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अब्बा हेडमास्टर, खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मिशन जिहादी… यदि पढ़ा-लिखा मुसलमान नहीं होता है ‘आतंकी’ तो रामेश्वरम ब्लास्ट में पकड़ा गया सोहैल कौन है लिबरलों

आपने अक्सर इस्लामी आतंकियों के बचाव में लिबरलों को ये तर्क देते हुए सुना होगा कि वो ये सब शिक्षा की कमी के कारण करते हैं। लिबरलों के मुताबिक मुस्लिम युवकों को देश में सही तालीम नहीं मिल पाती है इसलिए वो कट्टरपंथी संगठनों के बरगलाने पर कट्टरपंथ का रास्ता चुनकर आतंकी बन जाते हैं… लेकिन हकीकत क्या सच में ऐसी है जैसी हमें इतने सालों से लिबरल गिरोह के लोग दिखाना और समझाना चाहते हैं या फिर जमीनी सच्चाई कुछ और है।

अभी हाल में रामेश्वर कैफे ब्लास्ट का मामला लेते हैं। NIA ने बम धमाके में गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ के बाद जिन लोगों के यहाँ छापेमारी की है उनमें एक आंध्रप्रदेश जिले का रिटायर्ड हेडमास्टर अब्दुल और उसका सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटा सोहैल भी है। सोहेल को लेकर कहा जा रहा है कि वो इस हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल मतीन से सपर्क में था। इसके अलावा 2 डॉक्टरों के ठिकाने पर भी रेड पड़ी है। ये दोनों ही प्रोफेशन ऐसे हैं जिसमें बिना पढ़ाई लिखाई किए कोई नहीं घुस सकता। फिर जवाब क्या है कि इन्होंने ऐसा क्यों किया। शिक्षा की कमी के कारण या नौकरी न मिलने की वजह से…?

लिबरलों ने सालों से इस्लामी आतंकियों के छवि निर्माण के लिए जो भूमिका बनाई थी वो अब आए दिन इसीलिए ध्वस्त हो रही है क्योंकि सोशल मीडिया के कारण लोगों को पता चलने लगा है कि जिन आतंकियों का प्रोफेशन बताकर, परिवार की दुर्दशा बताकर संवेदना बटोरी जा रही है, वो असल में किस खतरनाक मानसिकता के साथ पोषित होते हैं।

बात सिर्फ रामेश्वर ब्लास्ट की नहीं है। आप याद करिए कुछ दिन पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरा टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था। आतंकियों को पकड़कर उनकी लिस्ट बनना शुरू हुई तो प्रोफेशन वाले कॉलम में किसी के आगे प्रोफेसर लिखा जा रहा था था, किसी के पीएचडी स्कॉलर तो किसी के में इंजीनियर।

इसी तरह जब मध्यप्रदेश पुलिस की आतंक निरोधी दस्ते ने हिज्ब उत् तहरीर आतंकी संगठन पर कार्रवाई की थी तो अलग-अलग जगह से ताबड़तोड़ आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी। छानबीन में पता चला था कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों में कंप्यूटर इंजीनियर, टेक्नीशियन, टीचर, व्यवासायी, जिम ट्रेनर, कोचिंग सेंटर संचालक, ऑटो ड्राइवर, दर्जी आदि शामिल थे।

इसी तरह 2021 में सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के 12 आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इनमें से कई आतंकी इंजीनियरिंग के छात्र थे। छानबीन में सबका कनेक्शन आतंकी संगठन मुजाहिद्दीन से पाया गया था। वहीं इनके पास से आधुनिक गैजेट्स जैसे लैपटॉप, फोन, पेन ड्राइव आदि सब बरामद हुए थे। पूछताछ में ये भी बताया गया था कि ये लोग अपने संगठन से लोगों को जोड़ उन्हें बम बनाने की ट्रेनिंग भी देते थे।

2022 में हुए गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाला मुर्तजा अब्बासी याद है क्या। पीएसी जवानों को धारदार हथियार से घायल करके मंदिर में घुसने जा रहा था और रोके जाने पर अल्लाह-हू-अकबर चिल्ला रहा था। छानबीन में सामने आया था कि उस मुर्तजा अब्बासी ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की हुई थी।

ये मुर्तजा अब्बासी या सोहैल कोई 1, 2, 3 या 10 उदाहरण नहीं है। ऐसे तमाम कट्टरपंथियों की लिस्ट है जिनका उद्देश्य पढ़ लिखकर भी सिर्फ जिहाद करना और काफिरों को मारना तक रहा। इसी का उदाहरण है कि आज आतंकियों के आतंक करने का तरीका सिर्फ कहीं घुसकर गोलीबारी या बमबारी करना नहीं रह गया है। ये लोग अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल करके अपने आतंक के तरीकों को अपग्रेड करते हैं।

