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238-248 सीट: BJP को नहीं मिलने वाला है पूर्ण बहुमत, करोड़ों-अरबों के सट्टा बाजार का अनुमान

19 तारीख को सभी मीडिया संस्थाओं के एग्जिट पोल आने के बाद अब सट्टा बाजार भी इस बात का दावा कर रहा है कि एक बार फिर 23 मई को देश की सत्ता मोदी सरकार को मिलने वाली है। जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक केंद्र में दोबारा एनडीए की सरकार बनने वाली है और एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री पद को नरेंद्र मोदी संभालेंगे।

मुंबई और दिल्ली सट्टा बाजार ने भाजपा को इन चुनावों में 238-241 सीटें दी हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को लेकर अनुमान है कि पार्टी को 78-81 सीटें मिलेंगी।

इसी तरह गुजरात और राजस्थान के सट्टा बाजार में भी बीजेपी के पक्ष में अनुमान लगाए गए हैं। गुजरात के सट्टा बाजार के मुताबिक भाजपा को 242-244 सीटें और कॉन्ग्रेस को 80-82 जीतने के अनुमान हैं। वहीं राजस्थान सट्टा बाजार के अनुसार भाजपा को 242-245 सीटें और कॉन्ग्रेस को 75-80 सीटें मिलने वाली है।

कॉन्ग्रेस शासित राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी में भी शहर के पंटर्स का अनुमान है कि भाजपा को 246-248 के बीच सीट मिलेंगी जबकि कॉन्ग्रेस के खाते में 80-82 सीट आएँगी।

हालाँकि, इन सबका कोई आधिकारिक आँकड़ा उपलब्ध नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि चुनावों में पार्टियों के प्रदर्शन पर सट्टा बाजार में करोड़ों के दाँव लगे हुए हैं। इसके अलावा सट्टा बाजार में इस बार नरेंद्र मोदी के पीएम बनने को लेकर, अमेठी में राहुल गाँधी को जीतने को लेकर और यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन पर भी खूब पैसे लगे हुए हैं।

खबर के मुताबिक इस चुनाव में सट्टा बाजार का आकार साल 2014 के लोकसभा चुनाव से अच्छा खासा बड़ा है। कुछ पंटर्स के अनुमान के मुताबिक इस बार दुगना पैसा सट्टा में लगा हुआ है। बता दें कि देश के अधिकांश भागों में सट्टा लगाना गैरकाननूनी है। लेकिन ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर किसी प्रकार की कोई गाइडलाइन नहीं है। सट्टा लगाने वाले मोबाइल फोन, एप्लीकेशन और वेबसाइट के जरिए सट्टा लगाते हैं।

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। बिहार महागठबंधन के भागीदार और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। साथ ही इस संभावित हिंसा का ठीकरा एक ही साँस में बिहार की नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर फोड़ दिया है।

‘हथियार भी उठाना हो तो हथियार उठाना चाहिए’

पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व में भाजपा नीत एनडीए के साथ सत्ता की मलाई काट चुके उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि लोगों में इस समय आक्रोश है। ऐसे में अगर ‘रिजल्ट लूटने’ की घटना हुई तो सड़कों पर खून बहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से हथियार उठाने के लिए तैयार रहने को भी कहा है। साथ में कहा कि अगर ऐसी कोई हिंसा होती है तो उसके लिए बिहार और केंद्र की सरकार जिम्मेदार होंगे

निर्वाचन के पहले, इसके दौरान और एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद से विपक्षी नेताओं का EVM और निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाना बदस्तूर जारी है। EVM और निर्वाचन आयोग को लेकर जिस तरह से संगठित दुष्प्रचार किया जा रहा है, उसे देखते हुए यह शंका जताई जा सकती है कि नतीजों के समय कहीं बड़े स्तर पर हिंसा करने के लिए पृष्ठभूमि तो नहीं तैयार की जा रही?

