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शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश का इस्लामीकरण: सरकार बनाएगी मदीना की तरह मस्जिद, इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद की निंदा पर सजा-ए-मौत की सिफारिश

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्तापलट के बाद देश का इस्लामीकरण तेज हो गया है। इस इस्लामीकरण में अब युनुस सरकार के साथ ही देश की न्यायपालिका भी शामिल हो गई है। बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने इस्लाम या पैगंबर की निंदा पर मौत की सजा लागू करने कि सिफारिश की है। वहीं युनुस सरकार में शामिल एक मौलाना ने कहा है कि वह देश में एक मस्जिद को सऊदी अरब की मस्जिद की तरह विकसित करने जा रहे है।

बांग्लादेश हाई कोर्ट दे रहा मौत की सजा की सिफारिश

बांग्लादेश हाई कोर्ट के जस्टिस एम.आर. हसन और जस्टिस फहमीदा कादर की बेंच ने कहा, “कुरान और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ इस तरह के गैर-जरूरी, बेशर्म, अड़ियल, भड़काऊ भाषण और आचरण के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसी सजा का प्रावधान होना चाहिए, इस पर संसद को विचार करना चाहिए।”

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “किसी भी ऐसे भड़काऊ भाषण या ऐसे कामों को खत्म करने के लिए, जो किसी भी मजहब के लोगों को ठेस पहुँचा सकता है, या फिर उनमें से डर, आतंक, परेशानी या आशंका पैदा करता है, इनके लिए सजा बढ़ाने और गैर जमानती बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।”

जहाँ कोर्ट अपने बयान में एक तरह कह रहा है कि पैगंबर मुहम्मद और कुरान के खिलाफ बयानों पर मौत की सजा होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उसने अपने इस्लामी कट्टरपंथ को सहारा देने के एजेंडे को सेक्युलर रंग देने के लिए बाद में ‘किसी भी मजहब’ का जुमला जोड़ दिया। यह पूरी दुनिया को पता है कि किस मजहब के लोग ईशनिंदा को लेकर सड़कों पर उतरते हैं।

बांग्लादेश का इस मामले में रिकॉर्ड भी कुछ ख़ास नहीं है। हाल ही में एक हिन्दू युवक को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बीच सड़क पर मार मार कर अधमरा कर दिया था। उस पर भी ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। उसे बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

यह कोई अकेली घटना नहीं है। इसके अलावा भी बांग्लादेश में कई बार हिन्दुओं को बांग्लादेश में निशाना बनाया जा चुका है। बांग्लादेश हाई कोर्ट की नई सिफारिश पर यदि युनुस सरकार कानून बनाती है, तो इसका असर सबसे अधिक हिन्दुओं पर ही पड़ेगा।

ऐसा इसलिए नहीं होगा क्योंकि बांग्लादेश में हिन्दू ईशनिंदा करते हैं। बल्कि इसलिए होगा क्योंकि बांग्लादेश में अब सत्ता इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथ में है। बांग्लादेश के भीतर अब किसी भी हिन्दू को निशाना बनाने के लिए ईशनिंदा एक टूलकिट के तौर पर उपयोग होने लगा है। एक बार आरोप लग जाने के बाद, चाहे वह झूठा हो या सच्चा, भीड़ किसी की नहीं सुनती।

युनुस सरकार ने मस्जिद बनाने का किया ऐलान

मोहम्मद युनुस की सरकार में शामिल AFM खालिद हुसैन ने चटगाँव में एक मस्जिद को सऊदी अरब की मदीना मस्जिद की तरह विकसित करने का ऐलान किया है। AFM खालिद हुसैन ने कहा, “अंदरकिला शाही जामे मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक अनूठा उदाहरण है। इसे स्थानीय मुस्लिम समुदाय की आकांक्षाओं के अनुरूप एक शानदार मस्जिद के रूप में विकसित किया जाएगा।” युनुस सरकार इस पर ₹10 करोड़ का खर्च करेगी। इसके बाद जरूरी होगा तो और भी पैसा लगाया जाएगा।

‘अल्लाह की मेहरबानी से जन्नत मिलेगी’: नौकरी का लालच और जहन्नुम का डर दिखाकर शाकिर ने हिन्दू लड़की को कबूल करवाया इस्लाम, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का शाकिर ने फर्जी नाम और पहचान से एक हिन्दू लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसाया और फिर उसका दुष्कर्म किया। आरोपित ने दबाव डालकर 20 वर्षीया पीड़िता को इस्लाम भी कबूल करवा दिया। लड़की को इस्लाम छोड़ने पर नरक जाने और फिर पूरे परिवार को कत्ल करने की भी धमकी दी। गुरुवार (21 नवंबर 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर शाकिर को गिरफ्तार कर लिया।

घटना मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र की है। यहाँ रहने वाली एक महिला ने 21 नवंबर को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि उसकी बेटी को बिजनौर के शाकिर ने हनी नाम बताकर संपर्क किया। इसके बाद नौकरी दिलाने का झाँसा देकर अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। हनी बने शाकिर ने अपना पता बिजनौर जिला बताया था, जबकि वह मूलतः रामपुर का निवासी है। उसने हनी नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था।

यही आधार कार्ड पीड़िता और उसकी माँ को भी दिखाया गया था। थोड़े समय बाद शाकिर ने हिन्दू लड़की से निकाह कर दिया। उसे अल्लाह की मेहरबानी से जन्नती सुकून मिलने जैसी बातें करके आरोपित अपने साथ ले गया। वह लड़की के साथ कटघर इलाके में ही किराए के एक मकान में रहने लगा। यहाँ उसने पीड़िता से कई बार रेप किया। 20 नवंबर को पीड़िता शाम को अपनी माँ के पास आई।

