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उल्टा राहुल EC को डाँटे: ‘मैंने कोई गलती नहीं की, आप भेदभाव मत कीजिए’

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने आचार संहिता उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग में जवाब दाखिल किया। इसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग को नसीहत दी है कि आयोग आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करते वक्त निष्पक्ष रहे और कॉन्ग्रेस के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाए। राहुल गाँधी का कहना है कि उन्होंने आदिवासियों के बारे में जो बयान दिया था, उसमें उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है।

दरअसल, राहुल गाँधी ने 23 अप्रैल को मध्यप्रदेश के शहडोल में कहा था कि मोदी सरकार एक ऐसा कानून लेकर आई है, जिसके तहत आदिवासियों को गोली मारी जा सकती है। वो आपकी जमीन और जंगल पर कब्जा कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। चुनाव आयोग के कारण बताओ नोटिस के जवाब में राहुल ने कहा कि उन्होंने भारतीय वन कानून में प्रस्तावित संशोधन को अपने एक राजनीतिक भाषण में संक्षिप्त कर सरल ढंग से समझाने का प्रयास किया था। इसके पीछे जनता को गुमराह करने या झूठ फैलाने की कोई मंशा नहीं थी।

राहुल ने कहा कि भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकने के लिए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, क्योंकि वह एक राजनीतिक पार्टी के प्रमुख होने के साथ ही उसके स्टार प्रचारक भी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना मोदी सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और कार्यों तक ही सीमित थी। भाषणों में मोदी सरकार के कामकाज की आलोचना करना आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। शहडोल में भाजपा की आदिवासी विरोधी नीतियों को लेकर दिया गया था। इसलिए शिकायत को रद्द किया जाना चाहिए।

राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग से कहा कि आयोग पार्टियों के खिलाफ की गई शिकायतों पर कार्रवाई करते वक्त निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण, गैर-मनमाना और संतुलित दृष्टिकोण अपनाए। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा नेताओं द्वारा दिये गए कई बयानों का हवाला दिया, जिनमें कई नेताओं ने ‘आपत्तिनजक’ शब्दों का इस्तेमाल किया था।

‘न्यूट्रल’ मीडिया ने पित्रोदा से कहा: ‘चुप भी करो यार, भाजपा को फायदा हो रहा है’

सिख दंगों पर सैम पित्रौदा का ‘हुआ तो हुआ…’ वाला विवादित बयान आने के बाद उनकी चारों ओर से आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी तक ने दिल्ली में चुनाव करीब होने के कारण सैम पित्रोदा से माफ़ी माँगने को कहा है, ताकि इसका खामियाज़ा पार्टी को चुनाव के आगामी चरणों में न भुगतना पड़े।

जिस प्रकार राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के अन्य नेता पित्रोदा के बयान की खुलकर आलोचना कर रहे हैं, वैसे ही इस सूची में कई जाने-माने ‘न्यूट्रल पत्रकारों’ ने भी अपना नाम शामिल कर लिया है जिन्होंने चुनावी माहौल देखते हुए अपने ट्वीट के जरिए सैम पित्रोदा के बयान के विरोध में लेकिन कॉन्ग्रेस के समर्थन में आवाज़ें उठाई हैं।

आजतक के राहुल कंवल ने सैम पित्रौदा के बयान के बाद ट्वीट किया कि कॉन्ग्रेस में किसी व्यक्ति को सैम पित्रौदा से कहने की जरूरत है कि वो टीवी कैमरा से 23 मई तक दूर रहें। राहुल के मुताबिक हर बार सैम जब भी बोलते हैं तो वो कॉन्ग्रेस की विरोधी पार्टियों (अर्थात भाजपा) को फायदा पहुँचा रहे होते हैं।

वहीं प्रसिद्ध पत्रकार सबा नकवी ने बड़ी इज़्ज़त के साथ सैम पित्रौदा के ट्वीट पर सवाल किया कि वह ऐसे समय में (चुनावी माहौल में) इंटरव्यू ही क्यों दे रहे हैं?

आदित्य मेनन नामक पत्रकार ने सैम के ‘गड़बड़ ट्रांस्लेशन’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि वो सार्वजनिक स्थलों पर बोलते ही क्यों हैं? आदित्य मेनन ने कहा कि ‘नो कमेंट’ जैसी भी कोई चीज होती है। क्या वो जानते हैं।

अभिसार शर्मा ने सैम पित्रौदा के इस बयान को आधार बनाकर ट्वीट किया है कि इससे सैम पित्रोदाजी को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली है।

वहीं शिवम विज नामक जर्नलिस्ट ने सलाह दी कि कॉन्ग्रेस इन चुनावों में ज्यादा सीटों से जीत सकती है अगर सैम पित्रोदा को मीडिया के सामने बोलने से रोक लिया जाए।

