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8 महीने की उस बच्ची के सिर पर अब नहीं रही ममता की छाँव, जिसकी माँ को सब कोस रहे थे: रम्या ने आत्महत्या नहीं की है, उसे ट्रोल आर्मी ने मार डाला

तमिलनाडु के कोयम्बटूर में एक टेक कम्पनी में काम करने वाली महिला की लाश मिली। बताया गया कि महिला ने आत्महत्या कर ली है। महिला के हाथ से एक माह पहले उसकी बच्ची छूट कर गिर गई थी, जिसका सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था। इसको लेकर महिला को ट्रोल भी किया गया था।

जानकारी के अनुसार, रम्या वी नाम की एक महिला का शव कोयम्बटूर में उसके माता-पिता के घर पर मिला। वह अपनी बच्ची के साथ ही कोयम्बटूर आई थी। रविवार (19 मई, 2024) को जब अन्य कोई घर पर नहीं था तब उसने आत्महत्या कर ली। उसका शव बाद में घर में मिला। उसके परिजनों ने उसे अस्पताल पहुँचा कर बचाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके। महिला के आत्महत्या के पीछे सोशल मीडिया की ट्रोलिंग को ही कारण बताया जा रहा है।

महिला चेन्नई में रह कर नौकरी करती थी, उसका पति भी एक टेक फर्म में काम करता है। चेन्नई में वह चौथे मंजिल पर रहती थी। 28 अप्रैल, 2024 को उसके हाथ से उसकी आठ महीने की बच्ची छूट गई थी। बच्ची इसके बाद नीचे बने एक सनशेड पर जा गिरी थी। इसके बाद बच्ची को आसपास रहने वालों ने मिलकर उसे सुरक्षित रूप से बचा लिया था। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें कई लोग बच्ची को बचाते दिखे थे।

बच्ची के नीचे गिरने का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया में उसकी माँ रम्या को काफी ट्रोल किया गया था। रम्या को सोशल मीडिया पर लापरवाह माँ कहा था। लोगों ने रम्या वी को काफी ट्रोल किया था। रम्या को सोशल मीडिया पर माँ के तौर पर विफल होने वाली महिला बताया गया था। इसको लेकर रम्या काफी दुखी चल रहीं थी। वह बच्ची के हाथ से छूटने के सदमे से निकल नहीं पा रही थीं। इस कारण से वह अपने पति के साथ पैतृक निवास वापस आ गईं थी। जहाँ उन्होंने आत्महत्या कर ली।

तमिलनाडु पुलिस ने इस घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जाँच कर रही है।

बेटी की सहेलियों को ‘वेश्या’ बनाती थी नादिया, डांस-ब्यूटीशियन कोर्स का लालच देकर फँसाती थी: हैदराबाद से दिल्ली तक करती थी स्कूल गर्ल्स की सप्लाई, 6 गिरफ्तार

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पुलिस ने शनिवार (18 मई 2024) को वेश्यावृत्ति के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। रैकेट को 37 वर्षीया महिला के. नादिया संचालित कर रही थी। पुलिस ने नादिया और उसके 6 सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह गरीब एवं मध्यम वर्ग की स्कूली छात्राओं को देह व्यापार में धकेल रहा था। ये सभी नादिया की बेटी की सहपाठी और सहेलियाँ हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना चेन्नई के वलसरवक्कम इलाके की है। शनिवार को पुलिस को इस क्षेत्र में स्कूली लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर कार्रवाई के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया और एक लॉज में दबिश दी गई। दबिश के दौरान लॉज से 2 लड़कियाँ बरामद हुईं। पीड़िताओं की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच है। उनसे पूछताछ में नादिया का नाम सामने आया।

बताया जा रहा है कि के नादिया अपनी बेटी की सहेलियों को डांस सिखाने और ब्यूटीशियन का कोर्स करवाने का लालच देती थी। ऐसा करके वो अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों से घुल-मिल जाया करती थी। नादिया लड़कियों को पार्ट टाइम काम करके 25 से 30 हजार रुपए तक कमाने का सपना दिखाती थी। इस धंधे में नादिया के साथ शामिल अन्य आरोपित लड़कियों को घर में बहाने बनाना सिखाते थे।

यह गैंग चाहता था कि छात्राएँ आराम से बिना किसी रोकटोक के रात भर बाहर रह सकें। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपितों ने लड़कियों को हैदराबाद और दिल्ली तक भेजा था। अगर कोई लड़की बाद में कहीं जाने से इनकार करती थी तो उसे उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किया जाता था। नादिया ग्राहकों को सोशल मीडिया के जरिए खोजती थी।

