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ध्रुव त्यागी मर्डर: सिर्फ आलम व जहाँगीर नहीं, 11 लोगों ने घेर कर मारा – छिपने को भागा था मस्जिद

मोती नगर में बेटी से छेड़खानी का विरोध करने वाले ध्रुव त्यागी की शम्सेर आलम और जहाँगीर ख़ान ने अपने कई साथियों व परिवार वालों के साथ मिलकर हत्या की थी। अब इस मामले में नया ख़ुलासा हुआ है। पहले ख़बर आई थी कि आरोपितों में इन दोनों के अलावा 2 अन्य नाबालिग शामिल हैं। अब ताज़ा सूचना के अनुसार, त्यागी को 11 लोगों ने घेर कर मारा था। इस हत्याकांड में आरोपितों के परिवार की महिलाएँ भी शामिल थीं। असल में जिस चाकू से हत्या की गई, उसे आरोपितों की माँ ने घर में से निकाल कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने जिन आरोपितों को गिरफ़्तार किया है, उसमें एक व्यक्ति और उसके तीन बेटे हैं। 2 आरोपित नाबालिग हैं। बाकी घर से भाग गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

ज्ञात हो कि ध्रुव राज त्यागी अपने परिवार समेत बसई दारापुर में रहा करते थे। रविवार की रात वह बेटी और बेटे के साथ अस्पताल से लौट रहे थे। घर पहुँचने से कुछ दूर पहले ही पाँच-छह लोगों से उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। जहाँगीर और आलम समेत उसके कुछ अन्य गुर्गे साथियों ने रास्ता देने से मना कर दिया। ऐसे में मृतक त्यागी ने पहले अपनी बेटी को घर पहुँचाया और फिर लौट कर छेड़खानी कर रहे लड़कों के पिता से शिकायत करने पहुँचे। इसी बीच में उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। बाप को बचाने आए पीड़िता का भाई भी बुरी तरह जख्मी हुआ, उस पर भी चाकुओं से वार किया गया।

दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में छपी ख़बर

शमशेर आलम मुख्य आरोपित है। उसने त्यागी के पेट, कंधे व सीने में चाकुओं से ताबड़तोड़ 10 वार किया था। त्यागी को बचाने के लिए जब उनका बेटा आया, तब उस पर भी चाकुओं से वार किया गया। मृतक का बेटा अनमोल अभी आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक के परिवार के अनुसार, शनिवार (मई 11, 2019) देर रात क़रीब 1 बजे बिजनेसमैन ध्रुव त्यागी की 26 साल की बेटी को माइग्रेन का दर्द हो गया था। वह बेटी को दिखाने आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल गए थे। वहीं से लौटते वक़्त ये घटना हुई। त्यागी का परिवार वर्षों से यहीं रहता है।

इस हत्याकांड में आरोपित के परिवार की 4 महिलाओं सहित कई लोग शामिल हैं। उन सभी ने त्यागी को पकड़ रखा था और आलम उन्हें चाकू मारे जा रहा था। वारदात में शमसेर का अब्बा, अम्मी, दोनों भाई, तीन-चार बहनें, एक दामाद और अन्य लोग शामिल हैं। अनमोल ने जब देखा कि उसके पिता को चाकू मारा जा रहा है तो वह अपने पिता के ऊपर लेट गया लेकिन आरोपित चाकू से लगातार वार करते रहे। दरिंदगी का आलम यह रहा कि त्यागी के हाथ-पैर पर पत्थरों से वार किया गया, उनका चेहरा कुचल दिया गया, उनके दाँत तोड़ दिए गए। उनके नाखून भी उखड़ गए थे।

इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित ने मस्जिद में शरण लेनी चाही। लेकिन मस्जिद में उन लोगों से थाने में सरेंडर करने को कहा गया। गाँव में पंचायत बुलाई गई है। चर्चा है कि किसी भी मुस्लिम को घर किराए पर न देने का निर्णय लिया जा सकता है। शमशेर आलम की अम्मी व बहन को हिरासत में ले लिया गया है। मृतक की बेटी से बात कर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

बंगाल में #Emergency: आधी रात में कई BJP नेता गिरफ़्तार, बिगड़े हालात पर EC ने बुलाई मीटिंग

पश्चिम बंगाल से भाजपा नेताओं पर बड़ी कार्रवाई की ख़बर आ रही है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा सहित कई भाजपा नेताओं को रात के 3 बजे गिरफ़्तार कर लिया गया है। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने बताया कि ममता सरकार की इस बड़ी कार्रवाई में बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए और बिना किसी चार्ज के कई भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के लिए देश के कई क्षेत्रों से भाजपा नेता कोलकाता में जाकर ठहरे हुए थे। मालवीय ने आरोप लगाया कि कई भाजपा नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस की ग़ैर-क़ानूनी हिरासत में हैं।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा भी कोलकाता में चुनाव प्रचार के लिए गए हुए थे। उन्हें कई सोशल मीडिया इवेंट्स में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। बग्गा के वहाँ पहुँचने के साथ ही भाजपा की सोशल मीडिया विंग में एक नए उत्साह का संचार हुआ था। कोलकाता के गलियारों में कार्यकर्ताओं के साथ बग्गा के कई फोटो भी ट्विटर पर देखे गए थे। लोगों का कहना है कि जब तेजिंदर बग्गा ने किसी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया है, तब उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया गया? ट्विटर पर आज (बुधवार) सुबह से ही ‘FreeTajinderBagga (फ्री तेजिंदर बग्गा)’ नामक हैशटैग टॉप ट्रेंड में बना हुआ है।