स्वाति चतुर्वेदी नामक ट्रोल पत्रकार ने सैम पित्रौदा को कॉन्ग्रेस पार्टी का नया मणिशंकर अय्यर बताया है। स्वाति के मुताबिक पित्रौदा के मूर्खतापूर्ण बयानों पर मोदी ने छक्का मारा है।

हरिंदर बावेजा ने ट्वीट पर कमेंट करते हुए कहा कि सैम पित्रौदा ने जिन (सिख) दंगों पर ‘हुआ तो हुआ’ वाली प्रतिक्रिया दी है, उसकी पीड़ा के साथ आज भी कई विधवा और अनाथ जी रहे हैं और न्याय के लिए लड़ रहे हैं। क्या कॉन्ग्रेस में कोई भी उन्हें चुप नहीं कर सकता है।

‘गवर्नर सरकार के चमचे होते हैं, सत्यपाल मलिक भी चमचा ही है’: संजय निरुपम के बोल

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा की गई टिप्पणी पर कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संजय निरुपम ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सत्यपाल मलिक को प्रधानमंत्री मोदी का चमचा तक कह दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जितने गवर्नर होते हैं वो सरकार के चमचे होते हैं। संजय ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हए कहा, “सत्यपाल मलिक भी चमचा ही है।” आगे उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी को बोफोर्स केस में अदालत से क्लिन चिट मिली थी और अरुण जेटली ने भी राजीव गाँधी को क्लीन चिट दी थी।

संजय ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा कि जब मोदी ने राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर 1’ कहा, तो उनकी इतनी आलोचना की गई कि अब वो दोबारा ऐसा बोलने की हिमाकत नहीं करेंगे। संजय ने कहा कि ऐसा लग रहा है सत्यपाल मलिक, पीएम मोदी की चापलूसी कर रहे हैं, चमचागिरी कर रहे हैं, ताकि उनकी कुर्सी बची रहे। राज्यपालों को अपनी गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।

गौरतलब है कि, गुरुवार (मई 9, 2019) को जम्‍मू कश्‍मीर के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने राजीव गाँधी पर लगे भ्रष्‍टाचार के आरोपों पर कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी शुरू में भ्रष्ट नहीं थे, लेकिन कुछ लोगों के प्रभाव में आकर वो बोफोर्स भ्रष्टाचार के मामले में शामिल हो गए थे। सत्यपाल मलिक ने कहा कि बोफोर्स भ्रष्टाचार मामले के मद्देनजर उन्होंने और पीडीपी संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य सभा की सदस्यता छोड़कर जन मोर्चा का गठन किया था।

‘मुझे डिप्टी PM बनाओगे तभी गठबंधन को समर्थन दूँगा’: TRS प्रमुख केसीआर की शर्त

तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) अध्यक्ष केसीआर राव ने विपक्ष से कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो वो ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कि वो न सिर्फ़ उस गठबंधन में शामिल होंगे बल्कि अपनी सक्रिय भूमिका भी निभाएँगे। लेकिन, इसके लिए उन्होंने गठबंधन के समक्ष एक शर्त भी रखी है जिसके पूरा न होने पर वो गठबंधन में नहीं रहेंगे।

ख़बर के अनुसार, केसीआर राव ने विपक्ष के समक्ष यह शर्त रखी है कि अगर वो उन्हें सरकार में उप-प्रधानमंत्री बनाएँगे तभी वो उनका समर्थन करेंगे। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट किया कि वो 21 मई को विपक्ष की पार्टी मीटिंग में तभी शामिल होंगे जब उन्हें इस बात का पूरा भरोसा दिलाया जाएगा कि गठबंधन सरकार में उन्हें उप प्रधानमंत्री का पद दिया जाए।

फ़िलहाल, गठबंधन में शामिल दलों की इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनकी इस बात को दलों तक पहुँचा दिया गया है। ख़बर यह भी है कि आंध्र प्रदेश के कॉन्ग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने चुनाव नतीजे आने से पहले किसी बात का कोई ख़ुलासा न करने का संकेत दिया है। विपक्ष का मानना है कि इन सभी मुद्दों पर नतीजे आने के बाद ही चर्चा होगी। हालाँकि पार्टी ने केसीआर प्रमुख से संपर्क बनाए रखा है।

ऐसा माना जा रहा है कि केसीआर बीजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे, और वो ख़ुद को राष्ट्रीय राजनीति में लाकर तेलंगाना की बागडोर अपने बेटे को सौंपना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ़ तेलुगूदेशम पार्टी (TDP) अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गुरूवार (9 मई) को चर्चा की।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्य ने बताया कि ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू ने महागठबंधन पर लंबी चर्चा की है जिसमें बुधवार को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से हुई मुलाक़ात के विषय पर भी बातचीत हुई। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि 21 मई को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक की तारीख आगे बढ़ा दी जाए यानी यह बैठक 23 मई के बाद के लिए भी निर्धारित की जा सकती है।