यहाँ पता चला कि लड़की को कलमा पढ़वा दिया गया है। लड़की ने यह भी बताया कि अगर उसने इस्लाम छोड़ा तो शाकिर न सिर्फ उसको नौकरी से निकाल देगा, बल्कि तलाक भी दे देगा। इस दौरान लड़की ने अपनी माँ से कहा, “मैं हिन्दुओं के बीच रहकर नरक नहीं जाऊँगी। आप काफिर हो। आप भी धर्मान्तरण कर लो वरना जहन्नुम (नरक) में जाओगी।”

अपनी बेटी के मुँह से ऐसी बातें सुनकर माँ हैरान रह गई। वह बेटी के साथ शाकिर के पास उलाहना लेकर गई। तब शाकिर ने कहा, “तुम हिन्दुओं को कितना भी समझा लो, तुम्हें समझ नहीं आएगा।” आरोपित ने महिला को धमकी दी कि अगर वो अपनी बेटी को को साथ ले गई तो पूरे परिवार का कत्लेआम कर दिया जाएगा। पीड़िता ने अपनी शिकायत में शाकिर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेकर 21 नवंबर को शाकिर के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319 (2), 318 (4), 336 (3) और 351 (3) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के सेक्शन 3/5(1) के तहत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

इस मामले की जानकारी मिलते ही मुरादाबाद के हिन्दू संगठनों ने हंगामा शुरू कर दिया। वो आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग पर अड़ गए। वायरल हो रहे एक वीडियो में हिन्दू संगठन के सदस्यों से घिरे शाकिर को लड़की के साथ देखा जा सकता है। लड़की ने काला लिबास पहन रखा है। पुलिस ने शाकिर को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से 2 आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं।

शहवाज ने इंस्टाग्राम पर 2 नाबालिग हिंदू बहनों को फँसाया, फिर ब्लैकमेल कर शुरू कर दी उगाही: परेशान लड़कियों ने दी जान, आरोपित UP से गिरफ्तार

उदयपुर के गोगुंदा में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 19 वर्षीय शहवाज ने इंस्टाग्राम के जरिए दो नाबालिग चचेरी बहनों को अपने जाल में फंसा लिया। शहवाज ने सोशल मीडिया पर दोस्ती कर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू किया। उसने बहाने बनाकर करीब ₹12,000 ऐंठे और और भी पैसे माँग रहा था। तनाव से तंग आकर दोनों बहनों ने जहर खाकर अपनी जान दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहवाज ने दोनों बहनों से इंस्टाग्राम पर दोस्ती की और धीरे-धीरे उनकी भावनाओं के साथ खेला। वह कभी मोबाइल खराब होने का बहाना बनाता तो कभी अन्य कारण से पैसे माँगता। इसके बाद, फोन पर बात करने और मिलने का दबाव डालता था। जब लड़कियाँ उसकी माँगें पूरी करने में असमर्थ रहीं, तो उसने उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

दोनों बहनें पिछले कुछ समय से तनाव में थीं। उन्होंने अपनी परेशानी परिवार को भी नहीं बताई। घटना वाले दिन दोनों के शव घर से थोड़ी दूरी पर मिले। उनके गले में काला-सफेद धागा बंधा हुआ था, जिससे परिवार ने इसे हत्या की ओर भी इशारा किया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की और शहवाज को उत्तर प्रदेश के हापुड़ से गिरफ्तार किया। जाँच में पता चला कि वह दोनों लड़कियों को आत्महत्या के लिए उकसा रहा था। पुलिस ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट खंगाले तो ब्लैकमेलिंग और पैसे ऐंठने की पुष्टि हुई।

इस मामले में लव जिहाद की भी आशंका जताई जा रही है, क्योंकि शहवाज का मकसद लड़कियों को फंसाकर उनका शोषण करना था। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है और इस तरह के सोशल मीडिया अपराधों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

गोगुंदा में सितंबर में भी हुआ था बवाल, नाबालिग को भगा ले गया था मुस्लिम

बता दें कि उदयपुर के गोगुंदा में सितंबर 2024 की शुरुआत में भी लव जिहाद का मामला सामने आया था, जहाँ एक मुस्लिम युवक नाबालिग हिंदू लड़की को अपनी जाल में फंसाकर भगा ले गया था। उस मामले में काफी तनाव पैदा हो गया था और स्थानीय लोगों ने बाजार बंद कर प्रदर्शन भी किया था। 2 बहनों के मामले में पुराने विवाद का भी साया हो सकता है, क्योंकि लव जिहाद के मामले में 2 माह पहले हुआ बवाल उनके मन में घूम रहा होगा।

संभल में मस्जिद का हुआ सर्वे तो जुमे पर उमड़ आई मुस्लिम भीड़, 4 गुना पहुँचे नमाजी: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, ड्रोन निगरानी

उत्तर प्रदेश के संभल में विवादित जामा मस्जिद में जुमे की नमाज पर भारी भीड़ उमड़ी। इस मस्जिद में इतने मुस्लिम आए कि अंदर जगह तक नहीं बची। लोगों ने बताया कि हिन्दुओं के दावे के बाद कई गुना नमाजी यहाँ आए। प्रशासन ने भारी पुलिस बल लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया। इस मस्जिद पर हिन्दुओं ने कहा है कि यह हरि हर मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

यह भीड़ शुक्रवार (22 नवम्बर, 2024) को उमड़ी। इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले एक वकील ने मीडिया से बताया कि सामान्यतः यहाँ 500-600 लोग जुमे की नमाज पढ़ने आते थे लेकिन मुकदमे और सर्वे के बाद जुमे को यहाँ 4000 से अधिक लोग पहुचे। इनमें से 2000 मस्जिद में अंदर गए जबकि बाकी को रोकना पड़ा।

संभल की विवादित जामा मस्जिद में बढ़ी भीड़ के पीछे सोशल मीडिया पर फैलाया गया मैसेज कारण बताया गया। कहा गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करके मुस्लिमों से बड़ी संख्या में जुमे को जामा मस्जिद पहुँचने को कहा गया था।

