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रेप की कोशिश और हत्या के मामले में मौत की सजा का इंतजार कर रहा था शख्स: हाई कोर्ट ने निर्दोष बता किया रिहा, 11 साल जेल के लिए दिया ₹5 लाख का मुआवजा

केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में मौत की सजा पा चुके एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया। वह 2013 से ही जेल में बंद था और 11 वर्षों की सजा काट चुका था। उसे निचली अदालत ने 2018 में मौत की सजा तक सुना दी थी। कोर्ट ने उसे ₹5 लाख का मुआवजा भी दिया है और कहा है कि उसके खिलाफ जाँच ढंग से नहीं हुई।

केरल हाई कोर्ट की जस्टिस नाम्बियार और जस्टिस स्याम कुमार की एक बेंच ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की गड़बड़ जाँच इस तरफ इशारा करती है कि अभियुक्त गिरीश कुमार को झूठे तरीके से इस केस में फंसाया गया हो। कोर्ट ने जाँच वाले पहलू को गंभीरता से लिया।

कोर्ट ने कहा, “निचली अदालत के सामने इस व्यक्ति को IPC की किसी भी धारा के तहत दोषी ठहराने के लिए कोई भी सबूत नहीं था जैसा उस पर आरोप लगाया गया था, उसे धारा 302 के तहत मौत की देना तो दूर की बात थी।” कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा देते वक्त निचली अदालत ने गंभीरतम में भी गंभीर अपराध का मानक नहीं देखा।

कोर्ट ने कहा कि किसी आदमी को भारतीय संविधान द्वारा दिए गए जीने के अधिकार केवल एक आधी अधूरी जाँच और फिर बिना सबूतों को देखे दिए गए फैसले के आधार पर नहीं छीना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों से जनता का विश्वास व्यवस्था में घटता है।

कोर्ट ने इसी के साथ गिरीश कुमार को रिहा कर दिया और 11 वर्षों तक उसे जेल में रहने के कारण हुई पीड़ा को देखते हुए ₹5 लाख का मुआवजा भी दिए जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य की तरफ से दलीलों को नहीं माना और निचली अदालत का मौत की सजा देने का निर्णय पलट दिया।

मौत की सजा पाने वाले इस व्यक्ति गिरीश कुमार को 2013 में कोल्लम में एक महिला के घर में घुस कर उसे मारने का आरोप था। उस पर आरोप लगाया गया था कि वह महिला के घर में उसे मारने और उसका रेप करने की नीयत से घुसा था। उस पर ₹6 लाख की चोरी का भी आरोप था।

इसे इसके बाद गिरफ्तार करके 2015 में मामला चलाना चालू किया गया था। 2018 में उसे मामले की सुनवाई पूरा करके दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी। उसने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। उसे मौत की सजा देने वाली निचली अदालत ने भी अपना निर्णय हाई कोर्ट को भेजा था।

हाई कोर्ट ने कहा कि उसने जेल के भीतर बिना किसी अपराध किए ही इतने दिन गुजार दिए और इसमें लंबा समय उसके सर पर मौत की तलवार लहराती रही। हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करके उसे निर्दोष करार दिया है और रिहा कर दिया है।

बच्ची की किडनी हो गई थी फेल, पादरी ने चमत्कार से ठीक करने का किया दावा: स्टेज पर जबरन चलवाकर की क्रूरता करने पर बाल आयोग में शिकायत

तेलंगाना में एक पादरी ने अपने चमत्कारी शो के दौरान किडनी फेलियर से जूझ रही एक बच्ची पर चमत्कार दिखाने का दावा किया। छोटी बच्ची पर चमत्कार दिखाने के लिए उसके साथ क्रूरता हुई। गंभीर रूप से बीमार बच्ची को जबरदस्ती स्टेज पर चलवा कर इसे करिश्मा बताया गया। मामले में अब पादरी के हिका शिकायत दर्ज हो गई है।

यह शिकायत 3 जुलाई, 2024 को LRPF नाम की एक संस्था ने दर्ज करवाई है। LRPF के अनुसार, पादरी प्रवीण कुमार के यूट्यूब चैनल पर 16 मई को एक वीडियो पोस्ट किया गया था। इसमें एक छोटी बच्ची की माँ ने बताया कि उसकी बेटी की किडनी खराब हो गई है। वीडियो में महिला रो रही थी। उसने बताया कि उसकी बच्ची पिछले 3 दिनों से हैदराबाद के निलोफर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थ। महिला ने बताया कि वह बच्ची की जान बचाने के लिए इस कैल्वरी चर्च के चमत्कारिक इलाज शो में लाई है।

लड़की की माँ ने बताया , डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि बच्ची अब आगे बचाई नहीं जा सकती। इसलिए वह डॉक्टरों की चेतावनी के बावजूद उसे तुरंत ICU से कैल्वरी चर्च ले गए। महिला ने बताया किकि उन्होंने एक पेपर पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें कहा गया था कि अगर उनकी बेटी को कुछ भी हुआ तो डॉक्टर जिम्मेदार नहीं होंगे। महिला के अनुसार, लड़की किडनी खराब होने के कारण हिल डुल तक नहीं पा रही थी, लेकिन अब चल सकती है।

