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मोहम्मद सरफुद्दीन की चिकन बिरयानी शॉप पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: कारीगर तिरंगे से उतार रहा था पका मांस, रोकने वालों को देने लगा गालियाँ, पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (4 जून 2024) को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करने का मामला सामने आया। यह अपमान चिकन बिरयानी बेचने वाले मोहम्म्द सरफुद्दीन की दुकान पर किया गया है। मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की इस दुकान पर कारीगर साहब ने राष्ट्रीय ध्वज से कड़ाही उतारी। दुकान के पास से गुजर रहे एक हिन्दू युवक ने जब ऐसा करने से रोका तो उसे गालियाँ दी गईं।

पुलिस ने सरफुद्दीन और साहब को हिरासत में ले लिया है। दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच की जा रही है। यह घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र इज्जतनगर की है। यहाँ 4 जून को आदित्य मौर्य नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आदित्य ने बताया कि 4 जून को वो अपने एक साथी वकील के साथ बरेली के कर्मचारी नगर से गुजर रहे थे।

इसी दौरान आदित्य ने देखा कि मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की एक नॉनवेज की दुकान पर एक व्यक्ति पके मांस से भरी कड़ाही उठा रहा था। आदित्य ने आरोपित को ऐसा करने से रोका तो वह गालियाँ देने लगा। वह समझाने पर भी मानने को तैयार नहीं हुआ। आदित्य ने बताया कि कारीगर की हरकत से राष्ट्र ध्वज काफी गंदा हो चुका था। उन्होंने दुकान के कारीगर से तिरंगे को माँगा, लेकिन नहीं दी।

इस दौरान उन्होंने आदित्य को गालियाँ देना जारी रखा। आख़िरकार आदित्य ने 112 नंबर डायल करके पुलिस बुलाई। पुलिस ने राष्ट्र ध्वज को कब्ज़े में ले लिया। आरोपितों की वीडियोग्राफ़ी भी की गई। दुकान मालिक का नाम मोहम्मद सरफुद्दीन और कारीगर का नाम साहब है। दोनों को हिरासत में लेकर चालान कर दिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। दोनों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 504 के साथ राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत कार्रवाई की गई है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पुलिस से दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ सरफुद्दीन के होटल की वैधानिकता की भी जाँच करने की माँग उठाई है।

तीसरी बार सत्ता में लौटे PM मोदी लेकिन AAP विधायक सोमनाथ भारती ने सिर मुँडवाने से किया इनकार, खुद को बता रहे सनातनी: कहा – बहुमत मिलता तो ये होती लोकतंत्र की हत्या

लोकसभा चुनाव 2024 में NDA 292 सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है और भाजपा ने अकेले दम पर 240 सीटें प्राप्त की हैं। मालवीय नगर से लगातार तीसरी बार विधायक सोमनाथ भारती ने चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सरकार में आते हैं तो वो अपना बाल मुँडवा लेंगे और चेहरा काला कर लेंगे। हालाँकि, अब जब तस्वीर साफ़ हो गई है और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं, तब वो अपने इस बयान से पलट गए हैं।

अब AAP विधायक सोमनाथ भारती ने कहा है कि नरेंद्र मोदी से उन्हें कोई तकलीफ नहीं है, तकलीफ इससे है कि उन्होंने जिस तरह से अपने शासन के दौरान हुनर दिखाए हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि जनता जिसको मरजीबनाए, जनता मालिक है और लोकतंत्र में जनता ही सब कुछ है, लेकिन ‘400 पार’ का नारा देकर जनता ने उन्हें 240 सीटें दी हैं। सोमनाथ भारती ने दावा किया कि जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का जनमत नहीं दिया है।

सोमनाथ भारती ने कहा, “160 सीटें नरेंद्र मोदी को नहीं मिल पाईं, इसीलिए नैतिकता के आधार पर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर चला जाना चाहिए। क्योंकि, ये दायित्व जनता उनको तीसरी बार नहीं देना चाहती। जहाँ तक सिर मुँडाने की बात है, मैं एक सनातनी हूँ और एक सनातनी के घर में जब किसी की मृत्यु होती है तो वो संस्कार करवाने के बाद अपना सिर मुँडवाता है। नरेंद्र मोदी को अगर मैंडेट मिलता, तो भाजपा को 272 से ज़्यादा आता।”

