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आतंक का पैसा लाने के लिए हिंदू नाम से चाहिए था बैंक अकाउंट, मेडिकल तैयारी करने कोटा आई बसंती पटेल को अलीगढ़ लाकर बनाया मुस्लिम, शाहनवाज से करवाया निकाह

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (22 अगस्त, 2024) को देश के कई राज्यों में छापेमारी कर के 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया था। इन सभी पर आतंकी संगठन अलकायदा के लिए काम करने का आरोप है। अब पूछताछ में इस नेटवर्क के कई खतरनाक मंसूबों का खुलासा हुआ है। ये लोग यमन में अमेरिकी सेना द्वारा मार गिराए गए एक आतंकी के वीडियो अक्सर सुनते थे। इसी के साथ इन्होंने मुंबई से अहमदाबाद तक रेकी की थी और फर्जी नामों से बैंकों के खाते खोले थे। पकड़े गए आतंकियों का नेटवर्क पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भी पाया गया है।

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, दिल्ली के ISIS मॉड्यूल को रिज़वान अली और शाहनवाज आलम खड़ा कर रहे थे। इन दोनों की मुलाकात शाहीन बाग़ में हुई थी। ये दोनों मिल कर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में भी अपना नेटवर्क बना रहे थे। 12 वीं पास 29 वर्षीय रिज़वान अली बम बनाने में एक्सपर्ट है जबकि माइनिंग इंजीनियरिंग से B.Tech डिग्रीधारक 31 साल का शाहनवाज आलम IED का विशेषज्ञ है। रिज़वान दिल्ली के दरियागंज जबकि शाहनवाज आलम झारखंड के हजारीबाग का निवासी है।

नर्सिंग कर रही हिन्दू छात्रा को कबूल करवाया इस्लाम

बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले रिज़वान और शाहनवाज ने बसंती नाम की हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवाया था। वह नर्सिंग की छात्रा है। मूल रूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली बसंती 2016 में राजस्थान के कोटा से मेडिकल का कोर्स कर रही थी। यहाँ उसकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़की से हुई जिसका एडमिशन कुछ दिनों बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हो गया था। यहीं पर उसने बसंती को भी बुला लिया। साल 2017 में बसंती का भी एडमिशन AMU के नर्सिंग कोर्स में हो गया।

बताया जा रहा है कि यहीं पर बसंती ने इस्लाम कबूल कर लिया जिसे उसने सबसे छिपा कर रखा। 2018 में बसंती दिल्ली आई और यहाँ वो खुद को खुदीजा मरियम बताने लगी। दिल्ली में बसंती हैरिश फारुक नाम के युवक के पेइंग गेस्ट हाउस में रुकी। यहीं पर बसंती की जान पहचान रिज़वान से हुई। रिज़वान ने बसंती का परिचय शाहनवाज से करवाया। मार्च 2021 में शाहनवाज और बसंती उर्फ़ खुदीजा मरियम का निकाह हो गया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बसंती उर्फ़ मरियम से निकाह करने की वजह बैंक का वो खाता खोलना था जिसे ऑपरेट शाहनवाज करता था। कई बार पैसे जुटाने के लिए शाहनवाज और रिज़वान ने मिल कर लूटपाट भी की थी। मरियम को ले कर शाहनवाज कुछ दिनों तक दिल्ली के बटला हाउस इलाके में रहता था। रिज़वान और शाहनवाज को हैरिश फारूक ने PDF फ़ाइल में जिहाद के लिए भड़काने वाले साहित्य और बम बनाने की तकनीकी दी।

यमुना के किनारे की थी बम की टेस्टिंग

इसी तकनीकी से दोनों ने बम बनाया और दिल्ली में यमुना नदी के किनारे उसकी टेस्टिंग भी की। यह टेस्टिंग अगस्त 2021 में की गई थी जो फेल रही थी। इसके एक माह बाद रिज़वान और शाहनवाज उत्तराखंड के हल्द्वानी गए। यहाँ इन्होंने बम की दोबारा टेस्टिंग की जो सफल रही। यहाँ से दोनों दिल्ली लौट आए। बड़ा धमाका करने के लिए रिज़वान और शहनवाज ने राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर पर नूहं इलाके में एक और ब्लास्ट की टेस्टिंग की थी।

जब रिज़वान और शाहनवाज बम बनाने में माहिर हो गए तो उन्होंने ब्लास्ट के लिए टारगेट खोजने शुरू कर दिए। इसी खोजबीन में उन्होंने मुंबई के कई हिस्सों की रेकी की। यहाँ पर उन्होंने नरीमन पॉइंट के उन हिस्सों को चिह्नित किया था जहाँ यहूदी रहते थे। दोनों ने कोलाबा और नरीमन पॉइंट की रेकी के साथ वहाँ से फोटो और वीडियो भी लिए। यहीं पर बने नेवी ऑफिस के कई कैमरों को देख कर दोनों आरोपितों ने वहाँ धमाका करने का प्लान बदल दिया था।