जैसे कुछ समय पहले खबर आई थी कि भारत में इस्लामिक स्टेट रोबोट से आतंकी हमले की साजिश रच रहा था और इसके लिए आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने मुस्लिम युवाओं को रोबोटिक्स की पढ़ाई करने के हुक्म दिए थे…अब जो कट्टरपंथी इस्लामी ISIS की विचारधारा से प्रभावित होगा तो क्या वो इस हुक्म का पालन नहीं करता… करता और किया भी।

जानकारी के अनुसार, ISIS के मकसद को पूरा करने के लिए माज मुनीर अहमद, सैयद यासीन, रीशान थाजुद्दीन शेख, माजिन अब्दुल रहमान और नदीम अहमद नाम ने रोबोटिक्स कोर्स स्टार्ट कर दिया था। इसके अलावा इन्होंने आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए बी मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। ये पूरा खुलासा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सप्लीमेंट्री चार्जशीट ने किया था।

मालूम हो कि जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने के काम में सिर्फ भारत के पढ़े-लिखे कट्टरपंथी नहीं शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही हाल है। अमेरिका में 9/11 हमने का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के बारे में मीडिया बताता है कि वो अच्छे बिजनेसमैन परिवार से था और इंजीनियर था। जाहिर है उसके पास न पैसे की कमी थी, न शिक्षा की… फिर भी वो कुख्यात आतंकी संगठन का सरगना बना क्योंकि उसके जहन में कट्टरपंथ घुस गया था। उसे तालीम लेकर अपने लिए या अपने परिवार के लिए कुछ नहीं करना था बल्कि उसे मजहब के नाम पर जिहाद करना था और उसकी इसी सोच ने अमेरिकी के ट्विन टॉवर्स और पेंटागन पर हमला कराया, जिसमें 3000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। ये हमला सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है, मगर बावजूद ऐसी तमाम घटनाओं के ISIS में शामिल होने के लिए युवक अमेरिका और ब्रिटेन से पढ़कर जाते हैं। वहाँ उनके लिए आत्मघाती ड्रोन बनाते हैं। ऐसी तकनीक सिखाते हैं जिससे दहशत बड़े पैमाने पर फैल सके और खुद आतंकी बन जाते हैं।

इतनी लंबी लिस्ट होने के बावजूद ये मीडिया गिरोह के लोगों द्वारा आतंकियों के प्रोफेशन का महिमामंडन चलता रहता है। कभी बुरहान वानी के अब्बा के हेडमास्टर होने की बात जनता को बताकर ये संवेदनाएँ बटोरते हैं तो आतंकी जाकिर मूसा के बाइक, सिहरेट, हेयर स्टाइल, डियोडरेंट, जूते पर फिदा हो जाते हैं। उसके बाद प्रोपगेंडा फैलाया जाता है कि इस्लामी कट्टरपंथ को खत्म करने का एक मात्र तरीका शिक्षा है, जबकि हकीकत तो ये है कि कट्टरपंथ से लड़ने के लिए हम जिस शिक्षा को अंतिम उपाय मान रहे हैं, कट्टरपंथी उसी शिक्षा का प्रयोग करके आतंकी बन रहे हैं और आतंकी संगठनों को मजबूत बना रहे हैं।

ऊपर इतने उदाहरणों का जिक्र ही इसलिए है ताकि समझ आ सके कि आज के समय में सिर्फ भारत नहीं, बल्कि दुनिया का सारा फोकस कट्टरपंथ मिटाने पर होना चाहिए। इसी कट्टरपंथ के चलते छोटे-छोटे बच्चों को बरगला कर पहले पत्थरबाज बनाया जाता है, फिर बंदूक थमाकर आतंकी और इसी कट्टरपंथ के चलते कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों का ब्रेनवॉश होता है और वो आतंकी संगठनों के कमांडर बनने लगते हैं। उनके लिए शिक्षा का अर्थ समाज में पहचान बनाना नहीं होता, बल्कि देश और दुनिया से काफिरों का खात्मा होता है।

‘आरोप आतंकवाद का फिर भी डेढ़ साल में बेल’: मद्रास HC के फैसले से सुप्रीम कोर्ट हैरान, नेताओं की तस्वीरों के साथ पकड़े गए थे PFI के 8 मेंबर

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के आठ सदस्यों की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले में भी बदलाव किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनके गंभीर आरोपों में सिर्फ डेढ़ साल ही जेल में काटे हैं, ऐसे में उन्हें छोड़ना सही नहीं होगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की वेकेशन बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा दिए गए जमानत के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता और अधिकतम सजा के तहत जेल में बिताए गए सिर्फ 1.5 साल को ध्यान में रखते हुए हम जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश में दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि एनआईए ने जो कोर्ट के सामने सामग्री रखी है, उसके आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

