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बंगाल में हिंसा जारी, दो गुटों में झड़प, 1 की मौत, धारा 144 लागू

पश्चिम बंगाल में हिंसक घटनाओं का दौर अभी भी जारी है। ताज़ा समाचार राज्य के भाटपारा क्षेत्र से है जहाँ गुरुवार (20 जून) को दो गुटों के बीच हुई आपसी झड़प में एक व्यक्ति की मौत और चार अन्य के घायल होने की ख़बर सामने आई है। भाटपारा और जगतदल के अधिकारियों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते चार से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाते हुए धारा 144 लागू कर दी है। मृतक की पहचान रामबाबू शॉ के रूप में हुई है।

ख़बर के अनुसार, इस झड़प के दौरान दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर कच्चे बम फेंके और गोलियाँ भी बरसाई। स्थिति पर नियंत्रण के लिए जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे। फ़िलहाल घायलों को इलाक़े के एक निजी अस्पताल (बीएन बोस) में भर्ती कराया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार के गृह सचिव, अलपन बंदोपाध्याय ने मीडिया को बताया, “इन क्षेत्रों में कुछ असामाजिक और आपराधिक तत्व सक्रिय रहे हैं। कुछ बाहरी तत्व भी स्थानीय असामाजिक तत्वों में शामिल हो गए। सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से असाधारण मानती है।”

गृह सचिव, अलपन बंदोपाध्याय ने बताया, “आईपीएस, एडीजी संजय सिंह को दक्षिण बंगाल को तत्काल प्रभाव से बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय का विशेष प्रभार सौंपा गया है। बैरकपुर आयुक्तालय के एडीजी प्रभारी जल्द ही घटनास्थल पर पहुँच रहे हैं। सीआरपीसी की धारा 144 को भाटपारा और जगतदल पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू किया गया है।

चुनाव के बाद की हिंसा को ध्यान में रखते हुए, बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय ने क़ानून और व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भाटापारा में एक नया पुलिस स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया था। इस सुविधा का उद्घाटन होना अभी बाक़ी है।

इससे पहले 18 जून को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार ज़िले में बीजेपी की युवा शाखा के कार्यकर्ता आनंद पाल (28 वर्षीय) की हत्या कर दी गई थी। इसके लिए बीजेपी ने तृणमूल को ज़िम्मेदार ठहराया था। इससे पहले बंगाल के बशीरहाट में बीजेपी कार्यकर्ता सरस्वती दास की हत्या की ख़बर भी सामने आई थी। वहीं, उत्तर परगना ज़िले के संदेशखली में TMC और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़पों में दो बीजेपी और एक TMC कार्यकर्ता की मौत हो गई थी।

फ़िलहाल, इलाक़े में तनाव की स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के समय से ही हिंसात्मक गतिविधियाँ जारी हैं, और अब दिन-प्रतिदिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

‘द वायर’ ने बर्खास्त, बेआबरू पुलिस अफसर संजीव भट्ट की उम्रकैद में भी घुसा दी अपनी मोदी-घृणा

‘The Wire’ मामला कुछ भी हो पर अजेंडाबाजी से कभी पीछे नहीं हटता। ऐसे पोर्टल न कोर्ट की सुनते हैं, न मानते हैं और न कानून की इन्हें परवाह है। तभी तो 30 साल पुराने मामले में एक आरोपित पूर्व आईपीएस, आरोप सिद्ध होने के बाद उम्र कैद की सजा पाता है, तो ‘अजेंडा परमो धर्मः’ की राह पर चलने वाला Wire बड़ी चालाकी से अपने हैडलाइन में लिखता है, “IPS Officer Who Questioned Modi’s Role in Gujarat Riots Gets Life in 30-Year-Old Case” जैसे कोर्ट ने अपराधी संजीव भट्ट को उम्र कैद की सजा उसके 30 साल पुराने अपराध के कारण नहीं बल्कि ‘मोदी के गुजरात दंगों शामिल’ होने की बात कहने के लिए दिया गया है।

जबकि ‘लायर’ The Wire को अच्छी तरह पता है कि किस मामले में संजीव भट्ट को सजा हुई है और वो भी 30 साल पुराने मामले में, जहाँ न्याय की जल्द से जल्द दरकार थी। खैर, यहाँ प्रोपेगेंडा पोर्टल Wire का न्याय से कोई मतलब नहीं है, मतलब है तो बस अपने अजेंडे से और अजेंडा एकसूत्री है- येन-केन-प्रकारेण मोदी विरोध। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी के गुजरात दंगों के मामले में सभी आरोपों से बरी होने के बाद भी, ऐसे प्रोपेगेंडा पोर्टल के स्वघोषित जज बार-बार ऐसा दिखाने और लिखने का प्रयास करते हैं जैसे सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन्हें आज भी मान्य नहीं है क्योंकि वह इनके नैरेटिव को सूट नहीं कर रहा। इससे इनके अजेंडाबाजी में बाधा उत्पन्न हो रही है।

