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रेलवे ट्रैक पर कहीं पत्थर, कहीं सरिया… संयोग नहीं है ये: पाकिस्तान में बैठे आतंकी का वीडियो- छेड़ो ‘फिदायीन जंग’, ट्रेन-पुलिस-हिंदू नेताओं को करो टारगेट

हाल में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई है जिसके बाद ट्रेनों को बेपटरी करने की साजिश रचे जाने का अंदेशा जताया जा रहा है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी फरहतुल्लाह गोरी के एक वीडियो से यह अंदेशा और गहरा गया है। इसमें उसने भारतीय रेल, पाइपलाइन, पुलिस और हिंदू नेताओं को निशाना बनाते हुए ‘फिदायीन जंग’ छेड़ने के लिए उकसाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने यह काम स्लीपर सेल से करने को कहा है। आतंकी गोरी ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) आतंक की कमर तोड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए उसने देश भर में इन्फ्रा पर हमला करने को कहा है। इस संबंध में एक वीडियो सुरक्षा एजेंसियों को मिला है।

सुरक्षा एजेंसियों को मिले वीडियो में गोरी बता रहा है कि कैसे ट्रेनों में अलग-अलग तरीके से धमाके किए जा सकते हैं। वह इसके लिए प्रेशर कुकर जैसी चीजों से बम बनाने का भी आईडिया दे रहा है। गोरी अभी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की शह पर वहीं रह रहा है और भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

गोरी का कहना है कि भारत में NIA और ED लगातार उनकी कमर आर्थिक रूप से तोड़ रही है। NIA और ED आतंकियों और उनके मददगारों की सम्पत्ति जब्त कर रही है, इस कारण गोरी काफी बौखलाया हुआ है। उसने कहा है कि इसका जवाब भारत में दिया जाएगा। उसने इसे फिदायीन जंग का नाम दिया है।

ट्रेनों को निशाने पर लेने की बात के बाद भारतीय एजेंसियाँ हरकत में आ गई हैं और सतर्क हो चुकी हैं। बीते कुछ समय में रेल दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी भी देखी गई है, कई जगह रेल पटरियों पर अवरोध रख कर रेल दुर्घटना करवाने का प्रयास किया गया है। राजस्थान से बीते सप्ताह एक ऐसी ही घटना सामने आई थी।

राजस्थान के पाली में जोधपुर से अहमदाबाद जाने वाली वन्दे भारत ट्रेन के आने से पहले 22 अगस्त को सीमेंट का बड़ा ब्लॉक रखा गया था वन्दे भारत ट्रेन इस ब्लॉक से टकरा भी गई। इसके बाद लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए और दुर्घटना नहीं हुई। इसके अगले दिन इससे बड़े 2 ब्लॉक रख दिए गए ताकि ट्रेन पलट जाए।

हालाँकि, इस दिन रेल कर्मचारियों ने इसे पहले देख लिया और पटरी पर से हटा दिया। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अहसान नाम के एक युवक पटरी पर एक मोटरसाइकिल का एक एलाय रिम रख कर उसे पलटने की साजिश रची। अहसान के रखे पहिए से एक मालगाड़ी टकरा भी गई थी। हालाँकि, इमरजेंसी ब्रेक लगने से हादसा टल गया।

फरहतुल्लाह गोरी ने ट्रेन और लॉजिस्टिक चेन को निशाना बनाने के अलावा आतंकियों से कहा है कि वह हिन्दू नेताओं और पुलिस वालों की भी हत्या करें। उसने कहा है कि इन नेताओं और पुलिस वहाँ निशाना बनाए जहाँ वह कमजोर हैं। इसके लिए उसने नई तरकीब अपनाने की बात की है।

भारत में ट्रेन हादसों करने के लिए ऐलान करने वाला फरहतुल्लाह गोरी हाल ही में हुए बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा वह गुजरात के अक्षरधाम मंदिर हमले में भी जुड़ा हुआ था। उसका मुख्य काम भारत से मुस्लिम युवाओं को भर्ती करके उन्हें आतंकी बनाना था। वह कई आतंकी मॉड्यूल का हैंडलर है।

राह चलती महिलाओं से छेड़खानी करता था छोटी मस्जिद का आरिफ लंगड़ा, हिंदू युवती के साथ अभद्रता के बाद घर पर पथराव: रायपुर के कोटा में बवाल

छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मुस्लिम युवक ने एक हिन्दू युवती के साथ छेड़छाड़ की। युवती ने छेड़छाड़ के बाद जब विरोध किया तो युवक ने उसके साथ अभद्रता भी की। इसके बाद आसपास के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने मुस्लिम युवक के विरोध में हंगामा किया। उन्होंने उसकी गिरफ्तारी की माँग की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रायपुर के सरस्वती नगर थाना क्षेत्र में कोटा इलाके में यह घटना हुई। यहाँ छोटी मस्जिद के पास रहने वाले एक युवक आरिफ लंगडा ने रविवार (25 अगस्त, 2024) को एक युवती के साथ छेड़छाड़ की। युवती ने इसका प्रतिरोध किया तो आरिफ अभद्रता पर उतर आया।

युवती ने इसके बाद शोर मचाया तो आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। आरिफ पहले भी महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ करता रहा है। पीड़ित युवती के परिजनों ने आरिफ के घर में इस बात की शिकायत की तो उनकी सुनने के बजाय उन्होंने हमला कर दिया।

आरिफ के परिजनों ने छेड़छाड़ का विरोध करने वालों पर लाठी डंडों से हमला किया। वह शिकायत करने वाले लोगों के विरुद्ध हिंसक हो गए। इसके बाद दूसरा पक्ष भी सामने आ गया। आरिफ के विरुद्ध प्रदर्शन इसके बाद लोगों ने उसके घर का घेराव कर प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने आरिफ के परिजनों की हिंसा का जवाब भी दिया।

आरिफ का विरोध करने वाले इस मामले में तुरंत पुलिस एक्शन की माँग कर रहे थे। उन्होंने सरस्वती नगर पुलिस थाने पर जाकर भी प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि आरिफ को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद पुलिस ने यहाँ मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाला और लोगों को शांत किया।