एनआईए ने अदालत को बताया कि अपीलकर्ताओं के पास आरएसएस नेताओं की ‘मार्क’ की गई तस्वीरें मिली थी, जो इनके निशाने पर थे। इसके साथ ही एनआईए ने पीएफआई के विजन 2047 को भी कोर्ट में रखा गया था। विजन 2047 के मुताबिक, भारत में इस्लामी राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखा गया था। इन सभी को एनआईए ने गिरफ्तार किया था, जो तमिलनाडु, केरल, यूपी समेत देश के कई हिस्सों से हैं।

पीएफआई के जिन 8 सदस्यों को मद्रास हाई कोर्ट से जमानत मिली थी, उन पर देश भर में आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप हैं। इन आठ सदस्यों के नाम हैं- बाराकतुल्लाह, अहमद इदरीस, खालीद मोहम्मद, सईद इश्हाक, ख्वाजा मौहेउद्दीन, यासिर आराफात, फयाज अहमद और मोहम्मद अब्बुताहिर। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

एनआईए की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने जमानत इस आधार पर रद्द करने का आदेश दिया कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि आतंकवादी घटना हिंसक या अहिंसक प्रतिबंधित किया जा सकता है।

जिसने पुणे में कार से इंजीनियरों को कुचला, उसके दादा के छोटा राजन से कनेक्शन: रिपोर्ट में दावा- भाई के खिलाफ डॉन की ली थी मदद, अब 25 की उम्र तक अब गाड़ी नहीं चला पाएगा रईसजादा

पुणे में दो लोगों को पोर्शे से कुचल कर मार देने वाले रईसजादे के दादा का अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से संबंध था। रईसजादे के दादा ने छोटा राजन से एक सम्पत्ति विवाद के मामले में मदद ली थी। इस मामले में हत्या की कोशिश तक हुई थी और इसकी जाँच सीबीआई ने की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाबालिग लड़के के दादा ने 2007-08 के दौरान अपने भाई के साथ चल रहे एक सम्पत्ति विवाद को सुलझाने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के एक गुर्गे से सम्पर्क किया था। सम्पत्ति विवाद के निपटारे के लिए वह छोटा राजन के गुर्गे से मिलने थाईलैंड की राजधानी बैंकाक गया था। राजन भारत से भागने के बाद यहीं रहता था।

राजन के गुर्गे से मुलाक़ात के बाद अजय भोंसले नाम के एक शख्स पर गोली चलाई गई थी। बताया गया कि यह हमला राजन के गुर्गों ने किया था क्योंकि भोंसले रईसजादे के दादा के भाई के मित्र थे। गोली चलने के बाद रईसजादे के दादा के खिलाफ पुणे में एक मामला भी दर्ज किया गया था।

इसमें रईसजादे के दादा पर कई धाराएँ लगाई गईं थी। बाद में राजन से जुड़े सारे केस सीबीआई को दे दिए गए थे, यह मामला भी इसी के साथ सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले में जाँच की थी। अभी यह मामला कोर्ट में लंबित है। यह मामला मुंबई के कोर्ट में चल रहा था।

पोर्शे से 2 लोगों को कुचलने वाले रईसजादे को अब गाड़ी चलाने का लाइसेंस 25 वर्ष की आयु तक नहीं मिलेगा। इस पर ट्रांसपोर्ट विभाग ने रोक लगा दी है। इसके अलावा जिस गाड़ी से दुर्घटना हुई है, उसे अगले एक वर्ष तक रजिस्टर नहीं किया जाएगा। गाड़ी को सड़क पर चलने भी नहीं दिया जाएगा, उसका अस्थायी रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो गया है।

गौरतलब है कि 18 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक अनियंत्रित पोर्शे कार ने बाइक पर जा रहे एक महिला और एक पुरुष को कुचल कर मार दिया था। यह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। इनकी पहचान अनीस दूधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में की हुई थी। पोर्शे गाड़ी इस दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी और 17 वर्षीय लड़के को पकड़ लिया गया था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 15 घंटे के भीतर इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वह एक 300 शब्द का निबन्ध ट्रैफिक समस्या पर लिखेगा।

