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चीन के अस्पताल में चाकूबाजी, 23 हताहत : ग्रामीण इलाके से आया हमलावर लोगों पर टूट पड़ा, तबाही के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

चीन में एक व्यक्ति ने चाकू हाथ में लेकर एक अस्पताल में जमकर कत्लेआम मचाया। इस हमले में 23 लोगों के हताहत होने की सूचना मिल रही है। इस घटना की पुष्टि चीनी मीडिया ने भी की है। बताया जा रहा है कि ये हमला मंगलवार (7 मई 2024) की सुबह करीब 11 बजे हुआ, जिसमें करीब दर्जन लोग घायल हो गए।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शुरुआती जानकारी में बताया था कि इस वारदात में कम से कम 10 लोग मारे जा चुके हैं या बुरी तरह से घायल हैं। हालाँकि स्थानीय मीडिया व अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 23 लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें से 2 की मौत हो गई, तो अभी मृतकों का आँकड़ा बढ़ भी सकता है। घायलों में कईयों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

ये हमला चीन के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में स्थित यून्नान प्रांत की है। यून्नान प्रांत की सीमाएँ लाओस, म्याँमार और वियतनाम से मिलती है। ये प्रांत चीन के सबसे गरीब प्रांतों में गिना जाता है। यहाँ से होकर बहने वाली मीकॉन्ग नदी से होकर चीन और पड़ोसी देशों में जमकर तस्करी होती है और इसे नशे के प्रसार का सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, ये हमना यून्नान प्रांत के झेनक्सियोंग काउंटी स्थित एक अस्पताल में हुआ। सरकारी समाचार साइट द पेपर ने अस्पताल की लॉबी में एक व्यक्ति द्वारा चाकू पकड़े हुए दूसरे व्यक्ति की ओर डंडा पकड़े हुए तस्वीरें प्रकाशित कीं, साथ ही घटनास्थल पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें भी प्रकाशित कीं।

पत्रकार मारियो नॉफाल ने एपी के हवाले से बताया है कि झाओटोंग शहर के झेन्जिओंग काउंटी में पीपल्स अस्पताल को निशाना बनाया गया है। शुरुआत में हमलावर फरार भी हो गया था, लेकिन चीन की पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया।

एक स्थानीय निवासी ने द पेपर को बताया, “यह हमला सुबह करीब 11 बजे हुआ… अभी भी ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि असलियत में कितने लोग घायल हुए।

बता दें कि चीन में हथियारों पर सख्त पाबंदी है। बंदूकों पर रोक के चलते ऐसे अपराधों की संख्या कम ही दिकती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में चीन में चाकूबाजी की घटनाएँ काफी बढ़ चुकी है। पिछले साल अगस्त में युन्नान में मानसिक बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति ने चाकू से हमला कर दिया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और सात अन्य घायल हो गए थे। उससे एक महीने पहले, दक्षिणी चीन के गुआंगडोंग प्रांत में एक किंडरगार्टन में चाकू से हमला कर छह लोगों की हत्या कर दी गई थी और एक घायल हो गया था।

चीन के युन्नान में मानव इतिहास की सबसे चाकू बाजी की घटना साल 2014 में हुई थी, जिसमें राजधानी कुनमिंग में शरणार्थियों ने चाकुओं से हमला कर दिया था। उसे चीन ने आतंकी घटना करार दिया था, जिसमें 33 लोगों की मौत हो गई थी, तो 133 लोग घायल हो गए थे। चाकू बाजी की सबसे बड़ी घटना

8 साल, 150 बार रेप, मामला निकला झूठा… ‘शादी का झाँसा देकर बलात्कार’ वाले केस कितने सही? प्रेम करना हो जाएगा मुश्किल, FIR होते अपराधी बन जाता है पुरुष

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मलयाली युवक के विरुद्ध दर्ज की गई बलात्कार की एक FIR को रद्द कर दिया। युवक पर उसकी पूर्व प्रेमिका ने 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। युवक का कहना था कि उसने कभी महिला से यौन सम्बन्ध बनाए ही नहीं और इसकी पुष्टि मेडिकल जाँच में भी हुई। इस तरह यह मलयाली युवक बलात्कार के आरोप के दाग से मुक्ति पा सका। इस मामले की गहराई में जाने पर पता चला कि यह 2016 से ही चला आ रहा था, ऐसे में उस युवक को 8 वर्षों तक यह आरोप झेलना पड़ा।