लेना चाहते थे गोधरा का बदला

मुंबई के बाद जनवरी 2023 में दोनों शाहनवाज और रिज़वान ब्लास्ट का टारगेट खोजने गुजरात गए। यहाँ उन्होंने अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे कई शहरों की रेकी की। इस दौरान इन दोनों ने हिन्दू संगठनों के कार्यालयों सहित कोर्ट-कचहरी तक की विडियोग्राफी की। इन दोनों के मन में गोधरा का बदला लेने की भी सनक सवार थी।

दिल्ली का ISIS मॉड्यूल टेलीग्राम के जरिए अपने पाकिस्तानी आकाओं और अफगानिस्तान के कट्टरपंथियों से जुड़ा हुआ था। इन्हे पाकिस्तानी हैंडलर अबू सुलेमान ऑपरेट कर रहा था। रेकी किए गए फोटो और वीडियो रिज़वान और शाहनवाज अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेजा करते थे। आखिरकार इस नेटवर्क ने पुणे के एक सुनसान इलाके में अपना ठिकाना बनाया। यहीं पर ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी की गई थी। यहाँ बम के लिए मेहँदी जैसे कोडवर्ड भी रखे गए। फिलहाल दिल्ली पुलिस इस सभी आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट लगाने की तैयारी कर रही है।

बँटेंगे तो कटेंगे… बांग्लादेश का हाल बता CM योगी ने हिंदुओं को बताया सुरक्षित रहने का मंत्र: बेबाकी के मुरीद हुए नेटिजन्स, कहा- इतना खुलकर बोलने की हिम्मत किसी में नहीं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की जनता और हिंदुओं को राष्ट्र के लिए हमेशा एकजुट रहने का संदेश दिया है। उन्होंने आगरा के एक कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा- “बँटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे।”

सीएम योगी ने कहा, “राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। राष्ट्र तब सशक्त होगा जब हम सब एक होंगे। बंटेंगे तो कटेंगे। आप बांग्लादेश में देख रहे हैं, वो गलतियाँ यहाँ नहीं होनी चाहिए। बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा को पहुँचेंगे।”

उन्होंने आगरा में अपना यह बयान राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौड़ की भव्य प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में सम्मिलित होते समय दिया। सीएम योगी ने कहा कि जिस देश में दुर्गादास राठौर जैसे महान वीर पैदा होते हैं, उस देश का कोई विदेशी आक्रांता बाल भी बाँका नहीं कर सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे दुर्गादास राठौड़ ने मुगल शासक औरंगजेब को खदेड़ा था

सीएम योगी ने याद दिलाया कि क्रांतिकारियों का उद्घोष था- “तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें ना रहें।” भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “हमें विकसित भारत की कल्पना को स्वीकार करना है।”

उन्होंने अपने भाषण में मुगल बादशाह औरंगजेब को दुष्ट बताया। साथ ही बताया कि कैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी और उससे कहा था- “तुम चूहे की तरह ऐसे तड़पते रह जाओगे, लेकिन हिंदुस्तान पर तुझे कब्जा तो नहीं करने देंगे।”

बता दें कि अब सोशल मीडिया पर उनके इस बयान की खूब चर्चा है। लोग सीएम योगी को निर्भीक बेबाक, हिंदू हृदय सम्राट कह रहे हैं। लोग बोल रहे हैं कि सीएम योगी ने बिन खौफ बिन डरे एकदम सच्ची बात कह दी है।

जिस रास्ते पर चल श्रीकृष्ण ने ली शिक्षा, उसको विकसित करेगी राजस्थान-मध्य प्रदेश की BJP सरकार: जन्माष्टमी पर ‘कृष्ण गमन पथ’ की घोषणा, मंदिरों का भी होगा विकास

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऐलान किया है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकार मिलकर कृष्ण गमन पथ विकसित करेगी। इसी पथ से श्रीकृष्ण शिक्षा गृहण करने गए थे। CM शर्मा ने ऐलान किया है कि इस रास्ते पर पड़ने वाले तीर्थों को भी विकसित किया जाएगा।

जन्माष्टमी के मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर के पूंछरी गाँव पहुँचे हुए थे। यह गाँव गोवर्धन परिक्रमा मार्ग का हिस्सा है। यहाँ CM भजनलाल शर्मा ने अपनी पत्नी के साथ श्रीनाथजी मंदिर और मुकुट मुखारविंद में पूजा अर्चना की। उन्होंने यहाँ पूंछरी का लौठा में भी पूजा की।

CM भजनलाल शर्मा ने इसके बाद ऐलान किया कि उनकी सरकार मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर कृष्ण गमन पथ का निर्माण करेगी। मान्यता है कि भगवान कृष्ण मथुरा से निकल कर राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश के उज्जैन तक गए। इस दौरान वह मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई क्षेत्रों से गुजरे थे।

भगवान कृष्ण उज्जैन में संदीपन मुनि के आश्रम में शिक्षा लेने के लिए गए थे। वह जिस रास्ते से गए थे उस पर कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। इसी को विकसित करने को लेकर मध्य प्रदेश की मोहन यादव और राजस्थान की भजनलाल शर्मा की सरकार साथ आई है। इस पथ पर पड़ने वाले कोटा झालावाड और भरतपुर जैसे शहरों में धार्मिक स्थलों को विकसित किया जाएगा।

