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बंगाल भर्ती घोटाले पर ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, बताया ‘फ्रॉड’: CJI चंद्रचूड़ बोले – जनता का विश्वास चला जाता है तो कुछ नहीं बचता

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शिक्षक भर्ती एक ‘सिस्टमेटिक फ्रॉड’ है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों की कई और बंगाल सरकार की गड़बड़ी को लेकर खूब सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के भर्ती रद्द करने के फैसले पर रोक भी लगा दी है।

मंगलवार (7 मई, 2024) को पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार को आड़े हाथों लिया। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा, “सरकारी नौकरियों की वैसे ही इतनी कमी है, अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नहीं बचेगा। यह सिस्टेमिक फ्रॉड है। एक तो सरकारी नौकरियां हैं नहीं और सिस्टम में क्या बचेगा अगर उन पर भी दाग लगता है। आप इसको किस तरह रखेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को इस बात को लेकर डांट लगाई कि उसके पास इस भर्ती में शामिल हुए लोगों की परीक्षा का डाटा नहीं है। उसने कहा कि बंगाल सरकार को इसका डाटा डिजिटल तरीके से रखना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट को बंगाल सरकार ने बताया था कि उसके पास इस भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका की कॉपी नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सीबीआई को मामले आगे जाँच करने की अनुमति भी दे दी है।

कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई को किसी अधिकारी या अभ्यर्थी के विरुद्ध प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस भर्ती में जो लोग अवैध रूप से भर्ती हुए, उन्हें अपनी तनख्वाह लौटानी होगी। सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के शिक्षक भर्ती मामले पर दिए गए निर्णय के विरुद्ध याचिका लगाई हुई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस भर्ती में हुई गड़बड़ियों को देखते हुए अप्रैल में रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 25,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाए। हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो लोग इसके जरिए भर्ती हुए हैं, उन्हें सरकार से ली गई तनख्वाह भी 12% ब्याज के साथ लौटानी होगी। कोर्ट ने कहा था बंगाल शिक्षक भर्ती आयोग इसे दोबारा नए सिरे से चालू करे। इस मामले में सीबीआई की जाँच भी चल रही है। इस निर्णय के खिलाफ बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

‘7 तारीख के बाद निकाल देंगे जय श्री राम वालों का राम’: अखिलेश यादव के करीबी सपा नेता ने दी ‘चुनौती’, फिर कहा – मेरे समाज से बढ़कर कुछ नही

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अपमान के बाद बयानबाजी का दौर अपने चरम पर है। इन बयानों की कड़ी में अब गगन यादव सुर्खियाँ बने हुए हैं और ‘X’ प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी बताए जा रहे गगन कुछ लोगों से 7 तारीख तक चुप बैठने और उसके बाद जवाब देने का ऐलान कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने ‘जय श्री राम’ वालों का ‘राम’ निकाल देने का भी चैलेन्ज दिया। पुलिस इस वीडियो की जाँच कर रही है। बाद में उन्होंने अपने इस विवादित बयान पर सफाई दी है।

भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश हैंडल ने गगन यादव का यह बयान 7 मई को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। इस वीडियो में पहले गगन यादव की अखिलेश के साथ तस्वीरें और जनसम्पर्क कार्यक्रम आदि दिखाई दिए है। बाद में उन्होंने कहा, “7 तारीख को तीसरे चरण में जो चुनाव होने जा रहे हैं। मैनपुरी का चुनाव जब हो जाएगा उसके बाद हम बता देंगे। ताकतवर तो हम बहुत हैं बस सत्ता की ताकत नहीं है। लड़के हमारे भरे बैठे हैं। हम ही उन्हें रोक के रखे हैं और हम चाहेंगे कि रुके रहें वो।”

वीडियो के अंत में गगन यादव ने कहा, “ये जय श्री राम वाले ही हैं। निकाल देंगे इनका राम बाहर। रुक जाओ अभी।” गगन यादव के इस बयान पर आसपास मौजूद लोग हामी भरते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन दिया, “सपा नेता और अखिलेश यादव के करीबी गगन यादव ने एक बार फिर सपाई परंपरा के अनुसार रामभक्तों को अपमानित किया है। लेकिन ऐसे श्रीराम विरोधियों को जनता माफ नहीं करेगी”।

सोशल मीडिया पर कुछ ही देर में यह वीडियो और गगन यादव दोनों ही वायरल हो गए। कई X यूजर पुलिस से इस बयानबाजी के खिलाफ एक्शन लेने की माँग करने लगे। मैनपुरी पुलिस ने भी वीडियो का संज्ञान लिया और जाँच शुरू कर दी है।

