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पुलवामा जैसे आतंकी हमलों से निपटने के लिए क्या कर रही है भारत सरकार? एक नज़र

मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को मजबूत और अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई सराहनीय कदम उठाए हैं। देश की रक्षा एवं सुरक्षा देश के विकास का ही एक अंग है। हम सुरक्षित हुए बिना विकसित होने की कल्पना नहीं कर सकते हैं। वर्तमान सरकार पड़ोसी देशों से सामरिक बढ़त लेने के साथ ही सेना को और उन्नत बनाने के लिए निरंतर सेना का आधुनिकीकरण करने के लिए प्रयासरत रही है। विदेशों से उच्च गुणवत्ता वाले हथियार और मिसाइलों के साथ ही इस सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि अधिक से अधिक रक्षा उपकरणों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ही किया जाए।

सेना के सशक्तिकरण के लिए हाल ही में लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों पर एक नज़र

72,400 असाल्ट राइफल के लिए अमेरिकी कंपनी से करार

भारत ने अमेरिका से 72,400 असाल्ट राइफलें खरीदने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। करीब ₹700 करोड़ में ये राइफलें खरीदी जाएँगी। अमेरिका और कई यूरोपीय देशों की सेना इस राइफल का इस्तेमाल करती हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी महीने सिग सौयर राइफलों की खरीद की मंजूरी दी थी। चीन से लगती 3,600 किलोमीटर की लंबी सीमा पर तैनात जवान इस राइफल का इस्तेमाल करेंगे।

इज़राइल से ख़रीदे 2 AWACS

भारत ने इज़राइल से 2 और फाल्कन एयरबॉर्न वॉर्निंग एंड कण्ट्रोल सिस्टम (“Phalcon” Airborne Warning And Control System) एयरक्राफ्ट ख़रीदने का निर्णय लिया है। इसे AWACS भी कहा जाता है। अभी हाल ही में भारत ने एयर डिफेंस रडार (ADR) के लिए इज़राइल से ₹4577 करोड़ का करार किया है। इज़राइल भारत के शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है। भारतीय सेना इस स्थिति को मज़बूत करते हुए इज़राइल से अतिरिक्त हेरॉन (Heron) और हारोप (Harop) भी ख़रीदना चाहती है। ये दोनों ही मानवरहित विमान हैं, जो दुश्मन के रडार में या अन्य लक्ष्य पर विस्फोट करने के लिए क्रूज़ मिसाइल का भी कार्य करते हैं।

भारत-रूस के बीच 7.47 लाख AK राइफ़लों का समझौता 

इसमें रूस के साथ मिलकर लगभग 7,47,000 क्लाशिनिकोव राइफ़लों के निर्माण का समझौता शामिल है। इन राइफ़लों को बनाने के लिए प्लांट उत्तर प्रदेश के अमेठी में लगाया जाएगा। बता दें इससे पहले भारत ने एक अमेरिकी कंपनी के साथ भी 72,400 असॉल्ट राइफ़ल्स की ख़रीद का समझौता किया था।

54 इज़रायली HAROP किलर ड्रोन

रक्षा मंत्रालय द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय वायु सेना की मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए 54 इजरायली HAROP किलर ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी गई है। ये किलर ड्रोन दुश्मन के हाई-वैल्यू मिलिट्री टारगेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकता है। इन घातक ड्रोनों को चीन और पाकिस्तान की सीमा पर तैनात किया जाएगा। इससे आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना और भी आसान हो जाएगा। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन भी आसानी से अंजाम देने में सक्षम होगी हमारी सेना। मौजूदा समय में वायुसेना के पास 110 ड्रोन हैं।

चिनूक सैन्य हेलिकॉप्टर

अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोईंग ने रविवार (10 फ़रवरी) को भारतीय वायुसेना को 4 चिनूक सैन्य हेलिकॉप्टर सौंप दिए। इन हेलीकॉप्टर्स को गुजरात में मुंद्रा बंदरगाह पर उतारा गया। कंपनी द्वारा जारी बयान के अनुसार सीएच-4एफ़ (I) चिनूक हेलिकॉप्टर को चंडीगढ़ ले जाया जाएगा, वहाँ उन्हें औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा। इसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान या सामान्य स्थिति में हथियारों, उपकरणों और ईंधन को ढोने में किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल मानवीय और आपदा राहत अभियानों में राहत सामग्री पहुँचाने और बड़ी सँख्या में लोगों को बचाने के लिए भी किया जाता है। चिनूक वही हेलिकॉप्टर है, जिसकी मदद से अमेरिका ने कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का ख़ात्मा किया था।

AN- 32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पहुँचा पाक्योंग एयरपोर्ट 

हाल ही में वायुसेना ने देश के सबसे ऊँचे हवाईअड्डों में से एक- पाक्योंग एयरपोर्ट पर अपना परिवहन विमान AN-32 को उतार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह एयरपोर्ट सामरिक रूप से भी भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। भारतीय वायुसेना (IAF) के ‘Antonov-32 (AN- 32)’ ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को पाक्योंग एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक लैंड कराया गया। यह एयरपोर्ट भारत-चीन सीमा से सिर्फ 60 किमी की दूरी पर स्थित है। राजधानी गंगटोक से इसकी दूरी क़रीब 16 KM है।

