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पश्चिम बंगाल का राजभवन वक्फ का, देश का सबसे बड़ा ‘कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी उसी का: बवाल होने पर बंगाल वक्फ बोर्ड ने पल्ला झाड़ा… तो कौन ले रहा ₹147 किराया?

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति है। जब पोस्ट वायरल हुआ तो पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड ने उस दावे के खारिज कर दिया। बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने कहा कि बोर्ड के पास इस बात की कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है कि बंगाल राजभवन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा कि राज्य में 80,000 वक्फ संपत्तियाँ हैं।

मुंशी ने कहा कि बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति के तहत पंजीकृत नहीं है। साहिदुल मुंशी ने कहा, “हम वक्फ रजिस्टर रखते हैं और जो हमारी संपत्तियाँ हैं उनका हम उसमें जिलेवार नामांकन हैं। बंगाल में वक्फ की करीब 8,000 नामांकित संपत्तियाँ हैं, जबकि कुल संपत्ति करीब 80,000 हैं।” उन्होंने कहा कि कोई भी RTI डालकर इसकी जानकारी हासिल कर सकता है।

बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने भले ही बंगाल राजभवन को वक्फ संपत्ति मानने से इनकार कर दिया, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने यह दावा किया था। बंगाल में सामूहिक शिक्षा मंत्री चौधरी ने 16 नवंबर 2024 को जी मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि धर्मतल्ला से लेकर कॉलिन स्ट्रीट तक वक्फ संपत्ति है।

हालाँकि, राजभवन के वक्फ संपत्ति होने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस एवं प्रभात खबर जैसे अंग्रेजी एवं हिंदी के प्रसिद्ध अखबारों ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी। इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर 2013 को अपने वेब पोर्टल की रिपोर्ट में कहा कि 12 इमामों सहित 22 मुस्लिम संगठनों ने माँग की थी कि मुअज्जिन और इमामों को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को किराए पर देने से उत्पन्न राजस्व से मासिक वजीफा दिया जाए।

ऑल बंगाल इमाम और मुअज्जिन समिति के अध्यक्ष एटीएम रफीकुल हसन ने कहा था, “हम भिखारी नहीं हैं। हम अपना अधिकार माँग रहे हैं। राज्य भर में 29,000 से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं। कोलकाता में ही गवर्नर हाउस, राज्य विधानसभा और आकाशवाणी भवन जैसे कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान वक्फ संपत्ति पर बने हैं। हमारी माँग है कि वक्फ बोर्ड को मौजूदा बाजार दर के अनुसार किराया दिया जाए।”

ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव एमडी कमरुज्जमां ने कहा था कि पुलिस-प्रशासन को अतिक्रमणकारियों से वक्फ संपत्तियों को खाली कराना चाहिए और उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाना चाहिए। इस संबंध में इमामों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वक्फ बोर्ड को एक ज्ञापन भी सौंपा था। तब वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने भी राज्य में फैले वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण की बात स्वीकार की।

पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था 356 बीघे में फैले गवर्नर हाउस से वक्फ बोर्ड को प्रति माह केवल 27.25 रुपए किराया मिलता है, जो नाकाफी है। उन्होंने कहा था कि कोलकाता में ही करीब 1,273 एकड़ जमीन वक्फ की है। ये नामांकित संपत्तियों में से हैं। उन्होंने कहा था कि कई संपत्तियाँ ऐसी हैं, जिनका नामांकन किया जाना बाकी है।

इसी तरह, हिंदी अखबार प्रभात खबर ने अपने पोर्टल पर 24 जनवरी 2014 के लेख में कहा है कि कोलकाता में 27 एकड़ में फैले राजभवन का किराया केवल 147 रुपया है। राजभवन वक्फ की संपत्ति है और अब्दुल मतीन एवं मोहम्मद अयूब इस वक्फ संपत्ति के मोतवल्ली (केयर टेकर) हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1797 ईस्वी में इस संपत्ति को वक्फ किया गया था। हालाँकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस संपत्ति को किसने दान की थी।

तब पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था, “यह मामला राज्यपाल के निवास स्थान का है। इसलिए हम लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने से पहले इस मुद्दे पर राज्य सरकार से बात करेंगे।” उन्होंने कहा था कि कोलकाता में राजभवन के अलावा और भी कई बड़ी संपत्तियाँ वक्फ की हैं। इन संपत्तियों के किराए के नाम पर ‘भीख’ दी जाती है।

इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 20+ बीघा जमीन पर फैले देश का सबसे बड़ा गोल्फ कोर्स ‘रॉयल कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी वक्फ की संपत्ति है। प्रिंस अनवर शाह चौराहे पर बनी टीपू सुल्तान मस्जिद के नाम यह वक्फ संपत्ति है। किराए के मुद्दे पर काफी विवाद के बाद गोल्फ कोर्स प्रबंधन ने कुछ वर्ष पहले एक लाख रुपए मासिक किराया देना मंजूर किया था।

इसके अलावा, बैंकशाल कोर्ट के सामने बनी बहुमंजिली ‘शॉ वालिस बिल्डिंग’ को भी वक्फ संपत्ति बताया गया है। इस इमारत का किराया 32,000 रुपए दिया जाता और काफी तूल के बाद इसका वक्फ बोर्ड को छह लाख रुपए मिलता है। हालाँकि, इस किराए से भी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं है। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा, आकाशवाणी भवन, इडेन गार्डेस को भी वक्फ की संपत्ति बताया गया था।

अब सवाल है कि वर्तमान बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सहिदुल मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन के वक्फ बोर्ड होने की जानकारी नहीं है, तो पहले के अध्यक्षों ने इस तरह का दावा क्यों किया। इसके अलावा, राजभवन की जमीन के लिए 147 रुपए का किराया किसे दिया जाता है और किस आधार पर दिया जाता है। क्या वर्तमान वक्फ बोर्ड ने इस किराया को लेने से यह कहकर कभी इनकार किया कि राजभवन की संपत्ति वक्फ है इसका प्रमाण उसके पास नहीं है और इसलिए वह इसका किराया नहीं ले सकता।

संभवत: पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के किसी भी अधिकारी या अध्यक्ष या किसी मुस्लिम संगठन ने ऐसा नहीं कहा। ऐसे में मुंशी का हालिया बयान संदेह उत्पन्न करने वाला है। तो क्या वर्तमान वक्फ कानून को ध्यान में रखते हुए मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन वक्फ संपत्ति नहीं है, क्योंकि बंगाल की कई संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आ जाएँगी, जिन पर मुस्लिम संगठन एवं वक्फ बोर्ड पहले से दावा करते रहे हैं?

