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एयरसेल मैक्सिस घोटाला: चिदंबरम पिता-पुत्र को अदालत ने 30 मई तक दी गिरफ़्तारी से राहत

एयरसेल-मैक्सिस घोटाला मामले में आरोपित पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को अदालत ने 30 मई तक गिरफ्तारी से राहत दी है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले की जाँच कर रही है। अदालत ने 30 मई तक दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं को गिरफ़्तारी से अंतरिम प्रोटेक्शन दिया। स्पेशल जज ओपी सैनी ने चिदंबरम पिता-पुत्र के वकील और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया। सरकारी एजेंसियों की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जाँच पूरी करने के लिए और समय की माँग की।

अदालत कई बार चिदंबरम को गिरफ़्तारी से राहत दे चुकी है। ऐसा पिछले वर्ष से ही चला आ रहा है। इस से पहले प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआइ ने अदालत से कहा था कि पी चिदंबरम जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। 2018 में 30 मई को गिरफ़्तारी से राहत के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद से उन्हें कई मौकों पर कोर्ट से राहत मिल चुकी है। इसी साल अगस्त महीने में सीबीआई के स्पेशल जज ओपी सैनी ने उन्हें अक्टूबर तक गिरफ्तारी से राहत प्रदान की थी।

उससे पहले शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायलय के चिदंबरम पिता-पुत्र को जमानत देने सम्बन्धी फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था। बता दें कि उस समय कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से अदालत में जिरह की थी। पिछले वर्ष दिसंबर में भी उन्हें अदालत द्वारा 11 जनवरी तक गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की गई थी।

पी. चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए गलत तरीके से विदेशी निवेश को मंजूरी दी थी। उन्हें 600 करोड़ रुपए तक के निवेश की मंजूरी देने का अधिकार था, लेकिन यह सौदा करीब 3500 करोड़ रुपयों के निवेश का था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने अलग आरोप पत्र में कहा है कि कार्ति चिदंबरम के पास से मिले उपकरणों में से कई ई-मेल मिली हैं, जिनमें इस सौदे का जिक्र है। इसी मामले में पूर्व टेलिकॉम मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन भी आरोपित हैं।

₹1381 करोड़ की कुल मदद का ऐलान, PM मोदी ने ‘फोनी’ से हुई तबाही का लिया जायजा

शुक्रवार (मई 3, 2019) को ओडिशा में आए चक्रवाती तूफान फोनी से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए आज (मई 6, 2019) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भुवनेश्वर पहुँचे। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण के जरिए तूफान से हुए नुकसान का आकलन किया और उससे हुई तबाही से उबरने के लिए ₹1000 करोड़ की तत्काल मदद का ऐलान भी किया। बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से पहले ही ₹381 करोड़ के मदद की घोषणा की जा चुकी है।

इस दौरान पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की प्रशंसा की। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नवीन बाबू ने हर चीज की योजना बहुत अच्छी तरह से बनाई और केंद्र सरकार उन्हें इन सभी चीजों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। पीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की टीमों और स्थानीय जिला प्रशासन की टीमों ने मिलकर बेहतर ढ़ंग से काम किया। साथ ही उन्होंने ओडिशा के नागरिकों और मछुआरों की भी तारीफ करते हुए कहा कि यहाँ के लोगों ने जिस तरह से सरकार के हर निर्देश का पालन किया, वो सराहनीय है और इसी वजह से जान की हानि कम हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर कदम पर ओडिशा के साथ है।

जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ओडिशा की तरह पश्चिम बंगाल में भी चक्रवाती तूफान के बाद उत्पन्न स्थिति के लिए समीक्षा बैठक करना चाहते थे। इसके लिए वहाँ की सरकार को पत्र भी लिखा गया, लेकिन राज्य की ममता सरकार ने जवाब में कहा कि सरकारी अधिकारी चुनाव ड्यूटी में बिजी हैं, इसलिए समीक्षा बैठक नहीं हो सकती।

इस तूफान से ओडिशा के 11 जिले प्रभावित हुए हैं। पुरी व खुर्दा पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। अभी भी बिजली, पानी और खाने के सामान की आपूर्ति सुचारू ढंग से शुरू नहीं हो पाई है। राज्य सरकार ने कहा है कि हालात को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। तूफान से 10 हजार गाँव व 52 शहरी इलाके प्रभावित हुए हैं और करीब एक करोड़ की आबादी इसकी चपेट में आई है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई है कि बहुत जल्द पुरी व भुवनेश्वर में बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से होने लगेगी। इसके साथ ही उन्होंने रविवार (मई 5, 2019) को कहा कि प्रभावित इलाकों में अगले 15 दिनों तक सरकार लोगों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराएगी।

आखिर कॉन्ग्रेस पार्टी ने स्वयं ही राजीव गांधी को ‘नीच डकैत’ क्यों कहा?

