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योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के नाम पर केजरीवाल ने की राजनीति, गृहमंत्री ने ‘PM मोदी के नेतृत्व’ से दी पटखनी

शराब घोटाले में अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा में फूट डालने की कोशिश शुरू कर दी है। शनिवार (11 मई 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटा दिया जाएगा और फिर पीएम मोदी अपनी कुर्सी अमित शाह को दे देंगे।

मीडिया से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने माइंडगेम खेलने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं भाजपा से पूछता हूँ कि आपका अगला पीएम कौन होगा? मोदी जी अगले साल 75 साल के हो रहे हैं। मोदी जी ने साल 2014 में खुद ही नियम बनाए थे कि भाजपा में जो भी 75 साल का होगा, उसे रिटायर कर दिया जाएगा। अब मोदी जी रिटायर होने वाले हैं।”

इतना ही नहीं, “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर केजरीवाल ने कहा, इनकी सरकार बनते ही अगले दो महीने में ये योगी जी को निपटाएँगे। इसके बाद अगले साल अपने सबसे खास अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाएँगे।” अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा, “मोदी जी अपने लिए नहीं, अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट माँग रहे हैं।”

अफवाह उड़ाते हुए केजरीवाल ने कहा, “इन्होंने (पीएम मोदी ने) सबसे पहले आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन की राजनीति खत्म की। शिवराज सिंह चौहान जैसे मुख्यमंत्री की राजनीति खत्म की, जिन्होंने भाजपा को मध्य प्रदेश चुनाव जीतकर दिया। उन्हें सीएम नहीं बनाया। वसुंधरा राजे, खट्टर साहब, रमण सिंह की राजनीति खत्म कर दी। अब अगला नंबर योगी जी का है।”

गृहमंत्री अमित शाह का बयान

अरविंद केजरीवाल के इन आरोपों पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के संविधान में 75 साल की उम्र वाली कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना टर्म पूरा करेंगे और देश का नेतृत्व करते रहेंगे। अमित शाह ने कहा कि इसको लेकर भाजपा में कोई दुविधा वाली स्थिति नहीं है।

अमित शाह ने कहा, “मैं केजरीवाल एंड कंपनी तथा इंडी गठबंधन से कहना चाहता हूँ कि मोदी 75 साल के हो जाएँ, इससे आपको आनंदित होने की जरूरत नहीं है। ये भारतीय जनता पार्टी के संविधान में कहीं नहीं लिखा है। मोदी जी ही यह टर्म पूरा करेंगे और मोदी जी ही आगे देश का नेतृत्व करते रहेंगे। इसको लेकर पार्टी में कोई कंफ्यूजन नहीं है।”

वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के संविधान में कहीं भी उम्र को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जनता जानती है मोदी जी का कण-कण और क्षण-क्षण भारत माता की सेवा के लिए समर्पित है। मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना साकार हो रही है और अपने अगले 5 वर्षों के कार्यकाल में मोदी जी देश को नये शिखर पर ले जाएँगे।”

10 साल की उम्र में विवाह, 6 बच्चों में एक भी जीवित नहीं बचा… कौन हैं ओडिशा की वो बुजुर्ग महिला जिनके PM मोदी ने छुए पाँव, 1 लाख भक्ति गीतों की कर चुकी हैं रचना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (11 मई, 2024) को ओडिशा के कंधमाल, बलांगिर और बरगढ़ में जनसभाओं को संबोधित किया। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के क्रम में उन्होंने 1 दिन पहले ही राजधानी भुवनेश्वर में भी रोडशो किया था। कंधमाल में पीएम मोदी ने इस दौरान एक बुजुर्ग महिला का पाँव छू कर उनका आशीर्वाद लिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। ओडिशा की उक्त बुजुर्ग महिला का नाम पूर्णमासी जानी है, जिन्हें लोग ताड़िसरू बाई कह कर पुकारते हैं।

पूर्णमासी जानी उर्फ़ ताड़िसरू बाई को 2021 में मोदी सरकार ने ही कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया था। उन्होंने कुई, उड़िया और संस्कृत व अन्य भाषाओं में 1 लाख भक्ति गीतों व अन्य कविताओं की रचना की है। वो 80 वर्ष की हो चली हैं। पूर्णमासी जानी कभी जीवन में स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन पर माँ सरस्वती का हमेशा आशीर्वाद रहा। उन्होंने आज तक अपनी किसी कविता या गीत को दोहराया नहीं है।

उनका जन्म कंधमाल के खजुरीपाड़ा प्रखंड के चारिपाड़ा गाँव में हुआ था। मात्र 10 वर्ष की उम्र में उनका बाल-विवाह कर दिया गया था। उनके 6 बच्चे हुए लेकिन उनमें से एक भी जीवित नहीं रह पाया। जीवन में आई इस आपदा के बाद उन्होंने भक्ति व अध्यात्म का रास्ता चुना। वो तपस्या के लिए ताड़िसारू पहाड़ी पर कुछ संतों के साथ जीवन व्यतीत करने लगीं। इसके बाद गाँव लौट कर उन्होंने कविताओं और गीतों के माध्यम से भक्ति व अध्यात्म का सन्देश देना शुरू किया।

