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8वीं फेल सलमान ने हिंदू लड़की को लव जिहाद में फाँस बनाया सेक्स टेप, ब्लैकमेल कर लाखों वसूले: मोबाइल रिपेयरिंग षड्यंत्र से 3-4 और हिंदू लड़कियाँ ट्रैप में

राजस्थान के जयपुर में सलमान खान को पुलिस ने ‘लव जिहाद’ के मामले में गिरफ्तार किया है। वो आठवीं फेल है, लेकिन मोबाइल की दुकान चलाता था। दुकान पर आने वाली हिंदू लड़कियों को पहचान छिपाकर फाँसता था और उन्हें प्रेम जाल में फँसाकर उनके वसूली करता था। ऐसे ही एक मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

सलमान खान ने अपनी पहचान छिपाकर 5-6 साल पहले एक हिंदू लड़की को अपनी दुकान पर ही प्रेम जाल में फँसाया, फिर उसके साथ संबंध बनाए और उसका वीडियो तैयार कर लिया। इस वीडियो के दम पर वो सालों से हिंदू लड़की के साथ वसूली कर रहा था। यही नहीं, हिंदू लड़की के नाम पर उसने स्कूटी तक खरीदवा रखी थी। वो लड़की को जबरन अपने साथ दिल्ली लेकर भाग गया था, जिसके बाद घरवालों की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला जयपुर के शिप्रा पथ थाना इलाके का है, जो मुख्यमंत्री आवास के सामने वाला इलाका है। यहाँ मोबाइल रिपेयरिंग शॉप चलाने वाले सलमान को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। वो अपने साथ जयपुर की हिंदू लड़की को लेकर भागा था। पता चला है कि उसने हिंदू लड़की को पहचान छिपाकर अपने जाल में फँसाया था और दुष्कर्म का वीडियो रिकॉर्ड कर सेक्स टेप तैयार कर लिया था। इसे वायरल करने की धमकी देकर वो लाखों रुपए लड़की से ऐंठ चुका था। जी मीडिया के मुताबिक, वो तीन-चार अन्य हिंदू लड़कियों को इसी तरह से फंसा चुका था

जानकारी के मुताबिक, सलमान खान अजमेर का रहने वाला है और जयपुर में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है। वो 29 अप्रैल को हिंदू लड़की को अपहृत कर फरार हो गया था। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। जाँच के दौरान पता चला कि सलमान ने पहले भी इसी तरीके से 3-4 अन्य हिंदू महिलाओं को फंसाया था। पुलिस ने सलमान खान का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

शिप्रा पथ पुलिस थाना के SHO अमित कुमार ने इस मालमे की पुष्टि की है और बताया है कि आठवीं फेल सलमान अजमेर का रहने वाला है। उसने 5-6 साल से लड़की को प्रेम जाल में फँसा रखा था। उसने लड़की से अपने लिए उसी के नाम पर स्कूटी भी खरीदवाई थी।

इस मामले में पुलिस ने पीड़िता का बयान कोर्ट में दर्ज कराया है साथ ही आरोपित सलमान खान को कोर्ट के आदेश के बाद रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया है कि सलमान खान कई हिंदू लड़कियों के साथ ये कर चुका है, ऐसी जानकारी मिल रही है। हालाँकि उसके फोन की फॉरेंसिक जाँच कराई जा रही है, जिसके बाद अन्य तथ्य सामने आ जा जाएँगे।

पाकिस्तान के पास एटम बम- ये कहकर अपने ही लोगों को डरा रही कॉन्ग्रेस: पीएम मोदी ने कहा- बम बेचने की नौबत, खरीदने वाला कोई नहीं

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के कंधमाल में हैं। वहाँ उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया और कॉन्ग्रेस एवं बीजू जनता दल (BJD) पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने यहाँ भगवान जगन्नाथ को नमन किया और ओडिशा के लोगों के आशीर्वाद के लिए जनता का धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “ओडिशा मुझे अपार प्यार और समर्थन प्रदान करता है। मैं निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करके आपके विश्वास का एक-एक कतरा चुकाऊँगा।” उन्होंने कहा, “26 साल पहले आज ही के दिन अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पोखरण परीक्षण किया था। परमाणु परीक्षण ने दुनिया भर में भारतीयों को गर्व से भर दिया।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वह पहली बार था जब भारत ने दुनिया को अपनी क्षमताओं से अवगत कराया। वहीं, कॉन्ग्रेस अपने ही लोगों को धमकाती रहती है। वे ‘पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है’ को दोहराकर भारतीयों के मन में भय का माहौल पैदा करते हैं।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमने ये दिखा दिया था कि देशभक्ति से ओत-प्रोत सरकार देशहित के लिए, देश की सुरक्षा के लिए, देश के लोगों को आशा-अपेक्षा के लिए कैसे काम करती है। एक वो दिन था, जब भारत ने दुनिया को अपने सामर्थ्य से परिचित कराया था। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस बार-बार अपने ही देश को डराने की कोशिश करती है। वो कहते हैं कि ‘संभल कर चलो, पाकिस्तान के पास एटम बम है।”

