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8 आतंकियों के एनकाउंटर का बदला लेने वाला था फैजान शेख, लोन वुल्फ अटैक का था प्लान: कश्मीर से दिल्ली तक आर्मी एरिया की 14 बार कर चुका था रेकी

मध्य प्रदेश की आतंकवाद निरोधक दस्ते (MP ATS) ने खंडवा जिले से इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी फैजान शेख को गिरफ्तार किया है। आतंकी फैजान शेख मध्य प्रदेश में लोन वुल्फ अटैक की साजिश रच रहा था। इंडियन मुजाहिदीन के इस आतंकी के निशाने पर सुरक्षाबल के जवान भी थे। आतंकी फैजान के पास से भारी मात्रा में हथियार मिले हैं, इसके अलावा जिहादी साहित्य भी मिले हैं। आतंकी के मोबाइल से ATS को कई आतंकी संगठनों के संपर्क में होने से सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान शेख इंडियन मुजाहिदीन ( Terror outfit Indian Mujahiddin ) के कुख्यात आतंकी यासीन और उसके भाई रियाज भटकल को अपना हीरो मानता था। वो सिमी के सरगना रहे अबूल फैजल से भी खूब प्रभावित था और इन्हीं आतंकियों की तरह आतंक की राह पर चलना चाहता था। फैजान शेख भटकल से इस तरह प्रेरित था कि कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल कस्बे में रहने वाले यासीन और रियाज के घर भी जा चुका है। यही नहीं, वो सिमी से जुड़े आतंकी रकीब कुरैशी का भी खास था और उससे मिलने कोलकाता की जेल भी जा चुका था। एनआईए की टीम मई 2023 में जब आतंकी नेटवर्क की छानबीन करने पहुँची थी, तब भी फैजान से पूछताछ की गई थी। इसके बाद से उस पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

लोन वुल्फ अटैक करना चाहता था फैजान, बनना था बड़ा मुजाहिद

जानकारी के मुताबिक, एमपी एटीएस ने खंडवा के कंजर मोहल्ला से फैजान शेख को पकड़ा और उसके ठिकाने पर छापेमारी कर हथियार भी बरामद किए। फैजान के पास 4 मोबाइल भी मिले हैं, जिनके जरिए वो आतंकी संगठन के लिए युवाओं का ब्रेन वॉश भी कर रहा था। उसके पास से इंडियन मुजाहिद्दीन, आईएसआई, सिमी और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े साहित्य भी मिले हैं। यही नहीं, आतंकी संगठन सिमी के लिए भर्ती करने वाले मेंबरशिप फॉर्म भी उसके पास से मिले हैं। फैजान के पास से एक पिस्टल और 5 कारतूस भी मिले हैं। ATS की पूछताछ में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी फैजान शेख ने कबूल किया है कि उसके निशाने पर सुरक्षाबल थे। कुछ सुरक्षाबलों के घर और परिजनों की फैजान रेकी भी कर चुका था। उसे बस एक मौके का इंतजार था। आतंकी फैजान ने कबूल किया है, कि वो खूंखार आतंकी अबू फैजल से प्रभावित था और वो उससे भी बड़ा मुजाहिद बनना चाहता था।

एटीएस के महानिरीक्षक (IG) आशीष ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला है कि वो लोन वुल्फ अटैक यानी अकेले हमले की योजना बना रहा था, इसके लिए वो कश्मीर से दिल्ली तक आर्मी कैंट इलाकों की 14 बार रेकी भी कर चुका था। उसके निशाने पर सुरक्षाकर्मी थे। जानकारी के मुताबिक, कुल 7 भाई बहनों में फैजान सबसे कम 8वीं तक पढ़ा लिखा है। सिमी, आईएसआईएस से जुड़े खंडवा के ही रकीब की गिरफ्तारी के समय एसटीएफ टीम का उसने विरोध किया था। रकीब फिलहाल कोलकाता की जेल में बंद है। उससे मिलने फैजान कुछ महीने पहले वहां भी गया था। फैजान को ‘हीरो’ बनने और ‘फेमस’ होने की सनक थी। इतना ही नहीं एटीएस की टीम जब उसे गिरफ्तार करने आई तो वो खुश हो गया था, उसे लगा कि अब मेरा नाम भी लोग जानने लगेंगे।

आतंकी फैजान अपनी फेसबुक आईडी पर इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित जिहादी पोस्ट कर आईएम व आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार कर रहा था। वो पाकिस्तान में चल रहे मुजाहिदीन ट्रेनिंग कैंप की वीडियो, मसूद अजहर (जैश-ए-मोहम्मद) लश्कर-ए-तैयबा की तकरीर पोस्ट करते हुए कंधार विमान अपहरण की कहानी तथा मुल्ला उमर के बयान एवं अंसार गजवा-तुल-हिंद (एजीएच) से संबंधित पोस्ट भी शेयर करता था।

बता दें कि 31 अक्टूबर, 2016 को जेल से भागने के बाद भोपाल के बाहरी इलाके में एनकाउंटर में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा मारे गए 8 सिमी आतंकवादियों में से पाँच खंडवा के रहने वाले थे। फैजान इस एनकाउंटर का बदला लेना चाहता था। वह लोन वुल्फ अटैक करके खुद को इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल एवं सिमी सरगना अबू फैजल की तरह बड़ा मुजाहिद साबित करना चाहता था। अपनी योजना को अंजाम देने के लिए वो द्वारा स्थानीय अवैध हथियार कारोबारी तथा राज्य के बाहर के लोगों से संपर्क करके पिस्टल एवं कारतूस इकट्ठा कर रहा था, जिसमें वो आँशिक तौर पर सफल भी रहा था।

