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18 आतंकी हमले, कश्मीरी पंडितों का खून, सिख शिक्षिका की हत्या… जानिए कौन था कुलगाम में मार गिराया गया ₹10 लाख का इनामी आतंकी बासित डार

जम्मू कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों के साथ हुए एक एनकाउंटर में दो आतंकियों को मार गिराया गया। मारे जाने वाले आतंकियों में से एक बड़ा आतंकी कमांडर बासित डार भी था। बासित डार पर ₹10 लाख का इनाम घोषित किया गया था। सुरक्षाबलों ने उसके एक और साथी को मुठभेड़ में मार गिराया।

जानकारी के अनुसार, कुलगाम के रेदवानी पाईन इलाके में सोमवार (6 मई, 2024) को सुरक्षाबलों ने कुछ आतंकियों की मौजूदगी को लेकर एक घर को घेरा था। सोमवार शाम को फायरिंग भी हुई थी। इसके बाद मंगलवार (7 मई, 2024) को मुठभेड़ तेजी से चालू हुई। सेना की राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू कश्मीर पुलिस के इस संयुक्त ऑपरेशन में दोनों आतंकियों को घर में ही घेर लिया गया। उन्हें आत्मसमर्पण करने का भी मौक़ा दिया गया लेकिन उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी।

इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी फायरिंग और कार्रवाई की। इस जवाबी कार्रवाई में उस घर को भी आग लग गई, जिसमें आतंकी छुपे हुए थे। कई घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद बासित डार और उसका साथी मारे गए। सुरक्षाबलों को इस कार्रवाई में कोई नुकसान नहीं होने की सूचना है।

जिस बासित डार को सुरक्षाबलों ने कुलगाम में मार गिराया है, वह एक बड़ा आतंकी कमांडर था। वह 18 आतंकी हमलों में शामिल था। वह पहले लश्कर ए तैयबा और फिर द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़ गया था। बासित डार के खिलाफ ₹10 लाख का इनाम घोषित किया गया था। सुरक्षाबलों के एनकाउंटर में मारा जाने वाले आतंकी बासित डार ने महिला सिख शिक्षक रुपिंदर कौर की 2021 में हत्या कर दी थी। उसने इसी हमले में एक और कश्मीरी पंडित शिक्षक को भी मार दिया था।

बासित डार ने अक्टूबर 2023 में श्रीनगर में क्रिकेट खेल रहे जम्मू कश्मीर पुलिस के अफसर मसरूर अहमद वानी पर भी हमला किया था। मसरूर अहमद वानी की बाद में दिल्ली में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह लगातार कश्मीर घाटी में आंतकी गतिविधियाँ बढ़ाने में लगा हुआ था। डार TRF आतंकी समूह का बड़ा कमांडर था। लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने अपनी आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए PAFF और TRF नाम के दो नए आतंकी संगठन बनाए हैं। डार, इन्हीं में से एक से जुड़ कर घाटी में आतंक फैला रहा था।

ऑपइंडिया की खबर का असर: हमास समर्थक प्रिंसिपल को सोमैया स्कूल ने हटाया, हिंदुओं से दिखाई थी नफरत, PM मोदी की कुत्ते से की थी तुलना

मुंबई के मशहूर सोमैया स्कूल ने अपने हमास समर्थक कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा से प्रेरित प्रिंसिपल परवीन शेख को पद से हटा दिया है। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद सोमैया स्कूल को चलाने वाले सोमैया ट्रस्ट ने कहा था कि वो मामले की जाँच कर रही है और जाँच के बाद इस मामले में कदम उठाएगी। इस बीच, परवीन शेख को बचाने के लिए पूरे वामपंथी और इस्लामिक गिरोह ने कैंपेन चलाया, लेकिन अब सोमैया स्कूल ने परवीन शेख को स्कूल से निकाल दिया है।

सोमैया स्कूल ने जारी किया बयान, परवीन शेख को हटाया

सोमैया स्कूल ने इस्लामी कट्टरपंथी प्रिंसिपल परवीन शेख को मंगलवार (7 मई 2024) को पद से हटाया और इस बारे में आधिकारिक बयान जारी कर सूचना सार्वजनिक की। सोमैया स्कूल ने अपने बयान में कहा, “सोमैया विद्यासागर के 80 साल के इतिहास में हमने हमेशा ज्ञान और समाज के सेवा को वरीयता दी। हम मानवतावादी और स्वतंत्र विचारधारा के आधार पर सेवा करते रहे हैं।”