कहते हैं राजनीति में कोई किसी का मित्र या शत्रु नहीं होता। यह भी कहा जाता है कि शब्द दोधारी तलवार होते हैं जिसे लिखने वाला अपने हिसाब की बातें लिखने के लिए मनचाहे तरीके से इस्तेमाल कर सकता है। कई बार आदमी सही बात लिखते हुए एक दो शब्द छुपा जाता है जिससे दो विपरीत अर्थ सामने आते हैं।

एक व्यक्ति हैं संजय झा। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता हैं। प्रवक्ता का मतलब होता है पार्टी की आधिकारिक बात को जनता के सामने रखना। कॉन्ग्रेस के क़रीबी माने जाते हैं, पार्टी के बड़े नेता भी माने जाते हैं। मैंने ‘माने जाते हैं’ लिखा है क्योंकि आज कल जिस तरह की बातें लिख रहे हैं, वो कॉन्ग्रेस के क़रीबी या नेता तो नहीं ही लिखेंगे। जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल संजय झा कर रहे हैं, उससे लगता है कि वो नाराज हैं, वो भी बहुत ज़्यादा।

हाल ही में नरेन्द्र मोदी ने मंच से एक सत्य बोला। सत्य यह था कि राजीव गाँधी भ्रष्ट व्यक्ति थे। इससे किसी को क्या आपत्ति होगी! राजीव गाँधी न सिर्फ भ्रष्ट थे, जो कि बोफ़ोर्स घोटालों से एक्सपोज हुए बल्कि अपनी माताजी की हत्या का बदला लेने के लिए पार्टी काडरों को सिखों के नरसंहार के लिए उकसाने वाले हत्यारे भी कहे जा सकते हैं। इसके अलावा भोपाल गैस कांड की लाशों का ख़ून भी राजीव गाँधी के शरीर पर नहीं तो हाथ पर तो ज़रूर है क्योंकि एंडरसन को देश से बाहर भागने का सरकारी मौका उन्होंने ही उपलब्ध कराया। समुदाय विशेष की महिलाएँ अगर हाल के दिनों तक तीन तलाक के कुत्सित परम्परा का भार उठाती घूम रही थीं, तो उसमें भी राजीव गाँधी ही केन्द्र में आते हैं।

जिस पार्टी का नारा ही प्रधानमंत्री को चोर कहते हुए लोकसभा चुनाव में जाने का है, वो अपने इतिहास को भूल कर मर्यादा और पद की गरिमा, मृतक को सम्मान आदि की बात कैसे कर सकती है। प्रधानमंत्री मोदी पर अपराध साबित होना तो छोड़िए, आरोप पर केस तक दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन कॉन्ग्रेस के मुखिया, राजीव गाँधी के लाड़ले और लाडली के लिए ‘चौकीदार चोर है’।

ये बड़े घरों में पलने वाले लोग हैं। इन्हें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले इनके पिता ने पलट दिए थे, तो इस माहौल की परवरिश पाकर बड़े हुए बच्चे तो अपने हर शब्द को कानून ही समझेंगे। भले ही राजीव के 410 को राहुल ने 44 पर पहुँचा दिया, पर ऐंठन तो वही रहेगी न! आखिर, ये बच्चे अपने हर शब्द को सत्य क्यों नहीं मानेंगे? ये तो इनका विशेषाधिकार है क्योंकि इन्होंने न सिर्फ भारत को तीन (+१) प्रधानमंत्री दिए हैं, बल्कि चोरों को भारत रत्न तक से नवाज़ा है और डकैती को जस्टिफाय कर दिया है।

बाद में भारत की इमोशनल जनता कहने लगती है, “लेकिन यार वो मर गया, अब उसको घेरने से क्या फायदा!” वाह! मतलब लाखों-करोड़ों की दलाली, लाखों करोड़ों के घोटाले, हजारों सिखों की हत्या, विदेशी अपराधियों को मामा-चाचा समझ कर देश से बाहर निकलने का मौका देना और सिर्फ राजीव गाँधी की मौत से वो हर अपराध से मुक्त हो जाएँगे!

