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RG कर अस्पताल के गर्ल्स होस्टल में महिला डॉक्टरों को रेप की धमकी: BJP नेता बोले- CM ममता चलाती हैं नेक्सस, सेक्स रैकेट के पैसे TMC पार्टी फंड में

कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। कैंपस की अधिकांश महिला डॉक्टर एवं नर्स अपना सामान लेकर जा चुकी हैं। जो वहाँ रहने को मजबूर हैं, वो दहशत में जी रही हैं। कहा जा रहा है कि 14 अगस्त की रात को कैंपस में घुसी हजारों की भीड़ ने महिला हॉस्टल में भी तोड़फोड़ की थी और महिला डॉक्टरों को रेप की धमकी दी थी।

दरअसल, 8-9 अगस्त की रात को ट्रेनी डॉक्टर की बर्बरता से रेप करने के बाद हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में RG कर मेडिकल के डॉक्टर कैंपस में विरोध प्रदर्शन पर बैठे थे। 14 अगस्त की रात की हजारों की संख्या में बाहरी लोग कैंपस में घुस आए और डॉक्टरों पर हमला कर दिया। उन्होंने इमरजेंसी वॉर्ड सहित कई जगहों पर तोड़फोड़ की। इनमें से कुछ सत्ताधारी TMC से भी जुड़े थे।

वहाँ की एक महिला डॉक्टर ने आजतक को बताया कि घटना वाले दिन हुड़दंगियों ने अस्पताल के गर्ल्स हॉस्टलों में भी पहुँच गए थे। कहा जा रहा है कि इस दौरान हॉस्टल में रहने वाली महिला रेजिडेंट डॉक्टरों को डराया-धमकाया गया और उन्हें रेप की धमकी दी गई। रेजिडेंट डॉक्टर ने बताया, “उस दिन हम लोग टॉयलेट में और बेड के नीचे छिप गए थे। जहाँ जगह मिल रही थी, जान बचाने के लिए लोग वहाँ भाग रहे थे।”

घटना से महिला डॉक्टर डर गईं और कैंपस छोड़कर या तो वे अपने घर चली गईं या दूसरी जगह शिफ्ट हो गईं। कहा जा रहा है कि वहाँ 160 महिला डॉक्टर थीं, जिनमें से अब केवल 17 बचीं हैं। जूनियर डॉक्टरों की वकील अपराजिता सिंह ने इस हालात के बारे में कहा था कि 700 रेजिडेंट डॉक्टरों में से सिर्फ 30-40 महिला डॉक्टर और 60-70 पुरुष डॉक्टर ही कैंपस में बचे हैं।

इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कैंपस में केंद्रीय बल CISF को नियुक्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद कैंपस में 150 से अधिक CISF सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। महिला डॉक्टर का कहना है, “हमें अभी भी डर है कि गुंडे यहाँ फिर से हमला कर सकते हैं। हमें ये भी डर है कि यहाँ जो घटना हुई है, वह हमारे साथ भी घट सकती है।”

रेजिडेंट या अन्य डॉक्टर भले ही हॉस्टल से चले गए हों, लेकिन मेडिकल कॉलेज की नर्सिंग स्टाफ के पास कोई विकल्प नहीं हैं। वे एडमिट किए गए मरीजों की देखभाल में जुटी हैं। नर्सों का कहना है कि 14 अगस्त की घटना के बाद कोई भी स्टाफ रात में ड्यूटी करने के लिए तैयार नहीं है। नर्स भी हॉस्टल छोड़कर जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में दो नर्सिंग हॉस्टल अभी भी भरे हुए हैं। यहाँ नर्सें रहने के लिए मजबूर हैं। रेप-मर्डर जैसी भयावह घटना के बाद भी वह रात में काम कर रही हैं। एक नर्स ने बताया कि वॉर्ड में उन्हें डर लगता है। नर्सों को लगता है कि इस घटना में कई लोग शामिल हैं। उसने बताया कि हंगामे के बाद से महिला डॉक्टरों के बदले पुरुष डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन मेल नर्स नहीं है।

भाजपा का आरोप

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में एक बड़ा नेक्सस चल रहा है। हॉस्टल से लेकर अस्पताल तक सेक्स रैकेट जैसी चीजें चल रही हैं और इस धंधे से आने वाला पैसा सत्ताधारी टीएमसी के पार्टी फंड में जाता है। उन्होंने कहा कि यह नेक्सस ममता बनर्जी के इशारे पर चल रहा है।

उन्होंने कहा, “एसपी दास से पूछताछ होनी चाहिए। ये ममता के सबसे खास डॉक्टर हैं। अपनी बेटी को किस तरह से नौकरी दिलवाई और प्राइम पोस्ट पर रखा है। यहाँ डॉक्टरों को फेल करने की धमकी दी जाती है। क्राइम सीन के पास तोड़फोड़ की गई। जब खोजी कुत्ता वहाँ गया तो वह और आगे जा रहा था और कुछ ढूंढ रहा था, लेकिन उसे आगे नहीं ले गए। इसमें कोलकाता पुलिस कमिश्नर सबसे बड़ा दोषी हैं।” 

दिलीप घोष ने आरोप लगाया, “(ट्रेनी डॉक्टर की) लाश को बुरी तरह से घसीट कर परिवार के सामने लाया गया था। ऐसे कौन करता है? पुलिस को सस्पेंड क्यों नहीं किया। अस्पताल में जितना नेक्सस चल रहा है, सब कुछ तो ममता के इशारे पर ही हो रहा है। डॉक्टर बेटी को भी फेल करने की धमकी दे गई थी।” दिलीप घोष ने इस दौरान TMC के पूर्व प्रवक्ता शांतनु सेन का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “शान्तनु सेन की बेटी को भी फेल करने की धमकी दी गई थी। पूरे बंगाल में खुला खेल चल रहा है। डॉक्टर एसपी दास और कोलकाता पुलिस कमिश्नर इसका हिस्सा हैं। घटना के समय और भी डॉक्टर मौजूद थे, उनको पकड़ो। जल्दी कुछ करो बंगाल के लिए। रोहिंग्या घुसपैठ से लेकर हर डिपार्टमेंट में हर तरफ लूटपाट है, इसको रोकना चाहिए।”

