे उन्होंने बताया कि कथित तौर पर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि 8 करोड़ का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया जाएगा। भारत सरकार ने योजना के तहत तेल विपणन कंपनियों को 10,675 करोड़ रुपए रीइम्बर्स किए।

छत्तीसगढ़: CM भूपेश बघेल के पिता करेंगे सत्याग्रह, कहा- मंत्रियों और विधायकों की भी नहीं सुन रहे अधिकारी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल ही प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रतिपक्ष की भूमिका में उतर आए हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश के अधिकारी मंत्री और विधायकों तक की बात नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अफसरों के खिलाफ वे मंगलवार (सितंबर 3, 2019) को बेमेतरा में सत्याग्रह करेंगे।

नंदकुमार बघेल ने शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह के विभाग में 20 हजार तबादलों के आवेदन लंबित हैं। अधिकारी ब्लैकमेलिंग के लिए मनमानी कर रहे हैं। बघेल ने ऐसे अधिकारियों से साफ तौर पर कहा है कि अगर वो स्थानांतरण नहीं कर सकते, तो उसे भी स्पष्ट बताएँ।

खुद को कॉन्ग्रेसी मानने तक से इनकार करते हुए बघेल ने कहा कि वे पिछड़ा वर्ग समाज के उत्थान के लिए प्रतिपक्ष की भूमिका में काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि, नंदकुमार बघेल अंबिकापुर के सर्किट हाउस में पिछड़ा वर्ग के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे थे। यहाँ टॉयलेट इस्तेमाल करने के दौरान उनका पैर फिसल गया। सिर में उन्हें हल्की चोट भी आई।

उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के अधिकारी किसी की नहीं सुन रहे हैं। इन अधिकारियों को लेकर पूर्व सीएम रमन सिंह आए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व टीएस सिंहदेव को चाहिए कि ऐसे अकड़बाज अधिकारियों को तत्काल बाहर निकालें।

चर्च ने बेंगलुरु मेट्रो को बेच दी सेना की ज़मीन, 60 करोड़ रुपए डकारे

कर्नाटक के बेंगलुरु में चर्च द्वारा सेना की ज़मीन बेचने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने चर्च ऑफ साउथ एशिया (CSI) के ख़िलाफ़ सेना की ज़मीन अवैध तरीके से बेंगलुरु मेट्रो को बेचने और 60 करोड़ रुपए का मुआवज़ा प्राप्त करने की शिक़ायत की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

ख़बर के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने कब्बन पार्क थाने में 20 अगस्त को सीएसआइ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। शिक़ायत में रक्षा मंत्रालय ने सीएसआइ पर अपनी 7,426 वर्गमीटर ज़मीन को धोखे से बेचने का आरोप लगाया है। बता दें कि यह ज़मीन ऑल सेंट चर्च कॉम्प्लेक्स में स्थित है। रक्षा मंत्रालय का आरोप है कि सीएसआई ने बिना उन्हें सूचित किए ज़मीन राज्य सरकार की बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) को बेच दी। दरअसल, बीएमआरसीएल उस ज़मीन पर भूमिगत स्टेशन का निर्माण कर रही है और ऊपर की ज़मीन का इस्तेमाल पार्किंग आदि के लिए करना चाहती है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में छपी ख़बर का स्क्रीनशॉट

इस मामले पर बेंगलुरु (मध्य) के पुलिस उपायुक्त चेतन सिंह राठौर ने कहा, “हम लोग रक्षा मंत्रलय की उस शिक़ायत की जाँच कर रहे हैं, जिसमें उसने कहा है कि सीएसआइ ने काफ़ी पहले लीज़ पर दी गई उसकी ज़मीन का एक हिस्सा बेचकर मुआवज़ा हासिल कर लिया है।” इसके आगे उन्होंने कहा,

“हमने दोनों पक्षों से ज़मीन के मालिकाना हक़ से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा है। दस्तावेज़ बताते हैं कि वर्ष 1860 के दौरान ब्रिटिश शासन में इस सार्वजनिक संपत्ति के मालिक मैसूरु के वोडेयार शासक थे।”