S-400 एयर डिफ़ेन्स सिस्टम 

रूस के उप विदेश मंत्री सर्जे रयाब्कोव ने जनवरी 9, 2019 को कहा कि रूस भारत को S-400 एयर डिफ़ेन्स मिसाइल सिस्टम पूर्व निर्धारित समय पर ही देगा तथा डिलीवरी में किसी भी प्रकार की देर नहीं की जाएगी। भारत-रूस के मध्य 40,000 करोड़ रुपये में S-400 ट्रायंफ खरीदने का समझौता गत वर्ष सम्पन्न हुआ था जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। S-400 एक इंटीग्रेटड मिसाइल सिस्टम है जो दूर और पास दोनों प्रकार के लक्ष्यों को भेद सकता है। युद्धनीति के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह एक प्रतिरक्षात्मक प्रणाली है अर्थात इसका प्रयोग पहले हमला करने के लिए नहीं किया जाता। S-400 की इन चार मिसाइलों की रेंज है: 40 किमी, 120-150 किमी, 200-250 किमी और 400 किमी।

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढाँचे का विकास

हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने अंडमान निकोबार द्वीपसमूह क्षेत्र में अपने सैन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले 10 वर्षों के लिए ₹5,650 करोड़ लागत की योजना को अंतरिम रूप दे दिया है। इसके ज़रिए अब अतिरिक्त युद्धपोत, विमान, ड्रोन, मिसाइल बैट्री और पैदल सैनिकों की तैनाती की राह सुलभ हो जाएगी। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को रोकने के लिए इस योजना को अमल में लाया गया है।

INS अरिहंत

नवंबर 5, 2018 को भारत की प्रथम स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिहंत ने समुद्र में गश्त लगाई थी। इसे Ship Submersible Ballistic Nuclear (SSBN) सबमरीन कहा जाता है। जल के भीतर होने से अरिहंत शत्रु की नज़र से लगभग ओझल ही रहेगी जिसके कारण भारतीय नौसेना को रणनीतिक लाभ होगा। अरिहंत 6000 टन की 367 फिट लंबी पनडुब्बी है जो K-15 बैलिस्टिक मिसाइल से लैस की जा सकती है। इस मिसाइल की रेंज 750 किमी तक मार करने की है। 

K-9 वज्र

इस सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्ज़र को लार्सेन एंड टर्बो नाम की कंपनी ने तैयार किया है। नवंबर 2018 को देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय सेना के तोपखाने में K-9 वज्र को शामिल करने की घोषणा की थी। पाकिस्तान से सटे बाड़मेर व अन्य रेगिस्तानी बार्डर वाले इलाके के लिहाज से यह बेहद उपयोगी है। K-9 वज्र के ज़रिए 28 से 38 किलोमीटर के रेंज में वार किया जा सकता है।

₹22,563 करोड़ की वृद्धि के साथ रक्षा बजट ₹3 लाख करोड़ के पार –

वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान रक्षा बजट में मात्र ₹22,563 करोड़ की वृद्धि की गई है। इससे सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण प्रभावित होगा। गत वर्ष रक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने वाइस चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद्र ने कहा था कि बजट में जितना धन आवंटित किया जा रहा है उससे लिमिटेड लायबिलिटी तक पूरी नहीं होती।स्पष्ट है कि यह बजट सेना के नवीनीकरण और आधुनिकरण में लाभदायक साबित होगा।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनेंगे नेवी के हेलिकॉप्टर्स

भारत ने 111 नौसैन्य हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अभिरूचि पत्र जारी किया। फरवरी 12, 2019 को रक्षा मंत्रालय ने 111 नौसेना उपयोगिता हेलीकॉप्टरों (एनयूएच) की खरीद के लिए संभावित भारतीय सामरिक साझेदारों एवं विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के नाम छांटने के लिए अभिरूचि पत्र यानी ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ जारी किया है। ये हेलीकॉप्टर चेतक मॉडल की जगह लेंगे और इनका इस्तेमाल हताहतों की तलाश, बचाव या उन्हें सुरक्षित निकाले जाने में किया जाएगा। इन 111 में से 95 हेलीकॉप्टरों का निर्माण भारत में उसके द्वारा चुने गए भारतीय सामरिक साझेदार करेंगे। इस कई अरब डॉलर वाले प्रस्ताव को पिछले साल अगस्त में रक्षा खरीद परिषद ने मंजूरी दी थी। इस परियोजना से सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और भारत में हेलीकॉप्टरों की निर्माण क्षमता को प्रोत्साहित करेगी।

CRPF के एक दर्जन से अधिक जवान आतंकी हमले में शहीद, 45 से अधिक घायल

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में अवंतीपोरा इलाके के करीब सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों द्वार किए गए हमले में सीआरपीएफ के एक दर्जन से अधिक जवान शहीद हो गए हैं। शहीद जवानों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर स्थित अवंतीपोरा इलाके में आतंकियों ने जवानों की गाड़ी को निशाना बनाते हुए आतंकी घटना को अंजाम दिया।

हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के काफ़िले पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन ने आत्मघाती हमला किया जिसमें करीब 40 जवान घायल, जबकि 18 जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।

