Home Blog Page 956

‘अयोध्या राम मंदिर से हटेगी रामलला की मूर्ति’: कॉन्ग्रेस का विधिवत ऐलान- सरकार बनते ही ‘शुद्धिकरण’, PM मोदी ने ‘बाबरी ताला’ पर किया था आगाह

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अयोध्या के राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद राम मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2024 के 3 चरण बीत चुके हैं और 4 चरण बाकी हैं, ऐसे में उनका ये बयान पार्टी को नुकसान पहुँचा सकता है। नाना पटोले ने फिर से ये झूठ फैलाया कि चारों शंकराचार्यों ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार कर दिया था। सच्चाई ये है कि श्रृंगेरी और कांची मठ ने बयान जारी कर के इसका स्वागत किया था।

महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष रहे नाना पटोले ने राम मंदिर में भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की प्रतिमा होने पर भी प्रश्नचिह्न लगाया, जबकि शुरू से ये मामला रामलला का ही रहा है और कोर्ट में केस के दौरान भी रामलला के लिए ही मुकदमा लड़ा गया। नाना पटोले ने इसकी जगह वहाँ राम दरबार बनवाने की घोषणा कर डाली। उन्होंने कहा कि I.N.D.I. गठबंधन की सरकार आने पर निश्चित ही राम मंदिर का शुद्धिकरण कराया जाएगा। उन्होंने इस दौरान शंकराचार्यों को सनातन धर्म का मुखिया बताया और कहा कि वो राम मंदिर के विरोध में हैं।

नाना पटोले ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी माँ के देहांत के बाद हिन्दू परंपरा को धता बताते हुए अपने बाल नहीं मुँड़वाए, ऐसे में उनके द्वारा प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा लेना गलत है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता ने भी मान लिया है कि गलत विधि से रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई है। हालाँकि, सैम पित्रोदा द्वारा दक्षिण भारतीयों को अफ़्रीकी और उत्तर-पूर्वी भारतीयों को चीनी बताने पर उन्होंने कहा कि उनसे ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा ले लिया गया है।

बता दें कि हाल तक गाँधी परिवार के करीबी रहे प्रमोद कृष्णम ने भी खुलासा किया कि जब राम मंदिर का निर्णय आया तो राहुल गाँधी ने अपने नजदीकी लोगों की बैठक में अमेरिका के अपने एक सलाहकार के कहने पर कहा था कि सरकार बनने पर राम मंदिर का फैसला पलट दिया जाएगा, इसके लिए सुपरपॉवर कमीशन बनाया जाएगा। बकौल प्रमोद कृष्णम, राहुल गाँधी ने यह भी कहा था कि जिस तरह तीन तलाक के मुद्दे को लेकर शाहबानो निर्णय को राजीव गाँधी सरकार ने बदला था तो फिर राम मंदिर का निर्णय क्यों नहीं बदला जा सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कॉन्ग्रेस के इस रुख को लेकर उस पर हमला बोल चुके हैं। उन्होंने कहा था कि NDA को 400 सीटें इसीलिए चाहिए, ताकि कॉन्ग्रेस राम मंदिर पर बाबरी वाला ताला न लगवा दे। इतिहास में ऐसा हो चुका है। AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी खुले मंच से ‘बाबरी मस्जिद ज़िंदाबाद’ का नारा लगा चुके हैं। I.N.D.I. गठबंधन में लालू यादव की RJD भी शामिल है, जिन्होंने CM रहते रामरथ रुकवा कर लालकृष्ण अडवाणी को गिरफ्तार करवाया था।

चुनाव प्रचार करेंगे अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले में 51 दिन बाद दिल्ली के CM को दी अंतरिम जमानत: 2 जून को सरेंडर करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 मई 2014) को शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 1 जून 2024 तक अंतरिम जमानत दे दी। इससे ठीक एक दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत का विरोध किया था और कहा था कि इससे एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया है। अंतरिम बेल से संबंधित सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि शराब नीति मामले में केस अगस्त 2022 में दर्ज किया गया था और केजरीवाल को लगभग डेढ़ साल बाद मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में ईडी द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और तब से वह हिरासत में हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्रीय एजेंसी ने 9 मई को कहा था कि चुनाव प्रचार का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और ना ही कानूनी या संवैधानिक अधिकार है। अगर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो यह एक मिसाल कायम करेगा, जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने और फिर चुनाव की आड़ में जाँच से बचने की अनुमति देगा। 

अपने हलफनामे में ED ने कहा, “अभिसाक्षी की जानकारी में अभी तक किसी भी राजनीतिक नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है। ये तो चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी नहीं हैं। यहाँ तक कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को भी चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है, अगर वह हिरासत में है।”

केंद्रीय एजेंसी ने कहा, “पिछले 5 वर्षों में लगभग 123 चुनाव हुए हैं। यदि चुनाव प्रचार के उद्देश्य से अंतरिम जमानत़ दी जानी है तो किसी भी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और ना ही न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि चुनाव पूरे वर्ष होते रहते हैं।” ED ने तर्क दिया कि संघीय ढाँचे में हर चुनाव महत्वपूर्ण है।

हलफनामे में आगे कहा गया है, “हर स्तर पर हर राजनेता यह तर्क देगा कि यदि उसे अंतरिम जमानत पर रिहा नहीं किया गया तो उसे अपरिवर्तनीय परिणाम भुगतने होंगे। अकेले धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वर्तमान में कई राजनेता हैं, जो न्यायिक हिरासत में हैं और उनके मामलों की जाँच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जा रही है।”

केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने आगे तर्क दिया, “अदालतें उनकी (नेताओं की) हिरासत में बरकरार रख रही हैं। गैर-पीएमएलए अपराधों में पूरे देश में कई राजनीतिक नेता न्यायिक हिरासत में होंगे। इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि याचिकाकर्ता द्वारा विशेष उपचार की विशेष प्रार्थना को स्वीकार किया जाए।”

सड़क से गुजर रही थी महिला, पीछे से गले में बेल्ट फँसा घसीटा, कारों के बीच ले जाकर किया रेप: CCTV से सामने आई दरिंदगी

अमेरिका के शहर न्यूयॉर्क में एक महिला का एक व्यक्ति ने बीच सड़क पर रेप किया। सड़क चलती महिला को उसने पहले पकड़ा और फिर बलपूर्वक उसके साथ दुष्कर्म किया। यह अपराध पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गया। महिला के साथ हुई इस घटना की वीडियो अब वायरल है।

