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कारगिल की लड़ाई के दौरान नरेंद्र मोदी टाइगर हिल क्यों गए थे?

कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने बृहस्पतिवार (मई 10, 2019) को दावा किया कि टाइगर हिल पर फिर से कब्जा करने के दूसरे दिन ही सेना का मनोबल बढ़ाने के लिये नरेंद्र मोदी वहाँ पहुँचे थे।

कारगिल युद्ध में शामिल रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बयान दिया है। सेना में रहकर देश की सेवा करने वाले ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा, “टाइगर हिल पर फिर से कब्जे के एक दिन बाद नरेंद्र मोदी ने वहाँ की यात्रा की थी। किसी पद पर न होने के बावजूद यह काम उन्होंने सिर्फ सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए किया था।” इसके साथ ही ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर ने कहा कि किसी पद पर नहीं रहने के बावजूद मोदी का वह दौरा बताता है कि वे देश की सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील हैं। ठाकुर ने सेना में हिमाचल रेजिमेंट के गठन पर भी बल दिया।

भाजपा नेता एवं ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) कुशाल ठाकुर ने कहा कि मोदी का टाइगर हिल का दौरा करना राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उस वक्त की उनकी चिंता को दर्शाता है, जब वह किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं थे। ब्रिगेडियर ठाकुर ने मीडिया से कहा कि मोदी न तो उस वक्त प्रधानमंत्री थे और न ही गुजरात के मुख्यमंत्री, जब वह जुलाई 05, 1999 को टाइगर हिल आए थे।

उस समय हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी थे नरेंद्र मोदी

ठाकुर उस समय 18 ग्रेनेडियर्स यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे, जिसने रणनीतिक चोटियों को वापस कब्जे में लिया था। ठाकुर ने बताया कि उस समय मोदी हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी थे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी की नीतियों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने मोदी के 5 साल के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति में काफी बदलाव देखा। उन्होंने कहा कि दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति के कारण मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमलों के माध्यम से कारगार साबित हुई।

बिग्रेडियर कुशाल ठाकुर के मुताबिक 1990 में पाकिस्तान की ओर से प्रॉक्सी वॉर शुरू किया गया था। उस वक्त कई आतंकवादी घटनाएँ हुईं और हम उन्हें मारने के लिए तब तक इंतजार करते थे, जब वो एलओसी के अंदर नहीं आ जाते थे। लेकिन, पहली बार एलओसी से बाहर निकलकर आतंकियों को घुसकर मारा गया है।

कॉन्ग्रेस का घोषणा पत्र सेना का मनोबल गिराने वाला’

शिमला में ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर ने कॉन्ग्रेस को कई मुद्दों पर घेरा। मंडी, हिमाचल प्रदेश से बीजेपी के टिकट के दावेदार रहे कुशाल ठाकुर ने कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि यह घोषणा पत्र सेना का मनोबल गिराने वाला है। अगर जम्मू कश्मीर में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट में बदलाव किया गया, तो यह आत्मघाती कदम होगा।

उन्होंने बताया कि करगिल युद्ध के दौरान हिमाचल प्रदेश के 52 सैनिकों ने अपने प्राण न्योछावर किए और 2 को देश के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र से भी नवाजा गया।

सरकारी स्कूलों में CCTV कैमरे लगवाए जाने के फ़ैसले पर SC का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए स्कूलों में CCTV कैमरे लगाने की याचिका पर 6 सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। याचिका में कहा गया था कि कक्षा में डेढ़ लाख कैमरे लगवाए जाने से और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग करवाए जाने से बच्चों पर मानसिक दबाव पड़ेगा।

दरअसल, सरकारी स्कूलों में CCTV कैमरे के माध्यम से कक्षा की लाइव स्ट्रीमिंग के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में यह कहा गया था कि लाइव स्ट्रीमिंग से वहाँ पढ़ने वाले छात्रों पर मानसिक रूप से दबाव पड़ने के साथ-साथ इसका उन पर बुरा असर पड़ेगा।