हिटलर, स्टैलिन, माओ, चर्चिल, ओबामा, बुश आदि में से कोई भी नरसंहारों के ख़ून से अपने आप को मुक्त नहीं कर सकता। इन सब ने राजनैतिक या निजी कारणों से जर्मनी, रूस, चीन, बंगाल, सीरिया, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान आदि में नरसंहार किए हैं। इन्हें जो भी कारण देकर जस्टिफाय किया जाए, भले ही ओबामा को शांति का नोबेल दे दिया जाए, लेकिन तथ्य यही है कि किसी एक देश की जनता को खुश करने के लिए बंगाल के अकाल के दौरान बुद्धिमान माना जाने वाला चर्चिल लाखों बंगालियों की मौत का ज़िम्मेदार रहेगा।

ओबामा के हाथ में भी सीरयाई आबादी का रक्त है, बुश के हाथों पर भी लाखों निर्दोषों का ख़ून है। उसी तरह सत्ता का गलत इस्तेमाल करके 1984 के सिख हत्याकांड का, जिसे दंगा कह कर उसके दुष्प्रभाव को कम करने का नैरेटिव बनाया जाता है, रक्त राजीव गाँधी के हर लिबास पर रहेगा जो संग्रहालयों में टँगे हुए हैं। माता की हत्या का बदला पूरे समुदाय से लेना, एक राजनैतिक पार्टी द्वारा एक धर्म के लोगों को निशाना बनाना, और हत्यारों को मुख्यमंत्री, सांसद, कैबिनेट मंत्री बनाना, उन लाखों सिखों की सिसकती घावों में नमक छिड़कने जैसा है।

मोदी ने क्या गलत कहा? मोदी को भी तो हर न्यायालय से छूट मिलने के बावजूद चोर और हत्यारा कहने वाले वही लोग हैं जो अपने पिता का नाम उसके मुँह से सुन कर बिलख रहे हैं। राजीव गाँधी भले ही राहुल और प्रियंका के पिता हैं, तो एक पिता के तौर पर तो बच्चों को हमेशा परिवार के साथ खड़े रहना चाहिए, लेकिन वो पिता प्रधानमंत्री भी था, और दुर्भाग्य से चोर और हत्यारा भी। देश उनके पिता से बड़ा है और अगर ये दोनों देशभक्त हैं तो राहुल या प्रियंका को मोदी की बात सुन कर चुपचाप रोने के बाद, आँसू के घूँट पीकर, रैली में किसी और विषय पर भाषण देते रहना चाहिए था।

उन्होंने क्या किया? उन्होंने ट्वीट लिख कर समर्थन जुटाने की बात सोची, और सोशल मीडिया इन दोनों डिम्पलधारियों को उनके पिता का वह इतिहास भी बता रहा है, जो उन्हें याद भी नहीं होगा।

दूसरी बात यह है कि किसी की मृत्यु, चाहे जैसे भी हुई हो, उसके कारनामों को पब्लिक चर्चा में लाना तब तक सही है जब तक वो एक पब्लिक व्यक्ति था। अगर आप किसी के निजी संबंधों पर, उसकी पत्नी पर, उसकी माँ पर हमले करेंगे, जो किसी भी तरह से राजनीति से जुड़े नहीं; आप उन पर चोरी का आरोप लगाएँगे जो हर तरह से ईमानदार है, फिर तो वो भी आप के बाप, दादी और परनाना तक जाएगा ही। ये तो सीधा गणित है कि पोलिटिकल कैम्पेन में कीचड़ उछालने का हक़ सिर्फ एक पार्टी को नहीं है।

चूँकि राजीव गाँधी की हत्या राजनैतिक कारणों से हुई, तो इससे उनके पाप तो नहीं धुलते। हाँ, उनकी मृत्यु का मजाक नहीं बनाया जा सकता, लेकिन इतिहास में दर्ज ग़लतियाँ तो उन्हें हमेशा बुलाती रहेंगी। उन्हें तो उनके असामयिक मृत्यु ने कई फजीहतों से बचा लिया और कोर्ट के चक्कर काटने से वो बच गए, लेकिन उनके सर पर तमाम अपराध तो रहेंगे ही।

