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हिन्दू लड़की से छेड़खानी, विरोध करने पर भाई को चाकू घोंपा, पिता को भी पीटा: सलमान-इमरान गिरफ्तार, मुबारिक-समीर खान फरार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अपनी बहन से छेड़खानी का विरोध कर रहे हिन्दू युवक को चाकू घोंपने की घटना सामने आई है। पीड़ित युवक का नाम सौरभ यादव है जिसका गंभीर हालत में इलाज चल रहा है। आरोपितों के नाम सलमान, मुबारिक, इमरान और समीर खान हैं। पुलिस ने सलमान और इमरान को गिरफ्तार कर लिया है। मुबारिक और समीर खान फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है। घटना गुरुवार (4 जून, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला ग्वालियर के जनकगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ के हरिकोटाशीर इलाके में 59 वर्षीय बालकिशन यादव किराने की दुकान चला कर परिवार का गुजारा करते हैं। उनके परिवार में 2 बेटे और 2 बेटियाँ हैं। किराने की दुकान पर बालकिशन यादव के अलावा उनकी बेटियाँ भी अक्सर सामान बेचती हैं। गुरुवार को बालकिशन अपनी बेटी के साथ दुकान पर मौजूद थे। तभी वहाँ सलमान, इमरान, मुबारिक व पड़ोसी समीर खान पहुँचे। ये सभी मुस्लिम बहुल इलाके आपागंज के निवासी हैं।

आरोप है कि इन सभी ने दुकान पर बैठी बालकिशन की बेटी से छेड़खानी शुरू कर दी। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो चारों ने मिल कर उसकी पिटाई शुरू कर दी। बेटी को बचाने की कोशिश में पिता को भी पीटा गया। इस दौरान बाप-बेटी को माँ-बहन की गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं। मारपीट की खबर सुन कर बालकिशन का बेटा सौरभ भी दुकान पर पहुँच गया। सौरभ यादव को आरोपितों ने चाकू घोंपने शुरू कर दिए। चाकू सौरभ की गर्दन और मुँह पर मारे गए। हमले से बालकिशन, उनकी बेटी और उनका बेटा सौरभ घायल हो गए।

बाप-बेटी को मामूली चोटें आईं हैं जबकि गंभीर रूप से घायल सौरभ यादव को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इस घटना पर नाराज़गी जताई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए ग्वालियर में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के पदाधिकारी वसंत गोडयाले ने बताया कि चारों आरोपितों में समीर खान पहले भी हिंदू लड़की को छेड़ने और प्रताड़ित करने के मामले में जेल काट चुका है। सौरभ यादव पर हुए हमले के विरोध में जब वसंत ने साथियों साथ थाने पर कार्रवाई की माँग उठाई तब उनको भी जान से मार डालने की धमकी दी गई।

इस घटना में मुबारिक, इमरान, सलमान और समीर खान को नामजद आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने सलमान और इमरान को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद मुबारिक और समीर खान फरार हो गए हैं। पुलिस टीमें दोनों आरोपितों की तलाश में दबिश दे रही हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

संगीत अनंत-राधिका का, रितिका का हाथ थामे चलीं नीता अंबानी: T20 के चैंपियंस ने की आरती, हर-हर महादेव का किया उद्घोष

बारबाडोस में T20 विश्व कप 2024 का चैंपियन बन कर आई भारतीय क्रिकेट टीम का भारत में जोरदार स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात की, मुंबई में हुए रोडशो में लाखों लोग जुटे और अब इन खिलाड़ियों को एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी में भी मेहमान बनाया गया है। अनंत अंबानी की शादी ‘एनकोर हेल्थकेयर’ के मालिक वीरेन मर्चेंट की बेटी राधिका मर्चेंट के साथ हो रही है, श्रृंखला में कई कार्यक्रम हो रहे हैं।

अब अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की संगीत सेरेमनी में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी पहुँचे, जिनका वहाँ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मुकेश अंबानी की पत्नी व ‘रिलायंस फाउंडेशन’ की चेयरमैन व MD (प्रबंध निदेशक) नीता अंबानी को खुद भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा की पत्नी रितिका सजदेह के हाथ पकड़ कर उन्हें ले जाते हुए देखा गया। इस दौरान मंत्रोच्चार ब्राह्मणों का मंत्रोच्चार चल रहा था। टीका लगा कर क्रिकेटरों का स्वागत किया गया।

इस दौरान रोहित शर्मा और उनकी पत्नी रितिका सजदेह के अलावा हार्दिक पंड्या को भी देखा गया। फाइनल मैच में चमत्कारी कैच लपकने वाले सूर्यकुमार यादव भी अपनी पत्नी देविशा शेट्टी के साथ पहुँचे थे। बता दें कि ये तीनों खिलाड़ी रिलायंस की IPL टीम ‘मुंबई इंडियंस’ का भी हिस्सा हैं। रोहित शर्मा पूर्व कप्तान हैं तो हार्दिक पंड्या मौजूदा कप्तान। इस दौरान खिलाड़ियों ने भगवान की आरती भी उतारी। उन्होंने ‘कृष्ण कन्हैया लाल की जय’ और ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष भी किया।

नीता अंबानी ने इस दौरान कहा, “हमारे बीच आज एक और परिवार है, जिन्होंने राष्ट्र को गर्वित किया है। आज रात जश्न का दिन है। आज हम अनंत और राधिका के विवाह में हम भारत का उत्सव मनाने वाले हैं।” इसके बाद नीता अंबानी ने इंडिया-इंडिया का नारा भी लगाया। वहीं मुकेश अंबानी ने कहा कि MS धोनी यहीं पर हैं, उनकी कप्तानी में 2011 में ये कारनामा हुआ था और अब इन खिलाड़ियों ने 2011 में ये कर दिखाया है। खिलाड़ियों ने ‘सरजमीं का परचम लहरा दो’ गाने के बीच तिरंगा भी लहराया।

