सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखाली के TMC नेता शाहजहाँ शेख को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को खरी-खरी सुनाई है। संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण के मामले की जाँच CBI कर रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया था। इसके खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस BR गवई और जस्टिस KV विश्वनाथन की पीठ ने ये फैसला सुनाया है।
फजीहत के बाद शाहजहाँ शेख को निलंबित कर के TMC ने किसी तरह डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी। शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर बसीरहाट के संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं के यौन शोषण के साथ-साथ कइयों की जमीन कब्जाने के भी आरोप हैं। इससे पहले 29 अप्रैल को ये मामला सामने आया था, जब जस्टिस गवई ने पूछा था कि आखिर एक निजी व्यक्ति के हितों को बचाने के लिए राज्य सरकार को क्यों याचिका दायर करनी चाहिए?
इस पर पश्चिम बंगाल सरकार के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा था कि इस मामले में सरकार पर टिप्पणी की गई थी कि उसने कार्रवाई नहीं की। अब पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर अधिवक्ता पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि शाहजहाँ शेख के खिलाफ न सिर्फ यौन शोषण और जमीन हड़पने, बल्कि राशन घोटाले के तहत भी मामला दर्ज कर दिया गया है जिसमें 4 साल पहले ही 43 FIR दर्ज किए गए थे।
Supreme Court rejects West Bengal government's plea challenging Calcutta High Court order directing CBI investigation into allegations of land grabbing and sexual assault in Sandeshkhali pic.twitter.com/ByDOAJM35p
उनका कहना था कि ये मामला सिर्फ ED अधिकारियों पर हमले से जुड़े 2 FIR का ही होना चाहिए था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी मामले संदेशखाली से ही जुड़े हुए हैं और अलग-अलग नहीं हैं। जस्टिस गवई ने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने कई दिनों तक कुछ नहीं किया। साथ ही वही सवाल दागा कि राज्य सरकार किसी को क्यों बचा रही है? बता दें कि शाहजहाँ शेख को राशन घोटाले में गिरफ्तार करने गई ED टीम पर हमले के बाद वो फरार हो गया था, जिसके बाद उसके कारनामों का काला चिट्ठा खुला था।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 दिवसीय (8-10 जुलाई) विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। वह इन तीन दिनों में रूस और ऑस्ट्रिया का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का तीसरी बार पद संभालने के बाद यह दूसरा महत्वपूर्ण विदेश दौरा है। यह इस कार्यकाल में पहला द्विपक्षीय दौरा है। इस दौरे में पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे।
पीएम मोदी इससे पहले 2019 में अंतिम बार रूस गए थे। इसके बाद कोविड महामारी और फिर यूक्रेन रूस संघर्ष के कारण दोनों देशों के नेता, एक दूसरे के देश नहीं आ जा पाए। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार पीएम मोदी रूस जा रहे हैं। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा और कोई भी बड़ा नेता पुतिन ने नहीं मिला है।
#WATCH | PM Narendra Modi embarks on a three-day official visit to Russia and Austria
PM Modi and President Vladimir Putin will hold the 22nd India-Russia Annual Summit in Moscow. On 9th July, PM Modi will travel to Austria, where he will meet President Alexander Van der Bellen… pic.twitter.com/h2XuTdn79O
पीएम मोदी अपने इस दौरे में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात के साथ ही रूस में रहने वालों भारतीयों से बातचीत के कार्यक्रम में भी शरीक होंगे। इसके अलावा उन्हें रूस का सर्वोच्च सम्मान सेंट एन्ड्रू आर्डर से नवाजा जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार 2019 में दिया गया था, अब वह इसे ग्रहण करेंगे।
राष्ट्रपति पुतिन के साथ पीएम मोदी भारत और रूस के बीच व्यापार और सैन्य सहयोग को लेकर भी बातचीत होगी। भारत, रूस से लगातार बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। इस कारण भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है। इसको लेकर भी बातचीत होगी।
दोनों नेताओं की बातचीत में मुख्य मुद्दा यूक्रेन-रूस युद्ध होगा। यह युद्ध बीते 2 वर्ष से अधिक समय से जारी है और दोंनो संघर्षरत देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है। भारत के दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखता है और कई बार माहौल को शांत करवाने का काम करता रहा है।
सालाना समिट में भी होंगे शामिल
पीएम मोदी के इस दौरे पर अमेरिका समेत बाक़ी विश्व की भी नजरें हैं। यहाँ वह राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच राजनयिक सहयोग का यह सबसे बड़ा मंच है। इसमें पीएम मोदी ने 2019 में आखिरी बार हिस्सा लिया था। इसके अब तक 21 संस्करण सम्पन्न हो चुके हैं। यह अंतिम बार दिल्ली में आयोजित किया गया था।