जिसने दिल्ली मेट्रो में अरविंद केजरीवाल के लिए लिखी थी धमकी, उसे दिल्ली पुलिस ने पकड़ा: बरेली से आया था, बैंक में करता है काम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए मेट्रो-स्टेन और स्टेशनों पर धमकी भरे मैसेज लिखने वाले अंकित गोयल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का रहने वाला है। अंकित गोयल बेहद पढ़ा लिखा है और एक नामी बैंक में काम करता है। उसने अपने ही इंस्टाग्राम अकाउंट पर केजरीवाल को धमकाने वाले संदेशों को पोस्ट भी किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 33 वर्षीय अंकित गोयल ने मेट्रो स्टेशन पर सीएम केजरीवाल को जान से मारने की धमकी लिखी थी। दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने एफआईआर दर्ज की थी और मामले की जाँच कर रही थी। अब उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपित की मानसिक हालत ठीक नहीं है, हालाँकि इसका पता जाँच के बाद ही चल पाएगा। इस बीच, सूत्रों का कहना है कि अंकित गोयल के राजनीतिक दलों से जुड़ाव को लेकर भी जाँच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि आरोपित अंकित गोयल ग्रेटर नोएडा किसी काम से आया था। वो दिल्ली में 5 स्टार होटल में रुका था और मेट्रो के सफर के दौरान उसने अरविंद केजरीवाल के लिए धमकियाँ लिखी। उसने खुद ही उन धमकियों की फोटो भी अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर की थी। अंकित गोयल ने इन धमकियों की तस्वीरें इंस्टाग्राम हैंडल @ankit.goel_91 पर साझा की गई थी, जिसमें मेट्रो कोच के अंदर एक धमकी भरे संदेश में लिखा था, ‘केजरीवाल कृप्या दिल्ली छोड़ दीजिए वरना आपको वे तीन थप्पड़ याद आएँगे, जो आपने चुनाव से पहले खुद को मरवाए थे। अबकी बार असली थप्पड़ जल्द पड़ेगा। आज की बैठक झंडेवालान में।’

एक अन्य मैसेज में लिखा है, ‘दिल्ली के सीएम हमें छोड़ दें। हमें मुफ्त की चीजें और नहीं चाहिए। 45 करोड़ रुपए सीएम आवास पर।’ एक अन्य ट्रेन में लिखा हुआ था, ‘नीचे दी गई बातों का आप पालन करें। जल बोर्ड का पारदर्शी ऑडिट और जिम्मेदार लोगों/नेताओं की जिम्मेदारी तय करें, शराब नीति और आपके नेताओं को मिले रिश्वत पर क्या कहना है और राघव चड्ढा की आंख का इलाज एम्स, या सफदरजंग या आपके किसी पसंद के भारतीय अस्पताल में। AAP से आखिरी उम्मीदें हैं।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के मैसेज कम से कम तीन मेट्रो स्टेशन पटेल नगर, रमेश नगर और राजीव चौक पर भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी है। और अब पुलिस ने अंकित गोयल को गिरफ्तार कर लिया है।

इस बीच आम आदमी पार्टी ने इसे भारतीय जनता पार्टी से की ओर से दी गई धमकी बताया है। ‘आप’ का दावा है कि धमकी की भाषा भाजपा जैसी है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संयोजक पर जानलेवा हमले की साजिश का आरोप भी लगाया है।

दारू पर ₹48 हजार उड़ाकर बार से निकला, फिर कुचल डाले 2 इंजीनियर: पुणे के रईसजादे के बाप ने भी पुलिस को किया गुमराह, ₹45 हजार में आया था फैंसी नंबर

महाराष्ट्र के पुणे में एक नाबालिग रईसजादे के दो लोगों को करोड़ों की पोर्शे कार से कुचल देने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। बताया गया है कि लड़के ने गाड़ी चलाने से पहले एक पब में जाकर खाने और शराब पर ₹48000 का खर्चा किया था। उसकी पोर्शे गाड़ी के लिए भी विशेष नम्बर लिया जा रहा था। नाबालिग को जहाँ जमानत मिल गई थी, वहीं उसके पिता ने पुलिस से बचने के लिए कई तरीके अपनाए लेकिन आखिर में पकड़ा गया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोर्शे से दो लोगों को कुचलने वाले लड़के ने पुणे के कोजी बार में जाकर ₹48,000 शराब और खाने पर खर्च किए थे। यहाँ उसे और उसके दोस्तों को शराब परोसी गई थी। ₹48000 का यह खर्चा मात्र डेढ़ घंटे में कर दिया गया था। इस खर्चे का बिल पुणे पुलिस को मिला है, इसमें स्पष्ट रूप से शराब पर खर्चे का जिक्र है। गाड़ी से दो लोगों को कुचलने वाला नाबालिग इसके बाद एक और बार में भी गया था।

पुलिस ने इन बिल और रेस्टोरेंट से सामने आए CCTV के आधार पर लड़के के खिलाफ शराब पीकर गाड़ी चलाने की धारा भी मामले में जोड़ दी है। इस मामले में उसके खून की भी जाँच करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। पुलिस ने कहा है कि स्पष्ट रूप से यह पता चल रहा है कि लड़के ने शराब पी रखी थी। पुलिस ने साथ ही में उस बार पर भी ताला जड़ दिया है, जिसने नाबालिग को शराब परोसी थी। उसको सीज कर दिया गया है।