इसी कारण सम्मान से लोग उन्हें ‘ताड़िसरू बाई’ कहने लगे। वो सामान्यतः मौन व्रत का पालन करती हैं, फिर ध्यान करती हैं और इसी दौरान वो भक्ति गीत गाती हैं। गाँव वाले उन्हें ईश्वर का अंश मानते हैं। वो साल के पत्तों की सिलाई कर के अपना जीवन-यापन करती हैं। 1990 में उस क्षेत्र में गए कुछ लेखकों का ध्यान उनकी कविताओं के प्रति आकर्षित हुआ। फिर उन्होंने इसे एक दस्तावेज के रूप में समेटने का प्रयास शुरू किया। आज की तारीख़ में उनकी 5000 से अधिक कविताएँ/गीत साहित्यकारों और साहित्यिक सोसाइटियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए हैं।

डॉक्टर सुरेन्द्रनाथ मोहंती ने उनकी जीवनी भी लिखी है। शिक्षक दुर्योधन प्रधान ने उनके गीतों को एक जगह सहेजा। कटक स्थित रेवेनशॉ विश्वविद्यालय के छात्रों समेत कइयों ने उनके जीवन और उनकी रचनाओं पर Ph.D भी कर रखी है। पीएम मोदी ने कंधमाल में मंच से कहा कि पूर्णमासी जानी, जो ‘कबीर’ के रूप में जानी जाती हैं, ओडिशा में जो ग्रामीण भाषा है, जो जनजातीय समाज की भाषा है, उस पर वो कविताएँ बनाती हैं, साहित्य को उन्होंने पचाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने और और शॉल ओढ़ा कर उन्हें सम्मान देने को अपना सौभाग्य बताया। पीएम मोदी ने कहा कि वो उन्हें अपने पाँव नहीं छूने देती थीं, बड़ी मुश्किल से उन्होंने उनके रोकने के बावजूद उनके पैर छुए। पीएम मोदी ने उन्हें मातृशक्ति का साक्षात रूप करार दिया। इस दौरान पीएम मोदी तुला बेहरा से भी मिलें, जिन्होंने भिक्षा माँग कर भगवान जगन्नाथ को 1 लाख रुपए का दान दिया। जब पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि उन्हें कुछ ज़रूरत भी है क्या, तो उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद चाहिए।

‘साड़ियाँ बाँट के अपराध नहीं ढँक सकती ममता बनर्जी… बशीरहाट के हर ब्लॉक में संदेशखाली जैसी स्थिति’ – बीजेपी प्रत्याशी रेखा पात्रा ने खोली TMC की पोल

लोकसभा चुनाव 2024 में सबकी नजरें पश्चिम बंगाल पर हैं। तमाम हाई प्रोफाइल सीटों के अलावा जिस सीट पर सभी की नजरे हैं, वो सीट है बशीरहाट लोकसभा सीट। उत्तरी 24 परगना जिले में आने वाली बशीरहाट की एक विधानसभा सीट है संदेशखाली, जहाँ से महिलाओं, किसानों पर टीएमसी के नेताओं और पार्टी के गुंडों के अत्याचार की खबरें सामने आई। महिलाओं के उत्पीड़न से लेकर जमीनों पर जबरन कब्जे की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा। कोलकाता हाई कोर्ट ने तो यहाँ तक टिप्पणी की, कि जैसी बातें संदेशखाली से निकलकर सामने आ रही हैं, उसमें 1% भी सच्चाई हुई, तो ये मानवता पर कलंक होगा। टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसका पूरा आपराधिक साम्राज्य संदेशखाली के इर्दगिर्द फैला हुआ था। महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन की कमान संभाली, तब जाकर शेख शाहजहाँ और उसकी गैंग की हैवानियत सामने आ पाई। अब उसी संदेशखाली की पीड़ित रेखा पात्रा को बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 में अपना उम्मीदवार बनाया है।

रेखा पात्रा अपनी सास और तीन बेटियों के साथ आम जिंदगी जी रही थी, कि शेख शाहजहाँ और उसके गैंग ने पूरे संदेशखाली में आतंक मचा दिया था। रेखा पात्रा भी आम महिलाओं की तरह इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई और देखते ही देखते महिलाओं पर हो रहे अपराधों के खिलाफ आंदोलन का एक चेहरा बन गई। महज पाँचवीं तक पढ़ी लिखी रेखा पात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शक्ति स्वरूपा’ बताया। बीजेपी ने जब से उन्हें कैंडिडेट घोषित किया है, वो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के लिए दु:स्वप्न की तरह हो गई हैं। कोर्ट से लेकर राजनीति के मैदान तक वो ममता बनर्जी को चुनौती दे रही हैं। रेखा पात्रा ने ठान लिया है कि वो महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को अंजाम तक पहुँचा कर रहेंगी।

