Home Blog Page 928

नाजिम ने राहुल बन नाबालिग हिंदू लड़की को फाँसा और ले भागा मुंबई: धर्मांतरण कर निकाह की थी तैयारी, साजिश में अम्मी नूरजहाँ भी शामिल

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ खुद को राहुल सिंह बताकर नाज़िम अली ने एक हिन्दू नाबालिग लड़की को अपने जाल में फँसा लिया और फिर उसे लेकर मुंबई चला गया। मुंबई में पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा कर निकाह की तैयारी की जा रही थी। उसके आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलवाने की भी कोशिश हुई।

इस पूरी साजिश में नाजिम की अम्मी नूरजहाँ भी शामिल बताई जा रही है और उसने भी अपने बेटे का भरपूर साथ दिया। पुलिस ने नाबालिग लड़की को बरामद कर लिया है। वहीं, 17 मई 2024 को पुलिस ने नाजिम अली को गिरफ्तार कर लिया है। साजिश में शामिल नाजिम की अम्मी नूरजहाँ की भी जाँच की जा रही है। लड़की की माँ के अनुसार, उसकी बेटी की उम्र 16 साल है।

यह मामला मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र का है। यहाँ 7 मई 2024 को पीड़िता की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता की माँ ने बताया कि उसकी 16 साल की बेटी को राहुल सिंह उर्फ़ नाज़िम अली बहला-फुसला कर अपने साथ कहीं भगा ले गया है। पप्पू अली का बेटा नाजिम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का रहने वाला है।

पीड़ित माँ ने अपनी बेटी की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं कुछ पता नहीं चल पाया। आखिरकार उसने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 व 363 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, नाजिम पीड़िता के घर के बगल में रहने के लिए 6 महीने पहले आया था।

उसने खुद को राहुल सिंह बताकर लड़की से दोस्ती की थी। कुछ ही समय में नाजिम ने लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। इसके बाद 7 मई 2024 को नाजिम अली लड़की को बहका कर अपने साथ लेकर फरार हो गया। भदोही से वह सीधे मुंबई पहुँचा। इधर लड़की को न पाकर उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू की। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाजिम अली मुंबई में पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा कर उससे निकाह करने की तैयारी कर रहा था। उसने कोर्ट मैरिज करके पेपर भी बनवाने शुरू कर दिए थे। नाजिम लड़की के आधार कार्ड में भी उसकी उम्र बढ़वाना चाहता था। इसके लिए वह मुंबई के एक आधार कार्ड सेंटर पर भी गया था। पीड़िता के आधार कार्ड में उसकी माँ का मोबाइल नंबर दर्ज है।

आधार कार्ड में एडिटिंग के दौरान OTP लड़की की माँ के फोन पर पहुँच गया। आधार कार्ड सेंटर वाले व्यक्ति ने OTP पूछने के लिए लड़की की माँ को कॉल कर दिया। इसके बाद पीड़ित माँ ने इसके बारे में पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने उसके खिलाफ जाल बिछाया और आखिरकार 17 मई को नाजिम किसी काम से मिर्जापुर आया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता को बरामद कर के उसकी काउंसिलिंग और मेडिकल परीक्षण करवाई गई है। लड़की का कोर्ट में बयान भी दर्ज करवाया गया। कोर्ट में दर्ज बयानों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। जाँच के दौरान पुलिस को नाजिम की अम्मी की भी भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस इस मामले में सबूतों की तलाश करते हुए आगे की कार्रवाई में जुटी है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

‘अवैध काम करने का दबाव, फर्जी केस दर्ज करने का आदेश’: भगवंत मान सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुँचे पंजाब के पूर्व DGP, बोले – बाहरी लोगों को सुरक्षा देने को कहा

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पूर्व डीजीपी विरेश कुमार भावरा को जमकर प्रताड़ित किया। उनपर फर्जी केस दर्ज करने के लिए दबाव डाला। यही नहीं, राज्य के बाहर के लोगों को सुरक्षा देने के लिए कहा, ये जानते हुए भी कि ये सब गलत है। इसके बावजूद भगवंत मान की पंजाब सरकार ने ये काम किए। यही नहीं, जैसे ही भगवंत मान की सरकार बनी, वैसे ही सरकार ने उनसे कहा कि वो इस्तीफा दे दें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में जस्टिस दीपक सिब्बल और जस्टिस दीपक मनचंदा की बेंच के समक्ष याचिका दाखिल कर पंजाब के पूर्व डीजीपी विरेश कुमार भावरा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में सत्ता में आते ही भगवंत मान सरकार ने उनसे कहा था कि वे इस्तीफा दे दें। इसके साथ ही उन्होंने मुझसे अवैध कामों को करने को कहा था। महत्वपूर्ण लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने को भी कहा गया।

अपनी याचिका में विरेश ने कहा है कि ‘ इस सरकार ने मार्च 2022 में सत्ता संभाली थी। उसके बाद से ही मेरे ऊपर दबाव था कि पद छोड़ दूँ। डीजीपी ने कहा कि इस सरकार ने आते ही उन्हें पद से हटा दिया। उसने ऐसा करते समय ट्रांसफर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किए गए नियमों का भी उल्लंघन किया।

हाई कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की है। इस केस में मौजूदा डीजीपी गौरव यादव को भी पार्टी बनाया गया है। भावरा ने कहा कि इस सरकार ने जैसे ही चार्ज लिया तो मेरे ऊपर दबाव बनाया जाने लगा कि पद से इस्तीफा दे दूँ। ऐसा दबाव महज इसलिए डाला जा रहा था क्योंकि उनकी नियुक्ति पिछली सरकार ने की थी। उन्होंने कहा कि मेरी नियुक्ति एकदम वैध थी। यूपीएससी की ओर से तय नियमों के आधार पर ही मुझे डीजीपी बनाया गया था। लेकिन उस वक्त किसी नियम का पालन नहीं हुआ, जब मुझे जबरदस्ती पद से हटा दिया गया।

