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‘बार-बार न हो धार्मिक कंटेंट से छेड़छाड़’ : रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के विरोध में उतरीं ‘सीता’, बोलीं दीपिका चिखलिया- नई स्टोरी, नया लुक देने में होता है सब खराब

रामानंद सागर की रामायण में माता सीता का रोल निभा चुकीं अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने रणबीर कपूर स्टारर रामायण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रामायण बार-बार रामायण नहीं बननी चाहिए। दीपिका का मानना है कि नई स्टोरी और नया लुक देने की वजह से कई बार सब खराब हो जाता है। उदहारण के तौर पर दीपिका ने आदिपुरुष का नाम लिया। ऐसी हरकतों को दीपिका रामायण के साथ छेड़छाड़ मानती हैं।

दीपिका चिखलिया ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान रणबीर कपूर के अभिनय में बन रही रामायण पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि बार-बार कुछ नया कोशिश करने में रामायण के मूल रूप से छेड़छाड़ हो रही है। उदाहरण के लिए दीपिका ने आदिपुरुष में सैफ अली खान द्वारा निभाए गए रावण के रोल और कृति सेनन को पहनाई गई गुलाबी साड़ी का जिक्र किया। सैफ अली के अभिनय को दीपिका रावण के प्रभाव को कम करने वाला मानती हैं।

जिस रामायण में रणबीर कपूर अभिनय करेंगे उसके डायरेक्टर नितेश तिवारी हैं। इस फिल्म के बारे में दीपिका ने अपनी राय रखते हुए कहा कि लोगों को धार्मिक कंटेंट से ज्यादा छेडख़ानी नहीं करनी चाहिए। दीपिका का मानना है कि अगर फिल्म बनानी ही है तो निर्माताओं के पास कई और भी विकल्प हैं। उन्होंने विकल्प के तौर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की फ़िल्में बनाने की सलाह दी। दीपिका ने यह भी सवाल किया कि रामायण पर ही बार-बार फ़िल्में क्यों बन रहीं हैं।

गौरतलब है कि नितेश तिवारी की प्रस्तावित फिल्म रामायण में रणबीर कपूर को भगवान राम का रोल दिया गया है। सीता माता के किरदार के लिए सई पल्ल्वी को चुना गया है। रामानंद सागर के रामायण में भगवान राम का अभिनय कर चुके भाजपा सांसद अरुण गोविल भी इस फिल्म में दिखाई देंगे। बॉलीवुड अदाकारा लारा दत्ता भी इस फिल्म में रोल करेंगी। खबर यह भी है कि नितेश की रामायण में सनी देओल बजरंग बली और यश रावण का पात्र निभाएँगे। हालाँकि इन खबरों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जनगणना, जातिवाद, 1977, 295 और मूसेवाला… ‘पप्पू पास हो गया’ – इस पर हँसने की जगह अब स्वीकार कीजिए, आगे ये लोग जो करने वाले हैं उससे सतर्क रहिए

जब 2024 लोकसभा चुनावों में मतदान के सातों चरणों का समापन हुआ, उसके बाद विपक्ष का I.N.D.I. गठबंधन अपना एक अलग एग्जिट पोल लेकर आया। उन्होंने इसे ‘जनता का पोल’ नाम दिया। उन्होंने दावा ठोका कि उनका गठबंधन 295 सीटें जीतने वाला है। ध्यान दीजिए, उन्होंने 290 या 300 का आँकड़ा नहीं दिया, उन्होंने ये नहीं कहाँ कि उनका गठबंधन फलाँ नंबर से लेकर फलाँ नंबर के बीच के आँकड़े को पार करेगी, बल्कि उन्होंने सीधा अपना एक नंबर दिया – 295.

आखिर इसके पीछे क्या सोच थी, क्या तर्क था, अगर ऐसा कुछ था भी तो, इस पर चर्चा स्वाभाविक थी। जब पत्रकारों ने इस विषय में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने संक्षिप्त में सिद्धू मूसेवाला का नाम लिया। सिद्धू मूसेवाला, पंजाब के गायक जिन्होंने कॉन्ग्रेस की तरफ से विधानसभा चुनाव लड़ा था और जिनकी मई 2022 में गैंगवॉर में हत्या कर दी गई थी। अपने गानों के भड़काऊ बोल के कारण कुख्यात सिद्धू मूसेवाला का एक गाना आया था, जिसका नाम था – 295. गाना खूब चला था।

सिद्धू मूसेवाला को अपने गानों के माध्यम से बन्दूकबाजी की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। तो क्या राहुल गाँधी द्वारा दिए गए नंबर का संबंध इसी गाने से था? I.N.D.I. गठबंधन वालों ने किसी पोलिंग एजेंसी को सर्वे वगैरह के लिए लगाया तो था नहीं, तो स्पष्ट है कि उन्होंने 295 वाले आँकड़े की भविष्यवाणी की तो इसके पीछे कुछ न कुछ प्रतीकवाद रहा होगा। हालाँकि, पंजाबी गायक-रैपर सिद्धू मूसेवाला के गाने ‘295’ से इसका कोई कनेक्शन सांयोगिक ही लगा।

हालाँकि, मुझे लगता है कि 295 वाला आँकड़ा दिए जाने के पीछे एक और इतिहास जुड़ा हुआ है। 1977 में जब इंदिरा गाँधी के खिलाफ विपक्षी दलों ने एक होकर ‘जनता पार्टी’ का गठन किया था और भारत की उस समय की सबसे शक्तिशाली नेता को मात दी थी। उस समय ‘जनता पार्टी’ को मिली कुल सीटों की संख्या थी – 295. संख्या 295 और इसके साथ ‘जनता का पोल’ वाला टैगलाइन जोड़ा जाना – ये संयोग तो बिलकुल नहीं लगता।

