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जानबूझकर भीड़ के बीच से निकाली गई सूरजपाल की गाड़ी, हाथरस पुलिस ने बताया: भोले बाबा के वकील बोले- ज़हरीले स्प्रे से हुई घटना

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। नारायण हरि साकार उर्फ भोले बाबा उर्फ सूरजपाल के वकील एपी सिंह ने दावा किया है कि श्रद्धालुओं में कुछ लोगों के पास जहरीले स्प्रे थे। उन्होंने वहाँ पर इस्तेमाल किया तो लोगों को साँस लेने में दिक्कत हुई और फिर भगदड़ मची। यह बात भी सामने आई है कि घटना के दिन जानबूझकर श्रद्धालुओं के भीड़ के बीच से सूरजपाल की गाड़ी निकाली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि हाथरस हादसे के जरिए नारायण हरि के सत्संग को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्संग के दौरान 10 से 15 अज्ञात लोगों ने कमर पर जहरीला नशीला स्प्रे बाँधकर लोगों के ऊपर स्प्रे किया था। इसकी वजह से लोग बेहोश होते रहे और दम घुटने से मौत हुई। उन्होंने चरणरज की वजह से भगदड़ की घटना को नकार दिया।

एपी सिंह के मुताबिक, एक अज्ञात सफेद स्कॉर्पियो और एक काली स्कॉर्पियो पंडाल से कुछ दूरी पर खड़ी थी। घटना के बाद स्प्रे करने वाले लोग भाग गए थे। उन्होंने कहा कि यह बात उन्हें 3-4 लोगों ने बताई है। ये सभी लोग उस दिन घटनास्थल पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे इन लोगों के बयान भी एसआईटी और प्रशासन के सामने दर्ज करवाएँगे।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा अनुमति दी गई थी। इतना ही कार्यक्रम के लिए प्रशासन को नक्शा भी दिया गया था, जिसके आधार पर परमिशन मिली थी। वकील एपी सिंह ने स्थानीय प्रशासन से उस दिन की टोल तक के पास वाले सीसीटीवी संरक्षित करने की माँग की है।

उधर, हाथरस पुलिस का कहना है कि सेवादारों ने जानबूझकर भोले बाबा की गाड़ी को श्रद्धालुओं के भीड़ के बीच से निकाली थी। वे सेवादार जानते थे कि अगर ऐसा हुआ तो बाबा चरणरज के लिए श्रद्धालुओं में भगदड़ मच सकती है। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया। पुलिस इस ऐंगल से मामले की जाँच कर रही है कि किसी के कहने पर तो सेवादारों ने जानबूझकर ऐसा तो नहीं किया था।

दरअसल, पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर के संपर्क में एक राजनीतिक दल था। इतना ही नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस बात की आशंका जता चुके हैं कि यह साजिश हो सकती है। इसके बाद पुलिस और SIT इस मामले की प्रमुखता से जाँच कर रही है। इसके साथ ही इसके फंडिंग के स्रोतों की भी जाँच की जा रही है।

नेता के बेटे ने स्कूटी सवार महिला को कुचल कर मार डाला, 100 मीटर तक बोनट पर घसीटा: पिता हिरासत में, आरोपित कार लेकर फरार

महाराष्ट्र के मुम्बई से हिट एन्ड रन का मामला सामने आया है। यहाँ BMW चला रहे व्यक्ति ने एक स्कूटी सवार महिला को टक्कर मार दी। दुर्घटना में महिला की मौत हो गई है। BMW मिहिर शाह नाम का व्यक्ति चला रहा था जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पदाधिकारी का बेटा बताया जा रहा है। घटना रविवार (7 जुलाई, 2024) की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुंबई के वर्ली इलाके की है। यहाँ के कोलीवाड़ा इलाके के रहने वाले प्रदीप मछली बेच कर अपने परिवार को चलाते हैं। उनकी पत्नी कावेरी इस कारोबार में उनका हाथ बँटाती थीं। रविवार को पति-पत्नी स्कूटी से मछली खरीदने मंडी में गए थे। यहाँ से लौटते हुए एक तेज रफ़्तार BMW ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहाँ पर कावेरी ने दम तोड़ दिया जबकि प्रदीप का गंभीर हालत में इलाज चल रहा है।

पुलिस ने केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। जाँच में निकल कर आया है कि हादसे के समय कार मिहिर शाह नाम का एक व्यक्ति चला रहा था। कार की स्पीड तय मानक से काफी ज्यादा थी। टक्कर लगने से कावेरी लगभग 100 मीटर तक कार की बोनट पर ही लटकी रह गईं। इसके बावजूद भी मिहिर ने कार नहीं रोकी। मिहिर शाह के पिता राजेश शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के पदाधिकारी हैं। घटना के बाद मिहिर शाह कार ले कर फरार हो गया।

पुलिस ने मिहिर के पिता राजेश शाह को हिरासत में ले लिया है। BMW राजेश के ही नाम पर रजिस्टर्ड है। फरार मिहिर की तलाश की जा रही है।

पाकिस्तान-ईरान ने 12000 अफगानों को देश से निकाला: CAA में मुस्लिमों को जोड़ने की पैरवी कर रहा था भारत का जो गिरोह, वो इस्लामी मुल्कों की करनी पर चुप