बता दें कि शांतनु सेन और उनकी पत्नी पत्नी काकाली सेन आरजी मेडकल कॉलेज एवं अस्पताल से ही पढ़ाई किए हैं। वहाँ पर उनकी बेटी भी पढ़ाई कर रही है। इस घटना के बाद प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का उन्होंने साथ दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस ने उन्हें तत्काल पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया था।

उन्होंने कहा था, “कॉलेज में एक रैकेट चलता है और अगर आप उसमें शामिल नहीं देते हैं तो आपको निशाना बनाया जाता है। अगर आप साथ देते हैं तो आप जो चाहें कर सकते हैं। मैं किसी विशेष प्रोफेसर का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन अगर आप उनकी नजर में अच्छे हैं तो आप परीक्षा में नकल भी कर सकते हैं। अगर आप निशाने पर हैं तो आप चाहे कितने भी अच्छे हों, आपकी डिग्री रद्द कर दी जाएगी।”

‘तुम हिन्दू कुछ ज्यादा ही कूद रहे हो, कट कर ही बाज आओगे’: सामान खरीदने गए 10 साल के बच्चे को दुकानदार दानिश की धमकी, बकी गंदी-गंदी गालियाँ

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नाबालिग हिन्दू लड़के को बाकी हिन्दुओं सहित काट देने की धमकी दी गई है। यह धमकी शहर में सिलाई-कढ़ाई का सामान बेचने वाले दुकानदार दानिश ने दी है। 10 साल का ये पीड़ित बच्चा मुस्लिम बहुल इलाके में पड़ने वाली दानिश की दुकान पर कुछ सामान लेने गया था। मामले की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना शुक्रवार (23 अगस्त 2024) की है। दानिश के अब्बा केस वापसी के लिए बार-बार पीड़ित के घर का चक्कर लगा रहे हैं।

यह मामला बिजनौर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ शुक्रवार को पीड़िता बच्चे के पिता दीपक सैनी ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया है कि 23 अगस्त को उनका बेटा पास की दुकान पर कुछ सामान लेने गया था। इस दुकान का मालिक दानिश है। दुकानदार दानिश ने पीड़ित से कहा, “तुम हिन्दू कुछ ज्यादा ही कूद रहे हो। कट कर ही बाज आओगे।” आरोप है कि इसी दौरान दानिश ने बच्चे को गंदी-गंदी गालियाँ भी दीं। पीड़ित डर कर वहाँ से लौट आया और घर वालों को सारी बात बताई।

पीड़ित बच्चे के पिता दीपक सैनी ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि वो मिश्रित आबादी वाले इलाके में रहते हैं। कुछ ही दूरी पर दानिश की भी दुकान है, जो मुस्लिम बहुल इलाके में है। वह सिलाई और कढ़ाई के तमाम आइटम बेचता है। घटना के दिन पीड़ित बच्चा दानिश के यहाँ चेन (जिप) खरीदने गया था। देरी होता देख कर पीड़ित ने दानिश से सामान जल्दी देने को कहा। इसी बात पर दानिश भड़क गया और उसने नाबालिग को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए सभी हिन्दुओं को काटने जैसी बातें की।

पीड़ित पिता ने तहरीर में जान का खतरा बताते हुए यह भी कहा है कि भविष्य में उनके बेटे के साथ किसी भी अनहोनी का जिम्मेदार दानिश ही होगा। फिलहाल मामले की शिकायत का पुलिस ने संज्ञान लेकर दानिश के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302, 351 (2) और 352 के तहत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। डिप्टी एसपी सिटी ने बताया है कि मामले में जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

ऑपइंडिया को दीपक ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद दानिश के अब्बा उनके घर 4 बार समझौते का प्रस्ताव लेकर आ चुके हैं। हालाँकि पीड़ित के पिता ने हमें बताया कि वो किसी भी हाल में समझौते के लिए राजी नहीं हैं। उन्होंने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

‘बांग्लादेश बना देंगे’: 400+ मुस्लिमों ने हिंदू युवती के घर बोला धावा, इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज रहे मुज्जमिल का किया था विरोध, सहमे हिंदुओं ने ‘मकान बिकाऊ है’ का लगाया बोर्ड

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मुजम्मिल नाम के मुस्लिम लड़के ने एक हिंदू लड़की को इंस्टाग्राम पर अश्लील मैसेज भेज-भेज कर जीना मुहाल कर दिया। इस बात की जब शिकायत की गई, तो 300-400 मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदू परिवारों पर हमला बोल दिया और जमकर मारपीट की।

मुस्लिमों ने ‘बांग्लादेश जैसी स्थिति’ पैदा करने की धमकी दी। इसके बाद कई हिंदू परिवारों ने अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊँ है’ के बोर्ड लगा दिए, जिसके बाद पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल प्रशासन मामले में जाँच की लिए लिखा है। इस मामले में पुलिस ने मुजम्मिल को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला बिजनौर जिले के चाँदपुर के सराय रफी मोहल्ले का है। एक हिंदू परिवार की बेटी को मोहम्मद मुजम्मिल नाम के युवक ने अश्लील सामग्री चैट पर भेजी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उसकी चैटिंग से परेशान होकर उनकी बेटी ने परिवार वालों से पूरे मामले की शिकायत की।