पीएम मोदी ने कहा, “ये मरे पड़े लोग, देश के आदमी को भी मार रहे हैं। वे पाकिस्तान के बम के बारे में बात करते हैं, लेकिन पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि उन्हें नहीं पता कि इसे कैसे रखा जाए और वे अपने बम बेचने के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कोई भी उन्हें खरीदना नहीं चाहता, क्योंकि लोग उनकी गुणवत्ता के बारे में जानते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस के इसी कमजोर रवैये के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों ने 60 साल तक आतंक भुगता है। देश ने कितने आतंकी हमले झेले हैं। देश भूल नहीं सकता कि आतंकियों को सबक सिखाने के बजाय ये लोग आतंकी संगठनों के साथ बैठकें करते थे। 26/11 के मुंबई हमले के बाद इन लोगों की हिम्मत नहीं पड़ी कि आतंक के सरपरस्तों पर कार्रवाई करें।”

उन्होंने आगे कहा, “क्यों? क्योंकि कॉ़न्ग्रेस और इंडी गठबंधन को लगता था कि अगर हम कार्रवाई करेंगे तो हमारा वोटबैंक नाराज हो जाएगा। मैं आज कॉन्ग्रेस को दो टूक कहूँगा… भारत के मुसलमान… कोई इधर-उधर जाएगा, ऐसा मानने की कोशिश न करें। कॉन्ग्रेस के शहजादे आए दिन बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस वाले कान खोलकर सुन लें… कॉन्ग्रेस इस देश में मान्य विपक्ष भी नहीं बन पाएगा। वे 50 सीटों से नीचे सिमटने वाले हैं।”

दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पाकिस्तान की पैरवी की थी। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए कहा था, “पाकिस्तान एक संप्रभु मुल्क है, उनकी भी इज्जत है, उनकी इज्जत को कायम रखते हुए उनसे जितनी कड़ी बात करनी है करो… लेकिन बात तो करो। बंदूक को लेकर आप घूम रहे हो। उससे क्या हल मिला… कुछ नहीं। तनाव बढ़ता जाता है।”

उन्होंने आगे कहा था, “कोई भी पागल वहाँ आ जाए तो क्या होगा देश का। उनके पास एटम बम है। हमारे पास भी है, लेकिन किसी पागल ने बम को लाहौर स्टेशन में छोड़ा तो आठ सेकेंड के अंदर उसकी रेडियो एक्टिविटी अमृतसर पहुँचेगी। आप उसको इस्तेमाल करने को रोको। उससे बात करो, उसको इज्जत दो तो तभी जाकर वह अपने बम के बारे में नहीं सोचेंगे, मगर आपने उसको ठुकरा दिया तो फिर क्या होगा।”

32.20 करोड़ रुपया, सिर्फ एक स्कूटी और झोले का कनेक्शन: झारखंड का टेंडर घोटाला लालू के चारा घोटाले की कॉपी, तब मोपेड पर ढोए गए थे सांड

झारखंड की राजधानी राँची में प्रर्वतन निदेशालय (ED) की टीम ने सोमवार (6 मई 2024) राज्य सरकार में मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और नौकर जहाँगीर आलम के घर से करोड़ों की नकदी बरामद की। इसके बाद दोनों लोगों से ED की लगातार पूछताछ चल रही है। इसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। ये कहानी कुछ-कुछ चारा घोटाले में मोपेड पर सांड ढोने जैसी है।

रिमांड में पूछताछ के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को जानकारी मिली कि संजीव लाल का नौकर जहाँगीर आलम बैग एवं थैले में नोट भरकर अपनी स्कूटी से घर लाता था। उसका घर हरमू रोड के सर सैय्यद अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में है। उसके इसी फ्लैट से ED ने 32.20 करोड़ रुपए बरामद किए थे। इसके साथ ही उसकी स्कूटी को भी जब्त कर ली गई है।

टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद मिले इन रुपयों को लेकर दोनों आरोपित नई-नई कहानियाँ गढ़ रहे हैं। संजीव लाल ने बताया कि जहाँगीर के घर से बरामद रुपए उनके नहीं हैं। उन्होंने कहा, “समझ ही नहीं पा रहा हूँ कि जहाँगीर के घर इतने पैसे कहाँ से आए।” संजीव ने जहाँगीर से सिर्फ अपनी जान-पहचान बताई। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, उनका और कोई रिश्ता नहीं है।

वहीं, जहाँगीर आलम ने भी साफ मना कर दिया कि ये रुपए उसके नहीं हैं। जहाँगीर आलम इस पैसे को किसी अनजान मास्क वाले व्यक्ति का पैसा बता रहा है। जहाँगीर का कहना है कि मास्क वाला आदमी कभी उसे फोन करके बुलाता है तो कभी दरवाजा खटखटाता है और बैग देकर चला जाता है। उसने कहा कि मास्क वाले से सवाल किए बिना ही वह रुपयों से भरा थैला अपने घर में रख लेता था।

ED संजीव लाल और उनके नौकर जहाँगीर आलम की रिमांड अवधि के दौरान ही ठेकेदार मुन्ना सिंह और राजीव सिंह से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। प्रर्वतन निदेशालय ने राँची के हटिया में सिंह मोड़ के रहने वाले राजीव के ठिकाने पर छापेमारी की थी, जिसमें 2.14 करोड़ रुपए बरामद किए गए थे। ईडी पूछताछ में इसका स्रोत जानने की कोशिश करेगी।