राठौर ने बताया,

“प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि दोनों पक्षों ने ज़मीन के मालिकाना हक़ को लेकर शहर के दीवानी न्यायालय में वाद दाखिल किया है। इस मामले में कार्रवाई शुरू करने से पहले हम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे।”

वहीं, बीएमआरसीएल के प्रवक्ता का कहना है कि ज़मीन खरीद से पहले आपत्ति के लिए नोटिस जारी किया गया था। उधर, चर्च के अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटिश शासन में ईस्ट इंडिया कंपनी छावनी क्षेत्र की ज़मीन की मालिक थी। उन्होंने दावा किया कि संबंधित ज़मीन ब्रिटिश काल में ही उन्हें दे दी गई थी।

TMC नेता जफर, अब्दुल और लश्कर ने अपने ही कार्यकर्ता की पत्नी से किया रेप, गला दबाकर की हत्या

बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बासंती थाने इलाके में TMC कार्यकर्ता की पत्नी से गैंगरेप और बाद में हत्या करने के आरोप में तृणमूल के तीन नेताओं पर मामला दर्ज हुआ है। इन नेताओं की पहचान जफर शेख, अब्दुल शेख और सफीक लश्कर के रूप में हुई है।

मृतका का पति भी सत्ताधारी दल टीएमसी का कार्यकर्ता है। उसने तृणमूल कॉन्ग्रेस के यूथ विंग के स्थानीय नेताओं पर पत्नी के साथ रेप और उसकी हत्या का आरोप लगाया है। उसके मुताबिक बासंती क्षेत्र में लंबे समय से तृणमूल के दो गुटों में रस्साकशी चल रही थी। इसकी वजह से वह घर छोड़कर कहीं और रह रहा था। शनिवार की रात तृणमूल यूथ विंग के स्थानीय कार्यकर्ता उसकी तलाश में पहुँचे और उसकी पत्नी से बदसलूकी की।

जब महिला ने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया और बाद में गला घोंटकर हत्या कर दी। मृतका के पति ने स्थानीय नेताओं जफर शेख, अब्दुल शेख और सफीक लश्कर पर मामला दर्ज करवाया है।

वहीं, तृणमूल यूथ विंग के नेताओं ने अपने ऊपर लगाए आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया है और महिला के पति पर संदेह जताते हुए उसे ही घटना के पीछे दोषी बताया है। उनका कहना है कि पति-पत्नी में लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके कारण हो सकता है टीएमसी कार्यकर्ता ने ही अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारा हो।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस घटना की जाँच कर रही है। अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

कांशीराम आवास योजना के फर्जी आवंटन पत्र बाँटने में फँसे भू-माफिया आज़म खान, जाँच के लिए टीम गठित

भू-माफिया सपा सांसद आज़म खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अब उन पर मकानों का फर्जी आवंटन पत्र बाँटने का आरोप लगा है। पीड़ितों ने आज़म खान पर कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत फर्जी आवंटन पत्र देने का आरोप लगाया है।

15 से 20 परिवारों का आरोप है कि साल 2016 में सपा सांसद आज़म खान ने ‘कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना’ के अंतर्गत सपा कार्यालय से मकानों के आवंटन पत्र बाँटे थे। जबकि, सरकारी ऑफिस में इन मकानों के आवंटन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित परिवारों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह से की। उन्होंने पीड़ितों की शिकायत के बाद जाँच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 3 दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट आ जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जेपी गुप्ता ने भी इस बारे में रविवार (सितंबर 1, 2019) को बताया कि जिला प्रशासन में कुछ लोगों द्वारा शिकायतें आईं हैं कि आज़म खान ने कांशीराम योजना के अंतर्गत उन्हें फर्जी आवंटन पत्र दिए। जेपी गुप्ता ने कहा कि वो इस मामले की जाँच करेंगे और यदि जाँच में सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाँच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है।

