पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मेयर और TMC सरकार में कैबिनेट मंत्री फिरहाद हकीम ने गैर-मुस्लिमों को बदकिस्मत बताया। हकीम ने सार्वजनिक तौर पर उन्हें इस्लाम कबूल करने का आह्वान किया। इसके बाद उनके इस बयान पर विवाद हो गया।
फिरहाद हकीम ने यह बयान 3 जुलाई, 2024 को दिया। हकीम कोलकाता के धोनो धोन्यो स्टेडियम में ‘आल इंडिया कुरान प्रतियोगिता’ में हिस्सा लेने आए थे। इसी दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “जो लोग इस्लाम में पैदा नहीं हुए, वे बदकिस्मत हैं। अगर हम उन्हें दावत (इस्लाम कबूल करने को कहना) दे सकें और उनमें ईमान (इस्लाम के प्रति निष्ठा) ला सकें, तो हम अल्लाह को खुश कर पाएँगे।”
फिरहाद हकीम यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “हमें गैर-मुसलमानों के बीच इस्लाम का प्रसार करने की जरूरत है। अगर हम किसी को इस्लाम के रास्ते पर ला सकते हैं, तो हम इसे फैलाकर एक सच्चे मुसलमान साबित होंगे।”
उन्होंने आगे जोर दिया, “जब हजारों लोग इस तरह से खोपड़ी पर टोपी पहनकर बैठते हैं तो हम सबको ताकत दिखाते हैं। यह हमारी एकता दिखाता है और यह भी साफ़ कर देता है कि देता है कि कोई भी हमें दबा नहीं सकता।”
कोलकाता के मेयर को यह भी कहते हुए सुना गया कि “हम इस्लाम में पैदा हुए हैं, इसलिए पैगंबर और अल्लाह ने हमारे लिए जन्नत का रास्ता साफ कर दिया है। अगर हम कोई पाप नहीं करते हैं, तो हम सीधे जन्नत जाएँगे।”
पहले भी विवादों में रहे हैं फिरहाद हकीम
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम गलत कारणों से चर्चा में आए हैं। अप्रैल 2016 में उन्होंने कोलकाता के मुस्लिम बहुल इलाके को ‘मिनी पाकिस्तान‘ करार दिया था। फरवरी 2021 में उन्हें कोलकाता की एक मस्जिद में राजनीति से सम्बन्धित भाषण देते हुए देखा गया था, यह आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन था।
CAA के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान मुस्लिम दंगाइयों को शांत करने के लिए फिरहाद हकीम ने उन्हें ‘भाई’ बता दिया था। उन्हें अर्धसैनिक बलों और भाजपा को ‘सुअर एर बच्चा’ (सुअरों के बच्चे) कहते हुए भी देखा गया था। हकीम ने बंगाल के उर्दूकरण का खुलकर समर्थन किया है। इसको लेकर उन्होंने कहा था, “इंशाअल्लाह, एक दिन ऐसा आएगा जब बंगाल की आधी आबादी उर्दू बोलेगी और इसी में कविता सुनाएगी।”
महाराष्ट्र राज्य में हिंदुओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, खास कर लोकसभा चुनाव के बाद। महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस-एनसीपी(शरद पवार) और शिव सेना (यूबीटी) ने लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं, जिसके बाद से महाराष्ट्र में इस्लामिक कट्टरपंथी बेखौफ हो गए हैं। इसी का परिणाम है कि राज्य भर में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर अकारण हमले किए जा रहे हैं। बीते एक सप्ताह में ही महाराष्ट्र में 8-9 घटनाएँ हुई हैं, जिसमें इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर हमले किए। ऐसी ही घटनाओं पर एक नजर…
1-पुणे में कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ बोलने पर अक्षय धवरे पर हमला
हाल के समय में महाराष्ट्र के पुणे में बीते सप्ताह ही बड़ी घटना सामने आई। पुणे के लोहियानगर इलाके में अक्षय धवरे नाम के हिंदूवादी कार्यकर्ता पर अतुल खान, सलमान शेख, सुल्तान शेख, असलम पटेल, आसिफ शेख और अन्य 4 लोगों ने हमला कर दिया। अक्षय हिंदूवादी और दलित कार्यकर्ता हैं। उन पर हमला इसलिए किया गया, क्योंकि वो इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ बोलते थे। इस मामले में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इस मामले में खड़क पुलिस स्टेशन ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 307, 324, 323, 143, 147, 148, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 4 और 25, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37(1), 135 और एससी/एसटी एक्ट, 1989 की धारा 3(1)(2) और 3(1)(10) के तहत मामला दर्ज किया है।
हमलावरों ने अक्षय से कहा कि वो दलितों के लिए ज्यादा ही भगवान बनता है। उस पर दो बार हमला हुआ, लेकिन वो बच गया। लेकिन इस बार नहीं बचेगा। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अक्षय पर तलवार से हमला किया। जिसमें उसके सिर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। इस दौरान उन्होंने कहा, “हम यहाँ के बाप हैं। हमारे खिलाफ अगर कोई बोलेगा तो हम उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।” इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
पुणे में रोहित थोराट नाम के हिंदू-दलित नेता पर हमला
पुणे के लोहियानगर इलाके में 27 जून को ऐसी ही घटना हुई, जिसमें हिंदू दलित नेता रोहित थोराट पर अफरीदी शेख, सादिक सज्जा, इजाज शेख और चार अन्य साथियों के एक समूह ने हमला किया। थोराट पर किया गया हमला दलित समुदाय को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों पर हमला एक टारगेटेड अटैक जाहिर होता है। थोराट अपने समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों और अन्याय के बारे में मुखर रहे हैं, जिसकी वजह से वो कट्टरपंथियों के निशाने पर आ चुके हैं।