पाकिस्तानी अधिकारी के घर में भारतीय महिला से सेक्स की डिमांड, शिकायत की तो आरोपित को बकरीद के बहाने मुल्क भेजा; पीड़िता को नौकरी से निकाला

नई दिल्ली में तैनात एक पाकिस्तानी राजनयिक के घर में काम करने वाली भारतीय महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई है। आरोपित 54 साल का मिन्हाज हुसैन है। वह पाकिस्तान का ही रहने वाला है। पीड़िता की शिकायत पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद आरोपित को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है।

पीड़िता विधवा है। पुलिस में शिकायत करने से पहले उसने पाकिस्तानी राजनयिक से मिन्हाज हुसैन के करतूत की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मिन्हाज को बकरीद के बहाने पाकिस्तान भेज दिया गया। वहीं पीड़िता को नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद मिन्हाज फिर भारत लौट आया और राजनयिक के यहाँ काम करने लगा।

जिस पाकिस्तानी राज​नयिक के घर यह घटना हुई है, उनकी पहचान साद अहमद वाराइच के तौर पर सामने आई है। मिन्हाज हुसैन उनके आधिकारिक आवास में रसोइए के तौर पर काम करता था। पीड़िता भी यहीं घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थी। दोनों नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वाराइच के आधिकारिक आवास के सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे।

रिपोर्ट के अनुसार इसी साल फरवरी में मिन्हाज हुसैन भारत आया था। उसके बाद से वह पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था। उसे यौन संबंध बनाने को कहता था। अश्लील हरकतें करता था। पीड़िता ने वाराइच को इसके बारे में बताया तो उन्होंने उसे बकरीद के बहाने चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया। इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग ने पीड़िता को फोन कर 30 जून तक नौकरी और वाइराइच का घर छोड़ने को कहा। इस बीच मिन्हाज पाकिस्तान से लौटकर फिर वाइराइच के आवास में काम करने लगा।

इस घटना ने पीड़िता को बुरी तरह झकझोर दिया। 28 जून 2024 को वह तिलक मार्ग थाने गई और मिन्हाज हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मिन्हाज को 30 जून को वापस पाकिस्तान भेज दिया। वह आधिकारिक पासपोर्ट और वीजा पर भारत में रह रहा था।

क्रूस चौक, चर्च, साहेब का कोना, ईसाइयों का मेला… जब ‘हिंसक हिंदू’ अल्पसंख्यक हो जाएँगे तो भारत का हर गाँव होगा खड़कोना, रमेश राम बोल भी नहीं पाएँगे

आपने शायद खड़कोना या कोरकोटोली का नाम न सुना हो। ये छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिले के दो गाँव हैं। मैं यहाँ गया हूँ। आप पूछ सकते हैं कि जिस देश में करीब 6.5 लाख गाँव हैं, उनमें से किन्हीं दो का नाम लेकर मैं क्या बताना चाहता हूँ? आप ये भी पूछ सकते हैं कि इन दोनों गाँवों के बारे में आपको क्यों जानना चाहिए?

पिछले दिनों इलाहबाद हाई कोर्ट ने हिंदुओं का धर्मांतरण रोकने को कहते हुए कहा है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन बहुसंख्यक (हिंदू) अल्पसंख्यक हो जाएँगे। हाई कोर्ट उन्हीं हिंदुओं पर आए खतरे से सचेत कर रहा है, जिन्हें लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने सदन के भीतर ‘हिंसक’ बताया है। हाई कोर्ट ने जिस मामले में यह टिप्पणी की उसमें कैलाश नाम का एक व्यक्ति अपने गाँव के लोगों को दिल्ली की ‘कल्याण सभा’ में ले गया था। यह सभा असल में हिंदुओं को लालच देकर उन्हें ईसाई बनाने का एक उपक्रम था।

खड़कोना या कोरकोटोली बताते हैं कि कैसे इसी तरह के उपक्रम से पहले हिंदुओं को धर्मांतरित किया जाता है। फिर जब धर्मांतरित लोग अपने गाँव में बहुसंख्यक हो जाते हैं तो उनके गाँव की पहचान बदली जाती है और अल्पसंख्यक हो चुके हिंदुओं का जीवन कठिन बना दिया जाता है।

पहाड़ और जंगलों से घिरे खड़कोना और कोरकोटोली में मैं सितंबर 2022 में गया था। खड़कोना में आज 39 घर हैं। इनमें से हिंदुओं के केवल 5 घर ही बचे हैं। वहीं कोरकोटोली में 35 घर हैं। इनमें से केवल 7 परिवार अब हिंदू है। इन गाँवों की डेमोग्राफी बदलने का सिलसिला 1906 में ही शुरू हो गया था। खड़कोना के चर्च परिसर में लगा एक शिलापट्ट बताता है कि इन दोनों गाँवों के लोगों का पहली बार धर्मांतरण 21 नवंबर 1906 को हुआ था। उस तारीख को जिन 56 लोगों का बपतिस्मा हुआ था, उन सभी के नाम इस शिलापट्ट पर अंकित हैं। यह ​शिलापट्ट हिंदुओं के धर्मांतरण के 100 साल पूरे होने पर लगाया गया था।

