Home Blog Page 809

6 बार मेडिकल टेस्ट से इनकार, मानसिक तौर पर अक्षम… ट्रेनिंग में VIP ट्रीटमेंट की डिमांड करने वाली IAS पूजा खेडकर के चयन पर उठ रहे सवाल

आईएएस बनने के बाद अधिक सम्मान पाने की लालसा में महिला ट्रेनी पूजा खेडकर की हर जगह आलोचना हो रही है। सरकार ने उनका ट्रांसफर पुणे से वाशिम कर दिया है लेकिन अब उनके उन सर्टिफिकेट्स पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिसके आधार पर वो आईएएस बनीं। इसके साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि कहीं बड़ा पद पाने के लिए पूजा खेडकर ने अपने पिता को लेकर कोई इंटरव्यू में झूठ तो नहीं बोले।

ये सवाल दरअसल एक वीडियो सामने आने से शुरू हुए हैं। वीडियो पूजा खेडकर एक मॉक इंटरव्यू का है जो उनकी कोचिंग वालों ने कराया था। इसमें वो कहती दिखाई दी थी कि उनके माता-पिता अलग हो चुके हैं और उनकी अपने पिता से कोई खास बात नहीं है। जबकि इस पूरे मामले में जहाँ पूजा खेडकर द्वारा अधिकारियों से अनुचित माँग की गई, उसमें सामने आया है कि पूजा के लिए उनके पिता भी अधिकारियों को धमकाते थे।

इसके अलावा ये भी पता चला है कि पूजा खेडकर के पिता ने हाल में लोकसभा चुनाव लड़ा था और उस समय उन्होंने अपने दायर हलफनामे में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं किया था कि वो अपनी पत्नी से अलग हो गए हैं। इसी आधार पर पूजा खेडकर की बात पर सवाल खड़े हो रहे हैं जो उन्होंने अपने मॉक इंटरव्यू में कही। उनके विकलांगता सर्टिफिकेट पर सवाल उठने के साथ ये भी कहा जा रहा है कि वो ओबीसीसी श्रेणी में भी क्रीमी लेयर में आती हैं इसलिए एक बार पूजा खेडकर की ज्वाइनिंग पर जाँच होनी जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि पूजा खेडकर ने साल 2023 में आईएएस परीक्षा को पास किया था उसमें उनकी 841 रैंक आई थी। अपने आपको उन्होंने इस सिलेक्शन प्रोसेस में मानसिक रूप से बीमार होने का दावा भी किया था। हालाँकि बाद में जब मेडिकल चेक अप की बारी आई तो वो अपनी ही बीमारी का सत्यापन करवाने के लिए 6 बार नहीं गईं। ऐसे में ये अब भी एक सवाल बना हुआ है कि अगर पूजा ने चेक अप कराने से मना किया तो फिर कैसे उनका सिलेक्शन हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि 2021 में पूजा को ओबीसी पीडब्ल्यूबीडी 1 में खेल प्राधिकरण में सहायक निदेशक के रूप में चुना गया था, लेकिन 2023 में, उन्होंने रहस्यमय तरीके से अपनी श्रेणी 4 एम पीडब्ल्यूबीडी 1 को पीडब्ल्यूबीडी 5 में बदल दिया और आईएएस के रूप में चयनित हो गईं।

बता दें कि पूजा खेडकर का पूरा मामला उस समय खुला है जब पुणे कलेक्टर ने उनकी गलत माँगों के चलते उनकी शिकायत मुख्य सचिव को भेजी। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने बताया था कि कैसे पूजा खेडकर वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए अधिकारियों को धमका रही हैं और परेशान कर रही हैं। उन्होंने अधिकारी अजय मोरे के चैंबर तक में कब्जा कर लिया था। वहीं अपनी निजी कार में वीआईपी नंबर लगाकर उसे चला रही थीं।