जबकि इसी वायर ने अपने हिंदी साइट पर ऐसी हरकतों से बचा है। वहाँ पर जो खबर है वही रिपोर्ट हुई है। लेकिन The Wire अपने अजेंडे पर कायम है। खैर,यह पहली बार नहीं है जब The Wire ने इस तरह की रिपोर्टिंग की हो। पहले भी सत्ता विरोध के नाम पर कई बार ये फेक न्यूज़ या भड़काऊ आर्टिकल पोस्ट करते नज़र आए हैं।

चलिए जान लीजिए कि पूरा मामला क्या है, क्यों यहाँ जानबूझकर The Wire ट्विस्ट दे रहा है। गुजरात के बरख़ास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा दी जो कि कस्टोडियल डेथ के मामले में सुनाई गई। यह 1990 का मामला है और यह घटना जोधपुर की है। हिरासत में हुई मौत का यह मामला 30 साल पुराना है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट से पूछा था कि उन्होंने हाई कोर्ट के 16 अप्रैल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में पहले क्यों चुनौती नहीं दी? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में निचली अदालत ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है और फैसला सुनाने की तारीख़ तय कर दी है। आज वही निर्णय निचली अदालत ने सुनाया।

विवादित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट का आरोप था कि इस घटना में 300 गवाह थे जबकि पुलिस ने सिर्फ़ 32 गवाहों को ही बुलाया। दरअसल, 1990 में भारत बंद के दौरान गुजरात के जामनगर में भी हिंसा हुई थी। उस समय संजीव भट्ट वहाँ पर एएसपी के रूप में पदस्थापित थे। उस दौरान पुलिस ने 133 लोगों को गिरफ़्तार किया था, जिसमें से 25 घायल हुए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान प्रभुदास नामक व्यक्ति की हिरासत में ही मौत हो गई थी।

बता दें कि संजीव भट्ट सोशल मीडिया पर विवादित ट्वीट्स करने के लिए भी कुख्यात हैं। उनके ट्वीट्स अक़्सर विवाद का विषय बनते थे। उनकी पत्नी ने उनके जेल जाने के बाद मोदी सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मोदी के पीएम बनने के बाद से ही उन पर कार्रवाई शुरू हो गई।

वैसे, चाहे जितनी बार, The Wire जैसे पोर्टल बदनाम क्यों न हो जाए लेकिन अजेंडेबाज़ी से बाज आ जाएँ तो करेंगे क्या? यही प्रमुख कारण है कि ऐसे पोर्टल अपनी विश्वश्नीयता खोते जा रहे हैं।

घर के अंदर कब्र और वहीं खाना-पीना-सोना: UP के छह पोखर गाँव के मुस्लिम आबादी की स्थिति दयनीय

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास – लोकसभा में दूसरी बार जीत कर पहुँचे पीएम मोदी के इस नारे को उत्तर प्रदेश प्रशासन को जरूर सुनना चाहिए। और न सिर्फ सुनना चाहिए बल्कि इस पर अमल भी करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि छह पोखर गाँव की मुस्लिम आबादी को विश्वास में लेना बहुत जरूरी है। छह पोखर आगरा में है। और यहाँ के लोग अपने घरों में ही मृतक परिवार वालों को दफनाने के लिए मजबूर हैं।

छह पोखर गाँव के लोग कब्रों के साथ रहने को मजबूर हैं। किसी के घर में चूल्हे के पास कब्र है तो किसी के बरामदे में। गाँव में अधिकांश लोग गरीब और भूमिहीन हैं। नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर में रिंकी बेगम बताती हैं कि उनके घर के पीछे पाँच लोगों को दफनाया गया है, इनमें उनका दस महीने का बेटा भी है। इसी गाँव की गुड्डी कहती हैं, “हम गरीब लोग इज्‍जत की मौत भी नहीं मर सकते। हमें कब्रों के ऊपर ही बैठना और चलना पड़ता है। घर में जगह की कमी है।”

यहाँ रहने वाले अधिकांश मुस्लिम परिवार गरीब और भूमिहीन हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ऐसे घरों में एक से ज्यादा (खासकर बच्चे) मौतें होती हैं। गाँव में कब्रिस्तान के नहीं होने से लगभग हर घर में एक से ज्यादा लोगों की कब्रे हैं। जगह की कमी की समस्‍या के कारण घर में ताजा बनी कब्रों को सीमेंट से पक्‍का नहीं किया जाता क्‍योंकि इससे ज्‍यादा जगह घिरती है। एक कब्र को दूसरी कब्र से अलग दिखाने के लिए उनके ऊपर छोटे-बड़े पत्‍थर रख दिए जाते हैं।

फोटो साभार: वन इंडिया

छह पोखर गाँव में कब्रिस्तान है ही नहीं। गाँव वालों ने कुछ समय पहले जब प्रशासन से इस बाबत अनुरोध किया था तो ‘पूर्णतः सरकारी ढंग’ से कब्रिस्तान के लिए जगह आवंटित कर दी गई थी। ‘पूर्णतः सरकारी ढंग’ इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि जो जमीन कब्रिस्तान के लिए आवंटित की गई थी, वो एक तालाब के बीचोबीच पड़ती है।

