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दिल्ली में चल रहा था किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट, चलाने वाले बांग्लादेशी थे: पुलिस ने 7000+ पन्नों की चार्जशीट की दायर, जाली फाइल, आधार कार्ड मिले

दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मामले में 7,000 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट दायर की है। इस रैकेट का भंडाफोड़ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इसी साल जुलाई में किया था। उस समय तीन बांग्लादेशी नागरिकों सहित 50 वर्षीय दिल्ली की महिला डॉक्टर सहित 7 लोगों की गिरफ्तार हुए थे।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, 7,112 पन्नों की चार्जशीट में कुल दस लोगों को आरोपित बनाया गया है। इस आरोप-पत्र को पिछले हफ्ते शहर की एक अदालत में दायर किया गया था।

इसमें पुलिस ने बताया कि महिला डॉक्टर, डी विजय राजकुमारी, जो दक्षिण-पूर्व दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में फीस-फॉर-सर्विस के आधार पर किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के रूप में काम कर रही थी, वह कथित तौर पर 2021 और 2023 के बीच बांग्लादेश के लगभग 15 लोगों के किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल थीं।

चार्जशीट के अनुसार, डॉ राजकुमारी ने ये सारी सर्जरियाँ नोएडा के यथार्थ अस्पताल में की थी, जहाँ वह एक विजिटर्स सलाहकार थीं। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में डॉक्टर की एक सहायक, विक्रम सिंह और तीन बांग्लादेशी नागरिक – रासेल, मोहम्मद सुमन मियाँ और मोहम्मद रोकोन उर्फ ​​रहुल सरकार उर्फ ​​बिजय मंडल शामिल हैं।

अपनी जाँच के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से कई चीजें बरामबद कीं। जैसे 23 स्टैंप, मरीजों और किडनी दाताओं की जाली फाइलें, जाली आधार कार्ड आदि। पुलिस अधिकारी ने इस पूरे रैकेट का सरगना रासेल को बताया।

छानबीन में पता चला कि रासेल 2019 में भारत आया था और उसने एक बांग्लादेशी मरीज को अपनी किडनी दे दी थी। अपनी सर्जरी के बाद, रासेल ने अपना इसे अपना धंधा बना लिया। अधिकारी ने कहा कि वह विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद स्थापित करता था। बांग्लादेश के संभावित किडनी दाताओं और यहाँ के मरीजों से संपर्क स्थापित करता था। उसका एक सहयोगी, इफ्ती, बांग्लादेश से दाताओं को लेकर आता था।

जल्दी आइए, आपकी बेटी की तबीयत बहुत खराब है: RG कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर की रेप-हत्या के बाद परिजनों को किया गया कॉल, सामने आए रिकॉर्डिंग में खुली झूठ की परतें

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 8-9 अगस्त 2024 की रात डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में अहम मोड़ आ गया है। अब तक दावा किया जाता रहा है कि डॉक्टर के पिता को बेटी के सुसाइड की जानकारी फोन पर दी गई थी, जबकि उसका रेप और मर्डर हुआ था, लेकिन अब वो फोन रिकॉर्डिंग भी सामने आ गई है, जिसमें डॉक्टर के पिता को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट ने फोन कॉल करके बेटे के सुसाइड की बात कही थी।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर की मौत सुबह 3 से 4 बजे के बीच हुई जबकि माता-पिता को पहली कॉल 10 बजकर 53 मिनट पर की गई। पहली कॉल में बताया गया कि आपकी बेटी की तबियत खराब है। पहली कॉल में लड़की के मम्मी-पापा से झूठ बोला गया। थोड़ी देर बाद दूसरी कॉल की गई, जिसमें बताया गया कि बेटी की हालत बहुत खराब है। तीसरी कॉल सबके सामने की गई थी, जिसमें बताया गया कि बेटी ने सुसाइड कर लिया है। इस मामले में मृतक डॉक्टर के परिवार से लगातार झूठ बोला जा रहा था।