अपने बयान पर विवाद बढ़ता देख कर गगन यादव सामने आ गए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर इस मामले को ले कर एक वीडियो जारी की है। वीडियो में गगन ने तमाम आरोप भारतीय जनता पार्टी पर मढ़ते हुए अपने बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, इस दौरान गगन ने कहा कि उनके लिए स्वाभिमान और अपने समाज से बढ़ कर कुछ भी नहीं है।

कैफे से लेकर सड़क तक चाकू घोंपता रहा साकिब, चीखती-चिल्लाती भागती रही बीवी: बंगाल में लोगों के सामने ही 22 साल की महिला की हत्या

कोलकाता में साकिब नाम के एक युवक ने अपनी 22 साल की पत्नी को सड़क पर दौड़ा कर मार दिया। उसे पहले एक कैफे के भीतर चाकू मारा गया और फिर जब वह बचने के लिए सड़क पर भागी तब उसे यहाँ दौड़ा कर चाकू मार दिया। हत्यारा पति पुराना अपराधी बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार (6 मई, 2024) शाम को कोलकाता के बेक बागान इलाके में स्थित एक कैफे में इर्तिका साकिब अपनी पत्नी अरीबा से मिलने आया था। थोड़ी देर बाद दोनों के बीच किसी मुद्दे को लेकर बहस चालू हो गई। थोड़ी देर बाद साकिब ने अरीबा पर हमला कर दिया।

साकिब ने एक चाकू से अरीबा के सर पर हमला किया जिससे वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। इसके बाद अरीबा अपनी जान बचाने के लिए कैफे से बाहर भागी। साकिब ने तब भी उस पर हमला करना नहीं छोड़ा। साकिब ने उसे सड़क पर दौड़ा कर चाकुओं से लगातार हमला किया और अरीबा की हत्या कर दी।

अरीबा को उसने लगातार मारना जारी रखा, इसके बाद आसपास के लोगों ने घायल अरीबा को बचाया। वह उसे अस्पताल लेकर गए जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। साकिब को घटनास्थल से पकड़ लिया गया। बताया गया कि आसपास खड़े लोगों ने साकिब को धुना भी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि साकिब और अरीबा की कुछ समय पहले शादी हुई थी लेकिन दोनों के बीच झगड़ा रहता था। साकिब पहले भी अरीबा को मारता पीटता था और इसको लेकर अरीबा ने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज करवाया था। साकिब को इस मामले में गिरफ्तार करके भेज दिया गया था।

उसे बाद में जमानत मिल गई थी। बताया गया कि साकिब इस कैफे में अरीबा से बातचीत करने आया था, इसी के बाद वह हमला करने लगा और अरीबा को मार दिया। पुलिस ने साकिब को गिरफ्तार कर लिया है, अरीबा का पोस्टमार्टम करवाया गया है।

मिशनरी स्कूल में काट ली बच्चे की शिखा, शिकायत करने गई माँ से कहा – जो करना है कर लो: नाम काटने की धमकी, तिलक लगाने पर भी डाँटा

उत्तर प्रदेश के बलिया में एक निजी स्कूल में हिन्दू छात्र की चोटी काटे जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र के टीके पर भी आपत्ति जताई गई। घटना एक मिशनरी स्कूल की बताई जा रही है जिसका नाम ‘सेंट मेरीज’ है। जब पीड़ित की माँ इसकी शिकायत करने पहुँची तो उनके साथ भी अभद्रता की गई। घटना गुरुवार (2 मई, 2024) की है। इस मामले में छात्र के पिता ने स्कूल की एक टीचर और प्रिंसिपल के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है।

स्कूल की प्रिंसिपल का नाम सिस्टर मर्सी दास है। शिकायत में स्कूल के अंदर धर्म-परिवर्तन जैसी साजिशें रची जाने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बलिया के थाना क्षेत्र रसड़ा का है। यहाँ के मरियमपुर राघोपुर इलाके में सेंट मेरीज स्कूल है जो कि ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित बताया जा रहा है। विवेकानंद सिंह का बेटा प्रभाकर इसी स्कूल में कक्षा 4 का छात्र है। वह सनातन परम्परा का पालन करते हुए चोटी रखता है। प्रभाकर की माँ अपने बेटे के माथे पर तिलक लगा कर स्कूल भेजती हैं। 2 मई को प्रभाकर हर दिन की तरह स्कूल गया। तब यहाँ क्लास टीचर बच्चों की हाजिरी लगा रहे थे। वो प्रभाकर सिंह की चोटी देख कर भड़क गए।

