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नाना ने जमीन दी, माँ ने आपातकाल में रिपोर्टिंग के लिए बेदखली का भेजा नोटिस, राजीव गाँधी ने भी जारी रखी प्रताड़ना: 37 साल बाद IndianExpress को कोर्ट से मिली राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को केंद्र सरकार द्वारा इंडियन एक्सप्रेस अखबार को जारी किए गए 37 साल पुराने बेदखली नोटिस को खारिज कर दिया। इस नोटिस में अखबार को दिल्ली के बहादुर शाह जफर रोड स्थित बिल्डिंग खाली करने की माँग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार का नोटिस प्रेस की स्वतंत्र को दबाने तथा उसके आय के स्रोत को समाप्त करने के लिए था।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि जिस नोटिस के जरिए सरकार ने अखबार के भवन की लीज समाप्त की थी, वह इंडियन एक्सप्रेस को कभी दिया ही नहीं गया। न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने कहा कि अखबार के दफ्तर को उस भवन से निकालने के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा नोटिस एवं प्रयास किए गए। यह सब प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने के लिए था।

अदालत ने कहा, “किराएदारों को नोटिस जारी करके उन्हें एल एंड डीओ के पास किराया जमा करने का निर्देश देना तत्कालीन सरकार की ओर से पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य केवल एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स को चुप कराना और इसके आय के स्रोतों को खत्म करना था। इससे अधिक कुछ नहीं। इस प्रकार, उक्त नोटिस मनमाने और दुर्भावनापूर्ण माने जाते हैं।”

अदालत ने आगे कहा, “वास्तव में 2 नवंबर 1987 का वह नोटिस, जिसके द्वारा लीज समाप्त की गई थी, एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स को कभी नहीं दिया गया और उसके बाद एक प्रति खरीदी गई। एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स को 15 नवंबर 1987 के टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर से इस बारे में पता चला। उस समय की सरकार का ऐसा आचरण कम से कम कहने के लिए कुछ और नहीं बल्कि दुर्भावना से प्रेरित है।”

चूँकि, सरकार का कार्य अवैध था और मुकदमा लगभग पाँच दशकों तक चला, इसलिए न्यायालय ने कहा कि एक्सप्रेस को 5 लाख रुपए का जुर्माना अदा किया जाना चाहिए। दरअसल, जिस जमीन पर एक्सप्रेस बिल्डिंग बनी हुई है, उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस पेपर के मालिक रामनाथ गोयनका को 1950 के दशक में दिया गया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन एक्सप्रेस को शुरुआत में यह जमीन तिलक ब्रिज के पास आवंटित की गई थी, लेकिन पंडित नेहरू के आग्रह पर गोयनका ने इसे वापस लौटा दिया। इसके बदले में रामनाथ गोयनका ने बहादुर शाह जफर मार्ग पर जमीन लेने के लिए राजी हो गए थे। मार्च 1980 में कॉन्ग्रेस की केन्द्र सरकार ने एक्सप्रेस को फिर से एंट्री करने और ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया।

सरकार की इस नोटिस को पर अखबार ने कहा कि यह सब इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा की गई ज्यादतियों की रिपोर्टिंग का प्रतिशोध था। इसके बाद वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में लेकर गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बेंच ने साल 1986 में सरकार द्वारा जारी नोटिस को खारिज कर दिया। कोर्ट ने नोटिस को मौलिक अधिकारों का हनन बताया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद कॉन्ग्रेस की सरकार ने अखबार को फिर से नोटिस भेजना शुरू कर दिया। उस समय केंद्र में राजीव गाँधी की सरकार थी। इसके बाद इस मामले को टाइम्स ऑफ इंडिया ने 15 नवंबर 1984 को अपने अखबार में उठाया। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार ने नोटिस जारी करने के बाद एक्सप्रेस बिल्डिंग पर नियंत्रण कर लिया है।

हालाँकि, अखबार ने कहा कि उसे कोई भी नोटिस नहीं मिला है। इस विषय में उसने केंद्र सरकार को भी लिखा। इसको लेकर सरकार ने अदालत का रूख किया। वहीं, अखबार ने भी कोर्ट में मामला दर्ज किया। कई आरोपों के बीच सरकार ने कहा कि एक्सप्रेस ने समाचार पत्र के अलावा अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए परिसर का उपयोग किया है तथा वहाँ अनाधिकृत निर्माण हुआ है।

जब हाई कोर्ट ने एक्सप्रेस पर बकाया राशि की गणना करने के लिए कहा तो सरकार का जवाब में 17,684 करोड़ रुपए बताया था। कोर्ट के बार-बार पूछने और कई वकीलों के बदलने के बाद केंद्र सरकार ने यह राशि घटाकर 765 करोड़ रुपए कर दी। अब इस मामले में जस्टिस प्रतिभा सिंह ने फैसला सुनाया है कि केंद्र सरकार द्वारा गणना की गई राशि ‘अविश्वसनीय, अनुचित और अत्यधिक’ है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि सरकार द्वारा जारी किया गया लीज समाप्ति का नया नोटिस 1986 में ‘सर्वोच्च न्यायालय के श्रमसाध्य निर्णय की पूर्ण अवहेलना’ है। इसमें यह भी कहा गया कि अखबार ने पट्टे की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अखबार को केवल रूपांतरण शुल्क और अतिरिक्त भूमि किराया देना होगा, जो लगभग 64 लाख रुपए है।

‘कॉन्ग्रेस का शफी नमाजी, वामपंथी शैलजा काफिर’: केरल चुनाव वाले स्क्रीनशॉट को लेकर CPM के शिक्षक नेता के खिलाफ विभागीय जाँच, होगी कार्रवाई