LRPF ने NCPCR को दी गई शिकायत में कहा, “पादरी आर प्रवीण कुमार के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो से यह साफ है कि गंभीर बीमार होने के दौरान छोटी बच्ची का इलाज करने के बजाय, उसके माता-पिता उसे पादरी प्रवीण कुमार और शेरोन द्वारा आयोजित चमत्कार शो में ले गए। उनका मानना था कि इस उनकी बेटी उनकी यहाँ ठीक हो जाएगी।”

शिकायत में कहा गया, “वीडियो से यह भी स्पष्ट है कि बच्ची, जिसे उसके माता-पिता द्वारा चल रहे इलाज को बंद करने के बाद ICU से लाया गया था, के साथ क्रूरता की गई और पादरी प्रवीण कुमार द्वारा चमत्कार शो के दौरान उसे चलने के लिए मजबूर किया गया।”

LRPF ने शिकायत में कहा, “कैलवरी चर्च के पादरी प्रवीण कुमार और मिस शेरोन ने बच्ची के साथ क्रूरता की, वह गंभीर किडनी फेलियर से पीड़ित थी। इसके अलावा, उन्होंने नाबालिग बच्ची का वीडियो बनाया और उसे अपने YouTube पर भी अपलोड कर दिया। यह उन्होंने खुद को चमत्कार करने वालों के रूप में पेश करने के लिए किया। यह बच्ची की गरिमा और निजता को नुकसान पहुँचाने वाला काम था।”

कैल्वरी मिनिस्ट्रीज एक ट्रस्ट है और इसकी पंजीकरण संख्या 39/2013 है। इसका पंजीकृत कार्यालय तेलंगाना के मंचेरियल जिले के सोमागुडेम में है। ट्रस्ट को 2003 में बनाया गया था। LRPF के अनुसार, कैल्वरी ट्रस्ट के अध्यक्ष पादरी आर प्रवीण कुमार और उनकी पत्नी शेरोन ने धार्मिक प्रार्थना सभाओं के नाम पर बेल्लमपल्ली और हैदराबाद में ऐसे ही चमत्कार के दावे वाले करने वाले शो आयोजित किए हैं।

LRPF ने कहा कि पादरी और उनकी पत्नी गरीब, अशिक्षित और कमजोर तबके के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं कि उनकी किसी भी गंभीर बीमारी का इलाज उनकी प्रार्थना सभा में हो सकता है। उनका दावा है कि वह उस बीमारी का इलाज कर सकते हैं जो डॉक्टर भी नहीं कर पाते। ऐसे में, उन्होंने कुछ लोगों को बड़ी भीड़ में शामिल होने और झूठ बोलने की व्यवस्था की है। यह लोग कहते हैं कि पादरी प्रवीण कुमार की प्रार्थनाओं की बदौलत उनकी चिकित्सा समस्याएँ ठीक हो गई हैं।

यह ध्यान रखने वाली बात है कि पादरी और उनकी पत्नी पर वर्ष 2019 में भी इसी तरह के एक मामले में FIR दर्ज की गई थी। 25 मई 2019 को पादरी की लापरवाही के कारण 21 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु के बाद, कासिपेट पुलिस, बेल्लमपल्ली में दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

यह मामला गिरीशेट्टी मंगम्मा द्वारा की गई शिकायत के पर दर्ज किया गया था, इसमें बताया गया था कि गिरीशेट्टी राजेश (21) गंभीर बुखार से पीड़ित था, वह इस उम्मीद में कैल्वरी चर्च में मिरेकल हीलिंग शो में गया था कि पादरी प्रवीण कुमार और सिस्टर शेरोन की प्रार्थना से वह ठीक हो जाएगा।

जब उसकी तबीयत और बिगड़ गई तो उसने अस्पताल जाना चाहा। लेकिन पादरी प्रवीण कुमार, सिस्टर शेरोन और अन्य पादरियों ने उसे अस्पताल नहीं जाने दिया। इसके बाद कैल्वरी चर्च में उसकी मौत हो गई। इस घटना की FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास है।

भारत में जादुई उपचारों के विज्ञापन को गैरकानूनी माना गया है। इससे सम्बन्धित कानून में लिखा है, “जादुई उपचार देने का पेशा करने वाला कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे जादुई उपचार का जिक्र विज्ञापन में नहीं करेगा। इसका उल्लंघन करने पर 6 माह की जेल और जुर्माना हो सकता है। दोबारा ऐसा किया तो 1 साला तक की सजा का प्रावधान है।