हर टेंडर पर 3% वसूलता था झारखंड में मंत्री रहे आलमगीर आलम का ‘गैंग’, 1.35% मंत्री का होता था शेयर: ED ने सीज की ₹4.42 करोड़ की प्रॉपर्टी, PA के नौकर के घर मिला था नोटों का पहाड़

टेंडर में कमीशन घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही ईडी ने झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल, उसकी पत्नी रीता लाल और नौकर जहाँगीर आलम की 4 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपए की संपत्ति जब्त कर ली है। अस्थाई रूप से जब्त इन संपत्तियों के मामला अब एडजुकेटिंग अथारिटी के पास गया है, जहाँ से 180 दिनों में फैसला आएगा। ये पूरा घोटाला 3000 करोड़ रुपए से अधिक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने इन सभी संपत्तियों को जाँच में अवैध धन से अर्जित संपत्ति पाया है। जाँच में स्पष्ट हुआ है कि आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल ने पद का दुरुपयोग कर उक्त संपत्ति अपने व अपनी पत्नी तथा नौकर के नाम पर खरीदी है। ईडी ने जब्ती नोट में इसका जिक्र किया है कि संजीव कुमार लाल ने पूछताछ में स्वीकारा था कि कुल टेंडर का तीन से चार प्रतिशत राशि वसूला जाता था। इसमें वह मंत्री के शेयर के रूप में 1.35 प्रतिशत राशि वसूलते थे। यह राशि सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता से मुख्य अभियंता के माध्यम से वसूली जाती थी। राशि की वसूली नकदी में होती थी। सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता संजीव लाल से कैश लेने के लिए किसी व्यक्ति को भेजने के लिए कहते थे।

जानकारी के मुताबिक, कैश लेने के लिए संजीव लाल अपने दोस्त मुन्ना सिंह या मुन्ना सिंह के भाई संतोष सिंह को इंजीनियर्स के पास भेजते थे। इसके बाद संजीव लाल अपने नौकर जहांगीर आलम को रानी अस्पताल के समीप स्थित अभिनंदन मैरेज हाल के पास स्कूटी के साथ भेजते थे, जहाँ रुपयों से भरा बैग मुन्ना सिंह के भाई संतोष सिंह उर्फ रिंकू सिंह जहाँगीर को देते थे। वह उन रुपयों को अपने सर सैय्यद रेसिडेंसी में पहुँचाता था। ये संपत्ति भी जब्त कर ली गई है। संजीव लाल के अनुसार, कमीशन की राशि से 1.35 प्रतिशत राशि वह मंत्री आलमगीर आलम को पहुँचाते थे। टेंडर के वर्क ऑर्डर आवंटन से मिली कमीशन से 1.65 प्रतिशत राशि बड़े नौकरशाह, इंजीनियरों और कर्मचारियों को जाता था।

ईडी की जाँच में ये भी खुलासा हुआ है कि जहाँगीर आलम के फ्लैट से बरामद 32 करोड़ 20 लाख रुपये व मुन्ना सिंह के ठिकाने से बरामद 2.93 करोड़ रुपये मंत्री जहाँगीर आलम के थे। पूछताछ में जहाँगीर आलम ने इसे स्वीकारा भी था। 32 करोड़ 20 लाख 94 हजार 400 रुपये संजीव लाल के दो-तीन लोगों ने अलग-अलग तारीखों में उसे दिया था। मुन्ना सिंह ने ईडी की पूछताछ में स्वीकारा था कि उसने 53 करोड़ रुपये नकदी अपने छोटे भाई संतोष कुमार के माध्यम से कलेक्ट किया और उसे संजीव लाल तक पहुँचाया। ये रुपए मुख्यत: सात लोगों के माध्यम से लिए गए, जिनमें राजीव कुमार, संतोष कुमार, राजकुमार टोप्पो, अजय कुमार, अशोक कुमार गुप्ता, अजय तिर्की व अमित कुमार शामिल हैं। ये सभी ग्रामीण विकास विभाग में इंजीनियर्स हैं।

ईडी ने ये संपत्तियाँ की हैं जब्त

  • तीन अप्रैल 2023 को बरियातू में खरीदी गई 16.52 डिसमिल आवासीय भूमि। यह वार्ड नंबर नौ स्थित बरियातू में खाता नंबर 143 के प्लाट नंबर 440 पर है। इस पर 2000 वर्गफीट में एक बिल्डिंग भी है। दस्तावेज के अनुसार इसकी कीमत 70 लाख रुपये है। इसका वास्तविक मूल्य दो करोड़ 85 लाख रुपये है। यह संजीव कुमार लाल के नाम पर है।
  • रीता लाल के नाम पर पुंदाग मौजा में 20 फरवरी 2024 को खरीदी गई 8.60 डिसमिल जमीन। दस्तावेज के अनुसार यह 24 लाख 50 हजार रुपये में खरीदी गई थी। इसका वास्तविक मूल्य 47 लाख 30 हजार रुपये है।
  • जहाँगीर आलम के नाम पर सर सैय्यद रेसिडेंसी में 18 नवंबर 2023 को खरीदा गया 995 वर्गफीट का ब्लाक बी में फ्लैट नंबर 1ए। दस्तावेज के अनुसार यह फ्लैट 38 लाख में खरीदा गया था। ये वही फ्लैट है, जिसमें भारी मात्रा में नकदी पाई गई थी।
  • जहाँगीर आलम के नाम पर 23 फरवरी 2024 को पुंदाग मौजा में 9.75 डिसमिल जमीन। दस्तावेज के अनुसार यह 25 लाख 71 हजार रुपये में खरीदी गई थी। इसका वास्तविक कीमत 72 लाख 25 हजार रुपये है।