CM भजनलाल शर्मा ने बताया, “मैं जिन रास्ते से श्रीकृष्ण शिक्षा लेने गए थे और जिस रास्ते से उज्जैन पहुँचे थे, उस पर श्रीकृष्ण गमन पथ मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने मिल कर बनाने का निर्णय लिया है। जहाँ-जहाँ वो गए हैं, उन स्थानों को मानचित्र पर लेकर विकसित करने का काम करेंगे। यहाँ आसपास के मंदिर भी विकसित होंगे।”

इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने मिलकर राम वनगमन पथ बनाने की घोषणा की थी। यह पथ उन स्थानों को चिन्हित करके बनाया जा रहा है, जिससे प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्षमण वनवास के लिए गए थे। अभी इसके ऊपर काम चल रहा है। अब इसी की तर्ज पर श्रीकृष्ण गमन पथ बनाया जा रहा है।

रेडलाइट एरिया में घूमा, गर्लफ्रेंड से नंगी फोटो मँगवाई… महिला डॉक्टर की रेप-हत्या के बाद पुलिस वाले के घर जाकर सोया था कोलकाता का दरिंदा

कोलकाता में महिला डॉक्टर के रेप-मर्डर मामले में 7 लोगों का अब तक पॉलीग्रॉफ टेस्ट हो चुका है। इस लिस्ट में मुख्य आरोपित संजय रॉय का नाम भी शामिल है। बताया जा रहा है कि संजय रॉय ने पॉलीग्राफ टेस्ट में स्वीकार कर लिया है कि उसने वारदात को अंजाम दिया था।

आजतक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इंटेरोगेशन के बारे में पूरी जानकारी है। संजय ऱॉय ने बताया 8-9 अगस्त को वो अपने दोस्त सौरभ के साथ आरजी कर अस्पताल गया था जहाँ सौरभ का भाई भर्ती था। दोनों ने अस्पताल से निकलकर शराब पीने का प्लान बनाया, फिर कोलकाता के रेड लाइट एरिया सोनागाछी गए।

सोनागाछी में मन की पूरी न होने पर दोनों ने दक्षिण कोलकाता के रेडलाइट एरिया चेतला जाने का निर्णय लिया। सोनागाछी से चेतला के बीच 15 किलोमीटर का डिस्टेंस है। इस दौरान दोनों ने रास्ते में में एक लड़की को छेड़ते हैं। लड़की को छेड़ने की हरकत सीसीटीवी में भी कैद है। बाद में दोनों चेतला जाते हैं। वहाँ सौरभ पैसे देकर यौन संबंध बनाता हैं जबकि संजय अपनी गर्लफ्रेंड को फोन करके उससे न्यूड फोटो मंगाता है।

इसके बाद संजय सौरभ के साथ अस्पताल जाता है जहाँ से सौरभ तो घर निकल जाता है लेकिन संजय 3:30-3:40 के बीच चौथी मंजिल पर ट्रॉमा सेंटर के ऑपरेशन थिएटर में जात, है। फिर 4:03 पर उसे सेमिनार हॉल के पास कॉरिडोर में जाता है और वहाँ जहाँ पीड़िता सो रही होती है वो उसका एकदम से मुँह और गला दबा देता है।

पीड़िता खुद को बचाने के लिए छटपटाती है, बेहोश हो जाती है, उसका रेप किया जाता है और आखिर में संजय पीड़िता को मारकर वहाँ से फरार हो जाता है। इस दौरान उसके गले में टंगा ब्लूटूथ वहीं गिर जाता है और वो चुप चाप कोलकाता पुलिस की चौथी बटालियन में अनुपम दत्ता के घर जाता है और सो जाता है।

इसके बाद क्या होता है और बाकी आरोपितों की इस केस में संलिप्ता क्या है इस पर जाँच जारी है। 9 अगस्त को महिला ट्रेनी का शव सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था और संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था।

जिसे कहते हैं ‘बंगाल का कसाई’, उसका रिश्तेदार ‘ढाका ट्रिब्यून’ का संपादक: बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा पर डाला पर्दा, कहा- हिंदुओं पर नहीं हुआ अत्याचार

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता पलटने के बाद से हिन्दुओं पर अत्याचार लगातार जारी हैं। हिन्दुओं के घरों को लूटने, जलाने, मंदिरों पर हमला करने और हिन्दुओं को सरेआम मारने तक की घटनाएँ सामने आई हैं। खुद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस ने माना है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हुए हैं। लेकिन यह बात मानने को बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून का संपादक जाफर सोभन राजी नहीं है।

शुक्रवार (23 अगस्त, 2024) को ’10 चीजें जो भारत को बांग्लादेश के विषय में जाननी चाहिए’ शीर्षक से प्रकाशित हुए इस लेख में ज़फर सोभन ने हिन्दुओं पर बांग्लादेश में हुए हमलों का कारण फेल कानून व्यवस्था बताने का प्रयास किया।