डीजीपी ने इस दौरान यह भी दावा किया कि पंजाब सरकार ने उन पर दबाव डाला था कि राज्य के बाहर के भी कुछ लोगों को पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान की जाए। ऐसा करना गलत था, लेकिन दबाव डाला गया। भावरा ने कहा कि इस सरकार को पता चल गया था कि मैं उनके दबाव में नहीं आऊँगा। फिर इन लोगों ने जून 2022 से मुझे हटाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और बाद में राज्य सुरक्षा सलाहकार के पद पर नियुक्ति दी गई।

‘प्राइवेसी सिर्फ जेंडर-सेक्सुअल ही नहीं, आध्यात्मिक भी’: जानिए क्या है ‘अंगप्रदक्षिणम’ प्रथा जिसपर लगी रोक हाईकोर्ट ने हटाई, कहा- प्रशासन नहीं रोक सकता

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार में जैसे लिंग और यौन रुझान शामिल होते हैं, वैसे ही आध्यात्मिक रुझान भी शामिल होते हैं। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा कि किसी को अपने धर्म का पालन किसी भी तरीके से करने का अधिकार है। यह मामला अंगप्रदक्षिण से संबंधित है, जिसमें ब्राह्मण केले के पत्ते खाना खाते हैं और भक्त उस झूठे पत्तल पर लोटते हैं।

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा, “किसी व्यक्ति पर यह निर्भर करता है कि वह इस रुझान को उस तरीके से व्यक्त कर सके जैसा वह उचित समझे। हाँ, इससे दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रता पर असर नहीं पड़ना चाहिए। जब तक इस सीमा को पार नहीं किया जाता, तब तक राज्य या अदालतों के लिए कार्रवाई में करना संभव नहीं है।”

अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार परिस्थितियों पर लागू होता है। किसी व्यक्ति की निजता का अधिकार उनकी जीवनशैली के बारे में उनके द्वारा चुने गए विकल्पों में अंतर्निहित है और यह अधिकार केवल इसलिए समाप्त या परिवर्तित नहीं होता है, क्योंकि वे सार्वजनिक स्थान पर होते थे। अदालत ने आगे कहा कि अंगप्रदक्षिणम संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) द्वारा परिभाषित पूरे देश में यात्रा करने की स्वतंत्रता का हिस्सा है।

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा है कि याचिकाकर्ता को अंगप्रदक्षिणम करने की अनुमति दी गई थी और अधिकारी इसे रोक नहीं सकते थे। अदालत ने आगे कहा, “पुलिस का कर्तव्य है कि याचिकाकर्ता को उसके मौलिक अधिकारों का प्रयोग करने में समर्थन दिया जाए और उसके रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा को हटाया जाए।”

अदालत ने कहा, “आध्यात्मिक रीति-रिवाजों के संबंध में याचिकाकर्ता की आस्था एवं विश्वास को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। मेहमानों (ब्राह्मणों) के खाने के बाद केले के पत्तों पर अंगप्रदक्षिणम करना श्री सदाशिव ब्रह्मेंद्रल के भक्तों द्वारा उच्च धार्मिक पूजा का कार्य है। यह अधिकार संविधान के भाग III [अनुच्छेद 14, 19(1)(ए), 19(1)(डी), 21 और अनुच्छेद 25(1)] द्वारा संरक्षित है।”

दरअसल, साल 2015 में मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने एक आदेश जारी कर किसी को भी अंगप्रदक्षिणम आयोजित करने से रोक दिया था। उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने कहा था कि अदालत का काम किसी के धर्म में हस्तक्षेप करना नहीं है, लेकिन धर्म के नाम पर किसी भी प्रथा या रीति-रिवाज का पालन करके किसी भी इंसान को अमानवीय बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसके बाद करूर जिले के मनमंगलम तालुक के नेरूर गाँव में स्थित श्री सदाशिव ब्रह्मेंद्रल नाम के संत के जीवन समाधि दिवस पर होने वाली 120 साल पुरानी इस रस्म को साल 2015 में बंद करना पड़ा था।वर्तमान उदाहरण में याचिकाकर्ता अंगप्रदक्षिणम करने की अनुमति माँगने के लिए अदालत के समक्ष आया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार होना चाहिए।

‘ये दुर्घटना नहीं हत्या है’: अनीस और अश्विनी का शव घर पहुँचते ही मची चीख-पुकार, कोर्ट ने पब संचालकों को पुलिस कस्टडी में भेजा

मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बीरसिंहपुर में मंगलवार (21 मई, 2024) को तड़के सुबह 3 बजे एक एम्बुलेंस पहुँची, जिसके बाद एक परिवार में चीख-पुकार मच गई। असल में इस एम्बुलेंस में पुणे से अनीस अवधिया की लाश लाई गई थी। अनीस अवधिया पुणे में बतौर IT इंजीनियर कार्यरत थे और उन 2 मृतकों में शामिल हैं, जिन्हें पुणे के बिल्डर के बेटे ने अपनी पोर्शे कार से कुचल कर मार डाला। इस घटना में अनीस अवधिया की मित्र अश्विनी कोस्टा की भी मौत हो गई जो बाइक पर उनके पीछे बैठी थी।

अनीस के दादा आत्माराम अवधिया ने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वाले किशोर को जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने इसे पूर्ण रूप से गलत बताते हुए कहा कि परिवार कड़ी सज़ा की माँग करता है। उन्होंने आरोपित की जमानत रद्द करने की भी माँग की। अनीस के परिवार में लोगों को एक-दूसरे को ढाँढस बँधाते और रोते हुए देखा गया। चाचा अखिलेश अवधिया ने कहा कि उक्त किशोर शराब पीकर 240 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से कार चला रहा था।