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने तेजिंदर बग्गा का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी ग़लती सिर्फ़ यही है कि वह बंगाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए गए थे। पश्चिम बंगाल में लगातार तृणमूल के गुंडों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में बाधा पहुँचाने की ख़बरें आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने हिंसा को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बात करते हुए मीडिया को भी इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि बंगाल में हिंसा की बात होनी तभी शुरू हुई जब मीडिया वाले ख़ुद इसकी चपेट में आ गए। पीएम का आरोप था कि इससे पहले ऐसी ख़बरों को नज़रअंदाज़ किया जाता था।

मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी बंगाल के अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने एक वीडियो शेयर कर बताया था कि कैसे बंगाल के अधिकारी बेवजह अमित शाह की रैली को लेकर उनसे बहस कर रहे थे और कागज़ी चीजों को लेकर भाजपा अध्यक्ष के रोड शो में अड़ंगा लगाया जा रहा था। पश्चिम बंगाल में अमित शाह के रोड शो के दौरान माहौल दूषित हो गया था और उन्हें रोड शो रोकना पड़ा था। इससे पहले चुनाव कवर करने के दौरान तृणमूल के गुंडों ने पत्रकारों को भी पीटा था।

पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण का चुनाव आते-आते माहौल और भी गर्म हो रहा है। भाजपा बंगाल चुनाव आयोग को तृणमूल का दलाल बता चुकी है। पार्टी का आरोप है कि राज्य की सारी सरकारी मशीनरी सिर्फ़ और सिर्फ़ ममता बनर्जी के इशारे पर काम करती हैं और उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। आधी रात को भाजपा नेताओ पर की गई इस कार्रवाई का मुद्दा अब राष्ट्रीय हो चुका है और विरोध के स्वर भी तेज़ हो गए हैं। भाजपा दिल्ली के जंतर-मंतर पर बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन करेगी।

बंगाल में जो राजनीतिक हालात पैदा हुए हैं, उसको ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज (बुधवार) सुबह 11.30 बजे बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्य में चुनाव के दौरान हिंसा पर पश्चिम बंगाल के पर्यवेक्षकों से जानकारी ली जाएगी।

ख़बर का असर: Exit Poll दिखाने वाले 3 मीडिया संस्थानों को EC से नोटिस, माँगा स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग द्वारा तीन मीडिया हाउसेज को नोटिस भेजा गया है। इन तीनों मीडिया हाउस ने एग्जिट पोल प्रकाशित किया था। स्वराज एक्सप्रेस, न्यूज़क्लिक और आईएएनएस ने लोकसभा चुनाव परिणाम का अनुमान लगाते हुए एग्जिट पोल प्रसारित किया था। चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा, “चुनाव आयोग को तीन मीडिया हाउसेज के ख़िलाफ़ शिकायतें मिली थीं कि उन्होंने लोकसभा चुनावों के परिणाम का अनुमान लगाते हुए एग्जिट पोल्स जारी किए थे। आयोग ने तीनों मीडिया हाउस से स्पष्टीकरण माँगा है। उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनके ख़िलाफ़ ‘Representation Of The People Act’ के सेक्शन 126A के तहत कार्रवाई की जाए।

सेक्शन 126A में लिखा हुआ है कि लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण का चुनाव शुरू होने से लेकर अंतिम चरण का चुनाव ख़त्म होने के आधे घंटे बाद तक, कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया के माध्यम से एग्जिट पोल नहीं दिखा सकता। इन तीनों मीडिया हाउसेज ने इसका खुला उल्लंघन किया था। स्वराज एक्सप्रेस के लिए यौन शोषण आरोपित विनोद दुआ ने एग्जिट पोल दिखाए थे, जिसे उन्होंने न्यूज़क्लिक नामक प्रोपेगेंडा वेबसाइट से उठाया था। वीडियो तो हटा दिया गया लेकिन रिपोर्ट अभी भी ऑनलाइन उपलब्ध है। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी एग्जिट पोल खुलेआम ट्विटर पर जारी किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस (आईएएनएस) ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रविवार (मई 12, 2019) को एक एग्जिट पोल प्रकाशित किया था। आईएएनएस का कहना है कि ये सर्वेक्षण विभिन्न संस्थानों और निष्पक्ष चुनाव विश्लेषकों द्वारा किया गया है। न्यूज सर्विस ने ये सर्वेक्षण ट्विटर पर शेयर किया है। ऑपइंडिया ने मंगलवार (मई 14, 2019) को एक लेख के माध्यम से दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर एग्जिट पोल दिखाने वाले सभी मीडिया हाउसेज को बेनकाब करते हुए चुनाव आयोग से उन पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। हमने अपने लेख में पूछा था कि सारे के सारे एग्जिट पोल में पार्टी विशेष को भारी बढ़त और एक ख़ास पार्टी को भारी घाटा दिखाया जा रहा है, ऐसा क्यों?