बता दें कि देश के विभिन्न हिस्सों में वक्फ बोर्डों द्वारा हजारों साल पुराने मंदिरों से लेकर हिंदुओं के गाँव के गाँव पर वक्फ संपत्ति होने का दावा ठोका जा रहा है। कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामले सामने आए हैं। इस बीच मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर वक्फ बोर्ड में हाहाकार मचा हुआ है।

रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड भारत की तीसरी सबसे अधिक संपत्ति वाली संस्था है। दिसंबर 2022 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 8,65,646 अचल संपत्ति थीं, जिसकी कीमत 9.4 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है। वहीं, साल 2009 तक वक्फ के पास चार लाख एकड़ ज़मीन पर 3 लाख पंजीकृत संपत्तियाँ थीं। पिछले 13 सालों में वक्फ की संपत्ति दोगुनी हो गई है।

धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा में शामिल हुए दिग्विजय सिंह के कॉन्ग्रेसी MLA बेटे जयवर्धन सिंह, बोले- ‘हिंदुओं में एकता जरूरी, भारत है हिंदू राष्ट्र’

मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) में ‘हिंदू एकता यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की एकता को बढ़ावा देना और जात-पात की दीवारें गिराना है। इस यात्रा में राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब कॉन्ग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने इसमें शिरकत की। जयवर्धन ने यात्रा में हिस्सा लेकर सनातन धर्म और हिंदू एकता के प्रति अपना समर्थन जताया।

धर्म के लिए एकजुटता जरूरी: जयवर्धन सिंह

जयवर्धन सिंह ने यात्रा के दौरान कहा, “यह यात्रा किसी पार्टी की नहीं बल्कि सनातन धर्म की है। जात-पात को खत्म कर समाज को एकजुट करना जरूरी है। संत अगर सनातन बोर्ड बनाने की बात करते हैं, तो यह विचार सही दिशा में है। हम सनातन के भक्त हैं और हमेशा रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास है, जिसमें सभी समाजों को समान सम्मान दिया जाना चाहिए। जयवर्धन ने हिंदू धर्म को भारत की आत्मा बताते हुए कहा, “हर धर्म की शुरुआत किसी न किसी स्थान से हुई है, और हिंदू धर्म की शुरुआत भारत से हुई है। इसलिए भारत स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र है।”

जहाँ जयवर्धन सिंह सनातन धर्म की बात कर रहे हैं, वहीं उनके पिता दिग्विजय सिंह का भगवा आतंकवाद पर बयान अक्सर चर्चा में रहा है। जयवर्धन की इस यात्रा में भागीदारी को उनके पिता से अलग विचारधारा के तौर पर देखा जा रहा है। जयवर्धन ने जाति आधारित भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारे कर्म सबसे अहम हैं। भगवान कृष्ण ने भी यही कहा है कि कर्मों के जरिए समाज का कल्याण होगा। अगर जात-पात की सीमाओं को खत्म करेंगे, तो समाज और देश दोनों आगे बढ़ेंगे।”

धीरेंद्र शास्त्री ने 21 नवंबर को इस यात्रा की शुरुआत बागेश्वर धाम से की, जो 160 किलोमीटर की दूरी तय करके 29 नवंबर को ओरछा में समाप्त होगी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और हिंदुओं को एकजुट करने के लिए है। जात-पात, बोली और भाषा के विभाजन को मिटाने के लिए हमें एकता के मार्ग पर चलना होगा।” शास्त्री ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को बचाने और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों को इस यात्रा का हिस्सा बनने का न्योता दिया।

धीरेंद्र शास्त्री और जयवर्धन सिंह के बयानों ने हिंदू एकता और जातिवाद के खिलाफ खड़े होने के संदेश को एक नया आयाम दिया है। यह यात्रा धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर कॉन्ग्रेस के भीतर।

दलित लेखराज की बच्ची का नाम सकीना… राजस्थान के मदरसों में 3000+ गैर मुस्लिम बच्चे, RTI में खुलासा: बजरंग दल का आरोप- इस्लामी शिक्षा से हो रहा धर्मांतरण

राजस्थान के मदरसों में दलित हिन्दू बच्चों को मुस्लिम बनाने की साजिश रची जा रही है, उनका धीमे-धीमे इस्लामी शिक्षा में माध्यम से धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया जा रहा है। यह आरोप एक RTI के सामने आने के बाद बजरंग दल के लोगों और RTI एक्टिविस्ट ने लगाए हैं।

बजरंग दल ने बताया है कि हाल ही में एक हिन्दू दलित बच्ची का नाम मदरसे में सकीना दर्ज किया गया था। उसके पिता का नाम अभी भी हिन्दू ही है। बजरंग दल एक ही मदरसे में 6 हिन्दू छात्रों के धर्मांतरण का आरोप लगाया था। इस मामले के बाद अब सामने आई एक RTI से चिंताएँ और बढ़ गई हैं।

RTI में सामने आया है कि राजस्थान के मदरसों में 3000 से अधिक गैर मुस्लिम बच्चे तालीम ले रहे हैं। इन बच्चों में अधिकांश संख्या हिन्दू बच्चों की बताई जा रही है। सरकारी या निजी स्कूलों में ना जाकर मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों में लगभग 50% लड़कियाँ हैं।

इसी RTI में सामने आया है कि इन मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों की संख्या तो सैकड़ों में है लेकिन गैर मुस्लिम शिक्षक ना के बराबर हैं। इस मामले में RTI कार्यकर्ता और बजरंग दल के लोगों ने धर्मांतरण और इस्लामी तौर तरीकों में ढालने की बड़ी साजिश की तरफ इशारा किया है।

कैसे सामने आई जानकारी?