ईरान और पाकिस्तान ने हाल ही में लगभग 12,000 अफगान प्रवासियों को अपने-अपने देशों से निर्वासित किया है। अफगानिस्तान के शरणार्थी और प्रत्यावर्तन मंत्रालय ने बताया कि सभी अफगान वापस अफगानिस्तान लौट आए हैं। हालाँकि, भारत में पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित रहने वाले कथित सेक्युलर इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। एक इस्लामी देश में ही मुस्लिमों के लिए जगह नहीं है।

ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ अफगानिस्तान के लोगों के साथ हो रहा है। जो काम पाकिस्तान अफगान लोगों के साथ करता है, वही काम अरब देश पाकिस्तान-बांग्लादेश या एशिया के अन्य इस्लामी देशों के साथ करते हैं। ऐसे में समय में देश के ये सेक्युलर जमात चुप्पी साध लेता है। इनके पास कहने को ना शब्द होते हैं और ना ही इसके पीछे देने के लिए तर्क होता है।

देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ तो यही जमात पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित हो रहे थे। उनके लिए ऐसे तर्क दे रहे थे, जैसे मानवाधिकार के ये कितने बड़े रहनुमा हों। सायमा, राना अयूब, आरफा खानुम शेरवानी जैसे लोग CAA का यह कहकर विरोध कर रहे थे, जब भारत पड़ोसी इस्लामी मुल्कों के पीड़ित हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि को अपने यहाँ आश्रय दे सकता है तो मुस्लिमों को क्यों नहीं।

अब जब पाकिस्तान अफगानिस्तान के मुस्लिमों को अपने यहाँ से जबरन निकाल रहा है तो ये जमात ना ही पाकिस्तान की भर्त्सना कर पा रहा है और ना ही ईरान का। एक इस्लामी मुल्क जब अन्य इस्लामी मुल्क के गरीब, पीड़ित मुस्लिमों को ही आश्रय नहीं दे रहा है तो भारत जैसे विविधता वाले देश से इस तरह की माँग किस तरह पर की जा सकती है, जबकि हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध जैसे धर्मों के लोगों को आश्रय लेने के लिए दुनिया में और कहीं जगह नहीं है।

चुनिंदा और अपनी सहूलियत के हिसाब से मुद्देे को रंग देने के कारण ही आज भारत में मुस्लिमों से जुड़े हर सवाल पर लोगों को संदेह होने लगा। इस संदेह में आरफा-सायमा जैसे नैरेटिव गढ़ने वालों का बहुत बड़ा योगदान है। वर्ना भारत में तो दुनिया भर के सताए हुए लोगों के आश्रय देने की प्राचीन परंपरा रही है। चाहे वो पारसी हों, यहूदी हों या यहीद के शासन काल के मुस्लिम ही क्यों ना हों, जिन्हें सिंध के राजा दाहिर ने अपने यहाँ शरण दिया था।

भारत में शरण पाने के बाद सारे समुदाय एवं पथ के लोग भारत की संस्कृति में समाहित हो गए, रच-बस गए लेकिन इस्लाम हमेशा खुद को अलग-थलग रखा। वह खुद को विशेष महसूस कराने के दायित्व दूसरे पर डालता रहा। परिणाम ये रहा है कि वे स्थानीय समुदाय के मन-मस्तिष्क में ऐसे लोगों की वजह से अपना स्थान नहीं बना पाए, जो आज के सेक्युलर बिरादरी जैसे कारामात उस दौरान के कुछ कथित लोग भी करते रहे होंगे।

इसमें आखिरकार नुकसान गरीब मुस्लिम वर्ग का ही हुआ। लेकिन, इन लोगों के लिए ये कभी मुद्दा रहा ही नहीं कि गरीब मुस्लिमों के बीच शिक्षा और विकास को तवज्जो दी जाए। अगर ऐसा होता तो ये सीरिया, लेबनान, इराक जैसे हिंसा ग्रस्त मुल्कों के आवाज उठाते। वहाँ के आतंकियों और सरकारों को कोसते। विश्व समुदाय के लोगों से उनके बीच शांति बहाल करने की कोशिश करते। हालाँकि, ऐसी माँग करते हुए उन्हें कभी देखा नहीं गया।

जब ईरान और पाकिस्तान की सरकारों ने अफगानिस्तान के हिंसा प्रभावित लोगों को देश से बाहर निकाल दिया तो हैदराबाद के सांसद ओसदुद्दीन ओवैसी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। वे शपथ ग्रहण करते हुए जय फिलिस्तीन के नारे लगा सकते हैं, पाकिस्तान के मुस्लिमों को CAA के तहत भारत में बसने के अधिकार की माँग कर सकते हैं लेकिन अफगानिस्तान के अपने मुस्लिम भाइयों के लिए आवाज नहीं उठा सकते।

ये सारा कुछ इस्लाम की वैश्विक भाईचारा का नतीजा है कह लें, देश की राजनीति में मुस्लिमवाद को बढ़ावा देने की कोशिश, ताकि खुद को पीड़ित शोषित दिखाकर विशेष रियायतों की माँग की सके। दुनिया को यह बताया जा सके कि देखो कि भारत किस तरह मुस्लिमों की अनदेखी करता है। इस तरह नैरेटिव ग़ढ़ने में यहाँ का बुद्धिजीवी, राजीनतिक और समाज का एक बड़ा तबका आक्रामक ढंग से काम कर रहा है।