खड़कोना और कोरकोटोली में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने की यात्रा ईसाई मिशनरियों ने तब भी पूरी कर ली है, जब पहली बार उन्हें इस जगह से खदेड़ दिया गया था। जिनलोगों को उस समय धर्मांतरित किया गया था, उनकी घर वापसी करवा दी गई थी। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पहली बार धर्मांतरण कराने के लिए इस गाँव में आया पादरी जिस जगह से जान बचाकर भागा था, वह जगह अब ईसाइयों के लिए ‘तीर्थ स्थल’ बन चुका है। इसे ‘साहेब का कोना’ कहते हैं। हर साल 29 नवंबर को यहाँ एक विशाल आयोजन होता है, जिसमें एक-डेढ़ लाख ईसाई जुटते हैं।

इसी ‘साहेब का कोना’ के पास हमें 65 वर्षीय कलाबेल मिले थे। कलाबेल के पूर्वज भी धर्मांतरित हुए थे। उनके अनुसार ईसाई मिशनरियों से उनके पूर्वजों को फायदा हुआ था, लेकिन उनलोगों को अब कोई लाभ नहीं मिल रहा। बावजूद वे बड़े गर्व से हमें ‘साहेब का कोना’ की कहानी सुना रहे थे। उन्होंने कहा, “साहेब लोग पहाड़ के रास्ते उधर से (आज के झारखंड से) आते थे। इसी जगह पर डेरा लगाते थे। गाँव के लोगों को यहीं बुलाते थे। पहले यहाँ पूरा जंगल था। अब हर साल यहाँ तीर्थ यात्रा लगता है।”

आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि इस जगह से हमें भागना पड़ा था, क्योंकि हम धर्मांतरण को लेकर बात कर रहे थे। वैसे खड़कोना की बदली डेमोग्राफी की मुनादी इस गाँव की ओर जाने वाली सड़क पर आपकी गाड़ी के मुड़ते ही होने लगती है। मुख्य सड़क से खड़कोना जाने का रास्ता 7.3 किलोमीटर लंबा है। खेतों और जंगल से घिरा है। दूर पहाड़ नजर आता है। रास्ते में ही सड़क किनारे चर्च बनी है। पूरे रास्ते जगह-जगह सड़क किनारे लकड़ी के बड़े-बड़े क्रॉस गड़े हैं। खड़कोना में प्रवेश करते ही ‘क्रुस चौक’ है। इसी चौक के करीब एक चर्च बना हुआ है जिसके परिसर में वह शिलापट्ट लगा है जिस पर पहली बार धर्मांतरित हुए लोगों के नाम का उल्लेख है।

इन गाँवों में रहने वाले हिंदुओं को अभिव्यक्ति की आजादी तक नहीं है। 25 साल के रमेश राम खड़कोना के बचे खुदे हिंदू लोगों में से एक हैं। वे अपनी परेशानियों के बारे में हमसे बात कर रहे थे, तभी धर्म बदल चुके ग्रामीण वहाँ जुट गए। उन्होंने हमें रमेश से बात नहीं करने दी। उलटे हमसे सवाल-जवाब करने लगे।

खड़कोना या कोरकोटोली केवल गाँव नहीं हैं। ये वो सच्चाई हैं जिससे हिंदू शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा बच नहीं सकता है। देश के जिस भी हिस्से (गाँव/शहर/प्रांत) में हिंदू अल्पसंख्यक हुए हैं, वहाँ न केवल उनका जीवन दूभर हुआ है, बल्कि उनके प्रतीक तक मिटा दिए गए हैं। उन्हें न तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, न अपने धार्मिक आयोजन और परंपराओं का निवर्हन करने की। इस वीभत्स कल से हिंदू अपनी पीढ़ियों को कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर नहीं बचा सकते। उन्हें खुद इसका प्रतिरोध करना होगा ताकि कोई कैलाश किसी रामकली के भाई को बहला-फुसलाकर किसी ‘कल्याण सभा’ में न ले जाए।

नाम- जमीअत उलमा-ए-हिंद, एजेंडा गजवा-ए-हिंद वाला: मुस्लिम छात्रों से कहा- स्कूलों में प्रार्थना और सूर्य नमस्कार का करें विरोध, RTE के दायरे में मदरसे भी नहीं कबूल

जमीअत उलमा-ए-हिंद की गवर्निंग काउंसिल की बैठक दिल्ली में हुई। ये बैठक दो दिनों तक चली, जिसमें पहले दिन तो आधुनिक शिक्षा पर बड़ी-बड़ी बातें कही गई, लेकिन दूसरे ही दिन जमीअत उलमा-ए-हिंद ने साफ कर दिया कि वो इस्लामी संगठन है और इस्लाम उसके लिए सबसे पहले है। इस बैठक में कुछ प्रस्ताव भी पारित हुए हैं, जिसमें मुस्लिम छात्रों से स्कूलों में ‘शिर्क’ का विरोध करने और गैर-इस्लामी कामों से दूर रहने की अपील की गई।

यही नहीं, जमीअत ने छात्रों और परिजनों से कहा है कि अगर उन पर प्रार्थना, सूर्य नमस्कार जैसी गतिविधियों में शामिल होने का दबाव डाला जाए, तो वो भी वो इसमें शामिल न हों, बल्कि विरोध करें और कानूनी कार्रवाई करें। इस दौरान जमीअत ने ये भी साफ कर दिया है कि वो मदरसों को ‘शिक्षा के अधिकार यानी आरटीई’ में लाने के खिलाफ है और इसे संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि मदसरों को शिक्षा के अधिकार कानून से बाहर ही रखा जाए। ये अधिकार हमें संविधान ने दिया है, जिसे हम छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4-5 जून 2024 को दिल्ली में जमीअत उलमा-ए-हिंद की गवर्निंग काउसिंल की बैठक में करीब 2000 सदस्यों-पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें पारित प्रस्ताव में मुस्लिम अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वह अपने बच्चों में तौहीद (एकेश्वरवाद) के प्रति विश्वास पैदा करें और शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी बहुदेववादी प्रथाओं में भाग लेने से बचें। यदि जबरदस्ती की जाए तो विरोध करें और कानूनी कार्रवाई करें।

