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ऑस्ट्रिया से यूक्रेन-रूस जंग पर PM मोदी का बड़ा संदेश, कहा- संघर्ष का समाधान रणभूमि से नहीं, यह युद्ध का दौर नहीं : अमेरिका ने हस्तक्षेप की लगाई थी गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना से स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन-रूस संघर्ष का समाधान युद्धभूमि से नहीं निकलने वाला है। उन्होंने दोहराया है कि यह दौर युद्ध का नहीं है। उन्होंने ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर के साथ प्रेस बयान में यह बातें की हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने और चांसलर नेहमर ने विश्व में चल रहे विवादों, रूस-यूक्रेन और पश्चिमी एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है। मैंने पहले भी कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है। समस्याओं का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता है। कहीं भी मासूम लोगों की जान की हानि स्वीकार्य नहीं है।”

पीएम मोदी ने कहा ऑस्ट्रिया और भारत शांति की बहाली चाहते हैं और इसके लिए हर प्रकार का सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान ख़ुशी जताई कि उनके तीसरे कार्यकाल में उन्हें ऑस्ट्रिया जाने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि 41 वर्षो के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री ऑस्ट्रिया पहुँची है।

उन्होंने इस दौरान बताया कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सम्बन्धों के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया न्याय और लोकतंत्र में विश्वास में रखते हैं और दोनों देश समान हित रखते हैं। पीएम मोदी ने यह भी ऐलान किया है कि अब ऑस्ट्रिया और भारत के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी में बदला दिया जाएगा।

दोनों देश अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, अक्षय ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रो में मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया को इंटरनेशनल सोलर अलायन्स में शामिल होने का न्योता भी दिया है। पीएम मोदी ने यहाँ से संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की माँग भी की है।

पीएम मोदी के साथ मौजूद ऑस्ट्रिया के चांसलर नेहमर ने भी इस दौरान भारत के वर्तमान में विश्व में रोल को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी रूस से होकर उनके देश पहुँचे हैं ऐसे में वह स्वयं उनसे रूस की स्थिति के विषय में जानना चाहते थे। उन्होंने कहा है कि भारत का ऑस्ट्रिया का रोल शान्ति के मामले में काफी महत्वपूर्ण है।

चांसलर नेहमर ने इस दौरान ऑस्ट्रिया और भारत के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच वर्तमान में लगभग ₹20,000 करोड़ का व्यापार हो रहा है और ऑस्ट्रिया की 150 से अधिक कम्पनियाँ भारत में व्यापार कर रही हैं। उन्होंने भारत में तेजी से बने इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ़ भी की।

गौरतलब है कि पीएम मोदी तीन दिवसीय विदेश (8-10 जुलाई) दौरे पर हैं। वह रूस में विदेश यात्रा पूरी करने के बाद मंगलवार को ऑस्ट्रिया पहुँचे थे। यहाँ ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने उनके एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। पीएम मोदी ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमार के साथ आधिकारिक बैठक में शामिल हुए हैं।

इससे पहले अमेरिका ने पीएम मोदी के रूस दौरे को लेकर कहा था कि भारत अपनी पुरानी दोस्ती के बल पर रूस-यूक्रेन संघर्ष रोक सकता है।

विश्वनाथ के घर रवींद्र को बुलाया, कहा- ईसाई बन जाओ… हाई कोर्ट ने कहा- धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं, जमानत से इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि भारत में लोगों को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें दूसरों को धर्मांतरित करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरित होने वाले व्यक्ति दोनों को संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का समान अधिकार है।

न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने कहा, “अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता के व्यक्तिगत अधिकार को धर्मांतरण के सामूहिक अधिकार के रूप में नहीं समझा जा सकता। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और जिस व्यक्ति का धर्मांतरण किया जाना है, दोनों का समान रूप से है।”

इसके अलावा, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021, गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण के खिलाफ इस संवैधानिक प्रावधान को बनाए रखने के इरादे से अधिनियमित किया गया था। इस मामले में श्रीनिवास राव नायक द्वारा जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