इसी राँची और उससे सटे आसपास के जिलों में लालू यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए चारा घोटाले को अंजाम दिया गया था। उस दौरान भी कुछ ऐसी ही कहानी गढ़ी गई थी। डोरंडा कोषागार से लगभग 140 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई थी। इस घोटाले में लाखों टन भूसा, पुआल, पीली मकई, बदाम खली, नमक आदि स्कूटर, बाइक और मोपेड पर ढोए गए थे।

इतना ही नहीं, हरियाणा से बढ़िया नस्ल के सांड़, बछिया और हाईब्रिड भैंस भी स्कूटर और मोपेड से झारखंड लाए गए थे। ये सब इसलिए किया गया था, ताकि यहाँ अच्छी नस्ल की गाय और भैंसों का उत्पादन किया जा सके। चारा घोटाले का यह सब खेल बिहार (तब झारखंड भी बिहार का ही हिस्सा था) के मुख्यमंत्री रहते हुए लालू यादव की निगरानी में सन 1990 से 1992 के बीच खेला गया है।

अब झारखंड अलग हो गया है, लेकिन घोटालों का दौर रुकने का नाम ले रहा है। मुख्यमंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन पर जमीन खरीद से लेकर खनन तक के आरोप हैं। फिलहाल वे घोटाले में ही जेल में बंद हैं। उसी राज्य में जहाँ मोपेड सो गाय-सांड ढोए गए थे, अब स्कूटी से नोटों की गड्डियाँ ढोई जा रही हैं। वह भी अनजान मास्क वाले व्यक्ति के देने पर।

करवा चौथ पर ‘खूब खाऊँगी’ बोलने वाली करीना कपूर खान बाइबिल पर फँस गई: ईसाई समाज में रोष, हाई कोर्ट से नोटिस भी

बॉलीवुड ने फिल्मों और उसके संवादों के माध्यम से हिंदू समाज और उसकी संस्कृति का बड़े ही भद्दे ढंग से मजाक उड़ाया है। ये बात किसी फिल्म विशेष की नहीं, बल्कि एक दौर की है। हिंदू धर्म, उसके त्योहारों, उसके आचार-विचार, उसकी आस्था, उसकी मान्यता, उसके विश्वास से लेकर उसके अनुयायियों को बेहद फूहड़ता से दिखाने का जैसे फिल्मों में रिवाज सा चल पड़ा है। हालाँकि, किसी दूसरे समुदाय के साथ इस तरह का प्रयोग मुश्किल में डालने वाला होता है।

दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्री एवं सैफ अली खान की बीवी करीना कपूर खान ने अपनी गर्भावस्था को लेकर एक पुस्तक लिखी है। उस पुस्तक के शीर्षक में उन्होंने बाइबिल शब्द का प्रयोग किया है। इसको लेकर ईसाई समाज के लोगों में रोष फैल गया। आखिरकार क्रिस्टोफर एंथनी नाम के एक वकील ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका डालकर अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की है।

इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने गुरुवार (9 मई 2024) को करीना कपूर खान को नोटिस जारी किया। वकील एंथनी ने फरवरी 2022 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने करीना के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि करीना ने अपनी किताब ‘करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबिल‘ के शीर्षक में ‘बाइबिल’ शब्द का उपयोग करके ईसाई समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। इसलिए करीना कपूर खान के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जानी चाहिए। करीना के अलावा याचिका के अन्य प्रतिवादी अमेज़ॅन ऑनलाइन शॉपिंग, जगरनॉट बुक्स और पुस्तक के सह-लेखक हैं।

दरअसल, वकील एंथनी ने शुरू में जबलपुर के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि करीना कपूर खान के कृत्य ने ईसाई समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था ‘पवित्र पुस्तक बाइबिल’ की तुलना अभिनेत्री की गर्भावस्था से नहीं की जा सकती है। हालाँकि, पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद वकील एंथनी ने मजिस्ट्रेट अदालत का रुख किया और इसी तरह की राहत की माँग करते हुए एक निजी शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, मजिस्ट्रेट ने भी इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि शिकायतकर्ता यह बताने में विफल रहा कि ‘बाइबिल’ शब्द के इस्तेमाल से ईसाई समुदाय की भावनाएँ कैसे आहत हुईं।

इसके बाद एडवोकेट क्रिस्टोफर एंथनी ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली और कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद क्रिस्टोफर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के दरवाजे पर पहुँचे। यहाँ पर हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब माँगा है।

दरअसल, हिंदुओं के दिवाली के त्योहार, मंगलसूत्र-बिंदी, कन्यादान आदि पर बॉलीवुड वाले मज़ाक उड़ाते रहते हैं। हालाँकि, अपनी सहिष्णुता की वजह से हिंदू समाज चुप रह जाता है। वहीं, हिंदुओं की तरह वे दूसरे समाज का माखौल उड़ाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें परेशानी भोगनी पड़ती है। चाहे वह किसी मुद्दे पर फिल्म बनानी हो या फिल्म का कोई दृश्य हो, गैर-हिंदू समुदाय बॉलीवुड को ऐसा करने की स्वतंत्रता नहीं देता है। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं।

यही करीना कपूर हैं, जिन्होंने करवा चौथ का माखौल उड़ाया था। करीना कपूर ने एक बार कहा था, “जब बाकी औरतें भूखी रहेंगी, मैं खूब खाऊँगी। क्योंकि मुझे अपना प्यार साबित करने के लिए भूखे रहने की कोई भी जरूरत नहीं है।” नसीरुद्दीन शाह की बीवी रत्ना पाठक शाह ने भी इसे पिछड़ेपन से जोड़ दिया था।