दरअसल, मई 2017 में दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में CCTV कैमरे लगाए जाने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के मुताबिक़ क़रीब 1,028 सरकारी स्कूलों में 1,46,800 कैमरे लगाने के प्रस्ताव को एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी ने मंज़ूरी दे दी थी। बता दें कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 597.51 करोड़ रुपए खर्च होने की ख़बर थी। सभी सरकारी स्कूलों में दो तरह के कैमरे लगाए जाने की स्वीकृति मिली थी, एक तो बुलेट (1,44,414) और दूसरा पीटीजेड (2,383)। कॉरिडोर में बुलेट कैमरे और ओपन एरिया में पीटीजेड कैमरे लगाने का प्रस्ताव था, और कक्षाओं में ड्रोन कैमरे लगाए जाना तय हुआ था।

दिल्ली सरकार के इसी प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिस पर सितंबर 2018 में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस सुनवाई में सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में लगने वाले CCTV कैमरे को कोर्ट ने ग़लत नहीं ठहराया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन दावों को ख़ारिज कर दिया था, जिसके अनुसार यह कहा गया था कि CCTV लगने से बच्चों की निजता के अधिकार प्रभावित होंगे।

ख़बर के अनुसार, जस्टिस राजेन्द्र मेनन और जस्टिस वी के राव की बेंच ने कहा था कि कक्षाओं में CCTV कैमरे लगने से निजता का कोई प्रश्न नहीं उठता क्योंकि स्कूलों में कुछ भी निजी काम नहीं किया जाता। इसके अलावा बेंच ने यह भी कहा था कि ऐसा कई बार होता है जब अभिभावक, शिक्षकों पर नहीं पढ़ाए जाने का आरोप लगाते हैं, CCTV  कैमरे लग जाने के बाद अभिभावकों की इस तरह की शिकायतों पर विराम लगेगा और सही तस्वीर से वे अवगत हो सकेंगे।

इस्लामिक स्टेट जम्मू कश्मीर का कमांडर इशफाक अहमद सोफी एनकाउंटर में ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में सुरक्षा बलों ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ़ जम्मू कश्मीर (आईएसजेके) के कमांडर इशफाक अहमद सोफी को एनकाउंटर में मार गिराया है। इशफाक अहमद सोफी जाकिर मूसा का बेहद करीबी था। घाटी में उसकी संलिप्तता कई आतंकी वारदातों में थी। इस्लामिक स्टेट की कश्मीर में सक्रियता का सूत्रधार जाकिर मूसा और सहयोगी कमांडर इशफाक अहमद सोफी ही था।

जाकिर मूसा के अलावा इशफाक अहमद सोफी कश्मीर में आईएसजेके का बड़ा कमांडर था। जाकिर मूसा अभी भी सेना की पकड़ से दूर है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आतंकी कमांडर के मारे जाने के बाद भी सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके को घेरे में ले लिया गया है। सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

कश्मीर से इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों का खात्मा करने के लिए जाकिर मूसा को मौत के घाट उतारना सुरक्षा बलों के लिए ज़रूरी हो गया है जिसके लिए घाटी में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

राजधानी, दुरंतो और शताब्दी ट्रेन में महिला और दिव्यांगों के लिए होगा अलग से कोच

भारतीय रेलवे ने महिलाओं और दिव्यांगों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला किया है। जल्द ही राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में महिलाओं और दिव्यांगों के लिए अलग से कोच लगाया जाएगा। वर्तमान में महिलाओं के लिए इन प्रीमियम ट्रेनों में स्पेशल कोच की व्यवस्था नहीं थी। हालाँकि, पैसेंजर ट्रेन में महिलाओं के लिए एक बोगी आरक्षित होती है। इस बोगी में पुरुष यात्री सवार नहीं हो सकते हैं। सिर्फ 12 साल से कम के बच्चे, महिला बोगी में सवार हो सकते हैं। खबर है कि रेलवे प्रशासन इन ट्रेनों के पावर कार को अपग्रेड करने की तैयारी कर रही हैं।

इससे पहले इन ट्रेनों में पहले से एलएचबी कोच लगे हुए हैं। अभी तक इन ट्रेनों में दो एलएचबी पावर कोच होते हैं जो पूरे ट्रेन में बिजली की सप्लाई करने के साथ ही एसी को भी पावर देते हैं।

प्रीमियम ट्रेनों अब एक ही पावर कोच होगा

अपग्रेडेड पावर कार के बाद एक ही कोच इन कामों के लिए पर्याप्त होगा। रिपोर्ट के अनुसार रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जब एक ही पावर कोच होगा, तो ऐसे में एक अतिरिक्त कोच की जगह बनती है। ये अतिरिक्त कोच ही महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए आरक्षित होगा।

