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सब हिंदू की माँ चु$वा… आलम (अमानउल्ला) ने किराए के नाम पर हिंदू महिला से की रेप की कोशिश: पकड़ाने पर हिंदू महिलाओं को देने लगा गाली

उत्तर प्रदेश के बरेली में आलम उर्फ अमानउल्ला ने एक हिंदू महिला को किराए का कमरा दिखाने के बहाने हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। आलम की इस हरकत का महिला ने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट पर उतर आया। यही नहीं, जब स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए, तो वो हिंदू महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने लगा। आलम ने हिंदुओं के साथ ही पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर भी अभद्र टिप्पणी की। इसके बाद लोगों ने उसकी पिटाई भी कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली के सीबीगंज इलाके में शनिवार (6 जुलाई 2024) को आलम उर्फ अमानउल्ला एक महिला को किराए का कमरा दिलाने के बहाने ले गया। उसने अचानक कमरा बंदकर दुष्कर्म किया। विरोध पर कपड़े फाड़ दिए। वो बचने के लिए चीखने लगी तो आसपास के लोगों ने आरोपित को घेरकर पीटा। उसी दौरान वह हिंदू महिलाओं के लिए अश्लील टिप्पणी करने लगा। आलम ने दावा किया कि वो हिंदू लड़कियों से धंधा करवाता है और उन्हें वो मुस्लिमों के सामने परोसता है। वो हिंदू महिलाओं को लेकर लगातार गलतबयानी करता रहा।

यही नहीं, वो खुलेआम गालियाँ बकने लगा और कहने लगा, “सब हिंदुओं की माँ ###वाऊँगा। धंधा करवाऊँगा।” वो पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर भी अभद्र टिप्पणी करने लगा। इस दौरान वो खुद का परिचय पठान के तौर पर दे रहा था। वीडियो यहाँ देखें

इस मामले में उसके विरुद्ध दुष्कर्म, अपमानित करने, अभद्रता, धमकाने की धारा में प्राथमिकी पंजीकृत कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

सीबीगंज के इंस्पेक्टर राजबली सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। वीडियो की जानकारी भी मिली है। विवेचना में उसके विरुद्ध धाराएँ बढ़ाई जाएँगी। एक्स पर कई लोगों ने वीडियो डाल कर मामले में कार्रवाई की मांग की।

…तो वो मेरी माँ नहीं: जेल में बंद खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल ने अपनी माँ को नकारा, कहा – ‘खालसा के लिए लाखों सिखों ने सिर कटाए’

पंजाब के खंडूर साहिब से लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाले खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को संसद सदस्य की शपथ ली। सेफ हाउस में अमृतपाल ने लगभग 50 मिनट तक अपने पिता और चाचा से मुलाकात की। इसके बाद उन्हें डिब्रूगढ़ जेल ले जाया गया। इस बीच अमृतपाल का एक बयान आया, जिसमें उन्होंने खुद को पंथ का बेटा और खालसा राज्य की माँग को वाजिब बता रहा है।

‘वारिस पंजाब दे’ नाम के खालिस्तान समर्थक संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने खुद को अपनी माँ के बयान से भी अलग कर लिया। अमृतपाल की माँ ने कहा था कि पंजाब के युवाओं के पक्ष में बोलने से अमृतपाल ‘खालिस्तान समर्थक’ नहीं बन जाते। वह खालिस्तान समर्थक नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अमृतपाल ने संविधान के दायरे में चुनाव लड़ा और अब उन्हें खालिस्तान समर्थक नहीं कहा जाना चाहिए।”

माँ के इस बयान के बाद शनिवार (6 जुलाई 2024) को अमृतपाल के सोशल मीडिया साइट X से एक पोस्ट किया गया। इस पोस्ट में कहा गया, “जब माताजी द्वारा दिए गए बयान के बारे में मुझे पता चला तो मेरा मन बहुत दुखी हुआ। मुझे विश्वास है कि उन्होंने यह बयान अनजाने में दिया होगा, फिर भी ऐसा बयान मेरे परिवार या मेरा समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति की तरफ से नहीं आना चाहिए।”

अमृतपाल के हैंडल से आगे लिखा गया, “खालसा राज्य का सपना देखना कोई अपराध नहीं है, यह गर्व की बात है। जिस रास्ते के लिए लाखों सिखों ने अपनी जान कुर्बान की है, उससे पीछे हटने का हम सपना भी नहीं देख सकते। मैंने मंच से बोलते हुए कई बार कहा है कि अगर मुझे पंथ और परिवार में से किसी एक को चुनना पड़े तो मैं हमेशा पंथ को चुनूँगा।”

आगे कहा गया, “इस संबंध में इतिहास का वाक्य बहुत सटीक है जहाँ बंदा सिंह बहादुर के 14 वर्षीय युवा साथी इस सिद्धांत के प्रमुख उदाहरण हैं। जब माँ ने अपने बेटे को बचाने के लिए उसके सिख होने से इनकार कर दिया तो उस किशोर ने कहा कि जब वह सिख नहीं है तो वह भी उसकी माँ नहीं है। बेशक यह उदाहरण इस घटना के लिए बेहद सख्त है, लेकिन सैद्धांतिक नजरिए से यह समझने के काबिल है।”

उसमें आगे लिखा है, “मैंने इसके लिए अपने परिवार को नसीहत देता हूँ कि सिख राज्य पर समझौते के बारे में सोचना भी अस्वीकार्य है। उम्मीद है कि आगे यह गलती नहीं दोहराई जाएगी। यह कहना बहुत दूर की बात है कि भविष्य में सोचते समय ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।” पोस्ट में अंत में लिखा है, “गुरु पंथ का गुलाम अमृतपाल सिंह बांदी डिब्रूगढ़ जेल असम।”

अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब सीट पर 1,97,120 वोटों से जीत मिले है। उन्हें कुल 4,04,430 वोट मिले थे। वहीं, कॉन्ग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को कुल 2,07,310 वोट मिले। साल 2019 में यहाँ से कॉन्ग्रेस के जसबीर सिंह गिल जीते थे। अमृतपाल फिलहाल NSA के तहत असम की जेल में बंद हैं। उन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था।

एक ‘राजनीतिक दल’ के संपर्क में था हाथरस हादसे का मुख्य आयोजक मधुकर: गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में खुलासा, मनरेगा के JE से फंड जुटाने को लेकर भी पूछताछ

हाथरस हादसे के मुख्य आरोपित वेद प्रकाश मधुकर के पॉलिटिकल कनेक्शन सामने आ रहे हैं। वो राजनीतिक दल के संपर्क में था। इसकी जाँच की जा रही है। इस बीच, हाथरस भगदड़ मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि भगदड़ की मुख्य वजह भारी संख्या में लोगों का जीटी रोड पर आ जाना है, क्योंकि मंच से कथित तौर पर चरणरज लेने की घोषणा कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि भोले बाबा उर्फ सूरज पाल का काफिला जीटी रोड से होकर निकला, जिसके बाद लोग उसकी चरणों की धूल या गाड़ियों के पहियो के निशान वाली मिट्टी उठानी शुरू कर दी। इस दौरान सेवादारों ने लोगों के साथ धक्कामुक्की की और भगदड़ मच गई।

वहीं, इस हादसे से जुड़े 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ मुख्य आयोजक देव प्रकाश मधुकर समेत कुल 9 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मधुकर को शनिवार को हाथरस की कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन का हिरासत में भेज दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सत्संग समारोह में आयोजकों ने गलत रास्ते का चयन किया था। प्रवचन समाप्त होने के बाद सूरजपाल सिंह उर्फ भोले बाबा का काफिला जब निकाला गया तो अनुयायी जीटी रोड पर उनके पास पहुँच गए। वहाँ चरणरज लेने वालों से सेवादारों ने धक्का-मुक्की कर दी। इस वजह से भगदड़ मची और 121 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि एटा-अलीगढ़ रोड पर आयोजन स्थल पर सड़क के एक ओर मंच बनाया था। मंच से जीटी रोड तक के लिए सूरजपाल के निकलने का जो रास्ता बनाया गया, वह बाएँ हाथ से अलीगढ़ की तरफ मिलाया गया था।

राजनीतिक कनेक्शन की जाँच

इस बीच, पुलिस ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक दलों ने हाल ही में मधुकर से संपर्क किया था। पुलिस ने कहा कि राजनीतिक संबंधों और धन के लेन-देन की जाँच की जाएगी और यदि कोई पार्टी इन गतिविधियों में शामिल पाई जाती है तो उसके खिलाफ ‘सख्त से सख्त’ कार्रवाई की जाएगी। हाथरस पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान मधुकर ने खुलासा किया कि कुछ समय पहले कुछ राजनीतिक दलों ने उससे और अन्य सत्संग आयोजकों से संपर्क किया था। पुलिस ने कहा कि सत्संग के दौरान डोनेशन की भी जाँच की जा रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि ऐसे कार्यक्रमों को किसी राजनीतिक दल द्वारा आर्थिक मदद दी जाती है या नहीं।

अग्रवाल ने कहा, “अभी तक की पूछताछ से ऐसा लगता है कि कोई राजनीतिक दल अपने राजनीतिक और निजी हितों के लिए उनसे (सूरज पाल से) जुड़ा हुआ है। आरोपित देवप्रकाश मधुकर से जुड़े सभी बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, मनी ट्रेल आदि की जांच की जा रही है; जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों से भी सहयोग मांगा जाएगा।”

अब तक कुल 9 गिरफ्तार

इस बीच, शनिवार (6 जुलाई 2024)को हाथरस के कैलोरा चौराहे और गोपालपुर कचौड़ी से दो आरोपियों रामप्रकाश शाक्य और संजू यादव को गिरफ्तार किया गया। 2 जुलाई को हुई भगदड़ के बाद से इस मामले में कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपित मधुकर को शनिवार को हाथरस में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बता दें कि हाथरस में सिकंदराराऊ के गाँव फुलरई के पास जीटी रोड के किनारे मंगलवार (2 जुलाई 2024) को हुए भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई थी। पुलिस प्रवचनकर्ता बाबा सूरजपाल के सेवादारों और सत्संग के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच-पड़ताल कर रही है। इस मामले में सिकंदराराऊ कोतवाली के अंतर्गत पोरा चौकी प्रभारी ब्रजेश पांडे की तरफ से भारतीय न्याय सहिता की धारा 105, 110, 126 (2), 223, 238 के अंतर्गत केस दर्ज कराया गया है, जिसमें 9 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

सहमति से बना संबंध शादी का झूठा वादा करके रेप नहीं: रद्द की FIR, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बोला- रिश्ते को समझने में 10 साल नहीं लगते

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जब कोई महिला सहमति से संबंध बनाती है और जब यह रिश्ता शादी में नहीं बदलता है तो वह शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप नहीं लगा सकती। इसके बाद उच्च न्यायालय ने आरोपित के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शादी का वादा झूठा है या सच्चा, यह समझने में 10 वर्ष नहीं लगते।

हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपित पुरुष और शिकायतकर्ता महिला ने अपनी मर्जी से दस साल तक रिश्ता बनाए रखा। बाद में वे अलग हो गए, क्योंकि आरोपित शादी नहीं करना चाहता था। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने लगातार माना है कि इस तरह के रिश्ते को बलात्कार का रंग नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “युवावस्था में जब लड़का और लड़की एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और भावनाओं में बहकर यह मान लेते हैं कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं तो आमतौर पर उन्हें लगता है कि उनका रिश्ता शादी में बदल जाएगा। कभी-कभी ऐसा नहीं होता है और लड़की खुद को छला हुआ मानकर FIR दर्ज करा देती है और कहती है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है।”

कोर्ट ने कहा कि जब शादी का वादा करके साल 2010 में पहली बार शारीरिक संबंध शुरू हुआ था, उसी समय महिला शिकायत दर्ज करा सकती थी। यह रिश्ता साल 2020 तक जारी रहा और साल 2021 तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई। कोर्ट ने आगे कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि शादी के झूठे वादे पर शारीरिक संबंध जारी रहा।

कोर्ट ने कहा कि 10 साल से अधिक समय तक चले किसी रिश्ते के दौरान बने यौन संबंध को बलात्कार मानना ​मुश्किल है। बकौल कोर्ट, ‘विवाह का झूठा वादा’ और विवाह करने के वास्तविक वादे को तोड़ने में अंतर है। कोर्ट ने कहा, “ऐसी परिस्थितियाँ हो सकती हैं, जब कोई व्यक्ति, जो अच्छे इरादे रखता हो, विभिन्न अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण पीड़िता से विवाह करने में असमर्थ हो।”

दरअसल, कटनी के आरोपित व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर अदालत विचार कर रही थी। अपनी याचिका में रेप के आरोपित व्यक्ति ने हाई कोर्ट से साल 2021 में उसके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। इस आपराधिक मामले में एक महिला ने उस पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने का आरोप लगाया था।

शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह और आरोपित व्यक्ति हाई स्कूल के दिनों से ही रिलेशनशिप में थे। साल 2020 तक उनके बीच शारीरिक संबंध भी बने रहे। महिला का कहना है कि उस व्यक्ति ने प्रपोज करते समय और रिलेशनशिप के दौरान महिला से शादी करने का वादा किया था, लेकिन बाद में उसने इनकार कर दिया।

आरोपित व्यक्ति द्वारा शादी से इनकार करने के बाद दोनों के बीच रिश्ता खत्म हो गया। इसके बाद महिला ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने पिता को दी। इसके बाद पिता ने अपनी बेटी के साथ थाने में जाकर आरोपित शख्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद आरोपित ने इस आपराधिक मामले के खत्म करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

अपनी याचिका में आरोपित शख्स ने कहा कि यह संबंध आपसी संबंध पर आधारित था। इस लिए उसके खिलाफ रेप और धोखाधड़ी का आपराधिक मामला नहीं चलाया जाना चाहिए। आरोपित शख्स ने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द किया जाए। इसके बाद सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया।

A++ आतंकी सैफुल्लाह के एक हाथ में बंदूक और दूसरे में ग्रेनेड, फिर भी जान की परवाह किए बिना गामित मुकेश कुमार ने मार गिराया: अब मिला ‘शौर्य चक्र’

राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को रक्षा अलंकरण समारोह-2024 का आयोजन हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों अथवा उनके परिजनों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर पुरस्कर पाए कुछ अधिकारियों, जवानों व उनके परिजनों से बात की। इनमें से एक हैं केंद्रीय अर्धसैनिक बल CRPF के कॉन्स्टेबल गामित मुकेश कुमार। को उनके वीरतापूर्ण कार्य के लिए शौर्य चक्र मिला है। ऑपइंडिया ने गामित मुकेश कुमार से बात कर के उनके साहसिक कार्यों के बारे में और जानकारी जुटाई।

गामित मुकेश कुमार मूलतः गुजरात के सूरत क्षेत्र के रहने वाले हैं। मुठभेड़ के दौरान उनकी तैनाती CRPF की 61वीं बटालियन में थी। 19 दिसंबर, 2021 में वो कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में तैनात थे। तब CRPF ने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिल कर एक सघन तलाशी अभियान छेड़ा था। इसी दौरान एक घर में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली। गामित अपने साथी के साथ उस मकान में घुसे तो आतंकी की तरफ से भयानक गोलीबारी शुरू हो गई।

गामित ने खुद को संभालने के साथ न सिर्फ आम नागरिकों की बल्कि अपने साथियों की भी जान बचाई। इसी के साथ उन्होंने आतंकी को मार भी गिराया था। मारा गया आतंकी हिज़्बुल मुजाहिद्दीन का चीफ कमांडर सैफुल्लाह था जो कश्मीर के डॉक्टर के नाम से भी कुख्यात था।

घर में छिपे आतंकी को खोज निकला

घटना के दिन का जिक्र करते हुए गामित ने बताया कि आतंकी की मौजूदगी की सटीक सूचना पर सुरक्षा बलों की टीम ने आतंकियों की घेराबंदी कर ली थी। इस टीम के सदस्य गामित भी थे। वो चाँदनी रात थी जिसमें काफी उजाला फैला हुआ था। इसी उजाले में आतंकी ने खुद को घिरता देखा लिया और फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की तरफ से भी जवाबी फायरिंग की गई। आतंकी अंधाधुंध गोलियाँ बरसाए जा रहा था जबकि सुरक्षा बल आमजनों का ध्यान रख रहे थे। हालाँकि आतंकी को पकड़ने के हर सम्भव प्रयास किए जा रहे थे।