उन्होंने कहा कि ये दुर्घटना नहीं, हत्या है। उन्होंने कहा कि उक्त किशोर के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं था। उधर अश्विनी कोस्टा का शव भी जबलपुर स्थित उनके आवास पर पहुँच चुका है। उनके चाचा जुगलकिशोर कोष्टा ने कहा कि परिवार व्यथित है, आरोपित को मात्र 15 घंटे में जमानत दे दी गई। उन्होंने कहा कि उस लड़के और उसके अभिभावकों की जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अश्विनी के बड़े सपने थे, वो अपने माता-पिता को गर्वित करना चाहती थीं।

अश्विनी के परिवार ने कहा कि वो अंत तक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। अश्विनी कोस्टा के एक अन्य चाचा सचिन बोकडे ने कहा कि उस लड़की ने अभी अपने जीवन में कुछ देखा भी नहीं था, और उसे मार डाला गया। उधर इस मामले में कोर्ट ने 3 लोगों को 24 मई तक के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। इनमें Cosie रेस्टॉरेंट के मालिक प्रह्लाद भुतडा, मैनेजर सचिन काटकर और होटल Blak के मैनेजर संदीप सांगले शामिल हैं। इन्होंने नाबालिगों को शराब परोसी थी। नाबालिग के पिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘धर्म परिवर्तन कराकर तुमसे ही करेंगे निकाह’: हिंदू छात्रा का साथियों संग पीछा करता था जुनैद, इस्लाम नहीं कबूलने पर एसिड अटैक की देता था धमकी; लोगों ने पकड़कर पीटा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में परीक्षा देने गई एक हिन्दू छात्रा का मुस्लिम युवकों ने पीछा किया और रास्ते में खींचने की कोशिश की। इतना ही नहीं, आरोपित पीड़िता के घर तक पहुँच गए और वहाँ जमकर हंगामा भी किया। आरोपितों में मोहम्मद जुनैद, साहिल और दो अन्य आरोपित शामिल हैं। लोगों ने छेड़खानी कर रहे इन दोनों मनचलों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है।

कहा जा रहा है कि पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का भी दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर के तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (20 मई 2024) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अलीगढ़ के थानाक्षेत्र क्वार्सी की है। युवती बीएड का पेपर देने के लिए छर्रा जाती थी। इस दौरान जुनैद और साहिल उसका पीछा करते थे।

सोमवार (20 मई 2024) को युवती की बीएड की अंतिम परीक्षा थी। वह परीक्षा देने छर्रा इलाके के कॉलेज में गई थी। रास्ते में जुनैद ने अपने दोनों साथियों के साथ उसका पीछा किया। वे लड़की के घर तक पहुँच गए। यहाँ उन्होंने पीड़िता और परिजनों से अभद्रता भी शुरू कर दी। शोरगुल की आवाज सुनकर आसपास के लोगों ने जुनैद, साहिल और तीसरे युवक विवेक प्रसाद को पकड़कर धुन दिया।

इसके बाद तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। अलीगढ़ निवासी जुनैद दिल्ली में रहता है। पीड़िता के ताऊ ने मीडिया को बताया कि उसकी भतीजी को आरोपित काफी दिनों से परेशान कर रहे थे। जुनैद पीड़िता पर उससे निकाह करने का दबाव बना रहा था। इससे पहले वह लड़की को इस्लाम कबूल करवाना चाहता था। ताऊ ने आरोप लगाया कि जुनैद पीड़िता के चेहरे पर तेज़ाब फेंकने की भी धमकी दी थी।

लड़की के ताऊ का कहना है कि छेड़छाड़ और इन धमकियों के कारण उनकी बेटी हमेशा गुमशुम और परेशान रहती थी। वह टेंशन में रहा करती थी। इस कारण से उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। जुनैद की करतूत को लव जिहाद बताते हुए पीड़िता के परिजनों ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। लड़की के परिजनों ने धर्मान्तरण की घटनाओं को रोकने की भी माँग उठाई है।

घटना की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के सदस्य विरोध में क्वार्सी थाने पहुँच गए। उन्होंने बताया कि आरोपित आए दिन लड़की का पीछा कर रहे थे। पीड़िता को धमकाने के साथ आरोपित हिन्दू धर्म पर अभद्र टिप्पणियाँ किया करते थे। 20 मई को तीन आरोपित लड़की का छर्रा से पीछा करते हुए अलीगढ़ तक पहुँच गए। आरोपितों से डरकर लड़की घर में घुस गई तो तीनों गली में ही रुक गए।

हिंदू संगठन के सदस्यों का कहना है कि शाम तक जब लड़की घर से बाहर नहीं निकली तो सभी आरोपित उसके घर में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान आरोपितों ने पीड़िता से कहा, “आज तुझे यहाँ से हिजाब पहनाकर ले जाएँगे। तेरा धर्म परिवर्तन करेंगे। शादी तो तुझ ही से करेंगे।” इस दरौान शोरगुल सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। उन्होंने तीनों आरोपितों को दबोचा लिया।

पकड़े गए युवकों की धुनाई करने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया गया। हिन्दू संगठनों ने आशंका जताई है कि आरोपितों के पास अवैध हथियार भी रहे होंगे। FIR में एक अन्य अज्ञात आरोपित भी दर्ज है। इन सभी पर IPC की धारा 298, 354 (ख) और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा जा रहा है। मौके पर हालत सामान्य हैं।