उपरोक्त बताए गए मामले में जब युवक ने हाई कोर्ट के सामने कथित पीड़िता की मेडिकल जाँच रखी तो पता चला कि वह ‘वर्जिन’ थी। यानी जिस महिला के साथ कभी यौन संबंध बनाए ही ना गए हों, उसने एक पुरुष पर 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। इससे भी ज्यादा हास्यास्पद यह है कि यह सिद्ध होने के बाद भी हाई कोर्ट ने उस युवक को कोई राहत नहीं दी जिस पर बलात्कार का आरोप था। कोर्ट ने महिला के बयान को ही पत्थर की लकीर माना।

‘150 बार बलात्कार’, ‘शादी का झांसा देकर किया रेप’, ‘महिला को धोखे में रख करता रहा रेप’ जैसी हेडलाइन्स बीते कुछ सालों में काफी सुनी गई हैं। यदि आप कोई भी अखबार उठाएँगे तो रोज आपको ऐसे 2-3 मामले मिलेंगे ही। नारी सशक्तिकरण के लिए कानून और नारियों के पक्ष में न्यायिक निर्णयों के चक्कर में पुरुष ऐसे मामले में अपने आप को दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं। सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर इस बात पर चर्चा होती है कि क्या किसी महिला के आरोप भर लगा देने से कोई पुरुष बलात्कारी हो जाएगा। इससे कई प्रश्न खड़े हुए हैं।

तय करनी होगी बलात्कार की परिभाषा

भारत एक परम्पराओं वाला देश है। हमारे समाज में बड़े पैमाने पर शादी से पहले लड़का-लड़की के यौन सम्बन्ध बनाने को सही नहीं समझा जाता। लेकिन बढ़ते आधुनिकीकरण के चलते यह भावना नेपथ्य में चली गई है। सामान्य रूप से यदि बलात्कार की बात की जाए तो यदि कोई पुरुष किसी महिला के साथ जोर जबरदस्ती से, उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन सम्बन्ध बनाता है, तो इसे बलात्कार माना जाता है। यह महिला कोई भी हो सकती है, किसी पुरुष की प्रेमिका भी हो सकती है।

लेकिन अगर दो वयस्क महिला-पुरुष आपस में यौन संबंध बनाते हैं और बाद में उनमें कोई लड़ाई-झगड़ा होता है, तो क्या इसे बलात्कार माना जाएगा। यहकि तब, जब महिला यौन सम्बन्ध बनाने के दौरान पुरुष के साथ पूरी तरह से सहमति में रही हो।

यदि कोई पुरुष यह जाने कि जिस महिला के साथ वह प्रेमवश आज यौन संबंध बना रहा है, वह भविष्य में बलात्कार माना जाएगा, तो क्या वह ऐसा करेगा। यदि महिला ने यौन संबंध बनाने के समय सहमति दे दी है, इस पूरे मामले में शामिल है, तो भला एक समय के बाद वह कैसे यह जान पाएगी कि यह बलात्कार था।

क्या सिर्फ इस आधार पर कि महिला अब उक्त पुरुष के साथ संबंध नहीं रखना चाहती या गुस्सा है, के कारण उसकी पूर्व में यौन संबंध के लिए दी गई सहमति को वापस लिया माना जाए और इसे बलात्कार का नाम दिया जाए। महिला के एक समय पर राजी ख़ुशी यौन संबंध बनाने और उसे बाद में बलात्कार का नाम देने को लेकर कोर्ट को यह तय करना होगा कि इसे क्या माना जाए, इसे बलात्कार की श्रेणी में रखा जाए या नहीं। यह मामला तो संबंध विच्छेद का होता है।

‘शादी का झांसा देकर रेप’ जैसी शिकायतों की भी हो गहराई से जाँच

आजकल सामने आ रहे बलात्कार के मामलों में सबसे अधिक यह सुनने को मिलता है कि एक पुरुष ने शादी का झांसा देकर किसी महिला से कई वर्षों तक रेप किया। बाद में पुरुष अपने वादे से मुकर गया। इन मामलों की भी गहराई से जाँच की आवश्यकता है।

इसमें मूल प्रश्न है कि यदि शादी के वादे के आधार पर ही यौन सम्बन्ध बनाए जाने थे तो इसको लेकर महिला को भी विचार करना चाहिए था। दूसरा प्रश्न उठता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से किए गए वादे से मुकरता है तो यह मामला धोखाधड़ी का बनता है ना कि बलात्कार का।

इस मामले में भी वही मूल प्रश्न आता है कि क्या महिला ने पहले यौन संबंध बनाने की सहमति दी और बाद में जब बात नहीं बनी तो संबंध को बलात्कार का नाम दे दिया। यानि क्या यौन सम्बन्धों के लिए दी गई सहमति बाद में वापस ली जा सकती है।