भले ही ‘295’ के पीछे कोई सोचा-समझा प्रतीकवाद न हो, लेकिन कम से कम ये ऐसा आभास तो देता ही है कि इन विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और शक्ति को उसी रूप में आँका, जिस तरह इंदिरा गाँधी की उनके चरम के दिनों में हुआ करती थीं। साथ ही I.N.D.I. गठबंधन वालों ने खुद को एक ‘तानाशाह’ के खिलाफ एकजुट हुए जनआंदोलनकारियों के रूप में देखा। बड़ी बात ये है कि इस समूह का नेतृत्व इंदिरा गाँधी के पोते राहुल गाँधी कर रहे हैं, लेकिन फिर वही बात है कि राहुल गाँधी ऐसी विडम्बनाओं की चलती-फिरती दुकान हैं।

एक तरह से देखा जाए तो 2024 में नरेंद्र मोदी उसी चुनौती से जूझ रहे थे जिससे 10 वर्ष पूर्व मनमोहन सिंह जूझ रहे थे – एक दशक तक सरकार चलाने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए जनमत की माँग। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत है नहीं, क्योंकि तब मनमोहन सिंह की हार के जो भी कारक थे वो सब यहाँ लागू नहीं हो रहे थे। मैं पूरी तरह गलत भी नहीं था क्योंकि चुनाव परिणाम में भाजपा भले ही पूर्ण बहुमत से चूक गई लेकिन NDA को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

UPA-III भले ही वास्तविकता में तब्दील नहीं हो पाया, ‘मोदी 3.0’ हमारे सामने है। चुनावों के दौरान ये तो स्पष्ट हो गया कि विपक्ष और उसका पूरा का पूरा समर्थक तंत्र नरेंद्र मोदी को उस तरह से हराने में नहीं लगा था जिस तरह से मनमोहन सिंह को हराया गया था, भले ही उन्होंने चुनावी बॉन्ड और अडानी जैसे मुद्दे गढ़े। 2019 में इसी तरह से राफेल घोटाले का शिगूफा छेड़ा गया था। लेकिन, इतना तो दिख ही गया कि ये नरेंद्र मोदी को उसी तरह हराने में लगे थे जैसे इंदिरा गाँधी को हराया गया था।

आप देखिए तो सही कि 1977 में इंदिरा गाँधी को कैसे हराया गया था – विरोध प्रदर्शन कर-कर के अशांति और अराजकता पैदा की गई, खासकर छात्रों का आंदोलन और बेरोजगारी से जुड़े प्रदर्शन, महँगाई का अब तक का उच्चतम स्तर, चुनाव में धाँधली के आरोप जिस कारण बाद में इंदिरा गाँधी को बतौर सांसद अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद देश पर आपातकाल थोपा गया। ये हाल ही में नरेंद्र मोदी पर विपक्षियों और उनके तंत्र द्वारा लगाए गए आरोपों से मेल खाते हैं।

ये 1977 की याद दिलाने को इतने बेताब थे कि इन्होंने ‘अघोषित आपातकाल’ तक का जम कर रट्टा लगाया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गाँधी की तरह कोई लोकतंत्र विरोधी कदम उठाया तो था नहीं, तो इन्होंने ‘अघोषित’ जोड़ दिया। हालाँकि, उनका 295 वाला सपना पूरा नहीं हुआ और I.N.D.I. गठबंधन 234 सीटों पर ही सिमट गया। लेकिन, वो पूरी तरह नाकाम भी नहीं हुए। विपक्ष और उसके तंत्र को देखिए – अंतरराष्ट्रीय मीडिया, यहाँ उनके पाले हुए यूट्यूबर्स, बुद्धिजीवी वर्ग, AI का इस्तेमाल कर के नैरेटिव बना कर चुनाव को प्रभावित करने वाली विदेशी ताकतें और इच्छाधारी आंदोलनकारियों का गुट।

इस पूरे के पूरे इकोसिस्टम ने पूरी ताकत लगा दी और उन्होंने एक तरह से खून चख लिया है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में उनकी रणनीति काम आ गई है। कारण – यूपी में भाजपा 2014 में 71 और 2019 में 62 सीटों से 2024 में सीधा 33 पर गिर गई। अब वो इन करतूतों को एक अलग स्तर पर ले जाने वाले हैं। यही तो कारण है कि वो उतना जश्न मना नहीं रहे हैं, वो अभी अगले स्तर पर जाने वाले हैं। अब जब उनकी साजिश थोड़ी-बहुत सफल हो गई है, एक राष्ट्र के रूप में अब इसका पूरा भार हमलोगों पर आ जाता है कि हम अपने देश को असफल न होने दें।

चलिए, उत्तर प्रदेश के परिणामों को देख कर तो हम ये कह रहे हैं कि हमें इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था, हम इसे पढ़ने में कामयाब नहीं रहे, लेकिन कम से कम I.N.D.I. गठबंधन वालों की जो मंशा है और आगे ये लोग जो करने वाले हैं उसके बारे में तो हम कम से कम ऐसा नहीं कह सकते। राहुल गाँधी को लेकर अब तक एक चीज तो समझ आ गई है, वो अपनी सनक में बार-बार एक ही चीज दोहराते रहेंगे भले ही 100वीं बार में इसमें सफलता क्यों न मिले।

राहुल गाँधी का समर्थन करने वाला इकोसिस्टम भी इसमें उनका साथ देने में उफ्फ तक नहीं करता है, थकना तो दूर की बात है। इसीलिए तो उन्हें 2004 से लेकर अब तक दर्जनों बार लॉन्च किया जा चुका है। अतः, साफ़ है कि अब वैसी-वैसी चुनौतियाँ ही खड़ी की जाने वाली हैं जैसी इंदिरा गाँधी के सामने कभी आई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अशांति और अराजकता का माहौल बनाया जाएगा, विभिन्न वर्गों को उसके खिलाफ सड़क पर उतारा जाएगा झूठतंत्र का सहारा लेकर।