इस मामले में पीड़ित लड़की के चचेरे भाई ने जब मुजम्मिल के खिलाफ ऑडियो मैसेज भेजा, तो मुस्लिम पक्ष के लोगों ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। यही नहीं, करीब 300-400 की संख्या में मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर धावा बोल दिया, जिसके बाद तनाव फैल गया।

इस झगड़े ने 19 अगस्त 2024 को बड़ा रूप ले लिया, जब मुस्लिमों ने हिंदुओं के घरों पर धावा बोला। इस हमले में कई हिंदू युवक घायल हो गए। मुस्लिमों ने की भीड़ ने महिलाओं के साथ भी मारपीट की है। आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने “बांग्लादेश जैसी स्थिति” पैदा करने की धमकी दी। यह घटना तब सांप्रदायिक मुद्दे में बदल गई जब उसी मोहल्ले के करीब 20 परिवारों ने उत्पीड़न के खिलाफ विरोध किया और अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ लिख दिया।

बिजनौर के एसपी ग्रामीण राम अर्ज ने जानकारी देते हुए बताया कि चांदपुर के सराय रफी मोहल्ले में 19 अगस्त को एक समुदाय के लड़के एक लड़की के साथ अश्लील आपत्तिजनक चैटिंग की थी। जिससे आहत होकर लड़की के भाई ने आरोपी लड़के को मैसेज भेजा था। इस मैसेज में भी आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया। इस मैसेज पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई। अब दूसरे पक्ष की ओर से भी गंभीर आरोपों के तहत शिकायत दी गई है।

पुलिस ने कहा कि हिंदू परिवारों ने विरोध में ‘मकान बिकाऊ है’ लिखा था जिसे माहौल शांत कराने के बाद हटवाया गया है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है ताकी शांति और लॉ एंड ऑर्डर बना रहे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस से गठजोड़ कर आरक्षण पर घिरे राहुल गाँधी, अमित शाह ने दागे 10 सवाल: पूछा- क्या जम्मू-कश्मीर के लिए अलग झंडे का समर्थन करती है कॉन्ग्रेस?

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही दिन के भीतर राहुल गाँधी ने कश्मीर का दौरा किया। उनके इस दौरे के साथ ही कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन की घोषणा की गई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस से 10 सवाल पूछे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “सत्ता के लालच में बार-बार देश की एकता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने जम्मू-कश्मीर चुनाव में अब्दुल्ला परिवार की ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के साथ गठबंधन करके एक बार फिर अपने छिपे हुए इरादों को उजागर किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र में किए गए वादों को देखते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी से मेरे 10 सवाल हैं।”

  1. क्या कॉन्ग्रेस नेशनल कॉन्फ्रेंस के जम्मू-कश्मीर के लिए अलग झंडे के वादे का समर्थन करती है?
  2. क्या राहुल गांधी और कॉन्ग्रेस पार्टी JKNC के अनुच्छेद 370 और 35A को बहाल करने और इस तरह जम्मू-कश्मीर को अशांति और आतंकवाद के युग में धकेलने के फैसले का समर्थन करते हैं?
  3. क्या कॉन्ग्रेस कश्मीर के युवाओं के बजाय पाकिस्तान के साथ बातचीत में शामिल होकर फिर से अलगाववाद को बढ़ावा देने का समर्थन करती है?
  4. क्या कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गांधी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पाकिस्तान के साथ ‘एलओसी व्यापार’ शुरू करने के फैसले का समर्थन करते हैं, जिससे सीमा पार आतंकवाद और उसके पारिस्थितिकी तंत्र का पोषण होता है?
  5. क्या कॉन्ग्रेस आतंकवाद और पत्थरबाजी में शामिल लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों में बहाल करने का समर्थन करती है, जिससे आतंकवाद, उग्रवाद और हड़तालों का युग वापस आ जाएगा?
  6. गठबंधन ने कॉन्ग्रेस पार्टी के आरक्षण विरोधी रुख को उजागर कर दिया है। क्या कॉन्ग्रेस दलितों, गुज्जरों, बकरवालों और पहाड़ी समुदायों के लिए आरक्षण समाप्त करने के जेकेएनसी के वादे का समर्थन करती है, जिससे उनके साथ अन्याय होगा?
  7. क्या कॉन्ग्रेस चाहती है कि ‘शंकराचार्य हिल’ को ‘तख्त-ए-सुलेमान’ और ‘हरि हिल’ को ‘कोह-ए-मारन’ के नाम से जाना जाए?
  8. क्या कॉन्ग्रेस जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को भ्रष्टाचार में धकेलने और इसे चुनिंदा पाकिस्तान समर्थित परिवारों को सौंपने की राजनीति का समर्थन करती है?
  9. क्या कॉन्ग्रेस पार्टी जम्मू और घाटी के बीच भेदभाव की जेकेएनसी की राजनीति का समर्थन करती है?
  10. क्या कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गांधी कश्मीर को स्वायत्तता देने की जेकेएनसी की विभाजनकारी राजनीति का समर्थन करते हैं?