खच्चर पर लाद कर सोने की तस्करी, ITBP ने लद्दाख में चीन सीमा से दबोचे 2 तस्कर: 108 kg गोल्ड के साथ चाकू, टॉर्च और हथौड़ा भी बरामद

‘भारत तिब्बत सीमा पुलिस’ (ITBP) ने चीन सीमा से सोने की तस्करी कर रहे 2 तस्करों को गिफ्तार किया है। इनके पास से 108 किलो सोना बरामद किया गया है। दोनों आरोपित इस सोने को खच्चर पर लाद कर भारत की सीमा में घुस रहे थे। पकड़े गए आरोपितों के नाम 40 वर्षीय तेंजिन तारगी और 69 वर्षीय त्सेरिंग चांबा हैं। इन दोनों से पुलिस के अलावा कस्टम विभाग के अधिकारी भी पूछताछ कर रहे हैं। घटना मंगलवार (9 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पूर्वी लद्दाख की है। यहाँ भारत चीन सीमा से लगभग 1 किलोमीटर दूर नार्बुला टॉप के पास सिरिगापले में ITBP की टीम गश्त कर रही थी। तस्करी और घुसपैठ रोकने के लिए सक्रिय यह गश्ती दल चिश्मूले, नार्बुला टॉप, जक्ले और जक्ला क्षेत्र की तरफ जा रहा था। मंगलवार की दोपहर लगभग डेढ़ बजे में ITBP की टीम को खच्चरों के साथ 2 संदिग्ध लोग दिखाई दिए। दोनों का पीछा कर के उनको रुकने की चेतावनी दी गई। आखिरकार दोनों रुक गए और उनकी तलाशी ली गई।

इनकी तलाशी के दौरान खच्चरों की पीठ पर सोना पाया गया। सोने का वजह 108 किलो निकला। इस सोने को खच्चरों की पीठ पर छिपा कर रखा गया था। सोने के अलावा इनके पास से दूरबीन, टॉर्च, खाने-पीने का सामान, कुछ अन्य चीनी वस्तुएँ, दूध, 2 चाकू और एक हथौड़ा भी बरामद हुआ। डिप्टी कमांडेंट दीपक भट्ट के नेतृत्व में ITBP की टीम ने दोनों ने पूछताछ की तो वो सोने को ले कर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। आखिरकार इन दोनों को कैम्प लाया गया। इसी के साथ पुलिस और कस्टम विभाग को भी सूचित कर दिया गया था।

सभी सुरक्षा एजेंसियों की सामूहिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपित सोने को खच्चरों पर लाद कर चीन की सीमा से भारत में घुसे थे। ये दोनों तस्कर हैं जिनके नाम तेंजिन तारगी और त्सेरिंग चांबा हैं। बरामद सोने को जब्त कर लिया गया है जिसकी कीमत करोड़ों रुपयों में बताई जा रही है। जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने की कोशिश में जुटी हैं कि दोनों आरोपित सोना कहाँ से ला रहे थे और इसको भारत में किसको डिलीवरी देनी थी। फ़िलहाल पूरे मामले की जाँच जारी है। इस कार्रवाई को ITBP की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

भारतीय लड़कियों से खाड़ी देशों में करवाया जा रहा मुजरा, सैफुद्दीन है शामिल: पीड़िता ने दिल्ली सहित कई महानगरों की बताई हालात, कॉन्ग्रेस नेता का भी नाम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 मई 2024 को एक हिन्दू लड़की ने अपने मुस्लिम शौहर के खिलाफ हिंसा का केस दर्ज करवाया था। इसमें 6 नामजद सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में अब पीड़िता सामने आई है। उसने लव जिहाद की गहरी साजिश का आरोप लगाया है। पीड़िता ने इस पूरे नेटवर्क में कॉन्ग्रेस के एक नेता को भी शामिल बताया है।