नाम-धर्म छिपाकर आजम ने हिंदू नाबालिग लड़की से दोस्ती की, बहला कर किया रेप: वीडियो बनाकर करने लगा ब्लैकमेल, देहरादून पुलिस ने दबोचा

उत्तराखंड के देहरादून में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ आजम नाम के एक मुस्लिम लड़के ने अज्जू बनकर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की और फिर उसका रेप किया। बाद में पीड़िता ने पुलिस थाने में शिकायत दी। इसके आधार पर एफआईआर दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि 2 जुलाई 2024 को सहसपुर की रहने वाली एक हिन्दू नाबालिग लड़की पुलिस के पास पहुँची। उसने अज्जू उर्फ आजम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उसने बताया कि वह साल 2017 में नाबालिग थी और कक्षा 9वीं में पढ़ती थी। उसी दौरान आजम नाम के मुस्लिम लड़के ने अज्जू बनकर दोस्ती की।

पीड़िता ने बताया कि 22 साल के आजम ने उससे दोस्ती करने के बाद बहला-फुसलाकर उसके साथ रेप किया। इस दौरान आजम ने उसके अश्लील वीडियो भी बना लिए। पीड़िता का आरोप है कि उस वीडियो के आधार पर आरोपित आजम उससे अक्सर रेप करने लगा। जब वह मना करती तो वीडियो वायरल करने की धमकी देता था।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह लोक-लाज के डर से इस मामले में चुप रही, लेकिन इस दौरान आरोपित की हिम्मत बढ़ती गई। आखिरकार लड़की ने इसकी शिकायत थाने में करने का निर्णय लिया। उसने सहसपुर थाने पहुँचकर सारी घटना बता दी। इसके आधार पर पुलिस ने आजम के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

थाना सहसपुर में मामला दर्ज कर विवेचना इंस्पेक्टर रश्मि रावत के सुपुर्द की गई। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त आजम को मेन्टल हॉस्पिटल शंकरपुर के पास से गिरफ्तार कर लिया है। वह केदारावाला निवासी जमशेद अली का बेटा है। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से पीड़िता की अश्लील वीडियो और फोटो बरामद की है। आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

विश्व चैम्पियन का निकला विजय रथ: मरीन ड्राइव से लेकर वानखेड़े स्टेडियम तक लाखों की भीड़, एक झलक पाने को बेताब दिखे प्रशंसक

बारबाडोस में T-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत विश्व चैंपियन बना है। इसको लेकर पूरे देश में उमंग है। विजेता भारतीय टीम को स्वदेश लाने के लिए चार्टर्ड प्लेन भेजा गया था। टीम की वापसी के बाद क्रिकेटरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद गुरुवार (3 जुलाई 2024) की शाम को मुंबई में विक्ट्री परेड निकाली गई। इस दौरान लाखों लोगों ने टीम इंडिया का आभार व्यक्त किया।

मुंबई की सड़कों पर लाखों क्रिकेट फैंस जुटे। हर किसी को चैंपियंस का इंतजार रहा। मुंबई का मरीन ड्राइव पूरी तरह से खचाखच भरा हुआ है। वानखेड़े स्टेडियम में भी हजारों फैंस जुटे हुए हैं। यह परेड मरीन ड्राइव से शुरू होकर वानखेड़े स्टेडियम तक खत्म होगी। भारतीय टीम जब मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँची तो क्रिकेट टीम को वाटर सैल्यूट दिया गया।

एयरपोर्ट से निकलते ही सेल्फी लेने के लिए फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हार्द‍िक पंड्या अपने हाथ में लिए हुए थे। टीम इंडिया के खिलाड़ी एयरपोर्ट से विक्ट्री परेड के लिए मरीन ड्राइव निकल गए। इस सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। साथ में एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी।

जब खिलाड़ियों को एयरपोर्ट से मरीन ड्राइव ले जाया जा रहा था, तब हजारों की तदाद में खड़े प्रशंसक उनकी एक झलक पाने को बेताब दिखे। खिलाड़ियों को ले जाने वाली बस के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर किया और बस को मरीन ड्राइव तक सुरक्षित पहुँचने के लिए रास्ता बनाया।

मरीन ड्राइव पहुँचने से पहले हार्दिक पांड्या ने ट्रॉफी के साथ एक सेल्फी शेयर की है, जिसमें वह मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। हार्दिक ने ट्वीट करके लिखा, “वानखेड़े कुछ देर में मिलते हैं।” वहाँ पहुँचते ही खिलाड़ियों के सम्मान में नारे लगने लगे। मरीन ड्राइव पर फैंस की भीड़ के बीच विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा के बड़े-बड़े कट आउट लगाए गए।

इसके बाद वहाँ से खिलाड़ियों की विक्ट्री परेड निकाली गई। वानखेड़े स्टेडियम के सभी स्टैंड भरे हुए नजर आए। स्टेडियम हाउसफुल था। एमसीए ने फैंस को स्टेडियम में फ्री एंट्री दी, जिसके कारण उम्मीद से ज्यादा लोग वहाँ पहुँचे।