संभल में जामा मस्जिद में बढ़ी नमाजियों की संख्या के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो गया। कई स्कूलों में जल्दी छुट्टी हुई तो वहीं कई दुकानें भी बंद रहीं। अनहोनी की आशंका के चलते प्रशासन ने मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए थे।

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद में वही लोग जाएँगे जो स्थानीय हैं। जामा मस्जिद में बढ़ी भीड़ के चलते कमिटी को खुद ऐलान करना पड़ा कि लोग अंदर ना आएँ। मस्जिद कमिटी ने बढ़ी संख्या से परेशान होकर कहा कि नमाजी दूसरी मस्जिद में जाएँ।

गौरतलब है कि 19 नवम्बर, 2024 को कोर्ट के आदेश पर संभल की मस्जिद में सर्वे किया गया था। यह आदेश हिन्दू पक्षकारों की याचिका पर दिया गया था। हिन्दू पक्षकारों ने इस मस्जिद को लेकर एक मुकदमा दायर किया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जहाँ आज मस्जिद है, वहाँ कभी भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दुओं ने कहा है कि बाबर के शासनकाल में यहाँ मंदिर को उसके एक कमांडर ने तोड़ दिया था। इसके बाद यहाँ मस्जिद बनाई गई। हिन्दू पक्ष ने इस बात को साबित करने के लिए बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी और अंग्रेज अफसर कनिंघम के रिकॉर्ड रखे हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर हमला, कई घायल, खून से लथपथ: प्रदर्शन करने जा रहे अल्पसंख्यकों पर टूट पड़ी इस्लामी कट्टरपंथी भीड़, देखती रही पुलिस-सेना

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में एक प्रदर्शन रैली में शामिल होने जा रहे हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला कर दिया। ये हमले शुक्रवार (22 नवंबर 2024) को हुए, जब महिगंज कॉलेज ग्राउंड की ओर जा रहे हिंदू जा रहे थे। कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं को बसों में यात्रा करने और प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोका। हमले में कई हिंदू घायल हो गए, लेकिन डराने-धमकाने के बावजूद, बड़ी संख्या में हिंदू प्रदर्शन में शामिल हुए।

पीड़ित हिंदू ‘बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट’ द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन रैली में शामिल होना चाहते थे। यह रैली मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों के अधिकारों और संरक्षण के लिए 8 माँगों को लागू करने की अपील को लेकर आयोजित की गई थी।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर से जुड़े कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि हिंदुओं को बसों से यात्रा करने और प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोका गया।

सूत्रों के अनुसार, कई बसों पर हमला किया गया। इस दौरान पुलिस और सेना के अधिकारियों ने इस उग्र इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

हालाँकि, डराने-धमकाने के इन प्रयासों के बावजूद, हिंदू प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी 8 माँगों को लागू करने की अपील की। ये माँगे थीं:

  • अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों का तेजी से निपटारा और पीड़ितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास।
  • अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम का निर्माण।
  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का गठन।
  • हिंदू वेलफेयर ट्रस्ट को हिंदू फाउंडेशन में अपग्रेड करना।
  • प्रॉपर्टी रिकवरी एंड प्रिजर्वेशन एक्ट और ट्रांसफर ऑफ एंट्रस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट का सही तरीके से लागू करना।
  • हर शैक्षणिक संस्थान में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों का निर्माण और हर हॉस्टल में प्रार्थना कक्ष का आवंटन।
  • संस्कृत और पाली शिक्षा बोर्ड का आधुनिकीकरण।
  • दुर्गा पूजा पर 5 दिनों की अनिवार्य छुट्टी।

मुस्लिम लड़की और हिन्दू लड़के ने की मंदिर में शादी, अब्बू ने ‘दामाद’ पर ही करवा दी रेप की FIR: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी जमानत, कहा- बाहर जाकर करो नियम-कानून से विवाह

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक हिन्दू युवक को मुस्लिम लड़की से शादी करने के आधार पर जमानत दे दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि हिन्दू युवक जेल से छूट कर मुस्लिम लड़की से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट में शादी करेगा। हिन्दू युवक पर उसकी मुस्लिम प्रेमिका के अब्बू ने रेप और अपहरण के मामले में FIR दर्ज करवा दी थी। इस चक्कर में हिन्दू युवक को जेल जाना पड़ा था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने 14 नवम्बर, 2024 को दिए गए आदेश में कहा, “ऐसा लगता है कि लड़की के जीवन की सुरक्षा के लिए युवक उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर सकता है, जिसके लिए उसे चार महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है।”

क्या था मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर से जुड़ा हुआ है। यहाँ के एक हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की के साथ मंदिर में शादी की थी। इसके लिए मुस्लिम लड़की ने अपना घर छोड़ दिया था। हालाँकि, दोनों के धर्म अलग होने की वजह से मुस्लिम लड़की के घरवालों को यह पसंद नहीं आया।

लड़की के अब्बू ने अपनी बेटी के प्रेमी के खिलाफ इसके बाद अम्बेडकर नगर की टांडा कोतवाली में एक FIR दर्ज करवा दी। इस FIR में आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी का हिन्दू युवक ने अपहरण किया है। इसके अलावा हिन्दू युवक पर रेप का आरोप लगाया गया। लड़की के अब्बू ने दावा किया कि उनकी बेटी नाबालिग थी, इसलिए हिन्दू युवक पर POCSO की धाराएँ भी लगी।

इसके बाद जुलाई, 2024 में युवक को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। वहीं मुस्लिम लड़की ने अपने घर नहीं गई और वह लखनऊ के एक अनाथालय में रहने लगी। इसके बाद हिन्दू युवक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस संबंध में अंतरिम जमानत के लिए याचिका लगाई।