पहली कॉल में आरजी कर अस्पताल के असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट को माता-पिता से अस्पताल आने का आग्रह करते हुए सुना जा सकता है। वे कहते हैं, “आपकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है। क्या आप तुरंत अस्पताल आ सकते हैं?” पिता को लगा कि कुछ गड़बड़ है, इसलिए उन्होंने और जानकारी माँगी, जिस पर स्टाफ सदस्य ने केवल इतना कहा, “वह ठीक नहीं है। हम उसे भर्ती कर रहे हैं। क्या आप जल्दी आ सकते हैं?” जब इस पर और अधिक जोर दिया गया तो स्टाफ सदस्य ने झिझकते हुए कहा, “जब आप यहाँ आएँगे तो डॉक्टर आपको बताएँगे कि क्या हुआ था। हमें आपका नंबर मिला और हमने आपको फोन किया क्योंकि आप परिवार के सदस्य हैं।”

दूसरा कॉल कुछ ही देर बाद आया, जिसमें अस्पताल का वही कर्मचारी और भी परेशान लग रहा था। “उसकी हालत बहुत गंभीर है। कृपया जल्द से जल्द आएँ,” उसने आग्रह किया। पिता, जो अब और भी अधिक चिंतित हो गया था, ने जानना चाहा कि आखिर हुआ क्या था, लेकिन जवाब अस्पष्ट रहा, “डॉक्टर समझाएँगे। कृपया जल्दी से जल्दी आएँ”। जब पिता ने पूछा कि उनसे कौन बात कर रहा है, तो भ्रम और बढ़ गया। स्टाफ़ सदस्य ने स्पष्ट किया, “मैं सहायक अधीक्षक हूँ,” और आगे कहा, “मैं डॉक्टर नहीं हूँ।” जवाब पाने के लिए बेताब पिता ने पूछा कि क्या कोई डॉक्टर मौजूद है, लेकिन बिना किसी स्पष्टीकरण के अचानक कॉल कट गई।

तीसरी और अंतिम कॉल ने स्थिति की भयावह वास्तविकता को उजागर किया। स्टाफ़ सदस्य, जो बहुत चिंतित लग रहा था, ने कहा, “उसने आत्महत्या कर ली होगी या मर गई होगी। पुलिस यहाँ है। हम अस्पताल में हैं, सबके सामने, यह कॉल कर रहे हैं”। इन कॉलों से प्रशिक्षु डॉक्टर की मौत की परिस्थितियों और अस्पताल द्वारा स्थिति से निपटने के तरीके पर गंभीर सवाल उठे हैं।

कोलकाता रेप मर्डर केस की सीबीआई जाँच चल रही है। देशभर में इस हत्याकांड को लेकर डॉक्टर्स और अन्य संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं।

पूर्व इंस्पेक्टर ने उठाए गंभीर सवाल

इस बीच, कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला ट्रेन डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में एक और बड़ा दावा सामने आया है। ममता सरकार में काम करने वाले पूर्व इंस्पेक्टर अरिंदम आचार्या ने पुलिस पर बड़ा सवाल उठा दिया है। अरिंदम आचार्य ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले तो केस में जाँच करने में देरी की। उन्होंने शाम को पोस्टमार्टम कराए जाने पर भी सवाल उठाए। अरिंदम के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है। अरिंदम ने कहा जिस डॉक्टर को पोस्टमार्टम करना था उससे केवल जबरन साइन कराए गए, ये बात उनको डॉक्टर ने बताया है।

अरिंदम ने कहा मैं खुद पुलिस ऑफिसर रहा हूँ। इस तरह की घटना में पुलिस क्वेस्ट रिपोर्ट तैयार करती है। विसरा भी सुरक्षित करती है, लेकिन कहाँ है ये सब? क्वेस्ट रिपोर्ट में स्कफल के निशान को समझा जाता है। अरिंदम ने बताया कि इस तरह की घटना में लड़की छटपटाई होगी और जो रेप या मर्डर किया होगा, उससे बचने के लिए उसके नाखूनों या मुट्ठी में निशान होंगे। वो मुट्ठी बंद अगर होती है, तो पोस्टमार्टम से ही खुलती है, इसकी रिपोर्ट कहां है?