डीड में कम कीमत दिखाई, नकदी में अधिक भुगतान किया

अधिकतर अचल संपत्तियों की खरीदारी में बड़े पैमाने पर नकदी का इस्तेमाल हुआ है। ईडी ने जाँच में पाया है कि डीड में बैंक के माध्यम से बहुत कम राशि का भुगतान हुआ। डीड में राशि भी कम दिखाई गई है, जबकि अचल संपत्तियों के एवज में भुगतान की बड़ी राशि नकदी में हुई है। यह वही राशि थी, जो कमीशन के एवज में उन्हें मिली थी।

हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें नाले में फेंक ईसाई बन गया रवींद्र, अब घर में 100 हिन्दुओं को जुटा कर करवा रहा था येशु का गुणगान: लाइब्रेरी की आड़ में ₹500 देकर धर्मांतरण

राजस्थान के भरतपुर स्थित एक गाँव में में ईसाई धर्मांतरण की घटना को ले कर हंगामा खड़ा हो गया। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) कार्यकर्ता विरोध जताते हुए घटनास्थल पर पहुँचे। धर्मांतरण के लिए बुलाए गए लोगों की संख्या लगभग 100 बताई जा रही है। इस दौरान हिन्दू संगठन के सदस्यों की आरोपितों से हाथापाई भी हुई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के 20 महिलाओं सहित कुल 28 संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। मामले की जाँच चल रही है। घटना शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला भरतपुर जिले के थाना क्षेत्र मथुरागेट का है। शुक्रवार को हिन्दू संगठन ने सदस्यों को रेलवे फाटक नंबर 39 एरिया में बने एक घर में धर्मांतरण की सूचना मिली। इस सूचना पर विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष लाखन सिंह आने साथियों के साथ सिमको फैक्ट्री के पास बने इस घर में पहुँचे। घर के अंदर लगभग 100 लोग मौजूद दिखे। जमावड़े की वजह पूछने पर एक महिला ने सफाई के तौर पर वहाँ लाइब्रेरी चलने की बात कही। हालाँकि विहिप के कार्यकर्ता इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए।

लाखन सिंह के आरोप है कि घर के अंदर हिन्दुओं को ईसाई बनाया जा रहा था। यहाँ लोगों को 500 रुपए भी दिए जा रहे थे। जिस घर में यह सब कार्यक्रम चल रहा था उसका मालिक कोई रवींद्र कुमार है। रवींद्र मूल रूप से भरतपुर शहर के ही पास एक गाँव अजान का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि रवींद्र पहले हिन्दू था लेकिन कुछ समय पहले ईसाई बन गया। तब उसने अपने घर से हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियाँ निकाल कर नाले में फेंक दी थीं। इस हरकत का अजान गाँव के निवासियों ने विरोध किया था।

कहा जा रहा है कि तब से रवींद्र भरतपुर शहर में रह कर ईसाइयत का प्रचार करते हुए अन्य हिन्दुओं को भी धर्मांतरित कर रहा था। बताया जा रहा है कि रवीन्द्र के घर के बाहर चर्च फाउंडेशन का बैनर लगा था। यहीं पर WMF मानवाधिकार महासंघ कार्यालय का भी बोर्ड लगा है। शुक्रवार को हिन्दू संगठन के सदस्यों को अपने घर में देख का रवींद्र आग-बबूला हो गया। वह विहिप कार्यकर्ताओं से उलझ गया जिस से दोनों तरफ से हाथापाई हुई। इस हाथापाई में 1 व्यक्ति घायल हो गया है। एक महिला ने अपने साथ अभद्रता किए जाने का भी आरोप लगाया है।

मामले की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने विवाद शाँत करवाया। हिन्दू संगठनों ने जहाँ मामले में धर्मान्तरण की शिकायत दर्ज करवाई है तो वहीं रवींद्र् के परिजनों ने अपने साथ मारपीट का आरोप लगाया है। पुलिस ने कुल 28 लोगों को हिरासत में लिया है जिसमें 20 महिलाएँ हैं। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। विहिप नेता लाखन सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले भी भरतपुर की सोनार हवेली में धर्म परिवर्तन की घटना सामने आई थी। तब इसकी जाँच के लिए SIT का गठन हुआ था। हालाँकि आरोप है कि SIT ने आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।

जिस महिला को TMC गुंडों ने नंगा कर पीटा, बंगाल पुलिस ने उसे जाँच के लिए ब्लाउज और पेटीकोट जमा कराने को कहा: हमले के बाद शफीकुल ने नग्न तस्वीरें की थी वायरल

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में पुलिस की शर्मनाक कार्यशैली सामने आ रही है। ममता बनर्जी की पुलिस ने टीएमसी के गुँडों के अत्याचार की पीड़ित महिला से उसने कपड़े जाँच के लिए माँगे हैं। कूचबिहार जिले की घोक्साडांगा पुलिस ने गुरुवार (4 जुलाई 2024) को महिला से उसके साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट को देने को कहा है, जो उसने घटना के दिन पहने थे।