इनमें से कई मामलों में ऐसा होता है कि जिस महिला ने पुरुष के खिलाफ बलात्कार की FIR करवाई होती है, वह उसी से विवाह कर लेती है। ऐसे में प्रश्न उठाया जाना चाहिए कि क्या कोई महिला अपने बलात्कारी से विवाह कर सकती है, और यदि कोई महिला बलात्कारी से विवाह करती है तो फिर वह व्यक्ति बलात्कारी क्यों माना जाए।

शादी का झांसा देकर बलात्कार के मामलों में किसी पुरुष को अपराधी घोषित करने से पहले इस बात की जाँच होनी चाहिए कि महिला ने यह आरोप किस आधार पर लगाए हैं। कहीं वह सिर्फ इस बात से गुस्सा तो नहीं कि उसकी उक्त पुरुष से शादी नहीं हो पाई या उनके रिश्ते में खटास आ गई है।

दूसरी बात यह भी है कि भारत में महिलाओं को झांसा दिए जाने को लेकर विचार भी करना होगा। झांसा आर्थिक मामले में दिया जा सकता है, शादी एक भावनात्मक वादा है, इसका झांसा कैसे दिया जा सकता है। महिलाओं को भी किसी भी पुरुष से मात्र शादी के वादे बात के आधार पर यौन संबंध बनाने को लेकर सतर्क होना होगा।

सिर्फ FIR/बयान के आधार पर ना मान लिया जाए पुरुष को अपराधी

बलात्कार के आरोप लगाने के मामले में अक्सर ऐसा सामने आता है कि मात्र आरोप भर लगने से ही पुरुष को अपराधी घोषित कर दिया जाता है। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है। कई मामलों में ऐसे पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है और उन्हें दुनिया उन्हें अपराधी की नजर से देखती है।

कई शिकायतों में कहा जाता है कि पुरुष ने महिला का 100 बार बलात्कार किया, लगातार तीन-चार साल बलात्कार करता रहा। सामान्य पाठक जब ऐसी खबरें पढ़ता है तो वह आरोपित की दुर्दांत छवि मन में बनाता है। ऐसा पाठक सोचता है कि इस पुरुष ने 3 साल महिला को परेशान किया। असल में मामला यह होता है कि महिला-पुरुष इस अवधि के दौरान प्रेम संबंध में रहे होते हैं और तब यौन संबंध आपसी सहमति से बन रहे होते हैं, इसे बाद में बलात्कार के रूप में पेश कर दिया जाता है।

सिर्फ FIR या महिला के बयान के आधार पर ही पुरुष को अपराधी मान लेने से जो हानि उसे होती है, उसके निर्दोष साबित होने के बाद इसकी भरपाई नहीं हो पाती है। भारत में कोई तब तक हत्या का भी अपराधी नहीं माना जाता जब तक कोर्ट इस बात को लेकर उसे दोषी ना सिद्ध कर दे लेकिन बलात्कार के मामलों में पहले ही पहले ही पुरुषों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। कई पुरुष ऐसे मामलों में कई वर्षों की सजा भी काट लेते हैं।

हाल ही में बरेली में एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ एक महिला ने 2019 में एक पुरुष को बलात्कार और अपहरण के फर्जी मामले में फंसा दिया था। इस व्यक्ति को 4 साल से अधिक की सजा भी काटनी पड़ी। बाद में महिला अपने आरोपों से पलट गई। कोर्ट ने महिला को उतने ही दिनों की सजा सुनाई जितनी सजा बेकसूर पुरुष को काटनी पड़ी थी।

झूठी FIR पर हो कार्रवाई, मुआवजे का हो प्रावधान

बलात्कार के मामले इतने जघन्य होते हैं और इनमें कार्रवाई का दबाव पुलिस पर अधिक होता है। ऐसे में कई मामलों में बिना जाँच के ही आरोपितों को पकड़ लिया जाता है, उन पर कार्रवाई की जाती है। इसका फायदा उठा कर कई महिलाओं ने इसे एक धंधा बनाया है। वह पहले किसी पुरुष से दोस्ती और मेल मिलाप बढ़ाती हैं, इसके बाद उसके खिलाफ बलात्कार के मामले में FIR दर्ज करवा देती हैं, ऐसा ना करने के लिए पैसे माँगे जाते हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर की एक ऐसी ही महिला को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था जो कि अमीर युवकों से पहले मेलजोल बढ़ाती थी। इसके बाद उनके खिलाफ बलात्कार की FIR करवा देती थी, उनसे पैसे ऐंठती थी। इसका नाम सोनिया था, इसने आधे दर्जन से ऐसे फर्जी मामले दर्ज करवाए थे। यदि कोर्ट बलात्कार के मामले में कड़ी सजा दे रहा है तो उसे यह भी पक्का करना होगा कि जो महिलाएँ इन कानूनों का फायदा उठा रही हैं, उनको सजा दिया जाए। उनसे जुर्माना वसूल किया जाए और उन पुरुषों को दिया जाए जिनकी प्रतिष्ठा धूमिल किया जाए।