राजस्थान हाई कोर्ट के वकील सुजीत स्वामी ने राजस्थान मदरसा बोर्ड को एक RTI लगाई थी। इसमें उन्होंने पूछा था कि राजस्थान के भीतर सभी जिलों के मदरसों में कितने गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ पढ़ रही हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी माँगी थी कि राजस्थान में मदरसों में कितने गैर मुस्लिम शिक्षक-शिक्षिकाएँ हैं। मदरसा बोर्ड ने यह जानकारी सुजीत स्वामी को जिलेवार दी है। इसमें कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह RTI ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इस जानकारी के सामने आने के बाद बजरंग दल और सुजीत स्वामी ने प्रश्न खड़े किए हैं।

क्या जानकारी सामने आई?

राजस्थान मदरसा बोर्ड ने बताया है कि राज्य के मदरसों में शिक्षा सत्र 2024-25 में कुल 3056 गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ तालीम हासिल कर रहे हैं। इनमें से 1600 छात्र हैं जबकि 1456 छात्राएँ हैं। मदरसों में पढ़ने वाले गैर मुस्लिम छात्र-छात्राओं की सबसे बड़ी संख्या कोटा जिले में हैं। कोटा में 184 छात्राएँ जबकि 156 छात्र पढ़ रहे हैं। इसके बाद टोंक जिले में गैर मुस्लिम 161 छात्र और 147 छात्राएँ मदरसों में पढ़ रहे हैं। चित्तौड़गढ़ में 115 गैर मुस्लिम छात्र और 98 छात्राएँ पढ़ रहे हैं।

राजस्थान गैर मुस्लिम

गैर मुस्लिम छात्र मंजूर, लेकिन शिक्षक नहीं?

इस RTI में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्र-छात्राओं की संख्या भले ही हजारों में है लेकिन गैर मुस्लिम शिक्षक लगभग नदारद हैं। RTI में बताया गया है कि जिस कोटा में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ मदरसों में हैं, वहाँ मदरसों में पढ़ाने वाला मात्र एक शिक्षक ही गैर मुस्लिम है। RTI में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि राजस्थान के 33 जिलो में से 15 जिलों में मदरसों में गैर मुस्लिम शिक्षिकाओं की सँख्या शून्य है।

वहीं बाकी के 10 जिलों में गैर मुस्लिम शिक्षकाओं की संख्या मात्र 1 है। इसी तरह जिले ऐसे हैं जहाँ गैर मुस्लिम पुरुष शिक्षक या तो 0 हैं या फिर 1 ही हैं। गैर मुस्लिम छात्र-छात्राओं की संख्या हजारों में शिक्षकों की संख्या दहाई में भी ना होना कई प्रश्न खड़े कर रहा है। पूरे राजस्थान भर में कुल 261 गैर मुस्लिम शिक्षक-शिक्षिकाएँ मदरसों में पढ़ा रहे हैं। इन गैर मुस्लिम पुरुष शिक्षकों में भी 170 शिक्षक मात्र 10 जिलों में ही हैं।

राजस्थान के मदरसों में गैर मुस्लिम शिक्षक

सुजीत स्वामी ने इसको लेकर ऑपइंडिया से बताया, “मदरसों में गैर मुस्लिम छात्रों का पढ़ना असामान्य बात है क्योंकि अधिकांश जगह पर सरकारी स्कूल भी मौजूद हैं। जिन मदरसों में यह छात्र-छात्राएँ पढ़ रहे हैं, उनमें से कई मस्जिदों में चल रहे हैं। इनमें नमाज भी पढ़ी जाती है। भले ही मदरसा चलाने वाले दावा करें कि गैर मुस्लिम बच्चों को इस्लामी तालीम नहीं दी जाती लेकिन आप उनके अलग-अलग क्लास तो नहीं बना रहे? ऐसे में क्या गारंटी है कि उनका ब्रेनवॉश ना हो। फिर यदि ऐसा ही है तो गैर मुस्लिम शिक्षक कम क्यों हैं?”

छात्रा का नाम सकीना, पिता का नाम लेखराज, मामला क्या?

बजरंग दल ने बताया कि कोटा के अनंतपुरा में मदरसा दारूल उलूम तहरीक-ए-हिन्द में पढ़ने वाली एक दलित छात्रा का नाम सकीना पाया गया था। इस मामले में बजरंग दल के योगेश रेनेवाल ने बताया, “सकीना बैरवा समाज से आती है, जो कि दलित हैं। सकीना का परिवार भी गरीब है, उसके पिता लेखराज मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। उनको इस मदरसा और यहाँ की गतिवधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सकीना पहले भी एक मुस्लिम द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ती थी। उसे बाद में मदरसे में दाखिल कर दिया गया।”

राजस्थान गैर मुस्लिम

योगेश रेनेवाल ने आरोप लगाया, “सकीना का मामला अकेला नहीं है, इसी मदरसे में 6 छात्र-छात्राएँ ऐसे हैं। हमारी माँग है कि इनकी गंभीर जाँच हो। बच्ची का परिवार गरीब है और हमें शक है कि उसे या तो वित्तीय मदद के बहाने के या अच्छी शिक्षा के बहाने स्कूल में भेजने को लेकर भरोसे में लिया गया है। ज्यादातर निशाने पर दलित और गरीब तबके के परिवार ही आते हैं। हमने इस मामले में जिला प्रशासन से भी शिकायत की थी लेकिन तब इन मदरसा वालों ने फोन तक नहीं उठाया। इनको जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी भी संरक्षण दे रहे हैं।”

अनंतपुरा मदरसे के ही एक कागज को देख कर पता चलता है कि इसी मदरसे के भीतर दो बच्चे ऐसे पढ़ रहे हैं जिनका खुद का नाम इस्लामी है लेकिन उनके पिता का नाम अभिषेक खान है। योगेश रेनेवाल ने बताया कि यह अपने आप ही प्रश्न खड़े कर देता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अगर निष्पक्ष जाँच करवाई जाए तो कई गड़बड़ियाँ सामने आएँगी। सुजीत स्वामी ने माँग की है कि कोटा को लेकर विशेष जाँच करवाई जाए क्योंकि यहीं सबसे बड़ी संख्या गैर मुस्लिम बच्चों की है।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर भी लगाए आरोप