इनमें अधिकांश बुजुर्ग ग्राहक होते थे, जो स्कूल गर्ल की चाह रखते थे। पुलिस ने हैदराबाद और कोयंबटूर के ऐसे ग्राहकों को भी चिन्हित किया है, जो स्कूली छात्राओं के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार रहते थे। नादिया के अलावा पुलिस ने इस गिरोह के 42 वर्षीय रामचंद्र, 43 वर्षीया सुमति, 29 साल की माया ओली, 43 साल की जयश्री, 31 वर्षीय अशोक और 70 वर्षीय रामचंद्रन को गिरफ्तार किया है।

अशोक कोयंबटूर का निवासी है, जबकि बाकी अन्य चेन्नई के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। इन सभी आरोपितों के मोबाइल फोन जब्त करके जाँच की जा रही है। इन्हीं आरोपितों में से एक आरोपित की कार भी पुलिस ने सीज कर ली है। जिला चाइल्ड यूनिट पीड़िताओं की काउंसिलिंग करवा रहा है। सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

निजी प्रतिशोध के लिए हो रहा SC/ST एक्ट का इस्तेमाल: जानिए इलाहाबाद हाई कोर्ट को क्यों करनी पड़ी ये टिप्पणी, रद्द किया केस

देश में एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। ये सवाल यूँ ही नहीं उठाए जाते हैं, इसके ऐसे कई उदाहरण हैं कि फर्जी SC-ST के कारण कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। कई लोगों के जीवन के अनमोल वर्ष जेल में बीते और बाद में पता चला कि केस झूठा था। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और कठोर टिप्पणी की है।

एक मामले की सुनवाई करने के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी के इशारे पर एक पति-पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा, “अगर उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति किसी और के द्वारा नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी के द्वारा दी जाती है तो यह न्यायालय अपने कर्तव्य में असफल होगा। यहाँ भू-माफियाओं, राजस्व अधिकारियों और तत्कालीन एसएचओ की मिलीभगत है, जिसमें एक जोड़े को गलत तरीके से आपराधिक कार्यवाही में फंसाया गया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया गया।”

याचिकाकर्ता अलका सेठी और उनके पति ध्रुव सेठी द्वारा दायर याचिका पर FIR रद्द करने का आदेश कोर्ट ने दे दिया। याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि सतपुड़ा में सड़क के खसरा नंबरों का लेखपाल निरीक्षण कर रहा था। इस दौरान अलका और उनके पति से लेखपाल का सामना हुआ। याचिका के अनुसार दोनों दंपत्ति ने लेखपाल को जातिसूचक गालियाँ दीं।

कथित तौर पर ध्रुव सेठी ने कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह उसकी पत्नी के साथ बदतमीजी और भ्रष्टाचार के मुकदमे में फँसा देगा। आरोप है कि याचिकर्ता ने लेखपाल को बंधक बना लिया था और बिहारीगढ़ एसएचओ के हस्तक्षेप के बाद लेखपाल को रिहा कराया जा सका। इसके बाद लेखपाल ने SC/ST ऐक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पति-पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज करा दी।

इसके बाद पूरे आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम), सहारनपुर द्वारा पारित समन एवं आरोप पत्र को चुनौती देते हुए पति-पत्नी ने अदालत का रुख किया। इस पर तर्क दिया गया कि ध्रुव सेठी ने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था और म्युटेशन के बाद सीमांकन के लिए आवेदन किया था। सीमांकन के आदेश के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने इसे पूरा नहीं किया।

अधिकारी सीमांकन नहीं कर रहे थे और इसके लिए आवेदकों को इधर-उधर दौड़ा रहे थे। जब उन पर दबाव डाला गया तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमांकन पक्षों के सामने कराया जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्होंने आवेदकों की अनुपस्थिति में सीमांकन करना शुरू कर दिया। जब इसका विरोध किया गया तो हाथापाई शुरू हो गयी।

दंपति ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय भू-माफिया, जिनका उस क्षेत्र में और राजस्व पर भी प्रभाव था, और स्थानीय पुलिस अधिकारी ने एक साजिश रची। वे उनकी जमीन हड़पना चाहते थे। इसी वजह से उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही दंपति ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि लेखपाल की जाति क्या है और ना ही जाति से संबंधित उन्होंने कोई बात कही।

इस पर न्यायालय ने कहा कि चौंकाने वाली बात है कि ST/SC ऐक्ट के प्रावधानों का कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत प्रतिशोध, व्यक्तिगत हितों या खुद को बचाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था कि उन्हें लेखपात की जाति के बारे में पता था।