लेख की शुरुआत में ही प्रोपेगेंडा पत्रकार ने दावा किया, “हिंदू खतरे में नहीं हैं। हाँ, शेख हसीना के जाने के बाद शुरुआती तौर पर अराजकता में, कानून व्यवस्था ना होने की छोटी अवधि थी, और हाँ, दुर्भाग्य से, जिन लोगों को निशाना बनाया गया उनमें से कुछ हिंदू समुदाय के थे।”

इसके बाद जाफर सोभन ने हिन्दुओं पर हमलों को भारतीय उपमहाद्वीप में होने वाले हमलों में शामिल करके इन घटनाओं का सामान्यीकरण करने का प्रयास किया। जफर सोभन ने लिखा, ”ऐसे समय में, निशाने पर होने वाले लोग सबसे कमजोर तबके के होते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि दक्षिण एशिया में, अल्पसंख्यक हमेशा असुरक्षित रहते हैं।”

बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचारों को छिपाने के लिए ढाका ट्रिब्यून के संपादक जाफर सोभन ने हिंसक मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा को राजनीतिक हिंसा बताकर लीपापोती कर दी। इसके बाद जफर सोभन यह सिद्ध करने लगा कि कैसे हिन्दुओं पर हुए हमले धार्मिक आधार पर नहीं हुए।

हिन्दुओं पर हमले को लेकर किया गुमराह

जफर ने हिंदुओं पर हमलों के पीछे धार्मिक कारणों को नकारते हुए कहा, “लेकिन यह धारणा कि हिंदू किसी तरह के नरसंहार का निशाना थे और उन्हें निशाना बनाना और उनसे हिंसा करना वास्तव में सत्ता परिवर्तन का एक अभिन्न अंग था, एक कल्पना मात्र है।” हालाँकि यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब हिन्दुओं पर हमलों को धार्मिक आधार ना बताकर उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध बताने का प्रयास किया गया हो। इससे पहले अल जजीरा, BBC और अमेरिकी अख़बार न्यू यॉर्क टाइम्स भी यही कर चुका है।

जफर सोभन ने अपने लेख में वही कहानी बताई कि मुस्लिम बांग्लादेश के भीतर मंदिरों की रक्षा कर रहे हैं। हालाँकि, यह बताने में जफर असफल रहे कि बांग्लादेश के मुस्लिम ऐसे दौर में किस्से आखिर अपने मंदिरों की सुरक्षा कर रहे थे। इसका जवाब इससे पहले अन्य प्रोपेगेंडाबाजों ने भी नहीं दिया था। जफर ने अपने प्रोपेगेंडा में तुरंत यह बताया कि मुस्लिम मंदिर बचा रहे हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि जिन हमलावरों से मंदिर को बचाया जा रहा है, वह भी इस्लामी कट्टरपंथी ही हैं।

बांग्लादेश से कर दी भारत की तुलना

जफर सोभन मात्र हिन्दुओं पर अत्याचारों को सही ठहराने तक ही नहीं रुके बल्कि उन्होंने बांग्लादेश को अल्पसंख्यकों के लिए भारत से बेहतर बताया। जफर ने दावा किया कि बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए भारत से अधिक सुरक्षित है। सोभन ने लिखा, “अल्पसंख्यक अधिकारों के मामले में बांग्लादेश में हालात बिल्कुल भी सही नहीं हैं, लेकिन तुलना के लिए एक देश का उदाहरण लें तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यक भारत की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित हैं।”

जफर सोभन हालाँकि यह नहीं बता पाए कि भारत में ‘अल्पसंख्यक’ मुस्लिम आबादी 1947 में 9.84% से बढ़कर 2011 में 14.09% हो गई, जबकि कथित ‘सुरक्षा की कमी’ के बावजूद बांग्लादेश में हिंदू आबादी में गंभीर गिरावट आई है। वह वर्तमान में मात्र 8% है।

जफर सोभन इस प्रोपेगेंडा को भारत में खाद पानी देने वाले भी कई लोग सामने आए। वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने जफर के लेख को अपनी वेबसाइट पर जगह दी। इसके अलावा पत्रकार शेखर गुप्ता के द प्रिंट ने भी इसे छापा और शेखर ने स्वयं इसे आगे बढ़ाया।

सुहरावर्दी के परिवार का है सोभन

ज़फ़र सोभन बांग्लादेशी एक्टिविस्ट और बैरिस्टर सलमा सोभन के बेटे हैं, जो ‘बंगाल के कसाई’ हुसैन शहीद सुहरावर्दी की रिश्तेदार हैं। 16 अगस्त, 1946 को कोलकाता में डायरेक्ट एक्शन डे हुआ था। यह मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिन्ना के इशारे

पर किया गया था। तब बंगाल के मुख्यमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के निर्देश पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की थी। ज़फ़र सोभन दिवंगत बांग्लादेशी कार्यकर्ता और बैरिस्टर सलमा सोभन के बेटे हैं, जो बदले में ‘बंगाल के कसाई’ हुसैन शहीद सुहरावर्दी से संबंधित हैं।