उरी के बाद यह बड़ा आतंकी हमला

घायल जवानों को नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि जिस वक्त सीआरपीएफ के काफ़िले पर हमला किया गया उस वक्त करीब दर्जनभर गाड़ियों में सवार होकर जवानों का काफिला निकल रहा था। बता दें कि उरी हमले के बाद यह बड़ा आतंकी हमला है। उरी हमले में 19 जवान शहीद हुए थे।

हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “जैश-ए-मोहम्मद ने फिदायीन हमले का दावा किया है। यह हमला 2004-05 के पहले के काले दिनों की याद दिलाते हैं।”

जैश-ए-मोहम्मद ने ली हमले की जिम्मेदारी, आदिल डार ने रची साजिश

हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। बताया जा रहा है कि इस आतंकी घटना को अंजाम देने के पीछे आदिल अहमद डार नाम के आतंकी का हाथ है। आदिल पुलवामा के काकापोरा इलाके का रहने वाला है। बता दें कि, हमले से पहले आतंकियों ने पहले हाइवे खड़ी एक कार में आईईडी से ब्लास्ट किया और फिर सीआरपीएफ जवानों के वाहनों पर हथियारों से जमकर फ़ायरिंग की।

जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर ट्रैफिक बंद, सर्च ऑपरेशन जारी

हमले की जानकारी मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की अन्य कंपनियों को अवंतिपोरा भेजा दिया गया है और आतंकियों का सर्च ऑपरेशन जारी है। हमले के बाद से जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर ट्रैफिक को बंद करते हुए बड़ा सर्च ऑपरेशन किया जा रहा है। इसके अलावा पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर जिलों में हाई अलर्ट भी जारी किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की निंदा करते हुए कहा है कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

J&K में आग से खेल रही सरकार: लद्दाख डिविज़न पर महबूबा मुफ़्ती की बौखलाहट

पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती आए दिन अपने बयानों से विवादों में घिर जाती हैं। आज फिर उनका एक बयान सामने आया, जिसमें एक बार फिर वो केंद्र को घेरने की कोशिश में दिखीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यपाल सत्यपाल मलिक के ज़रिए राज्य में आग से खेलने का प्रयास कर रही है। राज्य की मुस्लिम बहुल चरित्र को तोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र राज्यपाल को माध्यम बनाकर जो भी निर्णय ले रही है, वो राज्य के लोगों और उनके हितों के ख़िलाफ़ है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संवाददाताओं से मुख़ातिब होते हुए उन्होंने कहा, “पूरे देश और केंद्र को स्वीकार करना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य है और बड़े समुदाय के साथ-साथ अल्पसंख्यकों की भी भावनाओं का ख़्याल रखते हुए निर्णय लिए जाने चाहिए।”

बीजेपी के ख़िलाफ़त में महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि उन्होंने (बीजेपी) न सिर्फ़ पीर पंजाल और चेनाब को अनदेखा करके एक डिविज़न का गठन किया बल्कि इसके मुख्यालय के चयन में भी भेदभाव किया। करगिल के लिए लेह श्रीनगर से ज़्यादा दूर है।

बता दें कि राज्य प्रशासनिक परिषद ने पिछले सप्ताह ही राज्य में एक अलग डिविज़न लद्दाख का गठन किया था और लेह को इसका मुख्यालय बनाया था। इसका करगिल में विरोध भी हुआ था। इसके पीछे मुफ़्ती ने बीजेपी का हाथ होने की संभावना जताई।

महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा, ”हम राज्य में अब लिए जा रहे निर्णयों में केन्द्र सरकार का हाथ देख रहे हैं, यह एजेंडा लगता है। जिसे हमने बीजेपी को लागू करने नहीं दिया (जब पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार सत्ता में थी) वह अब राज्यपाल के ज़रिए लागू किया जा रहा है। इसके कारण करगिल में एक विस्फोटक स्थिति हुई, हालाँकि यह एक शांतिपूर्ण इलाक़ा है।”

Valentine’s Day: हैदराबाद में बजरंग दल के सदस्यों ने प्रेमी जोड़े की कराई शादी

हैदराबाद के मेडचल में एक कंडलाकोया पार्क है। मीडिया से आ रही ख़बरों के मुताबिक इस पार्क में वेलेंटाइन डे के मौके पर बजरंग दल के सदस्यों द्वारा एक प्रेमी जोड़े की शादी कराई गई है। हालाँकि, इस मामले में शादी के बाद से भगवा-पहने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ प्रेमी जोड़े द्वारा कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज़ नहीं की गई है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि दल की मौजूदगी में यह शादी युगल की सहमति से किया गया।

वेलेंटाइन के मौके पर प्रेमी जोड़े को शादी कराने के बाद बजरंग दल के सदस्यों ने कहा कि हमलोग वेलेंटाइन डे जश्न के ख़िलाफ़ हैं। वेलेंटाइन डे हिंदू परंपराओं के ख़िलाफ़ है। यह दिन हमारे देश की संस्कृति का प्रतीक नहीं है।

फरवरी के पहले ही सप्ताह से बजरंग दल ने शहर में वेलेंटाइन डे जश्न के ख़िलाफ़ बाइक रैलियों के जरिए विरोध प्रदर्शन किया था। इस रैली के माध्यम से बजरंग दल के लोगों ने वेलेंटाइन डे मनाने के ख़िलाफ़ प्रेमी जोड़े को सतर्क किया था। यही नहीं बजरंग दल के सदस्यों ने प्रेमी जोड़े को किसी पार्क या पब में जाकर वेलेंटाइन डे को सेलीब्रेट करने का भी विरोध किया था।