थोराट पर हमले के मामले की एफआईआर कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। एफआईआर की कॉपी के अनुसार, पुणे के गंगाधा इलाके में जब पीड़ित अपने रिश्तेदार के घर से घर लौट रहा था, तब आरोपितों ने उसे रोका और उसके साथ मारपीट की। आरोपितों ने पीड़ित की बाइक पर ऑटोरिक्शा चढ़ा दिया और उसे धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीड़ित पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 504, 341, 506, 34, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1), 135 और एससी/एसटी अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(आर), 3(1)(एस), 3(2), 3(वी), 3(2)(वीए) और 6 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुणे के लोहियानगर में हिंदू कार्यकर्ता पर तीसरा खतरनाक हमला: एलआरओ
इसी कड़ी में पुणे जिले के लोहियानगर इलाके में एक हिंदू कार्यकर्ता पर तीसरा भयानक हमला हुआ। 3 जुलाई 2024 को मातंग में हिंदू दलित युवक आदर्श भारत हनुवते पर हमला किया गया, इस घटना को लीगल राइट्स ऑब्ज़र्वेटरी (LRO) ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। LRO ने पुणे सिटी पुलिस पर हिंदुओं को प्रताड़ित करने और अपराधियों को बचाने के लिए अपराध को छिपाने का आरोप लगाया।
— Legal Rights Observatory- LRO (@LegalLro) June 24, 2024
पुणे और मुंबई के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों जैसे नांदेड़, सभाजीनगर और ठाणे में भी हमले हुए।
नांदेड़ में टी20 विश्व कप की जीत का जश्न मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम छात्रों का हमला
अभी कुछ दिन पहले 29 जून को महाराष्ट्र के नांदेड़ क्षेत्र के श्रीनगर इलाके में भारत की टी20 विश्व कप जीत का जश्न मनाने के बाद 20-25 मुस्लिम युवकों ने 4 हिंदू छात्रों पर हमला कर दिया। आरोपित हमलावर चारों पीड़ितों के किराए के अपार्टमेंट में घुस गए और उन पर लाठी और लोहे की रॉड से हमला किया। विकास माडवी, रावसाहेब नरवड़े, बालाजी पोरमद और कपिल पाटिल के रूप में पहचाने गए पीड़ितों को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्ड हो गई जिसमें आरोपितों को पीड़ितों के अपार्टमेंट में घुसते हुए देखा जा सकता है। अपार्टमेंट के मालिक ने घटना की पुष्टि की और कहा कि सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय के हैं।
ठाणे में हिंदू महिला से छेड़छाड़, एफआईआर दर्ज न करने की धमकी
बीती 27 तारीख को ठाणे पुलिस ने शहजाद शेख नामक एक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी और 452 के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें उसने एक हिंदू महिला से छेड़छाड़ की और उसे अपना मुँह बंद रखने के लिए मजबूर किया। यह घटना पिछले सप्ताह ठाणे के हजूरी दरगाह क्षेत्र में हुई थी, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। आरोपी ने इलाके में रहने वाली एक हिंदू महिला से छेड़छाड़ की। बाद में सकल हिंदू समाज के अनुसार जब महिला पास के एक मंदिर में शरण लेने गई, तो लगभग 100-150 मुस्लिम जूते पहनकर मंदिर में घुस गए और महिला को पुलिस में शिकायत दर्ज न करने की धमकी दी। इससे पहले, हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में एक पार्षद आरोपितों की मदद कर रहा था।
नासिरुल्लाह ने ठाणे के मदरसे में नाबालिग लड़के के साथ किया दुराचार
बुधवार (26 जून) को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में एक मदरसे के परिसर में 11 वर्षीय लड़के के साथ दुराचार करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित की पहचान नसीरुल्लाह के रूप में हुई है। यह घटना उस समय हुई जब पीड़ित मदरसे में पढ़ रहा था। नसीरुल्लाह ने नाबालिग लड़के का यौन उत्पीड़न किया और ‘अप्राकृतिक यौन संबंध’ बनाए। आरोपी पर बाल यौन अपराध रोकथाम (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब नसीरुल्लाह को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
हिंदू परिवार पर ईद के बकरे को मारने के विवाद में हमला
पुणे में ईद के बकरे द्वारा बच्चे को मारने पर हुए विवाद के बाद मोंटी सैयद, जमीर और अन्य लोगों ने हिंदू परिवार पर हमला कर दिया। इस साल 17 जून को पुणे के यरवदा इलाके में रहने वाले एक हिंदू परिवार पर एक बड़ी मुस्लिम भीड़ ने बेरहमी से हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब उनके परिवार की 3 साल की हिंदू लड़की आँगन में खेल रही थी। इसी दौरान उसी इलाके में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के 3-4 नाबालिग लड़के बकरीद पर कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों के साथ खेल रहे थे।
बकरियों में से एक ने दौड़कर लड़की को मारा जिसके बाद उसका परिवार यह देखने के लिए आँगन में पहुँचा कि क्या हुआ है। जब उन्होंने लड़कों से घटना के बारे में पूछा तो वे हिंदू परिवार के सदस्यों से बहस करने लगे और उनके साथ मारपीट भी करने लगे। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने हिंदू परिवार पर पत्थरबाजी की। उन्होंने रॉड और डंडों से भी परिवार पर हमला किया।
पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और नाबालिगों समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया है। इस घटना की एफआईआर कॉपी ऑपइंडिया को मिली है। पुणे पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 143 (अवैध रूप से एकत्र होना), 147 (दंगा करने की सजा), 149, 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 504 (जानबूझकर अपमान या उकसावा) और 337 के तहत धाराएँ लगाई हैं। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
