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जबसे मंदिर में चोरी की बुरे सपने आ रहे, हमारे बाल-बच्चों को क्षमा करें… प्रयागराज में चोर लौटा गया भगवान की मूर्ति: कर्नाटक में घर की दीवार पर सिर मार-मार मरा था नवाज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मंदिर से मूर्ति चुराने वाला चोर मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को खुद ही उन्हें लौटा गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी छोड़ कर गया है। इसमें उसने मंदिर में चोरी के बाद अपने साथ लगातार अनिष्ट होने की बात कही है। मूर्ति को फिर से विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित करवाया जा रहा है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि मूर्ति को जूट की बोरी में आश्रम के गेट के पास रखकर चोर चला गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला प्रयागराज जिले के थानाक्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ गऊघाट इलाके में खासला आश्रम है। इस आश्रम में बने मंदिर के गर्भगृह में अष्टधातु की बनी करीब 100 साल पुरानी राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित है। सोमवार (23 सितंबर 2024) को इस अष्टधातु की मूर्ति को कोई चुरा ले गया। तब मंदिर के महंत जयराम दास ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर चोर की तलाश शुरू कर दी।

लगभग 1 हफ्ते बीत जाने के बावजूद चोर को पकड़ा नहीं जा सका था। इस बीच मूर्ति चोरी से दुखी महंत जयराम दास ने अन्न का त्याग कर दिया। आश्रम के अन्य शिष्य भी दुखी रहने लगे। तभी अचानक मंगलवार (1 अक्टूबर) को चोर मूर्ति मंदिर के पास रख कर चुपचाप चला गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी महंत को सम्बोधित करते हुए छोड़ कर गया है। इस माफीनामे में उसने अपने काम को अज्ञानता बताते हुए लिखा है, “मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे बुरे-बुरे सपने आ रहे हैं।”

अपनी पहचान उजागर न करते हुए चोर ने माफीनामे में महंत को प्रणाम करते हुए लिखा है, “मेरे बेटे की तबीयत भी बहुत खराब हो गई है। थोड़े पैसे के लिए मैंने बहुत गंदा काम किया है। मैंने मूर्ति को बेचने के लिए उसके साथ काफी छेड़छाड़ किया है। अपनी गलती की माफी माँगते हुए मैं मूर्ति को रख कर जा रहा हूँ। आपसे विनती करता हूँ कि मेरी गलती को माफ कर भगवान को फिर से मंदिर में रखवा दिया जाए। हमारे बच्चों को क्षमा करते हुए अपनी मूर्ति स्वीकार करें।”

चोर ने मूर्ति को बेचने के लिए पॉलिश भी करवा दिया था। फिलहाल मूर्ति वापस आ जाने से आश्रम में ख़ुशी का माहौल है। प्रतिमा को जलाभिषेक व अन्य धार्मिक विधि-विधान करते हुए फिर से स्थापित किया जा रहा है। मामले की सूचना पुलिस को भी दे दी गई है। पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि वो सिद्ध मंदिर के महंत हैं और उन्होंने चोरी के बाद ईश्वर को ही न्याय करने के लिए कहा था।

कर्नाटक में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

बताते चलें कि जनवरी 2021 में कर्नाटक के मंगलुरु में ऐसा ही मामला सामने आया था। तब स्वामी कोरगज्जा मंदिर की दानपेटी में कंडोम डाल दिया गया था। पुलिस आरोपितों को खोज नहीं पाई थी, लेकिन एक दिन अब्दुल रहीम और तौफीक खुद ही मंदिर में महंत के आगे पहुँच गए थे। उन्होंने नवाज के साथ मिल कर मंदिर की दानपेटी में कंडोम डालने का गुनाह कबूल करते हुए बताया कि उस करतूत के बाद उन दोनों को खून की उल्टियाँ और खूनी पेचिश शुरू हो गई थी।

दोनों ने यह भी बताया था कि इस घटना के बाद नवाज अपने घर की दीवार पर सिर पटक-पटक कर मर गया था। मंदिर के पुजारी से तौफीक और रहीम ने कान पकड़ कर दया की भीख माँगी थी।

कौन हैं वे हिंदू संत जिन पर महाराष्ट्र में ठोक दिए 67 FIR, क्यों लग रहे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, CM एकनाथ शिंदे के पीछे भी क्यों पड़े इस्लामी कट्टरपंथी: जानिए सब कुछ

महाराष्ट्र के नासिक में इस्लाम पर एक बयान देने के कारण इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दू धर्मगुरु रामगिरी महाराज के पीछे पड़े हुए हैं। हिन्दू संत रामगिरी महाराज पर अब तक 60 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं। कहीं उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। महंत रामगिरी के बहाने महाराष्ट्र को मजहबी उन्माद में धकेलने की कोशिश की का रही है।

धमकियों के बीच महाराष्ट्र सरकार महंत रामगिरी की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। धमकियों और जान को खतरा होने के बाद भी महंत रामगिरी अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने इस पर माफ़ी माँगने या फिर अपने शब्द वापस लेने से इनकार कर दिया है। इस बीच मुस्लिम नेता महाराष्ट्र के माहौल को उबाल रहे हैं।

कौन हैं रामगिरी महाराज, उनका महाराष्ट्र में क्या प्रभाव?

इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना बन रहे स्वामी रामगिरी महाराज महाराष्ट्र समेत पूरे देश के मराठी समुदाय के बड़े धर्मगुरु हैं। वह महंत नारायणगिरी के शिष्य हैं। महंत रामगिरी महाराज सद्गुरु श्री गगनगिरी महाराज संस्थान के प्रमुख हैं। इस संस्थान के महाराष्ट्र समेत कोंकण क्षेत्र में लाखों अनुयायी हैं। यह संस्थान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में बना हुआ है।

महंत रामगिरी महाराज इस संस्थान के 2009 से ही प्रमुख हैं। उन्होंने इसका जिम्मा महंत नारायणगिरी के समाधिस्थ होने के बाद उठाया था। उनका महाराष्ट्र के वरकारी समुदाय में काफी प्रभाव है। यह समुदाय भक्ति आन्दोलन से जुड़ा है। महंत रामगिरी महाराज बीते लगभग डेढ़ दशक से ही पूरे महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रवचन देते आ रहे हैं।

महंत रामगिरी महाराज का संन्यास से पूर्व का नाम सुरेश रामकृष्ण राणे बताया जाता है। उनके विषय में जानने वाले बताते हैं कि वह कक्षा 9 में अध्ययन के दौरान ही सामान्य जीवन से विमुख हो गए थे और बाद में उन्होंने पूरी तरीके से संत जीवन अपना लिया। उन्हें नारायणगिरी महाराज ने दीक्षा दी थी।

महंत रामगिरी महाराज महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के कटान से बने सरला द्वीप पर बने आश्रम के प्रमुख हैं। यह अहमदनगर और औरंगाबाद जिले की सीमा पर है। बताते हैं कि इसकी स्थापना गगनगिरी महाराज ने की थी जो कि देश में हठयोग के बड़े गुरु माने जाते थे। यह द्वीप चारों तरफ नदी से घिरा हुआ है।

वह जिस संस्थान के मुखिया हैं वह प्रत्येक वर्ष एक कार्यक्रम आयोजित करता है, इसका नाम हरिनाम सप्त है। इस वर्ष यह आयोजन नाशिक में हुआ और वहीं रामगिरी महाराज ने प्रवचन में इस्लाम को लेकर एक उदाहरण दिया। जिसके बाद विवाद पैदा हुआ।

महंत रामगिरी महाराज ने ऐसा क्या कहा, जिस पर विवाद

नासिक जिले में सिन्नर तालुका के शाह पंचाले गाँव में एक धार्मिक आयोजन हुआ था। इसमें 15 अगस्त को महंत रामगिरि महाराज ने बांग्लादेश के हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाया था। इस दौरान लगातार बांग्लादेश से हिन्दुओं पर हमले और अत्याचार की खबरें सामने आ रही थीं।

महंत रामगिरी महाराज ने इस दौरान अपने प्रवचन में इस्लाम की बहुलता वाले क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बात की। उन्होंने तभी पैगम्बर मुहम्मद और कुरान को लेकर कुछ उदाहरण दिए। महंत रामगिरी महाराज का कहना था कि मुस्लिमों के सामने कई गलत उदाहरण हैं इसलिए बांग्लादेश और बाकी जगहों पर महिलाओं पर अत्याचार की खबरें आती हैं।

महंत रामगिरी महाराज ने इस दौरान हिन्दू ग्रंथों से भी कई उदाहरण दिए। मराठी में दिया गया महंत रामगिरी महाराज के प्रवचन का एक छोटा सा हिस्सा इसके बाद काट कर वायरल कर दिया गया। इसके बाद बवाल बढ़ना चालू हुआ।

अपने बयान को लेकर मुस्लिम समाज में नाराजगी पर महंत रामगिरि ने कहा, “मुस्लिम लोगों को नाराज नहीं होना चाहिए। हमने जो कहा वो सत्य कहा है। जो कहा वो उनकी किताब में लिखा हुआ है। इसलिए नाराज होने की कोई आवश्यकता नहीं।” माफी माँगने की बात पर उन्होंने कहा, “सबका अपना-अपना सोचना है। हमने जो बता दिया, वो बता दिया। बस।”

इस्लामी कट्टरपंथी महंत रामगिरी के पड़े पीछे

महंत रामगिरी महाराज के बयान का एक हिस्सा वायरल किए जाने के बाद महाराष्ट्र के भीतर मुस्लिम उनकी गिरफ्तारी की माँग करने लगे। 16 अगस्त, 2024 को महाराष्ट्र में मुस्लिमों ने बंद का ऐलान किया। कई जगह नारेबाजी भी की गई और प्रदर्शन भी हुआ।

महंत रामगिरी महाराज मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में हाल ही में सुनवाई में सामने आया कि उनके खिलाफ 67 FIR दर्ज की गई हैं। यह सभी FIR महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज की गई हैं। महंत रामगिरी महाराज के खिलाफ केवल FIR ही दर्ज नहीं करवाई गई हैं, बल्कि उनके खिलाफ मुस्लिम सड़कों पर भी हंगामा कर रहे हैं।

रामगिरी महाराज के बयान को लेकर AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की कोशिश भी की। जलील ने महाराष्ट्र के मुस्लिमों से मुंबई में इकट्ठा होने की अपील की। इस दौरान कई इस्लामी मौलाना और बड़ी संख्या में मुस्लिम इस रैली में इकट्ठा हुए।

यह भीड़ हाल ही में मुंबई पहुँची थी लेकिन राज्य की शिंदे सरकार ने इसे मुंबई की सीमाओं पर ही रोक दिया गया। इसी भीड़ के कई ऐसी वीडियो सामने आए जिनमें ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। कई मुस्लिम युवक यह नारे मौलानाओं के सामने लगाते देखे गए।

राज्य सरकार का क्या रुख?