बयान में आगे लिखा है, “इस बीच, हमारी नजर में ये मामला आया कि सोमैया स्कूल में लीडरशिप रोल में कार्यरत परवीन शेख की सोशल मीडिया पर क्रियाकलापों को हमारे ध्यान में लाया गया था। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मजबूती से समर्थन करते हैं, लेकिन उसमें दूसरों के लिए जिम्मेदारी और इज्जत भी होनी जरूरी है। ऐसे में परवीन शेख के क्रियाकलापों की हमने जाँच की और इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि हम उन्हें तुरंत प्रभाव से पद से हटा रहे हैं और अपने सभी संबंधों को खत्म कर रहे हैं।”

ऑपइंडिया की रिपोर्ट का असर

बता दें कि ऑपइंडिया ने अप्रैल 2024 में परवीन शेख के कारनामों को दुनिया के सामने रखा था। हमने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से हजारों बच्चों के भविष्य को बनाने की जिम्मेदार महिला परवीन शेख सोशल मीडिया पर न सिर्फ हमास समर्थक, बल्कि एंटी हिंदू पोस्ट को भी लाइक करती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कुत्ते से करती है।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद सोमैया स्कूल ने 25 अक्टूबर 2024 को कहा था कि वो परवीन शेख के कारनामों की जाँच के बाद उचित कदम उठाएगा। सोमैया ट्रस्ट ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट के जवाब में कहा था कि हमें परवीन शेख के इस पहलू के बारे में पता नहीं था, ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सोमैया ट्रस्ट ने कहा कि परवीन शेख के बारे में सामने आई जानकारियाँ चिंता पैदा करने वाली हैं, और वो इस मामले को देख रहे हैं। सोमैया ट्रस्ट ने लिखा, “आज हमारे संज्ञान में लाए जाने तक हम इस मामले से अनजान थे। हम ऐसी भावनाओं (परवीन शेख की) से सहमत नहीं हैं। यह निश्चित रूप से चिंताजनक है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि सोमैया ट्रस्ट द्वारा संचालित सोमैया स्कूल मुंबई के घाटकोपर-ईस्ट इलाके में आने वाले विद्या विहार में स्थित है। परवीन शेख 12 साल से स्कूल से जुड़ी हुई थी, जिनमें से 7 साल वो बतौर प्रिंसिपल काम कर चुकी थी। लेकिन अब उसके खिलाफ कार्रवाई हुई है और उसे पद से हटा दिया गया है।

हालाँकि इस मामले में लेफ्ट और लिबरल मीडिया ने परवीन शेख का भरसक बचाव करने की कोशिश की थी। वामपंथी इकोसिस्टम ने परवीन शेख के इंटरव्यू छापे और उसे अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का बचाव करने का खूब मौका दिया, लेकिन लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम की ये कोशिशें उसके काम नहीं आई और अब सोमैया ट्रस्ट ने परवीन शेख को पद से चलता कर दिया है।

नीदरलैंड में फिलिस्तीन समर्थकों पर बुलडोजर वाली कार्रवाई: एम्स्टर्डम यूनिवर्सिटी में घुस पुलिस ने 125 को पकड़ा, US-यूरोप में भी सख्ती

नीदरलैंड्स की एम्स्टर्डम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की जगह फिलिस्तीन के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन को पुलिस ने तितर-बितर कर दिया है। एम्स्टर्डम पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शन कर रहे 125 से ज्यादा फिलिस्तीन समर्थकों को गिरफ्तार भी कर लिया है। फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे कथित छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में कैंप लगा लिए थे, जिसे पुलिस ने उखाड़ फेंका है।

टाइम मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (7 मई 2024) के तड़के ही एम्स्टर्डम पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को यूनिवर्सिटी कैंपस से हटाने की मुहिम छेड़ी और सभी प्रदर्शनकारियों को टेंट खाली करके जाने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बात नहीं मानी, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सभी टेंटों को हटा दिया और 125 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया।