बता दें कि एक हफ्ते पहले, बजरंग दल ने चेतावनी जारी की थी कि तेलंगाना में कहीं भी अगर कोई जोड़ा वेलेंटाइन डे पर पाया जाता है, तो उनके माता-पिता को बुलाया जाएगा और उसके बाद अभिवावक के सामने इन प्रेमी जोड़े की काउंसिलिंग की जाएगी।

‘बच्चों की कसम है’ से लेकर, उसी कॉन्ग्रेस सपोर्ट के लिए ‘लालायित’ सड़जी… और कितना गिरेंगे?

देश के सबसे ईमानदार नेता केजरीवाल जी इन दिनों दुविधा के दौर से गुज़र रहे हैं। वो साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाकर भी लोकसभा चुनाव में खुद को खड़ा नहीं कर पा रहे हैं। कभी देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए वो बंगाल जाकर ममता की रैली में शामिल हो रहे हैं, तो कभी खुद ही दिल्ली में रैली निकाल रहे हैं। जिन विपक्षी नेताओं से उनका किसी समय में 36 का आँकड़ा था, उनके गले लगने में भी सीएम साहब को इस समय कोई गुरेज नहीं है।

हाल ही में केजरीवाल साहब विपक्ष की रणनीति के लिए एनसीपी के नेता शरद पवार के घर हुई बैठक में शामिल हुए। उनके साथ इस बैठक में बंगाल सीएम ममता और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी थे।

बुधवार को देर रात हुई इस बैठक के बाद केजरीवाल का बयान आया है कि दिल्ली में गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेस ने लगभग मना कर दिया है। जी हाँ, एक बार फिर से पढ़िए… केजरीवाल ने आज गुरूवार (फरवरी 14, 2019) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हमारे मन में देश को लेकर बहुत ज्यादा चिंता है, इसी वजह से हम लालायित हैं, उन्होंने (कॉन्ग्रेस) ने लगभग मना कर दिया है।”

यह वचन हैं माननीय दिल्ली सीएम श्री अरविंद केजरीवाल के… देश के प्रति अटूट चिंता दिखाने वाले महानुभाव चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस उनके साथ गठबंधन कर ले। ये वही केजरीवाल हैं जो कभी कॉन्ग्रेस को वोट देने का मतलब भाजपा को वोट देना ही कहते थे, और आज भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए कॉन्ग्रेस से गठबंधन करने के लिए लालायित हुए जा रहे हैं। ये उन्हीं केजरीवाल के बोल हैं जिन्होंने कभी कॉन्ग्रेस से सपोर्ट के मुद्दे पर बच्चों की कसम खाते हुए कहा था कि उनसे गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता।

केजरीवाल के मीडिया में दिए इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनका खूब चुटकी ली जा रही है। और, ऐसा हो भी क्यों न, अपने आप को सबसे ईमानदार पार्टी कहने वाले केजरीवाल ने कुछ समय पहले साल 2011 में हुए पीएनबी स्कैम को केंद्र में रखकर कॉन्ग्रेस और भाजपा पर हमला बोला था। उनका कहना था कि जिन घोटालों से आज भाजपा कमा रही है, उनसे कभी कॉन्ग्रेस कमाई करती थी।

सवाल है कि जिस कॉन्ग्रेस की सीएम शीला दीक्षित को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ केजरीवाल कभी 370 पेज के सबूत दिखाकर, जेल में भेजने की बात करते थे, उन्हें केजरीवाल ने बीतते समय के साथ कहाँ पर गायब कर दिया? शीला दीक्षित को ‘आप’ ने जेल भेजने का जो वादा किया था उसे लगता है ‘आप’ भूल गए हैं। कोई बात नहीं…लेकिन यह तो नहीं भूलना चाहिए कि जिस कॉन्ग्रेस से समर्थन के लिए लार टपक रही है उसी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाकर आपने दिल्ली की जनता से वोट माँगा था।

लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने किरण बेदी के चुनाव लड़ने पर दिल्ली के आटो रिक्शा तक पर उन्हें अवसरवादी कहलवा दिया था। लेकिन, इस बार उनका इस तरह से लालायित होना राष्ट्रभक्ति है। क्योंकि उन्हें देश की चिंता खाए जा रही है। देश हित में आज वो कॉन्ग्रेस के साथ क्या सभी विपक्षी नेताओं के साथ जुड़ने को तैयार हैं।

जिन शरद पवार के घर जाकर केजरीवाल मोदी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए गठबंधन पर बातचीत करके आए है, उन्हीं शरद पवार से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पर केजरीवाल दस दिन का अनशन कर चुके हैं। इस पर विधायक कपिल शर्मा ने तंज भी कसा है कि जो करप्शन से लड़ने आया था वो शरद पवार के सोफे पर जाकर पड़ा है। साथ ही कुमार विश्वास ने भी सीएम साहब की इस हरकत पर उन्हें आत्ममुग्ध बौना कहकर बुलाया। क्योंकि शरद पवार ही वो शख्स हैं जिन्होंने लोकपाल बिल का भरी संसद में मज़ाक उड़ाया था।