पीड़िता मूलतः UP के बहराइच जिले रहने वाली है, जबकि आरोपित कर्नाटक के बीदर से रहने वाले हैं। पीड़िता ने इस मामले में लखनऊ के गुडम्बा थाने में केस दर्ज कराया है। पीडिता ने अपनी शिकायत में बताया कि वो पिछले 6-7 वर्षों से दुबई और बहरीन में रहकर काम करती थी। बहरीन में उसकी मुलाक़ात कर्नाटक के बीदर निवासी सैफुद्दीन से हुई थी।

सैफुद्दीन ने पीड़िता से दोस्ती की और बहरीन में उससे रेप किया। इसके बाद पीड़िता ने बहरीन में बलात्कार का केस दर्ज करवाया। रेप की वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। इसके बाद पीड़िता को इस्लाम कबूल करने की सलाह दी गई थी। आरोप है कि सैफुद्दीन के परिजनों के दबाव में 13 फरवरी 2024 को पीड़िता ने धर्मांतरण करके सैफुद्दीन से निकाह किया।

गर्भावस्था के 5 माह पूरे होने पर सैफुद्दीन ने पीड़िता को इलाज के बहाने मुंबई भेजा। यहाँ साजिशन पीड़िता का गर्भपात करवा दिया। वहाँ से सैफुद्दीन पीड़िता को अपने घर कर्नाटक के बीदर ले गया। वहाँ लड़की को सैफुद्दीन के भाई सबीरूद्दीन और 3 अन्य लोगों ने अपनी बहन के साथ मिलकर उसका शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।

लखनऊ की पीड़िता ने अपनी शिकायत में सैफुद्दीन की पूर्व प्रेमिका मोनिका और कुछ अन्य लोगों के नाम दर्ज करवाए हैं। इसके आधार पर सैफुद्दीन, उसके 4 भाई, बहन और पूर्व प्रेमिका मोनिका पर 498A, 323 और 313 IPC के तहत FIR दर्ज कर ली थी। इस मामले की FIR से संबंधित कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

अब पीड़िता ने मीडिया को अपनी प्रताड़ना को विस्तार से बताया है। ABP न्यूज़ से बात करते हुए लड़की ने बताया कि सैफुद्दीन उसे एक क्लाइंट के तौर पर मिला था। कुछ दिनों की बातचीत में वो पीड़िता पर डोरे डालने लगा। वह शराब में गोलियाँ डालकर पीता था। वह खुद को अपने घर से बेहद परेशान बताया करता था।

पीड़िता ने बताया कि वह अपनी बीवी और गर्लफ्रेंड से खुद को परेशान बताता था। धीरे-धीरे सैफुद्दीन ने पीड़िता को अपने साथ निकाह के लिए तैयार करने की कोशिश करने लगा। एक दिन आरोपित सैफुद्दीन ने लड़की को नशीली दवा देकर उसका रेप किया और फिर अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा।

पीड़िता ने आगे बताया कि सैफुद्दीन का पेशा लड़कियों को इमोशनल ब्लैकमेल करके उन्हें अपने जाल में फँसाना है। ये लड़कियाँ मुंबई, दिल्ली और गुजरात आदि प्रदेशों की हैं। इन लड़कियों को होटल और ब्यूटी पॉर्लर की जॉब दिलाने का लालच दिया जाता है। बाद में लड़कियों को खाड़ी देशों में बेच दिया जाता और उनसे मुजरा करवाया जाता है।

पीड़िता का दावा है कि वो कई लड़कियों को जानती है, जो बहरीन के अलग-अलग बार में काम कर रही हैं। इसी दौरान पीड़िता ने बताया कि बीदर में कॉन्ग्रेस पार्टी का एक नेता है, जो सैफुद्दीन का रिश्तेदार है। इस रिश्तेदार पर भी आरोप है कि उसने न सिर्फ पीड़िता के साथ हाथापाई की, बल्कि उसका रेप भी करने का प्रयास किया।