सुहरावर्दी ने मुस्लिम भीड़ के सामने भड़काऊ भाषण दिए और उन्हें हिंदुओं पर हमला करने के लिए प्रोत्साहित किया। उसने उनसे वादा किया कि पुलिस और सेना उनके हमलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। उसने पुलिस बल को लेकर भी हेरफेर किया और सुनिश्चित किया कि वे हिंदुओं की मदद के लिए की गई कॉल का जवाब न दें। मुस्लिम भीड़ को दी गई राजनीतिक और कानूनी छूट ने उन्हें व्यापक हत्याएँ, लूटपाट, बलात्कार करने और लाखों हिंदुओं को भगाने की खुली छूट दी।

सुहरावर्दी का पहला लक्ष्य हिंदुओं को डराकर उन्हें मजबूर करना था। सुहरावर्दी मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में बंगाल को शामिल करवाना चाहता था। डायरेक्ट एक्शन डे में हुई हिंसा से उत्साहित होकर, कट्टरपंथी मुसलमानों ने बाद में नोआखली दंगों जैसे हिंदू विरोधी नरसंहारों को अंजाम दिया।

‘बिहार की नहीं हैं, हिंदी नहीं बोल पाएँगी’: पटना की भरी सभा में जिस महिला को खड़ा करवा कराया परिचय, कौन हैं वो डॉक्टर जाह्नवी दास

बिहार में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ‘जन सुराज पार्टी’ का गठन किया है। पिछले कई महीनों से वो राज्य में महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ ‘जन सुराज’ अभियान चला रहे थे। अब उन्होंने ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी। बिहार में फ़िलहाल JDU, BJP, LJP(R) और HAM(S) की सरकार है, वहीं विपक्ष में RJD, कॉन्ग्रेस और वामदल हैं। अब प्रशांत किशोर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए आ गए हैं।

अब प्रशांत किशोर का एक वीडियो चर्चा का विषय बन रहा है। पटना में महिलाओं का एक सम्मेलन बुलाया गया था, ये वीडियो वहीं का है। इसी दौरान उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी जाह्नवी दास डॉक्टर हैं। उन्होंने बताया कि वो ये कार्य इसीलिए कर पा रही हैं क्योंकि उनकी पत्नी ने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ कर परिवार का जिम्मा उठाया है और कहा है कि आपको बिहार में जो करना है वो कीजिए। उन्होंने इस दौरान अपनी पत्नी को दर्शक दीर्घा में खड़ा कराया और फिर उनका वहाँ उपस्थित महिलाओं से परिचय कराया।

प्रशांत किशोर ने इस दौरान कहा कि वो बिहार की नहीं हैं, इसीलिए हिंदी में नहीं बोल पाएँगी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी असम की हैं। प्रशांत किशोर ने अपनी दशा दिखाते हुए कहा कि वो 2 वर्ष से अपना घर-परिवार छोड़ कर पैदल चल रहे हैं, वो ये इसीलिए कर पा रहे हैं क्योंकि आप जैसी कोई महिला डॉक्टरी छोड़ कर घर-परिवार का जिम्मा उठाई हुई है। उन्होंने कहा कि खाना बनाने से लेकर बच्चों की चिंता करने से लेकर सब उनकी पत्नी सँभालती हैं।

वहाँ मौजूद महिलाओं से प्रशांत किशोर ने कहा, “आप इतना कुछ सँभाल रही हैं तो हमारा भी फर्ज है कि आपके लिए कुछ करें। आपको आपका अधिकार मिलना चाहिए। योगदान के हिसाब से मिलना चाहिए, संख्या तो आपकी है ही। आपका आशीर्वाद है, सहयोग है, जिसकी वजह से पुरुष समाज के लोग कुछ कर पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि उनके पीछे कोई महिला खड़ी हैं, कोई भी पुरुष ‘जन सुराज’ में इसीलिए कार्य कर पा रहे हैं क्योंकि उसके पीछे भी कोई महिला हो।

घर में करवाई कुरान ख्वानी, भीड़ ने सोसाइटी के गार्ड को पीटा: लोग बोले – फ्लैट को ही बना दिया है मदरसा, इस्लामी वेशभूषा में नाबालिग बच्चे भी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक फ़्लैट के अंदर कुरानख्वानी किए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। आसपास के लोगों ने आरोप लगाया है कि फ़्लैट के अंदर मदरसा बना दिया गया है। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया वायरल हो रहा है जिसमें इस्लामी वेशभूषा में कई लोगों को एक जगह जमा देखा जा सकता है। एक सिक्योरिटी गार्ड की पिटाई भी की गई है। घटना रविवार (25 अगस्त, 2024) रात की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला गाजियाबाद जिले के थाना क्षेत्र क्रॉसिंग रिपब्लिक का है। यहाँ रविवार की रात में चित्रवान सोसाइटी के एक फ़्लैट में स्थानीय लोगों का जमावड़ा होने लगा। लोगों का आरोप था कि सोसाइटी के एक मकान में मौलवियों को बुला कर बिना सरकारी अनुमति के मज़हबी गतिविधियाँ करवाई जा रहीं हैं। कुछ ही देर में लोग उस फ़्लैट के अंदर पहुँच गए जहाँ इस प्रकार की सूचना थी। अंदर इस्लामी वेशभूषा में कई लोग मौजूद थे जिसमें कुछ नाबालिग बच्चे भी थे।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में फ़्लैट के अंदर मौजूद लोगों को चाय-नाश्ता लेते हुए देखा जा सकता है। वीडियो बना रहे व्यक्ति ने वहाँ चल रहे कार्यक्रम को बिना अनुमति के होने का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फ़्लैट को पूरी तरह से मदरसा बना दिया गया है। कुरानख्वानी के बाद जब वो लोग वापस लौट रहे थे तो उनको सोसाइटी के गार्ड ने रोक कर पूछताछ की। आरोप है कि इस बात पर वो आरोपित भड़क गए और उन्होंने गार्ड की पिटाई कर दी।