कोर्ट ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि आवेदकों ने लेखपाल के खिलाफ जाति-संबंधी शब्दों का इस्तेमाल किया था। राजस्व अधिकारी को बाँधने की घटना को भी कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया और कहा कि एक महिला एवं एक पुरुष इतने लोगों कैसे हावी हो सकते हैं और एक व्यक्ति को बाँध सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि FIR पढ़ने से कोई मामला नहीं बनता। इसलिए इसे रद्द किया जाता है।

SC/ST Act के दुरुपयोग को लेकर कई कोर्ट सख्त

यह कोई पहली बार नहीं है कि किसी कोर्ट ने ST/SC ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर इस तरह की कठोर टिप्पणी की है। इससे पहले इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही व्यक्ति को निर्दोष करार दिया था, जो पिछले 20 वर्षों से जेल में कैद था। व्यक्ति को बलात्कार के आरोप और SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।

हाईकोर्ट ने आरोपित की रिहाई की बात कहते हुए मामले पर तल्ख़ टिप्पणी भी की है। हाईकोर्ट के मुताबिक़ दुराचार का आरोप साबित नहीं हो पाया। मेडिकल रिपोर्ट में ज़बरदस्ती के कोई सबूत नहीं मिले हैं। मामले की रिपोर्ट भी घटना के तीन दिन बाद लिखाई गई थी। इस मामले में बलात्कार का झूठा आरोप ही नहीं, बल्कि SC/ST ऐक्ट का भी झूठा इस्तेमाल करते हुए दुरुपयोग किया गया था।

SC व्यक्ति ने सीनियर पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर दे दी थी जान

इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए 22 साल पुराने आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। यह आरोप कन्नौज जिले में जिला बचत अधिकारी के रूप में कार्यरत प्रभात मिश्रा नाम के एक व्यक्ति पर लगा था। मृतक प्रभात मिश्रा का जूनियर था। इसके साथ ही आरोपित पर से कोर्ट ने ST-SC कानून की धाराएँ भी हटा दीं।

सुसाइड नोट पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मृतक काम के दबाव के कारण निराश था और आरोपित द्वारा सौंपे गए अपने आधिकारिक कर्तव्यों को लेकर आशंकित था। सुसाइड नोट में व्यक्त की गई आशंकाएँ किसी भी कल्पना से आरोपित को आत्महत्या के लिए उकसाने के तत्वों के रूप में कार्य करने के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती हैं।

सिर्फ गाली देने से नहीं लग सकता SC/ST ऐक्ट

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST Act को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ ST/ST Act लगाने के लिए काफी नहीं है। अदालत ने व्यक्ति के खिलाफ लगाए आरोप को खारिज कर दिया था। इसमें एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) (एक्स) के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

बेंच ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति किसी को सार्वजनिक रूप से ‘बेवकूफ’ या ‘मूर्ख’ या ‘चोर’ कहता है तो यह आरोपित द्वारा अपशब्द कहे जाने का कृत्य माना जाएगा। यदि यह SC/ST व्यक्ति को कहा गया है, तब तक धारा 3(1)(एक्स) के तहत व्यक्ति को आरोपित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इस तरह के शब्द जातिसूचक टिप्पणी के साथ नहीं कहे गये हों।

अदालत ने कहा था कि इस संबंध में ना ही प्राथमिकी में और ना ही आरोप पत्र में जिक्र है कि मौखिक विवाद के दौरान शिकायतकर्ता की जाति का कोई संदर्भ नहीं दिया गया था। अदालत ने कहा कि जिस समय घटना हुई, उस समय शिकायतकर्ता के अलावा उसकी पत्नी और बेटे ही उपस्थित थे। कोर्ट ने कहा कि पत्नी-बेटे की उपस्थिति में कही गई बात को सार्वजनिक नहीं कहा जा सकता।

SC/ST Act का गलत इस्तेमाल कानून का दुरुपयोग

इसी तरह के एक मामला में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तीन प्रोफेसरों के खिलाफ लगाए गए SC/ST Act को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय ने पाया कि यह मामला फर्जी है। इसके साथ ही आरोप लगाने वाली प्रोफेसर पर कोर्ट ने 15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

दरअसल, प्रोफेसरों ने महिला प्रोफेसर को समय पर आने और ढंग से पढ़ाने के लिए कहा था। इसके बाद उस महिला प्रोफेसर ने तीन अन्य प्रोफेसरों पर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करा दी थी और अपनी शिकायत में कहा था कि उसे अपमानित, परेशान और निशाना बनाया जा रहा है।

