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ठाणे के उस मंदिर में हिंदुओं ने की महा आरती जिसमें जूते पहनकर घुस गई थी मुस्लिमों की भीड़, शहजाद शेख ने जिस हिंदू महिला से की थी छेड़छाड़ उसके पीछे-पीछे आए थे हमलावर

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में हिंदुओं ने शिव मंदिर में महा आरती कर विरोध प्रदर्शन किया। ये मंदिर हजूरी इलाके में है। जहाँ शहजाद शेख नाम के मुस्लिम युवक ने हिंदू युवती के साथ छेड़छाड़ की। वो हिंदू युवती जब खुद के बचाव के लिए भाग कर मंदिर में पहुँची, तो मुस्लिमों की भीड़ जूता पहनकर मंदिर में घुस गई और उसे धमकाया, जिसके बाद गुरुवार (4 जुलाई 2024) को हिंदुओं ने विरोध स्वरूप मंदिर में महा आरती की।

महा आरती का वीडियो लीगल राइट्स ऑब्जर्वटरी (LRO) नाम के एक्स हैंडल द्वारा शेयर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्थानीय पार्षद विकास आर ने आरोपित शहजाद शेख की मदद की। उसने पुलिस वालों पर सीएम एकनाथ शिंदे के नाम की झूठी धौंस जमाई। जिसकी वजह से ‘शाहजाद शेख को पुलिस कस्टडी की जगह सिर्फ ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया।’

बताया जा रहा है कि ये मामला 23 जून 2024 को ठाणे जिले के मुस्लिम बहुल हजूरी दरगाह इलाके का है। इस मामले में 27 जून 2024 को आईपीसी की धाराओं 354, 354डी और 452 में केस दर्ज किया गया है। इस केस में शहजाद शेख के खिलाफ महिला के उत्पीड़न और उसे अपना मुँह बंद रखने के लिए धमकाने का केस दर्ज किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, हिंदू महिला आरोपी की सब्जी की दुकान पर गई थी, जहां दोनों के बीच पैसे को लेकर मामूली कहासुनी हुई। महिला ने कहा कि उसके पास खुले पैसे नहीं थे, लेकिन शहजाद ने जोर देकर कहा कि अगर वह सब्जी खरीदना चाहती है तो उसे खुले पैसे देने होंगे। इसके बाद महिला अपने घर चली गई, जहाँ आरोपित शहजाद ने उसका पीछा किया। इसके बाद वह उसके घर में घुस गया और उसके साथ छेड़छाड़ की। हालाँकि, महिला द्वारा मदद के लिए चिल्लाने पर वह मौके से भाग गया।

सकल हिंदू समाज की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इलाके में रहने वाले दूसरे मुसलमानों ने महिला पर शिकायत दर्ज न करने का दबाव बनाया। डरी हुई महिला बाद में पास के एक मंदिर में शरण लेने गई, जहाँ करीब 100-150 मुसलमान जूते पहनकर मंदिर में घुस आए और महिला को पुलिस में शिकायत दर्ज न करने की धमकी दी।

इस मामले में हिंदू समुदाय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आरोपित को पकड़ लिया। पहले हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। हालाँकि, आरोप है कि आरोपी को विकास आर नाम का व्यक्ति बचा रहा है। वो खुद की पहुँच सीएम एकनाथ शिंदे तक बताता है। उसने पुलिस पर दबाव बनाया कि आरोपित शहजाद शेख के खिलाफ पुलिस कम से कम कार्रवाई करे। आरोप है कि उसके दबाव की वजह से आरोपित को पुलिस हिरासत के बजाय न्यायिक हिरासत में रखा गया था।

इस मामले में ठाणे के सकल हिंदू समाज ने 30 जून को एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और आरोपितों के खिलाफ सख्त सजा की माँग की। हिंदुओं ने यह भी कहा कि मुस्लिमों द्वारा जूते पहनकर मंदिर में घुसने से धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। इस घटना की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास है। स्थानीय हिंदू समुदाय ने आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हिंदु समुदाय की सुरक्षा की माँग की है।

पैरों में कमजोरी, चलते-चलते लड़खड़ाना और घबराहट… केरल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर किसने किया ‘काला जादू’? घर से मिलीं मूर्तियाँ तो बोले- पता नहीं मैं कैसे जिंदा हूँ

केरल देश का सबसे शिक्षित राज्य है। इसके बावजूद वहाँ अंधविश्वास फल-फूल रहा है। यह अंधविश्वास अब राजनेताओं को सताने लगा है। केरल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष एवं सांसद के. सुधाकरन ने आरोप लगाया है कि उन पर काला जादू किया जा रहा है। यह आरोप उन्होंने तब लगाए, जब कन्नूर में उनके घर से ताँबे की प्लेट और कथित काला जादू से संबंधित मूर्तियाँ बरामद होने की तस्वीरें सामने आईं।

एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सुधाकरन और कासरगोड से सांसद राजमोहन उन्नीथन से बातें कर रहे हैं। सुधाकरन उन्नीथन से कहते हैं कि उन्हें आश्चर्य है कि वे अभी तक जिंदा हैं। उन्हें संदेह है कि काला जादू के कारण ही उनके पैरों में कमज़ोरी महसूस हो रही थी। इसके कारण चलते समय उनका संतुलन बिगड़ रहा था और उन्हें घबराहट के दौरे पड़ रहे थे।

वीडियो में एक मजदूर को सीप जैसा समान खोदते हुए देखा जा सकता है। घर से ताँबे की करीब 20 प्लेटें खोदकर निकालता दिखाई दे रहा है। खोदाई को दौरान कई ऐसी मूर्तियाँ भी मिलीं, जिन पर कुछ-कुछ लिखे हुए हैं। दरअसल, पेट्टा स्थित केरल कॉन्ग्रेस के कार्यालय में सुधाकरन के कमरे तथा तिरुवनंतपुरम और दिल्ली स्थित उनके आवासों से भी इसी तरह की चीजें बरामद की गईं।

सामने आया वीडियो करीब डेढ़ साल पुरानी है। उन्नीथन ने कहा कि उन्हें वीडियो के बारे में नहीं पता। वहीं, सांसद सुधाकरन के निजी सहायक ने भी कहा कि उन्हें फुटेज के बारे में जानकारी नहीं है। हालाँकि, सुधाकरन के एक करीबी नेता ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें इस कृत्य के पीछे सुधाकरन के एक पूर्व निजी कर्मचारी का हाथ होने का संदेह है।

टीवी चैनलों पर इस वीडियो के प्रसारित होने के बाद सुधाकरन के एक करीबी वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “वीडियो पूर्व निजी कर्मचारी के मोबाइल फोन पर शूट किया गया था, जिससे हमें संदेह हुआ कि यह उसी का काम है। वह सुधाकरन से भारी मात्रा में पैसे चुराने में शामिल था, जिसके कारण उसे दो साल से अधिक समय पहले उसे नौकरी से निकालना पड़ा था।”

उस नेता ने कहा, “सुधाकरन को काले जादू के पीछे भी उसकी भूमिका पर संदेह है। इससे पता चलता है कि इसी तरह के पदार्थ इंदिरा भवन और नई दिल्ली में उसके कार्यालय तक कैसे पहुँचे थे।” इस मामले को लेकर सुधाकरन ने गुरुवार (4 जुलाई 2024) को इस घटना की पुष्टि की और कहा कि कोई भी उन्हें खत्म नहीं कर सकता।

यह पहली बार नहीं है जब केरल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष को अपने घर में काले जादू से जुड़ीं वस्तुएँ मिली हों। इससे पहले साल 2018 में कॉन्ग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीएम सुधीरन के तिरुवनंतपुरम स्थित गौरीसापट्टम के उनके घर में काले जादू से संबंधित वस्तुओं का पता लगाने की घटना सामने आई थी।

जीत के लिए दिखाई भारत से नफरत, मुस्लिमों को खुश करने के लिए अलापा ‘आजाद कश्मीर’ का राग, फिर भी सोनिया कुमार से हार गए मार्को लॉन्गी: ब्रिटेन के चुनावों का एक नतीजा यह भी

ब्रिटेन के आम चुनाव में कश्मीर की आजादी पर मुस्लिमों से समर्थन माँगने वाले कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार मार्को लॉन्गी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें लेबर पार्टी की भारतवंशी उम्मीदवार सोनिया कुमार ने मात दे दी है। लॉन्गी ने चुनाव प्रचार के दौरान हिन्दुओं, भाजपा, पीएम मोदी और कश्मीर पर जहर उगल कर वोट साधने का प्रयास किया था।

लॉन्गी ब्रिटेन की डडले उत्तरी सीट से 2019 में चुनाव जीते थे और 2024 में फिर से चुनाव में खड़े थे। उनके सामने लेबर पार्टी ने सोनिया कुमार को उतारा था। सोनिया कुमार ने इस चुनाव में 12,215 वोट हासिल किए जबकि लॉन्गी केवल 10,315 वोट हासिल कर सके। उनकी 1900 वोटों से हार हो गई।

57 वर्षीय लॉन्गी ने अपने चुनाव प्रचार में भारत के कश्मीर मुद्दे के सहारे वोट बटोरने का प्रयास किया था। मार्को लॉन्गी ने 17 जुलाई, 2024 को एक पत्र जारी किया था, इस पत्र में उन्होंने हिंदू घृणा और भारत विरोधी प्रचार किया था। पत्र में उन्होंने अपनी सीट के इलाके में रहने वाले मुसलमानों से अपील की कि वह उन्हें वोट दें ताकि वह ब्रिटेन की संसद में कश्मीर की ‘आज़ादी’ का मुद्दा उठा सकें।