महाराष्ट्र की शिंदे सरकार इस दौरान महंत रामगिरी महाराज की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उनके खिलाफ अगस्त में हुए प्रदर्शन के बाद राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उनके कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि राज्य में संतों को कुछ नहीं होने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिंदे के अलावा महाराष्ट्र में भाजपा विधायक नितेश राणे ने भी महंत रामगिरी महाराज का समर्थन किया है और उनको मारने की धमकी देने वालों को चेताया है। इस्लामी कट्टरपंथियों कीई धमकी के बीच महंत रामगिरी महाराज के खिलाफ दर्ज FIR पर कानून के हिसाब से काम हो रहा है।

 

हिज्बुल्लाह चीफ की मौत से तिलमिलाए ईरान ने इजरायल पर दागीं 181 मिसाइलें: नेतन्याहू बोले- तेहरान ने भारी गलती कर दी, चुकानी होगी बड़ी कीमत, US ने दिया समर्थन

इजरायल की कार्रवाई में लेबनान के आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह के चीफ नसरल्लाह की मौत से ईरान बौखला गया है। उसने मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) की रात इजरायल पर कम से कम 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान के हमले के बाद अब इजरायल ने उसे अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। इजरायल ने कहा कि ईरान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है।

ईरान के मिसाइल दागने के बाद पूरे इजरायल में 1,800 रॉकेट सायरन बजने लगे और लोग अपने-अपने सुरक्षित ठिकानों पर पहुँचने लगे। ये मिसाइलें नागरिक इलाकों में गिरी। कुछ मिसाइलें घरों और स्कूलों पर गिरीं। हमले में हताहतों की सही जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हमले के बाद इज़रायली सेना IDF ने कसम खाई है कि वह इसका जोरदार जवाब देगा।

ईरान ने कहा कि उसने हिज़्बुल्लाह, हमास और ईरानी सेना के नेताओं की हत्या के प्रतिशोध में मिसाइलें दागीं। इसने हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड के जनरल अब्बास निलफ़ोरुशान का संदर्भ दिया, जो पिछले सप्ताह बेरूत में एक इज़राइली हवाई हमले में मारे गए थे। इसमें हमास के एक शीर्ष नेता इस्माइल हनीयेह का भी उल्लेख किया गया, जिनकी जुलाई में एक संदिग्ध इज़राइली हमले में तेहरान में हत्या कर दी गई थी।

इजरायल पर हमले का आदेश इजरायल के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने दिया था। अब इजरायल के तेवर को देखते हुए अमेरिका ने कहा, “हम इस हमले के खिलाफ इजरायल की रक्षा के लिए रक्षात्मक तैयारियों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहे हैं। ईरान की ओर से इजरायल पर सीधा सैन्य हमला ईरान के लिए गंभीर परिणाम लाएगा।”

हमला काफी हद तक असफल रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तेहरान को चेतावनी दी कि उसने एक बड़ी गलती की है और इसके लिए उसे भुगतान करना होगा। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हमले में लगभग 181 मिसाइलें लॉन्च की गईं। इज़राइल रक्षा बलों ने कहा कि उन्होंने उनमें से बड़ी संख्या को नाकाम कर दिया।

नेतन्याहू ने कहा, “ईरानी सरकार हमारी खुद की रक्षा करने और अपने दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की हमारी दृढ़ता को नहीं समझती है। (हमास नेता याह्या) सिनवार और (हमास के शीर्ष सैन्य कमांडर मोहम्मद) देफ ने भी इसे नहीं समझा था। (हिजबुल्लाह नेता हसन) नसरल्लाह और (हिजबुल्लाह के चीफ ऑफ स्टाफ फुआद) शुक्र ने भी इसे नहीं समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “शायद तेहरान में ऐसे लोग भी हैं, जो इसे नहीं समझते। वे समझेंगे। हम पर जो भी हमला करेगा, उस पर हम हमला करेंगे।” उन्होंने कहा कि ऐसा हर जगह हुआ है, जहाँ इजरायल आज ‘बुराई की धुरी’ से लड़ता है। ये जगह हैं वेस्ट बैंक, गाजा, लेबनान, यमन, सीरिया और ईरान।

समर्थन देने के लिए नेतन्याहू ने अमेरिका को धन्यवाद भी दिया है। तनाव को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ ईरानी प्रतिक्रिया को दबाने में मदद करने के लिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत तैनात किया है। तनाव को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ ईरानी प्रतिक्रिया को दबाने में मदद करने के लिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत तैनात किया है।

ईरान ने आखिरी बार अप्रैल में इजरायल पर हमला किया था, लेकिन उसकी मिसाइलों को पांच सेनाओं: इजरायल, अमेरिका, फ्रांस, जॉर्डन और यूनाइटेड किंगडम की एकीकृत कार्रवाई ने नाकाम कर दिया था।ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला अप्रैल में ईरान द्वारा इजरायल पर दागे गए 120 बैलिस्टिक मिसाइलों, 170 ड्रोन और दर्जनों क्रूज मिसाइलों से बड़ा था।

मूर्ति को सफेद कपड़े से ढका और मंदिर से ले गए बाहर: जानिए वाराणसी में साईं प्रतिमाओं को गंगा में क्यों कर रहे प्रवाहित, किनके नेतृत्व में चल रहा अभियान?

उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी काशी में कई मंदिरों से शिरडी साईं की प्रतिमाएँ हटाई जा रही हैं। अब तक 14 मंदिरों से साईं की मूर्तियाँ हटा दी गई हैं। यह कदम केंद्रीय ब्राह्मण सभा के विरोध के बाद उठाया गया है, जिसमें साईं की पूजा को सनातन धर्म विरोधी बताया गया था। मूर्तियाँ हटाने से पहले संबंधित मंदिरों की सहमति ली गई है और उन्हें विधि-विधान से गंगा में विसर्जित किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाराणसी के जिन प्रमुख मंदिरों से साईं की प्रतिमाएँ हटाई गई हैं, उनमें बड़ा गणेश मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और पुरुषोत्तम मंदिर समेत 14 मंदिर शामिल हैं। सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि कुल 100 मंदिरों की सूची बनाई गई है, जहाँ से साईं की मूर्तियों को हटाया जाएगा। इनमें अगस्त्यकुंडा और भूतेश्वर जैसे पौराणिक स्थल भी शामिल हैं।

अजय शर्मा ने दावा है कि काशी महादेव शिव की नगरी है, और अनजाने में लोग साईं की पूजा करने लगे थे। उनका दावा है कि जिन मंदिरों से साईं की मूर्तियाँ हटाई जा रही हैं, उन्हें 2013 में स्थापित किया गया था। मूर्तियों को हटाने के बाद गंगा नदी में विधिपूर्वक विसर्जित किया जा रहा है। बड़ा गणेश मंदिर में साईं की मूर्ति की जगह माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