ममता बनर्जी पर की टिप्पणी, अब 24 घंटे प्रचार नहीं कर पाएँगे BJP उम्मीदवार: चुनाव आयोग ने लगाई रोक, HC के जस्टिस रह चुके हैं अभिजीत गंगोपाध्याय

कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज और तमलुक सीट से बीजेपी उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय पर चुनाव आयोग ने 24 घंटों का बैन लगा दिया है। अब वो 24 घंटे प्रचार नहीं कर पाएँगे। उनके खिलाफ टीएमसी ने शिकायत की थी और सीएम ममता बनर्जी पर अमर्यादित टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग ने जो आदेश दिया है, उसमें बीजेपी उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय 21 मई की शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। यही नहीं, चुनाव आयोग ने गंगोपाध्याय को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतने की भी सख्त चेतावनी दी है। चुनाव आयोग ने अभिजीत की टिप्पणियों की निंदा की और इसे निम्न स्तर का व्यक्तिगत हमला और महिलाओं का सीधा अपमान बताया है।

चुनाव आयोग ने कहा कि अभिजीत गंगोपाध्याय का ऐसा बयान जो किसी भी महिला के संबंध में उपयोग किए जाने पर पूरी तरह से निंदनीय है। किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता की बात छोड़िए, एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को निशाना बनाया गया है।

इस मामले में चुनाव आयोग ने अभिजीत को नोटिस भेजकर जवाब माँगा था। उनके जवाब को चुनाव आयोग ने संतोषजनक नहीं पाया। चुनाव आयोग ने कहा कि इस तरह के घृणित शब्द अभिजीत गंगोपाध्याय की एजुकेशनल और प्रोफेशनल बैकग्राउंड से जुड़े व्यक्ति ने कहे हैं, इसलिए वो किसी भी लाभ के हकदार नहीं हैं।

टीएमसी के दावे को लेकर ममता बनर्जी को बनाया था निशाना

आजतक के मुताबिक, अभिजीत गंगोपाध्याय ने 15 मई को हल्दिया में चुनावी सभा को संबोधित किया था और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर विवादित टिप्पणी की थी। कथित वीडियो में अभिजीत को हालिया संदेशखाली स्टिंग का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी की ‘कीमत’ पर सवाल उठाते सुना जा रहा है। इस वीडियो में अभिजीत कहते हैं कि ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस का कहना है कि रेखा पात्रा (बीजेपी की संदेशखाली उम्मीदवार) को 2,000 रुपये में खरीदा गया है। आपकी कीमत क्या है, ममता बनर्जी?”

उन्होंने आगे कहा था कि’ यदि आपको 8 लाख रुपये दिए जाते हैं तो आप एक नौकरी देती हैं। यदि आपको 10 लाख रुपये दिए जाते हैं तो आप एक नौकरी देती हैं। राशन दूसरे देश ले जाया जाता है… क्या आपकी कीमत 10 लाख रुपये है? क्या रेखा पात्रा को खरीदना आसान है, क्योंकि वो गरीब है? अभिजीत ने आगे सवाल किया कि एक महिला दूसरी महिला पर ऐसे आरोप कैसे लगा सकती है। क्या वह (ममता बनर्जी) भी एक महिला हैं?’

कहीं बहन से भाई कर रहा रेप, कहीं सेक्स के लिए पाटर्नर हो रहे वहशी: रिश्तों को खा रहा पोर्न की सुलभता, छोटी उम्र में ही छीन रहा बचपना

टेक्नॉलजी की सुलभता ने पोर्न देखने को जितना सामान्य बना दिया है उसके दुष्परिणामों से चाहकर भी अब निजात नहीं पाई जा सकती। मोबाइल, लैपटॉप पर इसका एक्सेस इतना सरल है कि परिवार वाले कितना ही बचा लें पर छोटे से छोटा बच्चा जब चाहे इसे देख सकता है। इसके परिणाम इतने घातक होते हैं कि इसका लती धीरे-धीरे मानसिक रूप से बीमार हो जाता है और रिश्तों का लिहाज उसके भीतर शून्य रह जाता है। 

उदाहरण एकदम ताजा है। मुंबई में दो नाबालिग भाई (13) – बहन (15) साथ में बैठकर पोर्न देखे। इसके बाद दोनों की सेक्स करने की इच्छा हुई। पहली बार में नाकाम हुए तो अगली बार भाई ने फिर करने को कहा। बहन मना करती रही, मगर भाई ने उसका रेप कर दिया। मामला तब खुला जब परिजन बच्ची का अबॉर्शन कराने अस्पताल गए।

है न ये ऐसा मामला जिसे सुनकर घिन्न आ जाए? दुर्भाग्य ये है कि ये कोई अकेली घटना नहीं है-

  • उत्तर प्रदेश में कासगंज में 19 साल का लड़का अपनी 17 साल की बहन के रेप के आरोप में पकड़ा गया, पूछने पर पता चला कि उसका ये सब करने का मन पोर्न देखने के बाद हुआ था। 
  • हाल में गाजियाबाद में दो लड़के गिरफ्तार हुए। 20 और 23 साल के। खबरों की मानें तो दोनों भाई अपनी ही 14 साल की छोटी बहन का एक साल से यौन उत्पीड़न कर रहे थे। बच्ची अगर प्रेगनेंट नहीं होती तो शायद ये मामला कभी नहीं खुलता।
  • फरवरी माह में मध्यप्रदेश के छतरपुर से खबर आई थी कि एक 9 साल की नाबालिग के साथ उसके पिता ने रेप कर दिया। पूछताछ हुई तो पता चला कि पिता को पोर्न देखने की आदत है इसी के चलते उसने अपनी हवस का शिकार मासूम बच्ची को बनाया।
  • झाँसी में 36 साल के चाचा ने इस गंदी लत की वजह से अपनी 17 साल की भतीजी की अस्मत लूटी और बाद में उसकी पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। 
  • गाजियाबाद में कैला भट्टा चौकी में एक मामा ने अपनी भांजी को अकेले पाकर उसका दुष्कर्म किया और बाद में उसकी जान ले ली। छानबीन में पता चला कि जब घटना को अंजाम दिया तो वो घर में अकेला बैठ पोर्न देख रहा था। उसी बीच बच्ची उसके पास पहुँच गई और इसलिए उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