बता दें कि 29 जून को हुए फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हराकर इस फॉर्मेट में दूसरी बार चैम्प‍ियन बना है। फाइनल मुकाबले में भारत ने रोमांचक अंदाज में अपने प्रतिद्वंद्वी को मात दी। यह मुकाबला बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल स्टेडियम में हुआ था। इस जीत के साथ ही भारत ने 17 साल बाद टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया है।

‘मेक इन इंडिया’ की रफ्तार नहीं पचा पा रही विदेशी मीडिया एजेंसी ‘रॉयटर्स’, भारत में iPhone बनाने वाली Foxconn को महिलाओं के बहाने निशाने पर लिया: सरकार ने दावे नकारे

भारत में बीते कुछ वर्षों में मेक इन इंडिया योजना ने अच्छी रफ़्तार पकड़ी है। इसके अंतर्गत अब भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फोन निर्माता देश बन गया है। भारत में विश्व की सबसे बड़ी फोन कम्पनी एप्पल के भी फोन बन रहे हैं और लाखों करोड़ का इनका निर्यात भी हो रहा है। यह बात विदेशी मीडिया को पसंद नहीं आई है, उसने अब भारत में आईफोन का निर्माण करने वाली कंपनी Foxconn को निशाना बनाया है। ऐसी ही एक रिपोर्ट विदेशी मीडिया समूह रायटर्स ने छापी है।

क्या कहती है रायटर्स की रिपोर्ट?

विश्व के बड़े मीडिया समूह रायटर्स ने 25 जून, 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया कि Foxconn तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में स्थित आईफोन प्लांट में विवाहित महिलाओं की भर्ती को लेकर अनियमितताएँ कर रही है। रायटर्स ने आरोप लगाया है कि इस प्लांट में विवाहित महिलाओं को नौकरी नहीं दी जाती। इसको लेकर रायटर्स ने कुछ महिलाओं के इंटरव्यू और भर्ती के पैम्फलेट भी इकट्ठा किए हैं। रायटर्स का आरोप है कि विवाहित महिलाओं को सुनियोजित तरीके से भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाता है।

रायटर्स का दावा है कि महिलाओं को इस फैक्ट्री में इसलिए नहीं लिया जाता क्योंकि वह सोने-चाँदी के आभूषण पहनती हैं। इसके अलावा उनके पारिवारिक कारणों से छुट्टी लेने की समस्याएँ आती हैं, इसलिए भी उनको फैक्ट्री से दूर रखा जाता है। रायटर्स की रिपोर्ट में दावा है कि Foxconn यहाँ स्वयं ऐसा नहीं करती बल्कि वह जिन एजेंसियों के जरिए कम करने वालों की भर्ती करवाती है, उनके जरिए यह बात मौखिक रूप से स्पष्ट करवा देती है। रायटर्स ने इसे भेदभाव का नाम दिया है।

रायटर्स की रिपोर्ट को सरकार ने नकारा, नहीं मिली गड़बड़ी

रायटर्स के इन दावों को Foxconn ने पहले ही नकार दिया था। Foxconn ने अपने एक बयान में बताया था कि वह ऐसा कोई भेदभाव नहीं करती और इन आरोपों को सिरे से नकारती है। Foxconn ने यह भी बताया था कि उसके यहाँ सभी महिलाओं का काम करने के लिए स्वागत है। उसने यह भी साफ़ किया था कि Foxconn ने हाल ही में जिन महिलाओं की भर्ती की थी, उनमें से 25% विवाहित थीं। Foxconn ने यह भी बताया कि इससे पहले जब ऐसी बात सामने आई थी तो उसने कुछ भर्ती एजेंसियों के साथ काम करना बंद कर दिया था।

रायटर्स की इस रिपोर्ट पर Foxconn के बाद भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार ने भी एक्शन लिया है। श्रीपेरम्बदूर में स्थित इस प्लांट में तमिलनाडु के श्रम विभाग के बड़े अधिकारियों ने जाँच की है। इस क्षेत्र के जोनल चीफ लेबर कमिश्नर ने एक पाँच सदस्यीय टीम के साथ प्लांट का जायजा लिया है और महिलाओं के साथ भी की है।

लेबर कमिश्नर ने यह जानकारी रायटर्स को दी है कि इस प्लांट में 41,281 लोग काम कर रहे हैं। इनमें से 33360 महिलाएँ हैं। इन महिलाओं में से 2750 विवाहित हैं। यह कुल महिलाओं का 8% है। प्रथम दृष्टया श्रम विभाग के अधिकारियों को इस प्लांट में कोई भी गड़बड़ी नहीं मिली है। उन्होंने इसे दोषमुक्त करार दिया है। ऐसे में Foxconn को क्लीनचिट मिली है।