अब बात संजय झा जैसे नेताओं की जो अंग्रेज़ी में ट्वीट करते हुए ‘डेस्पिकेबल डेस्पराडो’ लिखते हैं। इसमें अनुप्रास अलंकार है। शायद इसीलिए भी संजय जी लिखते-लिखते नाम लिखना भूल गए कि आखिर वो घेर किसको रहे हैं। उनका ट्वीट कहता है, “जर्मनी में लोगों ने हिटलर को भुलाया नहीं है। लेकिन वो हिटलर और उसने जो मानवता के साथ किया, उस पर शर्मिंदा होते हैं। ऐसा ही प्रारब्ध इस नीच डकैत का भी इंतजार कर रहा है।”

संजय झा ने नाम तो नहीं लिखा, जबकि उस ट्वीट में अभी जगह और कैरेक्टर बचे हुए थे। संजय झा पढ़े-लिखे व्यक्ति की तरह नज़र आते हैं जिनकी शब्दावली में ‘डेस्पिकेबल’ और ‘डेस्पराडो’ जैसे शब्द हैं। फिर वो नाम लिखना क्यों भूल गए। पढ़े-लिखे लोग भूलते नहीं, जानबूझकर छोड़ देते हैं बातों को। जिस पार्टी ने मोदी को नाम लेकर दिन में दस बार कोसा हो, उसके संजय को नाम लिखने के लिए दिव्य दृष्टि की ज़रूरत नहीं।

फिर थोड़ा गणित का हिसाब लगाते हैं तो पता चलता है कि हिटलर से उनका मतलब राजीव गाँधी से है जिसने मनमानी भी की, और मानवता उसके कृत्यों से लज्जित भी है। कॉन्ग्रेस के अलावा पूरा देश इस बात से शर्मिंदा है कि बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, और उस धरती के हिलने का मतलब होता है हजारों सिखों को काटना, मारना और ज़िंदा जलाना।

इसके बाद उन्होंने उस समय के आने की भविष्यवाणी की है जब इस ‘डेस्पिकेबल’ (जिसका मतलब होता है नीच, घटिया, निंदनीय, घृणित, तिरस्कार योग्य, नाली का कीड़ा, अधम, घिनौना, नफ़रत पैदा करने वाला आदि) ‘डेस्पराडो’ (जिसका मतलब होता है डकैत, लुटेरा, शोहदा, गुंडा, ठग, बदमाश, दुष्ट, शठ, गलाकाटू आदि) को भी वैसे ही याद किया जाएगा।

इन दोनों शब्दों के मैंने जितने भी मतलब लिखे हैं, उसके दायरे में कॉन्ग्रेस का लगभग हर बड़ा नेता आ जाएगा। इन दोनों शब्दों के अर्थों पर राजीव गाँधी बिलकुल सटीक उतरते हैं। उन्होंने समाज में घृणा भी फैलाई, निंदनीय कार्य भी किए, घिनौने नरसंहार को अपनी ‘अध्यक्षता’ में संचालित किया और डकैती तो इतनी की है कि अभी तक नई बातें सामने आ ही रही हैं।

संजय झा को ऐसी बातें नहीं लिखनी चाहिए थीं। वो अभी भी पार्टी में ही हैं, और उन्हीं राजीव गाँधी के परिवार की छत्रछाया में उनके जैसे लोग अपना भरण-पोषण कर रहे हैं। संजय झा के इस ट्वीट से पता चलता है कि वो जिस थाली में खाते हैं, उसी की क्वालिटी पर नकारात्मक ट्वीट लिखते हैं। उनकी यह चालाकी अभी तो किसी की पकड़ में नहीं आ रही क्योंकि मंदबुद्धि लोग कॉन्ग्रेस के शीर्ष पर आसीन हैं, लेकिन पता चलते ही इन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों को कारण निकाला जाएगा।

अब राजीव गाँधी को भ्रष्ट कहने पर दुःखी और नैतिकता का लबादा ओढ़े भारत की आम जनता को भी यह बताना ज़रूरी है कि हाल ही में अटल बिहारी बाजपेयी की मृत्यु पर इन्हीं कॉन्ग्रेसियों और उनके समर्थक पार्टियों के कार्यकर्ताओं से लेकर कई बड़े लोगों ने ज्ञान दिया था कि उनकी मौत से उनके पिछले कर्मों का हिसाब नहीं होता।