वायरल वीडियो में दिखता है कि एक महिला सड़क किनारे बने फुटपाथ पर जा रही है। इतने में ही एक व्यक्ति पीछे से आता है और महिला के गले में बेल्ट डाल उसे खींचता है, इससे महिला जमीन पर गिर जाती है। इसके बाद वह महिला को बेल्ट से ही फुटपाथ पर और खींचता है।

महिला इस दौरान बेसुध दिखती है। महिला को खींचते हुए यह अपराधी पास खड़ी दो गाड़ियों के बीच ले जाता है। इसके बाद वह महिला से लूटपाट भी करता है। वह महिला के पास का समान लूट लेता है। इसके बाद वह महिला से रेप भी करता है। अपराधी ने अपने चेहरे पर एक सफ़ेद कपड़ा पहना हुआ था। महिला से लूट और रेप करने के बाद वह घटनास्थल से भाग गया।

बताया गया है कि यह घटना 1 मई, 2024 की है जो कि न्यूयॉर्क के थर्ड अवेन्यु इलाके में हुई। पीड़िता की आयु 45 वर्ष बताई जा रही है। इस मामले में न्यूयॉर्क पुलिस जाँच कर रही है। हालाँकि, पीड़िता ने पुलिस के साथ सहयोग करना बंद कर दिया है। उसे एक स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है।

अभी तक इस अपराधी की पुलिस पहचान और गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। इस घटना के बाद अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठ रहे हैं। एक आँकड़े में बताया गया है कि न्यूयॉर्क में पिछले कुछ दिनों में रेप के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। मात्र 2024 में ही 500 से अधिक रेप के मामले में न्यूयॉर्क शहर में सामने आ चुके हैं।

घटते हिन्दू और बढ़ते मुस्लिम भारत के लिए खतरे की घंटी: गजवा-ए-हिन्द के इस मिशन में कॉन्ग्रेसी तुष्टिकरण का भी हाथ, कासिम से PFI तक 1500 साल बीते पर एजेंडा वही

हाल ही में एक रिसर्च सामने आया। 1950 से लेकर 2015 तक के आँकड़ों का अध्ययन किए जाने के बाद इसमें पता चला कि जहाँ देश में हिन्दुओं की जनसंख्या 7.82% घट गई है, वहीं मुस्लिमों की जनसंख्या में 43.15% का भारी इजाफा हुआ है। इस रिसर्च का मानना है कि भारत में विविधता के फलने-फूलने के लिए एक उचित माहौल है, जिस कारण ऐसा हुआ। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने अपने सर्वे में ये जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि दुनिया भर में बहुसंख्यकों की आबादी घटने का ट्रेंड है।

न सिर्फ हिन्दू, बल्कि जैन समाज के लोगों की जनसंख्या भी कम हुई है। जैन 0.45% से 0.36% हो गए हैं। 1950 में जहाँ हिन्दू 84.68% हुआ करते थे, वहीं अब 78.06% हो गए हैं। सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि ईसाइयों की जनसंख्या में भी इजाफा हुआ है। वो 5.38% बढ़ कर 2.24% से 2.36% हो गए हैं। सिख 1.24% से 1.85% हो गए हैं। पारसियों की संख्या जबरदस्त तरीके से घटी है। वो 85% घट कर 1950 में 0.03% से सीधे 0.004% हो गए हैं।

इस रिसर्च पेपर में इस बात को भी इंगित किया गया है कि पड़ोसी मुल्कों में जहाँ बहुसंख्यक लगातार बढ़ रहे हैं, वहाँ के अल्पसंख्यकों ने संकट के समय भारत में शरण लिया। पाकिस्तान से भले ही बांग्लादेश कट कर अलग हो गया, लेकिन इसके बावजूद वहाँ इस अवधि में मुस्लिमों की जनसंख्या 10% बढ़ी। क्या मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने को सचमुच विविधता का फलना-फूलना मान कर हमें जश्न मनाना चाहिए? नहीं, इतिहास तो ऐसा बिलकुल नहीं कहता है।

हिन्दुओं की जनसंख्या बढ़ना खतरे की घंटी है, वहीं इसके साथ-साथ तेज़ी से मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ना और भी अधिक चिंता का विषय है। हमारे सामने उदाहरण है कि कैसे जिस भी इलाके में मुस्लिम प्रभावशाली होते चले जाते हैं, वहाँ वो अपने हिसाब से नियम-कानून चलाने लगते हैं, दूसरी परंपराओं की आस्था का वो सम्मान नहीं करते जिस कारण उन्हें पलायन के लिए विवश होना पड़ता है। गुजरात के सूरत में जैन समाज तो भरूच में हिन्दू समाज इसका निशाना बना

इसी को तो ‘लैंड जिहाद’ कहा जाता है – जहाँ भी बसो, अपने लोगों को बड़ी संख्या में बसाओ और शरिया चलाने लगो। सूरत के गोपीपुरा में कई जैन साध्वियाँ रहती थीं, लेकिन मुस्लिमों ने वहाँ फ़्लैट लेकर बकरियाँ काटनी शुरू कर दी। प्याज-लहसुन उनके घरों के बाहर छोड़ दिए जाते थे। भरूच के सोनी फलिया में मंदिर में आरती को ‘हराम’ बता कर रोक दिया गया। मुस्लिम अधिक दाम देकर संपत्ति खरीदते हैं, लालच में हिन्दू बेच कर निकल जाते हैं, फिर जो बचे-खुचे होते हैं वहाँ उनका रहना ही दूभर हो जाता है।

बिहार में ही देख लीजिए। सीमांचल के जिलों में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ी तो वहाँ स्कूलों में रविवार की जगह जुमा को शुक्रवार के दिन साप्ताहिक अवकाश रहने लगा। यानी, शासन-प्रशासन के भी नियम ये अपने इलाकों में बदल देते हैं। मस्जिद के सामने से हिन्दू शोभा यात्रा नहीं गुजर सकती, ‘इनके इलाके’ में हिन्दू DJ नहीं बजा सकते। हाँ, इनके मस्जिद दिन भर में 5 बार माइक से अजान दें तो उसे हर हिन्दू को विवश होकर सुनना पड़ेगा। हर हिन्दू पर्व-त्योहार में पत्थर इकट्ठा करने की इनकी परंपरा है।