अधिकारियों ने कहा कि एक नॉन-एसी कोच पूरी तरह एसी कोच वाली ट्रेन के साथ अटैच होगा। इससे इसका किराया कम होगा। अधिकारियों का कहना है कि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, जो रेलवे के लिए रेक का निर्माण करती है, ने पावर कार के दो प्रोटोटाइप रेक तैयार किए हैं।

लेडिज कोच को बीच में लगाने का फैसला

इससे पहले रेलवे ने पिछले साल ट्रेनों में महिला कोचों को ट्रेन के बीच में लगाने का फैसला किया था। इससे पहले ट्रेनों में महिला कोच को सबसे पीछे या कई ट्रेनों में सबसे आगे लगाया जाता था। रेलवे की तरफ से यह फैसला सुरक्षा की दृष्टि से उठाया गया था।

इसके अतिरिक्त महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे को अलग रंग देने का भी निर्णय लिया गया था। साथ ही, महिलाओं के लिए आरक्षित इन कोच में सीटीटीवी कैमरे के साथ की खिड़कियों पर जाली लगाने की भी बात कही गई थी। रेलवे ने साल 2018 को महिला सुरक्षा वर्ष के रूप में भी मनाया था।

वर्तमान में भी महिलाओं के लिए रेलवे की तरफ से कई सुविधाएँ दी जा रही हैं। जैसे कि, 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को महिला कोटा के तहत प्राथमिकता दी जाती है। इसमें 3 साल तक का बच्चा भी शामिल है। यह सुविधा स्लीपर और एसी दोनों क्लास में उपलब्ध है।

राजस्थान: ताबड़तोड़ फायरिंग में बजरंग दल के नेता सुरेंद्र जड़िया की गोली मार कर हत्या

राजस्थान के चुरू जिले के सादुलपुर कस्बे में गुरूवार (मई 9, 2019) को थाने से महज 300 मीटर की दूरी पर बाइक पर आए तीन नकाबपोश बदमाशों ने बजरंग दल के प्रखंड संयोजक और ट्रांसपोर्ट कंपनी के संचालक सुरेंद्र जड़िया की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों बदमाश वहाँ से फरार हो गए। सूचना मिलते ही वहाँ पर पुलिस आ गई। चौतरफा नाकाबंदी के बाद भी हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटनास्थल पर गोली के खाली खोखे व एक लोडेड मैगजीन मिली है।

खबर के मुताबिक, तीनों बदमाशों की सुरेंद्र के साथ कोई आपसी दुश्मनी थी, जिसका बदला लेने के लिए उन्होंने सुरेंद्र पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाकर उनकी हत्या कर दी। वो लोग सुरेंद्र को मारने की नीयत से उनके ऑफिस के बाहर पहले से ही मौजूद थे और जैसे ही वो ऑफिस के बाहर निकले, बदमाशों ने उन पर लगातार 10 फायरिंग की, जिसमें से 3 गोलियाँ सुरेंद्र को लगी और वो वहीं जमीन पर गिर पड़े और तीनों बदमाश बाइक पर बैठकर वहाँ से फरार हो गए।

सुरेंद्र को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी था। सुरेंद्र की मौत हो चुकी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जाँच कर रही पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में 3 संदिग्ध नजर आए हैं। जिसके बाद अब पुलिस उनकी तलाश करने में जुट गई है।

‘राहुल की NYAY, मुफ्त में पैसे बाँटने की योजना है’: RJD नेता रघुवंश प्रसाद सिंह

बिहार में कॉन्ग्रेस के सहयोगी दल आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कॉन्ग्रेस द्वारा प्रस्तावित न्यूनतम आय गारंटी को मुफ्त में पैसे देने वाली योजना करार दिया है।

रघुवंश ने इकोनॉमिक्स टाइम्स से हुई बातचीत में बताया कि न्याय योजना मनरेगा (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से बिलकुल अलग है। मनरेगा में जहाँ 100 दिन का रोजगार देने की बात है वहीं न्याय योजना में लोगों को बिना कुछ काम किए पैसा मिलेगा।