प्रस्ताव में कहा गया है- जमीअत उलेमा-ए-हिंद राज्य सरकारों की ओर से शिक्षा प्रणाली को भगवा रंग में रंगने और स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को शिर्क (अल्लाह के अलावा किसी अन्य ईश्वर को मानना) के काम करने के लिए मजबूर करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करती है। किसी को भी इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि इस्लाम धर्म की मूल मान्यता तौहीद (एकेश्वरवाद) है और कोई भी मुस्लिम किसी भी कीमत पर किसी भी परिस्थिति में अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत स्वीकार नहीं कर सकता और न ही वह ऐसे किसी व्यक्ति की इबादत स्वीकार करेगा जो गैर-धार्मिक लोगों की प्रथा और पहचान है। सरकार की ओर से स्कूली छात्र-छात्राओं को सूर्य नमस्कार, सरस्वती पूजा, हिंदू गीत, श्लोक या तिलक लगाने के लिए बाध्य करने का आदेश मजहबी आजादी में हस्तक्षेप और धर्मनिरपेक्ष संविधान का उल्लंघन है, जिसे मुस्लिम या कोई भी न्यायप्रिय भारतीय स्वीकार नहीं कर सकता।

खुद जमीअत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक दिन पहले अधिवेशन में मुस्लिम युवाओं से आधुनिक शिक्षा के माध्यम से देश की सेवा का आह्वान किया था। लेकिन अगले ही दिन शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को मदनी ने कहा कि जमीअत विशुद्ध धार्मिक संगठन है। यह आधुनिक शिक्षा के विरोध में नहीं है, लेकिन हमारा स्पष्ट मानना है कि नई पीढ़ी को बुनियादी धार्मिक शिक्षा प्रदान किए बिना स्कूल की शिर्क (किसी को अल्लाह के बराबर दर्जा देना) वाली शिक्षाओं पर आधारित पाठ्यक्रम न पढ़ाया जाए।

मदरसों को आरटीई के दायरे में लाने का विरोध

मौलाना महमूद मदनी ने उत्तर प्रदेश के गैरमान्यता प्राप्त 4,204 मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय का भी तीखा विरोध किया। इसपर टकराव वाला रुख अपनाते हुए मदनी ने कहा कि हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि इस्लामी मदरसे शिक्षा के अधिकार कानून से अलग हैं। यह अधिकार हमें संविधान ने दिया है, जिसे हम छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

हाथरस में भगदड़ के बाद भागा था, अब 4 दिन बाद मीडिया के सामने आया सूरजपाल: कहा- भरोसा बनाएँ रखें, मुख्य आयोजक मधुकर दिल्ली से गिरफ्तार

हाथरस हादसे में 121 लोगों की मौत के बाद से गायब चल रहे बाबा सूरज पाल की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। सूरज पाल ने हादसे को दुखद बताया है और कहा है कि पीड़ितों के परिवार की जिम्मेदारी हमारा ट्रस्ट लेगा और हम उनकी पूरी मदद करेंगे। सूरज पाल ने कहा कि जिनकी वजह से उपद्रव हुआ, प्रशासन उन्हें छोड़ेगा नहीं। इस बीच, हाथरस कार्यक्रम का मुख्य आयोजक और मुख्य आरोपित देव प्रकाश मधुकर दिल्ली से पकड़ा गया है। उस पर 1 लाख का ईनाम घोषित किया गया था।

हाथरस हादसे पर बोला सूरजपाल, – ‘हम सब दुखी’

हाथरस में 121 लोगों की मौत के मामले में सूरज पाल उर्फ भोले बाबा उर्फ नारायण साकार विश्व हरि ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। सूरज पाल ने घटना पर दुख जताया और कहा, “प्रभु हमें दुख की घड़ी से उबरने की शक्ति दें। सभी शासन प्रशासन पर भरोसा बनाए रखें। हमें विश्वास है जो भी उपद्रवकारी हैं वो बख्शे नहीं जाएँगे। हमने अपने वकील डॉक्टर एपी सिंह के माध्यम से कमेटी के महापुरुषों से यह प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं के परिजनों एवं ईलाजरत घायलों के साथ जीवन पर्यन्त तन, मन और धन से खड़ा रहने का आग्रह किया है। सभी इस जिम्मेदारी को निभा भी रहे हैं। सभी महामन का सहारा न छोड़ें।”

मुख्य आरोपित देव प्रकाश मधुकर दिल्ली से गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाथरस कांड के मुख्य आरोपित देव प्रकाश मधुकर को शुक्रवार (05 जुलाई 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया। हादसे के बाद मधुकर पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। सामने आया है कि देव प्रकाश मधुकर ने सरेंडर किया है। दिल्ली के नजफगढ़ – उत्तम नगर के बीच के एक अस्पताल में यूपी की हाथरस पुलिस पहुँची थी, देव प्रकाश ने उनके सामने सरेंडर किया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हाथरस पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

कौन है देव प्रकाश मधुकर?