जम्मू कश्मीर में देखिए, कश्मीरी हिन्दुओं को वहाँ से भगा दिया गया, महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और बड़ी संख्या में नरसंहार भी। इसके बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने घाटी को बंधक बना लिया। भारत की आज़ादी के बाद से ही जवाहरलाल नेहरू ने अपने मित्र शेख अब्दुल्ला को खुली छूट दी, परिणाम ये हुआ कि वहाँ कट्टरपंथ बढ़ता गया, कई अलगाववादी पैदा हो गए। मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 और धारा-35A को निरस्त किया, जिसके बाद वहाँ स्थिति शांत हुई।

आखिर मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने के पीछे कारण क्या है? इसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के तुष्टिकरण की राजनीति का हाथ नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि इसी कॉन्ग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का है। उन्होंने 10 वर्षों तक शासन किया, सोचिए उनकी नीतियों का हिन्दुओं को कितना नुकसान हुआ होगा। सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस एक बिल लेकर भी आई थी, जो अगर कानून बन जाता तो कहीं भी सांप्रदायिक दंगे होने पर हिन्दू समाज अपने-आप अपराधी घोषित कर दिया जाता और हिन्दू युवक जेल भेज दिए जाते।

हिन्दुओं की जनसंख्या घटने को हम ‘बहुसंख्यकों की जनसंख्या घटना’ कह कर शुभ संकेत की तरह क्यों लें? ये देश हिन्दुओं का है। ये देश सनातन का है, यहाँ हिन्दू धर्म से ही बौद्ध, जैन और सिख जैसे संप्रदाय निकले और फिर वापस समाहित की छाया में ही समाहित हो गए। इस्लाम तो बाहर से आया, हिंसा और धोखेबाजी का सहारा लेकर यहाँ के लोगों को बड़े पैमाने पर धर्मांतरित किया गया। कभी किसी फकीर ने ‘चमत्कार’ दिखाया, कभी किसी बादशाह ने जजिया कर लगाया।

भारत में अगर इस्लाम का प्रसार शांति से हुआ होता तो कोई दिक्कत की बात नहीं थी। कोई विचारधारा, जो हमारे देश की भूमि की सोच से मेल खाती ही नहीं है, वो बाहर से आकर यहाँ के मूलनिवासियों पर अपना आधिपत्य जमाने लगे तो इसमें खुश होने वाली कौन सी बात है? भारत में पहला बड़ा हमला करने वाला इस्लामी मुहम्मद बिन कासिम था, जिसने यहाँ की महिलाओं को सेक्स स्लेव बना कर अरब के बाजारों में भिजवाया, ये सोच तो भारत भूमि की नहीं हो सकती।

दुर्रानी साम्राज्य ने सिखों का सिर काट कर लाने पर इनाम रखा। अयोध्या, मथुरा और काशी से लेकर अनंतनाग तक मंदिर तोड़े गए, जबरन उन अवशेषों से मस्जिदें बनाई गईं। हिन्दू राजाओं के किलों में जाने वाली नहरों में गोमांस फेंके गए। कभी कोई नादिर शाह दिल्ली को लूट ले गया, कभी कोई अहमदशाह अब्दाली आ धमका। आज भी जानबूझकर गोहत्या की जाती है, हिन्दुओं को भड़काने के लिए। सोच वही है, सिर्फ पीढ़ियाँ बदली हैं। आज भी तो खलीफा के शासन के लिए आतंकी हमले किए जाते हैं।

भारत में PFI के एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था, जिसे प्रतिबंधित किया गया। उससे पहले SIMI हुआ करता था। इनका एक ही लक्ष्य था – भारत में इस्लामी शासन की स्थापना। PFI की छात्र यूनिट SDPI ने कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया। कॉन्ग्रेस इन ताकतों से मिली हुई है। केरल के वायनाड में राहुल गाँधी ने हरे झंडों वाले IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) से हाथ मिलाया। कॉन्ग्रेस आज भी अपने घोषणा-पत्र के माध्यम से मुस्लिम तुष्टिकरण में लगी है।

बिहार के फुलवारीशरीफ में भी PFI वालों के नेटवर्क पकड़ा गया, जहाँ गजवा-ए-हिन्द, यानी भारत में इस्लामी शासन के लिए साजिश चल रही थी। कई ठिकानों पर रेड पड़ी। कई दस्तावेज भी मिले, जिनमें इसके लिए 2047 यानी आज़ादी से 100 वर्ष बाद तक का लक्ष्य रखा गया था। कहीं युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती है, कहीं ऑनलाइन सीरिया-पाकिस्तान में बैठे आकाओं से संपर्क करा कर भड़काया जाता है। आखिर हिन्दुओं में कोई आतंकी संगठन क्यों नहीं है, ये सब क्यों नहीं होता? हिन्दू तो भारत को अपनी भूमि मानते हैं, यहाँ की धरती को नुकसान क्यों पहुँचाएँगे?

कॉन्ग्रेस पार्टी का एजेंडा है मुस्लिमों को आरक्षण देना, पिछड़ों का हक़ मार कर। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में नौकरी-एडमिशन से लेकर पंचायत चुनावों तक में मुस्लिमों को आरक्षण दिया जा रहा है। ये सब कॉन्ग्रेस ने किया। कॉन्ग्रेस की साजिश है देश की संपत्ति के बँटवारे की, ताकि हिन्दुओं की मेहनत की कमाई कई बच्चे पैदा करने वाले मुस्लिमों को पहुँच जाए। पार्टी घुसपैठियों का समर्थन करती है, इसने CAA का विरोध किया। पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक कॉन्ग्रेस पार्टी घुसपैठियों को प्रश्रय देती है।

एक तो भारत खुद ही इस्लामी ताकतों से परेशान है, ऊपर से बड़ी संख्या में म्यांमार-बांग्लादेश से रोहिंग्या घुसपैठियों के प्रति नरमी दिखा कर देश को तबाही की ओर धकेला जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रहे कांतिलाल भूरिया कहते हैं कि पार्टी सत्ता में आने के बाद महिलाओं को एक-एक लाख रुपया देगी, 2 बीवी वालों को 2 लाख रुपए मिलेंगे। अब हिन्दू धर्म में तो बहुविवाह की इजाजत नहीं है। शरिया ही इसकी अनुमति देता है। और हाँ, मुस्लिमों को तो भारत में अपना अलग कानून चलाने की अनुमति भी है, उनके लिए ‘पर्नसल लॉ’ है।