ईरान और पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजे जाने के बाद अफ़गानिस्तान में मानवीय संकट और भी बढ़ गया है। इनमें से कई निर्वासित अफ़गानिस्तान लौटने के बाद अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं, क्योंकि देश आर्थिक अस्थिरता और बुनियादी सेवाओं की कमी का सामना कर रहा है। इसके अलावा, इन्हें नस्लीय भेदभाव एवं उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया भर के मानवाधिकार समूहों और संगठनों ने सामूहिक निर्वासन की निंदा की है और अफ़गान निर्वासितों की सुरक्षा और भलाई के बारे में चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। इसके तहत शरणार्थियों को ऐसे देशों में जबरन वापस लौटने पर प्रतिबंध है, जहाँ उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

देश दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठनों द्वारा पाकिस्तान और ईरान सरकार की निंदा की जा रही है, लेकिन भारत के बुद्धिजीवी खामोश हैं। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ रहा है कि इन देशों से वापस भेजे गए अफगान प्रवासी किस तरह अपना जीवन यापन करेंगे। ये भी पता नहीं है कि उनके साथ उनके देश में किस तरह का सलूक होगा।

इस तरह आरफा-सायमा और ओवैसी जैसे लोगों के लिए दो मुस्लिम देशों के बीच उनका आंतरिक मामला बन जाता है, जबकि वे भारत से चाहते हैं कि बांग्लादेशी मुस्लिम ही नहीं, म्यांमार के रोहिंग्या, पाकिस्तान के शिया-सुन्नी और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत अपने यहाँ शरण दें।

भारत में शरिया लागू करना चाहता था जो आतंकी लतीफ़, उसे मार गिराने वाले राजेंद्र प्रसाद जाट को ‘शौर्य चक्र’: कश्मीरी हिन्दू राहुल और TikToker आमरीन की कर दी थी हत्या

राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को रक्षा अलंकरण समारोह-2024 का आयोजन हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों अथवा उनके परिजनों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर शौर्य चक्र पाए भारतीय सेना के मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट से बातचीत की। मेजर राजेंद्र ने कश्मीर में लश्कर-ए-तैय्यबा के मोस्ट वॉन्टेड 10 लाख रुपए के इनामी आतंकी लतीफ़ राठर को उसके साथियों सहित मुठभेड़ में मार गिराया था।

भारत में शरिया कानून लागू करने की सोच वाले आतंकी राठर ने ही कश्मीर में रील बनाने वाली लड़की आमरीन की हत्या की थी।

मेजर राजेंद्र प्रसाद मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके परिवार और रिश्तेदारियों में कई लोग सेना में शामिल हो कर देश की सेवा कर रहे हैं अथवा पूर्व सैनिक हैं। मेजर राजेंद्र के मुताबिक, बचपन से ही उन्होंने अपने घर-परिवार में देश के लिए मरने-मिटने का जज्बा देखा जो उनको भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित कर गया। भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट के मेजर राजेंद्र प्रसाद ने हमें बताया कि शौर्य चक्र मिलने से उनका परिवार, गाँव और पूरा देश गौरवान्वित है, ऐसे में उनको ख़ुशी होना स्वाभाविक है। फिलहाल मेजर राजेंद्र की तैनाती हैदराबाद में है।

सरेंडर के लिए कहा तो आतंकी बरसाने लगे थे गोलियाँ

जिस वीरता के लिए मेजर राजेंद्र को शौर्य चक्र मिला तो मुठभेड़ अगस्त 2022 में कश्मीर के बडगाम इलाके में हुई थी। तब रात लगभग 10 बजे सुरक्षा बलों को खानसाहिब इलाके के वाटरहेल में कुछ आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट मिले थे। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय रायफल्स की 62वीं बटालियन में तैनात मेजर राजेंद्र प्रसाद अपनी टुकड़ी के साथ निकल पड़े। घटनास्थल पर पहुँच कर सूचना सही मिली। आतंकियों को घेर लिया गया और सरेंडर के लिए चेताया गया।

जवाब में आतंकियों ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। आखिरकार सुरक्षा बलों को जवाबी फायरिंग करनी पड़ी।

अँधेरी रात और जंगली क्षेत्र में हुई थी मुठभेड़

ऑपइंडिया ने मेजर राजेंद्र प्रसाद से उस मुठभेड़ के बारे में बात की। उन्होंने हमें बताया कि अँधेरी रात में दृश्यता न के बराबर थी। मुठभेड़ स्थल भी गाँव के बाहरी हिस्से में था जहाँ से जंगल शुरू होता था। घने पेड़ों के बीच एक घर में आतंकी छिपे हुए थे। छिपते और सँभाल कर सुरक्षा बलों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ ही देर में आतंकियों को अपने घिरे होने की जानकारी मिल गई। उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने पेड़ की ओट में खुद को बचाया और जवाबी गोलीबारी करने लगे।

