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फ़ैक्ट चेक: PM मोदी के हेलीपैड के लिए हज़ारों पेड़ काटे जाने की ख़बर का सच

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुर्दा-बलांगिर रेलवे लाइन को हरी झंडी दिखाने के लिए 15 जनवरी को ओडिशा के बलांगिर पहुँचे थे। प्रधानमंत्री का यह दौरा हेलिपेड निर्माण के लिए हजारों पेड़ काटे जाने की ख़बर के बाद विवाद में आ गया था। दरअसल 14 जनवरी को पीटीआई ने एक ख़बर अपडेट किया, जिसके बाद इस ख़बर को आधार बनाकर कई सारे मुख्यधारा की मीडिया वेबसाइट ने प्रधानमंत्री के हेलीपेड के लिए 1000-1200 पेड़ काटे जाने की ख़बर को प्रमुखता से वेबसाइट पर अपडेट किया।

पीटीआई ने डिविजनल फ़ॉरेस्ट ऑफिसर (बलांगिर) समीर सतपथी के स्टेटमेंट को आधार बनाकर यह रिपोर्ट तैयार कर दिया। अपने स्टेटमेंट में सतपथी ने कहा कि फ़ॉरेस्ट विभाग से अनुमति लिए बग़ैर हेलीपेड बनाने के लिए पेड़ों को काटा गया, इस मामले में जाँच का आदेश दे दिया गया है। फ़ॉरेस्ट विभाग के एक अधिकारी के बयान के बाद पीटीआई जैसी संस्थान में काम करने वाले रिपोर्टर ने ग्राउंड पर जाकर सच जानने की कोशिश नहीं की। हालाँकि, PTI की ख़बर में ‘alleged’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है, फिर भी देश के इतने बड़े संस्थान के द्वारा ऐसी ख़बर को ‘कथित’ (alleged) कहकर आगे बढ़ा देना आलस्य ही कहा जा सकता है।

इसका परिणाम यह हुआ कि प्रधानमंत्री से जुड़ी गलत ख़बर को लगभग सभी संस्थानों ने अपनी वेबसाइट पर अपडेट किया। इसके बाद हमने देखा कि 13 जनवरी 2019 को द हिन्दू ने अपने वेबसाइट पर एक ख़बर पब्लिश की है। इस ख़बर में इस बात का जिक़्र है कि ‘अर्बन प्लांटेशन प्रोग्राम’ के अंतर्गत 2.25 हेक्टेयर जमीन रेलवे विभाग ने 2016 में अपने अधीन लिया था। हेलीपेड बनाने के लिए कुछ खाली जमीन की ज़रूरत थी, जिसके के लिए 1.25 हेक्टेयर ज़मीन को साफ़ किया गया।

द हिंदू अपने 14 जनवरी के रिपोर्ट में स्टेट फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ़ से समीर कुमार सतपती के हवाले से लिखा कि इस मामले में एक जाँच कमेटी गठित कर दी गई है। द हिंदू ने अपने रिपोर्ट में 1,000 से 1,200 पेडों के काटे जाने की पुष्टि की। उसके बाद, द हिंदू के रिपोर्ट को आधार बनाकर कई सारे मेन स्ट्रीम मीडिया ने इस गलत ख़बर को पब्लिश किया।

यह है ख़बर की सच्चाई

ऑपइंडिया टीम ने इस ख़बर की सच्चाई को ज़ानने के लिए ईस्ट कोस्ट रेलवे के मुख्य जनसूचना पदाधिकारी जेपी मिश्रा से संपर्क किया। जेपी मिश्रा ने हमारी टीम को बताया कि हेलीपेड बनाने का काम राज्य सरकार की पीडब्लूडी डिपार्टमेंट देख रही है।

इसके बाद थोड़ा रिसर्च करने के बाद हमने देखा कि TOI भुवनेश्वर ने एक ट्वीट के ज़रिए यह बताया है कि प्रधानमंत्री के ओडीशा दौरे में हजारों पेड़ काटे जाने की ख़बर गलत है। TOI ने, जहाँ हेलीपेड बनाई गई है, वहाँ से कई सारे वीडियो को ट्वीट किया।