बातचीत में रघुवंश ने बताया कि जब मनरेगा को लागू किया गया था तब वह यूपीए सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री थे। उनके मुताबिक अगर वह दोबारा से सत्ता में आए तो इस योजना का विस्तार किया जाएगा।

रघुवंश प्रसाद ने कहा कि एक मशहूर अर्थशास्त्री ने कहा है कि लोगों को कुछ भी फ्री में नहीं देना चाहिए। मनरेगा ने लोगों में काम करने की आदत डाली। फ्री में पैसे बाँटना किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ को फिर अन्य दल भी ऐसा करेंगे। जबकि मनरेगा ने देश में बहुत हद तक रोजगार की समस्या को दूर किया था।

जेल में क्रिश्चियन मिशेल को नहीं मिल रहा अच्छा खाना: 16 किलो घटा वजन

अगस्ता वेस्टलैंड चॉपर घोटाला मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल ने गुरुवार (मई 9, 2019) को सीबीआई कोर्ट में शिकायत की है कि तिहाड़ जेल के अंदर उसे जो खाना दिया जाता है, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं हैं। उसने कोर्ट से कहा कि जेल में खराब खाना खाने की वजह से उनका वजन 16 किलोग्राम कम हो गया है। मिशेल ने बताया कि उसे खाने में सिर्फ उबली हुई सब्जी दी जाती है। मिशेल का कहना है कि डॉक्टर ने उसे सेहतमंद खाना देने के लिए कहा है, लेकिन फिर भी उसे अच्छा खाना नहीं दिया जा रहा है।

सीबीआई कोर्ट ने मिशेल की दलील सुनने के बाद जेल अथॉरिटी को खाने की जाँच करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में जेल अधिकारियों और जेल के डॉक्टरों से उनका लिखित जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (मई 10, 2019) को 2 बजे होगी। इससे पहले भी मिशेल के वकील ने जेल में मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद कोर्ट ने मिशेल की पेशी का वारंट जारी किया था। वहीं, मिशेल ने अपने परिवार के साथ ईस्टर मनाने के लिए पिछले महीने कोर्ट में 7 दिनों की अंतरिम जमानत की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

गौरतलब है कि, मिशेल को पिछले साल 22 दिसंबर को संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को सौंपा था। मिशेल को ₹3600 करोड़ के हेलीकॉप्टर सौदे के मामले में संयुक्त अरब अमीरात में गिरफ्तार किया गया था और 4 दिसंबर को भारत लाया गया। इसके बाद 28 दिसंबर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बुर्क़े में छिपकर अंजुम ने आमिर पर फेंका तेजाब, दोनों प्रेमी-प्रेमिका

महाराष्ट्र के अहमदनगर में बुर्का पहने एक लड़की ने अपने आशिक के ऊपर तेजाब फेंक दिया। वारदात के बाद लड़की जगह से भागने में कामयाब रही, लेकिन बाद में स्थानीय पुलिस ने उसे धर दबोचा। इस हमले में लड़के का चेहरा 15 प्रतिशत झुलस गया है। लड़के का इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है।

जी न्यूज़ की खबर के मुताबिक अंजुम शेख (लड़की) और आमिर शेख (लड़के) के बीच पिछले दो साल से प्रेम संबंध थे, लेकिन कुछ समय बाद आमिर ने अंजुम से मुँह फेर लिया। जानकारी के मुताबिक जब आमिर दूसरी लड़कियों से ज्यादा बात करने लगा, तो अंजुम इस बात से नाराज़ हो गई। आमिर के इस रवैये से दुखी अंजुम अपना बदला लेने के लिए दिसंबर 2018 से प्लानिंग करने में जुटी हुई थी। बदला लेने के लिए लड़की ने अपने प्लान को क्राइम सीरियल देखकर तैयार किया।

योजना पूरी होने के बाद सोमवार (मई 6, 2019) अंजुम ने आमिर को शहर के तोरणा होटल में बुलाया। यहाँ इंतजार में खड़े आमिर पर अंजुम ने अचानक तेजाब से हमला किया और भागने में कामयाब हो गई। इस दौरान उसने बुर्का पहना हुआ था ताकि कोई उसे पहचान न पाए।

इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस हरकत में आई और 3 दिन की जद्दोजहद के बाद अंजुम को गिरफ्तार करने में सफ़ल रही। मीडिया खबरों के अनुसार पुलिस इस बात की तफ्तीश में जुट गई है कि युवती ने तेजाब कहाँ से हासिल किया। इसके अलावा अंजुम के ख़िलाफ़ जानबूझकर किसी को गंभीर रूप से घायल करने की आईपीसी धारा 326(ए) के तहत मामला दर्ज हुआ है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर किसी को भी 10 साल की उम्रकैद की सजा हो सकती है।

क्या है सच दिल्ली के सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों का? ऐसे फैलाया जा रहा झूठ

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता और समर्थक यह कहते नहीं थकते कि ‘आप’ के राज में शिक्षा क्रांति हो गयी, दिल्ली के सरकारी स्कूल वर्ल्ड क्लास हो गए। फिर वे करोड़ों खर्च कर दिल्ली के हजारों स्कूलों में से एक में बना जिम और दो में बने स्विमिंग पूल का फोटो दिखाकर कहते हुए पाए जाएँगे कि भई कमाल कर दिया केजरीवाल ने!

आजकल एक और झूठ मार्केट में बड़ी तेजी से फैलाया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को भी पछाड़ दिया है। बारहवीं के परीक्षा परिणामों का संदर्भ देते ऐसे लोग नज़र आते हैं लेकिन जब बात दसवीं के परीक्षा परिणामों की करें तो सब चुप्पी साध लेते हैं। फिर कोई ये नहीं बताता कि दिल्ली के स्कूलों का परिणाम 2006-07 में आये 77.12% के स्तर से भी नीचे क्यों चला गया? 2006-07 के बाद कभी भी दिल्ली का परिणाम विपरीत दिशा में जाता नज़र नहीं आया लेकिन बीते 2 वर्षों में रिकॉर्ड टूट गया। आईये समझते हैं क्या है दिल्ली के सरकारी स्कूलों की कहानी-

पहले बात 12वीं कक्षा की:

1) पहली बार यह सुनना बहुत अच्छा लगता है कि सरकारी स्कूल प्राइवेट से भी बेहतर परिणाम ला रहे हैं लेकिन दिल्ली के मामले में क्या ये पहली बार हो रहा है? दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने पहले भी प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ा है। 2009 और 2010 में सरकारी स्कूलों का 12वीं में प्रदर्शन प्राइवेट स्कूलों से बेहतर था। देखें सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के 12वीं परीक्षा परिणाम का ये आंकड़ा, जो दिल्ली सरकार द्वारा परीक्षा परिणाम आने के बाद हुए Result Analysis के जरिये साझा किया गया। इसलिए ये कहना कि ये ऐतिहासिक घटना है, गलत है!

2) ये भी कहना अतिरेक है कि परीक्षा परिणाम में सुधार केवल आप की सरकार बनने के बाद हुए। आँकड़े बताते है कि दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के परीक्षा परिणामों के गैप पहले के मुकाबले बेहद कम हुए है:

देखिये आंकड़े

यहाँ देखा जा सकता है कि कभी 13% से पिछड़ने वाले दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों की न केवल बराबरी की, बल्कि उसे पछाड़ा भी। बीते 3 साल से यही दुहराया जा रहा है लेकिन सरकारी और प्राइवेट के बीच का फासला बहुत अधिक का नहीं है जैसा बीते दशकों में था।

3) रही बात दिल्ली के बच्चों के प्रदर्शन की तो ये हमेशा से ही बेहतर रहा है। ऊपर के आँकड़े बताते हैं कि 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी 85% से कम नहीं हुआ। पिछले 3 सालों में अगर मामूली बढ़त हुई भी है तो उसी अनुपात में प्राइवेट स्कूलों का भी परिणाम सुधरा है। इस वर्ष यानी 2018-19 में अगर सरकारी स्कूलों का आँकड़ा 94% था तो प्राइवेट स्कूलों के आँकड़े भी 90% से ऊपर थे।

4) यहाँ यह भी देखना पड़ेगा कि जहाँ सरकारी स्कूलों में बच्चें कम हो रहे है, वही प्राइवेट स्कूलों में बच्चे बढ़ रहे हैं हर साल।

दिल्ली के इकॉनोमिक सर्वे (2018-19) की रिपोर्ट देखिये:

5) सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहे हैं, वहीं प्राइवेट स्कूलों में कुल नामांकन का शेयर भी दिल्ली में बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा जारी की गयी इकॉनोमिक सर्वे की रिपोर्ट के आँकड़े इसकी गवाही देते हैं। इसके मुताबिक 2014-15 में जहाँ प्राइवेट स्कूलों का शेयर 31% था, 2017-18 में वह बढ़कर 45.5% से भी अधिक हो गया।

6) यहाँ पर एक बेहद चौंकाने वाली बात है कि परीक्षा परिणाम भले ही चाहे जैसा आये, परीक्षा में बैठने वाले बच्चों की संख्या हमेशा बढ़ती रही है, लेकिन जैसे ही आप सरकार में आई, परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों की संख्या घट गई।

देखिये बीते एक दशक से भी अधिक के आंकड़े:

1998-99 से लेकर 2007-08

2008-09 से लेकर 2017-18

जाहिर सी बात है, जब से आप आई है, दिल्ली के सरकारी स्कूलों से 12वीं की परीक्षा में बैठने वाले बच्चों की संख्या कम होती जा रही है।

7) जो सबसे प्रमुख बात है कि हर साल 9वीं एवं 11वीं की परीक्षा में बड़ी संख्या में बच्चों को फेल किया जा रहा है ताकि केवल अच्छे बच्चें ही 12वीं की परीक्षा दे सकें। हर साल परीक्षार्थियों की घटती संख्या इसकी गवाही देते है जहाँ हर साल लगभग 50% बच्चों को 9 वीं में फेल कर दिया जाता है (देखें आँकड़े)

वही 11वीं कक्षा में भी 28-29% बच्चों को फेल कर दिया जाता है। पढ़ें इंडियन एक्सप्रेस की ये ख़बर.

इसके बावजूद परिणामों में आंशिक बढ़ोतरी को इस तरीके से बताया जाता है मानो करामात हो गई।

द प्रिंट की रिपोर्ट पढ़िए कि कैसे फेक तरीके से प्राइवेट स्कूलों को दिल्ली के सरकारी स्कूल पछाड़ रहे हैं- Delhi govt schools beat private schools in class 12 results. Reason: 50% flunk class 9

10वीं का परिणाम आते ही केजरीवाल सरकार के शिक्षा-क्रांति के दावे हवा हो जाते हैं।

जिस 12वीं के परिणाम पर आप और उसके समर्थक सरकार की प्रशंसा करते नही अघाते, उन्हें 10वीं का रिजल्ट आते ही साँप सूंघ जाता है।

जानते हैं कुछ तथ्य

1) इस वर्ष यानी 2018-19 में प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले दिल्ली के सरकारी स्कूल 21% पीछे रहे है। जहाँ दिल्ली के सरकारी स्कूलों का सामूहिक प्रतिशत 71.58% था, प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 93.12% था। (संदर्भ)

2) पिछले सत्र यानी 2017-18 में 10वीं के परीक्षा परिणाम आये तो जहाँ सरकारी स्कूलों के 69.32% बच्चे पास हुए थे, प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के पास होने का प्रतिशत 89.45% था। यानी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच फासला 20% का था। (संदर्भ)

दिल्ली बीते दो सालों में 10वीं की परीक्षा में राष्ट्रीय औसत से भी बेहद घटिया परिणाम दे रहा है इसके बावजूद इसकी जिम्मेवारी लेने के लिए कोई आगे नही आ रहा।

3) दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10वीं के रिजल्ट की हालत एक दशक पहले भी ऐसी नही थी। यह आप सरकार को श्रेय जाता है कि दिल्ली का प्रदर्शन पिछले एक दशक का भी रिकॉर्ड तोड़ अपने सबसे निम्नतम स्तर पर आ गया है।

4) प्राइवेट और सरकारी के बीच के गैप को पाटने में जो मेहनत दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आप की सरकार बनने से पहले हुई थी, उसे चौपट करने की जिम्मेवारी दिल्ली सरकार को ही लेनी चाहिए। सरकारी और प्राइवेट के बीच के नेगेटिव फासले को यानी -45% से जो सरकारे प्लस में ले आई थी, 2013 में प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ने का काम किया हो, आप की सरकार उसे दुबारा -21 में ले आई.