एम्स्टर्डम पुलिस ने इस कार्रवाई की सूचना एक्स पर भी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि 125 फिलिस्तीन समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए हिरासत में ले लिया है।

नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने घटनास्थल की तस्वीरें प्रसारित की है। इन वीडियो में पुलिस को बैरिकेड्स को गिराते दिखाया जा रहा है, जिसमें पुलिस ने भारी मशीनों का इस्तेमाल करते हुए अस्थाई निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान पुलिस वालों ने लाठियों का भी जमकर इस्तेमाल किया। पुलिस वालों ने फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और तंबुओं को उखाड़ फेंका।

बता दें कि फिलिस्तीन के समर्थन में अमेरिका और यूरोप के कई देशों की यूनिवर्सिटीज में प्रदर्शन हो रहे थे। अमेरिका में प्रदर्शन उग्र भी हो रहा था, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई की, बल्कि यूनिवर्सिटीज ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को यूनिवर्सिटी से भी निकाल दिया है। ये प्रदर्शनकारी 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हुए हमले के बाद इजरायल की जवाबी कार्रवाई का विरोध कर रहे थे।

‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगा वोट माँग रहे ओवैसी, पीएम मोदी ने बीड में कहा – कॉन्ग्रेस सरकार में आएगी तो राम मंदिर को भी कैंसिल कर देगी

AIMIM नेता और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी अपनी सभाओं में ‘बाबरी मस्जिद’ के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। वह अपनी सभाओं में इन नारों के जरिए वोट माँग रहे हैं। उनका यह करने का वीडियो भी वायरल हो रहा है। उधर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

AIMIM मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपने प्रत्याशी इम्तियाज जलील के समर्थन में सोमवार (6 मई, 2024) को एक जनसभा को संबोधित किया जहाँ उन्होंने ‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगाए। ओवैसी ने कहा कि 6 दिसम्बर, 1992 को गुनाह किया था। इसके बाद उन्होंने संसद में बाबरी के लिए लगाए गए नारों की याद दिलाई।

ओवैसी ने इस जनसभा में कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव) पर हमला भी बोला। उन्होंने पूछा कि विपक्षी INDI गठबंधन ने 48 सीटों में से किसी भी सीट पर किसी मुस्लिम को टिकट क्यों नहीं दिया। उन्होंने उद्धव ठाकरे को नया-नया सेक्युलर बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी, वह सब भूल जाएँगे।

पीएम मोदी ने बीड में कॉन्ग्रेस पर किया हमला

पीएम मोदी ने मंगलवार (7 मई, 2024) को महाराष्ट्र के बीड में एक जनसभा को संबोधित किया। मुंडे परिवार के राजनीतिक प्रभाव वाली इस सीट पर उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे को याद किया। उन्होंने इस रैली में कॉन्ग्रेस पर हमला भी किया।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस वर्तमान में तुष्टिकरण की राजनीती कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आने पर राम मंदिर को कैंसल करवा देगी, यह कॉन्ग्रेस में ही लम्बे समय तक रहे एक नेता ने कहा है। उन्होंने यहाँ आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान लोगों को बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने का मन बना चुके हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन के नेता अन्य किसी धर्म को लेकर कुछ नहीं बोलते लेकिन वोटों के लिए प्रभु राम का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन के लोग वोट जिहाद की अपील कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस 26/11 के आतंकियों के साथ रिश्तेदारी निभा रही है।

पीएम मोदी ने यहाँ मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस बात का पुरजोर विरोध किया था कि देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा, लेकिन कॉन्ग्रेस दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीन कर एक धर्म के लोगों को देना चाहती है। पीएम मोदी ने कर्नाटक में मुस्लिमों को दिए गए आरक्षण का उदाहरण इस जनसभा में दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर राज्य में यही काम करना चाहता है।

पीएम मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन पूरा आरक्षण मुस्लिमों को देना चाहते हैं, यह खतरे की घंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक मोदी ज़िंदा है तब कोई भी ताकत दलितों और पिछड़ों का आरक्षण नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नकली वीडियो बना रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को काम रोकने वाला बताया।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के बेटे अनस की गुंडागर्दी, पेट्रोल पंप कर्मियों को पीटा: नोएडा में बाप-बेटे पर FIR, अलीगढ़ में भी कर चुका है मारपीट

