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मनमोहन सिंह के लिए अगली बार RS के दरवाजे बंद, राज्यों में कॉन्ग्रेस की हालत पतली

पाँच बार उच्च सदन के सदस्य रह चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मौजूदा 6 साल का कार्यकाल 14 जून को पूरा हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 2 सीटों को भरने के लिए 7 जून को प्रदेश में चुनाव की घोषणा की है, लेकिन इस बार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सदस्य के रूप में राज्यसभा में वापसी की संभावना बहुत कम है।

दरअसल, असम में भाजपा की सरकार सत्ता में हैं। इसके कारण कॉन्ग्रेस पार्टी के पास उन्हें फिर से उच्च सदन में भेजने के लिए विधानसभा में अपेक्षित संख्याबल नहीं है। कॉन्ग्रेस के पास 126 सदस्यीय असम विधानसभा में केवल 25 विधायक हैं, जबकि सीट हासिल करने के लिए उनको कम से कम 43 वोटों की आवश्यकता है। हालाँकि पार्टी को सदन में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के 13 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन फिर भी ये संख्या 38 ही हो पाती है।

कॉन्ग्रेस पार्टी मनमोहन सिंह को कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सीटों के जरिए भी राज्यसभा नहीं भेज सकती है क्योंकि इस समय इन राज्यों में भी पद रिक्त नहीं हैं। हालाँकि पार्टी के पास पूर्व प्रधानमंत्री को तमिलनाडु के माध्यम से उच्च सदन में भेजने का विकल्प है जहाँ जुलाई में रिक्तियाँ होंगी क्योंकि राजसभा के 6 सदस्य 24 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

अब ऐसे में अगर मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से जुलाई में मैदान में नहीं उतारा जाता है, तो राजयसभा तक पहुँचने के लिए उन्हें अप्रैल 2020 तक इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि तब कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से 55 सदस्य रिटायर हो जाएँगे। देखना है कि कॉन्ग्रेस पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री को उच्च सदन में पहुँचाने के लिए क्या फैसला लेती है।

फिलहाल मीडिया खबरों के मुताबिक असम सीट पर ऐसी अटकलें हैं कि भाजपा खाली होने वाली 2 सीटों में से एक सीट की पेशकश केंद्रीय मंत्री और लोजपा नेता रामविलास पासवान को कर सकती है। 

Fact Check: क्या शीला दीक्षित ने कहा कि केजरीवाल वोटों के लिए अपनी माँ को भी बेच सकता है?

सोशल मीडिया पर अरविन्द केजरीवाल की छवि ख़राब करने के लिए एक अखबार के कटिंग को वायरल किया जा रहा है। वायरल हो रही इस पोस्ट में दावा किया गया है कि केजरीवाल वोट हासिल करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। इसमें यह सन्देश दिया जा रहा है कि दिल्ली कॉन्ग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला दीक्षित ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में कथित रूप से ये कहा है कि ‘केजरीवाल वोट के लिए अपनी माँ तक को बेच सकते हैं’। देखते हैं कि इस कटिंग की सच्चाई क्या है।

क्या है अफवाह?

सोशल मीडिया पर शीला दीक्षित की तस्वीर के साथ समाचार पत्र का एक कथित क्लिप शेयर किया गया है, जिसमें अरविंद केजरीवाल के बारे में उनके कथित बयान का जिक्र किया गया है।

सोशल मीडिया पर हो रही है वायरल
sheila dikshit fake quote
वायरल किया जा रहा फर्जी पोस्ट

क्या है सच्चाई?

इस फेक न्यूज़ पेपर कटिंग की छानबीन करने पर पता चलता है कि इसी तरह की एक रिपोर्ट ‘आजतक’ की वेबसाइट पर लिखी गई है। आजतक की रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ करके उसे वायरल कर दिया गया है। वायरल पोस्ट ने हिंदी न्यूज़ वेबसाइट ‘आजतक’ की रिपोर्ट को शब्दशः उठाकर फेक न्यूज़ की तरह फैलाया गया है।

आजतक में प्रकाशित मूल कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आतंकवाद से निपटने पर दीक्षित की टिप्पणी के बारे में थी। दिलचस्प बात यह है कि वायरल रिपोर्ट में लीड पैराग्राफ को छोड़कर अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र कहीं भी नहीं आता है। अखबार की इस फर्जी कटिंग को ध्यान से देखने पर ही पता चलता है कि केजरीवाल वाली लाइन और शेष कहानी के फ़ॉन्ट्स में भारी अंतर है।

different fonts of sheila dikshits fake quote
फर्जी एडिटिंग द्वारा लोगों को उल्लू बना रहे हैं