केरल में ‘काफिर’ वाला एक स्क्रीनशॉट खासा चर्चा का विषय बन रहा है। अब राज्य के जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को CPM नेता रिबेश रामाकृष्णन के खिलाफ विभागीय जाँच का आदेश दिया है। वो एक प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक है। साथ ही वो कोझीकोड के वटकरा तालुका में DYFI (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) का प्रखंड अध्यक्ष भी है। बता दें कि DYFI वामपंथी संगठन CPM की ही युवा यूनिट है। केरल के नेता AA रहीम इसके अध्यक्ष हैं।

अरंगोट MLP स्कूल का शिक्षा रिबेश रामाकृष्णन CPM से संबद्ध शिक्षक संगठन का भी नेता है। अब थोडनूर के ‘असिस्टेंट एजुकेशनल ऑफिसर’ (AEO) को जनरल एजुकेशन विभाग के डायरेक्टर ने जाँच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इसके बाद रिबेश रामाकृष्णन के खिलाफ ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी। यूथ कॉन्ग्रेस के स्टेट जनरल सेक्रेटरी VP डुल्किफल ने इसकी शिकायत की थी। 25 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के मतदान की पूर्व संध्या पर वटकरा के WhatsApp व अन्य मैसेजिंग एप्स पर ‘काफिर’ वाले स्क्रीनशॉट्स वायरल हुए थे।

इसमें CPM नेता व LDP की उम्मीदवार KK शैलजा को ‘काफिर’ बताया गया था। साथ ही कॉन्ग्रेस के शफी परम्बिल को वोट देने की अपील की गई थी, वो जीत कर सांसद भी बन गए। इस मामले में MSF का एक नेता मुहम्मद कासिम भी आरोपित है। रिबेश रामाकृष्णन के बारे में बताया जा रहा है कि सबसे पहले उसने ही स्क्रीनशॉट डाला था। कासिम ने पुलिस पर रिबेश को बचाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया है कि ‘रेड एनकाउंटर्स’ नामक व्हाट्सएप्प ग्रुप से ये स्क्रीनशॉट वायरल हुआ था और रिबेश ने वहीं डाला था।

वो इस स्क्रीनशॉट के स्रोत के बारे में कुछ नहीं बता पाया, जिस कारण उसका फोन जाँच के लिए जब्त कर लिया गया है। वायरल पोस्ट में लिखा था– “शफी एक मुस्लिम है जो दिन में 5 बार नमाज पढ़ता है और दूसरी महिला काफिर है। वोट देने से पहले ज़रूर सोचना कि किसे वोट देना चाहिए। वोट हमारे अपनों के लिए करिए।” रिबेश ने इस स्क्रीनशॉट को डालते हुए दिखाया कि मजहब के नाम पर वोट माँगा जा रहा है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि सीपीएम ने खुद ध्रुवीकरण के लिए ऐसा किया था।

उर्स में शामिल होने आए मुस्लिम सड़कों पर पढ़ने लगे नमाज, UP पुलिस ने खदेड़ा: चादर जुलूस का हिंदुओं ने किया विरोध- गाँव में नई प्रथा शुरू नहीं करने देंगे

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित आला हजरत के उर्स में आए कुछ मुस्लिमों ने खलील चौराहे की सड़क पर नमाज पढ़ने लगे। जब पुलिस ने उन्हें देखा तो उन्हें वहाँ से हटा दिया। इसको लेकर पुलिस ने उनकी नोंक-झोंक भी हुई। पुलिस का कहना था कि पास में ही उर्स स्थल है, वहाँ नमाज पढ़ी जाए। सड़कों पर नमाज पढ़ने से जाम लग रहा था। वहीं, एक मौलाना ने इसको लेकर पुलिस पर आरोप लगाया है।

ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के युवा इकाई के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्लाह रजा कादरी ने नमाजियों को सड़क पर से हटाने पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि कोतवाली पुलिस ने नमाजियों के साथ अभद्रता की। इसलिए आरोपित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि गुरुवार रात को कुछ लोगों ने पोस्टर फाड़े थे। उनकी भी पहचान करके जल्द से जल्द कार्रवाई हो।

दैनिक जागरण के मुताबिक, उर्स के दौरान इलाके के खजुरिया जुल्फिकार में मुस्लिमों ने नई प्रथा शुरू की कोशिश की। इसको लेकर गाँव के हिंदू पक्ष के साथ उनकी तानातनी हो गई। शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को चादरों का जुलूस निकाला जा रहा है। उसी दौरान गाँव में रहने वाले हिंदू पक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि मुस्लिमों द्वारा यह एक नई परंपरा डालने की कोशिश की जा रही है।

इज्जतनगर थाने के इंस्पेक्टर क्राइम यशपाल सिंह ने बताया कि गाँव से चादरों का जुलूस नहीं निकलता था। इस बार कुछ लोगों ने इसे निकालने का प्रयास किया था। इसलिए विरोध हुआ। बाद में दोनों पक्षों में सहमति बनी कि गाँव के 300 मीटर दूर तक कोई भी जुलूस के तौर पर नहीं निकलेगा। इस दायरे के बाद सड़क पर मुस्लिम पक्ष जुलूस निकाले तो हिंदू पक्ष आपत्ति नहीं करेगा।

वो मुख्यमंत्री जिसने खालिस्तान के हाथों मरना चुना, झुकना नहीं: बेअंत सिंह हैं सिखों के रोल मॉडल, नए बने खालिस्तानी सांसद बस दिवा-स्वप्न

31 अगस्त, 1995 – ये वो तारीख़ है जब पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। एक सिख नेता की हत्या करने वाले भी सिख आतंकवादी ही थे। कॉन्ग्रेस नेता बेअंत सिंह फरवरी 1992 में पंजाब के मुख़्यमंत्री बने थे। उनका मुख्यमंत्री बनना पंजाब के इतिहास में एक बड़ी घटना थी, क्योंकि 5 वर्षों के राष्ट्रपति शासन के पश्चात राज्य में विधानसभा चुनाव हो पाए थे। पंजाब में अराजकता का माहौल था, जरनैल सिंह भिंडराँवाले के मारे जाने के बावजूद अगले एक दशक से भी अधिक समय तक खालिस्तानी आतंकी राज्य को अशांत बनाए रहे थे।