पीएम मोदी ने इस दौरे को लेकर ट्विटर पर लिखा, “अगले तीन दिनों में मैं रूस और ऑस्ट्रिया में रहूँगा। ये यात्राएँ इन देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का एक शानदार अवसर होंगी, जिनके साथ भारत की पुरानी दोस्ती है। मैं इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करने के लिए भी उत्सुक हूँ।”
Over the next three days, will be in Russia and Austria. These visits will be a wonderful opportunity to deepen ties with these nations, with whom India has time tested friendship. I also look forward to interacting with the Indian community living in these countries.…
पीएम मोदी की इस यात्रा पर रूस ने कहा है कि इसे देख कर पश्चिमी देश जल रहे हैं और इसको बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं। रूस ने कहा कि यह दौरा महत्वपूर्ण होने वाला है इसीलिए पश्चिमी देश काफी गंभीरता से रहे हैं।
पीएम मोदी रूस के बाद यूरोपियन देश ऑस्ट्रिया भी जाएँगे। ऑस्ट्रिया में 41 वर्षों में यह पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति और चांसलर, दोनों से मिलेंगे और साथ ही वियना में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी बातचीत करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से एक हैरान करने वाली वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे आतंकी अपने छिपने के लिए ऐसे तरीके खोज रहे हैं जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल हो। आतंकियो ने अलमारी के भीतर जहाँ सामान रखने के खाने (ड्रॉवर) बनाए जाते हैं उसके अंदर घुसकर बंकर बनाया हुआ है ताकि सुरक्षाबल की नजर से बचे रहें।
जम्मू-कश्मीर : आतंकियों ने घर के अंदर अलमारी को बनाया बंकर
◆ कुलगाम में हुए मुठभेड़ में 6 आतंकवादी मारे गए और 2 जवान शहीद हुए
अलमारी के भीतर बने छोटे-छोटे बंकरों का खुलासा दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में मुठभेडों के दौरान हुआ। इस दौरान सुरक्षाबल ने ‘द रेजिस्टेंट फ्रंट’ के कमांडर सहित दो और आतंकियों को मार गिराया। ये टीआरएफ कमांडर आदिल हुसैन वही आतंकी था जिसने साल 2022 में शोपियाँ में सेब के बाग में कश्मीरी हिंदू सुनील कुमार को टारगेट करते हुए मौत के घाट उतारा था। इसके अलावा भी दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया था।
Indian Army has discovered a new hideout of terrorists in Kulgam, Kashmir, where they used to hide.
कुलगाम में हुई 2 मुठभेड़ों में अब तक 6 आतंकी मारे गए हैं। वहीं हमारे 2 जवान बलिदान भी हुए हैं। ये दोनों मुठभेड़ें जम्मू-कश्मीर के चिनीगाम और दूसरी कुलगाम में हुई हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबल ने इलाके में आतंकियों की पूर्व सूचना मिलने पर तलाशी शुरू की थी। सूचना पुख्ता होने पर उन्होंने इलाके की घेराबंदी की और इसी बीच आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।
भारतीय जवान बहादुरी से उस घर में घुसे जहाँ आतंकी थे, छानबीन के दौरान पुलिस ने पाया कि घर की अलमारी में एक तहखाना बनाया गया था। पुलिस ने एक शख्स को उस बंकर के भीतर घुसवाकर पूरे बंकर की वीडियो बनवाई। माना जा रहा है कि इन बंकरों का प्रयोग आतंकी अपने छिपने के साथ-साथ हथियार और गोला बारूद छिपाने के लिए करते थे।
यूनाइटेड किंगडम (UK) में नई लेबर पार्टी सरकार ने भारत और इजरायल पर दुष्प्रचार करने वाली शबाना महमूद को न्याय मंत्री बनाया है। शबाना महमूद को लॉर्ड चांसलर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। शबाना महमूद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की मूलनिवासी हैं। वह 2010 से बर्मिंघम लेडीवुड से सांसद हैं। वह पाकिस्तान से होने के कारण लगातार एक दशक से अधिक समय से प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में झूठी अफवाहें फैला रही हैं।
Last Thursday, I attended and spoke in the debate on the Political and humanitarian situation in Kashmir. http://t.co/poYXH3IZ6G
सितंबर 2014 से वह लगातार इंग्लैंड में सांसद हैं। नवम्बर 2015 में शबाना महमूद और उनके कुछ साथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंग्लैंड की यात्रा से पहले एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से सेना हटाने, AFSPA को हटाने, आतंकवाद के आरोप में बंद लोगों को रिहा करने और कथित तौर पर सामूहिक कब्रों की जाँच करने की माँग की थी।
शबाना महमूद की इन मांगों को भारत में इंग्लैंड के हस्तक्षेप के तौर देखा गया था। इसी पत्र में शबाना महमूद ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग की थी और इसके लिए अपने इरादे भी बताए थे।
गौरतलब है कि शबाना संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का इस्तेमाल पाकिस्तान और उसकी सेना भारत पर दबाव डालने के लिए करती आई है, जबकि वह स्वयं इसका कभी पालन नहीं करती। शबाना महमूद और उनके साथी सांसदों ने भी पाकिस्तान के इसी एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया था।
