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70 वादों में से 67 में फेल हुई दिल्ली सरकार, PPRC की रिसर्च रिपोर्ट ने दिखाया केजरीवाल को आईना

लोक नीति शोध केंद्र (PPRC) द्वारा किए गए रिसर्च में सामने आया है कि दिल्ली सरकार अपने अधिकतर वादों को पूरा करने में बुरी तरह से विफल रही है। दिल्ली सरकार 2015 के विधानसभा चुनाव में किए गए लगभग सभी वादों को पूरा करने में असफ़ल रही है। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में 70 वादे किए थे। इस घोषणापत्र को ’70 पॉइन्ट एक्शन प्लान’ के रूप में पेश किया गया था। रिसर्च के दौरान ‘पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर’ ने पाया कि दिल्ली सरकार इन 70 वादों में से 67 को पूरा करने में नाकाम रही है। मंगलवार (अप्रैल 30, 2019) को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पीपीआरसी के निदेशक विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस रिपोर्ट को जनता के सामने रखा। इस रिपोर्ट में उन सभी वादों को ट्रैक करते हुए उनका विश्लेषण किया गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आम आदमी पार्टी अपने कार्यों को जनता के बीच प्रचारित कर रही है। पार्टी लोकसभा चुनाव भी इन्हीं के आधार पर लड़ रही है। लेकिन, रिपोर्ट में पाया गया है कि इन दोनों ही क्षेत्रों में धरातल पर स्थिति और भी बदतर हुई है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में फ्री वाई-फाई देने की बात भी कही थी लेकिन इस पर अभी तक कुछ काम नहीं हो सका है। अरविन्द केरीवाल की पार्टी ने 500 नए स्कूलों के निर्माण का वायदा किया था लेकिन अभी तक सिर्फ़ 5 स्कूलों के निर्माण का कार्य ही शुरू हो सका है। दिल्ली के स्कूलों से पास होकर निकले छात्रों में से मात्र 0.13% छात्रों को ही शिक्षा लोन मुहैया कराया गया है।

केजरीवाल की पार्टी ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। अगर स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो इस मामले में भी दिल्ली सरकार फिसड्डी साबित हुई है। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की बात की गई थी लेकिन अभी तक उस पर 60% कार्य भी नहीं हो सका है। मोहल्ला क्लीनिकों में गाय और भैंस चर रहे हैं। मोहल्ला क्लीनिकों में डॉक्टरों, दवाओं और अन्य सुविधाओं के नाम पर बेहिसाब ख़र्च किए जा रहे हैं लेकिन आवारा पशुओं के अलावा वहाँ कोई और नहीं दिखता।

दिल्ली सरकार ने केंद्र की महत्वकांक्षी आयुष्मान योजना को भी रोक रखा है। पूरे देश में 20 लाख से भी अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं लेकिन दिल्ली में इस पर अमल ही नहीं किया गया। इस योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ़्त में कराया जाता है। दिल्ली सरकार ने अपने नागरिकों को इस योजना से मरहूम रखा है। अभी तक एक भी जगह वाई-फाई सर्विस नहीं शुरू की जा सकी है। महिला सुरक्षा को लेकर किए गए वादे अधर में लटके पड़े हैं। सीसीटीवी योजना की हालत ख़राब है। जनता को सीवर की गंदगी से मिले पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे उनमें रोष है। ऐसी शिकायतों में 50% से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आम आदमी पार्टी ने जन लोकपाल और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा था लेकिन जन लोकपाल वाले मामले में भी सरकार निष्क्रिय रही है। पीपीआरसी ने यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर ही तैयार की है। विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस दौरान केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने तो AAP के आंतरिक लोकपाल एडमिरल एल रामदास को भी निकाल बाहर किया।

दोस्त की 11 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ करता था ग़ुलाम मुसतफ़ा, टोकने पर दोस्त को 5वीं मंज़िल से नीचे फेंक मार डाला

दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके से एक व्यक्ति द्वारा अपने दोस्त की ही बेटी से छेड़छाड़ करने की ख़बर आई है। यहाँ 40 वर्षीय समीर अहमद (बदला हुआ नाम) अपनी पत्नी, दो बेटों और 11 वर्षीय बेटी के साथ जमा मस्जिद की गोदनी वाली गली में रहता था। समीर सुप्रीम कोर्ट की लाइब्रेरी में इलेक्ट्रिशियन का काम करता था। समीर की ही तरह जामा मस्जिद इलाक़े में ही रहने वाला ग़ुलाम मुसतफ़ा भी वहीं इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। ग़ुलाम और समीर दोस्त थे। ग़ुलाम अक्सर समीर के घर आया-जाया करता था। दोनों ही एक-दूसरे के घर हमेशा आते-जाते रहते थे और खाना-पीना भी साथ खाते थे। रविवार (अप्रैल 28, 2019) को समीर जब घर आया तो उसकी नाबालिग बेटी ने शिकायत की कि ग़ुलाम अंकल उसके साथ गन्दी हरकतें करते हैं।

इस पर समीर को गुस्सा आया और उसने ग़ुलाम को कॉल कर फ़ौरन घर आने को कहा। जब ग़ुलाम आया तो समीर ने उसके द्वारा अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ किए जाने को लेकर सवाल पूछने के लिए बातचीत शुरू की। दोनों छत पर बात कर रहे थे। दोनों ने छत पर ही खाना भी खाया। खाते-पीते और बातचीत करते सुबह 4 बजे से भी अधिक का समय हो गया। इसके बाद समीर ने उससे अपनी बेटी के साथ ग़लत हरकत किए जाने को लेकर सवाल पुछा तो ग़ुलाम को गुस्सा आ गया और उसने समीर को 5वीं मंज़िल से नीचे फेंक दिया। समीर नीचे गली में आकर गिरा। ग़ुलाम ने समीर को नीचे फेंकने के बाद फरार होकर बचने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया।

समीर को एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने ग़ुलाम के विरुद्ध ग़ैर इरादतन हत्या और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित ग़ुलाम मुसतफ़ा उर्फ़ पप्पू को गिरफ़्तार कर लिया गया है। उसकी उम्र 23 वर्ष है। आरोपित को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने समीर के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार वालों को सौंप दिया है। ग़ुलाम ने पुलिस से कहा कि उसका इरादा हत्या करने का नहीं था बल्कि शराब के नशे में उसने समीर को धक्का दिया और वो नीचे गिर गया। जब समीर नीचे गिरा, तब पड़ोसियों की नज़र उस पर पड़ी और उसे अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन वह बच नहीं सका और उसकी मृत्यु हो गई।

शास्त्री भवन में लगी आग, राहुल गाँधी ने कहा: मोदी फाइल जला रहे हैं

दिल्ली के शास्त्री भवन में आज दोपहर यकायक आग भड़क उठी। कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के दफ्तर वाले इस भवन की आग बुझाने में दमकल विभाग की गाड़ियाँ जुट गईं। पर अभी वह इमारत पूरी तरह से ठंडी भी नहीं हो पाई होगी कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी उस पर रोटियाँ सेंकने में जुट गए। उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि मोदी सरकार फाइलें जला रही है।

निराधार आरोप

राहुल गाँधी का यह आरोप कितना निराधार है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह साल भर से ज्यादा समय से देश भर में घूम-घूम कर आरोप रक्षा मंत्रालय-प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में घोटाले का लगा रहे हैं, और उन्हें जलती फाइलें कानून, सूचना एवं प्रसारण, कॉर्पोरेट मामले, केमिकल और पेट्रोकेमिकल, व मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय वाले शास्त्री भवन में दिख रहीं हैं। जबकि इनमें से किसी मंत्रालय का मोदी सरकार पर उनके द्वारा लगाए गए इकलौते आरोप राफ़ेल मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

राहुल गाँधी को सामने आकर यह साफ़ करना चाहिए कि आखिर कौन से ‘घोटाले’ की फाइलें शास्त्री भवन में रहीं होंगी, जिन्हें मोदी सरकार उनके आरोप के मुताबिक जला रही थी?