इतना ही नहीं, साल 2013 में “हैलो, मैं अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूँ…फोन मत काटिएगा” का तरीका अपनाकर घर-घर के लोगों के मन में ईमानदार सरकार की आस जगाने वाले सीएम महोदय ने उस दौरान अपने बच्चों की कसमें तक खाई थी कि वो न ही कॉन्ग्रेस को समर्थन देंगे और न उनसे समर्थन लेंगे। लेकिन, नतीजों के कुछ दिन बाद ही ‘सड़जी’ नायक के अनिल कपूर जैसे मुख्यमंत्री पद पर बैठे।

ऐसे ही, समय-समय पर कोर्ट द्वारा अपराधी करार दिए जा चुके लालू जैसे भ्रष्ट नेताओं से गले मिलना भी इनकी ईमानदारी की चमक बढ़ाता रहा है। पहले यही केजरीवाल जी अपने आप को छोड़कर हर किसी को भ्रष्ट मानते थे, वो अब अवसरवाद की राजनीति के कारण स्वयं को शायद गंगा मानकर सबसे गले मिलते जा रहे हैं।

आज केजरीवाल साहिब को भले ही अपने किए कारनामें याद न हों, लेकिन मासूम जनता का ख्याल तो आना ही चाहिए। विपक्षी नेताओं के साथ इस तरह उनकी रणनीति तय करना स्पष्ट करता है कि उनका एजेंडा जन कल्याण नहीं बल्क़ि सिर्फ राजनीति और सत्ता लोलुपता ही रहा है। एक आम आदमी का चोला पहनकर और बड़े-बड़े नेताओं को भ्रष्ट बता कर जो साहब कभी ईमानदार छवि की वजह से मुख्यमंत्री बने थे, उन्होंने आज अपनी गलीच राजनीति के चलते बड़े से बडे़ घाघ राजनेता को भी पीछे छोड़ दिया है।

जम्मू कश्मीर में अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रह रहे लोगों को भी मिलेगा 3% आरक्षण, राज्यपाल ने दी स्वीकृति

जम्मू कश्मीर राज्य में नियंत्रण रेखा (LoC) पर रहने वाले लोगों की तर्ज़ पर अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रह रहे लोगों को भी 3% आरक्षण का लाभ मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोग काफी समय से इसकी माँग कर रहे थे। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू कश्मीर राज्य में नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर रहने वालों के लिए 3% आरक्षण वाले दस्तावेज़ पर अपनी स्वीकृति प्रदान करते हुए केंद्र की मोदी सरकार को भेज दिया है। सालों से यहाँ के रहने वाले लोग इसकी माँग कर रहे थे।

अब केंद्रीय कैबिनेट अगर इस पर अध्यादेश लाती है तो इसका लाभ जम्मू कश्मीर राज्य में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर रह रहे लोगों को मिल सकेगा। कानून बनने के बाद कठुआ,आरएसपुरा, हीरानगर, साँभा, मड़ क्षेत्र तक जो अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोग हैं, उन्हें 3% आरक्षण का लाभ एलोसी की तर्ज़ पर मिल सकेगा। बता दें कि फ़िलहाल लोकसभा भंग है और इसका लाभ देने के लिए केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना होगा। उम्मीद की जा रही है कि सरकार अध्यादेश लाकर जल्द ही इसे मंजूरी दे देगी।

करीब 3 लाख लोगों को मिल सकेगा लाभ

कानून बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले करीब 3 लाख लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की लंबाई 198 किमी है जबकि एलओसी करीब 744 किमी है। इस इलाके में आए दिन पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी होती रहती है, जिसका शिकार यहाँ के लोग होते हैं।

गोलीबारी के चलते यहाँ रहने वाले लोगों को काफ़ी नुकसान उठना पड़ता है। यही कारण है कि एलओसी की तर्ज़ पर आरक्षण की माँग सालों से चली आ रही थी। जम्मू कश्मीर के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रविन्द्र रैना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इसकी जानकारी दी।

रविन्द्र रैना ने कहा, “अब अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को भी एलोसी की तर्ज़ पर लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की असेम्बली में बीजेपी हमेशा से अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के समीप रह रहे लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए इसकी माँग करती आई है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल से मंजूरी के बाद इस केंद्र के पास भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द अध्यादेश लाकर इसे मंजूरी दी जाएगी।”

70 सालों तक सरकारों ने यहाँ के नागरिकों को किया अनदेखा

इस दौरान रविन्द्र रैना ने कहा, “70 सालों से यहाँ कई सरकारें रहीं लेकिन उन्होंने यहाँ के लोगों को हमेशा अनदेखा किया और सिर्फ़ राजनीति की।” उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने यहाँ पर बॉर्डर के पास 20 हजार से ऊपर बंकरों का निर्माण शुरू कराया है। साथ ही बड़े-बड़े सीमा भवन भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे यहाँ के नवजवानों को लाभ मिलेगा।