जनवरी, 2017 में ब्रिटेन के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स में बोलते हुए महमूद ने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की की माँग की थी। इसमें उन्होंने कई झूठे तथ्यों के आधार पर भारत की खराब छवि पेश करने का प्रयास किया था।
इस भाषण में उन्होंने कहा था, “यह दुनिया के सबसे ज़्यादा सेना की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में से एक है जहाँ दो परमाणु-सशस्त्र शक्तियों के बीच पुराना विवाद है। दुनिया भर में इस क्षेत्र के बाहर कहीं भी इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है और स्पष्ट रूप से हमारे देश में भी नहीं दिया जाता है। जबकि हमारे ब्रिटिश कश्मीरी लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है। इस पर वही लोग ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इसके बाहर के लोग कोई भी रुचि नहीं ले रहे।”
अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी किया था प्रलाप
मोदी सरकार के अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद शबाना महमूद ने प्रोपेगैंडा की रफ़्तार डबल कर दी थी। उन्होंने इसको लेकर ट्विटर पर लिखा था, “भारत सरकार के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के निर्णय से मैं बहुत चिंतित हूँ, इससे जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता खत्म हो गई है। हाल के दिनों में हमने भारत सरकार द्वारा जो कार्रवाई में बढ़त देखी है, इसे रोका जाना चाहिए। मानवाधिकारों को बरकरार रखा जाना चाहिए।”
Deeply concerned about the Indian Government's decision to abolish #Article370, removing #Jammu and #Kashmir's existing level of autonomy.
The escalation we have seen by the Indian Government in recent days is truly shocking and it simply must stop. Human rights must be upheld.
शबाना और उसके साथियों ने इस संबंध में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमन्त्री बोरिस जॉनसन को एक पत्र लिख कर भारत पर दबाव बनाने की माँग की थी। इस पत्र में शबाना महमूद ने भारत और जम्मू कश्मीर पर कई सारे झूठ बोले थे।
शबाना महमूद के पत्र में लिखा,”हम आपसे अनुच्छेद 370 को रद्द करने के भारत सरकार के कदम की कड़ी निंदा करने और हिंदू राष्ट्रवाद चलाने वाले नेता प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम पर विचार करने का आह्वान करते हैं। हिन्दू राष्ट्रवाद के कारण भारत बदतर बना रहा है और इससे 19.5 करोड़ मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बन रहे हैं। BBC की रिपोर्ट में भी यही बात साबित हुई है कि ‘गौ रक्षा’ के नाम पर हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा कितने लोगों की हत्या की गई है।”
The PM must put principle before Britain's trade relationship and #StandWithKashmir by unequivocally condemning India's illegal and unconstitutional revokation of #Article370 which removes #Jammu and #Kashmir's autonomy.
शबाना महमूद और उनकी लेबर पार्टी के साथी यह पत्र लिखते समय भूल गए थे कि भारत अब इंग्लैंड का गुलाम नहीं है। ऐसे में उनके किसी भी प्रलाप का भारत पर कोई असर नहीं होने वाला। 7 अगस्त, 2019 को स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया, “मुझे लगता है कि भारत सरकार द्वारा कश्मीर की स्वायत्तता, स्वतंत्रता और विशेष दर्जे को छीनने का यह कदम बेहद भड़काऊ है। यह एक आक्रामक कार्रवाई है। मुझे लगता है कि यह काफी खतरनाक भी है।
The removal of #Kashmir's special status by the Indian Government is provocative and risks further destabilising the region.
The international community has a moral responsibility to ensure the rights of the Kashmiri people are upheld – we must not look the other way. pic.twitter.com/lA2QvLGjhO
उन्होंने भारत के इस फैसले को कश्मीर के साथ विश्वासघात बताया था। अगस्त, 2019 में शबाना महमूद को बर्मिंघम (यहाँ 29.9% मुस्लिम आबादी है) में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर अपने पाकिस्तानी साथियों के साथ प्रदर्शन करते देखा गया था। भारत और ब्रिटेन आपस में सहयोगी हैं और सहयोगी देश के सांसद का प्रदर्शन करना विचित्र बात थी।
मई 2020 में शबाना महमूद ने लेबर पार्टी के नेता और अब प्रधानमंत्री किएर स्टार्मरको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कश्मीर की कथित स्थिति के बारे में जानकारी देने के बारे में ट्वीट किया था। जम्मू कश्मीर को लेकर शबाना महमूद का आखिरी सोशल मीडिया मेल्टडाउन 5 अगस्त, 2020 को हुआ था। इसके बाद से उन्होंने जम्मू कश्मीर पर कुछ नहीं लिखा।
There is no end in sight to the horrendous suffering of the Kashmiri people and I continue to call for international action on well-documented human rights abuses happening in the region.