हाथों से पकड़ ली आतंकी की बंदूक

इस बीच आतंकी ने सुरक्षा बलों का घेरा तोड़ कर भागने की कोशिश की। वह पास के ही एक घर में छिपने में कामयाब रहा। गामित और उनके साथी उस घर की तरफ आगे बढ़े। आतंकी सुरक्षा बलों की पोजीशन छिप कर देख रहा था। जैसे ही जवान उस आतंकी के पास गए उसने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। ये गोलियाँ जवानों को छूते हुए निकल गईं। गामित ने आतंकी को बहुत मौक़ा देना ठीक नहीं समझा। उन्होंने आतंकी की बंदूक अपने हाथों से कस कर पकड़ ली और नली को दूसरी तरफ कर दिया।

भाग रहे आतंकी को किया ढेर

खुद को पस्त होते देख कर आतंकी ने दूसरे हाथ से ग्रेनेड फेंका। गामित और उनके साथी ग्रेनेड से भी विचलित नहीं हुए तो आखिरकार आतंकी घर की खिड़की से कूद कर भागने लगा। भाग रहे आतंकी का पीछा गामित नहीं नहीं छोड़ा। उन्होंने आतंकी को दौड़ाया तो फिर से दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। आखिरकार आतंकी को गामित की गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गया। मारे गए आतंकी की पहचान कश्मीर के मोस्ट वॉन्टेड सैफुल्लाह के रूप में हुई थी। सैफुल्लाह सीधे तौर पर शामिल हो कर और साजिश रच कर कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका था। सुरक्षा बलों ने उसे A++ कैटेगरी का आतंकी घोषित किया था।

ऑपइंडिया को पूरा घटनाक्रम बताते गामित मुकेश कुमार

ऑपरेशन के दौरान आम जनता की सुरक्षा पर रहता है विशेष ध्यान

गामित फिलहाल CRPF की रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) विंग में तैनात हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए गामित ने बताया कि आतंकियों के खिलाफ अभियान अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। इसकी वजह गामित ने 2 मोर्चे खुले होना बताया। एक तरफ जहाँ आतंकी को गिरफ्तार करने या मार गिराने की चुनौती होती है तो वहीं आम लोगों को कोई नुकसान न पहुँचे इसका भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। बकौल गामित, सुरक्षा बल यह भी प्रयास करते हैं कि मुठभेड़ के दौरान आतंकी भी किसी आम नागरिक को नुकसान न पहुँचा सके।

गामित ने खुद को मिले शौर्य चक्र पर ख़ुशी जताई। उन्होंने देशवासियों से भी खुद को मिल रहे सम्मान के लिए आभार जताया।

अस्वस्थ आडवाणी और बलिदानी कारसेवकों का अपमान, राम जन्मभूमि को हराने की बातें… बाबरी सोच के सबसे बड़े पैरोकार बन गए हैं राहुल गाँधी, ये कैसा घमंड?

राहुल गाँधी की हिन्दू-घृणा थमने का नाम नहीं ले रही है, वो लगातार जगह-जगह जाकर इसका प्रदर्शन कर रहे हैं। अब राहुल गाँधी ने गुजरात के अहमदाबाद पहुँच कर गलतबयानी की है। उन्होंने कहा कि जो आंदोलन लालकृष्ण आडवाणी ने चालू की थी, जिसका केंद्र अयोध्या था, उसे I.N.D.I. गठबंधन ने अयोध्या में हरा दिया है। राहुल गाँधी ने झूठा दावा किया कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में अयोध्या का एक भी व्यक्ति नहीं था। उन्होंने इस दौरान झूठ बोला कि अयोध्या के लोगों को जमीन के बदले मुआवजा नहीं मिला।

राहुल गाँधी सोच-समझ कर राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाली बात कही, क्योंकि उन्होंने खुद कहा कि वो ‘बड़ी बात’ कह रहे हैं। अयोध्या में समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद की जीत में उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के योगदान की बात करते हुए इन कार्यकर्ताओं को ‘बब्बर शेर’ कहा। उन्होंने इस दौरान एक रहस्यमयी भाषा सांसद के हवाले से ये भी दावा कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी की जगह अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन 3 बार सर्वे से पता चला कि वो यहाँ से लड़ेंगे तो उनका राजनीतिक करियर हार के बाद चौपट हो जाएगा।

ये पहला मौका नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह की बातें की हों। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने ‘शक्ति के विनाश’ की बात कहीं थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई शक्ति से है। जबकि भारत में शक्ति पूजा की परंपरा रही है, माँ दुर्गा को शक्ति कहा जाता है। असम में कामाख्या हों, कश्मीर में शारदा, तमिलनाडु में मिनाक्षी हों या फिर गुजरात में अम्बा और समलेश्वरी, माँ शक्ति की विभिन्न रूपों में भारत के कोने-कोने में उपासना की जाती है।

543 में 99 सीटें मिलने से उत्साहित राहुल गाँधी ने तीसरी मोदी सरकार के पहले संसद सत्र में बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले भाषण में भी उत्साहित होकर हिन्दुओं को हिंसक बता दिया। उन्होंने इस दौरान भगवान शिव को लेकर भी अनर्गल बयान दिया कि वो अपने त्रिशूल को जमीन में एक तरफ गाड़ देते हैं। उन्होंने शिव के अभय मुद्रा को कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न से जोड़ दिया। सदन में टोके जाने के बावजूद वो बार-बार भगवान शिव की तस्वीर दिखाते रहे।

राहुल गाँधी ने एक तरह से हिन्दू घृणा का लहू चख लिया है, जैसे कोई जंगली जानवर किसी आदमी का खून चख लेता है तो वो मनुष्यों को मार कर खाने के लिए ही खोजता रहता है। कई बार ऐसे जानवरों को या तो पकड़ कर हमेशा के लिए कैद करना पड़ता है, या फिर उसका काम तमाम करना पड़ता है। राहुल गाँधी ने अब राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने की बात कही है। राम मंदिर के निर्माण के साथ ही जो आंदोलन सफल हो गया, अब उसे कौन हरा सकता है?