यही तो कारण है कि भाजपा अपने घोषणा-पत्र में UCC (समान नागरिक संहिता) लाने की बात करती है, जबकि कॉन्ग्रेस 2 बीवियों और ज़्यादा बच्चों वालों को प्रोत्साहित करती है। देश में सबके लिए समान कानून होना चाहिए, इसमें भला क्यों किसी को आपत्ति हो? महिला-पुरुष को बराबर अधिकार मिलें, इसमें कोई किसी को दिक्कत हो? लेकिन इस्लाम में तो मातृभूमि से पहले कुरान को रखा जाता है, स्वयं बबासाहब भीमराव आंबेडकर कह गए हैं।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि मुस्लिमों की हिस्सेदारी देश में 20% हो गई है। उनका कहना है कि ये सनातन को खत्म करने की साजिश है, घुसपैठियों को कॉन्ग्रेस ने अपना वोट बैंक बना रखा है। वास्तविक परिस्थितियाँ इससे भी भयावह हैं। भारत में कई छोटे-छोटे पाकिस्तान बन गए हैं जहाँ शरिया चलता है। जिस ‘सोने की चिड़िया’ को हजारों वर्षों से हिन्दुओं ने अपने खून-पसीने से सींच कर उपजाऊ बनाया, जिसे बहार से आक्रांता लूट-लूट कर ले गए, अब वो क्षेत्र भी हिन्दुओं के हाथों से चला जाए तो कैसा लगेगा?

बार-बार ये कह कर मजाक बनाया जाता है कि धर्म कभी खतरे में था ही नहीं। अगर धर्म खतरे में नहीं था, फिर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान कट कर कैसे अलग हुए भारत से? इतना बड़ा क्षेत्र हिन्दुविहीन कैसे हो गया? बांग्लादेश में एक अफवाह पर देश भर में नवरात्री के पूजा-पंडालों पर हमले होते हैं, अफगानिस्तान से गुरुग्रंथसाहिब को वापस आना पड़ता है, पाकिस्तान वो तो आए दिन हिन्दू लड़कियों को उठा कर ले जाते हैं और जबरन धर्मांतरण-निकाह कर देते हैं, सरकार तक मंदिरों को गिराने में साथ देती है।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने शुरुआत से ही जो माहौल पैदा किया, ये सब उसका परिणाम है। जवाहरलाल नेहरू कहते थे कि राम-कृष्ण जैसे देवताओं ने गरीबी के सिवा और कुछ नहीं दिया। जिस देश की आत्मा में राम और कृष्ण बसते हों, वहाँ इस तरह के बयान से हिन्दू विरोधी उत्साहित नहीं होंगे तो और क्या। कभी राजीव गाँधी मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट देते हैं, कभी कॉन्ग्रेस सरकार ऐसा कानून लेकर आती है जिससे हिन्दू अपने ही तबाह धर्मस्थल को लेकर न्याय का दावा नहीं कर सकें।

और हाँ, ये आँकड़े तो सिर्फ 2015 तक के हैं। ‘लव जिहाद’ से लेकर कई अन्य तरह की आपराधिक घटनाएँ तो इसके बाद और भी तेज़ हो गईं, क्योंकि इसके लिए बाहर से फंडिंग तक आने लगा। अब तो सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम ने ‘वोट जिहाद’ की अपील कर दी है। 2015 के बाद के 9 वर्षों में ही 2020 के फरवरी में दिल्ली में दंगे हुए, दिव्यांगों को मुस्लिम बनाने का नेटवर्क पकड़ा गया, औरंगजेब के महिमामंडन के लिए बुद्धिजीवियों को लगाया गया और ‘भारत से बाहर ‘भारत में मुस्लिम खतरे में हैं’ वाला माहौल दुनिया भर में बनाया गया।

रायबरेली के अँधेरे में जुगनू की तरह प्रियंका गाँधी को चमकाने आया, गाँधी परिवार की ही बेइज्जती करवा गया: पत्रकार/फिल्म डायरेक्टर की ‘दलाली’ को नेटिजन्स ने किया नंगा

कॉन्ग्रेस के प्रचार को अद्भुत बनाने के लिए नए-नए हथकंडे इस्तेमाल हो रहे हैं। पार्टी के नेताओं और गाँधी परिवार को जमीन से जुड़ा साबित करने के लिए अलग-अलग तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। इसी क्रम में प्रियंका गाँधी की एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें प्रियंका अंधेरे में खड़े होकर रायबरेली में भाषण दे रही हैं और जनता टॉर्च जलाए हुए हैं। उनका यह ट्वीट देखने के बाद पत्रकार से फिल्म डायरेक्टर बने अविनाश दास भी उनकी चापलूसी में लग गए और प्रियंका गाँधी द्वारा अंधेरे में व बिन माइक के दिए गए भाषण को ‘कविता’ बताने लगे।

अविनाश दास को शायद लगा कि इस ट्वीट से लोगों में प्रियंका गाँधी की क्रांतिकारी छवि बनेगी, लेकिन हो इसका उलटा गया। दरअसल, प्रियंका गाँधी की वीडियो शेयर करके अविनाश दास ने लिखा था- “रायबरेली की बछरावां विधानसभा। कोई एक चौराहा। रात थी और दूर दूर तक अंधेरा। भीड़ ने अपने हाथों में रोशनी की ज़िम्मेदारी ली और जुगनू की तरह टिमटिमाती हुई प्रियंका गाँधी बिना माइक के चमक उठीं, गरज उठीं। जब मैं इस दृश्य को देख रहा था, तब मेरे लिए ये महज़ एक दृश्य नहीं, पूरी की पूरी कविता थी।”

उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अनिवाश दास का मजाक तो उड़ाया ही, साथ ही कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साध दिया। लोगों ने पूछा कि प्रियंका गाँधी का भाषण को कविता जैसा बताने वाले दास को दलाली छोड़ ये सवाल करना चाहिए था कि आखिर प्रियंका गाँधी को उस क्षेत्र में अंधेरे में भाषण क्यों देना पड़ा, जहाँ सालों से उनके परिवार का राज रहा है।

पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने अविनाश दास के ट्वीट पर पूछा, “लेकिन दूर दूर तक अंधेरा था ही क्यों? इतने साल बाद भी देश के सबसे ताकतवर परिवार के क्षेत्र की ऐसी हालत? दुख हुआ जान कर, कम से कम पिछले 10 साल में सोलर लाइट्स ही लगवा देते यहाँ के विधायक/सांसद…।”

राहुल गुप्ता ने लिखा, कॉन्ग्रेस की खानदानी सीट होने के बावजूद ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी कि अंधेरे में मोबाइल फ्लैश का उपयोग करके भाषण देना पड़ रहा है। चमचे जिसे प्रियंका गाँधी का स्वैग बता रहे हैं। दरअसल वह कॉन्ग्रेस के खानदानी सीट की शर्मनाक हकीकत है। चमचे इस वीडियो को दिखाकर वाहवाही लूटने की सोच रहे हैं… जैसे उसकी मालकिन वैसे उसके चमचे…।