दरअसल, अदालत महाराजगंज जिले के निचलौल थाने में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार, मुखबिर को सह-आरोपित विश्वनाथ के घर बुलाया गया था। वहाँ कई ग्रामीण, जिनमें से ज़्यादातर अनुसूचित जाति के थे, मौजूद थे।

विश्वनाथ, उसके भाई बृजलाल, श्रीनिवास राव नायक और रवींद्र ने उसे ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा था। उसने परेशानियों से राहत और बेहतर जीवन का वादा किया। कुछ ग्रामीण पहले ही धर्म परिवर्तन कर चुके थे और प्रार्थना करने लगे थे। मुखबिर बहाना बनाकर वहाँ से निकल गया और पुलिस को घटना की सूचना दी।

जमानत के याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि धर्मांतरण में उसकी कोई संलिप्तता नहीं थी। वह आंध्र प्रदेश से है और सह-आरोपित में से एक का घरेलू सहायक था। वकील ने दावा किया कि 2021 के अधिनियम के अनुसार एफआईआर में किसी भी धर्मांतरणकर्ता की पहचान नहीं की गई है। इसलिए गवाहों के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई अनुचित प्रभाव नहीं था।

इसके अतिरिक्त, ईसाई धर्म अपनाने वाले किसी भी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है। न्यायालय ने कहा कि संविधान अपने नागरिकों को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह किसी भी नागरिक को एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण की अनुमति नहीं देता है।

अदालत ने कहा, “इस मामले में मुखबिर को दूसरे धर्म में धर्मांतरण के लिए राजी किया गया था। यह आवेदक को जमानत देने से इनकार करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त है, क्योंकि इससे पता चलता था कि एक धर्मांतरण कार्यक्रम चल रहा था। इसमें अनुसूचित जाति समुदाय से कई ग्रामीणों को हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, “ऐसा कोई कारण नहीं है कि मुखबिर ने आवेदक को, जो आंध्र प्रदेश का निवासी है, गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के झूठे मामले में फँसाया। न तो जमानत आवेदन में और न ही बहस के दौरान, यह प्रस्तुत किया गया है कि मुखबिर और आवेदक के बीच कोई दुश्मनी थी।” इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में गिरफ्तार हुआ माजिद फ्रीमैन, लीसेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में रहा था सबसे आगे

इंग्लैंड के लीसेस्टर में साल 2022 में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हिंदू मंदिरों पर हमले के लिए लोगों को भड़काने वालों में मुख्य चेहरा रहे माजिद फ्रीमैन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसपर आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकवाद से जुड़े अपराधों से जुड़े होने के आरोप लगाए गए हैं।

माजिद फ्रीमैन गाजा पर इजरायल की कार्रवाई का विरोध करता रहा है और 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हुए आतंकी हमले का समर्थन करता रहा है। यही नहीं, वो सोशल मीडिया पर फिलिस्तीन का समर्थन करने के लिए जाना जाता है। ब्रिटेन के चुनाव प्रचार के दौरान वो लेबर पार्टी के सांसद जॉन एशवर्थ से भी भिड़ा था। एशवर्थ ने फिलिस्तीन का समर्थन करने वालों पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद माजिद ने उनका तीखा विरोध किया था।

लीसेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में सबसे आगे था माजिद फ्रीमैन

माजिद फ्रीमैन लीसेस्टर का एक स्थानीय मुस्लिम “कार्यकर्ता” है, जो समस्या पैदा करने वाला और चरमपंथी इस्लामी विचारों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। लीसेस्टर हिंसा के दौरान, माजिद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली फर्जी खबरें फैलाने में सबसे आगे था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 28 अगस्त 2022 को टी-20 मैच में हुई हार के बाद भारतीय ध्वज का अपमान होने के बाद झड़प हो गई थी। झड़प के बाद हिंदुओं ने माहौल को शांत किया और उस व्यक्ति की मदद की जिसने भारतीय ध्वज छीनकर उसका अपमान किया था। हालाँकि, माजिद फ्रीमैन की कहानी कुछ और ही थी।