अजय शर्मा ने यह भी कहा कि साईं की पूजा करने वालों को अपने घर में पूजा करने की छूट है, या वे चाहें तो एक अलग मंदिर का निर्माण कर सकते हैं।

मंदिरों से मूर्तियाँ हटाने से पहले मंदिर प्रबंधन की सहमति ली जा रही है। बड़ा गणेश मंदिर के महंत रम्मू गुरु का कहना है कि लोग अज्ञानता के कारण साईं की पूजा कर रहे थे। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने भी इस कदम का समर्थन किया, उनका कहना है कि शास्त्रों में शिरडी साईं की पूजा का कोई विधान नहीं है। हालाँकि, समाजवादी पार्टी के MLC आशुतोष सिंह और कुछ अन्य लोग इस कदम का विरोध कर रहे हैं।

हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों ने थाने को घेरा, ईशनिंदा में हुई है गिरफ्तारी: सेना की गाड़ियों पर हमला, बांग्लादेश की घटना

30 सितंबर को बांग्लादेश के चटगाँव जिले में पाटिया पुलिस स्टेशन को इस्लामी कट्टरपंथियों की गुस्साई भीड़ ने घेर लिया। कट्टरपंथियों की पुलिस से माँग थी कि वो उस हिंदू लड़के को उनके हवाले कर दे, जिसने कथित तौर पर पैगंबर की शान में गुस्ताफी की थी। इस्लामी कट्टरपंथियों की इस भीड़ में ज्यादातर स्थानीय मदरसे के छात्र शामिल थे। उन्होंने एक सेना की गाड़ियों पर भी हमला किया, क्योंकि उन्हें उसमें एक लड़का दिखाई दिया और उन्होंने उसे हिंदू युवक समझ लिया। इस हमले में बांग्लादेशी सेना का एक अधिकारी भी घायल हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 साल के पार्था बिस्वास पिंटू को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस मामले में कमरुल इस्लाम नाम के व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें पिंटू पर फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।

जैसे ही हिंदू युवक की गिरफ्तारी की खबर फैली, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गई। उन्होंने पुलिस वालों से कहा कि वो पार्था बिस्वास उर्फ पिंटू को भीड़ के हाथों में सौंप दे, ताकि वे उसे वहीं सजा दे सकें, जैसा भीड़ ने उत्सव मंडल के साथ किया था। हालाँकि, पुलिस ने उनकी माँगों के आगे झुकने से इनकार कर दिया। इस पर भीड़ ने पुलिस स्टेशन के वेटिंग रूप एरिया में तोड़फोड़ की और बांग्लादेशी सेना की गाड़ी पर हमला कर दिया, जिसमें एक अधिकारी घायल हो गया।

हिंदू युवक पार्थ बिस्वास पिंटू को किया गया गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक आज़ादी)

इस हिंसक घटना के फोटो-वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने कुल दो सेना वाहनों पर हमला किया, लेकिन वे मौके से भागने में सफल रहे। घटना के तुरंत बाद, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में पुलिस और सेना के जवानों की एक बड़ी टीम तैनात कर दी गई।

पाटिया सर्कल एसपी अरिफुल इस्लाम ने इस मामले पर बात करते हुए कहा, “भीड़ फेसबुक पोस्ट के कारण इकट्ठा हुई थी। हमने आरोपित को सुबह ही गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। भीड़ कानूनी प्रक्रिया को समझे बिना उत्तेजित हो गई। हालाँकि अतिरिक्त पुलिस और सेना बल की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया।”

इस बीच, हिंदू युवक को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ पुलिस ने उसकी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की माँग की। वहीं, जिस सेना अधिकारी पर हमला हुआ था, उनके हाथ में चोट आई और उन्हें पाटिया उपजिला हेल्थ सेंटर के इमर्जेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया।

उत्सव मंडल को पीट-पीट कर मार डाला

यह घटना पिछले महीने हुए एक और हमले की याद दिलाती है, जब एक हिंदू लड़के उत्सव मंडल पर मुस्लिम भीड़ ने ‘ईशनिंदा’ के आरोप में हमला किया था। 4 सितंबर को, खुलना के आजम खान गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज के छात्रों ने उत्सव मंडल को खुलना मेट्रोपॉलिटन डिप्टी कमिश्नर (साउथ) के कार्यालय में ले जाकर बंद कर दिया था।

घटना की जानकारी फैलते ही वहाँ 3000 से 5000 इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गई, जो हिंदू लड़के को उनके हवाले करने की माँग कर रही थी। डिप्टी पुलिस कमिश्नर ताजुल ने भीड़ को आश्वासन दिया था कि उत्सव के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और उसे कानूनी रूप से सजा दी जाएगी। लेकिन भीड़ ने उनकी बात नहीं मानी और उत्सव पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना और नौसेना के जवान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे थे।

हालाँकि, पुलिस, सेना और नौसेना बल की मौजूदगी के बावजूद, भीड़ डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में घुस गई और उत्सव मंडल पर हमला किया। पहले माना जा रहा था कि इस हमले के बाद उसकी मौत हो गई, लेकिन आईएसपीआर ने बाद में पुष्टि की कि उत्सव मंडल जीवित है और खतरे से बाहर है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मामले बढ़े

बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा के मामले हमले से सामने आते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हो चुके हैं, विशेषकर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद।

ओपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदू लड़के उत्सव मंडल को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में लगभग मार डाला था।

यह भी खुलासा हुआ था कि मुस्लिम छात्रों ने 60 से अधिक हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है।

हाल ही में, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

6 सितंबर को चटगांव के कादम मुबारक इलाके में गणेश उत्सव के दौरान हिंदू भक्तों की एक शोभायात्रा पर भी हमला हुआ था।

ये ‘रिसोल बैंक ऑफ इंडिया’ क्या है जो छापता है अनुपम खेर की तस्वीर वाले ₹500 के नोट, हैरान कर देगी ₹1.60 करोड़ की वह ठगी जिसमें चला गया 2100 ग्राम सोना