आचार संहिता उल्लंघन: पीएम मोदी को EC ने दी क्लीन चिट, कॉन्ग्रेस ने की थी शिकायत

लोकसभा चुनाव की गहमागहमी जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस की खिसियाहट कई बार सामने आ चुकी है। कॉन्ग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की थी। आचार संहिता उल्लंघन के इसी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने क्लीन चिट दे दी है। बता दें कि महाराष्ट्र के वर्धा में राहुल गाँधी को लेकर दिए बयान के मामले में चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि पीएम ने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है।

पूरा मामला यूँ है, कॉन्ग्रेस ने आयोग से शिकायत की थी कि एक अप्रैल को महाराष्ट्र के वर्धा में एक रैली के दौरान पीएम ने राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव का मुद्दा उठाया था। कॉन्ग्रेस की शिकायत के मुताबित पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस बहुसंख्यक आबादी वाले इलाकों से हटकर वहाँ चुनाव लड़ रही है जहाँ बहुसंख्यक आबादी माइनॉरिटी में हैं। कॉन्ग्रेस की यह शिकायत पाँच अप्रैल को की गई थी।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ शिकायत की है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस ऐसे कई निराधार आरोप लगा चुकी है।

चुनाव आयोग ने चलाया अनुशासन का डंडा, आजम खान पर दूसरी बार 48 घंटे के लिए बैन

चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान पर दूसरी बार अनुशासन के तहत कार्रवाई की है। आयोग ने आजम खान को एक बार फिर से 2 दिन तक चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई है।

बता दें कि आजम खान 1 मई की सुबह 6 बजे से 48 घंटों तक के लिए चुनाव प्रचार नहीं कर पाएँगे। इन 48 घंटों के दौरान आजम खान का चुनावी रैली, रोड शो, इंटरव्यू, जनसंपर्क अभियान थम जाएगा। आजम खान ने 5 अप्रैल, 7 अप्रैल, 8 अप्रैल, 9 अप्रैल और 12 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के अलग अलग जगहों पर विवादित बयान देकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था।

बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग ने बीजेपी कैंडिडेट जया प्रदा पर आपत्तिनजक बयान देने के लिए बैन लगाया था। जया प्रदा पर टिप्पणी के लिए चुनाव आयोग ने आजम खान पर 72 घंटे का बैन लगाया था। आज़म खान के बेटे ने भी जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने आजम खान के भाषणों की जाँच में पाया कि उनके स्पीच भड़काऊ थे और उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी पर धार्मिक आधार पर टिप्पणी की थी। आयोग ने कहा है कि आजम खान के बयान चुनाव में ध्रुवीकरण पैदा कर सकते हैं, और इसका असर सिर्फ वहीं नहीं पड़ता है जहाँ ये भाषण दिए जाते हैं बल्कि सूचना के डिजिटल युग में सोशल मीडिया के ज़रिए, इसका प्रभाव पूरे देश पर भी पड़ सकता है।

हालाँकि, आजम खान ने चुनाव आयोग को भेजे अपने जवाब में बिना शर्त माफी माँगा था, लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी इस पेशकश को ठुकरा दिया था। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह आजम खान द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान की सख्त निंदा करता है और उन्हें चेतावनी देता है कि वे भविष्य में ऐसा आचरण न करें।

CJI यौन उत्पीड़न मामले में महिला ने जाँच में शामिल होने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी जिन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, ने तीन न्यायाधीशों के इन-हाउस पैनल द्वारा की जा रही जाँच से यह कहते हुए शामिल होने से इनकार किया है कि उन्हें लगता है कि वहाँ कोई न्याय मिलने की संभावना नहीं थी।

