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गो हत्या के विरोधी थे MK गाँधी… लेकिन गोवध रोकने के लिए कानून बनाने का करते थे विरोध: खुद ही कंफ्यूज थे बापू या कर रहे थे मुस्लिम तुष्टिकरण?

भारत में गो-हत्या एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। यह मुद्दा आज से नहीं, बल्कि सदियों से है। मुगलकाल में भी इसको लेकर तमाम विरोध एवं युद्ध होते रहे हैं। ब्रिटिश भारत में भी गो-हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। महात्मा गाँधी भी गो-हत्या पर प्रतिबंध एवं गो-संरक्षण के प्रबल समर्थक थे। हालाँकि, मुस्लिम इससे नाराज ना हो जाएँ, इसके कारण वे इस पर प्रतिबंध के खिलाफ थे।

देश में गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर देश भर से लोगों के पत्र एवं टेलीग्राम महात्मा गाँधी को मिलते रहते थे। हिंदुओं ने ऐसे लगभग एक लाख पत्र भेजकर गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। तब महात्मा गाँधी ने 25 जुलाई 1947 ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसको लेकर एक जवाब दिया था।

महात्मा गाँधी ने माना था कि गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है, लेकिन बावजूद उन्होंने कहा था कि वे किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते और ना ही वे करेंगे। उन्होंने कहा था कि जब तक कि जब तक गो-हत्या करने वाले (विशेष रूप से मुस्लिमों के संदर्भ में) में खुद नहीं ऐसा करने के लिए खुद तैयार ना हों।

अपने जवाब में महात्मा गाँधी ने कहा था, “मैं किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए कैसे मजबूर कर सकता हूँ, जब तक कि वह खुद ऐसा करने के लिए तैयार ना हों? ऐसा नहीं है कि भारतीय संघ में केवल हिंदू ही हैं। यहाँ मुस्लिम, पारसी, ईसाई और अन्य धार्मिक समूह के लोग भी रहते हैं।”

एक तरफ महात्मा गाँधी कहते थे कि वे गो-हत्या के विरोधी हैं, दूसरी तरफ वे कहते थे कि गो-हत्या नहीं करने के लिए वे किसी को मजबूर नहीं कर सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने अपने जीवन में बार-बार गाय की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के हिंदुओं को न केवल गो-रक्षा या गो-सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

महात्मा गाँधी ने कहा, “मुस्लिमों पर गाय का वध करने का कोई धार्मिक दायित्व नहीं है। जहाँ तक ​​मैं कुरान को समझ पाया हूँ, उसमें किसी भी जीवित प्राणी का बिना कारण के जीवन लेना पाप बताया गया है। गाय को मारना साथी देशवासियों और मित्रों, हिंदुओं को मारना है। कुरान कहता है कि जो व्यक्ति अपने निर्दोष पड़ोसी का खून बहाता है, उसके लिए कोई स्वर्ग नहीं हो सकता।”

इसी तरह यंग इंडिया में लिखते हुए मोहनदास करमचंद गाँधी ने गौ रक्षा की आवश्यकता और महत्व के बारे में कहा है, “हिंदू धर्म का मुख्य तथ्य गौ रक्षा है। मेरे लिए गौ रक्षा मानव विकास में सबसे अद्भुत घटनाओं में से एक है। यह मनुष्य को इस प्रजाति से परे ले जाती है। मेरे लिए गाय का मतलब संपूर्ण उप-मानव दुनिया है।”

कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा, “गाय के माध्यम से मनुष्य को सभी जीवित प्राणियों के साथ अपनी पहचान का एहसास करने का आदेश दिया गया है। गाय को देवत्व के लिए क्यों चुना गया, यह मेरे लिए स्पष्ट है। भारत में गाय सबसे अच्छी साथी थी। वह बहुत कुछ देने वाली थी। उसने न केवल दूध दिया, बल्कि उसने कृषि को भी संभव बनाया।”

महात्मा गाँधी ने 6 अक्टूबर 1921 को यंग इंडिया में लिखे लेख में आगे लिखा, “गौ रक्षा दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। और हिंदू धर्म तब तक जीवित रहेगा जब तक गाय की रक्षा करने वाले हिंदू हैं… हिंदुओं का मूल्यांकन उनके तिलक से नहीं, मंत्रों के सही उच्चारण से नहीं, उनके तीर्थयात्राओं से नहीं, जाति के नियमों के उनके सबसे सख्त पालन से नहीं, बल्कि गाय की रक्षा करने की उनकी क्षमता से किया जाएगा।”

इसी तरह दिसंबर 1927 में मद्रास में आयोजित कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में महात्मा गाँधी ने एक मसौदा प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी। इसमें एक पंक्ति थी, जिसमें कहा गया था, “मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो-रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है!”

गाँधीजी उस रात बोले, “मैंने एक बड़ी गलती की है। मैंने मसौदा ठीक से नहीं पढ़ा। उस मसौदे में मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है! मैं इसे कैसे बर्दाश्त कर सकता हूँ? अगर वे गाय काटते हैं तो हम उन्हें बलपूर्वक नहीं रोक सकते। यह सच है, लेकिन हम कम से कम प्रेमपूर्वक सेवा करके उनका विश्वास जीत सकते हैं और उन्हें अपना दृष्टिकोण समझा सकते हैं, है न?”

महात्मा गाँधी गो-सेवा को हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग मानते हुए भी उन्होंने गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ रहे। उन्होंने कहा है, “मैं गो-रक्षा को हिंदू धर्म का मुख्य तत्व मानता हूँ, लेकिन मैं इस बात को कभी नहीं समझ पाया कि इस मामले में मुसलमानों के प्रति इतनी नफरत क्यों है। हम रोज़ाना अंग्रेजों की तरफ़ से होने वाले कत्लेआम के बारे में कुछ नहीं कहते।”

गो-हत्या को लेकर हिंदुओं के भड़कने को लेकर महात्मा गाँधी ने कहा है, “जब कोई मुसलमान गाय काटता है तो हमारा गुस्सा भड़क उठता है। गाय के नाम पर जितने भी दंगे हुए हैं, वे सब बेकार की कोशिशें हैं। उन्होंने एक भी गाय नहीं बचाई, बल्कि इसके विपरीत मुसलमानों की कमर कस दी है और इसके परिणामस्वरूप और ज़्यादा कत्लेआम हुआ है।”

महात्मा गाँधी ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं की हमेशा से यही शिकायत रही है कि मुसलमान गोमांस खाते हैं और बकरीद के दिन जानबूझकर गाय की हत्या करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू मुसलमानों को मांस या गोमांस खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। शाकाहारी हिंदू अन्य हिंदुओं को मछली, मांस या मुर्गी खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

महात्मा गाँधी कहते हैं, “गोरक्षा की समस्या केवल गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुसलमानों को गोमांस खाने और गोहत्या से रोकने में है। यह बेतुका लगता है। गाय को मारे जाने पर शायद ही किसी की आत्मा को पीड़ा नहीं होती है। लेकिन मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे अपना धर्म स्वयं निभाना है या किसी और से निभाना है? दूसरों को ब्रह्मचर्य का उपदेश देने से क्या लाभ होगा, यदि मैं स्वयं ही दुराचार में डूबा हुआ हूँ?”

इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गाँधी कहते हैं, “मान लीजिए कि मैं स्वयं गाय को नहीं मारता, तो क्या यह मेरा कर्तव्य है कि मैं मुसलमानों को उनकी इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने के लिए बाध्य करूँ? हम भूल जाते हैं कि ऐसे हिंदू भी हैं, जो खुशी-खुशी गोमांस खाते हैं। मैंने रूढ़िवादी वैष्णवों को जाना है, जो डॉक्टरों द्वारा बताए जाने पर अर्क खाते हैं।”

महात्मा गाँधी खाने की स्वतंत्रता के हिमायती थे। वे कहते थे, “मैं यह मानता हूँ कि मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए, अगर वे चाहें तो। हालाँकि, यह ध्यान रखना होगा कि इससे उनके हिंदू पड़ोसियों की संवेदनशीलता को ठेस न पहुँचे। मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी देना सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अपरिहार्य है, और गाय को बचाने का यही एकमात्र तरीका है।”

महात्मा गाँधी कहते थे, “गाय को बचाने के लिए मुसलमान से दुश्मनी पालना गाय को मारने का पक्का तरीका है और यह दुगुना पाप है। किसी हिंदू द्वारा गाय को मारने से हिंदू धर्म नष्ट नहीं होगा। हिंदू का धर्म गाय को बचाना है, लेकिन गैर-हिंदू पर बल प्रयोग करके गाय को बचाना उसका धर्म नहीं हो सकता। अगर कोई मुसलमान सोचता है कि उसे गाय को मारना चाहिए तो हिंदू बलपूर्वक उसके हाथ क्यों रोकेगा?ठ

गाँधी कहते थे, “क्यों न वह (हिंदू) उसके (मुस्लिमों के) सामने घुटनों के बल गिरकर उससे विनती करे? लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे। तो फिर, भगवान एक दिन मुसलमानों और हिंदुओं से वह करवाएगा जो हम आज नहीं कर सकते। अगर आप ईमानवाले हैं, तो मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप अपने आप में सिमट जाएँ और अपने अंदर रहनेवाले से प्रार्थना करें कि वह आपके हाथों को गलत कामों से दूर रखे और उन्हें सही काम करने के लिए प्रेरित करे।”

महात्मा गाँधी किसी मुस्लिम को गोहत्या से दूर रखने को उसे जबरदस्ती हिंदू धर्म में परिवर्तित करने की तरह मानते थे। वे कहते थे कि अगर भारत में हिंदुओं की सरकार बनी तो भी कानून बनाकर मुसलमान अल्पसंख्यकों को गोहत्या से रोकना गलत होगा। किसी व्यक्ति के धार्मिक आचरण को उस व्यक्ति पर लागू करना स्पष्ट रूप से गलत है, जो उस धर्म को नहीं मानता।

महात्मा गाँधी अलग तरह से सोचते थे। वे सोचते थे कि जैसे वे हैं, वैसी सारी दुनिया है। वे कहते थे, “हिंदुओं को गाय के बारे में मुसलमानों की चिंता करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें मुसलमानों से किसी तरह की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्हें मुसलमानों की माँग को मान लेना चाहिए। यदि गोहत्या पर रोक बलपूर्वक नहीं, बल्कि मुसलमानों और अन्य लोगों द्वारा जानबूझ कर स्वेच्छा से की गई आत्म-त्याग की कार्रवाई के रूप में लगाई जाए, तो यह हिंदू धर्म के लिए सम्मान की बात होगी।”

ईरान ने करीब 200 मिसाइलें दागी, पर केवल 1 व्यक्ति की हुई मौत, वह भी निकला फिलस्तीनी: आयरन डोम और बंकर बन गए इजरायल के सुरक्षा कवच

इजरायल पर मंगलवार (1 अक्टूबर, 2024) को हुए ईरान के हमले में एक फिलिस्तीन के व्यक्ति की मौत हो गई। इजरायल के जेरिको के पास वेस्ट बैंक के नुइमा शहर में उस पर इंटरसेप्टेड मिसाइल का हिस्सा गिर गया। मृतक की पहचान हो गई है और स्पष्ट हो गया है कि उसकी मौत ईरानी हमले में हुई।

मृतक फिलिस्तीनी गाजा के जबालिया इलाके का रहने वाला था। मृतक का नाम समेह असाली है और वह 37 वर्ष का था। फिलिस्तीनी प्रशासन ने बताया है कि उनके इलाके में रॉकेट और मिसाइल के हिस्से गिरने के कारण नुकसान हुआ है और एक जान भी गई है। बताया गया है कि समेह असाली एक कामगार था।

इसके अलावा, उसी रॉकेट के टुकड़े लगने के कारण 4 फिलिस्तीनी घायल भी हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन बच्चों के पिता समेह अल-असाली उन सैकड़ों गाजा मजदूरों में से एक है, जिनके पास इजरायली वर्क परमिट है। बताया गया कि समेह 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल के खिलाफ हमास के हमले के दौरान इजरायल में फंस गया था और उसने वेस्ट बैंक में शरण ली थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखता है कि अल-असाली के शव के पास 1 मीटर लंबा मिसाइल का टुकड़ा जमीन पर पड़ा हुआ है और उसे चादर से ढका हुआ है। इस घटना का एक वीडियो भी CCTV पर रिकॉर्ड हो गया जो कि अब लोग साझा कर रहे हैं।

वीडियो में दिखता है कि समेह असाली नुइमा गाँव की सड़क पर टहल रहा है, इसी दौरान आसमान से ईरानी मिसाइल का एक बड़ा टुकड़ा गिरता हुआ दिखाई देता है। मिसाइल का टुकड़ा सीधे समेह अल-असाली के ऊपर गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इजरायली एजेसियों ने बताया है कि ईरानी हमले के कारण तेल अवीव के भीतर केवल 2 लोग ही घायल हुए हैं जबकि बाकी कुछ लोगों को हलकी फुलकी चोटें आई हैं। इजरायल और ईरान के बीच गहराते संकट के बीच 1 अक्टूबर को युद्ध के बादल छा गए। ईरान ने इस दौरान इजरायल पर लगभग 200 मिसाइल दागीं।

ईरानी हमले से बचने के लिए इजरायल के लोगों ने बंकरों में शरण ली थी। बताया गया कि ईरान द्वारा दागी गईं 181 मिसाइलों में से ज्यादातर को इजरायल के आयरन डोम ने हवा में ही मार गिराया। यह भी सामने आया कि मिसाइलों को मार गिराने में अमेरिकी सेनाओं ने भी सहायता की।