विवेकानंद का आरोप है कि क्लास टीचर ने उनके बच्चे को चोटी रखने पर डाँटा। उन्होंने कहा, “चुटिया बढ़ा कर आए हो यहाँ पर? चुटिया बढ़ा कर और टीका लगा कर यहाँ आना सख्त मना है।” आरोप है कि इसके बाद क्लास टीचर ने कैंची से प्रभाकर की चोटी काट दी। जब बच्चे की माँ को इसकी जानकारी हुई तो वो शिकायत करने स्कूल गईं। आरोप है कि तब बच्चे की माँ से क्लास टीचर ही नहीं बल्कि प्रिंसिपल ने भी अभद्रता की। आरोप है कि इन दोनों ने कहा, “जो करना है कर लो।” ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

शिकायत में पीड़ित ने आगे लिखा है कि प्रिंसिपल और क्लास टीचर द्वारा सोमवार को बच्चे के स्कूल आने पर उसे देख लेने की भी धमकी दी गई थी। पीड़ित के पिता विवेकानंद ने सेंट मेरीज स्कूल में हिन्दू धर्म के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने यहाँ छात्रों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की भी आशंका जताई है। शनिवार (4 मई, 2024) को पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल और क्लास टीचर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर IPC की धारा 295- A, 504 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। बलिया पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

वायरल हो रहे एक वीडियो में बच्चे ने बताया कि उनको स्कूल में बिना चोटी के आने के लिए कहा गया। बच्चे ने यह भी बताया कि उसका नाम भी काटने की धमकी आरोपितों द्वारा दी गई।

चीन के अस्पताल में चाकूबाजी, 23 हताहत : ग्रामीण इलाके से आया हमलावर लोगों पर टूट पड़ा, तबाही के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

चीन में एक व्यक्ति ने चाकू हाथ में लेकर एक अस्पताल में जमकर कत्लेआम मचाया। इस हमले में 23 लोगों के हताहत होने की सूचना मिल रही है। इस घटना की पुष्टि चीनी मीडिया ने भी की है। बताया जा रहा है कि ये हमला मंगलवार (7 मई 2024) की सुबह करीब 11 बजे हुआ, जिसमें करीब दर्जन लोग घायल हो गए।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शुरुआती जानकारी में बताया था कि इस वारदात में कम से कम 10 लोग मारे जा चुके हैं या बुरी तरह से घायल हैं। हालाँकि स्थानीय मीडिया व अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 23 लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें से 2 की मौत हो गई, तो अभी मृतकों का आँकड़ा बढ़ भी सकता है। घायलों में कईयों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

ये हमला चीन के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में स्थित यून्नान प्रांत की है। यून्नान प्रांत की सीमाएँ लाओस, म्याँमार और वियतनाम से मिलती है। ये प्रांत चीन के सबसे गरीब प्रांतों में गिना जाता है। यहाँ से होकर बहने वाली मीकॉन्ग नदी से होकर चीन और पड़ोसी देशों में जमकर तस्करी होती है और इसे नशे के प्रसार का सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, ये हमना यून्नान प्रांत के झेनक्सियोंग काउंटी स्थित एक अस्पताल में हुआ। सरकारी समाचार साइट द पेपर ने अस्पताल की लॉबी में एक व्यक्ति द्वारा चाकू पकड़े हुए दूसरे व्यक्ति की ओर डंडा पकड़े हुए तस्वीरें प्रकाशित कीं, साथ ही घटनास्थल पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें भी प्रकाशित कीं।

पत्रकार मारियो नॉफाल ने एपी के हवाले से बताया है कि झाओटोंग शहर के झेन्जिओंग काउंटी में पीपल्स अस्पताल को निशाना बनाया गया है। शुरुआत में हमलावर फरार भी हो गया था, लेकिन चीन की पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया।

एक स्थानीय निवासी ने द पेपर को बताया, “यह हमला सुबह करीब 11 बजे हुआ… अभी भी ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि असलियत में कितने लोग घायल हुए।

बता दें कि चीन में हथियारों पर सख्त पाबंदी है। बंदूकों पर रोक के चलते ऐसे अपराधों की संख्या कम ही दिकती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में चीन में चाकूबाजी की घटनाएँ काफी बढ़ चुकी है। पिछले साल अगस्त में युन्नान में मानसिक बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति ने चाकू से हमला कर दिया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और सात अन्य घायल हो गए थे। उससे एक महीने पहले, दक्षिणी चीन के गुआंगडोंग प्रांत में एक किंडरगार्टन में चाकू से हमला कर छह लोगों की हत्या कर दी गई थी और एक घायल हो गया था।

