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बंगाल: निगम पार्षद ख़ालिद ख़ान की मौसेरे भाइयों ने की हत्या, भाजपा पर दोष मढ़ TMC ने मचाया उत्पात

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। शनिवार (24 अगस्त) की देर रात क़रीब 11.40 बजे आसनसोल नगर निगम के वॉर्ड-66 के तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्षद ख़ालिद ख़ान (45 वर्षीय) की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

मामले में खालिद के भाई अरमान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया हैं। ये हैं टिंकू शेख, शेख कादिर और शेख शाहिद। तीनों खालिदा खान के मौसेरे भाई हैं। लेकिन, इस हत्या का दोष भाजपा पर मढ़ने की कोशिश करते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया।

हत्या की य़ह घटना कुल्टी थाना के अंतर्गत बराकर-कल्याणोश्वरी रोड पर वॉर्ड-66 सिथित मनगड़िया की है। पुलिस ने आरोपित टिंकू शेख़ को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि शेख़ क़ादिर और शेख़ शाहिद फ़रार हैं।

ख़बर के अनुसार, तीनों आरोपित सगे भाई हैं। तीनों आरोपित भी मनगड़िया में ही रहते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हत्या के बाद बंगाल के उपभोक्ता मामलों के मंत्री साधन पांडे ने इसके पीछे भाजपा का हाथ बताया।

इसके बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया। मनगड़िया की ओर आने वाली सड़कों पर झाड़ियाँ रख दीं और टायरों को जलाकर मार्ग अवरोध किया। इसके अलावा बराकर बाज़ार को बंद करके अपना विरोध प्रदर्शन किया।

दैनिक जागरम के बंगाल संस्करण में छपी ख़बर

हत्या के बाद से तनाव की स्थिति बनी हुई है और दहशत का माहौल पसरा हुआ है। बता दें कि इससे पहले भी मृतक पर जानलेवा हमला हो चुका है। लोगों का कहना है कि शनिवार की रात को ख़ालिद ख़ान खाना खाने के बाद सड़क पर टहलने निकले थे। तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी।

गोली की आवाज़ सुनकर घटनास्थल पर लोगोंं की भाीड़ जुट गई। ख़ालिद को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ख़ालिद को चार गोलियाँ लगी थीं। घटना की सूचना मिलते ही मेयर जितेंद्र तिवारी, उपमेयर तब्बसुम आरा, बोरो चेयरमैन गुललाम सरवर समेत कई पार्षद व अन्य नेता अस्पताल पहुँचे। तनाव के कारण मनगड़िया क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

J&K: राहुल गाँधी ने पाक न्यूज वेबसाइट्स को दिया कच्चा माल, कहा- ‘ बर्बरता महसूस की’

श्रीनगर एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली लौटा दिए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी ने ट्वीट कर दावा किया कि उन्होंने उस बर्बरता को महसूस किया जो वहाँ के कश्मीरी झेल रहे हैं। इस बयान के बाद से वे पाकिस्तान की मीडिया में छाए हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया उनके बयानों को आधार बनाकर अपने प्रोपगेंडा को धार देने की कोशिश कर रहा है।

श्रीनगर से दिल्ली लौटने के बाद उन्होंने ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वतंत्रता और नागरिक आजादी पर अंकुश लगाए हुए 20 दिन हो गए हैं। लेकिन विपक्ष के नेताओं और मीडिया को जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे कठोर बल प्रयोग और प्रशासनिक क्रूरता का अहसास तब हुआ, जब हमने शनिवार को श्रीनगर का दौरा करने की कोशिश की।”

जाहिर है इस समय पाकिस्तान का और कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं का रोना एक ही हैं। इसलिए पाकिस्तान ने तुरंत राहुल गाँधी के बयान को अपनी मीडिया कवरेज में प्राथमिकता दी। पाकिस्तान के मशहूर अखबार द डॉन ने अपनी खबर में उनके शब्दों को हेडलाइन बनाकर लिखा कि कॉन्ग्रेस नेता ने अपने विक्षुब्ध अनुभवों के बारे में ट्वीट करते हुए बताया कि उन्हें प्रतिनिधिमंडल के साथ ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ में जाने से रोका गया।

dawn की खबर का स्क्रीनशॉट

वहीं, टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद में कश्मीर पर कवरेज करते हुए छापा गया कि मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद वहाँ प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, जिस कारण कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और अन्य 11 नेताओं को श्रीनगर में उतरने के बाद तुरंत दिल्ली भेज दिया गया। यहाँ इस अखबार ने कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के नाम का भी जिक्र किया जो राहुल गाँधी के साथ उनके प्रतिनिधिमंडल में थे।

