उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। खुद को प्रिंस बताकर फैज़ ने एक हिन्दू लड़की से दोस्ती की। बाद में पीड़िता को जामा मस्जिद के पास बुलाकर रेप किया। आरोपित ने पीड़िता को जबरन दिल्ली भी ले जाने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार (3 मई 2024) को FIR दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।
यह घटना मुरादाबाद के थाना क्षेत्र मुगलपुरा की है। शुक्रवार को यहाँ एक हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में मुरादाबाद के छजलैट निवासी पीड़िता ने बताया कि फेसबुक पर उसकी जान-पहचान प्रिंस नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। थोड़े समय बाद दोनों में दोस्ती हो गई। 28 अप्रैल 2024 को प्रिंस ने उसे मिलने के लिए बुलाया।
उक्त संबंध में क्रमशः थाना मूंढापाण्डे एवं थाना मुगलपुरा पर मुकदमा पंजीकृत है, अन्य विधिक कार्यवाही प्रचलित है ।
यहाँ प्रिंस पीड़िता को जामा मस्जिद क्वार्टर के पास लेकर गया और पीड़िता से रेप किया। पीड़िता जैसे-तैसे प्रिंस बने फैज़ के चंगुल से निकल पाई। शिकायत में आगे बताया गया है कि जब वो फैज़ के चंगुल से निकलकर भाग रही थी, तब उसे रोक लिया गया। उसने पीड़िता को घर तक छोड़ आने का झाँसा दिया। फैज़ लड़की को घर ले जाने के बजाय धोखे से बस में बैठाकर दिल्ली ले जाने लगा।
आखिरकार पीड़ित लड़की खुद को फँसता देखकर घबरा गई और शोर मचाने लगी। लड़की की आवाज सुनकर आसपास के लोग वहाँ पहुँच गए। लोगों के आता देखकर फैज़ वहाँ से भाग निकला। पीड़िता की मदद करने वालों ने उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। अपनी शिकायत में पीड़िता ने फैज़ पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
आरोपित फैज़ मुगलपुरा थानाक्षेत्र के जामा मस्जिद क्वार्टर के पास रहता है। पुलिस ने उसे नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 376 के तहत कार्रवाई की गई है। मुरादाबाद पुलिस के मुताबिक मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ पर पत्रकार नाविका कुमार और सुशांत सिन्हा को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि काशी में अंतिम चरण में चुनाव है, उनकी पार्टी ने एक बार फिर उन्हें वहाँ से उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने बताया कि 2014 में जब वो पहली बार काशी गए तो नामांकन के बाद उन्होंने कहा था, “ना मैं यहाँ आया हूँ, न मुझे किसी ने भेजा है, मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है।” बकौल पीएम मोदी, आज उन्हें लगता है कि माँ गंगा ने उन्हें गोद लिया है।
भावुक पीएम मोदी ने कहा कि 10 वर्षों में वाराणसी से उनका ऐसा नाता जुड़ गया है कि वो कहीं भी ‘मेरी काशी’ बोलते हैं, एक माँ-बेटे का जो रिश्ता होता है। कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र पर झूठ बोलने के आरोप पर पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार CAA का कानून लेकर आई, सब कुछ साफ़-साफ़ कहा गया और लिखा गया, सीधा-सीधा वो कानून नागरिकता देने के लिए आया, उसमें नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के झूठ पर पूछा कि क्या आपने कभी उसका फैक्ट-चेक किया?
Inheritance टैक्स पर पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के किसी भी विकसित देश में ऐसा नहीं होता है, कॉन्ग्रेस नेताओं के भाषणों में बार-बार ये बात आ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का है, कॉन्ग्रेस संपत्ति ले लेगी तो उन्हीं लोगों को देगी। बकौल पीएम मोदी, वो को कॉन्ग्रेस खुल कर इस बार बेनकाब कर रहे हैं इसीलिए वो बौखलाए हुए हैं, ये दोगलापन है।