गुजरात के एक सोना व्यापारी से नकली नोटों के जरिए 1 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की गई है। 500 रुपए मूल्य के इन नोटों पर महात्मा गाँधी के बदले अनुपम खेर की फोटो छपी हुई है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्पेलिंग भी गलत छपी हुई है। इस नोटों का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसे खुद अनुपम खेर ने शेयर किया है। पुलिस ने नकली नोटों को कब्ज़े में ले लिया है और रविवार (24 सितंबर 2024) को केस दर्ज करके ठगों की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ठगी का यह अनोखा मामला गुजरात की राजधानी अहमदाबाद का है। यहाँ के मानेक चौक इलाके में मेहुल ठक्कर की सर्राफे की दुकान है। 24 सितंबर को उनके पास प्रशांत पटेल नामक युवक की कॉल आती है। कॉलर ने 2100 ग्राम सोना खरीदने की इच्छा जताई। प्रशांत पटेल एक नामी ज्वैलरी शॉप का मैनेजर था जहाँ से मेहुल से पुराने व्यापारिक संबंध थे। प्रशांत पटेल की बातों में आकर मेहुल इस डील के लिए तैयार हो गए।

एडवांस माँगे जाने पर प्रशांत ने बताया कि खरीदार इतना पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं कर सकता। उसने मेहुल को पैसे डिलीवरी वाले पते पर ही कैश में देने का भरोसा दिया। प्रशांत ने सोने की डिलीवरी के लिए नवरंगपुरा क्षेत्र की एक कूरियर कम्पनी का पता दिया। 1 करोड़ 60 लाख रुपयों में डील फाइनल हो जाने के बाद ठक्कर का कर्मचारी भरत जोशी सोना लेकर बताए गए पते पर पहुँच गया।

यहाँ पर उसे एक व्यक्ति मिला जिसने एक प्लास्टिक का कवर देते हुए उसमें 1 करोड़ 30 लाख रुपए होने का दावा किया। इस प्लास्टिक कवर में 500 रुपए की नकली नोटों के 26 बंडल मौजूद थे। ठग ने भरत जोशी से नोटों को कैश मशीन में गिनने के लिए कहा। इसी के साथ वह सोना उठाकर यह कहते हुए चला गया कि बचे 30 लाख रुपए वो बगल वाली दुकान से ला रहा है। इधर कर्मचारी ने जैसे ही प्लास्टिक कवर खोला तो उसके अंदर से नकली नोट निकले।

इन नोटों की बनावट भी अजीब थी। नोटों में महात्मा गाँधी की जगह अनुपम खेर का चित्र छपा हुआ था। इन नकली नोटों के ऊपर ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ के बदले ‘रिसोल बैंक ऑफ इंडिया’ लिखा है। ये नोट जिस बंडल में पैक किए गए थे उनमें ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की जगह Start Bank of India प्रिंट था। अपने साथ हुई ठगी को भाँपते हुए भरत जोशी फ़ौरन ही ठग की तलाश में बाहर निकले। हालाँकि इतनी देर वो रफूचक्कर हो चुका था।

आखिरकार भरत जोशी ने अपने मालिक मेहुल को सूचना दी। मेहुल के जरिए यह सूचना पुलिस तक पहुँची। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर नोटों को अपने कब्ज़े में लिया और पड़ताल शुरू कर दी। जाँच में पता चला कि दोनों ठगों ने अपनी करतूत को लम्बी प्लानिंग के बाद अंजाम दिया था। इन्होंने जो कूरियर कम्पनी खोली थी वह भी फर्जी थी। बाहर एक फर्जी बोर्ड लगवा रखा था। दुकान किराए पर थी जिस पर महज 2 दिनों पहले ही पूरा सेटअप किया गया था।

पुलिस को यह भी पता चला कि ठगों ने दुकान मालिक से 1-2 दिनों के बाद एग्रीमेंट बनवाने की बात कही थी। फ़िलहाल पुलिस CCTV फुटेज सहित अन्य सबूतों की पड़ताल कर के ठगों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। वहीं अपनी तस्वीर से छपे नोटों पर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने भी चुटकी ली है। कई चौंकने वाली इमोजी के साथ अनुपम खेर ने लिखा, “लो जी कर लो बात। पाँच सौ के नोट पर गाँधी जी की फ़ोटो की जगह मेरी फ़ोटो? कुछ भी हो सकता है।”

हिंदू लड़कियों को ‘प्रेम’ में फँसाओ, मुस्लिम आबादी बढ़ाओ, भारत को बनाओ पाकिस्तान-बांग्लादेश: जिस ‘लव जिहाद’ को ठुकराते हैं लिबरल, अदालत ने उसे माना ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’

लव जिहाद से जुड़े एक मामले में बरेली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मोहम्मद आलिम नाम के आरोपित को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणिया कीं। उन्होंने ऐसे मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लव जिहाद का मुख्य उद्देश्य हिंदुस्तान के खिलाफ एक मजहब विशेष के कुछ अराजक तत्वों द्वारा जनसंख्यायिक युद्ध एवं अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत वर्चस्व स्थापित करना है। जज ने कहा लव जिहाद के तहत हिंदू लड़कियों को फँसाया जा रहा है और उनका धर्मांतरण होता है ताकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा किए जा सके। इस साजिश में विदेशी फंडिंग न हो, इससे भी मना नहीं किया जा सकता। ये केवल और केवल मुस्लिम जनसंख्या को देश में बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

कोर्ट की यह टिप्पणी उन लिबरल-वामपंथियों को शायद न पचे जो ‘लव जिहाद’ शब्द के अस्तित्व को हमेशा से नकारते आए हैं… जबकि हकीकत तो ये है कि ये लव जिहाद इस्लामी कट्टरपंथियो की ही देन है। इसके लिए बाकायदा ब्रेनवॉश होता है। बताया जाता है कि अगर हिंदू लड़की को इस तरह फँसाकर वह उससे संबंध बनाएँगे, उससे निकाह कर ले जाएँगे तो उन्हें जन्नत मिलेगी।