पाकिस्तानी मीडिया में छाए रहे राहुल गाँधी

इसी तरह फ्रंटियर पोस्ट और द स्टेट्समैन जैसी न्यूज वेबसाइट्स ने भी राहुल की दिल्ली वापसी की खबर प्रमुखता से चलाई। जैसे वहाँ भारतीय नेताओं का प्रतिनिधिमंडल नहीं, पाकिस्तान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का जायजा लेने दौरे पर पहुँचा हो।

स्पष्ट है कि इस समय अपना हित खोजने के लिए पाकिस्तानी राजनेता और वहाँ का मीडिया सिर्फ़ कॉन्ग्रेस नेताओं के बयानों पर आश्रित है। वह कश्मीर में अपने मनमुताबिक ‘अराजक’ स्थिति पर लिखने के लिए कॉन्ग्रेस के नेताओं को फॉलो कर रहा है। वर्तमान सरकार तो उनसे इस मसले को लेकर क्या किसी मसले पर बात करने को तैयार नहीं है। क्योंकि आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपनाया कड़ा रुख अभी तक बरकरार है।

गौरतलब है कि कश्मीर में बर्बरता महसूस किए जाने वाले बयान के अलावा राहुल कह चुके हैं कि कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हैं। वायरल होती अपनी एक वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि सरकार ने, गवर्नर ने उन्हें बुलाया था। वह बोलते हैं “सरकार कह रही थी कि सब नॉर्मल है, लेकिन अगर सब नॉर्मल है तो मुझे जाने क्यों नहीं दे रहे? हम किसी भी एरिया में जाने को तैयार हैं, अगर 144 लागू है तो हम जेल जाने को भी तैयार हैं।”

उनके इस वीडियो का भी पाकिस्तानी मीडिया धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। इमरान सरकार में मंत्री फवाद हुसैन ने लिखा, “मोतीलाल नेहरू के परपोते, जवाहरलाल नेहरू के पोते, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को उनके पूर्वजों के यहाँ नहीं जाने दिया गया। यह दिखाता है कि किस तरह आरएसएस और नाजी विचारधारा ने इंडिया पर कब्जा कर लिया है।”

कांचीपुरम में मंदिर के पास धमाका, आतंकी हमलों को लेकर हाई अलर्ट है तमिलनाडु

श्रीलंका से लश्कर आतंकियों की घुसपैठ के मद्देनजर तमिलनाडु हाई अलर्ट है। इस बीच, राज्य के कांचीपुरम में एक मंदिर के पास धमाके से एक की मौत हो गई और पॉंच अन्य जख्मी हो गए।

धमाका कैसे हुआ यह स्पष्ट नहीं है। हालॉंकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस धमाके को हाई अलर्ट से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मनमपति मंदिर के एक टैंक की सफाई के दौरान धमाका हुआ। सफाई के दौरान एक अज्ञात वस्तु के अचानक फटने से रविवार (अगस्त 25, 2019) को धमाका हुआ। बम निरोधक दस्ता इस बात की जाँच कर रहा है कि किस कारण से धमाका हुआ और उसमें कौन सा विस्फोटक पदार्थ था।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “मनमपति में मंदिर के पास एक टैंक से गाद निकाला जा रहा था। इसी दौरान वहाँ के मजदूरों को एक अज्ञात वस्तु मिली। उन्होंने उसे खोलने की कोशिश तो वह फट गया, जिसमें के. सूर्या नामक एक शख्स की मौत हो गई और 5 अन्य लोग घायल हो गए।”

कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया गया है कि मंदिर के पास पांच संदिग्ध लोग घूम रहे थे। इनमें से एक के पास बॉक्स था। जब उसने बॉक्स को खोलने की कोशिश की, तो धमाका हो गया।

बता दें कि, प्रदेश में आतंकियों के घुसने की खबर के बाद अलर्ट जारी किया गया है, लेकिन पुलिस ने इस आतंकवादी को लेकर जारी अलर्ट से इसका किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि शुरू में तो धमाके की बात सुनकर वो भी हैरान थे, लेकिन जब घटनास्थल पर जाकर देखा तो यह अलग तरह का धमाका था। उन्होंने बताया कि घायलों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है।