शिक्षकों की डिजिटल हाज़िरी के मामले में योगी सरकार ने बदला आदेश: जिस तरह अखिलेश अभी कर रहे राजनीति, पिता मुलायम ने नक़ल कानून का विरोध कर बनाई थी सरकार

उत्तर प्रदेश में एक नया नियामक लागू किया गया, जिसके तहत शिक्षकों को कहा गया कि वो डिजिटल रूप से हाज़िरी लगाएँ। हालाँकि, इसके विरोध में शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल स्कूलों की टाइमिंग 8 बजे से लेकर 2 बजे तक हैं, हालाँकि, भाजपा सरकार ने आदेश जारी किया कि शिक्षकों को पौने 8 बजे हाज़िरी बनानी पड़ेगी। अब आदेश को मोडिफाई कर के कहा गया है कि शिक्षकों को आधे घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

शिक्षकों को एक तरह से ये वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है, जिसके तहत वो साढ़े 8 बजे तक अटेंडेंस बना सकते हैं, लेकिन उन्हें सफाई देनी पड़ेगी कि वो क्यों देर से आए हैं। उम्मीद है कि इसके बाद शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन कम होगा। ‘प्रेरणा पोर्टल’ के तहत ‘डिजिटल रजिस्टर’ की व्यवस्था की गई है। यूपी में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। शिक्षकों के देर से आने पर उनका वेतन काटे जाने की व्यवस्था की गई थी।

अगर 8 जुलाई, 2024 की बात करें तो उस दिन 6 लाख शिक्षकों में से मात्र 2% ने रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। केवल 16,015 शिक्षकों ने अटेंडेंस बनाया था। 75 में से 14 जिलों में शत प्रतिशत लोगों ने इसका बहिष्कार किया। शाहजहाँपुर, पीलीभीत और संत कबीर नगर इन्हीं जिलों में से एक है। बरेली में 1, रामपुर में 2, और महराजगंज में 9 शिक्षकों ने ही हाज़िरी बनाई। कई शिक्षकों ने हाथ पर काली पट्टी बाँध कर ड्यूटी की थी।

भाजपा के विधान पार्षद बाबूलाल तिवारी ने खुद CM योगी आदित्यनाथ से मिल कर इस संबंध में सूचनाओं को साझा किया। हाज़िरी के लिए शिक्षकों के चेहरे पर आधारित सिस्टम भी की गई थी, लेकिन इसका भी विरोध किया गया। अखिलेश यादव ने वोट बैंक को देख कर प्रदर्शनकारी शिक्षकों को समर्थन दिया। इससे इतिहास की भी याद आ जाती है, जब भाजपा सरकार में ही कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते नक़ल विरोधी कानून 1992 में पारित किया गया था।

उस समय राजनाथ सिंह यूपी के शिक्षा मंत्री थे। इस कानून के तहत पुलिस को परीक्षा केंद्रों में घुस कर जाँच व कार्रवाई करने की अनुमति दी गई, लेकिन, मुलायम सिंह यादव ने इसका फायदा उठाया। उस दौरान 17% छात्र-छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दी थी। 1994 में मुलायम सिंह यादव ने सरकार बनते ही अपने पहले निर्णयों में इस कानून को रद्द किया। अब अखिलेश यादव उसी तरह की राजनीति कर रहे हैं। राजनाथ सिंह के CM रहते भी यूपी में भाजपा की हार हुई थी।

क्या CBI को जाँच करने से रोक सकते हैं राज्य? बंगाल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, केंद्र ने कहा – ये स्वतंत्र जाँच एजेंसी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 जुलाई 2024) को कहा कि सीबीआई की सामान्य सहमति रद्द करने के बावजूद पश्चिम बंगाल में एफआईआर दर्ज करने को लेकर पश्चिम बंगाल की याचिका सुनवाई योग्य है। इस मामले में ममता बनर्जी वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसका केंद्र सरकार ने विरोध किया था।