न्यायमूर्ति एसए बोबडे के नेतृत्व में वाले पैनल, जिसने सोमवार को अपना तीसरा इन-चैंबर सुनवाई किया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के सामने महिला ने अपना बयान दिया था। अब तक हुई तीन सुनवाई में, महिला ने कहा कि उसे डर लग रहा है क्योंकि उसे अकेले इसमें शामिल होना है और यहाँ तक कि उसके वकील को भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनने दिया गया।

इतना ही नहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने इस मामले की सुनवाई कर रही जजों की समिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। महिला ने समिति पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है।

महिला का आरोप है कि समिति द्वारा मुझसे बार-बार पूछा गया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत मैंने क्यों देर से की। महिला ने कहा कि तीन जजों की समिति द्वारा पूछताछ से मैं घबरा गई थी। वहाँ का माहौल अजीब था। मेरे वकील भी साथ में नहीं थे। इसके अलावा महिला ने कहा कि उसे 26 और 29 अप्रैल को दर्ज किए गए बयानों की प्रति भी नहीं दी गई।

बता दें कि इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच के लिए गठित तीन जजों की आंतरिक जाँच समिति से जस्टिस एनवी रमण ने खुद को अलग कर लिया था। दरअसल, आरोप लगाने वाली महिला कर्मचारी ने ही इस समिति में जस्ट‍िस एनवी रमण को शामिल किए जाने पर ऐतराज जताया था। महिला का कहना था कि जस्ट‍िस रमण प्रधान जस्ट‍िस गोगोई के करीबी दोस्त हैं और उनके घर पर अक्सर उनका आना-जाना रहता है।

आसाराम के बेटे नारायण साईं को दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा, ₹1 लाख का जुर्माना

गुजरात के सूरत स्थित आश्रम में दो बहनों से दुष्कर्म के मामले में सूरत की कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 30, 2019) को आसाराम के बेटे नारायण साईं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसी के साथ कोर्ट द्वारा नारायण साईं पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने शुक्रवार (अप्रैल 26, 2019) को सूरत की रहने वाली दो बहनों के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिया था। अदालत ने इस मामले पर सजा सुनाने के लिए 30 अप्रैल का दिन मुकर्रर किया था।

गौरतलब है कि इन दोनों बहनों ने 2013 में पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आसाराम और नारायण साईं ने उनके साथ बलात्कार किया। दोनों बहनों की शिकायत के बाद नारायण साईं को हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पास पीपली से दिसंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था। एक बहन ने साईं पर 2002 और 2005 के बीच सूरत में आश्रम में रहने पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था, तो वहीं पीड़िता की बड़ी बहन ने अहमदाबाद में 1997 और 2006 में आश्रम में रहने के दौरान आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

दोनों बहनों ने साईं और आसाराम के खिलाफ कथित शोषण की अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने आसाराम और उसके बेटे के खिलाफ दुष्कर्म, यौन शोषण और अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखना और अन्य अपराध के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने साईं के चार साथियों को भी गिरफ्तार किया था।

नारायण साईं के खिलाफ कोर्ट अब तक 53 गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें कई अहम गवाह भी हैं, जिन्होंने नारायण साईं को लड़कियों को अपने हवस का शिकार बनाते हुए देखा था या फिर इस कृत्य में आरोपियों की मदद की थी, लेकिन बाद में वो गवाह बन गए।

चक्रवात ‘फ़ानी’ से बचाव के लिए 1000 करोड़ रुपए का राहत फंड तैयार, Navy भी मुस्तैद

चक्रवात ‘फानी’ को हिंदुस्तान की ओर रुख कर आगे बढ़ता देखते हुए गृह मंत्रालय ने कमर कसनी शुरू कर दी है। इन्हीं तैयारियों के अंतर्गत ₹1000 करोड़ से अधिक का एक फंड उन चार राज्यों के लिए तैयार किया गया है जिनके इस चक्रवात की चपेट में आने की सम्भावना है। यह चारों राज्य भारत के पूर्वी समुद्र तट पर हैं।