गौरतलब है कि, श्रीलंका के रास्ते भारत में 6 लश्कर आतंकियों की घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट के बाद 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जिसमें से एक महिला भी शामिल है। तमिलनाडु के कोयंबटूर और केरल के कोच्चि से दो-दो लोगों को पकड़ा गया था। केरल पुलिस ने इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। और फिर कोयंबटूर पुलिस ने 2 और संदिग्धों के उससे संबंध रखने के में हिरासत में लिया है।

कॉन्ग्रेस NSUI की राष्ट्रीय महासचिव ने सावरकर को बताया गद्दार, कहा- ‘कालिख पोत कर ठीक किया’

एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर ज़हर उगला है। सुरभि ने वीर सावरकर को न सिर्फ़ देशद्रोही और गद्दार कह कर सम्बोधित किया बल्कि यह भी दावा किया कि वे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या में शामिल थे। सुरभि ने ट्विटर पर लिखा कि सावरकर की प्रतिमा उन स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा के साथ नहीं लगाई जानी चाहिए, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी। सुरभि ने लिखा कि सावरकर अंग्रेजों को क्षमा याचिकाएँ लिखा करते थे।

यहाँ यह गौर करने वाली बात है कि कॉन्ग्रेस के संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लकड़ा द्वारा वीर सावरकर की प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोतने और उन्हें जूतों का हार पहनाए जाने को सही ठहराया। इस कुकृत्य के लिए सुरभि ने अक्षय को बधाई भी दी। भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी को देशद्रोही, गद्दार कह कर उनकी प्रतिमा का अपमान और फिर उस अपमान का समर्थन!

बता दें कि कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI)’ ने आधी रात में वीर सावरकर की प्रतिमा को जूतों का हार पहनाया और चेहरे पर कालिख पोत दी थी। मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस में आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर सावरकर की प्रतिमा की स्थापना की थी।

वीर सावरकर की प्रतिमा को एनएसयूआई दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लकड़ा ने जूते की माला पहनाई थी। अक्षय ने समर्थकों संग मिल कर प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोत दिया था। इस दौरान एनएसयूआई के छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प भी हुई थी।

मेरे देश के अनाड़ी PM को ट्रेनिंग की ज़रूरत, कहता है कि जर्मनी-जापान पड़ोसी हैं: हिना रब्बानी खार

पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने अपने ही देश के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को खरी-खरी सुनाई है। पाकिस्तान की संसद में बोलते हुए उन्होंने न सिर्फ़ इमरान के कॉमन सेन्स पर सवाल खड़े किए बल्कि पाक पीएम को अनाड़ी भी बता दिया। हिना रब्बानी खार ने कहा कि इमरान को न भूगोल का ज्ञान है और न ही इतिहास का। हिना रब्बानी ने कहा, “हमारे पीएम कहते हैं कि जापान और जर्मनी पड़ोसी हैं जबकि भूगोल कहता है कि जापान ईस्ट एशिया में है और जर्मनी यूरोप में है। हमारे पीएम कहते हैं कि वर्ल्ड वॉर 2 में दोनों मुल्क़ दुश्मन थे जबकि इतिहास कहता है कि दोनों मित्र थे।

हिना रब्बानी खार का संसद में दिया यह भाषण सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपने ही देश में बुरी तरह घिर गए हैं और उनके ही देश के नेता उन पर सवाल खड़े कर रहे। आप भी इस वीडियो को देखिए:

इमरान ख़ान से नाराज़ हिना रब्बानी ने कहा कि पाक पीएम ने पाकिस्तानियों को हँसी का पात्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि इमरान देश को शर्मिंदा कर रहे हैं। हिना रब्बानी ने पाक पीएम को लताड़ते हुए कहा कि उन्हें ट्रेनिंग की ज़रूरत है। 2011 से 2013 तक पाक की विदेश मंत्री रहीं हिना रब्बानी खार पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता हैं। मात्र 33 वर्ष की उम्र में वह पाकिस्तान की सबसे युवा विदेश मंत्री बनी थीं।

इससे पहले इमरान ख़ान की पूर्व पत्नी रेहम ने भी उनकी नीतियों पर सवाल खड़े किए थे। रेहाम ने कहा था कि इमरान ने कश्मीर पर भारत के साथ डील कर लिया है और वह बिक गए हैं। हाल ही में पाकिस्तानी संसद में एक नेता ने अपने ही मंत्री को कुत्ता और बेशर्म कह कर सम्बोधित किया था।