इससे पहले सोमवार को इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के भीतर कई गाँवों में हमले किए। लेबनान के इन इलाकों के भीतर इजरायल की थल सेना घुसी थी। यह हमला हिज़्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह के बंकर पर हमले में मारे जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ।

‘ईसाई बनकर देख, सारे दुख दूर हो जाएँगे’: हिंदू महिला को जबरन सोनू के घर ले गई पुष्पा, प्रार्थना सभा में बाइबिल पढ़ने को किया मजबूर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक हिंदू महिला पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। महिला को ईसाई बनने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। उससे कहा जा रहा था कि उसके सारे दुख दूर हो जाएँगे। उसे पैसे मिलेंगे। उसे बाइबिल पढ़ने को भी मजबूर किया गया।

पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने पुष्पा सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गाजियाबाद जिले के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र का है।

सोमवार (30 सितंबर 2024) को पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया है कि वह सैन विहार इलाके में रहती है। उसके घर के पास ही पुष्पा नाम की महिला भी रहती है। पुष्पा लम्बे समय से ईसाई बनने का दबाव दाल रही है। इसमें पुष्पा के कुछ और साथी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पीड़िता का आरोप है कि उससे न सिर्फ सारी तकलीफें खत्म हो जाने जैसे दावे किए जा रहे हैं, बल्कि पैसे भी देने का ऑफर दिया गया। पैसे पाने के लिए 2-3 महीने तक लगातार प्रार्थना में आने के लिए कहा गया। जब भी पीड़िता इससे इनकार करती तो उसे नए-नए प्रलोभन दिए जाते थे। सोमवार को पीड़िता अपने घर लौट रही थी। रास्ते में उसे पुष्पा कुछ अन्य महिलाओं सहित मिल गई। इसी दौरान पुष्पा बोली, “तू भगवान की पूजा करती है। मेरे साथ ईसाई बन कर देख।”

पुष्पा जबरन पीड़िता को लेकर गली नंबर 12 में मौजूद किसी सोनू के घर में गई। वहाँ यीशु की प्रार्थना सभा चल रही थी। प्रार्थना सभा में पीड़िता से जबरन बाइबिल पढ़वाई गई। इसी दौरान पीड़िता का पति अपने कुछ साथियों सहित प्रार्थना सभा में पहुँच गया। उसने विरोध किया और अपनी पत्नी को वहाँ से लेकर वापस आ गया। प्रार्थना सभा से लौटने के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा कर पुष्पा सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि पुष्पा और उसके साथी पहले भी कई लोगों को ईसाई बना चुके हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। गाजियाबाद पुलिस की ACP लिपि नगायच के मुताबिक केस दर्ज कर जाँच चल रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के आश्रम में तमिलनाडु पुलिस ने भेज दी पूरी बटालियन, 150 जवानों ने ली तलाशी: जानिए क्यों आई ये नौबत, ईशा फाउंडेशन ने आरोपों पर क्या कहा?

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन ने कहा है कि वह लोगों पर शादी करने या संत बनने सबंधी कोई दबाव नहीं डालता। यह बयान उसके कोयम्बटूर के थोंडामुथुर स्थित ईशा फाउंडेशन के भीतर मंगलवार (1 अक्टूबर, 2024) को पुलिस के सैकड़ों जवान और अफसर पहुँचने के बाद आया। पुलिस टीम संस्थान में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहुँची थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को पुलिस के 4 बड़े अफसर सहित 150 जवानों की टीम थोंडामुथुर स्थित ईशा फाउंडेशन के भीतर गई थी। इस पुलिस टीम ने आश्रम के भीतर रहने वाले लोगों का सत्यापन भी किया और साथ ही उस अंदर के तौर तरीकों पर जानकारी भी ली। यह जाँच बुधवार (2 अक्टूबर, 2024) को जारी है। पुलिस टीम ने ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध पूर्व में दर्ज किए गए मामलों की जानकारी इकट्ठा करना भी चालू कर दिया है। पुलिस के साथ ही समाज कल्याण और बाल कल्याण विभाग के अफसर भी आश्रम के भीतर जाँच के लिए पहुँचे।

यह पुलिस जाँच मद्रास हाई कोर्ट में ही सुनवाई के बाद चालू हुई है। मद्रास हाई कोर्ट में सोमवार (30 सितम्बर, 2024) को ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध डाली गई बंदी प्रत्यक्षीकरण की एक याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस याचिका में एक वरिष्ठ नागरिक ने आरोप लगाया कि उसकी दो बेटियों को आश्रम के भीतर कैद कर लिया गया है और उन्हें बाहर नहीं आने दिया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंदर ऐसा खाना-पीना और दवाइयाँ दी जाती हैं जिनके कारण लोगों की बाकी क्षमताएँ कम हो जाती हैं।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि उनकी दोनों बेटियों का आश्रम आने से पहले अच्छा करियर था और जीवन था। लेकिन आश्रम में जाने के बाद उनका करियर ठप हो गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि सद्गुरु जग्गी का आश्रम लोगों को अपना सामान्य जीवन छोड़ कर साधु बनने के लिए ब्रेनवाश करता है। यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान लोगों को उनके परिवार से नहीं मिलने दिया जाता और उनका बाहरी दुनिया से सम्पर्क काट दिया जाता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने इस दौरान सद्गुरु जग्गी वासुदेव और ईशा फाउंडेशन को आड़े हाथों लिया। हाई कोर्ट ने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि आखिर एक व्यक्ति जिसने अपनी बेटी की शादी कर दी और उसका जीवन अच्छी तरह से स्थापित कर दिया, वह दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और एकांत में जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित क्यों कर रहा है?”

मद्रास हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दोनों बेटियाँ भी मौजूद थीं। बेटियों ने दावा किया कि वह अपनी मर्जी से आश्रम के भीतर हैं और उन्होंने दबाव की बात मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दोनों बेटियों को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति संत बनते हैं वह सभी से प्रेम करते हैं लेकिन यह दोनों महिलाएँ अपने पिता से बदतमीजी से बात कर रही हैं और उनसे घृणा रखती हैं। कोर्ट ने पूछा कि अपने परिजनों से घृणा रखना क्या पाप नहीं है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका में किए गए गंभीर दावों के आधार पर प्रशासन को आदेश दिया है कि वह ईशा फाउंडेशन के आश्रम के भीतर जाँच करे और इसकी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखे। इस दौरान ईशा फाउंडेशन ने कोर्ट में कहा कि वह किसी से संन्यास लेने को नहीं कहते। इस संबंध में ईशा फाउंडेशन ने एक प्रेस रिलीज भी जारी की है।