आतंकी भी मारने थे और नागरिक भी बचाने थे

मेजर राजेंद्र प्रसाद ने हमें आगे बताया कि चूँकि आतंकी एक घर में छिपे थे इसलिए उनकी टुकड़ी को बहुत सँभल कर लड़ना पड़ रहा था। जवानों को ये नहीं पता था कि घर में कितने आतंकी छिपे हैं। साथ ही इस बात की भी पुष्टि नहीं हो पा रही थी कि कहीं आतंकियों ने किसी को बंधक तो नहीं बना लिया है। ऐसे में बेहद संभल कर लड़ते हुए सुबह हो गई। पूरी रात आतंकियों की तरफ से गोलियाँ बरसती रहीं। हालाँकि, इस दौरान मेजर राजेंद्र की टुकड़ी ने घेराबंदी कमजोर नहीं होने दी जिसकी वजह से आतंकी घर से निकल कर भाग नहीं पाए।

20 घंटे से अधिक चली थी मुठभेड़, 3 आतंकी ढेर

बकौल मेजर राजेंद्र प्रसाद अगले दिन सुबह होने पर सुरक्षा बलों को लगभग सटीक जानकारी हुई कि घर में छिपे आतंकियों की तादाद 3 थी। उनके पास भारी मात्रा में गोला-बारूद था। वो सभी घर की अलग-अलग लोकेशन से गोलियाँ बरसा रहे थे। आखिरकार मेजर रजेन्द्र ने खुद को आगे रखते हुए घर की तरफ मूव किया। गोलियों की बौछार से खुद और अपने साथियों को बचाते हुए वो घर के पास पहुँच गए। इस बीच कई गोलियाँ उन्हें और उनके साथियों को छू कर निकल गईं। घेराबंदी कड़ी होती देख कर तीनों आतंकियों ने हमला तेज कर दिया।

इन तमाम खतरों को उठाते हुए आखिरकार एक-एक कर के मेजर राजेंद्र के नेतृत्व में तीनों आतंकियों का खात्मा हुआ। रात लगभग 10 बजे से शुरू हुई मुठभेड़ अगले दिन शाम लगभग 8 बजे खत्म हुई। तीनों आतंकियों के शव घर और उसके आसपास अलग-अलग लोकेशन पर पड़े पाए गए थे। इन सभी के पास घातक हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए थे। तीनों आतंकी लश्कर ए तैयबा के सदस्य थे। ये सभी सेना और आम नागरिकों पर हुए कई आतंकी हमलों में शामिल थे।

साथ ही इनकी तैयारी बड़े हमले की भी थी लेकिन उस से पहले ये मेजर राजेंद्र प्रसाद और उनकी टीम द्वारा ढेर कर दिए गए।

आतंकियों में आमरीन का कातिल लतीफ राठर भी

मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट और उनकी टीम द्वारा जिन 3 आतंकियों को ढेर किया गया था उसमें कश्मीर का मोस्ट वॉन्टेड लतीफ़ राठर भी शामिल था। लतीफ़ राठर लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय आतंकी था जिसने मई 2022 में आमरीन नाम की कश्मीरी लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी थी क्योंकि वो सोशल मीडिया पर रील बनाती थी। लतीफ़ भारत में शरिया कानून लागू करने की विचारधारा रखता था और आमरीन के काम को गैर इस्लामिक मानता था।

इसके अलावा लतीफ़ राठर ने कई सैन्य शिविरों और कश्मीरी हिन्दुओं पर आतंकी हमलों को लीड किया था। इन घटनाओं में चर्चित राहुल भट हत्याकांड भी शामिल है।

देश की बेहतरी के लिए काम करें युवा

मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट ने ऑपइंडिया के माध्यम से देश के युवाओं को संदेश दिया है। उनका कहना है कि आज का युवा भले ही किसी भी क्षेत्र में कैरियर बनाए, पर वो देश की बेहतरी के लिए प्रयासरत रहे। मेजर राजेंद्र के मुताबिक सशस्त्र बलों के तौर पर सेना के अलावा अर्धसैनिक बल और पुलिस विभाग भी दिन-रात राष्ट्र की सुरक्षा के लिए प्रयासरत है। भारत की अभेद्य सीमाओं के साथ मजबूत आंतरिक तंत्र का श्रेय मेजर राजेंद्र ने इन सभी के सामूहिक प्रयासों को दिया।

मुस्लिम जिम ट्रेनर के साथ पत्नी का अवैध संबंध, पति ने बच्चे सहित खुद की ली जान, मर गई बीवी भी: मिला लव जिहाद का केस वाला सुसाइड लेटर

गुजरात के भरुच में लव जिहाद से परेशान एक युवक परिवार मौत के मुँह में समा गया। यहाँ एक महिला ने आत्महत्या कर ली, तो उसके पति ने बेटे को गला दबा के मार डाला और खुद रेल के आगे कूद कर जान दे दी। इस तरह से एक साथ कुछ ही समय के अंतर में 3 लोगों का परिवार खामोश हो गया।

सुसाइड करने वाले युवक ने अपने माता-पिता को लिखे पत्र में कहा है कि राजा शेख को नहीं छोड़ना है, उसने लव जिहाद किया है। साथ ही कहा है कि मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए जिम ट्रेनर बन जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, भरुच के भोलाव कॉलोनी में सीनियर सेक्शन इंजीनियर जतिन मकवाना ने दो दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। जतिन ने पहले अपने बेटे को मार डाला, उसके बाद सुनवाड़ी के पास रेलवे ट्रैक पर कूद कर आत्महत्या कर लिया। पत्नी ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, तो जतिन ने भी अपनी जान दे दी।