एक यूजर ने कहा, “तुम जैसे मूर्ख कविता लिखते रह गए और गाँधी खानदान पिछले कई दशकों तक रायबरेली और अमेठी में राज करता रहा। फिर भी बिजली, पानी जैसी आवश्यकता की चीजें नहीं दे पाए, जिसका उदाहरण तुम्हारे सामने है। ये देखकर तुम्हें शर्म नहीं आ रही। तुम उनके चरण चाटने में लगे हो।”

यूजर्स ने कहा कि 70 साल तक जहाँ गाँधी परिवार जमा रहा। वहाँ अगर सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं है तो इसमें महिमामंडन करने वाली बात होनी चाहिए या फिर शर्म करने की।

रोहित नाम के यूजर ने कहा, “जब कोई दर्ज़ी फटे हुए लंगोट में अपनी दरिद्रता पर गर्व करता पहलवानी करने आए तो लोगों के मन में ये हास्यभाव स्वतः ही उठ जाता है की भई पहले अपना लंगोट तो सिल ले। यही भाव अंधेरे में खड़ी उस स्त्री को देखकर आ रहा है जो उस वंश से ही जिसने यहाँ 50 वर्ष सत्ता भोग किया।”

बता दें कि प्रियंका गाँधी 8 मई को रायबरेली में जनसभा को संबोधित करने गईं थीं। उन्होंने इसकी क्लिप शेयर करते हुए कहा था कि पिछले सौ साल का इतिहास कहता है कि रायबरेली हमेशा लोकतंत्र के साथ खड़ा रहा है। आजादी से पहले यहाँ के किसानों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन किया और उसके बाद भी हमेशा राजनीति को दिशा दिखाई है।

उनकी इस क्लिप पर भी नेटिजन्स ने काफी मजाक बनाया था। उन्हें कहा गया था कि आजादी के बाद 17 बार उनकी पार्टी के लोग जिस जगह से सांसद रहे, 65 साल तक राज किया। फिर भी क्या कारण है टोर्च की रौशनी में जनता को संबोधित करना पड़।

‘मैं कॉन्ग्रेस के शाही परिवार की तरह बड़े घराने से नहीं निकला, गरीबी में बड़ा हुआ हूँ’: PM मोदी ने नंदुरबार में कहा- कॉन्ग्रेस का हाल ‘चोर मचाए शोर’ वाला

लोकसभा चुनाव 2024 के सात चरणों में से तीन चरण का मतदान हो चुका है। चौथे चरण का मतदान 13 मई है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (10 मई 2024) को महाराष्ट्र के नंदुरबार में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन के साथी पर जमकर निशाना साधा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ठकॉन्ग्रेस जानती है कि वो विकास में मोदी का मुकाबला कर ही नहीं सकती है। इसलिए वो इस चुनाव में झूठ की फैक्ट्री खोलकर बैठ गए हैं। झूठ फैलाकर वोट लेना चाहते हैं। कभी आरक्षण को लेकर झूठ, कभी संविधान को लेकर झूठ। इन्होंने पूरा इकोसिस्टम ऐसी अफवाहें फैलाने के लिए चौबीसों घंटे लगाकर रखा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “आरक्षण पर कॉन्ग्रेस का हाल ‘चोर मचाए शोर’ वाला है। धर्म के आधार पर आरक्षण बाबा साहेब के सिद्धांतों के खिलाफ है। बाबा साहेब की भावना के खिलाफ है। संविधान निर्माताओं ने जो संविधान बनाया, उसकी पीठ में भी छुरा भोंकने वाला माफ ना कर सके, ये ऐसा पाप है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के शाही परिवार की तरह बड़े घराने से नहीं निकला हूँ। मैं तो गरीबी में ही बड़ा हुआ हूँ, मुझे पता है कि यहाँ आपने कितनी तकलीफ उठाई है। मोदी ने संकल्प लिया था – हर गरीब, हर आदिवासी को घर, हर आदिवासी के घर में पानी, हर परिवार को पानी की सुविधा, हर गाँव में बिजली।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने नंदुरबार के करीब 1.25 लाख गरीबों को पीएम आवास योजना के अंतर्गत पक्के आवास दिए। पिछले 10 साल में हम 4 करोड़ पक्के घर दे चुके हैं और तीसरे टर्म में हम 3 करोड़ घर और देंगे। NDA सरकार ने महाराष्ट्र के 20 हजार से अधिक गांवों में हर घर जल पहुंचाया है। इसमें नंदुरबार के 111 गाँव भी शामिल है।”

प्रोपेगेंडा भगवा आतंकवाद का, टारगेट RSS-VHP, सैनिक-संत’.. पीड़ित से लेकर कॉन्ग्रेस सरकार के अधिकारी तक खोल चुके हैं हिंदू विरोधी साजिशों की पोल

कॉन्ग्रेस ने अपने शासनकाल के दौरान भरसक यह प्रयास किया कि देश में हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव खड़ा किया जाए। मालेगाँव बम धमाका मामले के जरिए देश की हिन्दू आबादी पर प्रश्न खड़े गए। हिन्दू संतों और सैनिक को प्रताड़ित किया गया ताकि कैसे भी भगवा आतंकवाद की बात साबित की जा सके। धीमे-धीमे भगवा आतंकवाद शब्द सामने लाया गया और फिर एक पूरे धमाके का दोष ही हिन्दुओं पर डाल दिया गया।

दरअसल, मालेगाँव धमाका तो 2008 में हुआ था लेकिन इससे काफी पहले ही कॉन्ग्रेस की सरकार देश की बहुसंख्यक आबादी को विलेन बनाने के लिए काम पर लग चुकी थी। कॉन्ग्रेस सरकार के दौर में इस तैयारी की सबसे पहली झलक 2006 में मिलती है।

कैसे शुरू हुआ हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव

हिन्दू आतंकवाद के बारे में केंद्र सरकार में अंडर सेक्रेटरी रहे RVS मणि अपनी किताब में बताते हैं कि उन्हें एक बार केन्द्रीय मंत्री शिवराज पाटिल ने बुलाया था। पाटिल गृह मंत्री थे और मणि गृह मंत्रालय में आतंक के मामलों से जुड़ा एक विभाग देख रहे थे। मणि ने बताया कि पाटिल के कमरे में उन्हें IPS हेमंत करकरे और दिग्विजय सिंह भी बैठे हुए मिले। सिंह और करकरे ने इसके बाद मणि से पूछताछ चालू की। मणि से हालिया आतंकी घटनाओं के बारे में पूछा गया।

