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मसूद अजहर वैश्विक आतंकवादी घोषित: भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, पाक-चीन की फजीहत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया है। कूटनीतिक स्तर पर यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है। जबकि पाकिस्तान और चीन के लिए शर्म की बात। UNSC के इस एक फैसले से यह साबित (जो पहले से तय था लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय मुहर लग गई) हो गया कि पाकिस्तान आतंकियों और आतंकी गतिविधियों को पनाह देने वाला देश है। चीन की फजीहत इसलिए क्योंकि अपने साथी देश पाकिस्तान को वह वीटो के नाम पर कई सालों से बचाता आ रहा था।

ऑपइंडिया ने कल (30 अप्रैल, 2019) ही यह खबर प्रकाशित की थी कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारतीय कूटनीति के कारण मसूद अजहर को 1 मई को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा सकता है।

14 फरवरी को पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इससे पहले 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का भी जिम्मेदार भी यही आतंकी संगठन है। पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, फ्रांस और यूके के नेतृत्व में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की माँग की गई थी, लेकिन चीन ने उसका बचाव किया था। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्राँस द्वारा 13 मार्च को रखे गए प्रस्ताव पर चीन के अलावा सुरक्षा परिषद के सभी अन्य सदस्यों ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। आज चीन की मंजूरी भी मिल ही गई।

‘AAP’, वादे और धोखा: केजरीवाल के शिक्षा और स्वास्थ्य के दावों का कड़वा सच

श्रीमान अरविंद केजरीवाल बदलाव की राजनीति करने आए थे। वे व्यवस्था में परिवर्तन की बात करते थे और कहते थे कि सारे नेता चोर हैं और एकमात्र उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ ही दूध की धुली है। अरविंद केजरीवाल ने 2015 के पार्टी मैनिफेस्टो में अनेक ऐसे वादे किए थे जिनसे दिल्ली की सूरत बदल सकती थी। यदि उन वादों का आधा हिस्सा भी पूरा किया जाता तो भले पूरी दिल्ली की सूरत नहीं बदलती कम से कम दिल्ली की जनता के जीवन स्तर में बहुत हद तक सुधार हो सकता था। लेकिन केजरीवाल को मैनिफेस्टो में किए गए वादे पूरे करने ही नहीं थे, उन्हें तो केवल राजनीति चमकानी थी।

केजरीवाल द्वारा किए गए अनेक वादों में यह भी था कि आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देगी और इन क्षेत्रों में सुधार करेगी। आइये देखते हैं केजरीवाल सरकार ने बीते पाँच सालों में इन दो क्षेत्रों में क्या किया और कितने वादे पूरे किए।  

वादा #1: 500 नए सरकारी स्कूल

आम आदमी पार्टी ने 2015 के मैनिफेस्टो में वादा किया था कि 500 नए सरकारी स्कूल खोले जाएँगे। लेकिन PPRC की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक केवल 26 स्कूल ही खोले गए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स में 2017 में छपी रिपोर्ट के अनुसार दो सालों में केवल 17 स्कूल ही खोले गए थे। आम आदमी पार्टी सरकार यह दावा करती है कि उन्होंने 8000 ‘क्लासरूम’ खोले, और एक स्कूल में 80 क्लासरूम के हिसाब से 100 नए स्कूल खुले। यह दावा अपने आप में खोखला है क्योंकि क्लासरूम की संख्या तो पहले से बने स्कूलों में भी बढ़ाई जा सकती है। 2016 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार के स्कूलों की दीवारों पर दरारें आ गई थीं। आज उनकी क्या हालत है पता नहीं।

वादा #2: हायर एजुकेशन गारंटी स्कीम

अरविंद केजरीवाल ने अपने चुनावी वादे में यह कहा था कि दिल्ली के किसी भी स्कूल से कक्षा 12 पास किए हुए बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बिना किसी कोलैटरल के 10 लाख रुपये तक का लोन दिया सकेगा। लेकिन बीते चार वर्षों में इस स्कीम के प्रति जनता ने कोई ख़ास रुचि नहीं दिखाई। PPRC रिपोर्ट के अनुसार चार सालों में दिल्ली के स्कूलों से पास हुए केवल 0.13% छात्रों को ही लोन दिया गया। यह भी चिंता का विषय है कि जून 2018 तक केवल 678 छात्रों ने ही इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए आवेदन किया। क्या केजरीवाल सरकार ने इसके कारण जानने की कोशिश की? क्या इस स्कीम का प्रचार उस स्तर पर किया गया कि छात्रों को पता चल सके कि ऐसी कोई स्कीम भी है? जनता को योजना का लाभ देने की घोषणा करने मात्र से ही जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। उस योजना को जनता तक पहुँचाना भी सरकार का दायित्व होता है।    

वादा #3: 20 नए डिग्री कॉलेज

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली शहर के बाहरी क्षेत्रों में 20 नए डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका। अब दिल्ली सरकार अंबेदकर यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त पहले से मौजूद कॉलेजों में सीटें बढ़ाने पर विचार कर रही है। हिंदुस्तान टाइम्स की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार में मंत्री मनीष सिसौदिया कहते थे कि नए कॉलेज नहीं खुले तो क्या हुआ सीटें बढ़ाने पर भी छात्रों की संख्या तो बढ़ ही जाएगी क्योंकि आखिरकार छात्रों को डिग्री ही चाहिए होती है। अर्थात सिसौदिया को नए कॉलेज खुलने और सीटें बढ़ाने में अंतर समझ में ही नहीं आता। मौजूदा कॉलेज में सीटें बढ़ाने से उस कॉलेज के इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त भार पड़ता है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में कमी आती है लेकिन केजरीवाल को इससे कोई मतलब नहीं, उनको केवल डिग्री बाँटने से मतलब है।