यही नहीं अपने ट्वीट में TOI भुवनेश्वर ने यह दावा किया है कि ईस्ट कोस्ट रेलवे प्रवक्ता के मुताबिक हेलीपेड बनाए जाने के लिए बड़े पेड़ को नहीं काटा गया है। हालाँकि ट्वीट में यह बात लिखा है कि मौके पर करीब 40 के आस-पास पेड़ व झाड़ियों को हेलीपेड बनाने के लिए काटा गया है। इस तरह TOI भुवनेश्वर के इस रिपोर्ट से यह ज़ाहिर हो गया कि इंडियन एक्सप्रेस व द हिंदू जैसी मुख्यधारा की मीडिया ने गलत ख़बर को वेबसाइट पर अपडेट किया है।

यही नहीं PTI जैसी बड़ी न्यूज़ एजेंसी भी किसी ख़बर के तह में पहुँचे बगैर ख़बर को वेबसाइट पर अपडेट कर देती है। इससे भ्रामकता की स्थिति बनती है और कई लोग सच्चाई को नहीं जान पाते क्योंकि गलत ख़बर चलाने वाले संस्थान कभी भी अपनी गलती स्वीकार कर सच्ची ख़बर नहीं बताते।

पंजाब के ‘आप’ विधायक ने दिया पार्टी से इस्तीफ़ा, कहा- भटक गई है पार्टी की विचारधारा !

लोकसभा चुनावों के आते-आते राजनैतिक पार्टियों में उठा-पठक चालू हो रखी है। कहीं एक पार्टी के साथ दूसरी पार्टी की जुड़ने की खबरें आ रही हैं, तो कहीं पर विधायकों के पार्टी के छोड़ने की।

आने वाले लोकसभा के चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल की पार्टी को एक नया झटका लगा है। पंजाब में ‘आप’ पार्टी के विधायक बलदेव सिंह ने बुधवार यानि आज (जनवरी 16, 2019) पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। बता दें कि आप पार्टी के बलदेव सिंह पंजाब में ‘जैतो’ से विधायक थे।

पार्टी को छोड़ने से पहले बलदेव सिंह ने अरविंद केजरीवाल को भेजे ई-मेल में लिखा है कि वो बेहद दुखी मन के साथ आम आदमी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहे हैं। उन्होंने अपने पत्र में शिकायत भी की, कि आम आदमी पार्टी अपनी तय हुई विचारधारा से बिलकुल भटक चुकी है।

उन्होंने कहा कि वो अन्ना हजारे द्वारा शुरू किए गए आंदोलन से काफ़ी प्रेरित होकर ही ‘आप’ के साथ जुड़ने का फैसला किया था, जिसके लिए उन्होनें बतौर प्रधान शिक्षक अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया था। इसका पीछे उनका उद्देश्य देश की (खासकर पंजाब की) सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को सुधारने का था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने ये फ़ैसला लिया था तब उनके पूरे परिवार में खलबली सी मच गई थी। लेकिन, फिर भी उन्होंने ‘आप’ के बुलंद इरादों और वायदों पर ये जोखिम लेना जरूरी समझा।

बलदेव सिंह के अलावा पंजाब के ही एक और विधायक सुख़पाल खैरा ने आम आदमी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इन्होंने भी अपने इस्तीफ़े में केजरीवाल की पार्टी पर कई आरोप लगाए थे, कि पार्टी अपने निर्धारित किए हुए सिद्धांतों और विचारधारा से भटक चुकी है। जिस समय खैरा ने इस्तीफ़ा दिया उस समय वो पार्टी से निलंबित चल रहे थे, क्योंकि उन्होंने पार्टी के ख़िलाफ़ बगावत शुरू कर दी थी। जिसके कारण ही उनका पार्टी से निलंबन किया गया था। अब खबरें हैं कि अब बलदेव, सुखपाल खैरा की ‘पंजाबी एकता पार्टी’ से जुड़ सकते हैं।

इन दो विधायकों के अलावा हरविंदर सिंह फुलका जो पंजाब आदमी पार्टी के नेता और सिख़ विरोधी दंगे के वकील हैं, वो भी पार्टी को लेकर अपनी शिकायतों की वजह से सदस्यता छोड़ चुके हैं।

पाकिस्तान में ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को मिली हरी झंडी

अनुपम खेर की फ़िल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ जिसमें वो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के किरदार में दिख रहे हैं, अब पाकिस्तान में भी पर्दों पर दिखाई जाएगी। पाकिस्तान के सेंसर बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी है।

फ़िल्म के निर्माता जयन्तीलाल गड़ा ने इस बात की जानकारी दी कि फ़िल्म पाकिस्तान में 18 जनवरी को रिलीज़ की जाएगी।