यही तर्क राजीव से लेकर नेहरू तक लगेगा। उनकी मृत्यु हो गई लेकिन उनकी हरकतों और नीतियों का परिणाम पूरा भारत आज भी भुगत रहा है। उनकी असमय हत्या उनकी गलत नीतियों, भ्रष्टाचार या नरसंहारों के पाप से उन्हें मुक्त नहीं करती। बल्कि ऐसी बातें तो नैतिक शिक्षा की किताबों में पढ़ाई जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने ही देश के साथ किए गए अपराधों के ज़िम्मेदारों को सरकारी गाड़ी में बिठाकर भगाना कितना गलत है।

अंत में संजय झा जी को नमन रहेगा कि उन्होंने सैम पित्रोदा की तरह चाटुकारिता नहीं दिखाई और राजीव गाँधी को ‘ग्रेट लीडर’ कह कर राहुल गाँधी के क़रीबी होने का दावा नहीं किया। सत्य बोलने वाले को डराया जा सकता है, लेकिन ज़्यादा समय तक चुप नहीं रखा जा सकता। संजय झा इस कार्य के लिए सराहना के पात्र हैं, देश को उन पर गर्व है और इसीलिए संजय झा जी को ‘नमन रहेगा’।

जम्मू कश्मीर: मतदान न होने देने के लिए कहीं पत्थरबाजी तो कहीं फेंका ग्रेनेड

जम्मू कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट में शामिल शोपियाँ और पुलवामा से भारी हिंसा की खबरे आ रही हैं। इन दोनों जगहों के मतदान केंद्रों पर मतदानकर्मियों के पहुँचते ही पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, साथ ही पंचायत घर और एक स्कूल में आग तक लगा दी गई। परिस्थितियाँ इतनी अधिक तनावपूर्ण हो गईं कि मतदानकर्मियों को जेनापोरा इलाके से विमान द्वारा दूर ले जाना पड़ा।

शोपियाँ और पुलवामा में हिंसा की घटनाएँ रात से ही खबरों की सुर्खियाँ बनी हुई थीं लेकिन सुबह होते-होते हालात और भी बिगड़ गए। पथराव रोकने के लिए सेना ने आँसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन बिगड़ी स्थितियों पर काबू पाना बहुत मुश्किल था।

जी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक कल जैसे ही पोलिंग स्टाफ़ को पोलिंग का सामान देने की प्रक्रिया शुरू हुई वैसे ही कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन होने लगे जिसमें कई लोग घायल हुए। तनावपूर्ण स्थितियों के कारण शोपियाँ से जेनापुरा इलाके के लिए 38 पोलिंग स्टॉफ को एयरलिफ्ट करना पड़ा।

इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए चल रहे मतदान के बीच आतंकवादियों ने पुलवामा जिले में रोहमू मतदान केन्द्र को निशाना बनाकर वहाँ ग्रेनेड भी फेंका। ये पहला मौक़ा था जब चुनाव के चलते आतंकवादियों ने ऐसा कोई हमला किया हो। हालाँकि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है। ग्रेनेड हमले के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दक्षिण कश्मीर के नौगाम में आतंकवादियों ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। शनिवार (4 मई) को हुए इस हत्याकांड को उन्हीं के घर में अंजाम दिया गया। सीने और पेट में गोलियाँ लगने के बाद मीर को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया। यह हत्याकांड ठीक उसी समय हुआ था, जब कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने दहशतगर्दों से रमजान के महीने में दहशतगर्दी और हिंसा न करने की अपील की थी। 

रूस: आपातकाल लैंडिंग के दौरान विमान में लगी आग, 41 की मृत्यु, 11 घायल

रविवार (मई 6, 2019) को रूस की राजधानी मास्को में एयरपोर्ट पर आपातकाल लैंडिंग के दौरान सुखोई सुपरजेट 100 विमान में आग लगने के कारण 41 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 2 बच्चे भी शामिल हैं। विमान ने मॉस्को एयरपोर्ट से उत्तरी रूस के मरसांस्क शहर के लिए उड़ान भरी थी। हादसे के दौरान इसमें 73 यात्री और 5 क्रू मेंबर सवार थे।

दुर्घटना की जाँच में जुटी टीम की प्रवक्ता स्वेतलाना पेट्रेन्को द्वारा दी जानकारी के मुताबिक विमान में मौजूद 78 लोगों में 37 लोग जिंदा हैं यानि 41 लोगों की मौत हुई हैं। एक बयान में एयरोफ्लोट कंपनी ने कहा है कि विमान उड़ान भर चुका था लेकिन कुछ देर बार तकनीकी कारणों से उसे एयरपोर्ट पर लौटना पड़ा। रनवे पर लैंड करते वक्त विमान के इंजन में आग लग गई। इस घटना के बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर जीवित व्यक्तियों के नाम प्रकाशित किए हैं। साथ ही आश्वासन दिया है कि घायलों के परिजनों को नि:शुल्क मॉस्को पहुँचाया जाएगा।