आप अगर ऊपर दिए गए सारे उदाहरणों को ध्यान से देखेंगे तो पता चलेगा कि हर घटना में आरोपित और पीड़ित के बीच एक पारिवारिक रिश्ता है। ऐसा रिश्ता जो सामान्य तौर पर सबसे करीबी संबंध माना जाता हैं… चाहे पिता हो, भाई हो, मामा हो या चाचा हो… एक समय था जब इन रिश्तों के बारे में सोच कर लोगों के मन में सुरक्षा का भाव उमड़ जाता था… लेकिन वहीं अब ये समय है जब ऐसी खबरें पढ़ते हुए घरवाले हैरान होते हैं और हर रिश्ते को संदेह नजर से देखते मिलते हैं।

हम चाहें तो इस स्थिति के लिए समाज में बढ़ रहे पाश्चत्य प्रभाव को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ हमें कहीं न कहीं खुद भी मानना होगा कि इन सबमें गलतियाँ हमारी है। पहली तो हमने अपने अपने परिवारों को छोटा करने की चाह में जिस तरह रिश्तों में कटौती करनी शुरू की, उसी का नतीजा है कि अब की पीढ़ी उन रिश्तों की अहमियत को ही नहीं समझती। दूसरी ओर, हम तकनीक की ओर ऐसा झुकते गए कि अब हमें खुद नहीं मालूम है कि इससे उबरना कैसे है। दिन पर दिन पर इस पर आश्रित होते हमारे रवैये ने हमें परिवारों से दूर कर दिया और सही-गलत में फर्क करने वाली समझ को खत्म कर दिया।

सोचिए कभी ऐसा हो सकता था कि भाई-बहन एक दूसरे के साथ बैठ पोर्न देखें या सेक्स करें…नहीं, मगर अब ऐसा होता है और ऐसी स्थिति ही इसलिए पैदा हुई है क्योंकि तकनीक के कारण और परिवार से दूरियों के चलते बच्चे पोर्न में ज्यादा रुचि दिखाने लगे हैं। वहीं वो माता-पिता जिनके पास अपने बच्चों को देखने का भी समय नहीं वो सेक्स एजुकेशन के नाम पर बच्चों के पोर्न देखता देख लें तो उन्हें समझाने की बजाय उनकी इस हरकत को ये कहकर जस्टिफाई करते हैं- ‘आज के समय में तो बच्चों को सब पता ही है उन्हें क्या रोकना और क्या समझाना।’ इसके अलाव कुछ ओवर प्रोग्रेसिव माता-पिता पोर्न को सेक्स एजुकेशन लेने का जरिया मानते हैं और सोचते है इससे बच्चे की सोच ह्यूमन बॉडी के लिए डेवलप होगी।

उनकी इस आधुनिक सोच का नतीजा होता है कि बच्चा धीरे-धीरे उनसे दूर होकर अलग दुनिया में खोने लगता है और फिर वो खुद समाज के लिए जो कोढ़ बनकर उभरता है, उसके कारण ऐसी स्थिति पैदा होती है।

बच्चे पर प्रभाव

इंटरनेट पर सर्च करने पर ऐसे लेख मिलते हैं जो बताते हैं कि पोर्न देखने की लत एक बच्चे को पहले उसके परिवार से दूर करती है और मानसिक रूप से कमजोर बनाती है। क्रमानुसार समझें तो जब बच्चा पोर्न देखना शुरू करता है तो उसे पता होता है ये गलत है इसलिए वो माता-पिता की नजरों से बचना शुरू करता है…और इस तरह एक ही छत के नीचे रहकर परिवार से उसकी दूरियाँ बढ़़ने लगती है। फिर यदि उस पर रोक-टोक हो तो वो घर में चिल्लाने या अपने बड़ों से लड़ने पर भी गुरेज नहीं करता…वो इतना टॉक्सिक हो जाता है कि कोई सामान्य बात भी हो तो उसे चिड़चिड़ापन रहता है।

ऐसी प्रवृत्ति सिर्फ खुद के घरेलू संबंध नहीं बिगाड़ती बल्कि शरीर पर भी बुरे प्रभाव दिखाती है, जिसके कारण कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त ये लत भीतर से इंसानियत खत्म कर देती है। नतीजा भाई-बहन का लिहाज नहीं करता, पिता-बेटी का, मामा अपनी भाँजी का। वहीं सिर्फ निजी जीवन की बात करें तो लोग ऐसी वीडियो देखने के बाद उसे अपने पार्टनर पर आजमाने की कोशिश करते हैं और तरह-तरह से पार्टनर को टॉर्चर किया जाता है।

इन तमाम बातों के बावजूद आपको अपने आसपास ऐसे लोग ये कहते हुए मिल जाएँगे कि पोर्न देखना गलत नहीं बशर्ते उसके नकारात्मक प्रभाव शरीर पर न पड़ें… सोचिए एक ऐसा समाज जहाँ लोग फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे जैसी फिल्में देखकर दोस्त का रेप करते हैं, पत्नी को प्रताड़ित करने लगते हैं… क्या उस समाज में ऐसा संभव है कि पोर्न का असर न पड़े। वर्तमान स्थिति में जब पोर्न का एक्सेस इतना आसान है और लोग अपने परिजनों से दूर हैं तो ये असंभव है कि इसका कोई पॉजिटिव इफेक्ट लोगों में देखने को मिले। असर अगर देखने को मिलता है तो वो सिर्फ इतना ही जितना हम खबरों में अब पढ़ते हैं। फर्क ये है कि कुछ घटनाएँ मीडिया में आने लगी हैं और कुछ अब भी प्रकाश में नहीं आतीं।