रत्ना पाठक ने कहा था,  “एक बार मुझसे किसी ने पूछा था कि आप करवा चौथ का व्रत क्यों रखती। तो मैंने यही सोचा कि मैं क्या पागल हूँ क्या? ये बहुत ही अजीब है कि पढ़ी-लिखी महिलाएँ भी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि इससे पता चलता है कि असहिष्णुता कितनी बढ़ गई है कि करवा चौथ तक का प्रश्न किया जाता है।

सोनू मराठा बनकर समीर खान ने तलाकशुदा से बनाए संबंध, भाई भी किया रेप, बेटी पर भी गंदी नजर: मुंबई में आफाक ने झाँसा दिया, धर्मांतरण का बनाया दबाव

देश में लव जिहाद की घटनाएँ रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। एक उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक महिला को मुस्लिक युवक आफाक ने लव जिहाद का शिकार बना लिया। बेटी करने के बाद उसने हिंदू महिला को छोड़ दिया। वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर में सोनू मराठा बनकर समीर खान ने एक तलाकशुदा महिला को फँसा लिया और फिर उस धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।

दरअसल, कौशांबी जिले के पइंसा इलाके के मोहब्बतपुर का रहने वाला आफाक चार साल पहले नौकरी के लिए मुंबई गया था। वहाँ उसने सुनीता नाम की एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। सुनीता भरत नगर बॉम्बे की रहने वाली है। दोनों चार साल तक साथ भी रहे। इस दौरान दोनों को एक बेटी भी हुई। उसके बाद तीन महीने पहले आफाक बिना निकाह किए वहाँ से कौशांबी भाग आया।

आफाक के लापता होने पर पीड़िता परेशान हो गई और गुरुवार (9 मई) को कौशांबी पहुँचकर पइंसा थाना पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की माँग की। महिला का आरोप है कि शादी के लिए आफाक उससे धर्म परिवर्तन के लिए कह रहा था। इसके साथ ही वह अब किसी और लड़की से शादी करने वाला है। पुलिस ने तहरीर लेकर इस मामले में जाँच शुरू कर दी है।

इंदौर में तलाकशुदा महिला के साथ लव जिहाद

इंदौर के आजादनगर थाना क्षेत्र स्थित मदीनानगर का समीर खान ने सोनू मराठा बनकर एक तलाकशुदा महिला को अपने झाँसे में ले लिया। झाँसा देकर समीर ने महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसका वीडियो भी बना लिया। उसने दलित युवती से जबरदस्ती निकाह भी कर लिया। इस दौरान उसने कई रेप और अप्राकृतिक सेक्स भी किया।

महिला का कहना है कि आरोपित उसकी मासूम बेटी के साथ भी गंदी हरकत करने लगा। इसके बाद पीड़िता समाज के लोगों के साथ थाने जाकर शिकायत दर्ज करवाई। महिला का कहना है कि समीर खान उसके भाई का दोस्त है और उसके घर कभी कभार आता जाता था। इस दौरान उसने अपना नाम सोनू मराठा बताया था।

महिला का आरोप है कि दो साल तक साथ घुमने और शारीरिक संबंध बनाने के बाद जब उसने शादी के लिए कहा तो वह बोला कि मुस्लिम है और निकाह के लिए धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। इसके बाद समीर खान उसे लेकर धर्मपुरी में रहने वाले अपने भाई फिरोज उर्फ मौलाना हाफिज के पास ले गया और निकाह किया। निकाह के बाद दोनों खजराना में रहने लगे।

महिला का आरोप है कि इसी दौरान समीर खान का भाई अफजल आया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। उसे धोखे से नशीला पदार्थ पिलाया और बेहोश करके दुष्कर्म किया। महिला का आरोप है कि बेहोशी की अवस्था में उसका आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिया। महिला ने इसकी जानकारी जब आरोपित को दी तो उसने नजरअंदाज कर दिया।

इस दौरान उसकी बेटी के साथ भी गलत करने की कोशिश करते थे। महिला जब विरोध करती तो अश्लील वीडियो वायरल कर बदनाम करने की धमकी देते थे। आखिरकार महिला उनके अत्याचारों से तंग आ गई तो उसने दलित समाज के लोगों से संपर्क किया और पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज कराई।

छत्तीसगढ़ में एनकाउंटर में 12 नक्सली ढेर, 1200 जवानों ने सँभाला मोर्चा: बोले CM विष्णुदेव साय – डबल इंजन की सरकार का मिल रहा लाभ

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर में मुठभेड़ में 12 नक्सली ढेर हुए हैं। ये एनकाउंटर गंगानूर पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले गाँव पीडिया के पास की है। सुरक्षाकर्मियों की एक टीम नक्सलियों की तलाशी में अभियान चला रही थी। इसी दौरान पास के जंगल से नक्सली गोलीबारी करने लगे। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। घटनास्थल से सभी एक दर्जन नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

अच्छी बात ये है कि एक भी सुरक्षाकर्मी हताहत नहीं हुआ है। हालाँकि, 2 घायल हुए हैं। इलाके में अभी भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। याद दिलाते चलें कि इससे पहले काँकेड़ में एक मुठभेड़ में 29 नक्सली मार गिराए गए थे। जहाँ तक बीजापुर की बात हैं, वहाँ कोरचोली और लेंड्रा के जंगलों में इससे पहले हुए मुठभेड़ में पुलिस ने 13 नक्सलियों का सफाया किया था। इनमें से कई इनामी नक्सली भी थे। राज्य में सरकार बदलने के साथ ही नक्सल विरोधी कार्रवाई तेज़ हो गई है।