‘पतंजलि’ केस में अब IMA ही फँस गया: जिस नियम के तहत बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई अब वही विवाद में, पुनर्विचार करेगी केंद्र सरकार

अवैध विज्ञापन के मामले में ‘पतंजलि आयुर्वेद’ और ‘दिव्य फार्मेसी’ की तरफ से मंगलवार (7 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में उन अख़बारों को पेश किया गया, जिनमें बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनियों की तरफ से माफ़ीनामा जारी किया गया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो राज्यों की लाइसेंसिंग ऑथोरिटीज और केंद्र सरकार द्वारा भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के संबंध में उठाए जा रहे क़दमों का विश्लेषण करेगी। सुप्रीम कोर्ट इस दौरान अख़बार के उन पन्नों को देख कर संतुष्ट हुआ, जिनके माध्यम से माफ़ीनामा जारी किया गया था।

इससे पहले कई बार बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत पेशी के दौरान फटकार लगाया गया था। इस दौरान ‘पतंजलि’ की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के अध्यक्ष के बयान को लेकर अप्लीकेशन (IA) दायर कर दिया है। उन्होंने इसे हानि पहुँचाने के उद्देश्य से की गई अपमानजनक टिप्पणी करार दिया। IMA अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एलोपैथिक डॉक्टरों पर टिप्पणी पर सवाल उठाए थे।

मुकुल रोहतगी ने इसे गंभीर मामला बताया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि अगर IMA आरोपों पर जवाब नहीं देता है तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने ध्यान दिलाया कि ये बयान सुनवाई से 1 दिन पहले दिया गया था, ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि अनजान/बेखबर होने के कारण ये टिप्पणी की गई। वहीं भारत सरकार की तरफ से ASG केएम नटराज ने बात रखी। उन्होंने बताया कि ‘ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक्स रूल्स’ के नियम संख्या 170 को कई उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है।

उन्होंने बताया कि 2018 में नियम संख्या 170 की अधिसूचना जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ 8-9 याचिकाएँ दायर हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस नियम के तहत कोई कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था, बाद में केरल हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसे दोहराया। उन्होंने इस दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय का वो आदेश भी पढ़ कर सुनाया, जिसमें इस कानून के नियम-170 पर पुनर्विचार के लिए केंद्र सरकार को कहा गया था।

इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि भारत सरकार को इस सलाह का फायदा मिला। वहीं जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पूछा कि केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेने के लिए कहा गया था, फिर भी ये नियम यहाँ पर है। उन्होंने पूछा कि बिना कोई निर्णय लिए बिना आप कड़ी कार्रवाई न करने को कैसे कह सकते हैं? वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि ये एक अच्छा कानून है, जब तक इसे हटाया नहीं जाता, ये लागू है। केंद्र सरकार ने राज्यों को पत्र भेज इसके तहत एक्शन न लेने को कहा था। ASG ने इस कानून पर पुनर्विचार के लिए समय माँगा।

राम मंदिर का दर्शन करने पर किया जाता था टॉर्चर… कॉन्ग्रेस छोड़ BJP में शामिल हुईं राधिका खेड़ा, अभिनेता शेखर सुमन भी साथ आए

कॉन्ग्रेस की पूर्व महिला नेता राधिका खेड़ा ने हाथ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके साथ बॉलीवुड अभिनेता शेखर सुमन ने भी बीजेपी की सदस्यता ली। साथ ही राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपनी इच्छा जाहिर की।

पिछले दिनों काफी चर्चा में रही राधिका ने कहा, “सभी को जय श्री राम! मुझे कॉन्ग्रेस में सनातनी, हिंदू होने की सजा मिली। आज की कॉन्ग्रेस राम और हिंदू विरोधी है। मैं पीएम मोदी अमित शाह, जेपी नड्डा को धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने मुझे मौका दिया। यह राष्ट्र निर्माण में योगदान का हिस्सा बनने का अवसर है।”

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में मोदी जी की गारंटी वाली सरकार है, जिसके संरक्षण में मैं आज यहाँ तक पहुँच पाई। वरना जिस तरीके से राम भक्त होने के लिए, रामलला के दर्शन करने के लिए कौशल्या माता की धरती पर मेरे साथ जो दुर्व्यवहार किया गया। जिस तरीके का सलूक किया गया। मैं आपके पास नहीं पहुँच सकती थी। कॉन्ग्रेस पार्टी में मुझे हिंदू, सनातनी और राम भक्त होने की सजा मिली। आज मैं बोलते हुए भी काँप रही हूँ।”