चीन के युन्नान में मानव इतिहास की सबसे चाकू बाजी की घटना साल 2014 में हुई थी, जिसमें राजधानी कुनमिंग में शरणार्थियों ने चाकुओं से हमला कर दिया था। उसे चीन ने आतंकी घटना करार दिया था, जिसमें 33 लोगों की मौत हो गई थी, तो 133 लोग घायल हो गए थे। चाकू बाजी की सबसे बड़ी घटना

8 साल, 150 बार रेप, मामला निकला झूठा… ‘शादी का झाँसा देकर बलात्कार’ वाले केस कितने सही? प्रेम करना हो जाएगा मुश्किल, FIR होते अपराधी बन जाता है पुरुष

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मलयाली युवक के विरुद्ध दर्ज की गई बलात्कार की एक FIR को रद्द कर दिया। युवक पर उसकी पूर्व प्रेमिका ने 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। युवक का कहना था कि उसने कभी महिला से यौन सम्बन्ध बनाए ही नहीं और इसकी पुष्टि मेडिकल जाँच में भी हुई। इस तरह यह मलयाली युवक बलात्कार के आरोप के दाग से मुक्ति पा सका। इस मामले की गहराई में जाने पर पता चला कि यह 2016 से ही चला आ रहा था, ऐसे में उस युवक को 8 वर्षों तक यह आरोप झेलना पड़ा।

उपरोक्त बताए गए मामले में जब युवक ने हाई कोर्ट के सामने कथित पीड़िता की मेडिकल जाँच रखी तो पता चला कि वह ‘वर्जिन’ थी। यानी जिस महिला के साथ कभी यौन संबंध बनाए ही ना गए हों, उसने एक पुरुष पर 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। इससे भी ज्यादा हास्यास्पद यह है कि यह सिद्ध होने के बाद भी हाई कोर्ट ने उस युवक को कोई राहत नहीं दी जिस पर बलात्कार का आरोप था। कोर्ट ने महिला के बयान को ही पत्थर की लकीर माना।

‘150 बार बलात्कार’, ‘शादी का झांसा देकर किया रेप’, ‘महिला को धोखे में रख करता रहा रेप’ जैसी हेडलाइन्स बीते कुछ सालों में काफी सुनी गई हैं। यदि आप कोई भी अखबार उठाएँगे तो रोज आपको ऐसे 2-3 मामले मिलेंगे ही। नारी सशक्तिकरण के लिए कानून और नारियों के पक्ष में न्यायिक निर्णयों के चक्कर में पुरुष ऐसे मामले में अपने आप को दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं। सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर इस बात पर चर्चा होती है कि क्या किसी महिला के आरोप भर लगा देने से कोई पुरुष बलात्कारी हो जाएगा। इससे कई प्रश्न खड़े हुए हैं।

तय करनी होगी बलात्कार की परिभाषा

भारत एक परम्पराओं वाला देश है। हमारे समाज में बड़े पैमाने पर शादी से पहले लड़का-लड़की के यौन सम्बन्ध बनाने को सही नहीं समझा जाता। लेकिन बढ़ते आधुनिकीकरण के चलते यह भावना नेपथ्य में चली गई है। सामान्य रूप से यदि बलात्कार की बात की जाए तो यदि कोई पुरुष किसी महिला के साथ जोर जबरदस्ती से, उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन सम्बन्ध बनाता है, तो इसे बलात्कार माना जाता है। यह महिला कोई भी हो सकती है, किसी पुरुष की प्रेमिका भी हो सकती है।

लेकिन अगर दो वयस्क महिला-पुरुष आपस में यौन संबंध बनाते हैं और बाद में उनमें कोई लड़ाई-झगड़ा होता है, तो क्या इसे बलात्कार माना जाएगा। यहकि तब, जब महिला यौन सम्बन्ध बनाने के दौरान पुरुष के साथ पूरी तरह से सहमति में रही हो।

यदि कोई पुरुष यह जाने कि जिस महिला के साथ वह प्रेमवश आज यौन संबंध बना रहा है, वह भविष्य में बलात्कार माना जाएगा, तो क्या वह ऐसा करेगा। यदि महिला ने यौन संबंध बनाने के समय सहमति दे दी है, इस पूरे मामले में शामिल है, तो भला एक समय के बाद वह कैसे यह जान पाएगी कि यह बलात्कार था।

क्या सिर्फ इस आधार पर कि महिला अब उक्त पुरुष के साथ संबंध नहीं रखना चाहती या गुस्सा है, के कारण उसकी पूर्व में यौन संबंध के लिए दी गई सहमति को वापस लिया माना जाए और इसे बलात्कार का नाम दिया जाए। महिला के एक समय पर राजी ख़ुशी यौन संबंध बनाने और उसे बाद में बलात्कार का नाम देने को लेकर कोर्ट को यह तय करना होगा कि इसे क्या माना जाए, इसे बलात्कार की श्रेणी में रखा जाए या नहीं। यह मामला तो संबंध विच्छेद का होता है।