मीरा रोड: सोसायटी में बकरा काटने से रोकने पर हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों का हमला
मुंबई के मीरा रोड इलाके का यह मामला 18 जून को ऑपइंडिया द्वारा एक्सक्लूसिव तौर पर रिपोर्ट किया गया था। काशीगांव पुलिस स्टेशन ने हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट में रहने वाले वजूद नामक व्यक्ति पर हिंदुओं का अपमान करने, उन्हें धमकाने और धर्म को गाली देते हुए ‘हिंदुओं के म** की च**’ कहने का आरोप लगा है। भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 295A और 153A के तहत FIR दर्ज की गई।
यह घटना 16 जून को हुई जब मीरा रोड पर हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट और जेपी नॉर्थ सेलेस्टे सोसाइटी में रहने वाले मुस्लिम निवासियों ने बकरीद के त्यौहार से पहले अवैध रूप से वध के लिए सोसाइटी परिसर में बकरियाँ ले आए। हिंदुओं ने इस घटना का विरोध किया और पुलिस को बुलाया। हालाँकि, पुलिस ने यह कहते हुए बकरियों को जाने दिया कि सोसाइटी के भीतर कोई नीति नहीं है। इस बीच, हिंदुओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और सोसायटी के परिसर में कुर्बानी पर आपत्ति जताई। हालाँकि, मुस्लिम निवासियों ने हिंदुओं के साथ बहस की और दावा किया कि वे सोसायटी के परिसर में बकरे काटेंगे।
ऑपइंडिया को मिली एफआईआर की कॉपी में कहा गया है कि मुसलमानों ने हिंदुओं को धमकाते हुए कहा कि वे (मुसलमान) सोसायटी परिसर में ही बकरे काटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। एफआईआर के अनुसार वजूद ने कहा, “जो कर सकते हो करो। हम यहीं सोसायटी परिसर में ही जानवरों को काटेंगे। हिंदुओं के म** की च**।”
शिकायत में निवासी ने आगे कहा कि आरोपी व्यक्ति ने भगवान गणेश का भी अपमान किया। वजूद ने हिंदुओं को धमकाते हुए कहा, “आप लोग गणेश उत्सव मनाते हैं। क्या हम तब कुछ कहते हैं? जब हम आपके भगवान गणेश को देखते हैं तो हमें गुस्सा आता है और उल्टी आती है। हम देखेंगे कि आप यहाँ अपना गणेश उत्सव कैसे मनाते हैं।”
इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ और यहाँ पढ़ी जा सकती है।
ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
केरल में आयकर विभाग ने पुरानी कार के शोरूम में छापेमारी करके 102 करोड़ रुपए के कालेधन का पता लगाया है। आयकर विभाग ने मलप्पुरम निवासी मुजीब रहमान की कंपनी ‘रॉयल ड्राइव’ में कालेधन के लेनदेन का खुलासा किया। इसमें सिनेमा और खेल जगत के कई बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। आयकर विभाग अब इन सबको नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है।
कार के शोरूम तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, मलप्पुरम और कोझिकोड में हैं और आयकर विभाग ने यहाँ दो दिनों तक छापेमारी की थी। आयकर विभाग ने पिछले कुछ महीनों में यहाँ बड़ी रकम के लेन-देन का संदेह जताया है। इसमें मलयालम फिल्मों के कई सितारे तथा राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों की भी मिलीभगत सामने आई है।
आयकर विभाग ने पाया कि कई मशहूर हस्तियों ने लग्जरी कारें खरीदीं। उन्हें एक या दो साल तक इस्तेमाल किया और फिर अपने खातों में लेन-देन दर्ज किए बिना उन्हें रॉयल ड्राइव को बेच दिया। यह भी पाया गया कि शोरूम से कारें खरीदी गईं, जिनकी कीमत कालेधन से चुकाई गई। इस घटना में एक भारतीय क्रिकेटर और कई मलयालम फिल्म सितारे भी शामिल हैं।
खास बात यह है कि यह पैसा खातों में लेन-देन दर्ज किए बिना ही प्राप्त कर लिया जाता था। जाँच में यह भी पता चला कि शोरूम से गाड़ियाँ काले धन से खरीदी गई थीं। आयकर विभाग ने इस मामले में शामिल फिल्मी सितारे और खिलाड़ियों सहित सभी लोगों को नोटिस भेजने का फैसला किया है।
बता दें कि पिछले साल कोझिकोड में 20 कपड़ा दुकानों पर जीएसटी खुफिया छापेमारी की थी। इसमें फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए 27 करोड़ रुपए की कर चोरी का खुलासा हुआ था। केएस अशरफ अली, नूरजहाँ और शबीर की दुकानों के साथ-साथ के अब्बास के घर पर छापेमारी की गई थी। इस धोखाधड़ी में केरल के बाहर से खरीदे गए सामानों के लिए कर दस्तावेजों में जालसाजी शामिल थी।
ब्रिटेन के आम चुनावों में 14 साल से सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इन चुनावों में लेबर पार्टी ने कंजर्वेटिव को मात देते हुए 400 सीटों से अधिक पर जीत हासिल की है। लेबर को इसी के साथ प्रचंड बहुमत मिल गया है।
कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनाक ने अपना इस्तीफ़ा राजा को दे दिया है। अब लेबर पार्टी के नेता किएर स्टार्मर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन रहे हैं। उनकी पार्टी ने कुल 650 में से 412 सीटें जीत ली हैं।
ब्रिटेन के चुनावों में में कंजर्वेटिव पार्टी की इस हार के अनुमान पहले से लगाए जा रहे थे। अब इस हार को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग तरीके से देख रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे एंटी इनकम्बेंसी तो कुछ इसे कंजर्वेटिव की नीतियों का परिणाम बता रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इस हार के पीछे बढ़ती महँगाई और कोविड संकट को कारण बताया है। लेकिन इन सबसे अलग एक बिल्ली ‘लैरी द कैट’ ने भी बताया है कि कंजर्वेटिव क्यों हारे।
क्या कहा ‘लैरी द कैट’ ने?