उनसे पूछा गया कि उनके आरोपित कौन हैं, उनमें जाँच की स्थिति क्या है, कौन-कौन से संगठन जुड़े हुए हैं। जब मणि ने उन्हें बताया कि अधिकांश आतंकी हमले एक ही मजहब के लोग कर रहे हैं तो करकरे और दिग्विजय उनकी बातों पर थोड़ा सा असहज नजर आए।

इस दौरान दोनों बात बजरंग दल, हिन्दू और ऐसे ही टॉपिक पर बात करते रहे। मणि का कहना है कि वह नांदेड़ का जिक्र बार बार कर रहे थे। नांदेड़ में एक बम धमाका हुआ था जिसके विषय में बात हो रही थी। मणि बताते हैं कि इस बैठक के कुछ दिनों बाद ही एक हिन्दू व्यक्ति को एक आतंक के मामले में पकड़ा गया।

नांदेड से ही समीर कुलकर्णी नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। उसे ऊपर आरोप था कि उसने अपनी दुकान में विस्फोटक छुपा रखे थे, इनमें धमाका हुआ था। बताया गया कि समीर बजरंग दल के कार्यालय भी जाता था। इस मामले में समीर कुलकर्णी को हिन्दू आतंकवादी बताने की कोशिश हुई। इस पूरे मामले में करकरे की भूमिका संदिग्ध थी।

मालेगाँव धमाका और पूरी साजिश

महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर, 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कॉन्ग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए जिनके जबरदस्ती बयान दिलवाए गए और RSS-VHP नेताओं को इस मामले में फँसाने की साजिश भी रची गई। यह अब काम तब की महाराष्ट्र ATS ने किया।

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, स्वामी असीमानंद समेत कई हिन्दू व्यक्ति आरोपित बनाए गए। कर्नल पुरोहित को इस मामले में RDX देने का आरोपित बताया गया। साध्वी प्रज्ञा पर धमाके के लिए बाइक देने का आरोप लगा। इस धमाके में आरोपित बनाए गए कई लोगों को समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में भी आरोपित बनाया गया था। इसी के बाद पूरा नैरेटिव बुना जाने लगा कि देश में हिन्दू आंतकवाद भी है।

महाराष्ट्र ATS इस मामले में कर्नल पुरोहित और अन्य गवाहों के जरिए बड़े हिन्दू नेताओं को भी फँसाना चाहती थी। इसके लिए कर्नल पुरोहित को प्रताड़ित किया गया। उनकी टांग तोड़ी गई। उसने कहा गया कि वह मालेगाँव मामले में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS-VHP के बड़े नेताओं का नाम ले और यह बात स्वीकार कर लें कि धमाका उन्हीं ने किया है। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा को इतना मारा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में तक समस्या आ गई और उन्हें वेंटीलेटर पर भर्ती होना पड़ा।

यह सब इसीलिए किया गया ताकि देश में हिन्दुओं की आवाज उठाने वालों को आतंकवादी सिद्ध किया जाए और इस्लामी आतंकवाद के बराबर में हिन्दू आतंकवाद जैसे जूते नैरेटिव को खड़ा कर दिया जाए। बम धमाकों को रोक पाने में विफल कॉन्ग्रेस सरकार इस कोशिश में लगी रही कि देश की बड़ी हिन्दू आबादी को कैसे अपराधबोध में डाला जाए। हालाँकि उसकी यह कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं। ATS की मारपीट के कारण गवाहों ने शुरू में तो बयान दिए लेकिन बाद में उन्होंने भी सच्चाई बयाँ की।

ध्वस्त हो गया हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव, सामने आई प्रताड़ना की कहानी

कॉन्ग्रेस के राज में इस बात के खूब प्रयास हुए कि हिन्दू आतंक का नैरेटिव गढ़ा जाए लेकिन बाद में यह सब फेल हो गया। इसके उलट जिन लोगों पर इन मामलों में मुकदमे किए गए थे, उनकी प्रताड़ना की कहानियाँ सामने आईं। ATS के आरोपों पर 17 गवाह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए। इनमें से एक गवाह ने भी खुलासा किया कि उसको धमका कर हिन्दू नेताओं के नाम लेने के लिए कहा गया था। यहाँ तक कि जिन साध्वी प्रज्ञा को आरोपी बनाया गया था, उन्हें भी इस मामले में दाखिल की गई आखिरी चार्जशीट में दोषी नहीं माना गया।

कर्नल पुरोहित को भी इस मामले में जमानत मिली। इसके बाद इन लोगों ने बताया कि कैसे ATS ने इन्हें इस बात पर मजबूर किया कि वह देश में हिन्दू आतंकवाद की बात स्वीकारें। साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि हेमंत करकरे, परमबीर सिंह समेत कई पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जमीन पर गिरा कर पीटा, उन्हें गालियाँ दी, उनसे भद्दे सवाल पूछे। उनको पुरुष कैदियों के साथ पोर्न दिखाया। साध्वी को बेल देने की बात आई तो उस न्यायाधीशों को तक धमकाया गया।

कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ दिया गया। उन्हें कई दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा, इस दौरान उनको नंगा करके मारा गया। उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला हुआ। उन्हें बालों से खींचा गया। उन पर यह दबाव डाला गया कि वह RSS-VHP के बड़े नेताओं का नाम लें, उन्हें इस मामले में फँसाएँ। कोर्ट में गवाहों के पलटने और ATS की कारस्तानियों के बताने के बाद हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव मुंह के बल गिरा है।

दिल्ली में 1 दिन में 100 बम ब्लास्ट, भारत में खलीफा-राज की स्थापना… ISIS वाले मियाँ-बीवी कम्प्यूटर में एक्सपर्ट, MBA भी कर रखा था: क्रिप्टो में करते थे आतंकी फंडिंग

2019 में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में उस समय ठंड का मौसम था, जब जहाँजेब सामी अपनी बीवी हिना बशीर बेग के साथ जम्मू कश्मीर से यहाँ शिफ्ट हुआ। उसी साल 6 अक्टूबर को इन दोनों का निकाह हुआ था, जब अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले के कारण जम्मू कश्मीर में सख्ती थी और कई अलगाववादी नेता नज़रबंद थे। निकाह के 2 सप्ताह बाद ही दोनों दिल्ली के लिए निकल गए। जहाँजेब सामी एक ब्रिटिश कंपनी के लिए काम कर रहा था।