ऑपइंडिया ने अपने लेख के माध्यम से पूछा था कि क्या ऐसे एग्जिट पोल से माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है और लाखों लोगों को यूट्यब पर एग्जिट पोल दिखा कर मतदाताओं को प्रभावित किया जा रहा है? हमने सवाल उठाए थे कि वीडियो हटाए जाने तक भी उसे पाँच लाख लोग देख चुके हैं, उसका क्या? फिलहाल सभी को आयोग की नोटिस के बाद अगले क़दम का इन्तजार है। आईएएनएस ने भी अब अपनी ट्वीट डिलीट कर दी है लेकिन उसे उससे पहले कई लोग शेयर कर चुके थे।

चुनाव आयोग ने साफ़-साफ़ कहा था कि पहले चरण का चुनाव शुरू होने से लेकर अंतिम चरण का चुनाव संपन्न होने तक किसी भी प्रकार का एग्जिट पोल प्रतिबंधित रहेगा। अर्थात, 11 अप्रैल से लेकर 19 मई को चुनाव ख़त्म होने तक किसी तरह के कोई भी एग्जिट पोल प्रिंट या डिजिटल माध्यम से प्रकाशित या प्रसारित नहीं किए जा सकेंगे। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव से 48 घंटे पूर्व किसी भी प्रकार के ओपिनियन पोल पर भी प्रतिबन्ध चालू हो जाएगा, ऐसा नियम बनाया गया था। ये प्रतिबन्ध प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सिनेमा, टीवी- इन सभी माध्यमों पर लागू करने की बात कही गई थी।

गैर-मुस्लिम मर्द के साथ प्रेम: इरफ़ान और रिज़वान ने बहन पर फेंका एसिड, अम्मी भी अस्पताल से भाग गई

दिल्ली में एक युवर्ती के साथ उसके परिवार वालों द्वारा ही बेरहमी करने का मामला सामने आया है। दादरी कोतवाली क्षेत्र के कोट नहर के पास गुरुवार (मई 9, 2019) को तेज़ाब से झुलसी मिली युवती का नाम सलमा है, जिसे सफदरगंज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उसकी हालत कई दिनों तक गंभीर बनी रही। सलमा के भाइयों के नाम रिज़वान और इरफ़ान हैं। ख़बरों के अनुसार, 9 मई को गुलावठी की रामनगर निवासी सलमा को उसके भाई इरफ़ान और रिज़वान नोएडा घुमाने के बहाने लाए थे। इसके बाद कोट नहर के सामने भाइयों ने बहन का गला दबाया, चेहरे व शरीर पर एसिड डाला और फिर मृत समझ कर चले गए। अभी तक ये दोनों ही आरोपित पुलिस के शिकंजे से बाहर हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

अस्पताल पहुँचाने के बाद पुलिस ने सलमा के बयान के आधार पर उसकी अम्मी (माँ) को खोज लाई। वो सलमा के साथ कुछ देर अस्पताल में रही। अपनी बेटी को सहारा देने के बजाय वो अचानक से उसे बेसहारा कर अस्पताल छोड़ भाग गई। पुलिस के अनुसार, सलमा के दोनों भाई उसके एक पड़ोसी के साथ प्रेम सम्बन्ध होने को लेकर गुस्सा थे। पुलिस ने यह भी बताया है कि पड़ोसी शादीशुदा है और वो मुस्लिम नहीं है। दोनों भाइयों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास का मामला (आईपीसी सेक्शन 307) दर्ज किया गया है। फिलहाल सलमा का अस्पताल में इलाज चल रहा है और नर्सों की एक टीम उसका ख्याल रख रही है। वहाँ तैनात पुलिसकर्मी सलमा के लिए पानी, जूस और दवाओं का इंतजाम कर रहे हैं। पुलिस ने एक और सहायिका को रखा है, जो सलमा को बाथरूम तक ले जाने व लाने में मदद करती है।

सलमा की हालत पिछले 5 दिनों से गंभीर बनी हुई है और एसिड की वजह से उसके श्वसन प्रणाली (Respiratory System) का काफ़ी नुकसान हुआ है। इससे उसकी साँस लेने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। उसे जल्द ही जीवन रक्षण पद्धति (Ventilator Support) पर रखा जा सकता है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, हॉस्पिटल में तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल ने बताया कि पुलिस द्वारा सलमा की माँ को खोज कर उसे अस्पताल लाया गया था और सलमा से मिलवाया भी गया था। लेकिन, परेशान माँ कहती रही कि उसके पास सलमा के सामने जाने की हिम्मत नहीं है। वह पूरे दिन असपताल में रही लेकिन शाम के बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला।

सलमा के साथ जो भी हुआ और अभी उसकी जो हालत है, उसने अस्पताल में तैनात पुलिसवालों और अस्पतालकर्मियों को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल वही सब सलमा का परिवार बन गए हैं। लेकिन सलमा है कि बार-बार अपनी माँ को कॉल करने की बात कहती है। वह अपनी माँ को पुकारती रहती है। पीड़िता अस्पताल में भर्ती किए जाने से पहले 12 घंटों तक दर्द और पीड़ा से बदहवास छटपटाती रही थी। कुछ लोगों ने उसे तड़पते देख कर पुलिस को सूचना दी थी।