खबरों के अनुसार एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही विमान में धुआँ उठने लगा था। जानकारी मिलते ही चालक दल ने एटीसी को सूचना दी और विमान की आपातकालीन लैंडिंग हुई, लेकिन इस बीच आग ने विमान को अपनी लपटों में घेर लिया था। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो शेयर हो रहा है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयानक था। 41 लोगों की मौत के अलावा इसमें 11 लोगों के घायल होने की भी खबरे हैं।

एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि विमान दो साल पुराना था। रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने पूरे हादसे की जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस दुर्घटना के बाद विमानों को मॉस्को के अन्य एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस घटना पर दुःख प्रकट किया है।

क्रिस्चियान कोस्तोव नाम के एक चश्मदीद ने सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में लिखते हुए बताया कि प्लेन को आग की लपटों में देख यात्री डर से काँपने लगे थे।

अमेठी में ज़बरदस्ती हाथ पकड़कर पीठासीन अधिकारी ने कॉन्ग्रेस को डलवाया वोट

देश में आज लोकसभा चुनाव के पाँचवें चरण के लिए 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हो रहा है। इस बीच एक ख़बर सामने आई है कि एक वृद्ध मतदाता का हाथ ज़बरदस्ती पकड़कर उससे कॉन्ग्रेस को वोट दिलवाया गया। मामला अमेठी के गौरगंज के गूजरटोला बूथ नंबर 316 का है जहाँ पीठासीन अधिकारी ने एक बूढ़ी महिला का हाथ पकड़कर उससे ज़बरदस्ती कॉन्ग्रेस का बटन दबवाया और वोट कॉन्ग्रेस को डलवाया, जबकि उस महिला ने स्पष्ट किया कि वो अपना वोट बीजेपी को देना चाहती थी जिसके लिए वो कमल का बटन दबाना चाहती थी, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने उसकी मंशा भाँपते हुए उसका हाथ पकड़ा और पंजे (हाथ) के निशान वाला बटन दबवा दिया।

ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। ट्विटर पर अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर करते हुए एक यूज़र ने लिखा, “ये क्या हो रहा देश में। कुछ कानून नाम के कोई चीज है या नही। पूरी गुंडा गर्दी हो रही है।।।”

एक यूज़र ने ट्वीट कर पीठासीन अधिकारी के ऊपर कठोर कार्रवाई करने की माँग की, इसके अलावा पीठासीन अधिकारी को निष्पक्ष चुनाव कराने की बात भी लिखी गई।

ट्विटर पर एक अन्य यूज़र ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए लिखा कि अभी सिस्टम मे बहुत कॉन्ग्रेसी और जातिवादी दीमक लोकतंत्र को कुतरने और चमचई करने में लगे हैं। साथ ही EVM पर हमेशा सवाल उठाने वाली कॉन्ग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए राहुल गाँधी को शहज़ादा तक कह डाला।

इस घटना से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कॉन्ग्रेस वोट पाने की चाहत में कुछ भी कर गुज़रने पर उतारू है। ये मामला भले ही किसी एक जगह से आया हो लेकिन ऐसा अन्य जगहों पर नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इस सब के बीच अमेठी सीट से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अमेठी सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राहुल गाँंधी पर बूथ कैंपचरिंग करने का आरोप लगाया है। स्मृति ईरानी का आरोप है कि यहाँ पर पीठासीन अधिकारी कॉन्ग्रेस के इशारे पर भाजपा का वोट कॉन्ग्रेस को डलवा रहे हैं। स्मृति ईरानी ने अमेठी ने वीडियो ट्वीट शेयर करते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग और प्रशासन की है और साथ ही कार्रवाई की माँग की। वीडियो के वायल होने के बाद आला अधिकारी हरकत में आ गए और मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन विभाग ने फौरन पीठासीन अधिकारी को हटा दिया और उनकी जगह पर नए पीठासीन अधिकारी को तैनात किया गया है। गौरीगंज के उप जिला निर्वाचन अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जाँच करवाई जाएगी।