हिन्दू युवक ने याचिका में कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है लेकिन उसके घर वाले उसे नहीं रहने दे रहे। लड़की ने भी यही बात कही। इस मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम लड़की ने कहा कि उसके हिन्दू पति के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं।

मुस्लिम लड़की ने कोर्ट को बताया कि उसने हिन्दू युवक के साथ मंदिर में शादी की थी और अब आगे उसी के साथ रहना चाहती है। मुस्लिम लड़की ने बताया कि उसके हिन्दू युवक के साथ शादी करने के कारण दकियानूसी मुस्लिम परिजन उससे गुस्सा हैं और उन्होंने इस शादी को मंजूर नहीं किया है।

लड़की ने बताया कि उसकी उम्र 18 साल है लेकिन उसके पास इस बात को सिद्ध करने के लिए कोई कागज नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में मेडिकल जाँच करवाई जिसमें लड़की को लगभग 16-17 साल का बताया गया। हालाँकि, लड़की ने इस बात पर जोर दिया कि वह 18 साल की है।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

लड़की की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्ष सुनने के बाद, लगता है कि भविष्य में लड़की के जीवन की रक्षा के लिए युवक उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर सकता है, जिसके लिए उसे चार माह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है।”

हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपित को 4 महीने के लिए छोड़ दिया जाए और वह जेल से बाहर निकल कर पहले लड़की को अनाथालय से अपने पास लाए और फिर उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करे। हाई कोर्ट ने युवक को ₹20,000 के दो मुचलके पर जमानत दी है।

कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर दोनों पति-पत्नी शादी के सबूत के साथ कोर्ट में आएँ। कोर्ट ने इसी के साथ हिन्दू युवक को हिदायत दी कि वह जमानत का गलत फायदा ना उठाए। इस सुनवाई में मुस्लिम लड़की के अब्बू ने कहा कि अब उन्होंने अपनी बेटी से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने दिखानी चाही PM और गौतम अडानी की तस्वीर, दिखा दी अडानी और रॉबर्ट वाड्रा की फोटो: पैनलिस्ट ने कहा, ये ‘जीजा जी’ के साथ

अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी पर लगाए गए आरोपों ने विपक्षी पार्टियों को मोदी सरकार पर निशाना साधने का मौका दिया है। हालाँकि, अडानी को भ्रष्ट साबित करने और पीएम मोदी को इस मामले से जोड़ने के प्रयास में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अजय वर्मा ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर अपनी पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बना दिया।

21 नवंबर को दूरदर्शन न्यूज़ के एक डिबेट शो में अडानी पर लगे आरोपों को लेकर चर्चा हो रही थी। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अजय वर्मा ने विपक्ष की इस धारणा को आगे बढ़ाने की कोशिश की कि पीएम मोदी और गौतम अडानी बहुत करीबी हैं। इसे साबित करने के लिए वर्मा ने अपने मोबाइल पर एक तस्वीर दिखाई, जिसे उन्होंने पीएम मोदी और गौतम अडानी की तस्वीर समझा। लेकिन, बहस के दौरान पैनलिस्ट हंस पड़े क्योंकि वह तस्वीर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा और अडानी की थी। शो में शामिल OnlyFact India के संस्थापक विजय पटेल ने मजाक में कहा, “यह फोटो मोदी जी के साथ नहीं, जीजा जी (राहुल गाँधी के बहनोई) के साथ है।”

यह तस्वीर 2009 की थी, जब रॉबर्ट वाड्रा ने यूपीए सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद अडानी के मुंद्रा स्थित पोर्ट और SEZ का दौरा किया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाड्रा की यह यात्रा एक केंद्रीय मंत्री द्वारा आयोजित की गई थी, जो अडानी समूह के करीबी थे।

अमेरिका के आरोप और उनकी सच्चाई

गौतम अडानी और उनके सात अधिकारियों पर अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अज्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष शर्तों पर ठेके देने के बदले 250 मिलियन डॉलर (2100 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी गई।

हालाँकि कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा वाले ग्रुप अमेरिकी न्याय विभाग के इन आरोपों को सत्य मानते हुए प्रचारित कर रहे हैं, पर आरोपों के अनुसार रिश्वत 2021 से 2022 के बीच दी गई थी। इस दौरान जिन राज्यों का नाम सामने आया है, उनमें से एक भी राज्य भाजपा शासित नहीं था। इन राज्यों में तमिलनाडु (जहाँ डीएमके सत्ता में है), ओडिशा (बीजेडी सरकार), छत्तीसगढ़ (कॉन्ग्रेस सरकार), और आंध्र प्रदेश (वाईएसआर कॉन्ग्रेस सरकार) शामिल हैं।

बता दें कि गौतम अडानी पर राहुल गाँधी का खास फोकस है। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब राहुल गाँधी अडानी पर टिप्पणी न करें और पीएम मोदी पर पक्षपात का आरोप न लगाएँ। उन्होंने ‘मोदानी’ जैसे शब्द गढ़े और दावा किया कि पीएम मोदी अडानी के “कर्मचारी” हैं।

लेकिन यह विडंबना है कि कॉन्ग्रेस पार्टी जो अडानी को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश करती है, उसी पार्टी की तेलंगाना सरकार हाल ही में 2024 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस, स्विट्जरलैंड) के दौरान अडानी समूह के साथ 12,400 करोड़ रुपये के चार समझौतों पर हस्ताक्षर करती है।

‘ये चेहरे पर चेहरा लगाओगी कब तक…’: महाराष्ट्र में वोटिंग खत्म होते ही बेगम स्वरा भास्कर हुईं वोक, चुनावों में पैगंबर मुहम्मद के नाम पर माँग रही थीं वोट

‘जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग… जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग…एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग…’। फिल्म दाग में लता मंगेशकर का गाया हुआ यह गाना आपने जरूर सुना होगा। अगर नहीं सुना है तो जरूर सुनिए और बॉलीवुड की फ्लॉप अभिनेत्री स्वरा भास्कर को याद कीजिए। ऐसा लगता है कि यह गाना स्वरा भास्कर को ही ध्यान में रखकर लिखा गया था, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में अपने चेहरे पर कई नकाब ओढ़े और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की।