भाजपा प्रत्याशी नीलांजन रॉय पर लगा यौन शोषण का आरोप, गिरफ्तारी का आदेश

पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर सीट से भाजपा उम्मीदवार नीलांजन रॉय पर 17 साल की नाबालिग का यौन शोषण करने का आरोप लगा है। पुलिस ने शुक्रवार (मई 10, 2019) को इस बात की जानकारी दी है। राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिकायत के बाद मामले का संज्ञान लिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि 24 घंटो के भीतर नियमों के अनुसार आरोपित के ख़िलाफ़ जरूरी कार्रवाई हो।

मीडिया खबरों के मुताबिक बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह पाक्सो एक्ट, 2012 के तहत आरोपित को तुरंत गिरफ्तार करे। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण पूरा हो चुका है और उसका बयान दर्ज कर लिया गया है। हालाँकि अभी तक आरोपित को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।  

नीलांजन रॉय पर दक्षिण 24 परगना में एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण का आरोप है। इसके मद्देनजर ही राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने रॉय के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई है।

बता दें डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार नीलांजन रॉय कॉन्ग्रेस के अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे हैं। गौरतलब है ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने पिछले लोकसभा चुनाव में यहाँ से जीत हासिल की थी।

‘PM मोदी हैं महिषासुर, ममता हैं पश्चिम बंगाल की दुर्गा’: चंद्रबाबू नायडू के बोल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने गुरूवार (मई 9, 2019) को पश्चिम बंगाल का दौरा किया। नायडू यहाँ पर तृणमूल के समर्थन में प्रचार करने के लिए पहुँचे थे। यहाँ पर चंद्रबाबू नायडू ने एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तुलना महिषासुर से की और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना देवी दुर्गा से की। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में बैठे महिषासुर को बंगाल की दुर्गा हरा सकती हैं। इसके साथ ही नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी को पिछले 72 सालों का सबसे असफल प्रधानमंत्री बताया।

नायडू ने पश्चिम बंगाल के लालगढ़ में तृणमूल प्रत्याशी बीरबाहा सोरेन के समर्थन में आयोजित सभा में कहा कि उन्हें बंगाल में आकर बहुत खुशी मिलती है। उन्होंने बंगाल की तमाम विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल ने देश को एक से बढ़कर एक रत्न दिए हैं, जिन्होंने देश की संस्कृति और सभ्यता के विकास में अहम भूमिका निभाई है। ममता बनर्जी बंगाल की उस महान इतिहास की उत्तराधिकारी हैं।

इस दौरान चंद्रबाबू नायडू ने बंगाल की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को सबक सिखाने का मौका है। उन्होंने जनता से अपील की कि बंगाल की दुर्गा को दिल्ली के महिषासुर को हराने और देश में शांति व समृद्धि फिर से स्थापित करने का मौका दें। आज भाजपा के समर्थन का मतलब सांप्रदायिकता का समर्थन करना है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया टाउनशिप में आयोजित जनसभा में चंद्रबाबू नायडू ने ममता बनर्जी को बंगाल की शेरनी का तमगा दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल की शेरनी ममता बनर्जी जल्द ही देश की शेरनी बनेगी।

भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मीनारायण ने नायडू के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि राज्य की जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती। लक्ष्मीनारायण का कहना है कि पीएम मोदी के खिलाफ जितना नकारात्मक प्रचार नायडू ने किया है, उतना किसी ने नहीं किया है और वो चुनाव हार जाने के डर की वजह से इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा ने नायडू को मानसिक दिवालियापन का शिकार भी बताया।

बता दें कि, तेलगु देशम पार्टी ने गुरुवार को ट्वीट किया था कि नायडू ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर आलोचना की है। इस बार पश्चिम बंगाल की जमीन से उन्होंने मोदी की आलोचना की है। उन्होंने नरेंद्र मोदी को महिषासुर और ममता बनर्जी को बंगाल की दुर्गा कहा है। पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा कि उन्होंने (नायडू) कहा है कि बंगाल दुर्गा को देश में शांति और समृद्धि लाने के लिए दिल्ली में महिषासुर (मोदी) को हराना होगा।

‘अच्छे दिनों’ की आस में मंदिर पहुँचे रॉबर्ट वाड्रा, भीड़ ने लगाए ‘मोदी-मोदी’ के नारे