बाथरूम में महिलाओं का वीडियो बना रहा था कॉन्ग्रेस का युवा नेता आशिक बदरुद्दीन, पुलिस ने किया गिरफ्तार: केरल की घटना

केरल के कोल्लम में आशिक बदरुद्दीन नाम के एक स्थानीय कॉन्ग्रेस युवा नेता को बाथरूम में कैमरा रख महिलाओं के वीडियो बनाने करने आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थेनमाला में टॉयलेट संचालक के रूप में काम करने कॉन्ग्रेस के स्थाने युवा नेता आशिक बदरुद्दीन के खिलाफ महिलाओं ने वीडियो बनाने के प्रयास करने की शिकायत की थी। इसके बाद उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

वीडियो बनाने के मामले में गिरफ्तार हुआ आशिक बदरुद्दीन पुनालुर ब्लॉक में यूथ कॉन्ग्रेस का महासचिव है। महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस ने बदरुद्दीन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। साथ ही पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशिक (30) थेनमाला डैम में टॉयलेट ऑपरेटर के तौर पर काम करता है। उसने कथित तौर पर महिलाओं के शौचालय के अंदर एक कैमरा लगा दिया था। 21 मई को तिरुवनंतपुरम से घूमने आई कुछ लड़कियों की नजर कैमरे पर पड़ी और उन्होंने आशिक बदरुद्दीन के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में आशिक को अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

जहाँ से लड़ रही लालू की बेटी, वहाँ यूँ ही नहीं हुई हिंसा: रामचरितमानस को गाली और ‘ठाकुर का कुआँ’ से ही शुरू हो गई थी पटकथा, अपनी शादी ही याद कर लें रोहिणी आचार्य

बिहार में 1990-2005 के बीच 15 वर्षों का एक ऐसा दौर था, जब हिंसा ही राज्य की पहचान बन चुकी थी। इसके बाद नीतीश कुमार की सरकार बनी और शुरुआती 8 वर्षों में उन्होंने जिस तरह से काम किया, उसके बाद अपराध थमा और विकास की गति बढ़ी। हाँ, 2013 के अंतिम महीनों में उनके भीतर राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने उबाल मारना शुरू कर दिया और बिहार की राजनीतिक स्थिति डाँवाडोल होती चली गई। हालाँकि, फिर भी जंगलराज के दौर को याद कर लोग आज भी काँप उठते हैं, जब अपहरण-हत्या अपराध नहीं बल्कि उद्योग हुआ करता था।

रोहिणी आचार्य; जिनकी शादी बिहार के आपराधिक इतिहास का हिस्सा

इसी बीच सारण में हिंसा हो गई। वहाँ से लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य RJD की उम्मीदवार हैं। ये वही रोहिणी आचार्य हैं, जिनकी शादी में पटना में नए खुले शोरूम से नई-नई कारें उठा ली गई थीं। अगले दिन हवाई अड्डे पर ‘रोहिणी संग समरेश’ लिखे कारों की लाइन लगी हुई थी। अनुमान है कि करीब 45 कारें उठाई गई थीं। दर्जन भर दुकानों से 100 सोफे सेट और अन्य फर्नीचर लाए गए थे। एक शोरूम से 7 लाख रुपए के डिजाइनर कपड़े उठा लिए गए और 50 किलो ड्राइफ्रूट्स के अलावा खाने-पीने की अन्य सामग्रियाँ भी लूटी गई थीं।

पटना के एक्सहिबिशन रोड पर 2 शोरूम बंद हो गए थे – मिथिला मोटर्स और लॉली सेन। इसका कारण था – रोहिणी आचार्य की शादी। कुछ दिनों बाद टाटा तक ने अपने शोरूम में ताला लगा दिया था। तब लालू यादव के सालों सुभाष और साधु यादव का राज चलता था। सुभाष यादव ने बताया था कि जीजा ने उन्हें ‘राव साहब’ (समरेश के पिता) के स्वागत के लिए कारों की व्यवस्था करने को कहा, जब उन्होंने विधायकों की गाड़ियाँ लाने का सुझाव दिया तो लालू यादव ने मना करते हुए कहा कि नई कारें लेकर आओ।

सारण में हिंसा, जानिए क्या हुआ

अब रोहिणी आचार्य एक बार फिर से विवादों में हैं, हिंसा के केंद्र में उनका नाम है। असल में बिहार के सारण में लोकसभा चुनाव 2024 के 5वें चरण के तहत सोमवार (20 मई, 2024) को मतदान था। इसी दौरान शाम को रोहिणी आचार्य शाम को भिखारी ठाकुर चौक के पास स्थित बूथ संख्या 118 पर पहुँचीं। वहाँ उनका खूब विरोध हुआ। दोनों तरफ से लाठी-डंडे निकल गए, गोलियाँ भी चलीं। आरोप है कि रोहिणी आचार्य अपने समर्थकों के साथ बूथ पर पहुँच कर मतदाताओं से दुर्व्यवहार कर रही थीं।

आक्रोशित भीड़ को देखते हुए रोहिणी आचार्य खुद तो वहाँ से निकल गईं, लेकिन हिंसा को भड़का गईं। अगले दिन मंगलवार को सुबह से ही बवाल शुरू हो गया। 3 लोगों को गोली लगी, जिनमें एक की मौत हो गई है। पुलिस ने इसे RJD और BJP कार्यकर्ताओं के बीच झड़प बताया है। फ़िलहाल जिले में इंटरनेट बंद है। 2 लोग अब भी अस्पताल में हैं। बताया जा रहा है मुख्य विवाद जातीय स्तर पर पहुँच गया था, जहाँ राजपूत और यादव समाज के लोग आपस में भिड़ गए।