इसमें फाउंडेशन ने कहा, “ईशा फाउंडेशन की स्थापना सद्गुरु ने लोगों को योग और आध्यात्मिकता प्रदान करने के लिए की थी। हमारा मानना ​​है कि वयस्क व्यक्ति को अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता और समझ है। हम लोगों से शादी करने या साधु बनने के लिए नहीं कहते क्योंकि ये व्यक्तिगत इच्छाएँ हैं। ईशा योग केंद्र में हज़ारों ऐसे लोग रहते हैं जो साधु नहीं हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने ब्रह्मचर्य या संन्यास लिया है।”

ईशा फाउंडेशन ने उस याचिकाकर्ता पर भी कई आरोप लगाए हैं। ईशा फाउंडेशन का कहना है कि याचिकाकर्ता ने एक बार झूठी जानकारी के आधार पर आश्रम के भीतर घुसने का प्रयास किया था। ईशा फाउंडेशन ने कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा दर्ज करवाए गए मामले के अलावा उन पर कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है।

ऐसे ही बंद नहीं हो जाता है आपका सोशल मीडिया अकाउंट, UP के सीतापुर से चल रहा गैंग: शादाब-महताब गिरफ्तार, हिंदूवादी हैंडल मुख्य टारगेट; 600+ अकाउंट शिकार

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पुलिस ने रविवार (29 सितंबर 2024) को साइबर अपराध का बड़ा गिरोह चला रहे शादाब और महताब को गिरफ्तार किया है। दोनों अपने नेटवर्क के जरिए हिंदूवादी विचारधारा के सोशल मीडिया हैंडलों पर स्ट्राइक भेजकर उसे बंद करवाते थे। बाद में इसे खुलवाने के नाम पर मोटी उगाही की जाती थी। पकड़े गए आरोपितों के टेलीग्राम पर इस गैंग से जुड़े सैकड़ों लोग जुड़े पाए गए हैं।

मामला सीतापुर जिले के कोतवाली देहात का है। शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को इंस्टाग्राम की @randombrigade प्रोफ़ाइल के एडमिन ने पुलिस में शिकायत दी। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनके पास इंस्टाग्राम यूजरनेम @soloxkakashi की आईडी से ऑडियो फोन और मैसेज आया। इस मैसेज में कॉपीराइट स्ट्राइक करके उसके इंस्टाग्राम हैंडल को सस्पेंड कराने की धमकी दी गई।

जब पीड़ित ने ऐसा नहीं करने की गुजारिश की तो उससे पैसों की डिमांड हुई। पैसे भेजने के लिए एक QR कोड भेजा गया, जिससे जुड़े बैंक का खाता निजामुद्दीन के बेटे महताब के नाम पर रजिस्टर्ड था। पीड़ित ने 3 अगस्त 2024 को खाते में 500 रुपए भेज दिए। इसके बाद भी पीड़ित से और पैसों की माँग की गई। इस बार पैसों की डिमांड के साथ पीड़ित और उसके परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई।

धमकियों से पीड़ित डर गया और उसने 3 अगस्त को ही 2 बार में 1500 रुपए और भेजे। इसके बावजूद धमकियाँ जारी रहीं। पीड़ित ने 5 अगस्त को 1000 रुपए और 1 सितंबर को 750 रुपए और भेजे। पीड़ित से 3,750 रुपए वसूलने के बावजूद महताब ने पीड़ित से अमेजन या फ्लिप कार्ड से 70,000 रुपए का गिफ्ट माँगना शुरू कर दिया।

जब पीड़ित ने इतने पैसे देने में खुद को असमर्थ बताया तो महताब बोला, “मैं तुम्हारे इंस्टाग्राम एकाउंट को फर्जी कॉपीराइट बताकर तुम्हें बदनाम और तुम्हारी जिन्दगी बर्बाद कर दूँगा।” लगातार उगाही से परेशान होकर पीड़ित को अपनी व अपने परिवार की जान का खतरा सताने लगा। पीडित को यह भी लगा कि महताब ने फर्जी आईडी बनाकर उसकी तरह कई बेगुनाहों को परेशान किया होगा।

आखिरकार उसने थाने में जाकर शिकायत की। आरोपित के कामों को अवैध वसूली बताते हुए पीड़ित ने महताब पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। इस तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4), 352, 351 (2), 308 (5) व 66- D IT एक्ट के तहत केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

ऐसे देते थे अपराध को अंजाम

सीतापुर पुलिस ने इस केस की जाँच शुरू की तो महताब अंसारी के साथ शादाब का भी नाम सामने आया। ये दोनों सगे भाई हैं, जो सीतापुर के मूल निवासी हैं। फ़िलहाल के तौर पर दोनों आगरा में रहते हैं। इनके पास से 3 मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि शादाब अपने भाई महताब के साथ मिलकर गूगल से Insta Pro 2 की Apk File डाउनलोड करता था।

इसके बाद वे अपने टारगेट की असली इंस्टाग्राम आईडी से फोटो और डाटा उठा लेते थे। दोनों आरोपित गूगल से दोबारा इंस्टाग्राम का कॉपीराइट का फॉर्म डाउनलोड करते थे। इसे वो भर के मेटा (META) प्लेटफॉर्म को शिकायत के तौर पर भेजते थे। शिकायत में META से पीड़ित की ही आईडी को फर्जी बताकर अपने द्वारा बनाई गई प्रोफ़ाइल को ही असली बता देते थे।

इसके बाद यह गिरोह असली आईडी वाले की प्रोफ़ाइल पर कॉपीराइट का दावा करते थे। ID को उड़ाने के नाम पर पीड़ित से पैसों की उगाही भी की जाती थी। पुलिस के अनुसार, शादाब और महताब अब तक लगभग 600 ID पर इसी तरह का कॉपीराइट क्लेम कर चुके हैं। इनमे से कईयों से पैसों की उगाही भी की जा चुकी है।

इन्ही पीड़ितों में से एक @randombrigade भी निकला, जिसने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस ने शादाब और महताब को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी द्वारा अब तक अपराध से वसूले गए पैसों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जाँच व कार्रवाई के लिए थाना पुलिस के साथ साइबर सेल को भी लगाया गया है।

हिंदूवादी हैंडल थे बड़े गिरोह के निशाने पर

सीतापुर के पुलिस अधीक्षक IPS चक्रेश मिश्रा ने इस गिरोह के आपराधिक तौर तरीकों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस गिरोह के व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर ग्रुप बने हुए हैं। इन्हीं ग्रुपों के जरिए एक साथ असली प्रोफ़ाइल के खिलाफ हजारों की संख्या में शिकायतें META और X से की जाती थीं। बकौल पुलिस अधीक्षक, इन शिकायतों का संज्ञान लेकर META और X एक्शन भी ले लेते थे।

पुलिस ने इसे एक नए तरीके का ऑनलाइन क्राइम माना है। शादाब और महताब के द्वारा बनाए गए लगभग 20 फर्जी हैंडलों की अब तक पहचान हुई है। अपने गिरोह से सम्पर्क के लिए ये दोनों टेलीग्राम, व्हाट्सएप और ट्विटर का प्रयोग करते थे। इसके अलावा, ये अन्य तरीकों से भी एक-दूसरों को संपर्क में थे।