सोमनाथ भारती ने दावा किया कि भाजपा को बहुमत से नीचे सीटें मिली हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि अगर पीएम मोदी को मैंडेट मिलता तो वो मानते कि लोकतंत्र की हत्या हुई है, और जब किसी की मौत हो तो संस्कार करने के बाद सिर मुँडवा कर इसका इजहार किया जाता है और वही उन्होंने कहा था। सोमनाथ भारती पर अपनी पत्नी को कुत्ते से कटवाने का आरोप भी लगा था। उत्तर प्रदेश में उनके चेहरे पर स्याही भी फेंक दी गई थी। वो अक्सर बड़बोलेपन के लिए जाने जाते रहे हैं।

घर वापसी कर रुखसार बनी राधा, कुमेंद्र संग मंदिर में रचाई शादी: बोली- भगवान राम में पहले से ही है मेरी आस्था

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बुधवार (5 जून 2024) को एक मुस्लिम लड़की ने घर वापसी की है। लड़की का नाम रुखसार है, जो अब राधा नाम से जानी जाएँगी। रुखसार ने एक मंदिर में वैदिक विधि-विधान से हिन्दू युवक कुमेंद्र कुमार से विवाह किया है। हिंदू संगठनों ने रुखसार का कन्यादान व अन्य वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न करवाया। रुखसार ने बताया कि भगवान राम में उनकी गहरी आस्था है।

यह मामला बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ पड़ने वाले भीटानाथ महादेव मंदिर में बुधवार (5 जून) को कुमेंद्र कुमार अपनी प्रेमिका रुखसार के साथ पहुँचे। इन दोनों ने विवाह करने की इच्छा जताई। कुमेंद्र की तरफ से उनके माता-पिता और रिश्तेदार मौजूद थे। रुखसार के पक्ष से हिन्दू संगठन के सदस्य मंदिर में आए। शादी से पहले रुखसार ने शुद्धिकरण करवा के हिन्दू धर्म स्वीकार किया।

रुखसार ने शुद्धिकरण के बाद अपना नाम राधा रखा। रुखसार ने बताया कि बचपन से ही उनकी आस्था भगवान राम में रही है। शुद्धिकरण के बाद 20 वर्षीया रुखसार ने वैदिक विधि-विधान से कुमेंद्र कुमार को अपना जीवनसाथी चुना। इस दौरान उन्होंने मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं को बारी-बारी प्रणाम किया और उनके जयकारे लगाए। शादी के बाद जय श्रीराम के सामूहिक नारे लगाए गए।

रुखसार ने इस शादी से खुद को बेहद खुश बताया। बकौल रुखसार, उन्होंने यह कदम बिना किसी जोर-जबरदस्ती के तमाम दबाव से मुक्त होकर उठाया है। इस शादी को करवाने वाले दल में शामिल विहिप कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने ऑपइंडिया से बात की। हिमांशु ने बताया कि 26 वर्षीय कुमरेन्द्र और रुखसार मूल रूप से बरेली जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

उन्होंने बताया कि रुखसार के अब्बा मुन्ने बख्स का इंतकाल हो चुका है। अभिभावक के तौर पर घर में सिर्फ उनकी अम्मी हैं। दरअसल, रुखसार और कुमेंद्र 3 साल से देहरादून में एक साथ एक ही सिलाई फैक्ट्री में काम करते थे। यहीं पर दोनों की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई।

रुखसार ने अपने घर और रिश्तेदारी में कुमेंद्र से शादी की बात चलाई तो इनकार कर दिया गया। उन पर पहरे भी लगा दिए गए। आखिरकार तमाम बंधनों को तोड़ते हुए रुखसार भीटानाथ मंदिर पहुँचकर कुमेंद्र संग शादी के बंधन में बँध गईं। शादी के बाद रुखसार अपने पति के साथ उनके घर चली गईं।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, झारखंड… कई राज्यों में हारे मोदी 2.0 के मंत्री, पराजितों में 4 कैबिनेट तो 14 राज्य मंत्री: स्मृति ईरानी ने भी खोई अमेठी सीट

लोकसभा चुनाव 2024 में मोदी सरकार के 18 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। इस लोकसभा चुनाव में 4 केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री तो वहीं 14 केन्द्रीय राज्य मंत्री भी हारे हैं। हारने वालों में स्मृति ईरानी से लेकर अर्जुन मुंडा जैसे हैवीवेट नाम शामिल हैं।

कौन-कौन हारा?