लीसेस्टर पुलिस ने 30 अगस्त को जब मुस्लिम संगठनों से प्रभावित होकर झूठ बोला कि हिंदू ‘मुस्लिमों को मारो’ के नारे लगा रहे हैं (बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी जाँच में ऐसा कोई नारा नहीं सुना गया था), तो माजिद ने हिंदुओं के खिलाफ दंगा भड़काने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

शौकत एडम का समर्थक है माजिद फ्रीमैन

माजिद फ्रीमैन एक इस्लामिक कट्टरपंथी है। वो 2022 के लीसेस्टर प्रकरण के दौरान हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में सबसे आगे था, तो फिलिस्तीन समर्थक शौकत एडम का भी समर्थक है।

माजिद ने अपने ट्वीट्स में शौकत का खूब समर्थन किया। उसने एक ट्वीट में लिखा “पिछले हफ़्ते की यह बात याद है? @JonAshworth को अभी इसका पछतावा हो रहा होगा। सबसे बढ़िया आदमी @ShockatAdam ने जीत हासिल की और अब लीसेस्टर साउथ में उनकी जगह ले ली है।”

शौकत एडम की तरह ही माजिद फ्रीमैन भी उन्मादी मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा को सही ठहराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता। ऐसे में उसी की तर्ज पर फ्रीमैन ने लगातार फर्जी खबरें फैलाकर और अपने सह-धर्मियों को ‘हिंदुओं को सबक सिखाने’ के लिए उकसाकर इसे एक स्तर आगे बढ़ाया।

सितंबर 2022 में इस इस्लामिक कट्टरपंथी ने आरोप लगाया कि 3 लोगों ने एक किशोर मुस्लिम लड़की का अपहरण करने की कोशिश की थी। उसने ट्वीट किया, “कंफर्म: आज सुबह लीसेस्टर के एक कॉलेज से कुछ ही दूरी पर एक घटना घटी।”

उसने दावा किया, “एक मुस्लिम किशोरी से तीन लोगों ने संपर्क किया था, लेकिन वह स्कूल में भाग गई। कॉलेज और पुलिस को इसकी जानकारी है और लीसेस्टर पुलिस ने परिवार को घटना का नंबर दे दिया है।” उसने यहाँ तक ​​दावा कर दिया कि वो लड़की के परिजनों से मिला, और लड़की अभी सदमे में है।

माजिद के अन्य इस्लामिक कट्टरपंथी साथियों ने उसके इस झूठ को खूब फैलाया। इस मामले में आरएसएस का नाम भी घसीटा गया कि वो कथित अपहरण के मामले में अहम भूमिका निभा रहा था। यही नहीं, इन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मुस्लिम लड़की के अपहरण के झूठे मामले में हिंदू व्यक्ति की जानकारी ऑनलाइन कर दी और उसका पता भी सोशल मीडिया पर लीक कर दिया। इसके साथ ही उस व्यक्ति को फेसबुक पर धमकियाँ दी गई।

इस मामले में लीसेस्टर पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर सफाई दी थी और कहा था कि किसी मुस्लिम लड़की के अपहरण की कोई घटना नहीं हुई, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने लगातार हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को भड़काने की कोशिश की। यही नहीं, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि हिंदुओं ने इस्लाम विरोधी नारेबाजी की है, लेकिन जाँच में ये बात साफ हो गई कि उन्होंने ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए थे, क्योंकि वो हिंदुओं के खिलाफ भड़काई जा रही हिंसा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने किसी तरह की इस्लाम विरोधी नारेबाजी नहीं की थी। लेकिन माजिद ने इस मामले में भी फेक न्यूज फैलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी।

दिलचस्प बात यह है कि हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों का ही पक्ष बीबीसी ने भी लिया और बाकायदा माजिद फ्रीमैन का इंटरव्यू तक कर डाला।

मुस्लिम समुदाय में उन्माद भड़काने और लीसेस्टर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की नींव रखने के माजिद फ्रीमैन की पूछ काफी बढ़ गई थी, तभी तो उस समय शहर के मेयर ने बाकायदा उसके साथ मीटिंग भी की थी।