इस पत्र में डडले में ब्रिटिश पाकिस्तानी और कश्मीरी मुस्लिम मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें ईद-अल-अज़हा की बधाई दी थी और इसके बाद बताया कि हाल ही में भारत में भाजपा दोबारा चुनाव जीत गई है। उन्होंने घृणा फैलाते हुए कहा था कि इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में ‘कश्मीर के लोगों के लिए कठिन समय’ होगा।

इस पत्र में लिखा था, “नरेंद्र मोदी ने हाल ही में यह साफ किया है कि वह कश्मीर को लिए पूर्ण राज्य का दर्जा देने जा रहे हैं, इसका मतलब होगा कि कश्मीरियों के सभी अधिकारों को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि 2019 में जब वह चुने गए थे तो वह लगातार ब्रिटिश संसद में कश्मीर के मुद्दे पर बोलते रहे थे।

इस पत्र में उन्होंने लेबर पार्टी की उम्मीदवार सोनिया कुमार के नाम को अलग तरीके से बोल्ड अक्षरों में दिखाया था। उनका प्रयास था कि सोनिया को मुस्लिमों के सामने हिन्दू के तौर पर पेश किया जाए ताकि वह उन्हें वोट ना दें। इस पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं यह फैसला आप पर छोड़ता हूँ। अगर आप मुझे वोट देते हैं, तो मैं आपसे वादा करता हूँ कि मैं संसद में कश्मीर के लिए अपनी आवाज और भी बुलंद करूँगा और संसद में कश्मीरियों के लिए खड़े होने में सबसे आगे रहूँगा।”

लॉन्गी के इस कदम की आलोचना हुई थी। उनके ऊपर बाँटने की राजनीति करने का आरोप लगाया गया था। लेबर पार्टी के दूसरे उम्मीदवार राजेश अग्रवाल ने भी इस मुद्दे को लेकर लॉन्गी की आलोचना की थी। हालाँकि, लॉन्गी ने इसे मानवाधिकारों का मुद्दा बता कर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया था।

जिस डडले सीट से लॉन्गी को हार मिली है, वहाँ लगभग 50% ईसाई, 6% मुस्लिम और 2% सिख रहते हैं। इसके अलावा यहाँ हिन्दुओं की आबादी लगभग 1% है। ऐसे में लॉन्गी का मुस्लिमों को कश्मीर के बहाने लुभाने का पैंतरा नहीं चल सका है।

बहुसंख्यकों के अल्पसंख्यक होने का खतरा कितना बड़ा, कितनी घटी हिंदुओं की हिस्सेदारी, क्यों अदालतें कह रहीं- धर्मांतरण रोको, घुसपैठियों को भगाओ: सारे सवालों का जवाब एक साथ

हाल में इलाहाबाद की अदालत ने भारत में बहुसंख्यक हिंदुओ के अल्पसंख्यक होने की आशंका जताते हुए धर्मांतरण को रोकने के मामले में टिप्पणी की थी। वहीं झारखंड की हाई कोर्ट ने तो कहा था कि भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशियों को चिह्नित करके वापस से भेजना चाहिए क्योंकि वो यहाँ आकर जनजातीय लड़कियों को अपने जाल में फँसाते हैं और धर्मांतरण कराते हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट ने भले ही ये बातें अलग-अलग मामलों में की हो, लेकिन इनके मायने समझेंगे तो पता चलेगा कि मामला कितना गंभीर है। एक तरफ अदालत मान रहा है कि अगर धर्मांतरण का खेल चलता रहा तो बहुसंख्यक अल्पसंख्यक हो जाएँगे और दूसरी ओर दिख भी रहा है कि कैसे घुसपैठ के बाद एसटी महिलाओं को फँसाते हुए उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है, फिर वहीं रहते हुए नए मदरसे खुल रहे हैं और आबादी में परिवर्तन का खेल चल रहा है।

अदालतों की ये बातें निराधार बात नहीं है। भारत को स्वतंत्र हुए 75 साल हो गए हैं। इतने समय से मुस्लिमों को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखा जाता है, मगर जिस हिसाब से इनकी रफ्तार बढ़ रही है उसे देख ऐसा लगता है कि ओडिशा हाई कोर्ट की चिंता जायज है।

1951 और 2011 में हुई जनगणना

1951 में हुई जनगणना के अनुसार, भारत में हिंदुओं की आबादी 30.5 करोड़ (84.1%), सिखों की 60 लाख 86 हजार (1.9%), ईसाइयों की 80 लाख के आसपास और मुसलमानों की जनसंख्या 3.54 करोड़ (9.8%) थी। वहीं 2011 की जनगणना में यदि देखें तो कुल 121.09 करोड़ की जनसंख्या में हिंदू 96.63 करोड़ यानी 79.8% हो गए। वहीं मुस्लिम की संख्या बढ़कर 17.22 करोड़ (14.2%) हो गई; ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%); सिख 2.08 करोड़ (1.7%)।