पीएम मोदी ने कहा कि राम मंदिर, अनुच्छेद-370 और UCC का जिक्र भाजपा अपने घोषणा-पत्र में करती थी, अंतिम पंक्ति रखती थी तब भी अख़बार घोषणा-पत्र में यही रखते थे और कहा जाता था कि मंदिर बनाने की तारीख़ नहीं बताएँगे। उन्होंने कहा कि मीडिया ने कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र का वैसा पोस्टमॉर्टम नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब ‘संविधान दिवस’ मनाने की बात की गई तो मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया। बकौल पीएम मोदी, संविधान पर स्कूल-कॉलेजों में चर्चा हो, ये आम आदमी से जुड़े।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि कैसे संविधान के 60 वर्ष पूरे होने पर बतौर CM उन्होंने हाथी पर संविधान रख कर यात्रा निकाली और खुद पैदल चले। उन्होंने पूछा कि भाजपा के घोषणा-पत्र में या उनके भाषण में कहीं संविधान बदलने की बात लिखी है क्या? जबकि खुद के सवाल पर कॉन्ग्रेस कहती है कि हमारे घोषणा-पत्र में फलाँ चीज नहीं लिखी है। पीएम मोदी ने कहा कि ये दोगलापन नहीं चलेगा। मजहब के आधार पर आरक्षण न आने देने के अपने वादे को भी पीएम मोदी ने दोहराया।
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान सभा ने ही ये तय किया था कि मजहब के आधार पर आरक्षण देश के भविष्य के लिए ठीक नहीं है, जबकि छूत-अछूत और भेदभाव के कारण उसका प्रायश्चित करना ज़रूरी था। बकौल पीएम मोदी, संविधान सभा में बैठे सभी सनातनी थे, नेहरू जैसे कुछ अपवाद हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि डॉ राजेंद्र प्रसाद टीका लगा कर बैठते थे। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि संविधान की भावना के विरुद्ध वो नहीं जाएँगे, इसका मतलब ये नहीं कि मुस्लिमों को आरक्षण नहीं मिलेगा।
पीएम मोदी ने EWS की याद दिलाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों को इसके तहत आरक्षण मिला और उसमें मुस्लिम समाज के भी लोग हैं। बकौल पीएम मोदी, वो ये कह नहीं रहे कि मुस्लिमों को नहीं देंगे, लेकिन मजहब के आधार पर रचना नहीं होनी चाहिए। दलितों एवं जनजातीय समाज के संबंध में उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर ने सही निर्णय किया, इसके पीछे हजारों वर्षों का विरोध है। उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी घोषणा-पत्र में राम मंदिर, 370 और UCC रहता था, अब इनमें से जो हो गया है वो नहीं रहेगा।
पीएम मोदी ने कहा, “जब 100% की बात की जाती है तो ये समाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की गारंटी है। हमने 4 करोड़ घर बनाए। 3 करोड़ और घर देने की योजना हम बना रहे हैं। मैं चुनावी सभाओं में कहता हूँ कि किसी को घर या नल योजना का लाभ नहीं मिला है तो वो उन्हें लिख कर भेज दें, उनके तीसरे टर्म में ये मिल जाएगा। न हम इस्लाम के विरोधी हैं न मुस्लिम के, हमारा ये काम नहीं है। नेहरू के जमाने से गाली देने का ये नैरेटिव बना हुआ है। उन्होंने भय का वातावरण बना कर अपनी दुकान चलाई है। जब मैंने ‘तीन तलाक’ खत्म किया, ‘आयुष्मान कार्ड’ दिया और कोरोना की वैक्सीन दी तो मुस्लिमों को लगता है कि बिना भेदभाव काम हो रहा है।”
मुस्लिम विरोधी छवि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार का नेतृत्व करते हुए उन्हें 25 वर्ष हो गए, गुजरात में 80-90 के दशक में खूब दंगे होते थे लेकिन 2002 के बाद दंगे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वो ये पहली बार मुस्लिम समाज और इसके पढ़े-लिखे लोगों से कह रहे हैं कि वो आत्ममंथन करें, सोचें, देश आगे बढ़ रहा है और अपने समाज में अगर कोई कमी महसूस होती है तो क्या कारण है कि कॉन्ग्रेस के ज़माने में आपको सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला, आपकी ये दुर्दशा क्यों ही?
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भर में मुस्लिम समाज बदल रहा है, वो खाड़ी देशों में जाते हैं तो उन्हें और भारत को इतना सम्मान मिलता है, सऊदी अरब में योग पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ये न सोचे कि किसी को सत्ता से हटाना है, अपने बच्चों का भविष्य सोचे। उन्होंने बताया कि अरब मुल्कों में अमीरों ने भी बताया कि उनके बच्चे योग सीखने जाते हैं। उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि कोई समाज बंधुआ मजदूर बनके जिए, उन्हें कोई डराता रहे। उन्होंने कहा कि आप भाजपा कार्यालय में जाकर बैठिए, कब्ज़ा कीजिए, कौन रोकेगा, कौन निकालेगा आपको?