₹100 करोड़ की घूस, ₹45 करोड़ का डायरेक्ट फायदा AAP ने उठाया: दिल्ली शराब घोटाले में ED की चार्जशीट का कोर्ट ने लिया संज्ञान, CM केजरीवाल की बेल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

दिल्ली शराब घोटाला मामले में उच्च न्यायालय ने बुधवार (10 जुलाई 2024) को अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया। इससे पहले हाई कोर्ट ने केजरीवाल की ट्रॉयल कोर्ट से मिली बेल को रद्द कर दिया था। वहीं इसी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय ने चार्जशीट दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है

इस आरोप पत्र में क्या है, इसे लेकर इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने चार्जशीट में बताया है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में 100 करोड़ की रिश्वत ली गई थी, जिसमें से सीधे-सीधे 45 करोड़ का फायदा आम आदमी पार्टी को पहुँचा था। ये पैसे हवाला के जरिए गोवा ट्रांसफर किए गए थे और फिर इन्हें ही चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया गया था।

इस तरह से चार्जशीट के अनुसार, केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP ने अपराध की आय के 45 करोड़ रुपए अपने लिए उपयोग किए और इस तथ्य को छुपाने की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। चार्जशीट में ईडी ने मु्ख्य साजिशकर्ता अरविंद केजरीवाल को बताया है और उन्हें 37वें नंबर का आरोपित बनाया है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आरोपित विनोद चौहान के व्‍हाट्सऐप चैट की पूरी जानकारी दी। आरोप है कि बीआरएस नेता के कविता के पीए विनोद के जरिए 25.5 करोड़ रुपए गोवा चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी तक पहुँचाए थे। चैट से यह साफ है कि विनोद चौहान के अरविंद केजरीवाल के साथ में अच्छे संबंध थे।

चार्जशीट में बताया गया कि आरोपित विनोद चौहान के मोबाइल से हवाला नोट नंबर के काफी स्क्रीनशॉट बरामद हुए हैं। ये स्क्रीनशॉट दिखाते हैं कि विनोद चौहान क्राइम यानी अपराध से अर्जी आय को दिल्ली से गोवा हवाला के जरिए ट्रांसफर कर रहा था। वहीं वहाँ उन पैसों को मैनेज चरणप्रीत सिंह मैनेज कर रहा था। ईडी ने चार्जशीट में उसका बयान भी लिया है। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप पत्र में बताया है कि केस में विजय नायर की भी अहम भूमिका थी। इस मामले में वह केजरीवाल के इशारे पर ही काम कर रहा था। हालाँकि मामले में फँसने के बाद नायर ने बता दिया था कि इस पूरे खेल को अरविंद केजरीवाल द्वारा ही चलाया जा रहा है।

70 साल के रिटायर्ड IAS ने आधी उम्र की युवती से किया निकाह, सौतेले बेटे और दामाद ने बाँध कर किया रेप: प्रताड़ना में बेटी भी शामिल, मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक रिटायर्ड IAS की दूसरी पत्नी ने अपने साथ रेप और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई है। मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को दी गई इस शिकायत में पीड़िता ने अपने सौतेले बेटे सहित ससुराल के 6 सदस्यों को नामजद किया है। आरोप है कि पीड़िता से दहेज़ की माँग की जा रही थी। मामला कश्मीर के बांदीपुरा से संबंधित था। लखनऊ पुलिस ने आगे की कार्रवाई के लिए इस केस को कश्मीर ट्रांसफर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला लखनऊ के थाना क्षेत्र गाजीपुर का है। यहाँ मंगलवार को खुद को कश्मीर के बांदीपुरा की निवासिनी बताते हुए 35 वर्षीया पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई है। रिटायर्ड IAS कश्मीर कैडर के हैं। साल 2010 में वो रिटायर हो गए थे। 2018 में उनकी पहली पत्नी का इंतकाल हो गया था। इस पत्नी से उनके 4 बच्चे हैं। नवंबर 2020 में उन्होंने बांदीपुरा के शक्तिनगर की रहने वाली पीड़िता से दूसरा निकाह किया था। कुछ दिनों तक सब सही चला लेकिन बाद में रिश्तों में तनाव आ गया।