I also continue to support the rights of the Kashmiri people to self-determination. (2/3)
इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था “भारत सरकार द्वारा कश्मीर की स्वायत्तता और विशेष दर्जा रद्द करने के बाद लॉकडाउन लगाए हुए एक साल हो गया है। यह एक अन्याय से भरी और एकतरफा कार्रवाई थी और कोविड से दोहरे लॉकडाउन के साथ, काफी सारे लोग दोस्तों और परिवार के लिए चिंतित हैं।”
वह इससे पहले भी फिलिस्तीन के मुद्दे से जुड़ी रही हैं। एक तस्वीर में शबाना महमूद एक पोस्टर पकड़े हुए दिखाई दी थीं। इस पर लिखा था, ”फिलिस्तीन को आजाद करो, इजरायली कब्जे को खत्म करो।”
2014 की डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शबाना महमूद बर्मिंघम में एक सुपरमार्केट को जबरन बंद करने में शामिल थीं, क्योंकि वहाँ कथित तौर पर ‘अवैध बस्तियों’ से सामान स्टॉक किया गया था। यहूदी लोगों ने उन पर ‘तनाव बढ़ाने’ का बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। एक लेख में, द जेरूसलम पोस्ट ने बताया था कि वह किस तरह इजरायल विरोधी बयानबाजी लगातार कर रही थीं।
अब यह देखना बाकी है कि लेबर पार्टी के भीतर भारत-विरोधी और इजरायल-विरोधी प्रचार करने वाली शबाना महमूद , अब न्याय मंत्री के रूप में कैसे अपना कर्तव्य निभाती हैं।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तैय्यब नाम के शख्स ने अपनी 15 दिन की मासूम बेटी को जिंदा जमीन में दफना दिया। मामला खुला तो पुलिस पूछताछ करने पहुँची। बाप ने जवाब दिया उसके पास बेटी को इलाज के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने उसे गाड़ दिया।
तैय्यब के जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने फौरन आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। वहीं कब्र खोदकर बच्ची का शव निकाला गया ताकि शव का पोस्टमॉर्म करवाया जा सके। तैय्यब ने कहा कि वह अपनी नवजात बेटी का इलाज नहीं करा पा रहा था।
उसने पैसा का इंतजाम करने की कोशिश की लेकिन इसमें कामयाब नहीं हो सका। ऐसे में तैय्यब ने नवजात को एक बोरे में रखकर जमीन में गाड़ दिया। तैय्यब के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। आगे बच्ची का पोस्टमार्टम कराकर कार्रवाई की जाएगी।
Unable To Afford Treatment, Pakistan Man Buries 15-Day-Old Daughter Alive https://t.co/WlnHoWSQZI
बता दें कि पाकिस्तान में छोटे बच्चों पर होते अत्याचार के पहले भी कई मामले सामने आए हैं लेकिन इस घटना के साथ जो एक मामला चर्चा में है उसमें एक महिला पर पर आरोप लगा है कि उसने अपने शौहर के साथ मिलकर 13 साल की बच्ची का उत्पीड़न किया। उत्पीड़न के दौरान उसे नंगा किया गया, उसका शारीरिक शोषण हुआ।
बच्ची ने अपनी शिकायत में बताया कि वो उस दंपत्ति के घर में काम करती थी, लेकिन एक दिन चोरी के शक में हसम ने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसको शारीरिक यातनाएँ दी गईं।
डॉक्टर के यहाँ जाने पर पता चला कि बच्ची के शरीर में हाथ और नाक पर तमाम फ्रैक्चर थे। पुलिस ने कहा है कि वो इस मामले में जाँच कर रहे हैं और जाँच के बाद बच्ची को इंसाफ दिलाया जाएगा।
नई दिल्ली के शकूरपुर इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पता चला है कि यहाँ एक कोचिंग सेंटर JMD में मुस्लिम ट्यूटर रिजवान हिंदू छात्रों का ब्रेन वॉश कर रहा था। उन्हें भगवान की पूजा छोड़ अल्लाह की इबादत करने को कह रहा था। अब इसी संबंध में कोचिंग में पढ़ने वाले एक छात्र के पिता ने शिकायत दी है।
अपनी शिकायत में बच्चे के पिता बताया कि उन्होंने जब अपने बच्चे का एडमिशन कोचिंग सेंटर में कराया था उस समय उनकी मुलाकात किसी संजय से हुई थी। बाद में पता चला वहाँ रिजवान, अबरार, इरफान पढ़ाते हैं। सामने आए शिकायत पत्र के अनुसार, पिता ने सुभाष पैलेस थाने में पहुँच शिकायत देते हुए बताया कि उनका बच्चा जेएमडी कोचिंग में पढ़ता है और पिछले कई दिनों में उनसे कुरान के बारे में पूछता था। शुरू में उन्होंने इसे अनदेखा किया लेकिन बाद में बच्चे ने बताया कि कोचिंग में पढ़ाने वाले रिजवान टीचर उससे बार-बार कुरान पढ़ने को कह रहे हैं और कलमा पढ़ने के लिए बार-बार दबाव बना रहे हैं।
Shocking case from New Delhi. A Hindu family sent their two minor sons to a coaching centre run by Mohammed Rizwan, Mohammed Abrar and Mohammed Irfan