अमित शाह का आरक्षण पर फर्जी वीडियो वायरल होने के मुद्दे पर ‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ’ नवभारत के पत्रकारों नाविका कुमार और सुशांत सिन्हा के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के चुनाव में अमिताभ बच्चन के आवाज़ में डीपफेक वीडियो निकाला हुआ, वो रात भर सो नहीं पाए और वो रात में ही FIR कराना चाहते थे और कह रहे थे कि उनका राजनीति से अब कोई लेना-देना नहीं है, वो दूर से ही प्रणाम करते हैं। पीएम मोदी ने बताया कि G20 समिट व अन्य कार्यक्रमों में वो डीपफेक वीडियो के संकट पर बात कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसे कंटेंट पर लेबल होना चाहिए कि इसमें AI का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस आत्मविश्वास खो चुकी है और जनता के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है, CAA से लेकर किसान आंदोलन और सभी सरकारी निर्णयों में वो झूठ फैलाते हैं क्योंकि उनको लगता है कि ये तो होता ही चला जा रहा है और वो रोक सकते हैं तो कन्फ्यूजन पैदा करते हैं, ताकि लोगों को भड़का सकें। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस को फर्जी वादों-नारों पर निर्भर बताते हुए कहा कि फर्क वीडियो के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश नहीं चलेगी, जमीनी स्थिति बिलकुल अलग है।
पीएम मोदी ने कहा कि EVM अगर उनके हाथ में होता तो वो इतनी मेहनत क्यों करते, वो दिन रात टूट रहे हैं। तानाशाह होने के आरोपों, हिटलर से तुलना और सरकारी एजेंसियों पर नियंत्रण पर पीएम मोदी ने मीडिया से आग्रह किया कि वैज्ञानिक तरीके से इस विषय का विश्लेषण किया जाए, तानाशाही के 100 पॉइंट्स बना कर कॉन्ग्रेस-भाजपा की तुलना की जाए कि किसने क्या किया। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू ने पहला संविधान संशोधन प्रेस पर पाबन्दी लगाने के लिए किया, इंदिरा गाँधी ने जो गाना पसंद नहीं आया तो मजरूह सुल्तानपुरी को जेल में बंद किया, किशोर कुमार को बैन किया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला, नौसेना के जहाज पर पिकनिक मनाई जाती थी, नसबंदी कराई गई, गायत्री देवी के साथ जुल्म हुआ, कई राज्य सरकारें बर्खास्त की गईं।
PM मोदी ने कहा कि 100 में से एक बिंदु पर भी भाजपा पर आरोप सही नहीं निकलेंगे, हम ये सह रहे हैं इसका ही मतलब है कि हमारे रगों में लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि 10 वर्षों से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बेदाग़ सरकार चला रहे हैं, फिर भी वो बिना एक शब्द बोले गाली सह रहे हैं तो इससे बड़ा लोकतंत्र का सबूत क्या हो सकता है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि उनकी माँ को गाली दी गई, परिवार के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया लेकिन कुछ भी कहने पर डिक्टेटर कहते हैं।
अपनी दिवंगत माँ के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि उनकी माँ ने उन्हें जन्म दिया, वो माँ के साथ न्याय नहीं कर पाए, बच्चों से जो सपने होते हैं वो पूरे नहीं कर पाए तो वो उस प्रकार से गुनहगार हैं। पीएम मोदी ने बताया कि एक बार उन्हें अटल जी का काल आया और गुजरात जाने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि संगठन बहुत हो गया, अब सरकार सँभालो। बकौल पीएम मोदी, उन्होंने मना करते हुए कहा कि उनके पास इसका अनुभव नहीं है, उन्होंने पुलिस थाना तक नहीं देखा।
उन्होंने किस्सा सुनाया कि अगले दिन LK आडवाणी का फोन कॉल आया और उन्होंने कहा कि सबका मत है कि आपको गुजरात सरकार चलाने जाना है। तब उन्होंने अटल जी को कॉल कर के माफ़ी माँगी और गुजरात जाकर अपनी माँ से मिले और उनसे कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था, मैं वापस गुजरात आ रहा हूँ और माँ की ख़ुशी इसी में थीं। बकौल पीएम मोदी, उनकी माँ ने उन्हें कहा – गरीब की चिंता करना, कभी रिश्वत मत लेना।
पीएम मोदी ने भावुक होकर कहा, “मैं हर नामांकन से पहले माँ के पाँव छूने जाता था। वो गुड़ खिलाती थीं। ये मेरे जीवन का पहला चुनाव है जब मैं माँ के पाँव छुए बिना जाऊँगा। लेकिन, 140 करोड़ के इस देश में कई माताएँ हैं, उनका आशीर्वाद है। माँ गंगा भी हैं। इन सबसे मुझे शक्ति मिलती रही है। माँ शब्द में मेरे लिए एक समग्र संसार है। माँ मैं कोई बायोलॉजिकल चर्चा नहीं करता।” पीएम मोदी ने इस दौरान चन्द्रमा पर ‘चंद्रयान’ के लैंडिंग पॉइंट का नाम ‘शिव-शक्ति’ रखे जाने की भी याद दिलाई।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार (5 मई 2024) को जुबैर कुरैशी नाम के एक अंतर्राष्ट्रीय गोतस्कर को गिरफ्तार कर लिया। इसके ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। आरोपित खाड़ी देशों तक गोमांस की सप्लाई करता था। दिसंबर 2023 में उसके खिलाफ जालौन जिले में केस दर्ज हुआ था। दिसंबर 2023 में उस दौरान एक कंटेनर से हजारों किलो गोमांस बरामद हुआ था।
जुबैर की गिरफ्तारी जालौन पुलिस और स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने संयुक्त रूप से की है। जालौन पुलिस ने इस गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए बताया कि जुबैर मूल रूप से दिल्ली के ईस्ट जगतपुरी का रहने वाला है। उसके खिलाफ जालौन के थाना एट में 21 दिसंबर 2023 को मुकदमा दर्ज हुआ था। तब एक टोल प्लाजा पर खड़े संदिग्ध ट्रक की तलाशी ली गई थी।