जहाँ Foxconn विवाहित महिलाओं को काम देती है और उनके साथ भेदभाव नहीं करती तो वहीं भारतीय कानून उसे ऐसा करने से रोकता भी नहीं। भारत में निजी फर्म अपने काम की जरूरतों के अनुसार, विवाहित महिलाओं को भर्ती में शामिल होने से मना कर सकती हैं। हालाँकि, Foxconn ऐसा नहीं कर रही।

इस मामले में SPJ एडवोकेट्स में श्रम कानूनों की वकील सुनीता शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि भारतीय श्रम कानून विवाह के आधार पर भर्ती करने को लेकर विशेष नियम नहीं बताता। ऐसे में कोई कम्पनी यदि चाहे तो विवाहित महिलाओं को अपनीं भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर सकती है। हालाँकि, अधिकांश कम्पनियाँ ऐसा नहीं करती।

भारत में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग, चीन की चिंता का सबब

भारत में मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में हुई बढ़ोतरी चीन के लिए चिंता का सबब बन रही है। Foxconn का भारत में बढ़ता निवेश चीन को खटक रहा है। भारत ने 2023-24 में 12.1 बिलियन डॉलर (लगबग ₹1 लाख करोड़) के एप्पल के फोन निर्यात किए हैं, यह 2022-23 के मुकाबले दोगुने थे। इनमें से अधिकांश इसी श्रीपेरम्बदूर के प्लांट में बने हुए हैं। Foxconn यहाँ 2019 से ही iPHONE बना रही है। वर्तमान में दुनिया भर उपयोग होने वाले 14% iPHONE भारत में बन रहे हैं और हर साल में इसमें बढ़ोतरी हो रही है।

वर्तमान में चीन iPHONE समेत एप्पल के सभी उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। चीन में अब तक 90% से अधिक iPHONE बनते थे। लेकिन भारत में निर्माण चालू होने के बाद धीमे धीमे चीन का हिस्सा घटने लगा है। एप्पल चाहता है कि उसके कुल iPHONE का 25% उत्पादन 2027 तक भारत में हो। ऐसे में इससे चीन को बड़ा झटका लगेगा। चीन को इससे निर्यात और रोजगार, दोनों का नुकसान होगा। वहीं भारत को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।

चीन के सोशल मीडिया में भी अब भारत के आगे बढ़ने को लेकर चिंताएँ जताई जा रही हैं। Foxconn भारत में लगभग ₹60,000 करोड़ अगले कुछ वर्षों में निवेश करने वाली है। यह ताईवान की कम्पनी है और बीते दिनों में भारत और ताइवान के संबंध भी सुदृढ़ हुए हैं। ताइवान भारत को अन्य कई तकनीकों में भी मदद कर रहा है। ताइवान को चीन अपना हिस्सा करार देता है , ऐसे में उसके लिए भारत और ताइवान के संबंध सुदृढ़ होना चिंता की बात है।

रायटर्स की रिपोर्ट का चीनी कर रहे प्रसार

Foxconn को निशाने पर लेकर की गई रायटर्स की रिपोर्ट को चीन के सरकारी समाचार वेबसाइट और चीन समर्थक बढ़ा चढ़ा कर भी दिखा रहे हैं। चीन का सरकार नियंत्रित SCMP अखबार भी इस रिपोर्ट को आगे बढ़ा रहा है। रायटर्स की रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर भी जगह मिल रही है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य महिला अधिकारों को उठाना कम और भारत की छवि को धूमिल करना अधिक लगता है। ऐसे में आगे यह मामला और उठता दिख सकता है। रायटर्स इससे पहले चीन के ऊपर ऐसी रिपोर्ट भी नहीं करता देखा गया है।

जिधर मुस्लिम आबादी उस बूथ पर 5 साल में ही 117% बढ़ गए वोटर… हाई कोर्ट को भी कहना पड़ा- झारखंड की जमीन पर बस कर सुविधा भोग रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए

झारखंड हाई कोर्ट राज्य में बढ़ रही घुसपैठ को लेकर सख्त हो गया है। उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों से को राज्य से बेदखल करने को लेकर एक्शन का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान घुसपैठियों की राज्य में उपस्थिति के ऊपर भी रिपोर्ट माँगी है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को ये निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर राज्य में मौजूद घुसपैठियों का पता लगाए, उनको चिन्हित करे और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसको लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है।

हाई कोर्ट की यह सख्ती डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिखी है। याचिका में अदालत को बताया गया था कि राज्य के संताल परगना के जो भी जिले बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। नए मदरसे भी खुल रहे हैं। यहाँ 46 नए मदरसे खुले हैं। संताल परगना में गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले शामिल हैं।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी झारखंड की उस समस्या को दर्शाती है जो धीरे-धीरे नासूर बन चुकी है। संताल परगना के जिले पश्चिम बंगाल से सीमाएँ साझा करते हैं। पहले घुसपैठिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आते हैं और यहाँ से फैलते हुए वह झारखंड में आ जाते हैं।