योगेश रेनेवाल ने कोटा को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नाहिदा खान पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी मदरसों में अनियमितता की बात आती है, तो नाहिदा उन्हें बचाती हैं। गौरतलब है कि नाहिदा खान ने अक्टूबर, 2023 में ही इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर स्टेटस लगाए थे।

नाहिदा खान ने अपने सोशल मीडिया पर गाजा के लिए दुआ माँगने, कई कम्पनियों का बहिष्कार करने और साथ ही सपोर्ट करने और दान माँगने को लेकर स्टेटस लगाया था। इसको लेकर उनकी शिकायत की गई थी। उन्होंने सफाई दी थी कि यह स्टेटस उनके 8 साल के बेटे ने लगाए हैं। इस मामले में उन्हें नोटिस भी भेजा गया था।

NCPCR ने पहले भी उठाए मामले

ऐसा पहली बार नहीं है कि मदरसों में गैर मुस्लिम छात्रों को पढ़ने को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग इन मदरसों में दी जाने वाली इस्लामी शिक्षा और उसके गैर मुस्लिम बच्चों को लेकर मामला उठाते रहा है। ऐसे ही एक मामले में NCPCR मुखिया प्रियंका कानूनगो ने बताया था सहारनपुर के मदरसे में एक हिन्दू बच्चे का खतना करवाया गया था। इसके पहले और भी मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर भी उन्होंने प्रश्न उठाए थे, इस पाठ्क्रम में हिन्दुओं को ‘मुशरिक’ और ‘काफिर’ करार दिया गया था।

ऑपइंडिया ने राजस्थान में मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों के पढ़ने और फिर उन पर इस शिक्षा के असर को लेकर कोटा के विधायक और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से सम्पर्क करने का प्रयास किया। हालाँकि, उनकी व्यस्तता के चलते बात नहीं हो पाई। ऑपइंडिया ने बैरवा समाज से आने वाले राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से भी सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन यह भी संभव नहीं हो पाया। मामले में शिक्षा मंत्री या उपमुख्यमंत्री का जवाब आने पर रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी।

गोरखपुर में कोका-कोला से लेकर बिसलेरी तक, 45 कंपनियाँ खोल रही अपनी फैक्ट्री-ऑफिस: CM योगी सौंपेंगे आवंटन पत्र

गोरखपुर में गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए 30 नवंबर और 1 दिसंबर को भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1068 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित परियोजनाओं के लिए 45 उद्यमियों को आवंटन पत्र सौंपेंगे। इसके साथ ही 209 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

कोका-कोला और बिसलेरी लगा रहे बॉटलिंग प्लांट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोरखपुर में कोका-कोला 350 करोड़ रुपये की लागत से 17 एकड़ में बॉटलिंग प्लांट लगाएगा, जिससे 500 से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा। बिसलेरी कंपनी प्लास्टिक पार्क में 7 एकड़ में 70 करोड़ रुपये की लागत से मिनरल वॉटर प्लांट स्थापित करेगी। इससे 250 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, देश की एक प्रतिष्ठित डिस्टिलरी कंपनी 5 एकड़ में 50 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

गीडा प्रशासन बनाएगा ट्रीटमेंट प्लांट

दो दिवसीय कार्यक्रम में 150 स्टॉल लगाए जाएँगे, जिनमें से 100 स्थानीय उत्पादों और 50 प्रदेश के अन्य जिलों के होंगे। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट) को प्राथमिकता दी जाएगी। 30 नवंबर को बायर-सेलर मीट का आयोजन भी किया जाएगा। गीडा ने प्रदूषण रोकने के लिए 4 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित करने की योजना बनाई है। यह प्लांट तीन दशक से लंबित था, जिसे अब गीडा प्रशासन स्वयं स्थापित करेगा।

गुरुवार (21 नवंबर 2024) को मंडलायुक्त अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में गीडा की सीईओ अनुज मलिक ने उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बिजली की समस्या, जिला पंचायत शुल्क, और शासकीय योजनाओं के लंबित मामलों पर सकारात्मक आश्वासन दिए गए।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और ओडीओपी वित्त पोषण योजना के तहत अब तक 819 और 193 आवेदन बैंक को भेजे गए हैं। निवेश मित्र पोर्टल पर गोरखपुर के 13 मामलों का समय पर निपटारा करने का निर्देश दिया गया। यह आयोजन गोरखपुर को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

औकात में आया कनाडा: जस्टिन ट्रूडो के सलाहकार ने कहा- निज्जर की हत्या में PM मोदी और अजीत डोवाल को जोड़ना निराधार, इसके कोई सबूत नहीं

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार बैकफुट पर आ गई है। कनाडा सरकार ने कहा कि भारत में वांछित निज्जर की हत्या में भारत के होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ट्रूडो सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया।

प्रिवी काउंसिल के डिप्टी क्लर्क और प्रधानमंत्री ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रौइन ने कहा, “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और जारी खतरे के कारण RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) और अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को कनाडा में भारत सरकार के एजेंटों द्वारा की गई गंभीर आपराधिक गतिविधि के सार्वजनिक आरोप लगाने का असाधारण कदम उठाया।”

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आगे कहा, “कनाडा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर या NSA डोवाल को कनाडा के भीतर गंभीर आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के बारे में कभी नहीं कहा है और ना ही इससे जुड़े सबूतों की उसे जानकारी है। इसके विपरीत, कोई भी सुझाव काल्पनिक और ग़लत दोनों है।”

ट्रूडो सरकार का ये स्पष्टीकरण कनाडा के एक अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ में छपी रिपोर्ट के बाद आया है। उस अखबार में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की साजिश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रची थी। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल को इस योजना की जानकारी थी।

अखबार में यह रिपोर्ट एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से छापी गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसको लेकर कनाडा के पास प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस मीडिया रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयानों को खारिज कर देना चाहिए।

इससे पहले 14 अक्टूबर 2024 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर अपमानजनक आरोप लगाए थे और कनाडा की धरती पर हत्याओं को अंजाम देने का दावा किया था। RCMP के हवाले से उन्होंने कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय, खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले हिंसक खतरों की एक श्रृंखला खोज निकालने का दावा किया था।