शाकाहारी नेता बेअंत सिंह, धर्मनिष्ठ नामधारी सिख

सबसे पहले बेअंत सिंह के व्यक्तिगत व राजनीतिक जीवन के बारे में संक्षेप में बता देते हैं। उनका जन्म लुधियाना जिले के दोहरा प्रखंड स्थित बिलासपुर गाँव में हुआ था। लाहौर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। 23 वर्ष की उम्र में वो भारतीय सेना में शामिल हुए, लेकिन 2 वर्षों बाद ही राजनीति का रुख किया। 1960 में उन्होंने प्रखंड समिति का सदस्य चुना गया। वो लुधियाना स्थित ‘सेन्ट्रल कोऑपरेटिव’ बैंक के डायरेक्टर रहे, फिर 1969 में निर्दलीय जीत कर पंजाब विधानसभा पहुँचे।

बेअंत सिंह सिखों के नामधारी पंथ के अनुयायी थे और सफ़ेद रंग की पगड़ी पहनते थे। इस कारण वो मांस या शराब का सेवन नहीं करते थे, शाकाहारी थे। उन्होंने सतगुरु प्रताप सिंह से आशीर्वाद लिया था और सुरिंदर सिंह नामधारी के साथ मिल कर उन्होंने इस संप्रदाय की भलाई के लिए कार्य किया। 1993 में एक कारोबारी जब लालरु में मांस की फैक्ट्री लगाना चाहता था तो CM रहते बेअंत सिंह ने नामधारियों की माँग के कारण उसे इसकी अनुमति नहीं प्रदान की थी।

अमृतसर, लुधियाना और मालेरकोटला में उन्होंने नामधारी सिख संप्रदाय को 500 एकड़ जमीन दान दी थी। बेअंत सिंह की मौत दुःखद रूप में हुई थी। खालिस्तानियों ने उनकी हत्या कर दी थी। एक कार बम धमाके में तत्कालीन मुख्यमंत्री समेत 17 लोग मारे गए थे जिनमें 3 कमांडो जवान भी शामिल थे। ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ और ‘खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स’ का इस हत्याकांड में नाम आया। बेअंत सिंह हत्याकांड को समझने के लिए हमें उस वक्त की राजनीतिक परिस्थितियाँ देखनी पड़ेंगी।

पंजाब का CM रहते बेअंत सिंह की हत्या

जब बेअंत सिंह की हत्या हुई, उस समय वो कुछ कागज़ात पर हस्ताक्षर करने जा रहे थे। जैसे ही वो अपनी सफ़ेद रंग की एम्बेस्डर कार में बैठे, पंजाब के एक पुलिसकर्मी दिलावर सिंह बब्बर ने अपने शरीर पर लपेटे हुए बम को विस्फोट कर दिया। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद 1984 में सिखों का नरसंहार हुआ था। सरकारी आँकड़े कहते हैं कि इसमें 3340 सिख मारे गए। इसमें कमलनाथ, जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं का नाम आया जो राजीव गाँधी के करीबी रहे।

इंदिरा गाँधी की हत्या ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का बदला लेने के लिए की गई थी। कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम द्वारा ही पैदा किया गया आतंकी जरनैल सिंह भिंडराँवाले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में छिप कर बैठा हुआ था, जिसे मारने के लिए भारतीय सेना को अंदर घुसना पड़ा। इंदिरा गाँधी के इस आदेश के कारण सिख उनके खिलाफ हो गए थे। सतवंत सिंह और बेअंत सिंह नामक उनके बॉडीगार्ड्स ने ही उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दीं। इसके बाद सिख नरसंहार हुआ तो राजीव गाँधी ने कहा कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

पंजाब में उग्रवाद तब भी अपने चरम पर रहा। वहाँ जून 1987 में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करनी पड़ी जो फरवरी 1992 तक रहा। 1990 के दशक में सिख आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों और नेताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। 1992 में चुनाव तो हुए लेकिन भय का ऐसा वातावरण था कि मतदान प्रतिशत सिर्फ 24% रहा। KPS गिल पुलिस महानिदेशक थे और उन्हें राज्य में अपने हिसाब से काम करने की छूट मिली। कई आतंकी इसके बाद कनाडा और UK जैसे देशों में भाग खड़े हुए।

इसके बाद इंग्लैंड में वधावा सिंह के नेतृत्व में ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ ने उनकी हत्या की साजिश रची। BKI ने युवाओं के समूह को सीएम की हत्या के लिए उकसाया। पंजाब सेक्रेटेरिएट के बाहर हुए इस बम धमाके में जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह राजोआना को सज़ा-ए-मौत सुनाई गई। गुरमीत सिंह, लखविंदर सिंह और शमशेर सिंह को उम्रकैद मिली, वहीं नवजोत सिंह और नसीब सिंह को रिहा कर दिया गया। क्या आपको पता है कि बेअंत सिंह के हत्यारों को आज भी सिख कट्टरवादियों द्वारा नायक बताया जाता है?