‘शादी का झांसा देकर रेप’ जैसी शिकायतों की भी हो गहराई से जाँच

आजकल सामने आ रहे बलात्कार के मामलों में सबसे अधिक यह सुनने को मिलता है कि एक पुरुष ने शादी का झांसा देकर किसी महिला से कई वर्षों तक रेप किया। बाद में पुरुष अपने वादे से मुकर गया। इन मामलों की भी गहराई से जाँच की आवश्यकता है।

इसमें मूल प्रश्न है कि यदि शादी के वादे के आधार पर ही यौन सम्बन्ध बनाए जाने थे तो इसको लेकर महिला को भी विचार करना चाहिए था। दूसरा प्रश्न उठता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से किए गए वादे से मुकरता है तो यह मामला धोखाधड़ी का बनता है ना कि बलात्कार का।

इस मामले में भी वही मूल प्रश्न आता है कि क्या महिला ने पहले यौन संबंध बनाने की सहमति दी और बाद में जब बात नहीं बनी तो संबंध को बलात्कार का नाम दे दिया। यानि क्या यौन सम्बन्धों के लिए दी गई सहमति बाद में वापस ली जा सकती है।

इनमें से कई मामलों में ऐसा होता है कि जिस महिला ने पुरुष के खिलाफ बलात्कार की FIR करवाई होती है, वह उसी से विवाह कर लेती है। ऐसे में प्रश्न उठाया जाना चाहिए कि क्या कोई महिला अपने बलात्कारी से विवाह कर सकती है, और यदि कोई महिला बलात्कारी से विवाह करती है तो फिर वह व्यक्ति बलात्कारी क्यों माना जाए।

शादी का झांसा देकर बलात्कार के मामलों में किसी पुरुष को अपराधी घोषित करने से पहले इस बात की जाँच होनी चाहिए कि महिला ने यह आरोप किस आधार पर लगाए हैं। कहीं वह सिर्फ इस बात से गुस्सा तो नहीं कि उसकी उक्त पुरुष से शादी नहीं हो पाई या उनके रिश्ते में खटास आ गई है।

दूसरी बात यह भी है कि भारत में महिलाओं को झांसा दिए जाने को लेकर विचार भी करना होगा। झांसा आर्थिक मामले में दिया जा सकता है, शादी एक भावनात्मक वादा है, इसका झांसा कैसे दिया जा सकता है। महिलाओं को भी किसी भी पुरुष से मात्र शादी के वादे बात के आधार पर यौन संबंध बनाने को लेकर सतर्क होना होगा।

सिर्फ FIR/बयान के आधार पर ना मान लिया जाए पुरुष को अपराधी

बलात्कार के आरोप लगाने के मामले में अक्सर ऐसा सामने आता है कि मात्र आरोप भर लगने से ही पुरुष को अपराधी घोषित कर दिया जाता है। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है। कई मामलों में ऐसे पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है और उन्हें दुनिया उन्हें अपराधी की नजर से देखती है।

कई शिकायतों में कहा जाता है कि पुरुष ने महिला का 100 बार बलात्कार किया, लगातार तीन-चार साल बलात्कार करता रहा। सामान्य पाठक जब ऐसी खबरें पढ़ता है तो वह आरोपित की दुर्दांत छवि मन में बनाता है। ऐसा पाठक सोचता है कि इस पुरुष ने 3 साल महिला को परेशान किया। असल में मामला यह होता है कि महिला-पुरुष इस अवधि के दौरान प्रेम संबंध में रहे होते हैं और तब यौन संबंध आपसी सहमति से बन रहे होते हैं, इसे बाद में बलात्कार के रूप में पेश कर दिया जाता है।

सिर्फ FIR या महिला के बयान के आधार पर ही पुरुष को अपराधी मान लेने से जो हानि उसे होती है, उसके निर्दोष साबित होने के बाद इसकी भरपाई नहीं हो पाती है। भारत में कोई तब तक हत्या का भी अपराधी नहीं माना जाता जब तक कोर्ट इस बात को लेकर उसे दोषी ना सिद्ध कर दे लेकिन बलात्कार के मामलों में पहले ही पहले ही पुरुषों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। कई पुरुष ऐसे मामलों में कई वर्षों की सजा भी काट लेते हैं।