शायद राहुल गाँधी को पता नहीं है, राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाले कितने आए और कोशिश कर के धूल में मिल गए। मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई, लालू यादव ने लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करवाया और मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा कि भगवान श्रीराम काल्पनिक थे। जब ये तीनों नहीं कर पाए, राहुल गाँधी को लगता है कि उनसे हो पाएगा? अब तो रोज लाखों की संख्या में लोग राम मंदिर में दर्शन भी कर रहे हैं।

असल में ये सारा घमंड कॉन्ग्रेस के 99 या सपा के 37 सीटें जीतने का नहीं, बल्कि अयोध्या जीतने का है। फैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र, जिसके अंतर्गत अयोध्या आता है, वहाँ से समाजवादी पार्टी ने जातीय गणित बिठा कर मिल्कीपुर से 9 बार विधायक रहे अवधेश प्रसाद को खड़ा किया, जिन्होंने भाजपा के 2 बार के सांसद लल्लू सिंह को हैट्रिक लगाने से रोक दिया। इस तरह 54,567 वोटों से ये सीट I.N.D.I. गठबंधन के खाते में चला गया।

इसके बाद से ही संसद में बार-बार भाजपा को अवधेश प्रसाद का चेहरा दिखा कर चिढ़ाया जाने लगा। कभी राहुल गाँधी उन्हें अपने बगल में बिठाते हैं तो कभी अखिलेश यादव। अवधेश प्रसाद एक तरह से इन दोनों नेताओं के लिए एक मेडल हो गए हैं जिन्हें वो हमेशा गले में पहन कर रखना चाहते हैं, या यूँ कहें कि एक ट्रॉफी हो गए हैं कि जब चाहो दोनों हाथों में लेकर ऊपर उठा दो वाहवाही लूटने के लिए। भाजपा को नीचा दिखाने के लिए उन्हें एक कड़ी मिल गई है।

चूँकि अयोध्या भाजपा की राजनीति का एक केंद्र रहा है, इसीलिए वहाँ से पार्टी की हार को लेकर उसे बार-बार चिढ़ाया और हतोत्साहित किया जा रहा है। राहुल गाँधी ने ये बयान ऐसे समय में दिया है जब 96 वर्षीय पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। 7 दशक से भी अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे एक नेता और उसके योगदानों का अपमान करने के लिए राहुल गाँधी ने ये समय चुना है।

छद्म धर्मनिरपेक्ष नीतियों के खिलाफ लालकृष्ण आडवाणी सितंबर 1990 में राम रथ यात्रा निकाली थी, जिसे अयोध्या पहुँचना था लेकिन रास्ते में बिहार के समस्तीपुर में लालू यादव की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लालकृष्ण आडवाणी ने ये रथयात्रा सिर्फ राम मंदिर के लिए नहीं निकाली थी, बल्कि इसका उद्देश्य था देश की सांस्कृतिक पहचान को पुनः पुष्ट करना। उनका स्पष्ट मानना था कि बाबरी मस्जिद के पक्ष में अभियान चलाने वाले श्रीराम के सामने बाबर को खड़ा कर रहे हैं।

बता दें कि सन् 1527 में बाबर के सेनापति मेरे बाक़ी ने अयोध्या में राम मंदिर को ध्वस्त कर वहाँ बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसे दिसंबर 1992 में हिन्दुओं ने कारसेवा कर के ध्वस्त कर दिया और नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहाँ मंदिर निर्माण शुरू हुआ। हिन्दुओं ने इस मंदिर के लिए प्राचीन काल से लेकर अब तक कई युद्ध लड़े, कभी हथियारों से, कभी राजनीतिक, तो कभी न्यायिक। अब जब मंदिर का निर्माण पूरा होने वाला है, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है, अनेक बलिदानों का उद्देश्य पूरा हुआ, आंदोलन सफल हुआ।

लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को केवल राम मंदिर को पुनर्स्थापित करने के लिए नहीं खड़ा किया था, बल्कि उन उद्देश्य इससे भी बड़ा था। वो मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांत को हमेशा के लिए जमींदोज करना चाहते थे। वो चाहते थे कि देश के हिन्दू-मुस्लिम सभी स्वीकार करें कि उनकी पहचान राम से है, विदेशी आक्रांता बाबर से नहीं। आज घमंड देखिए कि फैज़ाबाद से जीतने वाले सांसद को ‘अयोध्या का राजा’ कह दिया जाता है, जबकि ये वो राज्य है जहाँ भरत ने भी अपने बड़े भाई श्रीराम की पादुका को सिंहासन पर रख कर उनकी अनुपस्थिति में शासन किया।

न तो अवधेश प्रसाद ‘अयोध्या के राजा’ हैं, और न ही राम जन्मभूमि आंदोलन असफल हुआ है। गुजरात के गोधरा में महिलाओं-बच्चों समेत 59 रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जला दिया गया था। मुलायम पुलिस की गोलीबारी में दर्जनों कारसेवक मारे गए। आज राहुल गाँधी ने ‘राम जन्मभूमि आंदोलन की हार’ की बात कर के उन सबका अपमान किया है, ये सिर्फ हिन्दू धर्म का ही अपमान नहीं है। राहुल गाँधी ने शायद गुजरात के 10% मुस्लिमों के वोट के लिए ये किया है।