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को होंगे। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे। पहले चरण के लिए नामांकन 27 अगस्त, दूसरे चरण के लिए 5 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 12 सितंबर से दाखिल किए जाएँगे। इस चुनाव में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दिल्ली, जम्मू और उधमपुर में स्पेशल पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें से 74 जनरल, 9 अनुसूचित जाति और 7 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। केंद्रशासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख हैं जिसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है। पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

अब अंग्रेज जमाने के ‘काले लिबास’ में नहीं होंगे दीक्षांत समारोह, मोदी सरकार ने AIIMS सहित अन्य संस्थानों को ‘देसी परिधान’ के दिए निर्देश

देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, विशेषकर मेडिकल कॉलेजों में होने वाले दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को काला गाउन और हैट पहनने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी केंद्रीय अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे दीक्षांत समारोह में ब्रिटिश औपनिवेशिक चिह्न अपनाने के बजाय भारतीय पोशाक को अपनाएँ।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि काले गाउन और हैट पहनना औपनिवेशिक काल की देन है। ये भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं। दीक्षांत समारोह में पहनी जाने वाली पोशाक उस राज्य की वेशभूषा और परंपराओं पर आधारित होनी चाहिए जहाँ संस्थान स्थित है। निर्देश में कहा गया कि अब इस औपनिवेशिक विरासत को बदलने की जरूरत है।

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वर्तमान में मंत्रालय के विभिन्न संस्थानों द्वारा दीक्षांत समारोह के दौरान काले गाउन और टोपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ड्रेस का चलन मध्य युग में यूरोप में शुरू हुआ था। बाद में यह ब्रिटिश के जरिए उपनिवेश वाले देशों में फैला। यह फैसला भारत की औपनिवेशिक विरासत से दूर जाने की दिशा में एक कदम है।

इस फैसले के साथ भारत के शिक्षण संस्थान अब अपनी संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित कर पाएँगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने संस्थान के दीक्षांत समारोह के लिए उपयुक्त भारतीय ड्रेस कोड तैयार करें। यह ड्रेस कोड राज्य की स्थानीय परंपराओं पर आधारित होना चाहिए।

बताते चलें कि कई सरकारी व निजी संस्थान अपने दीक्षांत समारोहों में पहले से ही पारंपरिक वस्त्रों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। आईआईटी हैदराबाद ने साल 2011 में ही ब्रिटिश काल से चली आ रही इस परंपरा को खत्म कर दिया था। साल 2011 से वहाँ दीक्षांत समारोह में पारंपरिक पोशाक पहनी जाती है। 

भारत में इस्लामी शासन लाना चाहता था डॉक्टर इश्तियाक, राजस्थान से UP तक तैयार कर रखे थे आतंकी: रिपोर्ट में दावा- जिस जमीन घोटाले में गिरफ्तार हुए थे CM हेमंत सोरेन, उसी केस में जेल में बंद बबलू खान से भी हैं रिश्ते

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए, झारखंड एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के जिस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, उसका मुखिया राँची के अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर इश्तियाक निकला है। वो आतंकियों को हमले की ट्रेनिंग भी दे रहा था, जिसमें से 6 आतंकी राजस्थान के भिवाड़ी में ट्रेनिंग करते पकड़े गए हैं। तो झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। एक आतंकवादी की गिरफ्तारी यूपी से की गई है। अब तक इस मॉड्यूल के 16 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के आतंकी डॉ इश्तियाक के लिंक हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की वजह बनी जमीन घोटाले से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में बबलू खान नाम के शख्स को समन किया है। ईडी अब यह जाँच कर रही है कि जमीन घोटाले से अर्जित राशि से कहीं आतंकी संगठन को फंडिंग तो नहीं हुई है।

चूँकि जमीन घोटाले में जेल में बंद अफसर खान और ताल्हा खान का बबलू खान रिश्तेदार है। वहीं, डॉ इश्तियाक बबलू खान के अस्पताल से जुड़ा रहा है। दोनों की पारिवारिक रिश्तेदारी भी है। इसके साथ ही अफसर अली और ताल्हा खान सेना जमीन घोटाला और हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन घोटाले में चार्जशीटेड हैं। ऐसे में ईडी ने अपनी जाँच को आतंकवाद की फंडिंग की तरफ भी घुमा दिया है। अब बबलू खान से पूछताछ कर ईडी और अन्य एजेंसियाँ ये पता करेंगी कि कहीं जमीन घोटाले के पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए तो नहीं किया।

डॉ इश्तियाक ने की थी खिलाफत की तैयारी

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के इस मॉड्यूल का संचालन रांची निवासी डॉ. इश्तियाक कर रहा था और उसने इस मॉड्यूल का विस्तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक कर लिया था। डॉ. इश्तियाक रांची के प्रतिष्ठित मेडिका अस्पताल में सेवा दे रहा था। हालाँकि एटीएस की कार्रवाई के बाद 22 अगस्त को ही मेडिका के मैनेजमेंट ने डॉ. इश्तियाक अहमद को टर्मिनेट कर दिया।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी इस मॉड्यूल के आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आतंकियों के पास से एके-47 सहित कई हथियारों की बरामदगी की भी सूचना है। झारखंड के आईजी ऑपरेशन अमोल होमकर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आठ लोगों से पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर इश्तियाक देश में खिलाफत घोषित करने के साथ कई आतंकी हमलों की फिराक में था।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट पर झारखंड एटीएस ने रांची के बरियातू जोड़ा तालाब के अल हसन रेसीडेंसी में दबिश देकर डॉक्टर इश्तियाक को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जाँच की। जाँच में कई संदिग्ध चीजें मिलने के बाद एटीएस उसे गुप्त ठिकाने पर ले गई, जहाँ पूछताछ कर यूपी, राजस्थान समेत अन्य शहरों में गतिविधि की जानकारी उससे जुटाई गई। डॉक्टर इश्तियाक को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया जा रहा है।