स्वरा भास्कर ने 21 नवंबर को सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक अपनी फोटो की क्लोज शेयर की। इसमें उन्होंने कई परिधानों में अपनी तस्वीरें शेयर कीं। यह नॉर्मल है। लेकिन, स्वरा ने इस फोटो के साथ जो पोस्ट शेयर किया, वह ध्यान देने वाला है। उन्होंने लिखा, “मुझे इस बात का एहसास नहीं था कि शादी के बाद मेरे परिधानों का चुनाव एक राष्ट्रीय साइबर बहस (विचित्र!) है।”

उन्होंने आगे लिखा, “यहाँ शादी के बाद की मेरी और तस्वीरें हैं, ताकि संघी कीड़ों को उनके गोबर के लिए और अधिक बकवास मिल सके ?. मुझे खेद है फहाद ज़िरार अहमद (उनके राजनेता शौहर) एक रूढ़िवादी मुस्लिम पति की आपकी छवि में फिट नहीं बैठता।” इस पोस्ट में स्वरा में खुद को और अपने शौहर को आधुनिक सोच वाला एवं प्रगतिशील दिखाने की कोशिश की।

इसके साथ ही उन्होंने ‘संघी कीड़े’ कहकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों को एक तरह से गाली देने का काम किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में भाजपा समर्थकों को रूढ़िवादी और पिछड़ा दिखाने की कोशिश की है। स्वरा का इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल एक वर्ग के प्रति उनकी घृणा को दर्शाता है और ये बताता है कि किस हद तक वह भाजपा से नफरत करती हैं।

हालाँकि, इस तस्वीर को शेयर करने के कुछ देर बाद ही उन्होंने एक दूसरी तस्वीर पर शेयर की और अपना असली स्वरूप दिखा दिया। इस तस्वीर में वह सिर पर चुन्नी ओढ़े और हाथ में बिरयानी जैसी दिख रही खाद्य पदार्थ का प्लेट लेकर मुस्कुराते हुए दिख रही हैं। यह उनके पहले वाली पोस्ट से ठीक उलट है। या फिर कह सकते हैं कि मुस्लिम परिधान में दूसरी तस्वीर डालकर उन्होंने ‘किसी को’ चिढ़ाने की कोशिश की।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के खत्म होते ही स्वरा भास्कर तस्वीरों की कोलाज डालकर खुद को प्रगतिशील और आधुनिक दिखाने की कोशिश की है। हालाँकि, उनके वास्तविक चेहरे को देखने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के प्रचार को ध्यान देना होगा। स्वरा ने फहाद अहमद नाम के एक मुस्लिम से शादी की है। फहाद ने इस बार सपा की साइकिल छोड़कर शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का हाथ थामा है।

शरद पवार ने फहाद को मुंबई की अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस दौरान स्वरा भास्कर ने फहद का जमकर चुनाव प्रचार किया। मु्स्लिम इलाकों में गईं और अल्लाह और पैगंबर मुहम्मद के नाम पर वोट माँगे। पूरे चुनाव वह उन्होंने खुद को एक मुस्लिम के रूप में प्रस्तुत किया। इस्लाम की जमकर तारीफ की और हिंदुओं को जमकर कोसा।

खैर लौटते हैं महाराष्ट्र चुनाव में स्वरा के किरदार की ओर। स्वरा भास्कर ने अपने शौहर के पक्ष में मुस्लिम वोटों को पोलराइज करने के लिए महिला-विरोध के लिए कुख्यात मौलाना सज्जाद नोमानी के मिलने फहाद अहमद के साथ गईं। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम पहनावे का विशेष तौर पर ध्यान रखा। इसकी तस्वीर भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

मौलाना सज्जाद नोमानी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अप्रैल 2023 में मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा था कि रमजान के वक्त लड़कियों को स्कूल/कॉलेज अकेले नहीं भेजना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना इस्लाम में हराम है। वीडियो में नोमानी ने कहा था, “पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ, जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या स्कूल-कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”

इसके ठीक दो दिन बाद अणुशक्ति नगर में चुनाव प्रचार करने का एक वीडियो सामने आया। इस रैली में वो उसी सुर और शब्दों में बात कर रही हैं, जो इस्लामी कट्टरपंथियों की रैली में होता है। स्वरा भास्कर अपने भाषण में मुस्लिमों को समझाती हैं कि वो गलती से भी उन ‘गुस्ताखों’ को समर्थन न दें, जिन्होंने कभी ईशनिंदा की हो। वह दीन-ईमान की बातें करके मुस्लिमों को इंप्रेस करती हैं।

रैली में स्वरा भास्कर कहती हैं कि वह हिंदू घर में जन्मी और मुस्लिम लड़के से शादी की, लेकिन उन्हें बस कहना ये है कि ‘हजूर पाक’ केे प्रति मन में इज्जत होने के लिए जरूरी नहीं कि इंसान किस जाति में पैदा हुआ हो। उनका इस्लामी शब्दावलियों से भरा ये भाषण सुन सारे मुस्लिम इतने खुश हुए कि स्वरा का उत्साह तालियाँ बजाकर बढ़ाते रहे और स्वरा बोलती रहीं।

वीडियो में स्वरा भास्कर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का नाम लेने से पहले ‘सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’ जोड़ना नहीं भूलती हैं। उनकी बातें और शब्द सुनकर कहीं से नहीं लगता है कि वह प्रगतिशील, आधुनिक और धर्मनिरपेक्षता से उनका दूर-दूर तक कोई नाता है। यह तो कतई नहीं लगता है कि उनकी परवरिश कभी हिंदू की तरह भी हुई होगी। इस्लाम के प्रति गहरा झुकाव एवं कठमुल्लों की सोच उनके पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