नई नहीं है डेमोग्राफी बदलने की बात

झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी को रेखांकित करने वाली काफी सारी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च, 2024 में आजतक की एक रिपोर्ट में याचिका में बताई गई समस्या को लेकर ही बात की गई थी। आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है। लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की।

आजतक की रिपोर्ट में यह तक बताया गया था कि यहाँ घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी इस जमीन में खनन के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। कुल मिलाकर धीमे-धीमे इस इलाके की पहचान बदली जा रही है। बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में घुसते ही फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लेते हैं। इसमें इनकी मदद पहले से आकर बस चुके लोग भी करते हैं।

सिर्फ जमीन ही नहीं चुनाव में भी घुसपैठ

बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। इसके लिए आपको संताल के बड़े जिले साहिबगंज की राजमहल विधानसभा का रुख करना होगा। कुछ दिन पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि उनके इलाके में कुछ गाँवों में बेतहाशा मुस्लिम वोट बढ़े हैं। उन्होंने बताया था कि यह काम पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गाँवों में हुआ है।

अनंत ओझा के अनुसार, उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।

विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने को कहा है।

बताया जा रहा है इस इलाके में मतदाताओं के भौतिक सत्यापन पर भी विचार हो रहा है। हालाँकि, इस बीच समस्या का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में अब कोर्ट को भी इस मामले में उतरना पड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की सरकार इन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर क्या कार्रवाई करती है, यह देखने वाला होगा।

फिर से झारखंड के मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन, मंत्रियों के नाम अभी फाइनल नहीं: घोटाले में गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को सौंपी थी कुर्सी

झारखंड में हेमंत सोरेन ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। राजभवन में राज्यपाल ने हेमंत सोरेन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। राजभवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन भी नजर आए। हेमंत सोरेन अपने पिता का हाथ थामकर उन्हें सहारा देते और राजभवन में ले जाते नजर आए। हेमंत सोरेन तीसरी बार राज्य के सीएम बने हैं। उनसे पहले शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा तीन बार सीएम रह चुके हैं।

पिता शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा की बराबरी

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज भवन में हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। वो तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। हेमंत सोरेन से पहले शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा झारखंड के तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट द्वारा 28 जून को जमानत दिए जाने के बाद हेमंत को जेल से रिहा कर दिया गया था, पाँच महीने पहले उन्हें गिरफ़्तार किया गया था। बीच के समय में चंपई सोरेन बतौर मुख्यमंत्री काम कर रहे थे। उन्होंने हेमंत के जेल से बाहर आने के बाद इस्तीफा दे दिया और हेमंत के लिए रास्ता साफ कर दिया।

शपथ ग्रहण समारोह से पहले हेमंत सोरेन ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कहा, “5 महीने पहले सत्ता के मद में चूर अहंकारियों ने मुझे चुप कराने की कोशिश की थी। आज झारखंडियों की जनमत वापस बुलंद होगी। हेमंत सोरेन ने कहा कि इसी जगह से मैंने आपको संदेश दिया था कि किस तरह हमारे खिलाफ विरोधियों ने साजिश रची और वो उसमें कामयाब हुआ। मुझे 5 महीने तक जेल में रखने का प्रयास किया गया। हमने भी कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया। न्याय ने मुझे पाक करार दिया। मैं आज फिर से आपके सामने हूँ।” हेमंत सोरेन ने कहा कि भगवान के घर अंधेर नहीं रहता है।

बता दें कि झारखंड में इस साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित है। झारखंड में झामुमो की अगुवाई में इंडी गठबंधन के विधायकों की संख्या 45 है। इसमें कॉन्ग्रेस के 17 विधायक, राजद के एक और झामुमो के 27 विधायक शामिल हैं। झामुमो के दो विधायक नलिन सोरेन और जोबा माझी अब सांसद बन चुके हैं। सीता सोरेन ने भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था और विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया था।

हाथरस भगदड़ मामले में 2 महिलाओं समेत 6 लोग गिरफ्तार: मुख्य आरोपित की तलाश जारी, पता बताने वाले के लिए पुलिस ने रखा ₹1 लाख का इनाम

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए भगदड़ हादसे की जाँच के बाद यूपी पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं मामले में मुख्य आरोपित की तलाश जारी है। मुख्य आरोपित सेवादार देव प्रकाश मधुकर है जिसे खोजने के लिए पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम रखा है। कहा जा रहा है कि पुलिस जल्द ही उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करवा सकती है।

आईजी शलभ माथुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले में मीडिया को हालिया कार्रवाई से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को पूछताछ के बाद अरेस्ट किया गया है। यह लोग आयोजन समिति के सदस्य थे लेकिन घटना के बाद मौके से फरार हो गए थे। गिरफ्तार आरोपितों में 2 महिलाएँ भी शामिल हैं।