डॉ इश्तियाक अहमद अलकायदा इन इंडियन सब कॉटिनेंट के इस मॉडयूल को लीड कर रहा था। उसने राजस्थान के भिवंड़ी में भी छह संदिग्धों को ट्रेनिंग के लिए भेजा था। इन सभी की गिरफ्तारी भी राजस्थान पुलिस ने की है। मौके से पुलिस ने एके 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की हैं। खास बात ये है कि राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किए गए 6 आतंकी भी झारखंड के ही निकले हैं।

डॉ इश्तियाक के बारे में जानिए

  • डॉ इश्तियाक पेशे से रेडियोलॉजिस्ट है, जिसने राँची के RIMS से मेडिकल की पढ़ाई की
  • मेडिका अस्पताल में 3 साल तक फुल टाइम कर चुका है काम
  • बीते 3 साल से पार्ट टाइम दे रहा था मेडिका अस्पताल में सेवा
  • हजारीबाग में भी क्लीनिक चलाता है इश्तियाक
  • भारत को इस्लामिक देश बनाने की कर रहा था कोशिश

झारखंड से इन आतंकियों की गिरफ्तारी

झारखंड एटीएस की टीम ने गुरुवार (22 अगस्त 2024) लोहरदगा में कुडू के हेंजला कौवाखाप गाँव अलताफ उर्फ इल्ताफ की तलाश में पहुँची थी। उसके घर से दो हथियार और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके साथ ही राँची के चान्हों इलाके में एटीएस की टीम ने कई जगहों पर दबिश दी। एटीएस ने चान्हों के बलसोकरा के मोहम्मद मोदब्बीर, रिजवान, चटवल के मुफ़्ती रहमतुल्लाह मजहिरी और पिपराटोली के मतिउर रहमान को हिरासत में लिया है।

एटीएस की टीम ने एक साथ चान्हों के बलसोकरा, चटवल, पिपराटोली के अलावा पकरियो गाँव के एनामुल अंसारी, शहबाज अंसारी तथा शहबाज अंसारी के घर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मोहम्मद मोदब्बिर, मोहम्मद रिजवान, मुफ़्ती व मतीउर रहमान को उनके घर से और मुफ्ती रहमतुल्लाह को एटीएस ने उसके मदरसा से हिरासत में लिया। इस दौरान पकरियो में छापेमारी में एनामुल अंसारी और शहबाज घर में नहीं मिले। परिजनों की ओर से बताया गया कि जेयारत अंसारी का बेटा शहबाज परीक्षा के लिए दिल्ली गया हुआ है, जबकि शहबाज और एनामुल अंसारी तबलीगी जमात में गए हुए हैं।

जेलेंस्की से मुलाकात के बाद PM मोदी ने दिया शांति का संदेश, रूस से युद्ध में घायलों को दिया BHISHM उपचार: भारत-यूक्रेन के बीच चार समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (23 अगस्त 2024) को युद्धग्रस्त यूक्रेन पहुँचे और राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के मुलाकात की। इस दौरान चार समझौते पर हस्ताक्षर हुए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है। जेलेंस्की से करीब तीन घंटे की मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने उन्हें भारत आने का न्योता दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले पीएम हैं, जिन्होंने यूक्रेन की यात्रा की है।

जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने रूस के साथ यूक्रेन की लगभग ढाई वर्षों से जारी जंग को रोकने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं ग्लोबल साउथ और करीब 120 देशों की ओर से भी शांति का संदेश लेकर आया हूँ। शांति के हर प्रयास में भारत का सक्रिय योगदान रहा है। हमारा स्पष्ट मानना है कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरी है। हम उसका समर्थन करते हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “जब मैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिला था तो मीडिया के सामने आँख से आँख मिलाकर मैंने उनको कहा था कि ये युद्ध का समय नहीं है। पिछले दिनों मैं रूस गया था। वहाँ भी मैंने अपनी बात साफ-साफ शब्दों में कही है कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में कभी नहीं होता है। समाधान… रास्ता बातचीत से ही निकलता है। डायलॉग से निकलता है… डिप्लोमेसी से निकलता है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “हमें बिना समय गँवाए उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। दोनों पक्षों को सामने बैठकर इस संकट से निकलने के लिए रास्ते तलाशने होंगे। शांति के हर प्रयास में भारत अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। व्यक्तिगत रूप से मैं भी इसमें कोई योगदान दे सकता हूँ तो मैं एक मित्र के रूप में ये जरूर करना चाहूँगा।”

प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध और महात्मा गाँधी के शांति के संदेशों की बात करते हुए कहा, “हम जंग पर कभी भी तटस्थ नहीं रहे हैं। हम पहले दिन से शांति के पक्ष में रहे हैं। हम बुद्ध की धरती से आए हैं, जहाँ युद्ध का कोई स्थान नहीं है। हम महात्मा गाँधी की धरती से आते हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया है।”

पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा से दुनिया भर देशों को उम्मीद है कि रूस और यूक्रेन के बीच अब शांति आएगी, क्योंकि दोनों के साथ भारत के करीबी संबंध हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनी गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने उम्मीद जताई कि पीएम मोदी का यूक्रेन दौरा शांति लाने में मददगार साबित होगा। यह यात्रा अपना असर दिखाएगी।

भारत और यूक्रेन के बीच कृषि, चिकित्सा, संस्कृति और मानवीय सहायता में सहयोग के लिए कुल चार समझौते हुए हैं। इससे पहले ही पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी थी। यह समझौता कृषि और खाद्य उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान करता है। इसके अलावा, दोनों देशों पर कई अन्य मुद्दों पर बातचीत हुई।