दिल्ली की ओखला विधानसभा सीट से आप विधायक अमानतुल्लाह खान और उसके बेटे अनस की गुंडागर्दी का मामला सामने आया है। यहाँ पेट्रोल पंप पर अनस खान और उसके साथियों ने सेल्समैनों के साथ मारपीट की है। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान, उसके बेटे अनस खान और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मारपीट की ये घटना सीसीटीवी में भी कैद हो गई, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाइन तोड़कर ईंधन नहीं भरने पर विधायक के बेटे ने नोएडा के सेक्टर-95 स्थित फिलिंग स्टेशन पर काम करने वाले से मारपीट और गाली गलौज की। इस दौरान विधायक अपनी गाड़ी बैठे रहे और बाद में पेट्रोल पंप के मेनेजर के ऑफिस में कर्मचारियों को धमकाया।

ये घटना मंगलवार (07 मई 2024) की सुबह की है, जब करीब 9:30 बजे अपने साथियों के साथ नोएडा के सेक्टर 95 स्थित पेट्रोल पंप पर पहुँचा। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि आप विधायक के बेटे ने नोएडा में कैसे पहले पेट्रोल डलवाने को लेकर वहाँ के कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और फिर उनके साथ मारपीट की।

शिकायत दर्ज कराने वाले विनोद प्रताप सिंह के मुताबिक, विधायक के बेटे ने उन्हें पीटा, क्योंकि वह चाहता था कि पहले उसकी कार में ईंधन भरा जाए

मामला शांत होने के थोड़ी देर बाद ही आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान खुद नोएडा के सेक्टर 95 में स्थित पेट्रोल पंप पर पहुँच गए। यहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने भी पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से बहस की। फिलहाल पुलिस ने इस पूरी घटना का संज्ञान लिया है। पुलिस ने इस मामले में विधायक अमानतुल्लाह खान और उसके बेटे पर FIR दर्ज कर ली है।

अलीगढ़ में डॉक्टर के साथ की थी मारपीट

27 मार्च 2024 को अमानतुल्लाह खान के बेटे अनस खान ने अपने मामा और साथियों के साथ मिलकर मामूली सड़क विवाद में अलीगढ़ के डॉक्टर सुहेब आरिफ को जमकर पीटा था। डॉ सुहेब आरिफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएनएमसी में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर हैं। इस घटना में उन्हें काफी चोटें आई और उन्हें जेएनएमसीएच में भर्ती कराना पड़ा था। हमलावरों में मुख्य भूमिका अनस पुत्र अमानतुल्ला खान (ओखला निर्वाचन क्षेत्र, दिल्ली से विधायक) और उनके मामा थे। यही नहीं, उन लोगों के साथ कार में सवार महिलाओं ने भी पीड़ित डॉक्टर के साथ गाली-गलौच की थी।

बांग्लादेश से हिंदुओं को साफ करने के लिए चल रहा लव जिहाद का खेल: लड़कियाँ फँसाने पर लाखों का इनाम, इस्लामी कट्टरपंथी संगठन दे रहे ट्रेनिंग

बांग्लादेश में हिंदू पुरुषों और महिलाओं को धर्मांतरित कराने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों के समूह ने नया खेल शुरू किया हुआ है। वहाँ कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समूह में शामिल मुस्लिम युवकों को इनाम दिया जा रहा है ताकि वो उसका इस्तेमाल हिंदुओं को इस्लाम कबूल करवाने के लिए करें।

मीडिया रिपोर्टें दावा करती हैं कि सोशल मीडिया पर तमाम पेज आदि खुले हैं ताकि कट्टरपंथी हिंदू पुरुषों और महिलाओं को धर्मांतरण के लिए मना सकें। इसके अलावा इन कट्टरपंथियों को ये भी सिखाया जाता है कि कैसे लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण करवाया जाए। वहीं नव मुस्लिमों को संरक्षण देने के नाम पर बैंक समेत कई सामाजिक संगठन धर्म परिवर्तन जैसे कुकृत्यों में शामिल रहे हैं।