इस समस्या को लेकर कई बार धरने-प्रदर्शन भी हुए। लेकिन नतीजा आज तक सामने नहीं आया। 2017 में इसी गाँव के मंगल खान की मौत हो गई थी। उनके परिवार के लोगों ने मृत शरीर को दफनाने से तब तक इनकार कर दिया, जब तक गाँव को कब्रिस्‍तान के लिए जमीन आवंटित नहीं करा दी जाती। अधिकारियों ने तब आश्वासन भी दिया था, परिवार वालों को समझा-बुझा के मंगल खान को तालाब के किनारे दफनवा भी दिया था। लेकिन तब से लेकर अब तक वो सरकारी आश्‍वासन खोखला ही साबित हुआ है।

जब इस बात की जानकारी जिलाधिकारी रविकुमार को मिली तो उन्‍होंने कहा, “मैं अधिकारियों की एक टीम गाँव में भेजूंगा। कब्रिस्‍तान के लिए आवश्‍यक जमीन का ब्‍यौरा मँगवा कर देखूँगा और उचित निर्णय लूँगा।” उम्मीद है जिलाधिकारी का यह आश्वासन भी पिछले कई वादों की तरह खोखली न साबित हो।

सरफराज पर हो सकती है अंदरूनी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, वर्ल्ड कप के बीच में ही जा सकती है कप्तानी

भारत से हार के बाद पाकिस्तान के सेमीफाइनल में पहुँचने की राह काफी मुश्किल हो गई है। वर्ल्ड कप 2019 में पाकिस्तान की यह लगातार दूसरी हार थी और वह अब तक कुल तीन मैच हार चुका है। पाकिस्तान को अगर सेमीफाइनल में पहुँचना है तो बाकी के सभी चार मैच जीतने होंगे।

लेकिन मीडिया में आ रही ख़बरों से ऐसा लगता है कि पाकिस्तान टीम के इस ख़राब प्रदर्शन का नुकसान कप्तान सरफराज को हो सकता है। भारत से मिली करारी हार के बाद से ही पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में अंदरूनी कलह और विवाद की ख़बरें आ रही हैं। इसका नतीजा यह हो सकता है कि कप्तान सरफराज को टूर्नामेंट के बीच में ही कप्तानी छोड़नी पड़े।

भारत से हार के बाद इस तरह की खबरें भी सुनाई देने लगीं हैं कि पाकिस्तानी टीम में ही कई गुट बन गए हैं और कप्तान सरफराज बिल्कुल अलग-थलग पड़ गए हैं। हालाँकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे महज अफवाह बताया है और कहा है कि पूरी टीम सरफराज के साथ खड़ी है।

दबंग इंजमाम उल हक़ का हो सकता है बड़ा रोल

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता इंजमाम उल हक़ और कप्तान सरफराज अहमद के बीच भी सम्बन्ध नाजुक चल रहे हैं और यह विवाद की एक और वजह हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीम के चयन में इंजमाम उल हक़ की बात का ज्यादा वजन रहता है और वो अपने रुतबे का पूरा इस्तेमाल करते हैं।

इंजमाम अपनी मौजूदगी का एहसास हमेशा कराते हैं लेकिन सवाल ये है कि मुख्य चयनकर्ता के तौर पर पाकिस्तान की टीम को उनका कितना फायदा मिल रहा है? पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि मुख्य चयनकर्ता के तौर पर इंजमाम का वर्ल्ड कप की टीम में काफी दखल रहा है। जब भारत से हार के बाद पाकिस्तान में कप्तान सरफराज अहमद, कोच मिकी आर्थर और कई खिलाड़ियों के लिए अपमानजनक बातें कही जा रही हैं ऐसे में अब इंजमाम की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पाकिस्तान के चैनलों की टीवी रिपोर्ट में सवाल पूछे जा रहे हैं कि इंजमाम को जवाब देना चाहिए कि बुरी तरह से फ्लॉप रहे शोएब मलिक को वर्ल्ड कप के लिए क्यों चुना गया? वो इंग्लैंड में पाकिस्तान की टीम के साथ हैं और अहम फैसलों में उनका दखल है। जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार सरफराज और मिकी ऑर्थर में वैसी दंबगई नहीं है कि इंजमाम को नियंत्रण में रख पाएँ इस वजह से इंजमाम खुलकर मनमानी करते हैं।

वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान के प्लेइंग इलेवन में जिन लोगों को शामिल किया है उससे लोग नाखुश हैं। इस टीम में इंजमाम उल हक के भतीजे इमाम उल हक भी शामिल हैं जो भारत के खिलाफ बुरी तरह से फ्लॉप रहे।