पैसा सीधे राज्यों के आपदा रिस्पॉन्स फंड में

यह धनराशि चारों राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा की राज्य सरकारों के आपदा रिस्पॉन्स फंड में सीधे जमा की जाएगी। तमिलनाडु को ₹309.75 करोड़, आंध्र प्रदेश ₹200.25 करोड़, ओडिशा को ₹340.875 करोड़ और पश्चिम बंगाल को ₹235.50 करोड़ दिए जाएँगे। कल (सोमवार) शाम से हाई अलर्ट पर चल रहे यह राज्य इस राशि का उपयोग नुक्सान की रोकथाम और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए करेंगे।

नेवी भी चौकस, बंगाल की खाड़ी में है तूफ़ान का उद्गम  

फ़ानी तूफ़ान का उद्गम बंगाल की खाड़ी में चेन्नै से 690 किमी और तमिलनाडु के ही अन्य शहर मछलीपट्टनम से 760 km दक्षिणपूर्व में बताया जा रहा है। गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने आज शाम को ही यह जानकारी दी कि पहले उत्तर की ओर बढ़ते इस तूफ़ान के बारे में अनुमान है कि 1 मई (कल, बुधवार) की शाम के आसपास यह ओडिशा की तरफ़ मुड़ जाएगा।

पूर्वी नेवल कमांड (ENC) को भी हाई अलर्ट पर मानवीय सहायता के लिए तैयार रहने को कहा गया है, इस आशय से नेवी के एक प्रवक्ता ने मंगलवार शाम को जानकारी दी है। चेन्नै और विशाखापत्तनम स्थित भारतीय नेवी के पोतों को आपदा सहायता, बचाव अभियान, मेडिकल सहायता आदि के लिए स्टैंडबाई पर रखा गया है। इन पोतों पर डॉक्टरों, दवाओं, कपड़ों, बचाव अभियान की रबर नावों सहित सभी सामग्री को संग्रहित कर लिया गया है।

नेवी कमांड स्थिति पर पैनी नजर रखे है और चारों राज्यों की राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित किए हुए है

PM मोदी के खिलाफ लड़ रहे महागठबंधन प्रत्याशी तेज बहादुर का खारिज हो सकता है नामांकन, EC ने भेजा नोटिस

वाराणसी लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की तरफ से पीएम मोदी के खिलाफ मैदान में उतारे गए बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन खारिज हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को सपा की तरफ से दाखिल किए गए एक नामांकन पत्र की जाँच करते हुए निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक ने नोटिस जारी करते हुए तेज बहादुर से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र माँगा है।

आयोग की ओर से जारी किए गए नोटिस में तेज बहादुर को निर्देश दिए गए हैं कि वह बीएसएफ से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आएँ, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया। निर्वाचन आयोग ने इस प्रमाण पत्र को जमा करने के लिए बुधवार (मई 1, 2019) को दोपहर 11 बजे तक का वक्त दिया है। अगर तेज बहादुर समय रहते अनापत्ति पत्र जमा नहीं कर पाते हैं, तो उनका नामांकन खारिज हो सकता है।

वहीं, इससे पहले तेज बहादुर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में जो पर्चा भरा था उसमें प्रस्तावकों के नाम को लेकर गड़बड़ियाँ पायी गई थी, जिसकी वजह से उसे रद्द कर दिया गया है।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी ने इसे बीजेपी की साजिश करार देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती कि तेज बहादुर यादव नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरें। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर पर्यवेक्षक ने 24 घंटे के भीतर बीएसएफ में भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्तगी को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र माँगा है और राजनीतिक साजिश के कारण ही ऐसा जान-बूझकर किया गया है। हालाँकि, अभी तक जिला प्रशासन की ओर से इसे लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।

बता दें कि,पहले समाजवादी पार्टी ने वाराणसी लोकसभा सीट से शालिनी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को अपना कैंडिडेट बताते हुए पार्टी नेताओं के माध्यम से उनका भी नामांकन करा दिया। मगर तेज बहादुर यादव के चुनाव लड़ने पर अभी भी संशय बरकरार है।