आज भी कई सामाजिक संगठन इस तरह की हरकत करते हैं जबकि कानून प्रशासन चुप होकर ये सब देखता रहता है। कट्टरपंथियों का मकसद अन्य धर्मों के लोगों को कमजोर करना है जिससे या तो वो इस्लाम में आ जाएँ या फिर पलायन करके भारत चले जाएँ।

उनके ऐसे घटिया प्रयासों के चलते देश में साम्प्रदायिकता फैल रही है… हाल में मोहम्मद साहिदुल्ला खान मदानी और डॉक्टर अब्दुल्ला फारूक द्वारा दस्तख्त किया गया जमीयत-ए-अहले-हदीस का फतवा सोशस मीडिया पर धड़ल्ले से चल रहा है। उसमें तो कहा यही गया है कि हिंदू युवतियों को लव जिहाद में फँसाओ और उनका धर्मांतरण कराओ। फतवे में 50 हजार से लेकर 50 लाख बांग्लादेशी करंसी इनाम देने की भी बात है। इस फतवे की कॉपी को संगठन के हर जिला अध्यक्ष और महासचिवों के पास भेजा गया है।

वहीं, जब इस संबंध में बांग्लादेश जमीयत-ए-अहले-हदीस से पूछा गया तो उन्होंने इसे साजिश बता दिया। जब पूछा गया कि इस संगठन का खर्चा कैसे चलता है तो बताया संतोषजनक जवाब देने की बजाय सिर्फ इतना कहा गया कि एफ्रो-अरब की अलग-अलग जगहों से जो चंदा आता है उससे ये संगठन चलते हैं।

इसी तरह इस्लामी दावाह संगठन भी मुफ्ती जुबैर अहमद के नेतृत्व में ऐसे कृत्यों को करवाने में शामिल है। वो मुस्लिम युवकों को ट्रेनिंग देते हैं कि कैसे हिंदू महिलाओं को फँसाकर इस्लाम में लाया जाए। इनके नाम पर तो एक पोस्ट भी वायरल हुआ था जिसमें साफ कहा गया था- “हमारे मुस्लिम भाई मूर्तिपूजकों (हिंदुओं) को प्रेम जाल में फँसा रहे हैं, और साथ ही उन्हें सच्चे मुसलमानों में बदल रहे हैं। प्रशंसनीय बात यह है कि हमारे मुस्लिम भाइयों को इस तरह से प्रशिक्षित किया जा रहा है कि लड़कियों (अन्य धर्मों की)को लगे कि वे वास्तव में उनसे प्यार करते हैं। उनकी यही क्षमता हमारे मिशन (गैर-मुसलमानों को प्रेम जाल में फँसाने) को पूरा कर रही है।” इसी तरह से लव जिहाद के नाम से एक मामून नाम का व्यक्ति ‘लव जिहाद मिशन’ पर पूरा फेसबुक पेज ही चला रहा है।

कई हिंदू संगठन इस्लामी कट्टरपंथियों के ऐसे कृत्यों से वाकिफ हैं इसलिए वो इसे चिंताजनक स्थिति बताते हैं। नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस से जुड़े वकील गोबिंदा चंद्रा कहते हैं कि इस तरह का ट्रेंड बेहद डराने वाला है। ऐसा देखने को मिल रहा है कि इस्लामी खुलेआम लव जिहाद की गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं और मुस्लिम युवकों को रिवार्ड दे रहे हैं ताकि वो हिंदुओं को फँसाएँ। गोबिंदा कहते हैं कि मुस्लिम कट्टरपंथियों की ऐसी हरकत का शिकार सिर्फ हिंदू महिलाएँ नहीं है बल्कि हिंदू पुरुष भी हैं और पूरा का पूरा परिवार है। ऐसा लगता है कि ये प्रयास हो बांग्लादेश को हिंदू मुक्त करने का। ये लोग हिंदुओं को इस मुल्क से मिटाना चाहते हैं।