वहीं नाबालिग की पोर्शे के बारे में भी एक जानकारी निकल कर आई है। नाबालिग की पोर्शे का रजिस्ट्रेशन RTO में रुका हुआ था। इस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए ₹45,000 का फैंसी नम्बर खरीदा गया था। इसका भुगतान हो गया था लेकिन मात्र ₹1758 की फीस नहीं जमा की गई थी जिसके कारण यह रजिस्ट्रेशन रुका हुआ था। नाबालिग पोर्शे कम्पनी की टायकान गाड़ी चला रहा था जो कि इलेक्ट्रिक है। इसका रजिस्ट्रेशन का कोई पैसा महाराष्ट्र में नहीं देना होता है, इन पर रोड टैक्स भी नहीं लगता। पोर्शे गाड़ी के लिए MH12WQ2000 नम्बर लिया गया था।

यह भी सामने आया है कि लड़के को जहाँ दो लोगों को कुचलने के कुछ ही घंटों के बाद जमानत मिल गई थी, वहीं उसका पिता फरार हो गया था। नाबालिग का पिता नामी बिल्डर है और इसके पास पुणे में ही काफी सरे घर हैं जहाँ वह घटना के बाद गया था। इसके बाद वह अपने ड्राइवर के साथ कोल्हापुर गया था। कोल्हापुर में वह अपने एक दोस्त के घर गया और वहाँ से अपनी गाड़ी को वापस मुंबई भेज दिया ताकि पुलिस गुमराह हो जाए।

वह इसके बाद अपने दोस्त के साथ कोल्हापुर से छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद) चला गया। उसने इस बीच बचने की काफी कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे जीपीएस और मोबाइल लोकेशन के सहारे ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि 18 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक अनियंत्रित पोर्शे कार ने बाइक पर जा रहे एक महिला और एक पुरुष को कुचल कर मार दिया था। यह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। इनकी पहचान अनीस दूधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में की हुई थी। पोर्शे गाड़ी इस दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी और 17 वर्षीय लड़के को पकड़ लिया गया था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 15 घंटे के भीतर इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वह एक 300 शब्द का निबन्ध ट्रैफिक समस्या पर लिखेगा।

जम्मू-कश्मीर में फिर से 370 बहाल करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- फैसला सही था: CJI की बेंच ने पुनर्विचार याचिकाओं को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 मई, 2024) को उसके अनुच्छेद 370 पर दिए गए निर्णय को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिका में दी गई दलील को मानने से इनकार करते हुए इन्हें खारिज किया।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पाँच सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि याचिकाओं का परीक्षण करने के बाद उसे अपने पुराने निर्णय में कोई भी गलती नहीं दिखती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के नियमों के आधार पर याचिका को खारिज किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग किए जाने वाले एक्ट की संवैधानिकता पर भी सुनवाई करने से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में भारत सरकार के पुराने स्टैंड का हवाला दिया कि वह जल्द ही जम्मू कश्मीर को केन्द्रशासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा देगी।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने लगाई थी। कॉन्फ्रेंस का कहना था कि दिसम्बर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 370 को हटाने को सही ठहराने वाले निर्णय में कुछ गलतियाँ थीं, ऐसे में कोर्ट इस फैसले पर दोबारा से विचार करे। हालाँकि, कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी और दोबारा सुनवाई से इनकार किया।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया था। इसके साथ जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बाँट कर दो केन्द्रशासित प्रदेश बनाए गए थे। लद्दाख को अलग केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था।

सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ डाली गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पर सुनवाई करते हुए दिसम्बर 2023 में सरकार के फैसले को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए थे कि केंद्र सरकार सितम्बर 2024 तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाए।

निकाह में घूमर देख भड़के मौलाना, रशीद के परिवार को 11 महीने के लिए समाज से किया बेदखल: ठोंका ₹1 लाख जुर्माना, प्रशासन के सामने पलटे