उन्होंने अपने बयान में कहा, “पेन स्टूडियो को इस बात को बताते हुए बेहद खुशी हो रही है, कि एक तरह की राजनीति से जुड़ी फ़िल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में हरी झंडी दिखा दी गई है। अब पाकिस्तान के सिनेमा प्रेमी भी इस फ़िल्म का आनंद उठा पाएँगे।”

उन्होंने अपने दिए बयान में कहा – “मैं हमेशा से ही इमरान खान को एक बहादुर क्रिकेटर होने के लिए सराहता था, लेकिन अब उनकी प्रधानमंत्री होने की भी इज़्ज़त करता हूँ। मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ। पाकिस्तान के सेंसर बोर्ड अध्यक्ष ने हमारी फ़िल्म को रिलीज़ की अनुमति दी।”

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ भारत में 11 जनवरी को रिलीज़ हो चुकी है। ट्रेलर के आने के साथ ही फ़िल्म कई विवादों से घिर गई थी। जिसकी वज़ह से इसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बता दें कि ‘बॉलीवुड हंगामा’ के अनुसार फ़िल्म ने 5 दिनों में केवल ₹13.90 करोड़ की कमाई की है।

यह फ़िल्म संजय बारू की किताब के आधार पर बनी है। संजय, मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार भी रहे हैं। इस फ़िल्म में संजय बारू का किरदार अक्षय खन्ना द्वारा निभाया जा रहा है। फ़िल्म की ओवर-ऑल रेटिंग चाहे कुछ भी रही हो, लेकिन कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि मुख्य किरदार में दिख रहे, सभी कलाकारों ने किरदारों को सटीक तरह से निभाने का पूरा प्रयास किया, जिसके लिए वो सराहना योग्य हैं।

बिहार में आंध्र से आने वाली मछलियाँ बैन, व्यापारियों में भारी आक्रोश

बिहार में आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों से आयातित मछलियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। बिहार मछलियों का बहुत बड़ा बाज़ार है और राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद मछली व्यापारियों को अपने धंधों के ठप हो जाने का डर सता रहा है। इस मामले में बिहार मछली व्यवसायी संघ के सचिव अनुज कुमार ने अन्य प्रदेशों से आयातित मछली में फार्मलिन सहित अन्य हानिकारक रसायनों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने से इनकार किया, जो कि सरकार की तरफ़ से बताया जा रहा है।

बिहार सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ मछली व्यापारियों ने कड़ा विरोध दर्ज़ कराया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बातें अख़बारों से माध्यम से पता चलीं। राज्य सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज़ कराने के लिए क़रीब 500 मछली व्यापारियों ने पटना की मछली मंडी में शनिवार (जनवरी 12, 2019) को एक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में व्यापारियों ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस फार्मलिन की बात सरकारी महक़मों द्वारा की जा रही है, वो सरासर झूठी और बेबुनियाद है।

पटना की मछली मंडी बंद है, व्यापार ठप

व्यापारियों ने शिकायत करते हुए बताया कि अक्टूबर 2018 में सरकार ने उनसे सैंपल लेकर जाँच की थी। उस जाँच की रिपोर्ट अब आई है। रिपोर्ट आने में होने वाली तीन महीने की देरी पर भी व्यापारियों ने सवाल खड़े किए। मछली व्यापारियों ने कहा कि मछली एक कच्चा माल है और कोई भी कच्चा माल 4 से 6 दिन में ही खराब हो जाता है। उन्होंने पूछा कि जिस फार्मलिन को किट से महज़ 2 मिनट में जाँचा जा सकता है, उसमें इतनी देरी क्यों लगाई गई?

मछली व्यापारियों ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा भी फार्मलिन किट से ही जाँच की जाती है। आंध्र के जाँच में मछलियाँ सही पाई गईं हैं और व्यापारियों के पास इसका ‘अप्रूवल रिपोर्ट’ भी है। उन्होंने यह बात भी पूछा कि बिहार सरकार द्वारा इन आयातित मछलियों को बैन करने के पीछे तर्क क्या है?