गोबिंदा और उनके संगठन पर हिंदुओं की आवाज बनने पर तमाम लांछन लगते हैं। लेकिन वो कहते हैं कि पिछले 35 सालों से उनका संगठन हिंदुओं के अधिकारों के लिए लड़ रहा है और लव जिहादियों का शिकार बनने से उन्हें रोक रहा है यही वजह है कि हिंदू विरोधी लोग इसे बंद कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि ये लोग हर संगठन को चुप कराना चाहते हैं ताकि बांग्लादेश को हिंदू मुक्त बना सकें… ये आरएसएस को बैन कराना चाहते हैं क्योंकि वो संस्था देश भर के हिंदुओं के अधिकारों के लिए काम कर रही है। ऐसे ही बांग्लादेश के इस्लामी पीएम मोदी के खिलाफ भी प्रोपगेंडा चलाते हैं क्योंकि वो हिंदुओं के अधिकार संरक्षित करने वाले वैश्विक नेता बनकर उभरे हैं।

दावा है कि बांग्लादेश में इस्लामी अपने तौर-तरीकों को हिंदुओं पर थोपने का प्रयास करते हैं। वहीं प्रशासन में बैठे कुछ लोग ऐसे हैं जो साफ तौर पर लव जिहाद को मानने से इनकार कर देते हैं। गोबिंदा इसे हिंदू घृणा का सबसे घटिया उदाहरण कहते हैं और बताते हैं कि सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे अभियानों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

इसके अलावा एक प्राइवेट इस्लामिक शरीया बैंक हैं जहाँ मुस्लिमों को कानूनी, आर्थिक और रोजगार संबंधित दिक्कतों के लिए सहायता मिलती है। ये बैंक कहता है कि ये मुस्लिमों के सामाजिक स्तर को बढ़ाने के लिए काम करते हैं लेकिन हकीकत में तो ये युवकों को कट्टरपंथी बना रहे हैं। देश के 64 जिलों में इन्होंने धर्मांतरण के काम के लिए कट्टरपंथी तैयार किए हुए हैं।

नोट: बांग्लादेश में फैलते लव जिहाद पर यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित हुआ है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

बंगाल भर्ती घोटाले पर ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, बताया ‘फ्रॉड’: CJI चंद्रचूड़ बोले – जनता का विश्वास चला जाता है तो कुछ नहीं बचता

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शिक्षक भर्ती एक ‘सिस्टमेटिक फ्रॉड’ है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों की कई और बंगाल सरकार की गड़बड़ी को लेकर खूब सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के भर्ती रद्द करने के फैसले पर रोक भी लगा दी है।

मंगलवार (7 मई, 2024) को पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार को आड़े हाथों लिया। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा, “सरकारी नौकरियों की वैसे ही इतनी कमी है, अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नहीं बचेगा। यह सिस्टेमिक फ्रॉड है। एक तो सरकारी नौकरियां हैं नहीं और सिस्टम में क्या बचेगा अगर उन पर भी दाग लगता है। आप इसको किस तरह रखेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को इस बात को लेकर डांट लगाई कि उसके पास इस भर्ती में शामिल हुए लोगों की परीक्षा का डाटा नहीं है। उसने कहा कि बंगाल सरकार को इसका डाटा डिजिटल तरीके से रखना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट को बंगाल सरकार ने बताया था कि उसके पास इस भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका की कॉपी नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सीबीआई को मामले आगे जाँच करने की अनुमति भी दे दी है।

कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई को किसी अधिकारी या अभ्यर्थी के विरुद्ध प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस भर्ती में जो लोग अवैध रूप से भर्ती हुए, उन्हें अपनी तनख्वाह लौटानी होगी। सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के शिक्षक भर्ती मामले पर दिए गए निर्णय के विरुद्ध याचिका लगाई हुई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस भर्ती में हुई गड़बड़ियों को देखते हुए अप्रैल में रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 25,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाए। हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो लोग इसके जरिए भर्ती हुए हैं, उन्हें सरकार से ली गई तनख्वाह भी 12% ब्याज के साथ लौटानी होगी। कोर्ट ने कहा था बंगाल शिक्षक भर्ती आयोग इसे दोबारा नए सिरे से चालू करे। इस मामले में सीबीआई की जाँच भी चल रही है। इस निर्णय के खिलाफ बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

‘7 तारीख के बाद निकाल देंगे जय श्री राम वालों का राम’: अखिलेश यादव के करीबी सपा नेता ने दी ‘चुनौती’, फिर कहा – मेरे समाज से बढ़कर कुछ नही