ताज़ा एनकाउंटर के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में हमारे जवानों को भारी सफलता मिली है। मुठभेड़ समाप्त हो गया है, नक्सलियों की 12 लाशें मिली हैं। मैं अधिकारियों और जवानों को बधाई देता हूँ। जब से हमलोग सरकार में आए हैं, नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं। केंद्र सरकार भी चाहती है कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हो। डबल इंजन की सरकार का हमें लाभ मिल रहा है।”

वहीं छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री और कवर्धा से विधायक विजय शर्मा ने बताया कि DRG की बीजापुर व दंतेवाड़ा की टीम, कोबरा बटालियन और STF मिल कर 1000 की संख्या में सर्चिंग के लिए निकले थे। उन्होंने कहा कि IED की चपेट में आने से एक जवान को मामूली चोट आई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समस्या का हल बातचीत के माध्यम से निकलना चाहिए, बस्तर तक विकास पहुँचना चाहिए, बस्तर के लोग बंधक न बनाए जाएँ, बंदूक के दम पर स्कूल-अस्पताल नहीं बनते। उन्होंने नक्सलियों के आत्म-समर्पण करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए नई रिहैबिटिलेशन योजना बनाने का भी वादा किया।

हिंदू नेताओं को धमकी वाला मोहम्मद अली उर्फ शहनाज बिहार से गिरफ्तार: नेपाल में नाम बदलकर रहता था, सोशल पर हिंदू विरोधी पोस्ट करता था

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और हिंदू सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपदेश राणा सहित कई नेताओं को जान से मारने की धमकी देने वाले मोहम्मद अली को गुजरात पुलिस ने बिहार के मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया है। उसके पाकिस्तान से लिंक मिले हैं। वह पाकिस्तान के एक व्यक्ति के साथ व्हाट्सऐप ग्रुप में जुड़ा था। उसी ग्रुप में गुजरात का मौलाना सोहेल खान भी था। 

हिंदू नेताओं को धमकी देने के मामले में सूरत की स्पेशल ब्रांच की टीम ने 24 साल के मोहम्मद अली उर्फ शहनाज को रात 2 बजे उसके ननिहाल से गिरफ्तार किया है। मोहम्मद अली मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र में सकरा चक अब्दुल्ला गाँव में छिपा हुआ था। गुजरात पुलिस फिलहाल उसे कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लेने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।

कहा जा रहा है कि मोहम्मद अली पाकिस्तानी संगठनों के लगातार संपर्क में था। वह पाकिस्तान के एक युवक डोगर से वॉट्सऐप से जुड़ा था। इनका ग्रुप भी था। गुजरात का मौलाना सोहेल खान भी उसी ग्रुप में जुड़ा हुआ था। मौलाना सुहैल की गिरफ्तारी के बाद गुजरात की स्पेशल ब्रांच की टीम मुजफ्फरपुर के सकरा पहुँची थी।

मोहम्मद अली के पास से पुलिस ने एक मोबाइल जब्त किया है। वह नेपाल के नंबर से वॉट्सऐप चलाता था और उससे आपत्तिजनक पोस्ट करके धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश करता था। इसके वॉट्सऐप ग्रुप में हिंदू देवी-देवताओं की कई एडिटेड तस्वीरें और वीडियो मिले हैं, जो आपत्तिजनक हैं। उसके खिलाफ सूरत में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए वीडियो कॉल करके लोगों को धमकियाँ देता था। वह जिस नेता को धमकी देनी होती थी, वह उसके नंबर को एक खास ग्रुप में जोड़कर ग्रुप वीडियो कॉल करता था। उसके बाद वीडियो कॉल करके धमकी देता था। धमकी में हत्या की धमकी भी शामिल है। उस पर कई हिंदू नेताओं को जान से मारने की धमकी और साजिश रचने का आरोप है।

बताया जाता है कि अली का जन्म नेपाल में ही हुआ है और वह पिछले 23 सालों से वहाँ रह रहा था। वहाँ अपना पहचान छिपाकर वह रह रहा था। वह बिहार आता जाता रहता है। हिंदूवादी नेता उपदेश राणा की हत्या की साजिश में मौलाना सोहेल अबुबक्र तिमोल की गिरफ्तारी के बाद यह मामला खुला। मोहम्मद अली को नेपाल में शहनाज के नाम से जाना जाता है।

 

‘चुनाव कर्मचारियों और मतदाताओं को हतोत्साहित करने वाला बयान’: वोटर टर्नआउट पर ECI ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लताड़ा, कहा – ये गैर-जिम्मेदाराना

वोटर टर्नआउट पर कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रोपेगंडा का चुनाव आयोग ने करारा जवाब दिया है। खड़गे ने I..N.D.I. गठबंधन के नेताओं को एक पत्र लिखा था। लोकसभा चुनाव 2024 के तीनों चरणों में वोटर टर्नआउट के आँकड़ों को जारी किए जाने में देरी के आरोपों को ECI ने नकार दिया है। चुनाव आयोग ने 11 पन्नों के अपने पत्र में मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लिए बिना ही जवाब दिया है। बता दें कि विपक्षी दल हर संवैधानिक संस्था को बदनाम करते हैं।