इस मामले को बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी ने उठाया। उन्होंने पुलिस द्वारा CrPC की धारा 91 के तहत जारी नोटिस की कॉपी को भी साझा किया, जिसमें साफ तौर पर पीड़ित महिला से साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट (शैया) कोशनिवार (6 जुलाई) को सुबह 10 बजे पुलिस स्टेशन में जमा करने को कहा गया है। इस मामले में महिला के कपड़े उतार कर टीएमसी के गुंडों ने पानी में फेंक दिए थे। इस मामले में शफीकुल समेत 4 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं।

इस मामले को बीजेपी के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी ने उठाया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “पीड़ित को परेशान करने का क्लासिक मामला! ममता पुलिस की दुस्साहसता की कल्पना करें। ममता बनर्जी की पुलिस उस महिला से, जिसे कूचबिहार जिले में टीएमसी के गुंडों ने पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया, उसके साथ छेड़छाड़ की और उसे बुरी तरह पीटा, फटे कपड़े जमा करने के लिए कह रहे हैं, जो अपराधियों ने जघन्य अपराध को अंजाम देते समय जबरदस्ती उससे उतार लिए थे। जब महिला को उसके परिवार के सदस्यों ने पाया, तो वह जमीन पर बेहोश पड़ी थी, लगभग पूरी तरह नग्न अवस्था में। यह बात स्पष्ट रूप से एफआईआर में दर्ज है। इसके बावजूद पुलिस उसके कपड़े माँग रही।”

उन्होंने आगे लिखा, “मेरी माँग है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए मामले को सीबीआई को सौंपना चाहिए, क्योंकि पश्चिम बंगाल पुलिस का इरादा अपराधियों को सजा दिलाने का नहीं, बल्कि उन्हें बचाने का है। पीड़ित की इकलौती गलती ये है कि वो बीजेपी से जुड़ी है और लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए काम कर रही थी। इस मामले के जाँच अधिकारी (IO) का ये घिनौना काम ये बताता है कि पुलिस सिर्फ पीड़ित को ही परेशान कर रही है। घोक्साडांगा थाने के जाँच अधिकारी और प्रभारी अधिकारी को उनके पक्षपाती काम और पीड़िता को अपमानित करने के लिए तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।”

25 जून को महिला पर बरपा था टीएमसी के गुंडों का कहर

बता दें कि 25 जून 2024 को टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी की समर्थक महिला को नंगा कर किया और उसके बाल पकड़कर एक किलोमीटर तक घसीटा। इस दौरान एक घंटे से ज्यादा समय तक उसकी पिटाई की गई। यह घटना पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के माथा भंगा-II ब्लॉक के रुईडांगा गाँव में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के गुंडों के एक ग्रुप ने राज्य में विपक्षी पार्टी बीजेपी की कार्यकर्ता होने के कारण महिला पर हमला किया। पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

पुलिस शिकायत के अनुसार, स्थानीय टीएमसी कैडर ने 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से महिला को घर से बाहर निकलने से रोक दिया था। पीड़िता पर उस समय हमला किया गया जब वह पास के पार्क से घर लौट रही थी। टीएमसी के गुंडों के एक समूह ने उस पर हमला किया, उसके कपड़े उतार दिए और फिर उसके कपड़े नदी में फेंक दिए। उन्होंने धमकी भी दी थी कि अगर वह फिर से बाहर निकली तो वे उसका घर तोड़ देंगे। कूचबिहार पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी शफीकुल समेत 4 लोगों को हिरासत में लिया था। शफीकुल ने हमले के दौरान पीड़िता की निर्वस्त्र तस्वीरें खींची और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

कट्टरपंथी जलीली को तो हरा दिया, लेकिन हिजाब की सर्जरी कर पाएँगे मसूद पेज़ेश्कियान? ईरान में सुप्रीम मौलाना अब भी शक्तिशाली, फिर भी नए राष्ट्रपति में महिलाओं को दिख रही उम्मीद

मसूद पेज़ेश्कियान ईरान के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने कट्टरपंथी सईद जलीली को हराया है। बता दें कि हिजाब न पहनने के कारण महासा अमिनी नामक युवती को ईरान पुलिस ने मार डाला था, जिसके बाद वहाँ कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ लाखों महिलाएँ एकजुट होकर सड़क पर उतरी थीं। मसूद पेज़ेश्कियान नरमवादी हैं और आशा जताई जा रही है कि उनके सत्ता में आने के बाद ईरान में कट्टरपंथ कम होगा। अब ईरान को उम्मीद है कि सामाजिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में काम होंगे, साथ ही ईरान की विदेशी नीति भी व्यावहारिक होगी।

ईरान में तेज़ी से आगे बढ़ रहे परमाणु कार्यक्रम के बीच उम्मीद है कि मसूद पेज़ेश्कियान के राष्ट्रपति चुने जाने का वैश्विक शक्तियाँ भी स्वागत करेंगी। ईरान का अमेरिका जैसे देशों के साथ चल रहे तनाव के अब शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद है। शहरी नागरिकों, महिलाओं और युवाओं का उन्हें समर्थन मिला है। वर्षों से ईरान में कट्टरवादी सत्ता है, जिसमें सुधारों के लिए बोलना भी गुनाह है। 69 वर्षीय मसूद पेज़ेश्कियान पढ़े-लिखे हैं, वो कार्डियक सर्जन हैं। उन्होंने ईरान में हिजाब को लेकर सख्त कानून में नरमी लाने का भी वादा किया है।