मायावती ने करीबी पार्टी MLA को किया निलंबित, भाजपा प्रत्याशी से गले मिलने का आरोप

एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद से ही विपक्ष के नेताओं में सिमटते जनाधार को लेकर चिंता का माहौल है। पहले ममता बनर्जी ने सर्वेक्षणों को ही ‘गॉसिप’ करार दिया, और अब मायावती ने अपनी संभावित हार के लिए बलि के बकरे तलाशने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री और विधानसभा में पार्टी के विधायक दल के सचेतक (व्हिप – whip) रामवीर उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में भागीदारी का आरोप लगाया गया है।

मिले थे गले, भाई पहले से भाजपाई

सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले भाजपा के आगरा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल को गले लगाते हुए रामवीर उपाध्याय की तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी। हालाँकि रामवीर उपाध्याय ने सफाई दे दी थी कि बघेल उनसे रास्ते में ‘टकरा’ गए थे और उन्होंने शिष्टाचारवश कुशल-क्षेम पूछा था, लेकिन अटकलबाजियों का दौर शुरू हो ही गया था। इससे पहले पिछले वर्ष रामवीर के भाई मुकुल उपाध्याय पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

मायावती के माने जाते थे करीबी

पार्टी महासचिव मेवालाल गौतम की ओर से कभी मायावती के करीबी माने जाने वाले रामवीर उपाध्याय को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कि उन्हें पहले भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में भागीदारी को लेकर सचेत किया गया था। इसके बावजूद आगामी लोकसभा के निर्वाचन के समय कई सीटों पर, जिनमें आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ शामिल हैं, न केवल उन्होंने पार्टी के प्रत्याशियों का समर्थन नहीं किया बल्कि विरोधी पार्टियों के उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन किया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित किया जाता है। उनसे प्रदेश विधानसभा में पार्टी के विधायक दल के मुख्य सचेतक (व्हिप) के पद से भी पदमुक्त कर दिया गया है। साथ ही, वह पार्टी के किसी भी कार्यक्रम, मीटिंग आदि में भी हिस्सा लेने के अधिकारी नहीं होंगे

निराश कार्यकर्ताओं में प्रियंका गाँधी ने भरी चाबी, कहा-‘एग्जिट पोल से न घबराएँ, मतगणना केंद्र पर ध्यान दें’

एग्जिट पोल में दर्शाए पूर्वानुमान के बाद चारों ओर हल्ला उठ चुका है कि सत्ता में दोबारा मोदी सरकार ही आ रही है। ऐसे में कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी ने सोमवार (मई 20, 2019) को पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों के कारण और एग्जिट पोल देखकर हताश न हों। उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्ट्राँग रूम तथा मतगणना केंद्रों पर डटे रहने की भी सलाह दी हैं। प्रियंका ने कहा है कि असली परिणाम 23 मई को आएँगे, उसके लिए तैयार रहें।

प्रियंका ने सोमवार (मई 21, 2019) को ऑडियो संदेश जारी करते हुए कहा, ” मेरे प्यारे कॉन्ग्रेस के भाइयों और बहनों… अफवाहों में पड़ने की जरूरत नहीं है। एग्जिट पोल आपको हतोत्साहित करने के लिए है।”

प्रियंका के मुताबिक यह सब सिर्फ़ कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की दृढ़ता को तोड़ने का एक प्रयास है। अपनी ऑडियो में प्रियंका ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “आपका इन सबसे अलर्ट रहना बहुत महत्वपूर्ण है। स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्र के बाहर आप निगरानी बनाए रखिए हमें यकीन है कि हमारे संयुक्त प्रयास का फल जरूर मिलेगा।”

प्रियंका गाँधी का यह बयान मिर्जापुर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ललितेश पति त्रिपाठी के पत्र के बाद आया है। इसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग से शिकायत की है कि जिस स्ट्रॉन्ग रूम में सारी ईवीएम रखी हैं, वहाँ पहले से ही 300 अतिरिक्त ईवीएम पहुँचाई जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि 19 मई को आए तकरीबन सभी एग्जिट पोल में एनडीए को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है। लोकसभा की 542 सीटों पर भाजपा और एनडीए के गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें दी गई हैं। एनडीए के खाते में एग्जिट पोल में सबसे ज्यादा 267-350 सीटें आई।

Breaking: अरुणाचल प्रदेश में आतंकी हमला, MLA तिरोंग अबो सहित 7 लोगों की मौत

अरुणाचल प्रदेश में नेशनल पिपल्स पार्टी (NPP) के विधायक तिरोंग अबो और 6 अन्य लोगों की मंगलवार (मई 21, 2019) को आतंकी हमले में मौत हो गई है। अभी तक की रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध NSCN (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड) के आतंकियों का हाथ इस हमले के पीछे हो सकता है। यह घटना अरुणाचल प्रदेश में तिरप जिले के बोगापानी गाँव में हुई है। 