‘सब संगठित होकर करें देश विरोधी विचारधारा का सामना’: नक्सलियों से लड़ते हुए दोनों पाँव गँवाने वाले विभोर सिंह को ‘शौर्य चक्र’, इलाज के बाद फिर पहनी वर्दी

राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को रक्षा अलंकरण समारोह-2024 का आयोजन हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। इन वीरों में पुलिस, पैरामिलिट्री और सेना के अधिकारी व जवान शामिल हैं। वीरगति पाए सैनिकों के परिजनों को यह पुरस्कार दिए गए। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर पुरस्कार पाए कुछ अधिकारियों, जवानों व उनके परिजनों से बात की।

इनमें से एक हैं केंद्रीय अर्धसैनिक बल CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह। विभोर सिंह ने साल 2022 में नक्सलियों से लड़ते हुए अपने दोनों पैर गँवा दिए थे। हालाँकि, यह अपूरणीय नुकसान उनके हौसलों को नहीं डिगा पाया। उन्होंने रिटयरमेंट तक CRPF में ही रह कर देश की सेवा करने का संकल्प लिया है।

सभी वीरता पुरस्कार प्राप्त जवानों और उनके परिजनों को दिल्ली के फाइव स्टार होटल अशोका में ठहराया गया है। उनके आने-जाने से ले कर खाने आदि का पूरा ध्यान रखा गया। ऑपइंडिया से बात करते हुए तमाम सैनिकों और उनके परिजनों के सरकार की इन व्यवस्थाओं की सराहना की। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई अन्य मंत्री व सैन्य अधिकारी इस समारोह में शामिल हुए। उन्होंने पुरस्कार पाए तमाम सैनिकों और वीरगति पाने वाले बलिदानियों के परिजनों से मुलाकात की। सभी की वीरता को सराहा गया।

नक्सल विरोधी अभियान में हुए थे घायल

सहायक कमांडेंट विभोर सिंह की उम्र लगभग 33 वर्ष है। मूलतः बिहार के निवासी विभोर सिंह वर्तमान में CRPF की 205 कोबरा बटालियन में तैनात हैं। 25 फरवरी, 2022 को अपनी टुकड़ी के साथ औरंगाबाद बिहार के एक नक्सल विरोधी अभियान पर थे। अचानक ही नक्सलियों ने उनकी टुकड़ी पर हमला कर दिया। हमले का जवाब देते हुए विभोर सिंह एक IED ब्लास्ट की चपेट में आ कर घायल हो गए थे। इस विस्फोट में विभोर सिंह के दोनों पैर काटने पड़े थे।

हालाँकि इतनी बड़ी हानि होने के बावजूद विभोर सिंह ने मोर्चा नहीं छोड़ा था और अपने साथियों को जरूरी निर्देश देते रहे। मुठभेड़ के बाद विभोर सिंह को स्थानीय अस्पताल पहुँचाया गया जहाँ से उनको पहले गया और बाद में दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया था। घटना के बाद उनकी तस्वीर की भी काफी वायरल हुई थी जिसमें वो घायल होने के बावजूद बिलकुल शांत और दृढ़ नजर आ रहे थे।

सेहत में सुधार होते ही फिर पहनी वर्दी

दिल्ली के AIIMS में विभोर सिंह का लम्बे समय तक इलाज चला था। यहाँ से सेहत में सुधार होते ही विभोर सिंह ने फिर से वर्दी पहनी और देश सेवा की भावना के साथ अपनी बटालियन पहुँच गए। फ़िलहाल विभोर सिंह कृत्रिम पैरों से चल-फिर रहे हैं। उनके इरादे ज्यों के त्यों मजबूत है। विभोर सिंह की तैनाती फिलहाल बिहार के गया में है।

सरकार ने रखा पूरा ध्यान

ऑपइंडिया से बात करते हुए सहायक कमांडेंट विभोर सिंह ने बताया कि उनके घायल होने के बाद से सरकार ने उनका पूरा ध्यान रखा। उन्होंने एम्स के डॉक्टरों की तारीफ की और अपनी सेहत में जल्द सुधार का क्रेडिट उनको दिया। हमें बताया गया कि घटनास्थल से स्थानीय अस्पताल तक पहुँचाने और वहाँ से एयरलिफ्ट कर के एम्स दिल्ली तक लाने में उनके साथियों सहित अन्य विभाग के स्टाफ का पूरा सहयोग मिला। खुद को मिला वीरता पदक विभोर सिंह अपनी मेहनत और देश के लिए किए गए त्याग पर एक मुहर के जैसा मानते हैं।

उन्होंने खुद को मिल रहे सम्मान के लिए देशवासियों का आभार भी जताया।

हिम्मत नहीं हारी, बाकी सब छोड़ दिया था ईश्वर पर

नक्सलियों से हुई मुठभेड़ का जिक्र करते हुए विभोर सिंह ने हमें बताया कि IED विस्फोट के बाद उन्हें पता चल गया था कि उनके दोनों पैर खराब हो चुके हैं। ऐसे में उन्होंने सबसे पहले अपनी हिम्मत को बिलकुल भी कम नहीं होने दिया और बाकी सब ईश्वर पर छोड़ दिया। अपना जीवन बचने को विभोर खुद पर भगवान की विशेष कृपा मानते हैं।