गलत सबूतों से ST/SC में फाँसी हुई तो शिकायतकर्ता भी नहीं बचेगा

SC/ST Act के लगातार बढ़ रहे दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST Act के एक प्रावधान की वैधता की जाँच करने पर सहमति जताई। इस प्रावधान के तहत उस व्यक्ति के लिए मौत की सजा है, जिसके झूठे साक्ष्य की वजह से SC या ST समुदाय के किसी निर्दोष सदस्य को दोषी ठहराया गया और फाँसी दी गई।

याचिकाकर्ता ने न्यायमूर्ति कांत और न्यायमूर्ति विश्वनाथन की पीठ को बताया कि एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2) (I) में प्रावधान है कि यदि एससी या एसटी समुदाय के किसी निर्दोष सदस्य को ऐसे झूठे या मनगढ़ंत साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषी ठहराया जाता है और उसे फाँसी दी जाती है, तो ऐसे झूठे साक्ष्य देने या गढ़ने वाले व्यक्ति को मौत की सजा दी जाएगी।

इस प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ इस सुनवाई कर रही थी। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह सरकार से परामर्श करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जुलाई के लिए टाल दी।

5 आतंकियों की उम्रकैद दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल की सजा में बदली, कहा- इनका अपराध गंभीर लेकिन इन्होंने कोई आतंकवादी घटना अंजाम नहीं दी

दिल्ली हाई कोर्ट ने जैश-ए-मोहम्मद के 5 ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की सजा उम्रकैद से घटा कर 10 वर्ष कर दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में लिप्त होने के बावजूद उन्होंने खुद किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया। इस दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रसिद्ध रुसी लेखक फ्योडोर दोस्तोवस्ती के मशहूर नॉवेल ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ का भी हवाला दिया। दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-द्दीन चोपन और इशफाक अहमद भट को ये राहत मिली है।

लॉ रिपोर्टिंग वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (20 मई 2024) को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाँच सदस्यों को भारतीय दंड संहिता की धारा 121ए के तहत अपराध के लिए दी गई सजा को बदलकर उम्रकैद से 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-दीन चोपन और इशफाक अहमद भट द्वारा ट्रायल कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर ये फैसला दिया। हाई कोर्ट की बेंच ने यूएपीए की धारा 23 के तहत अपराध के लिए इशफाक अहमद भट को दी गई सजा को उम्रकैद से 10 साल की कठोर सजा में बदल दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, “जिस व्यक्ति के पास विवेक है, वह अपने पाप को स्वीकार करते हुए कष्ट सहता है। हम ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ के लेखक फ्योदोर दोस्तोवस्की के उद्धरण का उल्लेख करते हैं, जिसके 19वें चैप्टर में दोस्तोवस्की ने लिखा, “यदि उसके पास विवेक है तो वह अपनी गलती के लिए पीड़ित होगा; वही सजा होगी – साथ ही जेल भी।”

जानकारी के मुताबिक, बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-द्दीन चोपन और इशफाक अहमद भट को साल 2022 में ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं और यूएपीए की धाराओं के तहत दोषी पाया था और उन्हें 28 नवंबर 2022 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ये सभी लोग जम्मू-कश्मीर में आत्यधिक सक्रिय रहे जैश-ए-मोहम्मद जैसे दुर्दांत आतंकी संगठन के ओवर ग्राउंड वर्कर थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी सजा कम करने से इनके अपराध कम नहीं हो जाते, ये भले ही कई मामलों से जुड़े रहे थे, लेकिन सीधे इन्होंने किसी काम को अंजाम नहीं दिया। ऐसे में इन्हें सुधरने के लिए एक खिड़की खुली छोड़ देनी चाहिए। हालाँकि एनआईए ने जोर दिया है कि ये लोग कई आतंकी घटनाओं से जुड़े रहे हैं।

CM केजरीवाल के PA विभव कुमार को लेकर मुंबई गई दिल्ली पुलिस, स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के बाद यहीं फॉर्मेट किया था फोन: जाँच के लिए SIT का गठन

स्वाति मालीवाल से CM अरविन्द केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर मारपीट मामले में आरोपित पूर्व PS बिभव कुमार को दिल्ली पुलिस मुंबई लेकर पहुँची है। दिल्ली पुलिस इस मामले में जाँच के लिए बिभव कुमार को हवाई रास्ते से दिल्ली लेकर पहुँची है। बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ऐसा सबूत जुटाने के लिए कर रही है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की टीम बिभव कुमार को मुंबई में उस जगह पर लेकर जाएगी जहाँ उन्होंने अपना फोन फॉर्मेट किया था। यह बात दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट को भी बताई है। बताया गया था कि बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी के बाद अपना फोन फॉर्मेट कर दिया था।