केंद्र सरकार में महिला और बाल कल्याण विकास मंत्री स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से चुनाव हार गईं। उन्हें यहाँ कॉन्ग्रेस के किशोरी लाल शर्मा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा है। अमेठी में 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को हराया था।

स्मृति ईरानी के अलावा उत्तर प्रदेश में ही केन्द्रीय राज्य मंत्री संजीव सिंह बालियान भी चुनाव हार गए। वह उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर सीट से सपा के हरेन्द्र मलिक के हाथों हारे। वह मोदी सरकार में मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मामलों के मंत्री थे। उत्तर प्रदेश में ही कैबिनेट मंत्री महेन्द्रनाथ पांडेय की हार भी हुई। महेन्द्रनाथ पाण्डेय चंदौली से सपा के बीरेंद्र सिंह से हार गए। महेंद्र नाथ पाण्डेय मोदी सरकार में भारी उद्योगों के मंत्री थे।

उत्तर प्रदेश की खीरी लोकसभा सीट से देश के गृह राज्य मंत्री रहे अजय मिश्र टेनी की भी हार हो गई, उन्हें सपा के उत्कर्ष वर्मा ने हरा दिया। उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से साध्वी निरंजन ज्योति भी हार गईं। उन्हें सपा के नरेश चन्द्र ने हरा दिया। वह मोदी सरकार में खाद्य वितरण, ग्रामीण विकास और उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री थी।

उत्तर प्रदेश की मोहनलालगंज सीट से केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री रहे कौशल किशोर भी हार गए। उन्हें सपा के आरके चौधरी ने पटखनी दी। उत्तर प्रदेश के ही जालौन से MSME मामलों के केन्द्रीय मंत्री भानु प्रताप सिंह भी हार गए। उन्हें सपा प्रत्याशी नारायण दास अहिरवार ने हरा दिया।

महाराष्ट्र में भी भाजपा के दो केन्द्रीय मंत्रियों की हार हुई। महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से रावदानवे साहब को कॉन्ग्रेस को वैजनाथ राव ने हरा दिया। वह मोदी सरकार में कोयला और खनन मामलों के राज्यमंत्री थे। इसके अलावा भिवंडी लोकसभा सीट से केन्द्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटील की हार हो गई, उन्हें एनसीपी शरद पवार के गोपीनाथ म्हात्रे ने हराया। महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य कर्नाटक की बीदर सीट से भगवंत खुबा भी हारे। उन्हें कॉन्ग्रेस के ईश्वर खंद्रे ने हराया। वह उर्वरक और रसायन मामलों के राज्य मंत्री थे।

पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के मंत्रियों की हार हो गई। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक भी हार गए। उन्हें TMC के जगदीश चन्द्र बर्मा ने हराया। पश्चिम बंगाल की ही बांकुरा सीट से शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार भी हार गए। उन्हें TMC के अरुण चक्रवर्ती से हार मिली। राजस्थान के बाड़मेर से केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी हार गए, उन्हें कॉन्ग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल ने हरा दिया। बिहार की आरा सीट से केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री आरके सिंह हार गए। उन्हें CPIM के सुदामा प्रसाद ने हरा दिया।

केरल में भी भाजपा के दो मंत्री हारे। केरल के अत्तिंगल में केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन हारे, उन्हें कॉन्ग्रेस के अदूर प्रकाश ने हराया। केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से आईटी मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के हाथों हार मिली।

झारखंड में खूंटी लोकसभा सीट से केन्द्रीय कैबिनेट कृषि कल्याण और ST कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा भी चुनाव हार गए, उन्हें कॉन्ग्रेस के कालीचरण मुंडा ने हरा दिया। तमिलनाडु की नीलगिरी सीट से केन्द्रीय राज्य सूचना प्रसारण मामलों के मंत्री एल मुरुगन भी चुनाव हार गए, उन्हें DMK के ए राजा ने हराया।

पिता को बना दिया ‘किंग मेकर’, आंध्र में ला दी NDA की आँधी: जिस सीट पर TDP का नामलेवा नहीं वहाँ से रिकॉर्ड तोड़ जीत, कौन हैं नारा लोकेश