गौरतलब है कि, इससे पहले शनिवार (अगस्त 31, 2019) को आज़म खान और इनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ रामपुर जिले में घर खाली करने के लिए मजबूर करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित ने पुलिस से की गई शिकायत में दावा किया था कि अक्टूबर 15, 2016 को 15 से 20 लोगों का एक समूह उसके घर में घुसा और उसे खाली करने के लिए कहा। घर खाली न करने पर जाने से मारने की धमकी भी दी। इस मामले में पुलिस ने आज़म खान और उनके साथियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 427, 323, 504 ,506, 395 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया था।

आज़म खान पर मदरसे से किताबें चुरा कर जौहर यूनिवर्सिटी में रखने, सिंचाई विभाग की ज़मीन हड़पने, शत्रु सम्पत्ति को फर्जीवाड़ा कर फ़र्ज़ी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित किए जाने समेत कई मामले दर्ज हैं। 

पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर सिख समुदाय में रोष, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की उठाई माँग

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बेटियों के जबरन धर्मांतरण ख़िलाफ़ दिल्ली में सिख समुदाय आग-बबूला है। हाल ही में पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की 19 साल की बेटी को गुंडे उनके घर से घसीटते हुए उठा ले गए थे।

इसके बाद पीड़िता से जबरन इस्लाम क़बूल करवाकर उसका निक़ाह हाफ़िज़ सईद के आतंकी संगठन के जमात-उद-दावा के मोहम्मद हसन से करवा दिया था। इस घटना से आहत सिख समुदाय ने पाकिस्तान में सिख परिवारों की सुरक्षा की माँग करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया है। बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ भी शामिल हुईं, उन्होंने भी अपने हाथों में बैनर और पोस्टर्स लेकर इस मुद्दे पर अपना विरोध जताया।

इसी मामले में सिख समुदाय ने काशी में भी अपना विरोध दर्ज किया। इस दौरान गुरुद्वारे में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की गई। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदाय की रक्षा की माँग की और पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने का अनुरोध किया।

सिख धर्म के धर्मगुरु अरजन देव की गद्दी दिवस के मौक़े पर गुरुद्वारा गुरुबाग पर सैकड़ों की संख्या में सिख समुदाय के लोग उपस्थित हुए। अरदास और शबद कीर्तन के बाद भारी संख्या में सिख समुदाय के लोगों ने मेन गेट पर आकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाजी की और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धर्म परिवर्तन का पुरज़ोर विरोध किया।

बीते रविवार (1 सितंबर) को भी ऐसी ही घटना सामने आई, जिसमें एक हिंदू लड़की को सिंध प्रांत के सुक्कुर स्थित उसके कॉलेज से ही अगवा कर लिया गया। इसके बाद उसका जबरन धर्म परिवर्तन कर उसे इस्लाम क़बूल करवाया गया। ख़बर यह भी है कि लड़की को सियालकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी के कार्यकर्ता मिर्ज़ा दिलावर बेग के घर पर रखा गया है।

ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत ने फेसबुक पोस्ट करके इस मामले की जानकारी दी। फेसबुक की इस पोस्ट के अनुसार पाकिस्तान में बीते दो महीने में इस तरह की यह तीसरी घटना है।

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर जबरन इस्लाम क़बूल करवाने का सिलसिला पुराना है। ऐसे ज़्यादातर मामलों में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। बीते दिनों ख़बर आई थी कि इसके कारण पाकिस्तान में सिखों की आबादी 15 साल में 40 हजार से घटकर 8 हजार हो गई है।

लोगों को न भड़काएँ ओवैसी, मुॅंह बंद रखें इमरान खान: असम के शीर्ष मुस्लिम संगठन ने लगाई फटकार

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर बयानबाजी को लेकर एआईएमआईएम के अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को असम के शीर्ष मुस्लिम संगठन ने फटकार लगाई है। इस संगठन से राज्य मूल निवासियों के 21 संगठन संबद्ध है। संगठन ने ओवैसी से गलत सूचना देकर लोगों को भड़काने से बाज आने को कहा है। वहीं, इमरान खान को इस मसले पर अपना मुॅंह बंद रखने की नसीहत दी है।