5) यह हालत तब है जब पिछले साल लगभग 42% बच्चे 9वीं की परीक्षा में फेल हो गए थे। यानी बेहतर बच्चे ही अगली कक्षा में भेजे गए।

जैसा कि ऊपर भी बताया गया, जिस 10वीं की परीक्षा में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम बीते दो सालों से बेहद ख़राब आ रहे है, उसी 10वीं की परीक्षा में 2013 में दिल्ली के बच्चों का प्रदर्शन प्राइवेट स्कूलों से बेहतर था। (संदर्भ)

5) दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में उन बच्चों को दुबारा नामांकन नहीं लेने दिया जा रहा, जो फेल हो गए थे। पिछले सत्र (2017-18) में ऐसे बच्चों की संख्या 66% थी।

पढ़ें दिल्ली हाई कोर्ट में अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की याचिका का ये हिस्सा:

दिल्ली सरकार को 12वीं के Manipulated Achievement पर वाहवाही बटोरने की वजाए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों का जबाब देना चाहिए कि –

1) लर्निंग आउटकम बढ़ाने के बड़े बड़े दावों के साथ “मिशन चुनौती” और “मिशन बुनियाद” चलाने के बावजूद भी इस तरह के परिणाम क्यों आ रहे हैं?

2) परीक्षा परिणामों को सुधारने के लिए बच्चों को क्यों फेल किया जा रहा है?

3) जो बच्चें फेल हो रहे है, उन्हें दुबारा नामांकन क्यों नही लेने दिया जा रहा?

4) सरकार चुनिन्दा स्कूलों की रंगाई-पुताई और कुछ भवन बनाकर वाहवाही लुटने की वजाए पढ़ने-पढ़ाने के ऊपर ध्यान क्यों नहीं दे रही?

दिल्ली सरकार के मुखिया को ध्यान रखना चाहिए कि कागज़ी आंकड़ों की बाजीगरी करके भले आप वाहवाही लूट लें, करोड़ों लुटाकर मीडिया का ध्यान भटका दें, जिन गरीब के बच्चों को स्कूली व्यवस्था से दूर कर रहे हैं, उन बच्चों के साथ खिलवाड़ कर राष्ट्र-अपराध कर रहे हैं।

इंडोनेशिया में मंदिर का विरोध, मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने दी जिहाद की धमकी

इंडोनेशिया के सुकतानि जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे से गाँव सुकाहुरिप में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने मंदिर निर्माण के खिलाफ जिहाद की धमकी दी है। बेकासी रीजेंसी के अंतर्गत आने वाले गाँव, वेस्ट जावा में प्रदर्शनकारी हरे झंडे और बैनर के साथ मंदिर निर्माण का विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस पर बैनर पर साफ-साफ लिखा है कि अगर उन्होंने मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ किया तो वो जिहाद को अंजाम देने के लिए तैयार हैं। इस घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

https://www.youtube.com/watch?time_continue=75&v=wLSZTtzjgIg

जानकारी के मुताबिक, गाँव में मंदिर निर्माण के लिए ग्राम प्रधान और आस-पास के लोगों से सहमति ली गई थी। जिस पर ग्राम प्रधान और वहाँ के स्थाई निवासियों द्वारा सहमति व्यक्त की गई थी, मगर गाँव के बाहर के एक संगठन ने मंदिर निर्माण पर विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया।

बेकासी पुलिस प्रमुख कैंड्रा सुकमा कुमारा ने भी गाँव में प्रदर्शनकारियों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन की पुष्टि की है। उन्होंने भी गाँव के बाहर के एक संगठन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस प्रमुख ने कहा कि मंदिर के निर्माण की योजना बिना किसी रोक-टोक के 2017 से सुचारू रूप से चल रही थी, मगर हाल ही में इस तरह के विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं।

बता दें कि, इस इलाके में तकरीबन 6,000 से 7,000 हिंदू रहते हैं, जिन्हें मंदिर जाने के लिए पड़ोस के बीकासी नगर पालिका के पुरा अगुंग तीर्थ भुआना जाना पड़ता है। जिसके लिए उन्हें काफी दूरी तय करनी पड़ती है। इसलिए इन समस्या को दूर करने के लिए हिंदू समुदाय ने मंदिर निर्माण करने के बारे में सोचा और इसके लिए एक समिति का भी गठन किया जिसमें मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के बारे में योजना बनाई जा रही थी। मगर स्थानीय लोगों का समर्थन होने के बावजूद ये योजना असफल होती हुई दिखाई दे रही है।