भारत G-7 का हिस्सा नहीं फिर भी वार्षिक सम्मलेन में PM मोदी को मिला बुलावा, जानिए वजह

जी-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बियारित्ज़ शहर में पहुँचे हैं। हाल ही में फ्रांस दौरे के बाद यूएई और बहरीन की यात्रा के बाद फिर से फ्रांस पहुँचे हैं। जी-7 राष्ट्र समूह में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इस बैठक में भारत क्यों शामिल हो रहा है क्योंकि वह जी-7 का हिस्सा तो है ही नहीं? दरअसल, भारत जी-7 की वार्षिक समिट में फ्रांस के आमंत्रण पर शामिल हो रहा है।

फ्रांस की मेजबानी में हो रहे इस समिट में राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन ने भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और रवांडा को इन्विटेशन भेजा है। उन्होंने कहा कि भारत का इस समिट में रहना ज़रूरी है क्योंकि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर बिना भारत से राय लिए आगे नहीं बढ़ा जा सकता। जी-7 के आयोजक देश के रूप में फ्रांस के पास यह अधिकार है कि वह समूह के बाहर के अन्य देशों को भी बुला सकता है।

इस समिट में कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। बियारित्ज़ पहुँचने से पहले पीएम मोदी ने बहरीन में 15,000 से भी अधिक प्रवासी भारतीयों को सम्बोधित किया। अरुण जेटली के निधन के बाद पीएम मोदी देश लौटना चाहते थे लेकिन जेटली की पत्नी व बेटे ने पीएम से फोन पर अपील की कि वे अपना विदेश दौरा बीच में न छोड़ें।

राजीव गाँधी को ‘आधुनिक भारत के पिता’ के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करेंगी राजस्थान और MP की सरकारें

मध्य प्रदेश और राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकारों ने राजीव गाँधी की जयंती से पहले कई ऐसे निर्णय लिए जो बहस का मुद्दा नहीं बने। अगर भाजपा ने किसी स्वतंत्रता सेनानी या किसी महापुरुष को लेकर ऐसा निर्णय लिया होता तो कई लोग बवाल खड़ा करते हुए कहते कि सरकार पाठ्यक्रम से छेड़छाड़ कर रही है या उसका भगवाकरण कर रही है। सबसे पहले बात मध्य प्रदेश की। मध्य प्रदेश की सरकार ने कॉलेजों में राजीव गाँधी के ‘जीवन, विचारधारा और नीतियों’ को पढ़ाने का निर्णय लिया था।

इसके लिए कॉलेजों में ख़ास सेशन आयोजित किए गए। ऐसे सेशन साल भर आयोजित किए जाते रहेंगे। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर हंगामा मचाने वाले लोगो ने इसपर चूँ तक नहीं किया। मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों को राजीव गाँधी के बारे में ग़लत जानकारियाँ दी गई हैं? यहाँ सवाल उठता है कि ये गलत जानकारियाँ किसने दी? और कॉन्ग्रेस के पास इस बात के क्या सबूत हैं कि ये जानकारियाँ गलत हैं? क्या राज्य सरकारों का काम यही है कि राजीव गाँधी की पॉजिटिव इमेज तैयार की जाए।

सोचिए अगर भाजपा ने वीर सावरकर के बारे में पढ़ाने के लिए कॉलेजों में ख़ास सेशन का इंतजाम किया होता तो क्या-क्या आरोप लगते? और सावरकर की नेगेटिव इमेज बनाने में तो कॉन्ग्रेस का योगदान भी है क्योंकि नेहरू काल में उन पर मुक़दमे भी चले। हालाँकि, वे बाइज्जत बरी हुए। भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस छात्रों को राजीव गाँधी के बारे में पढ़ाए लेकिन सिर्फ़ उन्हीं के बारे में क्यों? भाजपा का सवाल यह है कि बाकी महापुरुषों के बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाना चाहिए?