इस दौरान PM मोदी ने जंग के बीच यूक्रेन की मानवीय सहायता के लिए जेलेंस्की को BHISHM मेडिकल क्यूब दिए। यह कॉम्पैक्ट किट जंग में घायल लोगों और सैनिकों के इलाज में मदद करेगी। भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को दोबारा बनाने के लिए इंटर गवर्नमेंटल टास्क टीम बनाई गई है। इसमें भारत और यूक्रेन के विदेश मंत्री शामिल हैं और जयशंकर ही इसके चेयरपर्सन होंगे। 

BHISHM Cube एक पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल की तरह है, जिसे आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘प्रोजेक्ट BHISHM’ यानी भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित, एंड मैत्री के तहत विकसित किया गया है। यह परियोजना फरवरी 2022 में घोषित की गई थी।

बता दें कि साल 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ था। इसके कारण कई देश बने थे, जिनमें से एक यूक्रेन भी है। यूक्रेन की स्थापना से लेकर आज तक कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री वहाँ नहीं गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने यूक्रेन की यात्रा की है। वहाँ जाकर उन्होंने शांति का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए भारतीय समुदाय के लोग कीव में मौजूद रहे। भारतीयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुलाकात की। इसके साथ भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया। वहाँ ‘जय श्रीराम‘ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे।सुरक्षा को देखते हुए पीएम मोदी का दौरा काफी सीक्रेट रखा गया है।

मर गए भोला पांडेय, देवेंद्र के साथ मिलकर हाइजैक कर लिया था हवाई जहाज: इंदिरा गाँधी की रिहाई की रखी थी शर्त, बाद में कॉन्ग्रेस ने बना दिया MP-MLA

डॉक्टर भोलानाथ पांडेय का शुक्रवार (23 अगस्त 2024) को निधन हो गया। वे अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव थे। पूर्व विधायक। लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके थे। पर ये उनका अधूरा परिचय है। उनका पूरा परिचय यह है कि उत्तर प्रदेश के ही देवेंद्र पांडेय के साथ मिलकर उन्होंने एक विमान को अगवा कर लिया था।

देवेंद्र पांडेय का साल 2017 में निधन हुआ था। दोनों की माँग थी कि इंदिरा गाँधी को बिना शर्त रिहा कर दिया जाना चाहिए। इसका इनाम दोनों को कॉन्ग्रेस ने बाद में सांसद-विधायक बनाकर दिया। वैसे सियासत और अपराध का घालमेल नई बात नहीं है। इस मोर्चे पर भी कॉन्ग्रेस सबसे ज्यादा अनुभव रखती है। सत्तालोभ और तुष्टिकरण के लिए ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जिसे उसने ध्वस्त न किया हो।

यही कारण है कि भोला पांडेय के निधन को कॉन्ग्रेस नेता पार्टी की अपूरणीय क्षति बता रहे हैं। उन्हें अन्याय के खिलाफ आजीवन संघर्ष करने वाला बता रहे हैं। जिस घटना ने भोला पांडेय के कॉन्ग्रेस में आगे बढ़ने की नींव डाली वह दिसंबर 1978 का है। किशन आर वाधवानी की पुस्तक ‘इंडियन एयरपोर्ट्स (शॉकिंग ग्राउंड रियलिटीज़)’ के अनुसार, भोला और देवेंद्र पांडेय ने इंडियन एयरलाइंस के एक घरेलू उड़ान का अपहरण कर लिया था। देवेंद्र पांडे कॉन्ग्रेस के उन समर्थकों में से एक थे, जो अपने चहेते नेता के लिए कुछ भी कर गुजरने को तत्पर रहते थे।

इंदिरा गाँधी की रिहाई के लिए 27 साल के देवेंद्र पांडेय ने भोला पांडेय के साथ मिलकर फिल्मी स्टाइल में इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाइजैक कर लिया। दोनों ने क्रिकेट बॉल को रुमाल से ढककर उसे बम बताते हुए प्लेन को अगवा किया। दिल्ली जाने वाले प्लेन को वाराणसी ले गए। उस वक्त प्लेन में 132 यात्री सवार थे।

विमान अपहरण के बदले उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी कि रिहाई की माँग की थी, जिन्हें कि आपातकाल के बाद गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों ने यात्रियों को छोड़ने के लिए मुख्यतः तीन शर्तें रखी थीं;

  • इंदिरा गाँधी को रिहा किया जाए।
  • इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी के खिलाफ लगे सारे आरोप खत्म किए जाएँ।
  • इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार करने वाली केंद्र की जनता पार्टी की सरकार इस्तीफा दे।

हालाँकि, इस विमान अपहरण कि घटना को ‘राजनीतिक हास्य’ का नाम दिया गया क्योंकि पांडेय भाइयों ने विमान अपहरण के लिए बच्चों के खिलौने वाले हथियार का इस्तेमाल किया था। कुछ घंटों के लिए 132 यात्रियों को बंधक बनाए रखने के बाद, उन्होंने मीडिया की मौजूदगी में वाराणसी उतरने पर आत्मसमर्पण कर दिया था।

देवेंद्र पांडेय को इस मामले में 9 महीने, 28 दिन जेल में भी रहना पड़ा था। देश में जब फिर से इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी, तब इन पर लगे मुकदमों को वापस ले लिया गया।

गाँधी परिवार की भक्ति में उठाए गए इस कदम के कारण ही विमान अपहरण के इस संगीन अपराध के बावजूद ‘पुरस्कार स्वरूप’ कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा उन्हें पुरस्कृत किया गया था- पहले उन्हें 1980 में विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का टिकट मिला और बाद में लोकसभा के लिए। इस चुनाव में पांडेय जीत गए और उत्तर प्रदेश की विधान सभा के सदस्य बन गए।