दैनिक जागरण से बातचीत में रेखा पात्रा कहती हैं कि वो खुद को नेता नहीं मानती, क्योंकि वो तमाम पीड़ितों में एक पीड़ित हैं और उन्हीं पीड़ितों की आवाज हैं। उनका कहना है कि अत्याचार का विरोध करते समय किसी ने हमारा साथ नहीं दिया, सिवाय बीजेपी के… इसलिए जब उन्हें बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया, तो मैंने भी बशीरहाट की भलाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। रेखा पात्रा कहती हैं कि मैं गाँव की साधारण महिला हूँ। मुझे राजनीति की जानकारी नहीं है। मैं सिर्फ संदेशखाली की माँ-बहनों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से राजनीति में आई हूँ। मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति करूँगी।

पीएम नरेंद्र मोदी के बारे में पूछने पर रेखा पात्रा ने उन्हें पिता-तुल्य बताया है। उन्होंने कहा कि बशीरहाट के लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि प्रधानमंत्री मेरी जैसी गरीब परिवार की लड़की को प्रत्याशी बनाएंगे। उन्होंने मुझे फोन करके मेरा मनोबल भी बढ़ाया। मैं यह सीट जीतकर उन्हें उपहार में देना चाहती हूँ।

ये पूछने पर कि बीजेपी ने ही उन्हें कैंडिडेट क्यों बनाया, इस सवाल के जवाब में रेखा पात्रा ने कहा, “संदेशखाली कांड के सामने आने के बाद भाजपा छोड़कर कोई पार्टी हमारे साथ आकर खड़ी नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमारे पास आए और सिर पर हाथ रखा। उन्होंने मुझे प्रत्याशी बनाकर नई राह दिखाई है। वे हमारे लिए अभिभावक की तरह हैं। हम सभी उनके कृतज्ञ हैं।” रेखा पात्रा ने कहा कि शाहजहाँ शेख ने जिन लोगों पर अत्याचार किए हैं, सभी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा, “मैं हारूँ या जीतूँ, अपने लोगों के साथ संदेशखाली में ही रहना चाहती हूँ। मैं उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी। हम संदेशखाली से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। माँ-बहनों के सम्मान की रक्षा के लिए मैं आखिरी साँस तक लड़ती रहूँगी।

संदेशखाली में अत्याचार जारी

रेखा पत्रा ने अपील की है कि सीबीआई संदेशखाली के पीड़ितों को न्याय दे और हर गुनाहगार को गिरफ्तार करे, क्योंकि अभी भी बहुत से गुनाहगार खुले घूम रहे हैं और पीड़ितों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने कहा मुझे खबर मिली है कि घरों से महिलाओं को उठाकर थाने ले जाकर पुलिस अधिकारियों के पैरों में गिरवाकर माफी मँगवाई जा रही है। ऐसा होने पर बशीरहाट के लोग भयमुक्त होकर मतदान नहीं कर पाएंगे। मैं संदेशखाली के लोगों से कहूंगी कि वे डरें नहीं। हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे। जरूरत पड़ने पर संदेशखाली की महिलाएँ मतदान के दिन फिर हाथों में झाडू़ व लाठियाँ लेकर सड़कों पर उतरेंगी। बशीरहाट का प्रत्येक मतदाता शांतिपूर्ण माहौल में बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके, हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।

साड़ियों से नहीं ढंकते अपराध

रेखा पात्रा ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। रेखा पात्रा ने कहा, “मुख्यमंत्री खुद गुंडों को प्रश्रय दे रही हैं। बशीरहाट के ब्लॉक-ब्लॉक में संदेशखाली जैसी स्थिति है। वहाँ के लोग डर के मारे मुँह नहीं खोल रहे हैं। ममता बनर्जी की पार्टी चुनाव देखकर अभी संदेशखाली की महिलाओं में साड़ियाँ बाँट रही हैं। संदेशखाली की महिलाएँ सम्मान खोने का दर्द समझती हैं। वे इन साड़ियाँ को कभी स्वीकार नहीं करेंगी। लेंगी भी तो जला देंगी। साड़ियों से अपराध को ढँका नहीं जा सकता।”

संदेशखाली कांड सामने आने के बाद ममता सरकार ने बंदी की योजनाएँ

बशीरहाट लोकसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट रेखा पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी खुद को बंगाल की बेटी कहती हैं। अगर वाकई ऐसा होता तो वे तृणमूल के गुंडों के हाथों बंगाल की महिलाओं का सम्मान नष्ट नहीं करवातीं। वह अच्छा बनने का ढोंग करती हैं। लक्ष्मी भंडार के माध्यम से 1000-1200 रुपये देकर महिलाओं का सम्मान खरीदने की कोशिश की जा रही है। पैसे देकर महिलाओं का लूटा गया सम्मान वापस नहीं किया जा सकता। वास्तविकता यह है कि संदेशखाली की घटना सामने आने के बाद वहाँ की महिलाओं को लक्ष्मी भंडार, विधवा व वृद्धावस्था भत्ता देना बंद कर दिया गया है।

कागज दिखा कर इस्तीफा माँगने वाले अरविंद केजरीवाल ने गिनाए CM पद नहीं छोड़ने के कारण: रंगा सियार कौन?