क्या कॉन्ग्रेस छात्रों को केवल राजीव गाँधी के बारे में पढ़ा कर पार्टी एक परिवार विशेष के लोगों को हाईलाइट नहीं कर रही? राजनीति तक तो ठीक है लेकिन अब शिक्षा व्यवस्था को भी इसके चपेट में लेने की कोशिश हो रही है। इसी तरह राजस्थान सरकार ने भी पाठ्यक्रम में राजीव गाँधी की प्रशंसा में लिखे आलेखों को पढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत के इतिहास के अंतर्गत राजीव गाँधी को ‘आधुनिक भारत के पिता’ के रूप में पढ़ाया जाएगा।

राजीव गाँधी के बारे में क्या पढ़ाया जाना है, इस बारे में भी सरकार तय करेगी। सरकार इसके लिए कुछ लोगों को चुनेगी, जो राजीव गाँधी पर आलेख लिखेंगे। इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सीधा अर्थ है कि कॉन्ग्रेस सरकार अपने पसंद के इतिहासकारों व अकादमिक विशेषज्ञों को चुनेगी जो कॉन्ग्रेस पार्टी के अजेंडे के तहत राजीव गाँधी पर चैप्टर तैयार करेंगे।

मेरे पास फाइलों को पढ़ने का समय नहीं था, अधिकारियों ने की है गड़बड़ियाँ: चिदंबरम ने मामला शिफ्ट करने की कोशिश की

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ब्यूरोक्रेट्स की तरफ़ शिफ्ट करने की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान भी उनके वकील कपिल सिब्बा ने कहा था कि आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी अप्रूवल देने में भारत सरकार के 6 सचिवों का हाथ था। उन्होंने पूछा था कि उन्हें क्यों नहीं गिरफ़्तार किया गया है? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिदंबरम ने सीबीआई को कहा कि उनके पास सभी फाइलों को पढ़ने का समय नहीं रहता था इसीलिए वह एफआईपीबी के अधिकारियों की अनुशंसा पर कार्य करते थे।

चिदंबरम ने सीबीआई से पूछताछ के दौरान कहा कि वे सभी अधिकारी अपने काम में दक्ष थे और फाइलों को वही लोग देखा करते थे। उनके इस बयान के बाद अब उनके कार्यकाल में वित्त मंत्रालय में तैनात रहे कुछ अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर सकती है। चिदंबरम ने कहा कि अगर कोई अनियमितता हुई है तो उन्हें ज़रूर पता होगा। अपने परिवार के सदस्यों से मिलने के समय इमोशनल चिदंबरम ने कहा कि वे सरकार के ‘आतिथ्य का आनंद’ ले रहे हैं।

पूर्व डीईए सचिव डी सुब्बाराव ने जाँचकर्ताओं को बताया था कि ऑफिस रिकार्ड्स के अनुसार एफडीआई अप्रूवल देने में हुई अनियमितताओं को एफआईपीबी के संज्ञान में नहीं लाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, ऐसा निर्णय लेने से पहले प्रस्ताव को रिज़र्व बैंक के पास भेजा जाना चाहिए था।

चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों की अनुशंसा पर निर्णय लिया (साभार: ABP)

आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने पाँच देशों के सम्बंधित विभागों को पत्र भेज कर कुछ अहम जानकारियाँ माँगी हैं। ये वही देश हैं, जहाँ से रुपयों का अवैध लेनदेन किया गया और ट्रांसफर्स किए गए। सीबीआई ने यूके, बरमूडा, मारीशस, सिंगापुर और स्विट्ज़रलैंड को पात्र भेजा है। बता दें कि अभी पी चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में हैं।

‘लोग घरों में मेरा शो नहीं देखने देते’ कहने वाले रवीश जी, लोगों को आपके बेकार शो मे रूचि नहीं रही

एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार का दोहरा रवैया फिर सामने आया है। अगर आप कभी भूले-भटके उनके टीआरपी-विहीन शो ‘प्राइम टाइम’ देख लेते होंगे तो आपको पता होगा कि रवीश हमेशा टीवी से दूर रहने की सलाह देते हैं। “टीवी मत देखिए“, “न्यूज़ में आजकल केवल एंकर चिल्लाते हैं“, “टीवी पर कुछ भी मत देखिए“- ये सभी रवीश के पसंददीदा शब्द रहे हैं। रवीश अक्सर झुंझलाहट में कभी पीएम मोदी को, कभी मीडिया को तो कभी-कभार जनता को ही कोसते हुए नज़र आते हैं।

अब रवीश कुमार के 2 वीडियो वायरल हुए हैं। पहले वाले वीडियो में वह लोगों को टीवी उठा कर फेंक देने की सलाह दे रहे हैं। जबकि दूसरे वाले में अपने शो की टीआरपी कम होने के लिए मोदी को दोष दे रहे हैं। पहले वीडियो में रवीश कुमार पूछ रहे हैं कि क्या आप उस टीवी को नहीं छोड़ सकते, जो भारतीय लोकतंत्र को उखाड़ फेंकने के लिए दिन-रात एक किए हुआ है? अर्थात, इस वीडियो में रवीश लोगों को टीवी से दूर रहने और टीवी न देखने की सलाह दे रहे हैं।