बता दें कि आरजी कर अस्पताल के सेमीनार हॉल में 9 अगस्त की सुबह एक ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव अर्धनग्न अवस्था में मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि हत्या से पहले ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप किया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टर की मौत सुबह तीन से चार बजे के बीच होने की पुष्टि हुई। इस मामले में मुख्य आरोपित संजय रॉय का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जा चुका है।

अमरोहा में आदिल ने अमन बनकर हिंदू लड़की को फाँसकर किया रेप, फिर कराया धर्म-परिवर्तन: असम में अलोम अहमद ने कॉलेज छात्रा को बनाया हवस का शिकार

उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में आदिल ने इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान छिपाकर अमन नाम से आईडी बनाई, फिर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फंसा लिया। उसने हिंदू लड़की के साथ रेप किया। वहीं, असम में अलोम अहमद नाम के मुस्लिम युवक ने एक हिंदू छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसाया और शारीरिक संबंध बनाए। बाद में वो लड़की से पीछा छुड़ाने लगा, तो उसकी सच्चाई पता चली।

अमरोहा में आदिल बना अमन, हिंदू लड़की का रेप के बाद कराया धर्मांतरण

अमरोहा में आदिल नाम के लव जिहादी ने इंस्टाग्राम पर अमन बनकर युवती को प्रेमजाल में फंसाया फिर शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार रेप किया। यही नहीं, उसने लड़की को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी। लड़की ने बताया कि वो बड़ी मुश्किल से एसपी ऑफिस पहुँची और आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कराया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि एक साल पहले अमन नाम के युवक से उसकी इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। गरीब परिवार से होने के चलते उसने शादी के हामी भर दी। आरोपित आदिल उसे अपने घर अमरोहा ले गया। जहाँ उसे पता चला कि अमन असल में आदिल है। इसके बाद आदिल ने युवती का धर्म परिवर्तन कराया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 20 दिन बाद वो किसी तरह आदिल के चंगुल से निकली और एसपी दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई।

मामले में अपर पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि एक तहरीर प्राप्त हुई है। लड़की को धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाए गए हैं। लड़की को उसकी सच्चाई पता चली, तो उसे तमंचा दिखाकर धमकाया गया। उन्होंने कहा कि हमने केस दर्ज कर लिया है और कार्रवाई की जा रही है।

असम में अलोम अहमद ने झांसा देकर हिंदू छात्रा की लूटी अस्मत

दूसरा मामला असम के गुवाहाटी का है। यहाँ चाँदमारी इलाके में मुस्लिम आरोपित अलोम अहमद ने हिंदू छात्रा को अपने जाल में फंसाया। मामले की शुरुआत गुवाहाटी के जेबी लॉ कॉलेज से हुई। जहाँ पर पढ़ रही हिन्दू लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़के से हुई। कुछ दिनों बाद दोस्ती प्यार में बदल गई और उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। शारीरिक संबंध बनाने के बाद अहमद ने पीड़ित लड़की से वादा किया कि वह उससे शादी कर लेगा। लेकिन कुछ समय बाद उसने हिन्दु लड़की से शादी करने से मना कर दिया। जिसको लेकर दोनों के बीच इस बात को लेकर काफी विवाद हुआ।

अहमद के मना करने पर लड़की ने पुलिस में उसकी शिकायत कर दी। जिसके बाद मंगलवार (27 अगस्त 2024) को आरोपित अलोम अहमद को धुबरी स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 (विवाह, नौकरी या पदोन्नति का झूठा वादा करने और अपनी असली पहचान छिपाने जैसे धोखे से हासिल किए गए यौन संबंधों को अपराध मानती है।) के तहत केस दर्ज किया गया है।