तिरोंग अबो खोंसा वेस्ट से विधायक थे। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने इस हमले की पुष्टि की है।

सीएम संगमा ने एक ट्वीट में इस घातक हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पीएमओ से इस हमले के ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

हालाँकि, अभी तक इस हमले की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन NSCN पर इस वारदात में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

BJP से हाथ मिला लें मुस्लिम: कॉन्ग्रेसी MLA ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं को दी ‘गाली’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं को अपशब्द कहे हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने के भी संकेत दिए। कर्नाटक में एग्जिट पोल के सामने आने के बाद से ही अंदरूनी कलह शुरू हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने राज्य के कई नेताओं से मुलाक़ात कर धीरज रखने की सलाह दी थी। एग्जिट पोल्स में भाजपा को राज्य में 28 में से 25 सीटें तक मिलती हुई दिखाई दे रही हैं। इससे कॉन्ग्रेस खेमे में हड़कंप है और नेता पार्टी आलाकमान से गठबंधन पर पुनर्विचार करने की माँग कर रहे हैं। सार्वजनिक तौर पर बयानबाज़ी रोकने की लाख कोशिशों के बावजूद विधायक रौशन बेग ने हालिया लोकसभा चुनावों में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन को लेकर नाराज़गी जताई है।

कॉन्ग्रेस द्वारा राज्य में आशानुरूप प्रदर्शन न कर पाने के लिए बेग ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य में पार्टी के प्रभारी केसी वेणुगोपाल को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने इन दोनों नेताओं के लिए अपशब्दों का भी प्रयोग किया। साथ ही उन्होंने मुस्लिमों को भी ख़ास सलाह दी। विधायक बेग ने मुस्लिमों से कहा कि अगर अगली बार भी राजग की सरकार बनती है तो वे लोग समझौता कर लें। उन्होंने कहा कि राजग की सरकार बनने की स्थिति में मुस्लिम भाइयों को परिस्थितियों से समझौता कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ती है तो मुस्लिमों को भाजपा से हाथ मिलाने से भी नहीं हिचकना चाहिए।

रौशन बेग मुस्लिमों के बीच राज्य में जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने मुस्लिमों को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें किसी ख़ास पार्टी का वफ़ादार नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर मुस्लिमों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एक ही मुस्लिम को टिकट दिया है। बेग ने ज़रूरत पड़ने पर पार्टी छोड़ने की भी बात कही। साथ ही मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का भी बचाव किया। मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए विधायक ने कहा कि राज्य में कॉन्ग्रेस के ख़राब या कमजोर प्रदर्शन के लिए वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और गुंडु राव ज़िम्मेदार हैं।

कॉन्ग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री लाचार हैं, उन्हें काम ही नहीं करने दिया जा रहा है। बैकॉल रौशन बेग, इसी कारण हार के लिए कुमारस्वामी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार गठन के दौरान मंत्रालय बेचे गए थे। उन्होंने सिद्धारमैया पर महत्वाकांक्षी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मन में लगातार मुख्यमंत्री बनने की इच्छा पल रही है।

वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी ने विधायक रौशन बेग के आरोपों से किनारा कर लिया है। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वरा ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। उन्होंने आशा जताई कि 23 मई को लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के साथ ही राज्य में परिस्थितियाँ बदलेंगी। आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए प्रभारी वेणुगोपाल बंगलौर आएँगे। मुस्लिमों के बीच लोकप्रिय रौशन बेग 8 बार विधायक रह चुके हैं और कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान आधा दर्जन मंत्रालय संभाल चुके हैं। गृह मंत्रालय से लेकर हज मामला मंत्रालय संभालने वाले रौशन बेग के आरोपों से पार्टी को झटका लगना तय है।

देशभर में मदरसों की स्थापना के लिए RSS ने कसी कमर, उत्तराखंड से होगी शुरुआत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) देश भर में मदरसों की स्थापना की अपनी योजना पर काम करने के लिए कमर कस रहा है। संघ ने उत्तराखंड में अपना पहला मदरसा स्थापित करने की योजना बना ली है। इस काम के लिए जमीन पहले से ही खरीदी जा चुकी है और निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।