शीर्ष संस्था के अध्यक्ष सैयद मुमीन-उल-औवाल ने हैदराबाद के सांसद ओवैसी से भी कहा कि वे असम के लोगों को NRC के मुद्दे पर गलत जानकारी देने की कोशिश न करें, जैसा उन्होंने शनिवार (31 अगस्त) को किया था।

सैयद मुमीन-उल-औवाल ने एक बयान में कहा,

“इमरान ख़ान को असम के मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है। खान को असम पर बोलने का हक़ नहीं है। उन्हें अपना मुँह बंद रखना चाहिए। हम अपने हिंदू भाइयों के साथ शांति से पीढ़ियों से असम में रह रहे हैं।”

औवाल ने मीडिया द्वारा ग़लत ख़बरों के प्रचार-प्रसार को भी फ़टकार लगाते हुए कहा उन्हें झूठी ख़बरे नहीं फैलानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें सरकार पर पूरा भरोसा है और राज्य अब पूरी तरह से शांत है।”

ग़ौरतलब है कि शनिवार को ओवैसी ने कहा था कि उन्हें संदेह है कि नागरिक संशोधन विधेयक के ज़रिए बीजेपी एक बिल ला सकती है, जिसमें वो सभी ग़ैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने की कोशिश कर सकती।

उन्होंने कहा था कि असम में कई लोगों ने उन्हें बताया है कि लोगों के माता-पिता के नाम लिस्ट में हैं, लेकिन बच्चों के नाम नहीं हैं। साथ ही कहा था कि अभी तक बीजेपी दावा कर रही थी कि राज्य में 40 लाख से ज्यादा अवैध रूप से रह रहे हैं। लेकिन लिस्ट में सिर्फ 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। इनमें से करीब 3 लाख लोग ऐसे हैं जो दस्तावेज़ जमा नहीं कर पाए हैं। उनके दस्तावेज़ जमा कर देने के बाद यह आंकड़ा और भी कम हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि आख़िर 40 लाख लोग कहाँ गए। वहीं, एनआरसी का जिक्र करते हुए इमरान खान ने शनिवार को मोदी सरकार पर मुस्लिमों के सफाये का आरोप लगाया था।

कश्मीरी सुरक्षा बलों के आँख-कान, घाटी में बचे 150 से 200 आतंकी: राज्यपाल के सलाहकार

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के पीछे की वजह आतंकवाद का खात्मा करना बताया था। सरकार ने कहा था कि वो देश से आतंकवाद की जड़ को समाप्त करना चाहती थी, इसलिए प्रदेश से 370 को निष्क्रिय किया जा रहा है। सरकार का आतंकवाद की समाप्ति की दिशा में उठाया गया कदम सार्थक होता दिखाई दे रहा है।

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की संख्या पहले से काफी कम हो गई है। कभी घाटी में हजारों की संख्या में सक्रिय रहने वाले आतंकियों की संख्या घटकर महज 150 से 200 के बीच रह गई है। यह जानकारी प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार फारूक खान ने रविवार (सितंबर 1, 2019) को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए दी। इस दौरान खान ने कहा कि आतंकियों को या तो जेल जाना होगा या फिर कड़ी सजा झेलनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से ही पाकिस्तान ने कश्मीर की शांति भंग करने की कोशिश की है। इसलिए पाकिस्तान से कुछ अच्छा होने की उम्मीद करना सबसे बड़ी गलती होगी। प्रदेश के हर नागरिक को उससे सावधान रहने की आवश्यकता है। फारूक खान कहा कि पिछले कुछ दशक से आतंकवाद से लड़ने में स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों की काफी मदद की है। उन्होंने कहा, “वे हमारे आँख-कान हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कहाँ क्या हो रहा है।”

फारूक खान ने कहा कि स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों को आतंकियों से लड़ने में हमेशा मदद की है और वो आगे भी लगातार अपना सहयोग देते रहेंगे। लोगों के सहयोग के बिना आतंकवाद से नहीं लड़ा जा सकता। उनके सहयोग के कारण ही आतंकवादियों की संख्या पहले के हजारों से घटकर 150 से 200 के बीच रह गई है। 