भोलानाथ पांडेय ने वर्ष 1980 से 1985 और 1989 से 1991 तक दोआबा, बलिया से कॉन्ग्रेस विधायक के रूप में कार्य किया। दूसरी तरफ देवेंद्र पांडेय दो कार्यकाल तक संसद के सदस्य रहे और उत्तर प्रदेश के महासचिव के रूप में कॉन्ग्रेस पार्टी की सेवा की।

दोनों पांडेय बंधुओं को भारत में आपातकाल के दौरान जेल में सभी विपक्षी नेताओं की हत्या के विचार के साथ ही कई अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। भोलानाथ पांडेय आजमगढ़ जिले से थे और देवेंद्र पांडेय उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से। दोनों ही युवा कॉन्ग्रेस के सदस्य थे।

विमान का अपहरण करना कुछ सबसे बड़े अपराधों में से एक है और ऐसे व्यक्ति को आजीवन कारावास की न्यूनतम सजा से लेकर मौत की सजा तक हो सकती थी। लेकिन कॉन्ग्रेसी प्लेन अपहरणकर्ताओं को परिवार के लिए उठाए गए इस कदम के लिए संसद भेजकर सम्मानित किया गया।

विमान अपहरण की इस घटना के दशकों बाद, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की 2014 की एक रिपोर्ट से पता चला कि विमान अपहरणकर्ता भोलानाथ पांडेय लोकसभा चुनाव के दौरान सलेमपुर से कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार था। उन्हें कॉन्ग्रेस ने 1991,1996,1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लोकसभा का चुनाव लड़ाया। यह दूसरी बात है कि 7 बार टिकट मिलने के बाद भी वे संसद नहीं बन पाए।

‘जमानत नियम है और जेल अपवाद’: न्याय की प्रतीक्षा में हैं लाखों जिंदगी, वर्षों से जेलों में बंद हैं अंडरट्रायल कैदी

भारत की जेलों में अंडरट्रायल कैदियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। ये वे लोग हैं जिन्हें किसी अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, लेकिन उनका मामला अभी अदालत में चल रहा है और उनके खिलाफ कोई फैसला नहीं हुआ है। दुर्भाग्यवश कई अंडरट्रायल कैदी ऐसे हैं, जो वर्षों से बिना दोषी साबित हुए जेल में बंद हैं।

भारतीय संविधान के तहत हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। ‘निर्दोषता की धारणा’ एक प्रमुख सिद्धांत है, जिसका अर्थ है कि जब तक किसी व्यक्ति को अपराध का दोषी सिद्ध नहीं किया जाता, उसे निर्दोष माना जाएगा। इसके बावजूद, हमारे देश की कानूनी प्रक्रिया इतनी धीमी है कि अनेक अंडरट्रायल कैदी वर्षों तक जेल में बंद रहते हैं।

भारत की न्यायिक प्रणाली में मुकदमों की सुनवाई में अक्सर देरी होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं- जैसे कि न्यायालयों में लंबित मामलों की अधिकता, वकीलों की अनुपलब्धता, गवाहों की कमी और पुलिस की धीमी जाँच प्रक्रिया। यह सब मिलकर अंडरट्रायल कैदियों के मामलों को लंबा खींच देता है।

अक्सर देखा जाता है कि गरीब और असहाय कैदी, जो ज़मानत की राशि नहीं भर सकते, उन्हें ज़मानत मिलने के बावजूद जेल में रहना पड़ता है। ये लोग या तो अपनी वित्तीय स्थिति के कारण ज़मानत नहीं ले पाते या फिर उनके पास कानूनी सहायता नहीं होती। कई मामलों में अंडरट्रायल कैदियों को जेल में रखना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

जेल में लंबे समय तक रहना किसी व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति को प्रभावित करता है। इसके साथ ही उसके परिवार पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। कई बार तो यह देखा गया है कि अंडरट्रायल कैदियों की जेल में रहते-रहते मृत्यु तक हो जाती है और उनका मुकदमा अधूरा ही रह जाता है।

सरकार और न्यायपालिका ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ का गठन किया गया है, ताकि मामलों का निपटारा जल्द हो सके। इसके अलावा, गरीब कैदियों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का प्रावधान भी किया गया है। हालाँकि, अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। अंडरट्रायल कैदियों की समस्या हमारे देश की न्याय प्रणाली की गंभीर चुनौती है।

इसके समाधान के लिए आवश्यक है कि न्यायपालिका, सरकार और समाज मिलकर काम करें। न्याय में देरी अन्याय के समान है और अंडरट्रायल कैदियों की ज़िंदगी इस कथन की सच्चाई को दर्शाती है। न्याय व्यवस्था को तेज और सुलभ बनाना आज की प्रमुख आवश्यकता है, ताकि हर नागरिक को न्याय मिल सके और कोई भी निर्दोष वर्षों तक जेल में न रहे।

भारत में न्यायिक प्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय सुरक्षा संहिता (BSS) को लागू किया गया है। इन नए कानूनों में ज़मानत से जुड़े प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय प्रक्रिया तेज़ और सुलभ हो और दोषियों को दंड देने के साथ-साथ निर्दोषों को राहत मिले।

भारतीय न्याय संहिता के तहत ज़मानत देने के संबंध में नए दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। ज़मानत के प्रावधान अब अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनाए गए हैं, ताकि न्यायालयों द्वारा इसे लागू करने में कोई अस्पष्टता न हो। गंभीर अपराधों के मामलों में ज़मानत देने के लिए अब कड़े मानदंड तय किए गए हैं।

ऐसे मामलों में ज़मानत सिर्फ तभी दी जा सकेगी, जब अभियुक्त की ओर से पर्याप्त सबूत प्रस्तुत किए जाएँगे कि वह न तो न्याय प्रक्रिया में बाधा डालेगा और ना ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा। अपराध की प्रकृति, अभियुक्त का चरित्र और समाज में उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए ज़मानत दी जाएगी।