चुनाव आयोग ने कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष द्वारा चुनावी चरणों और प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर हमला करने वाले बयान मतदाताओं की हिस्सेदारी पर नकारात्मक असर डाल सकती है। साथ ही इसे विशाल संख्या में चुनाव कर्मचारियों और मशीनरी को भी हतोत्साहित करने वाला बताया गया है। चुनाव आयोग ने कहा कि इससे मताधिकार के योग्य लोगों को अपने मत का इस्तेमाल करने से वंचित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

चुनाव आयोग ने कहा कि आगे इस तरह के बयान दिए जाने से बचना चाहिए, सावधानी बरती जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने समझाया कि तैनाती, EVM के इस्तेमाल आउट वोटर टर्नआउट के आँकड़े की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से की जाती है जिसमें नीचे से ऊपर पहुँचा जाता है। अर्थात, प्रत्येक मतदान केंद्र से आँकड़े जुटाए जाते हैं। चुनाव आयोग ने बताया है कि 1961 के नियमों के अनुसार, हर एक पोलिंग एजेंट को प्रत्येक EVM के मतदान के आँकड़े साझा किए जाते हैं।

चुनाव आयोग ने EVM में गड़बड़ी होने के मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों को भी आश्चर्यजनक करार दिया। ECI ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय दल द्वारा ऐसा करना चिंताजनक है। इलेक्शन कमीशन ने इस दौरान याद दिलाया कि ये सारे आँकड़े पार्टी के उम्मीदवारों और पोलिंग एजेंट्स के पास पहले से मौजूद हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि सामान्यतः वो चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया से बचता है, लेकिन ताज़ा बयान भ्रम पैदा करने वाला है।

चुनाव आयोग ने इस दौरान 2019 लोकसभा चुनावों की भी याद दिलाई, जब वोटर टर्नआउट के आँकड़े बाद में अपडेट किए गए थे। दूसरे चरण में तब 18 अप्रैल को 66% पोलिंग का आँकड़ा दिया गया था, लेकिन 5 दिन बाद समीक्षा के बाद बताया गया कि ये 69.43% है। इसी तरह 2021 में केरल के आँकड़े प्रथम दृष्टया 69.95% थे, समीक्षा के बाद जिसे 76% किया गया। आयोग ने कहा कि वोटर टर्नआउट एप में भी सब कुछ सार्वजनिक है।

मी लॉर्ड! ये ‘दरियादिली’ कहीं गले की हड्डी न बन जाए, अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत ने बताया न्यायिक सुधार अविलंब क्यों जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार (10 मई 2024) को दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दे दी। अरविंद केजरीवाल को यह जमानत लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी के प्रचार के लिए दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध किया था कहा था कि इससे गलत परंपरा होगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने अंतरिम बेल से संबंधित सुनवाई करते हुए कहा कि शराब नीति मामले में केस अगस्त 2022 में दर्ज किया गया था और अरविंद केजरीवाल को लगभग डेढ़ साल बाद मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया। शीर्ष अदालत ने पूछा कि आखिर डेढ़ साल तक ED कहाँ थी।

हालाँकि, ईडी के विरोध के बावजूद अरविंद केजरीवाल को न्यायालय से अंतरिम जमानत मिल गई है, लेकिन इसको लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं। वैसे भारत में न्यायपालिका पर सवाल उठाने के रिवाज नहीं है, लेकिन जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने जो तर्क दिया था वो उचित था। ईडी का संदेह भी सच साबित होता दिख रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में दर्ज अपने हलफनामे में प्रवर्तन निदेशालय ने तर्क दिया था कि अगर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो यह एक मिसाल कायम करेगा, जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने और फिर चुनाव की आड़ में जाँच से बचने की अनुमति देगा। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि चुनाव प्रचार का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और ना ही कानूनी या संवैधानिक अधिकार है।

ED की आशंका आखिरकार सच साबित होती दिख रही है। अब राष्ट्रद्रोह में जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने चुनाव में नामांकन दाखिल करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से सात दिनों के लिए अंतरिम जमानत की माँग की है। वह खडूर साहिब लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहता है। हालाँकि, हाई कोर्ट ने असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल की याचिका खारिज कर दी है।

NSA के तहत जेल में ‘बंद वारिस पंजाब दे’ नाम के खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की याचिका भले खारिज हो गई हो, लेकिन इससे एक नया रिवाज पैदा होने का खतरा पैदा हो गया है। इस देश में ऐसे दर्जनों नेता हैं, जिन पर विभिन्न मामलों में केस दर्ज है और कुछ नेता पुलिस एवं न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में वे भी अपने लिए छूट की माँग कर सकते हैं। इनमें से प्रमुख नाम झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम प्रमुख है।

अपने हलफनामे में ED ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कहा था, “अभिसाक्षी की जानकारी में अभी तक किसी भी राजनीतिक नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है। ये (अरविंद केजरीवाल) तो चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी नहीं हैं। यहाँ तक कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को भी चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है, अगर वह हिरासत में है।”