दूसरे समुदाय के ‘कबाड़ी’ जबरन घर में घुसे, मारपीट कर 13 साल की लड़की से किया गैंगरेप: पीड़िता के परिजनों का आरोप, पुलिस ने मुख्य आरोपित फैजान को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कबाड़ियों द्वारा घर में घुसकर 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप को अंजाम दिया है। घटना को अंजाम देकर आरोपित मौके से फरार हो गए हैं, जिनमें से मुख्य आरोपित फैजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। परिवार का दावा है कि बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ है। सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया।

बृजविहार इलाके में थाने के सामने लोगों ने गुरुवार (29 अगस्त) की शाम को प्रदर्शन किया। लोगों ने बलात्कारियों को अविलंब फाँसी देने की माँग की है। प्रदर्शन के दौरान भड़के लोगों ने आरोपित की कबाड़ी की दुकान के बाहर रखे सामान और वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। एक ई-रिक्शे को फूंक दिया। मामला दो समुदायों से जुड़ा है। तनाव को देखते हुए पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं।

पीड़िता बच्ची की चाची का कहना है कि बुधवार (28 अगस्त 2024) की शाम को घर के सभी बड़े महिला-पुरुष सदस्य काम पर गए हुए थे। इसी दौरान कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करने वाले तीन-चार लड़के पीछे का गेट फाँदकर घर के अंदर घुस आए। घर में उनकी लड़की अकेली थी। इस दौरान लड़की के साथ मारपीट की गई। जब वह अचेत हो गई तो उसके साथ गैंगरेप किया गया।

हालाँकि, पुलिस का कहना है कि 29 अगस्त की सुबह जब पीड़िता की माँ एवं उसके परिवार के लोग थाने आए तो उन्होंने सिर्फ एक व्यक्ति पर रेप करने का आरोप लगाया था। इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। बकौल पुलिस, अब पीड़ित परिवार तीन-चार युवकों पर गैंगरेप का आरोप लगा रहा है। मामले की जाँच गहनता से की जाएगी।

सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता की माँ ने गुरुवार की सुबह थाना लिंक रोड पर शिकायत दर्ज कराई। उपाध्याय ने आगे बताया कि पीड़िता की माँ ने तहरीर में लिखा कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ दूसरे समुदाय के कबाड़ का काम करने वाले व्यक्ति ने मारपीट और रेप की। शिकायत पर मुकदमा दर्ज करके एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस मामले में हिंदू संगठन भी आगे आ गए हैं। हिंदू नेता आशीष पाल ने कहा कि आरोपित की कबाड़ी की दुकान के पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। उन्होंने कहा कि इसी यहाँ अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ नहीं रह गया है। इस घटना में शामिल आरोपितों के नाम फैजान, रेहान, राशिद, वसीम बताए जा रहे हैं। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वह गैंगरेप की जाँच कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले को रद्द करने से कोर्ट का इनकार, पीएम मोदी को बताया था ‘शिवलिंग पर बैठा बिच्छू’

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर पिछली रोक भी हटा दी है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने साल 2018 के बैंगलोर साहित्य महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की थी।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय को ‘इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का कोई आधार नहीं मिला है’। उन्होंने दोनों पक्षों को 10 सितंबर 2024 को निचली अदालत में पेश होने का भी निर्देश दिया। साल 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने थरूर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

मानहानि का यह मुकदमा दिल्ली भाजपा के नेता राजीव बब्बर द्वारा दायर की गई है। इस मामले में शशि थरूर को तलब करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह रोक जारी की है। अप्रैल 2019 में ट्रायल कोर्ट ने बब्बर द्वारा साल 2018 में दायर आपराधिक मानहानि शिकायत के जवाब में थरूर को तलब किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने जून 2019 में शशि थरूर को जमानत दे दी थी। बब्बर ने दावा किया कि अक्टूबर 2018 में बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान शशि थरूर द्वारा की गई टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की गई थी।