पुलिस ने आरोपित आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि पहले मामला शांत हो गया था लेकिन बाद में बवाल चालू हो गया। सरस्वती नगर पुलिस थाने के प्रभारी ने बताया है कि अब कोटा इलाके में शान्ति है और लोगों को समझा बुझा दिया गया है। आरोपित पर FIR दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया है।

‘न भिंडरावाले और न किसी सिख ने कभी माँगा खालिस्तान’: कंगना रनौत को SGPC का नोटिस- सीन हटाओ, माफी माँगो; ‘इमरजेंसी’ के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की ‘इमरजेंसी’ फिल्म रिलीज होने से पहले बवाल मचा हुआ है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने फिल्म में सिखों के चरित्र और इतिहास को गलत तरह पेश करने का आरोप लगाते हुए मेकर्स को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि कभी किसी सिख ने खालिस्तान नहीं माँगा चाहे वो भिंडरावाले ही क्यों न हो।

जानकारी के मुताबिक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा भेजे गए नोटिस में गए कहा गया कि जरनैल सिंह भिंडरावाला और सिख समुदाय के किसी अन्य व्यक्ति ने कभी भी खालिस्तान की माँग नहीं की। फिल्म में ऐसे सीन दिखाए गए हैं जिनमें सिख पोशाक में कुछ किरदारों को असॉल्ट राइफल में से लोगों पर गोली चलाते दिखाया गया है।

एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार एडवोकेट अमबीर सिंह सियाली द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया कि कहीं कोई ऐसा सबूत या रिकॉर्ड नहीं है जो साबित करे कि भिंडरावाले ने ऐसे शब्द कहे। नोटिस में फिल्म निर्माताओं से ये भी कहा गया है कि वो सिख विरोधी भावना वाले दृश्यों को फिल्म से हटाएँ और सिख समुदाय से माफी माँगें।

इमरजेंसी फिल्म के रिलीज से पहले एसजीपीसी के नोटिस के अलावा कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। ये याटिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर हुई है वो भी इस माँग के साथ कि इमरजेंसी फिल्म को बैन किया जाना चाहिए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका को दो अमृतधारी सिखों ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि इस फिल्म में ऐतिहासिक पहलुओं से छेड़छाड़ हुई है। ये सिख समुदाय और हिंदू समुदाय के लोगों के बीच घृणा फैलाएगी। इसके अलावा इस याचिका में कहा गया कि फिल्म में सिख समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है, इसलिए न सिर्फ इस फिल्म के रिलीज पर रोक लगाई जाए बल्कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को पास कर जो सर्टिफिकेट जारी किया है उसे भी रद्द किया जाए।

याचिका में उसी सीन पर आपत्ति जताई गई है जिसमें कुछ लोग सिख पोशाक में फायरिंग करते दिख रहे हैं। कोर्ट में इस याचिका की पैरवी अमृतधारी सिखों की ओर से ईमान सिंह खारा और दीपेंद्र सिंह वर्क करेंगे।

बता दें कि इमरजेंसी फिल्म की फिलहाल रिलीज डेट 6 सितंबर 2024 निर्धारित हुई है। लेकिन, इसका ट्रेलर आने के बाद से ही इस फिल्म को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बीच कंगना रनौत को जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। दो दिन रहले विक्की थॉमस सिंह (एक ईसाई से निहंग) बने व्यक्ति ने वीडियो जारी कर कहा था कि अगर खालिस्तानी नायक जरनैल सिंह भिंडरावाले को आतंकवादी के रूप में दर्शाया गया तो याद रखें कि इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था? सतवंत सिंह और बेअंत सिंह कौन थे?

बलूचिस्तान में तेज़ हुई आज़ादी की ज़ंग, 102 पाकिस्तानी फौजियों को उतारा मौत के घाट: पंजाब प्रांत वालों को खोज-खोज कर उड़ा रहे, समझिए इस विद्रोह का इतिहास

बलूचिस्तान के विद्रोही संगठनों में से एक बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर लड़ाई लड़ते हुए पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ‘ऑपरेशन हेरोफ’ और ‘ऑपरेशन डार्क वाइंडी स्टॉर्म’ चलाया, जिसमें 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, तो पाकिस्तान के आर्मी बेस के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया। यही नहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी ने हाईवे ब्लॉक कर दिए और बसों या अन्य सार्वजनिक वाहनों की तलाशी लेकर लोगों के पहचान पत्र देखे और पंजाबी मूल के लोगों को अलग कर उन्हें गोलियों से भून डाला। करीब 2 दर्जन पंजाबियों को बलूचियों ने अपनी गोली का शिकार बना डाला।

पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है बलूचिस्तान। क्षेत्रफल 44 प्रतिशत मगर आबादी महज 5 से 6 प्रतिशत। बलूचिस्तान से हजारों लोग गायब हैं। ये वो लोग हैं, जो बलोच होते हुए बलूचियों के बारे में और बलूचिस्तान की आजादी के बारे में सोचते थे। अब बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे के आठवें दशक में एक बार फिर से बलूचियों ने सर उठाया है। बलूचिस्तान के विद्रोहियों ने पाकिस्तान से खुलकर टक्कर लेना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सेना बलूचियों पर जितना अत्याचार बढ़ा रही है, बलूच भी उतनी ही ताकत से अब जवाब दे रहे हैं।

आजादी से जुड़ी है बलूचिस्तान के विद्रोह की कहानी

बलूचिस्तान में ये कत्लेआम आज का नहीं है। इसकी जड़ें जुड़ी हैं भारत और पाकिस्तान की आजादी से। बलूचिस्तान के लोगों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के व़क्त उन्हें ज़बरदस्ती पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया, जबकि वो ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क़ के तौर पर देखना चाहते थे। बलूचिस्तान में कलात के शाह ने तो अंग्रेजों को ये पेशकश भी की थी कि वो आजादी चाहते हैं, भले ही विदेशी मामलों की जिम्मेदारी ब्रिटेन अपने पास रखे। वो किसी भी हाल में पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।