केंद्र सरकार द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बीआर गवई और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य की शिकायत में कार्रवाई का कारण बताया गया है। पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दी गई इस दलील को भी खारिज कर दिया कि राज्य ने शिकायत में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है।

दरअसल, मामला साल 2018 का है। उस दौरान बंगाल की सरकार ने CBI जाँच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले लिया था। इसके बाद भी एजेंसी पश्चिम बंगाल में अपराधों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना जारी रखी। कोर्ट ने कहा कि सामान्य सहमति वापस लेने के बाद एजेंसी जाँच जारी नहीं रख सकती थी।

वहीं, बंगाल की सरकार ने तर्क दिया कि CBI केंद्र सरकार के अधीन काम कर रही है। खंडपीठ ने कहा कि यह निर्धारित करने के लिए कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य है। कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मुकदमा कानूनी मुद्दा उठा रहा है कि क्या सामान्य सहमति वापस लेने के बाद CBI एफआईआर दर्ज करना और DSPE Act की धारा 6 का उल्लंघन करने वाले मामलों की जाँच करना जारी रख सकती है।”

यह मुकदमा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत भारत सरकार के खिलाफ दायर किया गया था। इसमें राज्य सरकार ने तर्क दिया कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत CBI का गठन किया गया है। राज्य ने कहा कि सहमति रद्द करने के बावजूद सीबीआई ने राज्य में हुए अपराधों के संबंध में एफआईआर दर्ज करना जारी रखा।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 131 संघ और राज्यों के बीच विवाद को खत्म करने के लिए है। यह CBI पर ये लागू नहीं होता है, क्योंकि यह केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं है। इसलिए यह दायर मुकदमा केंद्र सरकार के खिलाफ है।

मौलवी ने गला घोंट कर की हिन्दू छात्र को मारने की कोशिश: दरगाह में जामुन तोड़ते देख कर भड़का, मुजीब शेख गिरफ्तार

महाराष्ट्र के बीड जिले में एक दरगाह में लगे जामुन के पेड़ से जामुन का फल तोड़ने पर मौलवी और उसके साथी ने हिंदू बच्चों पर हमला कर दिया। इस दौरान मौलवी ने हिंदू बच्चे का गला भी घोंट दिया। यही नहीं, कई बच्चों को डंडे से भी पीटा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं उसका एक साथी फरार है।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार (08 जुलाई 2024) को डिंड्रूड (मजलगाँव) में मौलवी ने एक बच्चे का गला घोंटने की भी कोशिश की। एक छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका बीड के एक सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोपितों की पहचान मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख और समीर अत्तर कसम के रूप में हुई है। पुलिस ने मौलवी मुजीब को गिरफ्तार कर लिया है। घायल छात्र की माँ की शिकायत के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ दिनदरूद थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि समीर अत्तर कसम अभी भी फरार है।

जानकारी के अनुसार , 13 वर्षीय छात्र तेजस नवनाथ कटारे और रत्नेश्वर रुस्तम ठोंबरे डिंडरूड के रहने वाले हैं। वे माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। स्कूल से घर लौटते समय बच्चे जिला परिषद स्कूल के पास महबूब सुभानी दरगाह के पास एक पेड़ से जामुन खाने गए थे। इसी दौरान मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख और समीर अत्तर कसम वहाँ आए और उन्होंने लाठी से उन पर बेरहमी से हमला करना शुरू कर दिया। इस हमले में 3 छात्र घायल हो गए। एक छात्र डरकर भाग गया। मारपीट के दौरान आरोपित मौलवी ने तेजस के सिर पर डंडे से वार किया। उसने गला दबाकर बच्चे की हत्या करने की भी कोशिश की। तेजस गंभीर रूप से घायल हो गया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उसका सीटी स्कैन कराया गया है और उसे मेडिकल निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसका इलाज बीड के सरकारी अस्पताल में चल रहा है। जबकि रत्नेश्वर थोम्बरे को मामूली चोट आई है।