सिखों ने चंडीगढ़ में ‘कौमी इंसाफ मोर्चा’ के बैनर तले 1 वर्ष से भी अधिक समय तक इनकी रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन किया। राजोआना भी पुलिस कॉन्स्टेबल था और उसे बैकअप के रूप में रखा गया था। अगर दिलावर सिंह बब्बर विफल होता तो वो खुद को उड़ा लेता। राजीव गाँधी के हत्यारों की रिहाई के बाद ‘शिरोमणि अकाली दल’ (SAD) ने उसकी रिहाई के लिए भी अभियान चलाया। वो लगभग 27 वर्षों से जेल में है, 2007 में CBI कोर्ट ने उसे मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया।

हत्यारों का महिमामंडन: SGPC और SAD ने रिहाई के लिए चलाया अभियान

इसके बाद इस मामले में पड़ता है ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी’ (SGPC), अमृतसर स्थित दरबार साहिब से लेकर पंजाब के सभी गुरुद्वारों के मामले में अंतिम निर्णय इसका ही होता है। तब पंजाब के मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल ने मार्च 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात की थी, साथ में उनके बेटे और तत्कालीन डिप्टी CM सुखबीर सिंह बादल भी थे। 31 मार्च, 2012 में बलवंत सिंह राजोआना को फाँसी दी जानी थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने उसकी सज़ा रोक दी।

उस समय UPA-II की सरकार थी, मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और P चिदंबरम गृह मंत्री हुआ करते थे। दिसंबर 2019 में वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ़ किया कि बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सज़ा कम नहीं की गई है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर स्थित सेन्ट्रल सिख म्यूजियम में SGPC द्वारा बेअंत सिंह के हत्यारे दिलावर सिंह बब्बर की तस्वीर भी स्थापित की गई। जून 2022 में SGPC के अध्यक्ष अधिवक्ता हरजिंदर सिंह ने इस तस्वीर को इंस्टॉल करते हुए उसे ‘शहीद’ बताया था।

उन्होंने कहा था कि दिलावर सिंह बब्बर ने खुद को ‘बलिदान’ कर के सिखों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और मानवाधिकार के घोर उल्लंघनों पर लगाम लगाई। SGPC ने ये भी कहा था कि गुरु के आशीर्वाद के बिना ‘बलिदान’ संभव नहीं है। याद दिलाते चलें कि बेअंत सिंह हत्याकांड के 3 आरोपित जून 2004 में चंडीगढ़ स्थित जेल से भाग निकले थे, बाकी भागते हुए पकड़े गए थे। एक आरोपित इंटरपोल की मदद से जनवरी 2014 में थाईलैंड से भी पकड़ा गया था।

आज जब अमृतपाल सिंह जैसे खालिस्तानी समर्थक सांसद बन रहे हैं, बेअंत सिंह जैसे नेताओं का अभाव है जो कट्टरपंथियों के सामने झुके बिना इससे उपजे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर सकें। बेअंत सिंह की गलती इतनी थी कि वो एक धर्मनिष्ठ नामधारी सिख थे, देश को खंडित करने की सोच रखने वाले कट्टरपंथी नहीं। आज अमृतपाल सिंह जैसे नेता देश के टुकड़े करने की माँग करते हैं और जेल से ही लोकसभा का चुनाव लड़ कर सांसद बन जाते हैं।

ताज मोहम्मद ने ‘बबलू’ बन हिन्दू महिला को फाँसा, धर्मांतरण कर बना दिया ‘नाजिया’: फिर ‘तीन तलाक’ देकर कर लिया दूसरा निकाह

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लव जिहाद का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ताज मोहम्मद नाम के एक मुस्लिम ने अपना नाम बबलू बताकर नीलम मिश्रा से दोस्ती की। धीरे-धीरे उसने महिला को अपने प्रेम जाल में फँसाकर उसका धर्म परिवर्तन कराया और नाजिया नाम रख दिया। इसके बाद उससे निकाह कर लिया। कुछ दिनों के बाद उसने उसे तीन बार तलाक बोलकर उसे तीन तलाक दे दिया।

घटना लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित निगोहाँ का है। डीहा मजरा की रहने वाली नीलम मिश्रा नाम की एक हिंदू युवती राजीव गाँधी महिला विकास परियोजना में काम करती थी। ताज मोहम्मद उसकी मुलाकात साल 2010 में हुई थी। इस दौरान ताज ने अपना नाम बबलू बताया था। दोनों में दोस्ती हुई। धीरे-धीरे ताज मोहम्मद ने महिला को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया।

कुछ दिनों के बाद ताज मोहम्मद उसे शादी का झाँसा देकर अपने साथ भगा ले गया। साथ रहने के दौरान महिला को पता चला कि वह बबलू नहीं, बल्कि ताज मोहम्मद है और वह मुस्लिम है। नीलम ने ताज मोहम्मद का विरोध किया तो उसने महिला के साथ मारपीट की। ताज मोहम्मद ने महिला पर दबाव डालकर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया और उसका नाम नाजिया रख दिया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसे ताज मोहम्मद के साथ मजबूरी में रहना पड़ा, क्योंकि वह गर्भवती हो गई थी। इसके बाद वह किसी तरह वह अपना गुजर बसर करने लगी। नीलम मिश्रा उर्फ नाजिया का कहना था कि ताज मोहम्मद जुआ खेलता है। उसने अपनी वेतन में मिले पैसे को जोड़कर उसे साल 2016 में नौकरी के लिए सऊदी अरब भेजा था।

महिला का आरोप है कि वहाँ पहुँचने के बाद ताज घर आना बंद कर दिया। वह सऊदी से वापस आया तो एक दिन पता चला कि ताज मोहम्मद ने साल 2021 में साजिया नाम की मुस्लिम लड़की से निकाह कर लिया है। साजिया भारतीय ही है। वह गोसाईगंज के मतीन टोला मलौली की रहने वाली है। इसकी जानकारी मिलते ही पीड़िता ने इस निकाह का विरोध किया।

विरोध करने पर ताज मोहम्मद ने पीड़िता के साथ मारपीट की और उसे घर से निकाल दिया। पीड़िता वहाँ से निकलकर अपने भाई शाश्वत मिश्रा के घर चली गई। भाई ने उसे घर में पनाह दे दी। इसी बीच आऱोपित ताज मोहम्मद वहाँ भी पहुँच गया और उसके भाई से लड़ाई करने लगा। इस दौरान उसने महिला को तीन बार तलाक कहकर उसे तीन तलाक दे दिया।