लव जिहाद करने पर मिलेगी ‘जन्नत’

अगर इस बात पर यकीन नहीं, तो 2022 का एक पुराना मामला पढ़िए। मोहम्मद आलम ने एक अनुज प्रताप सिंह बनकर एक हिंदू लड़की को फँसाया, उसने लड़की को यकीन दिलाया कि वो हिंदू है, उसके बाद उससे शादी कर ली।

राज जब खुला तो मोहम्मद आलम युवती की अश्लील वीडियो वायरल करने की, उसको गोली मारने की धमकियाँ देने लगा। हिंदुओं को अपशब्द भी वो खुलकर कहने लगा। एक बार तो उसने युवती को गोली मारी भी, लेकिन लड़की बचकर निकल गई।

आलम ने ये सब करने के बाद अपने स्टेटस पर क्या अपडेट किया इसे ध्यान से पढ़िए। उसने अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है-“मैंने जो किया है, इससे जन्नत मिलती है।”

जाहिर है कि उसे किसी ने ये बताया होगा कि हिंदू लड़की को फँसाना, उसका रेप करना, उससे इस्लाम कबूल करवाना ये सब जन्नत जाने के रास्ते हैं तभी उसने ऐसा किया…?

बांग्लादेश में भी चल रहा लव जिहाद का खेल

आपको जानकर हैरानी होगी कि लव जिहादी सिर्फ भारत में नहीं बल्कि बांग्लादेश में भी अपना खेल खेल रहे हैं। ऐसी मीडिया रिपोर्ट सामने आ चुकी है जहाँ कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समूह में शामिल मुस्लिम युवकों को इनाम देते दिखाया गया था ताकि वो उस राशि का इस्तेमाल हिंदुओं को इस्लाम कबूल करवाने के लिए करें।

ऐसे फतवे वायरल हुए थे जिसमें कहा गया था कि हिंदू युवतियों को लव जिहाद में फँसाओ और उनका धर्मांतरण कराओ। फतवे में 50 हजार से लेकर 50 लाख बांग्लादेशी करंसी इनाम देने की भी बात है। इस फतवे की कॉपी को संगठन के हर जिला अध्यक्ष और महासचिवों के पास भेजा गया है।

लव जिहाद शब्द गलत तो कहाँ से हर साल आ रहे मामले

इन प्रमाणों के बाद भी यदि संदेह उठता है तो उदाहरण देने के लिए सैकड़ों मामले हैं। अकेले 2023 में ऑपइंडिया ने 153 लड़कियों के लव जिहाद में शिकार होने की सूचना को रिपोर्ट किया था। जाहिर है ऑपइंडिया भी हर मामले को नहीं उठा पाया होगा, फिर भी सोचिए संख्या 153 तक पहुँच गई थी। इसी तरह साल 2022 में भी ऑपइंडिया ने 150 के करीबन मामले लव जिहाद पर रिपोर्ट किए थे…। हर रिपोर्ट में खबरों के लिंक और उनका सोर्स जोड़ा गया था जिसका मतलब साफ है कि वो घटनाएँ हकीकत थीं, उन्हें किसी ने खुद से शब्दों में गढ़कर नहीं पेश कर दिया था।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं इस्लामी कट्टरपंथियों की मंशा का खुलासा

केरल के मुख्यमंत्री रहे वीएस अच्युतानंदन भी लव जिहाद की हकीकत को कबूल चुके हैं। साल 2010 में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया था कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों की योजना अगले 20 साल में केरल को मुस्लिम राज्य बनाने की है। इसके लिए वे युवाओं का माइंडवाश कर रहे हैं। उन्हें पैसे दे रहे हैं। मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए युवाओं को हिंदू लड़कियों से शादी करने के लिए उकसाया जा रहा है। कम्युनिस्ट नेता ने बताया था कि इस्लामी कट्टरपंथियों की तरकीबें काम भी कर रही और राज्य में उनकी आबादी भी बढ़ रही है।

सर्वे में भी सामने आया था लव जिहाद को सच

लव जिहाद के काले सच को आम लोग भी धीरे-धीरे अच्छे से जान-समझ रहे हैं। कुछ समय पहले लव जिहाद (Love Jehad) की बढ़ती घटनाओं के बीच एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई थी। इस सर्वे में देश भर के 1.40 लाख से अधिक लोगों से राय ली गई थी और नतीजे ये निकलकर आए थे कि देश के 53% लोगों का मानना था कि मुस्लिम पुरुष लव जिहाद में लिप्त रहते हैं।

अगर लव जिहाद झूठ तो क्या है इन सवालों के जवाब

इतने प्रमाणों के बावजूद जो ये मानते हैं कि लव जिहाद जैसा कुछ नहीं है और दक्षिणपंथी केवल प्रेम के बीच मजहब को लाकर नफरत फैलाते हैं… उनसे सवाल किया जाना चाहिए कि ऐसे मामलों में अगर दो लोगों के बीच रिश्ता प्रेम का ही होता है तो फिर उसकी शुरुआत झूठ से ही क्यों होती है? क्या जरूरत होती है नाम छिपाकर किसी दूसरे धर्म की लड़की को फँसाने की? क्या जरूरत होती है उससे शादी करने से पहले उसका धर्म बदलवाने की? उस पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाने की, इस्लामी रीति-रिवाज मनवाने की? सिर्फ प्रेम की बात होती तो क्या ऐसे मामले सामने आते…? नहीं।

ये मामले लव जिहाद के ही होते हैं जिनमें केवल एक तरह का पैटर्न देखने को मिलते हैं। दिल्ली हो या केरल, बंगाल हो या कश्मीर…आप जहाँ से लव जिहाद के मामले सुनेंगे तब आपको पता चलेगा कि कैसे सिर्फ पीड़ित और आरोपित अलग हैं लेकिन बाकी सारी बातें एक जैसी। कई बार लव जिहाद की पीड़िताओं को भागकर अपनी आपबीती बताने का मौका मिलता है मगर कई ऐसी भी होती हैं जो एक बार जाल में फँसने के बाद इससे कभी निकल ही नहीं पातीं। फिर या तो उनकी लाश मिलती है या फिर लाश के टुकड़े…।