वादा #4: प्राइवेट स्कूलों की फीस कम की जाएगी

केजरीवाल सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस कम करने के लिए तीन साल तक कोई ठोस नियमावली नहीं बनाई। अप्रैल 2018 में एक सर्कुलर के द्वारा यह निर्देश जरूर दिया गया कि सरकारी भूमि पर बने प्राइवेट स्कूल मनमाना ढंग से ट्यूशन फीस नहीं बढ़ाएँगे। लेकिन प्रश्न उठता है कि क्या दिल्ली के सभी स्कूल सरकारी भूमि पर बने हैं? जवाब है नहीं। तो उन स्कूलों की आसमान छूती फीस का क्या जो निजी भूमि पर बने हैं। कोर्ट के बाहर अभिभावकों की लंबी लाइन लगी है जो न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने अपने स्तर पर स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

वादा #5: स्कूल एडमिशन में पारदर्शिता

आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि दिल्ली के स्कूलों में नर्सरी और केजी के एडमिशन में पारदर्शिता लाने के लिए एक केंद्रीकृत सिस्टम होगा। लेकिन आज तक ऐसा कोई पोर्टल या सिस्टम नहीं बन पाया है।  

वादा #6: सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारा जाएगा ताकि वे प्राइवेट स्कूल जैसी शिक्षा दे सकें

सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के केजरीवाल के दावों की सच्चाई यह है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कुल 64,000 पद स्वीकृत हैं जिनमें से केवल 36,000 शिक्षक ही स्थाई हैं। अस्थाई रूप से अतिथि शिक्षक के रूप में 22,000 शिक्षक काम करते हैं और 6000 पद रिक्त हैं। मनीष सिसौदिया ने 2017 में कहा था कि जब तक शिक्षकों की नियुक्ति स्थाई नहीं हो जाती तब तक उन्होंने शिक्षकों का वेतन बढ़ा दिया है। मनीष सिसौदिया कहते हैं कि वे रातोंरात शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकते। जब दिल्ली सरकार सरकारी स्कूलों में नए शिक्षक नहीं रख सकती और पुराने शिक्षकों की नियुक्ति स्थाई नहीं कर सकती तो सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाएँ कहाँ से देगी?

चुनाव पूर्व अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि गेस्ट शिक्षकों को स्थाई किया जाएगा और रिक्त पड़े सभी पदों को भरा जाएगा। स्थिति यह है कि अभी भी हज़ारों पद रिक्त पड़े हैं और जिन पदों पर बहाली भी की गई है, उसमें भी हज़ारों अतिथि शिक्षक शामिल हैं। केजरीवाल यह दावा करते हैं कि उन्होंने शिक्षा व्यवथा में सुधार के लिए ज़रूरी आधारभूत संरचना का विकास किया है, इंफ़्रास्ट्रक्चर मज़बूत किया है लेकिन सवाल यह है कि शिक्षकों की बहाली के बिना ये सब अधूरा है। भवन और कक्षा भले रहें लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक ही न रहें तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे आएगा?

यही नहीं हालत यह है कि टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 9वीं से 12वीं तक के 66% छात्र जो 2017 में अनुत्तीर्ण रह गए थे, अब औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो गए हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 1,55,436 अनुत्तीर्ण छात्रों में से 52,582 छात्रों को ही फिर से कक्षा में प्रवेश दिया गया। दिल्ली के कई स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के माता-पिता से बातचीत करने पर पता चलता है कि 11वीं में स्ट्रीम के चयन को लेकर एक अनौपचारिक प्रचलन आम हो चुका है जिसमें कम अंक प्राप्त छात्रों को आगे की कक्षा में विज्ञान या गणित लेने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया गया। सरकारी स्कूलों में अधिकतर विद्यार्थी गणित या विज्ञान में ही अनुत्तीर्ण होते हैं, अतः अनौपचारिक रूप से उनके चयन पर प्रतिबंध लगाकर सरकार उनके करियर के साथ खेल रही है ताकि उत्तीर्ण होने के प्रतिशत को ज्यादा दिखाया जा सके। थिंक टैंक PPRC के अनुसार 1029 स्कूलों में से 279 स्कूलों में ही विज्ञान और गणित की पढ़ाई हो रही है।

वादा #7: हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा

केजरीवाल ने चुनाव लड़ने से पहले घोषणापत्र में कहा था कि वे 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाएँगे और दिल्ली के अस्पतालों में 30,000 अतिरिक्त बेड मुहैया कराए जाएँगे जिसमें से 4000 मैटरनिटी वार्ड में होंगे। केजरीवाल ने प्रति 1000 लोगों पर 5 बेड देने का वादा किया था। लेकिन हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने 1000 मोहल्ला क्लिनिक खोलने का वादा किया था लेकिन 2018 तक केवल 160 मोहल्ला क्लिनिक ही खुल पाए थे। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अब तक 9,098 बेड की व्यवस्था ही हो पाई है।

दावा #8: अच्छी दवाइयाँ कम कीमत पर

आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि सरकार बनते ही वे सस्ती दवाइयाँ कम कीमत पर उपलब्ध कराएगी। लेकिन इसपर कुछ नहीं किया गया। केजरीवाल सरकार का एक लाख शौचालय बनवाने का दावा भी झूठा निकला।

अब हिंदी में भी काम करेगा पटना हाईकोर्ट, ऐसा करने वाला देश का पाँचवाँ उच्च न्यायालय

राजभाषा हिंदी को पटना उच्च न्यायालय में आखिरकार प्रवेश मिल ही गया है। अब पटना हाईकोर्ट में सुनवाई अंग्रेजी के अलावा हिंदी में दायर याचिकाओं पर भी हो सकेगी। यह निर्णय वकील इन्द्रदेव प्रसाद की याचिका की सुनवाई के बाद लिया गया। इस याचिका में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी के प्रचार और विकास की संवैधानिक हिदायत का हवाला दिया था।