पुलिस ने उस ट्रक में से 21,000 किलोग्राम गोमांस बरामद किया था। जाँच में सामने आया था कि इस मांस को फर्जी कागजातों के सहारे ले जाया जा रहा था। तब ट्रक को कब्ज़े में लेकर इंस्पेक्टर संजय कुमार गुप्ता की तहरीर पर IPC की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत FIR दर्ज की गई थी। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
थाना एट पुलिस एवं यू0पी0 एसटीएफ की संयुक्त टीम द्वारा थाना एट में पंजीकृत मु0अ0सं0 210/23 धारा 420/467/468/471/34 भादवि व 3/5/8 गौवध निवारण अधि0 में वांछित चल रहे 50,000 रूपये के इनामी अभियुक्त को गिरफ्तार करने के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी कोंच द्वारा दी गयी बाइट। https://t.co/GoA9ZoeZo6pic.twitter.com/iVj7q3g2nT
बाद में इस FIR में धारा 34 के साथ गोवध निवारण अधिनियम की धारा बढ़ाई गई थी। इस घटना की जाँच के दौरान ट्रक के मालिक और ट्रक के ड्राइवर सहित 3 लोगों को आरोपित किया था। जाँच के दौरान गोतस्करी में जुबैर कुरैशी का भी नाम सामने आया। तभी से पुलिस जुबैर को तलाश रही थी। हालाँकि, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह फरार हो गया था। वह अपनी लोकेशन लगातार बदल रहा था।
जुबैर पर प्रशासन ने 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। जुबैर की गिरफ्तारी के लिए UP STF को भी लगाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार (5 मई 2024) को पुलिस को जुबैर की लोकेशन उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मिली। जालौन पुलिस, बिजनौर पुलिस और STF ने संयुक्त रूप से दबिश दी और वह धामपुर थाना क्षेत्र के होटल यूरेशिया से गिरफ्तार कर लिया गया।
जुबैर की गिरफ्तारी के साथ अंतर्राष्ट्रीय गोतस्करी के रैकेट के जुड़े कुल आरोपितों की संख्या 6 हो चुकी है। पुलिस की पूछताछ में जुबैर ने अपने अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा किया है। उसने पुलिस को बताया कि वह अपने नेटवर्क के साथ बिहार के किशनगंज जिले से गोमांस की पैकिंग करवाता था। इस गोमांस को फर्जी कागजातों के सहारे चेन्नई तक पहुँचाया जाता था।
चेन्नई से यह मांस पानी के जहाज के जरिए वियतनाम, दुबई, क़तर, ओमान, ईरान आदि देशों में सप्लाई होता था। इस तमाम अवैध धंधे में जुबैर का ही GST लाइसेंस का प्रयोग होता था। इस मामले में पुलिस को दो अन्य आरोपितों की तलाश है। जुबैर से पूछताछ के बाद अभी कुछ और नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस इस मामले में आगे की जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक शौहर ने शनिवार (4 मई 2024) को अपनी बीवी की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपित अपने 8 माह के बेटे को लेकर फरार हो गया था। पीड़िता के परिजनों ने आरोपित समीर पर दहेज़ की माँग पूरी न करने पर हत्या का आरोप लगाया है। शिकायत में समीर के परिजनों को भी नामजद किया गया है। पुलिस ने समीर को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेरठ के थाना क्षेत्र नौचंदी की है। यहाँ रहने वाले समीर का निकाह पिछले साल गुलफ्शा से हुआ था। समीर कबाड़ का कारोबार करता है। गुलफ्शा के परिजनों के मुताबिक, उन्होंने निकाह में एक करोड़ रुपए कैश, एक लक्जरी गाड़ी और लगभग 45 लाख रुपए का सोना दिया था। निकाह के बाद दोनों को एक बेटा भी हुआ, जिसकी उम्र लगभग 8 माह है।
हालाँकि, आरोपित समीर आए दिन अपनी बीवी से अधिक पैसों की माँग कर रहा था। इसी बात को लेकर मियाँ-बीवी में आए दिन झगड़े होते थे। शनिवार (4 मई) को किसी बात को लेकर एक बार फिर से समीर और गुलफ्शा में झगड़ा हुआ। गुस्से में समीर ने रिवॉल्वर निकाल कर अपनी बीवी पर फायर झोंक दिया। गोली गुलफ्शा के सिर में लगी और वो तड़पने लगी।
इसके बाद बीवी को तड़पता छोड़कर समीर अपने बेटे को लेकर घटनास्थल से भाग निकला। इधर गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हुए। उन्होंने घायल गुलफ्शा को अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृतका के मायके वाले भी इस सूचना पर अस्पताल पहुँच गए। जानकारी मिलते ही पुलिस भी घटनास्थल पर पहुँची।
मेरठ ब्रेकिंग
मेरठ में पति ने की पत्नी की गोली मारकर हत्या
पति ओर उसका परिवार महिला की हत्या कर मौके से फरार
सूचना पर पहुची पुलिस जांच कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
पति ने गृहकलेश में की पत्नी की हत्या- मृतक गुल्फ़शा का चाचा
गुलफ्शा के परिजनों ने समीर और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज़ हत्या की तहरीर दी, जिसके आधार पर FIR दर्ज कर लिया गया। आरोपित समीर की तलाश में पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी। सोमवार (6 मई 2024) को पुलिस को समीर के मेरठ में लेबर चौक पर होने की सूचना मिली। दबिश दे कर फ़ौरन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयोग हुआ हथियार भी बरामद कर लिया है।