जाहिर सी बात है कि जब उम्मीदवार नहीं होने के बावजूद सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए अरविंद केजरीवाल अंतरिम जमानत की माँग कर सकते हैं तो कई ऐसे नेता हैं तो खुद उम्मीदवार हैं। ऐसे में वे अरविंद केजरीवाल की जमानत को प्रमुखता से उदाहरण के रूप में पेश करके अपने लिए भी ऐसी माँग कर सकते हैं। ऐसी में न्यायालय के सामने एक अलग तरह का धर्मसंकट खड़ा हो सकता है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ भी जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच चल रही है। ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 31 जनवरी 2024 को ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन्होंने 2 फरवरी को अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, यह याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। लेकिन, अरविंद केजरीवाल का हवाला देखकर सोरेन भी सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

हेमंत सोरेन और दिल्ली शराब घोटाले में बंद आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया भी न्याय में समानता के सिद्धांत का तर्क देकर अपने लिए अंतरिम जमानत की माँग कर सकते हैं। दरअसल, जमानत देना न्यायालय का विशेषाधिकार है और वह कई मामलों को ध्यान में रखते हुए किसी आरोपित को जमानत देता है। इनमें जिस धारा के आरोपित बंद है उसमें जमानत के लिए क्या प्रावधान हैं, जमानत पर निकलने के बाद वह लापता तो नहीं हो जाएगा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ तो नहीं करेगा, गवाहों को धमकाएगा तो नहीं, गवाहों की हत्या तो नहीं करेगा, किसी अन्य आपराधिक मामले को अंजाम तो नहीं देगा… आदि कई ऐसे बिंदु होते हैं।

अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं और शक्तिशाली भी हैं। ऐसे में इन बिंदुओं पर न्यायिक सिद्धांत के तहत नजर डालना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि अगर चुनाव प्रचार के नाम पर जमानत मिलती है तो ऐसी याचिकाओं की लंबी लाइन लग जाएगी, क्योंकि भारत में लगभग हर साल कहीं ना कहीं चुनाव होते ही रहते हैं। इनमें पंचायत से लेकर लोकसभा के चुनाव तक शामिल हैं।

कोर्ट में ED ने भी तर्क दिया था, “पिछले 5 वर्षों में लगभग 123 चुनाव हुए हैं। यदि चुनावी प्रचार के उद्देश्य से अंतरिम वैधानिकता है तो किसी भी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और ना ही किसी राजनेता को अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि चुनाव पूरे साल होता है।” ED ने तर्क दिया था कि संघीय ढाँचे में हर चुनाव महत्वपूर्ण है। किसी को कम या अधिक महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता।

एजेंसी ने यह भी तर्क दिया था कि अगर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो यह एक मिसाल कायम करेगा, जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने और फिर चुनाव की आड़ में जाँच से बचने की अनुमति देगा। ED ने कहा कि एक राजनेता एक सामान्य नागरिक से विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता। समन से बचने के लिए केजरीवाल ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का यही बहाना बनाया था।

इन सब तमाम बिंदुओं को मिलाते हुए सोशल मीडिया पर लोग न्याय में समानता की बात लोग कर रहे हैं। लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि चुनाव प्रचार के लिए किसी आरोपित को, जो जेल में बंद है, उसे जमानत किस आधार पर दी जा सकती है। क्या अरविंद केजरीवाल की जगह कोई आम आदमी होता तो उसे यह सुविधा मिलती?

अधिकांश लोग किसी ना किसी पार्टी अथवा नेता के फॉलोअर होते हैं। अगर जेल में बंद। ऐसा ही कोई व्यक्ति तर्क दे कि उसे पार्टी अथवा नेता का प्रचार करना है तो क्या उसे यही सुविधा मिलेगी? इसका जवाब हाँ भी हो सकता है और ना भी। इसलिए देश में दशकों से न्यायिक सुधार की माँग भी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में थोड़ा कदम बढ़ाए भी था, लेकिन वो फलीभूत नहीं हो पाया।

जिसका नाम रखा ‘पीयूष’, वही जीवन के लिए बन गया ‘विष’: पंखे पर झूल गए सूरत के बुजुर्ग माँ-बाप, छोड़ गए वो सुसाइड नोट जिसे पढ़ आप कहेंगे भगवान ऐसा बेटा दुश्मन को भी न दें

एक बच्चे के जन्म का दिन माता-पिता के लिए सबसे खुशी वाला दिन होता है। दोनों जन उसी क्षण से अपने मन में उस नवजात को हर खुशी देने के सपने देखने लगते हैं। बाद में उसके किशोर होने पर उसे अच्छी शिक्षा देने के लिए खुद को झोंक देते हैं। फिर युवा होने पर उसके उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करने लगते हैं… यही करते-करते एक दिन वो दोनों प्राणी बूढ़े हो जाते हैं और आस भरी नजरों से सिर्फ यही सोचते हैं कि अब उनके बच्चे उनका ख्याल रखेंगे। लेकिन क्या असल में ऐसा हो पाता है? क्या हर माता-पिता को उनके त्याग और समर्पण के बदले बुढ़ापे में बच्चों का सहारा मिलता है? नहीं… बच्चा अगर सूरत के चुन्नी भाई और मुक्ताबेन की बड़ी औलाद पीयूष जैसा हो तो बिलकुल भी नहीं।