अहम है न्यायिक उपयोग में हिंदी

मंगलवार को दिए गए इस फैसले में तीन न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पटना हाईकोर्ट के जज अब हिंदी में दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर सकेंगे। मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही के अलावा आशुतोष कुमार और राजीव रंजन प्रसाद इस पीठ के अन्य सदस्य हैं। याचिका में पटना हाइकोर्ट के वकील इंद्रदेव प्रसाद ने संविधान के अनुच्छेद 351 को उद्धृत करते हुए यह इंगित किया कि हिंदी का प्रचार और विकास तभी होगा जब हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर करने में हिंदी का प्रयोग लागू किया जाए। सुनवाई में अदालत ने यह भी कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश हिंदी भाषी क्षेत्र हैं और अगर यहाँ भी हिंदी के साथ भेदभाव हुआ तो यह अन्याय होगा।

सचिवालय की अधिसूचना से हुआ था भ्रम

प्रसाद ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार के मंत्रिमंडल (राजभाषा) सचिवालय ने 9 मई, 1972 को एक जारी अधिसूचना में एक ओर जहाँ आपराधिक और फौजदारी मामलों में हाईकोर्ट में हिंदी के प्रयोग की बात कही, वहीं दूसरी ओर संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत इसके विरोधाभास में हाईकोर्ट के मामलों को अंग्रेजी में दायर करने की बात की गई है।

पूर्ण पीठ ने राज्य सरकार को 4 हफ्ते के भीतर अधिसूचना को संशोधित करने का आदेश दिया था। साथ में यह भी जोड़ा था कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो अधिसूचना रद्द भी हो सकती है।

ऐसा करने वाला पाँचवाँ हाईकोर्ट

इस आदेश के साथ ही पटना हाईकोर्ट हिंदी को अनुमति देने वाला पाँचवाँ उच्च न्यायालय बन गया है। इससे पहले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, इलाहाबाद और राजस्थान के हाइकोर्ट भी हिंदी के न्यायिक कार्यों में प्रयोग की अनुमति दे चुके हैं।

तो भारत में हड़प्पा के सामानांतर भी थी कोई सभ्यता.. यहाँ से खुदाई में मिली चीजें करती हैं इशारा

कई बार यह सवाल पूछा जाता है कि क्या हड़प्पा सभ्यता के सामानांतर या उससे पहले भी ऐसी कोई सभ्यता थी जिनसे हम आज परिचित नहीं हैं या जिनके बारे में हमें ज्यादा कुछ नहीं पता। उत्तर प्रदेश स्थित बागपत के सनौली में खुदाई से मिली कुछ चीजें इस ओर इशारा करती हैं। आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा क्षेत्र में की जा रही खुदाई में मिली चीजें 4000 वर्ष से भी अधिक पुरानी बताई जा रही है।

इसमें जो अहम चीजें मिली हैं। ये चीजें खुदाई के दौरान निकाले गए ‘पवित्र कक्षों’ से मिली हैं। यहाँ से ताबूत, रथ, कंकाल और मुकुट जैसी वस्तुएँ मिली हैं जो उस समय की युद्ध प्रणाली के विषय में भी बहुत कुछ कहती हैं। इसके अलावा तलवारें, ढाल और हेलमेट मिले हैं जो उस समय हुई किसी युद्ध की ओर इशारा करते हैं।

एएसआई के डायरेक्टर डॉक्टर एसके मंजुल ने कहा कि ये चीजें हड़प्पा संस्कृति से वास्ता नहीं रखतीं। वहाँ ताबूत के साथ कुछ जली हुई लकड़ियों के अवशेष भी मिले हैं जो बताते हैं कि शव के क्रिया कर्म से पहले उसे नहला कर पूजा-पाठ किया गया होगा। डॉक्टर मंजुल ने इस बारे में विशेष जानकारी देते हुए कहा:

“एक इतिहासकार (उत्खनक) के रूप में मुझे लगता है कि ये हड़प्पा संस्कृति से अलग है। यह हड़प्पा संस्कृति के अंतिम चरण के समकालीन है। उत्तरी गंगा-यमुना दोआब में पनपी संस्कृतियों को समझने के लिए ये महत्वपूर्ण साबित होगा। हमें ताँबे की तलवारें, ढाल, रथ और हेमलेट मिले। हमें कुछ बर्तनों में उड़द की दाल, चावल, जानवरों की हड्डियाँ, जंगली सूअर और नेवले भी मिले हैं जिन्हें शवों के साथ ही दफनाया गया होगा। पवित्र कक्षों में शव को किसी तरह की पूजा-पाठ वगैरह के लिए रखा गया होगा।”

सोनौली यमुना नदी के बाएँ किनारे पर स्थित है। यह दिल्ली से 68 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बसा हुआ है। वहाँ हुई खुदाई से यह पता चला है कि यहाँ हड़प्पा के समकालीन समय का सबसे बड़ा श्मसान था। जो ताबूत मिली हैं, उसमें 4 पाए हैं। इसे चूना-मिट्टी से सजाया गया है। इसके साथ 2 महिलाओं के कंकाल मिले हैं, जिनकी उम्र 30-40 वर्ष रही होंगी। उनके पास से चूना मिट्टी का बाजूबंद और सोने का टुकड़ा मिला है। हवनकुंड में लकड़ी के जले टुकड़े मिले हैं। ताम्बे की फ्रेम वाला शीशा, सींग से बनी कंघी और चित्रकारी किया हुआ बक्सा भी मिला।