जम्मू-कश्मीर के पुँछ में शनिवार (4 मई, 2024) को भारतीय वायुसेना के जवानों को निशाना बना कर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 1 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे जबकि 4 अन्य घायल हो गए थे। हमलावरों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने सघन तलाशी अभियान छेड़ रखा है। इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैय्यबा के विदेशी आतंकी अबू हमजा के गुर्गों का हाथ होने के संकेत मिल रहे हैं। पुलिस ने पहले ही अबू हमजा पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है।
वहीं इस हमले को अंजाम देने वाले 2 अन्य आतंकियों के स्केच जारी हुए हैं। इन दोनों के बारे में सटीक सूचना देने वालों को प्रशासन की तरफ से 20 लाख रुपए के इनाम का एलान हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को भी सुरक्षा बलों द्वारा अबू हमजा और अन्य हमलावरों की तलाश जारी रही। पुँछ के जिस इलाके में हमला हुआ है उसको सेना, पैरामिलिट्री और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने घेर रखा है। चप्पे-चप्पे की तलाशी चल रही है। आतंकियों को मार गिराने के लिए पैरा कमांडो उतारे गए हैं। जंगलों में आतंकी मूवमेंट पर नजर रखने के लिए हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जा रहा है। मुख्य मार्गों पर बैरिकेड बना कर सभी वाहनों की तलाशी ली जा रही है।
हमले में घायल 3 जवानों की हालत स्थिर बताई जा रही है जबकि चौथे जवान को बेहतर इलाज के लिए उधमपुर शिफ्ट किया गया है। अबू हमजा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़ा हुआ है। उसकी गिरफ्तारी पर प्रशासन की तरफ से 1 लाख रुपए का इनाम घोषित है। माना जा रहा है कि हमजा और उसके साथी पुँछ और राजौरी के जंगलों में सक्रिय है। इसी साल 22 अप्रैल को राजौरी में मार डाले गए सरकारी कर्मचारी मोहम्मद रज्जाक की हत्या का भी मास्टरमाइंड अबू हमजा को माना जा रहा है।
The security forces released sketches of two terrorists responsible for the attack on #IAF vehicles in the frontier district of #Poonch on May 4.
The officials have also provided four mobile numbers on which people can contact them and share Info. 9541051982 and 8082294375. pic.twitter.com/jKTE3a0fDc
— Pragya Srivastava (Modi Ka Pariwar) (@pragyasrivasta1) May 6, 2024
वहीं IAF पर हमला करने वाले 2 आतंकियों के स्केच जारी किए गए हैं। इन दोनों के बारे में सटीक सूचना देने वालों को प्रशासन की तरफ से 20 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। स्केच में दोनों आतंकियों के चेहरे पर दाढ़ी दिख रही। एक के बाल छोटे जबकि दूसरे के कंधे तक हैं। ये दोनों आतंकी पाकिस्तान के बताए जा रहे हैं। जवानों पर हमले में एके असॉल्ट राइफलों और स्टील की गोलियों के साथ अमेरिका में बनी एम4 कार्बाइन का इस्तेमाल किया गया था। जम्मू के ADGP के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने कई संदिग्धों को उठाया है जिनसे पूछताछ चल रही है।
एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स तीसरी बार अंतरिक्ष की उड़ान के लिए तैयार हैं। इससे पहले उन्होंने बताया है कि वो अपने साथ भगवद्गीता की पुस्तक लेकर जा रही हैं। साथ ही उन्होंने भगवान गणेश को अपना ‘लकी चार्म’ बताते हुए कहा कि वो उनकी प्रतिमा अपने साथ रखती हैं। सुनीता विलियम्स ने कहा कि वो धार्मिक होने से ज्यादा आध्यात्मिक हैं। उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरनी है। भारतीय समयानुसार ये उड़ान मंगलवार (7 मई, 2024) को सुबह साढ़े 8 बजे शुरू होगी।
बोईंग की स्टरलाइनर नाम के एक नए एयरक्राफ्ट का इसके लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। NDTV से बात करते हुए सुनीता विलियम्स ने कहा कि वो इस कमर्शियल क्रू फ्लाइट में अपने साथ भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर जा रही हैं क्योंकि वो उनके लिए ‘गुड लक चार्म’ हैं। उन्होंने कहा कि आउटर स्पेस में उनके साथ गणेश जी होंगे, इससे उन्हें ख़ुशी मिलती है। इससे पहले जब वो अंतरिक्ष में गई थीं तो उन्होंने अपने पास भगवद्गीता की पुस्तक रखी थी, जिसमें श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया है।
सुनीता विलियम्स न सिर्फ अमेरिकन नौसेना की अधिकारी हैं, बल्कि एक मैराथन धावक भी हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहने के दौरान भी वो मैराथन में हिस्सा ले चुकी हैं। किसी भी महिला एस्ट्रोनॉट द्वारा सबसे अधिक स्पेस वॉक का रिकॉर्ड उनके नाम है, उन्होंने 50 घंटे और 40 मिनट में 7 स्पेसवॉक पूरे किए। पिछले कुछ दिनों से वो बोईंग की क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन का प्रशिक्षण ले रही हैं। वो 1998 में एस्ट्रोनॉट बनी थीं, फिर उन्हें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने एक बड़े मिशन के लिए चुना।
सुनीता विलियम्स कल तीसरी बार भरेंगी अंतरिक्ष के लिए उड़ान, भगवान गणेश से है यह उम्मीद
59 वर्षीय सुनीता विलियम्स इससे पहले 2006 और 2013 में अंतरिक्ष के लिए उड़ान भर चुकी हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 322 दिन बिताए हैं। सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पंड्या एक न्यूरोएनाटोमिस्ट थे। गुजरात के मेहसाणा के झुलासन गाँव में उनका जन्म हुआ था। बाद में वो अमेरिका चले गए थे, जहाँ उन्होंने स्लोवेनियाई महिला बोनी से शादी की थी। सुनीता विलियम्स के नाम पर अमेरिका के नीधम में स्कूल भी है। भारत भी ‘गगनयान’ अंतरिक्ष मिशन की तैयारी में लगा हुआ है।