बब्बर ने तर्क दिया कि यह बयान उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला और भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए अपमानजनक है। वहीं, थरूर ने मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दायर की गई शिकायत को रद्द करने की माँग की थी।

‘रेप की तुलना साइकिल चलाने से करना महिलाओं का मजाक’: जिस अकाली नेता ने कहा कि ‘कंगना से पूछो रेप कैसे होता है’ उसे BJP सांसद ने लताड़ा

हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने पूर्व अकाली सांसद सिमरनजीत सिंह मान के उस विवादित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि कंगना को ‘रेप का तजुर्बा’ है। कंगना ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह टिप्पणी न केवल अपमानजनक है बल्कि महिलाओं के दर्द और पीड़ा को छोटा करने का प्रयास भी है।

कंगना ने सिमरनजीत के बयान पर तीखा जवाब दिया। कंगना ने मान के बयान को महिलाओं के सम्मान और उनके खिलाफ होने वाले अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दे को संवेदनशील और महिलाओं का मजाक उड़ाने सरीखा बताया।

कंगना रनौत ने एक्स पर लिखा, “ऐसा लगता है कि यह देश रेप को महत्वहीन बनाना कभी बंद नहीं करेगा। आज इस वरिष्ठ नेता ने रेप की तुलना साइकिल चलाने से कर दी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मजे के लिए महिलाओं के खिलाफ रेप और हिंसा इस पितृसत्तात्मक राष्ट्र की मानसिकता में इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि इसका इस्तेमाल महिलाओं को चिढ़ाने या उनका मजाक उड़ाने के लिए किया जाता है। भले ही वह एक हाई प्रोफाइल फिल्म निर्माता या राजनेता ही क्यों न हो।”

बता दें कि पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने कहा, “आप कंगना से पूछ सकते हैं कि रेप कैसे होता है ताकि लोगों को उसके बारे में बताया जा सके। उन्हें बड़ा अनुभव है।” जब मान से पूछा गया कि कंगना रनौत को रेप का तजुर्बा कैसे है? इसके जवाब में मान ने कहा- “जैसे आप साइकिल चलाते हैं तो आपको साइकिल चलाने का तजुर्बा हो जाता है। उनको रेप का तजुर्बा है।”

मान से फिर पूछा गया कि क्या वे कंगना रनौत की बात कर रहे हैं। इस पर मान ने कहा कि बिल्कुल, वह कंगना रनौत की बात कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सिमरनजीत सिंह मान खालिस्तान के भी समर्थक होने के नाते जाने जाते हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार-सिख विरोधी दंगों के विरोध में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी थी। बाद में उनपर हत्या की साजिश से लेकर देशद्रोह तक के केस दर्ज हुए थे। 5 साल भागलपुर जेल में बंद रहने के बाद में उन्होंने 1989 में चुनाव लड़ा और 93.92 फीसद वोट पाकर सांसद बने। फिर 1999 में भी तरनतारन सीट को जीता।

इसके बाद वो अपने विवादित बयान के कारण 2 साल पहले चर्चा में आए थे उन्होंने सरदार भगत सिंह को आतंकवादी कहा था। इस बार उन्होंने ये प्रतिक्रिया उस समय दी है जब किसान प्रदर्शन को लेकर कंगना का दिया बयान काफी सुर्खियों में रहा। अभिनेत्री ने अपने बयान में कहा था कि अगर भारतीय नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो प्रदर्शन से बांग्लादेश जैसे हालात हो सकते थे।

उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन में शवों को लटका पाया गया था, उस दौरान रेप हुआ था। उन्होंने इन सबके पीछे चीन और यूएस तक कहा हाथ कहा था। हालाँकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने जब उन्हें इस बयान के लिए फटकार लगाई उसके बाद उन्होंने कहा था कि वो आगे से शब्दों का चयन करते समय सवाधानी बरतेंगी।