नक्सली और आतंकी हर देशवासी के दुश्मन

नक्सलियों से हुई मुठभेड़ के बारे में और गहराई से बताते हुए विभोर सिंह ने कहा कि वो सिर्फ एक हिस्से नहीं बल्कि हर देशवासी के दुश्मन हैं। CRPF के सहायक कमांडेंट का मानना है कि इनकी सोच और कार्यशैली सिर्फ पुलिस, पैरामिलिट्री या सेना के लिए नहीं बल्कि देश के हर व्यक्ति के लिए घातक है। विभोर ने कहा, “नक्सलियों से सभ्य समाज के हर व्यक्ति के बच्चों का भविष्य खतरे में है।” उनका मानना है कि सभी को संगठित हो कर हर देश-विरोधी विचारधारा का सामना करना चाहिए।

ऑपइंडिया परिवार को दिया धन्यवाद

विभोर सिंह ने ऑपइंडिया परिवार को भी धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें वो समय याद है जब वो घायल हो कर एम्स में भर्ती हुए थे। तब ऑपइंडिया परिवार के सदस्य उनके परिजनों से बराबर सम्पर्क में थे और हालचाल लेने के साथ हिम्मत भी बँधा रहे थे। ऑपइंडिया की टीम पैरामिलिट्री के उस अस्पताल में भी गई थी जहाँ विभोर सिंह भर्ती थे। सेहत में सुधार के बाद भी हम लगातार सहायक कमांडेंट के सम्पर्क में बने रहे।

‘गुरु नानक ने किसी भी मुद्रा या आसन को मान्यता नहीं दी’: SGPC ने राहुल गाँधी को दिया झटका, कहा – ‘अभय मुद्रा’ का सिख धर्म से कोई संबंध नहीं

राहुल गाँधी शनिवार (6 जून, 2024) को एक बार फिर से कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न को अभय मुद्रा बताते हुए इसे सभी धर्मों से जोड़ा। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की तस्वीर भी आप देखेंगे तो वो उनका हाथ अभय मुद्रा में होता है। हालाँकि, अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर का प्रबंधन करने वाली ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी’ (SGPC) ने राहुल गाँधी के इस बयान की निंदा की है। राहुल गाँधी ने संसद में भी यही बात कही थी, जिसे उन्होंने गुजरात में दोहराया है।

SGPC ने स्पष्ट कहा है कि पवित्र गुरबानी और गुरुओं की शिक्षाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सिख संस्था ने एक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें कहा गया कि गुरुओं के मूल सिद्धांतों और पवित्र गुरबानी के सही अर्थ की कभी-कभी राजनीतिक हस्तियों द्वारा गलत व्याख्या की गई, जिससे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची। सिख संस्था ने कहा कि राहुल गाँधी ने गुरु नानक की तस्वीर को अभय मुद्रा से जोड़ा, जो एकदम गलत है।

पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि गुरु नानक देव जी ने ऐसी किसी भी मुद्रा या आसन को मान्यता नहीं दी है। इसमें कहा गया है कि गुरु नानक ने ऐसी किसी भी चीज से अलग ‘अकाल पुरख’ से जुड़ने की शिक्षा दी है। साथ ही SGPC ने लोकसभा एवं राज्यसभा के स्पीकरों से निवेदन किया कि किसी भी धर्म को ठेस पहुँचाई जाने वाली बातें संसद में नहीं की जानी चाहिए। राहुल गाँधी, जो सिख धर्म से भी कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न को जोड़ रहे हैं, उन्हें इस बयान से झटका लग्न तय है।

राहुल गाँधी ने संसद में भगवान शिव की भी तस्वीर दिखाई थी और दावा किया था कि वो अपनी त्रिशूल को जमीन में गाड़ देते हैं और अभय मुद्रा में अपना हाथ आगे रखते हैं। साथ ही उन्होंने इस्लाम में दुआ पढ़े जाने को भी इससे जोड़ा था। राहुल गाँधी ने येशु मसीह और गुरु नानक की भी तस्वीरें लहराई थीं। मुस्लिम विद्वान पहले ही उन्हें लताड़ते हुए कह चुके हैं कि इस्लाम का अभय मुद्रा से कोई लेना-देना नहीं है। अब यही बातें कर के कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गुजरात में भाजपा को हराने की बातें कर रहे हैं।

नूहं में बृजमंडल यात्रा के लिए तैयारियाँ शुरू, पहुँचने लगे साधु-संत: पिछले साल मुस्लिम भीड़ की हिंसा में गई थी 6 जानें, शिव मंदिर से लेकर बच्चों के गुरुकुल तक पर हुआ था हमला

हर वर्ष की तरफ इस बार भी सावन माह में बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा सोमवार (22 जुलाई, 2024) को प्रस्तावित है। इस बार भी हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों के अलावा कई साधु-संत यात्रा भी शामिल होंगे। इस यात्रा में हरिद्वार से गंगाजल ला कर हरियाणा के नूहं, पुन्हाना और फ़िरोज़पुर झिरका के मंदिरों में अभिषेक किया जाता है। साल 2023 में इस यात्रा पर मेवात क्षेत्र में मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस हिंसा में कुल 6 लोगों की जान चली गई थी।

हिन्दू संगठनों द्वारा इस साल फिर से यात्रा निकालने के ऐलान के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। ऑपइंडिया ने इस प्रस्तावित यात्रा को ले कर सभी पक्षों से बात की।

बजरंग दल हरियाणा के प्रान्त विद्यार्थी प्रमुख ललित बजरंगी ने मंगलवार (2 जुलाई, मंगलवार) को ऑपइंडिया से इस यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि इस साल की बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा 22 जुलाई को होने जा रही है। ललित बजरंगी ने इस यात्रा की डिटेल एक पोस्टर में बना कर भेजी। इस पोस्टर की शुरुआत ‘जय श्री राम’ से हुई है। यह यात्रा 1 दिन की होगी जो 22 जुलाई (सोमवार) को निकलेगी। यात्रा के दौरान महाभारतकालीन नल्हड़ शिव मंदिर, फ़िरोज़पुर झिरका के झीर महादेव मंदिर और पुन्हाना के राधा कृष्ण शृंगार मंदिर में जलाभिषेक किया जाएगा।

