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जिधर मुस्लिम आबादी उस बूथ पर 5 साल में ही 117% बढ़ गए वोटर… हाई कोर्ट को भी कहना पड़ा- झारखंड की जमीन पर बस कर सुविधा भोग रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए

बांग्लादेशी घुसपैठ की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। हाल ही में झारखंड की की राजमहल विधानसभा में मुस्लिम बहुल बूथों पर बेतहाशा वोट बढ़ने को लेकर शिकायत की गई थी।

झारखंड हाई कोर्ट राज्य में बढ़ रही घुसपैठ को लेकर सख्त हो गया है। उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों से को राज्य से बेदखल करने को लेकर एक्शन का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान घुसपैठियों की राज्य में उपस्थिति के ऊपर भी रिपोर्ट माँगी है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को ये निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर राज्य में मौजूद घुसपैठियों का पता लगाए, उनको चिन्हित करे और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसको लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है।

हाई कोर्ट की यह सख्ती डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिखी है। याचिका में अदालत को बताया गया था कि राज्य के संताल परगना के जो भी जिले बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। नए मदरसे भी खुल रहे हैं। यहाँ 46 नए मदरसे खुले हैं। संताल परगना में गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले शामिल हैं।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी झारखंड की उस समस्या को दर्शाती है जो धीरे-धीरे नासूर बन चुकी है। संताल परगना के जिले पश्चिम बंगाल से सीमाएँ साझा करते हैं। पहले घुसपैठिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आते हैं और यहाँ से फैलते हुए वह झारखंड में आ जाते हैं।

नई नहीं है डेमोग्राफी बदलने की बात

झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी को रेखांकित करने वाली काफी सारी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च, 2024 में आजतक की एक रिपोर्ट में याचिका में बताई गई समस्या को लेकर ही बात की गई थी। आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है। लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की।

आजतक की रिपोर्ट में यह तक बताया गया था कि यहाँ घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी इस जमीन में खनन के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। कुल मिलाकर धीमे-धीमे इस इलाके की पहचान बदली जा रही है। बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में घुसते ही फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लेते हैं। इसमें इनकी मदद पहले से आकर बस चुके लोग भी करते हैं।

सिर्फ जमीन ही नहीं चुनाव में भी घुसपैठ

बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। इसके लिए आपको संताल के बड़े जिले साहिबगंज की राजमहल विधानसभा का रुख करना होगा। कुछ दिन पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि उनके इलाके में कुछ गाँवों में बेतहाशा मुस्लिम वोट बढ़े हैं। उन्होंने बताया था कि यह काम पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गाँवों में हुआ है।

अनंत ओझा के अनुसार, उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।

विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने को कहा है।

बताया जा रहा है इस इलाके में मतदाताओं के भौतिक सत्यापन पर भी विचार हो रहा है। हालाँकि, इस बीच समस्या का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में अब कोर्ट को भी इस मामले में उतरना पड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की सरकार इन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर क्या कार्रवाई करती है, यह देखने वाला होगा।

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अर्पित त्रिपाठी
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