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अपमान के बाद बयानबाजी का दौर अपने चरम पर है। इन बयानों की कड़ी में अब गगन यादव सुर्खियाँ बने हुए हैं और ‘X’ प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी बताए जा रहे गगन कुछ लोगों से 7 तारीख तक चुप बैठने और उसके बाद जवाब देने का ऐलान कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने ‘जय श्री राम’ वालों का ‘राम’ निकाल देने का भी चैलेन्ज दिया। पुलिस इस वीडियो की जाँच कर रही है। बाद में उन्होंने अपने इस विवादित बयान पर सफाई दी है।

भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश हैंडल ने गगन यादव का यह बयान 7 मई को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। इस वीडियो में पहले गगन यादव की अखिलेश के साथ तस्वीरें और जनसम्पर्क कार्यक्रम आदि दिखाई दिए है। बाद में उन्होंने कहा, “7 तारीख को तीसरे चरण में जो चुनाव होने जा रहे हैं। मैनपुरी का चुनाव जब हो जाएगा उसके बाद हम बता देंगे। ताकतवर तो हम बहुत हैं बस सत्ता की ताकत नहीं है। लड़के हमारे भरे बैठे हैं। हम ही उन्हें रोक के रखे हैं और हम चाहेंगे कि रुके रहें वो।”

वीडियो के अंत में गगन यादव ने कहा, “ये जय श्री राम वाले ही हैं। निकाल देंगे इनका राम बाहर। रुक जाओ अभी।” गगन यादव के इस बयान पर आसपास मौजूद लोग हामी भरते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन दिया, “सपा नेता और अखिलेश यादव के करीबी गगन यादव ने एक बार फिर सपाई परंपरा के अनुसार रामभक्तों को अपमानित किया है। लेकिन ऐसे श्रीराम विरोधियों को जनता माफ नहीं करेगी”।

सोशल मीडिया पर कुछ ही देर में यह वीडियो और गगन यादव दोनों ही वायरल हो गए। कई X यूजर पुलिस से इस बयानबाजी के खिलाफ एक्शन लेने की माँग करने लगे। मैनपुरी पुलिस ने भी वीडियो का संज्ञान लिया और जाँच शुरू कर दी है।

अपने बयान पर विवाद बढ़ता देख कर गगन यादव सामने आ गए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर इस मामले को ले कर एक वीडियो जारी की है। वीडियो में गगन ने तमाम आरोप भारतीय जनता पार्टी पर मढ़ते हुए अपने बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, इस दौरान गगन ने कहा कि उनके लिए स्वाभिमान और अपने समाज से बढ़ कर कुछ भी नहीं है।

कैफे से लेकर सड़क तक चाकू घोंपता रहा साकिब, चीखती-चिल्लाती भागती रही बीवी: बंगाल में लोगों के सामने ही 22 साल की महिला की हत्या

कोलकाता में साकिब नाम के एक युवक ने अपनी 22 साल की पत्नी को सड़क पर दौड़ा कर मार दिया। उसे पहले एक कैफे के भीतर चाकू मारा गया और फिर जब वह बचने के लिए सड़क पर भागी तब उसे यहाँ दौड़ा कर चाकू मार दिया। हत्यारा पति पुराना अपराधी बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार (6 मई, 2024) शाम को कोलकाता के बेक बागान इलाके में स्थित एक कैफे में इर्तिका साकिब अपनी पत्नी अरीबा से मिलने आया था। थोड़ी देर बाद दोनों के बीच किसी मुद्दे को लेकर बहस चालू हो गई। थोड़ी देर बाद साकिब ने अरीबा पर हमला कर दिया।

साकिब ने एक चाकू से अरीबा के सर पर हमला किया जिससे वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। इसके बाद अरीबा अपनी जान बचाने के लिए कैफे से बाहर भागी। साकिब ने तब भी उस पर हमला करना नहीं छोड़ा। साकिब ने उसे सड़क पर दौड़ा कर चाकुओं से लगातार हमला किया और अरीबा की हत्या कर दी।