PCB भी है कप्तान सरफराज से नाराज

वहीं, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी कप्तान सरफराज अहमद को जमकर लताड़ लगाई है। PCB का कहना है कि सरफराज अहमद टीम को सही दिशा में नेतृत्व और खिलाड़ियों को प्रेरित करने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान की टीम दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले आगामी मैचों में भी हारती है तो सरफराज अहमद को कप्तान के पद से हटाया जाना तय है।

सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए पाकिस्तान के लिए बाकी के चार मैच जीतना आसान नहीं है। पाकिस्तान का अगला मैच 23 जून को दक्षिण अफ्रीका से है। हालाँकि दक्षिण अफ्रीका इस बार कमजोर टीम दिख रही है। दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड, बांग्लादेश और भारत से हार चुका है।

इसके बाद पाकिस्तान बर्मिंघम में 26 जून को न्यूजीलैंड के साथ खेलेगा। पाकिस्तान के लिए यह सबसे मुश्किल मुकाबला है। न्यूजीलैंड ने अब तक सारे मैच जीते हैं बस भारत से मैच बारिश के कारण नहीं हो पाया था। पाकिस्तान को न्यूज़ीलैंड को हराने के लिए बेहतरीन खेलना होगा।

पाकिस्तान के बाकी दो मैच लीड्स में अफगानिस्तान से और लॉर्ड्स में बांग्लादेश से हैं। अफगानिस्तान को पाकिस्तान हरा सकता है, लेकिन पाकिस्तान वॉर्मअप मैच में अफगानिस्तान से हार चुका है। पाकिस्तान का आखिरी मैच बांग्लादेश से है जो कि बढ़िया खेल रही है और उसने 17 जून को वेस्टइंडीज को 322 रन चेज करके हराया है, इसलिए पाकिस्तान के लिए बांग्लादेश को हराना भी आसान नहीं होगा।

इंटरनेशनल राड़ा: ईरानी सेना ने मार गिराया अमेरिका का RQ-4 ग्लोबल हॉक ड्रोन, बढ़ सकता है तनाव

ईरान ने बृहस्पतिवार (जून 20, 2019) को अमेरिका का ड्रोन मार गिराया है। न्यूक्लियर डील पर जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बीच मतभेद और बढ़ना तय है। हालाँकि, मामले पर अमेरिका की सेना ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। ईरान की समाचार एजेंसी का कहना है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) (ईरानी सेना) ने अमेरिकी ड्रोन को मार कर गिरा दिया है।

ईरान के रिवॉल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिका के आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक ड्रोन को मारा गिराया। ईरान के पैरामिलिट्री रिवॉल्यूशनरी गार्ड, जो केवल सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनी के प्रति जवाबदेह हैं, ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन पर उस वक्त हमला किया गया जह वह दक्षिणी ईरान के होर्मोजोअन प्रांत के कौमोबारक जिले के पास ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस रहा था। कौमोबारक तेहरान से लगभग 1,200 किलोमीटर (750 मील) दक्षिण-पूर्व में होमरुज स्ट्रेट के करीब है।

यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब कुछ दिनों पहले ही अमेरिका इरान पर उनके ड्रोन पर मिसाइल हमला करने का आरोप लगा चुका है। बीते हफ्ते जून 13, 2019 को ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर भी हमले किए गए थे लेकिन यह हमले किसने किए थे इसके बारे में साफ नहीं हो सका। हालाँकि अमेरिका ने हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। इससे पहले भी अमेरिका ने पिछले महीने इस रणनीतिक समुद्री इलाके में ऐसे ही हमलों को लेकर इस्लामिक गणराज्य से आपत्ति जताई थी।

ईरान-अमेरिका के सम्बन्ध अच्छे नहीं चल रहे हैं

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक साल से तनावपूर्ण माहौल जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से एक साल पहले परमाणु समझौता वापस ले लिया था। ईरान ने हाल ही में कहा था कि वह कम समृद्ध यूरेनियम के उत्पादन को बढ़ाएगा और उसने हथियार-ग्रेड स्तर के करीब इसके संवर्धन को बढ़ावा देने की धमकी दी थी। जिससे कि यूरोप पर 2015 डील के लिए दबाव बनाया जा सके।

विगत कुछ समय में अमेरिका ने एक विमानवाहक पोत को मध्य पूर्व में भेजा है और इस क्षेत्र में पहले से ही 10 हजार सैनिक तैनात हैं इसके बावजूद हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है। रहस्यमय हमलों ने तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया क्योंकि ईरान-सहयोगी हौती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में बम से लैस ड्रोन लॉन्च किए। इससे आशंका बढ़ गई है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष हो सकता है। ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है और युद्ध के हालात बनते हैं तो ऐसा ईरान की इस्लामिक क्रांति के 40 साल बाद होगा। ईरानी सेना का यहाँ तक कहना है कि वो युद्ध के लिए भी तैयार हैं।