दिल्ली पुलिस इस प्रयास में है कि वह बिभव कुमार फॉर्मेटेड किए गए फोन से डाटा वापस निकाल सके। इसके लिए ही वह बिभव कुमार को मुंबई में उस जगह ले जा रही है जहाँ उन्होंने फोन से सारा डाटा उड़ा चुके हैं। बिभव कुमार अभी पुलिस की हिरासत में हैं।

पुलिस इस पूरी घटना के अधिक से अधिक सबूत जुटाने में लगी हुई है। बिभव कुमार को इस मामले में शुक्रवार (16 मई, 2024) को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सबूत जुटाने के लिए घटना का रीक्रिएशन भी CM आवास में करवाया था। इसमें बिभव कुमार को भी ले जाया गया था।

दिल्ली पुलिस ने लगभग 20 लोगों के बयान भी इस मामले में दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बिभव कुमार CM आवास पर घटना वाले दिन क्यों पहुँची थी। मामले में कई डिवाइस की फॉरेंसिक जाँच भी करवाई जाएगी।

मामले में जाँच के लिए एक SIT का भी गठन हुआ है, इसमें सिविल लाइन्स थाने के अधिकारी भी शामिल हैं। उनके पास ही स्वाति मालीवाल शिकायत लेकर सबसे पहले पहुँची थी और इसी थाने में FIR दर्ज की गई थी। यह भी बताया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर CM केजरीवाल के परिवार के लोगों के बयान भी लिए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि AAP राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने 13 मई, 2024 को आरोप लगाया था कि उनके साथ CM आवास में केजरीवाल के पूर्व PS बिभव कुमार ने मारपीट की। इस मामले में बाद में मालीवाल ने दिल्ली पुलिस के पास FIR भी दर्ज करवाई थी। इसके बाद से इस मामले में AAP और स्वाति मालीवाल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है।

‘हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए बनाई फिल्म’: मलयालम सुपरस्टार ममूटी का ‘जिहादी’ कनेक्शन होने का दावा, ‘ममूक्का’ के बचाव में आए प्रतिबंधित SIMI के पूर्व अध्यक्ष

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सिनेमा व राजनीति एक-दूसरे से मिले-जुले हुए हैं। तमिलनाडु के CM रहे करूणानिधि और जयललिता फिल्म इंडस्ट्री से थे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे NTR फिल्म इंडस्ट्री से थे। हालाँकि, केरल में ये देखने को नहीं मिलता है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री एक एक बड़ा बाजार है, जिसने ममूटी, मोहनलाल, जयराम और सुरेश गोपी जैसे सुपरस्टार दिए हैं। आज दिलकीर सलमान और फहाद फासिल सुर्खियाँ बटोर रहे हैं।

अब पिछले 53 वर्षों से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय ममूटी पर जिहादी होने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद वो विवादों में आ गए हैं। उन्हें उनके फैंस ‘मम्मूक्का’ भी कहते हैं। चेन्नई स्थित एक कारोबार मोहम्मद शरशाद बनियांदी, जो कि CPI(M) नेता भी है, उन्होंने ‘सुपर मेगास्टार’ ममूटी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जो धर्मनिरपेक्ष, उदार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन रखने वालों को हैरान करने वाले हैं। हालाँकि, न सिर्फ CPI(M) व उनके लेफ्ट के साथी दल, बल्कि कॉन्ग्रेस भी ममूटी को जिहादी बताए जाने का विरोध कर रही है।

मोहम्मद शरशाद बनियांदी ने कहा है कि उनकी पूर्व-पत्नी राठीना PT और स्क्रिप्ट लेखक हर्षद ने मिल कर एक हिन्दू विरोधी और सवर्ण विरोधी फिल्म बनाने की साजिश रची, जिसमें ममूटी मुख्य अभिनेता थे। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राठीना PT पर दबाव बनाया गया था कि हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए वो इस फिल्म का निर्देशन करें। मामला 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘Puzhu’ से जुड़ा है, जिसे ममूटी की होम प्रोडक्शन कंपनी ‘Wayfarer Films’ द्वारा बनाया गया था।