जानिए थप्पड़ खाने के बाद अब कैसी सिक्योरिटी लेकर चलेंगे CM केजरीवाल

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कल चाँदनी चौक सीट से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार पंकज गुप्ता के लिए चुनाव प्रचार करने गए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शनिवार (मई 4, 2019) को मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के मारे जाने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर अहम कदम उठाया गया है।

बता दें कि, आम आदमी पार्टी के समर्थकों या प्रशंसकों के लिए अब केजरीवाल के नजदीक जाना काफी मुश्किल होगा। अब वो पहले की तरह करीब जाकर न तो हाथ मिला सकते हैं और न ही माला पहना सकते हैं। केजरीवाल के आसपास सुरक्षाबलों का मजबूत घेरा होगा और अगर कोई समर्थक केजरीवाल से मिलना चाहता है या फिर माला पहनाकर स्वागत करना चाहता है तो तो उसे सुरक्षाकर्मियों के द्वारा जाँच किए जाने के बाद ही ये मौका मिल पाएगा।

अब केजरीवाल के रोड शो दे दौरान उनकी गाड़ी में पार्टी के लोग कम और सुरक्षाकर्मी ज्यादा होंगे। केजरीवाल की सहमति के बिना कोई भी गाड़ी में सवार नहीं हो सकेगा। सीएम की गाड़ी में केजरीवाल के अलावा तीन लोग ही मौजूद होंगे। एक तो वो वो कैंडिडेट, जिसके लिए केजरीवाल प्रचार कर रहे होंगे और दूसरा उस क्षेत्र का विधायक। इसके अलावा एक और व्यक्ति केजरीवाल की सहमति से गाड़ी में सवार हो सकता है। इसके साथ ही पब्लिक मीटिंग के दौरान आसपास की ऊँची बिल्डिंगों की छतों पर एके-47 के साथ जवान तैनात किए जाने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही अगर वो किसी रोड शो के दौरान खुली जीप में होंगे तो उनकी गाड़ी में दिल्ली पुलिस सिक्यॉरिटी यूनिट के 2 जवान पीछे और 2 जवान आगे गाड़ी में रहेंगे। इतना ही नहीं, 4 जवान गाड़ी के पीछे, 6 जवान गाड़ी के दोनों साइड और 4 जवान गाड़ी के आगे घेरा बनाकर चलेंगे और 1 या 2 कमांडो को भी वर्दी में तैनात किया जाएगा। अब केजरीवाल जिस भी जिले में प्रचार करने जाएँगे, वहाँ उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी वहाँ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर, जिला डीसीपी, सब-डिविजन के एसीपी और संबंधित थानों के सभी एसएचओ की होगी।

सीएम के गाड़ी में चढ़ने से पहले भी गाड़ी की जाँच की जाएगी कि कहीं किसी ने गाड़ी में बम वगैरह तो नहीं ना प्लांट किया है। वहीं अगर वो गाड़ी से उतरकर लोगों के बीच जाएँगे तो उस समय तकरीबन 20 जवान उनके चारों ओर घेरा बनाकर मौजूद रहेंगे, ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो। हालाँकि, सीएम से पहले भी कई बार कहा गया है कि उनको खतरा है, वो अपने साथ सिक्याॅरिटी कवर रखें, मगर वो हर बार मना कर देते थे। मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के बाद उन्होंने खुद इसके लिए सहमति दे दी है।

‘श्री लंका के हमलावरों का हमारे पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’: J&K पुलिस

जम्मू और कश्मीर पुलिस के प्रमुख दिलबाग सिंह ने रविवार को कहा कि उनके विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि श्री लंका में ईस्टर रविवार को आतंकी हमले में शामिल संदिग्ध व्यक्तियों ने कश्मीर की यात्रा की थी। बता दें कि श्री लंका सेना प्रमुख ने दावा किया था कि हमले के संदिग्धों ने कश्मीर की यात्रा की थी।

ख़बर के अनुसार, सिंह ने कहा कि उन्हें राजनयिक चैनल के माध्यम से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, दस्तावेजों में उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सिंह ने कहा, “हमने जाँच की है और उनके यहाँ आने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के बाद आव्रजन (Immigration) रिकॉर्ड फिर से देखे गए थे और किसी भी हमलावर ने कश्मीर का दौरा नहीं किया था।