ये वही, हिंदू हैं जिन्होंने एक साधारण सी दिखने वाली एक लड़की को अभिनेत्री बनाया और बॉलीवुड में कुछ दिनों तक ही सही, टिकाए रखा। हालाँकि, अपने व्यवहार और बयान से बहुसंख्यक लोगों के मन-मस्तिष्क से उतरती चली गईं। जब लोगों ने CAA से लेकर तमाम मुद्दों पर स्वरा भास्कर का बयान देखा और पढ़ा तो उन्हें बेहद अफसोस हुआ।

फिल्म जख्मी में किशोर कुमार का गाया और शत्रुघ्न सिन्हा पर फिल्माया गया गाना ‘तुझे सब प्यार करते हैं, सभी ने तुझको पूजा है… मगर ऐ प्यार की देवी, ये मैं जानूँ की तू क्या है… ये चेहरे पर चेहरा लगाओगी कब तक, जमाने से खुद को छुपाओगी कब तक’ स्वरा पर सटीक बैठता है। लोगों ने उनके वास्तविक चेहरे को पहचान लिया है।

उनके शौहर का चुनाव खत्म खत्म तो स्वरा भास्कर फिर से प्रगितशीलता का नकाब ओढ़ने लगी हैं, लेकिन हिंदी में एक कहावत है कि ‘काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती’। अब वह प्रगतिशीलता, आधुनिकता और स्वतंत्र सोच की प्रतीक नहीं, बल्कि रूढ़ीवादी एवं नफरत करने वाले व्यक्ति के सोच की प्रतीक बन गई हैं। यही उनका असली चेहरा है।

हालाँकि, हिन्दुस्तान जैसी मीडिया हाउस स्वरा भास्कर जैसी प्रगतिशीलता की चतुर चैंपियन के बहकावे में आ जाते हैं और उनकी तस्वीरों को खबर के रूप में परोस करके ना चाहते हुए भी उसका PR कर बैठते हैं। हिंदुस्तान ने स्वरा की विभिन्न परिधानों में शेयर की गई तस्वीरों को उनकी उनकी बोल्डनेस और प्रगतिशीलता से जोड़ा है और उनके घृणास्पद बयान को ‘ट्रॉल्स को करारा जवाब‘ बताया है।

मुगलों ने खुद लिखा, अंग्रेजों के इतिहास में भी दर्ज, सरकारी दस्तावेज भी… फिर भी संभल में कैसे मंदिर पर बन गई मस्जिद

उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित जामा मस्जिद का हाल ही में एक टीम ने सर्वे किया। यह सर्वे 19 नवम्बर, 2024 को किया गया। इस दौरान मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी की गई। यह सर्वे स्थानीय कोर्ट के आदेश के बाद किया गया। सर्वे को लेकर हिन्दुओं ने याचिका लगाई थी। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जहाँ आज जामा मस्जिद खड़ी है, वहाँ कभी उनके आराध्य विष्णु का मंदिर हुआ करता था। हिन्दुओं ने कहा है कि इस मंदिर को इस्लामी आक्रान्ता बाबर के शासनकाल में तोड़ा गया था।

हिन्दुओं ने मंदिर के अपने दावे को पुख्ता करने के लिए कई ऐतिहासिक प्रमाण भी दिए हैं। यहाँ तक कि उन्होंने बाबर का खुद का लिखा कागज भी रख दिया है। इसके अलावा उन्होंने अकबर और अंग्रेजों के शासनकाल से भी साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे हैं।

सबसे पहले समझिए मामले की डिटेल

संभल के जिला न्यायालय में एक याचिका लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि संभल में स्थित जामा मस्जिद का निर्माण सदियों पुराने श्री हरि हर मंदिर पर किया गया था, जो भगवान कल्कि को समर्पित था और जिसे बाबर ने नष्ट कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि यह स्थल हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व रखता है और इसे मुगल काल के दौरान इसे जबरन मस्जिद में बदल दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में यह संरक्षित स्मारक है।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील और एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के पिता हरि शंकर जैन, नोएडा के पार्थ यादव साथ अन्य याचिकार्ताओं ने लगाई है। याचिका लगाने वालों में और भी लोग शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट से कहा है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव के भक्त होने के नाते, उन्हें पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में जाने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि मस्जिद प्रबंधन ने पूजा करने के अधिकार को छीन लिया है। इसके अलावा, उन्होंने ASI पर इस जगह तक सार्वजनिक पहुँच के अधिकार को सुनिश्चित ना करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अभी की स्थिति उनके धर्म का पालन करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करती है।

हिन्दू पक्ष ने किस आधार पर कही मंदिर की बात

हिन्दू पक्ष ने याचिका में श्री हरि हर मंदिर के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा है कि यह स्थल हिन्दू धर्मग्रंथों में पूजनीय है और इसकी भविष्यवाणी कल्कि अवतार से जुड़ी है। गौरतलब है कि भगवान कल्कि को भगवान विष्णु का दसवाँ और अंतिम अवतार माना जाता है। मान्यता के अनुसार, कलयुग का अंत करने और सतयुग की शुरुआत करने के लिए कल्कि संभल में प्रकट होंगे। संभल के अलग-अलग युग में अलग-अलग नाम रहे हैं। इसे सतयुग में संभलेश्वर, त्रेता युग में महादगिरि, द्वापर युग में पिंगला और कलयुग में संभल बताया गया है।

हिन्दू पक्ष ने याचिका में कहा है कि भगवान कल्कि को समर्पित श्री हरि हर मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण सृष्टि के आरंभ में भगवान विश्वकर्मा ने किया था। भगवान विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार हैं। हिन्दू धर्मशास्त्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु और भगवान शिव की एकता का प्रतीक बताया गया है। हिन्दू ग्रंथों में लिखा है, ““यथा शिवस्तथा विष्णु, यथा विष्णुस्तथा शिवः” जिसका अर्थ है ‘जैसे शिव हैं, वैसे ही विष्णु हैं; जैसे विष्णु हैं, वैसे ही शिव हैं।’