पुलिस को जाँच में पता चला है कि ये लोग खुद ही भीड़ को नियंत्रित करने का काम करते थे। प्रशासन से मदद नहीं लते थे। घटना वाले दिन भी यही हुआ। मगर भगदड़ में जब हालात अनियंत्रित हुए तो ये मौके से भाग गए और लोगों को वीडियो बनाने से रोकने लगे।

इस मामले में पुलिस ने यह भी बताया कि फिलहाल भगदड़ में मरे 121 लोगों की पहचान हो गई है। वहीं जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने बताया कि इन 121 शवों में 21 शवों को आगरा, 28 को एटा, 34 को हाथरस और 38 को अलीगढ़ लेकर जाया जाएगा।

बता दें कि 2 जुलाई को हुई इस घटना की बाबत यूपी सरकार ने जाँच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम को दी है। पैनल को दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं योगी आदित्यनाथ खुद भी हाथरस का दौरा किए और घायलों से मुलाकात थी।

इस दौरान उन्होंने सवाल किया था कि जिनकी वजह से भीड़ इकट्ठा हुई उनका नाम एफआईआर में क्यों नहीं है। इस पर उन्हें कहा गया ता कि प्रथम दृष्टया में आयोजकों पर केस हुआ है। आगे जो जो इस केस में जिम्मेदार पाया जाएगा सब पर कार्रवाई होगी।

श्रमिकों के बच्चे भी अब बन सकेंगे अधिकारी, छत्तीसगढ़ की BJP सरकार ने शुरू की मुफ्त कोचिंग योजना: 10 जिलों में पंजीकरण का काम शुरू

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने श्रमिकों के बच्चों को सरकारी नौकरियों की तैयारी कराने के लिए मुफ्त कोचिंग देने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य लोकसेवा आयोग, बैंकिंग, व्यापम आदि प्रतियोगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जाएगी। शुरू में यह योजना कोरबा सहित राज्य के 10 जिलों में शुरू होगी।

प्रदेश के 10 जिलों में मुफ्त कोचिंग क्लासेस जुलाई में ही शुरू हो जाएगी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया भी विभाग ने बता दी है। यह योजना कोरबा विधायक और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के पहल से शुरू की जा रही है। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक और पात्र हितग्राही सेन्टर या श्रम कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

नियमों के अनुसार, पंजीकृत श्रमिक की अगर मौत हो चुकी है, तब भी उसके बच्चों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा मिलेगी। अगर पंजीकृत श्रमिक की मौत 9 जून 2020 से पहले हुई है तो पुरानी अधिसूचना के अनुसार योजना के लिए उनके बच्चे पात्र हैं। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक और दिव्यांग सहायता योजना से जुड़े हुए श्रमिक की मौत पर भी उनके बच्चे भी यह सुविधा मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भवन और अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पंजीकृत श्रमिकों एवं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए यह योजना लाई गई है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिक एवं उनकी संतानों को शैक्षणिक योग्यता के अनुसार 4 से 10 महीने तक मुफ्त कोचिंग दी जाएगी।

इस मुफ्त कोचिंग में संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोकसेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल, कर्मचारी चयन आयोग, बैंकिंग, रेलवे, पुलिस भर्ती जैसी परीक्षाओं की व्यापक तौर पर तैयारी कराई जाएगी। यह कोचिंग ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी मिलेगी, ताकि विभिन्न परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को ये दोनों को विकल्प मिल सके।

यह योजना राज्य के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगाँव, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर, चांपा, महासमुंद जिले में इस योजना की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के तीन जिले रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में 50-50 की संख्या वाले चार बैच भरे जा चुके हैं। अन्य जिलों में भी काम जारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश कर दिए हैं।

मौलाना ने कहा- ईद पर गाय की कुर्बानी न दें, भड़का मुफ्ती रहमान अजहरी: हिंसक प्रदर्शन की धमकी, असम पुलिस ने किया गिरफ्तार

असम पुलिस ने कट्टरपंथी इस्लामिक धर्मगुरु मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी को गिरफ्तार किया है। प्रशासन के खिलाफ भड़काऊँ भाषण देने के आरोपों में मंगलवार (2 जुलाई 2024) उसे गिरफ्तार किया गया। असम के डीजीपी जीपी सिंह के निर्देशों पर दराँग जिले की पुलिस ने उसे पकड़ा। मुकिबुर रहमान अजहरी ने सोशल मीडिया पर लखमीपुर पुलिस स्टेशन और एसपी को धमकाते हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की धमकी दी थी।

मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी ने 6 जुलाई को लखीमपुर पुलिस स्टेशन के घेराव की धमकी दी थी और उसकी तैयारियों में जुटा था। यही नहीं, उसने असम में 6 से 10 जुलाई के बीच राज्यव्यापी चक्काजाम और प्रदर्शन की भी धमकी दी थी।