कुछ दिनों पूर्व श्री लंकाई सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके की टिप्पणी आई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईस्टर हमले के संदिग्ध भारत में कश्मीर गए थे और उन्होंने केरल राज्य की यात्रा भी की थी। दिलबाग सिंह ने कहा कि श्री लंका के सेना प्रमुख को राजनयिक चैनलों के माध्यम से सबूत भेजने चाहिए, और वह इस पर ग़ौर करेंगे।

ज्ञात हो कि 21 अप्रैल को श्री लंका के तीन चर्चों और लग्जरी होटलों में आतंकी हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। एक महिला समेत नौ आत्मघाती हमलावरों ने इस घटना को अंजाम दिया था।

TMC कार्यकर्ता ने किया BJP उम्मीदवार अर्जुन सिंह पर हमला: #VotingRound5

पश्चिम बंगाल में बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उनपर हमला किया। उनका कहना है कि हमला करने के लिए टीएमसी ने बाहर से गुंडों को बुलवाया था। इस हमले में उन्हें चोट आई है।

खबरों के अनुसार टीएमसी के गुंडे मतदाताओं को डरा धमका रहे थे और उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे, तभी एक महिला अर्जुन सिंह के पास अपनी शिकायत लेकर पहुँची कि उनका बेटा जो कि पोलिंग एजेंट था, वह मिल नहीं रहा है। महिला की शिकायत पर अर्जुन सिंह ने तुरंत पोलिंग एजेंट का पता लगवाने में मदद की और उन्हें ढूँढकर बूथ के भीतर बैठाया। इस घटना के तुरंट बाद टीएमसी के कथित गुंडों ने उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी जिसमें अर्जुन सिंह को खासी चोटे आईं।

ऐसा पहली बार नहीं है कि टीएमसी के गुंडों ने खुलेआम अपनी गुंडागर्दी दिखाई हो, इससे पहले भी उनके हिंसा में शामिल होने की खबरें आती रही हैं। पिछले चरण के मतदान में टीएमसी के उत्पात के कारण ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का फैसला कर लिया था। उनकी जिद थी कि यदि पोलिंग बूथ पर सीआरपीएफ को तैनात नहीं किया गया तो वह मतदान करने नहीं जाएँगे।

इसके अलावा पिछले महीने टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की बुरी तरह पिटाई करके उन्हें लहूलुहान कर दिया। ट्विटर पर अंकुर सिंह ने लहूलुहान भाजपा कार्यकर्ता का फोटो शेयर कर दावा किया था कि तृणमूल के गुंडों ने उन्हें बुरी तरह पीटा है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता के बेटे ने भी अपने पिता का फोटो शेयर कर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रतीक ने ट्विटर के माध्यम से पूरे देश का सहयोग माँगा था और कहा था कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनके पूरे परिवार को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

रमज़ान के कारण मतदान के समय में नहीं होगा बदलाव: निर्वाचन आयोग का फैसला

रमजान के महीने में पड़ने वाले अंतिम तीन चरणों के मतदान के समय में बदलाव करने की माँग को चुनाव आयोग ने रविवार (मई 6, 2019) को खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि लोकसभा 2019 के आम चुनाव के 5वें, 6ठे और 7वें चरण के मतदान के तय समय में फेरबदल करना संभव नहीं है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज हुई थी। इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने रमजान के दौरान मतदान के समय को सुबह 7 बजे की बजाय 5 बजे से कर देने की अपील की थी। कोर्ट में यह याचिका मोहम्मद निजामुद्दीन पाशा और असद हयात द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि मतदान के अंतिम तीन चरण में देश के कई हिस्सों में भीषण गरमी रहेगी और ‘लू’ चल सकती है, उस दौरान रमजान का महीना भी रहेगा, इसलिए मतदान का समय सुबह 7 बजे की बजाय तड़के 4:30 या 5 बजे से कर देना चाहिए। माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर चुनाव आयोग को विचार करने को कहा था। कोर्ट ने इस मामले पर चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं माँगा था। खबरों की मुताबिक कोर्ट ने आयोग से सिर्फ़ यह जानने की कोशिश की थी कि वे इस प्रकार की माँग पर गौर कर सकते हैं या नहीं?

उल्लेखनीय है कि चुनाव शुरू हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय तब तक चुनाव आयोग के काम में दखल नहीं दे सकता है, जब तक कोई बड़ी चूक या किसी नियम का उल्लंघन न हुआ हो। इसलिए, पूरा मामला चुनाव आयोग पर निर्भर करता था कि वह इस पर क्या फैसला करेगा।