CM सिद्धारमैया को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश हुई तो बांग्लादेश का हाल होगा: कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी विधायक ने दी गीदड़भभकी, कहा- PM मोदी के घर धावा बोलेंगे

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियाँ ठीक वही सपना देख रही हैं, जिसमें बांग्लादेश में हिंसा के दम पर शेख हसीना को अलोकतांत्रित तरीके से अपना देश छोड़कर भागना पड़ा। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस नेता और विधायद जीएस पाटिल भी ऐसा ही सपना देख रहे हैं। दरअसल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर जाँच की तलवार लटकी है, ऐसे में जीएस पाटिल ने कहा कि अगर सिद्धारमैया की ताकत को कम करने की कोशिश हुई, या वो सत्ता से बेदखल हुए, तो भारत में भी बांग्लादेश जैसा हाल हो जाएगा।

गजेंद्रगढ़ में तालुक अहिंदा यूनियन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान जीएस पाटिल ने ये विवादित बयान दिया। पाटिल ने धमकी देते हुए कहा, “वह दिन दूर नहीं जब लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर धावा बोलेंगे, ठीक वैसे ही जैसे बांग्लादेश में हुआ था।”

विधायक ने दावा किया कि मोदी सरकार राज्यपाल के माध्यम से कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। पाटिल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा पूँजीपतियों के हितों को आम जनता के हितों से अधिक प्राथमिकता दे रही है, जबकि सिद्धारमैया का प्रशासन जनता के हित में है। पाटिल ने कहा, “सिद्धारमैया ऐसी योजनाएँ लागू कर रहे हैं जो राज्य में सभी समुदायों के विकास का समर्थन करती हैं।”

जीएस पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने पहले बीजेपी और जेडीएस नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन महज एक कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर सिद्धारमैया के खिलाफ़ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश को ख़तरनाक रास्ते पर ले जाने और देश में राजनीतिक अशांति पैदा करने का आरोप लगाया।

इस बीच, बीजेपी नेताओं ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विजयपुरा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनागी ने उनके बयान की निंदा की और कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं में बुद्धि और समझ की कमी है। वो जनता को धोखा दे रहे हैं। सांसद ने कहा कि कॉन्ग्रेस प्रशासन राज्य के विकास में योगदान देने में विफल रहा है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कॉन्ग्रेस के एमएलसी इवान डिसूजा ने राज्यपाल थावर चंद गहलोत को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जाँच के लिए दिए गए अपने निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया तो उनका “बांग्लादेश जैसा हश्र” होगा। उन्होंने घोषणा की, “अगर राष्ट्रपति राज्यपाल को वापस भेजने में विफल रहते हैं, तो राज्यपाल के कार्यालय को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ेगा, जिन्हें रात के दौरान अचानक अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हमारी अगली लड़ाई ‘चलो राज्यपाल कार्यालय’ के नारे के साथ होगी।”

बता दें कि 17 अगस्त को राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन के आवंटन में अनियमितताओं के बारे में सिद्धारमैया के खिलाफ जाँच को अधिकृत मंजूरी दी। सिद्धारमैया ने राज्यपाल के आदेश को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती देकर जवाब दिया। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को 29 अगस्त की सुनवाई तक मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी आगे की कार्रवाई करने से रोकने का आदेश दिया है।

‘चिकन नेक बंद कर पूर्वोत्तर का रास्ता काटेंगी, आतंकियों को बसाएँगी’: BJP नेता ने कहा- सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती हैं ममता बनर्जी, राज्यपाल को लिखी चिट्ठी

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखकर शिकायत की है। वहीं, बंगाल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सौमित्र खान ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी 2026 तक सिलीगुड़ी में भारत के ‘चिकन नेक’ को बंद करके पूर्वोत्तर भारत के रास्ते को बंद कर देंगी।