जहाँ ये चीजें पाई गईं, वहाँ से कुछ सौ मीटर की दूरी पर एक बसावट वाला स्थान मिला है। वहाँ 4 ताँबे को गलाने वाली भट्टियाँ मिलीं। पिछले साल यहीं पर हुई खुदाई में 8 शाही ताबूत, रथ और युद्ध के अन्य साजो-सामान मिले। ताम्र हथियार बनाने की ऐसी प्रक्रिया का सबूत किसी भी हड़प्पा की खुदाई में नहीं मिलता

हड़प्पा के लिए अब तक 500 से भी अधिक जगह खुदाई हो चुकी है लेकिन ऐसी चारपाई वाली शव पेटिका कहीं नहीं मिली है। डॉक्टर संजय मंजुल ने कहा है कि वो गंगा और यमुना के बीच फैली इस सभ्यता के तह तक जाना चाहते हैं। उन्हें भरोसा है कि भारत जैसे विशाल देश में उस अवधि में एक ही संस्कृति पनपी होगी, ये विश्वास करने लायक नहीं है।

शासक नहीं सेवक: PM मोदी की रैली के बाद खुद मैदान की सफाई करते दिखे देबजीत सरकार

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था कि हमें वो बदलाव स्वयं बनना चाहिए, जो हम दूसरों में देखना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर आजकल भाजपा नेता देबजीत सरकार की तस्वीरें खूब शेयर की जा रही हैं। इन तस्वीरों में देबजीत सरकार लोगों के साथ मिलकर चुनावी रैली के बाद मैदान की सफाई करते हुए देखे जा रहे हैं। देबजीत सरकार सेरामपुर संसदीय क्षेत्र, पश्चिम बंगाल से भाजपा के प्रत्याशी हैं।

देशभर में आम चुनाव जारी है। इस बीच तरह-तरह की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहाँ कुछ सत्तापरस्त और वंशवाद की राजनीति में लिप्त कॉन्ग्रेस जैसे राजनीतिक दल के नेता चौकीदार और चायवालों को हीन दृष्टि से देखते हैं और उन पर अपमानजनक टिप्पणी करते हैं, वहीं दूसरी और भाजपा नेता हैं, जो आम जनता के बीच स्वयं उदाहरण पेश करते हुए आगे बढ़ते हैं।

सेरामपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी हैं युवा नेता देबजीत सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अक्सर देखने को मिलता है कि उनकी पार्टी के सदस्य और नेता भी सामाजिक अवसरों से लेकर सार्वजानिक अवसरों पर भी जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। इस बार इसी तरह का उदाहरण पेश किया है पश्चिम बंगाल के युवा नेता देबजीत सरकार ने। पश्चिम बंगाल राज्य बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष देबजीत सरकार इस लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के सेरामपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हैं।

शासक नहीं सेवक

जिन तस्वीरों में देबजीत सरकार सफाई करते हुए नजर आ रहे हैं, यह सेरामपुर, पश्चिम बंगाल में आयोजित पीएम नरेंद्र मोदी की अप्रैल 29, 2019 की चुनावी रैली के बाद की है। इसी दिन भाजपा नेता देबजीत सरकार के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए सेरामपुर की जनता से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी। लेकिन, इन सबसे ज्यादा जो चर्चा का विषय है, वो है देबजीत सरकार द्वारा इस विशाल जनसभा के सफल आयोजन के बाद की तस्वीरें!

इन तस्वीरों में देबजीत सरकार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्वयं सभास्थल की सफाई कर रहे हैं। देबजीत सरकार के बारे में अक्सर इस तरह के उदाहरण सोशल मीडिया पर देखने को मिलते हैं, जब वो युवाओं के साथ मिलकर इस प्रकार के उदाहरण पेश करते हैं। सेरामपुर में पाँचवें चरण के चुनाव आगामी 6 मई को होने हैं। PM नरेंद्र मोदी इसी चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में और भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साहवर्धन के लिए विगत सप्ताह सेरामपुर में मौजूद थे। सेरामपुर लोकसभा पश्चिम बंगाल का महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र है। स्वच्छ भारत अभियान प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का एक बड़ा सपना है और इस तरह का सहयोग करते हुए नेताओं को देखना कहीं ना कहीं एक सकारात्मक सन्देश देता है।

‘नामपंथी, वामपंथी, दमन पंथी और चौथा, विकास पंथी’

भाजपा इस आम चुनाव में पश्चिम बंगाल से अधिक से अधिक सीट जीतने का प्रयास कर रही है। इसी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “भारत की राजनीति में आज तक 4 प्रकार के दल और पॉलिटिकल कल्चर देखे गए हैं। पहला है नामपंथी, दूसरा वामपंथी, तीसरा दाम और दमन पंथी और चौथा है विकास पंथी।”

PM मोदी द्वारा विपक्ष पर किया गया यह तंज और देबजीत सरकार की ये तस्वीरें यह बताने के लिए स्पष्ट हैं कि भाजपा नेता और कॉन्ग्रेस नेताओं के बीच सबसे बड़ा फासला यही है। एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस नेता अपनी अभिजात्य मानसिकता के चलते समाज के मध्यम और निचले वर्ग को हीन समझते हैं, वहीं भाजपा नेता समाज के मध्यम और शोषित वर्ग के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े नजर आते हैं। ऐसा हम नहीं, जनता कहती है।

20 बड़े वादे जिन्हें पूरा करने में नाकाम रही केजरीवाल सरकार, क्या कहा और क्या किया

आम आदमी पार्टी ने 2015 विधानसभा चुनाव के दौरान 70 वादे किए थे, जिसके आधार पर जनता ने उन्हें सत्ता सौंपी। लोक नीति शोध केंद्र (PPRC) द्वारा केजरीवाल के सभी वादों और अभी उपलब्ध दिल्ली सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर वृहद् रिसर्च के बाद एक लम्बी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि कैसे अरविन्द केजरीवाल 70 में से 67 वादों को पूरा करने में नाकाम साबित हुए हैं। यहाँ हम 70 में से उन चुनिंदा और बड़े 20 वादों की पड़ताल करेंगे जिसमें केजरीवाल ने चुनाव पूर्व वादा कुछ और किया था जबकि हकीकत में 4 वर्षों तक सरकार चलाने के बाद उस क्षेत्र में प्रगति लगभग न के बराबर हुई है। चूँकि ओरिजिनल रिपोर्ट काफ़ी लम्बी है, यहाँ हम पॉइंट बाई पॉइंट नोट करके आपको समझा रहे हैं कि इस रिपोर्ट में क्या है?