The tutors started brainwashing the boys into hating on their religion by calling their deities powerless and weak. They served… pic.twitter.com/s0U26xLDFt
इसके अलावा सामने आए शिकायत पत्र के अनुसार, ये भी उल्लेख है कि टीचरों ने बच्चों को कहा- “तुम्हारा हिंदू धर्म तो बकवास है। तुम्हारे देवी-देवताओं में कोई शक्ति भी नहीं है। इसलिए अब से कुरान और कलमा पढ़ना है। इसमें बहुत शक्ति है। इसी से बलवान बनोगे।”
लड़के के पिता के अनुसार, उन्होंने जब सारी बात को गंभीरता से लेते हुए कोचिंग में फोन किया और वहाँ एक मैडम से बात हई तो मैडम ने रिजवान सर से बात कराई। रिजवान से बच्चे के पिता ने पूछा- “आप बेटे को क्यों मजबूर कर रहे हैं।” इस पर रिजवान भड़ गया और गाली-गलौच शुरू कर दी। शिकायत मे कहा गया कि रिजवान ने बच्चे के पिता को बोला- “मैं दाऊद इब्राहिम का बाप हूँ। तेरे पूरे परिवार को नंगा नाच कराऊँगा और फिर मुझे गंदी गंदी गालियाँ दी गई।”
Minor Hindu boy from Delhi narrates how his private tutor Rizwan told him to read Quran and believe in Allah as his Hindu deities as weak & powerless
Child’s father rightly raises concerns that Rizwan’s relatives who are govt teachers might be doing the same in their schools pic.twitter.com/ZU17yP9cb4
इस मामले में स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने शिकायत पत्र साझा करते हुए कुछ ट्वीट किए हैं। स्वाति गोयल शर्मा ने कहा, “मैंने लड़कों के पिता से बात की और सच्चाई यह है कि जिस कोचिंग सेंटर में नाबालिग हिंदू लड़कों को इस्लाम धर्मांतरण करवाया जा रहा है उस कोचिंग सेंटर का नाम ‘जय माता दी है’ और इसके बोर्ड पर जेएमडी लिखा है। लड़के के पिता कहते हैं कि उन्होंने जब लड़कों का एडमिशन करवाया उस समय संजय नामक व्यक्ति से उनकी बातचीत हुई थी। पिता को तब नहीं पता था कि ट्यूशन में रिजवान और अबरार जैसे टीचर निकलेंगे और बच्चों को धर्मांतरण के लिए मजबूर करेंगे।”
इस मामले में बच्चे का वर्जन भी मीडिया में सामने आया है। जनमत की पुकार नाम के चैनल पर साफ तौर पर बच्चा बोलता दिख रहा है कि- “रिजवान सर बोलते थे तुम्हारे हिंदू देवी-देवताओं में शक्ति नहीं है। हमारे अल्लाह में है।” वहीं पिता बोलते दिखते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को कोचिंग शिक्षा के लिए भेजते हैं न कि ब्रेनवॉश कराने के लिए भेजते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों की मानसिकता ऐसी है कि ये टीचर नहीं हो सकते। इनको जिहादी कहा जाए तो बहुत अच्छा होगा। ये काम टीचरों का नहीं है। ये शिक्षक नहीं है ये धर्मपरिवर्तन करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो किसी मजहब पर टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन जब वो लोग बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते है तो उनका ब्रेनवॉश क्यों किया जा रहा है।
फ्रांस के आम चुनावों में वामपंथी गठबंधन की जीत हुई है। वामपंथी गठबंधन की जीत के बाद फ्रांस में भीषण दंगे भड़क गए हैं और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। यह प्रदर्शनकारी दंगे कर रहे हैं और पेट्रोल बम चला आगजनी कर रहे हैं। फ्रांस में इससे बचने के लिए भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया है।
फ्रांस में वामपंथी गठबंधन की जीत अप्रत्याशित तरीके से हुई है। चुनाव से पहले लगातार यह माना जा रहा था कि इन चुनावों में दक्षिणपंथी गठबंधन की जीत होगी। दक्षिणपंथी गठबंधन की नेता मरीन ली पेन के प्रधानमंत्री बनने के आसार जताए जा रहे थे। लेकिन दूसरे चरण की वोटिंग के बाद पासा पलट गया और वामपथी गठबंधन सबसे अधिक सीटें लाने में सफल रहा।
फ्रांस के इन चुनावों में वामपंथी गठबंधन ने 577 सीटों में से लगभग 182 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। वहीं दूसरी तरफ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की रिनेसां पार्टी ने 163 सीटें जीती हैं। तीसरे नम्बर पर धुर दक्षिणपंथी गठबंधन है, जिसने 132 सीटें जीत ली है। अभी अंतिम परिणाम नहीं सामने आए हैं।
अंतिम परिणामों के सामने आने से पहले ही फ्रांस में भीषण हिंसा का माहौल है। प्रदर्शकारियों ने चुनाव नतीजों के रुझानों के साथ फ्रांस की सड़कों पर कब्जा कर लिया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर गाड़ियों को इकट्ठा करके आग लगा दी और पुलिस से भी भिड़ गए।
France following the path of UK
Right wing leader Marine Le Pen lost the French elections.