शुक्रवार (मई 10, 2019 ) को कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा दक्षिण मुंबई स्थित मुंबादेवी मंदिर दर्शन करने पहुँचे। यहाँ से निकलते वक्त उन्हें मोदी समर्थकों का सामना करना पड़ा। उनको देखकर लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए। वाड्रा ने इस दौरान पत्रकारों से भी बातचीत की लेकिन इस बीच राजनैतिक मुद्दों को दूर रखा। उन्होंने राजनीति से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार मंदिर में वाड्रा दोपहर के करीब 12 बजे दर्शन के लिए पहुँचे थे। उनके पहुँचते ही उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। इस दौरान उन्होंने मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा की और मंदिर के गर्भ गृह की परिक्रमा की। दर्शन के उपरांत पत्रकारों ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री और उनके ससुर राजीव गाँधी पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा। इस पर वाड्रा जवाब देते हुए कहा कि मंदिर में राजनीतिक बातें नहीं की जानी चाहिए, वो मंदिर में मुंबा देवी दर्शन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, “यहाँ की जो महत्ता है, वह महसूस की जा सकती है। दर्शन करके बहुत अच्छा लग रहा है। अच्छा समय आने वाला है। जल्द ही पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आऊँगा।”

बता दें मुंबा देवी को मुंबई की इष्टदेवी माना जाता है। इन्हीं के नाम पर शहर का नाम भी पड़ा है। खबरों के मुताबिक वाड्रा के मंदिर पहुँचते ही वहाँ मीडियाकर्मियों को देख काफ़ी भीड़ जमी हो गई थी। वाड्रा जैसे ही बाहर निकले तो लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस मौक़े पर पहुँची और वाड्रा के जाने के लिए रास्ता खाली कराया। जब लोगों से नारेबाजी की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें एक बार फिर से देश में मोदी सरकार ही चाहिए इसलिए उन्होंने नारेबाजी की। कुछ मीडिया खबरें के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा को मंदिर में VIP दर्शन कराए जाने से लोगों को दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा।

भीड़ से यह भी पूछा गया कि क्या वे भाजपा के कार्यकर्ता हैं तो भीड़ ने बताया कि वे सभी भाजपा के समर्थक हैं उन लोगों ने खुद नारेबाजी की, उनसे किसी ने भी नारे लगाने को नहीं कहा था। इस घटना पर कॉन्ग्रेस के एक नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के समय राजनीतिक विरोध समझ आता है लेकिन अगर कोई मंदिर में दर्शन करने जाता है तो वहाँ पर इस तरह की नारेबाजी अशोभीय हैं।

भाजपा वाले मणिशंकर अय्यर को ढूँढ रहे थे, सच्चाई बाहर आई तो हँसते-हँसते पागल हो गए

लोकसभा चुनाव जारी हैं और ऐसे में सभी राजनेता और मतदाताओं के बीच तमाम चिंता के बीच एक सबसे बड़ी चिंता का कारण मणिशंकर अय्यर बने रहे। सवाल ये था कि भाजपा के स्टार प्रचारक आखिर मणिशंक्कर अय्यर हैं कहाँ? क्या राहुल गाँधी ही निभाएँगे कॉन्ग्रेस को हारने की जिम्मेदारी? लेकिन आज एक बड़ा  खुलासा देखने को मिला है, जिसके बाद भाजपा मुख्यालय में ख़ुशी की लहार देखने को मिली है।

गौरतलब है कि हर दूसरे दिन अनाप-शनाप बयान देकर कॉन्ग्रेस पार्टी की फिजा में चार चाँद लगाने वाले मणिशंकर अय्यर इस लोकसभा चुनाव के दौरान कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ मनचले युवा ये निंदनीय दावा करते हुए भी पाए गए कि मणिशंकर अय्यर बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारे गए थे, जो कि एकदम निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण उम्मीद थी और इसकी जितनी ज्यादा निंदा की जाए कम ही है।

मणिशंकर अय्यर की गैरमौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया था: सूत्र

मणिशंक्कर अय्यर की गैरमौजूदगी के कारण भाजपा समेत कॉन्ग्रेस के तमाम विरोधी दलों में यह चिंता छा गई थी कि ऐसे में, जबकि मणिशंक्कर अय्यर कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में गायब है, तो अब कॉन्ग्रेस में रहते हुए ही कॉन्ग्रेस की कब्र आखिर कौन खोदेगा? हालाँकि, भाजपा के प्रमुख राष्ट्रीय प्रचारक राहुल गाँधी अभी भी कॉन्ग्रेस में भाजपा स्लीपर सेल के रूप में अध्यक्ष पद पर कायम हैं।

लेकिन ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने Faking News नामक वेबसाइट की ख़बरों का फैक्ट चेक कर के जीवनयापन कर प्रासंगिक बने रहने वाले फैक्ट चेकर्स के एक सचल दस्ते की मदद से एक ऐसे व्यक्ति पर निगाह रखने का ठेका दिया, जो अचानक से नजर आकर आजकल कॉन्ग्रेस की कब्र खोदने के लिए दिन-रात मेहनत करता नजर आ रहा था।