एक ही दिन में तीन शव मिलने से सनसनी फैल गई थी, जिसकी असली वजह अब सामने आई है। पता चला है कि जतिन ने एक सुसाइड नोट लिखा है। उसी सुसाइड नोट में लव जिहाद की जानकारी सामने आई है, साथ ही जिम ट्रेनर राजा शेख की कारस्तानी भी।

जतिन ने 22 जून को अपने पिता को लिखी चिट्ठी में पत्नी के अवैध संबंधों के बारे में बताया था। साथ ही ये भी बताया कि जिम में ट्रेनिंग दे रहे मुस्लिम युवक एक हिंदू लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ ले गए थे। इसमें जतिन ने लिखा है कि राजा शेख के खिलाफ लव जिहाद का मामला दर्ज किया जाए। जतिन ने यह भी आरोप लगाया कि राजा शेख की माँ ने भी पत्नी से बात की थी। इस मामले में पत्नी की माँ भी बराबर दोषी है।

जतिन ने सुसाइड नोट में लिखा, “पत्नी ने मेरी, (बेटे का नाम) और हम सबकी जिंदगी बर्बाद कर दी है, लेकिन राजा शेख को मत छोड़ना, (उसके खिलाफ) लव जिहाद का मामला दर्ज करो। ये उसका काम है। आज मेरी जिंदगी बर्बाद हुई है, कल किसी और की होगी।”

‘मुस्लिम युवक खुद को जिम ट्रेनर बताकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं’

जतिन ने पत्र में आगे लिखा, ”जिम में भी ऐसा ही बिजनेस चल रहा है। मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए जिम ट्रेनर बन जाते हैं और उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। मेरी आत्मा को शांति मिले इसके लिए राजा शेख को सबसे बड़ी सजा मिलनी चाहिए और जिम में चल रहे इस तरह के धंधे को बंद करना चाहिए। राजा शेख ने ही मेरी और पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर दी है।” जतिन ने कहा कि ये बात समाज तक पहुँचनी जरूरी हैं।

इस मामले में फिलहाल भरुच रेलवे पुलिस और अंकलेश्वर बी डिविजन पुलिस मामले की जाँच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा शेख से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने आत्महत्या के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती दौर में पता चला कि पत्नी ने आत्महत्या की है, फिर पति ने बेटे की हत्या कर उसे ट्रेन से नीचे गिरा दिया। फिलहाल एफएसएल टीम जाँच कर रही है।

शंकराचार्य करेंगे पूजा, गजपति लगाएँगे झाड़ू, राष्ट्रपति लेंगी आशीर्वाद… पुरी में शुरू हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निकले महाप्रभु

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय के अवसर पर रविवार (7 जून, 2024) को महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ओडिशा के पुरी में शुरू हो गई है। दशमी तिथि तक, यानी 10 दिनों तक भगवान अपने भक्तों के बीच में होते हैं। इस दौरान रथ पर उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम भी सवार होते हैं। गुंडीचा मंदिर तक ये यात्रा 10 दिनों में तय की जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दर्शन मात्र से 1000 यज्ञों का फल मिलने की बात कही जाती है।

इस रथयात्रा में सबसे आगे तालध्वज पर बलराम जी चलते हैं, उनके पीछे पद्मध्वज पर माँ सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को विराजमान किया जाता है। सबसे पीछे गरुड़ ध्वज पर स्वयं भगवान जगन्नाथ चलते हैं। स्कन्द पुराण में भी रथयात्रा का विवरण है, बताया गया है कि रथ के पीछे कीर्तन करते हुए चलने वाले भक्त पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि राजा इन्द्रद्युम्न ने इस परंपरा को शुरू किया था। भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद में 7 प्रकार के चावल, 4 प्रकार की दाल, 9 तरह की सब्जियाँ और कई प्रकार की मिठाइयाँ परोसी जाती हैं।

हालाँकि, मिठाइयों में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल होता है, मंदिर में आलू, टमाटर और फूलगोभी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रविवार को सिंहद्वार से महाप्रभु की सवारी प्रस्थान करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इस दौरान रथयात्रा में भगवान का आशीर्वाद लेने पहुँचेंगी। सबसे पहले पुरी मठ के शंकराचार्य रथ का पूजन करते हैं, उसके बाद ओडिशा के महाराज गजपति सोने की झाड़ू से बुहार कर साफ़-सफाई करते हैं। इस बार दिव्यसिंहदेव इस रस्म को पूरा करेंगे।

8 जुलाई, या फिर 9 जुलाई को महाप्रभु की सवारी गुंडीचा मंदिर तक पहुँच जाएगी। 8-15 जुलाई तक वहीं पकवानों का महाप्रसाद उन्हें चढ़ाया जाएगा। रथयात्रा का समापन होने के साथ ही इन्हें वापस मंदिर में ले जाया जाता है’। फ़िलहाल ‘धडी पहांदी’ रस्म निभाई गई है, जिसके तहत प्राचीन वाद्ययंत्रों को ध्वनि गूँजती है। रथों की प्रतिष्ठा पूजा भी कर ली गई है। राजा इन्द्रद्युम्न द्वारा इस परंपरा को शुरू किए जाने की बात पुराणों में वर्णित है।

केरल की सत्ताधारी CPM फिर शुरू करेगी देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना: ‘मालाबार मीट’ के लिए मँगाए निवेश, कटेगा भैंसा-बकरा

केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPM द्वारा नियंत्रित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (BDS) द्वारा संचालित देश से सबसे बड़े बूचड़खाने को पुनर्जीवित की प्रक्रिया तेज हो गई है। BDS ने अपने प्रमुख उद्यम ‘मालाबार मीट’ ब्रांड निजी पूंजी स्वीकार की है। कर्ज तथा निवेशकों एवं कर्मचारियों के विरोध के कारण बीडीएस ने लगभग एक साल पहले मीट संयंत्र बंद कर दिया था।

दरअसल, पशु बाजारों से वध के लिए मवेशियों की खरीद-बिक्री पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध के बाद BDS ने केरल में बीफ का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनने की कोशिश की थी। इसके लिए CPM ने भरपूर मदद भी की थी। हालाँकि, कोरोना और राजनीतिक खींचतान के बाद यह कर्ज में डूब गई और आखिरकार मीट प्लांट बंद करना पड़ा था। अब मालाबीर मीट ब्रांड को बचाने की कोशिश की जा रही है।

ऑनमनोरमा ने सूत्रों के हवाले से कहा कि कोट्टयम स्थित फर्म बफेट ब्लूवे प्राइवेट लिमिटेड (BBL) ने BDS में हिस्सेदारी ली है। BBL इस प्लांट के रखरखाव में BDS की मदद करेगी। इसके लिए वह कार्यशील पूँजी जुटाएगी और आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करेगी। सूत्रों ने बताया कि मध्य केरल की यह फर्म विदेशी बाजारों में भैंस के मांस के निर्यात में शामिल है।

BDS के COO डॉक्टर बी. सुनील कुमार ने बताया कि इससे केरल में ‘पिंक क्रांति’ होगी। उन्होंने कहा, “निजी भागीदारी के साथ मालाबार मीट ब्रांड को फिर से लॉन्च करने के लिए विस्तृत व्यवस्था की जा रही है। हमने कोट्टयम स्थित कंपनी के साथ समान लाभ-साझाकरण के आधार पर एक समझौता किया है। हम प्लांट की क्षमता के 100% तक उत्पादन बढ़ाने की भी सोच रहे हैं।”

मालाबार मीट अपने मौजूदा फ्रोजन बीफ, मटन और चिकन आइटम में और उत्पाद जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा आउटलेट्स को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित ताजा मांस उपलब्ध कराने के लिए सुल्तान बाथरी और कलपेट्टा नगरपालिकाओं सहित स्थानीय प्रशासनिक निकायों द्वारा बातचीत शुरू की गई है। सुनील कुमार ने कहा, “अछूते बाजार स्थान का दोहन करने के लिए ‘ताजा मांस’ और ‘ठंडा मांस’ आपूर्ति श्रृंखला भी बनाई जाएगी।”

BDS में 500 से ज़्यादा शुरुआती निवेशकों हैं, जिनमें से अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक हैं। इन्होंने केरल चिकन और वायनाड कॉफ़ी सहित विभिन्न BDS उपक्रमों में पैसा लगाया है। उन्होंने कृषि क्षेत्र सहित विभिन्न परियोजनाओं में 70 करोड़ रुपए से ज़्यादा का निवेश किया था। हालाँकि, कोविड के कारण BDS का कर्ज़ बढ़कर 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गया।

इस दौरान मालाबार मीट को 46 करोड़ रुपए और केरल चिकन प्रोजेक्ट को 26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। दावा यह भी किया जाता है कि CPM के नेताओं के आपसी मतभेद के कारण इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। पूर्व चेयरमैन पी. कृष्ण प्रसाद, जिन्हें पिनाराई विजयन के विरोधी गुट का माना जाता है, को कर्ज बढ़ने के कारण चेयरमैन पद से हटना पड़ा था।

निवेश के साथ ही इस संयंत्र के पूर्व कर्मचारियों को बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मीट प्रोसेसिंग यूनिट के 70 से ज़्यादा कर्मचारियों में से 26 को बहाल किया जाएगा। बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भर्ती किया जाएगा। पिछले महीने बंद हुई वायनाड कॉफ़ी प्रोजेक्ट भी कनियम्पट्टा स्थित एक सहकारी संस्था से निवेश के बाद सुधार के दौर में है।

बता दें कि वायनाड स्थित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (बीडीएस) देश में सबसे बड़े बहु-प्रजाति बूचड़खाने का मालिक है। कोरोना से पहले इस संयंत्र की प्रतिदिन की क्षमता 45 टन थी। जबकि सालना टर्नओवर 7.5 करोड़ रुपए थी। मालाबार मीट ब्रांड के कई फ्रेंचाइजी भी बाँटे गए थे। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से किसानों को भैंस के बछड़े दिए गए थे पालने के लिए, ताकि भैंसों की कमी ना हो।

हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा पशुओं के वध से संबंधित नियम बना दिए गए। इसके बाद BDS ने इसमें अवसर खोजा और साल 2017 में BDS ने अगले पाँच साल के भीतर यानी साल 2022 तक राज्य के 6,500 करोड़ रुपए के बीफ बाजार में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, कोरोना के कारण यह फेल हो गया।

‘डरे हुए हैं तमिलनाडु के दलित, राज्य में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची’: BSP प्रदेश अध्यक्ष की हत्या के बाद श्रद्धांजलि देने पहुँचीं मायावती, कहा – DMK सरकार पर भरोसा नहीं