हाल ही में बरेली में एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ एक महिला ने 2019 में एक पुरुष को बलात्कार और अपहरण के फर्जी मामले में फंसा दिया था। इस व्यक्ति को 4 साल से अधिक की सजा भी काटनी पड़ी। बाद में महिला अपने आरोपों से पलट गई। कोर्ट ने महिला को उतने ही दिनों की सजा सुनाई जितनी सजा बेकसूर पुरुष को काटनी पड़ी थी।

झूठी FIR पर हो कार्रवाई, मुआवजे का हो प्रावधान

बलात्कार के मामले इतने जघन्य होते हैं और इनमें कार्रवाई का दबाव पुलिस पर अधिक होता है। ऐसे में कई मामलों में बिना जाँच के ही आरोपितों को पकड़ लिया जाता है, उन पर कार्रवाई की जाती है। इसका फायदा उठा कर कई महिलाओं ने इसे एक धंधा बनाया है। वह पहले किसी पुरुष से दोस्ती और मेल मिलाप बढ़ाती हैं, इसके बाद उसके खिलाफ बलात्कार के मामले में FIR दर्ज करवा देती हैं, ऐसा ना करने के लिए पैसे माँगे जाते हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर की एक ऐसी ही महिला को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था जो कि अमीर युवकों से पहले मेलजोल बढ़ाती थी। इसके बाद उनके खिलाफ बलात्कार की FIR करवा देती थी, उनसे पैसे ऐंठती थी। इसका नाम सोनिया था, इसने आधे दर्जन से ऐसे फर्जी मामले दर्ज करवाए थे। यदि कोर्ट बलात्कार के मामले में कड़ी सजा दे रहा है तो उसे यह भी पक्का करना होगा कि जो महिलाएँ इन कानूनों का फायदा उठा रही हैं, उनको सजा दिया जाए। उनसे जुर्माना वसूल किया जाए और उन पुरुषों को दिया जाए जिनकी प्रतिष्ठा धूमिल किया जाए।

‘पतंजलि’ केस में अब IMA ही फँस गया: जिस नियम के तहत बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई अब वही विवाद में, पुनर्विचार करेगी केंद्र सरकार

अवैध विज्ञापन के मामले में ‘पतंजलि आयुर्वेद’ और ‘दिव्य फार्मेसी’ की तरफ से मंगलवार (7 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में उन अख़बारों को पेश किया गया, जिनमें बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनियों की तरफ से माफ़ीनामा जारी किया गया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो राज्यों की लाइसेंसिंग ऑथोरिटीज और केंद्र सरकार द्वारा भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के संबंध में उठाए जा रहे क़दमों का विश्लेषण करेगी। सुप्रीम कोर्ट इस दौरान अख़बार के उन पन्नों को देख कर संतुष्ट हुआ, जिनके माध्यम से माफ़ीनामा जारी किया गया था।

इससे पहले कई बार बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत पेशी के दौरान फटकार लगाया गया था। इस दौरान ‘पतंजलि’ की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के अध्यक्ष के बयान को लेकर अप्लीकेशन (IA) दायर कर दिया है। उन्होंने इसे हानि पहुँचाने के उद्देश्य से की गई अपमानजनक टिप्पणी करार दिया। IMA अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एलोपैथिक डॉक्टरों पर टिप्पणी पर सवाल उठाए थे।

मुकुल रोहतगी ने इसे गंभीर मामला बताया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि अगर IMA आरोपों पर जवाब नहीं देता है तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने ध्यान दिलाया कि ये बयान सुनवाई से 1 दिन पहले दिया गया था, ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि अनजान/बेखबर होने के कारण ये टिप्पणी की गई। वहीं भारत सरकार की तरफ से ASG केएम नटराज ने बात रखी। उन्होंने बताया कि ‘ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक्स रूल्स’ के नियम संख्या 170 को कई उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है।

उन्होंने बताया कि 2018 में नियम संख्या 170 की अधिसूचना जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ 8-9 याचिकाएँ दायर हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस नियम के तहत कोई कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था, बाद में केरल हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसे दोहराया। उन्होंने इस दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय का वो आदेश भी पढ़ कर सुनाया, जिसमें इस कानून के नियम-170 पर पुनर्विचार के लिए केंद्र सरकार को कहा गया था।

इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि भारत सरकार को इस सलाह का फायदा मिला। वहीं जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पूछा कि केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेने के लिए कहा गया था, फिर भी ये नियम यहाँ पर है। उन्होंने पूछा कि बिना कोई निर्णय लिए बिना आप कड़ी कार्रवाई न करने को कैसे कह सकते हैं? वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि ये एक अच्छा कानून है, जब तक इसे हटाया नहीं जाता, ये लागू है। केंद्र सरकार ने राज्यों को पत्र भेज इसके तहत एक्शन न लेने को कहा था। ASG ने इस कानून पर पुनर्विचार के लिए समय माँगा।