संदेहास्पद लग रहे इस व्यक्ति ने कभी सिख दंगों को ‘हुआ तो हुआ’ बताया, तो कभी मिडल क्लास को स्वार्थी बताया और यह भी बयान देते हुए देखा गया कि मोबाइल और कम्प्यूटर राजीव गाँधी ही अपने कन्धों पर ढोकर भारत लाए थे। इस से पहले कि ये व्यक्ति कहता कि जिन देशों में राजीव गाँधी ने जन्म नहीं लिया, वो आज भी मोबाइल और कंप्यूटर की एक झलक के लिए जूझ रहे हैं, ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने उसे धर लिया और उसके कारनामों का पर्दाफाश कर डाला। इसके लिए हमने ट्विटर के एक मनचले नागरिक @Atheist_Krishna की भी मदद ली।

यह व्यक्ति ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल के रडार में अपनी हरकतों की वजह से ही आया है। हमारे सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया कि यह व्यक्ति सुबह से शाम तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच ही रहकर उन्हीं के साथ घूम रहा है, लेकिन काम भाजपा का ही कर रहा है और अपनी ऊल-जुलूल हरकतों के कारण रोजाना चर्चा में बना है। इसी वजह से इस सज्जन पर हमारे सूत्रों को संदेह हुआ कि कहीं यही सज्जन तो मणिशंकर अय्यर नहीं!

इसी बीच, अपने सर पर सफ़ेद बालों का कटोरा लेकर घूमने वाले इस सज्जन के बारे में एक यह भी भ्रामक अफवाह सोशल मीडिया पर देखने को मिली कि यह तो अल्बर्ट आइन्स्टाइन है। लेकिन एक सोशल मीडिया यूजर ने इस तथ्य का Fact Check करते हुए भंडाफोड़ कर के बताया, “नहीं, सर पर सफेद बालों का टोकरा लेकर घूमने वाला हर आदमी नहीं होता है आइन्स्टाइन।” साथ ही उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा, “अलास! दैट डजन्ट हैपन।”

मणिशंक्कर जैसे काम करने वाले इस सज्जन की जानकारी इकठ्ठा करने पर हमें मालूम हुआ कि ये सेम पित्रोदा नहीं बल्कि सेम पित्रोदा की शक्ल में घूम रहे मणिशंकर अय्यर ही हैं। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब समाज में घृणा और नफरत फैलाने वाले यह उम्मीद लगा रहे थे कि मणिशंकर अय्यर बालाकोट एयरस्ट्राइक में ‘मसूद अजहर’ के साथ ही ‘निकल लिए’ हैं।

लेकिन,  मणिशंकर अय्यर को सुरक्षित, स्वस्थ और कॉन्ग्रेस के बीच में देखकर भाजपा मुख्यालय में एक बार फिर ख़ुशी की लहर देखने को मिली है। मशहूर निष्पक्ष पत्थरकार सागरिका घोष ने बताया कि इसके बाद भाजपा कार्यालय में लोग एक दूसरे से ख़ुशी से बात कर रहे हैं, गले लगा रहे हैं, हवाओं में मोहब्बत के गीत घुल रहे हैं। हालाँकि, चिंता कि बात अब यह है कि जब ये व्यक्ति मणिशंक्कर अय्यर है, तो फिर भाजपा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस के वोट काटने के लिए सेम पित्रोदा को मतदाताओं के सामने क्यों नहीं ला रही है?

ममता बनर्जी का फोटोशॉप करने पर महिला को जेल

देश में डेमोक्रेसी यानि लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहरुआ बनीं ममता बनर्जी के राज में फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की आजादी) कितनी सुरक्षित है। इसकी शर्मनाक नजीर एक बार फिर देखने को मिल रही है। ममता बनर्जी का फोटोशॉप ‘कार्टून’ बनाने के ‘जुर्म’ में बंगाल भाजयुमो की महिला कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को उठा कर जेल में ठूँस दिया गया है। सोशल मीडिया पर इसके विरुद्ध भाजपा के युवा नेता तेजस्वी सूर्या समेत कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रियंका शर्मा हावड़ा में भाजयुमो की संयोजिका हैं।

प्रियंका चोपड़ा की तस्वीर पर चिपकाया ममता का चेहरा, ‘हिंसा’ की FIR  

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा पिछले दिनों हॉलीवुड के प्रतिष्ठित कार्यक्रम मेट गाला में बिखरे बालों वाले लुक लिए सामने आईं थीं। जिसको कई लोगों ने हास्यास्पद मानते हुए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। उसी पर प्रियंका शर्मा ने फोटोशॉप इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा ममता बनर्जी का चेहरा प्रियंका के चेहरे पर चिपका दिया।