AN-32 विमान हादसा: अरुणाचल प्रदेश में मिले 6 शव, 7 के पार्थिव अवशेष

असम में जोरहाट से उड़ान भरने के बाद अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों में क्रैश हुए भारतीय वायु सेना के विमान AN-32 में सवार 13 वायु सैनिकों में से छ: के शव और सात के पार्थिव अवशेष बरामद हुए हैं। यदि मौसम ठीक रहा तो शव और पार्थिव अवशेष जोरहाट लाए जा सकेंगे। ख़बर के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि ख़राब मौसम के चलते पिछले तीन दिनों में MI-17, चीता और ALH समेत कोई भी हेलीकॉप्टर घटनास्थल पर उतरने में क़ामयाब नहीं हो सका था। उन्होंने बताया कि एक टीम घटनास्थल पर पैदल चलकर पहुँची। इस टीम में गरुड़ कमांडो, भारतीय सेना के विशेष दल, पोर्टर और शिकारी शामिल थे। राहत एवं बचाव दल ने इस रूसी विमान का कॉकपिट वायस रिकॉर्डर (CVR) और उड़ान डेटा रिकॉर्डर (FDR) बरामद किए थे।

इस विमान के बारे में बता दें कि 3 जून को 12:25 मिनट पर AN-32 ने असम के जोरहाट से मेंचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन 1 बजे के आसपास इसका सम्पर्क कंट्रोल रूम से टूट गया था। तभी से यह विमान लापता था, इसमें पायलट समेत 13 लोग सवार थे।

AN-32 विमान हादसे का शिकार हुए 13 यात्रियों में से 8 क्रू मेंबर थे

  • विंग कमांडर जीएम चार्ल्स
  • स्कवाड्रन लीडर एच विनोद
  • फ्लाइट लेफ्टिनेंट आर थापा
  • फ्लाइट लेफ्टिनेंट ए तंवर
  • फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस मोहंती
  • फ्लाइट लेफ्टिनेंट एमके गर्ग
  • वारंट ऑफिसर के के मिश्रा
  • सार्जेंट अनूप कुमार
  • कॉरपोरल शेरिन
  • लीडिंग एयरक्राफ्ट मैन एसके सिंह
  • लीडिंग एयरक्राफ्ट मैन पंकज
  • नॉन कॉम्बैंटेट (ई) पुतली
  • नॉन कॉम्बैंटेट (सी) राजेश कुमार

ख़बर के अनुसार, भारतीय वायु सेना के AN-32 विमान का मलबा जिस जगह पर मिला था वो अरुणाचल प्रदेश में विमान के उड़ान मार्ग से क़रीब 15-20 किलोमीटर उत्तर की ओर है। वायु सेना के बयान के अनुसार, क़रीब 12,000 फ़ीट पर एक छोटे से गाँव लिपो के पास AN-32 विमान का मलबा मिला था।

लिपो गाँव के घने जंगलों में AN-32 विमान का मलबा मिला था, इसके बाद वायु सेना द्वारा इसकी तस्वीरें जारी कर दी गई थी। जारी की गई तस्वीरों में स्पष्ट नज़र आ रहा है कि जिस जगह AN-32 का मलबा था वहाँ आसपास के पेड़ जले हुए थे जिससे यह संभावना जताई जा रही थी कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद वहाँ आसपास के पेड़ों में आग लग गई होगी।

BJP में जा सकते हैं TDP के 6 में से 4 राज्यसभा सांसद, नायडू को बड़ा झटका: रिपोर्ट

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 6 में से 4 राज्यसभा सांसद जल्द ही अपना इस्तीफा सौंप कर भाजपा में शामिल होने वाले हैं। न्यूज़ 18 ने सूत्रों के हवाले से ख़बर देकर बताया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री वाईएस चौधरी, टीडीपी के प्रवक्ता सीएम रमेश और टीजी वेंकटेश राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को अपना इस्तीफा सौंपने वाले हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भारी हार का सामना करने वाले नायडू के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा क्योंकि राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए बड़ी ज़मीन बनाने की उनकी सारी कोशिशें ध्वस्त हो चुकी हैं। कुछ दिनों पहले सीबीआई ने वाईएस चौधरी के ठिकानों की तलाशी ली थी।

राजग छोड़ कर विपक्षी एकता बनाने निकले नायडू को विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा और उनकी सीएम की कुर्सी खिसक गई। 176 सदस्यीय विधानसभा में उनकी पार्टी को महज 23 सीटें मिली। लोकसभा में और भी दुर्गति हुई। टीडीपी के बस 3 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस ने नायडू की पार्टी को हर स्तर पर चित कर दिया।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान व उससे पहले नायडू लगातार भारत भ्रमण कर विपक्षी नेताओं से मिल कर एकजुटता के प्रयास में लगे हुए थे। उन्होंने लगभग सभी बड़े विपक्षी नेताओं से मुलाक़ात की थी और खंडित जनादेश की स्थिति में तैयारी हेतु योजना बनाई थी। लेकिन, भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलते ही उनकी सारी योजनाएँ धराशाई हो गई और दिल्ली तो दूर की बात है, आंध्र में भी उनकी राजनीति पर ग्रहण लग गया। अब राज्यसभा में अगर उनके सांसद इस्तीफा देते हैं तो उनकी पार्टी के पास महज 2 राज्यसभा सांसद बच जाएँगे।