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक मुस्लिम परिवार सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है। बॉयकॉट का ये फरमान स्थानीय मौलानाओं ने सुनाया है। पीड़ित परिवार की गलती बस इतनी है कि उनके एक निकाह समारोह में डांसर ने नाच दिया था। बहिष्कार का ऐलान करने वालों ने इसे मज़हबी तौर-तरीकों के खिलाफ बताया है। परिवार के समाज से निष्कासन की अवधि फिलहाल 11 महीने रखी गई है। इसी के साथ परिवार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला हरदा के छीपानेर रोड का है। यहाँ रशीद अपने परिवार के साथ रहते हैं। रशीद के घर 28 जनवरी को एक सदस्य का निकाह हुआ था। निकाह में दूल्हा मोहीन और दुल्हन चाँदनी थीं। 2 दिनों के बाद 30 जनवरी को इसी निकाह की ख़ुशी में रशीद ने दावत रखी थी। इस दावत में रशीद के रिश्तेदारों और दोस्तों के अलावा आसपास के तमाम लोगों ने शिरकत की थी। इसी निकाह में रशीद ने राजस्थानी कलाकारों को बुलाया था। इन कलाकारों में एक महिला डांसर ने घूमर डांस किया था। डांस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में एक महिला डांसर राजस्थानी परिधान में कई लोगों के आगे स्टेज पर नाच रही थी। मंच पर एक पुरुष में राजस्थान के पारम्परिक वेश में दिख रहा है। कार्यक्रम खत्म हो जाने के बाद रशीद के इलाके के कुछ मौलानाओं और मुस्लिम समाज के अन्य लोगों ने मीटिंग की। मीटिंग में सर्वसम्मति से यह घोषणा की गई कि निकाह में महिलाओं का डांस कायदों के खिलाफ है। इसी दौरान सभा के पंचों ने रसीद और उनके परिवार को नियम तोड़ने वाला घोषित कर दिया।

रशीद ने हरदा के जिलाधिकारी (DM) को शिकायती पत्र दे कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को 11 महीने के लिए किसी भी शादी-ब्याह में न बुलाने का फरमान सुनाया गया है। बताया यह भी जा रहा है कि पीड़ित परिवार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। रशीद की बुजुर्ग अम्मी ने इस फरमान को गलत बताया है। पीड़ित परिवार इस फैसले के खिलाफ पुलिस में गया। आरोप है कि पुलिस ने बॉयकॉट करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

आखिरकार रशीद ने हरदा के जिलाधिकारी से शिकायत की है। जिलाधिकारी ने फ़ौरन ही जाँच के लिए एक टीम रशीद के घर और पास-पड़ोस में पहुँची। रशीद के पड़ोसियों ने बहिष्कार जैसे आरोपों को झूठ बताया है। पड़ोसियों ने बताया कि रशीद का बहिष्कार नहीं किया गया है बल्कि उनको जाजम के खाने से बाहर कर दिया गया है। प्रशासन मामले की जाँच करवा रहा है।

‘दिखाता खुद को सेकुलर है, पर है कट्टर इस्लामी’ : हिंदू पीड़िता ने बताया आकिब मीर ने कैसे फँसाया निकाह के जाल में, ठगे ₹42 लाख भी

सोशल मीडिया पर 20 मई 2024 को एक वीडियो सामने आई थी जिसमें एक शख्स अपनी पत्नी को ताबड़तोड़ मारे जा रहा था। छानबीन करने पर पता चला कि हिंसा करने वाले व्यक्ति का नाम आकिब मीर है जो जम्मू के बठांडी में रहता है और कुछ समय पहले इसने हिंदू बनने का दिखावा करके एक हिंदू महिला को फँसाया था। मीर के विरुद्ध केस दर्ज हो गया है। पीड़िता के आरोप सुन मीर पर आईपीसी की धारा 376, 420,400, 504, 506 और 34 लगाई गई है।

एफआईआर में पीड़िता ने बताया कि आकिब के साथ कॉन्टैक्ट में आने से पहले वो शादीशुदा थी और उसका एक बेटा भी था, लेकिन उसका पति शराबी था और लगातार बीमार रहता था… इस वजह से वह काफी तनाव में रहती थी और भावनात्मक तौर पर काफी कमजोर हो गई थी। कुछ समय बाद वह उससे अलग हो गई। इस बीच आकिब के साथ उसकी बातचीत इंस्टाग्राम पर शुरू हुई। आकिब ने अपने आपको रवि राजपूत बताया। दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आ गए।

आकिब जानता था कि महिला शादीशुदा है। बावजूद इसके उसने रवि बनकर करीबी बनाई। कुछ समय बाद जब महिला ने अपने फोन में स्नैपचैट डाउनलोड किया तो पता चला कि वो रवि राजपूत नहीं आकिब मीर है। महिला ने इस संबंध में उससे सवाल किए तो उसने कहा कि वो हिंदू इसलिए बना ताकि वो उसके विश्वास को जीत सके। उसने महिला को ये कहकर बरगलाया कि वो नहीं चाहता था कि महिला किसी और प्रकार के तनाव में आए, क्योंकि उसकी जिंदगी में पहले ही इतना तनाव था।

इसी बीच आकिब ने महिला को प्रपोज किया और साथ ही वादा किया कि वो महिला के बेटे का भी ख्याल रखेगा। जब महिला ने निकाह को इनकार किया तो आकिब ने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया। आकिब ने कहा कि अगर महिला ऐसा नहीं करेगी तो वो उसके बेटे को मार देगा। महिला पूरी तरह खुद को फँसा समझ रही थी।