इसके बाद पीड़िता ने थाने पहुँचकर ताज मोहम्मद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। एसएचओ अनुज तिवारी ने बताया कि इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 115(2), मुस्लिम महिला विवाह अधिकारों की सुरक्षा अधिनियम 2019 की धारा 3 और 4 के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत कार्रवाई की गई है।

कपड़े बदलती हिरोइन की नंगी वीडियो के लिए कैमरा, ‘हिरोइन नाम’ का ही फोल्डर: राधिका शरतकुमार ने बताया मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का एक और सच

केरल की फिल्म इंडस्ट्री चर्चा में है। इसलिए नहीं कि किसी मलयालम फिल्म ने झंडे गाड़ दिए हैं बल्कि गंदी हरकतों के लिए। हाल-फिलहाल में यौन शोषण के आरोपों से घिरी इस इंडस्ट्री पर लेटेस्ट आरोप लगाया है मलयालम फिल्मों में काम कर चुकीं हिरोइन राधिका सरथकुमार ने। इनके अनुसार कपड़े बदलती हिरोइनों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है, फिल्म के सेट पर उस वीडियो को फिर सभी लोग अपने मोबाइल में देखते हैं।

राधिका सरथकुमार (Radhika Sarathkumar) ने बताया कि मलयालम फिल्मों के सेट पर जो कैरावैन (बड़ी सी गाड़ी, जिसमें हीरो-हिरोइन कपड़े बदलने से लेकर मेकअप आदि तक करते हैं, आराम करने के लिए भी जगह होती है) होते हैं, उसमें छिपा कर कैमरा लगा दिया जाता है। जब हिरोइन लोग इसमें अपने कपड़े बदलने जाती हैं तो उनकी नंगी वीडियो रिकॉर्ड कर ली जाती है।

रिकॉर्ड किए गए वीडियो को उसी हिरोइन के नाम से बने फोल्डर में सेव किया जाता है। इसके बाद उस मलयालम फिल्म के सेट पर मौजूद लोगों के फोन पर वीडियो शेयर किया जाता है। राधिका के अनुसार उन्होंने खुद लोगों को ऐसे वीडियो देखते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। इन वीडियो में कपड़े बदलती हिरोइने थीं। इस घटना के बाद राधिका कैरावैन के बजाय किसी कमरे में कपड़े बदलती थीं या मेकअप करती थीं।

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ हिरोइन लोगों का ही यौन शोषण होता है, ऐसा नहीं है। मलयाली फिल्मों के डायरेक्टर रंजीत (Malayalam director Ranjith) के खिलाफ एक हीरो ने भी अपने साथ किए गए यौन अपराधों के लिए FIR दर्ज करवाई है।

FIR दर्ज करवाने वाले हीरो ने बताया कि फिल्म में काम दिलवाने के बहाने रंजीत ने उन्हें एक फाइव स्टार होटल में बुलाया था। यहाँ उन्होंने पीड़ित हीरो को पूरी तरह से नंगा करवाया। शिकायत के अनुसार, इसके बाद उनके साथ अमानवीय तरीके से यौन शोषण किया गया, जिसका जिक्र भी वो नहीं कर सकते। पीड़ित हीरो के अनुसार उनकी नंगी तस्वीर डायरेक्टर रंजीत ने एक हिरोइन को भी भेजी थी।

आपको बता दें कि मलयालम सिनेमा में जो गंदगी है, उसको लेकर हेमा कमिटी ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार वहाँ 15 मर्दों का एक ‘माफिया’ है, जो सब कुछ तय करता है। यह जानना भी जरूरी है कि हेमा कमिटी रिपोर्ट 5 साल पहले ही केरल सरकार के पास पहुँच गई थी, लेकिन इसे अब जाकर सार्वजनिक किया गया है।

बिहार से मिले घातक हथियार, UP में गन बनाने की ट्रेनिंग, राजस्थान में फायरिंग: अलकायदा आतंकियों के नेटवर्क में MBBS डॉक्टर भी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए और कई राज्यों की एटीएस ने अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। उसका मुखिया राँची के अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर इश्तियाक निकला है। इश्तियाक ने इस मॉड्यूल के लिए खतरनाक हथियार बिहार के लखीसराय लिए थे। वह पाकिस्तान में ट्रेंड आंतकी टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। 

NIA एवं अन्य टीमों ने इस मामले में राजस्थान के भिवाड़ी से 6 आतंकियों को ट्रेनिंग करते हुए पकड़ा था। इसके अलावा झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। एक आतंकवादी की गिरफ्तारी यूपी से की गई है। अब तक इस मॉड्यूल के 16 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

आतंकियों का सेफ जोन बुलंदशहर

पूछताछ में एजेंसियों को पता चला कि आतंकियों कोे दूसरे चरण का प्रशिक्षण लेने के लिए भिवाड़ी भेजा गया था। ये सभी किराए के कमरे ले रखे थे और वहाँ से करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ों में उन्हें फायरिंग का अभ्यास करना था। यह भी पता चला है कि ट्रेनिंग लेने वाले संदिग्ध आतंकी कुछ वर्ष पहले दिल्ली में भी रुके थे। तब डॉक्टर इश्तियाक के मॉड्यूल से इनका संपर्क नहीं हुआ था।

पूछताछ में संदिग्ध आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी ट्रेनिंग लेने का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि बुलंदशहर आतंकियों का सेफ हाउस जैसा है। वहाँ पर उन्हें फिटनेस, कॉम्बेट फाइट के साथ हथियार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। वहाँ से वे राँची गए और फिर भिवाड़ी पहुँचे। संदिग्धों ने दिल्ली रूट से भिवाड़ी आने की बात कबूली है।