1. दिल्ली जन लोकपाल बिल

वादा: एक निश्चित समयावधि में भ्रष्टाचार की जाँच के लिए सत्ता में आते ही जन लोकपाल का गठन करेंगे।

वास्तविकता: 4 वर्षों में जन लोकपाल का गठन तो दूर, अपनी पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल एल रामदास को भी निकाल बाहर किया।

जन-लोकपाल पर नाकाम केजरीवाल

2. सस्ती बिजली

वादा: सरकार बनाते ही बिजली बिल आधा कर एक पारदर्शी सिस्टम बनाकर कंपनियों को नियंत्रित करेंगे।

वास्तविकता: बिजली के ‘Minimum Bill’ और ‘Fixed Charges’ में पिछले 4 वर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है। अतः, ‘Net Charges’ आधा होना तो दूर, उलटा बढ़ गया।

बिजली बिल घटाने के नाम पर दिल्लीवासियों को मिला धोखा

3. पानी की उपलब्धता

वादा: साफ़ पीने योग्य पानी उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा। 14 लाख घरों तक पाइप के माध्यम से वाटर कनेक्शन पहुँचाया जाएगा।

वास्तविकता: 2017 तक 2 वषों में वाटर कनेक्शन न पहुँचने वाली शिकायतों की संख्या 51% बढ़ गई जबकि दूषित पानी से सम्बंधित शिकायतों की संख्या 24% बढ़ गई।

पानी की कमी से जूझती दिल्ली

4. शौचालयों का निर्माण

वादा: 2 लाख शौचालयों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से अधिकतर झुग्गियों वाले क्षेत्र में बनवाए जाएँगे।

वास्तविकता: 2018 में आई CAG रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल सरकार द्वारा एक भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया।

दिल्ली में एक भी शौचालय नहीं बनवाए गए

5. स्कूलों का निर्माण

वादा: दिल्ली के बच्चों को सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 500 नए विद्यालयों का निर्माण कराया जाएगा।

वास्तविकता: केवल 26 स्कूलों का ही निर्माण कराया जा सका, जिनमें से कुछ की दीवारें इतनी कमज़ोर हैं कि उनमें दरार आनी शुरू हो गई है।

दिल्ली की सरकारी स्कूलों की स्थिति बदतर

6. निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण

वादा: फीस स्ट्रक्चर और एकाउंट्स की जानकारी ऑनलाइन प्रकाशित की जाएगी और प्राइवेट स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को नियंत्रित किया जाएगा।

वास्तविकता: प्राइवेट स्कूल अभी भी मनमानी कर रहे हैं और फीस पर कोई नियंत्रण नहीं है। अभिभावक हलकान हैं।

प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतारू

7. शिक्षा स्वास्थ्य बजट

वादा: शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में वृद्धि की जाएगी, दोनों क्षेत्रों का एलोकेशन बढ़ाया जाएगा।

वास्तविकता: बजट का ‘Revenue Expenditure Curve’ तो बढ़ रहा है लेकिन ‘Capital Expenditure’ घट रहा है, जिसके कारण शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति बदतर होती जा रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति बदतर

8. उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण दवाएँ

वादा: जेनेरिक और उचित गुणवत्ता वाली दवाएँ कम मूल्य में उपलब्ध कराई जाएँगी और फार्मा के क्षेत्र से भ्रष्टाचार मिटाया जाएगा।

वास्तविकता: मोदी सरकार द्वारा अस्पतालों और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन दिल्ली सरकार ने इस क्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं किया है।

केजरीवाल ने सस्ती दवाओं के लिए कुछ नहीं किया

9. सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे

वादा: सार्वजनिक स्थानों व बसों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएँगे ताकि महिलाएँ कभी भी बाहर निकल सकें।

वास्तविकता: दिल्ली की किसी भी सार्वजनिक जगहों या बसों में सीसीटीवी कैमरे इनस्टॉल नहीं किए गए हैं। भाजपा सांसदों ने अपने फंड से सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं।

एक भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाए गए

10. महिला सुरक्षा पर वादाख़िलाफ़ी

वादा: 10,000 होमगार्ड्स के साथ एक ‘महिला सुरक्षा दल’ बनाया जाएगा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अपराध रोकने के लिए 5000 बीएस मार्शल नियुक्त किए जाएँगे।

वास्तविकता: ‘महिला सुरक्षा दल’ का गठन नहीं किया गया और होमगार्ड्स सीनियर सरकारी अधिकारियों व मंत्रियों के यहाँ नौकर, कूक और ड्राइवर का काम कर रहे हैं।

डीटीसी के बस में मार्शल नियुक्त नहीं किए गए

11. मुफ़्त में वाई-फाई सर्विस

वादा: दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर मुफ़्त में वाई-फाई सर्विस दी जाएगी।

वास्तविकता: केजरीवाल सरकार के 4 वर्ष पूरे होने के बावजूद एक भी जगह मुफ़्त वाई-फाई सर्विस इनस्टॉल नहीं की गई।

दिल्ली में मुफ़्त वाई-फाई का वादा नहीं हुआ पूरा

12. व्यापार और खुदरा बाज़ार

वादा: ‘Single Window Clearance’ की स्थापना करते हुए दिल्ली को व्यापार का हब बनाया जाएगा। व्यापार फ्रेंडली नीतियाँ बनाई जाएँगी।