शराब घोटाले में अंतरिम जमानत पर बाहर आए आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्ग्रेस करके बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं छोड़ा। केजरीवाल ने कहा कि वे 50 दिन बाद जेल से लौटे हैं, क्योंकि उन पर बजरंग बली की कृपा है। बजरंग बली ने उन्हें दिल्ली और देश की राजनीति में परिवर्तन लाने के लिए भेजा है। वे तानाशाही से लड़ रहे हैं।

सीएम केजरीवाल ने कहा, “कई लोगों का सवाल है कि आखिर केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? सबसे ज्यादा बीजेपी वाले यह सवाल उठा रहे थे। आज मैं आपको इसके पीछे की सच्चाई बताता हूँ।” उन्होंने कहा कि बीते 75 साल में भारत में कितने ही राज्यों में चुनाव हुए, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि दिल्ली जितनी ऐतिहासिक जीत किसी पार्टी को मिली हो।

राजनीतिक नाटक रचने हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में ऐतिहासिक अंतर से AAP की सरकार की बनी। इतनी भारी बहुमत से जीतने के बाद वह (भाजपा वाले) जानते थे कि केजरीवाल यहाँ से अगले 20 साल तक चुनाव नहीं हार सकता। इसलिए उन्होंने साजिश रची कि झूठे केस में उन्हें फँसा दो। वह खुद जेल चला जाएगा और उसे इस्तीफा देना पड़ेगा। उसके बाद उसकी सरकार चली जाएगी।”

केजरीवाल ने आगे कहा, “मैंने ठान लिया था कि मैं जनतंत्र जेल से चलाकर दिखाऊँगा। सरकार जेल से चलाकर दिखाऊँगा। इसलिए आज अगर मैं जेल से इस्तीफा नहीं दे रहा हूँ तो इसका एक कारण है कि मैं तानाशाह से लड़ रहा हूँ। अगर कल इनकी सरकार बनी तो ये अन्य राज्यों के सीएम को झूठे केस में फँसाकर जेल में डाल देंगे और उनकी सरकार गिरा देंगे। मैं इनकी यह मंशा पूरी नहीं होने दूँगा।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पूरे तन-मन-धन से तानाशाह के खिलाफ लड़ रहे हैं। ये लड़ाई सिर्फ उनके लड़ने से नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए वे लोगों से साथ देने की भीख माँगने बाहर आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने नहीं आया हूँ। मैं इनकम टैक्स कमिश्नर की नौकरी करता था। ये नौकरी छोड़कर मैंने एक-दो साल नहीं, 10 सालों तक दिल्ली झुग्गियों में काम किया है।”

सीएम केजरीवाल ने आगे कहा, “मुझे पद का लालच नहीं हैं। जब पहली बार सीएम बना तो मैंने 49 दिन में खुद पद छोड़ दिया था। ऐसे सीएम का पद हजार बार कुर्बान। लेकिन, आज मैं इसलिए सीएम पद से इस्तीफा नहीं दे रहा, क्योंकि मुझे राजनीतिक षडयंत्र रचकर जेल भेजा गया। मेरी लड़ाई तानाशाही के खिलाफ है। मेरे जेल जाने से लोग बहुत भावुक हुए हैं। मैं सभी का आभार जताता हूँ।”

पश्चिम बंगाल में BJP नेता के घर में ब्लास्ट, प्लांट किए गए थे 6 बम: मीडिया रिपोर्ट में जली हुई बाइकें, बोले पीड़ित – मेरी कार भी फूँक दी

लोकसभा चुनाव 2024 के 3 चरण के चुनाव बीत चुके हैं। 4 चरणों के चुनाव बाकी हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर में भाजपा के एक नेता के घर में बम ब्लास्ट की खबर है। उक्त नेता पार्टी के पंचायत प्रधान के पद पर हैं। जहाँ ब्लास्ट हुआ, वहाँ पर 6 बम प्लांट किए गए थे। इनमें से 2 बम फ़टे। शुक्रवार (10 मई, 2024) आधी रात के समय पुलिस ने 4 सक्रिय बम बरामद करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सफलता पाई है।

घटना खेजुरी 2 ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गाँव हालूदबारी की है। भाजपा के पंचायत प्रधान निताई मंडल ले घर में एक मोटर बाइक रखी हुई थी, जिसके इस बम ब्लास्ट में परखच्चे उड़ गए। सूचना मिलने के बाद आधी रात के समय ही खेजुरी पुलिस थाने की एक टीम मौके पर पहुँची। बम ब्लास्ट के आसपास वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी कर दी गई। पुलिस ने CCTV फुटेज का विश्लेषण करते हुए जाँच शुरू कर दी है। ये किसने किया है, इस संबंध में कुछ सामने नहीं आया है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि 4 गोलाकार बम पुलिस ने जब्त कर के रखा हुआ है। भाजपा नेता ने बताया कि रात के पौने 1 बजे के करीब उन्हें छत पर से कुछ आवाज़ सुनाई दी। उस दौरान वो लोग जगे हुए थे, उनलोगों ने कुछ लोगों की आवाज़ें भी सुनीं। भाजपा नेता ने ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ को बताया कि जब वो बाहर नहीं गए, किसी ने उनकी बाइक और कार में आग लगा दी थी। बकौल निताई मंडल, इसके बाद उन्होंने अपनी माँ को फोन किया जो उनके लिए खासी चिंतित थीं।

भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें नहीं पता ये किसने किया है, लेकिन वो नाम गेस कर सकते हैं। उनका कहना है कि वो लोग उनके पिता को भी जानते हैं। उन्होंने बताया कि बाहरी लोगों को उनके घर के बारे में उतनी जानकारी नहीं है, वहाँ कैमरे भी लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वो अधिकतर अध्ययन में व्यस्त रहते हैं और राजनीति में उतने सक्रिय नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में चौथे चरण में बहरामपुर, कृष्णानगर, राणाघाट, बर्धमान पूर्व, बर्धमान-दुर्गापुर और आसनसोल के अलावा बीरभूम और बोलपुर में मतदान होगा।

‘छोटा हाथी’ में था ₹7 करोड़, एक्सीडेंट से खुला राज… सड़कों पर बिखर गईं गड्डियाँ: आंध्र पुलिस ने किया जब्त, 13 मई को है मतदान

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में शनिवार (11 मई 2024) को भारी मात्रा में नकदी बरामद हुआ है। ये नकदी ‘छोटा हाथी’ कहे जाने वाली एक गाड़ी में गत्ते की पेटियों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान एक लॉरी ने इस गाड़ी को टक्कर मार दी और यह गाड़ी पलट गई। गाड़ी पलटते ही सारा कैश सड़कों पर बिखर गया। इसके बाद पुलिस ने आकर इसे जब्त कर लिया।

पुलिस के अनुसार, पूर्वी गोदावरी जिले के नल्लाजर्ला मंडल के अनंतपल्ली में एक छोटा हाथी में करोड़ों रुपए के नोट ले जाया जा रहा था। इन्हें गत्ते की सात पेटियों में रखकर बोरे में रखा गया था। गाड़ी विजयवाड़ा से विशाखापट्टनम की ओर जा रही थी। इसी दौरान गाड़ी पलट एक टक्कर में पलट गई और सारा भेद खुल गया। जब्त नकदी 7 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

इस दुर्घटना में छोटा हाथी के ड्राइवर को भी चोटें आई हैं और उसे गोपालपुरम के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले शुक्रवार (9 मई) को भी आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले में चेकिंग के दौरान पाइप से लदे एक ट्रक से पुलिस ने करीब 8 करोड़ रुपए जब्त किए थे। पुलिस ने ट्रक और पैसों को जब्त करने के साथ-साथ उसमें सवार दो लोगों को भी हिरासत में ले लिया है।

बताते चलें कि आंध्र प्रदेश की सभी 25 सीटों पर 13 मई को होने वाले चौथे चरण में मतदान होने हैं। इनमें अराकू, श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापट्टनम, अनकापल्ली, काकिनाड़ा, अमलापुरम, राजमुंदरी, नरसापुरम, एलुरु, मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, नरसारावपेट, बापटला, ओंगोल, नांदयाल, कर्नूलु, अनंतपुर, हिंदूपुर, कडपा, नेल्लोर, तिरुपति (आरक्षित), राजमपेट और चित्तूर की सीटें शामिल हैं।

‘ये तो मेरा लास्ट है’: रोहित शर्मा के ‘लास्ट’ वाली बातचीत पर क्यों मच रहा है हायतौबा? क्या उनके दिल में वही चल रहा, जो उनके फैन्स के मन में है…?

आईपीएल 2024 के 60वें मैच से पहले केकेआर की सोशल मीडिया टीम ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें रोहित शर्मा और केकेआर के असिस्टेंट कोच अभिषेक नायर दिख रहे थे। ये वीडियो अब डिलीट कर दिया गया है। दरअसल, इस वीडियो में रोहित शर्मा और अभिषेक नायर की आपसी बातचीत थी, जिसकी वजह से क्रिकेट फैन्स तमाम सवाल खड़े करते दिखे, खासकर ‘मेरा क्या भाई, मेरा तो लास्ट है।’ इस वीडियो के बाद ही सवाल उठने लगा कि क्या रोहित शर्मा अब सन्यास लेने जा रहे हैं?