देव प्रकाश ने ही ग्राम फुलरई, मुगलगढ़ी में सत्संग के लिए अनुमति ली थी। इसके लिए 72 सदस्यों वाली मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम समिति बनाई। सत्संग स्थल पर लगाए गए बोर्ड पर इनके नाम लिखे थे। देव प्रकाश मधुकर सिकंदराराऊ का मूल निवासी है। न्यू कालोनी दमदपुरा में मकान है, जहाँ परिवार रहता है। एटा के शीतलपुर ब्लाक में मनरेगा में तकनीकी सहायक के पद पर तैनात है। नौकरी के चलते वह जलेसर विकास खंड के सलेमपुर मितरौल रहता था। एक लाख रुपये का इनाम और प्राथमिकी होने के बाद प्रशासन ने शिकंजा कसते हुए उसके पास से सभी चार्ज हटा दिए गए हैं। इस मामले में बीडीओ से रिपोर्ट भी माँगी गई है। माना जा रहा है कि उसकी नौकरी भी जा सकती है।

कार्यक्रम का मुख्य आयोजक देव प्रकाश मधुकर (फोटो साभार : दैनिक जागरण)

बता दें कि हाथरस में सिकंदराराऊ के गाँव फुलरई के पास जीटी रोड के किनारे मंगलवार (2 जुलाई 2024) को हुए भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई थी। पुलिस प्रवचनकर्ता बाबा सूरजपाल के सेवादारों और सत्संग के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच-पड़ताल कर रही है। इस मामले में सिकंदराराऊ कोतवाली के अंतर्गत पोरा चौकी प्रभारी ब्रजेश पांडे की तरफ से भारतीय न्याय सहिता की धारा 105, 110, 126 (2), 223, 238 के अंतर्गत केस दर्ज कराया गया है, जिसमें 6 लोग पहले ही पकड़े जा चुके हैं। अभी तक मुख्य आरोपित और कार्यक्रम का आयोजक देवप्रकाश मधुकर फरार चल रहा था। हालाँकि उसे दिल्ली से हाथरस पुलिस ने पकड़ लिया।

मणिपुर में भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा था रथ, अज्ञात बंदूकधारियों ने की फायरिंग: जाँच में जुटी पुलिस

मणिपुर की राजधानी इम्फाल में शुक्रवार रात (4 जुलाई, 2024) को रथ यात्रा के लिए बनाए जा रहे रथ पर हमला किया गया। अज्ञात बदमाशों ने रात करीब 12.30 बजे निर्माणाधीन रथ पर फायरिंग की और फिर मौके से फरार हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना इम्फाल के सना कोनुंग के पास हुई, जहाँ रथ खड़ा किया गया था। हमलावर एडवांस हॉस्पिटल की दिशा से एक कार में सवार होकर आए थे। इसके बाद उन्होंने रथ पर दो राउंड फायरिंग की। फायरिंग करने के बाद हमलावर तेजी से पैलेस गेट की ओर वापस भाग गए। फायरिंग में कोई हताहत नहीं हुआ है।

इंफाल ईस्ट पुलिस को इस घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद वह मामले की जाँच करने के लिए घटनास्थल पर पहुँची। यह रथ यात्रा 8 जुलाई, 2024 को होनी है। इसके लिए ही इस विशेष रथ को तैयार किया जा रहा था। इस रथ पर हमला क्यों हुआ, इसका कारण साफ़ नहीं है।

यह रथ यात्रा मैतेई समुदाय के लोग निकलते हैं। मणिपुर सरकार की वेबसाइट बताती है कि इम्फाल में निकलने वाली यह रथ यात्रा राज्य के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। यह रथ यात्रा ओडिशा के पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा की तरह ही होती है।

इस रथ यात्रा में भी भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और सुभद्रा को रथ पर बिठाया जाता है। यह रथ लगभग 20 फीट ऊँचा होता है और इसे श्रृद्धालु अपने हाथों से खींचते हैं। इस रथ को काफी सजाया भी जाता है। यात्रा को इस उत्सव के पहले और अंतिम दिन ही निकाला जाता है।

इस रथ पर हमला बीते लगभग डेढ़ वर्षों से मणिपुर में चल रही अशांति के बीच हुआ है। राज्य के दो समुदायों कुकी और मैतेई के बीच चल रहे इस संघर्ष में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए हैं। सरकार लगातार यहाँ स्थितियाँ सामान्य करने में जुटी हुई है।

मंदिर का दौरा, हिन्दूफोबिया की आलोचना और भारत को बताया आर्थिक महाशक्ति: दिल्ली से रिश्ते सुधारने के मूड में ब्रिटेन की किएर स्टार्मर सरकार

विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन में सत्ता बदल गई है। कंजर्वेटिव पार्टी 14 साल सत्तारूढ़ रहने के बाद अब विपक्ष में बैठेगी। लेबर पार्टी ने पिछले एक सदी की सबसे बड़ी जीत हासिल की है। उसके मुखिया किएर स्टार्मर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। भारतवंशी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने डाउनिंग स्ट्रीट को अलविदा कह दिया है। ब्रिटेन के इस राजनीतिक फेरबदल के बीच नई दिल्ली में बैठे लोगों की उत्सुकता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि ब्रिटेन की नई सरकार का भारत के प्रति का क्या रुख होने वाला है।

भारतवंशी पारम्परिक रूप से लेबर पार्टी के वोटर माने जाते रहे हैं। लेकिन 2019 में लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन और अन्य सांसदों की कश्मीर को लेकर बयानबाजी और ब्रिटिश संसद में प्रस्ताव लाने के क़दमों के बाद भारतवंशी और भारत के राजनयिक समुदाय, दोनों ही उनसे कुछ दूर छिटक गए थे। हालाँकि, जेरेमी कॉर्बिन और उनके कश्मीर वाली नीतियाँ अब पुरानी बात हो चुकी हैं। किएर स्टार्मर वाली लेबर पार्टी भारत को लेकर सहयोग वाला रवैया अपना रही है।