दरअसल, भारत की आजादी के समय बलूचिस्तान में चीफ कमिश्नर के नेतृत्व में एक राज्य हुआ करता था, जिसमें 4 मुख्य प्रिंसली स्टेट्स भी थे। इनके नाम कलात, मकरान, लाल बेला और खारन थे। इनका नेतृत्व कलात के शाह कह रहे थे। इन्होंने अपने लिए पहले भारत में आने की कोशिश की, लेकिन भारत के मना करने के बाद और पाकिस्तान के दबाव के आगे कलात के खान- अहमद यार खान (आखिरी) को झुकना पड़ा और उन्होंने 27 मार्च 1948 को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए सहमति दे दी।

हालाँकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने अहमद यार खान के फैसले को मानने से इनकार कर दिया और जुलाई 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। ये लड़ाई 1950 तक चली। वहीं, अहमद यार खान को कलात के खान की उपाधि 1955 तक चलती रही। इसके बाद बलूचिस्तान का पाकिस्तान में पूरी तरह से विलय हो गया। ये लड़ाई रह-रह कर पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बनती रही। 1948 के बाद 1958-1959, 1962-62, 1973-77 तक पाकिस्तान को लगातार इनसे जूझता रहा।

इस समय बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा सक्रिय जो संगठन है, उसका नाम है बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी। माना जाता है कि ये संगठन 1970 के दशक से सक्रिय है। जब जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार थी, तब बलूचों ने एक बार फिर से हथियार हुआ, लेकिन जियाउल हक ने तानाशाही करते हुए जब भुट्टो का तख्तापलट किया, तब जियाउल हक ने बलूच विद्रोहियों से भी बातचीत की। इसके बाद सशस्त्र लड़ाई तो खत्म हो गई, लेकिन जो वादे किए गए, वो कभी पूरे नहीं हुए। हालाँकि लड़ाई खत्म होने की वजह से बलूच लिबरेशन आर्मी भी लगभग खत्म हो गई। इसके बाद 1999 के आसपास जब जनरल मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया, तो एक बार फिर से बलूचियों की हिम्मत जागी और तब से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी लगातार सशस्त्र लड़ाई लड़ रही है।

21वीं सदी में बलूच राष्ट्रवाद का नया उभार

साल 2003 में परवेज मुशर्रफ ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को तबाह करने के लिए पूरा जोर लगाना शुरू किया। इसके साथ ही बलूचियों ने भी पूरी ताकत से जवाब देना शुरू कर दिया। मशहूर बलूच नेता नवाब अकबर खान बुगती को परवेज मुशर्रफ ने मरवा दिया। लेकिन बलूचियों का संघर्ष थमने की जगह बढ़ता चला गया। नवाब अकबर खान बुगती के बाद बीएलए का नेतृत्व संभाला नवाबज़ादा बालाच मिरी ने, लेकिन साल 2007 में उसे भी पाकिस्तानी सेना ने मार डाला।

माना जाता है कि गैर बलूचियों के खिलाफ साल 2009 से गुस्सा बाहर निकलना शुरू हुआ और बीएलए ने पंजाबियों को निशाना बनाना शुरू किया। साल 2009 में करीब 500 पंजाबी बलूचिस्तान के इलाकों में मारे गए, इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने सिस्टमैटिक तरीके बलूचियों को गायब करना शुरू किया। माना जाता है कि 5000 से अधिक राष्ट्रवादी बलूचियों को पाकिस्तानी सेना ने या तो मार डाला, ये उन्हें किसी ऐसी जगह कैद कर रखा है, जिनका किसी को कुछ अता-पता ही नहीं। इस साल भी पाकिस्तान में इस्लामाबाद तक बलूचियों ने प्रदर्शन किया था, लेकिन पाकिस्तानी सरकार के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी।

एक तरफ बलूच पूरी दुनिया में पाकिस्तान की फौज की ज्यादतियों का मुद्दा उठा रहे हैं और शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीएलए जैसे संगठन अब हथियारों के दम पर पाकिस्तान की सरकार की नाक में दम कर दिया है। बलूचिस्तान के दोहन में जुटे पाकिस्तान ने ग्वादर में चीनी निवेश लाने में जितना जोर लगाया, बीएलए अब उतनी ही ताकत से चीनियों और पाकिस्तानियों को निशाना बना रहा है। जिसकी वजह से मौजूदा समय में ग्वादर को किलेबंदी की शक्ल में कैद किया जा चुका है और वहाँ से एक आवाज भी बाहर नहीं आ पा रही है।

एनजीओ वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स की रिपोर्ट कहती है कि 2001 और 2017 के बीच 16 साल में 5,228 बलूच लोग लापता हुए और इनका कोई पता नहीं चल सका। पाक सेना ने क्रूरता दिखाई है तो बलूच समूहों ने भी हिंसा का सहारा लिया है।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के कुछ बड़े हमले

बीएलए ने जुलाई, 2000 को क्वेटा में बम धमाका किया, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई तो 25 लोग घायल हुए थे। ये इस सदी की शुरुआत में बीएलए का सबसे बड़ा हमला था। साल 2004 में बीएलए ने पहली बार चीनी श्रमिकों पर हमले किए थे। बीएलए शुरू से ही बलूचिस्तान के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ रहा है, इसलिए उसके निशाने पर पाकिस्तानी पंजाब के साथ ही चीनी नागरिक भी रहे हैं।

इसके बाद बलूचियों का बड़ा हमला जुलाई 2009 में सामने आया, जब बीएलए के लड़ाकों ने 19 पाकिस्तान पुलिसकर्मियों को किडनैप कर लिया। इस दौरान उन्होंने 1 पुलिस अधिकारी को मार दिया, तो 16 घायल हो गए। तीन सप्ताह तक इन पुलिसकर्मियों को बंधक बनाए रखने के बाद बीएलए ने 1 पुलिसकर्मी को छोड़कर बाकी 18 को मार डाला।

साल 2011 के नवंबर महीने में बीएलए के लड़ाकों ने उत्तरी मुसाखेल में कोयला खदान में तैनात पाकिस्तान के सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया, जिसमें 14 लोगों की मौत हुई, तो 10 घायल हो गए। दिसंबर 2011 में बीएलए के लड़ाकों ने पूर्व मंत्री मीर नसीर मेंगल के घर के बाहर कार धमाका किया था, जिसमें 13 लोग मारे गए थे। जून 2012 में बीएलए ने पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना के घर पर ही रॉकेट से हमला कर दिया था और जिन्ना के घर पर लगे पाकिस्तानी झंडे को उखाड़ फेंकने के साथ ही बीएलए का झंडा लहरा दिया था।