22 वर्षाया सलमा का चेहरा बुरी तरह झुलस गया है और उसकी आँखें तेज़ाब की वजह से जल गई हैं। वह ठीक से कुछ देख भी नहीं पा रही है। पुलिस ने जब उसका बयान दर्ज किया, तब वह मुश्किल से ही बोल पा रही थी। उसके दोनों भाई घर से फरार हैं। कोर्ट द्वारा खुले में तेज़ाब बेचने पर प्रतिबन्ध लगाने के बावजूद यह आसानी से उपलब्ध है और इसका ग़लत उपयोग पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

फैक्ट चेक – मूर्खता, रडार और मोदी विरोध: आँखों में डालो कैक्टस, बिलबिलाओ कि मोदी सही क्यों है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान से मीडिया गिरोह और टुटपुँजिया चुटकुलेबाजों को लगा कि उन्हें खाद-पानी मिल गया है। हलचल तेज हो गई जैसे ही उन्होंने कहा कि बादल छाए रहने के बावजूद तय तिथि पर ही बालाकोट एयर स्ट्राइक के लिए उन्होंने आगे बढ़ने का सुझाव दिया, क्योंकि ‘बादलों के होने से हमारे विमानों को रडार से बचने में मदद मिलती।’

रडार मामलों के नवजात विशेषज्ञों ने इस विषय पर कुछ वेब पृष्ठों पर आधा-अधूरा पढ़ा और पूरा ज्ञान उड़ेल दिया कि पीएम कैसे गलत हैं। और तो और, इस विषय पर मरियम अख्तर मीर जैसे महान बुद्धिजीवी तक ने कमेंट कर के समाज को नई जानकारियाँ प्रदान कीं।

इसी कड़ी में एक ने अमेरिका के DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) नामक वेबसाइट को ‘एक्जॉटिक’ यानी अजीब कह कर ज्ञान दिया।

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी प्रधानमंत्री पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूछा, “मोदी जी, जब भी भारत में बारिश होती है, क्या सभी एयरक्राफ्ट रडार से गायब हो जाते हैं?”

ED के सवालों से घिरे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी नौसिखिया प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी अपने भाई का साथ बखूबी दिया। उन्होंने कहा, “मोदी को लगता है कि बादलों के कारण वो भी लोगों के रडार पर नहीं आएँगे!”

इसके साथ ही, कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य के साथ मीडिया संस्थान भी इस झुंड में शामिल हो गए और इस मुद्दे पर टिप्पणी करने के लिए विशेषज्ञों से राय लेने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने केवल चुटकुलों से ही काम चलाना उचित समझा क्योंकि यह उनके एक एकसूत्री मोदी-विरोधी राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल था।

यह समझना कोई मुश्किल बात नहीं है कि प्रधानमंत्री के बयान पर अधिकांश कमेंट और आलोचना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या घृणा से उपजी है न कि इस विषय पर जानकारी या तथ्य जुटाने से कि रडार कैसे काम करते हैं। सबने बस यह कह कर मजाक उड़ाया है कि ‘देखो मोदी कहता है कि बादलों के होने से रडार की पकड़ में जेट नहीं आएँगे।’ किसी ने यह नहीं बताया कि मोदी कैसे गलत है। बस कह दिया गया कि वो गलत है जो कि उसी एलीट मानसिकता का परिचायक है जहाँ अपनी विचारधारा को महान और दूसरों के विचारों को झुठला दिया जाता है।

अक्सर यह कहा जाता है कि भौतिक विज्ञान हमें जो सिखाता है, उसके विपरीत, ब्रह्मांड के मूल भाग इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और मोरोन (बेवकूफ) हैं। इसी कारण से, रडार कैसे काम करते हैं, इस बारे में विस्तार से बात करना बहुत ज़रूरी है क्योंकि पिछले कई दिनों से लगातार कुछ बेवक़ूफ़ अपनी मूर्खता को ज्ञान समझ कर नाच रहे हैं।

बालाकोट एयर स्ट्राइक एक बड़ा सैन्य अभियान था और इस तरह के आतंकवादी शिविरों पर होने वाले हमलों में कई तरह के रडार शामिल होते हैं।

हमारे लड़ाकू विमानों पर रडार

दुश्मन इलाकों में उड़ान भरने वाले किसी भी लड़ाकू विमान में यह समझने की क्षमता होनी चाहिए कि क्या यह दुश्मनों द्वारा ट्रैक कर लिया गया है और क्या इस पर कोई मिसाइल दागी गई है। चूँकि, विमान बादलों के ऊपर उड़ रहा होगा, इसलिए इसका अपना रडार जमीनी स्तर पर बादल होने पर भी काफी अच्छा काम करेगा। बालाकोट एयर स्ट्राइक के मामले में, ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी वायु सेना को हमारे एयरक्राफ्ट का पता भी नहीं चला (नीचे इस पर विस्तार में बात होगी)।

एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि हमारे विमान को लेजर बीम के माध्यम से लक्ष्य को ‘इलुमिनेट’ करना होगा ताकि विमान द्वारा गिराए गए बम सही लक्ष्य पर गिर सकें। वैसे ‘इलुमिनेट’ शब्द का प्रयोग थोड़ा अजीब है क्योंकि लेज़र ‘विजिबल स्पेक्ट्रम’ (जिसे हमारी आँखें देख सकें) में काम नहीं करेगा। कहने का मतलब यह है कि लेजर से चिह्नित टार्गेट बम पर लगे यंत्रों को दिखेगा, पर हमारी आँखों को नहीं।

अगर आकाश में बादल हों, तो इस स्थिति में, एयरक्राफ्ट को बादलों के बीच में कहीं थोड़ी जगह बनने का इंतजार करना पड़ेगा ताकि वो लक्ष्य को लेजर से इलुमिनेट कर सकें। इसके अलावा, यदि बादल ज़्यादा हैं, और लेजर द्वारा अभेद्य हैं, तो लक्ष्य के अक्षांश और देशांतर निर्देशांकों का उपयोग करके बमों को लक्ष्य भेदने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। हाँ, ये बात भी है कि बादलों के होने से उनकी सटीकता प्रभावित होती है।

बमों पर मार्गदर्शन प्रणाली

यूँ तो बालाकोट जैसे मामलों में बमों को किसी भी रडार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके लक्ष्य एक ही जगह पर होते हैं, हिलते नहीं, लेकिन उन्हें अंतिम बिंदु तक जाने के लिए मार्गदर्शन क्षमता की आवश्यकता होती है ताकि वे सटीक निशाना लगा सकें। एक बार जब वे बादलों से नीचे हो जाते हैं (मान लेते हैं कि बादल हैं), तब पहले से ही लेजर द्वारा इलुमिनेट किए हुए लक्ष्य, और जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम), या और तरीक़ों की मदद से निशाना भेदने में सफल होते हैं।

पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली के लिए रडार

हमारे लड़ाकू विमानों के विपरीत, जो ठीक से जानते हैं कि वे कहाँ हैं, और उन्हें कहाँ पहुँचना है, पाकिस्तानी वायु सेना के रडार को लगातार आकाश को स्कैन करना होगा और अनजान चीज़ों की तलाश करनी होगी। भारत सहित सभी लड़ाकू विमानों पर रडार-एब्जॉर्बर सामग्री का लेप किया जाता है। इसलिए एक लड़ाकू विमान का रडार क्रॉस-सेक्शन काफी छोटा होता है। नतीजतन, यदि आकाश में बहुत सारे बादल हैं, तो ये रडार बीम के बहुत सारे प्रतिबिंबों को जन्म देंगे और घुसपैठिए का पता लगाना अधिक कठिन बना देंगे। अतिरिक्त सूचना, जैसे उड़ान का समय, निम्न-स्तरीय क्लाउड पैच और उच्च-ऊँचाई वाले विमान के बीच अंतर करने के लिए उपयोगी होंगे। लेकिन फिर भी, बहुत ज्यादा बादलों की उपस्थिति निश्चित रूप से दुश्मन के लिए हमारे विमानों का पता लगाना कठिन बना देंगे और उनकी सुरक्षित रूप से वापसी आसान हो जाएगी।

तो संक्षेप में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कहा वह सही है, भले ही उनके आलोचकों के लिए यह पचाना थोड़ा मुश्किल हो। मीडिया गिरोह या अधिकांश विरोधियों की टिप्पणी ऐसे छद्म विशेषज्ञों की बेवकूफी का प्रमाण है। बादल विभिन्न तरीकों से रडार प्रणाली के कई पहलुओं को प्रभावित करते हैं और एक कुत्ते के साथ एक तस्वीर को ट्वीट करने से तथ्य बदलने वाला नहीं है।

यह आलेख अंग्रेज़ी के इस मूल लेख के एक हिस्से का अनुवाद है।

SC द्वारा प्रियंका को बरी करने के बाद ट्विटर पर ममता के मीम्स की बाढ़

ममता बनर्जी को अब एक मीम के लिए भाजयुमो नेत्री प्रियंका शर्मा को जेल भेजना भारी पड़ने लगा है। गेम ऑफ़ थ्रोन्स के खलनायक ‘नाइट किंग’ से लेकर हिटलर और ग्रीक राक्षसी मैड्यूसा तक मीमर्स हर वैराइटी और रंग-ढंग के मीम्स पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा पर बनाने लगे हैं। यह ट्रेंड शुरू करने वाले भाजपा कार्यकर्ता और मशहूर TEDx स्पीकर विकास पांडे थे। उन्होंने लोगों से ममता बनर्जी के ऊपर अधिकाधिक मीम बनाकर उनके निम्न ट्वीट के जवाब में पोस्ट करने की अपील की:

जवाब में लोगों ने ममता बनर्जी पर मीम्स का सैलाब उँड़ेल दिया।

इन मीम्स में लोगों ने खुलकर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किया है।

‘जस्ट फ़क ऑफ़’ के साथ ‘स्टार प्रचारक’ मणिशंकर ब्रो की हुई वापसी, BJP में ख़ुशी की लहर

लोकसभा चुनाव का अब आखिरी चरण बाकी है। ऐसे में भाजपा से लेकर कॉन्ग्रेस और सभी विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ये उम्मीद लगाकर चल रहे थे कि वो जरूर अभी कोई मास्टरस्ट्रोक खेलेंगे। कॉन्ग्रेस में सेम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर की जबरदस्त घरवापसी देखकर एक बार फिर यकीन हो गया है कि मास्टरस्ट्रोक खेला जा चुका है।