मैन इन भगवा: इंग्लैंड के खिलाफ केसरिया जर्सी पहनकर उतर सकती है टीम इंडिया- मीडिया रिपोर्ट्स

इस क्रिकेट वर्ल्‍ड कप में अब तक टीम इंडिया गहरे नीले रंग की जर्सी में नजर आई है। लेकिन खबर है कि नए नियमों के कारण भारतीय टीम के लिए ऑरेंज (केसरिया) रंग की दूसरी किट भी होगी। वर्ल्ड कप के कुछ मैचों में भारतीय टीम नीले रंग के बजाय ऑरेंज यानी भगवा रंग की जर्सी पहनकर उतर सकती है। भारतीय टीम का अब अगला मुकाबला 22 जून को अफगानिस्तान से होना है और इसके बाद 30 जून को उसकी भिड़ंत मेजबान इंग्लैंड से होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, आईसीसी ने दूसरी जर्सी के रूप में टीम इंडिया को कोई और रंग चुनने को कहा था। भारतीय टीम मैनेजमेंट ने ऑरेंज (केसरिया) रंग चुना है।

क्या है भगवाकरण का उद्देश्य?

दरअसल, अफगानिस्तान और इंग्लैंड दोनों टीमों के खिलाड़ियों की जर्सी का रंग नीला है। जबकि रिपोर्ट्स के अनुसार आईसीसी के नियमों के मुताबिक, किसी भी ऐसे मैच में, जिसका प्रसारण टीवी पर होता है, दोनों टीमें एक ही रंग की जर्सी पहनकर नहीं उतर सकती हैं।

ICC लाई है जर्सी में भी फुटबॉल कि तरह  ‘होम’ और ‘अवे’ नियम

यह नियम फुटबॉल के ‘होम और अवे’ मुकाबलों में पहनी जाने वाली जर्सी से प्रेरित होकर बनाया गया है। आईसीसी ने इस बार जर्सी को लेकर एक नया फैसला लिया है जिसमें फुटबॉल कि तरह ‘होम’ और ‘अवे’ यानी, ‘घरेलू सरजमीं से बाहर’ प्रणाली के तहत प्रत्येक टीम (मेजबान टीम को छोड़कर) दूसरी जर्सी में भी नजर आएगी।
वर्ल्‍ड कप 2019 में इंग्‍लैंड, भारत, अफगानिस्‍तान और श्रीलंका की टीमों की जर्सी नीले रंग की है। ऐसे में नए दर्शकों को टीम पहचानने में परेशानी न हो, इसलिए होम और अवे मैच की तर्ज पर टीमों की जर्सी अलग-अलग रंग की होगी।

भगवा रंग की जर्सी पर होगी नीली पट्टी

टीम इंडिया की जर्सी की रंग नीला है और उसमें कॉलर पर भगवा रंग की पट्टी है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह इंग्लैंड के खिलाफ मैच में उल्टा हो सकता है। टीम इंडिया की जर्सी भगवा रंग की हो सकती है जिसमें नीले रंग की पट्टी कॉलर पर होगी। साथ ही, यह भी संभावना है कि इंग्लैंड के खिलाफ सभी वनडे मैचों में भारत की जर्सी का रंग बदला हुआ होगा।

हालाँकि टीम प्रबंधन से जुड़े सारे लोगों को इस पर अब भी जानकारी नहीं है कि टीम को नए रंग की जर्सी पहनने की जरूरत है या नहीं। भारतीय टीम की किट स्पॉन्सर कंपनी नाइक के प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और वेस्ट इंडीज को अपनी जर्सी का रंग बदलने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि उनका रंग किसी भी टीम की जर्सी से मेल नहीं खाता है।

लिबेरपंथी और मीडिया गिरोह हो सकता है धुआँ-धुआँ

अगर टीम इंडिया मैदान में भगवा रंग की जर्सी पहनकर उतरती है, तो भगवा शब्द सुनते ही किलकारियाँ मारने वाला देश का एक बड़ा वर्ग खुद को कोड़े मारते हुए देखा जा सकता है। संसद से लेकर क्रिकेट वर्ल्डकप तक भगवाकरण होता देखना कुछ लोगों को जरूर दुःख दे सकता है। उनके लिए सलाह है कि वो आने वाले दिनों में सूती कपड़े पहनें, लम्बी साँसे लें, हाइड्रेटेड रहें, यात्रा करें और राहुल गाँधी के जन्मदिन पर चर्चा करें। वरना इमरजेंसी का माहौल हो सकता है और सेक्युलरिज़्म भी खतरे में पड़ सकता है।

‘ममता जी, अपराधी को उसके मजहब के कारण मत बख़्श दीजिए’