इन खतरों में हत्याएँ और जबरन वसूली शामिल हैं, जो कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद जारी हैं। आरसीएमपी ने कहा कि उसने कनाडा की धरती पर भारत सरकार के एजेंटों द्वारा ‘संचालित’ आपराधिक गतिविधियों की जाँच के लिए फरवरी 2024 में एक टीम बनाई थी। जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि कनाडा के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं।

इस बयान में ‘भारत सरकार’ का 10 बार जिक्र किया गया है, जबकि भारत का 13 बार। पीएम ट्रूडो ने पिछले साल कनाडा की संसद में बोलते हुए भी निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देश के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत ने ट्रूडो और उनकी पार्टी पर खालिस्तानियों को लुभाने के लिए वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था।

पिछले साल जून में कनाडा के सर्रे शहर में स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर अलगाववादी खालिस्तानी आतंकी था। वह आतंकी संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ का प्रमुख था। भारत में वांछित निज्जर पिछले कई वर्षों से कनाडा में रह रहा था और लोगों को भारत सरकार के खिलाफ उकसा रहा था। NIA ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था।

उमर अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस की सरकार ने कश्मीरी पंडितों की दुकानों पर चलाया बुलडोजर, पीड़ित बोले- ‘हम सब कुछ खो चुके, अब कहाँ जाएँ?’

जम्मू में कश्मीरी पंडित प्रवासियों की दुकानों पर जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) का बुलडोज़र चलने से बवाल खड़ा हो गया। बुधवार (20 नवंबर 2024) को JDA ने मुठी इलाके में करीब एक दर्जन दुकानों को ध्वस्त कर दिया। ये दुकानें उन कश्मीरी पंडित परिवारों की थीं जिन्हें तीन दशक पहले तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने यहाँ बसाया था।

दुकानदारों का कहना है कि उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना दिए कार्रवाई की गई, जबकि JDA ने इस दावे को खारिज किया है। JDA के उपाध्यक्ष पंकज शर्मा का कहना है कि प्रभावित लोगों को 20 जनवरी को नोटिस दिया गया था और उन्होंने फरवरी के अंत तक जगह खाली करने का वादा किया था। लेकिन चुनावी आचार संहिता और अन्य बाधाओं के कारण समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

शर्मा ने बताया कि मुठी इलाके में 25 कनाल ज़मीन थी, जहाँ कश्मीरी पंडित प्रवासियों को शुरू में एक कमरे वाले गुंबदनुमा घरों में बसाया गया था, और बाद में उन्हें पुरखू और जगती में दो कमरों वाले फ्लैटों में बसाया गया। उन्होंने कहा कि इस कदम के बाद भी कई लोगों ने शुरुआती बस्तियों को खाली नहीं किया है। चूँकि यहाँ 208 गरीबों के लिए घरों का निर्माण कराया जाना है, जिसका टेंडर भी जारी हो चुका है। ऐसे में हमें जमीन खाली करानी ही है। इसके बावजूद प्रशासन ने 10 दुकानों का इंतजाम इन लोगों के लिए किया है।

इस घटना के बाद कई राजनीतिक दलों और कश्मीरी पंडित संगठनों ने सरकार की आलोचना की। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति वीडियो में रोते हुए कहते हैं, “हम सब कुछ खो चुके हैं। अब कहाँ जाएँ?”

महबूबा मुफ्ती (PDP प्रमुख) ने इसे “कश्मीरी पंडितों की दशकों की तकलीफों पर एक और चोट” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “पहले आदिवासी समुदाय को निशाना बनाया गया, और अब कश्मीरी पंडितों को। यह उन्हें और अलग-थलग करने का काम करेगा।”

J-K अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा, “अगर विध्वंस जरूरी था तो पहले उनकी आजीविका का इंतजाम किया जाना चाहिए था। इस तरह की कार्रवाई जनता के हितों के खिलाफ है।”

बीजेपी प्रवक्ता जी.एल. रैना ने इसे NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार की “बदले की कार्रवाई” बताया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था देने की माँग की।

JDA का कहना है कि मुठी कैंप की यह जमीन अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 208 फ्लैट्स के निर्माण के लिए आवंटित की गई है। हालाँकि, राहत आयुक्त अरविंद करवानी ने आश्वासन दिया कि प्रभावित दुकानदारों के लिए नई दुकानें जल्द बनाई जाएँगी। इन लोगों के लिए 10 दुकानें लगभग तैयार हैं, जो कैंप-2 में हैं। जेडीए ने कहा कि सिर्फ 1-2 लोग दिक्कत पैदा कर रहे हैं।

इस घटना को लेकर बीजेपी ने सीधे तौर पर NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार पर निशाना साधा। लोगों का मानना है कि सरकार बदलने के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय पर ऐसी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकती है। बता दें कि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है, जिसका घाटी की तरफ झुकाव ज्यादा रहा है।

सालों तक मर्जी से रिश्ते में रही लड़की, नहीं बनता रेप का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की FIR: कहा- सिर्फ ब्रेक अप हो गया इसलिए नहीं बन जाएगा आपराधिक मुकदमा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शादी के झूठे वादे के आधार पर किए गए रेप के मुकदमे को खारिज कर दिया और एक व्यक्ति को राहत दे दी। व्यक्ति पर उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड ने आरोप लगाए थे उसने जबरदस्ती उसके साथ कई बार संबंध बनाए और उसके भाई को भी जान से मारने की धमकी दी। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के दावों को सही नहीं पाया और FIR को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। बुधवार (20 नवम्बर, 2024) मामले की सुवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “एक दूसरे के साथ सहमति से रिश्ते में रहे किसी कपल का आपस में रिश्ता टूटने के आधार पर ही आपराधिक कार्रवाई चालू नहीं की जा सकती। अगर किसी रिश्ते में शुरुआत में लड़का और लड़की आपस में अपनी मर्जी से जुड़े थे, और बाद में उनका रिश्ता वैवाहिक जीवन में तब्दील नहीं हो सका, ऐसे में इस आधार पर बाद में इसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।”

क्या था मामला?