सिक्योरिटी गार्ड ने अपनी पिटाई करने वालों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। जिस महिला के फ़्लैट में यह जमावड़ा लगा था उसकी मालकिन का कहना है कि उनकी बेटी लम्बे समय से बीमार थी। इसी बीमारी से निजात पाने के लिए उन्होंने घर में कुरान ख्वानी का कार्यक्रम रखा था। फिलहाल ACP वेबसिटी पूनम मिश्रा के मुताबिक़ पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है। उन्होंने कहा कि जाँच में बाद आए निष्कर्ष से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कौन हैं ‘ब्राह्मण Genes’ लाने वाली महिला CEO, जातिवादी नैरेटिव का कैसे बनी जवाब: उस हैशटैग के बारे में जानिए सबकुछ जिससे दिलीप मंडल जैसे हो रहे नंगे

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘Brahmin Genes’ ट्रेंड हो रहा है। अर्थात, जो लोग ब्राह्मणों को गाली दे रहे हैं उन्हें प्रतिक्रिया के रूप में ब्राह्मण समाज के लोग भी अपनी शारीरिक बलिष्ठता, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक परिवेश का प्रदर्शन करते हुए तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। ब्राह्मण समाज के कई लोगों ने अपनी-अपनी तस्वीरें ‘ब्राह्मण ज्ञानतंतु’ वाले हैशटैग के साथ शेयर कर रहे हैं। हालाँकि, कई जातिवादी लोग इन्हें निशाना बनाते हुए कह रहे हैं कि ये श्रेष्ठता का बोध है।

ये सब शुरू हुआ बेंगलुरु में एक कंपनी चलाने वाली अनुराधा तिवारी के पोस्ट से, जिन्होंने अपने ट्राइसेप्स दिखाते हुए इस ‘Brahmin Genes’ लिखा। कुछ जातिवादी लगातार अत्यधिक चर्बी वाले लोगों की तस्वीरें शेयर कर ‘ब्राह्मण जीन्स’ लिख रहे थे, जिसके प्रतिक्रिया में उन्होंने ऐसा किया। वो JustBurstOut नामक कंटेंट राइटिंग एवं मार्केटिंग एजेंसी चलाती हैं। बाद में अनुराधा तिवारी ने कहा कि केवल ‘ब्राह्मण’ शब्द से ही खुद को ‘निम्न’ मानने वाले कुछ लोग चिढ़ गए, इससे पता चलता है कि असली जातिवादी कौन है। उन्होंने लिखा कि सामान्य वर्ग को न आरक्षण मिलता है, न मुफ्त की चीजें।

ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं, उसे ‘Bravo Pharma’ के CEO राकेश पांडेय ने शेयर किया। राकेश पांडेय ने भी इस हैशटैग में हिस्सा लेते हुए अपनी शारीरिक बलिष्ठता वाली तस्वीर शेयर की। इस पर जैकी यादव जैसे जातिवादी भड़क गए और कहने लगे कि सभी तो Genes से ही बने हैं। राकेश पांडेय की कंपनी करोड़ों डॉलर की है और दुबई से लेकर लंदन तक उनका कारोबार फैला हुआ है। उन्होंने दक्षिण भारत के एक दलित बहुल गाँव में दलितों के लिए मंदिर का निर्माण भी करवाया है।

इसी तरह अधिवक्ता और लीगल फर्म चलाने वाले राघव अवस्थी ने भी अपनी शर्टलेस तस्वीर शेयर कर के ‘Brahmin Genes’ वाला हैशटैग डाला। कई महिलाओं ने भी खुल कर इस ट्रेंड में हिस्सा लिया और अपनी तस्वीरें शेयर की।

वहीं कुछ लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों मंगल पांडेय, बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आज़ाद की तस्वीरें भी शेयर की और ‘Brahmin Genes’ वाला हैशटैग लगाया। आखिर इस ट्रेंड की ज़रूरत ही क्यों पड़ी? इसका जवाब विचारक दिव्य कुमार सोती ने दिया है। उन्होंने दिलीप मंडल एक एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका के पूर्व संपादक ने लिखा था कि ब्राह्मण बलात्कारी है, बच्चियों का यौन शोषण करता है, माँग कर संपत्ति बनाई है, अवैध कब्ज़ा कर के उसने मंदिर बनाए हैं।

दिव्य कुमार ने कहा कि हमें ‘Brahmin Genes’ ट्रेंड की लोकप्रियता बताती है कि ये इस तरह का नैरेटिव बनाए जाने का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक प्रतिरोध में भी बदल सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि ये कोई न कहे कि पहले चेतावनी नहीं दी गई थी।