UP शराब कांड में मुख्य आरोपित RJD नेता गिरफ़्तार, बिहार से है कनेक्शन

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ज़हरीली शराब के कारण 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। इस शराब कांड ने दोनों ही राज्यों की सरकार को हिला कर रख दिया। राज्य सरकार की गंभीरता की वजह से दोनों ही राज्यों की पुलिस ने इस मामले में 346 केस दर्ज किए थे। इसी मामले में पुलिस ने बिहार के राजद (राष्ट्रीय जनता दल) नेता हरेंद्र यादव को गिरफ़्तार किया है।

सरकार के दबाव की वजह से पुलिस ने लगातार छापेमारी की। इसके कारण दोनों राज्यों में लगभग 10,000 लीटर से ज़्यादा अवैध शराब और 75,000 किलो से ज़्यादा लहन (जहरीला पदार्थ, जिससे लोकल शराब बनाई जाती है) पकड़ी गई। छापेमारी के दौरान लगभग 200 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। आपको बता दें कि मरने वालों में सहारनपुर के 70 जबकि हरिद्वार के 32 लोग हैं।

इस मामले में यूपी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। यूपी पुलिस ने इस मामले में छापेमारी करके शराब माफ़िया हरेंद्र यादव को गिरफ़्तार किया है। हरेंद्र यादव बिहार के बिसंभरपुर थाने के भोजछापर गाँव का रहने वाला है। हरेंद्र आज से नहीं बल्कि दो दशक के ज़्यादा समय से राजद से जुड़ा हुआ है। यही नहीं, हरेंद्र यादव की पत्नी बाचो देवी सलेहपुर पंचायत से बीडीसी सदस्य भी है। यूपी पुलिस ने हरेंद्र को राजस्थान के भिलवाड़ा से गिरफ़्तार किया।

बता दें कि हरेंद्र उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाक़ों में शराब बनाकर बेचने का कारोबार करता था। पिछले दिनों बेदूपार एहतमाली, जवहीं दयाल चैनपट्टी, खैरटिया जलाल छापर गाँव के 20 लोगों की मौत हो गई थी। यूपी के इस क्षेत्र में हरेंद्र यादव द्वारा बनाई गई शराब बिकती थी। यही वजह है कि शराब कांड में नाम आते ही हरेंद्र के परिवार के सभी लोग भूमिगत हो गए थे। हरेंद्र पर कुचायकोट, विसंभरपुर, गोपालपुर थाने में शराब तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि इस शराब कांड के बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित सपा के दफ़्तर में कहा था कि योगी सरकार ने शराब पर गौ कल्याण टैक्स लगाया है। सरकार ने लोगों को लालच दिया है कि गाय सेवा सिर्फ़ तभी अच्छी होगी, जब लोग शराब का ज़्यादा सेवन करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा था कि ग़रीब को नहीं पता है कि उसे कौन-सी शराब पीनी है। लेकिन सरकार को सब पता है। सरकार शराब पीने वालों को बढ़ाना चाहती है। उनका मानना है कि सरकार को यह भी पता है कि कौन ऐसी ज़हरीली शराब बना रहा है।

अखिलेश यादव के ऐसे बयानों को सुनकर लगता है कि योगी सरकार पर लगातार किसी भी मामले में, किसी भी तरह से आरोप लगाने वाले पूर्व सीएम अपना समय भूल गए हैं। योगी सरकार पर ऊँगली उठाने वाले अखिलेश भूल रहे हैं कि उनके राज में उन्नाव और लखनऊ में 33 लोगों की मौतें ज़हरीली शराब पीने से हुई थी। इसके बाद तत्कालीन सरकार और प्रशासन की ओर से काफ़ी बड़े-बडे़ दावे भी किए गए थे।

ऐसे में अखिलेश यादव का इस मामले पर योगी सरकार को घेरना बेहद शर्मनाक है क्योंकि वो खुद भी ऐसी स्थिति का सामना अपने शासनकाल में कर चुके हैं।

PM मोदी के साथ भद्दा मज़ाक, ट्विटर पर कॉन्ग्रेस को मिला ईंट का जवाब पत्थर से

कॉन्ग्रेस पार्टी आज तक भाजपा के ऊपर आईटी सेल जैसा आरोप लगाती रही है। भाजपा को घेरने के लिए कॉन्ग्रेस ने न जाने कितने आम लोगों को भी पेड ट्रोल्स का तमगा बाँट दिया है। लेकिन इन सबके बीच देश की सबसे पुरानी पार्टी खुद कब ट्रोल बन गई, उसे पता ही नहीं चला।

वैलेंटाइन डे पर 14 फरवरी को दोपहर में कॉन्ग्रेस अपने ट्विटर हैंडल से एक कार्टून कैरेक्टर जारी करती है। यह कुछ और नहीं बल्कि पीएम मोदी को चौकीदार की ड्रेस पहना कर एक लाइन का तंज मारता हुआ कार्टून है। इसके बाद भाजपा के अन्य नेताओं के लिए भी ऐसे ही भद्दे कैरेक्टर कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से जारी किए गए।

ऐसे में एक ट्विटर यूज़र शशांक‏ (@pokershash) ने कॉन्ग्रेस पार्टी को उसी की भाषा में जवाब दिया – प्यार के साथ – वैलेंटाइन विश करते हुए। देखा जाए और लहरिया लूटा जाए:

सोनिया गाँधी के लिए शशांक लिखते हैं – क्या तुम डिफेंस डील हो? क्योंकि मुझे अपना कमीशन लेना पसंद है।