तमिलनाडु में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष K आर्मस्ट्रॉन्ग की शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को हत्या कर दी गई थी। अब उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए खुद पार्टी सुप्रीमो मायावती दक्षिण भारतीय राज्य पहुँची है। साथ ही उन्होंने DMK सुप्रीमो व मुख्यमंत्री MK स्टालिन के राज में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया। मायावती ने कहा कि इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वो असली दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार CBI जाँच की अनुशंसा करे।

पेरंबूर के प्राइवेट स्कूल में K आर्मस्ट्रॉन्ग का पार्थिव शरीर रखा गया है, जहाँ पहुँच कर मायावती ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी उम्र 52 वर्ष थी। साथ ही उन्होंने मृत नेता के परिजनों से भी मुलाकात कर उन्हें ढाँढस बँधाया। उन्होंने K आर्मस्ट्रॉन्ग को मेहनती एवं समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनकी हत्या से उन्हें और उनके पूरे परिवार को दुःख पहुँचा है। उन्होंने कहा कि आर्मस्ट्रॉन्ग बाबासाहब भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों में विश्वास रखते थे।

उन्होंने कहा कि K आर्मस्ट्रॉन्ग भगवान बुद्ध के अनुयायी थे और उन्होंने राजनीति में कदम रखने की ठानी तो ‘बहुजन समाज पार्टी’ (BSP) को चुना। मायावती ने कहा कि K आर्मस्ट्रॉन्ग ने तमिलनाडु में बसपा के विकास के लिए मेहनत की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। उन्होंने कहा कि असली दोषियों को अभी पकड़ा जाना बाकी है। मायावती ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार पर विश्वास नहीं है कि वो इस मामले में न्याय करेगी।

मायावती ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार हुए अपराधी तो सिर्फ मुखौटा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि ये मामला सिर्फ बसपा के प्रदेश अध्यक्ष का नहीं है बल्कि पिछड़े एवं दलित वर्ग की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में दलित लोग डरे हुए हैं और CM स्टालिन को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बसपा ने इस हत्याकांड को गंभीरता से लिया है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।

नूहँ में विज्ञापन- ‘नि:संतान महिलाओं को गर्भवती करो, लाखों कमाओं’: एजाज, इरशाद को पुलिस ने किया गिरफ्तार

हरियाणा के नूहँ के ठगों ने नया कारनामा कर डाला है। उन्होंने अब ‘नि:संतान महिलाओं को प्रेग्नेंट करो और पैसे कमाओ’ की स्कीम निकाली है। ठगों ने बाकायदा विज्ञापन भी दिया था, जिसका शीर्षक था ‘प्रेग्नेंट जॉब’। हालाँकि ये विज्ञापन पुलिस की नजर में आ गए और ठगों का भंडाफोड़ हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठगों ने प्रेग्नेंट जॉब के नाम से विज्ञापन दिया था और कहा था कि ऐसी महिला को प्रेग्नेंट करना है, जिसको औलाद नहीं हो रही। अगर आपने ऐसा कर दिया, तो लाखों रुपए मिलेंगे। ये मामला हरियाणा के नूहँ जिले से सामने आया है। जहाँ महिलाओं को गर्भवती करने के लिए पैसे देने वाले फर्जी विज्ञापन निकाले थे। ये विज्ञापन पुलिस की नजर में आ गए, जिसके बाद पुलिस ने विज्ञापन एजेंसी से संपर्क किया और एजाज-इरशाद को धर दबोचा।

जानकारी के मुताबिक, एजाज और इरशाद पुरुषों को सुंदर महिलाओं की तस्वीरों के जरिए रिझाते थे और झाँसा देते थे कि अगर इस महिला को प्रेग्नेंट कर दिया, तो उसे लाखों रुपए मिलेंगे, क्योंकि महिला को बच्चे नहीं हो रहे। ये ठग लोगों को फंसाने के लिए महिलाओं की फेक तस्वीरों का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस ने बताया कि जब कोई व्यक्ति विज्ञापन देखकर उनसे संपर्क करता था, तो वे उनसे रजिस्ट्रेशन फीस और फाइलिंग की कास्ट वसूलते थे, इसके बाद उन्हें ब्लॉक कर देते थे। पुलिस ने बताया कि 4 से ज्यादा फर्जी फेसबुक अकाउंट और विज्ञापन मिले हैं। अब दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बता दें कि नूहँ से पिछले कुछ समय से ठगी के कई मामले सामने आए हैं। कुछ मामले हाई प्रोफाइल साइबर क्राइम के भी रहे हैं। नूहँ से कई ठगों को पुलिस पहले भी गिरफ्तार कर चुकी है। ऐसे में प्रेग्नेंट जॉब का विज्ञापन देखते ही पुलिस सक्रिय हो गई और ठगों को गिरफ्तार कर लिया।

‘देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ फेंको, मुफ्त इलाज और ₹10 हजार महीना लो’: भरतपुर की चंगाई सभा के आरोपितों ने धर्मांतरण की ली थी ट्रेनिंग, कहते थे- यीशु सबसे महान