सारण लोकसभा सीट: 8 बार लालू-रूडी का कब्ज़ा

सारण (पहले छपरा) लोकसभा सीट बिहार की हॉट सीटों में से एक है, क्योंकि ये राजद सुप्रीमो लालू यादव का गृह क्षेत्र है। वो पहली बार यहीं से 1977 में जीत कर सांसद बने थे। फिर 1989, 2004 और 2009 में वो यहाँ से सांसद बने। इसी तरह भाजपा के राजीव प्रताप रूडी यहाँ हैट्रिक लगाने के लिए उतरे हैं। वो इस सीट से 1996, 1999, 2014 और 2019 में यहाँ से सांसद बने। इसी तरह दोनों बड़े नेता यहाँ से 4-4 बार MP रहे हैं। राजीव प्रताप रूडी राजपूत जाति से आते हैं।

सारण के 6 में से 4 विधानसभा सीटों पर राजद का कब्ज़ा है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। राजीव प्रताप रूडी ने 2014 में यहाँ से बिहार की पूर्व CM और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी को हराया था। वो अमनौर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। वहीं इसी क्षेत्र में परसा भी पड़ता है, जो चन्द्रिका राय का क्षेत्र है। वो राजीव प्रताप रूडी के साथ हैं। लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव से चन्द्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या की शादी हुई थी।

बाद में ऐश्वर्या के साथ दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें घर छोड़ना पड़ा। ऐसे में कहा जा रहा है कि यहाँ के यादव लोग ऐश्वर्या राय के मान-सम्मान को लेकर भी लालू परिवार से नाराज़ हैं। परसा से चन्द्रिका राय 6 बार विधायक बने हैं, उन्होंने कॉन्ग्रेस, निर्दलीय, जनता दल, राजद और जदयू के टिकट पर चुनाव जीते हैं। ऐसे में इस बार काँटे की टक्कर है। ऊपर से लालू यादव की पार्टी की तरफ से जिस तरह के भड़काऊ बयान आए हैं, उससे पता चलता है कि इन सबकी पटकथा काफी पहले से लिखी जा रही थी।

रामचरितमानस को गाली, ‘ठाकुर का कुआँ’: पहले से लिखी जा रही थी पटकथा

सितंबर 2023 में लालू यादव की पार्टी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान ‘ठाकुर की कुआँ’ कविता संसद में पढ़ी, जिस कारण राजद से राजपूत समाज नाराज़ हुआ। उधर आनंद मोहन की तरफ से भी कुछ बयान आए, उनके बेटे चेतन आनंद को लेकर लालू यादव ने नकारात्मक बयान दिया। कुल मिला कर इस मामले को जातिवादी बना दिया गया। हालाँकि, बाद में चेतन आनंद ने पाला बदल कर राजद विधायक होते हुए भी विश्वासमत में नीतीश कुमार के पक्ष में वोट किया और उनकी माँ लवली आनंद को शिवहर से जदयू का लोकसभा टिकट मिला।

ये सारा विवाद तभी शुरू हो गया था जब बिहार के शिक्षा मंत्री रहे राजद नेता चंद्रशेखर यादव ने रामचरितमानस पर नकारात्मक टिप्पणी की थी। जनवरी 2023 में उन्होंने पटना में एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों के मन में तुलसीदास कृत रामकथा के प्रति ज़हर भरा। इसी तरह सितंबर 2023 में उन्होंने रामचरितमानस को पोटैशियम सायनाइड बता दिया। लालू यादव ने खुल कर मनोज झा का समर्थन किया, चंद्रशेखर यादव के साथ भी पार्टी खड़ी रही।

बिहार में NDA में भाजपा, चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास), पशुपति कुमार पारस की RLJP, उपेंद्र कुशवाहा की RLM और जीतन राम माँझी की HAM(S) शामिल है। NDA ने आरोप लगाया है कि जहाँ लालू यादव रहते हैं वहाँ हिंसा होती है, जहाँ ये परिवार हाथ डालता है वहाँ आग लग जाती है। जंगलराज के दौर के बाद इस ताज़ा घटना को देखें तो ये आरोप झूठा नहीं लगता। सारण में रोहिणी आचार्य के पहुँचने के बाद ही हिंसा शुरू हुई।

रोहिणी आचार्य का क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं, विदेश में रहती हैं

रोहिणी आचार्य छपरा में रहती भी नहीं है। छपरा क्या, वो बिहार या भारत में भी नहीं रहतीं। वो रहती हैं सिंगापुर में। चूँकि छपरा उनके पिता का गृह क्षेत्र है और कहा जाता है कि सिंगापुर में रोहिणी आचार्य ने ही अपने पिता को किडनी दी है, ऐसे में लालू यादव को लेकर उनके समर्थकों में जो संवेदना और भावनात्मकता है उसका वो फायदा उठा कर वोट लेना चाहती हैं। हारने के बाद वो फिर सिंगापुर चली जाएँगी। नेता का अर्थ ये थोड़े होता है कि वो हार कर बैठ जाए, वो जमीन पर जनता से संपर्क में रहता है और उनके सुख-दुःख में साथ रहता है।