यह पूरा मामला 2019 में दिल्ली के रोहिणी में हुई एक FIR से जुड़ा है। इस FIR में एक महिला ने बताया था कि वह दिल्ली में अपने भाई के साथ रहते हुए वोडाफोन के कॉल सेंटर में काम करती थी। महिला ने बताया कि वह एक कॉल के जरिए युवक प्रशांत के सम्पर्क में आई। महिला ने बताया कि नवम्बर,2017 और अप्रैल, 2018 में दोनों के बीच मुलाक़ात भी हुई।

महिला ने आरोप लगाया कि 2019 में प्रशांत को उसके घर का पता लग गया। इसके बाद प्रशांत ने उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए। महिला ने आरोप लगाया कि इसके बाद कई बार डरा धमका कर उसके साथ रेप किया गया। प्रशांत ने इसके बाद महिला से विवाह करने से भी मना कर दिया।

महिला का यह भी आरोप था कि प्रशांत उसे छतरपुर में अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ संबंध बनाता था। महिला की इस शिकायत का युवक प्रशांत ने विरोध किया। उसने दिल्ली हाई कोर्ट में इस FIR को रद्द करने के लिए याचिका लगाई लेकिन उसे हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।

इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट को प्रशांत के वकील ने बताया कि आरोप लगाने वाली महिला के पुलिस को दिए गए बयान और उसकी मेडिकल रिपोर्ट से कुछ भी आपराधिक साबित नहीं होता। प्रशांत ने दलील दी कि महिला और युवक, दोनों का प्रेम संबंध था और उन्होंने सहमति से संबंध बनाए थे।

प्रशांत के पक्ष ने कहा कि केवल निजी दुश्मनी के आधार पर यह मुकदमा किया गया है। यह दलील भी दी गई कि महिला ने मेडिकल रिपोर्ट में एक सप्ताह पहले रेप होने की जबकि FIR में जनवरी, 2019 में रेप होने की बात कही है, जो आपस में मेल नहीं खाती। दलील दी गई कि महिला के बयानों में कोई भी समानता नहीं है। इसका सरकारी वकील ने विरोध किया।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि महिला ने जहाँ एक तरफ जबरदस्ती संबंध बनाने का दावा किया है वहीं वह 2017 और 2019 में लगातार उससे मिलती भी रही। कोर्ट ने कहा कि ना उसने इस दौरान मुलाक़ात बंद की और ना ही कोई शिकायत दर्ज करवाई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बात मानने योग्य नहीं लगती कि महिला जबरदस्ती संबंध बनाए जाने के बाद भी आरोपित से सहमति से मिलती रही। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित प्रशांत के महिला का पता ढूंढ लेने की दलील भी नहीं स्वीकारी और कहा कि यह संभवतः उसने खुद ही दिया होगा। कोर्ट ने यह भी पाया कि एक समय पर दोनों शादी का इरादा रखते थे लेकिन यह नहीं हो सका।

कोर्ट ने कहा, “शिकायत करने वाली महिला और आरोपित पुरुष आपस में सहमति से रिश्ते में थे। वे दोनों पढ़े लिखे वयस्क लोग हैं। महिला ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के बाद वर्ष 2020 में किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर लिया। इसी तरह आरोपित की भी वर्ष 2019 में शादी हुई थी। संभवतः वर्ष 2019 में आरोपित की शादी ने ही महिला को उसके खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए प्रेरित किया है क्योंकि तब तक वे सहमति से रिश्ते में थे।” कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में रेप का मामला नहीं बनता।

कोर्ट ने सारे सबूत देखने के बाद पाया कि दोनों के बीच सहमति से ही संबंध बने थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद कहा कि एक दूसरे के साथ सहमति से रिश्ते में रहे किसी कपल का आपस में रिश्ता टूटने के आधार पर ही आपराधिक कार्रवाई चालू नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस मामले में FIR रद्द कर दिया।

AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए निकाली पहली लिस्ट, आधे से ज्यादा बाहरी नाम, 3 दिन पहले वाले को भी टिकट: 2 पर कस चुका ED का शिंकजा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के ऐलान से काफी दिन पहले ही उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी, 2025 में पूरा हो रहा है। AAP की पहली लिस्ट में 11 उम्मीदवारों का नाम दिया गया है। इस लिस्ट में शामिल कई उम्मीदवार पार्टी में बाहर से आए हैं। कुछ को प्रवर्तन निदेशालय ED) के एक्शन का भी सामना करना पड़ा है। पार्टी की पहली लिस्ट में भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों ही पार्टियों से आने वालों को टिकट थमाया गया है।

गुरुवार (21 नवम्बर, 2024) को जारी की गई AAP की लिस्ट में छतरपुर से ब्रह्म सिंह तंवर, बदरपुर से राम सिंह नेताजी, लक्ष्मी नगर से बीबी त्यागी, सीलमपुर से जुबैर अहमद, सीमापुरी से वीर सिंह धींगन, रोहतास नगर से सरिता सिंह, घोंडा से गौरव शर्मा, विश्वासनगर से दीपक सिंगला, करावल नगर से मनोज त्यागी, किराड़ी से अनिल झा जबकि मटियाला से सुमेश शौक़ीन को आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित किया गया है।

AAP द्वारा घोषित किए गए 11 उम्मीदवारों में से 6 कॉन्ग्रेस या भाजपा से आए हुए नेता हैं। उन्होंने हाल ही में AAP की सदस्यता ली है। छतरपुर से उम्मीदवार बनाए गए ब्रह्म सिंह तंवर ने 1 नवम्बर, 2024 को ही AAP की सदस्यता ली थी। वह इससे पहले तीन बार भाजपा के विधायक रह चुके थे। वह 1993, 1998 और 2013 में भाजपा के टिकट से चुनाव जीते थे। उनकी सीट के AAP विधायक करतार सिंह तंवर ने भाजपा की सदस्यता ले ली थी। इसके बाद उन्होंने भाजपा छोड़ कर AAP की सदस्यता ले ली। वह 2015 और 2020 में करतार सिंह से हार चुके हैं।