फर्जी कटिंग वाले वायरल पोस्ट और आजतक के रिपोर्ट की तुलना करने पर दोनों में काफी गलतियाँ मिलती हैं। इस वायरल फर्जी तस्वीर में ‘आजतक’ की रिपोर्ट में शीला दीक्षित को दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर सम्बोधित किया गया है। मूल और फर्जी कटिंग, दोनों रिपोर्ट्स ने शिला दीक्षित को दिल्ली की मुख्यमंत्री बताया है।

इस तस्वीर में सामान्य ज्ञान की कमी ढूँढिए

मार्च 15, 2019 को लिखी गई मूल रिपोर्ट में कहा गया है, “दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि मनमोहन सिंह की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की।” हालाँकि, वायरल पोस्ट में उनके बयान को बदल दिया गया है और कहा गया है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा की केजरीवाल वोट के लिए अपनी माँ को भी बेच सकता है।

रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप यह देख सकते हैं कि वायरल पोस्ट में इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से का ही इस्तेमाल किया गया। यह रिपोर्ट शीला दीक्षित के इंटरव्यू से संबंधित हैं, जिसमें उन्होंने कहीं भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जिक्र नहीं किया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का यह इंटरव्यू टीवी एंकर वीर सांघवी ने किया था। वहीं, पेपर की क्लिप में जिस खबर को इस्तेमाल किया गया है, उसे एक हिंदी न्यूज चैनल की साइट से हूबहू उठाया गया है।

निष्कर्ष: खबर को एडिट कर वायरल किया जा रहा है, शीला दीक्षित ने कभी ऐसा कोई बयान नहीं दिया

सत्ता से दूर बेचैन सोनिया सारे पैंतरे आजमा रही है, लग चुकी है 272 जुटाने में

लोकसभा चुनाव 2019 की चुनावी प्रक्रिया में अब केवल एक चरण बाक़ी रह गया है। 23 मई को चुनावी नतीजे घोषित होने हैं, इस बीच कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी गठबंधन के लिए कुछ विचलित नज़र आ रही हैं।

राजनीतिक गलियारे से ख़बर आ रही है कि सोनिया गाँधी दिल्ली में एक रणनीति बैठक के लिए 21, 22 और 23 मई नेताओं की उपस्थिति को लेकर सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं के पास पहुँच रही हैं। डीएमके ने पुष्टि की है कि उनके अध्यक्ष एमके स्टालिन को उक्त तिथियों पर राष्ट्रीय राजधानी में उपस्थित रहने को कहा गया है। मतलब साफ है कि उन्हें बैठक में शामिल होने का न्यौता दिया गया है। जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवगौड़ा ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वह सोनिया गाँधी के साथ बैठक के लिए 23 मई की दोपहर को दिल्ली पहुँचेंगे।

ख़बर के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए सोनिया न केवल सहयोगी दलों बल्कि बीजेडी और टीआरएस जैसी अन्य पार्टियों के साथ मिलकर अपनी चुनावी रणनीति को दिशा देने का काम कर रही हैं।

बता दें कि सोनिया गाँधी द्वारा 2004 के लोकसभा चुनावों के दौरान इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी, जिसके बाद यूपीए अस्तित्व में आया था। यह देखना दिलचस्प है कि सोनिया गाँधी का अनुसरण करते हुए वर्तमान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी उन्हीं प्रयासों को एक बार फिर से हवा दे रहे हैं। देखना होगा कि उनके ये प्रयास कितने कारगर साबित होते हैं।

जानकारी के मुताबिक़, सोनिया की इस क़वायद का मक़सद 23 मई को आने वाले चुनावी नतीजों से पहले विपक्षी दलों के बीच आपसी समझ विकसित कर लेना है, ताकि वो जनादेश हासिल करने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से सरकार बनाने का पहला न्यौता पाने की स्थिति में ख़ुद को सक्षम साबित कर सकें। बिगड़े स्वास्थ्य के कारण, सोनिया गाँधी ने लोकसभा चुनाव अभियान में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया। इसलिए, उन्होंने औंधे मुँह गिरती कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है।

CBI ने सुबह किया जाँच को आगे बढ़ाने से इनकार, शाम को कहा बोफोर्स से है ‘प्यार’

केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने सुबह दिल्ली की एक कोर्ट को सूचित किया था कि वो बोफोर्स दलाली केस में चल रही जाँच को आगे बढ़ाने वाली अर्ज़ी को वापस लेना चाहते हैं। लेकिन ताजा समाचार मिला है कि सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष 64 करोड़ की बोफोर्स तोप दलाली वाली जाँच जारी रखने की अर्जी पुनः दायर की है।

दरअसल सुबह खबर आई थी कि देश की शीर्ष जाँच एजेंसी सीबीआई ने आज (मई 16, 2019) दिल्ली में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नवीन कुमार कश्यप की अदालत में बोफोर्स तोप दलाली जाँच को आगे बढ़ाने वाली याचिका वापस ले ली है जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि बोफोर्स दलाली कांड की जाँच बंद हो जाएगी। प्राइवेट पिटीशनर अजय अग्रवाल ने भी जाँच को आगे बढ़ाने वाली याचिका वापस ले ली थी।

परंतु शाम होते-होते खबर आई कि सीबीआई ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में जाँच को आगे बढ़ाने के लिए फिर से याचिका दायर की है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई स्वतंत्र जाँच एजेंसी है और उसे जाँच के लिए पूछने की आवश्यकता नहीं है। सीबीआई को केवल कोर्ट को सूचित करना होता है कि वह जाँच को आगे बढ़ाएगी या नहीं।

बोफोर्स तोप दलाली केस देश का बहुचर्चित भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें प्रधानमंत्री राजीव का नाम आया था।

मस्जिदों से किया गया ग़ैर-मुस्लिमों की हत्या का आह्वान, हिन्दुओं के पलायन का वीडियो वायरल

लोकसभा चुनाव 2019 शुरू होने के बाद से ही पश्चिम बंगाल हिंसात्मक गतिविधियों के लिए लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है। मंगलवार (14 मई) को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा उन पर हमला बोले जाने की ख़बर सामने आई थी। इस दौरान जो हिंसा हुई उसके लिए बीजेपी और तृणमूल कॉन्ग्रेस ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए और साथ ही प्रसिद्ध दार्शनिक ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति भी तोड़ दी गई।

13 मई को एक ख़बर सामने आई थी कि शुक्रवार (10 मई) से डायमंड हार्बर में सतगाचिया विधानसभा क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी, जिसे नियंत्रित करने में अधिकारी जन बुरी तरह से विफल रहे। ख़बरों के अनुसार, तृणमूल के गुंडों द्वारा कथित तौर पर हिन्दुओं के घरों और दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की गई। वहीं, दुर्भाग्य इस बात का है कि इस हिंसा को साम्प्रदायिक हिंसा का नाम देकर इसे राजनीतिक हिंसा का नाम दिया गया।

राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “शुक्रवार रात शुरू हुई झड़पों के दौरान कई घरों, दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ की गई जो कि तीन दिनों तक जारी रही। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।” वहीं, आईएएस अधिकारी ने मंगलवार को बताया, “यह एक राजनीतिक टकराव है, साम्प्रदायिक नहीं। हमने इस पर ज़िला प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है।”

ऐसा दावा किया जाता है कि तृणमूल के एक नेता ने क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनाने के लिए लगभग 200 गुंडों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा आसपास के इलाक़ों में भी हिंसा की जानकारी मिली है। हालात इतने गंभीर थे कि पहले तो पुलिस इसमें घुसने से कन्नी काटती दिखी, आख़िरकार रैपिड एक्शन फ़ोर्स के ज़रिए काफ़ी संघर्ष के बाद अशांत माहौल पर क़ाबू पाया गया। हालाँकि, इस दौरान कुछ लोग घायल भी हुए।