देखने से साफ पता चलता है कि यह मात्र विनोद के लिए किया गया है। पर इतना सा हँसी-मजाक ममता बनर्जी को इतना चुभा कि प्रियंका शर्मा को गिरफ्तार कर हावड़ा की अदालत में पेश कर ही उन्होंने दम लिया। शिकायतकर्ता ने इसे ममता बनर्जी के लिए अपमानजनक होने के साथ-साथ ‘हिंसात्मक’ भी अपनी पुलिस शिकायत में बताया है।

ट्विटर पर कड़ी प्रतिक्रिया, लोगों ने लताड़ा

इस निर्णय की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की जा रही है। भाजपा के नेताओं से लेकर सामान्य लोगों तक सभी की ओर से इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अपने प्लैकार्ड से वामपंथी-छद्म-लिबरलों को आईना दिखाने और मिर्च सुँघाने वाले मधुर ने पोस्ट किया:

सोशल मीडिया पर्सनैलिटी ऋषि बागड़ी ने भी लिखा:

भाजपा से आधिकारिक तौर पर जुड़े कई लोगों ने भी इसपर आपत्ति दर्ज कराई। सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, TEDx स्पीकर और भाजपा के स्वयंसेवक विकास पांडे ने मीडिया के सन्नाटे को भी आड़े हाथों लिया। लोगों से इस फोटोशॉप तस्वीर को प्रोफाइल पिक्चर लगाने और #ISupportPriyankaSharma को ट्रेंड कराने की अपील की।

भाजपा के युवा नेता और बंगलुरु के लोकसभा प्रत्याशी तेजस्वी सूर्या ने इस मामले की तुलना कॉन्ग्रेस के श्रीवत्स द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोटोशॉप से हिटलर दिखाने और भाजपा के इसपर क़ानूनी कार्रवाई न करने से की। साथ ही श्रीवत्स को अब इस घटना का विरोध करने के लिए ललकारा।

पहले भी ममता लोगों को कार्टून के लिए जेल भेज चुकीं हैं  

यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी लोगों को कार्टून बनाने के लिए जेल भेज रहीं हैं। इससे पहले भी वह जादवपुर विश्विद्यालय के रसायनशास्त्र प्रोफ़ेसर अम्बिकेश महापात्रा को अपना कार्टून फॉरवर्ड करने के आरोप में जेल भेज चुकीं हैं। उस मामले में अदालत ने प्रोफ़ेसर साहब की गिरफ़्तारी गलत बताते हुए उन्हें ₹75,000 के मुआवजे का आदेश ममता सरकार को दिया था। इसके अलावा 2017 में इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून पोस्ट करने के जुर्म में सौरव सरकार नामक किशोर को भी ममता ने गिरफ्तार करा दिया था।

मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण, राजनीतिकरण: दांडी यात्रा के बाद विन्ची-गाँधी यात्रा के 3 प्रमुख पड़ाव

सेना के राजनीतिकरण की बहस थमी नहीं थी कि गोदी मीडिया के बीच सेना के ससुरालीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा होने लगी है। एक बात बेहद चौंकाने वाली है कि कि अपने कन्धों पर ढोकर इस देश में कम्प्यूटर लाने के बाद देश में सेना के ससुरालीकरण जैसे कारनामे भी राजीव गाँधी ही लेकर आए थे, वो भी आजादी के बाद पहली बार, लेकिन गोदी मीडिया ने यह तथ्य किस वजह से छुपाकर रखा? जिस तरह से महात्मा गाँधी की दांडी यात्रा ऐतिहासिक थी, उसी तरह से कॉन्ग्रेस के इन तीन बड़े नामों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किए गए कारनामे भी किसी यात्रा से कम नहीं हैं।

वर्ष 2019 की शुरुआत में ही फरवरी माह में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद से देश की दिशा और दशा में अचानक से एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। मीडिया से लेकर राजनेताओं की स्वर और तथ्य, सुबह होने से लेकर शाम होने के बीच 10 बार बदलते देखे जाने लगे। गोदी मीडिया के कुछ नेहरूवादी सिपाहियों ने जब आतंकवाद के कारण पर बात करने से बेहतर बलिदानी शहीदों को दिए जाने वाले ‘दर्जे’ की चर्चा छेड़ डाली थी। मोदी सरकार पर प्राइम टाइम के दौरान ‘कहाँ गया 56 इंच?’ जैसे शब्दों से उकसाने वाले सवाल पूछे जाते रहे, लेकिन जब पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की बात सामने आई, तब यही गोदी मीडिया ‘आपको ऐसा करना शोभा नहीं देता है’ वाले मोड में आ गई। इसके रातोंरात एक जुमला गोदी मीडिया के शब्दकार ने रचा, वो था ‘सेना का राजनीतिकरण।’