बीएलए से जुड़े मजीद ब्रिगेड ने कराची से लेकर ग्वादर तक चीनी नागरिकों को निशाना बनाया, जिसमें सबसे बड़ा हमला नवंबर 2018 का है, जिसमें कराची में स्थित चीनी वाणिज्य दूतावाल पर हुआ हमला भी शामिल है। इसमें चीनियों समेत 7 लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का ताजा बड़ा हमला

ताजे मामले में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने अपने ऑपरेशन हेरोफ के पहला फेज पूरा होने का ऐलान किया है। बीएलए ने सैन्य शिविर और सैन्य चौकियों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में 102 पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की जिम्मेदारी ली है। बीएलए ने ऑपरेशन हेरोफ के सफल समापन की घोषणा करते हुए इसे बलूचिस्तान पर नियंत्रण हासिल करने के व्यापक अभियान का हिस्सा कहा है।

बीएलए के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के शुरू होने के छह घंटों के अंदर 102 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस ऑपरेशन में बीएलए के मजीद ब्रिगेड के आत्मघाती हमलावर भी शामिल हैं। इसमें पाकिस्तानी सेना के बेला कैंप के बड़े हिस्से पर कब्जा करना और सैन्य काफिलों पर घात लगाकर हमला करना शामिल है।

बलूचिस्तान में सैन्य चौकियों को ही नहीं सोमवार (26 अगस्त 2024) को मुसाखाइल जिले में पंजाब के भी 23 लोगों की उनकी आईडी देखे के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई। बलूचिस्तान में पंजाबियों के खिलाफ नफरत इस तरह का यह पहला हमला नहीं है। इसी साल अप्रैल में बलूचिस्तान के नोशकी में नौ पंजाबी यात्रियों की आईडी की जाँच के बाद गोली मारी गई थी। पिछले साल अक्टूबर में भी केच जिले में छह पंजाबी मजदूरों की मार डाला गया था। 

इस बीच, बीएलए के लड़ाकों ने बलूचिस्तान में सभी हाइवे पर अपने बैरियर-नाकेबंदी लगा दी है। बीएलए के कब्जे में आए हाईवे में ग्वादर-जिवानी हाईवे, होटाबाद इलाके के मंड-तुर्बत हाईवे, तेगरान में अब्दोई हाईवे, तुर्बत-हेरोनक सीपीईसी हाईवे, क्वेटा-ताफ्तान हाईवे, नोश्की-खरान हाईवे, मस्तुंग-खड़कुचा हाईवे, कलात-कराची हाईवे, बोलन और कोह-ए-सुलेमान के मेन हाईवे, बल्गटर-पंजगुर और सिबी-मिथ्री हाईवे शामिल हैं। इस काम बलूच लिबरेशन आर्मी के फतह स्क्वाड और स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशन स्क्वाड शामिल हैं।

बीएलए ने इस दौरान 22 से अधिक सैन्य, पुलिस और लेवी वसूली कर्मियों को पकड़ने की भी सूचना दी है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने चीन और पाकिस्तान को खुलकर कहा है कि वो अपनी सलामत चाहते हैं, तो बलूचिस्तान से दूर ही रहें।

बीएलए की मजीद ब्रिगेड से काँपता है पाकिस्तान

बीएलए में सबसे खतरनाक ब्रिगेड है मजीद ब्रिगेड, जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ फिदायीन हमलों से लेकर छोटे-छोटे समूहों में हमला करता है। बीएलए के अधिकतर हमलावर मजीद ब्रिगेड से ही होते हैं। मजीद ब्रिगेड पर पाकिस्तान सरकार ने बैन लगाया हुआ है, जबकि बीएलए को पाकिस्तान के साथ ही यूके और अमेरिका ने भी आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

एक नजर में बलूचिस्तान

पाकिस्तान में क्षेत्रफल के हिसाब से बलूचिस्तान सबसे बड़ा प्रांत है। इसकी सीमाएँ ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से मिलती हैं। बलूचिस्तान का पूरा इलाक़ा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत, ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरूज और हेलमंड समेत कुछ इलाकों से मिलकर बना है। पाकिस्तान के हिस्से में पड़ने वाला बलूचिस्तान प्रांत प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहाँ गैस, कोयला और तांबे के बड़े भंडार हैं। लेकिन इसके बावजूद ये पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है, क्योंकि इसका दोहन पाकिस्तान की पंजाबी प्रभुत्व वाली सरकार करती है।

ईरान के साथ ही बलूचियों की जंग

एक समय में बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ाई पाकिस्तान के साथ ही ईरान के साथ भी चल रही थी। बलूचिस्तान में दूसरा महत्वपूर्ण संगठन बीएलएफ-बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट था, जो ईरानी कब्जे वाले बलूचिस्तान की आजादी के साथ ही एकीकृत बलूचिस्तान के लिए लड़ रही थी। हालाँकि 1980 के दशक में 5 साल तक चली बातचीत के बाद संघर्ष विराम हुआ, लेकिन बीते कुछ सालों में बलूच विद्रोही फिर से ईरान में भी सिर उठा रहे हैं। कुछ समय पहले ईरान का पाकिस्तान में घुसकर और पाकिस्तान सेना के ईरान में घुसकर हमलों की बात सामने आई थी, वो इन्हीं बलूच राष्ट्रवादी लड़ाकों की वजह से था।

बीएलएफ की स्थापना 1964 में सीरिया में हुई थी। यह ईरानी सरकार के खिलाफ बलूच समूहों का विद्रोह था। लेकिन साल 2013 से बीएलएफ ने ईरान के साथ ही पाकिस्तान की तरफ भी रूख कर लिया। बीते एक दशक में पाकिस्तान और ईरान की नाक में दम करने वाले संगठन यही बीएलए और बीएलएफ सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। खास बात ये है कि दोनों के ही लड़ाके अफगानिस्तान में आने वाले बलूच इलाकों को बेस बनाए रखा था, लेकिन अब बीएलए पूरी तरह से पाकिस्तान में ही सक्रिय है और एक ठीक-ठाक हिस्से में बीते कुछ माह से स्वतंत्र होकर काम कर रहा है, जहाँ पाकिस्तानी सेना भी नहीं पहुँच पा रही है।