गौरतलब है कि तेजबहादुर यादव ने बीएसएफ में खाने को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने वहाँ दिए जाने वाले भोजन को लेकर वीडियो बनाया था और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया था। उनके ख़िलाफ़ 2 मोबाइल फोन लेकर ऑपरेशनल ड्यूटी पर जाने और भोजन की गुणवत्ता को लेकर ग़लत अफवाह फैलाने का मामला साबित हुआ था, जिसके बाद बीएसएफ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तेज बहादुर यादव को बर्खास्त कर दिया था।

वाराणसी में राड़ा होना तय: SP जुटा शालिनी यादव को मनाने में, नामांकन वापस न लेने से बढ़ीं तेज बहादुर की मुश्किलें

किसी भी शर्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने की मशक्कत में जुटे SP और कॉन्ग्रेस की माथापच्ची के कारण वाराणसी लोकसभा सीट पर हर दिन नया मनोरंजन देखने को मिल रहा है। एक ओर जहाँ SP द्वारा सेना में मिलने वाली पीली दाल का वीडियो बनाने से चर्चा में आए BSF से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को टिकट दिए जाने के बाद मीडिया उनके समर्थन में माहौल बनाने में जुटा है, वहीं SP अभी अंदरूनी समस्याओं से ही जूझती नजर आ रही है।

आसान काम नहीं है शालिनी यादव को मनाना

BSF के पूर्व जवान तेज बहादुर के लिए समाजवादी पार्टी (SP) ने जिस शालिनी यादव का टिकट काटा है, वो पूर्वांचल के बड़े राजनीतिक घराने से संबंध रखती हैं। शालिनी यादव अब भी PM नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से उम्मीदवार हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। माना जा रहा है कि शालिनी यादव का अपना जनाधार है, इसलिए SP के नए उम्मीदवार और BSF के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शायद इसीलिए पार्टी अब शालिनी को मनाने में जुटी हुई है।

शालिनी यादव पूर्वांचल में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे श्यामलाल यादव की बहू हैं। श्यामलाल यादव 1984 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर वाराणसी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वो राज्यसभा के उप सभापति रहे थे। श्यामलाल 1957 से 1962 और 1967 से 1968 तक UP विधानसभा के सदस्य और केंद्रीय कृषि मंत्री भी रह चुके हैं। कुल मिलाकर शालिनी यादव बनारस के एक बड़े कॉन्ग्रेस परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि वो 22 अप्रैल को ही कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर SP में शामिल हुई थीं। ऐसे में उन्हें मनाना SP के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

शालिनी ने वाराणसी के मेयर पद का चुनाव लड़ा था और उन्हें सवा लाख वोट मिले थे। हालाँकि, वो हार गई थीं। वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएट हैं। नामांकन वापसी के मामले पर शालिनी यादव की नाराजगी SP की परेशानी बढ़ा रही है।

यदि शालिनी यादव अपना नामांकन वापस नहीं लेती हैं, तो तेज बहादुर के साथ ही SP की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। शालिनी का टिकट काटना एक तरह से महिलाओं का अपमान भी है, वो भी तब, जबकि पूर्वांचल में वैसे ही बहुत कम महिलाएँ मैदान में हैं।

शालिनी यादव ने अभी अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका कहना है कि अगर अखिलेश यादव कहेंगे, तो वह अपना नामांकन वापस ले लेंगी। साथ ही, उन्होंने कहा है कि अगर पार्टी की तरफ से नहीं कहा जाएगा तो वो ऐसा नहीं करेंगी और चुनाव लड़ेंगी। इस पूरे प्रकरण में BJP का कोई नुकसान नहीं है, लेकिन SP का वोट प्रतिशत जरूर कम हो सकता है। इसका कारण यह है कि शालिनी यादव तेज बहादुर के मुकाबले एक गंभीर प्रत्याशी हैं।

बता दें कि BSF से बर्खास्त तेज बहादुर ने सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया है। जबकि, वो पहले ही निर्दलीय तौर पर भी नामांकन कर चुके थे।