मनमोहन सिंह के लिए सिर्फ डॉटेड लाइन खींची गई है, काफ़ी है न!
क्या तुम दिमाग हो, क्योंकि मैं तुम्हें बहुत मिस करता हूँ
क्या तुम चीन हो? क्योंकि मैं तुम्हें कश्मीर का एक हिस्सा देना चाहता हूँ
क्या तुम बार-डांसर हो? क्योंकि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ

कॉन्ग्रेस को अपने दड़बे से बाहर आना होगा। राजनीतिक मठाधीशी वाली ठसक से बाहर आना होगा। उन्हें समझना होगा कि 2019 वाली कॉन्ग्रेस 1885 वाली पार्टी नहीं रही। ना ही पढ़ाई-लिखाई से लेकर भावनात्मक स्तर पर अब देश की जनता का आपसे वैसा जुड़ाव रहा।

आज की जनता सोशल मीडिया को घोल कर पी गई है। जिस जनता को आप ट्रोल कह-कह कर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, वो जनता दरअसल आपसे त्रस्त है। आपकी नीतियों से उसे नफ़रत है। आप जिस भाषा और शैली की राजनीति करते आए हैं, जनता ने अब उसमें मास्टरी कर ली है। कुछ ने तो डॉक्टरी भी। बचिए इनसे। ये आपकी लेंगे और कह के लेंगे… क्लास!

राहुल ‘अच्छे शगुन’ से फूँकेंगे चुनावी बिगुल, लेकिन वहाँ की जनता मानती है कॉन्ग्रेस को अपशकुन

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी गुरुवार को गुजरात के वलसाड जिले से चुनावी बिगुल फूकेंगे। गुजरात के इसी वलसाड ज़िले से होकर दमनगंगा नदी बहती है। इस नदी के किनारे से चुनावी बिगुल फूँकना राहुल और उनकी पार्टी अपने लिए शगुन मानती है, जबकि यहाँ रहने वाले लोग शायद कॉन्ग्रेस पार्टी को वोट देना अपने लिए अपशगुन मानते हैं।

यही वजह है कि इस ज़िले के पाँच विधानसभा सीटों में से चार विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। केंद्र के मोदी सरकार द्वारा गंगा को साफ़ करने के लिए नमामि गंगे योजना लागू होने के बाद वलसाड के लोगों में यह उम्मीद जगी है कि गंगा के तरह ही भाजपा सरकार दमनगंगा को साफ़ करने के लिए भी कोई नई स्कीम शुरू करेगी।

कॉन्ग्रेस पार्टी का कहना है कि वलसाड ज़िले के लालडुंगरी गाँव से चुनावी बिगुल फूँकना पार्टी के लिए अच्छा शगुन माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1980 में इंदिरा गाँधी, 1984 में राजीव गाँधी और 2004 सोनिया गाँधी ने इसी गाँव से चुनाव प्रचार करके सत्ता हासिल की थी। यह बात अलग है कि 2014 में कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता हासिल करने के इस फॉर्मूले को भूल गई थी।

यह कहा जाता है कि वलसाड में जिस पार्टी को लोगों का प्यार मिलता है वही पार्टी राज्य या केंद्र में सरकार बनाती है। वलसाड दक्षिणी गुजरात का हिस्सा है। वलसाड ज़िले में कुल पाँच विधानसभा सीटें हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी यह दावा करती है कि लालडुंगरी से चुनावी अभियान की शुरुआत करने के बाद उनकी पार्टी सत्ता में आती है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के साथ समस्या यह है कि अपने विरासत को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी कभी गंभीर नज़र नहीं आती है। कॉन्ग्रेस पार्टी आज भले ही सत्ता पाने के लिए अच्छा शगुन बताकर वलसाड से चुनावी रैली की शुरुआत कर रही हो, लेकिन चुनाव के बाद उसी वलसाड के लोगों का हाल तक जानना कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता उचित नहीं समझते हैं। ऐसे में जनता का कॉन्ग्रेस पार्टी से दूर होना स्वाभाविक है।

वलसाड दक्षिणी गुजरात का एक हिस्सा है। दक्षिणी गुजरात में कुल 35 विधानसभा सीटें हैं। दक्षिणी गुजरात में कॉन्ग्रेस पार्टी की तुलना में भाजपा का मज़बूत पकड़ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि चुनाव के पहले और चुनाव के बाद भाजपा के दिग्गज़ नेताओं का इस क्षेत्र में आना-जाना लगा रहता है।

यदि वलसाड विधानसभा की बात करें तो यहाँ से लगातार 6 बार भाजपा उम्मीदवार को लोगों का साथ मिला है। यही नहीं पिछले चुनाव में इस विधानसभा सीट पर भाजपा के भरत भाई कीकूभाई पटेल ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार टंडेल नरेंद्र कुमार जगुभाई को हराया था। इस ज़िले के एकमात्र कपराडा विधानसभा पर कॉन्ग्रेस पार्टी की मज़बूत पकड़ है। यहाँ से जीतू भाई लगातार तीन बार से कॉन्ग्रेस पार्टी से चुनाव जीत रहे हैं।