उम्मीद जताई जा रही है कि ईरान में समाज अब लिबरल होगा, एक विविधता वाली विचारधारा का जन्म होगा। साथ ही 2015 में परमाणु कार्यक्रमों को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था, वो फिर से अस्तित्व में आ सकेगा। हालाँकि, ईरान में एक दोहरी व्यवस्था चलती है जिसमें मौलाना ही सरकारी मामलों में अंतिम फैसला लेते हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई अब भी वहाँ के सुप्रीम लीडर हैं। अरब के आतंकी संगठनों को समर्थन के विषय में भी वही निर्णय लेते हैं।

लेकिन, चूँकि अब अयातुल्ला अली खामेनेई की उम्र 85 वर्ष हो गई है, उनका उत्तराधिकारी चुनने में नए राष्ट्रपति की बड़ी भूमिका होगी और इस तरह आगे के बड़े फैसलों में राष्ट्रपति प्रभावी रूप से शामिल रहेंगे। मसूद पेज़ेश्कियान ये भी कह चुके हैं कि अयातुल्ला अली खामेनेई की नीतियों के खिलाफ नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा कि अपने चुनावी वादे को पूरा न कर सकने की स्थिति में वो राजनीति को अलविदा कह देंगे। बता दें कि मई में एक हेलीकॉप्टर क्रैश में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत के बाद ये पद रिक्त हुआ था।

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी के नेतृत्व वाले सुधारवादी दल ने इस चुनाव में मसूद पेज़ेश्कियान का समर्थन किया था। इब्राहिम रईसी को खामेनेई गुट का माना जाता था और उन्होंने महिलाओं के ड्रेस से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक के मामले में इस्लामी कट्टरपंथी रुख अपनाया था। मसूद पेज़ेश्कियान ने कुप्रबंधन, अमेरिकी प्रतिबंधों और भ्रष्टाचार से जूझती ईरानी अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने का भी वादा किया था। कइयों का मानना है कि वो कमजोर राष्ट्रपति साबित होंगे, क्योंकि सुप्रीम लीडर का गुट अभी भी शक्तिशाली है।

महासा अमिनी की मौत को लेकर भी मसूद पेज़ेश्कियान ने ईरान पुलिस से स्पष्टीकरण माँगा था। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के समय उन्हें ईरानी सेना के लिए मेडिकल सुविधाएँ पहुँचाने का काम सौंपा गया था। खातमी के कार्यकाल में वो स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं। 1994 में एक दुर्घटना में उनकी पत्नी और एक बच्चे की मौत हो चुकी है। उन्होंने अकेले ही 2 बेटों और एक बेटी का पालन-पोषण कर बड़ा किया। इजरायल को लेकर ईरान का क्या रुख रहता है, ये भी देखने वाली बात होगी।

8 कैमरामैन और डायरेक्टर लेकर स्टेशन पहुँचे थे राहुल गाँधी, लोको पायलट वाले वीडियो के लिए पहले से तय थी स्क्रिप्ट: रेलवे अधिकारी ने बताया – नहीं था कोई ‘असली’ कर्मचारी

कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव से पहले काफी स्टंटबाजी की थी। कभी मकैनिक की दुकान पर गए, तो कभी खेतों में काम कर रहे किसानों के बीच, लेकिन अब सरकार को घेरने की कोशिश में स्क्रिप्टेड ड्रामा की पोल खुल चुकी है। दरअसल, शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को राहुल गाँधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। वहाँ उन्होंने कथित तौर पर लोको पायलटों से बातचीत की थी, जिसकी असलियत अब सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी शुक्रवार (5 जुलाई 2924) को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुँचे और कथित तौर पर करीब 50 लोको पायलट्स से मुलाकात कर उनकी परेशानियों को जाना था। लेकिन राहुल के रेलवे स्टेशन के दौरे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने जिन लोको पायलटों से मुलाकात की, वे कहीं और से लाए गए थे और वे भारतीय रेलवे लॉबी से नहीं थे। रेलवे के मुताबिक, राहुल गाँधी 8 कैमरामैन के साथ नई दिल्ली स्टेशन पहुँचे थे। ऐसा लग रहा था कि वे स्टेशन पर फिल्म या रील बना रहे हैं।

उत्तर रेलवे के मुख्य पीआरओ दीपक कुमार ने कहा कि रेलवे द्वारा एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें राहुल अपने साथ कुछ कैमरामैन लेकर आए थे और रील बनाते हुए देखे गए हैं। वहीं एक स्टाफ का कहना है कि वह राहुल गाँधी के निरीक्षण को फिल्म की शूटिंग समझकर देखने वहाँ पहुँचा था। इस पूरे मामले को लेकर राहुल गाँधी की खिल्ली भी उड़ रही है।

राहुल गाँधी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने निकाली भड़ास

बाला नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “राहुल गाँधी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आठ कैमरों और एक निर्देशक के साथ देखा गया, जहाँ वे “लोको पायलटों” से बात कर रहे थे, जिन्हें वे खुद लेकर आए थे। उन्हें किसी चीज़ की परवाह नहीं है; उन्हें सिर्फ़ ड्रामा की परवाह है। शर्मनाक!”

मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर लिखा, “राजधानी ट्रेन के ड्राइवर का चौंकाने वाला दावा: उसने कहा कि जब उसे पता चला कि राहुल गाँधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हैं, तो वह उनसे मिलने गया, लेकिन पाया कि जिन “लोको पायलटों” से वह बात कर रहा था, उनमें से कोई भी जाना-पहचाना चेहरा नहीं था। वह किसी को पहचान नहीं सका क्योंकि वे बाहरी लोग थे। धोखेबाज़ परिवार।”

सुनंदा रॉय नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर राहुल गाँधी का पीआर।

8 कैमरामैन कैमरों के साथ- 1 डायरेक्टर, जो रागा को चीजें समझा रहा है।

दो कथित लोको पायलट

बातचीत वीडियो के लिए कुछ और लोग।

इस तरह से राहुल गाँधी लोगों को बरगला रहे हैं।”

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ऐसा लगता है कि तीसरी बार असफल हुए राहुल गाँधी दोपहर में लोको पायलटों से मिलने गए। उनके साथ आठ कैमरामैन और एक डायरेक्टर भी थे। आप उनकी गिनती कर सकते हैं…इससे भी ज़्यादा अजीब बात यह है कि वे रियल लोको पायलटों से नहीं मिले, पूरी संभावना है कि वे पेशेवर अभिनेता थे, जिन्हें उनकी टीम ने बुलाया था।”

कॉग्रेस ने राहुल गाँधी के स्टेशन दौरे को लेकर एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, “नेता विपक्ष राहुल गाँधी ने नई दिल्ली में लोको पायलट्स से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं। लोको पायलट्स के कंधों पर रेलवे सुरक्षा की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनकी समस्याओं को दूर कर ही हम सुरक्षित रेलवे के लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।”

बता दें कि राहुल ने शुक्रवार को अपनी इस मुलाकात को लेकर कहा था, “नई दिल्ली में देश भर से आए 50 लोको पायलटों से मुलाकात की। प्रतिदिन हज़ारों ट्रेन यात्रियों की ज़िम्मेदारी होती है इनके कंधों पर है मगर, देश के यातायात की ये रीढ़ सरकार की उपेक्षा और अन्याय का शिकार हैं। बिना उचित आराम और सम्मान के काम करने पर विवश हैं। उनकी समस्याएँ सुन कर उनकी आवाज़ बुलंद करने का आश्वासन दिया – पहले भी किया है, और न्याय मिलने तक करता रहूँगा।”

8 आतंकियों के एनकाउंटर का बदला लेने वाला था फैजान शेख, लोन वुल्फ अटैक का था प्लान: कश्मीर से दिल्ली तक आर्मी एरिया की 14 बार कर चुका था रेकी

मध्य प्रदेश की आतंकवाद निरोधक दस्ते (MP ATS) ने खंडवा जिले से इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी फैजान शेख को गिरफ्तार किया है। आतंकी फैजान शेख मध्य प्रदेश में लोन वुल्फ अटैक की साजिश रच रहा था। इंडियन मुजाहिदीन के इस आतंकी के निशाने पर सुरक्षाबल के जवान भी थे। आतंकी फैजान के पास से भारी मात्रा में हथियार मिले हैं, इसके अलावा जिहादी साहित्य भी मिले हैं। आतंकी के मोबाइल से ATS को कई आतंकी संगठनों के संपर्क में होने से सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान शेख इंडियन मुजाहिदीन ( Terror outfit Indian Mujahiddin ) के कुख्यात आतंकी यासीन और उसके भाई रियाज भटकल को अपना हीरो मानता था। वो सिमी के सरगना रहे अबूल फैजल से भी खूब प्रभावित था और इन्हीं आतंकियों की तरह आतंक की राह पर चलना चाहता था। फैजान शेख भटकल से इस तरह प्रेरित था कि कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल कस्बे में रहने वाले यासीन और रियाज के घर भी जा चुका है। यही नहीं, वो सिमी से जुड़े आतंकी रकीब कुरैशी का भी खास था और उससे मिलने कोलकाता की जेल भी जा चुका था। एनआईए की टीम मई 2023 में जब आतंकी नेटवर्क की छानबीन करने पहुँची थी, तब भी फैजान से पूछताछ की गई थी। इसके बाद से उस पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

लोन वुल्फ अटैक करना चाहता था फैजान, बनना था बड़ा मुजाहिद

जानकारी के मुताबिक, एमपी एटीएस ने खंडवा के कंजर मोहल्ला से फैजान शेख को पकड़ा और उसके ठिकाने पर छापेमारी कर हथियार भी बरामद किए। फैजान के पास 4 मोबाइल भी मिले हैं, जिनके जरिए वो आतंकी संगठन के लिए युवाओं का ब्रेन वॉश भी कर रहा था। उसके पास से इंडियन मुजाहिद्दीन, आईएसआई, सिमी और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े साहित्य भी मिले हैं। यही नहीं, आतंकी संगठन सिमी के लिए भर्ती करने वाले मेंबरशिप फॉर्म भी उसके पास से मिले हैं। फैजान के पास से एक पिस्टल और 5 कारतूस भी मिले हैं। ATS की पूछताछ में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी फैजान शेख ने कबूल किया है कि उसके निशाने पर सुरक्षाबल थे। कुछ सुरक्षाबलों के घर और परिजनों की फैजान रेकी भी कर चुका था। उसे बस एक मौके का इंतजार था। आतंकी फैजान ने कबूल किया है, कि वो खूंखार आतंकी अबू फैजल से प्रभावित था और वो उससे भी बड़ा मुजाहिद बनना चाहता था।