अवैध है जामा मस्जिद, इसे गिराओ: अब हिमाचल के कुल्लू में सड़क पर हिंदू, ‘धर्म जागरण यात्रा’ और हनुमान चालीसा पाठ से जताया विरोध; वैध बता रहा प्रशासन

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बाद अब हिन्दू संगठनों ने कुल्लू की एक अन्य मस्जिद को अवैध बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। यहाँ बनी जामा मस्जिद को गिराने की माँग करते हुए हिन्दू संगठन के सदस्यों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई है। सोमवार (30 सितंबर 2024) को हिन्दू संगठनों ने बड़ा जुलूस निकाल कर अवैध इबादतगाहों के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। फ़िलहाल, मस्जिद के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मस्जिद को विवादित बताया जा रहा है वह कुल्लू के अखाड़ा बाजार में बनी है। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे जामा मस्जिद के नाम से बुलाते हैं। प्रशासन ने इसे वैध करार दिया है लेकिन हिन्दू संगठन के सदस्यों का दावा इस से उलट हैं। उन्होंने इसके निर्माण को गैर कानूनी बताया और सोमवार को 3 किलोमीटर तक जुलूस निकाला। इस जुलूस को ‘धर्म जागरण यात्रा’ का नाम दिया गया जिसमें ढोल-नगाड़े बज रहे थे।

जुलूस की शुरुआत रामशिला से हुई, जहाँ लोगों ने पारम्परिक परिधान नाटी पहनकर भगवा ध्वज के साथ भाग लिया। जुलूस जब जामा मस्जिद के पास पहुँचा, तो कुछ प्रदर्शनकारी उत्तेजित हो गए और मस्जिद की तरफ बढ़ने लगे। इस पर पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें रोका, जिससे हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ने दिया और मस्जिद के करीब प्रदर्शन नहीं होने दिया। प्रशासन ने एहतियातन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 लागू कर दी थी।

पुलिस ने लोगों से शाँति बनाए रखने और कानूनी तौर पर अपनी बात कहने की अपील की। प्रशासन के प्रयासों से जुलूस में शामिल कोई भी व्यक्ति मस्जिद के पास नहीं जा पाया। थोड़ी देर में जुलूस आगे बढ़ गया और मस्जिद से लगभग 25 मीटर दूर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगा।

प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद सनातन धर्म की रक्षा की शपथ ली और मस्जिद को गिराने की माँग को लेकर प्रशासन से बातचीत की। हालाँकि, उपायुक्त तोरुल एस रवीश और एसडीएम विकास शुक्ला की ओर से मस्जिद के वैध कागजात दिखाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट नहीं किया जा सका। एसडीएम विकास शुक्ला के मुताबिक अखाड़ा बाजार की जामा मस्जिद पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है। हालाँकि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे क्षितिज सूद ने अगली बार और उग्र प्रदर्शन का एलान किया है।

बताते चलें कि मस्जिद को अवैध बताते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 21 जून 2017 को इसकी शिकायत नगर परिषद कुल्लू से की थी। इस शिकायत का संज्ञान ले कर 28 जून को नगर परिषद ने एक नोटिस जारी किया था जिसके बाद निर्माण कार्य बंद करा दिया गया था। जामा मस्जिद नाम से चर्चित इस ढाँचे का 14 जुलाई 2000 को पारित हुआ था जिसमें एक मंजिल पुरानी है और तीन मंजिलें साल 2000 के बाद बनाई गईं हैं।

हालाँकि आरोप है कि मस्जिद का निर्माण नक्शे के मुताबिक नहीं हुआ है जिस पर शहरी विकास विभाग जाँच भी कर रहा है। हिन्दू संगठनों ने अब प्रशासन पर सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले को अदालत में भी ले जाने का ऐलान किया है।

RG Kar अस्पताल में डॉक्टर बिटिया संग बर्बरता से हिल गया पूरा देश, पर पश्चिम बंगाल सरकार की नहीं टूट रही नींद: सुप्रीम कोर्ट ने ‘सुस्ती’ पर लताड़ा, जारी रहेगी हड़ताल

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में हो रही देरी पर कड़ी फटकार लगाई। यह मामला 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई बलात्कार और हत्या से जुड़ा है। कोर्ट ने सरकार से सुरक्षा उपायों की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए, विशेषकर CCTV कैमरों और अन्य सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर 15 अक्टूबर तक सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने प्रेस रिलीज जारी कर सरकार और न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कई महीनों बाद भी अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे डॉक्टर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों ने सरकार से जल्द और ठोस सुरक्षा इंतजामों की माँग की है। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा उपायों की कमी के कारण कई घटनाएँ रोकी जा सकती थीं, यदि समय पर कार्रवाई की जाती।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CCTV कैमरे, ड्यूटी रूम, और शौचालय जैसे बुनियादी उपायों की अब तक कितनी प्रगति हुई है। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण काम में देरी हुई है, और अब तक केवल 22% CCTV कैमरे स्थापित किए गए हैं।

कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पूछा, “50% से अधिक काम किसी भी क्षेत्र में पूरा क्यों नहीं हुआ है? डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इतनी धीमी गति क्यों है?” कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह 15 अक्टूबर तक सुरक्षा उपायों को तेजी से लागू करे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में कार्रवाई शुरू की थी।

इससे पहले, कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। कोर्ट ने डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया था और साथ ही अस्पताल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा और CBI से भी मामले में प्रगति की जानकारी माँगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सुरक्षा उपायों में तेजी लाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के आखिर में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में यह जानकारी दें कि क्या अस्पताल में कोई ऐसा व्यक्ति है, जिस पर अपराध या वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। यदि CBI द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि पहले ही पाँच डॉक्टरों को निलंबित किया जा चुका है, और यदि और लोगों के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा उपायों में और देरी होती है, तो राज्य सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