कभी ‘श्रीकृष्ण’ गायब तो कभी ‘श्रीराम’… जन्माष्टमी पर भी छलका राहुल गाँधी का ‘सेकुलरिज्म’, जब हिंदुओं को दिखाना होता है नीचा तब हाथ में होती है देवी-देवताओं की तस्वीर

हिंदू धर्म में मूर्ति पूजन का महत्व सदियों से रहा है। सनातन मानने वाले लोग आमतौर पर पूजा पाठ के दौरान भगवान की मूर्ति के समक्ष ही आराधना करते हैं। आप भी यदि किसी देवी-देवता का नाम स्मरण करेंगे तो पहले उनकी एक मूरत आपके मन में बनेगी फिर आगे कुछ सोच पाएँगे। ऐसा सिर्फ होगा क्योंकि आपके मन में हिंदू धर्म के लिए आस्था है… जिनके मन में ये आस्था नहीं होती वो मूर्ति और मूर्ति पूजन दोनों से आपत्ति करते हैं। वो आपके त्योहार पर आपको शुभकामनाएँ तो देते हैं लेकिन भगवान के रूप को साझा करने से अक्सर परहेज करते हैं।

इस बात को अगर आपको अच्छे से समझना है तो लिबरलों द्वारा त्योहारों पर साझा होने वाले पोस्ट पर ध्यान देना चाहिए। ये लोग हर त्योहार पर हर समुदाय के लोगों को बधाई देते हैं लेकिन हिंदू धर्म के त्योहारों पर शुभकामना संदेश देते समय उनका अंदाज थोड़ा अलग होता है।

उदाहरण कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी का ले लीजिए। आज जन्माष्टमी है राहुल गाँधी ने एक पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट में उन्होंने एक बाँसुरी और मोरपंख के साथ जन्माष्टमी की बधाई दी और लिखा, “सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाए एवं बधाई। आशा करता हूँ कि हर्ष और उल्लास का यह पर्व आप सभी के जीवन को नई उमंग एवं उत्साह से भर दे।”

राहुल गाँधी के पोस्ट में जन्माष्टमी की बधाई तो दे दी गई, ये तो कह दिया गया कि ये पर्व हर्ष और उल्लास का है लेकिन इसे हिंदू मनाते क्यो हैं और किनके जन्म के कारण इसकी महत्वता है इस पर एक शब्द नहीं लिखा।

इसी तरह उन्होंने जो पोस्ट साझा की उसमें नीले बैकग्राउंड में बाँसुरी और मोरपंख दिखाया गया, लेकिन ग्राफिक्स में कहीं भी ये नहीं दिखाया गया कि ये बाँसुरी और मोरपंख आखिर किसके प्रतीक हैं। तस्वीर में देख सकते हैं कि कहीं भी श्रीकृष्ण का चित्र नहीं दिखाया गया है।

अब शायद आप सोचें कि इसमें क्या समस्या है हर किसी का तरीका होता है बधाई संदेश देने का, कुछ लोग प्रतीकों को आधार बनाकर भी देते हैं और कुछ बिन तस्वीर के भी और कुछ सिर्फ टेक्स्ट के जरिए… बिलकुल सही बात है क्रिएटिव होने के नाम पर कोई भी विधा अपनाई जा सकती है लेकिन भावनाएँ आपकी साफ होनी चाहिए। आज बहुत से लोग भगवान के प्रतीकों को आधार बनाकर फोटो शेयर करते हैं, लेकिन उनके पोस्ट से हमेशा ही भगवान की मूर्ति गायब नहीं होती, लेकिन राहुल गाँधी के केस में ऐसा नहीं है।

ये पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी के सोशल मीडिया पोस्टों से भगवानों की मूर्तियाँ ही गायब मिली हों। ये सिलसिला पुराना है। राहुल गाँधी ने महाशिवरात्रि के मौके पर कैलाश पर्वत की तस्वीर लगा सकते हैं लेकिन प्रतीक के तौर पर उनसे शिवलिंग की तस्वीर नहीं लग पाती। जगन्नाथ यात्रा के वक्त वो मंदिर के शिखर की तस्वीर लगाकर शुभकामनाएँ दे सकते हैं मगर न रथ की फोटो और न भगवान जगन्नाथ की फोटो लगा सकते हैं।

इसी तरह गणेश चतुर्थी पर राहुल गाँधी मोद, भोग, अगरबत्ती सबकी तस्वीरें लगा सकते हैं लेकिन उन्हें अपने पोस्ट में गणेश जी की फोटो लगाने में ससमस्या हो जाती है।

श्री राम नवमी पर टेक्स्ट के तौर पर राम नवमी लिखकर बधाई देना उन्हें आसान पड़ता है मगर श्रीराम का चित्र लगाना उनके लिए मुश्किल काम है। इसके अलावा दीवाली पर तो राहुल गाँधी बिन किसी तस्वीर के ही शुभकामना दे देते हैं।