रोहिणी आचार्य पर ये परिभाषा फिट नहीं बैठती। न तो उनका कोई जमीनी संपर्क रहा है, न वो श्रद्धा-विवाह जैसे कार्यक्रमों में पहुँची हैं, न ही उन्होंने पिछले 5 साल से जमीन पर मेहनत की है, न ही उन्होंने अपने इलाके के समर्थकों से फोन कॉल कर उनका हालचाल पूछा, न ही उन्होंने जमीनी मुद्दों व समस्याओं को समझा, न ही उन्हें ठीक से पूरे क्षेत्र की जानकारी है और न ही इसकी कोई गारंटी है कि जीतने के बाद वो अपने लोकसभा क्षेत्र में जनता को समय देंगी।

रोहिणी आचार्य तो केवल अपने ट्वीट्स के लिए जानी जाती रही हैं, जो वो सिंगापुर में बैठ कर करती रही हैं। जब महागठबंधन टूटा था तो उन्होंने जम कर नीतीश कुमार को खरी-खोटी सुनाई थी, उन्हें ट्वीट्स डिलीट तक करने पड़े थे। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘कचरा’ तक बता दिया था। उनकी एक ही उपलब्धि है और वो ये है कि वो लालू यादव की बेटी हैं। इसी दम पर उन्हें सांसद बनना है। अब लालू परिवार हिंसा और लाशों के सहारे फिर से जीत की राह देख रहा है।

शासन में RJD का प्रभाव, आत्मरक्षा में चली गोली: रूडी

जो भी हो, रामचरितमानस विवाद और ‘ठाकुर का कुआँ’ विवाद से उपजी जातीय घृणा ने लालू यादव की बेटी के क्षेत्र में जंगलराज की यादों को ताज़ा कर दिया है। सारण के भाजपा नेता भी यही आरोप लगा रहे हैं कि लालू परिवार जहाँ भी रहेगा वहाँ इस तरह की वारदातें होंगी ही। सांसद राजीव प्रताप रूडी मानते हैं कि आत्मरक्षा में गोली चली है, उन्होंने पूछा कि 500 लोग घर पर चढ़ आएँगे तो कोई क्या करेगा? उन्होंने रोहिणी आचार्य पर बूथ-बूथ जाकर हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि FIR इसीलिए दर्ज नहीं की गई क्योंकि शासन में अब भी RJD से जुड़े लोगों का कब्ज़ा है।

बिहार में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है, जंगलराज के दौर में ये आम थी। लालू यादव ‘मतपेटी से जिन्न’ निकलने की बातें करते थे, मुख्य चुनाव आयुक्त TN शेषन तक बिहार में निष्पक्ष चुनाव करवाने में नाकामयाब रहे। बूथ लूटा जाना आम बात था। आँकड़े कहते हैं कि 14 वर्षों (1990-2004) के दौरान बिहार में चुनावी हिंसा में 641 मौतें हुईं। 23 वर्षों बाद बिहार में 2002 में पंचायत चुनाव हुए थे, 196 हत्याएँ तो उसी में हो गईं। वहीं 2005-15 के बीच 8 लोगों की मौत हुई बिहार में चुनावी हिंसा में। अंतर आप खुद देख लीजिए।

आजमगढ़ में अखिलेश यादव की सभा में चले ईंट-पत्थर, भगदड़ में कई घायल: फूलपुर से भी अखिलेश-राहुल बिना भाषण दिए लौट गए थे

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवाल (21 मई 2024) को आजमगढ़ की लालगंज लोकसभा सीट पर प्रचार करने पहुँचे थे, जहाँ जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान जमकर ईंट-पत्थर चले और मारपीट भी हुई। इस घटना में कई लोग घायल भी हो गए। अखिलेश यादव आजमगढ़ जिले की लालगंज लोकसभा सीट से दरोगा प्रसाद सरोज के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पहुँचे थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव आजमगढ़ के लालगंज लोकसभा सीट के सरायमीर थाना क्षेत्र में आने वाले खरेमा बाजार में जनसभा करने पहुँछे थे। उनकी जनसभा में भगदड़ मच गई। इस दौरान जनसभा में जमकर ईंट-पत्थर भी चले और कुर्सियाँ चलीं। लोगों के घायल होने की सूचना मिल रही है, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एनबीटी ने इस भगदड़ का वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है।

बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव जैसे ही मंच पर पहुँचे, वैसे ही सपा कार्यकर्ता बेकाबू हो गए। यही नहीं, वो बैरीकेडिंग तोड़कर अखिलेश यादव के मंच की ओर बढ़ने लगे। कार्यकर्ताओं को काबू करने के लिए पुलिस को लाठियाँ भी भाँजनी पड़ी। इस दौरान भगदड़ के साथ ही जमकर ईंट-पत्थर और कुर्सियाँ चलाईं।

इससे पहले, रविवार (19 मई 2024) को आयोजित राहुल गाँधी और अखिलेश यादव की संयुक्त रैली में हंगामा हुआ था। दोनों नेताओं के मंच पर पहुँचते ही समर्थकों ने बेकाबू होकर सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और धक्का-मुक्की की। फूलपुल में भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठी चलाई तो भगदड़ मच गई थी। इस दौरान अखिलेश ने समर्थकों से शांत रहने की भी अपील की, लेकिन उनकी बात का किसी ने ध्यान नहीं दिया। अखिलेश के साथ राहुल ने भी हाथ उठाकर लोगों से शांत रहने की अपील की। बेकाबू भीड़ को रोकने के दौरान पुलिस से भी धक्का-मुक्की की गई।

इतना ही नहीं, जब दोनों नेताओं की बात किसी ने नहीं सुनी तो अखिलेश यादव नाराज हो गए। वे उठे और मंच से जाने लगे। इस दौरान मंच पर मौजूद नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे रूके नहीं और मंच के पीछे बने हेलिपेड की तरफ चल पड़े। अखिलेश यादव के साथ राहुल गाँधी भी मंच से उतर आए। दोनों नेता रैली को संबोधित किए बिना ही वहाँ से रवाना हो गए।