इसी तरह शेखर सुमन ने कहा, “कल तक मुझे ये नहीं मालूम था कि आज यहाँ बैठूँगा क्योंकि जिंदगी में बहुत कुछ जाने-अनजाने होता है। कभी-कभी आप अनजान रहते हैं कि आपका भविष्य क्या है। ऊपर से एक आमद होती है और आप उस आदेश का पालन करते हैं। मैं एक बहुत ही सकारात्मक सोच के साथ यहां आया हूं। सबसे पहले तो मैं ईश्वर का शुक्रिया करूंगा कि उन्होंने मुझे यहां तक आने का आदेश दिया।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद राधिका खेड़ा ने छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं पर उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के नेता सुशील आनंद सहित उनके दो साथियों को लेकर कहा है कि इन लोगों ने उनके साथ रायपुर के ऑफिस में अभद्रता की थी। इतना ही नहीं ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान तो ये तक पूछा था कि वो होटल के किस कमरे में ठहरी हैं और उन्हें पीने के लिए कौन सी शराब भेजी जाए।

बड़े भाई अब्दुल ने नाबालिग हिंदू लड़की को फँसाया, कई बार रेप कर छोड़ा… फिर छोटे भाई इरफान ने रेप किया, किडनैप कर नमाज पढ़वाई, कबूल करवाया इस्लाम

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में जबरन धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न का एक मामला सामने आया है जिसमें दो मुस्लिम भाइयों ने एक नाबालिग हिंदू लड़की के साथ बार-बार बलात्कार किया और उसे रोजा रखने और इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया। लव जेहाद के इस केस में पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ पुलिस की शरण ली है और बताया है कि पिछले 2 साल से अब्दुल रहमान और इरफान नाम के मुस्लिम भाईयों ने उसकी जिंदगी नर्क में तब्दील कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात चित्रकूट के कर्वी के पास स्थित तरौंहा गाँव की है। पीड़िता ने बताया है कि साल 2022 में जब वो दसवीं कक्षा में थी, तब चौगलिया-तरौंहा का रहने वाला अब्दुल रहमान रोज उसका पीछा करता था। दोस्ती के लिए कहने पर जब वो नहीं मानी, तो अब्दुल रहमान ने उसे धमकाया। अब्दुल रहमान हिंदू बच्ची का स्कूल से लेकर मंदिर तक.. हर जगह पीछा करता था।

पीड़ित बच्ची ने बताया कि उसने डर की वजह से अब्दुल की हरकतों के बारे में अपने परिवार को नहीं बताया, जिसकी वजह से उसका मनोबल बढ़ गया। उसने धमकाकर पीड़िता को अपने घर में बुलाया और रेप किया। इसके बाद अब्दुल उसे ब्लैकमेल करके उसकी अस्मत लूटता रहा। अब्दुल ने इस बीच किसी अन्य महिला से निकाह कर लिया। लेकिन इसके बाद अब्दुल का भाई इरफान लड़की का पीछा करने लगा। उसने ये कहकर लड़की को ब्लैकमेल किया कि उसे अब्दुल और उसके बीच के संबंधों के बारे में पता है। इरफान ने लड़की की मजबूरियों का फायदा उठाते हुए कई बार उसके साथ रेप किया। इसके साथ ही इरफान ने लड़की के साथ ही उसके पूरे परिवार को बर्बाद करके धमकी दी।

यही नहीं, इरफान ने उससे निकाह का झाँसा दिया और 30 मार्च 2024 को उसे भगाकर पुणे ले गया। इसके बाद वो उसे जबरदस्ती मस्जिद ले जाने लगा। यही नहीं, वो उसे बुर्का भी पहनाने की कोशिश करता, लेकिन लड़की ने मना किया, तो इरफान ने उसके बाल काट दिए। पीड़िता ने बताया कि इरफान ने अपने भाई अब्दुल की बीवी रुक्सार से उसकी फोन पर बात कराई और फिर उसे इस्लाम में कन्वर्ट करा दिया गया। इन सबसे तंग आकर उसने पुलिस की मदद ली है। पीड़िता का कहना है कि अब्दुल रहमान और इरफान पिछले 2 साल से उसके साथ ज्यादती कर रहे हैं।

‘अमित शाह का डीपफेक वीडियो शेयर करने वालों पर फ़िलहाल न हो कड़ी कार्रवाई’: तेलंगाना हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को राहत, आरक्षण पर फैलाया था झूठ

भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के डीपफेक वीडियो मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली और हैदराबाद पुलिस को आदेश दिया है कि वो इसे शेयर करने वालों पर फ़िलहाल कोई कड़ी कार्रवाई न करें। हालाँकि, शुक्रवार (3 मई, 2024) को जारी हुए इस आदेश में पुलिस को मामले की जाँच की छूट दी गई है। केस पर अगली सुनवाई 12 जून, 2024 को तय की गई है। हाईकोर्ट ने इस केस के वादी को भी नोटिस जारी किया है।

‘बार एन्ड बेंच’ के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2024 को दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की थी। इस FIR में तहरीर किसी शिंकू शरण द्वारा दी गई थी। शिंकू शरण ने मन्ने सतीश, आशमा तस्लीम, अम्बाला शिव कुमार, पट्टम नवीन, कोया गीता और पंडयाला वामशी कृष्णा को नामजद किया था। ये सभी कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य बताए जा रहे हैं। इन पर गृहमंत्री अमित शाह का एक डीप फेक वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल करने का आरोप लगाया गया था।

वायरल हुए इस डीपफेक वीडियो के साथ आरोपितों ने यह अफवाह उड़ाने की कोशिश की कि अमित शाह SC, ST और OBC का आरक्षण खत्म करने की बात कह रहे हैं। हालाँकि पुलिस जाँच के साथ तमाम फैक्ट चेक में यह वीडियो एडिटेड पाया गया था। तब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सभी आधे दर्जन आरोपितों के खिलाफ जाँच और जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी थी। इन सभी कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ हैदराबाद पुलिस की साइबर सेल ने भी एक केस दर्ज किया।

यह FIR भाजपा नेता जी पेरेन्दर रेड्डी की तहरीर पर दर्ज हुई थी। केस दर्ज करने के बाद हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार (3 मई, 2024) को तेलंगाना में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। एक स्थानीय अदालत ने इन सभी आरोपितों को जमानत दे दी। जमानत में 10-10 हजार के 2 जमानतदार लगे। इसके अलावा इन आरोपितों को सोमवार व शुक्रवार को जाँच अधिकारी के आगे सामने पेश होने का भी आदेश दिया गया था। आखिरकार आरोपितों ने हाईकोर्ट की शरण ली।

इन सभी आरोपितों ने एडवोकेट थूम श्रीनिवास के माध्यम से तेलंगाना के प्रमुख व गृह सचिव, पुलिस कमिश्नर हैदराबाद, साइबर क्राइम ब्रंच हैदराबाद SHO, वादी जी पेरेन्दर रेड्डी, दिल्ली की FIR के वादी शिंकू और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के SHO को पक्षकार बनाया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी विजयसेन रेड्डी की बेंच में हुई। दोनों पक्षों को सुन कर हाईकोर्ट ने दिल्ली और हैदराबाद पुलिस को आरोपितों के खिलाफ फिलहाल कोई कड़ी कार्रवाई न करने के निर्देश दिए। हालाँकि, अदालत ने पुलिस को जाँच जारी रखने की छूट दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून तय की गई है।

तमिलनाडु की जेल में YouTuber की आँखों पर बाँधी पट्टी, फिर पाइपों से पीटा… इलाज के लिए खटखटाना पड़ा कोर्ट का दरवाजा, वकील ने बताया – हाथ टूटा, पूरे शरीर में जख्म

तमिलनाडु के कोयम्बटूर स्थित जेल में YouTuber सुवुक्कु शंकर की पिटाई का मामला सामने आया है। उन्हें शनिवार (4 मई, 2024) को साइबर अपराध के मामले में तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब उनके वकील गोपालकृष्ण ने बताया है कि उनके मुवक्किल को कोयम्बटूर सेन्ट्रल जेल के कर्मचारियों ने पीटा है। बताया जा रहा है कि न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद उनके दाएँ हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। यहाँ तक कि उनके लिए सही इलाज तक की व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।

काउंसल ने बताया कि शनिवार की रात 10 की संख्या में जेल कर्मचारियों ने YouTuber सुवुक्कु शंकर की आँखों पर पट्टी बाँध दी, उसके बाद इसके बाद उन पर हमला कर दिया गया। हथियार के रूप में प्लास्टिक की पाइपों पर कपड़ा लपेट कर उनका इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इसके बाद उन्हें बिना उनकी इच्छा के पेनकिलर दवाएँ खाने को मजबूर किया गया। सुवुक्कु शंकर को 17 मई तक जुडिशल कस्टडी में भेजा गया है।