इसका विश्लेषण ज़रूरी है कि राहुल गाँधी, उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस और इनका समर्थन करने वाला इकोसिस्टम अब आगे क्या साजिश कर रहा है? अराजकता, संघर्ष और शांति का दौर पैदा करना, यही उनकी मंशा है। इसकी शुरुआत विरोध प्रदर्शनों से होगी, हर प्रकार के विरोध प्रदर्शन। इसकी पूरी संभावना है कि सिद्धू मूसेवाला और AK47 का स्टिकर लगा कर किसान आंदोलनकारी फिर से दिल्ली में लौटेंगे। इसीलिए, राहुल गाँधी ने जो 295 का आँकड़ा दिया था वो सिर्फ संयोग प्रतीत नहीं होता।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने में जातिवाद का खूब इस्तेमाल किया गया, इसीलिए इस बार जाति का इस्तेमाल खूब किया जाने वाला है और जातिगत संघर्षों को जन्म दिया जाएगा। अगर आप कथित किसान आंदोलन को भी याद करें तो उसका नेतृत्व जाट किसान नेताओं ने ही किया था। अब कुछ ऐसी पटकथा लिखी जा सकती है कि एक के बाद एक जातीय समूह अपने ‘अधिकारों’ के लिए सड़क पर उतर आएँ। भाजपा को इससे बड़े ही सलीके से निपटना होगा, क्योंकि अब तक पार्टी और समर्थक ऐसी समस्याओं के इर्दगिर्द विरोधाभासी नैरेटिव ही परोसते रहे हैं।

2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद ‘Subaltern Hinduva’ का विचार ज़रूर आया, जिसमें ये कहा गया कि जातिगत पहचान आपके धर्म के आड़े नहीं आता। हालाँकि, ये कॉन्सेप्ट जाति व्यवस्था को लेकर अधिक व्याख्या नहीं करता। इसका समाधान कैसे करना है, ये हमें देखना होगा। 2021 से ही भारत में आम जनगणना नहीं हो पाई है, ऐसे में नई सरकार बनने के बाद इसे जल्द से जल्द पूरा करवाना होगा। इस बीच जाति जनगणना की माँग और जोर-शोर से उठाई जाएगी।

जनगणना की प्रक्रिया जैसे ही शुरू होगी, इसे NRC से जोड़ते हुए ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाला ड्रामा फिर से वापस रचा जाएगा। और हाँ, उत्तर-दक्षिण में विभाजन का अभियान और तेज़ किया जाएगा। विडम्बना देखिए कि आज यही इकोसिस्टम उत्तर प्रदेश के लिए अपने प्यार और सम्मान को प्रकट करने का दिखावा कर रहा है, क्योंकि भाजपा को यहाँ मात मिली है। लेकिन, कुछ ही दिनों बाद ये इकोसिस्टम ‘जनसंख्या में तेज़ी से बढ़ते’, ‘अशिक्षित’ और ‘अस्वच्छ’ ‘भैय्या’ लोगों को अपमानित करना, उन पर तंज कसना, उन्हें बदनाम करना और उन्हें लेकर घृणा फैलाना जारी रखेगा।

ये ट्रेंड और खतरनाक होगा, क्योंकि 2026 या उसके बाद संसदीय सीटों का पुनः परिसीमन ही होना है। सीटों की संख्या बढ़ेंगी, इसे लेकर भी खूब झूठ फैलाया जाएगा। परिसीमन भी जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से ही परिसीमन भी होना है, ऐसे में जनगणना कराना मोदी सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द शामिल होने वाला है। इसकी प्रक्रिया पूरी कराने से अधिक इसे लेकर जो प्रोपेगंडा फैलाया जाएगा जो लोगों को इसे लेकर जिस तरह से डराया जाएगा, उससे मोदी सरकार कैसे निपटेगी ये देखना है।

जनगणना से घुसपैठियों को बाहर रखा जाएगा, विदेशी मीडिया इसे ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ बता कर प्रचारित करेगा। ये सब तो उन समस्याओं की सूची है, जो सीधे दिख रही है या जिसका इशारा मिल रहा है। क्षेत्र, भाषा, जाति, धर्म, वर्ग या किसी भी चीज़ के आधार पर अराजकता या शांति फैलाई जा सकती है, किसी समूह को भड़काया जा सकता है। किसी भी कन्फ्यूजन की स्थिति का फायदा उठाया जा सकता है। अचानक से विदेशी मीडिया में चलने लगेगा कि समूह A समूह B पर अत्याचार कर रहा है, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से इन कृत्रिम संघर्षों पर सवाल पूछे जाएँगे जबरन।

आप देखिए, आखिर सबकी निगाहें भारत पर ही है। भारत के किसी भी हिस्से से ऐसी कहानी पेश कर के उसका अंतरराष्ट्रीय करण किया जा सकता है। इसीलिए, अब वो समय गया जब हम ‘पप्पू पास हो गया’ या ‘पप्पू कांट डांस साला’ पर हँसते थे। पप्पू न सिर्फ पास हो गया है, बल्कि औपनिवेशिक ताकतों के इशारे पर नाच भी रहा है। हम तो यह तय करें कि अनजाने में ही सही लेकिन कहीं हम ऐसी ताकतों के क्रियाकलापों को समर्थन देकर उन्हें पुष्ट तो नहीं कर रहे हैं?

हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि ये सब सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी के खिलाफ किया जा रहा है, हमें इससे क्या! हाँ, सीधे तौर पर तो ये दिख ही रहा है कि ये सब उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए किया जा रहा है। गहराई से देखेंगे तो आपको भी पता चल जाएगा कि अंदरखाने क्या सब पक रहा है। हम ये नहीं कह सकते कि अभी देश में परम आदर्श स्थिति है, लेकिन अगर हमने थोड़ी सी भी ढील बरत दी या गलती कर दी तो हम अराजकता और संघर्ष के चक्र में फँसते चले जाएँगे।

(ये लेख मूल रूप से ऑपइंडिया के CEO राहुल रौशन द्वारा हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, इसे मूल रूप में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

चंद्रबाबू नायडू की TDP को चाहिए लोकसभा अध्यक्ष, नीतीश कुमार माँग रहे ‘रेल’: मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया क्या है शिंदे-चिराग-माँझी के डिमांड्स

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद अब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की तैयारी शुरु हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया है और अब वो तीसरी बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ 8 जून को लेंगे। इस बीच दिल्ली में एनडीए की सहयोगी दलों की बैठक हुई, जिसमें 16 पार्टियों के 21 शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो अब सरकार गठन के बाद मंत्रालय को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों की माँगें सामने आ रही हैं।

टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एनडीए में बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तेलुगू देशम पार्टी ने अपनी माँग बीजेपी के सामने रख दी है। टीडीपी ने लोकसभा स्पीकर के साथ ही 3 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्रियों की जगह माँगी है।

टीडीपी के अलावा चिराग पासवान की लोजपा (राम विलास) ने पाँच लोकसभा सीटें जीती है। ऐसे में चिराग पासवान एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री का पद अपनी पार्टी के सांसदों के लिए चाहते हैं। वहीं, बिहार से एक सीट जीतने वाली हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के सबसे बड़े नेता जीतन राम माँझी भी कैबिनेट पद चाहते हैं।

सूत्रों की मानें तो शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना भी केंद्र सरकार में अहम हिस्सा चाहती है। उसने भी एक कैबिनेट मंत्रालय और एक राज्य मंत्री का पद माँगा है। हालाँकि संख्या के हिसाब से ये माँग कम या ज्यादा भी नहीं लगती। वहीं, नीतीश कुमार द्वारा भी रेल मंत्रालय की माँग सामने आ रही है। हालाँकि एनडीए में शामिल सभी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है, ऐसे में किस पार्टी के हिस्से कौन सा मंत्रालय आता है, इसका पता 2-3 दिनों में लग ही जाएगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदा समय में कार्यवाहक के तौर पर देश की बागडोर संभाल रहे हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया है, जिसके राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। एनडीए की बैठक दिल्ली में होने पर नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता भी चुन लिया गया है। माना जा रहा है कि वो 8 जून को तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

बिहार की लड़की को आरिफ ने दिल्ली में फँसाया, इस्लाम कबूल कराकर बनाया मुस्लिम: भाई ने भी किया बलात्कार, अब्बा ने की मारपीट

उत्तर प्रदेश के बरेली में ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ बिहार की एक हिन्दू लड़की ने मोहम्मद आरिफ पर खुद को प्रेमजाल में फँसाने और बाद में जबरन इस्लाम कबूल करवाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के साथ आरिफ के भाई मोहम्मद तालिब ने भी बलात्कार किया। विरोध करने पर महिला की बेरहमी से पिटाई की गई और जान से मारने धमकी दी गई है।

यह घटना मंगलवार (4 जून 2024) की बताई जा रही है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। यह घटना बरेली के थाना क्षेत्र बहेड़ी की है। कस्बा सुन्नीनगर की रहने वाली पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के नवादा जिले की रहने वाली है।

महिला दिल्ली में रहकर नौकरी करती थी। यहीं पर उसे उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला मोहम्मद आरिफ मिला। कुछ समय के बाद आरिफ ने लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। यहाँ से वो महिला को अपने घर बरेली के बहेड़ी ले आया। इस दौरान उसने महिला के साथ कई बार बलात्कार किया। लगभग एक साल पहले आरिफ ने दबाब डालकर पीड़िता को इस्लाम भी कबूल करवा दिया।

इस्लाम कबूल करवाने के बाद आरिफ ने पीड़िता का नाम सना रखा और फिर निकाह कर लिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 4 जून (मंगलवार) को पीड़िता घर पर अकेली थी। रात में लगभग 2 बजे पीड़िता के कमरे में आरिफ का भाई मोहम्मद तालिब घुस गया। उसने पीड़िता से अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। महिला ने विरोध किया, इसके बावजूद तालिब ने उसके साथ रेप किया।

पीड़िता ने जब इसकी शिकायत करने की चेतावनी दी तो तालिब बोला, “साली तू वैसे भी बिहार की रहने वाली है। अगर तूने इस बात को किसी से भी बताया तो तेरी हत्या कर दूँगा।” पीड़िता ने जैसे-तैसे रात बिताई और अगले दिन 5 जून (बुधवार) को आरिफ के घर आने के बाद उसे उसके भाई तालिब की करतूत बताई। आरिफ ने अपने भाई का ही पक्ष लिया और पीड़िता को ही गलत बता दिया।

इसके बाद आरिफ ने अपने भाई तालिब और अब्बा साबिर इस्लाम के साथ मिलकर पीड़िता को बुरी तरह से पीटा। इन सभी ने महिला को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और कहा, “साली अगर तूने इस बात की शिकायत किसी से की तो हम सब मिलकर तुझे जलाकर तेरी हत्या कर देंगे। तेरी लाश का भी पता भी नहीं चलेगा। वैसे भी बहेडी थाना क्षेत्र में बाहर की लड़कियों की लाशें बहुत मिलती हैं।”