राम मंदिर का दर्शन करने पर किया जाता था टॉर्चर… कॉन्ग्रेस छोड़ BJP में शामिल हुईं राधिका खेड़ा, अभिनेता शेखर सुमन भी साथ आए

कॉन्ग्रेस की पूर्व महिला नेता राधिका खेड़ा ने हाथ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके साथ बॉलीवुड अभिनेता शेखर सुमन ने भी बीजेपी की सदस्यता ली। साथ ही राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपनी इच्छा जाहिर की।

पिछले दिनों काफी चर्चा में रही राधिका ने कहा, “सभी को जय श्री राम! मुझे कॉन्ग्रेस में सनातनी, हिंदू होने की सजा मिली। आज की कॉन्ग्रेस राम और हिंदू विरोधी है। मैं पीएम मोदी अमित शाह, जेपी नड्डा को धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने मुझे मौका दिया। यह राष्ट्र निर्माण में योगदान का हिस्सा बनने का अवसर है।”

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में मोदी जी की गारंटी वाली सरकार है, जिसके संरक्षण में मैं आज यहाँ तक पहुँच पाई। वरना जिस तरीके से राम भक्त होने के लिए, रामलला के दर्शन करने के लिए कौशल्या माता की धरती पर मेरे साथ जो दुर्व्यवहार किया गया। जिस तरीके का सलूक किया गया। मैं आपके पास नहीं पहुँच सकती थी। कॉन्ग्रेस पार्टी में मुझे हिंदू, सनातनी और राम भक्त होने की सजा मिली। आज मैं बोलते हुए भी काँप रही हूँ।”

इसी तरह शेखर सुमन ने कहा, “कल तक मुझे ये नहीं मालूम था कि आज यहाँ बैठूँगा क्योंकि जिंदगी में बहुत कुछ जाने-अनजाने होता है। कभी-कभी आप अनजान रहते हैं कि आपका भविष्य क्या है। ऊपर से एक आमद होती है और आप उस आदेश का पालन करते हैं। मैं एक बहुत ही सकारात्मक सोच के साथ यहां आया हूं। सबसे पहले तो मैं ईश्वर का शुक्रिया करूंगा कि उन्होंने मुझे यहां तक आने का आदेश दिया।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद राधिका खेड़ा ने छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं पर उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के नेता सुशील आनंद सहित उनके दो साथियों को लेकर कहा है कि इन लोगों ने उनके साथ रायपुर के ऑफिस में अभद्रता की थी। इतना ही नहीं ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान तो ये तक पूछा था कि वो होटल के किस कमरे में ठहरी हैं और उन्हें पीने के लिए कौन सी शराब भेजी जाए।

बड़े भाई अब्दुल ने नाबालिग हिंदू लड़की को फँसाया, कई बार रेप कर छोड़ा… फिर छोटे भाई इरफान ने रेप किया, किडनैप कर नमाज पढ़वाई, कबूल करवाया इस्लाम

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में जबरन धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न का एक मामला सामने आया है जिसमें दो मुस्लिम भाइयों ने एक नाबालिग हिंदू लड़की के साथ बार-बार बलात्कार किया और उसे रोजा रखने और इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया। लव जेहाद के इस केस में पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ पुलिस की शरण ली है और बताया है कि पिछले 2 साल से अब्दुल रहमान और इरफान नाम के मुस्लिम भाईयों ने उसकी जिंदगी नर्क में तब्दील कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात चित्रकूट के कर्वी के पास स्थित तरौंहा गाँव की है। पीड़िता ने बताया है कि साल 2022 में जब वो दसवीं कक्षा में थी, तब चौगलिया-तरौंहा का रहने वाला अब्दुल रहमान रोज उसका पीछा करता था। दोस्ती के लिए कहने पर जब वो नहीं मानी, तो अब्दुल रहमान ने उसे धमकाया। अब्दुल रहमान हिंदू बच्ची का स्कूल से लेकर मंदिर तक.. हर जगह पीछा करता था।

पीड़ित बच्ची ने बताया कि उसने डर की वजह से अब्दुल की हरकतों के बारे में अपने परिवार को नहीं बताया, जिसकी वजह से उसका मनोबल बढ़ गया। उसने धमकाकर पीड़िता को अपने घर में बुलाया और रेप किया। इसके बाद अब्दुल उसे ब्लैकमेल करके उसकी अस्मत लूटता रहा। अब्दुल ने इस बीच किसी अन्य महिला से निकाह कर लिया। लेकिन इसके बाद अब्दुल का भाई इरफान लड़की का पीछा करने लगा। उसने ये कहकर लड़की को ब्लैकमेल किया कि उसे अब्दुल और उसके बीच के संबंधों के बारे में पता है। इरफान ने लड़की की मजबूरियों का फायदा उठाते हुए कई बार उसके साथ रेप किया। इसके साथ ही इरफान ने लड़की के साथ ही उसके पूरे परिवार को बर्बाद करके धमकी दी।