पुलिस ने यह भी माना है कि शादाब और महताब के गिरोह द्वारा ज्यादातर दक्षिणपंथी हैंडलों को टारगेट किया जाता है। ऐसा करने के लिए इस गिरोह को कोई ऊपर से दिशा-निर्देश भी देता था, जिसके बारे में पुलिस जानकारियाँ जुटा रही है। मामले में अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सस्पेंड, 98 फर्जी डॉक्टरों की खबर रोकने को दिया था ₹10 लाख का ऑफर: फर्जीवाड़े पर भजनलाल सरकार सख्त, जाँच कमेटी का गठन

राजस्थान की भजनलाल शर्मा की सरकार ने फर्जी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन मामले में बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने 98 फर्जी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन करने वाले रजिस्ट्रार को सस्पेंड करने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में जाँच कमिटी बनाई थी, उसी की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हुई है।

समाचार पत्र दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश अकोदिया ने हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया था कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के भीतर 98 अयोग्य लोगों को डॉक्टर के रूप में रजिस्टर किया गया था। इनके पास डॉक्टरी की कोई योग्यता नहीं थी और इन्होने फर्जी कागज रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए थे। इन 98 में से 1 ने भी MBBS की पढ़ाई नहीं की थी। कई ने बाहरी राज्यों के फर्जी प्रमाण पत्र और डिग्री RMC को दिए थे और प्रैक्टिस की अनुमति हासिल कर ली थी।

भास्कर ने यह भी खुलासा किया था कि इस मामले में RMC के रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा की संलिप्तता थी। भास्कर के खुलासे के बाद स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देशन में एक जाँच कमिटी बनाई गई थी। इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात मानी है। इसके बाद राजेश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। राजेश शर्मा की जगह सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर गिरधर गोयल को रजिस्ट्रार का अतिरक्त प्रभार दे दिया है।

अपनी रिपोर्ट में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश अकोदिया ने बताया था कि जब उन्होंने RMC के रजिस्ट्रार राजेश शर्मा से पूछताछ की तो उन्होंने गलती सुधारने की बजाय ₹10 लाख की रिश्वत का ऑफर अकोदिया को दे दिया था। स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने इस मामले को गंभीर अपराध बताया था। उन्होंने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई की बात भी कही थी।

रिपोर्ट से पता चला था कि RMC के पास जब ऑनलाइन आवेदन आए तो उन्होंने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि जाली ईमेल अटैच करके सत्यापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इन कथित डॉक्टरों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और एनओसी के फर्जी दस्तावेज अटैच किए थे। RMC ने बिना किसी की डिग्री की पड़ताल किए ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इन फर्जी डॉक्टरों में से कुछ सर्जन हैं तो कुछ गाइनी।

रिपोर्ट में ऐसे कुछ डॉक्टरों के नाम भी उजागर किए हैं। जैसे डॉ. सरिमुल एच मजूमदार, डॉ. रामकिशोर महावर, डॉ. गीता कुमारी, डॉ. देवेंद्र नेहरा, डॉ. शांतनु कुमार, डॉ. पंकज यादव, डॉ. महेश कुमार गुर्जर आदि। इन फर्जी डॉक्टरों ने न तो कभी मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप का। बावजूद इनको सरकारी मुहर लगाकर डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र बाँट दिया गया। इस मामले में अब RMC के अंतर्गत रजिस्टर्ड सभी डॉक्टरों की जाँच की माँग की गई है।

जानिए क्या है वह कानून जिसके कारण ‘हाजी अली’ का नाम-लोगो कुछ भी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे केरल के जूस वाले, बॉम्बे हाई कोर्ट का है आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केरल के कोच्चि में पाँच जूस सेंटर आउटलेट्स को मुंबई के नामी हाजी अली जूस सेंटर के नाम, ट्रेडमार्क और लोगो का उपयोग करने से रोक दिया है। दरअसल, मुंबई के हाजी अली जूस सेंटर के संस्थापक की बेटी असमा फरीद नूरानी द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन को लेकर एक मुकदमा दायर किया था।

न्यायमूर्ति आरआई छागला ने इस संबंध में दो अंतरिम आदेश पारित किए। एक 9 अगस्त 2024 को और दूसरा 5 सितंबर 2024 को। असमा वर्तमान में हाजी अली जूस सेंटर के ट्रेडमार्क की मालिक हैं। न्यायालय ने पाया कि असमा फरीद नूरानी को अंतरिम राहत देने के लिए प्रथम दृष्टया मामला मजबूत था।

इसके बाद कोर्ट ने एक कोर्ट रिसीवर और दो अतिरिक्त विशेष कोर्ट रिसीवरों को कोच्चि के आउटलेट्स से हाजी अली जूस सेंटर के ट्रेडमार्क और संबंधित चिह्नों वाली सभी सामग्री जब्त करने का काम सौंपा। कोर्ट ने रिसीवरों को निर्देश दिया कि वे हाजी अली चिह्न के साथ या उसके बिना सभी सामग्रियों- स्टेशनरी, मेनू कार्ड, साइन बोर्ड आदि का नियंत्रण अपने हाथ में लें।

हाजी अली जूस सेंटर का यह लोगो एक लाल सेब है। दरअसल, असमा नूरानी ने कोर्ट में दावा किया था कि कोच्चि आउटलेट्स ने फ्रैंचाइजी समझौतों की समाप्ति के बावजूद उसकी अनुमति के बिना हाजी अली ट्रेडमार्क का उपयोग जारी रखे हुए है। असमा नूरानी की इस दलील के बाद हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया।

न्यायमूर्ति छागला ने 9 अगस्त के आदेश में कहा, “मुझे लगता है कि उपरोक्त मास्टर फ्रेंचाइज समझौते और उसके बाद उप-फ्रेंचाइज समझौते की समाप्ति के बावजूद प्रतिवादियों ने अनाधिकृत रूप से वादी के पंजीकृत ट्रेडमार्क का उपयोग जारी रखा, जिसमें उसका संक्षिप्त नाम HAJC JUICE CENTRE और लोगो MUMBAI HAJI ALI, ‘द ओरिजिनल स्टोर’ शामिल है… वादी ने अंतरिम राहत के लिए वास्तव में एक मजबूत प्रथम दृष्टया मामला बनाया है।”