इस फिल्म का डिस्ट्रीब्यूशन SonyLIV ने किया था।इस फिल्म इस फिल्म में उन्होंने एक ‘उच्च जाति’ के IPS अधिकारी का किरदार निभाया है, जो अपनी बहन से इसीलिए नफरत करता है क्योंकि वो अपने दलित प्रेमी के साथ भाग गई थी। असल में राठीना PT ने एक हल्का-फुल्का मनोरंजन वाली फिल्म बनाने की सोची थी, लेकिन दावा है कि उन्हें ‘सुपर मेगास्टार’ के हिसाब से चलना पड़ा। फिल्म के लेखक हर्षद को भी शरशाद ने एक ‘इस्लामी कट्टरपंथी’ बताया है।

बनियांदी ने कहा कि ममूटी को राठीना के साथ एक अन्य प्रोजेक्ट पर काम करना था, लेकिन जल्दी-जल्दी में ‘Puzhu’ बना दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस फिल्म के लिए कुछ ‘बाहरी तत्वों’ ने उनकी पूर्व पत्नी के मन में कुछ भर दिया था। ममूटी 2000 से ही ‘कैराली टीवी’ के चेयरमैन हैं, जिसे CPI(M) का वरदहस्त हासिल है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से उनके नज़दीकी रिश्ते हैं। 2007 में ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI)’ के ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि अगर ये संगठन गुजरात में सक्रिय रहता तो 2002 में दंगे नहीं होते।

बता दें कि DYFI ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट)’ का ही युवा संगठन है। अब SIMI के पूर्व अध्यक्ष एवं CPI(M) के MLA KT जलील ने भाजपा पर हमला किया है। उन्होंने ममूटी का बचाव किया है। वो कहते रहे हैं कि भारत को इस्लाम के माध्यम से ही ‘मुक्त’ किया जा सकता है। वो केरल में मंत्री भी रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि मोहम्मद शरशाद बनियांदी अपने कहे से पलट गए हैं, लेकिन हमें अभी तक ऐसा कुछ आधिकारिक नहीं मिला है।

रोहिंग्या मुस्लिमों ने 5000 हिंदुओं-बौद्धों के घर जलाए, आँखों के सामने सब कुछ लूटा: इससे पहले म्यांमार से आई थी 1600 हिंदुओं को बंधक बनाने की खबर

म्यांमार के रखाइन प्रांत में सैन्य नेतृत्व वाले जुंटा और जातीय विद्रोही समूहों के बीच झड़पें तेज होने के बाद वहाँ सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई है। खबर है कि वहाँ पर इस तनाव के चलते रोहिंग्याओं ने हिंदुओं और बौद्धों के 5000 घरों को जला दिया है

सूत्रों से प्राप्त जानकारी बताती है, “घरों को निशाना इसीलिए बनाया गया था क्योंकि वो हिंदुओं और बौद्धों के हैं। इस घटना के बाद कई लोग इलाका छोड़ भाग गए थे, जो लोग बचे थे उन्हें जबरन वहाँ से हटा दिया गया और आँखों के सामने घरों को लूट लिया गया। इस घटना को अंजाम रोहिंग्याओं ने दिया।”

बताया जा रहा है कि ये विध्वंस 11 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच बांग्लादेश सीमा से सिर्फ 25 किमी दूर स्थित बुथिदौंग क्षेत्र में अंजाम दिया गया। सूत्र बताते हैं कि 2018 की जनगणना के अनुसार बुथिदौंग में 3000 घर थे। बाद में संख्या बढ़ी और घरों की गिनती 10000 हो गई। अब इन 10 हजार में से 50 फीसद घर तो मुस्लिमों के हैं और बाकी बचे हिंदू और बौद्धों के, जिनपर अब हमले की खबर है।

उल्लेखनीय है कि रखाइन राज्य में सांप्रदायिक हिंसा कोई नई बात नहीं रह गई है। यहाँ दशकों से भड़कती आग के कारण पलायन होता रहा है। इससे पहले इसी बुथिडुआंग से खबर आई थी कि वहाँ 1600 से भी अधिक हिन्दुओं एवं 120 बौद्ध समाज के लोगों को बंधक बनाया गया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि म्यांमार की फ़ौज की तरफ से इस्लामी कट्टरपंथियों को ये काम सौंपा गया है कि वो मुल्क के स्थानीय समुदायों को आतंकित करें। धर्म को आधार बना कर नरसंहार की साजिश रची जा रही है। इसी क्रम में 1600 से अधिक हिन्दुओं और 120 से अधिक बौद्धों को बंधक बनाया गया है। 

कॉन्ग्रेस और उसके साथियों ने पीढ़ियाँ बर्बाद की, अम्बेडकर नहीं होते तो नेहरू नहीं देते SC/ST को आरक्षण: चम्पारण में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार में कहा है कि कॉन्ग्रेस ने बापू के आदर्शों को छोड़ कर एक परिवार को आगे बढ़ाने पर सारा जोर लगा दिया, देश के 60 साल बर्बाद कर दिए। पीएम मोदी ने राजद पर भी हमला किया। उन्होंने इन सभी पार्टियों पर देश का विकास ना करने और मूल सुविधाएँ ना देने को लेकर हमला किया।