दिल्ली शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। आरोप है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से फंडिंग ली है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसकी आतंक निरोधी एजेंसी NIA से जाँच कराने की सिफारिश की है।
दरअसल, इस संबंध में उपराज्यपाल को एक शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP को देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने और खालिस्तान समर्थक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए फंड मिले थे। इसके लिए खालिस्तानी आतंकी समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 133.60 करोड़ रुपए) मिले थे।
Delhi LG, VK Saxena has recommended an NIA probe against Delhi CM Arvind Kejriwal for allegedly receiving political funding from the banned terrorist organization “Sikhs for Justice”
LG had received a complaint that Arvind Kejriwal-led AAP had received huge funds – USD 16… pic.twitter.com/11wzfXvgmo
दरअसल, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया और आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मुनीश कुमार रायजादा ने इस संबंध में 1 अप्रैल 2024 को उपराज्यपाल को पत्र लिखा था। इसमें आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया गया था।
पत्र में कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने यह रकम 2014 से लेकर 2022 के बीच में खालिस्तानी संगठन से ली है। इसमें यह भी कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल और खालिस्तान समर्थक सिखों के बीच साल 2014 में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित गुरुद्वारा रिचमंड हिल्स में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में केजरीवाल ने खालिस्तानी देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने का वादा किया था।
उपराज्यपाल द्वारा केंद्रीय गृह सचिव को NIA जाँच के लिए लिखी गई चिट्ठी के अनुसार, भुल्लर को रिहा करने के बदले में अरविंद केजरीवाल ने अपनी आम आदमी पार्टी के लिए वित्तीय सहायता की माँग की थी। इस बैठक की तस्वीरें रायजादा ने अपने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर साल 2014 में साझा भी की थी।
आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मनीश कुमार रायजादा और आशू मोंगिया द्वारा लिखी गई चिट्ठी के आधार पर उपराज्य ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 जनवरी 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर प्रोफेसर भुल्लर को क्षमा देने की भी अपील की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान अपनी कई जनसभाओं में कहा है कि वो किसी भी कीमत पर मजहब के आधार पर आरक्षण नहीं होने देंगे। उन्होंने संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर और प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों भी नहीं चाहते थे कि मजहब के आधार पर आरक्षण मिले। अब सोशल मीडिया में इसे लेकर बहस का बाजार गर्म हो गया है।
‘इंडिया टुडे’ के संपादक रहे एक्टिविस्ट दिलीप मंडल ने ने एक ट्वीट में लिखा कि इस चुनाव में हमने एक चीज तय कर दिया है कि SC/ST की सूची में अब कोई मुस्लिम वर्ग नहीं आ जाएगा। उन्होंने लिखा कि हमने रंगनाथ मिश्रा कमीशन को हमने गहरी मिट्टी में दफना दिया है। बता दें कि UPA सरकार द्वारा गठित इस आयोग ने सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों को 10% आरक्षण देने की सिफारिश की थी। साथ ही OBC को जो 27% कोटा मिला हुआ है उसमें से 8.5% मुस्लिमों को देने की सिफारिश भी की थी।
इस आयोग ने यहाँ तक सलाह दे दी थी कि दलितों को इस्लामी या ईसाई धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण का लाभ मिलता रहे। दिलीप मंडल ने स्पष्ट किया कि अब ये सुनिश्चित हो गया है कि केंद्र में या किसी भी राज्य में मुस्लिमों को आरक्षण नहीं मिलेगा। उन्होंने इस दौरान याद दिलाया कि कैसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस द्वारा आरक्षण दे दिया गया। साथ ही कहा कि आगे ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक चुनाव में इतना सुनिश्चित हो गया, यही बहुत है।
इस पर सोशल मीडिया पर घृणा फैलाने वाला आसिफ खान भड़क गया और उसने कहा, “हिन्दू इस देश की जनसंख्या का 80% हैं। हिन्दू समूहों के लिए जाति आधारित आरक्षण विशुद्ध बहुसंख्यकवाद है। इस देश में स्पष्ट बहुमत में होने के बावजूद उन्हें SC/ST/OBC/EWS आरक्षण का लाभ मिलता है। इस कारण हिन्दू भारत के सभी संस्थानों में हावी हैं। उनका प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है, इसीलिए उनका आरक्षण खत्म किया जाना चाहिए। जिनका प्रतिनिधित्व कम है, उन अल्पसंख्यक समूहों को आरक्षण मिलना चाहिए।”
Hindus comprise 80% of this country's population. Caste-based reservations for Hindu groups reflect pure majoritarianism.