इसके साथ ही अपराध की गंभीरता के आधार पर ज़मानत की शर्तें निर्धारित की जाएँगी। ज़मानत राशि को अभियुक्त की आर्थिक स्थिति के अनुरूप तय किया जाएगा, ताकि गरीबों को ज़मानत प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभियुक्त द्वारा दी गई ज़मानत की राशि न्यायसंगत हो।

भारतीय सुरक्षा संहिता के तहत भी ज़मानत से जुड़े प्रावधानों में सुधार किए गए हैं। ऐसे अपराध जिनका संबंध राष्ट्र की सुरक्षा, आतंकवाद या संगठित अपराध से है, उनमें ज़मानत देने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। इन मामलों में ज़मानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन होगा, ताकि राष्ट्र की सुरक्षा को कोई खतरा न हो।

ज़मानत प्राप्त करने वाले अभियुक्तों पर निगरानी रखने के लिए अब विशेष तंत्र बनाए गए हैं। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के माध्यम से अभियुक्त की गतिविधियों पर नज़र रखी जाएगी। अंतराष्ट्रीय अपराधों के मामलों में ज़मानत के प्रावधान भी सख्त किए गए हैं और ज़मानत देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों का पालन किया जाएगा।

BNS और BSS के तहत ज़मानत के नए पारदर्शी, सुलभ और न्यायसंगत प्रावधान न्यायालयों को उचित दिशा-निर्देश देते हैं, जिससे न केवल दोषियों को दंडित करने में मदद मिलेगी, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों को भी राहत मिलेगी। न्यायपालिका और कानून व्यवस्था के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि ‘ज़मानत नियम है और जेल अपवाद’।

कौन कहता है कमजोर हुआ नरेंद्र मोदी का मैजिक, क्योंकि पब्लिक कह रही उन जैसा प्रधानमंत्री कोई नहीं: राहुल गाँधी के लिए दिल्ली अब भी बहुत दूर

प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी अभी भी सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं। ये बात मैं नहीं, बल्कि एक सर्वे कह रहा है। सर्वे में 49 प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी को सबसे बेहतर विकल्प बताया है। वहीं, सर्वे में शामिल 22 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो ये मानते हैं कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे।

इस साल हुए लोेकसभा चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं। हालाँकि, पिछली बार की तुलना में इस बार भाजपा की सीटों में कमी देखी गई है। पिछले लोकसभा चुनावों यानी साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 303 सीटें मिली थीं। यानी बहुमत के आँकड़े से 31 सीटें अधिक मिली थीं।

इस साल हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा को 240 सीटें मिलीं। यानी कि वह बहुमत का आँकड़ा नहीं छू पाई। इसके बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इकबाल कम हुआ है और भाजपा सरकार की लोकप्रियता में कमी आई है। इतना ही नहीं, भाजपा के जुड़े कार्यकर्ता भी ये मान रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार में पहले वाली बात नहीं है।

इसके पीछे वे तर्क देते हैं कि अपने फैसलों को लेकर अडिग रहने वाली मोदी सरकार अब अपने पाँव पीछे खींचने के लिए मजबूर हो गई है। इसके लिए वे वक्त बोर्ड बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजकर ठंडे बस्ते में डालने की बात हो या लेटरल एंट्री वाले अपने आदेश को वापस को लेने के मुद्दे का तर्क देते हैं। सोशल मीडिया पर सरकार समर्थक भी इसको लेकर आलोचना करते रहते हैं।

हालाँकि, सरकार लोगों की माँगों को वृहद दायरे में रखकर निर्णय ले रही है, ये बात कोई समझने को तैयार नहीं है। पिछले बार की भारी बहुमत वाली सरकार में भी पीएम नरेंद्र मोदी ने विरोध के बाद तीन कृषि कानूनों को वापस लिया था। यह सब जनता के हित और उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप सरकार की प्रतिक्रिया थी।

हालिया सर्वे उनके इस दावे के झुठला रहा है कि मोदी सरकार का जलवा कम हुआ है। दरअसल, इन्हीं विषयों पर जनता का मूड जानने के लिए आजतक ने सी-वोटर के साथ मिलकर ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे किया। इस सर्वे में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी की पसंद के आसपास कोई भी नेता नहीं है। राहुल गाँधी को उनसे आधे से भी कम लोग पीएम पद के लिए पसंद कर रहे हैं।

सर्वे में शामिल 49 प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी को सबसे बेहतर विकल्प बताया। सिर्फ 22 प्रतिशत लोगों इसके लिए राहुल गाँधी को विकल्प के रूप में चुना। इसी सर्वे में लोगों ने नरेंद्र मोदी को देश का अब तक का सबसे अच्छा प्रधानमंत्री बताया। सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत लोगों ने नरेंद्र मोदी का नाम लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया है। 12-12 प्रतिशत लोगों ने माना कि अब तक सबसे अच्छे प्रधानमंत्री में मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिया। वहीं, 10 प्रतिशत लोगों ने इंदिरा गाँधी और 5 प्रतिशत लोगों ने जवाहरलाल नेहरू का नाम लिया।

इस तरह, भाजपा सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इकबाल अभी भी कायम है। समय के साथ इन प्रतिशतों में कमी या बढ़ोत्तरी होती रहती है, लेकिन संपूर्ण आँकड़ों में कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने में नहीं आ रहा है। भाजपा सरकार अपना काम पहले की ही भाँति बेहद संजीदगी और देश के विकास को लक्षित करके कर रही है।