ख़बर के अनुसार, संघ बहुत पहले से देश में ऐसे मदरसों को स्थापित करने की योजना बना रहा है जो इस्लामी शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी प्रदान करेगा। इस संबंध में संघ ने उत्तराखंड से शुरूआत करने की योजना बनाई है, जिसे देवभूमि भी कहा जाता है। यहीं पर संघ द्वारा संचालित पहला मदरसा स्थापित किया जाएगा। बता दें कि यह मदरसा उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले के एक गाँव में स्थापित किया जाएगा। संघ परिवार के अनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच बैनर तले खोले जाने वाले मदरसे शुरुआत में 50 छात्राओं को प्रवेश देंगे।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राज्य प्रमुख सीमा जावेद ने भी इस बात की पुष्टि की कि मदरसे की स्थापना के लिए सभी आवश्यक कामों को पूरा कर लिया गया है, और इसके लिए ज़मीन भी ख़रीदी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुकूल तैयार किया गया है। पिछले साल पीएम मोदी ने एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की दृष्टि सामने रखी थी जिसमें मुस्लिम छात्रों के एक हाथ में क़ुरान और दूसरे में कंप्यूटर हो

जहाँ एक तरफ़ कुछ मुस्लिमों को इस तरह के मदरसों पर कोई आपत्ति नहीं हैं, वहीं मुस्लिम सम्प्रदाय में एक दूसरा तबका इस तरह की ख़बरों से आशंकित है। उनका कहना है कि संघ परिवार का इतिहास बताता है कि अगर संघ परिवार मदरसा स्थापित करना चाहता है, तो यह केवल अल्पसंख्यकों की संस्कृति को प्रभावित करने के लिए हो सकता है।

Record लोकसभा मतदान प्रतिशत: लक्षद्वीप, त्रिपुरा रहे अव्वल, यूपी-बिहार 60% के नीचे

लोकसभा 2019 के निर्वाचन में मतदान प्रतिशत सर्वकालिक उच्चतम स्तर (67.11%) का रहा। हालाँकि यह आँकड़ा एक लोकसभा क्षेत्र वेल्लोर को हटा कर है (यानि 542 सीटों का है), जहाँ निर्वाचन आयोग ने मतदान स्थगित कर दिया था। वहाँ मतदान सम्पन्न होने के बाद ही अंतिम राष्ट्रीय आँकड़ा सामने आएगा। इससे पहले इन 542 सीटों का रिकॉर्ड 65.95% का 2014 में था- वह भी मोदी लहर के दौरान। सभी 543 सीटों को मिला भी दें तो 2014 का अंतिम रिकॉर्ड 66.4% का है।

पूर्वी राज्यों का प्रदर्शन बेहतर, पश्चिमी राज्य रहे पीछे

राज्यवार हिसाब से देखें तो 18 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में पहले (2014) से अधिक मतदान प्रतिशत रहा, जबकि 16 राज्यों में यह 2014 से नीचे चला गया। तेलंगाना में 2014 का आँकड़ा अलग से उपलब्ध नहीं हो पाया क्योंकि राज्य पिछली लोकसभा का निर्वाचन होने के बाद ही संयुक्त आंध्र से अलग हुआ था। उसके लिए 2014 के आँकड़े से ही तुलना की गई है।

जहाँ देश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों के राज्यों यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे कम मतदान वाले रहे (एक अपवाद के तौर पर न्यूनतम मतदान प्रतिशत, 29.4%, वाला जम्मू-कश्मीर उत्तरी राज्य है), वहीं सर्वाधिक मतदान प्रतिशत वाले राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में दक्षिण-पश्चिमी लक्षद्वीप के अलावा बाकी सभी पूर्वी भारत के हैं।

साभार: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

कश्मीर में भारी गिरावट, एमपी-हिमाचल में उछाल

आतंक-ग्रसित जम्मू-कश्मीर में इस बार मतदान प्रतिशत में पिछली बार (2014) के मुकाबले 20% की गिरावट रही। पिछली बार वहाँ 49.7% मतदान हुआ था। भारी हिंसा के बीच भी पश्चिम बंगाल में 2014 के 82.2% से थोड़ा ही कम 81.9% मतदान हुआ। मध्य प्रदेश में दूसरी ओर 2014 के मुकाबले 9.6% की उछाल के साथ मतदान प्रतिशत 71.2% जा पहुँचा, वहीं हिमाचल में 64.5% से 71.5% तक मतदान का स्तर पहुँचा। कश्मीर के अलावा केवल दो राज्यों में 60% के नीचे मतदान हुआ- बिहार में 58.1% और यूपी में 59.6%