पश्चिम बंगाल में लगातार हो रहे घटनाक्रमों के बीच ममता बनर्जी बुरी तरह फँस गई हैं। लोकसभा चुनावों में बीजेपी के 18 सीट जीतने के बाद तो उनकी पकड़ पश्चिम बंगाल पर दिनों-दिन और ढीली पड़ती जा रही है। एक तरफ डॉक्टरों के हड़ताल और दूसरी तरफ वहाँ के नागरिकों द्वारा ‘जय श्री राम’ के जयघोष कई अवसरों पर प्रोटेस्ट करने वालों ने लगाए, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती ही जा रही है। डॉक्टरों पर मजहबी भीड़ द्वारा किए हमले के बाद, अभी हाल ही में मिस इंडिया यूनिवर्स की घटना में भी कट्टरपंथियों का ही हाथ सामने आया है।

वह लगातार असमंजस में हैं कि कार्रवाई करें तो करें कैसे? अब उनकी मुश्किल थोड़ी आसान की है वहाँ के कुछ लोगों ने ही। कोलकाता के समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर हाल की घटनाओं पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की है।

कोलकाता के लोगों द्वारा ममता बनर्जी को लिखा गया पत्र

पत्र में लिखा गया है कि लिखनेवाले कोलकाता में रहने वाले समुदाय विशेष से हैं, जो दशकों से यहाँ रह रहे हैं और हालिया दो घटनाओं से बेहद आहत हैं- पहला डॉक्टरों पर हमला और दूसरा पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स उशोषी सेनगुप्ता पर हमला।

उनका कहना है कि इन दोनों घटनाओं में शामिल आरोपित समुदाय विशेष से हैं। वे उनके ही मजहब के हैं, इससे वे और भी ज़्यादा आहत और खीझ से भरे हैं।

इसके बाद पत्र में उन्होंने अपने तरफ से ममता बनर्जी को दो रास्ते सुझाएँ हैं जिससे इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। पत्र के अनुसार, पहला अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए। न केवल इस मामले में बल्कि उन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया जाए जहाँ दोषी या आरोपित समुदाय विशेष से हैं। उन्हें अवश्य गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि लोगों के बीच यह मत पुष्ट होता जा रहा है कि तुष्टिकरण के कारण राज्य उन सभी अपराधियों को खुली छूट दे रही है जो खास समुदाय से आते हैं। ऐसे आरोपितों को राज्य द्वारा सिर्फ उनके मजहब के कारण बच के निकल जाने दिया जा रहा है या उन्हें कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

दूसरा सलाह है कि समुदाय विशेष बहुल इलाकों में ऐसे प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए जिससे मजहब के युवाओं में संवेदनशीलता और जागरूकता पैदा हो, खासतौर से जेंडर सेंसिटिविटी, कानूनों के प्रति जागरूकता के क्षेत्र में। बेशक यह एक लम्बी प्रक्रिया है लेकिन इसकी शुरुआत होनी चाहिए।

दोनों मामलों में एक मामला पूर्व मिस इंडिया का है जिसमें, पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स उशोषी सेनगुप्ता ने खुद फेसबुक पर अपनी दास्ताँ बयाँ की है, और बताया है कि कैसे 6 लड़कों ने उनकी गाड़ी के साथ अपनी बाइक भिड़ाने के बाद उनके ऊबर कैब के ड्राइवर को बेरहमी से पीटा, उसकी गाड़ी तोड़ दी और उशोषी के भी साथ बदतमीज़ी की। और इस दौरान कोलकाता की पुलिस मूकदर्शक बनी ज्यूरिस्डिक्शन-ज्यूरिस्डिक्शन (मेरा एरिया-उनका एरिया) खेलती रही। यहाँ तक कि मामले की प्राथमिकी दर्ज करने से भी इनकार किया और मामला तूल पकड़ने के बाद ही ढंग से प्राथमिकी हुई।

इसी मामले में, उशोषी ने तंज कसते हुए यह भी कहा, “अगर आपके साथ मारपीट, बदसलूकी, छेड़खानी या फिर मर्डर की घटना हो, तब पुलिस के पास जाने से पहले उनके सीमा क्षेत्र के बारे में जान लें, क्योंकि घटनास्थल पुलिस थाने की सीमा से 100 मीटर भी बाहर हुआ, तो वे मदद नहीं करेंगे।”

इसके अलावा व्यापक आक्रोश का मुद्दा बना डॉक्टरों के ऊपर हमला, कोलकाता स्थित नील रतन सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टरों की मानें तो करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे।

मेरा बॉयफ्रेंड मुस्लिम है, पापा कहते हैं कि आतंकवादी है और उसे स्वीकार नहीं रहे: ऋतिक रोशन की बहन

जाने-अनजाने बीते कुछ वर्षों से ऋतिक रोशन का नाम विवादों से घिरा रहता है। कभी वो अपनी पत्नी सुज़ैन ख़ान को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं तो कभी अभिनेत्री कंगना रनौत से अपने रिश्ते को लेकर सवालों में घिरे रहते हैं। अब ऋतिक रोशन की बहन सुनैना रोशन ने अपने परिवार के ख़िलाफ़ एक बड़ा ख़ुलासा किया है। सुनैना ने अपने पिता राकेश रोशन, भाई ऋतिक रोशन समेत पूरे परिवार पर मारपीट का आरोप लगाया है।