बृजमंडल यात्रा के पोस्टर

सभी साधु-संतों को निवेदक बताते हुए इस पोस्टर के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने की अपील की गई है। यात्रा का सानिध्य भी साधु-संतों के हाथों में बताया गया है। ललित ने हमें आगे बताया कि यात्रा के लिए प्रवास शुरू हो चुके हैं। साधु संत भी अलग-अलग प्रांतों से पहुँचने लगे हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्रवाल महासभा नूंह के जिलाध्यक्ष राजकुमार गर्ग ने बताया है कि सावन के पहले दिन यानी 22 जुलाई को प्रस्तावित इस यात्रा की तैयारियाँ शुरू कर दी गईं हैं।

इस घटना में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए ऑपइंडिया ने नूहं के पुलिस अधीक्षक को कॉल किया। SP नूहं का नंबर उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को व्यस्त बताया और थोड़ी देर बाद कॉल करने को कहा। पुलिस का पक्ष आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा। हालाँकि, जिले के DC और अन्य प्रशासनिक अधिकारीयों ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि अभी तक उनको यात्रा की परमीशन के लिए कोई पत्र नहीं मिला है।

गौरतलब है कि साल 2023 में नूहं में बृजमंडल यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। हमलावरों ने लाठी-डंडों के साथ घातक हथियारों का भी प्रयोग किया था। हमले में न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया था। पहाड़ों की ओट में छिप कर गोलियाँ बरसा रहे हमलावरों ने नल्हड के प्राचीन शिव मंदिर में घुसने की भी कोशिश की थी। कई गाड़ियों को आग लगा दी गई थी। महिलाओं को भी नहीं छोड़ा था।

हिंसक भीड़ ने गाँवों में घुस कर शक्ति सैनी जैसे बेगुनाह लोगों को भी निशाना बनाया था जिनका यात्रा से भी कोई लेना-देना नहीं था। तब एक गुरुकुल में पढ़ रहे बच्चों को भी मुस्लिम भीड़ ने घेर लिया था।

‘4 जून के बाद कुछ नया घटनाक्रम’: शराब घोटाले में CBI ने बताया – अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जाँच जारी, अबकी आरोपितों के खिलाफ हो गई है पूरी

दिल्ली के शराब नीति घोटाला केस में सीबीआई ने कोर्ट से बताया है कि अरविंद केजरीवाल को छोड़कर केस से जुड़े अन्य सभी आरोपितों की भूमिका की जाँच पूरी हो चुकी है। सीबीआई ने कहा कि अब केवल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भूमिका की जाँच की जा रही है। सीबीआई के वकील एडवोकेट डीपी सिंह ने आगे कहा कि हम 4 जून के बाद हुए कुछ नए घटनाक्रमों के बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देंगे, जिसके कारण हमें अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने कहा है कि सिर्फ केजरीवाल की भूमिका और जाँच की जा रही है, जबकि बाकी आरोपितों के खिलाफ जाँच लगभग पूरी हो चुकी है। सीबीआई ने आगे स्पष्ट किया कि सॉलिसिटर जनरल द्वारा पहले दिया गया बयान केजरीवाल को छोड़कर मामले में गिरफ्तार सभी आरोपितों से संबंधित था। इससे पहले 4 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया था कि जाँच जल्द पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा था कि अंतिम शिकायत और चार्जशीट जल्द से जल्द और किसी भी स्थिति में 3 जुलाई, 2024 को या उससे पहले दायर किया जाएगा और उसके तुरंत बाद ट्रायल कोर्ट मुकदमे की कार्यवाही के लिए स्वतंत्र होगा।

इन दलीलों के मद्देनजर और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस न्यायालय द्वारा 30 अक्टूबर, 2023 के आदेश द्वारा निर्धारित “6-8 महीने” की अवधि खत्म नहीं हुई है, इन याचिकाओं का निपटारा करना पर्याप्त होगा। साथ ही याचिकाकर्ता को सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार आखिरी एफआईआर/चार्जशीट दाखिल करने के बाद अपनी प्रार्थना को नए सिरे से रिवाइव करने की स्वतंत्रता दी जाएगी।

सिसोदिया और कविता के वकीलों ने सीबीआई पर गुमराह करने का लगाया आरोप

मनीष सिसोदिया और के. कविता के वकीलों ने शनिवार को आरोप लगाया कि सीबीआई बयानों को गलत तरीके से गढ़ रही है और गुमराह कर रही है। 22 मार्च को अदालत द्वारा पारित न्यायिक आदेश में कहा गया था कि जाँच पूरी हो चुकी है। सीबीआई ने अदालत के समक्ष गलत तरीके से कहा कि जाँच पूरी हो चुकी है। स्थिति यह है कि दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट इसके विपरीत है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने शनिवार (6 जुलाई 2024) को दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपितों की न्यायिक हिरासत 15 जुलाई 2024 तक बढ़ा दी। हालाँकि, कोर्ट ने बीआरएस नेता के कविता के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने के पहलू पर भी अपनी सुनवाई टाल दी। कोर्ट ने आरोपपत्र के कुछ पन्नों पर गलत पेज नंबर लिखे होने के बाद मामले की सुनवाई 8 जुलाई 2024 तक टाल दी।