वहीं करतार के अलावा पार्टी ने किराड़ी से अनिल झा को टिकट थमाया है। अनिल झा भी भाजपा से ही 2008 और 2013 में विधायक बने थे। उन्होंने 17 नवम्बर को ही पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्हें केजरीवाल ने पूर्वांचल के समाज का बड़ा नेता करार दिया था। वह 2015 और 2020 का चुनाव किराड़ी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें AAP के ही ऋतुराज झा ने हराया था। ऋतुराज झा का भी टिकट काट कर अब अनिल झा को टिकट दिया गया है।

इन दोनों के अलावा कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक सोमेश शौक़ीन को भी मटियाला से उतारा गया है। सोमेश शौक़ीन ने 18 नवम्बर, 2024 को ही पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्हें केजरीवाल ने ही पार्टी में शामिल करवाया था। सोमेश शौक़ीन 2008 में मटियाला से कॉन्ग्रेस से विधायक बने थे। इसके बाद 2013, 2015 और 2020 का चुनाव वह हार गए थे। उनके AAP की सदस्यता लेते ही टिकट मिल गया है। इस सीट से पार्टी ने अपने विधायक का टिकट काट दिया है।

AAP ने सीलमपुर विधानसभा से जुबैर अहमद को टिकट दिया है। वह भी सीलमपुर से 5 बार कॉन्ग्रेस के विधायक रहे मतीन अहमद के बेटे हैं। उन्होंने एक माह पहले ही AAP का दामन थामा था। उनकी पत्नी शगुफ्ता चौधरी कॉन्ग्रेस से ही पार्षद थीं। वह भी AAP में शामिल हुई थीं। इनके अलावा वीर सिंह धींगान को सीमापुरी से टिकट दिया गया है। वीर सिंह धींगन को सीमापुरी से उम्मीदवार बनाया गया है। धींगन कॉन्ग्रेस से 1998 से 2013 तक कॉन्ग्रेस से इस सीट से विधायक रहे हैं। वह 2013, 2015 और 2020 का चुनाव हारे थे। वह भी ED के घेरे में आ चुके हैं।

वहीं लक्ष्मी नगर से उम्मीदवार बनाए गए बीबी त्यागी भी नवम्बर, 2024 में ही भाजपा छोड़ कर AAP में शामिल हुए थे। बीबी त्यागी लक्ष्मी नगर क्षेत्र से दो बार पार्षद रहे हैं। बीबी त्यागी को अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने पार्टी में शामिल करवाया था। AAP इन सभी बाहरी पार्टी से आए उम्मीदवारों को टिकट देकर निशाने पर आ गई है।

इन सबके अलावा पार्टी ने रोहतास नगर से सरिता सिंह को टिकट दिया है। वह छात्र संगठन की प्रमुख हैं। वह 2015 में AAP से चुनाव जीती थीं लेकिन 2020 में इसी सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनके साथ ही दीपक सिंगला को भी टिकट दिया गया है। दीपक सिंगला 2020 में चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। सिंगला पर मार्च 2024 में ED का छापा भी पड़ा था। वह गोवा के इंचार्ज भी हैं। ED शराब घोटाले में गोवा के पदाधिकरियों की जाँच कर रही है।

AAP ने बदरपुर से राम सिंह नेताजी को टिकट दिया है। 2015 और 2020 में वह चुनाव जीत चुके हैं। घोंडा से AAP ने गौरव शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। 2020 में यह सीट पार्टी नहीं जीत पाई थी। मनोज त्यागी को पार्टी ने करावल नगर सीट से टिकट दिया है। यह सीट भी 2020 में पार्टी के हाथ नहीं लगी थी। AAP की इस चुनावी तैयारी से भाजपा और कॉन्ग्रेस पर अब चुनावी तैयारी तेज करने का दबाव पड़ेगा।

इस देश में अजमल कसाब को भी फेयर ट्रायल मिला: सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक मामले में की टिप्पणी, अपहरण कांड में जम्मू कोर्ट में पेश होने का CBI ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) को वायुसेना के 4 अधिकारियों के अपहरण के मामले में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सुनवाई के लिए तिहाड़ जेल में एक अदालत कक्ष स्थापित करने का संकेत दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यहाँ तक ​​कि मुंबई हमले का आतंकी अजमल कसाब को भी देश में निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने जम्मू ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे यासीन मलिक को शारीरिक रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। यह पेशी वायुसेना अधिकारियों के अपहरण और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े मामले में गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “जिरह ऑनलाइन कैसे की जाएगी? जम्मू में शायद ही कोई कनेक्टिविटी है… हमारे देश में अजमल कसाब पर भी निष्पक्ष सुनवाई हुई और उसे उच्च न्यायालय में कानूनी सहायता दी गई।” इस पर मेहता ने कहा कि मलिक ‘सिर्फ एक और आतंकवादी’ नहीं है। इसने हाफिज सईद से मिलने के लिए कई बार पाकिस्तान की यात्रा की है।

उन्होंने कोर्ट को आतंकवादी हाफिज सईद के साथ मंच साझा करते हुए यासीन मलिक की एक तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने इशारा किया कि यह आतंकी कितना खतरनाक है। मेहता ने सुरक्षा चिंताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि यासीन मलिक को मुकदमे के लिए जम्मू नहीं ले जाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यासीन मलिक कोई सामान्य अपराधी नहीं है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह न्यायाधीश को कार्यवाही के लिए राष्ट्रीय राजधानी आने के अलावा जेल के अंदर मुकदमा चलाने का आदेश दे सकती है। हालाँकि, पीठ ने यह भी कहा कि आदेश पारित करने से पहले इस मामले के सभी आरोपित व्यक्तियों को सुना जाना चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई अब 28 नवंबर को होगी।

बता दें कि रुबैया को 8 दिसंबर 1989 को श्रीनगर के लाल डेड अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। उस समय केंद्र में भाजपा समर्थित वीपी सिंह की सरकार थी और रुबैया के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। रूबैया की रिहाई के लिए केंद्र सरकार ने पाँच आतंकवादियों को रिहा किया था। इसके बाद पाँच दिन बाद रूबैया को रिहा कर दिया गया था।