37 साल के रोहित शर्मा भारतीय टीम के ऑल-फॉर्मेट कप्तान हैं। अगले महीने से वेस्टइंडीज और अमेरिका में होने जा रहे टी-20 विश्वकप में वो भारतीय टीम की कमान भी संभाल रहे हैं। वो इस साल से पहले तक आईपीएल की सबसे सफल फ्रेंचायजी में से एक मुंबई इंडियंस के कप्तान थे, जिनकी कप्तानी में मुंबई इंडियंस 5 बार आईपीएल की चैंपियन बनी, लेकिन इस साल रोहित शर्मा को कप्तानी से हटा दिया गया और हार्दिक पांड्या को कप्तानी दे दी गई। खास बात ये है कि मुंबई इंडियंस इस साल बेहतर प्रदर्शन कर पाने में नाकाम रही और हार्दिक पांड्या को भी खूब भला-बुरा सुनने को मिला, ऐसे में KKR vs MI मैच से पहले रोहित शर्मा और अभिषेक नायर का वीडियो सामने आया, तो तमाम तरह के सवाल क्रिकेट प्रेमियों के मन में कौंधने लगे।

इस वीडियो में रोहित शर्मा अभिषेक नायर से बातचीत में कहते हैं, “एक-एक चीज चेंज हो रहा है। सब उनके ऊपर है। मैं ध्यान नहीं देता।” इसके आगे वो बोल रहे हैं, “जो भी है, मेरा घर है। मैंने मंदिर टेंपल (मंदिर) बनाया है।” और फिर आखिर में… “भाई मेरा क्या, मेरा तो लास्ट है।” ये तीन लाइनें काफी उठापटक की ओर इशारा कर रही हैं। वैसे, रोहित शर्मा और अभिषेक नायर किस विषय पर बात कर रहे थे, ये तो वही दो लोग सही से बता पाएँगे, लेकिन कयासों का दौर चल पड़ा है। केकेआर द्वारा डिलीट कर दिया गया वीडियो कई सोशल मीडिया हैंडल्स से डाला गया है, उसमें से एक खुद को रोहित शर्मा का फैन बताने वाले आर्यन का एक्स हैंडल भी है।

इस आईपीएल में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी दिखी है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वो है उन्हें मुंबई इंडियंस की कप्तानी से हटाने की। हालाँकि रोहित शर्मा ने जिस ‘लास्ट’ की बात की है, हो सकता है कि वो मुंबई इंडियंस की ओर से खेले जाने वाले मैच की बात हो।

चूँकि इस आईपीएल में मुंबई इंडियंस के पास प्ले ऑफ में जगह बनाने का कोई मौका नहीं रह गया है। ऐसे में हो सकता है कि रोहित शर्मा का केकेआर के खिलाफ मैच ही इस साल के आईपीएल का उनका आखिरी मैच भी हो, क्योंकि आईपीएल के तुरंत बाद भारतीय टीम को टी-20 विश्वकप की तैयारी में भी जुट जाता है। केकेआर के खिलाफ उनका बल्ला चलता भी रहा है। ऐसे में हो सकता है कि वो मुंबई इंडियंस के लिए इस साल केकेआर के खिलाफ खेलने के बाद अगला मैच न ही खेलें। आखिरी मैच एलएसजी के खिलाफ मुंबई में ही है। वो सकता है कि वो मैच में हिस्सा लेने की जगह अपने घर पर समय बिताएं, क्योंकि फिर उन्हें काफी लंबा समय वेस्टइंडीज और अमेरिका में बिताना है।

वैसे, अगर रोहित शर्मा आखिरी मैच एलएसजी के खिलाफ खेलते भी हैं, तो फिर आईपीएल के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा। इसके लिए टीम में बहुत सारे बदलाव भी हो सकते हैं, क्योंकि अगले साल के आईपीएल से पहले मेगा ऑक्शन भी होना तय है। ऐसे में हो सकता है कि रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस फ्रेंचायजी से बोल दिया हो कि वो अब मुंबई इंडियंस से नहीं खेलेंगे और उन्हें रिलीज कर दिया जाए। मेगा ऑक्शन में उन्हें खरीदने के लिए बहुत सारी टीमें कोशिश करती दिख जाएँगी, रोहित शर्मा का ऐसा रिकॉर्ड है कि कोई भी टीम उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहेगी। ऐसे में ये देखने वाली है कि रोहित शर्मा के ‘लास्ट’ का क्या मतलब निकलता है। क्या वो केकेआर के खिलाफ मैच को ही मुंबई इंडियंस के लिए अपना आखिरी मैच खेल लेंगे, या वानखेड़े मैच तक का इंतजार करेंगे, ये कुछ ही समय में पता चल ही जाएगा।

हिंदी की कोई ज़रूरत नहीं है… फहाद फाज़िल की मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ में राजभाषा का अपमान? सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ के एक दृश्य में हिंदी भाषा का अपमान किए जाने का आरोप लगा है। बता दें कि दक्षिण भारत में कुछ तत्वों द्वारा हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाते हुए अपने ही देश की भाषा का विरोध किया जाता है। यहाँ तक कि वहाँ के राजनेता भी इसकी फसल काटते हैं। फहाद फाज़िल को अल्लू अर्जुन अभिनीत तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ (2021) में बतौर विलेन शोहरत मिली थी। मलयालम मनोरंजन इंडस्ट्री में उनकी कई फिल्मों को समीक्षकों द्वारा प्रशंसा मिली है।