सोशल मीडिया पर मणिशंकर अय्यर का आज ही एक नया वीडियो ‘वायरल’ हुआ है, जिसको लेकर बुद्दिजीवी पत्रकारों में एकदम सन्नाटा देखने को मिला है। इस वीडियो में मणिशंक्कर अय्यर उनका इंटरव्यू लेने गए पत्रकारों को बस घूँसा ही नहीं मार पाए, बाकी अपनी ‘छुपी हुई’ प्रतिभा का जितना भी परिचय वो दे सकते थे, उन्होंने खुलकर दिया।

वायरल हो रहे इस वीडियो में मणिशंकर अय्यर की मानसिक स्थिति ठीक नजर नहीं आ रही है और वो पत्रकारों को धमकाते हुए कभी उन्हें घूँसा मारने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं, तो कभी गाली उनकी जुबान पर आते-आते रुक रही है। लेकिन, आखिर मणिशंकर भी इंसान ही हैं और तमाम प्रयासों के बावजूद भी आखिर में उनके मुँह से वो चमत्कारी शब्द निकल गया जिसे अंग्रेजी में कहते हैं “फ़क ऑफ़!” हिंदी में यह बहुत ही गन्दी बात होती है और बेहद निंदनीय मानी जाती है। लेकिन, बहुमत की सरकार द्वारा चुने गए देश के प्रधानमन्त्री को ‘नीच’ कह देने वाले मणिशंक्कर अय्यर के लिए तो यह सब सामान्य बात नजर आती है।

मणिशंकर अय्यर लगातार जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग प्रधानमंत्री के लिए करते आ रहे हैं, वो स्पष्ट रूप से लोकतंत्र को गाली दे रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि राजीव गाँधी के घोटाले का जिक्र कर देने भर से जिस मीडिया गिरोह को नींद नहीं आ रही है, उसे मणिशंकर अय्यर के ‘फ़क ऑफ़’ में भी गुलाब की महक आ रही है और वो लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाली पत्रकारिता को गाली देने वाले मणिशंकर को लेकर मौन है।

इस वीडियो में मणिशंकर अय्यर मीडिया से कह रहे हैं, “वो आपसे बात नहीं करते हैं क्योंकि वो डरपोक हैं। नरेंद्र मोदी के तीखे हमले आपने नहीं देखे हैं? उनसे जाकर सवाल कीजिए।” इसके बाद मणिशंकर अय्यर ने अपने दोनों हाथ हवा में उठाकर शानदार अभिनय प्रतिभा का भी परिचय दिया। हालाँकि, यह उनके अभिनय की सूक्ष्म झलक थी, फिर भी मनमोहक थी। इस अभिनय में यह प्रतीत हो रहा है मानो पत्रकारों ने उनसे सवाल करते-करते उनकी जोर से पूँगी बजा दी हो।

मीडिया द्वारा 23 मई के रिजल्ट के सवाल पर वो घूँसा बनाकर पत्रकार की तरफ आगे बढ़े और उनको चुप होने के लिए कहा। पत्रकारों ने उनसे जब निवेदन किया कि कृपया नाराज ना हों, इस पर मणिशंकर अय्यर ने खुलकर अपने मन की बात करते हुए बताया कि वो नाराज हो रहे हैं। इसके बाद मणिशंकर अय्यर ने घूँसा तानते हुए आपत्ति के स्वर में पत्रकार से बहुत ही मधुर स्वर में “जस्ट फ़क ऑफ़” कहकर इंटरव्यू को विराम दिया।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने एक खुलासा करते हुए यह भी बताया था कि मणिशंकर अय्यर बालाकोट एयर स्ट्राइक में मसूद अजहर के साथ ‘निकल नहीं लिए’ हैं, बल्कि वो और मसूद अजहर दोनों ही एकदम सुरक्षित हैं। आज के उनके इस वायरल वीडियो ने इस तथ्य की पुष्टि भी कर डाली है।

नोट : राजनेताओं द्वारा इस प्रकार की भद्दी और अश्लील भाषा का प्रयोग करना आम बात होती जा रही है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि नरेंद्र मोदी की छवि की धज्जियाँ उड़ाने के चक्कर में राहुल गाँधी के सिपाही उन्हीं की पार्टी की धज्जियाँ उड़ाने पर उतारू हो गए हैं। इस प्रकार की भाषा एक वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देती है और कम से कम मीडिया के सामने तो अपनी भाषाशैली पर लगाम लगाकर रखनी चाहिए। मणिशंकर अय्यर द्वारा कहे गए ‘फ़क ऑफ़’ की कड़ी निंदा की जानी चाहिए और अन्य नेताओं को भी इस प्रकार स्तरहीन टिप्पणियाँ करने से बचना चाहिए।

श्री लंका: ‘हिंसा में समुदाय विशेष वाले अपने घरों से निकलकर खेतों में छुप गए, पुलिस तमाशा देखती रही’