मुंबई में 1970 के दशक में अपना परिचालन शुरू करने वाले हाजी अली जूस सेंटर का स्वामित्व साल 2019 में अस्मा फरीद नूरानी (पारिवारिक समझौते के बाद) को उनके पिता एवं जूस सेंटर के संस्थापक फरीद अब्दुल लतीफ नूरानी की मृत्यु के बाद मिला था। इससे पहले 2018 में अल्टियस लाइफस्टाइल ब्रांड्स एलएलपी (मास्टर फ्रैंचाइज़ी) के साथ एक फ्रैंचाइजी समझौता हुआ था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत मास्टर फ़्रैंचाइज़ी समझौते (एमएफए) ने विभिन्न खिलाड़ियों को कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल सहित कई राज्यों में हाली अली जूस सेंटर संचालित करने की अनुमति दी थी। केरल को लेकर साल 2021 में एक पूरक डीड के परिणामस्वरूप कोच्चि के एडापल्ली में एक उप-फ्रैंचाइज़ी आउटलेट का शुभारंभ हुआ।

असमा नूरानी ने साल 2022 में फ्रैंचाइज़ समझौतों को रद्द कर दिया, जिसमें फ्रैंचाइज़ियों द्वारा अपने समझौतों की शर्तों का पालन करने में विफलता का हवाला दिया गया। हालाँकि, फ्रैंचाइज़ आउटलेट्स ने अपना संचालन बंद करने से इनकार कर दिया और उसका लोगो जारी रखा। इसके बाद असमा नूरानी ने इस साल जनवरी में उनके खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दायर किया।

उन्होंने शिकायत की कि केरल में कई हाजी अली आउटलेट बिना उनकी अनुमति के और फ्रैंचाइज़ समझौते का उल्लंघन करते हुए स्थापित किए गए थे। जिन आउटलेट्स के बारे में शिकायत की गई उनमें पनमपिल्ली नगर, अलुवा, कक्कनाड और कोठामंगलम के आउटलेट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन आउटलेट्स ने कानूनी नोटिस का जवाब नहीं दिया।

इतना ही नहीं, प्रतिवादियों (कोच्चि में आउटलेट्स के संचालकों) ने 1 दिसंबर 2022 से 24 मई 2023 के बीच की अवधि के लिए ‘हाजी अली जूस सेंटर’ चिह्न और उसके लोगो के अनधिकृत उपयोग के लिए रॉयल्टी का भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 9 अगस्त को कोर्ट ने हाजी अली नाम का उपयोग करने वाले आउटलेट्स के खिलाफ निरोधक आदेश जारी किया।

बाद में असमा नूरानी ने कहा कि उन्हें कक्कनद और कोठामंगलम में नए आउटलेट के बारे में पता चला, जिन्हें पहले अदालत के संज्ञान में नहीं लाया गया था। इसके बाद अदालत ने 5 सितंबर को कक्कनद और कोठामंगलम आउटलेट के संबंध में भी इसी तरह के निर्देशों के साथ एक और आदेश पारित किया। इसकी अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।

क्या है ट्रेडमार्क कानून

ट्रेडमार्क कानून बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत आता है। भारत में ट्रेडमार्क अधिकारों को ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 द्वारा संरक्षित किया गया है। इसके तहत पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क का अधिकार सुरक्षित किया जाता है। ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 ट्रेडमार्क के धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग से सुरक्षा, पंजीकरण और रोकथाम से संबंधित है। यह ट्रेडमार्कधारक के अधिकारों, उल्लंघन के लिए दंड, नुकसान के लिए उपचार और ट्रेडमार्क के हस्तांतरण के तरीकों से भी संबंधित है।

ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 में ट्रेडमार्क को इस प्रकार परिभाषित किया गया है, “ट्रेडमार्क का अर्थ है एक चिह्न, जिसे ग्राफिक रूप से दर्शाया जा सके और जो एक व्यक्ति के सामान या सेवाओं को दूसरों से अलग करने में सक्षम हो और इसमें वस्तुओं का आकार, उनकी पैकेजिंग और रंगों का संयोजन शामिल हो सकता है।” ऐसे चिह्न में हस्ताक्षर, नाम, लेबल, शीर्षक आदि जैसी अनेक चीजें शामिल हो सकती हैं।

ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 7 के अनुसार ट्रेडमार्क का वर्गीकरण वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार किया जाना चाहिए। ऐसे वर्गीकरण में कुल 45 वर्ग हैं, जिनमें वस्तुएँ और सेवाएँ आ सकती हैं। वर्ग 1-34 वस्तुओं के लिए हैं और वर्ग 35-45 सेवाओं के लिए हैं।

ट्रेडमार्क का अधिकार हासिल करने के लिए इस अधिनियम की धारा 18 के तहत सूचीबद्ध प्रावधानों का पालन करते हुए लिखित रूप में आवेदन करना होगा। आवेदन में चिह्न, माल और सेवाओं का नाम, माल और सेवाओं के वर्ग, चिह्न के उपयोग की अवधि और आवेदक के व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम और पता शामिल होना चाहिए।

जबसे मंदिर में चोरी की बुरे सपने आ रहे, हमारे बाल-बच्चों को क्षमा करें… प्रयागराज में चोर लौटा गया भगवान की मूर्ति: कर्नाटक में घर की दीवार पर सिर मार-मार मरा था नवाज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मंदिर से मूर्ति चुराने वाला चोर मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को खुद ही उन्हें लौटा गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी छोड़ कर गया है। इसमें उसने मंदिर में चोरी के बाद अपने साथ लगातार अनिष्ट होने की बात कही है। मूर्ति को फिर से विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित करवाया जा रहा है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि मूर्ति को जूट की बोरी में आश्रम के गेट के पास रखकर चोर चला गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला प्रयागराज जिले के थानाक्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ गऊघाट इलाके में खासला आश्रम है। इस आश्रम में बने मंदिर के गर्भगृह में अष्टधातु की बनी करीब 100 साल पुरानी राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित है। सोमवार (23 सितंबर 2024) को इस अष्टधातु की मूर्ति को कोई चुरा ले गया। तब मंदिर के महंत जयराम दास ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर चोर की तलाश शुरू कर दी।

लगभग 1 हफ्ते बीत जाने के बावजूद चोर को पकड़ा नहीं जा सका था। इस बीच मूर्ति चोरी से दुखी महंत जयराम दास ने अन्न का त्याग कर दिया। आश्रम के अन्य शिष्य भी दुखी रहने लगे। तभी अचानक मंगलवार (1 अक्टूबर) को चोर मूर्ति मंदिर के पास रख कर चुपचाप चला गया। मूर्ति के साथ चोर एक माफीनामा भी महंत को सम्बोधित करते हुए छोड़ कर गया है। इस माफीनामे में उसने अपने काम को अज्ञानता बताते हुए लिखा है, “मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे बुरे-बुरे सपने आ रहे हैं।”

अपनी पहचान उजागर न करते हुए चोर ने माफीनामे में महंत को प्रणाम करते हुए लिखा है, “मेरे बेटे की तबीयत भी बहुत खराब हो गई है। थोड़े पैसे के लिए मैंने बहुत गंदा काम किया है। मैंने मूर्ति को बेचने के लिए उसके साथ काफी छेड़छाड़ किया है। अपनी गलती की माफी माँगते हुए मैं मूर्ति को रख कर जा रहा हूँ। आपसे विनती करता हूँ कि मेरी गलती को माफ कर भगवान को फिर से मंदिर में रखवा दिया जाए। हमारे बच्चों को क्षमा करते हुए अपनी मूर्ति स्वीकार करें।”