सूरत के चुन्नी भाई और उनकी पत्नी मुक्ताबेन ने हाल में अपनी औलाद के कारण एक आखिरी खत लिखकर मौत को गले लगा लिया। अपने आखिरी खत में वो साफ-साफ कह गए कि उनके अंतिम संस्कार में उनके बच्चों को न शामिल किया जाए और उतना ही खर्च हो जितने की जरूरत हो, इसके अलावा कुछ भी नहीं।

फोटो साभार: देश गुजरात

आप सोचेंगे कितने निष्ठुर माता-पिता रहे होंगे जो अपने बच्चे से अंतिम संस्कार का अधिकार छीन लिया और दुनिया के सामने उसे बुरी संतान साबित कर गए…कुछ लोग शायद ऐसा भी सोचें कि बच्चे ने अगर कुछ गलत किया भी था तो इसमें आत्महत्या करने की क्या जरूरत थी, जैसे खत में बच्चे को दूर रहने को कहा है वैसे असल जिंदगी में भी कह देते… लेकिन हमारे लिए ये सारी चीजें सोचना आसान है क्योंकि हम उस मनोवस्था को समझ ही नहीं पा रहे जो आखिर समय में चुन्नी भाई और उनकी पत्नी की रही होगी। पीयूष उनकी बड़ी औलाद था। बचपन से उसे पढ़ाने लिखाने में चुन्नी भाई ने खुले हाथ से खर्च किया। जब बड़ा हुआ तो उसका काम सेट करवाने के लिए अपनी सारी संपत्ति लगा दी। पीयूष उसमें भी सफल नहीं हुआ तो अपने नाम पर चुन्नी भाई ने कर्जा लेकर उसे 35 लाख रुपए दिलवा दिए। उन्हें लगा बेटा कमाएगा तो सारा कर्जा चुकता हो जाएगा। मगर बेटे ने क्या किया…उन पैसों को भी व्यापार में डुबा दिया।

इतने पर भी चुन्नी भाई और मुक्ताबेन ने अपने बेटे का हाथ नहीं छोड़ा। वो उसे सेटल करवाने के प्रयास करते रहे। उन्होंने पीयूष की शादी करवाई उसका घर बसवाया। एक बच्चा हुआ। बाद में उन्होंने पीयूष को कनाडा भेजा। इन सबके बीच पीयूष को एक भी बार ख्याल नहीं आया कि जो 40 लाख रुपए उसके पिता ने उसके काम के लिए उधार लिए थे वो कैसे वापस दिए जाएँगे। देखते-देखते पीयूष कनाडा में रम गया। वहीं उसकी बीवी भी अपने बच्चे को लेकर अलग घर में रहने लगी। सब जानते हुए भी पीयूष को न माता-पिता की चिंता रही, न कर्जा लौटाने की बात। अपना कमाना अपना खाना वाली नीति पर पीयूष जिंदगी गुजारता था। इधर सूरत में माता-पिता इस शर्मींदगी में जीवन जीते रहे कि इतना कर्जा लौटाया कैसे जाएगा…।

कर्ज देने वाले चुन्नी भाई की खुद्दारी जानते थे इसलिए वो उनसे ज्यादा कुछ नहीं कहते थे, पर चुन्नी भाई को ये कर्ज अंदर ही अंदर खा रहा था। इसी बीच एक दिन उन्हें पता चला कि उनका बेटा पीयूष सालों बाद कनाडा से सूरत आया था लेकिन उनसे मिले बिना, हाल-चाल जाने बिना ही वापस लौट गया…। दोनों पति-पत्नी को ये बात सदमे की तरह लगी। उन्होंने किसी से कुछ कहा तो नहीं लेकिन मन में घुटते रहे। एक दिन दोनों ने निर्णय लिया कि जिस बच्चे के लिए उन्होंने अपना सब कुछ लुटा दिया, 40 लाख रुपए के कर्जे में आ गए, जब वही उन्हें नहीं पूछ रहा तो उन्हें अब आगे नहीं जीना।

बंद कमरे में दोनों 5 पन्नों का खत लिखा और फिर एक साथ मौत को गले लगा लिया। घटना के वक्त छोटा बेटा संजय बगल वाले कमरे में अपनी पत्नी के साथ सो रहा था, उसे इसके बारे में पता भी नहीं चला। बाद में जब नींद खुली तब तक माता-पिता जा चुके थे। उनके पास वो खत अब सुसाइड नोट बन चुका था जिसमें उन्होंने अपने दिन की सारी बात लिखी थी। उन्होंने अपनी बहू से भी सवाल किया था कि वो तो बहुत बड़े घर से शादी होकर उनके यहाँ आई थी, फिर उसकी परवरिश में ऐसी क्या कमी रह गई जो उसने भी उनके साथ ऐसा किया…।

उनका ये सुसाइड पत्र एक आईना है हर उस बच्चे के लिए जो अपने माता-पिता के प्रेम को भुलाकर अपनी दुनिया में खो गए हैं। वो भूल चुके हैं कि उनके माता-पिता ने उनके लिए अपनी जिंदगी खपा दी, तब जाकर वो इस काबिल बने कि समाज में अपनी पहचाने जा सकें, स्कूल-कॉलेज में उच्च शिक्षा ले सकें, विदेश जाकर पढ़ सकें और इस काबिल बन सकें कि अपना नया परिवार बनाकर उसका गुजर-बसर कर सकें… क्या इतने के बावजूद माता-पिता को भुलाया जाना उचित है, उनकी परवाह किए बिना अपनी दुनिया में रमना उचित है?