Despite being the brute majority in this country, they benefit from reservations as SC/ST/OBC/EWS; this has led to Hindus dominating all institutions in… https://t.co/inJPjiZdrs
इस सोच को देखिए। आसिफ खान जैसों का कहना है कि आरक्षण पिछड़े समूहों को नहीं, मुस्लिमों को मिलना चाहिए। यानी, मजहब के आधार पर आरक्षण, वो भी हिन्दुओं के देश में। दुनिया भर में 50+ मुस्लिम मुल्क हैं। इसके अलावा भी कई देशों में मुस्लिम अच्छी-खासी संख्या में हैं। लेकिन, इन्हें आरक्षण चाहिए भारत में। भारत में देश से बाहर से आए मजहब को आरक्षण चाहिए। जो हिन्दू यहाँ के मूलनिवासी हैं, जिन पर 800 वर्षों के इस्लामी शासन के दौरान अत्याचार हुए, उन्हें कोई फायदा न मिले – ऐसा इनका कहना है।
जहाँ मुस्लिम बहुलता में आ जाते हैं, वहाँ सबसे पहले शरिया लगाने की कोशिश की जाती है, फिर वो इलाका ‘दारुल इस्लाम’ बन जाता है। बिहार के सीमांचल में कई सरकारी स्कूलों में भी रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी होना इसका उदाहरण है। फिर जहाँ इस्लाम का शासन आ जाता है, बाकी वर्ग अपने-आप दोयम दर्जे के नागरिक हो जाते हैं। उनसे जजिया कर वसूला जाता है। अब आसिफ खान जैसे लोग पिछड़े हिन्दुओं का आरक्षण खत्म कर के भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बनाना चाहते हैं।
उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने राज्य में मुस्लिमों को मिल रहे आरक्षण का बचाव किया है। बता दें कि राज्य में नौकरी, एडमिशन और पंचायत चुनावों तक में पिछड़ों के कोटे में मुस्लिमों को आरक्षण मिला हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने पीएम मोदी के इस दावे को झूठ बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने पिछड़ों का आरक्षण लेकर मुस्लिमों को दे दिया। पीएम मोदी ने बताया था कि आंध्र प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस ने 4 बार ऐसी कोशिश की, लेकिन न्यायपालिका के कारण सफल नहीं हो पाई।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह दिए गए एक फैसले में ‘गर्भवती महिला’ की जगह ‘गर्भवती व्यक्ति’ शब्द का इस्तेमाल किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसका कारण बताया है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि जन्म से जो स्त्रीलिंग हैं, उनके अलावा नॉन-बाइनरी (ऐसे लोग जो खुद को पुरुष या महिला नहीं मानते) भी गर्भवती हो सकते हैं, इसीलिए ‘महिला’ की जगह ‘व्यक्ति’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। मामला 14 साल की एक नाबालिग लड़की के गर्भवती होने से जुड़ा था।
मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस JB पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने ये फैसला सुनाया था। अब उन्होंने कहा है कि Cis-जेंडर (जो अपना जेंडर वही मानते हैं जो उनके जन्म के समय था) ही नहीं बल्कि ट्रांसजेंडर (समलैंगिक) पुरुष और नॉन-बाइनरी (महिला-पुरुष के अलावा अन्य) लोग भी गर्भवती हो सकते हैं। इस मामले में उक्त नाबालिग लड़की बलात्कार के बाद गर्भवती हुई थी। एक मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वो शारीरिक और मानसिक रूप से गर्भ गिराने के लिए फिट है, हाईकोर्ट की अनुमति मिल जाए तो।
जब तक उक्त लड़की ने बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तब तक वो 27 हफ्ते की गर्भवती हो चुकी थी। हालाँकि, फिर से मेडिकल बोर्ड ने कहा कि भ्रूण में कोई जन्मजात असमानताएँ नही थीं, ऐसे में आयु के हिसाब से उसे गिराना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को पुनः परीक्षण का आदेश दिया। जाँच के बाद बोर्ड ने इसके लिए हामी भर दी और कहा कि लड़की गर्भवती रही तो इससे इसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।
आखिरकार, 22 अप्रैल, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने गर्भ गिराने की अनुमति दे दी। जब तक उसके अभिभावक अंतिम फैसले तक पहुँचते, लड़की 30 सप्ताह (7 महीने) की गर्भवती हो चुकी थी। अभिभावक अपनी बेटी के स्वास्थ्य को लेकर बेचैन थे और लड़की भी बच्चे को जन्म देना चाहती थी, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया। लड़की की इच्छा है कि नवजात को गोद लेने के लिए दे दिया जाएगा। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने लिखा था कि ऐसे मामलों में ‘गर्भवती व्यक्ति’ की इच्छा क्या है इसे सबसे पहले देखा जाना चाहिए।