भाजपा विरोधी गठबंधन के सूत्रधार नायडू की CM की कुर्सी भी नहीं बचेगी: Exit Polls

चंद्रबाबू नायडू ने भले ही हाल के दिनों में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, एनसीपी संस्थापक शरद पवार, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, तृणमूल की सर्वेसर्वा ममता बनर्जी और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी से विपक्षी एकता बनाए रखते हुए भाजपा विरोधी गठबंधन के निर्माण के लिए मुलाक़ात की हो, लेकिन एग्जिट पोल्स के अनुसार, उनकी ख़ुद की सीएम की कुर्सी पर ही संकट के बादल मँडरा रहे हैं। तीन एग्जिट पोल्स के औसत के अनुसार, चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार रहे हैं और वाईएसआर कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी राज्य के नए मुख्यमंत्री बनते दिख रहे हैं।

अगर नायडू की सीएम की कुर्सी भी नहीं बचती है तो राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा किरदार अदा करने के लिए उनके द्वारा लगातार की जा रही मेहनत पर पानी पड़ने की संभावना है। जगन मोहन रेड्डी लोकसभा चुनाव में भी आंध्र प्रदेश की कई सीटें जीतते दिख रहे हैं, ऐसे में इसका सीधा नुकसान किंगमेकर बनने का सपना पाल रहे नायडू को ही उठाना पड़ सकता है क्योंकि राज्य में अभी यही दोनों पार्टियाँ प्रभावी हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, तीन एग्जिट पोल्स का औसत निकालने पर पता चलता है कि 175 सीटों वाली राज्य की विधानसभा में टीडीपी को मात्र 65 सीटें आएँगी जबकि 106 सीटों के साथ रेड्डी की पार्टी पूर्ण बहुमत के लिए ज़रूरी न्यूनतम आँकड़े से काफ़ी आगे निकल जाएगी।

पीपल्स प्लस ने वाईएसआर कॉन्ग्रेस को 112 सीटें दी हैं जबकि मिशन चाणक्य ने पार्टी को 91-105 सीटें जीतते हुए दिखाया है। टीडीपी को दोनों एजेंसियों ने क्रमशः 59 और 55-61 सीटें दी है। एक अन्य एग्जिट पोल में टीडीपी को जगन की पार्टी से अधिक सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। 2014 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में नायडू की पार्टी को 117 सीटें मिली थीं जबकि वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी को 70 सीटों से संतोष करना पड़ा था। कॉन्ग्रेस की राज्य में स्थिति अच्छी नहीं है और भाजपा अभी पाँव जमाने की कोशिश में ही लगी है।

इस बार आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों ही नेताओं ने एक-दूसरे पर जम कर आरोप लगाए। जहाँ चंद्रबाबू नायडू ने अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों को हाइलाइट करते हुए फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को जम्मू कश्मीर से बुलाकर मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कई नई योजनाओं के वादे किए, जगन मोहन रेड्डी ने जनता के बीच यह बताने की कोशिश की कि नायडू अपने वादे पूरे करने में विफल रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू ने मार्च 2018 में राजग ने नाता तोड़ लिया था, उसके बाद से वह पीएम मोदी के विरोध में मुखर रहे हैं।

नायडू ने अपने राज्य में इस बार आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने को मुद्दा बनाया था। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने अपने हर भाषण में प्रधानमंत्री मोदी को घेरा। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम लोकसभा चुनाव परिणामों के साथ ही 23 मई को जारी किए जाएँगे। किसी भी एग्जिट पोल ने राज्य में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों (भाजपा एवं कॉन्ग्रेस) के खाता खुलने की भी संभावना नहीं जताई है। सभी एग्जिट पोल्स ने इन दोनों ही बड़े दलों को शून्य सीटें मिलती हुई दिखाई हैं। अब देखना यह है कि विपक्षी एकता के नए सूत्रधार नायडू अपना गढ़ बचाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