पीएम मोदी बिहार के पूर्वी चम्पारण में लोकसभा चुनावों के लिए एक रैली को संबोधित कर रहे थे। यहाँ उन्होंने भाजपा उम्मीदवार राधामोहन सिंह के लिए वोट माँगे। यहाँ उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को भी लोगों को बताया।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं गरीब माँ का बेटा हूँ, इसलिए मुझे पता है कि महिलाओं को शौचालय ना होने पर कैसी असुविधा का सामना करना पड़ता था। पहले होने वाली समस्याओं से महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ते थे। कॉन्ग्रेस को गरीब की आवश्यकता की समझ नहीं थी। मोदी सरकार में गरीब के घर में बिजली पहुँची।”

उन्होंने कहा, “60 सालों में इन लोगों ने बड़े बड़े महल बना लिए, स्विस बैंक में अकाउंट खुल गए, आपके पास पेट भरने को अन्न नहीं था लेकिन इन लोगों की तिजोरियां नोटों से भरी रहती थी। गरीब परेशानी में था लेकिन इन लोगों को कोई फर्क नहीं था। देश में गरीब की पूछ तब हुई जब गरीब का यह बेटा खपने लगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि जितना काम पिछले 10 वर्षों में हुआ है, उससे ज्यादा काम अगले पाँच वर्षों में होगा। उन्होंने कहा कि यह मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि मजबूत सरकार उन्हें गरीब बच्चों की जिन्दगी बनाने के लिए चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि वह बापू की जन्मभूमि से बापू की कर्मभूमि पर आए हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “इस चुनाव में इन लोगों के पास मोदी को गाली देने सिवाय कोई मुद्दा नहीं है। कोई कह रहा है कि मोदी की कब्र खोदेंगे, कोई कह रहा है कि गाड़ देंगे, कॉन्ग्रेस के शहजादे मोदी की आँखों में आंसू देखना चाहते हैं। INDI वालों की इच्छा से अब देश नहीं चलता।”

राम मंदिर को लेकर भी पीएम मोदी ने यहाँ कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंदिर वालों ने इनके घर जाकर निमन्त्रण दिया और उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने लालू यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि इन लोगो को जेल से बाहर आए व्यक्ति के घर खाना पकाने की फुर्सत है लेकिन मंदिर जाने की फुर्सत नहीं है। उन्होंने बिहार के जंगलराज को लेकर भी राजद को निशाने पर लिया और कहा कि राजद ने केवल कट्टा और अपहरण का उद्योग दिया।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि अगर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर नहीं होते तो जवाहर लाल नेहरू SC/ST को आरक्षण नहीं मिलने देते। उन्होंने कहा कि गाँधी परिवार के लोगों ने आरक्षण का विरोध किया और उनके पास एक ही वोटबैंक उनके पास बचा है।

3 दिन का उपवास रखकर जुबान फिसलने का प्रायश्वित करेंगे संबित पात्रा, कहा- मैं महाप्रभु जगन्नाथ का भक्त, अनजाने में हुई भूल पर माँग चुके हैं क्षमा

भाजपा नेता संबित पात्रा ने अपने एक हालिया बयान को लेकर माफ़ी माँगी है। इस बयान में उनके मुंह से निकल गया था कि भगवान जगन्नाथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भक्त हैं। उन्होंने निर्णय लिया है कि अपने बयान पर भगवान जगन्नाथ से माफ़ी माँगने के लिए वह तीन दिन का उपवास रखेंगे। उन्होंने कहा है कि उसने यह भूल अनजाने में हुई है।

संबित पात्रा ने मीडिया को बताया, “मेरा एक बयान विवादित हो गया, आज पीएम मोदी का पुरी में भव्य रोड शो हुआ है। रोड शो जब समाप्त हुआ, सफल हुआ, तब मैंने 15-16 मीडिया चैनल को बाईट दी। हर जगह मैंने यही बताया कि प्रधानमंत्री मोदी महाप्रभु जगन्नाथ के बड़े भक्त हैं। अहमदाबाद में बतौर मुख्यमंत्री और उससे पहले भी जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की है। हर चैनल में मैंने यही बात कही। आखिर में जब एक चैनल को बाईट देते समय मैंने इसका उलटा कह दिया।”