‘ताज़े फ़िश’ स्टार्ट-अप के मालिक रंजीत कुमार के 4 सवाल:

  • बिहार सरकार के तुगलकी रवैये के कारण रोजगार से ज्यादा बेरोजगार बढ़ रहा है। फार्मलिन जाँच की बात सरकार कहती है लेकिन यह नहीं बताती कि आख़िर जाँच में इतनी देरी क्यों होती है जबकि बंगाल और गुवाहाटी में 1 दिन में फैसला आता है।
  • मैंने ताज़े फिश ऑनलाइन खोला था। मछली ज़्यादा बिकने लगी थी। अपनी पूंजी लगा कर, हम मछली अपनी गाड़ी से मँगवाने लगे और कुछ मंडी से ख़रीदने लगे। अब बंद कर दिया गया तो मेरी पूंजी गई और बचा माल तो गया ही।
  • बिहार सरकार की रिपोर्ट में यह लिखा है कि जिंदा मछली में फार्मलिन पाया गया है। अब जो लेप बस मुर्दा मछली पर लग सकता है क्या वो कोई जिंदा में लगा भी सकता है ? लॉजिक गज़ब है सरकार का।
  • 2 वैन से राज्य सरकार ख़ुद से मछली बेचेगी? 2 गाड़ी से पूर्ति हो जाएगा? सब आदमी के कमाने का साधन छीन के जब सरकार ही हर काम करेगी तो हमलोग क्या करेंगे, दूसरे राज्य में जाके मार खाएँगे?

बिहार मछली व्यापारी संघ ने आग्रह किया कि बिहार सरकार फिर से व्यापारियों के सामने जाँच करवाए और रिपोर्ट उनके सामने दे। उन्होंने दावा किया कि अगर उनकी मछलियॉं खाने योग्य नहीं निकलती हैं तो वे ख़ुद इसे बैन कर देंगे। व्यापारियों की इस माँग पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रया नहीं आई है।

बिहार सरकार के इस निर्णय के बाद मछली व्यापारियों को काफ़ी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। मछलियों की होम डिलीवरी करने वाले स्टार्ट-अप को ₹40 लाख का भारी घाटा हुआ है। साथ ही, इससे वहाँ के व्यापारियों का घाटा करोड़ों में है।

ज्ञात हो कि बिहार सरकार ने आंध्र और बंगाल से आने वाली मछलियों पर रोक लगाने के साथ ही इनके भण्डारण पर भी तत्काल प्रभाव से प्रतिबन्ध लगा दिया है। अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसे सात सालों तक की सज़ा हो सकती है। यही नहीं, इसके लिए ₹10 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। सज़ा के इतने कड़े प्रावधानों के कारण मछली व्यापारियों में डर का भी माहौल है।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय सिंह ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस बारे में और अधिक अध्ययन किया जा रहा है और पशुपालन विभाग के एक्सपर्ट्स भी इस मामले को देख रहे हैं।

2016 में राहुल पहुँचे थे कन्हैया के लिए JNU, फिर अब बिलकुल चुप क्यों हैं?

हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा कन्हैया कुमार पर देशद्रोह मामले में चार्जशीट दाख़िल की गई है। ये मामला 2016 का है, जब जेएनयू में कन्हैया कुमार के नेतृत्व में “भारत तेरे टुकडे होंगे” जैसी नारेबाज़ी की गई थी।

इस मामले के तूल पकड़ने पर जेएनयू समेत देश भर में माहौल गरमा गया था। ये लाज़मी था, आखिर देश के इतने प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान में जहाँ हर साल कई पीएचडीधारी बुद्धिजीवी निकलते हैं, वहाँ ऐसी घटना का होना बिल्कुल भी अपेक्षित नहीं था। विचारधाराओं पर बहस अपनी धरातल पर ठीक है, लेकिन देशविरोधी नारेबाज़ी करना किसी भी राष्ट्रवादी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।

इस मामले पर जब कन्हैया कुमार की गिरफ़्तारी हुई तो जेएनयू में जैसे हड़कंप मच गया, वहाँ के छात्र क्लासरूम छोड़कर धरने पर बैठ गए। इन लोगों को कई विपक्षी दल के नेताओं का समर्थन मिला, जिनमें राहुल गाँधी का नाम शामिल था, राहुल इन धरने पर बैठे लोगों के समर्थन में जेएनयू भी पहुँचे थे। लेकिन, अब हैरान करने वाली बात ये है कि कन्हैया समेत सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ चार्जशीट आने के बाद राहुल की किसी भी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है।