साल 2024 में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों में ही तेलुगु देशम पार्टी का प्रदर्शन सराहनीय दिखा। इस बीच टीडीपी के महासचिव नारा लोकेश की लगातार चर्चा रही। उन्हें लेकर कहा गया कि उनकी वजह से ही आंध्र प्रदेश में टीडीपी को बढ़त मिली।

उन्होंने खुद विधानसभा चुनाव में मंगलगिरी निर्वाचन क्षेत्र से वाईएसआरसीपी के मुरुगुडु लावण्या के खिलाफ 91,413 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। ​​लोकेश को 1,67,710 वोट मिले, जबकि लावण्या को 76,297 वोट मिले। लोकेश की जीत के साथ, टीडीपी ने लगभग चालीस वर्षों में पहली बार मंगलगिरी में जीत हासिल की है।

41 वर्षीय लोकेश, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के बेटे हैं और स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने एबीए की पढ़ाई की है। इन चुनावों में उनकी भूमिका अहम थी। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में जब टीडीपी को मात्र 23 सीट पाकर सिमटना पड़ा था उस समय कहा गया था कि ये तेलुगु देसम पार्टी का अंत है। हालाँकि, टीडीपी ने अपनी लड़ाई लड़ी और इन चुनावों में अपनी जगह बनाई।

पाँच साल बाद टीडीपी को 135 सीटें मिली हैं। उनकी सहयोगी पार्टी पवन कल्याण जन सेना पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। भाजपा ने 8 सीटें जीती हैं तो कुल गठबंधन की सीट 164 हो गई है। ये प्रचंड बहुमत टीडीपी की सरकार को 175 विधानसभा सीटों पर मिला है।

इस जीत का प्रमुख कारण नारा लोकेश को इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि नारा लोकेश युवाओं के बीच बहुत फेमस थे। सोशल मीडिया पर उनकी तमाम रील्स और शॉर्ट्स चल रहे थे। उन्हें आंध्र प्रदेश और टीडीपी का भविष्य कहा जा रहा था।

इस पूरी जीत में नारा लोकेश द्वारा की गई 400 दिनों की पदयात्रा को भी अहम बताया जा रहा है। उन्होंने चुनावी प्रचार में खुद को हर वक्त आगे रखा। वह एक महीने तक रोजाना 28 हजार कदम चलते थे। लोगों से मिलते थे, उनकी बात समझते थे।

जनवरी 2023 में शुरू हुई उनकी पदयात्रा में 4000 किलोमीटर दूरी को कवर किया गया था। इसका मकसद था कि लोग उनकी पार्टी से जमीनी स्तर पर जुड़ें। पार्टी की नीतियों और लक्ष्यों को जानें।

उनकी राजनीति को हवा तब मिली जब उनके पिता को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्होंने पदयात्रा रोककर पार्टी का कार्यभार थामा। अपनी शिक्षा और अनुभव से पार्टी को मजबूत किया। उन्होंने यात्रा से भी पहले पार्टी को डिजिटली मजबूत करना शुरू कर दिया था। उन्होंने पार्टी में लोगों को शामिल और पार्टी सदस्यों के मैनेज करने के लिए व्हॉट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का बराबर इस्तेमाल किया। नतीजा ये हुआ कि पदयात्रा से पहले उनके साथ 5 लाख लोग जुड़े।

अब उनके राजनैतिक करियर की बात करें तो एमएलसी चुने जाने पर ही लोकेश को 2017-2019 के बीच नायडू कैबिनेट में आईटी, पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री का पद मिल गया था। लोगों ने ये देख उनका काफी विरोध भी किया था क्योंकि उन्हें लोगों द्वारा निर्वाचित नहीं किया गया था। हालाँकि बाद में वो माहौल शांत हुआ। बताया जाता है कि नारा लोकेश ने एनटीआर मेमोरियल ट्रस्ट में प्रमुख भूमिका निभाई थी जो ये स्वास्थ्य सेवा, कौशल और आपदा प्रबंधन पर काम करता है। इसके अलावा आँध्र प्रदेश में नारा लोकेश भाजपा और टीडीपी के गठबंधन के कोर समर्थक रहे हैं।

देश के मन में आज है जो सवाल, PM मोदी ने 5 साल पहले ही दे दिया था उसका जवाब: कहा था – गठबंधन राष्ट्रीय एकता का माध्यम, क्षेत्रीय मसलों के समाधान का रास्ता