बिहार से मिले हथियार

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध आतंकियों ने बताया है कि भिवाड़ी पहुँचने के बाद वहाँ उन्हें कुछ मददगार भी मिले। इन मददगारों ने आतंकियों के लिए लेबर कॉलोनी में किराए के कमरे का इंतजाम किया था। इनके लिए दो कमरे 10 अगस्त 2024 को ही बुक हो चुके थे। अब एजेंसियाँ इन सब की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही हथियारों की सप्लाई करने वालों का भी पता लगा रही है।

भिवाड़ी में रेड के दौरान एजेंसियों ने संदिग्ध आतंकियों के साथ-साथ हथियार भी बरामद किए थे। ये हथियार उन्हें बिहार के लखीसराय से मिले थे। डॉक्टर इश्तियाक ने ये हथियार खरीदे थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब भिवाड़ी इलाके में छापा मारा तो संदिग्ध आतंकी लोहरदगा निवासी अल्ताफ से यह हथियार बरामद हुए। छापेमारी में मिली एक कार्बाइन 40 हजार रुपए में खरीदी गई थी।

चतरा का फरार आतंकी सूफियान से संपर्क

यह भी पता चला है कि डॉक्टर ​इश्तियाक का झारखंड के चतरा जिले के टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान से संपर्क था। सूफियान ने पाक अधिकृत क​श्मीर के कैंपों में ट्रेनिंग ली है। उसी ने इश्तियाक को अलकायदा का झारखंड मॉड्यूल खड़ा करने वाले ओडिशा निवासी आतंकी अब्दुल रहमान कटकी से मिलवाया था। अबू सूफियान अभी तक पकड़ा नहीं गया है, जबकि आतंकी कटकी पकड़ा चुका है।

जाँच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी अबू सूफियान साल 2016 से ही सक्रिय है। इसके बावजूद वह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। कहा जाता है कि ट्रेनिंग के बाद वह पाकिस्तान में है। यह भी कहा जाता है कि वह भारत में कहीं अंडरग्राउंड होकर काम कर रहा है। वह AQIS का टॉप नेता है। बंगाल और केरल की तर्ज पर ही अलकायदा झारखंड मॉड्यूल खड़ा करना चाह रहा था।

डॉक्टर इश्तियाक ने की थी खिलाफत की तैयारी

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के इस मॉड्यूल का नेतृत्व डॉक्टर इश्तियाक कर रहा था। उसने इस मॉड्यूल का विस्तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक कर लिया था। डॉ. इश्तियाक राँची के प्रतिष्ठित मेडिका अस्पताल में सेवा दे रहा था। हालाँकि एटीएस की कार्रवाई के बाद 22 अगस्त को ही मेडिका के मैनेजमेंट ने डॉ. इश्तियाक अहमद को टर्मिनेट कर दिया।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट पर झारखंड एटीएस ने रांची के बरियातू जोड़ा तालाब के अल हसन रेसीडेंसी में दबिश देकर डॉक्टर इश्तियाक को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जाँच की। जाँच में कई संदिग्ध चीजें मिलने के बाद एटीएस उसे गुप्त ठिकाने पर ले गई, जहाँ पूछताछ कर यूपी, राजस्थान समेत अन्य शहरों में गतिविधि की जानकारी उससे जुटाई गई।

भिवाड़ी में मौके से पुलिस ने एके 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की हैं। खास बात ये है कि राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किए गए 6 आतंकी भी झारखंड के ही निकले हैं।

डॉ इश्तियाक के बारे में जानिए

  • डॉक्टर इश्तियाक पेशे से रेडियोलॉजिस्ट है, जिसने राँची के RIMS से मेडिकल की पढ़ाई की
  • मेडिका अस्पताल में 3 साल तक फुल टाइम कर चुका है काम
  • बीते 3 साल से पार्ट टाइम दे रहा था मेडिका अस्पताल में सेवा
  • हजारीबाग में भी क्लीनिक चलाता है इश्तियाक
  • भारत को इस्लामिक देश बनाने की कर रहा था कोशिश

झारखंड से इन आतंकियों की गिरफ्तारी

झारखंड एटीएस की टीम ने 22 अगस्त 2024 लोहरदगा में कुडू के हेंजला कौवाखाप गाँव अल्ताफ उर्फ इल्ताफ की तलाश में पहुँची थी। उसके घर से दो हथियार और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके साथ ही राँची के चान्हों इलाके में एटीएस की टीम ने कई जगहों पर दबिश दी। एटीएस ने चान्हों के बलसोकरा के मोहम्मद मोदब्बीर, रिजवान, चटवल के मुफ़्ती रहमतुल्लाह मजहिरी और पिपराटोली के मतिउर रहमान को हिरासत में लिया था।

एटीएस की टीम ने एक साथ चान्हों के बलसोकरा, चटवल, पिपराटोली के अलावा पकरियो गाँव के एनामुल अंसारी, शहबाज अंसारी तथा शहबाज अंसारी के घर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मोहम्मद मोदब्बिर, मोहम्मद रिजवान, मुफ़्ती व मतीउर रहमान को उनके घर से और मुफ्ती रहमतुल्लाह को एटीएस ने उसके मदरसा से हिरासत में लिया। इस दौरान पकरियो में छापेमारी में एनामुल अंसारी और शहबाज घर में नहीं मिले। परिजनों की ओर से बताया गया कि जेयारत अंसारी का बेटा शहबाज परीक्षा के लिए दिल्ली गया हुआ है, जबकि शहबाज और एनामुल अंसारी तबलीगी जमात में गए हुए हैं।

मुस्तफा की गुलामी का सबूत पेश करें: छतरपुर में थाना को घेरने के लिए पर्चा बाँट जुटाई थी मुस्लिम भीड़, पत्थरबाजों को बुला ठहराया था होटल में

मध्य प्रदेश के छत्तरपुर शहर में कोतवाली थाने पर पथराव के मामले में अब तक 25 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, बाकी के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इस घटना के 10 दिन के बाद एक पर्चा सामने आया है, जिसे वायरल करके लोगों से थाने के सामने जुटने की अपील की गई थी। यह पर्चा कॉनग्रेस नेता हाजी शहजाद अली की बताई जा रही है।