एटीएस के महानिरीक्षक (IG) आशीष ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला है कि वो लोन वुल्फ अटैक यानी अकेले हमले की योजना बना रहा था, इसके लिए वो कश्मीर से दिल्ली तक आर्मी कैंट इलाकों की 14 बार रेकी भी कर चुका था। उसके निशाने पर सुरक्षाकर्मी थे। जानकारी के मुताबिक, कुल 7 भाई बहनों में फैजान सबसे कम 8वीं तक पढ़ा लिखा है। सिमी, आईएसआईएस से जुड़े खंडवा के ही रकीब की गिरफ्तारी के समय एसटीएफ टीम का उसने विरोध किया था। रकीब फिलहाल कोलकाता की जेल में बंद है। उससे मिलने फैजान कुछ महीने पहले वहां भी गया था। फैजान को ‘हीरो’ बनने और ‘फेमस’ होने की सनक थी। इतना ही नहीं एटीएस की टीम जब उसे गिरफ्तार करने आई तो वो खुश हो गया था, उसे लगा कि अब मेरा नाम भी लोग जानने लगेंगे।

आतंकी फैजान अपनी फेसबुक आईडी पर इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित जिहादी पोस्ट कर आईएम व आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार कर रहा था। वो पाकिस्तान में चल रहे मुजाहिदीन ट्रेनिंग कैंप की वीडियो, मसूद अजहर (जैश-ए-मोहम्मद) लश्कर-ए-तैयबा की तकरीर पोस्ट करते हुए कंधार विमान अपहरण की कहानी तथा मुल्ला उमर के बयान एवं अंसार गजवा-तुल-हिंद (एजीएच) से संबंधित पोस्ट भी शेयर करता था।

बता दें कि 31 अक्टूबर, 2016 को जेल से भागने के बाद भोपाल के बाहरी इलाके में एनकाउंटर में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा मारे गए 8 सिमी आतंकवादियों में से पाँच खंडवा के रहने वाले थे। फैजान इस एनकाउंटर का बदला लेना चाहता था। वह लोन वुल्फ अटैक करके खुद को इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल एवं सिमी सरगना अबू फैजल की तरह बड़ा मुजाहिद साबित करना चाहता था। अपनी योजना को अंजाम देने के लिए वो द्वारा स्थानीय अवैध हथियार कारोबारी तथा राज्य के बाहर के लोगों से संपर्क करके पिस्टल एवं कारतूस इकट्ठा कर रहा था, जिसमें वो आँशिक तौर पर सफल भी रहा था।

पाकिस्तानी अधिकारी के घर में भारतीय महिला से सेक्स की डिमांड, शिकायत की तो आरोपित को बकरीद के बहाने मुल्क भेजा; पीड़िता को नौकरी से निकाला

नई दिल्ली में तैनात एक पाकिस्तानी राजनयिक के घर में काम करने वाली भारतीय महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई है। आरोपित 54 साल का मिन्हाज हुसैन है। वह पाकिस्तान का ही रहने वाला है। पीड़िता की शिकायत पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद आरोपित को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है।

पीड़िता विधवा है। पुलिस में शिकायत करने से पहले उसने पाकिस्तानी राजनयिक से मिन्हाज हुसैन के करतूत की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मिन्हाज को बकरीद के बहाने पाकिस्तान भेज दिया गया। वहीं पीड़िता को नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद मिन्हाज फिर भारत लौट आया और राजनयिक के यहाँ काम करने लगा।

जिस पाकिस्तानी राज​नयिक के घर यह घटना हुई है, उनकी पहचान साद अहमद वाराइच के तौर पर सामने आई है। मिन्हाज हुसैन उनके आधिकारिक आवास में रसोइए के तौर पर काम करता था। पीड़िता भी यहीं घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थी। दोनों नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वाराइच के आधिकारिक आवास के सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे।

रिपोर्ट के अनुसार इसी साल फरवरी में मिन्हाज हुसैन भारत आया था। उसके बाद से वह पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था। उसे यौन संबंध बनाने को कहता था। अश्लील हरकतें करता था। पीड़िता ने वाराइच को इसके बारे में बताया तो उन्होंने उसे बकरीद के बहाने चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया। इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग ने पीड़िता को फोन कर 30 जून तक नौकरी और वाइराइच का घर छोड़ने को कहा। इस बीच मिन्हाज पाकिस्तान से लौटकर फिर वाइराइच के आवास में काम करने लगा।

इस घटना ने पीड़िता को बुरी तरह झकझोर दिया। 28 जून 2024 को वह तिलक मार्ग थाने गई और मिन्हाज हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मिन्हाज को 30 जून को वापस पाकिस्तान भेज दिया। वह आधिकारिक पासपोर्ट और वीजा पर भारत में रह रहा था।

क्रूस चौक, चर्च, साहेब का कोना, ईसाइयों का मेला… जब ‘हिंसक हिंदू’ अल्पसंख्यक हो जाएँगे तो भारत का हर गाँव होगा खड़कोना, रमेश राम बोल भी नहीं पाएँगे

आपने शायद खड़कोना या कोरकोटोली का नाम न सुना हो। ये छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिले के दो गाँव हैं। मैं यहाँ गया हूँ। आप पूछ सकते हैं कि जिस देश में करीब 6.5 लाख गाँव हैं, उनमें से किन्हीं दो का नाम लेकर मैं क्या बताना चाहता हूँ? आप ये भी पूछ सकते हैं कि इन दोनों गाँवों के बारे में आपको क्यों जानना चाहिए?