नरेंद्र मोदी गुजरात में बतौर मुख्यमंत्री 4 और केंद्र में प्रधानमंत्री के रूप में 2 बार सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं, ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद वो 7वीं सरकार का नेतृत्व सँभालने जा रहे हैं। हालाँकि, ये पहली बार होगा जब वो किसी ऐसी गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे, जहाँ भाजपा बहुमत से पीछे हो। चंद्रबाबू नायडू की TDP, नीतीश कुमार की JDU, चिराग पासवान की RLJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (शिंदे) को उन्हें साथ लेकर चलना है।

लोग चर्चा कर रहे हैं कि इस नई चुनौती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह से लेंगे, UCC और NRC जैसे कोर एजेंडों का क्या होगा और क्या संसद ठीक से चल पाएगी? इन सबका जवाब पीएम मोदी के एक पुराने बयान में भी छिपा है, जो बताता है कि इस तरह की चुनौती के लिए वो पहले से ही तैयार हैं। इसके लिए हमें 5 साल पीछे चलना होगा, तब 2024 नहीं बल्कि 2019 लोकसभा चुनाव चल रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार की तरह ही ज़ोर-शोर से प्रचार-प्रसार में जुटे थे।

13 मई, 2019 को News24 के मानक गुप्ता ने पीएम मोदी से ये इंटरव्यू लिया था, तब 6 चरण के चुनाव हो चुके थे और सिर्फ अंतिम चरण बाकी था। वहीं गठबंधन के परिदृश्य में पूछे गए सवाल पर पीएम मोदी ने कहा था कि उन्हें गठबंधन सरकार चलाने का पुराना अनुभव है। उन्होंने याद किया कि कैसे जब वो संगठन में थे तब हरियाणा में बंसीलाल और ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में उन्होंने काम किया। इसी तरह जम्मू कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला और मुफ़्ती मोहम्मद सईद के साथ भी उन्होंने काम किया।

नरेंद्र मोदी ने गिनाया था कि कैसे उन्हें गुजरात में चिमनभाई पटेल के साथ काम करने का अनुभव है। PM मोदी का तब कहना था कि केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के बावजूद उन्होंने अहंकार को नहीं पाला, उनका ये मत है कि हिंदुस्तान की राजनीति ध्रुवीकरण वाली राजनीति है और एक खेमे का भाजपा नेतृत्व करती है तो दूसरे का कॉन्ग्रेस, कितना भी बहुमत क्यों न आए हमें सभी साथियों को साथ लेकर ही चलना चाहिए क्योंकि इससे न सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान किया जा सकता है बल्कि देश की एकता भी बनाई रखी जा सकती है।

PM नरेंद्र मोदी ने तब कहा था, “हमारे लिए गठबंधन एक चुनावी चहल-पहल नहीं है, ये हमारे लिए क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को जोड़ कर रखने के देश की एकता बनाए रखने के हमारे महान प्रयासों का एक पहलू है।” इस बार NDA में जयंत चौधरी की RLD, HD देवगौड़ा की JDS और पवन कल्याण की JsP भी है, जिसकी दो-दो सीटें हैं। इसी तरह ‘अपना दल (सोनेलाल)’ से अनुप्रिया पटेल और HAM (सेक्युलर) से जीतन राम माँझी ने जीत दर्ज की है। इस तरह NDA ने 292 सीटों पर जीत दर्ज की है।

अभी जेल में ही कटेंगे अरविंद केजरीवाल के दिन, दिल्ली की कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ाई: खराब सेहत का हवाला दे माँगी थी राहत

दिल्ली शराब घोटाला केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार (05 जून 2024) को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। केजरीवाल ने सेहत का हवाला देते हुए सात दिनों की अंतरिम जमानत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया, लेकिन जेल प्रशासन को ये निर्देश दिया है कि वो अरविंद केजरीवाल की सेहत की पूरी जाँच कराए और रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत भी 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। अब केजरीवाल को 19 जून तक जेल में ही रहना होगा। अपने आदेश में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जरूरी मेडिकल टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में केजरीवाल की चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखने का निर्देश दिया है।

बता दें कि केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 मई को दी गई अंतरिम जमानत पर एक जून तक के लिए जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद उन्होंने अंतरिम जमानत को सात दिन के लिए बढ़ाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को उनकी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था।