वास्तविकता: वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2017 में दिल्ली ‘Ease Of Doing Business’ की रैंकिंग में 2 वर्षों में 15वें से फिसल कर 17वें स्थान पर आ गई। व्यापार सुलभ माहौल स्थापित नहीं किया गया।

दिल्ली में व्यापार के लिए नहीं हैं दोस्ताना माहौल

13. कर्मचारियों के लिए

वादा: संविदा पर बहाल 4000 डॉक्टरों और 15,000 नर्सों को नियमित किया जाएगा। सरकार में 55,000 रिक्तियाँ भरी जाएँगी।

वास्तविकता: केजरीवाल सरकार ने संविदा पर बहाल कर्मचारियों को नियमित नहीं किया।

संविदा पर बहाल कर्मचारी केजरीवाल से परेशान

14. प्रदूषण को लेकर बिगड़े हालात

वादा: प्रदूषण में कमी लाने के लिए सड़कों पर गाड़ियों की संख्या घटाई जाएगी और मोहल्ला सभाओं के साथ मिलकर वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए वनीकरण किया जाएगा।

वास्तविकता: प्रदूषण को नियंत्रण में रखने में नाकाम साबित हुई दिल्ली सरकार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 25 करोड़ का फाइन लगाया।

दिल्ली सरकार प्रदूषण रोकने में हुई नाकाम

15. बस सर्विस की हालत बदतर

वादा: 5000 नए बसों के साथ यात्रा ख़र्च में भी कमी लाई जाएगी।

वास्तविकता: 23 जून 2018 तक दिल्ली सरकार के पास 2008 से भी कम बसें थीं। 2008 में ये संख्या 3934 थी जबकि 2018 में सिर्फ़ 3882 बस थे।

नए बस जोड़ने में असफ़ल रही केजरीवाल सरकार

16. पुनर्वास योजना वाली कॉलोनी

वादा: पुनर्वास योजना के तहत बनाई गई कॉलोनीज में रह रहे लोगों को प्लॉट का मालिकाना हक़ दिया जाएगा।

वास्तविकता: रिसेटलमेंट कॉलोनीज के लोगों को ‘फ्रीहोल्ड राइट्स’ देने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया गया।

रिसेटलमेंट कॉलोनी के लोग सीएम से नाराज़

17. पंजाबी, संस्कृत और उर्दू को बढ़ावा देने के मामले में

वादा: उर्दू और पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा दिया जाएगा। उर्दू, संस्कृत और पंजाबी को बढ़ावा देने के लिए इन भाषाओं में दक्ष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

वास्तविकता: दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन ने पंजाबी और उर्दू शिक्षकों की कमी के मद्देनजर कई बार नोटिस जारी किया। पंजाबी और उर्दू को पहले से ही दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।

पंजाबी और उर्दू शिक्षकों की कमी से जूझते दिल्ली के सरकारी स्कूल

18. सफ़ाई कर्मचारियों की खस्ता हालत

वादा: सफ़ाई कर्मचारियों के मामले में संविदा वाले नियम को ख़त्म कर उन्हें नियमति किया जाएगा। उनकी ट्रेनिंग और शिक्षा का ध्यान रखा जाएगा। ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को 50 लाख रुपए दिए जाएँगे।

वास्तविकता: अब तक 49 सफ़ाई कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान मृत्य की ख़बर है लेकिन उनके परिवारों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया।

सफ़ाई कर्मचारियों का नहीं रखा जा रहा ध्यान

19. झुग्गियों में रहने वालों के लिए

वादा: झुग्गियों में रहने वालों को फ्लैट और प्लॉट दिए जाएँगे। पुनर्स्थापन पूरा होने से पहले झुग्गियों को नहीं तोड़ा जाएगा।

वास्तविकता: 3.22 लाख लोगों को फ्लैट देने का लक्ष्य था लेकिन अक्टूबर 2018 तक इनमें से मात्र 0.5% परिवारों को ही फ्लैट दिया जा सका।

झुग्गियों में रहने वालों को नहीं मिला घर

20. 1984 सिख दंगा पीड़ितों के साथ धोखा

वादा: 1984 सिख दंगों के लिए कॉन्ग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात की गई और फिर से जाँच की बात कही गई।

वास्तविकता: कॉन्ग्रेस से गठबंधन के लिए केजरीवाल बेचैन हैं। सिंख दंगा पीड़ितों के लिए कुछ नहीं किया गया।

सिख दंगा पीड़ित केजरीवाल से नाराज़

निफ्टी घोटाला: CMIE के निदेशक अजय शाह पर 2 साल का बैन, कॉन्ग्रेस घोषणापत्र से भी जुड़े हैं तार

2011-14 के दौरान हुए निफ्टी घोटाले मामले में सेबी ने आज सजा सुनाते हुए वित्त मंत्रालय के पूर्व अधिकारी और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अजय शाह पर दो साल तक शेयर बाजार में सूचित कम्पनियों से किसी भी प्रकार से सम्बद्ध होने पर रोक लगाई है। अजय शाह जिस कंपनी CMIE में निदेशक के तौर पर सूचीबद्ध हैं, उसी के सीईओ महेश व्यास टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक कॉन्ग्रेस की घोषणापत्र समिति के सलाहकार थे।

क्या था निफ्टी घोटाला?