लैरी द कैट ब्रिटेन की राजनीति पर समयसामयिक टिप्पणी करने वाला एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट है। इसे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास 10, डाउनिंग स्ट्रीट पर रहने पली एक बिल्ली लैरी के नाम से बनाया गया है। यह अकाउंट लैरी के माध्यम से ब्रिटेन की राजनीति पर टिप्पणियाँ करता है।
लैरी द कैट के इस अकाउंट से ब्रिटेन में कंजर्वेटिव की हार पर कई टिप्पणियाँ लिखी गईं। एक ऐसे ही ट्वीट में लैरी ने लिखा, 4 जुलाई वो तारीख है जिस दिन देश ने बिना कोई सुविधा दिए टैक्स बढ़ाने वाले एक अलोकप्रिय और जमीन से दूर शासक को सत्ता से बाहर कर दिया।
The 4th July is a date associated with a nation finally vanquishing an unpopular, out of touch ruler who charged taxes without providing services. Apt.#GeneralElection2024
दूसरे एक ट्वीट में लैरी ने लिखा कि कंजर्वेटिव पार्टी के तीन बड़े नेताओं ने पार्टी के लिए प्रचार तक नहीं किया, ऐसे में पार्टी की हार सुनिश्चित ही थी। यह बात ऋषि सुनाक के एक ट्वीट के जवाब में लिखी गई थी, जिसमें उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी में एकता बताई थी। इसमें ऋषि के अलावा ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून और बोरिस जॉनसन के साथ ही डेविड गोव की तस्वीरें थी। यह तीनों कंजर्वेटिव पार्टी के बड़े नेता हैं।
Three of the four people pictured have chosen not to stand for the Conservatives at this general election; you're on your own Sunak. pic.twitter.com/0ToAPrMeIK
लैरी ने एक और ट्वीट में लिखा, “मैं कोई राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ नहीं हूँ, लेकिन जब कैबिनेट मंत्री ही विपक्ष के भारी बहुमत से जीतने का दावा करने की बात कर रहे हैं, तो ऐसा लगता नहीं कि कंजर्वेटिव का चुनाव अभियान ढंग से चल रहा है।”
I'm not an expert, but when cabinet ministers are talking about the opposition winning a supermajority and claiming unchecked power, it feels like the Conservative's election campaign isn't going brilliantly… https://t.co/sgWW6PSqmF
कंजर्वेटिव पार्टी के अभियान को लेकर लैरी ने यह भी लिखा, “कंजर्वेटिव्स का चुनाव अभियान इस बात पर आधारित है कि लोग भूल जाएँ कंजर्वेटिव 14 साल से सत्ता में नहीं हैं। हो सकता है कि वो लोग कंजर्वेटिव के शासनकाल को भले भूल जाएँ लेकिन वह उन्हें माफ़ नहीं करेंगे।” लैरी की इन टिप्पणियों को ब्रिटेन समेत दुनिया भर में देखा गया है।
The Conservatives election campaign is seemingly based on forgetting that the Conservatives haven't been in power for the last 14 years. While most voters would probably be happy to forget, I'm not convinced they'll be willing to forgive.
लैरी 17 वर्षीय बिल्ली है। वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास में रहती है। उसे ‘चीफ माउसर टू द कैबिनेट’ का दर्जा मिला हुआ है। यह दर्जा आधिकारिक है। उसे 2011 में यह पदवी मिली थी। वह 2011 से ही प्रधानमंत्री आवास पर रहती है। लैरी द कैट को डेविड कैमरून में कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास में लाया गया था। उसे कैमरून ने एक नौकरशाह का दर्जा दिया था। लैरी का मुख्य काम प्रधानमंत्री आवास पर चूहे पकड़ना है।
लैरी लगातार प्रधानमंत्री आवास और उसके आसपास घूमा करती है। कहा जाता है कि उसे फोटो खिंचाना भी काफी पसंद है। उसके लगातार कई फोटो सामने आते रहते हैं। उसके यहाँ रहते हुए प्रधानमंत्री आवास में पाँच प्रधानमंत्री और उनके परिवार रहने आ चुके हैं। लैरी ने नए प्रधानमंत्री किए स्टार्मर से भी अपनी माँगे स्पष्ट कर दी है। लैरी के नाम से चलाए जाने वाले एक्स अकाउंट ने स्टार्मर को बधाई देते हुए लिखा कि लैरी के नाश्ते का वक्त सुबह 10 बजे, दोपहर के खाने का वक्त 11 बजे और रात के खाने का वक्त 3 बजे, 5 बजे और 7 बजे है।
Congratulations on your much deserved victory. Now, the important business of my meal times: I like breakfast at 10, lunch at 11, dinner at 3. And 5. And 7. Plenty of snacks in between. Get that right and the rest of your job is a doddle.
लैरी ने लिखा कि इस बीच उसे कई बार हल्का फुल्का खाना भी चाहिए। लैरी ने कहा कि उसे ये मिलता रहे तो किएर की गद्दी को कोई आँच नहीं आने वाली। अब किएर लैरी के प्रधानमंत्री आवास पर रहते हुए छठे प्रधानमंत्री होंगे। लैरी की तस्वीरें लगातार अब सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं।
महाराष्ट्र के पुणे में पोर्श कार से दो लोगों को कुचलकर मारने के आरोपित किशोर ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखकर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश कर दिया। दरअसल, किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपित किशोर को जमानत शर्तों के तहत सड़क सुरक्षा विषय पर निबंध लिखकर जमा करने का आदेश दिया था।
बता दें कि 19 मई 2024 को पुणे में एक नामी बिल्डर के किशोर ने अपनी तेज रफ्तार लग्जरी पोर्श कार से एक बाइक को टक्कर मार दी थी। इस बाइक पर सवार एक लड़के और एक लड़की की मौत हो गई थी। दोनों मृतक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। घटना के वक्त आरोपित नशे में था। इस लग्जरी कार को पिता विशाल अग्रवाल ने अपने नाबालिग बेटे को खरीद कर दी थी।