तेजस की माँ वंदना कटारे ने डिंड्रूड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109, 118(1) और 3(5) के तहत एफआईआर (संख्या 142/2024) दर्ज की है। पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है और दूसरे की तलाश चल रही है।

चाँद दिखा तो बिना अनुमति निकाला मुहर्रम का जुलूस, फिलिस्तीन के झंडे लहरा कर लगाए नारे: मोहम्मद साहिल और गफ्फार का बेटा गोरख नामजद

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक जुलूस में कुछ लोगों को नारेबाजी करते देखा जा सकता है। एक व्यक्ति द्वारा इसी जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा भी लहराया जा रहा है। कई यूजर्स ने इस घटना पर पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए मोहम्मद साहिल और गफ्फार के बेटे गोरख को नामजद किया है। 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर के आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना रविवार (7 जुलाई 2024) की है।

यह घटना भदोही जिले के थानाक्षेत्र औराई की है। वायरल हो रहे वीडियो का संज्ञान ले कर पुलिस ने अपनी तरफ से इस मामले की FIR दर्ज की है। सोमवार (8 जुलाई) को एक पुलिस सब इंस्पेक्टर द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया है कि उन्होंने ट्विटर पर अपने क्षेत्र का एक वीडियो वायरल होते देखा। वीडियो ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ द्वारा शेयर कर के पुलिस से कार्रवाई की माँग की गई थी। फिलिस्तीनी झंडा लहराए जाने के इस वीडियो की जाँच के दौरान पता चला कि वह 7 जुलाई को भदोही के माधव बाजार में बनाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा यह जुलूस मुहर्रम को चाँद दिखने के दौरान निकाला गया था। इस जुलूस के लिए प्रशासन से कोई परमिशन भी नहीं ली गई थी। फिलिस्तीनी झंडे लहराने वालों में मोहम्मद साहिल और गफ्फार के बेटे गोरख को नामजद किया गया है। ये दोनों भदोही के ही अलग-अलग गाँवों के निवासी है। पुलिस का आरोप है कि साहिल और गोरख की हरकत गैरकानूनी है और इस से समाज में सौहार्द को नुकसान पहुँचा है। पुलिस के अनुसार, आरोपितों की वजह से समाज में वैमनस्यता फैली और आपसी घृणा की भावना पैदा हुई है।

पुलिस की FIR में दोनों नामजद आरोपितों के साथ कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी शामिल बताया गया है। इस तहरीर पर गफ्फार के बेटे गोरख और बादशाह नाम से चर्चित मोहम्मद साहिल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। जुलूस में शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

‘एल्विश यादव हाजिर हों’: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में YouTuber को ED का नोटिस, करीबियों में शामिल रिजॉर्ट मालिकों से लेकर फैजलपुरिया तक रडार पर

साँपों के जहर केस में पहले ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे यूट्यूबर एल्विश यादव की मुश्किलों में इजाफा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन जारी कर के उनको पूछताछ के लिए पेश होने का आदेश दिया है। नोटिस के मुताबिक, एल्विश को 23 जुलाई को ED की लखनऊ यूनिट के आगे पेश होना है। यह नोटिस मनी लॉन्ड्रिंग केस में जारी हुई है। इस से पहले जारी नोटिस में ED ने एल्विश को सोमवार (8 जुलाई, 2024) को पेश होने का आदेश दिया था। हालाँकि, तब विदेश में होने की बात कहते हुए एल्विश पेश नहीं हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2024 में ED ने एल्विश यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस केस के बाद एल्विश यादव के बैंक खातों के साथ महँगी कारों और अन्य खर्चों की डिटेल जुटाई जा रही है। 23 जुलाई को ED के सवालों में इसको भी शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा एल्विश के कुछ अन्य साथियो पर भी ED की नजर है। इनमें नोएडा के रिजॉर्ट मालिक और होटल कारोबारी आदि शामिल हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इन सभी से सवाल-जवाब हो सकता है।