पिछले दिनों इलाहबाद हाई कोर्ट ने हिंदुओं का धर्मांतरण रोकने को कहते हुए कहा है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन बहुसंख्यक (हिंदू) अल्पसंख्यक हो जाएँगे। हाई कोर्ट उन्हीं हिंदुओं पर आए खतरे से सचेत कर रहा है, जिन्हें लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने सदन के भीतर ‘हिंसक’ बताया है। हाई कोर्ट ने जिस मामले में यह टिप्पणी की उसमें कैलाश नाम का एक व्यक्ति अपने गाँव के लोगों को दिल्ली की ‘कल्याण सभा’ में ले गया था। यह सभा असल में हिंदुओं को लालच देकर उन्हें ईसाई बनाने का एक उपक्रम था।

खड़कोना या कोरकोटोली बताते हैं कि कैसे इसी तरह के उपक्रम से पहले हिंदुओं को धर्मांतरित किया जाता है। फिर जब धर्मांतरित लोग अपने गाँव में बहुसंख्यक हो जाते हैं तो उनके गाँव की पहचान बदली जाती है और अल्पसंख्यक हो चुके हिंदुओं का जीवन कठिन बना दिया जाता है।

पहाड़ और जंगलों से घिरे खड़कोना और कोरकोटोली में मैं सितंबर 2022 में गया था। खड़कोना में आज 39 घर हैं। इनमें से हिंदुओं के केवल 5 घर ही बचे हैं। वहीं कोरकोटोली में 35 घर हैं। इनमें से केवल 7 परिवार अब हिंदू है। इन गाँवों की डेमोग्राफी बदलने का सिलसिला 1906 में ही शुरू हो गया था। खड़कोना के चर्च परिसर में लगा एक शिलापट्ट बताता है कि इन दोनों गाँवों के लोगों का पहली बार धर्मांतरण 21 नवंबर 1906 को हुआ था। उस तारीख को जिन 56 लोगों का बपतिस्मा हुआ था, उन सभी के नाम इस शिलापट्ट पर अंकित हैं। यह ​शिलापट्ट हिंदुओं के धर्मांतरण के 100 साल पूरे होने पर लगाया गया था।

खड़कोना और कोरकोटोली में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने की यात्रा ईसाई मिशनरियों ने तब भी पूरी कर ली है, जब पहली बार उन्हें इस जगह से खदेड़ दिया गया था। जिनलोगों को उस समय धर्मांतरित किया गया था, उनकी घर वापसी करवा दी गई थी। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पहली बार धर्मांतरण कराने के लिए इस गाँव में आया पादरी जिस जगह से जान बचाकर भागा था, वह जगह अब ईसाइयों के लिए ‘तीर्थ स्थल’ बन चुका है। इसे ‘साहेब का कोना’ कहते हैं। हर साल 29 नवंबर को यहाँ एक विशाल आयोजन होता है, जिसमें एक-डेढ़ लाख ईसाई जुटते हैं।

इसी ‘साहेब का कोना’ के पास हमें 65 वर्षीय कलाबेल मिले थे। कलाबेल के पूर्वज भी धर्मांतरित हुए थे। उनके अनुसार ईसाई मिशनरियों से उनके पूर्वजों को फायदा हुआ था, लेकिन उनलोगों को अब कोई लाभ नहीं मिल रहा। बावजूद वे बड़े गर्व से हमें ‘साहेब का कोना’ की कहानी सुना रहे थे। उन्होंने कहा, “साहेब लोग पहाड़ के रास्ते उधर से (आज के झारखंड से) आते थे। इसी जगह पर डेरा लगाते थे। गाँव के लोगों को यहीं बुलाते थे। पहले यहाँ पूरा जंगल था। अब हर साल यहाँ तीर्थ यात्रा लगता है।”

आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि इस जगह से हमें भागना पड़ा था, क्योंकि हम धर्मांतरण को लेकर बात कर रहे थे। वैसे खड़कोना की बदली डेमोग्राफी की मुनादी इस गाँव की ओर जाने वाली सड़क पर आपकी गाड़ी के मुड़ते ही होने लगती है। मुख्य सड़क से खड़कोना जाने का रास्ता 7.3 किलोमीटर लंबा है। खेतों और जंगल से घिरा है। दूर पहाड़ नजर आता है। रास्ते में ही सड़क किनारे चर्च बनी है। पूरे रास्ते जगह-जगह सड़क किनारे लकड़ी के बड़े-बड़े क्रॉस गड़े हैं। खड़कोना में प्रवेश करते ही ‘क्रुस चौक’ है। इसी चौक के करीब एक चर्च बना हुआ है जिसके परिसर में वह शिलापट्ट लगा है जिस पर पहली बार धर्मांतरित हुए लोगों के नाम का उल्लेख है।

इन गाँवों में रहने वाले हिंदुओं को अभिव्यक्ति की आजादी तक नहीं है। 25 साल के रमेश राम खड़कोना के बचे खुदे हिंदू लोगों में से एक हैं। वे अपनी परेशानियों के बारे में हमसे बात कर रहे थे, तभी धर्म बदल चुके ग्रामीण वहाँ जुट गए। उन्होंने हमें रमेश से बात नहीं करने दी। उलटे हमसे सवाल-जवाब करने लगे।

खड़कोना या कोरकोटोली केवल गाँव नहीं हैं। ये वो सच्चाई हैं जिससे हिंदू शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा बच नहीं सकता है। देश के जिस भी हिस्से (गाँव/शहर/प्रांत) में हिंदू अल्पसंख्यक हुए हैं, वहाँ न केवल उनका जीवन दूभर हुआ है, बल्कि उनके प्रतीक तक मिटा दिए गए हैं। उन्हें न तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, न अपने धार्मिक आयोजन और परंपराओं का निवर्हन करने की। इस वीभत्स कल से हिंदू अपनी पीढ़ियों को कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर नहीं बचा सकते। उन्हें खुद इसका प्रतिरोध करना होगा ताकि कोई कैलाश किसी रामकली के भाई को बहला-फुसलाकर किसी ‘कल्याण सभा’ में न ले जाए।