उसने B.Tech और MBA कर रखा है। इसी तरह उसकी बीवी हिना बशीर बेग ने भी कम्प्यूटर एप्लीकेशंस में स्नातक करने के बाद मैनेजमेंट का कोर्स किया था। वो कुछ बैंकों के लिए काम कर चुकी थी और निकाह के दौरान उसने काम से ब्रेक लिया हुआ था। दोनों की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी। उन्होंने जामिया नगर के C ब्लॉक में एक फ़्लैट रेंट पर लिया। शुरू में वो मूवी देखते हुए या ओखला बर्ड सैंक्चुरी घूमते हुए वीकेंड्स पर समय व्यतीत करते थे।

उसके तुरंत बाद CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के खिलाफ शाहीन बाग़ आंदोलन शुरू हो गया और फिर इस जोड़े को अधिकतर घर में ही रहना पड़ा। इसके अगले साल कोरोना वायरस आपदा दुनिया पर कहर बन कर टूटी और फिर लॉकडाउन में दोनों घर में ही रहे। 8 मार्च, 2020 – ये वो तारीख़ थी जब दिल्ली पुलिस का आतंकरोधी दस्ता उनके दरवाजे पर पहुँचा। गिरफ़्तारी के बाद उन पर UAPA लगाया गया। असल में इंटरनेट पर दोनों की अलग पहचान थी।

हिना बशीर बेग जहाँ ‘Hannabee’ और ‘कतिजह अल कश्मीरी’ नाम से सक्रिय थी, जबकि उसका शौहर ‘जाएब’, ‘अबू अब्दुल्लाह’ और ‘अबू मुहम्मद अल-हिन्द’ नाम से। असल में ये दोनों आतंकी संगठन ISIS के सदस्य थे और सीरिया-अफगानिस्तान में बैठे आका इन्हें आदेश दे रहे थे। मामला NIA को ट्रांसफर किया गया, दोनों जेल भेजे गए। साढ़े 4 महीने बाद वो दोषी साबित हुए। जहाँजेब सामी दिल्ली में एक दिन में 100 बम ब्लास्ट की साजिश रच रहा था।

उसकी मंशा थी कि भारत में खलीफा का राज स्थापित किया जाए और इसके लिए वो ये सब कर रहा था। उसे 20 साल की सज़ा सुनाई गई, जबकि उसकी बीवी को 7-7 साल की। गिरफ़्तारी से कई महीने पहले से दोनों सर्विलांस में थे। 2019 की गर्मियों में ही एक चैटिंग प्लेटफॉर्म से एन्क्रिप्टेड मैसेज के आदान-प्रदान का ट्रेस मिला था। उसी दौरान ISIS ने भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए ‘विलायह अल-हिन्द’ मिशन लॉन्च किया था।

‘स्वात-अल-हिन्द’ नामक डिजिटल मैगजीन भी टेलीग्राम जैसे एप्स पर अपलोड किए गए थे। दोनों मियाँ-बीवी मिल कर CAA विरोध की आड़ में मुस्लिम युवाओं को हथियार उठाने के लिए भड़का रहे थे। IS-खोरासन के अबू उस्मान अल कश्मीरी से ये दोनों संपर्क में थे। IS कमांडर हुज़ैफ़ा-अल-बाकिस्तै से वो प्रेरणा लेते थे। उसे अफगानिस्तान के नंगरहार में एक ड्रोन हमले में मार गिराया गया था। इन दोनों ने मैगजीन में एक लेख लिख कर उक्त आतंकी का महिमामंडन किया था

हिना ने पुणे से पढ़ाई की थी, ऐसे में वो पुणे के एक कपल के साथ भी संपर्क में थे। उक्त शख्स जिम ट्रेनर था, जबकि उसकी बीवी सादिया पहले से ही ISIS के प्रति झुकाव को लेकर जाँच एजेंसियों की रडार पर थी। हिना ने सादिया को एक मिशन के लिए सुसाइड बेल्ट पहनने के लिए भी तैयार कर लिया था। सामी-हिना की ऑनलाइन एक्टिविटीज के कारण उन्हें ट्रेस किया गया। वो आतंकी मैगनीज को भी सर्कुलेट कर रहे थे। क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से वो फंड्स का लेनदेन करते थे। अब NIA कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया है।

ईरान ने 5 और नाविक छोड़े, महिला को पहले ही भेज चुका है भारत: इजरायल से जुड़े जहाज पर सवार थे 17 भारतीय क्रू मेंबर

ईरान ने एक इजरायली पोत से बंदी बनाए गए पाँच भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया है। ये भारतीय नाविक गुरुवार (9 मई 2024) को ईरान से निकल गए। भारत ने इसके लिए ईरान की सरकार को धन्यवाद दिया है। दरअसल, कुछ दिन पहले ईरान ने इजरायल से संबंधित एक जहाज को जब्त कर लिया था और उसके क्रू सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें पाँच भारतीय भी थे।

भारतीय दूतावास ने भारतीय नाविकों की रिहाई का विवरण साझा करते हुए कहा, “हम बंदर अब्बास में दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ घनिष्ठ समन्वय के लिए ईरानी अधिकारियों की सराहना करते हैं।” वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट कर कहा, “एमएससी एरीज पर सवार पाँच भारतीय नाविकों को गुरुवार शाम रिहा कर दिया गया और वे ईरान से चले गए हैं। इजरायल से जुड़े मालवाहक जहाज को 13 अप्रैल को ईरान ने जब्त कर लिया था, जिसमें 17 भारतीय नागरिक सवार थे।”

जहाज पर सवार भारतीय दल में केरल की एक महिला नाविक एन टेसा जोसेफ भी थीं। ईरान की सरकार ने जोसेफ को पहले ही रिहा कर दिया था और वह 18 अप्रैल 2024 को भारत पहुँच गई थीं। हालाँकि, जोसेफ के बाद अब पाँच भारतीय नाविकों को फिर रिहा किया गया है। हालाँकि, अभी भी 11 भारतीय नाविक ईरान में ही हैं।

दरअसल, ईरान ने 13 अप्रैल 2024 को भारत की ओर आ रहे एक जहाज एमएससी अराईज को होरमुज़ की खाड़ी में अपने कब्जे में लिया था। इस जहाज के चालक दल में 17 भारतीय भी शामिल थे। एक इजरायली-संबद्ध कंटेनर जहाज था। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। ईरान का आरोप था कि जहाज उनके इलाके से बिना इजाजत गुजर रहा था।