महिला का आरोप है कि पूर्व IAS के साथ उनके बेटे-बेटी और एक दामाद भी आए दिन दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया करते थे। माँग पूरी न होने पर पीड़िता की पिटाई की जाती थी। आरोप है कि अप्रैल 2024 में पूर्व IAS के बेटे और दामाद ने मिल कर पीड़िता को बंधक बना लिया। इसके बाद दोनों ने महिला से बलात्कार किया। विरोध करने पर महिला की पिटाई की जाती थी। बकौल पीड़िता, वह 5 दिनों तक बंधक बन कर अपने ही सौतेले बेटे और दामाद के बलात्कार का शिकार होती रही।

जैसे-तैसे पीड़िता ने खुद को आरोपितों के चंगुल से मुक्त करवाया और पुलिस तक पहुँची। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर कुल 6 लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। FIR में पूर्व IAS, उनके बेटे और दामाद के साथ कुल 6 आरोपित बनाए गए हैं। पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटनास्थल कश्मीर का बांदीपुरा का निकला। लखनऊ पुलिस ने आगे की जाँच व कार्रवाई के लिए केस को कश्मीर ट्रांसफर कर दिया है।

गाजीपुर थाने के इंस्पेक्टर विकास राय ने मीडिया से बात करते हुए इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

कर्नाटक CM सिद्दारमैया, पत्नी और साले के खिलाफ शिकायत दर्ज, सस्ती जमीन के बदले महँगी जमीन हथियाने का आरोप

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उनकी पत्नी और साले के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई गई है। उनके खिलाफ यह मामला मैसुरु में जमीन घोटाला करने के आरोप में दर्ज करवाई गई है। उनके खिलाफ यह FIR स्नेहमयी कृष्णा ने दर्ज करवाई है।

इस शिकायत में सिद्दारमैया की पत्नी पर आरोप लगाया गया है कि उनके भाई ने 2004 में मैसुरु के केसारे गाँव में 3 एकड़ 16 गुंता जमीन खरीदी थी। उन्होंने यह जमीन बाद में सिद्दारमैया की पत्नी और अपनी बहन पार्वती को गिफ्ट में दे दी थी। शिकायत में आरोप है कि इस जमीन को फर्जी कागजों के सहारे लिया गया।

शिकायत में आरोप है कि इस जमीन के कागजों पर 2004 और 2010 के बीच पार्वती और उनके भाई मल्लिकार्जुन का नाम दिखता है, ऐसे में यह अवैध है। इसमें आरोप है कि इन कागजों के जरिए मैसुरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) को करोड़ों को चूना लगाया। शिकायत में CM, उनकी पत्नी, मल्लिकार्जुन और कई प्रशासनिक अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है।

शिकायतकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कहा है कि उनकी शिकायत पर FIR नहीं दर्ज की है। इस मामले में SIT जाँच चल रही है। उन्होंने इस मामले में पुलिस से सात दिनों के भीतर जाँच करके मामला दर्ज करने की माँग की है। इस मामले में कृष्णा ने एक पत्र राज्य के राज्यपाल और चीफ सेक्रेटरी को भी पत्र लिखा है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला कर्नाटक के बड़े शहर मैसुरु में कई इलाकों के विकास के लिए लाई गई एक स्कीम से जुड़ा है। दरअसल, MUDA यह स्कीम लाई थी कि मैसुरु में जिन लोगों की जमीन अविकसित इलाकों में अधिग्रहित की जाएगी, उनको किसी विकसित इलाके में अधिग्रहित जमीन का आधा हिस्सा दिया जाएगा। इस स्कीम को 50:50 नाम दिया गया था। इसी स्कीम में घोटाले का आरोप है।