Now the far left party will govern France that means Islamic Caliphate is coming soon there.
दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके। कहीं कहीं कूड़ेदानों में भी आग लगा दी गई। फ्रांस के शहर नान्तेस में भी दंगाइयों ने कहर बरपाया है। अभी यह नहीं साफ है कि दंगाई किस समूह के हैं। पुलिस उन पर कब्जा करने में जुटी हुई है। दंगाइयों ने पेरिस के महत्वपूर्ण स्थानों पर तोड़फोड़ भी की है।
फ्रांस में दंगों के इतिहास को देखते हुए पहले से ही इस हिंसा का अंदाजा लगाया जा रहा था। वामपंथियों के इस हिंसा करने की आशंका जताई जा रही थी। इसके लिए फ्रांस में 30,000 पुलिसकर्मी लगाए गए थे। पेरिस समेत बड़े शहरों में महंगी दुकानों में बैरिकेड लगा दिए गए थे ताकि दंगे के दौरान उन्हें लूट से बचाया जा सके।
कुछ दुकानों के शीशों पर लकड़ी तक ठोंक दी गई ताकि प्रदर्शनकारी यहाँ से ना घुसें। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पहले चरण की वोटिंग पूरी होने के बाद फ्रांस में कसके दंगे किए थे। 30 जून, 2024 को इन दंगाइयों ने फ़्रांस में कसके कहर बरपाया था।
वामपंथियों ने पहले चरण के चुनाव में दक्षिणपंथियो की बढ़त के बाद सार्वजनिक सम्पत्ति को जलाया था और पुलिस पर हमले किए थे। दूसरे चरण के बाद हिंसा किस समूह ने की है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। चुनाव नतीजों के बाद अब फ्रांस में वामपंथी प्रधानमंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर आए दिन भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए कुख्यात वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली त्यागी पर उत्तर प्रदेश में FIR दर्ज हुई है। यह FIR शामली पुलिस द्वारा शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को दर्ज की गई है। केस में कुल 5 आरोपित हैं जिसमें शिकायतकर्ता खुद पुलिस बनी है। पुलिस का आरोप है कि इन सभी के ट्वीट से समाज में वैमन्सयता फ़ैलाने और शांति भंग होने की आशंका है। साथ ही इन आरोपितों की हरकतों से दूसरे समुदाय के लोगों में नाराजगी है।
यह मामला शामली जिले के थानाक्षेत्र थानाभवन का है। शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को यहाँ तैनात सब इंस्पेक्टर मनेंद्र कुमार ने अपने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में मनेंद्र ने बताया कि 5 जुलाई को वो अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ जलालाबाद क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर थानाभवन क्षेत्र में ही फ़िरोज़ नाम के व्यक्ति की मौत को लेकर कुछ आपत्तिजनक ट्वीट होते देखे। ये ट्वीट वसीम अकरम त्यागी, ज़ाकिर अली त्यागी, आसिफ राणा, सैफ इलाहाबादी और अहमद रज़ा खान द्वारा किए जा रहे थे।
पुलिस ने बताया कि इन आरोपितों ने मॉब लिंचिंग में “एक और मौत” जैसे शीर्षक दिए थे। इन पोस्ट में आरोपितों ने आगे लिखा, “थानाभवन थानाक्षेत्र के जलालाबाद कस्बे में देर रात एक युवक जिसका नाम फिरोज उर्फ काला कुरैशी बताया जा रहा है, कुछ दूसरे समुदाय के लोगों ने घर में घुसने के शक में जमकर पीटा, मार दिया ऐसे तो कोई किसी को भी मार देगा बोल देगा कि उसे शक था।”
पुलिस ने मुताबिक आरोपितों द्वारा इस प्रकार के ट्वीट किए जाने से दूसरे समुदाय के लोगों में नाराजगी है। शिकायत में सब इंस्पेक्टर मनेंद्र कुमार ने आरोप लगाया है कि पाँचों आरोपितों के ट्वीट से लोगों के बीच अपसी वैमन्सयता फैलने, साम्प्रदायक सोहार्द बिगड़ने और स्थानीय स्तर पर शांति भंग होने की आशंका है। आरोपितों द्वारा लिखे गए शब्दों को भद्दी पोस्ट बताते हुए पुलिस ने इसके स्क्रीनशॉट सेव कर लिए हैं। पुलिस ने इन भद्दी पोस्ट वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 353 के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
विक्टिम कार्ड भी नहीं आया काम