पुर्तगाल के झंडे तले चलने वाला यह जहाज UAE से भारत की तरफ आ रहा था। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडो ने इस पर हेलिकॉप्टर से उतर कर इसे अपने कब्जे में लिया था। यह जहाज लंदन स्थित ज़ोडियाक मैरीटाइम से जुड़ा है। ज़ोडियाक मैरीटाइम इज़रायली अरबपति इयाल ओफ़र के ज़ोडियाक समूह का हिस्सा है। इस जहाज पर चालक दल के कुल 25 सदस्य सवार थे। 

इस घटना के सामने आने के बाद भारत ने अपने नागरिकों की रिहाई के प्रयास शुरू कर दिए थे। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की थी। भारत सरकार की माँग पर ईरान ने अपने कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद भारतीयों को सहायता को अनुमति दे दी थी।

बता दें कि ईरान आतंकी संगठन हमास का समर्थन कर रहा है, जबकि इजरायल हमास के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। वहीं, लाल सागर में ईरान के समर्थन से हूती विद्रोही अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर लगातार हमले कर रहे हैं। वहीं, सीरिया में ईरान के दूतावास को निशाना बनाया था, जिसमें ईरानी सेना के दो शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इस हमले का आरोप ईरान ने इजरायल पर लगाया था।

हिरोइन लैला खान को ‘अब्बा’ ने ही बंगले में गाड़ दिया, 13 साल बाद कोर्ट ने माना दोषी: बेटियों से करवाना चाहता था देह का धंधा, गिराई थी 6 लाशें

बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान की हत्या के मामले में एक सेशन कोर्ट ने उनके सौतेले अब्बा परवेज टाक को दोषी ठहराया है। गुरुवार (9 मई, 2024) को अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जबकि मंगलवार को इस संबंध में सज़ा सुनाई जाएगी। न सिर्फ लैला खान, बल्कि उनके 4 अन्य भाई-बहनों और माँ माँ को भी मार डाला गया था। बिस्तर और तकिये से लिपटी हुई उनकी लाशें मिली थीं। इगतपुरी के एक सुनसान फार्महाउस में परवेज टाक ने उनके शवों को दफ़न कर दिया था।

परवेज टाक, शेलीना का तीसरा शौहर था। शेलीना का अपने दूसरे शौहर आसिफ शेख के साथ नजदीकी उसे पसंद नहीं थी और इसे लेकर ही हुए वाद-विवाद के बाद उसने लोहे की रॉड से अपनी बीवी के सिर पर वार किया। असल में शेलीना खान बिल्डर आसिफ शेख को अपनी संपत्ति का केयरटेकर बनाने की योजना पर काम कर रही थी। बेटे इमरान, बेटी अज़मीना और भतीजी आफरीन उसे बचाने आई, लेकिन परवेज टाक ने एक-एक कर उन सभी को रॉड से मारा, चाकू भी घोंप दिया।

लैला खान और इमरान की जुड़वाँ बहन ज़ारा उस समय मुंबई के मीरा रोड में एक जमीन से संबंधित करार में व्यस्त थे। परवेज टाक को पता था कि उनके पास कुछ आभूषण हैं और साथ में 2 करोड़ रुपए भी, जिन्हें लेकर वो फार्महाउस पर आएँगे। ऐसे में वो अपने साथी शाकिर के साथ मीरा रोड उन्हें लेने के लिए पहुँचा। रास्ते में ही घोड़बंदर रोड पर कार रोक कर उसने दोनों को मार डाला। हत्या के वक्त लैला खान की उम्र मात्र 31 वर्ष थी। उसकी अम्मी 51 साल की थी, जबकि बड़ी बहन 32 साल की।

इमरान और ज़ारा दोनों जुड़वाँ 25 साल के थे। ओशिवारा पुलिस थाने में लैला खान के अब्बा और शेलीना के पहले शौहर नादिर पटेल ने अपने परिवार के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने परवेज टाक और आसिफ शेख पर आरोप लगाए थे। बेंगलुरु से आसिफ शेख को पकड़ा भी गया लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया। मोबाइल डेटा के आधार पर इगतपुरी में परवेज टाक के लैला खान के साथ होने का पता चला, ऐसे में उसे गिरफ्तार किया गया।

हत्या के बाद परवीज टाक अपने मूल निवास स्थान कश्मीर 2 कार लेकर चला गया था, जहाँ वो फॉरेस्ट कॉन्ट्रैक्टर हुआ करता था। 8 जुलाई, 2012 को जम्मू कश्मीर पुलिस ने उसे ठगी के एक मामले में पकड़ा, जिसके बाद उसने महाराष्ट्र में हत्या की बात उगल दी। 10 जुलाई, 2012 को फार्महाउस में खुदाई के बाद लाशें निकाली गईं। परवेज टाक लगातार बयान बदल रहा था और लाशों को पहाड़ से फेंकने की बात भी कह रहा था। उसके खिलाफ केस साबित करने के लिए 41 गवाहों की कोर्ट में पेशी हुई

सेलिना के सबसे बच्चे उसके पहले शौहर से ही थे, ऐसे में पटेल उससे मिलने-जुलने आया करते थे। ये बात परवेज टाक को खटकती थी। नादिर पटेल के अनुसार, उनकी बेटियों ने उन्हें बताया था कि परवेज टाक दुबई शिफ्ट होने के लिए उन पर दबाव बनाता था और वेश्यावृत्ति कर के पैसे कमाने के लिए कहता था। परवेज टाक का कहना था कि उसे डर था कि शेलीना और उसके बच्चे उसे छोड़ कर दुबई में बस जाएँगे। वो अपनी बीवी की संपत्ति हड़पना चाहता था

लैला खान को ‘वफ़ा: अ डेडली लव स्टोरी’ (2008) फिल्म के लिए जाना जाता है। ये एक बोल्ड मूवी थी, जिसमें राजेश खन्ना मुख्य किरदार में थे। अटकलें थीं कि उन्होंने हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के आतंकी मुनीर खान से निकाह कर रखा है। 2002 में उन्होंने ‘लैला पटेल’ नाम से कन्नड़ फिल्म ‘मेकअप’ से डेब्यू किया था। हत्या से पहले वो निर्माता राकेश सावंत की फिल्म ‘जिन्नात’ के लिए शूटिंग कर रही थीं। अब इस हत्याकांड में 13 वर्षों बाद न्याय मिला है।