इसी बीच आकिब एक दिन महिला को और उसके बेटे को अपने साथ ले गया। वहाँ उसने उनसे एक कागज पर दस्तखत कराए। महिला को समझ नहीं आया कि कागज कौन से हैं। बाद में पता चला वो निकाहनामा था। महिला अपने बेटे के भविष्य को लेकर और चिंतित हो गई। उसने कुछ समय बाद अपने 42 लाख के जेवर बेचकर 32 लाख रुपए की प्रॉपर्टी ली और पैसे आकिब के जरिए डीलर को दिलाए।

23 अप्रैल को जब उसने प्रॉपर्टी के कागज माँगे तो पता चला जो प्रॉपर्टी महिला ने अपने बेटे के लिए ली थी, लेकिन उसके पैसे आकिब मीर और प्रॉपर्टी डीलर ने ठग लिए हैं। वहीं 32 लाख की प्रॉपर्टी के अलावा 10 लाख रुपए भी आकिब ने पर्सनल यूज के नाम पर उससे ले लिए। महिला बताती है कि आकिब उसके साथ जबरन संबंध बनाता था और खुलेआम कहता था कि उसके कई महिलाओं के साथ चक्कर हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए महिला ने बताया कि वह अब तो आकिब का घर छोड़ चुकी है लेकिन बीच में उसे लगातार एक महिला कॉल करती थी। एक दिन उसने महिला का फोन उठाया तो पता चला कि आकिब उसके साथ था। सवाल पूछे जाने पर आकिब ने मारपीट की। महिला के अनुसार, आज केवल सीसीटीवी फुटेज के कारण आकिब की सच्चाई खुली है।

महिला कहती है कि आकिब सोशल मीडिया पर अपने आप को सेकुलर दिखाता है लेकिन असल में वो इस्लामी है। उसने महिला को साफ कहा हुआ था कि वो हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करे। इसके अलावा अन्य महिलाओं के साथ रहने की उसकी आदत भी लगातार बढ़ती जा रही थी। सवाल-जवाब करने पर वो मारपीट करता था। जब हर चीज की अति हो गई तब महिला ने उस घर को छोड़ दिया।

महिला के अनुसार, उसकी पहली शादी 2009 में हुई थी। 2019 में वह अपने पति से अलग हो गई और आकिब का घर छोड़ दिया।

आकिब का कहना है कि ये मामला लव जिहाद का नहीं है बल्कि प्रॉपर्टी विवाद का है।

बता दें कि आकिब मीर के पहले कनेक्शन भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा था लेकिन तमाम महिलाओं की शिकायतें आने के बाद पार्टी ने उसे 2019 में ही निकाल दिया था।

रेप कर इतना किया टॉर्चर कि सदमे में चली गई महिला, 2 साल बाद हुई ठीक तो पकड़े गए मोहम्मद शफी, मोहम्मद शबील और मोहम्मद फैसल

केरल के कोझिकोड में एक महिला के रेप और उसके बच्चे को यातनाएँ देने के मामले के तीन आरोपित घटना के दो साल बाद पकड़े गए। उनकी पहचान पुलिस घटना के दो साल बाद कर पाई क्योंकि रेप पीड़िता की मानसिक स्थिति उसके साथ हुई घटना के बाद खराब हो गई थी।

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद शफी, मोहम्मद शबील और मोहम्मद फैसल ने घरों में काम करने वाली एक महिला से सोशल मीडिया से पहचान बढ़ाई। इसके बाद वह उसके घर पर आकर उसका लगातार रेप और उसके साथ हिंसा करने लगे। उन्होंने उसके बच्चे पर गरम पानी तक डालने की कोशिश की और महिला को यातनाएँ दी।

महिला ने इस संबंध में जून 2022 में पुलिस के पास रेप की शिकायत दर्ज करवाई, उसने इन तीनों के नाम भी केरल पुलिस को दिए और बताया कि उसके साथ क्या घटना हुई। पुलिस इस मामले में कार्रवाई चालू करती कि उससे पहले ही महिला का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह अवसादग्रस्त हो गई।

महिला की मानसिक हालत इतनी अस्थिर हुई कि उसे एक देखभाल गृह में ले जाना पड़ा और उसके बच्चे को साथ ही एक बाल संरक्षा गृह में भेज दिया गया। पुलिस इस कारण से घटना के विषय में महिला से और कोई जानकारी नहीं जुटा पाई। महिला से जानकारी ना जुटा पाने के कारण मामले की जाँच जहाँ की तहाँ रुक गई।

पुलिस को महिला का बयान ना लेने की हिदायत दी गई थी इसलिए वह आरोपितों की पहचान के विषय में कोई जानकारी नहीं इकट्ठा कर पा रही थी। हालाँकि, यह स्थित धीमे धीमे बदलने लगी। महिला को जून 2023 में फिट घोषित कर दिया गया था। इसके बाद वह काम भी करने लगी थी और साथ ही अपने बच्चे की भी देखभाल करने में सक्षम हो गई थी।