‘आवेशम’ में भी उनके परफॉर्मेंस की तारीफ की जा रही है। 155 करोड़ रुपए बटोरने के बाद अब ‘Amazon Prime’ के जरिए OTT पर रिलीज किया गया है। फिल्म में फहाद फाज़िल ने ‘रंगा’ नाम का किरदार निभाया है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि रंगा कॉलेज के सीनियरों को धमकी दे रहा है। इस दौरान पहले मलयालम में धमकी देता है, फिर कन्नड़ में, फिर हिंदी में और अंत में फिर से कन्नड़ में। इसके बाद उसका एक साथी उसे जाकर रुकने के लिए कहता है, क्योंकि धमकी लंबी खिंच गई।

इस दौरान वो कहता है कि सबको सन्देश मिल गया है, अब हमें निकलना चाहिए। इस दौरान रंगा पूछता है, “हिंदी की ज़रूरत नहीं है?” उसका साथी कहता है, “कोई ज़रूरत नहीं है।” जब सोशल मीडिया में इस संबंध में ध्यान दिलाया गया कि तो कई दक्षिण भारतीय कहने लगे कि भारत की कोई एक आधिकारिक भाषा नहीं है। ‘आवेशम’ को नियमों के विरुद्ध रिलीज के 28 दिन बाद ही OTT पर रिलीज कर दिया गया, जबकि केरल के फिल्म एक्सहिबीटर्स एसोसिएशन ने इसके लिए 42 दिन का विंडो रखा है।

इसी कारण ‘आवेशम’ को OTT पर रिलीज किए जाने के साथ ही थिएटरों ने निकाल बाहर किया। अब हिंदी भाषा के अपमान के आरोप के बाद नया विवाद पैदा हो गया है। वहीं कुछ फिल्म प्रशंसकों का कहना है कि दृश्य के हिसाब से ये डायलॉग उचित था, हिंदी का अपमान नहीं किया गया है। फ़िलहाल इस फिल्म को हिंदी में डब नहीं किया गया है। तमिलनाडु में भी कई नेता ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगा कर अपनी राजनीति चमकाते रहते हैं।

चीनी कहने पर क्यों भड़क जा रहे सिंगापुर के लोग? जिस देश की 74% जनसंख्या चायनीज, वहाँ भी चीन को लेकर नाराज़गी: TikTok वीडियो के बाद फिर छिड़ी बहस

शॉर्ट वीडियो एप TikTok पर एक वीडियो खासा वायरल हो रहा है, जिसमें खुद को चायनीज बताने जाने पर कुछ सिंगापुर के नागरिक भड़के हुए नज़र आ रहे हैं। चीनी मीडिया कह रहा है कि वो अपने जड़ों को भूल गए हैं। वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ये 2 अलग-अलग पहचान हैं, इन्हें मिलाना ठीक नहीं। चीन से आए एक व्यक्ति ने वीडियो में कहा कि वो इससे हैरान है कि सिंगापुर के लोग चीन की मुख्य भूमि से खुद को जोड़े जाने को लेकर उदासीन थे, साथ ही उन्होंने खुद को चीन से ‘हमवतन’ मानने से भी इनकार कर दिया।

उक्त चीनी नागरिक का कहना है कि सिंगापुर के लोग अपनी संस्कृति को भूल गए हैं। साथ ही उसने सिंगापुर को चीनी बहुसंख्यक वाला देश करार दिया। 36 सेकेण्ड के उक्त वीडियो पर हजारों कमेंट्स और लाखों व्यूज आ रहे हैं। कई वर्षों से इस पर चर्चा चलती रही है कि सिंगापुर सांस्कृतिक रूप से चीन का हिस्सा है या नहीं। वैसे साम्राज्यवादी चीन हर इलाके पर अपना दावा किसी न किसी बहाने ठोकता रहा है। ‘The Singaporean Son’ नामक TikTok यूजर ने बताया कि सिंगापुर के एक चीनी व्यक्ति ने ‘हमवतन’ कहे जाने पर कैसी प्रतिक्रिया दी।

उसने बताया, “मुझे नहीं पता था सिंगापुर के व्यक्ति का चेहरा काला पड़ गया था। उसने कहा – ‘हम कब से हमवतन हैं? मैं सिंगापुरी हूँ, चीनी नहीं।’ इसके बाद मैं दंग रह गया और मैंने ऐसी बातें कहनी बंद कर दी।” एक यूजर का कहना था कि सिंगापुर के चीनी मूल के लोग खुद को चीनी मानते हैं, लेकिन कोई और उन्हें चीनी माने इससे नहीं घृणा है। एक यूजर ने कहा कि बाहर घूमने जाने वाले चायनीज लोगों ने अपनी ख़राब छवि बना रखी है – वो चिल्ला कर बात करते हैं, उनकी आदतें और उनका व्यवहार ठीक नहीं है।

वहीं इस दौरान कुछ लोगों ने ये भी ध्यान दिलाया कि सिंगापुर में जो चीनी मूल के लोग हैं वो चीन मेनलैंड से ताल्लुक नहीं रखते। दोनों के पूर्वज अलग-अलग थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि चीन का TikTok यूजर जो सिंगापुर घूमने गया था, वो मंदारिन भाषा न बोल पाने और ट्रेनों पर चीनी भाषा में न लिखे होने के कारण सिंगापुर के लोगों की आलोचना कर रहा है। इस पर कई लोगों ने ध्यान दिलाया कि सिंगापुर में आम संपर्क की भाषा अंग्रेजी है।