रूबैया मुफ्ती फिलहाल तमिलनाडु में रहती हैं। वह सीबीआई के अभियोजन पक्ष के गवाह हैं। इस अपहरण कांड की जाँच सीबीआई ने 1990 के दशक में अपने हाथ में ली थी। रूबैया का अपहरण जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने ही की थी। यासीन मलिक इस आतंकी संस्था का मुखिया है। यासीन टेरर फंडिंग मामले में NIA कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी है। तब से वह तिहाड़ में है।

अनजान लोगों से करवाता था पत्नी का रेप, रिकॉर्ड किए 20000+ फोटो-वीडियो: बेटे ने कहा – मेरे बाप को मिले कठोर सजा, कोई माफी नहीं

यूरोपीय देश फ्रांस में डोमिनिक पेलिकॉट नाम के एक व्यक्ति द्वारा लगभग 72 अजनबी लोगों से अपनी पत्नी का रेप और सामूहिक बलात्कार कराने का मामला सामने आया है। आरोपित डोमिनिक के बेटों ने 18 नवंबर को अदालत से अपने पिता को कड़ी सजा देने का आग्रह किया। पीड़िता के बेटों ने कहा कि वे अपने पिता को कभी माफ नहीं कर पाएँगे।

डोमिनिक ने अदालत के समक्ष पहले अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने स्वीकार किया है कि 10 साल की अवधि में उसने दर्जनों अजनबियों को अपनी पत्नी के साथ बलात्कार करने के लिए अपने घर बुलाया था। इस दौरान वह अपनी पत्नी को नशीला पदार्थ पिलाता है। इस मामले में 50 अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। डोमिनिक की पत्नी अब 71 साल की है।

आरोपित डोमिनिक के बेटों में से एक 50 वर्षीय डेविड पेलिकॉट ने अदालत के समक्ष कहा, “हमारा परिवार नष्ट हो गया है। मैं इस मुकदमे से उम्मीद करता हूँ कि इन लोगों को (आरोपितों) और कटघरे में मौजूद उस व्यक्ति (उसके पिता) को मेरी माँ पर किए गए अत्याचार के लिए कठोर रूप से दंडित किया जाएगा।” अपने आरोपित पिता डोमिनिक की माफी को भी डेविड ने पूरी तरह नकार दिया।

डेविड ने यह भी कहा कि उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने अपने पिता की सारी तस्वीरें नष्ट कर दी है, ताकि घर में आरोपित का कोई नामो-निशान ना बचे। डेविड ने कहा कि यह मुकदमा अन्य महिलाओं को रेप के बारे में बोलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। डेविड की माँ ने इस मुकदमे को सार्वजनिक रूप से आयोजित करने के लिए कहा था, ताकि दूसरी महिलाओं को हिम्मत मिले।

डेविड के 38 वर्षीय भाई फ्लोरियन ने अदालत को बताया कि चार साल पहले उनकी माँ के साथ हुई दरिंदगी की जानकारी से परेशान हो गए थे। फ्लोरियन ने कहा कि उसके पिता उसके लिए मर चुके हैं। उन्होंने कभी-कभी रोते हुए अदालत से कहा, “मुझे अपने पिता को खोए हुए चार साल हो गए हैं। हमारा परिवार अलग हो गया है।” फ्लोरियन ने कठोरतम सजा की माँग की है कि ताकि पीड़ित को डर ना लगे।

फ्रांसीसी कानून के तहत पीड़िता अपनी पहचान गुप्त रख सकती थी और मुकदमा बंद कमरे में चल सकता था। इस मामले के सामने आने के बाद पीड़िता गिसेले पेलिकॉट के समर्थन में पूरे फ्रांस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर हो गए थे। वहीं, गिसेले की बेटी कैरोलिन डेरियन ने अदालत को बताया कि उसका मानना ​​​​है कि उसके पिता ने उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया था।

कैरोलिन ने कहा, “मेरे और मेरी माँ के बीच एकमात्र अंतर यह है कि (उनकी माँ के साथ हुए दुर्व्यवहार के) सबूत हैं।” कैरोलिन इस केस में सबसे पहली गवाह बनी थीं। अब सभी पक्षों को सुनने के बाद बाद अदालत का फैसला और सजा का ऐलान 20 दिसंबर 2024 के आसपास आने की उम्मीद है।

पीड़िता गिसेले पेलिकॉट ने दक्षिणी शहर एविग्नन की अदालत को बताया था कि उसके 71 वर्षीय पति डोमिनिक पेलिकॉट उसे खाने और शराब में दवा मिलाकर बेहोश कर देता था। उसके बाद लोगों को बुलाकर उसी हालत में उनसे अपनी पत्नी का रेप करवाता था। जाँचकर्ताओं ने पाया कि पीड़िता के साथ लगभग एक दशक में 100 से अधिक बार रेप हुआ। रेप के दौरान आरोपित डोमिनिक रिकॉर्डिंग करता था।

उसके कब्जे से हजारों फोटो और वीडियो बरामद हुए थे। पीड़िता ने अदालत को बताया था कि एचआईवी से पीड़ित एक व्यक्ति ने उसके साथ कम-से-कम छह बार बलात्कार किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी जान को खतरा था, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। गिसेले पेलिकॉट ने अपनी गवाही में कहा था, “पुलिस ने मिस्टर पेलिकॉट के कंप्यूटर की जाँच करके मेरी जान बचाई।”

बता दें कि आरोपित डोमिनिक पेलिकॉट को नवंबर 2020 में एक सुरक्षा गार्ड ने सुपरमार्केट में महिलाओं की स्कर्ट का वीडियो बनाते हुए पकड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की जाँच के दौरान फ्रांसीसी पुलिस ने डोमिनिक के कंप्यूटर से जुड़े यूएसबी ड्राइव पर ‘दुर्व्यवहार’ लेबल वाली एक फ़ाइल बरामद की। जब पुलिस ने ड्राइव खोली तो उसमें से लगभग 20,000 तस्वीरें और फिल्में मिलीं थीं।

इनमें पाया गया कि एक महिला के साथ लगभग 100 बार से अधिक बलात्कार किया गया था। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि यह उसकी पत्नी है। इसके बाद पुलिस ने उसकी पत्नी का बयान दर्ज किया और डोमिनिक के बेटों और बेटी को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद पीड़िता ने इस केस की सुनवाई सार्वजनिक रूप से करने की माँग की।