ऊपर दिए उदाहरण चुनिंदा है और संभव है राहुल गाँधी की टाइमलाइन पर ऐसे और वाकये मिल जाएँ जहाँ भगवान के साकार रूप का चित्र लगाने से बचा गया हो। ऐसा करने के पीछे दूसरे समुदायों को अपनी ओर आकर्षित करने की मंशा, खुद को सेकुलर लिबरल दिखाने की उनकी कोशिश किसी से छिपी नहीं है। आम दिनों में राहुल गाँधी श्रीराम की तस्वीर लगाने से बचते हैं, अयोध्या राम मंदिर जाने से बचते हैं लेकिन एक हिंदू देवता को समर्पित त्योहार पर भी उनका तस्वीर न लगाने वाला रवैया स्वीकार्य कैसे हो सकता है। क्रिएटिविटी के नाम पर एक ही गलती बार-बार नहीं हो सकती और बार-बार सिर्फ भगवान की मूर्तियाँ गायब होना या उनके चिह्न से ही समझौता करना मात्र संयोग नहीं हो सकता। ये विशुद्ध रूप से केवल मूर्ति पूजा का विरोध मालूम पड़ता है।

यही राहुल गाँधी को जब हिंदू धर्म पर सवाल खड़ा करना होता है, हिंदुओं को हिंसक दिखाकर देवताओं का अपमान करना होता है तो वो फौरन संसद में भगवान की तस्वीरें दिखाने से परहेज नहीं करते क्योंकि वहाँ पर मंशा हिंदुओं को बदनाम करने की होती है लेकिन बात जैसे ही हिंदुओं की आस्था को सम्मान देने की आती है वो चालाकी से उन्हीं तस्वीरों को छिपा लेते हैं। राहुल गाँधी के ऐसे दोहरे रवैया के बारे में अब नेटिजन्स भी अच्छे से जान गए हैं। उन्होंने पुराने पोस्ट की तस्वीरें साझा कर सवाल उठाए हैं कि आखिर जब संसद में चिल्लाते हुए भगवान की तस्वीर दिखा दी जाती है तो सदन के बाहर हिंदू त्योहारों के वक्त क्यों भगवानों की तस्वीरें गायब हो जाती हैं।

अपडेट: कॉन्ग्रेस के कुछ समर्थकों ने राहुल गाँधी के कुछ पुराने ट्वीट और कुछ हालिया ट्वीट दिखाए हैं, जिनमें हिंदू देवताओं की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। बावजूद इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता है कि हिंदू त्योहारों पर राहुल गाँधी के सोशल मीडिया पोस्ट से बार-बार हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें गायब रही हैं। यही वजह कि लोगों ने उनके सोशल मीडिया पोस्टिंग पैटर्न पर सवाल उठाया है।

हाइवे ब्लॉक कर बस रोकी, यात्रियों को नीचे उतार चेक की ID, 23 लोगों की गोली मारकर हत्या: अपनी ही लगाई आग से बलूचिस्तान में जला पाकिस्तान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक हाइवे पर कई गाड़ियों पर हमला किया। हमलावरों ने उन लोगों को मौत के घात उतार दिया जो पंजाब प्रांत से तालुक रखते थे। बलूचिस्तान में हुए इस हमले में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई है। हमलवारों ने लोगों को मारने के अलावा लगभग एक दर्जन गाड़ियों को आग भी लगा दी और फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला बलूचिस्तान के मूसाखेल जिले में सोमवार (26 अगस्त, 2024) को हुआ। यहाँ एक अंतरराज्यीय हाइवे को हमलावरों ने बंद कर दिया। इसके बाद यहाँ आने वाली गाड़ियों से लोगों को उतार कर उनकी पहचान पूछी। जो लोग पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहने वाले थे, उनको अलग कर लिया गया और अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई गईं।

इसके बाद हमलावरों ने यहाँ से जाते समय 10 गाड़ियों में आग लगा दी। हमलावर किस समूह से थे यह अभी पता नहीं चल पाया है। बलूचिस्तान प्रशासन ने हमले की सूचना के बाद यहाँ से मृतकों के शवों को हटवाया और घायलों को अस्पताल पहुँचाया है।

बताया गया है कि इस हमले में मरने वाले 20 लोग पाकिस्तानी पंजाब प्रांत से हैं जबकि 3 लोग बलूचिस्तान के रहने वाले थे। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाल लिया है, वह हमले की जाँच कर रहे हैं। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

माना जा रहा है कि हमला किसी बलूच विद्रोही संगठन ने किया है। बलूच विद्रोही लगातार कहते आए हैं कि उनके संसाधनों पर पंजाब के लोग कब्जा करते हैं। वह बलूचिस्तान में सेना और पाकिस्तान की सरकार के दमन से नाराज हैं। बलूच विद्रोही इससे पहले भी चीनी नागरिकों और पंजाबियों पर हमला कर चुके हैं। उनकी सेना से लगातार लड़ाई चल रही है।

मूसाखेल में हुए हमले के अलावा भी पाकिस्तान में कई जगह हमले एक साथ हुए हैं। रविवार से सोमवार के बीच कलात, मुस्तांग समेत कई जगहों पाक फ़ौज निशाने पर ली गई है। मूसाखेल में हुए इस हमले की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने निंदा की और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।