The Supreme Court utilizes the phrase "Pregnant person" instead of "Pregnant women" in its ruling. Read More at: https://t.co/X7BdeNJoNn
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर ‘गर्भवती व्यक्ति’ और उसके अभिभावक के बीच मतभेद हो तो अदालत को नाबालिग या मानसिक रूप से बीमार शख्स की बात को सुनना चाहिए और फैसले लेते समय उसका ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि पश्चिमी देशों में कई जगह ‘They/Them’ प्रोनाउन का इस्तेमाल किया जा रहा है और He/Him या She/Her को नफरत की निगाह से देखा जाता है। भारत में भी अब धीरे-धीरे कई जगह ये फ़ैल रहा है। ये ‘वोक’ कल्चर का हिस्सा है।
कोलकाता पुलिस के डीसीपी क्राइम ब्रांच के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने सोमवार (6 मई, 2024) को सार्वजनिक रूप से एक यूजर से उसकी पहचान उजागर करने को कहा। पुलिस ने उससे उसका नाम-पता बताने को कहा। उसका जुर्म सिर्फ इतना था कि उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक मीम वीडियो साझा कर दिया था।
कोलकाता पुलिस ने मीम वीडियो के रिप्लाई में लिखा, “आपको तुरंत अपना नाम और पता और अपनी पहचान बताने का आदेश दिया जाता है। यदि माँगी गई जानकारी नहीं बताई जाती है, तो आप CRPC की धारा 42 के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे।”
You are directed to immediately disclose your identity including name and residence. If the information sought is not revealed, you shall be liable for legal action u/s 42 CrPC.
Cyber PS, Lalbazar Kolkata Ph no: 033-22143000
— DCP (Cyber Crime), Kolkata Police (@DCCyberKP) May 6, 2024
यह ट्वीट पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पर बनाए गए एक स्पूफ वीडियो के जवाब में किया गया था। ममता बनर्जी को एक गाने पर नाचते हुए दिखाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और इसे 400 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया था।
— DCP (Cyber Crime), Kolkata Police (@DCCyberKP) May 6, 2024
कोलकाता पुलिस ने इस यूजर को दिए गए नोटिस में कहा गया है, “यह देखा गया है कि आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और भड़काऊ पोस्ट करने के लिए कर रहे हैं। आपको यह पोस्ट हटाने और ऐसा करने से बचने का निर्देश दिया जाता है, अन्यथा आप नियम-कानूनों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे।” कोलकाता पुलिस ने अपने नोटिस में कहा है कि CM ममता बनर्जी का यह वीडियो साझा करने से क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।
ममता बनर्जी पर मीम साझा करने पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
2019 में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मेट गाला थीम वाला मीम शेयर करने पर एक महिला को गिरफ्तार किया गया था। ममता बनर्जी की एक एडिटेड तस्वीर शेयर करने के आरोप में भारतीय जनता युवा मोर्चा की संयोजक प्रियंका शर्मा के खिलाफ हावड़ा में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता विभास हाजरा ने शिकायत दर्ज कराई थी। मेट गाला 2019 थीम वाले मीम में प्रियंका चोपड़ा के शरीर पर ममता बनर्जी का चेहरा लगाया गया था। प्रियंका को इसके बाद गिरफ्तार कर हावड़ा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था।
इस मामले में की गई शिकायत की कॉपी में लिखा था कि इस कृत्य ने कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है और इसे हिंसक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। शिकायत में लिखा था, “प्रियंका ने ना केवल हमारी माननीय मुख्यमंत्री का अपमान करने की कोशिश की है, बल्कि उसने फेसबुक पर अपने पोस्ट के जरिए हमारे बंगाल की संस्कृति का अपमान करने की कोशिश कर रही है जो साइबर अपराध है।” सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस मामले टीएमसी सरकार को फटकार लगाई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की गिरफ्तारी “प्रथम दृष्टया मनमानी” थी।