वकील गोपालकृष्ण ने बताया कि सोमवार को जब वो सुवुक्कु शंकर से कानूनी सहायता देने के लिए मिलने पहुँचे तो उन्हें इस घटना के बारे में पता चला। जेल में उन्हें प्रताड़ित किए जाने के संबंध में और इस घटना की जाँच कराने के लिए कोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और हमारे पक्ष में निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल में YouTuber का इलाज कराए जाने की भी माँग की है।

इससे पहले सुवुक्कु शंकर जब कडलुर जेल में बंद थे जब वहाँ के सेंथिल कुमार जेल सुपरिटेंडेंट हुआ करता थे, अब वो कोयम्बटूर जेल में पदस्थापित हैं। उन्होंने बताया कि इसी कारण कोयम्बटूर में उन पर केस दर्ज कर के उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है। पुलिस पर बदले की भावना से काम करने के आरोप लगे हैं। उन्हें थेनि से गिरफ्तार किया गया। उन पर महिला कॉन्स्टेबलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला दर्ज किया गया है। वो विजिलेंस डिपार्टमेंट में कार्यरत रहे हैं।

उन्हें 2 शीर्ष अधिकारियों की बातचीत लीक करने के आरोप में 2008 में भी जेल भेजा गया था। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने अदालत की अवमानना मामले में उन्हें 6 महीने की सज़ा सुनाई थी। YouTube पर उनके चैनल ‘सुवुक्कु मीडिया‘ पर 5.21 लाख सब्सक्राइबर्स हैं और उन्होंने 1700 से भी अधिक वीडियो डाल रखे हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 1.72 लाख और फेसबुक पर 1.25 लाख फॉलोवर्स हैं। अब वकील ने कहा है कि उनकी पिटाई के बाद पूरे शरीर पर जख्म हैं, जेल में उनकी जान को खतरा है।

राजदीप सरदेसाई कॉन्ग्रेस की गोद में बैठ पाकिस्तान और 26/11 आतंकी हमले पर दे रहे थे ज्ञान, पुराने कॉन्ग्रेसी नेता ने सरेआम धो डाला

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कॉन्ग्रेस का बचाव करवाने के चक्कर में फिर से अपनी घोर फजीहत करवा ली। इस बार उनकी बेइज्जती पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और वर्तमान में शिंदे गुट के शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने की है।

राजदीप सरदेसाई उनसे पूछ रहे थे कि शिवसेना ने विज्ञापन दिया है जिसमें लिखा है- “कॉन्ग्रेस की जीत का जश्न पाकिस्तान में मनेगा… आप क्या चाहते हैं कि आपके वोट का जश्न भारतीय मनाएँ या पाकिस्तानी।”

इसी पर सरदेसाई ने उनसे पूछा कि उनकी पार्टी इस तरह के प्रचार कर रही है जबकि एनडीए तो भविष्य और विकास की बात कर रही है। इस पर मिलिंद देवड़ा ने सरदेसाई को टोंकते हुए पूछा कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा भारत का मुद्दा नहीं है। ये भारत को उस विकसित भारत के मुकाम तक पहुँचाने के लिए जरूरी नहीं जिसकी बात एनडीए कर रही है।

इस बीच सरदेसाई ने आहत होकर देवड़ा से कहा शिवसेना का विज्ञापन डर फैलाने वाला है। उन्होंने पूछा, “क्या मैं अगर कॉन्ग्रेस पार्टी को वोट दे रहा हूँ तो मैं पाकिस्तान समर्थक हूँ।”

इसके बाद देवड़ा ने सरदेसाई की मंशा भाँपते हुए उन्हें जवाब देना शुरू किया और समझाया कि कैसे शिवसेना का विज्ञापन सही है और कॉन्ग्रेस की मंशा गलत। मिलिंद देवड़ा ने 26/11 हमले का उल्लेख किया और याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने किस तरह से उस टाइम भारत के हित के खिलाफ काम किया था और आतंकवादी हमले के लिए हिंदुओं को दोषी ठहराया था।

उन्होंने कहा, “जब 26/11 हुआ मैं उस समय साउथ मुंबई से सांसद था। मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बहुत करीब काम करता था। उस समय सरकार और जाँच एजेंसियों की मंशा दुनिया को ये बताने की थी कि पाकिस्तान के पीछे संयुक्त राष्ट्र है जबकि पाकिस्तान इस बात को खुद स्वीकार कर चुका था कि 26/11 उन्होंने खुद किया है। हमने उस समय अजमल कसाब को पकड़ा था, उसके ऊपर केस चला था और उसको सजाए मौत हुई थी।”