इसी स्कीम के तहत सिद्दारमैया की पत्नी के नाम पर दर्ज जमीन को MUDA ने अधिग्रहित किया और उसके बदले मैसुरु के एक रिहायशी महँगे इलाके विजयनगर में उसकी आधी जमीन अलग-अलग जगहों पर दे दी। आरोप है कि सिद्दारमैया की पत्नी की जमीन की कीमत उतनी नहीं थी जितने की जमीन उसके बदले में उनको मिली। ऐसा कई जमीनों के मामले में किया गया और इससे राज्य को कम से कम ₹4,000 करोड़ का नुकसान हुआ।

इस मामले में सिद्दारमैया ने अपना बचाव करते हुए बताया कि उनकी पत्नी की जमीन पर MUDA ने प्लाट बना कर बेचे और उसके बदले में जमीन उन्हें दी। उन्होंने तर्क दिया था कि क्या वह मुआवजे के हकदार नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें विजयनगर में जमीनें इसलिए मिली क्योंकि दूसरे इलाके में जमीने खाली नहीं थी।

भाजपा ने लगाया घोटाले का आरोप

इस मामले के सामने आने के बाद भाजपा लगातार सिद्दारमैया सरकार पर हमलावर है। भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष बी वाई विजयेन्द्र ने इस मामले पर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री के चेहरे का नकाब उतर गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने प्रदेश की जनता को गलत जानकारी दी है। उनका आरोप है कि इस मामले में अपनी शक्ति का फायदा लेते हुए घोटाला किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से इस मामले में जवाब माँगा है।

भाजपा ने इस मामले में पूरे प्रदेश भर में प्रदर्शन का ऐलान किया है। भाजपा ने कहा है कि इस मामले की CBI जाँच हो। हालाँकि, राज्य की सिद्दारमैया सरकार इस पर तैयार नहीं है। सिद्दारमैया ने इस मामले पर CBI जाँच करवाने से मना है। उन्होंने इस मामले की जाँच कर्नाटक पुलिस को ही देने का ऐलान किया है।

केरल के मंदिर की परंपरा में दखल दे रहा था सरकारी बोर्ड, हाई कोर्ट ने रोका: कहा- मुख्य पुजारी की सहमति के बिना नहीं हो सकता बदलाव

केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी मंदिर की प्रचलित धार्मिक प्रथा में परिवर्तन केवल तंत्री (मुख्य पुजारी) की सहमति से ही किया जा सकता है। कोर्ट ने कूडलमाणिक्यम देवस्वोम प्रबंध समिति के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें अम्मनूर परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य हिंदू कलाकारों को त्रिशूर के इरिन्जालाकुडा में मंदिर के कूथम्बलम में कूथु और कूडियाट्टम नृत्य करने की अनुमति दी गई थी।

दरअसल, अम्मनूर परिवार के सदस्यों को कूडलमाणिक्यम मंदिर के कूथम्बलम में कूथु और कूडियाट्टम करने का वंशानुगत अधिकार प्राप्त है। हाई कोर्ट ने कहा कि कुथु और कूडियाट्टम जैसे मंदिर नृत्य धार्मिक और अनुष्ठानिक समारोह हैं। न्यायालय ने कहा कि देवस्वोम प्रबंध समिति तंत्रियों की सहमति के बिना कलाकारों की प्रकृति में बदलाव करने का निर्णय नहीं ले सकती।

न्यायाधीश अनिल के नरेंद्रन और न्यायाधीश पीजी अजितकुमार की खंडपीठ ने अम्मानूर परमेश्वरन चाक्यार द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया। यह याचिका अम्मानूर परिवार के अलावा हिंदू कलाकारों के लिए कुथु और कूडियाट्टम प्रदर्शन के लिए कुथम्बलम खोलने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि अम्मानूर परिवार के प्रथागत अधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश ने कहा कि कुडलमाणिक्यम अधिनियम 2005 की धारा 10 के तहत प्रबंध समिति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह इस प्रथा को बिना किसी चूक के जारी रखे। अधिनियम की धारा 35 के प्रावधानों में तंत्रियों का निर्णय अंतिम है। न्यायाधीशों ने कहा कि इसकी अनदेखी करते हुए प्रबंध समिति ने 19 फरवरी 2022 को आयोजित बैठक में अन्य हिंदू कलाकारों को भी कुथम्बलम में प्रदर्शन की अनुमति दी।