अब इन दोनों जनगणनाओं की यदि तुलना करें तो पता चलेगा कि हर धर्म के लोगों की जनसंख्या में बढ़ते समय के साथ गिरावट आई है जबकि सिर्फ मुस्लिम ऐसे हैं जो इतने सालों में निरंतर बढ़े हैं। 1951 में ये 9.8% थे जो कि अब बढ़कर 14.2% हो गए हैं।

हिंदुओं की घटी हिस्सेदारी

इसके अलावा अभी हाल में भी ये चिंताजनक आँकड़े प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की साइट पर उपलब्ध अध्य्यन से ही उजागर हुए थे। इसमें बताया गया था कि कैसे बीते सालों में हिंदुओं की हिस्सेदारी घटी है। रिपोर्ट में बताया गया था कि 1950 से लेकर 2015 के बीच, भारत में बहुसंख्यक आबादी में 7.82% की उलेखनीय गिरावट आई। पहले हिंदू 84.68 फीसदी थे और अब सिर्फ 78.06 रह गए हैं। जबकि इसी अवधि के दौरान अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार 1950 में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 9.84 प्रतिशत था और 2015 में बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गया।

इस रिपोर्ट पड़ोसी मुल्कों से जुड़े आँकड़े भी दिए गए थे जिनको देखने पर साफ हुआ था कि ये भारत ही है जहाँ अल्पसंख्यकों की संख्या में बढ़त देखने को मिली और बहुसंख्यक कम होते गए। वरना बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान इन तीनों मुल्कों में बहुसंख्यक आबादी यानी मुस्लिम सिर्फ बढ़े ही बढ़े हैं। कम हुए हैं तो हिंदू धर्म के लोग।

इसलिए ये कहना कि समय के साथ जनसंख्या में ऐसे परिवर्तन देखना आम है एकदम गलत तथ्य है। अगर ऐसा होता तो बाकी मुल्कों में भी संख्या बढ़ी-घटी होती। सारे देशों की तुलना में अगर कुछ समान चीज को खोजें तो पाएँगे सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों को हर जगह बढ़ना ही एक कॉमन चीज है। इसके अलावा अगर मीडिया रिपोर्ट्स आदि पढ़कर समझेंगे तो पता चलेगा कि जिन जगहों पर मुस्लिमों की ऐसी वृद्धि हुई है वहाँ पहले से बसे हिंदू या अन्य वर्ग के लोग अपने आप कम हुए हैं और इस बदलाव ने कई जगह की डेमोग्राफी भी बदली है।

डेमोग्राफी बदलना सामान्य नहीं

डेमोग्राफी का बदलना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं होती, वो भी तब जब धीरे-धीरे दिखने वाले इस बदलाव के साथ उस क्षेत्र के तौर-तरीकों और रहन-सहन में बदलाव दिखने लगे। सोचिए, 1930 में कराची की तस्वीर में महाशिवरात्रि के मेले की भीड़ दिखती थी क्योंकि वहाँ का इलाका हिंदू बहुल था मगर भारत से अलग होने के बाद वो जगह मुस्लिम बहुल हुई और आज कोई हिंदू वैसे उत्सव की कल्पना भी कराची में नहीं कर सकता। हाँ! अगर कल्पना कर सकता है तो धर्मांतरण की जैसा कि पाकिस्तान से आने वाली रिपोर्ट्स बताती हैं।

पता रहे कि आज के समय में भारत में डेमोग्राफी बदलाव काफी चिंता का विषय है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, असम जैसे राज्यों के कई सीमा से सटे क्षेत्र में 10 सालों में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिला है। 2022 की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश और असम बॉर्डर वाले इलाकों में अचानक से 32% फीसदी बढ़ने की जानकारी आई थी जबकि पूरे राज्य में मिलाकर ये दर 10-15 फीसद बढ़ी बताई गई थी। इसी तरह उत्तराखंड में भी 11 साल में मुस्लिम आबादी में हुई बढ़ोतरी की खबरें 2022 में सामने आई थी।

ये दुर्भाग्य है कि हमने अपने इतिहास से कुछ नहीं सीखा क्योंकि डेमोग्राफी में होने वाले बदलाव तो कोई अभी की बात नहीं है। इनपर चिंता तो तभी से होने चाहिए थी जब इस्लाम के नाम पर भारत का 8 लाख वर्ग किलोमीटर उठाकर पाकिस्तान को दे दिया गया। आज उसी क्षेत्र में देख लीजिए हिंदुओं के हालात क्या है। आए दिन वहाँ से अल्पसंख्यको के साथ धर्मांतरण, रेप की खबरें आती हैं। इसके बाद यही बांग्लादेश में भी हुआ। भारत का करीबन डेढ़ लाख वर्ग किलोमीटर उनको दे दिया गया। वहाँ भी आज के समय में पाकिस्तान जैसा ही अल्पसंख्यकों को हाल है। अगर कोई धर्मांतरण के खेल से बच जाए तो उस पर ईशनिंदा के आरोप लगाकर अत्याचार किए जाने लगते हैं। इसी तरह अफगानिस्तान, एक समय में ये भी भारत का हिस्सा था, मगर अब वहाँ 6 लाख वर्ग किलोमीटर में इस्लाम का बोल बाला हो गया है।