Pinkvilla पोर्टल को दिए एक साक्षात्कार में, सुनैना ने अपने रिश्ते को स्वीकार किया और यह दावा किया कि कोई भी इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था – न तो ऋतिक और न ही उनके पिता राकेश रोशन। सुनैना ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता ने उन्हें तब थप्पड़ मारा जब वो अपने रिश्ते के बारे में सब कुछ बता रहीं थीं।

पोर्टल ने सुनैना के हवाले से लिखा:

“पिछले साल (मुझे प्यार हो गया) और क्योंकि मुझे एक मुस्लिम व्यक्ति से प्यार था, मेरे पिता ने मुझे थप्पड़ मारा था और मुझे बताया था कि जिस लड़के से मैं प्यार करती थी वह एक आतंकवादी था, जो कि रुहेल नहीं है। अगर वह एक आतंकवादी होता तो वो मीडिया में काम करते हुए आज़ाद कैसे घूम रहा होता? क्या वह सलाखों के पीछे नहीं रह रहा होता? मैं पिछले साल फेसबुक के माध्यम से रूहेल से मिली थी, लेकिन मैंने उसका नंबर सेव नहीं किया था, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरे माता-पिता को इस बारे में पता चले।”

सुनैना ने कहा, “मैं इस बारे में (आतंकवादी होने के विषय में) बात नहीं करना चाहती थी, लेकिन मैं चाहती हूँ कि वे (रोशन परिवार) अभी रुहेल को स्वीकार करें क्योंकि वे मेरे जीवन को नरक बना रहे हैं और मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती… वे नहीं चाहते कि मैं उनसे (रुहैल) मिलूँ। मैं शादी के बारे में कुछ नहीं जानती, लेकिन अभी मैं रूहेल के साथ रहना चाहती हूँ। सिर्फ़ इसलिए कि वह मुस्लिम है, वे (रोशन परिवार) उसे स्वीकार नहीं कर रहे।”

इससे पहले भी सुनैना ने एक साक्षात्कार में अपनी पारिवारिक स्थिति का ज़िक्र किया था और कहा था, “हाँ, निश्चित तौर पर कुछ मुद्दे हैं, लेकिन कृपया मुझे इस बारे में बात करने के लिए न कहें क्योंकि यह मेरे परिवार के बारे में है और मैं नहीं चाहती कि वे प्रभावित हों।”

इससे पहले कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने इस बात का ख़ुलासा करके सबको अचंभित कर दिया था कि सुनैना ने अपने इस बुरे हालात में कंगना से मदद की गुहार लगाई है। अपने ट्वीट में रंगोली चंदेल ने लिखा कि सुनैना रोशन को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा क्योंकि वो दिल्ली के एक मुस्लिम व्यक्ति से प्यार करती हैं। पिछले हफ्ते परिवार वालों ने एक महिला पुलिसकर्मी से सुनैना को थप्पड़ मरवाया। इतना ही नहीं उनके पिता ने भी उन्हें मारा और भाई ऋतिक उन्हें सलाखों के पीछे डालने की कोशिश कर रहा है।

अपने ट्वीट में रंगोली चंदेल ने यह भी लिखा कि उन्हें डर है कि कहीं रोशन परिवार सुनैना को किसी तरह की कोई हानि न पहुँचा दे। मैं इस बात का ख़ुलासा सार्वजनिक तौर पर कर रही हूँ कि सुनैना कंगना को कॉल करती हैं और रोती हैं। कंगना नहीं जानतीं कि वो सुनैना की कैसे मदद करें, इसलिए उन्होंने सुनैना का नंबर ब्लॉक कर दिया। हमें सुनैना की फ़िक्र है, हर किसी को उस इंसान से प्यार करने का हक़ है, जिसे वो चाहता है।

फ़िलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर रोशन परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ऋतिक की एक्स वाइफ़ सुज़ैन रोशन परिवार के सपोर्ट में नज़र आईं हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने लिखा, “इस प्यारी सी फैमिली में एक लंबा अरसा रहने के बाद और फैमिली के लोगों के साथ अपने अनुभव के आधार पर मैं बताना चाहती हूँ कि सुनैना बेहद प्यारी और सभी की परवाह करने वाली इंसान हैं, लेकिन अभी वह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में हैं। सुनैना के पिता (राकेश रोशन) शारीरिक बीमारी से गुज़र रहे हैं और उनकी माँ भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए मैं रिक्वेस्ट करूँगी कि ऐसे मुश्किल समय में परिवार का सम्मान करें। ऐसी परिस्थितियाँ हर परिवार में आती हैं। मुझे यह सब कहने की इसलिए ज़रूरत पड़ी क्योंकि मैं एक लंबे समय तक इस परिवार का हिस्सा रही हूँ।”