यह कार्रवाई ED की लखनऊ यूनिट कर रही है। इस से पहले प्रवर्तन निदेशालय ने एल्विश यादव को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर के 8 जुलाई को पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, तब एल्विश ने खुद को विदेश में बताया था। तब नोटिस का जवाब देते हुए एल्विश ने हाजिर होने के लिए कुछ दिनों का समय माँगा था। इस बीच में ED ने हरियाणा के गायक राहुल यादव से भी पूछताछ की है। माना जा रहा है कि ED दोबारा राहुल यादव उर्फ़ राहुल फाजिलपुरिया को पूछताछ के लिए बुला सकती है।

बताते चलें कि एल्विश पर रेव पार्टियों में साँपों का जहर सप्लाई करने का आरोप है। नोएडा पुलिस ने उन्हें 17 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। 5 दिन जेल में बिताने के बाद एल्विश 22 मार्च को जमानत पर रिहा हुए थे। इस दौरान उनकी माता और पिता उन्हें बेगुनाह बताते रहे। जाँच के बाद नोएडा पुलिस एल्विश के खिलाफ कोर्ट में 1200 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। चार्जशीट में एल्विश पर रेव पार्टी करना, ड्रग्स की सप्लाई करना और साँपों की तस्करी के आरोप लगाए गए है। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

ऑस्ट्रिया से यूक्रेन-रूस जंग पर PM मोदी का बड़ा संदेश, कहा- संघर्ष का समाधान रणभूमि से नहीं, यह युद्ध का दौर नहीं : अमेरिका ने हस्तक्षेप की लगाई थी गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना से स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन-रूस संघर्ष का समाधान युद्धभूमि से नहीं निकलने वाला है। उन्होंने दोहराया है कि यह दौर युद्ध का नहीं है। उन्होंने ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर के साथ प्रेस बयान में यह बातें की हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने और चांसलर नेहमर ने विश्व में चल रहे विवादों, रूस-यूक्रेन और पश्चिमी एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है। मैंने पहले भी कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है। समस्याओं का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता है। कहीं भी मासूम लोगों की जान की हानि स्वीकार्य नहीं है।”

पीएम मोदी ने कहा ऑस्ट्रिया और भारत शांति की बहाली चाहते हैं और इसके लिए हर प्रकार का सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान ख़ुशी जताई कि उनके तीसरे कार्यकाल में उन्हें ऑस्ट्रिया जाने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि 41 वर्षो के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री ऑस्ट्रिया पहुँची है।

उन्होंने इस दौरान बताया कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सम्बन्धों के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया न्याय और लोकतंत्र में विश्वास में रखते हैं और दोनों देश समान हित रखते हैं। पीएम मोदी ने यह भी ऐलान किया है कि अब ऑस्ट्रिया और भारत के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी में बदला दिया जाएगा।

दोनों देश अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, अक्षय ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रो में मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया को इंटरनेशनल सोलर अलायन्स में शामिल होने का न्योता भी दिया है। पीएम मोदी ने यहाँ से संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की माँग भी की है।

पीएम मोदी के साथ मौजूद ऑस्ट्रिया के चांसलर नेहमर ने भी इस दौरान भारत के वर्तमान में विश्व में रोल को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी रूस से होकर उनके देश पहुँचे हैं ऐसे में वह स्वयं उनसे रूस की स्थिति के विषय में जानना चाहते थे। उन्होंने कहा है कि भारत का ऑस्ट्रिया का रोल शान्ति के मामले में काफी महत्वपूर्ण है।