हिंदुओं को सतर्क होना क्यों जरूरी

अनुपम सिंह अपनी रिपोर्ट में कहते हैं कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तो इस्लामी कट्टरवाद की बस 33 फीसद सफलता है, बाकी की जीत तो उनकी ‘गजवा-ए-हिंदुस्तान’ के सपने के साथ पूरी होगी। ‘गजवा-ए-हिंद’ यानी पूरे भारत पर इस्लाम का राज…। आज धीरे-धीरे हो रहा डेमोग्राफी बदलाव इसी मकसद को पूरा करने के लिए उठाए गए कदम हैं जिसके लिए इस्लामी कट्टरपंथी तरह-तरह से लगे हैं। उन्हें कम आँकने वालों को समझना होगा कि राज्यों में होने वाले डेमोग्राफी सामान्य नहीं हैं। न ही ये कोई हवा-हवाई बातों से उठी चिंचा है। अतीत में इसके दुष्परिणाम भारत झेल चुका है और अगर अब भी वो नहीं सतर्क हुए तो हाल बुरे हो सकते हैं। शायद अगला कराची भारत का कोई इलाका हो जहाँ हिंदुओं को अपने पर्वों का उत्साह धीरे-धीरे भूलना पड़े और आदत लग जाए इस्लामी तौर-तरीकों के हिसाब से जीने की। आप समझ भी नहीं पाएँगे कब ये समस्या दूसरे के क्षेत्र से उठकर आपके क्षेत्र में पहुँच जाएगी और आपको उस क्षेत्र से निकलने पर मजबूर कर देगी। वर्तमान में कई मामले आ चुके हैं जहाँ मुस्लिम संख्या बढ़ने पर उसे मुस्लिम इलाका अपने आप घोषित कर दिया जाता है।

अरविंद केजरीवाल कोई घोषित अपराधी या आतंकवादी नहीं, जमानत दे दीजिए: हाई कोर्ट ने पूछा- ट्रायल कोर्ट क्यों नहीं गए, CBI से भी माँगा जवाब

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई की गिरफ्तारी के खिलाफ हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब माँगा है। हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब माँगते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को तय की है। इस मामल में अरविंद केजरीवाल ने सीधे हाई कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में अरविंद केजरीवाल की तरफ से कहा कि वो कोई आतंकवादी नहीं हैं, ऐसे में उन्हें यहीं से जमानत दे देनी चाहिए। इस दौरान वकील ने ट्रिपल टेस्ट का भी जिक्र किया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब माँगा और मामले की सुनवाई 17 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी, जिस दिन केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका भी सूचीबद्ध है। केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, विक्रम चौधरी और एन हरिहरन पेश हुए। सीबीआई की ओर से विशेष वकील डीपी सिंह ने पैरवी की।

कोई आतंकवादी नहीं, जिसमें ट्रिपल टेस्ट का आरोप

इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने सीधे हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल किया है, जिसका विरोध सीबीआई ने किया। सीबीआई के विशेष वकील डीपी सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को पहले निचली अदालत में जाना चाहिए था, सीधे हाई कोर्ट में नहीं। इसके बाद अरविंद केजरीवाल की ओर पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में सीआरपीसी की धारा 41ए का उल्लंघन नहीं हुआ है, ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में आ सकते हैं।

अरविंद केजरीवाल की तरफ से कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिस पर ट्रिपल टेस्ट का दूर-दूर तक कोई आरोप हो और केजरीवाल न तो घोषित अपराधी हैं और न ही आतंकवादी। बता दें कि ट्रिपल टेस्ट के लिए यह आवश्यक है कि अभियुक्त के भागने का जोखिम न हो, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना न हो और न ही गवाहों को प्रभावित करने की संभावना हो। ऐसे में हाई कोर्ट सही जगह है। हालाँकि इस मामले में कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की और सीबीआई को नोटिस जारी कर जमानत पर जवाब माँगा है।

कोर्ट 17 जुलाई को करेगी सुनवाई

जस्टिस कृष्णा ने हाल ही में केजरीवाल की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें सीबीआई की गिरफ्तारी और तीन दिन की पुलिस हिरासत को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई 17 जुलाई को तय की गई है।

इससे पहले, वेकेशन बेंच के जस्टिस अमिताभ रावत ने 26 जून को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तीन दिन के लिए सीबीआई हिरासत में भेज दिया था और कहा था कि इस स्तर पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं कहा जा सकता। हालाँकि, जस्टिस ने कहा कि गिरफ्तारी अवैध नहीं है, लेकिन सीबीआई को अति उत्साही नहीं होना चाहिए। बाद में, 29 जून को वेकेशन बेंच की जस्टिस सुनैना शर्मा ने केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया क्योंकि सीबीआई ने इस स्तर पर उनकी आगे की रिमांड की माँग नहीं की थी। फिलहाल अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।

केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। मई में उन्हें लोकसभा चुनाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1 जून तक अंतरिम जमानत दी थी। 2 जून को उन्होंने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद उन्हें ईडी की गिरफ्तारी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी थी। वहीं, दूसरे ही दिन कोर्ट की अनुमति के बाद सीबीआई ने 26 जून को अदालत में केजरीवाल से पूछताछ की और फिर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

दोस्त की शादी में राम मंदिर वाले गाने पर नाचा हिंदू युवक, मुस्लिमों ने घर में घुसकर पीटा: पीड़ित परिवार ने जान को बताया खतरा, कर्नाटक के कलबुर्गी की घटना

कर्नाटक के कलबुर्गी में एक हिंदू युवक पर उसके दोस्त की शादी में राम मंदिर के गाने पर डाँस करने की वजह से मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया और उसे बेरहमी से पीटा। यह घटना गुलबर्गा विश्वविद्यालय पुलिस स्टेशन के अंतर्गत इटगा गाँव की है, जहाँ सोमवार (1 जुलाई) को पीड़ित ने डीजे पर राम मंदिर का गाना “अगर छुआ तो मंदिर को, तेरी औकात दिखा देंगे” बजाकर दोस्त की शादी में डांस किया था, इसके बाद उस पर हमला हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (2 जुलाई 2024) की सुबह पाँच-छह मुस्लिम युवकों ने भीमा शंकर के घर में घुसकर उसे बेरहमी से पीटा। हमलावरों की पहचान खानपाशा, खाजापाशा, मशाक पटेल, फिरोज, काशिम, मदार और नईम के रूप में की गई है। हिंदू पीड़ित परिवार ने कहा है कि हमले के बाद वे डरे हुए हैं और उनकी जान को खतरा है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हमले में शामिल कुछ मुस्लिम युवकों को भी चोटें आई हैं। पीड़ित की माँ की शिकायत पर मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और जाँच की जा रही है। घटना के बाद इटगा गाँव में तनावपूर्ण माहौल है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। कुछ समय पहले कोलार शहर में अरहल्ली गेट के पास दो हिंदू और मुसलमानों के बीच झड़प हो गई थी। नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 515वीं जयंती के मौके पर मस्जिद के सामने डीजे ने संगीत बजाना शुरू कर दिया, जिससे दोनों समूहों के बीच विवाद हो गया, हालाँकि पुलिस ने बीच-बचाव कर मामले को किसी तरह से शांत किया था। इसके बावजूद पूरे इलाके में तनाव बना हुआ था।

मंच पर चढ़ीं महिला मंत्री, टॉप उठाकर दिखाने लगीं स्तन: लुबना जाफरी के ‘आत्मविश्वास’ से प्रधानमंत्री भी हुए गदगद, ओस्लो प्राइड इवेंट का Video वायरल

नॉर्वे की एक मंत्री ने एक इवेंट के दौरान सबके सामने अपना टॉप उठाकर अपनी ब्रेस्ट दिखाई। उनकी इस हरकत की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। महिला मंत्री का नाम लुबना जाफरी है। नॉर्वे सरकार ने उन्हें संस्कृति और लैंगिक समानता मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी दी हुई है, लेकिन अब जून माह में हुए प्राइड इवेंट के दौरान उनकी ऐसी वीडियो सामने आई है कि सब लोग देख हैरान हैं।

इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि लुबना स्टेज पर खड़ी हैं और उन्हें फैग-हैग 2024 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के बाद वह अपना टॉप उठाती हैं फिर घूम घूमकर सबको दिखाती हैं। इस दौरान बाकी सब लोग हँसते रहते हैं। वीडियो में नजर आ रहा एक व्यक्ति तालियाँ बजाता रहता है।

बता दें कि नॉर्वे मंत्री द्वारा उनके की गई ऐसी हरकत पहले से प्लान थी चूँकि स्तन दिखाने के दौरान उन्होंने एरोला क्षेत्र को कवर किया हुआ था। घटना के बारे में जब उनसे पूछा गया तो 44 वर्षीय लुबना जाफरी ने जोर देते हुए फाग-हैग सम्मान के लिए आभार जताया और कहा कि अपने आपको गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

वहीं कार्यक्रम को आयोजित करने वाले शख्स ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कई वर्षों के दौरान घटित हुई सबसे अच्छी बात है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत बढ़िया है कि हमारे पास एक ऐसी मंत्री हैं जो पूरी तरह से हमारे लिए आगे बढ़ती हैं और खुद को पेश करने से नहीं डरती हैं। पिछले दस सालों में इस कार्यक्रम को कभी इतनी पॉपुलैरिटी नहीं मिली। दर्शकों ने लुबना के स्टंट को सराहा है।”