राजस्थान के भरतपुर स्थित एक गाँव में में ईसाई में धर्मांतरण की घटना में 20 महिलाओं सहित 28 लोगों को हिरासत में लेने के बाद उन्हें जमानत मिल गई है। ईसाइयों की चंगाई सभा में धर्मांतरण के लिए 100 से अधिक लोगों को बुलाया गया था। इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। वे लोग हर महीने 10 हजार रुपए देने और कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहे थे।

धर्मांतरण सभा में बुलाए गए लोगों को पैसे के साथ-साथ कैंसर जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज का लालच दिया गया था। सभा में आरोपित हिन्दू-देवी देवताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। जब इसका एक व्यक्ति ने विरोध किया तो उसे अपमानित किया गया और धमकी दी कि ईसा मसीह उसे भस्म कर देंगे। ईसा मसीह के सामने हिन्दू देवी-देवता कमजोर बताया जाता था।

दरअसल, सिमको रेलवे फाटक संख्या 39 के निकट एक मकान में शुक्रवार (5 जुलाई 2024) की सुबह धर्म-परिवर्तन सभा चल रहा था। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को जब इसकी जानकारी मिली तो वे पहुँचकर विरोध करने लगे। इसके बाद उन लोगों के साथ मारपीट की गई। इसकी सूचना मिलने पर थाना मथुरा गेट पुलिस मौके पर पहुँची और 28 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

मथुरा गेट थाना इंचार्ज करन सिंह राठौड़ ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ धारा 299 (किसी धर्म को लेकर विद्वेष पूर्ण कार्य करने) और 302 (शब्दों के माध्यम से किसी को धर्म बदलने के लिए प्रेरित करने) में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। शनिवार (6 जुलाई) को कोर्ट ने रविंद्र कुमार को जमानत दे दी। बाकी लोगों को शुक्रवार को ही 5-5 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी गई थी।

इस घटना का मुख्य आरोपित 39 वर्षीय रविंद्र कुमार और 32 साल की उसकी पत्नी रूबी हैं। दोनों फाटक नंबर 39 और एक अन्य आरोपित फूल सिंह डीग के तेलीपाड़ा का निवासी है। दोनों पति-पत्नी शहर में चर्च फाउंडेशन चलाते हैं। इन्होंने पंजाब के चंडीगढ़ से बाकायदा ट्रेनिंग भी ली थी। ये वॉट्सऐप ग्रुप से लोगों को जोड़ते थे और सेंटर में कैंसर जैसी बीमारी को ठीक करने का दावा करते थे।

घटना को लेकर FIR निरंजन सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “आरोपित सभा में शामिल लोगों से कह रहे थे कि देवी-देवताओं की मूर्ति पूजा छोड़कर ईसाई धर्म अपनाओ। हिंदू देवी-देवताओं ने कोई अवतार नहीं लिया। भगवान श्रीकृष्ण के बारे में अपशब्द कहे और हिंदू धर्म को सबसे नीच बताया। यह भी कहा कि यीशु सबसे बड़े भगवान हैं। उनकी सेवा करोगे तो स्वर्ग मिलेगा।”

दैनिक भास्कर के अनुसार, FIR में कहा गया है, “सभा में आरोपितों ने लोगों से कहा कि देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़कर फेंक दो। सभा में आने वालों को 10,000 रुपए बोनस और फ्री इलाज का लालच दिया गया। लगातार आने पर बोनस बढ़ने की बात भी कही। जब हमने विरोध किया तो रविंद्र ने कहा- भाग जा यहाँ से, वरना यीशु तुझे भस्म कर देंगे। तेरे देवता यीशु के सामने नहीं रुक सकते।”

पुलिस की जाँच में रविंद्र के घर से करीब 5 बाइबिल और ईसाई धर्म की अन्य प्रचार सामग्री मिली है। उन सबको जब्त कर लिया गया है। आरोपित रविन्द्र कुमार के मोबाइल में कई वॉट्सऐप ग्रुप भी मिले हैं। इनमें लोगों को सेंटर से जुड़ने को लेकर मैसेज किए गए थे। पुलिस इस मामले में रविंद्र कुमार के बैंक खातों को खंगाल रही है और फंडिंग के स्रोत के बारे में पता लगा रही है।

विहिप के जिला अध्यक्ष लाखन सिंह ने बताया कि रविंद्र कुमार भरतपुर के अजान गाँव का रहने वाला है। वह कई सालों से भरतपुर में धर्म परिवर्तन का सेंटर चला रहा है। इसमें उसकी पत्नी भी साथ देती है। रविंद्र की पत्नी ने चंडीगढ़ में धर्म परिवर्तन की ट्रेनिंग ली। इसके बाद दोनों ने धर्म परिवर्तन का सेंटर शुरू किया। वे गाँव-गाँव और बस्तियों में जाकर लोगों को ईसाई धर्म के बारे में बताने लगे।

लाखन सिंह ने बताया कि रविंद्र ने अपने घर से देवी-देवताओं की तस्वीरें निकालकर नाली में फेंक दी थी। अजान गाँव के लोगों को जब पता चला तो उसे और उसकी बीवी को पीटकर गाँव से भगा दिया। उसके बाद दोनों भरतपुर के एकता विहार कॉलोनी में प्लाॅट लेकर उस पर धर्मांतरण सेंटर चलाने लगे। वहाँ से लोगों ने भगाया तो वे रेलवे फाटक आ गए। इस दौरान इस काम में रविंद्र का भाई भी जुड़ गया।