एक अधिकारी ने बताया कि आरोपित किशोर को पिछले महीने पर्यवेक्षण गृह से रिहा कर दिया गया था। जमानत की शर्तों में यह लेख लिखना शामिल था। दरअसल हादसे के बाद से इस नाबालिग आरोपित को किशोर न्याय बोर्ड के पर्यवेक्षण गृह में बंद किया गया था। हालाँकि, हाईकोर्ट ने इसे गलत माना और आरोपित को रिहा करने का आदेश दिया था।
दरअसल, शहर के कल्याणी नगर इलाके में हुए पोर्श कार हादसे के कुछ घंटे बाद ही 17 साल के आरोपित किशोर को जमानत दे दी थी। किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपित को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा था। इसके बाद लोगों का आक्रोश फूट गया था। लोगों ने इसके लिए बोर्ड की जमकर आलोचना की थी।
दबाव बढ़ता देखकर पुणे पुलिस ने फिर से किशोर न्याय बोर्ड का रुख किया और आदेश में संशोधन की माँग की। इसके बाद बोर्ड ने आरोपित को निगरानी गृह में रखने का आदेश दिया। इसके खिलाफ आरोपित किशोर के परिजन हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने आरोपित को रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद पिछले महीने किशोर को रिहा कर दिया गया।
इससे संबंधित मामले में किशोर के पिता और दादा को भी गिरफ्तार किया गया था। दादा को जमानत मिल गई है। दोनों पर अपने परिवार के ड्राइवर का अपहरण कर कैद करने के आरोप हैं। किशोर के पिता और दादा ने ड्राइवर पर दबाव डाला था कि वह कार चलाने की बात कोर्ट में कहे। इसके लिए तोहफे और नकद राशि का लालच दिया। फिर उसे धमकाया गया।
जिस समय पूरा भारत टी 20 वर्ल्ड कप की जीत में डूबा हुआ है उस समय भारत के पूर्व कोच अंशुमन गायवाड को लेकर बहुत बुरी खबर है। सामने आया है कि अंशुमन गायकवाड ब्लड कैंसर से जूझ रहे हैं और उन्हें अपने इलाज के लिए पैसे चाहिए। इस संबंध में बीसीसीआई से भी मदद माँगी गई है।
अंशुमन को कैंसर होने की बात ऐसे समय में सामने आई है जब भारत के वर्ल्ड कप जीतने पर बीसीसीआई ने टीम को 125 करोड़ देने का ऐलान किया है और खबर पढ़कर बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने एक ऐलान किया। मिड-डे रिपोर्ट में लिखे अपने कॉलम ने बीसीसीआई से अनुरोध किया कि वो अंशुमन गायकवाड के इलाज के लिए मदद करें। वो इस समय में लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं।
पाटिल ने बताया कि क्रिकेट बोर्ड से ऐसा नहीं है कि गायकवाड को सहायता नहीं मिली, लेकिन उस सहायता के अतिरिक्त उन्हें और मदद की जरूरत होगी। पाटिल ने अपने लेख में बताया कि अंशुमन गायकवाड से मिलने वो और पूर्व खिलाड़ी दिलीप वेंगसरकर गए थे। इसके बाद उन लोगों ने बीसीसीआई कोषाध्यक्ष आशीष शेलार से भी बात की थी। पूर्व क्रिकेटर के अनुसार, शेलार तुरंत स्थिति पर विचार करने के साथ-साथ अन्य पूर्व भारतीय खिलाड़ियों के फंड अनुरोधों पर भी सहमत हो गए।
बता दें कि अंशुमान गायकवाड़ ने दिसंबर 1974 से दिसंबर 1984 के बीच टीम इंडिया के लिए 40 टेस्ट मैच और 15 वनडे मैच खेले। इसके अलावा उन्होंने दो अलग अलग कार्यकाल (पहले 1997-1999 और फिर 2000)में भारतीय क्रिकेट टीम को कोचिंग भी दी। उनकी कोचिंग के दौरान कई उपलब्धियाँ भारत ने अपने नाम देखी। जैसे भारत की टीम साल 20000 में चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल तक पहुँची थी और साथ ही साथ भारत के पूर्व खिलाड़ी अनिल कुंबले के नाम जो 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड है वो भी अंशुमन गायकवाड के कार्यकाल में ही बना था। राहुल द्रविड़ जिनकी कोच रहते आज भारत वर्ल्ड कप जीता है वो द्रविड भी गायकवाड की कोचिंग खेल चुके हैं।
इसके अलावा आज ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले ‘मास्टर ब्लास्टर’ की उपाधि पाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भी जीवन में जो ऊँचाइयों को छुआ वो अंशुमन गायकवाड के कोच रहते ही था। उनकी इसी उपलब्धियों को लेकर पाटिल ने कॉलम में लिखा भी- “मैं आँकड़ों के बारे में बात नहीं करता, लेकिन मुझे लगता है कि अंशुमन के कार्यकाल के दौरान सचिन तेंदुलकर सबसे सफल रहे। मैं एक बार भी यह सुझाव नहीं कहता कि वो सारे रन अंशु की बल्ले से आए थे, लेकिन जब सचिन को अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए सभी नैतिक समर्थन की आवश्यकता थी, तो अंशुमन वहाँ मौजूद थे और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वह 1990 के दशक में राष्ट्रीय चयनकर्ता भी थे और वर्तमान में भारतीय क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं।”
पंजाब शिव सेना नेता संदीप थापर (अमर बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी सुखदेव थापर के वंशज) पर शुक्रवार (5 जुलाई 2024) दोपहर लुधियाना सिविल अस्पताल के बाहर निहंगों के एक ग्रुप ने तलवारों से हमला किया। खास बात यह है कि थापर को पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई है और यह हमला उनके गनमैन के सामने हुआ, लेकिन उसने उन्हें बचाने के लिए कोई खास कोशिश नहीं की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संदीप थापर पर हमला करने वाले सभी निहंग मौके से फरार हो गए। इस दौरान सड़क पर भारी संख्या में लोग थे, लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। उन पर हमले का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ निहंग सिख उन्हें सड़क पर ही रोकते हैं और गनमैन को स्कूटी से उतार देते हैं। इसके बाद उन पर ताबड़तोड़ तलवार से हमला किया जाता है। वो गिर जाते हैं, फिर भी निहंग उन्हें मारते रहते हैं। इस दौरान वो निहंगों के सामने हाथ भी जोड़ते दिखते हैं, लेकिन हमलावरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने उनके नगर की रिवॉल्वर छीन ली थी।