इस मामले में नॉर्वे के प्रधानमंत्री, जोनास गहर स्टोर ने भी ओस्लो प्राइड में लुबना जाफ़री की मौजूदगी को सराहा है। उन्हें यह कहते हुए सुना गया, “लुबना एक आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और अद्भुत व्यक्ति हैं, जिनका पूरे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है।”

पतंजलि के पीछे पड़ा था IMA, अब खुद की हेकड़ी निकली: सुप्रीम कोर्ट से माँगी माफी, कहा- गरिमा को ठेस पहुँचाने का नहीं था कोई इरादा

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. आर. वी. अशोकन ने सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के खिलाफ अपनी टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी माँगी है। मामला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से की गई टिप्पणी के संबंध में एक इंटरव्यू के दौरान अपने द्वारा दिए गए बयान से जुड़ा है। उन्होंने इस संबंध में बृहस्पतिवार (04 जुलाई 2024) को सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने कहा कि वह अपने वक्तव्य के लिए खेद व्यक्त करते हैं। इस बारे में आईएमए ने बाकायदा प्रेस नोट भी जारी किया है। नोट में कहा गया है कि उनका (डॉ RV अशोकन का) सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को कम करने का कभी कोई इरादा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले में सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी, उसमें आईएमए भी एक पक्षकार था।

डॉक्टरों के संगठन की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर आर. वी. अशोकन ने आईएमए के एक पक्ष होने से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से की गई टिप्पणी के संबंध में प्रेस को दिए अपने बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी माँगी है। डॉ. अशोकन ने 23 अप्रैल के आदेश का जिक्र करते हुए एक बयान में कहा कि आईएमए भी कदाचार के मुद्दों के बारे में समान रूप से चिंतित है। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापन संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि उसका मानना है कि आईएमए को भी अपना घर ठीक करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में भी डॉ. अशोकन ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपने बयान को लेकर बिना शर्त माफी माँगी थी।

डॉ. अशोकन ने कहा कि आईएमए ने आधुनिक मेडिकल पेशेवरों के खिलाफ कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे भ्रामक विज्ञापन और दुर्भावनापूर्ण अभियानों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक रिट याचिका दायर की है। एक इंटरव्यू के दौरान मेरे द्वारा दिए गए कुछ बयानों के संदर्भ में, मैंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष खेद व्यक्त किया है। मैंने बिना शर्त माफी माँगने के लिए अदालत में अपना हलफनामा भी जमा कर दिया है। उन्होंने अपने माफीनामे में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के महत्व या गरिमा को कम करने का मेरा कभी कोई इरादा नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एसोसिएशन के सदस्यों के बारे में कथित अनैतिक कृत्यों से संबंधित कई शिकायतें हैं जो मरीजों द्वारा उन पर जताए जाने वाले भरोसे को तोड़ते हैं। वे न केवल बेहद महँगी दवाएँ लिख रहे हैं, बल्कि टालने योग्य/अनावश्यक जाँच की भी सिफारिश कर रहे हैं। डॉ. अशोकन ने कहा कि नैतिक प्रथाओं का निरंतर अपडेट और प्रसार आईएमए की मुख्य गतिविधियों में से एक है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आईएमए को भी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आईएमए को इस विषय पर सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। इसके बाद ये सार्वजनिक माफी सामने आई है।

14 साल बाद ब्रिटेन की सत्ता में लौट रही लेबर पार्टी, ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी को मिली हार: जानिए कौन हैं किएर स्टार्मर जिनकी चली आँधी

यूके में पिथले 14 साल से विपक्ष में बैठी लेबर पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना रही है। किएर स्टार्मर की अगुवाई में लेबर पार्टी करीब 2 तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने को अग्रसर है। वहीं, मौजूदा प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की अगुवाई वाली कंजर्वेटिव पार्टी की बेहद करारी हार हुई है। इसी के साथ तय हो गया है कि ऋषि सुनक अब प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, क्योंकि भारी बहुमत से जीतने वाली लेबर पार्टी के किएर स्टार्मर अब यूके के नए प्रधानमंत्री होंगे। लेबर पार्टी अभी तक 650 सीटों में 500 सीटों पर नतीजों की घोषणा में 348 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर चुकी है।

लेबर पार्टी प्रचंड जीत की ओर

यूके में 650 सांसदों वाले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) में बहुमत की सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को 326 सीटों की आवश्यकता होती है, जिसमें लेबर पार्टी 400 से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज करने की ओर बढ़ रही है। अधिकतर एग्जिट पोल्स में लेबर पार्टी को 410 से 460 सीटों तक का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं, लेटेस्ट आँकड़ों के मुताबिक, 650 सीटों में से 500 सीटों के नतीजे आ चुके हैं, जिसमें से 348 सीटें जीतकर लेबर पार्टी ने पूर्ण बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया है। वहीं कंजर्वेटिव पार्टी महज 76 सीटें ही जीत सकीहै।

ऋषि सुनक ने दी बधाई, इस्तीफे का किया ऐलान

यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी पार्टी की करारी हार के बाद इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वो 6 जुलाई को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। उन्होंने किएर स्टार्मर को जीत की बधाई दी है। अपनी संसदीय सीट रिचमंड एंड नॉर्थलर्टन में काउंटिंग की जगह पर पहुँचे ऋषि सुनक ने कहा कि उनकी पार्टी के लिए आज की रात बेहद कठिन रही। उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है, मैं इसके लिए बधाई देता हूँ। बता दें कि चुनावी नतीजे एग्जिट पोल्स की तरह ही एकतरफा आ रहे हैं।

कौन हैं किएर स्टार्मर?