चोर ने मूर्ति को बेचने के लिए पॉलिश भी करवा दिया था। फिलहाल मूर्ति वापस आ जाने से आश्रम में ख़ुशी का माहौल है। प्रतिमा को जलाभिषेक व अन्य धार्मिक विधि-विधान करते हुए फिर से स्थापित किया जा रहा है। मामले की सूचना पुलिस को भी दे दी गई है। पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत जयराम दास ने बताया कि वो सिद्ध मंदिर के महंत हैं और उन्होंने चोरी के बाद ईश्वर को ही न्याय करने के लिए कहा था।

कर्नाटक में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

बताते चलें कि जनवरी 2021 में कर्नाटक के मंगलुरु में ऐसा ही मामला सामने आया था। तब स्वामी कोरगज्जा मंदिर की दानपेटी में कंडोम डाल दिया गया था। पुलिस आरोपितों को खोज नहीं पाई थी, लेकिन एक दिन अब्दुल रहीम और तौफीक खुद ही मंदिर में महंत के आगे पहुँच गए थे। उन्होंने नवाज के साथ मिल कर मंदिर की दानपेटी में कंडोम डालने का गुनाह कबूल करते हुए बताया कि उस करतूत के बाद उन दोनों को खून की उल्टियाँ और खूनी पेचिश शुरू हो गई थी।

दोनों ने यह भी बताया था कि इस घटना के बाद नवाज अपने घर की दीवार पर सिर पटक-पटक कर मर गया था। मंदिर के पुजारी से तौफीक और रहीम ने कान पकड़ कर दया की भीख माँगी थी।

कौन हैं वे हिंदू संत जिन पर महाराष्ट्र में ठोक दिए 67 FIR, क्यों लग रहे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, CM एकनाथ शिंदे के पीछे भी क्यों पड़े इस्लामी कट्टरपंथी: जानिए सब कुछ

महाराष्ट्र के नासिक में इस्लाम पर एक बयान देने के कारण इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दू धर्मगुरु रामगिरी महाराज के पीछे पड़े हुए हैं। हिन्दू संत रामगिरी महाराज पर अब तक 60 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं। कहीं उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। महंत रामगिरी के बहाने महाराष्ट्र को मजहबी उन्माद में धकेलने की कोशिश की का रही है।

धमकियों के बीच महाराष्ट्र सरकार महंत रामगिरी की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। धमकियों और जान को खतरा होने के बाद भी महंत रामगिरी अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने इस पर माफ़ी माँगने या फिर अपने शब्द वापस लेने से इनकार कर दिया है। इस बीच मुस्लिम नेता महाराष्ट्र के माहौल को उबाल रहे हैं।

कौन हैं रामगिरी महाराज, उनका महाराष्ट्र में क्या प्रभाव?

इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना बन रहे स्वामी रामगिरी महाराज महाराष्ट्र समेत पूरे देश के मराठी समुदाय के बड़े धर्मगुरु हैं। वह महंत नारायणगिरी के शिष्य हैं। महंत रामगिरी महाराज सद्गुरु श्री गगनगिरी महाराज संस्थान के प्रमुख हैं। इस संस्थान के महाराष्ट्र समेत कोंकण क्षेत्र में लाखों अनुयायी हैं। यह संस्थान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में बना हुआ है।

महंत रामगिरी महाराज इस संस्थान के 2009 से ही प्रमुख हैं। उन्होंने इसका जिम्मा महंत नारायणगिरी के समाधिस्थ होने के बाद उठाया था। उनका महाराष्ट्र के वरकारी समुदाय में काफी प्रभाव है। यह समुदाय भक्ति आन्दोलन से जुड़ा है। महंत रामगिरी महाराज बीते लगभग डेढ़ दशक से ही पूरे महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रवचन देते आ रहे हैं।

महंत रामगिरी महाराज का संन्यास से पूर्व का नाम सुरेश रामकृष्ण राणे बताया जाता है। उनके विषय में जानने वाले बताते हैं कि वह कक्षा 9 में अध्ययन के दौरान ही सामान्य जीवन से विमुख हो गए थे और बाद में उन्होंने पूरी तरीके से संत जीवन अपना लिया। उन्हें नारायणगिरी महाराज ने दीक्षा दी थी।

महंत रामगिरी महाराज महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के कटान से बने सरला द्वीप पर बने आश्रम के प्रमुख हैं। यह अहमदनगर और औरंगाबाद जिले की सीमा पर है। बताते हैं कि इसकी स्थापना गगनगिरी महाराज ने की थी जो कि देश में हठयोग के बड़े गुरु माने जाते थे। यह द्वीप चारों तरफ नदी से घिरा हुआ है।

वह जिस संस्थान के मुखिया हैं वह प्रत्येक वर्ष एक कार्यक्रम आयोजित करता है, इसका नाम हरिनाम सप्त है। इस वर्ष यह आयोजन नाशिक में हुआ और वहीं रामगिरी महाराज ने प्रवचन में इस्लाम को लेकर एक उदाहरण दिया। जिसके बाद विवाद पैदा हुआ।

महंत रामगिरी महाराज ने ऐसा क्या कहा, जिस पर विवाद

नासिक जिले में सिन्नर तालुका के शाह पंचाले गाँव में एक धार्मिक आयोजन हुआ था। इसमें 15 अगस्त को महंत रामगिरि महाराज ने बांग्लादेश के हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाया था। इस दौरान लगातार बांग्लादेश से हिन्दुओं पर हमले और अत्याचार की खबरें सामने आ रही थीं।

महंत रामगिरी महाराज ने इस दौरान अपने प्रवचन में इस्लाम की बहुलता वाले क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बात की। उन्होंने तभी पैगम्बर मुहम्मद और कुरान को लेकर कुछ उदाहरण दिए। महंत रामगिरी महाराज का कहना था कि मुस्लिमों के सामने कई गलत उदाहरण हैं इसलिए बांग्लादेश और बाकी जगहों पर महिलाओं पर अत्याचार की खबरें आती हैं।

महंत रामगिरी महाराज ने इस दौरान हिन्दू ग्रंथों से भी कई उदाहरण दिए। मराठी में दिया गया महंत रामगिरी महाराज के प्रवचन का एक छोटा सा हिस्सा इसके बाद काट कर वायरल कर दिया गया। इसके बाद बवाल बढ़ना चालू हुआ।

अपने बयान को लेकर मुस्लिम समाज में नाराजगी पर महंत रामगिरि ने कहा, “मुस्लिम लोगों को नाराज नहीं होना चाहिए। हमने जो कहा वो सत्य कहा है। जो कहा वो उनकी किताब में लिखा हुआ है। इसलिए नाराज होने की कोई आवश्यकता नहीं।” माफी माँगने की बात पर उन्होंने कहा, “सबका अपना-अपना सोचना है। हमने जो बता दिया, वो बता दिया। बस।”