आईएएस अधिकारी द्वारा किए गए दावों के विपरीत, कुछ ख़बरों के अनुसार, यह हिंसा एक साम्प्रदायिक रूप लिए हुई थी, जिसे नज़रअंदाज़ करने का भरसक प्रयास किया जा रहा था। ख़बर के अनुसार, इस हिंसात्मक हमले के अपराधी समुदाय विशेष से थे और पीड़ित वर्ग हिन्दुओं से संबंधित था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के अनुसार, ग़ैर-मुस्लिमों को मारने के लिए मस्जिदों से आह्वान किया गया था, जिसके बाद हिन्दु परिवारों में अपनी जान बचाने के लिए अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में बड़े स्तर पर कई साम्प्रदायिक हिंसाएँ देखने को मिली हैं। इन हमलों में TMC की छत्रछाया में फलते-फूलते कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं पर हिंसात्मक हमले किए गए। मालदा और बशीरहाट में ऐसी घटनाएँ सामने आईं जहाँ कट्टरपंथी, हिन्दुओं के ख़िलाफ़ काफ़ी उग्र होते नज़र आए, जबकि इन्हीं हिंसात्मक हमलों में हिन्दुओं को बचाने की कोशिश में पुलिस महकमा पूरी तरह से विफल रहा। डायमंड हार्बर की हिंसात्मक घटना भी उसी तर्ज पर जान पड़ती है, जहाँ तृणमूल से जुड़े लोगों ने राजनीतिक आवरण के नाम पर हिन्दुओं के ख़िलाफ़ जमकर हिंसात्मक हमले किए, इस वजह से क्षेत्र के हिन्दुओं को वहाँ से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा।

इन घटनाओं से ममता बनर्जी के वो सभी दावे खोखले साबित होते हैं जिसमें वो अक्सर यह कहते हुए पाई जाती हैं कि वो भाजपा की तरह हिन्दू हैं। जबकि सच्चाई का इस दावे कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि उनके राज में समुदा को संरक्षण प्राप्त है, जिससे वो हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देते रहें हैं और हिन्दुओं से उनका नाता इस बात से ही स्पष्ट हो जाता है कि वो (ममता बनर्जी) उन्हें सुरक्षा प्रदान करने में एक बार नहीं हर बार नाकाम रहीं।

सिद्धू की पत्नी का टिकट कटने पर अमरिंदर सिंह ने कहा ये सब बकवास है

भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्धू के तल्ख़ तेवर तो जगज़ाहिर हैं, लेकिन सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी पिछले कुछ दिनों से सुर्ख़ियों में छाईं हुई हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पति के पक्ष में उनके प्रचार को लेकर बड़ा बयान दिया था जिसकी मुख्य वजह उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को बताया था। उन्होंने सीधे तौर पर कहा था कि उनके पति को प्रचार के लिए इसलिए अवसर नहीं दिया जा रहा है क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री ख़ुद नहीं चाहते कि उनके पति (नवजोत सिंह सिद्धू) प्रचार करें। इसके अलावा सिद्धू की पत्नी ने ख़ुद टिकट न दिए जाने पर भी मुख्यमंत्री को ही दोषी ठहराते हुए कहा था कि उन्होंने जानबूझकर उन्हें टिकट नहीं दिया।

नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने चुप्पी तोड़ते हुए नवजोत कौर के सभी आरोपों का खंडन किया और कहा, “कौर को दो जगह अमृतसर और भटिंडा से टिकट का ऑफ़र दिया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वो चंडीगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती थीं, जबकि पार्टी ने फ़ैसला किया कि वो इस सीट के लिए फिट उम्मीदवार नहीं हैं।” आपको बता दें कि नवजोत कौर ने आरोप लगाया था कि आशा कुमारी की वजह से उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए नवजोत कौर ने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को लग रहा है कि वो 13 की 13 सीटें जीत रहे हैं और इसलिए पजाब में नवजोत सिंह की ज़रूरत नहीं है और इसीलिए उनके पति केवल उन्हीं जगहों पर प्रचार कर रहे हैं जहाँ उनकी ज़रूरत है।

इससे पहले भी कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच कई मुद्दों पर मतभेद की ख़बरें सामने आ चुकी हैं। आए दिन कॉन्ग्रेसी खेमे से उथल-पुथल की ख़बरें पार्टी में बढ़ते रोष की सच्ची तस्वीरों को बयाँ करती हैं। प्रतीत तो यही होता है कि नवजोत सिंंह सिद्धू के अट्टहास भरे अंदाज़ वाली टीका-टिप्पणियाँ भी कॉन्ग्रेस का मन नहीं बहला पा रही हैं। ख़ुद को टिकट न दिए जाने और पति के पक्ष में नवजोत कौर का यूँ खुलकर सामने आना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं कॉन्ग्रेस पार्टी सदस्यों में बढ़ता असंतोष अपने पैर पसारता दिख रहा है जिसके नतीजे जल्द सामने होंगे।

16 मई ही वह तारीख थी जब BJP ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज की, अब है 23 का इंतज़ार

लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण का चुनाव प्रचार जारी है। 19 मई को अंतिम चरण की वोटिंग के साथ मतदान समाप्त हो जाएँगे फिर सारा देश परिणाम के दिन यानी 23 मई के इंतज़ार में लग जाएगा।

तारीखों में अगर पाँच साल पीछे चलें तो आज ही के दिन अर्थात 16 मई 2014 को पिछली बार 16वीं लोकसभा के चुनावी नतीजे आए थे। पाँच साल पहले 16 मई, 2014 को करीब 11 बजे तक ये साफ हो गया था कि सत्‍ता अब एक परिवार के हाथों से छिनने जा रही रही है। सत्ता का माहौल बदलने वाला है।

उस दिन जब 16वें लोकसभा चुनाव के परिणाम जब दोपहर तक घोषित हुए तो भाजपा को ऐतिहासिक विजय का ताज जनता ने पहना दिया था। बीजेपी पहली बार अपने दम पर बहुमत का स्‍पष्‍ट आँकड़ा पार करते हुए 282 सीटों तक पहुँच चुकी थी। अटल युग में भी बीजेपी सत्‍ता के शीर्ष तक पहुँची थी लेकिन अपने दम पर 200 का आँकड़ा भी पर नहीं कर पाई थी।

2004 के बाद से 10 साल तक सत्‍ता से बाहर रहने वाली बीजेपी ने 2013 में घोटालों और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में पेश किया। उनके करिश्माई व्यक्तित्व ने जनता में ‘मोदी लहर’ चला दी। मोदी ने खुद के लिए गुजरात के वडोदरा के साथ वाराणसी को चुनाव क्षेत्र के रूप में चुना और जनता ने न सिर्फ उन्हें, बल्कि NDA को भारी बहुमत से जिताकर उनका प्रधानमंत्री बनना तय कर दिया। काशी से गूँजे नाद ‘घर-घर मोदी, हर-हर मोदी’ ने देश में मोदी लहर कायम रखा, परिणाम स्वरुप नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा न केवल अपने दम पर बहुमत पाने में कामयाब रही बल्कि तीन दशकों में स्‍पष्‍ट जनादेश हासिल करने वाली पहली पार्टी बनी।

2014 के लोकसभा चुनाव की एक और ख़ास बात रही कि लगभग 50 साल तक शासन पर काबिज और एक दशक से लगातार सत्‍ता पर काबिज कॉन्ग्रेस 2014 में सिमटकर महज 44 सीटों की पार्टी बन गई। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस की इतनी भी हैसियत नहीं रही कि उसे नेता-प्रतिपक्ष का पद हासिल हो सके। ऐसी शर्मनाक हार के बारे में शायद ही कभी कॉन्ग्रेस ने सोचा होगा।

बता दें कि बीजेपी ने 16वें लोकसभा चुनाव में 428 प्रत्‍याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें से 282 प्रत्‍याशियों ने जीत हासिल कर बीजेपी को सत्ता में पहुँचाया। 2004 से सत्‍ता से बाहर बीजेपी ने 2009 का चुनाव लालकृष्‍ण आडवाणी के नेतृत्‍व में लड़ा था लेकिन बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और कॉन्ग्रेस के नेतृत्‍व में यूपीए-2 की दोबारा वापसी हुई और मनमोहन सिंह लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। लेकिन 2014 का चुनाव मोदी की छवि, गुजरात मॉडल और अमित शाह की चुनावी रणनीति के साथ लड़ा गया, जिसका परिणाम बीजेपी के लिए सुखद रहा। स्पष्ट बहुमत के साथ, बीजेपी की इस जीत में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 पर जीत ने कॉन्ग्रेस को समेटने में बड़ा योगदान दिया। नरेंद्र मोदी सत्‍ता के शिखर पहुँचे और 26 मई, 2014 को देश के प्रधानमंत्री बने।

इस बार के लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने अपना प्रभाव कायम रखा है। विपक्ष के सभी वार खाली जा रहे हैं। फिर भी अंतिम परिणाम क्या होगा इसका पता 23 मई को चलेगा।

अंग्रेजी हम शर्मिंदा हैं: RaGa हुए वैश्विक स्तर पर जलील, ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने कहा ‘चल झूठे’

राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए आज एक नया ‘बचकाना तरीका’ आजमाया। राहुल ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर छेड़छाड़ की हुई एक तस्वीर को शेयर किया, जिसमें MODILIE शब्द का अर्थ सर्च करके दिखाया गया है। इस तस्वीर को शेयर करते हुए राहुल ने लिखा है कि ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में एक नया शब्द जोड़ा गया है, जिसका स्क्रीनशॉट नीचे हैं। इस तस्वीर में MODILIE शब्द का अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल भी बताया गया है। तस्वीर में इस शब्द का एक अर्थ- बार-बार बदला सच; दूसरा अर्थ- ऐसा झूठ जो आदतन बोला जाता है और तीसरा अर्थ- लगातार झूठ… बताया गया है। इस स्क्रीनशॉट में अर्थों के साथ दाहिनी ओर कॉन्ग्रेस का विज्ञापन भी दिखाया जा रहा है।

हालाँकि जब आप इंटरनेट पर मौजूद किसी भी डिक्शनरी में इस शब्द को खोजेंगे तो आपको इसका कोई अर्थ नजर नहीं आएगा, जिससे आपको खुद पता चल जाएगा कि देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री की छवि बिगाड़ने के लिए खुद के फॉलोवर्स को बरगलाने की कोशिश की है। हालाँकि ऑक्सफॉर्ड डिक्शनरी ने खुद राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर रिप्लाई दिया और स्पष्ट किया उनकी डिक्शनरी में ऐसा कोई शब्द नहीं है और शेयर की गई तस्वीर एक झूठी तस्वीर है।

शर्म की बात ये है कि रोजाना अनाप-शनाप नए अंग्रेजी के शब्द लाकर मीडिया और नव-बुद्धिजीवियों पर अपना रौब जमाने वाले शशि थरूर जैसे ‘इंग्लिशाचार्य’ के कॉन्ग्रेस में रहते हुए इस युवा अध्यक्ष को यह ऐतिहासिक लानत मिली है।

अपने इस झूठ के बाद भी राहुल इतने पर नहीं रुकते हैं और थोड़ी देर बाद वह एक तस्वीर के साथ नया ट्वीट करते हैं। इसमें मोदी की एडिटिड तस्वीर में वो एक वेबसाइट का यूआरएल (modilies.in) शेयर करते हैं। इस ट्वीट में वह लिखते हैं कि पीएम मोदी के झूठों की सबसे सटीक लिस्ट। इस वेबसाइट में कई खबरें हैं, जिनमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर कौन-कौन से झूठ बोले हैं।

लेकिन, पड़ताल किए जाने पर मालूम चलता है कि इस वेबसाइट का डोमेन नाम modilies.in दिया गया है, जो D414400000006247637-IN डोमेन आईडी के नाम से रजिस्टर है। इसका रजिस्‍टर यूआरएल https://www.gandi.net/ है। 2018 में बनी इस वेबसाइट को पिछले महीने ही अपडेट किया गया है।

इसके अलावा यह वेबसाइट किसके नाम से रजिस्टर है इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है। इस वेबसाइट को रजिस्‍टर कराने वाले व्यक्ति का न तो कॉन्टेक्ट नंबर उपलब्ध है और न ही उसका कोई पता लिखा है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक इसके एडमिन या संगठन के बारे में भी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है। जिसके कारण वेबसाइट के साथ राहुल की गंभीरता भी संदेह के घेरे में आती है।

चुनाव में TMC की हिंसा को भुलाकर, EC के फैसले पर सब मिलकर पीट रहे छाती

पश्चिम बंगाल में अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग के निर्णय की टीएमसी समेत कई विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। एक ओर जहाँ इस हिंसा का आरोप टीएमसी और भाजपा ने एक दूसरे पर लगाया है। वहीं, ममता बनर्जी ने उनकी पार्टी के साथ खड़े होने के लिए ट्वीट करते हुए विपक्षी दलों का आभार जताया है।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बसपा प्रमुख मायावती, अखिलेश यादव, कॉन्ग्रेस पार्टी और चंद्रबाबू नायडू को अपने ट्वीट में टैग करके बंगाल की जनता के साथ खड़े होने के लिए आभार प्रकट किया है। उन्होंने लिखा है कि भाजपा के निर्देश पर चुनाव आयोग का पक्षपातपूर्ण निर्णय लोकतंत्र पर हमला है। पश्चिम बंगाल के लोग इसका कड़ा जवाब देंगे।