शामली पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ विक्टिम कार्ड खेलने की भी कोशिश की गई। हालाँकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही करार दिया है। पुलिस का कहना है कि घटना में साम्प्रदयिक एंगल न होने के बावजूद इसे जानबूझ कर दूसरा रूप देने की कोशिश की गई। आरोपितों द्वारा की गई पोस्ट को पुलिस ने दुर्भावना से ग्रसित बताया है। पुलिस ने इस घटना को मॉब लिंचिंग बताने वाले दावों का भी खंडन किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फ़िरोज़ की मौत पर फैलाए जा रहे भ्रम पर शामली पुलिस ने सच्चाई पेश की है। पुलिस ने घटना की सच्चाई अपने X हैंडल पर बताई है। पुलिस के मुताबिक 4 जुलाई 2024 की रात फ़िरोज़ जलालाबाद कस्बे में राजेन्द्र के घर में घुस गया था। इस दौरान फ़िरोज़ ने नशा कर रखा था। नशेड़ी फ़िरोज़ ने राजेंद्र के परिजनों से हाथापाई की। फ़िरोज़ के घर वाले आकर उसे अपने साथ ले गए जहाँ उसकी मौत हो गई। मृतक के शरीर पर कोई गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी यह बात साबित हो गई कि मौत की वजह मारपीट नहीं है।
वसीम और ज़ाकिर उड़ा रहे थे मॉबलिंचिंग की अफवाह
पुलिस द्वारा बार-बार समझाए जाने और सफाई पेश किए जाने के बावजूद वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली आदतन इस मामले को मॉब लिंचिंग बता रहे थे। इन लोगों द्वारा पुलिस और पोस्टमार्टम की जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही मामले को साम्प्रदायिक रंग में रंगने की कोशिश शुरू हो चुकी थी। इस वजह से राजेंद्र के परिवार की सुरक्षा भी प्रभावित होने की आशंका थी। अपने नाम के अंत में त्यागी लगाने वाले वसीम अकरम और ज़ाकिर अली की उड़ाई अफवाह से उनके फॉलोवरों ने भी इस झूठ को हवा देनी शुरू कर दी थी।
कुछ ही दिन पहले इन्हीं लोगों ने की थी शामली पुलिस की तारीफ
अपने खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली के साथ उनके तमाम समर्थक शामली पुलिस को ही गलत बताने की कोशिश में जुट गए हैं। यह वही समूह है जिसने अभी कुछ दिन पहले शामली पुलिस की तारीफ में कसीदे गढ़े थे। खास बात ये है कि तब थानाक्षेत्र भी यही थानाभवन ही था। जून 2024 में बकरीद पर जावेद द्वारा गाय नहीं बल्कि भैंस क़ुर्बान किए जाने के शामली पुलिस के खुलासे को न सिर्फ वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली ने बल्कि मोहम्मद जुबैर तक ने न्याय और सत्य जैसे परोक्ष पदवी से नवाजा था। महज कुछ ही दिनों में यह समूह शामली पुलिस के खिलाफ अपने नजरिए में पूरी तरह से बदलाव ले आया है।
नफरत का है पुराना इतिहास
पाँचों नामजदों में मुख्य आरोपित ज़ाकिर अली त्यागी और वसीम अकरम अपने X हैंडल से आए दिन हिन्दुओं के खिलाफ अशोभनीय कमेंट और ट्वीट किया करते हैं। ज़ाकिर अली त्यागी तो अगस्त 2020 में सीता और लक्ष्मी को नोचने जैसे ट्वीट कर चुका है। साल 2017 में ज़ाकिर अली त्यागी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में जेल भी काट चुका है। वहीं FIR दर्ज होने के बाद पत्रकारिता का लबादा ओढ़ कर विक्टिम कार्ड खेल रहा वसीम अकरम त्यागी आए दिन कुछ पत्रकारों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ किया करता है। सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके खिलाफ उसके द्वारा की गई नफरती ट्वीट की एक लम्बी श्रृंखला है।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पाकिस्तान प्रेम का मामला सामने आया है। यहाँ शाहरुख़ अहमद ने अपने सोशल मीडिया स्टेट्स पर पाकिस्तान के शहर लाहौर की तस्वीर डाली। इसी स्टेट्स में पाकिस्तान का झंडा भी लगा है। साथ में कैप्शन के तौर पर पाकिस्तान को बहुत प्यारा बताया गया है। रविवार (7 जुलाई 2024) को हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र शीशगढ़ का है। रविवार को बरेली के विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने अपने X हैंडल से शाहरुख़ अहमद की शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि गाँव जाफ़रपुर में मोहम्मद शरीफ का बेटा शाहरुख अहमद ने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर की है। इस वीडियो को पाकिस्तान समर्थक बताते हुए कहा गया कि उसमें ‘पाकिस्तान बहुत प्यारा है’ लिखा गया है। हिमांशु का आरोप है कि बरेली के खुराफातियों में सुधार नहीं हो रहा है।