अप्रैल के महीने श्री लंका में हुए आत्मघाती हमलों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। श्रीलंकाई लोगों को यह जानकर बहुत बड़ा झटका लगा था कि उन हमलों के पीछे समुदाय के ही स्थानीय लोगों का हाथ हो सकता है। श्रीलंका में ईस्टर संडे के आत्मघाती हमले के कारण देश में सांप्रदायिक हिंसा काफी ज्यादा भड़क चुकी है। इसको लेकर प्रशासन भी लगातार कदम उठा रहा है।

इस्लामिक आतंकियों द्वारा चर्च और होटलों में की गई खतरनाक बमबारी के बाद से श्री लंका में समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। मस्जिदों और समुदाय के व्यापार पर हमले के बाद श्रीलंका के कई इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। श्री लंका के सैनिकों ने बख्तरबंद वाहनों में इस हफ्ते हिंसा की चपेट में आए क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान निवासियों का कहना है कि हिंसा के वक्त लोग अपने घरों और दुकानों से निकलकर धान के खेतों में छुप रहे थे और वहीं पुलिस खड़ी हिंसा देखती रही।

पुलिस और निवासियों के अनुसार, फेसबुक पर शुरू हुए विवाद के बाद कई दर्जन लोगों ने रविवार (मई 12, 2019) को क्रिश्चियन-बहुल वाले शहर चिलवा में मस्जिदों और समुदाय की दुकानों पर पत्थर फेंके और एक व्यक्ति को खूब पीटा। वहाँ के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एक विवादित फेसबुक पोस्ट को लिखने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान 38 वर्षीय अब्दुल हमीद मोहम्मद हसमार के रूप में हुई है।

उसने ऑनलाइन कमेंट में लिखा था, “एक दिन तुम लोगों को रोना है।” लोगों ने इस कमेंट को धमकी के रूप में ले लिया और शहर में हिंसा शुरू हो गया। इस पोस्ट पर मचे बवाल के बाद शहर में कई मस्जिदों और समुदाय की दुकानों पर पथराव किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था। 

14 मई को श्री लंका के पास के कोट्टमपतिया में एक मस्जिद में भीड़ के हमले के बाद श्री लंका के सैनिकों ने बख्तरबंद वाहन के जरिए हेटिपोला की सड़कों पर गश्त लगाई। अधिकारियों ने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में स्थिति नियंत्रण में थी, जबकि मजहब विरोधी भीड़ रविवार से शहर से शहर जा रही थी। श्री लंका में तनाव का माहौल है और सांप्रदायिक हिंसा भड़की हुई है। इस हिंसा में मजहब विरोधी भीड़ ने मस्जिदों पर हमला किया। इसके अलावा हिंसा के दौरान मजहब के धार्मिक ग्रंथ कुरान को भी जला दिया गया।

कोट्टमपिटिया शहर में एक मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुए लोगों के समूह में से एक ने बताया, “समुदाय के लोग पास के धान के खेतों में छुप गए। जिसके कारण किसी की जान नहीं गई।” उन्होंने बताया कि सोमवार की दोपहर के बाद लगभग एक दर्जन लोगों का एक समूह टैक्सियों में आया था और समुदाय के स्वामित्व वाले स्टोर पर पत्थरों से हमला किया। देखते ही देखते भीड़ ने काफी नुकसान किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने मुख्य मस्जिद, 17 समुदाय विशेष के स्वामित्व वाले कारोबार और 50 घरों पर हमला किया। 48 साल के अब्दुल बारी ने बताया कि दुकान को पेट्रोल बम से जला दिया गया, उन्होंने कहा कि हमलावर मोटरबाइकों पर थे, जो छड़ और तलवारों से लैस थे।

साथ ही वहाँ के लोगों ने भीड़ को तितर-बितर करने में विफल रहने के लिए पुलिस को दोषी ठहराया। 47 साल के मोहम्मद फलील के अनुसार, “पुलिस देखती रही, वे गली में थे। उन्होंने किसीको भी नहीं रोका। उन्होंने हमें अंदर जाने के लिए कहा। हमने पुलिस को कहा कि इसे रोको, लेकिन पुलिस ने गोली नहीं चलाई। पुलिस को ये रोकना था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।”

वहीं, पुलिस के प्रवक्ता रूवान गुणसेकेरा ने उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि हिंसा के दौरान पुलिस खड़ी थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में थी और अपराधियों को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हिंसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही ज्यादा से ज्यादा पुलिस बल का इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही गई है। अपराधियों को 10 साल की जेल की सजा हो सकती है। वहीं इस मामले में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सोमवार देर रात उन्होंने सुरक्षा बलों को मजहब विरोधी हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी थीं।

कॉन्ग्रेस को मेरे पति की जरूरत नहीं, तभी नहीं करा रहे प्रचार: सिद्धू की पत्नी का टूटा सब्र का बाँध

नवजोत सिंह सिद्धू के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के अन्य सभी बड़े-छोटे नेताओं को गाली देकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की नजरों में आने के सारे प्रयास विफल होते नजर आ रहे हैं। वर्तमान हालात ये हैं कि कॉन्ग्रेस में जाने के बाद उनकी स्थिति अब इधर कुआँ, उधर खाई वाली है। स्थिति यह आ गई है कि इस बार लोकसभा चुनाव में उन्हें न तो स्टार प्रचारक की श्रेणी में रखा गया और ना ही उनकी पत्नी नवजोत कौर को टिकट ही दिया गया।