घटना के मुख्य आरोपित एवं कॉन्ग्रेस नेता हाजी शहजाद अली के भाई फैयाज अली को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फैयाज अली भी इस घटना में आरोपित है। फैयाज पर साल 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता उमा भारती पर जानलेवा हमले का मामला दर्ज हुआ था। इसके अन्य भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। पुलिस कोतवाली पर हमले के मामले में 1000 लोगों की तलाश कर रही है।

प्रशासन को पता चला है कि शहजाद अली और उसके भाई इम्तियाज पर वन विभाग की बेशकीमती 17 एकड़ जमीन कब्जाने के आरोप लगे हैं। यहाँ अक्सर हिरण सहित वन्य जीव घूमते रहते हैं। जुलाई 2023 में वन विभाग ने अतिक्रमण को लेकर शहजाद के भाई इम्तियाज अली के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालाँकि, उसके रसूख के चलते कब्जा नहीं हट सका और वन विभाग ने कार्यवाही रोक दी। 

पुलिस ने मुख्य आरोपित शहजाद अली की करोड़ों रुपए की कोठी पर बुलडोजर चलाकर उसे खाक में मिला दिया है। वहीं, उसकी अन्य अवैध संपत्तियों का भी पता चला है। इस मामले में लगभग तीन दर्जन से ज्यादा आरोपितों से पुलिस पूछताछ कर रही है। इस मामले में शहजाद अली अभी फरार है। प्रशासन ने शहजाद के पार्षद भाई आजाद सहित 16 आरोपितों के हथियारों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।

शुक्रवार (30 अगस्त 2024) यानी जुम्मे दिन पुलिस ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला। इस दौरान मुस्लिम बहुल इलाकों और मस्जिदों का निरीक्षण किया। वहीं, शुक्रवार को ही मुख्य आरोपित हाजी शहजाद अली ने एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में खुद निर्दोष बताते हुए शहजाद अली इस घटना को गहरी साजिश बताया और मुख्यमंत्री से इसकी निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है।

पता चला है कि कोतलवाली थाना के बाहर हिंसा को लेकर बहुत पहले से प्लानिंग की गई थी। आरोपितों ने इस घटना को अंजाम देने से दो-तीन दिन पहले मुस्लिमों के घर-घर में पर्चे बँटवाए थे। इतना ही नहीं, इस घटना के लिए बाहर से भी पत्थरबाजों को बुलाया गया था। होटलों में उनके रुकने की व्यवस्था की गई थी। जो पर्चे बाँटे गए थे, वह भी अब सामने आया है। इसमें लोगों से जुटने की अपील की गई है।

घटना से पहले मुस्लिमों के बीच बाँटे गए पर्चे (साभार: हिंदुस्तान)

दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 21 अगस्त 2024 को मुस्लिम भीड़ ने कोतवाली थाने पर हमला करके कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने कई उपद्रवियों का जुलूस निकाल कर जेल भेजा और मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता हाजी शहजाद अली के घर पर बुलडोजर चलाया। अब इसी घटना में एक मौलाना का वीडियो वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में मौलाना को उन्मादी बयानबाजी करते हुए भीड़ को भड़काते देखा जा सकता है। मौलाना का नाम इरफ़ान चिश्ती बताया जा रहा है। मौलाना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद मौलाना लोगों से माफ़ी माँगता नजर आया। हमला से एक दिन पहले सामने आए एक वीडियो में मौलाना ने ज्यादा से ज्यादा तादाद में मुस्लिमों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। 

इसी वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा था कि जो भी इस प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा उसे ईद-उल-मिलाद के जुलूस में भी शिरकत करने का कोई हक नहीं होगा। वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा कि इस बार ज्ञापन नहीं दिया जाएगा बल्कि सीधे FIR दर्ज करवाई जाएगी। इरफ़ान चिश्ती ने वीडियो बनाने से 1 रात पहले उलेमाओं से हुई किसी मीटिंग का भी हवाला दिया।

वायरल वीडियो में सबको सलाम पेश करने के बाद इरफ़ान चिश्ती ने संत गिरिराज को मक्कार कहा। बोला, “कल नमाज़-ए-जोहर (जोहर की नमाज़) के बाद शहर की पूरी आवाम मस्तान शाह के मैदान में इकट्ठा हो और उस खिनजीर (सूअर) के नाम पर FIR दर्ज की जाए।” वीडियो में मौलाना ने भड़काऊ भाषण के आरोप में जेल काट रहे मुफ़्ती सलमान अज़हरी की शान में कसीदे भी गढ़े।

यह सब कुछ महाराष्ट्र के नासिक में प्रवचन के दौरान सरला द्वीप के महंत रामगिरि द्वारा बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर दी गए उदाहरण को लेकर था। इसका उदाहरण देेते हुए उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का भी जिक्र किया था। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इसे ईशनिंदा और उनके पैगंबर मुहम्मद का अपमान बताकर उनके खिलाफ कई जगहों पर एफआईआर दर्ज करवाई है।

इतना ही नहीं, अहमदनगर और नासिक सहित महाराष्ट्र के कई इलाकों में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने सड़कों पर निकल कर हिंसा फैलाई। उन्होंने जगह लोगों पर हमला किया, दुकानों में तोड़फोड़ की और वाहनों में तोड़फोड़ एवं आग लगाई। इसको देखते हुए महाराष्ट्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब नूपुर शर्मा मामले की तरह इसे भी कट्टरपंथियों द्वारा देश के अन्य हिस्सों फैलाने की कोशिश की जा रही है। 

बंगाल में TMC नेता का बेटा गिरफ्तार, 13 साल की जनजातीय लड़की का रेप करने के बाद हत्या की कर रहा था कोशिश: ग्रामीणों का आरोप- 3 बार कर चुका है ऐसे अपराध