ICC अध्यक्ष बने जय शाह, बोले – क्रिकेट की वैश्विक लोकप्रियता और पहुँच को विस्तार देने के लिए करूँगा कार्य: ‘एशियन क्रिकेट काउंसिल’ के भी हैं अध्यक्ष

जय शाह को ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। उनकी उम्र मात्र 35 वर्ष है, ऐसे में वो इस पद पर पहुँचने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। जय शाह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे हैं। अब तक वो BCCI (बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया) के सेक्रेटरी थे। वो अक्टूबर 2019, यानी पिछले 5 वर्षों से इस पद पर थे। साथ ही वो जनवरी 2021 से ही ‘एशियन क्रिकेट काउंसिल’ (ACC) के अध्यक्ष भी हैं।

जय शाह पहले अहमदाबाद स्थित ‘सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ क्रिकेट’ के सदस्य बने। सितंबर 2013 में उन्हें ‘गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन’ (GCA) का जॉइंट सेक्रेटरी बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान अहमदाबाद में ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ का निर्माण हुआ। 2015 में उन्हें BCCI की फाइनेंस और मार्केटिंग कमिटियों में लाया गया। अक्टूबर 2022 में जय शाह को दोबारा BCCI का सेक्रेटरी चुना गया था। इसी तरह जनवरी 2024 में उन्हें दोबारा ACC अध्यक्ष चुना गया।

जय शाह को निर्विरोध ICC अध्यक्ष पद के लिए चुना गया, वो 1 दिसंबर, 2024 को पदभार ग्रहण करेंगे। इससे पहले न्यूजीलैंड-कनाडाई खेल प्रशासन ग्रेगर जॉन बार्कले लगातार 2 बार से ये पद सँभाल रहे थे, लेकिन उन्होंने तीसरे कार्यकाल से इनकार कर दिया था। जय शाह ने कहा है कि वो क्रिकेट की वैश्विक लोकप्रियता और पहुँच को विस्तार देने का कार्य करेंगे। 2028 में लॉस एंजेल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किया गया है, जिसे इस खेल के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

जय शाह ने कहा कि वो ICC के सदस्यों और अन्य देशों के साथ मिल कर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ क्रिकेट के कई प्रारूपों (टेस्ट, वनडे, T20) के सह-अस्तित्व को संतुलित करने के साथ-साथ उन्नत तकनीकों को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने क्रिकेट को नए वैश्विक बाजारों तक ले जाने की भी बात कही। जय शाह के ICC अध्यक्ष चुने जाने को भारतीय खेल विश्लेषक भारत के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।

बिहार में युवक को नंगा कर मलद्वार में डाल दिया लाल मिर्च पाउडर, मोहम्मद सिफ़त गिरफ्तार: तेजस्वी यादव जैसे नेता बता रहे थे ‘अल्पसंख्यकों पर जुल्म’

सोमवार (26 अगस्त, 2024) को बिहार के अररिया जिले के बताते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में कुछ लोगों ने एक व्यक्ति को जकड़ रखा है। बाद में पीड़ित के गुप्ताँग में लाल मिर्च डाल दी जाती है। पीड़ित द्वारा की जा रही रहम की अपील का आरोपितों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। घटना रविवार (26 अगस्त, 2024) की है। अब पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद सिफत नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। वीडियो में दिख रहे अन्य लोगों की पहचान कर के गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अररिया के थाना क्षेत्र इस्लामनगर की है। यहाँ रविवार को चोर होने के शक में कुछ लोगों ने एक 30 वर्षीय युवक को पकड़ लिया। इन्होंने पहले युवक की पिटाई की फिर उसके हाथ बाँध दिए। इसके बाद उन लोगों ने पीड़ित के मलद्वार में लाल मिर्च का पाउडर डाल दिया। पीड़ित युवक चीख कर रहम की भीख माँगता रहा लेकिन इसका आरोपितों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। मलद्वार में मिर्च भरने के बाद पीड़ित को उसकी पैंट पहना दी गई।

वीडियो में देखा जा सकता है की कुछ लोग पीड़ित को पुलिस के हवाले करने के लिए कह रहे हैं। हालाँकि इसका आरोपितों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्हीं में से एक आरोपित ने कहा, “पुलिस को देंगे तो वो छोड़ देगी।” इस वीडियो को RJD नेता तेजस्वी यादव ने शेयर किया है। उन्होंने कैप्शन के तौर पर लिखा, “बिहार में तालिबान राज! बीजेपी/NDA बिहार में सत्ता में मौज से है इसलिए जातिवादी गोदी मीडिया मौन है। हम और हमारा दल दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक और हिस्सेदारी की बात करते है इसलिए जातिवादियों को हमारा शासन हमेशा जंगलराज नजर आता है।”

वायरल वीडियो का संज्ञान पुलिस ने लिया है। पुलिस ने इस वीडियो के आधार पर थाना इस्लामनगर पर FIR दर्ज कर ली गई है। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और 117 (4) के तहत कार्रवई की गई है। इस मामले में मंगलवार (27 अगस्त) को मुख्य आरोपित मोहम्मद सिफत को गिरफ्तार कर लिया गया है। मोहम्मद सिफत अररिया का ही रहने वाला है। मोहम्मद सिफत की गिरफ्तारी पर भाजपा कार्यकर्ता हरि माँझी ने तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि आरोपित का नाम सुन कर अब RJD और कॉन्ग्रेस का मुँह बंद हो जाएगा।

फ़िलहाल पुलिस मोहम्मद सिफत के अलावा वीडियो में दिख रहे अन्य आरोपितों की पहचान करा के गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। जिस युवक के साथ इस अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया है वो अररिया के सिमरहा थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पीड़ित पर पहले भी चोरी के केस दर्ज बताए जा रहे हैं। उस पर बाइक चोरी की कोशिश का आरोप लगा कर अमानवीयता की गई थी। पीड़ित को पुलिस ने लगभग आधे घंटे थाने पर बिठाया था लेकिन कोई लिखित शिकायत न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था।

उदयपुर में जिसने 14 साल के देवराज को मार डाला, उसे गुंडा बनाना चाहता था अब्बा: खुद भी है सटोरिया, बेटे को दे रखी थी चायनीज चाकू