सेबी ने पाया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (निफ्टी) ने तीन शेयर दलालों- OPG Securities, GKN Securities और Way2Wealth Securities- को बाकियों के मुकाबले अनुचित तरजीह दी थी। मामले के आपराधिक आपराधिक पहलुओं की जाँच कर रही सीबीआई ने पाया कि अजय शाह ने वर्ष 2005-06 के दौरान ‘शोध’ के नाम पर निफ्टी का गुप्त डाटा इकठ्ठा किया था। बाद में उस डाटा की मदद से उन्होंने ‘चाणक्य’ नामक एक एल्गोरिदम-सॉफ्टवेयर विकसित किया जिसे उन्होंने OPG Securities समेत कई शेयर दलालों को बेचा। द हिन्दू बिज़नेस लाइन में सेबी के हवाले से छपी खबर के अनुसार अजय शाह के साढू-भाई सुप्रभात लाला 2010-13 के दौरान निफ्टी के नियमन प्रमुख और ट्रेडिंग डिवीजन के प्रमुख थे, और निफ्टी के सर्वरों के उपयोग में OPG Securities समेत शाह का सॉफ्टवेयर खरीदने वाले कई दलालों को अनुचित रूप से तरजीह दी गई।

इन्हीं सब के चलते सेबी ने अजय शाह और सुप्रभात लाला समेत कई आरोपियों पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबन्ध लगाए हैं। इसके अलावा अपनी संस्था के अंदर हो रहे कदाचार को रोक पाने में असफल रहने और कुछ दलालों को दूसरे शेयर दलालों के ऊपर तरजीह दिए जाने के आरोप में सेबी ने निफ्टी पर भी ₹1,100 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है।

कॉन्ग्रेस कनेक्शन

जैसा कि ऑपइंडिया ने पहले ही अपनी खबर में प्रकशित किया था, अजय शाह जिस CMIE कंपनी के निदेशक मंडल में हैं, टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार उसी कंपनी के सीईओ कॉन्ग्रेस को घोषणापत्र पर सलाह दे रहे थे। इसके अलावा CMIE के द्वारा इकट्ठा किए हुए रोजगार आँकड़ों के हवाले से कॉन्ग्रेस ने भाजपा की केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश भी की थी।

ऐसे में कॉन्ग्रेस को आगे बढ़कर दो बातें साफ़ करनी चाहिए:

  1. अब जबकि CMIE के कॉन्ग्रेस से रिश्ते जगजाहिर हो चुके हैं तो उसके द्वारा इकट्ठे किए गए ‘निराशाजनक’ रोजगार आँकड़ों पर आधारित कॉन्ग्रेस के मोदी सरकार पर हमले की विश्वसनीयता क्या है?

  2. अजय शाह को सेबी द्वारा दी गई सजा और सीबीआई से लेकर आयकर विभाग तक की उनके खिलाफ बैठी जाँच के आलोक में, उनकी कंपनी के सीईओ महेश व्यास ने कॉन्ग्रेस को घोषणापत्र में क्या सलाह दी, यह सवाल लाजिमी है। इसे भी कॉन्ग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए, और यह भी साफ़ करना चाहिए कि यदि कॉन्ग्रेस ने महेश व्यास की सलाह से कोई बात अपने घोषणापत्र में शामिल की, तो क्या वह उस पर अब भी कायम रहेगी?

ज़ाकिर नाइक का ‘चेला’ था आतंकी, PEACE TV पर लंका में लगा बैन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका में ईस्टर संडे बम ब्लास्ट के कुछ दिनों बाद, द्वीप देश के केबल ऑपरेटरों ने कट्टरपंथी इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के पीस टीवी को बंद कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका, डायलॉग और एलटी जैसे दो सबसे बड़े केबल ऑपरेटरों ने ज़ाकिर नाइक के पीस टीवी को बंद कर दिया है। हालाँकि, इस संबंध में आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

इससे पहले, श्रीलंका ने इस्लामी बुर्का सहित सभी प्रकार के चेहरे को ढँकने वाले वस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था।

ब्रिटेन और कनाडा के बाद, भारत और बांग्लादेश ने पीस टीवी पर भी प्रतिबंध लगा दिया था, जो अक्सर ISIS के भर्तियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है, ताकि वे ब्रेनवाश कर सकें। धार्मिक असहिष्णुता और हिंसक अतिवाद को उकसाने के लिए, नाइक की वार्ता और भाषणों को भारत सरकार द्वारा ‘अत्यधिक आपत्तिजनक’ घोषित किया गया था।

ताजा अपडेट के अनुसार, आईएसआईएस आतंकी रियास अबूबकर उर्फ ​​अबू दुजाना ने स्वीकार किया कि वह जाकिर नाइक के भाषणों और वीडियो को फॉलो कर रहा था।  

NIA ने सोमवार को केरल में एक व्यक्ति को श्रीलंका में ईस्टर संडे ब्लास्ट के बाद जाँच के तहत गिरफ्तार किया था। कोल्लेंगोडे पलक्कड़ से गिरफ्तार आतंकवादी, रियाज़ अबूबकर, उर्फ ​​अबू दुजाना ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह श्रीलंकाई विस्फोट की तरह  केरल में आत्मघाती बम विस्फोट करने की योजना बना रहा था।

एनआईए के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आरोपितों ने एक साल से अधिक समय तक श्रीलंकाई विस्फोट के मास्टरमाइंड ज़हरान हाशिम के भाषणों और वीडियो को और कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक ज़ाकिर नाइक के भाषणों को भी फॉलो किया।

इस बीच, विवादित इस्लामिक उपदेशक, नाइक को 2016 से भारतीय एजेंसियों द्वारा जाँचा जा रहा है क्योंकि केंद्र ने उनके इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) संगठन पर पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

गिरफ्तारी के डर से, कट्टरपंथी इस्लामवादी उपदेशक जाकिर नाइक, जिसके खिलाफ इंटरपोल द्वारा भारत के अनुरोध पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संभावना है, वर्तमान में मलेशिया में है, क्योंकि 1 जुलाई 2016 को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत उसके खिलाफ जाँच शुरू होने के बाद वह भारत से भाग था।