सोमवार (मई 11, 2019) को ही खबर आई कि नवजोत सिंह, गले में समस्या की वजह से फिलहाल प्रचार नहीं करेंगे। हालाँकि इस पर नवजोत कौर के सब्र का बाँध टूट गया है। पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले राज्य सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने सिद्धू के प्रचार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे-सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर ही ठीकरा फोड़ दिया, जिससे नवजोत सिंह सिद्धू जैसे वाचाल के गले में समस्या आने पर संदेह हो जाता है।

‘अमरिंदर सिंह नहीं चाहते कि सिद्धू प्रचार करें’

नवजोत सिंह की पत्नी नवजोत कौर ने आज स्पष्ट कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में इसलिए प्रचार नहीं कराया जा रहा है क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा नहीं चाहते हैं। बता दें कि मीडिया में खबर यह आई थी कि सिद्धू के गले में समस्या है, जिसका इलाज चल रहा है, इसलिए वह प्रचार से दूर हैं। खबरों पर गौर करें तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कई मसलों पर मतभेद बना रहता है। अब नवजोत कौर ने कहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को सिद्धू की जरूरत ही नहीं है, इसीलिए उनसे पंजाब में प्रचार नहीं कराया जा रहा है।

यह देखना दुखद है कि लगातार कॉन्ग्रेस परिवार के नेतृत्व यानी, राहुल गाँधी की नजरों में आने के लिए प्रयास कर रहे नवजोत सिंह सिद्धू की हालत वर्तमान में बेहद दयनीय हो चुकी है। उन्होंने सुर्ख़ियों में आकर कॉन्ग्रेस परिवार की वाहवाही लूटने के चक्कर में प्रधानमंत्री के लिए कई प्रकार के निम्न से भी निम्नस्तरीय विवादित टिप्पणियाँ दी हैं।

‘मेरा टिकट भी उन्होंने ही कटवाया’

सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने पंजाब में 19 मई को होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले यहाँ तक कह डाला कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की वजह से ही उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ ही उन्होंने आशा कुमारी को भी अपना टिकट कटने के लिए जिम्मेदार बताया। नवजोत कौर ने कहा कि दशहरा पर जो ट्रेन हादसा हुआ था, उसे आधार बनाकर मेरा टिकट काटा गया।

बता दें कि अमृतसर में पिछले वर्ष दशहरे के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें शामिल होने के लिए नवजोत कौर पहुँची थीं। इस कार्यक्रम को देखने बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे, जिनमें से कुछ रेलवे ट्रैक पर भी खड़े थे और ट्रेन से कुचलकर उनमें से कई की मौत हो गई थी। इस हादसे को लेकर नवजोत कौर पर काफी सवाल उठे थे।

नवजोत कौर ने इस हादसे को ही अपना टिकट कटने के पीछे वजह बताया है। साथ ही इस बहाने अपने पति व पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में प्रचार न कराने को लेकर भी नवजोत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचना की है।

‘हिंदू आतंकवाद’ वाले बयान पर कमल हासन के खिलाफ FIR दर्ज

अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन पर ‘हिंदू आतंकवादी’ वाले बयान के बाद दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। कमल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153(ए) और 295(ए) के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है। उन पर आतंकवाद को हिंदू धर्म के साथ जोड़कर हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने का आरोप है।

कमल हासन के खिलाफ यह शिकायत हिंदू सेना के विष्णु गुप्ता ने दर्ज कराया है। जिनका आरोप है कि इस बयान से हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। गुप्ता का आरोप है कि इस बयान के जरिए दो समुदायों के बीच द्वेष फैलाने की भी कोशिश की गई है। इस मामले की सुनवाई 16 मई को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में होगी। इसके अलावा कमल हासन के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसमें इस मामले में चुनाव आयोग से दखल देने की गुजारिश की गई है। इस मामले में कल (मई 15, 2019) सुनवाई हो सकती है।

गौरतलब है कि, कमल हासन ने रविवार (मई 12, 2019) को तमिलनाडु के अरावकुरिचि में अपनी पार्टी मक्कल निधि मय्यम के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था। उन्होंने कहा कि वो इसलिए ये नहीं कह रहे हैं, क्योंकि ये मुस्लिम बहुल इलाका है, बल्कि वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि महात्मा गाँधी की प्रतिमा सामने है। हासन के इस बयान पर जमकर हंगामा हुआ।

इस बयान के बाद कमल हासन के इस बयान की भाजपा, एआईएडीएमके, संघ और हिंदू महासभा ने कड़ी निंदा की। और अब हिंदू आतंकवादी के बयान पर घिरे कमल हसन की सभी चुनावी रैलियाँ रद्द हो गई हैं। वहींं, तमिलनाडु सरकार के मंत्री केटी राजेंद्र बालाजी ने कमल हासन के इस बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए उनकी जीभ काटने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी एक के किए गलत काम के लिए पूरी कौम को इस तरह से सवालों के घेरे में नहीं लाया जा सकता है। उनका कहना है कि कमल ने अल्पसंख्यकों का वोट हासिल करने के लिए ये बयान दिया है।