हिन्दू पक्ष ने कहा है कि यह मंदिर मुग़ल काल में तोड़ दिया गया था और यहं पर जबरदस्ती एक मस्जिद तामीर कर दी गई थी। इसको लेकर हिन्दू पक्ष ने बाबर और अकबर समेत अंग्रेजों के समय से तीन ऐतिहासिक तथ्य निकाल कर कोर्ट के सामने पेश किए हैं।

सबूत नम्बर 1: बाबर का कबूलनामा

बाबर के सेनापति हिन्दू बेग ने कथित तौर पर मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया और 1527-28 में इसे मस्जिद में बदल दिया। यह काम बाबर के निर्देश पर इस्लामी वर्चस्व स्थापित करने और स्थानीय हिन्दू आबादी को डराने के लिए किया गया था। हिन्दू पक्ष ने इस घटना के सबूत के तौर बाबर की डायरी यानी बाबरनामा को रखा है।

संभल मस्जिद हिन्दू मंदिर

बाबरनामा के अनुसार, “हिन्दू बेग कुचिन 932 हिजरी (इस्लामी साल) में हुमायूँ के चेले थे और उन्होंने उनके लिए संभल पर कब्ज़ा किया था। इसलिए, ऐसा लगता है कि उन्हें काबुल से महिलाओं को ले जाते समय संभल जाने का आदेश दिया गया था… यहाँ यह वाली बात है कि 933 हिजरी में संभल में उन्होंने एक हिन्दू मंदिर को मस्जिद में बदल दिया था। यह बाबर के आदेश पर किया गया था और मस्जिद पर आज भी मौजूद एक शिलालेख में इसका जिक्र है। लगता नहीं है कि बाबर ने खुद ये लिखवाया है, क्योंकि इसमें तारीफ की गई है।”

सबूत नम्बर 2: आइन-ए-अकबरी

हिन्दू पक्ष ने बाबरनामा के साथ ही उसके बेटे अकबर के शासनकाल में लिखा गया आइन-ए-अकबरी का भी संदर्भ दिया गया है। आईन-ए-अकबरी में इसको लेकर लिखा गया, “संबल (संभल) इलाके में बहुत सारे शिकार हैं। यहाँ गैंडा भी मिलता है। यह एक छोटा हाथी जैसा जानवर है, इसके सूंड नहीं होती और इसकी थूथन पर एक सींग होता है जिससे यह जानवरों पर हमला करता है। इसकी खाल से ढालें ​​बनाई जाती हैं और सींग से धनुष की डोरी से उंगली बचाने वाले दस्ताने और बाकी इसी तरह की अन्य चीजें बनाई जाती हैं।”

आगे आइन-ए-अकबरी में लिखा है, “संभल शहर में हरिमंडल (विष्णु का मंदिर) नाम का एक मंदिर है जो एक ब्राह्मण का है, उसके वंशजों में से दसवाँ अवतार इस स्थान पर प्रकट होगा। हांसी एक प्राचीन स्थान है, जो शेख फरीद-ए-शकर गंज के उत्तराधिकारी जमाल की समाधि है।” हिन्दू पक्ष ने मुगलों के अलावा अंग्रेजों के समय का ब्यौरा भी दिया है।

सबूत नम्बर 3: अंग्रेज अफसर की रिपोर्ट

याचिका में एक अंग्रेज अफसर द्वारा किए गए सर्वे का ब्यौरा भी दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि 1874-76 के दौरान मेजर-जनरल ए. कनिंघम द्वारा संभल में कई पुरातात्विक सर्वेक्षण किए गए थे, वह उस समय ASI के मुखिया थे। उन्होंने ‘मध्य दोआब और गोरखपुर में भ्रमण’ शीर्षक से एक रिपोर्ट लिखी थी। इसमें मंदिर के वास्तुशिल्प की भी बात की गई थी। यह मंदिर के वह हिस्से थे जो मस्जिद बनाने के दौरान बच गए थे और कनिंघम के सर्वे के दौरान भी मौजूद थे।

संभल पर लिखी गई एक पुस्तक के कुछ हिस्सों में लिखा है, “संभल में मुख्य इमारत जामी मस्जिद है, इसके बारे में हिन्दू दावा करते हैं कि यह मूल रूप से हरि मंदिर था। इसमें 20 फीट वर्ग का एक केंद्रीय गुंबददार कमरा है, जिसमें गैर बराबर लंबाई के दो हिस्से हैं। एक हिस्सा उत्तर की ओर 500 फीट 6 इंच है, जबकि दक्षिण की तरफ केवल 38 फीट 1½ इंच है। दोनों हिस्सों मेंतीन मेहराबदार दरवाजे हैं। जो सभी अलग-अलग चौड़ाई के हैं, जो 7 फीट से 8 फीट तक अलग-अलग हैं।”

संभल मस्जिद हिन्दू मंदिर

किताब में आगे लिखा गया है, “मुसलमानों का मानना ​​है कि इस इमारत का निर्माण बादशाह बाबर के समय में हुआ था और वे मस्जिद के अंदर एक शिलालेख की ओर इशारा करते हैं। इस शिलालेख में जिसमें निश्चित रूप से बाबर का नाम है, लेकिन हिन्दू कहते हैं कि यह फर्जी तौर पर बनाई गई है। हिन्दुओं के अनुसार, इस स्लैब के पीछे मंदिर से संबंधित मूल हिंदू शिलालेख है। संभल के कई मुसलमानों ने मेरे सामने कबूल किया कि बाबर के नाम वाला शिलालेख जाली है।”