अरीबा को उसने लगातार मारना जारी रखा, इसके बाद आसपास के लोगों ने घायल अरीबा को बचाया। वह उसे अस्पताल लेकर गए जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। साकिब को घटनास्थल से पकड़ लिया गया। बताया गया कि आसपास खड़े लोगों ने साकिब को धुना भी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि साकिब और अरीबा की कुछ समय पहले शादी हुई थी लेकिन दोनों के बीच झगड़ा रहता था। साकिब पहले भी अरीबा को मारता पीटता था और इसको लेकर अरीबा ने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज करवाया था। साकिब को इस मामले में गिरफ्तार करके भेज दिया गया था।

उसे बाद में जमानत मिल गई थी। बताया गया कि साकिब इस कैफे में अरीबा से बातचीत करने आया था, इसी के बाद वह हमला करने लगा और अरीबा को मार दिया। पुलिस ने साकिब को गिरफ्तार कर लिया है, अरीबा का पोस्टमार्टम करवाया गया है।

मिशनरी स्कूल में काट ली बच्चे की शिखा, शिकायत करने गई माँ से कहा – जो करना है कर लो: नाम काटने की धमकी, तिलक लगाने पर भी डाँटा

उत्तर प्रदेश के बलिया में एक निजी स्कूल में हिन्दू छात्र की चोटी काटे जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र के टीके पर भी आपत्ति जताई गई। घटना एक मिशनरी स्कूल की बताई जा रही है जिसका नाम ‘सेंट मेरीज’ है। जब पीड़ित की माँ इसकी शिकायत करने पहुँची तो उनके साथ भी अभद्रता की गई। घटना गुरुवार (2 मई, 2024) की है। इस मामले में छात्र के पिता ने स्कूल की एक टीचर और प्रिंसिपल के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है।

स्कूल की प्रिंसिपल का नाम सिस्टर मर्सी दास है। शिकायत में स्कूल के अंदर धर्म-परिवर्तन जैसी साजिशें रची जाने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बलिया के थाना क्षेत्र रसड़ा का है। यहाँ के मरियमपुर राघोपुर इलाके में सेंट मेरीज स्कूल है जो कि ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित बताया जा रहा है। विवेकानंद सिंह का बेटा प्रभाकर इसी स्कूल में कक्षा 4 का छात्र है। वह सनातन परम्परा का पालन करते हुए चोटी रखता है। प्रभाकर की माँ अपने बेटे के माथे पर तिलक लगा कर स्कूल भेजती हैं। 2 मई को प्रभाकर हर दिन की तरह स्कूल गया। तब यहाँ क्लास टीचर बच्चों की हाजिरी लगा रहे थे। वो प्रभाकर सिंह की चोटी देख कर भड़क गए।

विवेकानंद का आरोप है कि क्लास टीचर ने उनके बच्चे को चोटी रखने पर डाँटा। उन्होंने कहा, “चुटिया बढ़ा कर आए हो यहाँ पर? चुटिया बढ़ा कर और टीका लगा कर यहाँ आना सख्त मना है।” आरोप है कि इसके बाद क्लास टीचर ने कैंची से प्रभाकर की चोटी काट दी। जब बच्चे की माँ को इसकी जानकारी हुई तो वो शिकायत करने स्कूल गईं। आरोप है कि तब बच्चे की माँ से क्लास टीचर ही नहीं बल्कि प्रिंसिपल ने भी अभद्रता की। आरोप है कि इन दोनों ने कहा, “जो करना है कर लो।” ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

शिकायत में पीड़ित ने आगे लिखा है कि प्रिंसिपल और क्लास टीचर द्वारा सोमवार को बच्चे के स्कूल आने पर उसे देख लेने की भी धमकी दी गई थी। पीड़ित के पिता विवेकानंद ने सेंट मेरीज स्कूल में हिन्दू धर्म के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने यहाँ छात्रों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की भी आशंका जताई है। शनिवार (4 मई, 2024) को पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल और क्लास टीचर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर IPC की धारा 295- A, 504 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। बलिया पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

वायरल हो रहे एक वीडियो में बच्चे ने बताया कि उनको स्कूल में बिना चोटी के आने के लिए कहा गया। बच्चे ने यह भी बताया कि उसका नाम भी काटने की धमकी आरोपितों द्वारा दी गई।