किएर स्टार्मर का जन्म साल 1963 में की मजदूर परिवार में हुआ था। उनके पिता टूलमेकर थे, तो माँ एक नर्स थी। उनके माता पिता ने लेबर पार्टी के संस्थापक कीर हार्डी के नाम पर उनका नाम कीर स्टार्मर रखा था। वो साल 2015 में पहली बार सांसद चुने गए थे और साल 2020 में उन्होंने बहुत ही कम समय में लेबर पार्टी की कमान संभाल ली थी। किएर स्टार्मर ने अपने कई बयानों में भारत को लेकर सकारात्मक बातें कही हैं। इस बार के चुनाव में उनकी लेबर पार्टी को भारत वंशियों का जोरदार समर्थन मिला है।

स्टार्मर ने हार्डकोर वामपंथी माने जाने वाले जेरेमी कॉर्बिन से अप्रैल 2020 में पार्टी की कमान संभाली थी। उन्होंने पार्टी में सभी वर्गों के उत्थान की बात कही है, साथ ही यूके को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उनके वादे पर आम जनता ने भरोसा किया है।

‘जो गिर गए उन्हें उठाओ मत, सब बाबा की कृपा से ठीक हो जाएँगे’: हाथरस में भगदड़ के बाद घायलों की भी मदद नहीं करने दे रहे थे सेवादार, मीडिया को भी रोका था

हाथरस भगदड़ मामले में नया खुलासा हुआ है। सामने आया है कि जब घटना वाले दिन (2 जुलाई 2024) भगदड़ में लोग गिरना शुरू हुए थे उस समय कुछ ग्रामीण और प्रशासन के लोग उनकी मदद को आगे आ रहे थे। हालाँकि वो सेवादार थे जिन्होंने उन जमीन पर गिरे लोगों की मदद करने से सबको इनकार कर दिया था और कह रहे थे कि ये लोग बाबा के आशीर्वाद से ठीक हो जाएँगे। इसके बाद वो लोग मौका देखकर भाग गए।

वहीं इस नए खुलासे के बाद अब पूरे मामले में साजिश होने की आशंका जताई जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस सेवादारों की पहचान करने में जुटी है।मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सेवादार और बाबा के निजी सुरक्षाकर्मियों की धक्का-मुक्की के कारण भगदड़ शुरू हुई और लोग एक दूसरे के ऊपर गिरना शुरू हुए। हालाँकि जब ग्रामीण और पुलिस प्रशासनिक अधिकारी उनकी मदद को आगे आने लगे तो सेवादारों ने उन्हें उठाने नहीं दिया और कहा कि ये लोग बाबा की कृपा से ठीक हो जाएँगे।

मामले में एसडीएम और पुलिस रिपोर्ट से पता चला है कि 2 जुलाई को हुए 1 घंटे के कार्यक्रम में 2 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ थी। जब साकार विश्व हरि उस भीड़ से निकला तो लोग उसके पीछे उसे पाँव की मिट्टी माथे पर लगाने के लिए दौड़े। कुछ सेवादारों ने इन्हें रोका तो कई लोग नीचे गिर गए। इसके बाद जो माहौल हुआ उसमें जमीन पर गिरे लोगों का उठ पाना मुश्किल हो गया। स्थिति को दूर से देख रहे ग्रामीणों ने घायलों की मदद करनी चाही लेकिन सेवादारों ने उन्हें रोक दिया और मीडिया को वीडियो बनाने से मना कर दिया। बाद में इन्हीं लोगों के छूटे सामान, कपड़े, जूते-चप्पल को उठाकर निकटवर्ती खेल में फसलों में फेंककर सबूतों को छिपाने का प्रयास हुआ।

राहुल गाँधी हाथरस पीड़ितों से मिलने पहुँचे

अब पुलिस इस मामले में फोटो और वीडियोज देख बाकी साक्ष्य जुटा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कल 6 सेवादारों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं मुख्य आरोपित की तलाश के लिए 1 लाख रुपए का इनाम घोषित हुआ था।

बता दें कि इस मामले को विपक्ष पूरी तरह से भुनाने के प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में राहुल गाँधी हाथरस घटना में जान गँवाने वाले पीड़ितों के परिजनों से मिलने गए सामने आई तस्वीरों में उन्हें अलीगढ़ में पीड़ितों के परिवारों से दिखते-बात करते देखा जा सकता है।