संदीप थापर पर हमले का वीडियो वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी शेयर किया है। उन्होंने बताया है कि पीड़ित संदीप थापर की हालत नाजुक है।
#BREAKING: Punjab Shiv Sena leader Sandeep Thapar, who is also descendant of Indian Freedom fighter and martyr Sukhdev, has been assaulted with swords by a group of Nihangs outside Ludhiana Civil Hospital in Punjab on Friday afternoon, his condition is believed to be serious. pic.twitter.com/Yx7XiMx3jy
शिवसेना पंजाब के अध्यक्ष राजीव टंडन ने कहा, “संदीप थापर बीजेपी नेता रविंदर अरोड़ा की स्मृति समारोह में शामिल होने के लिए सिविल अस्पताल गए थे। जैसे ही वह अपने गनमैन के साथ अस्पताल से बाहर निकले, निहंगों के एक ग्रुप ने उन्हें रोक लिया। आरोपितों ने संदीप थापर पर उनके गनमैन के सामने तलवारों से हमला किया, जिसने उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं किया।”
जानकारी के मुताबिक, निगंहों के जाने के बाद उन्हें सीएमसी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। हमले के बाद शिवसेना नेताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ सिविल अस्पताल और बाद में डीएमसी अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में भगदड़ से गई 121 लोगों की जान मामले में यूपी प्रशासन जाँच करके एक्शन लेने में जुटा है। प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। वो लगातार पुलिस से उनके एक्शन के बारे में पूछ रहे हैं लेकिन इस बीच विपक्ष बयानबाजी देने में सक्रिय हो गया है… आज सुबह ही खबर आई थी कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी हाथरस में भगदड़ में मरे लोगों के परिजनों से मिलने गए। यहाँ जाकर उन्होंने कहा कि हादसे पर राजनीति नहीं होनी। अपनी इसी बात के साथ राहुल गाँधी ने कुछ चीजें कहीं जो बताती हैं कि राहुल गाँधी भले ही कैमरे पर राजनीति न करने की बातें कर रहे हों, लेकिन उनका अलीगढ़ पहुँचना उनकी राजनीति का ही हिस्सा है।
ये जानते हुए कि इस पूरे केस को योगी सरकार सख्ती से डील कर रही है राहुल गाँधी पीड़ितों से मिलकर कैमरे पर कहते दिखे कि पीड़ित परिजनों को दिल खोलकर मुआवजा मिले। इसके साथ ये कहकर कि ‘मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’ उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था की कमी थी अगर प्रशासन वहाँ जिम्मेदारी लेता तो ऐसी घटना नहीं होती। उनकी इन बातों से साफ है कि वो अलीगढ़ में पीड़ित परिवार से मिलने सिर्फ इसलिए गए थे ताकि उनकी राजनीति सधे। अगर ऐसा नहीं है और वाकई उन्हें मृतकों के दुख से लेना देना है तो फिर उनका ये दुख सिलेक्टिव घटनाओं पर ही क्यों है।
ज्यादा वक्त नहीं बीता, भारत में संदेशखाली का मामला खुला था। महिलाएँ चीख-चीखकर अपने पर हुए अत्याचार की कहानी बता रही थीं। पूरा देश उनकी आपबीती सुन सन्न था, लेकिन राहुल गाँधी तो क्या कॉन्ग्रेस के किसी प्रत्याशी के दिमाग में उन पीड़ितों से मिलने का ख्याल तक नहीं आया। इसके साथ अभी पिछले दिनों तमिलनाडु के कुल्लाकुरिची में जहरीली शराब के कारण 65 लोगों की मौत हुई थी… राहुल गाँधी की संवेदनाएँ एक भी बार मृतकों के परिवारों से मिलने के लिए नहीं उमड़ीं। न उन्होंने वहाँ जाना जरूरी समझा न ही पीड़ित परिजनों का हाल जानना।
इन मामलों पर चुप्पी और यूपी के हर मामले में उनकी सक्रियता दिखाती है कि उनकी मंशा सिर्फ और सिर्फ राजनीति है। हाँ! इस मामले में वो सीधा-सीधा हमलावर नहीं हो सकते क्योंकि अगर होंगे तो उनके गठबंधन के साथी अखिलेश यादव सवालों के घेरे में आएँगे, इसलिए वे पहले एक ‘नोट‘ की तरह अपनी सफाई दे दे रहे हैं कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए उसके बाद वो योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए अपनी राजनीति करते हैं। ( बता दें कि अखिलेश यादव के बाबा से कनेक्शन होने की बात में दो राय है । उनकी ऐसी वीडियो और पोस्ट वायरल हैं जिसमें वो कह रहे बाबा की जय जयकार कर रहे हैं)
ये कहना कि पुलिस अगर घटना के समय वहाँ होती तो ये सब नहीं होता- कितना उचित है वो भी तब जब मीडिया में हर जगह ये बात हो कि बाबा के सेवादार किसी पुलिस प्रशासन को भीड़ को कंट्रोल नहीं करने देते थे, वो अपनी आर्मी बनाकर खुद ही भीड़ हैंडल करने की बात करते थे। उनका ये दबदबा इतना था कि चाहे आम जन हो या नेता बाबा से मिलने जाते थे सबको सिक्योरिटी पीछे करनी पड़ती थी।