चांसलर नेहमर ने इस दौरान ऑस्ट्रिया और भारत के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच वर्तमान में लगभग ₹20,000 करोड़ का व्यापार हो रहा है और ऑस्ट्रिया की 150 से अधिक कम्पनियाँ भारत में व्यापार कर रही हैं। उन्होंने भारत में तेजी से बने इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ़ भी की।

गौरतलब है कि पीएम मोदी तीन दिवसीय विदेश (8-10 जुलाई) दौरे पर हैं। वह रूस में विदेश यात्रा पूरी करने के बाद मंगलवार को ऑस्ट्रिया पहुँचे थे। यहाँ ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने उनके एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। पीएम मोदी ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमार के साथ आधिकारिक बैठक में शामिल हुए हैं।

इससे पहले अमेरिका ने पीएम मोदी के रूस दौरे को लेकर कहा था कि भारत अपनी पुरानी दोस्ती के बल पर रूस-यूक्रेन संघर्ष रोक सकता है।

विश्वनाथ के घर रवींद्र को बुलाया, कहा- ईसाई बन जाओ… हाई कोर्ट ने कहा- धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं, जमानत से इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि भारत में लोगों को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें दूसरों को धर्मांतरित करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरित होने वाले व्यक्ति दोनों को संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का समान अधिकार है।

न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने कहा, “अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता के व्यक्तिगत अधिकार को धर्मांतरण के सामूहिक अधिकार के रूप में नहीं समझा जा सकता। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और जिस व्यक्ति का धर्मांतरण किया जाना है, दोनों का समान रूप से है।”

इसके अलावा, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021, गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण के खिलाफ इस संवैधानिक प्रावधान को बनाए रखने के इरादे से अधिनियमित किया गया था। इस मामले में श्रीनिवास राव नायक द्वारा जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

दरअसल, अदालत महाराजगंज जिले के निचलौल थाने में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार, मुखबिर को सह-आरोपित विश्वनाथ के घर बुलाया गया था। वहाँ कई ग्रामीण, जिनमें से ज़्यादातर अनुसूचित जाति के थे, मौजूद थे।

विश्वनाथ, उसके भाई बृजलाल, श्रीनिवास राव नायक और रवींद्र ने उसे ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा था। उसने परेशानियों से राहत और बेहतर जीवन का वादा किया। कुछ ग्रामीण पहले ही धर्म परिवर्तन कर चुके थे और प्रार्थना करने लगे थे। मुखबिर बहाना बनाकर वहाँ से निकल गया और पुलिस को घटना की सूचना दी।

जमानत के याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि धर्मांतरण में उसकी कोई संलिप्तता नहीं थी। वह आंध्र प्रदेश से है और सह-आरोपित में से एक का घरेलू सहायक था। वकील ने दावा किया कि 2021 के अधिनियम के अनुसार एफआईआर में किसी भी धर्मांतरणकर्ता की पहचान नहीं की गई है। इसलिए गवाहों के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई अनुचित प्रभाव नहीं था।

इसके अतिरिक्त, ईसाई धर्म अपनाने वाले किसी भी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है। न्यायालय ने कहा कि संविधान अपने नागरिकों को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह किसी भी नागरिक को एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण की अनुमति नहीं देता है।

अदालत ने कहा, “इस मामले में मुखबिर को दूसरे धर्म में धर्मांतरण के लिए राजी किया गया था। यह आवेदक को जमानत देने से इनकार करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त है, क्योंकि इससे पता चलता था कि एक धर्मांतरण कार्यक्रम चल रहा था। इसमें अनुसूचित जाति समुदाय से कई ग्रामीणों को हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, “ऐसा कोई कारण नहीं है कि मुखबिर ने आवेदक को, जो आंध्र प्रदेश का निवासी है, गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के झूठे मामले में फँसाया। न तो जमानत आवेदन में और न ही बहस के दौरान, यह प्रस्तुत किया गया है कि मुखबिर और आवेदक के बीच कोई दुश्मनी थी।” इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।