अपने पत्र में मजूमदार ने लिखा है, “हाल ही में कोलकाता में टीएमसी की छात्र शाखा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिए गए बयानों को आपके ध्यान में लाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। उन्होंने यह कहते हुए सभा में शामिल लोगों को उकसाया कि ‘मैंने कभी बदला नहीं लिया, लेकिन अब जो करना है, करो’।”

मजूमदार ने अपने पत्र में आगे लिखा है, “राज्य के सर्वोच्च पद से बदला लेने की राजनीति का यह खुला समर्थन चिंताजनक है। इसके अलावा, उन्होंने भड़काऊ टिप्पणी भी की, जिसमें कहा गया कि ‘याद रखें, अगर बंगाल जलता है तो असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे’। यह संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की आवाज नहीं है, यह एक राष्ट्र विरोधी का बयान है।”

सुकांत मजूमदार ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ये बयान धमकी देने, लोगों को उकसाने, हिंसा भड़काने और लोगों के बीच घृणा का प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पत्र में उन्होंने राज्यपाल से उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बयान पर बीजेपी सांसद और पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष सौमित्र खान ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल में रहता हूँ और मुझे डर है कि अगर भारत सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है तो ममता बनर्जी साल 2026 तक सिलीगुड़ी में भारत का चिकन नेक कहलाने वाले हिस्से को बंद कर देंगी।”

सौमित्र खान ने आगे कहा, “ममता बनर्जी ऐसा करके पूर्वोत्तर भारत का रास्ता बंद कर देंगी… वह राजनीति के लिए कुछ भी कर सकती हैं… वह अपनी राजनीति के लिए वहाँ आतंकवादियों और अपराधियों को भी जगह दे सकती हैं। न्यायालय और भारत सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा भारत खतरे में पड़ जाएगा।”

पत्रकार का सवाल- आपकी रिहाई पर तेजस्वी यादव ने कहा है… अनंत सिंह का जवाब- खस्सी-पठरू दिन भर बकर-बकर करता रहता है

बिहार के बाहुबली अनंत सिंह ने राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर हमला बोला है। अनंत सिंह ने कहा है कि तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू यादव ने घोटाले किए हैं। उन्होंने कहा है कि जनता जानती है किसका बाप कितने दिन जेल में रह कर आया है। अनंत सिंह ने तेजस्वी यादव के हमलों को ‘खस्सी-पठरू की बकर-बकर’ बताया है।

तेजस्वी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में पैसे लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग होने के आरोपों के बाद यह हमला अनंत सिंह ने बोला। अनंत सिंह ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “तेजस्वी के बाप ने घोटाला किया है, तेजस्वी ने घोटाला किया है। जनता जानती है कि किसका बाप कितने दिन जेल में रह कर आया है। मात्र कहने से नहीं होगा, जनता जानती है।”

आगे उन्होंने कहा, “आगे हम चुनाव लड़ने वाले हैं। नीतीश कुमार के साथ मजबूती के साथ राजनीति होगी। नीतीश कुमार जी जब तक जीवित रहेंगे मुख्यमंत्री रहेंगे।” अनत सिंह ने कहा कि वह अब तेजस्वी का नाम सुनने को भी तैयार नहीं है और वह खस्सी-पठरु की तरह बक-बक करते हैं।

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव किसी लायक नहीं है जो उन पर हमला बोलें। अनत सिंह ने यह बयान हत्या के एक मामले में कोर्ट से बरी होने के बाद दिया। उन्होंने बताया कि उनका न्याय व्यवस्था में पूरा विश्वास है और उनको न्याय मिला है। उन्हें कोर्ट ने रामजन्म यादव हत्याकांड मामले में राहत दी है।