नाईक की आतंकवादी संगठनों और मनी लॉन्ड्रिंग के सम्बन्ध में संदिग्ध संबंधों की जाँच की जा रही है। दिसंबर 2017 में  एनआईए ने गिरफ्तारी करने की योजना बनाई थी। इसके अलावा एनआईए ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) जारी करने के लिए इंटरपोल को एक नई दलील भी दी।

इस बीच, इसका विरोध करने के लिए नाइक ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मामला भारत में अल्पसंख्यकों के धार्मिक उत्पीड़न से संबंधित था। नाइक ने अल्संख्यक कार्ड खेलते हुए यह दावा किया कि भारतीय एजेंसियाँ ​​उसे गलत तरीके से निशाना बना रही थीं क्योंकि वह एक मुस्लिम है।

इसके अलावा, NIA जाकिर नाइक के पासपोर्ट को रद्द कराने में सफल रही। वर्ष की शुरुआत में, प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई और पुणे में कथित रूप से 16.40 करोड़ रुपए की नाइक की संपत्ति अटैच की थी। इससे पहले अक्टूबर 2018 में, एनआईए अदालत ने मुंबई के मझगाँव क्षेत्र में नाइक से संबंधित पाँच संपत्तियों की कुर्की का आदेश दिया था।

नाइक, जिसके  ‘कॉन्ग्रेस के साथ लिंक’ भी उभरे थे, धार्मिक समूहों के बीच नफरत फैलाने और मुस्लिम युवाओं को इस्लाम के गैर-विश्वासियों के खिलाफ जिहाद में शामिल होने के लिए उकसाने में कुख्यात रहा है। नाइक ने अपने गैर सरकारी संगठन ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’(IRF) और एक टीवी चैनल (पीस टीवी) का उपयोग देश में अपने नफरत भरे भाषणों को हवा देने के लिए किया।

Breaking: IED ब्लास्ट में 15 जवान वीरगति को प्राप्त, गढ़चिरौली में नक्सलियों ने कमांडो टीम पर किया अटैक

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से एक बुरी खबर है। यहाँ नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट से सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। इस हमले में 15 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। यह घटना तब हुई जब गढ़चिरौली के घने जंगलों के बीच से सी 60 कमांडो यूनिट का दस्ता गुजर रहा था।

नक्सलियों ने जिस तरह से इस हमले को अंजाम दिया, उससे जाहिर है कि इसके लिए लंबी प्लानिंग की गई होगी। आज सुबह महाराष्ट्र दिवस पर 36 गाड़ियों को जलाकर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को अपनी ओर आने का एक तरह से लालच दिया। और हुआ भी ऐसा ही। घटना की सूचना मिलते ही क्विक एक्शन फोर्स घटनास्थल की ओर रवाना हुई। इसी रूट पर नक्सली घात लगा कर बैठे थे। जैसे ही जंबुलखेड़ा गांव से सी 60 कमांडो की टीम गुजर रही थी, नक्सलियों ने IED ब्लास्ट कर उनकी गाड़ी को निशाना बनाया।

सी 60 कमांडो यूनिट के दस्ते को निशाना बनाने के लिए नक्सलियों ने घात लगाकर आईईडी ब्लास्ट किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार फिलहाल घटनास्थल पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चल रही है।

इस कायराने हमले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शोक जताया है। उन्होंने लिखा, “सभी बहादुर जवानों को सलाम करता हूँ। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा। मेरी सांत्वना शोक संतप्त परिवारों के साथ है। साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा।”

सी 60 कमांडो यूनिट पर नक्सलियों ने यह हमला कुरखेड़ा-कोरची रोड के पास किया। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले 2 साल में यह नक्सलियों का सबसे बड़ा हमला है। अप्रैल 2018 में इसी गढ़चिरौली में एनकाउंटर करके सुरक्षा बलों ने 40 माओवादियों को मौत के घाट उतारा था।

Breaking: वाराणसी से SP ‘प्रत्याशी’ तेज बहादुर की उम्मीदवारी रद्द, विरोधी सन्नाटे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से SP प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरने वाले BSF के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के सपने पर पानी फिर गया है। निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए दो नोटिसों का जवाब देने बुधवार (मई 01, 2019) दोपहर 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ RO से मिलने पहुँचे। जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर के नामांकन पत्र को खारिज कर दिया।

अब शालिनी यादव सपा की तरफ से चुनावी मैदान में मोदी को टक्कर देंगी। नामांकन पत्र के नोटिस के जवाब देने के दौरान तेज बहादुर के समर्थकों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने समर्थकों को कचहरी परिसर से बाहर कर दिया।

मंगलवार (मई 01, 2019) को प्रेक्षक प्रवीण कुमार की मौजूदगी में नामांकन पत्रों की जाँच शुरू हुई। जाँच के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह द्वारा यादव को BSF से बर्खास्तगी के संबंध में दो नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी देने पर नोटिस देकर 24 घंटे में BSF से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर प्रस्तुत करने को कहा गया था।

तेज बहादुर को कहा गया था कि वो BSF से प्रमाणपत्र लेकर आएँ, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया। जाँच में पाया गया कि यादव ने पहले नामांकन में ‘भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन के कारण पदच्युत किया गया’ के सवाल पर ‘हाँ’ में जवाब दिया और विवरण में 19 अप्रैल, 2017 लिखा है।

दूसरे नामांकन में शपथ पत्र प्रस्तुत कर पहले नामांकन में गलती से ‘हाँ’ लिख दिया गया, बताया है। शपथ पत्र में बताया कि तेज बहादुर यादव सिंह पुत्र शेर सिंह को 19 अप्रैल, 2017 को बर्खास्त किया गया, मगर भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा पद धारण के दौरान भ्रष्टाचार एवं नियमों के उल्लंघन के कारण पदच्युत नहीं किया गया है।