घटना वाले दिन भी यही हुआ था…जब बाबा ने अपनी जगह छोड़ी तो सारे लोग पीछे भागे, सेवादारों ने उन लोगों से धक्का-मुक्की की। जब कुछ उनमें से गिर गए तो उनकी मदद करने ग्रामीण और पुलिस वाले आगे आने लगे, मगर उस समय उन सेवादारों ने किसी की मदद करने से भी पुलिस को रोक दिया… सिर्फ ये कहते रहे कि बाबा की कृपा से सब ठीक हो जाएँगे। हालाँकि बाद में मौत का आँकड़ा बढ़ता देख उन सेवादारों ने सबूत मिटाने शुरू कर दिए। मीडिया को वीडियो बनाने से रोका और मृतकों के सामान फेंकने शुरू हुए और अंत में आरोपित फरार हो गए।
ये सारा खेल क्यों हुआ ये एक बड़ा सवाल है। पुलिस जाँच करने में जुटी है लेकिन उससे भी बड़ा सवाल राहुल गाँधी का सिलेक्टिव ढंग से पीड़ितों से मिलना है। सोचकर देखिए कि जिनका अपना कोई दुनिया छोड़ गया हो उसके पास इतना समय होता है कि वो राजनेताओं की राजनीति समझ सके। सामने आई तस्वीरों में पीड़ित परिजन उनसे लिपट कर रो रहे है, उन्हें पता तक नहीं है कि वो एक टूल की तरह प्रयोग किए जा रहे हैं जिससे राहुल गाँधी की छवि का निर्माण होगा…अगर ये मिलना इंसानियत के नाते होता तो दर्द तमिलनाडु के पीड़ितों के लिए उमड़ता और संदेशखाली व उन तमाम जगहों के लिए उमड़ता जहाँ किसी किसी कारणवश लोगों की जान चली जाती है।
हाथरस की घटना दुखद है और वाकई राहुल गाँधी को समझना चाहिए कि इसपर ‘राजनीति नहीं करनी चाहिए’ कहकर राजनीति न करें। इससे पहले भी वो हाथरस से जुड़े केस में एक परिवार से मिलने गए थे। वहाँ जाकर उन्होंने मृतिका के परिजनों को सांत्वना दी थी। बाद में वीडियो आई तो पता चला कि उस जगह पहुँचने से पहले कैसे राहुल गाँधी चिल कर रहे थे। उस वीडियो को देख बिलकुल नहीं लग रहा था कि राहुल गाँधी को कोई दुख है और अगर दुख नहीं है तो क्या राहुल गाँधी के ऐसे दौरों को राजनीति से प्रेरित और दिखावा नहीं कहा जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च को भेजे गए नोटिस में यह बात सामने आई है कि उसने किस तरह अडानी समूह को निशाना बनाया। इस खुलासे में किंगडन कैपिटल का नाम शामिल है। कहा जा रहा है कि अडानी को शॉर्ट सेल करने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक का इस्तेमाल किया। हालाँकि, कोटक बैंक ने इससे इनकार किया है।
SEBI को हिंडनबर्ग द्वारा दिए गए जवाब से पता चला है कि उसने किंगडन कैपिटल से साथ मिलकर अडानी समूह के खिलाफ साझेदारी की और उसके शेयरों की शॉर्ट सेलिंग करके करोड़ों डॉलर का लाभ कमाया। इस खुलासे ने किंगडन कैपिटल और इसके संस्थापक मार्क किंगडन तथा इनके वित्तीय हथकंडों के बारे में पता चलता है। साथ ही हिंडनबर्ग का चीनी कनेक्शन भी सामने आया है।
Here’s a huge smoking gun in the sordid episode of the short sale of #Adani shares by #Hindenburg. Pursuant to #SEBI's notice to Hindenburg, the following facts emerge: 1. Hindenburg – a research agency – was hired by American businessman #MarkKingdon to prepare a report on the… https://t.co/yar0uEuarm
किंगडन कैपिटल और हिंडनबर्ग रिसर्च को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जेठमलानी ने खुलासा किया है कि किंगडन कैपिटल के मालिक मार्क किंगडन और उनकी चीनी मूल की पत्नी अनला चेंग ने अडानी ग्रुप पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए हिंडनबर्ग रिसर्च को हायर किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि किंगडन कैपिटल ने अडानी समूह के शेयरों को शॉर्ट सेल करने के लिए कोटक महिंद्रा के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोला था। इस दौरान अडानी पर रिपोर्ट तैयार करके हिंडनबर्ग रिसर्च ने मार्केट में अफरा-तफरी मचाई और शेयरों को शॉर्ट सेल करके करोड़ों-रुपए कमाए। हालाँकि, इस दौरान भारतीय खुदरा निवेशकों लाखों करोड़ों रुपए डूब गए।
जेठमलानी ने आगे कहा, “किंगडन ने कोटक की अंतर्राष्ट्रीय निवेश शाखा (KMIL) से अडानी शेयरों में व्यापार करने के लिए एक ऑफशोर फंड और खाते स्थापित करने के लिए संपर्क किया। इस प्रकार कोटक इंडिया ऑपर्चुनिटी फंड (KIOF) अस्तित्व में आया। हिंडनबर्ग रिपोर्ट तैयार होने से पहले KIOF ने मॉरीशस के रास्ते अदानी शेयरों में बड़ी शॉर्ट पोजीशन ली।”
उन्होंने आगे कहा, “व्यापार के लिए फंड ($40 मिलियन) किंगडन के मास्टर फंड द्वारा प्रदान किए गए थे। इसकी एक बड़ी शेयर होल्डिंग किंगडन परिवार के पास है, जिसमें मार्क किंगडन की हाई प्रोफाइल पत्नी अनला चेंग भी शामिल हैं।” चीनी अमेरिकी नागरिक अनला चेंग अमेरिका में चीनी हितों के लिए एक प्रभावशाली लॉबिस्ट है। वह SupChina की सीईओ थी।
SupChina एक चीन समर्थक मीडिया कॉर्पोरेट थी। यह बाद में द चाइना प्रोजेक्ट नामक इकाई में बदल गई। चाइना प्रोजेक्ट को कुछ अमेरिकी सीनेटरों द्वारा इसकी विध्वंसकारी गतिविधियों की जाँच की माँग करने पर इसे बंद कर दिया गया। यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध शामिल हैं।
कौन है चीनी नागरिक अनला चेंग
मार्क किंगडन की पत्नी अनला चेंग निजी इक्विटी फर्म सिनो-सेंचुरी की पार्टनर हैं। वह न्यूयॉर्क स्थित समाचार प्लेटफ़ॉर्म SupChina की संस्थापक हैं। उनका करियर निवेश बैंकिंग से संबंधित हैं। चेंग ने रॉबर्ट फ्लेमिंग एंड कंपनी में काम किया और कमिटी ऑफ 100 में रहीं और कोलंबिया ग्लोबल सेंटर, ईस्ट एशिया के बोर्ड में रहीं।