इस मामले में प्रबंध समिति ने तर्क दिया कि अम्मानूर परिवार के सदस्यों द्वारा प्रदर्शन वर्ष में कुछ ही दिनों तक सीमित रहता है। इसके कारण कुथम्बलम लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है। इससे इसका खराब रख-रखाव होता है और परिणामस्वरूप इसका पतन होता है। यह लकड़ी से बनी एक विरासत संरचना है। केंद्र की सहायता से इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार किया गया था।

इस पर अदालत ने कहा कि दर्शकों को कूथम्बलम के अंदर जाने की अनुमति देते समय मंदिर में पालन किए जाने वाले किसी भी धार्मिक और प्रथागत अनुष्ठान का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। इसके बाद केरल हाई कोर्ट ने मंदिर प्रबंध समिति के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें अन्य हिंदू कलाकारों को प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी।

पहले बाँधे हाथ-पाँव, फिर खंजर रख काट डाली नाक: पाकिस्तान में प्रपोजल नकारने पर महिला के साथ हुई वीभत्सता, 8 माह बाद 4 आरोपित गिरफ्तार

पाकिस्तान के डेरा गाजी खान जिले में शाह सद्दारदीन इलाके से एक वीभत्स घटना की वीडियो वायरल हुई है। इस वीडियो में एक महिला को पकड़कर कुछ लोग उसकी नाक काट रहे हैं और कुछ उसकी वीडियो बना रहे हैं। अब पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, आठ महीने पहले डेरा गाजी खान इलाके में महिला से संबंध बनाने के लिए एक आरोपित दबाव बना रहा था। जब महिला ने इससे साफ मना कर दिया तब आरोपित ने अपने साथियों संग उसे पकड़ा और फिर उसे किसी जगह ले जाकर उसके हाथ-पाँव बाँध दिए।

सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि आरोपित युवक उस महिला के हाथ-पाँव बाँधकर उसके ऊपर बैठा हुआ है और खंजर से उसकी नाक काटने की बात कहता है। महिला डरने की बजाय कहती है कि मारना है तो एक बार में मारे। आरोपित उसकी नाक पर खंजर रखकर खून निकाल देता है।

बताया जा रहा है कि इस वीभत्स घटना पर पहले पाकिस्तान पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। हालाँकि बाद में इस मामले मानवाधिकार आयोग वालों की नजर गई और उनके हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई का दबाव बना।

आयोग ने डीजी खान जिला पुलिस अधिकारी सैयद अली से रिपोर्ट माँगी और तब जाकर पुलिस ने इस मामले में जफऱ लाशारी और 3 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 334, 511 और 354 के तहत मामला दर्ज हुआ है। शिकायत लड़की की बहन सहारन बीबी ने इस संदर्भ में दी थी।

शंभू बॉर्डर पर 5 महीने से बैठे किसानों का उखड़ेगा टेंट, हाई कोर्ट ने 7 दिन में हाइवे खुलवाने का दिया आदेश: कहा- तय जगह पर प्रदर्शन करें आंदोलनकारी

दिल्ली घेरने आ रहे किसान आंदोलनकारियों को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर को बंद कर दिया था, जिसके बाद से किसानों ने वहीं डेरा डाल दिया था। अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि वो 1 सप्ताह के भीतर शंभू बॉर्डर और हाई-वे को खोले। हाई कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने जो बेरीकेडिंग की है, उसे हटाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया। हाई कोर्ट का कहना है कि किसानों का प्रदर्शन लंबे समय से चल रहा है। हाईकोर्ट ने किसानों को कानून व्यवस्था बनाए रखने की नसीहत भी दी। कोर्ट ने कहा कि अब शंभू बॉर्डर पर महज 500 प्रदर्शनकारी हैं, इस लिए अब यह हाईवे खोला जा सकता है। यह हाईवे पिछले पांच महीने से बंद है इसे अब और बंद नहीं रखा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, शंभू बॉर्डर के व्यापारियों ने किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर बॉर्डर खोले जाने को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के वकील वासू रंजन शांडिल्य ने शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। वासु रंजन ने अपनी याचिका में कहा था कि अंबाला और शंभू के आसपास के मरीज बॉर्डर बंद होने के कारण दिक्कत में हैं। एंबुलेंस के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी याचिका पर कोर्ट का आदेश आया है। कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हरियाणा और पंजाब दोनों सरकारों की होगी। वहीं, आंदोलनकारी किसान प्रशासन की तरफ से चिन्हित जगहों पर आंदोलन कर सकते हैं।