महिला ने आरोपितों को काफी दबंग और आपराधिक किस्म का बताते हुए अपनी हत्या की भी आशंका जताई है। पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बरेली के हिन्दू संगठन के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने स्थानीय प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के साथ पीड़िता की जान-माल की रक्षा की अपील की है।

लोकसभा में साफ, विधानसभा में हाफ: ओडिशा ने नवीन पटनायक की कैश से लेकर FREE बिजली तक को नकारा, पहली बार राज्य में BJP बनाएगी सरकार

लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही ओडिशा विधानसभा चुनाव के भी नतीजे आए। ओडिशा में जनमत ढाई दशकों के बाद पूरी तरह से बदला नजर आया। जनकल्याण की नीतियों को छोड़कर सिर्फ चेहरा चमकाने की राजनीति कर रहे नवीन बाबू को जब लगा कि चुनाव में बीजेडी कमजोर पड़ रही है, तो उन्होंने मुफ्त की रेवड़ियों की झड़ी लगा दी। नवीन पटनायक की बीजेडी ने ओडिशा में 100 यूनिट फ्री बिजली, सभी छात्रों के छात्रवृत्ति, स्वयंसेवी समूहों को आर्थिक मदद और अन्य वादे किए, लेकिन जब नतीजे 4 जून को आए, तो ओडिशा में बीजू जनता दल को बुरी तरह से पराजय का मुँह देखना पड़ा। खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक डैमेज कंट्रोल के लिए 2 सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन एक सीट पर उन्हें भी पराजय का मुँह देखना पड़ा।

ओडिशा में आम जनता ने बीजेडी की मुफ्त रेवड़ियों की जगह बीजेपी के विकास, रोजगार सृजन और समस्याओं के लॉन्ग टर्म समाधान को चुना है। नवीन बाबू की मुफ्त रेवड़ियों को नकारते हुए जनमानस ने ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 78 पर बीजेपी को जीत दिला दी। बीजेडी सिर्फ 51 तक सिमट गई, तो कॉन्ग्रेस 14, निर्दलीय 3 और सीपीआई-एम को महज 1 सीट मिली। चुनावी नतीजों के बाद धर्मशाला विधानसभा सीट से जीते निर्दलीय विधायक हिमाँशु साहू ने बीजेपी का दामन थाम लिया और बीजेपी के विधायकों की संख्या 79 तक पहुँच गई।

नवीन पटनायक की अगुवाई में बीजेडी ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनावी रेवड़ियों की झड़ी लगा दी। बीजेडी ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा कर दी, साथ ही 100-150 यूनिट के बीच बिजली पर आँशिक सब्सिडी भी दी। बीजेडी ने कहा कि इससे गरीबी परिवारों और खासकर किसानों को फायदा मिलेगा। बता दें कि ओडिशा में अधिकाँश किसान सिंचाईं के लिए बिजली के पंप पर निर्भर हैं।

फोटो साभार : बीजेडी घोषणापत्र

बीजेडी ने मुफ्त बिजली के बाद सेल्फ हेल्ड ग्रुपों को आर्थिक सहयोग की घोषणा की। नवीन पटनायक ने अगले 10 सालों में 20 हजार करोड़ रुपए महिला सशक्तिकरण समूहों को देने की घोषणा की, जिसमें इन समूहों से जुड़े लोगों को पेंशन देने की भी घोषणा की गई। मिशन शक्ति के तहत 6 लाख महिला स्वयंसेवी समूहों और इनसे जुड़ी 70 लाख महिलाओं को इससे फायदा पहुँचाने की बात कही गई।

मिशन शक्ति के तहत नवीन पटनायक ने की थी हजारों करोड़ की घोषणा

इसके अलावा बीजेडी ने छात्रों के लिए 1 लाख करोड़ रुपए छात्रवृत्ति के तौर पर देने की घोषणा की। इसमें कॉलेज जाने वाली छात्राओं को 14 हजार रुपए सालाना और छात्रों को 12 हजार रुपए सालाना देने का वादा किया गया।

ये वादे देखने में तो आकर्षक लगते हैं, लेकिन बीजेपी ने बीजेडी की ये कहकर आलोचना की कि आखिरी समय में सत्ता में आने के लिए नवीन पटनायक ने इस तरह की घोषणा की। बीजेपी नेताओं खासकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेडी की आलोचना की। बीजेपी नेताओं लंबे समय से राज्य की सत्ता में रही बीजेडी द्वारा इन घोषणाओं के समय पर सवाल उठाए। बीजेपी ने इसे चुनावी रेवड़ी की संज्ञा दी।

दूसरी तरफ बीजेपी ने ओडिशा की जनता के सामने समावेशी विकास का ताना-बाना रखा। बीजेपी ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की, लेकिन ये पूरी तरह से फ्री नहीं था। बल्कि इसे पीएम सूर्य घर योजना के तहत केंद्र सरकार की स्कीम से मिलाया। पीएम मोदी ने जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन इस योजना की घोषणा की थी, जिसमें घरों के ऊपर सोलर एनर्जी के लिए पैनल स्थापित किए जाएँगे।

केंद्र सरकार की इस योजना का लक्ष्य नवीनीकृति ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही बीजेपी ने राज्य की 19,630 तालाबों-झीलों को पुनर्जीवित करने और सभी ग्राम पंचायतों की सड़कों को सोलर एनर्जी से प्रकाशित करने की योजना पेश की। ओडिशा में जनता ने एक तरफ बीजेडी की मुफ्त रेवड़ियों को लाल झंडी दिखाई, तो बीजेपी के समावेशी विकास के वादे को गंभीरता से लिया।

नवीन पटनायक को कंटबजी विधानसभा सीट पर बीजेपी के लक्ष्मण बाग ने बुरी तरह से हराया। इस विधानसभा क्षेत्र में पलायन का मुद्दा काफी गंभीर है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर काफी काम किया और ओडिशा में चुनाव प्रचार को औद्योगिकीकरण और पलायन को रोकने के मुद्दे को जोड़कर उठाया। पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह दोनों ने ही पलायन के मुद्दे को गंभीरता से उठाया।