राजस्थान के उदयपुर जिले में 16 अगस्त, 2024 को एक मुस्लिम छात्र ने दलित समुदाय के अपने सहपाठी को चाकू घोंप दी थी। इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया था, जिसके बाद हिंसक भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की थी। 19 अगस्त को पीड़ित छात्र ने दम तोड़ दिया था। आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपित को उसके ही अब्बा गुंडा बनाने की चाह रखते थे। हमले में प्रयोग किया गया चाकू भी आरोपित के अब्बा ने ही खरीद कर दिया था।

आरोपित छात्र नाबालिग है जिसकी पहचान उजागर नहीं की जा सकती। ‘नवभारत टाइम्स’ के मुताबिक, वह धौंस जमाने के लिए अपने साथ अक्सर चाकू ले कर घूमा करता था। यह चाकू चाइनीज था जिसे आरोपित के अब्बा ने ही 400 रुपए में खरीद कर दिया था। पुलिस के हवाले से बताया गया है कि हमलावर छात्र का अब्बा ही चाहता था कि उनका बेटा गुंडा बने। इसके लिए आरोपित का अब्बा उसको अक्सर उकसाया भी करता था। हमलावर छात्र का अब्बा सटोरिया बताया जा रहा है।

आरोपित छात्र अपने अब्बा द्वारा दिलाए गए चाकू इस घटना से पहले भी कई जगह दिखा चुका था। पुलिस के द्वारा जुटाए गए आँकड़ों के मुताबिक, आरोपित छात्र के अब्बा पर भी पहले से ही 2 केस दर्ज हैं। कक्षा 10 के मृतक देवराज पर हमला भी आरोपित ने अपने अब्बा के उकसाने पर किया था। 3 दिन पहले आरोपित ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल के जरिए से देवराज को जान से मार डालने की धमकी दी थी। घटना के दिन भी दोनों के पारिवारिक बातों पर वाद-विवाद बढ़ा था। एक अन्य रिपोर्ट में देवराज की हत्या की वजह आरोपित को होमवर्क के लिए स्कूल की कॉपी न देना बताया गया है।

पुलिस ने आरोपित के अब्बा से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है। बताते चलें कि देवराज की हत्या के बाद मृतक के परिजनों ने शव को ले कर धरना दिया था। उन्होंने आरोपित छात्र पर कठोर कार्रवाई की माँग की है। रक्षाबंधन के दिन हुई इस मौत पर जिले में तनाव फैल गया था। तब प्रशासन ने एहतियातन कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया था।

क्या भारत में दखल देने की कोशिश कर रहा है USAID? गुपकार गैंग हो या ओवैसी, विपक्ष हो या किसान नेता… हर किसी को हो रही साधने की कोशिश

26 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कई विषयों पर चर्चा करने के लिए टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत से कुछ घंटे पहले, अमेरिकी राजनयिकों ने जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं से मुलाकात की। हाल के दिनों में भारतीय विपक्षी नेताओं और अमेरिकी राजनयिकों के बीच की मुलाकातें पहले की तुलना में अधिक बार सुर्खियों में रही हैं, जिससे भारतीय लोकतंत्र में संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप पर चिंता बढ़ गई है।

ऐसी खबरें आई हैं कि अमेरिकी राजनयिकों ने प्रदर्शनकारी किसान नेताओं भी से मुलाकात की, जिसे भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ऑफिसियल प्रेस रिलीज के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के प्रति राष्ट्रपति बिडेन की गहरी प्रतिबद्धता की सराहना की, जो लोकतंत्र, कानून के शासन और लोगों के बीच मजबूत संबंधों के साझा मूल्यों पर आधारित है।

इसमें आगे बताया गया है कि दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की और इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत-अमेरिका साझेदारी का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ पूरी मानवता को लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से बात की। चर्चा के दौरान, उन्होंने यूक्रेन की स्थिति के बारे में बात की और प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति बायडेन को यूक्रेन की अपनी हालिया यात्रा के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा, उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति पर चर्चा की और कानून-व्यवस्था की बहाली और अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

दिलचस्प बात यह है कि व्हाइट हाउस की प्रेस रिलीज में बांग्लादेश या बांग्लादेश में हिंदुओं का कोई जिक्र नहीं था। प्रेस रिलीज के मुताबिक, “राष्ट्रपति जोसेफ आर. बाइडेन जूनियर ने आज भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रधान मंत्री की हालिया पोलैंड और यूक्रेन यात्रा के साथ-साथ सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों पर चर्चा की। राष्ट्रपति ने प्रधान मंत्री की पोलैंड और यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्राओं के लिए, जो दशकों में किसी भारतीय प्रधान मंत्री की पहली यात्रा थी, और यूक्रेन के लिए शांति और चल रहे मानवीय समर्थन के उनके संदेश के लिए सराहना की। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने निरंतर समर्थन की पुष्टि की। नेताओं ने भारत-प्रशांत में शांति और समृद्धि में योगदान देने के लिए क्वाड जैसे क्षेत्रीय समूहों के माध्यम से मिलकर काम करने की अपनी निरंतर प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।

अमेरिकी राजनयिकों ने जम्मू-कश्मीर में एनसी नेताओं से की मुलाकात

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक मामलों के मंत्री-सलाहकार ग्राहम मेयर और फर्स्ट सेक्रेटरी गैरी एप्पलगार्थ सहित संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनयिकों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। यह मुलाकात अब्दुल्ला के श्रीनगर में गुपकार रोड स्थित आवास पर हुई। कथित तौर पर बैठक के दौरान नेताओं और राजनयिकों ने जम्मू-कश्मीर और सामान्य रूप से क्षेत्र से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रैवल एडवायजरी पर फिर से विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में प्रतिबंधों में ढील दी गई है। उन्होंने विदेशी पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर की संस्कृति और सुंदरता का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए यहाँ आने के लिए प्रोत्साहित किया।