अब बात दूसरी वायरल वीडियो की। इस वीडियो में रवीश अपने पहले वाले बयान को ही काटते हुए नज़र आ रहे हैं। विरोधाभाष की पराकाष्ठा तय करते हुए रवीश इस वीडियो में कहते हैं कि जब उनका शो आता है तो लोग टीवी बंद कर देते हैं। उन्होंने अपने एक फैन के सन्देश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जब वह टीवी पर रवीश का शो देखने बैठता है तो उसका बड़ा भाई टीवी बंद कर देता है। साथ ही रवीश पूछते हैं कि इस देश में क्या हो रहा है? दोनों वीडियो को यहाँ देखिए:

पहले वीडियो में टीवी को फोड़ने की बात करने वाले रवीश दूसरे वीडियो में टीवी बंद भर करने से नाराज़ हो जाते हैं। रवीश ने ‘मीडिया द्वारा बनाए गए माहौल’ पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शो के समय टीवी बंद कर देना तानाशाही है। लोगों ने रवीश कुमार की इस कुंठा युक्त विरोधाभासी दोहरे रवैये पर जमकर चुटकी ली।


बात न मानने पर झूठी ख़बरें चला अधिकारियों को करते थे बदनाम: 5 पत्रकारों के ख़िलाफ़ ‘गैंगस्टर एक्ट’

ग्रेटर नोएडा पुलिस ने 5 पत्रकारों के ख़िलाफ़ ‘गैंगस्टर एक्ट’ के तहत मामला दर्ज किया है। ये पत्रकार अपने पेशे का ग़लत इस्तेमाल करते हुए पुलिस अधिकारियों की इमेज ख़राब किया करते थे। ये अपने पोर्टल्स पर पुलिस के जवानों के ख़िलाफ़ जानबूझ कर ऐसे कंटेंट्स डालते थे, जिससे उनकी इमेज ख़राब हो। ये पुलिस बलों पर दबाव डाल कर काम निकलवाने की कोशिश करते थे। इनमें से 4 आरोपित पत्रकारों को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि पाँचवा फरार है। उनके ऊपर 25,000 रुपए का इनाम रखा गया है। इनमें से 3 पहले से ही भ्रष्टाचार के मामलों में ज़मानत पर बाहर है।

ये सभी आरोपित पुलिस पर अपने अजेंडे के अनुसार काम करने के लिए दबाव बनाते थे, जैसे- किसी आरोपित की मदद करना। इसके बदले वे आरोपित से रुपए ऐंठते थे। गौतम बुद्ध नगर के डीएम बीएन सिंह ने कहा कि एक पत्रकार की हैसियत से इन्होने थानों व पुलिस के बीच अपनी पैठ बना ली थी और वे इसका नाजायज फायदा उठाते थे। पाँचों पत्रकारों पर आरोप है कि इन्होने पुलिस की क़ानूनी कार्यवाहियों में बाधा डाला है।

अगर कोई पुलिस अधिकारी इनकी बात नहीं मानता था या फिर इनके अजेंडे के अनुसार कार्य नहीं करता था तो ये सभी आरोपित पत्रकार ऐसी-ऐसी खबरें बनाते थे, जिनसे उस अधिकारी की इमेज ख़राब हो। पुलिस ने उनके पोर्टल्स पर कुछ ऐसी भ्रामक ख़बरें भी दिखाईं। इनमें से एक ख़बर में पुलिस पर ‘जाति के आधार पर ट्रांसफर पोस्टिंग’ की बात कही गई थी। एक अन्य ख़बर में उन्होंने पुलिस पर ‘सैंड माइनिंग’ करने का आरोप लगाया था।

इन पत्रकारों के द्वारा निशाने पर लिए गए अधिकारियों के ख़िलाफ़ कंटेंट्स को व्हाट्सप्प और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर फैलाया जाता था। एफआईआर में दर्ज किया गया है कि इन्होने ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का ग़लत फायदा उठाते हुए आधारहीन ख़बरें चलाईं और पुलिस की इमेज को नेगेटिव करने की कोशिश की। आरोपितों ने इन बातों का खंडन करते हुए कहा कि अगर पुलिस को उनके लेखों से दिक्कत थी तो पहले उन्हें नोटिस भेजनी चाहिए थी।