ओडिशा में पिछले 25 साल से सत्ता में बीजेडी है। ओडिशा में हमेशा नवीन पटनायक और बीजेडी के पक्ष में मतदान करती रही आम जनता ने इस चुनाव में बीजेडी को सबक सिखाने का फैसला किया और बीजेपी के पक्ष में जमकर मतदान किया।

सिर्फ विधानसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव में बीजेडी को जनता ने नकारा

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी का खाता भी नहीं खुला है। यहाँ 25 साल से सत्ता में काबिज बीजेडी को 21 में से सभी 21 सीटों पर हार का मुँह देखना पड़ा। बीजेपी ने 20 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की, तो कॉन्ग्रेस ने भी एक सीट जीत ली।

खास बात ये है कि ओडिशा में जीत के लिए बीजेपी लंबे समय से प्रयास कर रही थी। धर्मेंद्र प्रधान जैसे नेताओं को फ्री-हैंड दिया गया। लगातार ओडिशा में बीजेपी ने जोर लगाया। इस बार बीजेपी को अपनी मेहनत का फल भी मिला है। बीजेपी ने केरल में भी एक लोकसभा सीट जीती है और उस टैग से खुद को बाहर निकाला है, जिसमें बीजेपी को सिर्फ ‘उत्तर भारतीय राज्यों की पार्टी’ कहा जाता था।

मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

जिसकी पीठ में छुरा घोंप CM बने थे शरद पवार, अब उसके पोते ने शिवसेना (UBT) को हराया तो MVA में मचा घमासान: कॉन्ग्रेस का बाग़ी बन कर उतरा, उद्धव के सेनानी को चटाई धूल

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और I.N.D.I. गठबंधन के बाकी घटक दलों के बीच मनमुटाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसकी वजह सांगली लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार विशाल पाटिल की जीत है। उद्धव ठाकरे को लगता है कि यहाँ से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और कॉन्ग्रेस ने शिवसेना (UBT) के प्रत्याशी चंद्रहर सुभाष पाटिल को धोखा दिया है।

विशाल पाटिल ने इसी साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस से बगावत कर दिया था। वहीं, I.N.D.I. गठबंधन ने यहाँ से शिवसेना उद्धव गुट के प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। विशाल पाटिल कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल के पोते हैं। सांगली से निर्दलीय उम्मीदवार विशाल पाटिल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के संजय पाटिल को 1,00,053 वोटों से हराया था।

शिवसेना उद्धव गुट ने सांगली लोकसभा सीट से चंद्रहर सुभाष पाटिल को मैदान में उतारा था। चंद्रहर सुभाष पाटिल तीसरे नंबर पर रहे। उनका विशाल पाटिल से हार का अंतर 5,10,806 वोटों का रहा। I.N.D.I. गठबंधन में इस सीट को लेकर चुनाव पूर्व भी खींचतान हुई थी। अंत में इस सीट को उद्धव ठाकरे के गुट के पाले में डाल दिया गया था।

Source: ECI website

निर्दलीय होने के बावजूद विशाल पाटिल की बड़े अंतर से हुई जीत ने कई राजनैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक प्रश्न यह भी है कि क्या कॉन्ग्रेस के गढ़ में बाकी I.N.D.I. दलों द्वारा हाथ खींच लेने और उद्धव के प्रत्याशी को खड़ा करना कोई धोखा तो नहीं है। आशंका इस बात की भी जताई जा रही है कि इस सीट पर कॉन्ग्रेस और NCP ने अपने मतदाताओं को शिवसेना उद्धव गुट के बजाय विशाल पाटिल को वोट देने के लिए अंदर ही अंदर उकसाया था।

एक्जिट पोल में जब सांगली सीट से विशाल पाटिल द्वारा जीत दर्ज करने की भविष्यवाणी हुई तभी उद्धव गुट ने गठबंधन के सहयोगियों पर गुस्सा दिखाया था। मतगणना से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे के करीबी नेता संजय राउत ने बिना नाम लिए ही कॉन्ग्रेस और NCP के खिलाफ बयानबाजी की थी। तब उन्होंने कहा था कि सांगली में जो कुछ भी हुआ उस पर उनकी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। संजय राउत ने यह भी कहा था कि वो राजनीति में कंचे खेलने नहीं आए हैं।

माना यह भी जा रहा है कि अगर कुछ दिन और महाराष्ट्र में I.N.D.I. गठबंधन में सब सही चला तो आगामी विधानसभा चुनावों में भी सीटों के बँटवारे पर इसी तरह का विवाद खड़ा होगा। इसी साल मार्च के महीने में जब शिवसेना (उद्धव गुट) ने सांगली से अपना उम्मीदवार घोषित किया था कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता संजय निरुपम ने अपनी पार्टी से गठबंधन तोड़ने की अपील की थी। संजय निरुपम ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को चरमपंथी रुख करार दिया था। याद दिला दें कि शरद पवार पहली बार वसंतदादा पाटिल की पीठ में छुरा घोंप कर ही मुख्यमंत्री बने थे।

सांगली लंबे समय से कॉन्ग्रेस का गढ़ रहा है। यहाँ सन 1962 से 2014 के 52 वर्षों के अंतराल में कॉन्ग्रेस का ही कब्ज़ा रहा है। यह इलाका महाराष्ट्र के तीन बार के मुख्यमंत्री और राज्य के सबसे बड़े कॉन्ग्रेस नेताओं में से एक वसंतदादा पाटिल का गढ़ रहा है। साल 1980 से 2014 तक वसंतदादा के परिवार के ही सदस्य इस सीट से जीत कर संसद में जाते रहे हैं। ऐसे में यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या उद्धव ठाकरे ये नहीं जान पाए कि कॉन्ग्रेस ने उद्धव ठाकरे के लिए अपने मजबूत गढ़ को इतनी आसानी से क्यों छोड़ दिया। इसके बाद एक कॉन्ग्रेस के एक बागी नेता ने उद्धव के प्रत्याशी को पटखनी क्यों दी?