हलाँकि, 1975 के चुनावों से वलसाड़ विधानसभा की सीट पर नज़र दौड़ाएँ तो जिस दल के उम्मीदवार की इस सीट से जीत हुई है। सूबे में उस दल की ही सरकार बनी है। वर्ष 1975 में जनसंघ-एनसीओ गठबंधन उम्मीदवार के रूप में यहाँ से केशवभाई राणा जी पटेल चुनाव जीते थे। उस वर्ष राज्य में जनसंघ-एनसीओ की साझा सरकार बनी थी। वर्ष 1980 में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार के रूप में दोलत राय देसाई ने वलसाड़ से चुनाव जीता था। तब राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी थी।

SC का फ़ैसला संविधान और लोकतंत्र के ख़िलाफ़, दिल्ली के साथ अन्याय: केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली सरकार बनाम उप-राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फ़ैसले को लोकतंत्र और संविधान के ख़िलाफ़ बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (फरवरी 14, 2019) को अहम निर्णय सुनाते हुए कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्र सरकार के अंतर्गत कार्य करेगी। इसके अलावा कोर्ट ने अधिकारियों के तबादले पर भी उप-राज्यपाल के निर्णय को ऊपर रखने की बात कही। दिल्ली सरकार के निर्णय पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा:

“आज सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और दिल्ली के लोगों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन ये फ़ैसला दिल्ली और दिल्ली की जनता के साथ अन्याय है। अगर कोई अधिकारी काम नहीं करेगा तो सरकार कैसे चलेगी। हमें 70 में से 67 सीटें मिली लेकिन हम ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री के पास एक चपरासी को भी ट्रांसफर करने की पावर नहीं है, यह ग़लत जजमेंट हैशीला दीक्षित का मैं बहुत सम्मान करता हूँ, उन्हें हमारी मदद करनी चाहिए। उन्होंने जितने काम अपने कार्यकाल में किए उससे ज़्यादा हमने अपने 4 साल में किए हैं। अगर हमारे पास किसी की भ्रष्टाचार की शिक़ायत आती है और अगर एसीबी हमारे पास नहीं है तो हम क्या कार्रवाई करेंगे।”

साथ ही अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि सारी ताक़त विपक्षी पार्टी को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को हर कार्य के लिए भाजपा के पास जाना होगा। यह बेतुका बयान है, क्योंकि कल को कई राज्यों में चल रही सारी विपक्षी पार्टियों की सरकारें अगर विशेष सहायता, फंड, योजनाएँ इत्यादि के लिए इसी आधार पर केंद्र सरकार से मिलना-जुलना और परस्पर सहयोग करना बंद कर दे, तो संघीय ढाँचा बर्बाद हो जाएगा। यहाँ तक कि केरल की वामपंथी सरकार ने भी कभी ऐसा बेहूदा कारण नहीं बताया है।

अरविन्द केजरीवाल बार-बार कहते रहे हैं कि भाजपा दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हुई बुरी हार के कारण बौखलाई हुई है। अक्सर 67 विधायकों का झुनझुना बजाने वाले अरविन्द केजरीवाल अदालत द्वारा बार-बार झटका खाने के बावजूद वही चीजें दोहरा रहे हैं। इस से पहले भी दिल्ली में पूर्ण बहुमत की सरकारें रहीं हैं, केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें रहीं हैं- लेकिन इस तरह का टकराव देखने को नहीं मिला। आख़िर क्या कारण है कि किसी भी विभाग के साथ केजरीवाल सरकार का समन्वय संभव नहीं हो पा रहा?

दिल्ली में जब पहली बार शीला दीक्षित की सरकार बनी थी, तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। दिल्ली और केंद्र में विरोधी दलों की सरकार होने के बावजूद ऐसी विषैली राजनीति देखने को नहीं मिली, जैसी आज खेली जा रही है। अरविन्द केजरीवाल को संवैधानिक संस्थाओं के दायरों को समझते हुए दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार, उप-राज्यपाल एवं ब्यूरोक्रेसी के साथ मिल कर कार्य करना होगा। उनके मंत्रियों ने मुख्य सचिव तक को पीट रखा है। बहुमत पाँच वर्ष स्थिरतापूर्वक कार्य करने के लिए होता है, लड़ने के लिए नहीं।`

हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से भी केजरीवाल सरकार के सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। दिल्ली में प्रदूषण का ठीकरा वह हरियाणा पर फोड़ते आए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह से उनकी पटती नहीं। अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को ही लोकतंत्र के ख़िलाफ़ बता दिया। यह सुविधा की राजनीति है। सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी न्यायिक व्यवस्था है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उप-राज्यपाल के पक्ष में फ़ैसला दिया था। केजरीवाल को अपनी राजनितिक सीमा का ध्यान रखते हुए कार्य करना चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने अरविन्द केजरीवाल के बयानों को सुप्रीम कोर्ट की धज्जियाँ उड़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी केजरीवाल के ख़िलाफ़ अवमानना केस दर्ज कराएगी। पात्रा ने कहा:

“केजरीवाल ने इलेक्शन कमीशन, आरबीआई को नहीं छोड़ा। मगर आज पराकाष्ठा हो गई जब खुले मंच से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान कर दिया। हम मानहानि के लिए कोर्ट में जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट जैसी महान संस्था को मटियामेट करने की कोशिश केजरीवाल नहीं कर सकते। यह देश यह होने नहीं देगा। हम इस पर चिंतन करेंगे।”