जो नेहरूवादी सभ्यता के विचारक आज तक जवाहरलाल नेहरू के नाम लिए बिना अन्न तक ग्रहण नहीं करते, वो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते देखे जाने लगे हैं कि एयर स्ट्राइक का श्रेय नरेंद्र मोदी को नहीं लेना चाहिए या उन्हें इसका जिक्र तक नहीं करना चाहिए। ये वही विचारक हैं, जो नोटबंदी के दौरान बैंक कर्मचारियों द्वारा की गई अव्यवस्था, नीतियों के गलत इस्तेमाल से लेकर गाँव के शौचालयों में पानी ना होने जैसी अव्यवस्था तक के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते हैं।

लेकिन सेना के राजनीतिकरण को लेकर जब नरेंद्र मोदी ने इन नेहरूवादी विचारकों को चिंतित देखा, तो उन्होंने उनकी चिंता को जायज ठहराते हुए उनके रिसर्च कार्य के लिए और भी ‘कच्चा माल’ उपलब्ध करवाया, जिससे कि ये विचारक अपनी रिसर्च और थीसिस को आगे बढ़ाकर गौरवान्वित महसूस कर सकें। अचानक नरेंद्र मोदी ने राजीव गाँधी द्वारा ससुराल के साथ सैर की घटना याद दिलाकर बाजारों से ‘बरनोल’ की सप्लाई को तेज कर दिया।

मोदी तो बस रास्ते से जा रहे थे, भेलपूरी खा रहे थे

नरेंद्र मोदी तो बस रस्ते से जा रहे थे, भेलपूरी खा रहे थे। लेकिन, जब उन्हें निष्पक्ष मीडिया ने सेना और संसाधनों के राजनीतिकरण की याद दिलाई, तो उन्होंने सेना के ससुरालीकरण का जिक्र छेड़कर हाल ही के कुछ वर्षों में निष्पक्ष बनी गोदी मीडिया को याद दिलाया कि साल 1987-88 में वो लोग इतने निष्पक्ष नहीं थे, ना ही यह जिम्मेदार मीडिया ‘राजनीतिकरण’ जैसे शब्दों से अवगत थी।

मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण और राजनीतिकरण: महज 3 शब्दों में गाँधी परिवार सिमट चुका है

1- मिस्ट्रेसीकरण

कुछ दिन पहले ही सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बताया कि किस तरह से उनके ससुर, जेडी कपाड़िया, जो कि 1950 के दशक में रक्षा सचिव थे, का तबादला सिर्फ इस वजह से करवा दिया गया क्योंकि उन्होंने देश के बाँधों (Dam) को ही तीर्थ बताने वाले जवाहरलाल नेहरू के ‘यूरोपीय महिला मित्र’ (European mistress) को एयरफोर्स के विमान का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। स्वामी ने कहा कि इस घटना के बाद उनके ससुर का तबादला कर दिया गया था और अगले रक्षा सचिव ने ऐसा करने की अनुमति दे दी थी।

एक दूसरे प्रसंग में, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सबसे पहले ऐसी शाही परंपरा की शुरुआत करते हुए INS देल्ही (INS Delhi) का इस्तेमाल अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए किया था। उसकी अब जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनसे भी यह बात साफ पता चलती है कि नेहरू ने उस आईएनएस देल्ही का इस्तेमाल किया था, जो 1933 में नौसेना के लिए बनाया गया एक हल्का क्रूजर था। इसे ब्रिटिश राज में एचएमएस अकिलिस के नाम से जाना जाता था। 1950 में अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए इसी वॉरशिप का इस्तेमाल नेहरू ने किया था।

उसके बाद, जब 59 वर्ष की आयु में एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में और साथ ही उनकी याद में पुष्पांजलि देने के लिए भेजा। लेडी माउंटबेटन की बेटी लेडी पामेला हिक्स का कहना है, “1960 में उनकी मृत्यु पर, एडविना को उनकी इच्छा के अनुसार समुद्र में दफनाया गया था। जब उनका शोक संतप्त परिवार घटनास्थल पर माल्यार्पण के बाद हट गया, तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और पंडितजी के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर गया।”

2 – ससुरालीकरण

नेहरूवादी सभ्यता को जीवित रखते हुए लक्षद्वीप पर हॉलिडे मनाने के लिए इंदिरा गाँधी के बेटे और जवाहरलाल नेहरू के नाती यानी, मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा के ससुर, राजीव गाँधी के साथ इटली से उनके ससुराल वाले भी आए थे। इनके अलावा, मेहमानों की सूची में राजीव गाँधी के साथ, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका और उनके चार दोस्त, सोनिया गाँधी की माँ, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही तब के सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और उनके बच्चे, अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी और पूर्व मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी भी मौजूद थे। छुट्टी का स्थान बंगारम था, जो लक्षद्वीप द्वीपसमूह में एक छोटा निर्जन द्वीप है।