किएर स्टार्मर का भारत को लेकर रुख सकारात्मक

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ने किएर स्टार्मर भारत को लेकर सकारात्मक रवैया अपनाया है। उन्होंने ब्रिटेन में 10 लाख से अधिक की संख्या वाले हिन्दू समुदाय को भी चुनाव अभियान में साधने का प्रयास किया है। स्टार्मर अपने चुनाव अभियान के अंत में लंदन के एक हिन्दू मंदिर गए थे। यहाँ उन्होंने हिन्दू धर्म के सेवा के मंत्र की प्रशंसा की और इसे अपनी सरकार का हिस्सा बनाने का वादा भी किया था। यहाँ उन्होंने हिन्दू वोटरों को लुभाने के लिए जय स्वामीनारायण का उद्घोष किया था।

किएर स्टार्मर ने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन के भीतर हिन्दूफोबिया की कोई जगह नहीं है। उन्होंने यहाँ यह भी साफ किया था कि वह भारत के साथ नई रणनीतिक साझेदारी पर काम करेंगे। किएर स्टार्मर से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नवम्बर, 2023 में मुलाकात की थी। भारत के रणनीतिक गलियारों को यह अहसास हो गया था कि वर्तमान में सत्तारूढ़ सुनक की सरकार वापस नहीं आएगी और उसे आगे अपने रिश्तों को चलाने के लिए किएर स्टार्मर से अच्छे रिश्ते चाहिए होंगे।

किएर स्टार्मर ने जून, 2024 में आयोजित इंडिया ग्लोबल फोरम में भी भारत से सुदृढ़ रिश्तों की बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि यह दोनों देशों के बीच रिश्तों को रिन्यू करने का समय है। उन्होंने इस दौरान कहा था कि यह बदली हुई लेबर पार्टी है, इसने सभी मोर्चों पर अपनी सोच में बदलाव किया है। उनका इशारा लेबर पार्टी के भारत के पहले के रुख की तरफ था। किएर स्टार्मर ने भारत को मजबूत और आधुनिक देश बताया था और कहा था कि वह विश्व में लोकतंत्र का सबसे अच्छा उदाहरण है।

किएर स्टार्मर ने सरकार बनने के बाद भारत आने की इच्छा भी जताई थी और पीएम मोदी की तारीफ भी की थी। उन्होंने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर आगे बढ़ने की बात भी की थी। इसको लेकर भारत और ब्रिटेन के बीच लम्बे समय से बातचीत चल रही है। उन्होंने यहाँ भी इशारों में बताया था कि कई मुद्दों पर उनकी पार्टी का रुख बदल चुका है। उनका इशारा कश्मीर की तरफ था। किएर स्टार्मर ने कहा था कि वह भारत के साथ रिश्तों को और आगे ले जाना चाहेंगे।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने बताया भारत को महाशक्ति

ब्रिटेन की नई सरकार में डेविड लैमी को विदेश मंत्री बनाया गया है। वह विपक्ष में रहते हुए शैडो फॉरेन मिनिस्टर थे। लैमी की माँ के पूर्वज भारतीय थे और वह कैरिबियन आइलैंड ले जाए गए थे। लैमी ने भी भारत के साथ सकारत्मक रिश्तों की अहमियत को स्वीकारा है। उन्होंने ग्लोबल इंडिया फोरम में भारत को विश्व की महाशक्ति करार दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत के बिना विश्व की कल्पना नहीं हो सकती। उन्होंने भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से चालू करने की वकालत की थी।

डेविड लैमी ने फरवरी माह में भारत का दौरा भी किया था। वह इस दौरान कई लोगों से मिले थे और अपनी पार्टी के लिए समर्थन भी जुटाया था। डेविड लैमी से विदेश मंत्री जयशंकर भी नवम्बर, 2023 में मिले थे। डेविड लैमी का भारत को लेकर नजरिया काफी सहयोगपूर्ण रहा है। ऐसे में उनके मंत्री बनने पर भारत के साथ रिश्ते और भी आगे बढ़ने की उम्मीद है।

भारत ने अच्छे रिश्तों की जताई आशा

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री को जीत की शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “यू.के. के आम चुनावों में जीत पर किएर स्टार्मर को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। मैं सभी क्षेत्रों में भारत-यू.के. व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, आपसी विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए हमारे बीच सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग की आशा करता हूँ।”

भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग का सबसे बड़ा मुद्दा वर्तमान में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। इसको लेकर कई चरणों में बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका है। भारत की ब्रिटेन की नई सरकार के साथ पहली प्राथमिकता यह समझौता पूरा करने की होगी। इसके अलावा भारत नई सरकार से खालिस्तान और भारत विरोधी तत्वों को ब्रिटेन में प्रश्रय ना देने और उन्हने हतोत्साहित करने को लेकर भी कह सकता है।

‘अपने बॉस का पजामा थामने में व्यस्त हैं’: रेखा शर्मा पर TMC सांसद महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से भड़का महिला आयोग, स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। शर्मा हाथरस हादसे वाली जगह पर गई थीं। इस दौरान उनके पीछे एक व्यक्ति छाता पकड़ पीछे चल रहा है। इसको लेकर सवाल उठे तो महुआ ने अभद्र टिप्पणी कर दी। इस पर NCW ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है। साथ ही भाजपा ने इस्तीफा माँगा है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा रेखा शर्मा के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी की निंदा की। इसके साथ ही इस बयान का स्वतः संज्ञान लिया और सांसद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। इसके लिए NCW ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा है।