विशेषज्ञ कहते हैं सिंगापुर और चीन के संबंधों को लेकर ये चर्चा नई नहीं है। उनका कहना है कि सिंगापुर को लंबे समय तक चीन का हिस्सा होने को लेकर भ्रमित किया जाता रहा है और ये सोच मुख्य रूप से अमेरिकी और यूरोपियन देशों से आती है। इसका कारण बताया जाता है कि दोनों देशों की विरासत में समानता है और सिंगापुर में चीनी बहुसंख्यक हैं। सिंगापुर की जनसंख्या 40 लाख है, जिसका 74% हिस्सा चीनी हैं। 13% मलेशियन हैं और 9% भारतीय।

वहीं 3% यूरेशियन जनसंख्या भी सिंगापुर में रहती है। द्वीपीय देश सिंगापुर उत्तर-पूर्वी एशिया से बाहर अकेला ऐसा देश है, जहाँ एक तिहाई से अधिक जनसंख्या चीनी है। सिंगापुर के लिए ये समस्या भी पैदा करता है। वहाँ की संसद में भी ये मामला उठ चुका है कि चीनी समझे जाने के कारण बाकी दुनिया से उसके रिश्तों पर असर पड़ता है। भाषा और संस्कृति के मामले में सिंगापुर के चीनी मूल के लोग चीन के साथ काम करने में सहज महसूस करते हैं। इससे सिंगापुर-चीन के द्विपक्षीय रिश्ते भी ठीक हुए हैं।

चूँकि सिंगापुर एक अलग स्वतंत्र देश है, इसीलिए अगर वहाँ के लोगों को किसी अन्य देश से जोड़ा जाएगा तो उन्हें बुरा लगेगा ही। TikTok के CEO चिउ शोउ ज़ी से अमेरिका में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से उनके कनेक्शन को लेकर पूछताछ हो चुकी है। उनसे उनकी राष्ट्रीयता को लेकर भी सवाल किए गए। अमेरिकी के एक सीनेटर ने कहा कि सिंगापुर में चीन की सबसे ज्यादा घुसपैठ और प्रभाव है। 1990 में सिंगापुर ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे और पिछले दशक में चीन इसका सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर रहा है।

1 मोबाइल के लिए 71 सिम कार्ड… आपके अकाउंट से पैसे निकालने के लिए ऐसे होता था साइबर क्राइम: 28200 मोबाइल ब्लॉक, 20 लाख सिम का दोबारा वेरिफिकेशन

साइबर क्राइम से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सख्ती भरे कदम उठाए हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 28,200 मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक कर दिए हैं। इसके साथ ही इन हैंडसेट्स से जुड़े 20 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों को फिर से वेरीफिकेशन के लिए कहा है। अगर इनका री-वेरिफिकेशन नहीं कराया जाता है, तो इन्हें ब्लॉक करने के आदेश दिए गए हैं।

पीआईबी द्वारा जारी रिलीज में बताया गया है कि दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications), गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और राज्य पुलिस साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक साथ आए। इस सहयोगात्मक प्रयास का उद्देश्य धोखेबाजों के नेटवर्क को नष्ट करना और नागरिकों को डिजिटल खतरों से बचाना है।

गृह मंत्रालय और राज्य पुलिस द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि साइबर अपराधों ( Cyber crimes ) में 28,200 मोबाइल हैंडसेट का दुरुपयोग किया गया था। डीओटी ने आगे विश्लेषण किया और पाया कि इन मोबाइल हैंडसेटों के साथ आश्चर्यजनक रूप से 20 लाख नंबरों का उपयोग किया गया था। इसके बाद, दूरसंचार विभाग ने देश भर के दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को 28,200 मोबाइल हैंडसेटों को ब्लॉक करने और इन मोबाइल हैंडसेटों से जुड़े 20 लाख मोबाइल कनेक्शनों का तत्काल पुन: सत्यापन करने तथा पुन: सत्यापन में विफल रहने पर कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए।

भारत सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया है, ताकि आम लोगों को साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रखा जा सके। बता दें कि साइबर क्राइम के चलते हर साल लाखों मामले दर्ज किए जाते हैं, जिसमें फर्जी नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत सरकार ने 6 फरवरी 2024 को लोकसभा में आधिकारिक रूप से बताया था कि अकेले साल 2023 में ही साइबर फ्रॉड के कुल 11.28 लाख मामले सामने आए थे। पूरे देश में सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र राज्य रहा। देश में कुल 11.28 लाख साइबर क्राइम के केस में 7,488.6 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। सबसे अधिक रकम महाराष्ट्र में 990.7 करोड़ रुपये थी। 759.1 करोड़ रुपये के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर रहा, जबकि यूपी में 721.1 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। कर्नाटक में 662.1 करोड़ रुपये और तमिलनाडु में 661.2 करोड़ रुपये का फ्रॉड शामिल रहा। वहीं, साल 2022 में 1,391,457 साइबर सुरक्षा से संबंधित घटनाएं दर्ज की गईं।थी.