अजहरी ने ये बयान और धमकी मौलाना मुस्तफा कमाल द्वारा ईद के मौके पर उस अपील के बाद दी थी, जिसमें मौलाना कमाल ने मुस्लिमों से ईद के मौके पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की थी। मौलाना मुस्तफा कमाल ने कहा था कि इस्लाम में कुर्बानी तो अहम है, लेकिन गाय की ही कुर्बानी देनी है, ये जरूरी बिल्कुल भी नहीं है। उनके इस बयान पर असम के कट्टरपंथियों ने उसका विरोध किया था और मौलाना मुस्तफा कमाल की गिरफ्तारी की माँग की थी। इसी क्रम में मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी ने सोशल मीडिया पर बाकायदा लाइव आकर कहा था कि वो मौलाना मुस्तफा कमाल के घर के साथ ही पुलिस स्टेशन और एसपी ऑफिस का भी घेराव करेगा, जिसमें दम है वो रोक कर दिखाए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया है।

असम के मंत्री पीयूज हजारिका ने मुफ्ति मुकिबुर रहमान के बयान के आलोचना की है। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति खास समुदाय से संबंध रहता है, जो अल्पसंख्यक है। चूँकि ईद पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की गई थी, लेकिन इसकी आड़ में ये व्यक्ति नफरत बढ़ा रहा है और लाइव वीडियो में असम पुलिस को चैलेंज कर रहा है। ये व्यक्ति हिंसा की भी धमकी दे रहा है। असम किधर जा रहा है?”

फेसबुक लाइव सेशन के दौरान मुफ़्ती ने कहा कि वो 6 से 10 जुलाई के बीच लखीमपुर पुलिस स्टेशन और उस “शैतान” (मुस्तफा कमाल) के घर का घेराव करेगा। इस दौरान काफी लोग मेरे साथ रहेंगे। मुकिबुर रहमान अज़हरी ने घोषणा की, “मैं यह जानना चाहता हूँ कि वो आदमी कितना बहादुर है। मुझे आज उत्तर लखीमपुर पुलिस स्टेशन से फोन भी आया था और ये कहा गया कि 6 जुलाई को घेराव जैसा कोई काम न किया जाए, लेकिन मैं उस दिन जरूर आऊँघा.. इंशाअल्लाह।” यही नहीं, उसने कहा कि एसपी और डीसीपी भी उसे फोन करें, तब भी वो घेराव करेगा, मानेगा नहीं।

मुस्तफा कमाल को गाली देते हुए उसने कहा, “मैं फिर भी जाऊँगा इंशाअल्लाह। उस आदमी ने यह खेल शुरू किया है और यह उसका आखिरी खेल है। मैं इस खेल को खत्म कर दूँगा। मैं इस्लाम का प्रचार करने के लिए बहुत मेहनत करता हूँ। अब, आप इस्लाम का अपमान करते हैं? आप रसूल (पैगंबर मुहम्मद) को गाली देते हैं। उन्होंने रसूल को शैतान कहा था। चाहे वे मेरे पैर काट दें या मेरे हाथ तोड़ दें, मैं जाऊँगा। मैं जाऊँगा, चाहे वह कितनी भी पुलिस को बुलाए। मैं 3 से 4 लाख रुपए महीना कमाता हूँ। यह आदमी केवल आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के जरिए कमाता है। वह मानहानि का मामला दर्ज कर सकता है, लेकिन यह सच है। वह एक बाँग्लादेशी नास्तिक से भी मिला था। वह 100% आरएसएस है।”

अजहरी ने एक बार फिर दोहराया कि उसे थाने में जिहादी आंदोलन करने से कोई नहीं रोक सकता और आरोप लगाया, “इस्लाम और हमारे रसूल का अपमान मेरे लिए असहनीय है। मैं लड़ाई लड़ूँगा और विरोध करूँगा। आप मेरा वीडियो एसपी को दिखा सकते हैं। लेकिन मैं संविधान के अनुसार विरोध करूँगा। मैं बवाल करूँगा बाबा साहब अंबेडकर के संविधान ने हमें हदीस, कुरान, अल्लाह और रसूल पर विश्वास करने की आजादी दी है।”

अजहरी ने मुस्तफा कमाल को धमकी देते हुए कहा कि असम किसी के बाप की जागीर नहीं है। उसने कहा, “अगर आप इस्लाम, कुरान, रसूल या नबी का अपमान करते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। असम आपके पिता की जागीर नहीं है। मैं तुम्हारी दिलेरी देखने तुम्हारे शहर आऊँगा और थाने को भी घेर कर रखूँगा।”

सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो के लोकप्रिय होने के बाद कानून अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और 2 जुलाई को मुफ्ती मुकीबुर रहमान अजहरी को गिरफ्तार कर लिया। धुला पुलिस स्टेशन ने उनके खिलाफ मामला 97/24 दर्ज किया है, जिसे मंगलदोई कोर्ट में पेश किया गया है। किसी भी तरह की और गड़बड़ी को रोकने के प्रयास में अधिकारी भी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।