हिमांशु पटेल ने जो वीडियो शेयर की है उसमें एक व्यस्त सड़क पर कई गाड़ियाँ दिख रहीं हैं। सामने हरे रंग के बोर्ड पर इंग्लिश और उर्दू में लाहौर लिखा हुआ है। तस्वीर के बीचोंबीच पाकिस्तान का झंडा छपा हुआ है। कैप्शन के तौर पर बड़े अक्षरों में ‘पाकिस्तान बहुत प्यारा है’ लिखा गया है। पाकिस्तान शब्द को खासतौर पर बोल्ड कर के हरे रंग से रंगा गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए हिमांशु पटेल ने बताया कि उनके द्वारा शिकायत करने के बाद आरोपित ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल लॉक कर ली है।
प्रभारी निरीक्षक शीशगढ़, बरेली को आवश्यक विधिक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है।
हिमांशु पटेल का कहना है कि अगर पुलिस ने अपनी तरफ से संज्ञान ले कर कार्रवाई नहीं की तो बाकायदा शिकयत दे कर आरोपित के खिलाफ एक्शन की माँग की जाएगी। उन्होने हमें बताया कि पाकिस्तान परस्त शाहरुख़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर के कार्रवाई होनी चाहिए। हालाँकि, बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान ले लिया है। रविवार को पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से बताया है कि शीशगढ़ के थाना प्रभारी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए है।
बदजुबानी के लिए चर्चित तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलों में इजाफा हुआ है। सोशल मीडिया के X (पूर्व ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कमेंट करने के आरोप में उन पर FIR दर्ज कर ली गई है। शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को हुई शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में दर्ज की गई है। महुआ मोइत्रा पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा पर अशोभनीय कमेंट करने का आरोप है। मामले की जाँच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। FIR के बाद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली पुलिस को खुद को गिरफ्तार करने के लिए कहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला आयोग की तरफ से शुक्रवार को दिल्ली पुलिस में तहरीर दी गई थी। तहरीर में बताया गया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने X हैंडल पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा के खिलाफ अशोभनीय बाते लिखीं हैं। गुरुवार को किए गए इस ट्वीट में महुआ मोइत्रा ने रेखा शर्मा के हाथरस भगदड़ वाले घटनास्थल पर पहुँचने को ले कर टिप्पणी की थी। तब शेयर हुए एक वीडियो में रेखा शर्मा के पीछे किसी व्यक्ति को छाता ले कर चलते देखा गया था।
इस वीडियो पर एक X यूजर ने सवाल किया था कि रेखा शर्मा अपना छाता खुद ले कर क्यों नहीं चल सकतीं। इस कमेंट के जवाब में महुआ मोइत्रा ने लिखा, “वह (रेखा शर्मा) अपने बॉस का पजामा संभालने में बहुत बिजी हैं।” शुक्रवार को राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 79 के तहत कार्रवाई के योग्य माना था। दिल्ली पुलिस में शिकायत शिकायत देते हुए तब कार्रवाई की रिपोर्ट 3 दिनों में तलब की गई है।
Come on @DelhiPolice please take action immediately on these suo moto orders. Am in Nadia in case you need me in the next 3 days to make a quick arrest. I Can Hold My Own Umbrella . https://t.co/pXvRSVSzxa
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जाँच कर रही है। खुद पर FIR दर्ज होने के बावजूद महुआ मोइत्रा के तेवर ज्यों के त्यों रहे। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के ट्वीट को Quote कर के दिल्ली पुलिस से खुद को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए कहा है। खुद को पश्चिम बंगाल के नादिया में बताते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा है कि वो अपना छाता खुद ले कर चल सकती हैं।