गौरतलब है बंगाल में होती हिंसा पर निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार की समय सीमा को कम कर दिया था। इस फैसले के मद्देनजर शुक्रवार (मई 17, 2019) को खत्म होने वाले चुनाव प्रचार की समय सीमा को गुरुवार (मई 16, 2019) की रात 10 बजे तक कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग के इस फैसले और बंगाल के गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्या और सीआईडी के एडीजी राजीव कुमार को पद से हटाने के बाद ममता आयोग पर भड़क गईं। इन मामलों में विपक्षी पार्टियों ने भी ममता का खूब साथ दिया।

मायावती

मायावती ने टीएमसी का समर्थन करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि भाजपा के कारण बंगाल में हिंसा हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को भी प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के दबाव का नतीजा बताया था। उनके मुताबिक आज प्रधानमंत्री मोदी की बंगाल में दो रैलियाँ होनी हैं और इसी कारण इन रैलियों के बाद चुनाव प्रचार रुकेगा। मायावती ने ट्वीट किया है कि पीएम मोदी और भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत बंगाल की सरकार को लंबे वक्त से निशाना बनाया हुआ था ताकि अपनी कमियों व विफलताओं से जनता का ध्यान हटा सकें।

चंद्रबाबू नायडू

बंगाल की हिंसा पर चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि बीजेपी ने सीबीआई, आईटी और ईडी से बंगाल की सरकार गिराने की कोशिश की है, और अब सीधे हिंसा पर उतर आई है।

अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के इस निर्णय को अलोकतांत्रिक फैसला बताया है। उनका कहना है कि भाजपा के डर से बंगाल में अराजकता फैल रही है।

सीताराम येचुरी

इसके अलावा सीताराम येचुरी ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया और पूछा कि चुनाव आयोग ने रात 10 बजे प्रचार क्यों रोकने को कहा है? क्या, पीएम नरेंद्र मोदी को रैली करने देने के लिए?

अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने भी चुनाव आयोग के फैसले के बाद भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इसी विचारधारा ने गाँधी की हत्या की है। बंगाल के लोग मोदी-शाह की इस हिंसा का उचित उत्तर देंगे।

पिद्दी है तो मुमकिन है: वायनाड में 10 के 10 ज़ीरो पर आउट, राहुल गाँधी के क्यूट डिम्पल और लकी टच का असर

इससे पहले कि राहुल गाँधी वायनाड भागते, उनसे पहले ही राहुल गाँधी की लहर वायनाड पहुँचकर अपना करिश्मा दिखाती नजर आ रही है। 0,0,0,0,0,0,0,0,0,0! इसे देखकर आपको हैरानी जरूर हुई होगी। पर कासरगोड में खेले गए अंडर-19 गर्ल्स टीम के दस बल्लेबाजों ने यही स्कोर बनाया है। यह स्कोर इंटर-डिस्ट्रिक्ट मैच में बना, जहाँ कासरगोड की टीम का मुकाबला वायनाड की अंडर-19 टीम से हुआ। यह मैच बुधवार (मई 15, 2019) को मल्लपुरम के पेरिनथलमन्ना स्टेडियम में खेला गया।

इस क्रिकेट मैच में राहुल गाँधी के भविष्य की झलक देखने को मिल रही है। रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी के भाई और कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस लोकसभा चुनाव में एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह मास्टरस्ट्रोक आलू से सोना बनाकर जनता को जादू दिखाने का नहीं है, ना ही फटी जेब में हाथ डालकर दूसरी तरफ से हाथ बाहर निकालकर दिखाने का है, बल्कि यह मोदी लहर से घबराकर दक्षिण भारत के वायनाड भाग जाने को लेकर है।

यह मामला है ऐतिहासिक स्कोर इंटर-डिस्ट्रिक्ट मैच का, जहाँ कासरगोड की टीम का मुकाबला वायनाड की अंडर-19 टीम से हो रहा था।

वायनाड ने 10 के 10 बल्लेबाजों को किया 0,0,0,0,0,0,0,0,0,0 पर क्लीन बोल्ड

0,0,0,0,0,0,0,0,0,0! स्कोर बोर्ड पर टंगे इस स्कोर को देखकर हर क्रिकेट प्रेमी हैरान-परेशान था। जहाँ समर्थक मायूस थे, वहीं विरोधियों की तालियों से स्टेडियम गूँज रहा था। ऐसा हुआ कासरगोड में खेले गए अंडर-19 के गर्ल्स मैच में। वहाँ लड़कियों की टीम के 10 बल्लेबाजों ने यही स्कोर बनाया।