एग्जिट पोल के बाद संजय राउत के बयान से अनुमान लगाया गया था कि उन्हें अपनी पार्टी के साथ सहयोगी दलों द्वारा खेले गए खेल का पता पहले से था। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ख़ास बात ये भी है कि सांगली सीट पर जीत हासिल करने के बाद विशाल पाटिल ने बयान दिया था कि उनकी लड़ाई कभी कॉन्ग्रेस के खिलाफ थी ही नहीं। तब उन्होंने कहा कि वो कॉन्ग्रेस को बचाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। विशाल पाटिल ने खुद को असली कॉन्ग्रेसी भी कहा था। इस बयान के बाद इन आशंकाओं को और बल मिला था कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंदर ही अंदर विशाल पाटिल की मदद की थी।

NDA ने नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार चुना अपना नेता, सब बोले – उनकी नीतियों से विकसित हो रहा देश

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम जारी हो गए, जिसमें भाजपा को 240 सीटें प्राप्त हुईं और NDA 292 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटा। अब नई दिल्ली में बुधवार (5 जून, 2024) को NDA के घटक दलों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गठबंधन का नेता चुन लिया गया है। गठबंधन ने जो प्रस्ताव पारित किया है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि भारत के 140 करोड़ देशवासियों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों से देश को हर क्षेत्र में विकसित होते देखा है।

NDA के सभी दलों द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव में आगे लिखा है कि 6 दशक बाद ऐसा हुआ है जब भारत की जनता ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत से किसी सशक्त नेतृत्व को चुना है। NDA नेताओं ने इस पर गर्व जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्होंने न सिर्फ ये चुनाव लड़ा, बल्कि जीता भी। साथ ही सर्वसम्मति से एक बार फिर से उन्हें अपना नेता चुन लिया गया। गरीब, महिला, युवा, किसान, शोषित, वंचित और पीड़ित नागरिकों की सेवा के लिए भी प्रतिबद्धता जताई गई है।

NDA ने अपने बयान में कहा है कि भारत की विरासत को संरक्षित कर देश के सर्वांगीण विकास हेतु NDA सरकार भारत के जन-जन के जीवन में सुधार लाने के लिए कार्य करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने राजग के सभी सांसदों के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा है कि वो इस निर्णय के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। शुक्रवार (7 जून, 2024) को राजग के सभी सांसदों की बैठक होगी, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

गठबंधन सहयोगियों से बातचीत की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा के अलावा ‘मोदी 2.0’ में गृह मंत्री रहे अमित शाह और रक्षा रहे मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया है। उधर I.N.D.I. गठबंधन भी सरकार बनाने पर विचार-विमर्श कर रहा है, लेकिन इसकी शायद ही कोई संभावना नज़र आ रही है। बता दें कि 17वीं लोकसभा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भंग कर दिया है। अब 8 जून को शपथग्रहण समारोह के बाद नई कैबिनेट का गठन होगा। 3 निर्दलीयों और एक-एक सांसद वाले 7 अन्य दलों ने भी पीएम मोदी को समर्थन दिया है।

हमारी निष्ठा NDA के साथ, नरेंद्र मोदी ही हमारे प्रधानमंत्री: पॉवर स्टार पवन कल्याण की दो टूक, आंध्र प्रदेश का डिप्टी CM बनने पर ‘जनसेना’ के नेता ने नहीं खोले पत्ते

आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी, जनसेना पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के एनडीए गठबंधन को लैंडस्लाइड जीत मिली है। तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार अभिनेता और जनसेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण ने कहा है कि वो एनडीए के ही साथ हैं। इस गठबंधन ने आंध्र प्रदेश में एकतरफा जीत दर्ज की है। पवन कल्याण की पार्टी जनसेना ने 2 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर पार्टी को जीत मिली है। टीडीपी को 16 और बीजेपी को 3 लोकसभा सीटों पर जीत मिली है, वहीं विपक्षी पार्टी YSRCP को महज 4 सीटों पर जीत मिली।

न्यूज18 से बातचीत में पवन कल्याण ने साफ कर दिया है आंध्र प्रदेश में एनडीए गठबंधन अटूट है। वो एनडीए से अलग नहीं होंगे। पवन कल्याण ने कहा कि हमारे मन में एनडीए के समर्थन करने और न करने को लेकर दूसरी बार कोई सवाल नहीं आया। हम सिर्फ एनडीए के साथ हैं। पवन कल्याण ने कहा कि वो सत्ता में समुचित हिस्सेदारी लेंगे, लेकिन ये सब कुछ जनता के कल्याण के लिए होगा। ये पूछने पर कि क्या वो डिप्टी सीएम बनना चाहते हैं, पवन कल्याण के कहा कि इस पर एक-दो दिनों में चर्चा कर ली जाएगी।

आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने 21 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने टीडीपी और बीजेपी का मेल कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता आम जनमानस का कल्याण है। वो अपने लिए कुछ नहीं चाहते, वो बस जनता की सभी परेशानियों को दूर करने के लिए राजनीति में उतरे हैं। इस दौरान जगन मोहन रेड्डी से तनातनी को लेकर पवन कल्याण ने कहा कि जगन मोहन रेड्डी से मेरी कोई आपसी रंजिश नहीं है। उन्होंने जो कुछ भी किया, जनता ने उन्हें सबक सिखाया है।