NCW ने अपने X पोस्ट में लिखा, “अभद्र टिप्पणी अपमानजनक है और एक महिला के सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने पाया कि यह टिप्पणी भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 79 के अंतर्गत आती है। एनसीडब्ल्यू सुश्री मोइत्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अनुरोध करता है।”

राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “उनके (महुआ मोइत्रा के) खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए और 3 दिनों के भीतर आयोग को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दी जानी चाहिए।” ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस के आयुक्त संजय अरोड़ा से भी शिकायत की गई है।

दरअसल, रेखा शर्मा भगदड़ के बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए हाथरस गई थीं। घटनास्थल पर बारिश के दौरान उनके पीछे एक व्यक्ति छाता पकड़ कर चल रहा था। पत्रकार निधि राजदान ने एक्स पर जानना चाहा कि चेयरमैन ने खुद छाता क्यों नहीं पकड़ा। मोइत्रा ने एक्स पर राजदान की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणी की, “वह अपने बॉस का पजामा थामने में बहुत व्यस्त हैं।”

NCW की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने पछतावा दिखाने के बाजय दिल्ली पुलिस को चुनौती दे दी। उन्होंने ट्वीट किया, “आओ दिल्ली पुलिस कृपया इन स्वत: संज्ञान वाले आदेशों पर तुरंत कार्रवाई करो। अगर आपको अगले 3 दिनों में मेरी ज़रूरत पड़े तो मैं नादिया में हूँ, ताकि मैं जल्दी से जल्दी गिरफ़्तारी दे सकूँ। मैं अपना छाता खुद ही थाम सकती हूँ।”

इस बीच भाजपा ने महुआ मोइत्रा के इस्तीफे की माँग की है। भाजपा के नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “सांसद महुआ मोइत्रा, जिन्होंने संदेशखली और तालिबानी पिटाई को न्यायसंगत ठहराने की कोशिश की और उस पर चुप्पी साधे रखी, स्वाति मालीवाल पर चुप रहीं, अब एक अन्य महिला और वह भी NCW प्रमुख पर घृणित टिप्पणी करती हैं!”

उन्होंने आगे कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर भाजपा के किसी सांसद ने ऐसा कहा होता तो सब कुछ बिगड़ जाता!! महुआ मोइत्रा को टीएमसी द्वारा बर्खास्त किया जाना चाहिए! क्या प्रियंका वाड्रा, राहुल गाँधी, खड़गे जी, सोनिया गाँधी, प्रियंका चतुर्वेदी और AAP इस पर आवाज़ उठाएँगे? क्या ममता दीदी उन पर कार्रवाई करेंगी? नहीं, ठीक वैसे ही जैसे वे संदेशखली और चोपड़ा पर चुप रहीं।”

बदइंतजामी और साजिश: हाथरस हादसे में SIT ने CM योगी को सौंपी जाँच रिपोर्ट, ‘भोले बाबा’ के राजनीतिक संबंधों का जिक्र; यूपी पुलिस ने मीडिया रिपोर्ट को नकारा

SIT द्वारा जाँच रिपोर्ट सौंपने की खबरों का ADG आगरा द्वारा नकारने के बाद इस खबर को अपडेट किया गया है.

उत्तर प्रदेश के हाथरस में भगदड़ से हुई 121 लोगों की मौत की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यक्रम की स्वीकृति लेने के दौरान आयोजन समिति ने सभी जरूरी इंतजाम करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। हालाँकि, आगरा ADG ने मीडिया रिपोर्ट को नकारा है और कहा कि रिपोर्ट अभी सौंपी नहीं गई है।

इस जाँच रिपोर्ट में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। इस जाँच को आगरा जोन के ADG अनुपम कुलश्रेष्ठ और अलीगढ़ के कमिश्नर वी. चैत्र को सौंपा गया था। SIT से जाँच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और डीजीपी प्रशांत कुमार इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT ने 15 पन्नों की अपनी जाँच रिपोर्ट में कहा है कि साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए थे। इनमें पुराने की अपेक्षा नए श्रद्धालु ज्यादा थे। ये श्रद्धालु बाबा को देखना चाहते थे। इसके लिए वे आगे बढ़े और इसी दौरान भीड़ अनियंत्रित हो गई। इसके कारण बड़े पैमाने पर यह हादसा हुआ।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भीड़ को सड़क पर नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन की मदद माँगी गई थी। इसके साथ ही अनुमति देने के दौरान LIU की रिपोर्ट में बाबा के सत्संग में सेवादारों की ओर से पूरे इंतजाम की बात कही गई थी। हालाँकि, स्थानीय अफसरों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा नहीं लिया। सत्संग शुरू होने के बाद भीड़ बढ़ती रही।

सत्संग स्थल पर जो बल तैनात किया गया था, उसमें से कुछ पुलिसकर्मी ही सत्संग के बाहर लगाए गए थे। ज्यादातर पुलिस फोर्स सड़क पर भीड़ नियंत्रण और यातायात को मैनेज करने में लगी हुई थी, ताकि हाईवे जाम ना हो। वहीं, अंदर की व्यवस्था सेवादार देख रहे थे। रिपोर्ट में अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करने और तथ्यों को छुपाने के लिए आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया है।