अनंत सिंह यह बयान तेजस्वी यादव के बीते दिनों में नीतीश सरकार पर किए गर तीखे हमलों के बाद दिया है। हाल ही में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि बिहार के भीतर IAS-IPS अफसरों की पोस्टिंग में भ्रष्टाचार होता है और इसीलिए अच्छे अफसर बिहार में नहीं रुकते। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए थे। अगले चुनावों में अनंत सिंह अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी मोकामा से विधायक हैं। इससे पहले 4 बार विधायक रहे हैं।

बनभूलपुरा हिंसा मामले में HC ने 50 को दी जमानत: नैनीताल पुलिस ने चार्जशीट नहीं फाइल करने के दावों को नकारा

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी को हुई हिंसा और आगजनी के मामले में हाई कोर्ट ने 29 अगस्त को 6 आरोपित महिलाओं समेत 50 लोगों की जमानत मंजूर कर ली है। इस मामले में पहले कहा गया था कि ये जमानत पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट जमा न करने के कारण हुई है। हालाँकि बाद में नैनीताल पुलिस ने इस बाबत स्पष्टीकरण दिया और इन खबरों को फेक न्यूज बताया।

नैनीताल पुलिस ने बताया, बनभूलपुरा हिंसा से संबंधित कुछ आरोपितों की जमानत होने पर कुछ सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में तथ्यहीन और भ्रामक खबरें फैलाई गई कि पुलिस ने समय से चार्जशीट नहीं फाइल की इसी वजह से आरोपितों की जमानत हुई। हालाँकि सच ये है कि यूएपीए के सेक्शन 43डी के अंतर्गत विवेचक को आवश्यकता अनुसार 90 दिन के पश्चात रिमांड अवधि बढ़ाने हेतु आवेदन करने का अधिकार है, उसी को मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा रिमांड की अवधि 90 दिन से 180 दिन की गई थीं। पुलिस ने 180 दिन से पूर्व चार्जशीट फाइल भी कर दी थी। अत: पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट फाइल न करने की खबरें असत्य और भ्रामक हैं।

बता दें कि पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हिंसा केस के एक आरोपित बनभूलपुरा निवासी गुलजार सहित 50 अन्य ने जमानत की याचिका लगाते हुए कोर्ट में कहा कि पुलिस की ओर से उनके विरुद्ध 90 दिन के भीतर न तो चार्जशीट दाखिल की गई है और न ही रिमांड बढ़ाने का कारण बताया गया और जमानत भी खारिज कर दी गई।

इसी के बाद मीडिया में ये चला कि पुलिस ने चार्जशीट फाइल नहीं की है। हालाँकि पुलिस की सफाई आने के बाद रिपोर्टें अब अपडेट कर दी गई हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया कि सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बता दिया था कि पुलिस के पास पर्याप्त आधार और कारण हैं कि रिमांड क्यों बढ़ाई गई।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष फरवरी माह में बनभूलपुरा में अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने को लेकर 8 फरवरी को काफी बवाल हुआ था। उपद्रवियों ने पुलिस , प्रशासन व नगर निगम की टीम पर पथराव कर दिया था और थाने को भी आग के हवाले कर दिया था। घटना में पाँच लोगों की मौत हो गई थी।

पुलिस ने जाँच के बाद मामले में 107 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें गुलजार, फुरकीन, मोहम्मद वसीम, शहराज हुसैन, सरीम मिकरानी, मो फैजान, नबी हसन, जीशान, मो फिरोज, मो उजैर, हाजरा बेगम, शहनाज, सोनी, शमशीर, अजीम, शाहबुद्दीन, मो आसिफ, आदिल खान, हुकुम रजा, शाहिल अंसारी, अरबाज, अहमद हसन, माजिद, जीशान, मुजम्मिल, रईस अहमद, गुलजार, मो शाद, मो फरीद, जावेद, शरीफ व मो ईश्तकार आदि का नाम शामिल था। वहीं केस को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 120 बी, 307, 332, 353, 427, 435, उत्तराखंड प्रिवेंशन आफ डैमेज पब्लिक प्रापर्टी, आर्म्स एक्ट आदि के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।