राहुल के इस चुप्पी पर सवाल ये उठता है, जब 2016 मे वो जेएनयू की भीड़ से मिलने पहुँचे थे, तो अब आरोपितों के प्रति उनकी सहानुभूति कहाँ चली गई? ऐसा भी नहीं है कि जिस दिन जेएनयू मामले पर चार्जशीट दायर की गई, उस दिन वो सोशल मीडिया पर एक्टिव न हुए हों। 14 जनवरी को उन्होंने पूरे देश को पोंगल के त्यौहार की शुभकामनाएँ भी दी और साथ ही में उन्होंने प्रधानमंत्री को कोटलर अवार्ड को लेकर प्रधानमंत्री पर तंज भी कसा।

लेकिन जेएनयू मामले पर उनका किसी भी प्रकार का कोई बयान सामने नहीं आया हैं, अब इसे लोकसभा चुनावों का असर भी कहा जा सकता है और राहुल के अवसरवादी होने का सबूत भी। कोई पार्टी या कोई नेता जिसके लिए कुर्सी से बढ़कर कुछ भी न हो, वो अपनी ज़मीन तैयार करने के लिए बिना सोचे-समझे किसी के भी समर्थन में खड़ा तो हो जाता है, लेकिन चुनावों के आते ही उन्हीं मामलों पर चुप्पी साध लेता है, ताकि किसी भूल से मतदाताओं की सोच पर नकारात्मक असर न पड़े।

व्यक्तिगत धर्म की स्वतंत्रता लेकिन सामूहिक धर्मान्तरण की अनुमति नहीं: राजनाथ सिंह

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार (जनवरी 15, 2019) को एक ईसाई संगठन के ‘शांति उत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने कभी अपने जीवन में जाति, वर्ण और धर्म के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया है – हमें वोट मिले या नहीं मिले; हम जीते या हारें; हम सरकार बनाएँ या न बनाएँ; – हम लोगों के बीच भेदभाव नहीं करेंगे। यही हमारे प्रधानमंत्री का सन्देश है।”

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “बिना प्रेम के कोई भी सत्ता और शासन में नहीं रह सकता। कोई भी प्रेम से ही शासन कर सकता है। शासन का कोई दूसरा तरीका नहीं है।”

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी व्‍यक्तिगत तौर पर किसी भी धर्म को स्‍वीकार करने के लिए स्वतन्त्र है। लेकिन सामूहिक धर्मांतरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि ऐसा होता है तो इस पर बहस ज़रूरी है।

गृहमंत्री ने यह भी कहा, “मैं ईसाई समुदाय को लेकर एक चीज और कहूँगा। हम किसी के ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं लगाना चाहते। अगर कोई व्यक्ति किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे ऐसा करना चाहिए। इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन सामूहिक धर्मांतरण में बड़ी संख्या में लोग धर्म बदलना शुरू कर देते हैं। यह किसी भी देश के लिए चिंता की बात है।”

गृह मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में अल्पसंख्यक धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग करते हैं। जबकि भारत में बहुसंख्यक माँग कर रहे हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए। यह चिंता की बात है।

उनके अनुसार कुछ लोग दूसरों के बीच डर की भावना भरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा आ गई, अब गड़बड़ होगा। ये हो जाएगा, वो हो जाएगा। हम डर की भावना भरकर देश नहीं चलाना चाहते। हम विश्वास के साथ देश चलाना चाहते हैं। किसी के अंदर अलगाव की भावना नहीं होनी चाहिए। यही हमारी कोशिश रहेगी।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “राजग सरकार को बदनाम करने की कई कोशिशें होती रही हैं। यहाँ तक कि चर्च पर पत्थर फेंके गए। कुछ पादरी आए और मुझसे सुरक्षा देने की माँग की। आपने देख होगा, पत्थरबाज़ी की यह घटनाएँ विधानसभा चुनावों से महज एक महीने पहले ही शुरू हुईं थीं। और यह घटनाएँ चुनाव ख़त्म होने के बाद बंद भी हो गईं। आप इस पर क्या कहेंगे? इसमें किसकी साजिश है? सिंह ने कहा कि जहाँ तक राजग सरकार का सवाल है, किसी से कोई भेदभाव नहीं होगा।”

रोते-रोते महिला ने कहा… भारतीय सेना नहीं होती तो हम में से कोई नहीं बच पाता!