द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 24 जनवरी 1988 को एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें बताया गया कि जब राजीव गाँधी अपने परिजन, दोस्त और विदेशी मेहमानों के साथ जब छुट्टियाँ बीता रहे थे, उस दौरान आईएनएस विराट में उनके निजी सचिव और तत्कालीन सरकार में प्रभावी शख्सियत वी जॉर्ज भी मौजूद थे। वी जॉर्ज के अलावा मणिशंकर अय्यर, सरला ग्रेवाल, एम जैकब और अन्य लोग शामिल थे।

लेकिन उस समय ‘1 सवाल पूछने के शौक़ीन’ नेहरुवियन सभ्यता वाले निष्पक्ष पत्रकारों को क्या मालूम था कि उन्हें भविष्य में इन सभी बातों के लिए लज्जित होना पड़ेगा। इस तरह, यह सेना और देश के संसाधनों के ससुरालीकरण की दूसरी ‘शाही’ घटना थी। यह भी जानना आवश्यक है कि ससुराल के साथ यह शाही हॉलिडे जिस ‘कार’ द्वारा आयोजित किया गया, वह आईएनएस विराट उस समय भारतीय नौसेना का एकमात्र वाहक युद्धपोत हुआ करता था। इसे राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी द्वारा सारा लाव-लश्कर सिर्फ ससुरालीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया क्योंकि यह आईएनएस विराट तो कई नेहरूवादियों के अनुसार, देश के पहले परिवार द्वारा इस्तेमाल किया गया था। कायदे से जवाहरलाल नेहरू ने इस चलन की शुरुआत की थी। राजीव ने तो इस ‘पुश्तैनी’ परंपरा को बस आगे बढ़ाने का काम किया था।

3 – राजनीतिकरण

मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण के बाद राजनीतिकरण इस तीसरी पीढ़ी का विशेषण है। शाही परिवार में पैदा होने के बावजूद भी नौसेना के संसाधनों का प्रयोग ना कर पाने का मलाल कहीं न कहीं राहुल गाँधी को जरूर होगा। राहुल गाँधी इस मामले में सबसे दुर्भाग्यशाली साबित हुए हैं। पहला तो इस वजह से कि वो सेना का ससुरालीकरण चाह कर भी फिलहाल नहीं कर सकते, दूसरा ये कि अब मीडिया ‘निष्पक्ष’ हो चुका है। यह मीडिया इतना निष्पक्ष होता जा रहा है कि जिन पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता की जमीन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्बन्ध ‘2002’ से जोड़-जोड़कर बनाई थी, वही आजकल ये कहते सुने जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी का इसमें कोई योगदान नहीं था। कुछ निष्पक्ष पत्रकार बस ‘1 सवाल’ पूछने के चक्कर में इतने बदहवास हालात में यहाँ-वहाँ दौड़ रहे हैं कि वो आज महागठबंधन के फोटोग्राफर बनकर निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं।

हालाँकि, ‘चौकीदार चोर है’ जैसे जुमलों को चुनावी गर्मी में गलती से निकले शब्द बताकर हर दिन माफ़ी माँगने वाले कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी फिलहाल नौसेना और सेना के संसाधनों का तो इस्तेमाल अपने पूर्वजों की तरह नहीं कर पा रहा है। लेकिन, इसके पास राजनीतिकरण जैसा शब्द अभी भी मौजूद था। सेना के राजनीतिकरण जैसे जुमलों को भुनाने के चक्कर में कॉन्ग्रेस के इस पारम्परिक अध्यक्ष राहुल गाँधी ने नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक की फजीहत करवा डाली है। जो मीडिया और क्रांतिजीव 5 साल तक मोदी की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा करते रहे, उन्हें नेहरू से लेकर राजीव गाँधी के भ्रमणों से रूबरू होना चाहिए, ताकि वो उसकी समीक्षा कर के बता सकें कि मिस्ट्रेसीकरण और ससुरालीकरण उनकी किसी विदेश नीति का हिस्सा थे?

कॉन्ग्रेस की प्रत्येक इच्छा को नरेंद्र मोदी स्वयं साकार करने पर तुले हुए हैं। कॉन्ग्रेस हर सम्भव प्रयास करती रही कि ‘भूतों’ के नाम पर 2019 का लोकसभा चुनाव जीत सके। इसके लिए कभी किसी की नाक बीच में लाइ गई, कभी साड़ी का इस्तेमाल किया गया, तो कभी किसी की नीतियों का हवाला दिया जाता रहा। मोदी ने इन सभी घटनाओं को एक ही बार में लपेटकर एक नई कहावत रच ली है, ‘सौ नामदार की, एक चौकीदार की’।