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के बेटे को 13 साल की आदिवासी लड़की के साथ बलात्कार और हत्या के प्रयास के आरोप में गुरुवार (29 अगस्त) को गिरफ्तार किया गया। यह घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर उपखंड के बंशीहारी में हुई थी। राष्ट्रीय सुर्खी बनने के बाद राज्य सरकार का इस पर ध्यान गया और कार्रवाई की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित की पहचान प्रियनाथ राजबंशी के रूप में हुई है। यह TMC के प्रभावशाली बूथ अध्यक्ष नरेश राजबंशी का बेटा है। आरोपित के परिवार के कई सदस्य प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं। इस तरह आरोपित का परिवार इलाके के प्रभावशाली परिवारों में से एक माना जाता है।

प्रियनाथ राजबंशी ने बुधवार (28 अगस्त 2024) की रात को पीड़िता के घर में जबरन घुस गया था और वहाँ पर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। कहा जा रहा है कि रेप के बाद उसने नाबालिग लड़की का गला दबाकर हत्या करने की कोशिश की। इस दौरान नाबालिग चिल्लाई तो उसे बचाने के लिए उसकी माँ आई। हालाँकि, इस दौरान आरोपित प्रियनाथ घटनास्थल से भागने में सफल रहा।

इस घटना में नाबालिग लड़की की गदर्न पर चोट के गहरे निशान पड़ गए हैं। उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कहा जा रहा है कि पीड़िता की हालत गंभीर बनी हुई है। उसका ईलाज गंगारामपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना से बंशीहारी इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल है।

घटना की जानकारी पुलिस को गुरुवार (29 अगस्त) को मिली। इसके बाद एएसपी इंद्रजीत सरकार और आईसी असीम गोप के नेतृत्व में पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुँची। वहाँ आरोपित प्रियनाथ के पैंट और जूते बरामद हुए। इसके साथ ही पुलिस ने दबिश देकर आरोपित प्रियनाथ राजबंशी को भी गिरफ्तार कर लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रियनाथ इस तरह की कम-से-कम तीन घटनाओं में शामिल रहा है।

इस घटना के बारे में बताते हुए दीप्ति राजबंशी नाम की एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा कि उसे न्याय चाहिए। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपित ने पहले भी इसी तरह के अपराध किए हैं। इसलिए उसे इस बार कड़ी-से-कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में वह इस तरह की गलती दोबारा ना करे। चेतावनी देते हुए महिला ने कहा कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो उन्हें अपने हाथ में कानून लेना पड़ेगा।

वहीं, शिबनाथ पांडे नाम के एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लड़कियों की कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि वह आदिवासी समुदायों की सुरक्षा कर रही है, लेकिन सुरक्षा कहाँ है? उनका कहना है कि प्रदेश में इस तरह की घटनाएँ आए दिन हो रही है।

‘कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं’- रामचरितमानस की वो चौपाई, जिसकी प्रेरणा से अवनी ने जीता पैरालंपिक का गोल्ड मेडल

भारत की अवनी लेखरा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है। अवनी ने अंतिम राउंड में 249.7 का स्कोर करके यह उपलब्धि हासिल की है। यह पैरालंपिक का नया रिकॉर्ड है। इसके अलावा, भारत की मोना अग्रवाल ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। अवनी के पिता ने बताया कि रामचरितमानस की चौपाई ने उनकी बेटी को ताकत दी, जिसके कारण उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।

अवनी के पिता प्रवीण लेखरा ने कहा कि उन्होंने रामचरितमानस की एक चौपाई लिखकर अपनी बेटी को दी थी। यह चौपाई है- ‘कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं’। इससे अवनी शक्ति और प्रेरणा मिली। बता दें कि पेरिस पैरालंपिक से पाँच महीने पहले 22 वर्षीय शूटर अवनी लेखरा को पथरी निकालने के लिए ऑपरेशन करवाना पड़ा था। इससे उनकी ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई थी।

यह पैराओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अवनी के खाते में कुल तीन पदक शामिल हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने तीन वर्ष पहले टोक्यो में आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्ण और कांस्य पदक जीता था। टोक्यो पैरालिंपिक में अवनी ने इतिहास रच दिया था। वह एक ही पैरालंपिक में कई पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय बनी थीं। इससे पहले जोगिंदर सिंह सोढ़ी ने 1984 में यह कारनामा किया था।

इतना ही नहीं, एक कार दुर्घटना में अवनी की रीढ़ में चोट लग गई थी। इसके कारण उनके कमर के नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो गया था। साल 2011 में वह अपने माता पिता के साथ कार से जा रही थी। उस समय उसकी उम्र लगभग 11 साल रही थी। जयपुर-धौलपुर हाइवे पर कार का एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद उन्हें 90 दिन तक जयपुर और दिल्ली के इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में बीताना पड़ा था।

प्रवीण लेखरा ने बताया कि इस दौरान अवनी टीवी पर डांस देखती थी और किताबें पढ़ती थी। उसे सामान्य होने में लगभग 3 साल का लंबा वक्त हो गया। दुर्घटना के तीन साल बाद अवनी ने जगतपुरा शूटिंग रेंज में अपनी शूटिंग शुरू की और फिर 2016 में किराए की एयर राइफल के साथ कोच शेखर से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। मांसपेशियों में कमजोरी के बावजूद उन्होंने एक साल के भीतर रजत पदक जीत लिया।

अवनि ने साल 2022 में पेरिस में पैरा विश्व कप के दौरान फाइनल में 250.6 के नए विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ भारत के लिए पहला पैरालंपिक कोटा हासिल किया था। पिछले साल दिल्ली में पैरा शूटिंग विश्व कप में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इसमें भारत की ही मोना अग्रवाल ने स्वर्ण पदक जीता था। हालाँकि, उन्हें लगातार दर्द की समस्या रही थी।