कनिंघम की किताब के अनुसार, “मुसलमानों को इमारत पर 1857 के विद्रोह या उससे लगभग 25 साल पहले तक भी इस इमारत पर कब्जा नहीं हासिल हुआ था। उन्होंने इमारत पर बलपूर्वक कब्ज़ा किया और फिर जिला जज के सामने एक मुकदमा चला और मुसलमानों ने मुख्य रूप से फर्जी शिलालेख और सभी मुसलमानों के एक साथ मिलकर हिंदुओं के खिलाफ झूठी गवाही देने के कारण मामला जीता। इस दौरान हिन्दू यहाँ अल्पसंख्यक थे।”

ASI को भी लिया घेरे में

याचिका में विवादित मस्जिद के ASI नियंत्रण को लेकर भी बात की गई है। मस्जिद को 22 दिसंबर, 1920 को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया कि तब से ही स्थल को ASI की देखरेख और नियंत्रण में रखा गया है। ASI के नियमों के अनुसार, उसे इसका संरक्षण करने के साथ ही यहाँ जनता के आने-जाने के लिए अनुमति देनी चाहिए। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया कि ASI जनता को यहाँ पहुँच प्रदान करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में फेल रहा है।

अब हिन्दू पक्ष की क्या माँग?

हिन्दू पक्ष ने मस्जिद में प्रवेश और इसके प्रबन्धन को ASI को सौंपे जाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट इस संबंध में आदेश जारी कर दे। इसके अलावा, उन्होंने ASI और गृह मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय सहित संबंधित सरकारी अधिकारियों को मस्जिद में पहुँच देने के लिए नियम बनाने की माँग की है। उनकी सर्वे की माँग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा हिन्दू पक्ष ने कहा है कि मस्जिद कमिटी लोगों के आने जाने को रोक ना पाए, इसको लेकर भी आदेश जारी किया जाए।

जिन कपिल मुनि के कारण गंगा धरती पर आईं, मकर संक्रांति के दिन हिंदुओं को मिलता है मोक्ष… खतरे में उनका मंदिर, सो रही बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल के गंगासागर में स्थित विश्व प्रसिद्ध कपिल मुनि मंदिर पर समुद्र के बढ़ते पानी का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है, जहाँ हर साल मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालु गंगासागर मेले में आते हैं। लेकिन अगले 2 सालों में ये प्रसिद्ध मंदिर समंदर में समा सकता है, क्योंकि आध्यात्मिक आस्था के इस प्रसिद्ध केंद्र को बचाने के लिए राज्य सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में आए चक्रवात ‘दाना’ ने मिट्टी के कटाव को तेज कर दिया है। अब समुद्र और मंदिर के बीच सिर्फ एक किलोमीटर का फासला रह गया है। इससे पहले भी गंगासागर तट पर तीन मंदिर समुद्र में समा चुके हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगले दो साल में यह मंदिर भी जलसमाधि ले सकता है।

हालाँकि, अब इस समस्या को हल करने के लिए बंगाल सरकार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास और नीदरलैंड के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। विश्व बैंक भी इस प्रयास में आर्थिक सहयोग करेगा। जल्द ही विशेषज्ञों की टीम गंगासागर का दौरा कर मिट्टी कटाव रोकने के प्रभावी उपाय सुझाएगी। राज्य के सिंचाई मंत्री मानस भुइयां ने इस गंभीर स्थिति पर अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। मिट्टी कटाव रोकने के लिए बनाए गए बैरियर पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। चक्रवात “यास” और “दाना” से तट को भारी नुकसान हुआ है।

गंगासागर का कपिल मुनि मंदिर: आस्था और महत्व

कपिल मुनि मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। गंगासागर, जो बंगाल की खाड़ी में स्थित एक द्वीप है, हिंदुओं के लिए धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि इसका पहला निर्माण रानी सत्यभामा ने 430 ईस्वी में करवाया था। आधुनिक मंदिर 1974 में बनाया गया, लेकिन समुद्र के बढ़ते जलस्तर और चक्रवातों के कारण इसे लगातार खतरा बना हुआ है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पर्यावरणीय संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। सरकार और विशेषज्ञों के प्रयासों के जरिए मंदिर को बचाने की कोशिश की जा रही है ताकि यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहे।

हिंदू ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु ने कपिल मुनि के रूप में इस स्थान पर अवतार लिया और तपस्या की। इसी दौरान, राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया और उनके यज्ञ का अश्व इंद्र ने चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास छोड़ दिया। राजा सगर के 60,000 पुत्रों ने कपिल मुनि पर घोड़े की चोरी का आरोप लगाया, क्योंकि देवराज इंद्र ने ये घोड़ा यहाँ बाँधा था, आरोप कपिल मुनि पर आया। ऐसे में झूठे आरोपों से क्रोधित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के सभी पुत्रों को भस्म कर दिया।

जब राजा सगर ने क्षमा माँगी, तो कपिल मुनि ने सुझाव दिया कि गंगा को धरती पर लाने से उनके पुत्रों को मोक्ष मिलेगा। राजा भगीरथ ने घोर तपस्या कर गंगा को धरती पर लाने में सफलता पाई। गंगा के स्पर्श से राजा सागर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ।

गंगा नदी यहीं बंगाल की खाड़ी में मिलती है। मकर संक्रांति के दिन यहाँ स्नान करने का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। लाखों श्रद्धालु इस दिन पवित्र स्नान कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन पवित्र स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कपिल मुनि मंदिर इस ऐतिहासिक और पौराणिक घटना का प्रतीक है। माना जाता है कि यहीं पर उन्होंने तपस्या की थी। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1974 में बना था, लेकिन समुद्र के बढ़ते जलस्तर और मिट्टी के कटाव के कारण इसे खतरा बना हुआ है। गंगासागर हिंदू तीर्थस्थलों में विशेष स्थान रखता है और कुम्भ मेले के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला यहीं लगता है। श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और पौराणिक महत्व इसे एक विशिष्ट तीर्थस्थल बनाते हैं।