मीडिया से बात करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और संचार प्रमुख तनवीर सादिक ने कहा कि बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर और सामान्य रूप से इस क्षेत्र से संबंधित कई विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सलाहकार अभिराम भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से सांसद और वरिष्ठ एनसी नेता रूहुल्लाह मेहदी भी बैठक में मौजूद थे। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बताया कि अब्दुल्ला ने राजनयिकों को अपने परिवारों के साथ कश्मीर आने के लिए आमंत्रित किया, ताकि अमेरिका और अन्य देशों के अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए पहला कदम उठाया जा सके।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा, “इस चर्चा में जम्मू-कश्मीर और सामान्य रूप से इस क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। उमर अब्दुल्ला ने राजनयिकों को प्रतिबंधों को कम करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रैवल एडवायजरी पर फिर से विचार करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने दुनिया भर के लोगों को कश्मीर आने और इसकी सुंदरता और संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राजनयिकों को संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के बीच विश्वास जगाने के लिए पहले कदम के रूप में अपने परिवारों के साथ कश्मीर आने के लिए आमंत्रित किया।”

अमेरिकी राजनयिकों ने भारतीय विपक्षी नेताओं से मुलाकात की

हालाँकि अमेरिकी राजनयिकों की कश्मीर यात्रा “दोस्ताना” लग सकती है, लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अकेले अगस्त में अमेरिकी राजनयिकों ने पर्दे के पीछे कई भारतीय नेताओं से मुलाकात की है। 14 अगस्त को स्पुतनिक इंडिया ने जेनिफर लार्सन और भारतीय विपक्षी नेताओं के बीच बैठकों पर प्रकाश डालते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की।

लार्सन हैदराबाद में अमेरिकी मिशन की प्रभारी अमेरिकी महावाणिज्यदूत हैं। उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात की। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “सांसद और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी, आपके दयालु आतिथ्य और साझा मुद्दों और चिंताओं से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों को साझा करने के लिए धन्यवाद। मैं हमारी चर्चाओं को जारी रखने के लिए उत्सुक हूँ!”

अमेरिकी राजनयिक ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से भी मुलाकात की। एक्स पर उन्होंने लिखा, “आज आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू से मिलना सम्मान की बात थी। मैं राज्य के लिए उनके दृष्टिकोण की बहुत प्रशंसा करती हूं और उनसे पूरी तरह सहमत हूँ कि संयुक्त राज्य अमेरिका और आंध्र प्रदेश को व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और लोगों के बीच व्यापक संबंधों को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक साथ काम करना जारी रखना चाहिए।”

इसके अलावा उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात की। एक्स पर उन्होंने लिखा, “तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ मेरी एक बेहतरीन मुलाकात हुई। यह मुलाकात नए निवेश जुटाने के लिए अमेरिका जाने से ठीक पहले की है। हैदराबाद में करीब 200 अमेरिकी कंपनियाँ हैं और एआई जैसे कई हाई-एंड टेक सेक्टर में लगातार अधिक से अधिक कंपनियों को आकर्षित कर रही हैं, जो अमेरिका-भारत व्यापार में उछाल की सफलता की कहानी में योगदान दे रही हैं। मैंने सीएम रेड्डी को उनके प्रयासों में बहुत सफलता की कामना की और हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने का वादा किया!”

उल्लेखनीय है कि उन्होंने जुलाई में भी AIMIM प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। एक्स पर उन्होंने लिखा, “कुतुब शाही हेरिटेज पार्क के पूरा होने के समारोह में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पर्यटन और संस्कृति मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और प्रिंस रहीम आगा खान के साथ शामिल होना बहुत ही शानदार अनुभव था, और मुझे इस बात पर गर्व है कि हैदराबाद के इन खूबसूरत, ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास ने सहायक भूमिका निभाई। यह पिछले कुछ साल में अमेरिका-तेलंगाना के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की कहानी कहता है!”

भारत के मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप का डर

अमेरिकी राजनयिकों और भारतीय विपक्षी नेताओं के बीच हाल ही में हुई बैठकों को लेकर विशेषज्ञ इस बात की चिंता जता रहे हैं कि अमेरिका भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहा है और यह आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में पहले कथित अमेरिकी दखल के समान ही एक समानता देखी जा सकती है, जहाँ रिपोर्ट बताती है कि शेख हसीना की सरकार को गिराने में यूएसएआईडी (USAID) और अन्य विदेशी हित शामिल हो सकते हैं।

हसीना के खिलाफ प्रतिरोध आंदोलनों को अमेरिका द्वारा समर्थन दिए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिसके कारण बांग्लादेश में तनाव और अशांति बढ़ी है। ये कार्रवाइयाँ अमेरिका द्वारा बार-बार किए जाने वाले आचरण का संकेत हैं, जहाँ वह संप्रभु राज्यों की स्थानीय राजनीति को प्रभावित करने के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करता है।

इस पृष्ठभूमि के मद्देनजर, अमेरिकी राजनयिकों और भारतीय विपक्ष के बीच इस तरह की बातचीत कुछ लोगों के लिए संदेहास्पद हो सकती है, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए, जहाँ कोई भी बाहरी ताकत क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 18 सितंबर, दूसरे चरण का 25 सितंबर और तीसरे चरण का मतदान 1 अक्टूबर को होगा। मतगणना 4 अक्टूबर को होगी। जम्मू-कश्मीर में कड़ी सुरक्षा के बीच विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है।

खबरों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा कर लिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस 90 में से 51 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कॉन्ग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पाँच सीटों पर “दोस्ताना” मुकाबला होगा। एक सीट सीपीआई(एम) और पैंथर्स पार्टी को आवंटित की गई है। अब तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव के लिए 45 उम्मीदवारों की घोषणा की है।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

यात्रियों के साथ अंताक्षरी, फोन नंबरों का आदान-प्रदान, आतंकियों ने माफ़ी भी माँगी: कंधार विमान हाईजैक की ये कौन सी कहानी लेकर आ रहे अनुभव सिन्हा?