इस याचिका में केजरीवाल ने गुहार लगाई थी कि उन्हें मेडिकल जाँच कराने के लिए समय चाहिए क्योंकि उनका वजन कम हो रहा है और कीटोन का स्तर बढ़ा है। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की माँग करते हुए विशेष सीबीआई-ईडी अदालत का रुख किया। 1 जून को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने अपना आदेश पाँच जून के लिए सुरक्षित रख लिया था। अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने कहा था कि केजरीवाल अदालत को गुमराह कर रहे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि लगातार चुनाव प्रचार कर रहे केजरीवाल का स्वास्थय तब खराब हुआ जब सरेंडर करने का समय आया।

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 1 जून तक की अंतरिम बेल दी थी, ताकि वो लोकसभा चुनाव में प्रचार कर सकें। इसके बाद उन्होंने तिहाड़ जेल पहुँचकर सरेंडर कर दिया था। अरविंद केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका अभी पेंडिंग है। आगामी 7 जून 2024 को उस जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।

महाराष्ट्र में खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी देवेन्द्र फडणवीस ने ली, डिप्टी CM पद से इस्तीफे की पेशकश: कहा- पार्टी के लिए काम करूँगा

लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए खुद को पद से मुक्त किए जाने की माँग की है। उन्होंने माँग की है कि उन्हें सरकार से मुक्त किया जाए ताकि वह पार्टी के लिए काम सकें।

देवेन्द्र फडणवीस ने बुधवार (5 जून, 2024) को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “महाराष्ट्र में भाजपा के नेता के रूप में पूरी जिम्मेदारी मेरी थी, मैं इस परिणाम की जिम्मेदारी लेता हूँ। मैं भाजपा आला कमान से आग्रह करता हूँ कि मुझे उपमुख्यमंत्री पद से मुक्त करें ताकि मैं पार्टी की मजबूती के लिए राज्य में काम कर सकूँ।”

फडणवीस ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हार का बड़ा कारण विपक्ष के झूठे नैरेटिव को बताया। उन्होंने कहा कि संविधान बदलने का नैरेटिव विपक्ष ने चलाया जिसे हमें काउन्टर किया लेकिन कहीं कमी रही जिसके कारण हार मिली। इसके अलावा कपास और सोयाबीन की कीमतों को लेकर लाई गई योजना के देर से लागू होने को भी उन्होंने हार का कारण बताया।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में NDA गठबंधन को 48 में से 17 सीट हासिल हुई हैं। इसमें भाजपा को 9, शिवसेना को 7 जबकि NCP को 1 सीट हासिल हुई है। भाजपा को राज्य में 14 सीटों का नुकसान इन चुनावों में उठाना पड़ा है। भाजपा ने राज्य में 28 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इसमें से 19 सीटें वह हार गई जबकि शिवसेना ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से वह 7 सीटें ही जीत सकी। इसके अलावा NCP ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उसे मात्र 1 ही सीट पर जीत मिल सकी है।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस को राज्य में 13 सीटें मिली हैं और उद्धव बाल ठाकरे शिवसेना को 9 सीटें मिली हैं। शरद पवार की NCP को राज्य में 8 सीट मिली हैं। महाराष्ट्र में 2024 के अंत तक ही विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं, ऐसे में राज्य इन नतीजों को लेकर सभो पार्टियां गंभीर हैं और अब अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी हैं।

जिस दलित के घर में कादिर का था आना-जाना, उसकी ही बेटी को चाकुओं से गोदा: हत्या के बाद हुआ फरार, UP के प्रतापगढ़ का मामला

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में मंगलवार (4 जून 2024) को कादिर मुसलमान नाम के एक व्यक्ति ने दलित युवती की हत्या कर दी। आरोपित का मृतका के घर पहले से आना-जाना था। पीड़िता को कादिर काफी दिन से परेशान कर रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स में हत्या की वजह प्रेम त्रिकोण बताया जा रहा है। पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना प्रतापगढ़ जिले के थाना क्षेत्र कोतवाली सिटी की है। यहाँ 4 जून (मंगलवार) को पीड़िता के पिता ने थाने में तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया कि वो अपने परिवार सहित शहर के कांशीराम कॉलोनी में रहते हैं। उनकी 2 बेटियाँ हैं। 25 वर्षीया बड़ी बेटी का नाम ज्योति है, जिसकी शादी उन्होंने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में की थी।