पीड़िता की पहचान-तस्वीरों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीरें और वीडियो साझा करने को लेकर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकिपीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर न करने का जो आदेश दिया गया था, वह सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लागू होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सूचित किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो इस तरह की सामग्री पर निगरानी रखेगा और उसे हटाने के निर्देश देगा। कोर्ट ने इस मामले में MEITY को दिशानिर्देश तैयार करने के लिए भी कहा।

जारी रहेगी डॉक्टरों की हड़ताल

इस बीच, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने सोमवार (1 अक्टूबर 2024) को एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्य सरकार और न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त की घटना के बाद भी अस्पतालों में सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रेस रिलीज में कहा गया कि राज्य के अस्पतालों में CCTV कैमरों की कमी और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती में देरी के कारण डॉक्टरों को असुरक्षित महसूस हो रहा है।

जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना मरीजों का इलाज करना संभव नहीं है। उनका कहना था कि यदि सरकार ने पहले से सुरक्षा उपाय लागू किए होते, तो इस घटना को रोका जा सकता था। जूनियर डॉक्टरों ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से उनकी शिकायतों को अनसुना किया गया है और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

डॉक्टरों ने अपनी पाँच प्रमुख माँगें भी सरकार के सामने रखीं थी, जिसमें अस्पतालों में CCTV कैमरे लगाने, सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने, और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने जैसी माँगें शामिल थीं। डॉक्टरों का कहना था कि सरकार ने इन माँगों पर अब तक ध्यान नहीं दिया है और अस्पतालों में सुरक्षा की स्थिति बदतर होती जा रही है।

प्रेस रिलीज़ में जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कई सरकारी अस्पतालों में आज भी बुनियादी सुरक्षा उपायों की कमी है। उन्होंने बताया कि कई अस्पतालों में डॉक्टरों और उनके परिवारों के साथ हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं, जिनमें शारीरिक हमले भी शामिल हैं। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि अगर अस्पतालों में ICU और अन्य सुविधाओं को बेहतर किया जाता, तो कई घटनाएं रोकी जा सकती थीं।

डॉक्टरों का यह भी कहना था कि सागर दत्ता अस्पताल में हाल ही में एक मरीज की मौत हो गई थी, जिसे समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टरों ने राज्य सरकार से यह सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब तक मरीजों और डॉक्टरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाएगा।

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के मशहूर RG कर मेडिकल कॉलेज में 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने डॉक्टरों के बीच सुरक्षा को लेकर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस जघन्य अपराध की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टरों ने विशेष रूप से अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और सख्त सुरक्षा उपायों की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर उचित सुरक्षा उपाय होते, तो यह घटना टाली जा सकती थी।

इस खबर को रोकने के लिए ₹10 लाख का ऑफर, पर हम छाप रहे… क्योंकि 12वीं पास भी बन रहे हैं डॉक्टर: MBBS की पढ़ाई के बिना ही 98 को डिग्री, कोई सर्जन तो कोई गाइनी

आपने झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सुना होगा। संभव है कि कभी उनके फेरे में आप फँस भी चुके हों। पर राजस्थान में ऐसे लोगों को सरकारी ठप्पे के साथ डॉक्टर बना देने का मामला सामने आया है, जिन्होंने कभी एमीबीएस की पढ़ाई ही नहीं की। इनमें से कुछ तो 12वीं पास ही हैं।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश आकोदिया ने किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कम से कम 98 ऐसे लोगों का राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन किया गया है जो वास्तविकता में डॉक्टर नहीं हैं। उनका यह भी दावा है कि काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा ने इस खबर को रोकने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए देने का ऑफर दिया था।

रिपोर्ट से पता चलता है कि आरएमसी के पास जब ऑनलाइन आवेदन आए तो उन्होंने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि जाली ईमेल अटैच करके सत्यापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इन कथित डॉक्टरों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और एनओसी के फर्जी दस्तावेज अटैच किए थे। आरएमसी ने बिना किसी की डिग्री की पड़ताल किए ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इन फर्जी डॉक्टरों में से कुछ सर्जन हैं तो कुछ गाइनी।

रिपोर्ट में ऐसे कुछ डॉक्टरों के नाम भी उजागर किए हैं। जैसे डॉ. सरिमुल एच मजूमदार, डॉ. रामकिशोर महावर, डॉ. गीता कुमारी, डॉ. देवेंद्र नेहरा, डॉ. शांतनु कुमार, डॉ. पंकज यादव, डॉ. महेश कुमार गुर्जर आदि। इन फर्जी डॉक्टरों ने न तो कभी मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप का। बावजूद इनको सरकारी मुहर लगाकर डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र बाँट दिया गया।

भास्कर ने इस मामले में सच्चाई खोजने के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ राजेश का स्टिंग भी किया। स्टिंग में राजेश शर्मा ने स्वीकार किया कि ये इस तरह के फर्जी डॉक्टरों को आरएमसी ने सर्टिफिकेट दिया। बाद में उन्होंने कथित तौर पर रिपोर्टर से कहा कि वह इस खबर को कहीं छापे नहीं, इसके लिए वे 10 लाख रुपए देंगे। रजिस्ट्रार ने ये भी कहा कि वो ये पैसे उन्हीं लोगों से लेंगे जिनको जिनकी फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरियाँ लगी हैं। रजिस्ट्रार ने कैसे भी इस मामले को निपटाने की बात कही।

बाद में जब भास्कर के रिपोर्टर ने इस संबंध में चिकित्सा मंत्री खींवसर को सारे सबूत दिखाए तो वह चौंक गए। उन्होंने कहा यह मामला बेहद गंभीर है। इस मामले में एक्शन लेना जरूरी है। उन्होंने रिपोर्टर से पूरी डिटेल माँगी और आरएमसी के ऑफिस को सीज करने की बात कही।