इस्लामी कट्टरपंथी महंत रामगिरी के पड़े पीछे

महंत रामगिरी महाराज के बयान का एक हिस्सा वायरल किए जाने के बाद महाराष्ट्र के भीतर मुस्लिम उनकी गिरफ्तारी की माँग करने लगे। 16 अगस्त, 2024 को महाराष्ट्र में मुस्लिमों ने बंद का ऐलान किया। कई जगह नारेबाजी भी की गई और प्रदर्शन भी हुआ।

महंत रामगिरी महाराज मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में हाल ही में सुनवाई में सामने आया कि उनके खिलाफ 67 FIR दर्ज की गई हैं। यह सभी FIR महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज की गई हैं। महंत रामगिरी महाराज के खिलाफ केवल FIR ही दर्ज नहीं करवाई गई हैं, बल्कि उनके खिलाफ मुस्लिम सड़कों पर भी हंगामा कर रहे हैं।

रामगिरी महाराज के बयान को लेकर AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की कोशिश भी की। जलील ने महाराष्ट्र के मुस्लिमों से मुंबई में इकट्ठा होने की अपील की। इस दौरान कई इस्लामी मौलाना और बड़ी संख्या में मुस्लिम इस रैली में इकट्ठा हुए।

यह भीड़ हाल ही में मुंबई पहुँची थी लेकिन राज्य की शिंदे सरकार ने इसे मुंबई की सीमाओं पर ही रोक दिया गया। इसी भीड़ के कई ऐसी वीडियो सामने आए जिनमें ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। कई मुस्लिम युवक यह नारे मौलानाओं के सामने लगाते देखे गए।

राज्य सरकार का क्या रुख?

महाराष्ट्र की शिंदे सरकार इस दौरान महंत रामगिरी महाराज की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उनके खिलाफ अगस्त में हुए प्रदर्शन के बाद राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उनके कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि राज्य में संतों को कुछ नहीं होने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिंदे के अलावा महाराष्ट्र में भाजपा विधायक नितेश राणे ने भी महंत रामगिरी महाराज का समर्थन किया है और उनको मारने की धमकी देने वालों को चेताया है। इस्लामी कट्टरपंथियों कीई धमकी के बीच महंत रामगिरी महाराज के खिलाफ दर्ज FIR पर कानून के हिसाब से काम हो रहा है।

 

हिज्बुल्लाह चीफ की मौत से तिलमिलाए ईरान ने इजरायल पर दागीं 181 मिसाइलें: नेतन्याहू बोले- तेहरान ने भारी गलती कर दी, चुकानी होगी बड़ी कीमत, US ने दिया समर्थन

इजरायल की कार्रवाई में लेबनान के आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह के चीफ नसरल्लाह की मौत से ईरान बौखला गया है। उसने मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) की रात इजरायल पर कम से कम 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान के हमले के बाद अब इजरायल ने उसे अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। इजरायल ने कहा कि ईरान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है।

ईरान के मिसाइल दागने के बाद पूरे इजरायल में 1,800 रॉकेट सायरन बजने लगे और लोग अपने-अपने सुरक्षित ठिकानों पर पहुँचने लगे। ये मिसाइलें नागरिक इलाकों में गिरी। कुछ मिसाइलें घरों और स्कूलों पर गिरीं। हमले में हताहतों की सही जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हमले के बाद इज़रायली सेना IDF ने कसम खाई है कि वह इसका जोरदार जवाब देगा।

ईरान ने कहा कि उसने हिज़्बुल्लाह, हमास और ईरानी सेना के नेताओं की हत्या के प्रतिशोध में मिसाइलें दागीं। इसने हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड के जनरल अब्बास निलफ़ोरुशान का संदर्भ दिया, जो पिछले सप्ताह बेरूत में एक इज़राइली हवाई हमले में मारे गए थे। इसमें हमास के एक शीर्ष नेता इस्माइल हनीयेह का भी उल्लेख किया गया, जिनकी जुलाई में एक संदिग्ध इज़राइली हमले में तेहरान में हत्या कर दी गई थी।

इजरायल पर हमले का आदेश इजरायल के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने दिया था। अब इजरायल के तेवर को देखते हुए अमेरिका ने कहा, “हम इस हमले के खिलाफ इजरायल की रक्षा के लिए रक्षात्मक तैयारियों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहे हैं। ईरान की ओर से इजरायल पर सीधा सैन्य हमला ईरान के लिए गंभीर परिणाम लाएगा।”

हमला काफी हद तक असफल रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तेहरान को चेतावनी दी कि उसने एक बड़ी गलती की है और इसके लिए उसे भुगतान करना होगा। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हमले में लगभग 181 मिसाइलें लॉन्च की गईं। इज़राइल रक्षा बलों ने कहा कि उन्होंने उनमें से बड़ी संख्या को नाकाम कर दिया।

नेतन्याहू ने कहा, “ईरानी सरकार हमारी खुद की रक्षा करने और अपने दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की हमारी दृढ़ता को नहीं समझती है। (हमास नेता याह्या) सिनवार और (हमास के शीर्ष सैन्य कमांडर मोहम्मद) देफ ने भी इसे नहीं समझा था। (हिजबुल्लाह नेता हसन) नसरल्लाह और (हिजबुल्लाह के चीफ ऑफ स्टाफ फुआद) शुक्र ने भी इसे नहीं समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “शायद तेहरान में ऐसे लोग भी हैं, जो इसे नहीं समझते। वे समझेंगे। हम पर जो भी हमला करेगा, उस पर हम हमला करेंगे।” उन्होंने कहा कि ऐसा हर जगह हुआ है, जहाँ इजरायल आज ‘बुराई की धुरी’ से लड़ता है। ये जगह हैं वेस्ट बैंक, गाजा, लेबनान, यमन, सीरिया और ईरान।

समर्थन देने के लिए नेतन्याहू ने अमेरिका को धन्यवाद भी दिया है। तनाव को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ ईरानी प्रतिक्रिया को दबाने में मदद करने के लिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत तैनात किया है। तनाव को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ ईरानी प्रतिक्रिया को दबाने में मदद करने के लिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत तैनात किया है।

ईरान ने आखिरी बार अप्रैल में इजरायल पर हमला किया था, लेकिन उसकी मिसाइलों को पांच सेनाओं: इजरायल, अमेरिका, फ्रांस, जॉर्डन और यूनाइटेड किंगडम की एकीकृत कार्रवाई ने नाकाम कर दिया था।ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला अप्रैल में ईरान द्वारा इजरायल पर दागे गए 120 बैलिस्टिक मिसाइलों, 170 ड्रोन और दर्जनों क्रूज मिसाइलों से बड़ा था।