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों और नई सरकार को लेकर सस्पेंस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राष्ट्रपति ने भी उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। हालाँकि, नई सरकार के गठन तक पीएम मोदी कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन पहुँचकर अपना इस्तीफा सौंपा। पीएम नरेंद्र मोदी 8 जून को पीएम पद की शपथ लेंगे। इस बीच, एनडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को सामने आए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने तीसरी बार बहुमत हासिल कर लिया है। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन ने 292 सीटें जीती हैं। हालाँकि, बीजेपी अकेले बहुमत के आँकड़े को नहीं छू पाई और उसे 240 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। विपक्षी इंडी गठबंधन ने 234 सीटों पर जीत हासिल की। इंडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी 99 सीटों तक ही सीमित रह गई।

मोहम्मद सरफुद्दीन की चिकन बिरयानी शॉप पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: कारीगर तिरंगे से उतार रहा था पका मांस, रोकने वालों को देने लगा गालियाँ, पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (4 जून 2024) को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करने का मामला सामने आया। यह अपमान चिकन बिरयानी बेचने वाले मोहम्म्द सरफुद्दीन की दुकान पर किया गया है। मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की इस दुकान पर कारीगर साहब ने राष्ट्रीय ध्वज से कड़ाही उतारी। दुकान के पास से गुजर रहे एक हिन्दू युवक ने जब ऐसा करने से रोका तो उसे गालियाँ दी गईं।

पुलिस ने सरफुद्दीन और साहब को हिरासत में ले लिया है। दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच की जा रही है। यह घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र इज्जतनगर की है। यहाँ 4 जून को आदित्य मौर्य नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आदित्य ने बताया कि 4 जून को वो अपने एक साथी वकील के साथ बरेली के कर्मचारी नगर से गुजर रहे थे।

इसी दौरान आदित्य ने देखा कि मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की एक नॉनवेज की दुकान पर एक व्यक्ति पके मांस से भरी कड़ाही उठा रहा था। आदित्य ने आरोपित को ऐसा करने से रोका तो वह गालियाँ देने लगा। वह समझाने पर भी मानने को तैयार नहीं हुआ। आदित्य ने बताया कि कारीगर की हरकत से राष्ट्र ध्वज काफी गंदा हो चुका था। उन्होंने दुकान के कारीगर से तिरंगे को माँगा, लेकिन नहीं दी।

इस दौरान उन्होंने आदित्य को गालियाँ देना जारी रखा। आख़िरकार आदित्य ने 112 नंबर डायल करके पुलिस बुलाई। पुलिस ने राष्ट्र ध्वज को कब्ज़े में ले लिया। आरोपितों की वीडियोग्राफ़ी भी की गई। दुकान मालिक का नाम मोहम्मद सरफुद्दीन और कारीगर का नाम साहब है। दोनों को हिरासत में लेकर चालान कर दिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। दोनों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 504 के साथ राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत कार्रवाई की गई है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पुलिस से दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ सरफुद्दीन के होटल की वैधानिकता की भी जाँच करने की माँग उठाई है।

तीसरी बार सत्ता में लौटे PM मोदी लेकिन AAP विधायक सोमनाथ भारती ने सिर मुँडवाने से किया इनकार, खुद को बता रहे सनातनी: कहा – बहुमत मिलता तो ये होती लोकतंत्र की हत्या

लोकसभा चुनाव 2024 में NDA 292 सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है और भाजपा ने अकेले दम पर 240 सीटें प्राप्त की हैं। मालवीय नगर से लगातार तीसरी बार विधायक सोमनाथ भारती ने चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सरकार में आते हैं तो वो अपना बाल मुँडवा लेंगे और चेहरा काला कर लेंगे। हालाँकि, अब जब तस्वीर साफ़ हो गई है और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं, तब वो अपने इस बयान से पलट गए हैं।

अब AAP विधायक सोमनाथ भारती ने कहा है कि नरेंद्र मोदी से उन्हें कोई तकलीफ नहीं है, तकलीफ इससे है कि उन्होंने जिस तरह से अपने शासन के दौरान हुनर दिखाए हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि जनता जिसको मरजीबनाए, जनता मालिक है और लोकतंत्र में जनता ही सब कुछ है, लेकिन ‘400 पार’ का नारा देकर जनता ने उन्हें 240 सीटें दी हैं। सोमनाथ भारती ने दावा किया कि जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का जनमत नहीं दिया है।

सोमनाथ भारती ने कहा, “160 सीटें नरेंद्र मोदी को नहीं मिल पाईं, इसीलिए नैतिकता के आधार पर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर चला जाना चाहिए। क्योंकि, ये दायित्व जनता उनको तीसरी बार नहीं देना चाहती। जहाँ तक सिर मुँडाने की बात है, मैं एक सनातनी हूँ और एक सनातनी के घर में जब किसी की मृत्यु होती है तो वो संस्कार करवाने के बाद अपना सिर मुँडवाता है। नरेंद्र मोदी को अगर मैंडेट मिलता, तो भाजपा को 272 से ज़्यादा आता।”

सोमनाथ भारती ने दावा किया कि भाजपा को बहुमत से नीचे सीटें मिली हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि अगर पीएम मोदी को मैंडेट मिलता तो वो मानते कि लोकतंत्र की हत्या हुई है, और जब किसी की मौत हो तो संस्कार करने के बाद सिर मुँडवा कर इसका इजहार किया जाता है और वही उन्होंने कहा था। सोमनाथ भारती पर अपनी पत्नी को कुत्ते से कटवाने का आरोप भी लगा था। उत्तर प्रदेश में उनके चेहरे पर स्याही भी फेंक दी गई थी। वो अक्सर बड़बोलेपन के लिए जाने जाते रहे हैं।