यही नहीं, इरफान ने उससे निकाह का झाँसा दिया और 30 मार्च 2024 को उसे भगाकर पुणे ले गया। इसके बाद वो उसे जबरदस्ती मस्जिद ले जाने लगा। यही नहीं, वो उसे बुर्का भी पहनाने की कोशिश करता, लेकिन लड़की ने मना किया, तो इरफान ने उसके बाल काट दिए। पीड़िता ने बताया कि इरफान ने अपने भाई अब्दुल की बीवी रुक्सार से उसकी फोन पर बात कराई और फिर उसे इस्लाम में कन्वर्ट करा दिया गया। इन सबसे तंग आकर उसने पुलिस की मदद ली है। पीड़िता का कहना है कि अब्दुल रहमान और इरफान पिछले 2 साल से उसके साथ ज्यादती कर रहे हैं।

‘अमित शाह का डीपफेक वीडियो शेयर करने वालों पर फ़िलहाल न हो कड़ी कार्रवाई’: तेलंगाना हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को राहत, आरक्षण पर फैलाया था झूठ

भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के डीपफेक वीडियो मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली और हैदराबाद पुलिस को आदेश दिया है कि वो इसे शेयर करने वालों पर फ़िलहाल कोई कड़ी कार्रवाई न करें। हालाँकि, शुक्रवार (3 मई, 2024) को जारी हुए इस आदेश में पुलिस को मामले की जाँच की छूट दी गई है। केस पर अगली सुनवाई 12 जून, 2024 को तय की गई है। हाईकोर्ट ने इस केस के वादी को भी नोटिस जारी किया है।

‘बार एन्ड बेंच’ के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2024 को दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की थी। इस FIR में तहरीर किसी शिंकू शरण द्वारा दी गई थी। शिंकू शरण ने मन्ने सतीश, आशमा तस्लीम, अम्बाला शिव कुमार, पट्टम नवीन, कोया गीता और पंडयाला वामशी कृष्णा को नामजद किया था। ये सभी कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य बताए जा रहे हैं। इन पर गृहमंत्री अमित शाह का एक डीप फेक वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल करने का आरोप लगाया गया था।

वायरल हुए इस डीपफेक वीडियो के साथ आरोपितों ने यह अफवाह उड़ाने की कोशिश की कि अमित शाह SC, ST और OBC का आरक्षण खत्म करने की बात कह रहे हैं। हालाँकि पुलिस जाँच के साथ तमाम फैक्ट चेक में यह वीडियो एडिटेड पाया गया था। तब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सभी आधे दर्जन आरोपितों के खिलाफ जाँच और जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी थी। इन सभी कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ हैदराबाद पुलिस की साइबर सेल ने भी एक केस दर्ज किया।

यह FIR भाजपा नेता जी पेरेन्दर रेड्डी की तहरीर पर दर्ज हुई थी। केस दर्ज करने के बाद हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार (3 मई, 2024) को तेलंगाना में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। एक स्थानीय अदालत ने इन सभी आरोपितों को जमानत दे दी। जमानत में 10-10 हजार के 2 जमानतदार लगे। इसके अलावा इन आरोपितों को सोमवार व शुक्रवार को जाँच अधिकारी के आगे सामने पेश होने का भी आदेश दिया गया था। आखिरकार आरोपितों ने हाईकोर्ट की शरण ली।

इन सभी आरोपितों ने एडवोकेट थूम श्रीनिवास के माध्यम से तेलंगाना के प्रमुख व गृह सचिव, पुलिस कमिश्नर हैदराबाद, साइबर क्राइम ब्रंच हैदराबाद SHO, वादी जी पेरेन्दर रेड्डी, दिल्ली की FIR के वादी शिंकू और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के SHO को पक्षकार बनाया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी विजयसेन रेड्डी की बेंच में हुई। दोनों पक्षों को सुन कर हाईकोर्ट ने दिल्ली और हैदराबाद पुलिस को आरोपितों के खिलाफ फिलहाल कोई कड़ी कार्रवाई न करने के निर्देश दिए। हालाँकि, अदालत ने पुलिस को जाँच जारी रखने की छूट दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून तय की गई है।