देश की सेना पर हमेशा सवाल उठाने वाले लोग भूल जाते हैं कि वो अगर देश में रहकर सुरक्षित हैं तो इसका मतलब है कि सीमा पर तैनात ज़वान उनके लिए दिन-रात जाग रहा है।

एक तरफ़ जब लोग साल 2019 के आने की तैयारी कर रहे थे, तो उसी समय भारतीय सेना नाथुला पास में करीब 3,000 जिंदगियों को बचाने का प्रयास कर रही थी।

भारी बर्फबारी के कारण लगभग 3,000 टूरिस्ट 28 दिसंबर 2018 को सिक्किम के नाथुला पास में फँस गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 300 से 400 गाड़ियाँ बर्फबारी के कारण फँस गई थी। इस वज़ह से पर्यटकों का वहाँ से निकलना मुश्किल था। फँसे हुए इन लोगों में महिला, बच्चे और बुजुर्ग भी थे।

ऐसी स्थिति में भारतीय सेना के जवान फँसे हुए लोगों का बचाव करने वहाँ पहुँचे। उन्होंने मुश्किल भरे हालातों का सामना करके सभी लोगों की जान बचाई। उनकी इस बहादुरी का सबूत सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया गया है।

ट्विटर पर शेयर किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह एक महिला पर्यटक रोते-रोते भारतीय सेना का शुक्रिया अदा कर रही है। ये अंजान महिला इस वीडियो में कहते हुए नज़र आ रही हैं कि अगर ये खुद या बाकी के अन्य पर्यटक जिंदा हैं, तो सिर्फ और सिर्फ भारतीय सेना की वज़ह से ही जिंदा हैं।

महिला ने कहा, “हम अक्सर पूछते थे कि सेना काम क्या करती है, आज मैंने देखा कि आखिर में सेना करती क्या है।”

इस वीडियो पर ट्विटर के बहुत सारे यूजर्स ने भारतीय सेना को बधाई दी और भारतीय सेना के सहयोग के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।

बता दें कि पर्यटकों को बचाने के बाद सेना के जवानों ने उन्हें गर्म कपड़े भी उपलब्ध कराए। साथ ही उन्हें रहने के लिए आर्मी क्वॉटर में जगह भी दिया। इसके बाद सेना ने बर्फबारी से जाम हुई रोड को साफ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

ये सिर्फ एक घटना नहीं हैं, जहाँ सेना ने आम नागरिकों को संकट से निकाला हो। केदारनाथ में आई आपदा से लेकर केरल आपदा तक में वो सेना के जवान ही थे, जो हर परिस्थिति से लड़कर वहाँ आपदा पीड़ितों को सुविधा मुहैया कराई।

हम देखते हैं कि आए दिन कुछ बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों द्वारा सेना पर सवाल उठाए जाते हैं। उनकी आलोचना की जाती है। उन्हें कठोर, निष्ठुर कहकर दरकिनार कर दिया जाता है। लेकिन, हम भूल जाते हैं कि सैनिक होने का मतलब क्या है। यह एक जिम्मेदारी है, जिसमें सेना का हर जवान, हर परस्थिति में अपनी जान गंवा कर भी देश को और देश के नागरिकों को बचाने का प्रण लेता है।

BJP को दौड़ा-दौड़ा के मारेंगे, मरी नानी याद दिला देंगे: BSP नेता

उत्तर प्रदेश में बसपा की अध्यक्ष मायावती के जन्मदिन पर उनकी पार्टी के नेता विजय यादव ने एक बेहद विवादित बयान दिया है। मायावती के जन्म दिन पर जनसभा को संबोधित करते हुए विजय यादव ने कहा- “घबराने की जरूरत नहीं है, दौड़ा-दौड़ा कर मारेंगे बीजेपी को, मरी हुई नानी याद दिला देंगे।”

सपा-बसपा के गठबंधन के बाद दोनों पार्टियों के नेताओं में और उनके समर्थकों में एक अलग ही ‘स्तर’ का आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है। लगातार हर तरफ ऐसे बयान सुनने में आ रहे हैं कि इस गठबंधन ने बीजेपी पार्टी से जुड़े लोगों की नींदें उड़ा दी हैं।

ANI द्वारा ट्विटर पर जारी किए गए वीडियो के एक हिस्से में विजय यादव कहते नज़र आ रहे हैं, “कॉन्ग्रेस ने एक तरफ जहाँ देश को राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के रूप में चार गाँधी दिए हैं। वहीं बीजेपी ने भी मोदी दिए हैं- नीरव मोदी, ललित मोदी और अंबानी की गोद में बैठा नरेंद्र मोदी।”