उत्तर प्रदेश में मतदान के चौथे चरण के बाद दूसरे दिन सिटी मजिस्ट्रेस समेत प्राइवेट गाड़ी में ईवीएम और वीवीपैट मिलने के कारण नेताओं ने खूब हंगामा किया था। मौक़े पर ड्राइवर के भाग जाने के कारण मामले ने भी काफ़ी तूल पकड़ा। हालाँकि सूचना मिलते ही डीएम मौक़े पर पहुँचे और नेताओं की उपस्थिति में हुई जाँच में साफ़ हो गया कि दूर के क्षेत्रों से मशीनें आने में देरी हुई है। इसके अलावा भड़के नेताओं को शांत कराने के लिए मशीनों को उनके सामने चेक भी किया गया, सारी मशीनें वैसी थीं जिनका उपयोग नहीं हुआ था।

इस पूरी घटना की खबर को दैनिक भास्कर ने 30 अप्रैल को अपने वेबसाइट पर प्रकाशित किया। लेकिन बावजूद इसका संज्ञान लिए चुनाव परिणाम का दिन नजदीक होने के कारण मामले को उछाला गया। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री ने 20 मई को अपने ट्विटर पर लिखा, “देशभर में मतगणना केंद्रों के आसपास इवीएम खुली गाड़ियों में पकड़ी जा रही हैं। जनता पकड़ रही है…लेकिन ख़ुद को पत्रकार कहने वाले बड़े-बड़े लोग आँख मूँदकर बैठे है …. उन्हें इंतज़ार है कि इस हेराफेरी से मोदी जीते तो ये फिर इवीएम पर सवाल उठाने वालों पर भौंकना शुरू करें।”

मनीष सिसोदिया के इस ट्वीट पर जब वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह ने उन्हें जवाब दिया और बताया, “पत्रकार आँख मूंद कर नहीं बैठे हैं, बल्कि पड़ताल कर रहे हैं और फिर अफवाहों का खंडन भी!” उन्होंने दैनिक भास्कर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा, “आप खुद देख लीजिए, आपके सहयोगियों के आरोप और सच्चाई में कितना बड़ा फर्क है!”

इस पर मनीष सिसोदिया भी शांत नहीं बैठे, उन्होंने सबूत देखे और ब्रजेश कुमार पर निशाना साधते हुए फिर एक ट्वीट किया। उन्होंने भास्कर के स्क्रीनशॉट पर कहा, “अपने चैनल पर भी ज़रा इस सच को दिखा दीजिए..सिर्फ़ दैनिक भास्कर की वेबसाईट पर सच क्यूँ? सारन, फगवाड़ा, चंदौली, मेरठ, फ़तेहाबाद, सकलडीह, ग़ाज़ीपुर में अपनी पड़ताल का सच भी बता दीजिए… उम्मीद है 23 से पहले आपकी पड़ताल पूरी हो जाएगी। बॉक्स में महोबा वाली ख़बर का सच भी बता दीजिएगा।”

मनीष सिसोदिया की लीक पर चलते हुए स्वरा भास्कर ने भी ट्विटर पर निर्वाचन आयोग से जवाब माँगा है। उन्होंने पूछा है कि ये सब क्या हो रहा है। उनके मुताबिक बिहार से लेकर हरियाणा तक हर जगह ईवीएम की मशीनें मिल रही हैं।

इन्हीं सवालों के कारण उत्तर प्रदेश, चंदौली में हुई घटना पर निर्वाचन आयोग ने सफाई दी है। उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए यह सुनिश्चित किया कि ईवीएम कड़ी सुरक्षा में हैं। आयोग ने अपनी ओर से हर घटना पर अलग-अलग जवाब दिए। उत्तर प्रदेश गाजीपुर मामले में चुनाव आयोग ने बता दिया है कि स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर प्रत्याशियों द्वारा जो सवाल खड़े किए गए थे, उन्हें सुलझा लिया गया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, हर काउंटिंग सेंटर पर ईवीएम और VVPAT मशीन को राजनीतिक दलों के सामने वीडियोग्राफी करके सुरक्षित रखा गया है। आयोग के मुताबिक, ईवीएम जिस जगह पर ये सभी हैं, वहाँ पर सीसीटीवी कैमरे की भी पूरी व्यवस्था है। सुरक्षा के लिए CPAF की तैनाती है, प्रत्याशियों को भी स्ट्रॉन्ग रूम में जाने की अनुमति दी गई है। ऐसे में किसी तरह का गलत आरोप लगाना निराधार है।