पात्रा ने आगे बताया, “मैंने कह दिया कि भगवान् जगन्नाथ पीएम मोदी के भक्त हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता है, कोई मनुष्य सही हालत में ऐसा कोई नहीं कह सकता कि किसी मनुष्य के भक्त भगवान होंगे। मैंने यह बयान काफी शोरगुल और गर्मी के बीच दिया था। इस बयान से कुछ लोग जरूर आहत होंगे। मेरी मंशा बिलकुल भी वो नहीं थी। मुझे अनजाने में हुई इस गलती के लिए महाप्रभु से क्षमा याचना करनी चाहिए और मैंने निर्णय लिया है कि मैं तीन दिन का उपवास करूँगा।”

संबित पात्रा ने यह बयान सोमवार (20 मई, 2024) को पीएम मोदी के पुरी में किए गए रोड शो के बाद दिया था। इस पर ओडिशा के मुख्यमंत्री ने इस पर कहा था कि इससे करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्हें इसे निंदा के लायक बताया था। संबित पात्रा ने उनकी इस बात का जवाब भी दिया था। संबित पात्रा ने इसका जवाब देते हुए अपनी गलती मानी थी और कहा था कि उनकी जुबान फिसल गई जिस कारण से उन्होंने भगवान जगन्नाथ को पीएम मोदी का भक्त बता दिया। उन्होंने इस को लेकर विवाद ना खड़ा करने की बात कही।

भाजपा के प्रवक्ता और बड़े नेता संबित पात्रा इस इस बार पुरी लोकसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2019 में भी पुरी से ही चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। चुनाव में हार के बाद से लगातार वह जमीन पर मेहनत कर रहे थे। उनके समर्थन में ही पीएम मोदी ने यह रोड शो किया जिसके बाद गलती से यह बयान उन्होंने दे दिया।

मतदान के दिन लालू की बेटी रोहिणी आचार्य को बूथ से पड़ा था लौटना, अगली सुबह बिहार के छपरा में गिर गई 1 लाश: खूनी संघर्ष के बाद इंटरनेट बंद

बिहार के छपरा में चुनावी हिंसा में एक की मौत की खबर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार 21 मई 2024 को बीजेपी और राजद समर्थकों के बीच टकराव हुआ। फायरिंग हुई।

हिंसा की यह घटना उसी इलाके में हुई है, जहाँ के एक बूथ से रोहिणी आचार्य को मतदान के दिन (20 मई) विरोध के बाद लौटना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी, सारण की सीट से राजद उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला बीजेपी के राजीव प्रताप रुडी से है।

छपरा में हुई हिंसा को लेकर आई जानकारी बताती है कि भाजपा और राजद समर्थकों ने न केवल हाथापाई की बल्कि काँच की बोतल से एक दूसरे पर हमला किया और फायरिंग की गई। घटना में एक की मौत हो गई जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। उन्हें पटना रेफर किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरा मामाल भिखारी ठाकुर चौक का है। इस झड़प के बाद पूरे जिले को हाई अलर्ट कर दिया गया है। अब पुलिस चप्पे-चप्पे पर गश्त कर रही है। स्थिति नियंत्रित रखने के लिए पूरे जिले से 48 घंटे के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया है। वहीं शांति व्यवस्था बनाने के लिए काम हो रहा है। पुलिस एसपी गौरव मंगला ने घटना की जानकारी देते हुए शांति अपील की। साथ ही आरोपित को पकड़ने का आश्वासन दिया।

बता दें कि सारण की लोकसभा सीट की राजद प्रत्याशी एक बूथ पर सोमवार (20 मई 2024) शाम को पहुँचीं थी, लेकिन यहाँ किन्हीं कारणों से इनका विरोध हुआ और बाद में इन्हें बूथ से लौटना पड़ा। इस घटना की अगली सुबह ही मीडिया में खबर आई कि भाजपा और राजद के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसमें एक की मौत हो गई है वहीं दो बुरी तरह गोली लगने से घायल हैं।

मृतक की पहचान 26 साल के चंदन राय के तौर पर हुई है। वह तेलपा के रहने वाले थे। वहीं घायलों में शंभू राय के 30 वर्षीय पुत्र गुड्डू राय और विदेशी राय के 40 वर्षीय पुत्र मनोज राय भी शामिल हैं। इनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा था। बाद में इन्हें पीएमसीएच रेफर किया गया। इनमें मनोज के जहाँ कमर में गोली लगी हुई है तो वहीं गुड्डू के सिर में गोली लगी है। घटना के बाद पूर्व मंत्री भी इनसे मिलने पहुँचे।