विजय यादव ने इस वीडियो में जनता को संबोधित करते हुए बोला, “अगर इस मोदी ने किसी के लिए कुछ किया है तो वो उद्योगपतियों के लिए किया है, बाकी किसी गरीब के लिए मोदी ने कुछ नहीं किया है।”

इस पूरे वीडियो में ऐसा लग रहा है कि सपा-बसपा के एक होने की खुशी विजय यादव से समेटे नहीं सिमट रही है। अपनी बात को रखने का अंदाज़ इस लहज़े में था कि अगर उन्हें कुर्सी नहीं मिली तो वो उसे छीन लेंगे।

लोकसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए अपनी इस बातचीत में उन्होंने श्रोताओं से कहा कि वे लोग फिक्र न करें, भारतीय जनता पार्टी वालों को तो सपा-बसपा दौड़ा-दौड़ा कर मारेगी।

विजय यादव ने यह भी बोला कि बीएसपी वालों को घबराने की जरूरत नहीं है। सपा-बसपा को साथ देखकर तो बीजेपी वालों को इनकी मरी हुई नानी याद आ गई हो गई।

जनता को न डरने की सलाह देते हुए नेता जी ने जय भीम बोलते हुए मुस्लिमों को अस्सलाम-वालेकुम कहा और हिन्दुओं को कहा राम-राम।

विजय यादव के ऐसे बयान के बाद लगता है कि सपा-बसपा के गठबंधन से पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ी हो चाहे न दौड़ी हो, लेकिन पार्टी के सारे नेताओं में जीत को लेकर अत्याधिक विश्वास अभी से देखने को मिल रहा है। बता दें कि कॉन्ग्रेस का एक तरफ इस गठबंधन पर कहना है कि इन दोनों पार्टियों ने एक होकर वही काम किया है, जो बीजेपी चाहती थी कि सारे गुट एक हो जाएँ। वहीं बीजेपी के समर्थकों का इस गठबंधन पर कहना है कि उन्हें विश्वास है कि चाहे सारी पार्टियाँ एक क्यों न हो जाएँ, लोकसभा चुनावों में जीत उन्हीं की होगी।

PM मोदी को अवॉर्ड पूरे देश का सम्मान, विपक्ष की हाय-तौबा ख़ेदजनक: कोटलर

‘फादर ऑफ़ मॉडर्न मार्केटिंग (Father Of Modern Marketing)’ कहे जाने वाले फ़िलिप कोटलर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि फ़िलिप कोटलर प्रेसिडेंशियल लीडरशिप अवार्ड के लिए जो भी पैमाने तय किए गए थे- मोदी उन सब पर खड़े उतरे। मार्केटिंग जर्नल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने इस पर खुल कर बात की। उन्होंने बताया कि आज के युग में एक नेता के क्या दायित्व होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ़िलिप कोटलर लीडरशिप अवॉर्ड उन्हीं को दिया जा सकता है जो:

  • प्रतिनिधित्व वाली सरकार और सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं।
  • इस बात में विश्वास रखते हैं कि एक अच्छा समाज एक बेहतर व्यावसायिक वातावरण का निर्माण करेगा।
  • पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ सबकी भलाई के लिए काम करते हैं।

बकौल कोटलर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सभी पैमानों पर बाकी वैश्विक नेताओं से काफ़ी आगे हैं। मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की छवि में सुधार किया है। कोटलर ने कहा कि उपर्युक्त पैमानों को ध्यान में रखते हुए WMS (World Marketing Summit) की एक समिति ने इस पर मतदान किया और अंतिम निर्णय उनका था।

जब फ़िलिप कोटलर अवॉर्ड को लेकर चल रहे विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा पीएम मोदी को अवॉर्ड दिए जाने की आलोचना करना ख़ेदजनक है। यह अवॉर्ड जितना पीएम मोदी का सम्मान है, उतना ही पूरे भारत का सम्मान भी है। उन्होंने कहा कि वो स्वास्थ्य कारणों से नरेंद्र मोदी को खुद अवॉर्ड देने भारत नहीं जा सके। इसी कारण उन्होंने अपने मित्र जगदीश सेठ को कहा कि वो भारत जाकर पीएम मोदी को यह अवॉर्ड प्रदान करें।