खान ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर कहा कि अब वहाँ पर हालात पूरी तरह से सामान्य हो रहे हैं। संचार की थोड़ी बहुत समस्या है, लेकिन 75 फीसदी लैंडलाइन फोन और कुछ इलाकों में मोबाइल सेवा बहाल हो चुकी है। जल्द ही सब जगह संचार नेटवर्क काम करेगा। आने वाले दिनों में पाबंदियों में और छूट दी जाएगी। राज्य के लोगों को डरने की आवश्यकता नहीं है। राज्य का पुनर्गठन होने से लोगों को फायदा मिलेगा। सरकार बहुत जल्द 50 हजार नौकरियाँ देने जा रही है। हर एक भर्ती पूरी तरह से पारदर्शी होगी।

वहीं हिरासत में लिए गए लोगों के रिश्तेदारों द्वारा उनसे मिलने न दी जाने की बात को खान ने पूरी तरह से स्वार्थी तत्वों का झूठा प्रचार करार देते हुए कहा कि जेल को नियमावली एवं कानून के अनुसार हिरासत में लिए गए व्यक्तियों से उनके रिश्तेदारों को मिलने दिया जाता है।

दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से चला रहे हैं मध्य प्रदेश की सरकार: कमलनाथ के वन मंत्री

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पहले से ही खींचतान मची हुई है। अब प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री उमंग सिंघार ने अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है। वन मंत्री सिंघार ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से राज्य की कमलनाथ सरकार को चला रहे हैं।

गंधवानी में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने कहा, ”माननीय दिग्विजय सिंह जी पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं। यह जगजाहिर है। पूरे प्रदेश की जनता जानती है। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता जानते हैं। जब वह सरकार ही चला रहे हैं तो उन्हें मंत्रियों से मिलने के लिए चिट्ठी लिखने की आवश्यकता ही नहीं है। जब वो सरकार ही चला रहे हैं तो फिर चिट्ठी लिखने की क्या आवश्यकता है?”

कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री के बयान को राज्य के मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने हाथों हाथ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट में मंत्री के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह हैं मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री, आप उन्हीं से सुन लीजिए…”

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने भी ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा, “अब तो स्वयं साक्षात मंत्री जी कह रहे हैं तो सवाल अहम हो जाता है। क्या संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रख दिया। क्या शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री से परे सत्ता के सूत्र किसी अन्य के पास हैं तो संवैधानिक संकट है? अराजकता है? लोकतंत्र का अपमान है ? महामहिम राज्यपाल संज्ञान लें।”

बता दें कि, दिग्विजय की तरफ से चिट्ठी में लिखा गया है, “मेरे द्वारा माह जनवरी 2019 से 15 अगस्त 2019 तक स्थानांतरण सहित विविध विषयों से संबंधित आवदेन पत्र आवश्यक कार्यवाही हेतु आपकी ओर अग्रेषित किए थे। मेरे द्वारा आपको पृथक से पत्र लिखकर मेरे पत्रों पर की गई कार्यवाही से अवगत कराने एवं यदि किसी प्रकरण में कार्यवाही संभव नहीं है तो उसकी जानकारी देने का भी अनुरोध किया था। मेरे द्वारा आपको प्रेषित पत्रों पर की गई कार्यवाही के बारे में जानने के लिए मैं आपसे 31 अगस्त 2019 के पहले भेंट करना चाहता हूँ। कृप्या 31 अगस्त से पहले मुझे भेंट के लिए समय प्रदान करने का कष्ट करें।”

गौरतलब है कि, दिग्विजय ने शनिवार (सितंबर 1, 2019) को बजरंग दल के तार ISI से जुड़े होने की बात कही थी। हालाँकि, बाद में कॉन्ग्रेस ने दिग्विजय सिंह के बयान से किनारा कर लिया था और अपने बयान के लिए उन्हें खुद सबूत पेश करने के लिए कहा था।