पिता नंदीराम का कहना है कि कादिर मुसलमान नाम का एक युवक 1-2 वर्षों से घर आया-जाया करता था। कादिर मुसलमान होटलों में रोटियाँ बनाता था। उन्होंने आगे कहा कि मंगलवार (4 जून) को वे अपने घर पर नहीं थे। शाम 3:30 बजे कादिर उनके घर आया। घर में ज्योति अपनी छोटी बहन पुष्पा के साथ मौजूद थी।

इस दौरान कादिर घर में घुस गया और पीड़िता को गालियाँ देने लगा और जातिसूचक शब्द बोलने लगा। कुछ देर बाद कादिर ने चाकू निकाल लिया और ज्योति पर ताबड़तोड़ वार करने लगा। ज्योति की बहन पुष्पा यह सब देख कर डर गई। उसने अपने पिता को कॉल करके बुलाया। शिकायतकर्ता जब घर पहुँचा तब तक बेटी की मौत हो चुकी थी।

खून से लथपथ ज्योति का शव जमीन में पड़ा हुआ था। इसके बाद नंदीराम ने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हत्या के बाद कादिर मुसलमान फरार हो गया। मूल रूप से मेरठ के रहने वाले कादिर की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। इसके लिए पुलिस ने कई टीमों का गठन किया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, कादिर पर IPC की धारा 302 के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ज्योति की हत्या के पीछे प्रेम त्रिकोण की बात है। इसके साथ ही यह भी दावा किया गया है कि ज्योति का उसके पति से 4 साल पहले अलगाव हो चुका था।

कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ लेकर माँग रहीं ₹1 लाख: कहा – अपने लोगों को मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे, हमें नहीं दे रहे

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित हो गए हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी भले ही तिहाई अंक तक नहीं पहुँच पाई लेकिन उसने ऐसा माहौल बना रखा है जैसे उसने भाजपा को हरा दिया है। इस चुनाव में राहुल गाँधी ने संपत्ति के बँटवारे समेत कई बड़े-बड़े वादे किए। अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं की लंबी कतार लग गई है। ये सभी 1 लाख रुपए की माँग कर रही हैं, साथ ही कह रही हैं कि उन्हें वित्तीय लाभ दिया जाए।

मुस्लिम महिलाएँ अपना-अपना पहचान-पत्र समेत अन्य दस्तावेज लेकर कॉन्ग्रेस के दफ्तर पहुँची हैं। इन महिलाओं ने अपने हाथों में कॉन्ग्रेस का ‘गारंटी कार्ड’ भी थाम रखा है, जिसमें एक लाख रुपए के वेतन के अलावा हर शिक्षित युवा को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया है। ‘इस गारंटी कार्ड’ में कर्जमाफी का भी वादा है। मुस्लिम महिलाओं ने इन कार्ड्स को भर भी रखा है। उन्होंने बताया कि यहीं से उन्हें ये कार्ड्स मिले थे। हालाँकि, कइयों का जमा नहीं किया जा रहा और कहा जा रहा है कि लंबी प्रक्रिया है इसकी।

‘India Today’ की रिपोर्ट में आप देख सकते हैं कि तस्लीम नाम की एक महिला ने बताया कि अभी उन्हें कॉन्ग्रेस दफ्तर की तरफ से कुछ नहीं बताया गया है। कई फॉर्म्स जमा कर लिए गए हैं। जमा करने के बाद उन्हें स्लिप भी दी गई है। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें कार्ड नहीं मिले, कइयों को दोपहर बाद आने के लिए कहा गया। लाइन में लग कर मुस्लिम महिलाएँ इंतज़ार करती रहीं, 12 बजे के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर खिड़की के पास इंतज़ार करती रहीं।

एक मुस्लिम महिला ने कहा कि ये अपने एरिया में मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे हैं और उन्हें कुछ नहीं दे रहे। एक महिला ने कहा कि वो छोटे बच्चे को घर में छोड़ कर आई हैं, वहीं एक मुस्लिम युवती ने कहा कि अगर पैसे नहीं मिलेंगे तो इनलोगों को स्पष्ट बोल देना चाहिए। महिलाएँ बार-बार दूसरों को गड्डी दिए जाने की बात कहती रहीं। कॉन्ग्रेस की प्रोपेगंडा मशीनरी ने इस चुनाव में किस तरह काम किया, ये इसका एक उदाहरण है। इसी तरह ‘मोदी सरकार आरक्षण खत्म कर देगी’ जैसे झूठ फैलाए गए।