वहीं, ABP न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT ने रिपोर्ट में ‘भोले बाबा’ के राजनीतिक संबंधों का जिक्र है। माना जा रहा है कि भगदड़ देखकर मौके से भागे ‘भोले बाबा’ ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में एक खास राजनीतिक दल की मदद की थी। रिपोर्ट में साफ तौर पर राजनीतिक साजिश की ओर इशारा किया गया है, जिसका अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हुआ है।

बताते चलें कि यह हादसा 2 जुलाई को ‘धार्मिक उपदेशक’ नारायण साकर हरि के ‘सत्संग’ में हुआ था। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं बच्चे मारे गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपम कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में गठित एसआईटी को 24 घंटे के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

मीडिया रिपोर्ट को ADG आगरा जोन ने नकारा है। अपने X पोस्ट में ADG आगरा हैंडल ने लिखा, “खण्डन! दिनांक 02.07.2024 को थाना सिकंदराराऊ क्षेत्रांतर्गत हुई दुःखद दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में ADG आगरा जोन श्रीमती अनुपम कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में एसआईटी टीम का गठन किया गया था।”

इसमें आगे लिखा गया है, “कतिपय सोशल मीडिया व न्यूज चैनलों के माध्यम से संज्ञान में आया है कि एसआईटी टीम द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंप दी गई है, जो कि असत्य व निराधार है। कृपया असत्य व भ्रामक खबर न फैलाये।” इस तरह उत्तर प्रदेश पुलिस ने जाँच रिपोर्ट सौंपे जाने की मीडिया की खबरों को पूरी तरह नकार दिया।

घटना के बारे में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा था, “सभी जानते हैं कि सज्जन (उपदेशक) की तस्वीरें किसके साथ हैं और उनके राजनीतिक संबंध किससे हैं। आपने देखा होगा कि पिछले दिनों रैलियों के दौरान कहाँ भगदड़ मची और इसके पीछे कौन था? हमें इसके बारे में जानना जरूरी है। जो लोग मासूम लोगों की जिंदगी से खेलते हैं, उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

दरअसल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को पिछले दिनों भोले बाबा के कार्यक्रमों में शामिल होते देखा गया था। कई वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं, जिसमें उन्हें भोले बाबा और उनकी ‘ईश्वरीय गतिविधियों’ की प्रशंसा करते देखा जा सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, नारायण हरि साकार की संपूर्ण ब्रह्मांड में सदा-सदा के लिए जय जयकार हो।”

इस बीच, विपक्ष के नेता राहुल गाँधी भी हाथरस और अलीगढ़ जाकर उन परिवारों से मिले, जिन्होंने भगदड़ में अपने परिजनों को खो दिया है। उन्होंने परिवारों से मुलाकात की और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त सजा की माँग की। उन्होंने राज्य सरकार से भगदड़ में जान गँवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देने की भी माँग की।

भारतीय विमान का अपहरण करने वाले खालिस्तानी आतंकी गजिंदर सिंह की मौत, लाहौर के अस्पताल में पड़ा दिल का दौरा: पाकिस्तान सरकार ने दे रखी थी सुरक्षा

भारत के भगोड़े खालिस्तानी आतंकी गजिंदर सिंह का पाकिस्तान के लाहौर में बुधवार (3 जुलाई 2024) को निधन हो गया। गजिंदर की उम्र 73 साल थी और वह साल 1981 में अपने साथियों संग मिलकर इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर उसे लाहौर ले गया था। गजिंदर सिंह गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में मोस्ट वॉन्टेड व्यक्तियों में से एक था।

कहा जा रहा है कि गजिंदर सिंह बीमारी से जूझ रहा था। कुछ दिन पहले उसे दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उसे पाकिस्तान के लाहौर स्थित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में भर्ती कराया गया था। उसने साल 2022 में पाकिस्तान को अपना ठिकाना बनाया था। विमान हाईजैक करने के बाद उसने कुख्यात आतंकी भिंडरावाले की रिहाई और 500,000 डॉलर की माँग की थी।

अलगाववादी सिख संगठन ‘दल खालसा’ के संस्थापक गजिंदर सिंह ननकाना साहिब में अकेले रहते थे। वहाँ उनके पास घर और खेत थे। पाकिस्तान सरकार ने उसे सुरक्षा भी दे रखी थी। पिछले साल मई में लाहौर में खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवार की हत्या के बाद पाकिस्तान सरकार ने उसे सरकारी गेस्ट हाउस में स्थानांतरित कर दिया था।

दअसल, खालिस्तानी आतंकी जनरैल सिंह भिंडरावाले जेल से छुड़ाने के लिए 29 सितंबर 1981 को इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर लाहौर ले गया था। भिंडरावाले ने हिंद समाचार समूह के संस्थापक संपादक लाला जगत नारायण की हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया था। बाद में भिंडरावाले का एनकाउंटर कर दिया गया था।

विमान हाईजैक करने वाले पाँच आतंकियों में गजिंदर सिंह भी शामिल था। इस जुर्म में उसे खालिस्तानी गजिंदर सिंह को 14 साल पाकिस्तानी जेल में बितना पड़ा था। साल 1995 में पाकिस्तानी जेल से रिहा होने के बाद से गजिंदर सिंह निर्वासन में रह रहा था। गजिंदर भारत के 20 कुख्यात आतंकियों में से एक रहा है।

साल 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय ने प्रत्यर्पण के लिए पाकिस्तान को 20 लोगों की सूची दी थी। उसमें इसका भी नाम था। खालिस्तानी गजिंदर सिंह की पत्नी मनजीत कौर का कई वर्ष पहले निधन हो गया है। वहीं, उसकी बेटी बिक्रमजीत कौर यूनाइटेड किंगडम में रहती है।