चेंग का किंगडन कैपिटल से जुड़ाव वित्तीय, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक नेटवर्क का विस्तार है। अनला चेंग की सुपचाइना के साथ भागीदारी के लिए अमेरिकी सीनेट द्वारा जाँच का सामना करना पड़ा। आरोप है कि सुपचाइना ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एजेंटों को शरण दी। इससे विदेशी प्रभाव और जासूसी की गंभीर चिंताएँ पैदा होती हैं।
चेंग के खिलाफ जाँच 2022 में शुरू हुई थी। इसने उनकी पेशेवर गतिविधियों और विस्तार से किंगडन कैपिटल के संचालन पर भी छाया डाली। चेंग के खिलाफ आरोपों के संभावित निहितार्थ दूरगामी हैं क्योंकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक जासूसी और वित्तीय बाजारों की अखंडता को प्रभावित करती हैं। जाँच से किंगडन कैपिटल और उनके संबद्ध नेटवर्क पर प्रभाव पड़ सकता है।
ब्रिटेन के आम चुनाव में लीसेस्टर ईस्ट से हिन्दू उम्मीदवार शिवानी राजा ने जीत हासिल की है। वह कंजर्वेटिव पार्टी से चुनाव लड़ रही थीं। उन्होंने लेबर पार्टी के उम्मीदवार राजेश अग्रवाल को पटखनी दी है। वह खुद को ‘निडर हिंदू’ बताती हैं।
शिवानी राजा को इस चुनाव में 14,526 वोट मिले और लेबर पार्टी के राजेश अग्रवाल को मात्र 10,100 वोट मिले। इसके अलावा लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के ज़ुफ्फर हक़ केवल 6329 वोट हासिल किए। शिवानी राजा के साथ ही कंजर्वेटिव पार्टी के लिए भी यह बड़ी जीत है। कंजर्वेटिव पार्टी को यह जीत 37 साल बाद हासिल हुई है। इस सीट पर लगातार लेबर पार्टी कब्जा कर रही थी। शिवानी राजा लीसेस्टर में जन्मी पहली पीढ़ी की ब्रिटिश नागरिक हैं और एक कट्टर हिंदू हैं।
शिवानी राजा की वेबसाइट के अनुसार, शिवानी राजा के माता-पिता 70 के दशक के अंत में केन्या और भारत से लीसेस्टर चले गए थे। शिवानी ने डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पूरी की है। उन्होंने फार्मास्युटिकल और कॉस्मेटिक साइंस में ग्रेजुएशन किया है और बाद में इंग्लैंड में कुछ बड़े कॉस्मेटिक्स ब्रांड के साथ काम किया है।
पिछले महीने वह लीसेस्टर में हिन्दू मंदिर के 50 वर्ष पूरे होने के समारोह में भी हिस्सा लिया था।
?✨ Celebrating 50 Years of Sanatan Mandir! ✨?
For half a century, our Leicester community has focussed on fostering unity, devotion, and service. Together, we’ve built a legacy of faith, compassion, and rich cultural heritage.
पिछले महीने की शुरुआत में वह लीसेस्टर पूर्व में हिन्दू कथावाचक गिरिबापू के ‘शिव कथा’ कार्यक्रम में शामिल हुईं थी।
लेबर पार्टी को ब्रिटेन भर में जीत लेकिन लीसेस्टर में पटखनी
ब्रिटेन के आम चुनावों में लेबर पार्टी बड़ी जीत की तरफ अग्रसर है। इसी के साथ कंजर्वेटिव पार्टी का 14 साल का शासन खत्म हो गया है और अब लेबर पार्टी के नेता किएर स्टारमर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की भूमिका संभालने जा रहे हैं। लेकिन कंजर्वेटिव उम्मीदवार होने के नाते, शिवानी राजा ने लीसेस्टर ईस्ट सीट पर ऐतिहासिक जीत है।
लेसीस्टर ईस्ट परंपरागत रूप से लेबर पार्टी का गढ़ रही है। लीसेस्टर ईस्ट, हिन्दू मुस्लिम समेत कई समुदायों वाला इलाका है। यहाँ दशकों से लगातार लेबर उम्मीदवार जीतते आए हैं। यहाँ कंजर्वेटिव की जीत एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।
गौरतलब है कि यहाँ से हारने वाली निर्दलीय उम्मीदवार क्लॉडिया वेब ने पिछले साल खालिस्तानियों और उनके एक फर्जी ‘जनमत संग्रह’ का खुलकर समर्थन किया था। इस दौरान लंदन में भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानियों की भीड़ ने हमला भी किया था। उन्हें मिशेल मेरिट नाम की एक महिला को 18 महीने तक परेशान करने का दोषी पाया गया था। इसके बाद उन्हें लेबर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने इसके बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था।
हिंदू उम्मीदवार शिवानी राजा की जीत के इस क्षेत्र की जनसांख्यिकी और यहाँ के हालिया इतिहास के हिसाब से महत्वपूर्ण है। लीसेस्टर 2022 में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का केंद्र था, इसके बाद इस इलाके में काफी तनाव उत्पन्न हो गया था। इस तनाव के बाद पुराने मुद्दे बाहर आ गए थे। शिवानी राजा की जीत के बाद यहाँ के हिन्दुओं के मुद्दे सुलझने की उम्मीद है।
लीसेस्टर हिन्दू विरोधी हिंसा
वर्ष 2022 में लीसेस्टर में हिंदू विरोधी हिंसा हुई थी। ऑपइंडिया ने इस मामले में बताया था कि यहाँ सितंबर 2022 में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के बाद विवाद शुरू हुआ इसने जल्द ही लड़ाइयों का रूप ले लिया। इसके बाद इस इलाके में हिंदुओं के घरों, व्यवसायों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया था।
सोशल मीडिया पर हिन्दुओं के विरुद्ध फर्जी जानकारी भड़काऊ बयानबाजी की गई जिससे हिंसा भड़की। इलाके के मुस्लिमों ने लगातार हिन्दुओं के विरुद्ध अपमानजनक बयानबाजी की और सड़कों पर निकल कर हिन्दुओं को डराने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया। ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के सामने रखी गई CDPHR की एक रिपोर्ट में कहा गया कि हिंदू समुदाय पर हमला “लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून के राज” पर सीधा हमला था।
shivani raja from conservative wins leicester seat where violence against hindus hapeened in 2022