महिला के स्वस्थ होने पर पुलिस ने दिसम्बर 2023 में उससे सम्पर्क किया। इसके बाद महिला ने तीनों आरोपितों के नाम स्पष्ट रूप से बताए। इसके साथ ही उसने एक डायरी भी दी जिसमें कई सारे नम्बर लिखे हुए थे। पुलिस को जाँच में एक नम्बर मिला जो कि एक आरोपित का था।

पुलिस ने इस नम्बर की लोकेशन तलाश कर एक आरोपित को पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ के आधार पर बाकी के दो आरोपित भी पकड़े गए। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद इन लोगों ने अपने नम्बर बदल लिए थे। पुलिस ने इनके फोटो लेकर पीड़िता को दिखाए, पीडिता ने तुरंत उनकी पहचान कर ली। पुलिस अब इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

जानें क्या होता है एयर टर्बुलेन्स, जिसमें फँसा सिंगापुर का एयरलाइन्स का विमान: 229 यात्री थे सवार

सिंगापुर एयरलाइन्स का विमान हवाई तूफान की चपेट में आ गया, जिसमें एक यात्रा की मौत की सूचना है। इस हादसे में 30 से अधिक लोग घायल हो गए। सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान SQ321 हीथ्रो हवाई अड्डे से सिंगापुर के रास्ते में थी, जब उसे गंभीर एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। एयर टर्बुलेंस की वजह से फ्लाइट को स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:45 बजे बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। फ्लाइट में कुल 211 यात्रियों के अलावा 18 क्रू सदस्य सवार थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंगापुर एयरलाइंस की ये फ्लाइट शाम 6 बजकर 10 मिनट पर सिंगापुर के चाँगी एयरपोर्ट उतरने वाली थी, लेकिन उसे आपात स्थिति की वजह से बैंकॉक में उतरना पड़ा। इस हादसे की वजह से यात्री की मौत के बाद सिंगापुर एयरलाइंस ने मृतक यात्री के परजनों के प्रति शोक जताया है। प्लेन की लैंडिंग के तुरंत बाद एम्बुलेंस की कई गाड़ियाँ एयरपोर्ट पहुँची। घायलों को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि FlightRadar24 के उड़ान ट्रैकिंग डेटा के अनुसार सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान 37,000 फीट (11,300 मीटर) पर उड़ान भर रही थी। 0800 GMT के तुरंत बाद, बोइंग 777 लगभग तीन मिनट में तेजी से 31,000 फीट (9,400 मीटर) तक नीचे आ गया। विमान तेजी से उतरने और आधे घंटे के भीतर बैंकॉक में उतरने से पहले केवल 10 मिनट से कम समय के लिए 31,000 फीट (9,400 मीटर) की ऊंचाई पर रहा। यह तब हुआ जब फ्लाइट अंडमान सागर के ऊपर, म्यांमार की ओर बढ़ रही थी।

यह घटना सिंगापुर एयरलाइंस के लिए एक दुर्लभ घटना है। एयरलाइन का सुरक्षा रिकॉर्ड अच्छा है। 1972 में एक विमान दुर्घटना के बाद से इसकी कोई घातक दुर्घटना नहीं हुई है। एयर टर्बुलेंस उड़ान का एक सामान्य हिस्सा है। हालाँकि, यह आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है। आधुनिक विमान टर्बुलेंस को सहन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और पायलटों को इसे संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

एयर टर्बुलेंस की वजह

थर्मल अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट: जब गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे उतरती है, तो इससे एयर टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

जेट स्ट्रीम: ये संकरी हवा की धाराएँ होती हैं जो हजारों फीट ऊपर तेज़ी से बहती हैं। प्लेन में प्रवेश करने या बाहर निकलने पर यह कंपन पैदा कर सकती हैं।

पहाड़ और बादल: जब हवा पहाड़ों या बादलों से होकर गुजरती है, तो इसका प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

विमान का वेक: बड़े विमानों के पीछे बनने वाला हवा का घूर्णन छोटे विमानों को प्रभावित कर सकता है, जिससे टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

बहरहाल, ऐसी स्थिति में यात्रियों को चालक दल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए। ध्यान रखें कि एयर टर्बुलेंस बहुत सामान्य स्थिति है, और हजारों-लाखों मामलों में एक खतरनाक होता है। ऐसे में अपनी सीट बेल्ट बांधकर, शांत रहकर और चालक दल के निर्देशों का पालन करके, आप टर्बुलेंस वाली उड़ान को सुरक्षित और आरामदायक बना सकते हैं।