लड़कियों की टीम के सभी बल्लेबाज एक समान तरीके से क्लीन बोल्ड ऑउट हुए। इस तरह क्रिकेट इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड रचा गया। हालाँकि, सभी बल्लेबाज, जिसमें नॉट आउट बैट्समैन भी शामिल थीं, खाता नहीं खोल पाईं। कासरगोड की टीम बोर्ड पर 4 रन जरूर जोड़ पाई, जिसमें वायनाड की गेंदबाजों का ही योगदान रहा, यानी ये 4 चार भी ‘एक्स्ट्रा’ रन की बदौलत नसीब हुए हैं। वायनाड की बल्लेबाजों ने जीत के लिए जरूरी 5 रनों का लक्ष्य महज एक ओवर में हासिल कर लिया और मुकाबला 10 विकेट से जीत लिया।

पिद्दी है तो मुमकिन है

देखा जाए तो इस मैच में राहुल गाँधी के क्यूट डिम्पल और उनके जादुई ‘टच’ का सीधा असर देखा जा सकता है। उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि कहीं ये क्रिकेट मैच, आने वाली 23 मई को आने वाले चुनावी रुझान का ही ट्रेलर तो नहीं है? जिस तरह की बल्लेबाजी पावरप्ले के दौरान कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर से लेकर सिख नरसंहार को ‘हो गया तो हो गया’ कहने वाले सैम पित्रोदा कर रहे हैं, उसे देखकर तो यही लगता है कि राहुल गाँधी भी अपनी टीम के साथ 0,0,0,0 के साथ डब्बाबंद होने के लिए कमर कस चुके हैं। यह भी सम्भावनाएँ हैं कि जो दो-चार वोट पड़ें भी, वो NOTA और गलती से ही पड़ रहे हों।

कॉन्ग्रेस चाहे तो अपनी हार का ठीकरा फोड़ने के लिए EVM के हैक होने के अलावा ‘डकवर्थ लुइस’ नियम का भी सहारा ले सकती है। इसमें कॉन्ग्रेस यह तर्क भी ला सकती है कि किस प्रकार उन्होंने वर्ष 2014 के बाद अवार्ड वापसी गैंग से लेकर सस्ते कॉमेडियंस को मोदी सरकार के विरोध में उतारने में जरा देरी कर दी और शुरूआती वर्ष में आवश्यक स्ट्राइक रेट की बढ़त बना पाने में नाकामयाब रहे।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने मिडिल ओवर्स में ‘चौकीदार चोर है’ जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए बढ़त बनाने की कोशिश की लेकिन ऐन वक़्त पर सुप्रीम कोर्ट ने एम्पायर रेफ़रल की भूमिका निभाते हुए इसे भी अमान्य घोषित कर दिया।

राहुल नहीं, राहु की महादशा ने किया है वायनाड में प्रवेश

इस तरह से राहुल गाँधी के ‘टच’ को राहु की दशा की तरह देखा जा सकता है। राहुल गाँधी के वायनाड की ओर रुख करते ही ‘शून्य’ का यह ऐतिहासिक जादुई आँकड़ा उनसे पहले ही वायनाड पहुँचकर राष्ट्रीय खबर बन गया और लोगों को इसमें राहुल गाँधी के चमत्कार की आहट नजर आने लगी।

खैर, कॉन्ग्रेस के 2-4 अहम बल्लेबाज अभी आखिरी चरण के मतदान से पहले ही मैदान पर जमे हुए हैं। इनमें बकबकिया नवजोत सिंह सिद्धू से लेकर दिग्विजय सिंह जैसे कभी भी बाजी को पलट देने की क्षमता रखने वाले बल्लेबाज शामिल हैं। मतदाता और भाजपा उम्मीद लगाए बैठी है कि अभी इन सलामी बल्लेबाजों को आउट किए बिना ही कुछ देर और मैदान पर मैडन ओवर खिलवाकर बहुमत की ओर आसानी से बढ़त बनाई जा सकती है।

भाजपा यदि बहुमत से सरकार बनाने में सफल रहती है, तो उन्हें अपने सबसे बड़े बल्लेबाजों, सैम पित्रोदा, नवजोत सिंह सिद्धू, मणिशंकर अय्यर और स्वयं राहुल गाँधी को जरूर दिल से आभार व्यक्त करना चाहिए। वास्तव में यही कॉन्ग्रेस के लिए देशभक्त सरकार की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।