विवादित फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा एक वेब सीरीज लेकर आ रहे हैं, जो कंधार हाइजैकिंग पर आधारित है। आतंकियों ने ‘इंडियन एयरलाइन्स’ के IC-814 विमान को हाईजैक किया था, जिसके बदले भारत को 3 आतंकियों को छोड़ना पड़ा था। इसमें एक मसूद अज़हर भी शामिल था, जिसका मुंबई से लेकर कई हमलों में इसके बाद हाथ रहा। इस एयरबस को 25 दिसंबर, 1999 को हाईजैक किया गया था। ये दिल्ली से काठमांडू जा रही थी। इस्लामी आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन’ के 5 आतंकियों ने इस घटना को अंजाम दिया था।

भारत सरकार जो जिन 2 अन्य आतंकियों को रिहा करना पड़ा था, वो था अहमद उमर सईद शेख और मुस्ताक अहमद जरगर। क्रू मेंबर्स को मिला कर इस विमान में 185 लोग सवार थे, ऐसे में उनकी जान का सवाल था। इस पर आधारित वेब सीरीज में नसीरुद्दीन शाह और पंकज कपूर जैसे वरिष्ठ अभिनेता भी दिखाई देंगे। नेटफ्लिक्स पर ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ नाम से इसे रिलीज किया जा रहा है। इस वेब सीरीज में 6 एपिसोड होंगे। ये ‘फ्लाइट इन्टू फियर’ नामक पुस्तक पर आधारित है।

उस प्लेन के कैप्टन रहे देवी शरण और सृंजॉय चौधरी ने इस किताब को लिखा है। अनुभव सिन्हा ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में पता था और जब उन्होंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो वो ये नहीं कह सकते कि उन्हें ये पसंद नहीं आया, बल्कि हमें लगा कि इसके साथ कुछ और भी किया जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने हाइजैकिंग का ‘360 डिग्री दृश्य’ पेश करने का निर्णय लिया और फिल्म लेखक त्रिशांत श्रीवास्तव व पत्रकार एड्रिअन लेवी को इससे जोड़ा गया। अनुभव सिन्हा का कहना है कि इन सभी ने मिल कर रिसर्च किया।

अनुभव सिन्हा ने कहा कि इस दौरान वो तीनों गुनगुनाने लगे और तभी उनके दिमाग में एक अजीबोगरीब विचार आया। अनुभव सिन्हा ने दावा किया कि विमान में आतंकियों के साथ यात्रियों ने अंताक्षरी खेली थी, वो आपस में गले मिले थे और एक-दूसरे का फोन नंबर भी लिया था। उन्होंने दावा किया कि कैप्टन देवी शरण को चोट पहुँचाने वाले एक आतंकी ने माफ़ी तक माँगी थी। इससे उनके गर्दन पर निशान पड़ गया था, लेकिन उक्त आतंकी ने गले लगा कर उनसे माफ़ी माँगी।

बकौल अनुभव सिन्हा, हाईजैकरों ने कैप्टन से कहा था, “मैं आपके किसी काम आ सकूँ तो बताना।” इस वेब सीरीज को गुरुवार (29 अगस्त, 2024) को Netflix पर रिलीज किया जाएगा। बता दें कि मसूद का भाई इब्राहिम अज़हर भी हाईजैकरों में शामिल था। इन्होंने रूपिन कत्याल नामक एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर को मार डाला था, जो पत्नी रचना के साथ हनीमून पर जा रहे थे। भोपाल के बिल्डर दुर्गेश गोयल और उनकी पत्नी रेणु ने तो अगले एक दशक तक फ्लाइट की सवारी नहीं की। पूरे 175 घंटे तक आतंकियों और सरकार में मोलभाव चला था।

सरेंडर करने की फिराक में था कॉन्ग्रेस नेता हाजी शहजाद, MP पुलिस ने कोर्ट के बाहर ही दबोचा: छतरपुर थाने पर मुस्लिम भीड़ के हमले में थी तलाश

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 21 अगस्त 2024 (बुधवार) को पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के मुख्य आरोपित शहजाद अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। शहज़ाद अदालत में चुपके से सरेंडर करने वाला था लेकिन पुलिस ने उसे कोर्ट के बाहर ही दबोच लिया है। पुलिस की तरफ से शहज़ाद पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था। शहज़ाद की गिरफ्तार मंगलवार (27 अगस्त 2024) को हुई है।

छतरपुर जिले के पुलिस अधीक्षक IPS अगम जैन ने शहजाद अली की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपित से पूछताछ की जा रही है। इस पूछताछ में फरारी के दौरान उसके ठिकाने, उसके मददगारों व आकाओं सहित तमाम अन्य बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। बताया जा रहा है कि पुलिस अदालत में कॉन्ग्रेस नेता शहज़ाद का कस्टडी रिमांड लेने की माँग करेगी। रिमांड में पुलिस यह भी जानने का प्रयास करेगी कि हाजी शहजाद के आगे का प्लान क्या था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को शक था कि शहज़ाद अली जल्द ही कोर्ट में सरेंडर कर सकता है। इस सूचना पर अदालत के आसपास सादी वर्दी में पुलिस वालों को तैनात किया गया था। जैसे ही वो दिखा उसे हिरासत में ले लिया गया। अब आगे हाजी शहज़ाद का मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा जिसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

प्रशासन ने हाजी शहजाद अली पर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही थी। लुक आउट नोटिस जारी करके उसके फरार होने के सभी संभावित स्थानों पर कड़ी चौकसी बरती जा रही थी। हाजी शहज़ाद सहित अब तक इस केस में कुल 27 आरोपितों गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 6 आरोपितों को जिला बदर किया जा चुका है। CCTV फुटेज सहित अन्य सबूतों से थाने पर हमले के अन्य फरार आरोपितों को चिन्हित किया जा रहा है। जल्द ही इस केस में कई और गिरफ्तारियाँ की जा सकती हैं।

बताते चलें कि कुछ दिन पहले इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी का आरोप लगाकर छतरपुर पुलिस स्टेशन पर हमला किया। उस भीड़ का नेतृत्व हाजी शहजाद ही कर रहा था। घटना में कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं। हमले के बाद हाजी शहज़ाद फरार चल रहा था। उसकी करोड़ों की कोठी पर प्रशासन पहले ही बुलडोजर चला चुका है। इसी दौरान उसके वाहनों को कुचल कर कबाड़ बना दिया गया था। प्रशासन इस बात की भी जाँच कर रहा है कि महज कुछ वर्ष पहले ठेले पर कपड़े बेचने वाला शहजाद इतने कम समय में करोड़पति कैसे बन गया था।