बता दें कि किसान बीते कई महीनों से एमएसपी को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं। कुछ महीने पहले किसान दिल्ली की तरफ कूच करने वाले थे, उसी दौरान उन्हें पंजाब बॉर्डर पर ही रोकने के लिए शंभू बॉर्डर को बंद कर दिया गया था। इस बॉर्डर के बंद होने की वजह से दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे के एक हिस्से को भी बंद करना पड़ा था। अब हाईकोर्ट ने यहाँ लगे बेरिकेडिंग को हटाने का आदेश दिया है।

‘भाग कु$या, वरना पेट में जो बच्चा है उसे भी मार डालूँगा’: इमरान ने भगवा, कलावा और तिलक का इस्तेमाल कर हिन्दू लड़की को फाँसा, 4 साल किया बलात्कार

उत्तर प्रदेश के कानपुर से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक ने नाम बदल कर पहले हिन्दू महिला को प्यार में फँसाया और लगातार 4 साल तक रेप किया। बाद में पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया जाने लगा। पीड़िता 2 माह की गर्भवती है। आरोपित का नाम इमरान है जिसके खिलाफ मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को FIR दर्ज कर ली गई है। इमरान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना कानपुर नगर के थाना क्षेत्र कर्नलगंज की है। यहाँ सोमवार (8 जुलाई) को एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि साल 2019 में इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती अमन नाम के एक युवक से हुई थी। तब अमन ने खुद को हिन्दू बताया था। अमन लक्जरी कारों के साथ और होटलों से अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करता था। पीड़िता इन तस्वीरों से काफी प्रभावित हुई और एक दूसरे का मोबाइल नंबर शेयर कर लिया।

पीड़िता के मुताबिक, 4 साल पहले जब अमन पहली बार उस से मिलने आया था तब उसने माथे पर तिलक, हाथों में कलावा और भगवा कुर्ता पहन रखा था। वह पीड़िता को ले कर मंदिर में दर्शन करने भी गया। अमन ने पीड़िता को विश्वास में ले कर उसके साथ 4 साल में कई बार रेप किया। यह रेप उसने होटलों और अपने रिश्तेदारों के घर में किया। विरोध करने पर वह शादी का झाँसा देता था। इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसने अमन पर शादी का दबाव बनाया तो अमन सीधे मुकर गया।

बकौल पीड़िता, तब अमन ने अपनी असल पहचान जाहिर करते हुए खुद को हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम बताया। उसने अपना असली नाम इमरान बताया और शादी के लिए पीड़िता के आगे इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी। इमरान ने पीड़िता से कहा, “मैं तुझ से शादी नहीं करूँगा। जा भाग जा साली कुतिया वरना तुझे और तेरे बच्चे को जान से मार दूँगा।” अपनी शिकायत में पीड़िता ने इमरान उर्फ़ अमन को धोखेबाज बताते हुए आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

कानपुर पुलिस ने इस शिकायत पर इमरान उर्फ़ अमन के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। आरोपित पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 376, 504 और 506 के अलावा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिशेध अधिनियम 2024 के सेक्शन 5(1) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। दावा किया जा रहा है कि अमन उर्फ़ इमरान सोशल मीडिया के जरिए लगभग 35 लड़कियों के सम्पर्क में था।

वह इन लड़कियों को भी धोखे में रख रहा था। आरोपित द्वारा इस तरह कितनी अन्य लड़कियों को शिकार बनाया गया है इसकी जाँच की जा रही है।