इसके अलावे कोटलर ने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में बात करते हुए कहा कि वो ट्रम्प के आलोचक हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन के बारे में उन्होंने कहा कि मैक्रॉन अभी ‘येलो जैकेट क्रांन्ति’ में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता उस देश का ब्रांड गार्जियन होता है। वो कैसा व्यवहार करता है, इसका असर पूरे देश पर पड़ता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले फ़िलिप कोटलर प्रेसिडेंशियल अवार्ड से नवाजा गया है। नरेंद्र मोदी का चयन देश को उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान करने के लिए किया गया है। पीएमओ के अनुसार, यह अवार्ड ‘पीपुल, प्रॉफिट और प्लैनेट’ की अवधारणा पर केंद्रित है। हर साल यह अवॉर्ड किसी देश के नेता को दिया जाएगा। इस अवॉर्ड को दिए जाने के बाद राहुल गाँधी समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को जवाब देते हुए कहा था कि ऐसा व्यक्ति यह बात कह रहा है, जिसके परिवार में किसी ने ख़ुद को ही भारत रत्न दे दिया था।

फ़िलिप कोटलर फ़िलहाल केल्लॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में इंटरनेशनल मैनेजमेंट के प्रोफेसर हैं। उन्हें हाल ही में ‘मार्केटियर ऑफ़ द ईयर’ के अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है।

सत्य-हिन्दी का असत्य: AAP के पूर्व नेता व पत्रकार आशुतोष की वेबसाइट पर राफ़ेल की झूठी ख़बर

सबसे पहले ट्विटर पर रवि नायर ने राफ़ेल की आधी कीमत वाले झूठ को फैलाया, जिसके बाद इसे ‘द वायर’ जैसे मीडिया पोर्टल्स ने आगे बढ़ाया। अब आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता आशुतोष की वेबसाइट सत्य-हिंदी ने इस फ़र्जी खबर को आधार बनाते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें कहा गया है कि फ्रांस भारत से आधी कीमत पर उन्नत राफ़ेल विमान खरीदने जा रहा है। जबकि यह सरासर झूठी ख़बर है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में 16 जनवरी की सुबह 7:57 पर भी एक ख़बर छपी है, जिसमें फ्रांस की सरकार द्वारा इस ख़बर का खंडन किया गया है। लेकिन आपका काम ही जब प्रोपेगंडा फैलाना बन जाए तो सुबह उठकर अख़बार या न्यूज़ वेबसाइट पढ़ने में दिलचस्पी कोई दिखाए क्यों? और यही काम आशुतोष और उसकी सत्य-हिन्दी टीम ने किया।

आपको बता दें कि राफ़ेल लड़ाकू विमान के लिए F4 कॉन्फ़िगरेशन अभी भी ड्राइंग बोर्ड में है। यह वर्तमान में विकास के प्रारंभिक चरण में है। और 2023 तक F4 राफ़ेल को वितरित करना संभव नहीं है। क्योंकि F4 स्टैण्डर्ड कल 14 जनवरी 2019 को ही शुरू किया गया है। राफ़ेल को फ़्रांस सरकार से मिला €2 बिलियन का अनुबंध F4 मानक के विकास के लिए है। फ्रांसीसी सरकार ने दसाँ (Dassault) एविएशन की आरएंडडी गतिविधियों की फ़ंडिंग की है। राफ़ेल के F4 मानक के विकास के लिए यह अनुबंध तब कंपनी को प्रदान किया गया जब सशस्त्र बल के फ्रांसीसी मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने 14 जनवरी, 2019  को फ़्रांस के मेरिग्नैक में कंपनी के संयंत्र का दौरा किया। यह अनुबंध केवल उन्नत F4 कॉन्फ़िगरेशन के विकास के लिए है। इसमें विमान उत्पादन शामिल नहीं है।


मंगलवार को (जनवरी 15, 2019) ऑपइंडिया हिंदी ने इस मामले पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें यह बताया गया था कि राफ़ेल सौदे को लेकर कैसे एक ताजा झूठ फैलाया जा रहा है और इसमें कई मीडिया पोर्टल भी शामिल हैं। ऑपइंडिया ने अपने इस रिपोर्ट में बताया था कि कुछ लोगों ने एक ख़बर प्रसारित की है कि फ़्रांस ने 28 राफ़ेल विमानों को दसाँ (Dassault) एविएशन से €2 बिलियन का ऑर्डर दिया है। उनके अनुसार, ये विमान अगली पीढ़ी के F4 स्टैंडर्ड के होंगे और इस सौदे की प्रति यूनिट कीमत भारत F3R मानक के 36 राफ़ेल जेट विमानों के लिए चुकाए जा रहे क़ीमत की लगभग आधी है।