देवड़ा ने आगे कॉन्ग्रेसियों की पोल खोलते हुए सरदेसाई से पूछा कि उस समय कॉन्ग्रेसी नेताओं ने आतंकी हमले के बाद क्या कहा था? उन्होंने एक किताब रिलीज की थी (26/11 आरएसएस की साजिश/लेखक अजीज बर्नी) ताकि पाकिस्तान से लोगों का ध्यान भटक जाए और सारा इल्जाम हिंदुओं पर लगे। देवड़ा पूछते हैं कि आखिर ये सब हिंदू-मुस्लिम पहले किसने किया था।

सरदेसाई ने इस जगह कॉन्ग्रेस के हिंदू विरोधी चेहरे को ढाँकने का प्रयास किया वो भी ये कहकर कि वो लोग सिर्फ किताब के विमोचन में शामिल हुए थे। इसके अलावा देवड़ा से ही सवाल किए कि उन्होंने इसके विरोध में क्या किया। तब, देवड़ा बोले कि उन्होंने पार्टी के आतंरिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाया था।

इसके बाद मिलिंद देवड़ा ने बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस के एक नेता ने दावा किया था कि आईपीएस हेमंत करकरे पर पीकिस्तानी अजमल कसाब ने गोली नहीं चलाई बल्कि आरएसएस के पुलिस अधिकारी ने गोली चलाई। इसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस के उस पक्ष पर भी गौर करवाया जब उन्होंने चीन के साथ विवाद में भारत की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए थे।

बता दें कि देवड़ा के साथ बातचीत में सरदेसाई ने आखिर तक ये साबित करने का प्रयास किया कि ये विज्ञापन गलत है और शिवसेना के स्तर को गिराती है। इस पर देवड़ा ने फिर राजदीप को फटकार लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा का कोई मजाक नहीं है बल्कि जरूरी मुद्दा है और चुनावों में भी महत्वपूर्ण है।

नोट- ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पूरा आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

‘राम मंदिर बेकार है, ऐसे नहीं बनते मंदिर’: सपा महासचिव रामगोपाल अब बने वास्तुविद, सहयोगी कॉन्ग्रेस शाहबानो मामले की तरह लाएगी ‘स्पेशल बिल’, हिंदुओं से ये कैसी दुश्मनी?

कभी राम भक्तों पर गोली चलवाने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव दुनिया में नहीं हैं, लेकिन राम मंदिर विरोध की डोर अब उनके भाई-बेटे ने थाम ली है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाकर अखिलेश यादव के पास अपने पिता के पापों का प्रायस्चित करने का मौका था, लेकिन उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा में शामिल न होकर वो मौका तो खो ही दिया, अब अखिलेश यादव के चाचा और उनके सबसे बड़े सलाहकार राम गोपाल यादव एक कदम आगे बढ़ गए।

राम गोपाल यादव ने तो राम मंदिर के निर्माण को ही गलत बता दिया। इसलिए नजरिए से नहीं कि वो हिंदुओं का तीर्थ है, बल्कि इस नजरिए से कि राम मंदिर का वास्तु सही नहीं है। मंदिर ऐसे नहीं बनता है। तो अब राम गोपाल यादव वास्तुविद बन कर राम मंदिर से जुड़ी आस्था को तय करेंगे। हालाँकि साथ ही वो ये भी बोल रहे हैं कि वो कोई मंदिर वंदिर नहीं जाते।

अखिलेश यादव के सबसे करीबी सलाहकार और उनके राज्यसभा सांसद चाचा रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर बयान देते हुए कहा है कि ‘वो मंदिर बेकार है, मंदिर ऐसे नहीं बनते। राम मंदिर का नक्शा ठीक नहीं बना है, ये वास्तु के हिसाब से ठीक नहीं बनाया गया है।’ इससे पहले, उन्होंने रामनवमी के मौके पर भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था। राम गोपाल यादव ने कहा था, “करोड़ों लोग हजारों वर्षों से रामनवमी मनाते आ रहे हैं और इस देश में केवल एक राम मंदिर नहीं है। उन्होंने अधूरी प्राण-प्रतिष्ठा की है और शंकराचार्य इसके खिलाफ थे। बीजेपी को सजा देंगे। मैंने कभी किसी की पूजा नहीं की। मैं दिखावा नहीं करता हूँ। मैं भगवान का नाम लेता हूँ, लेकिन पाखंडी नहीं हूँ। पाखंडी लोग ये सब करते हैं। भगवान राम इन लोगों को दंड देंगे।”

खास बात ये है कि एक दिन पहले ही गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने खुलासा किया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में आने के बाद ठीक वैसा ही काम करेगी, जैसा राजीव गाँधी की अगुवाई में कॉन्ग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी खास कानून लाकर शाहबानो केस को पलट दिया था। उसी तरह से कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में आने के बाद राम मंदिर के फैसले को कानूनी तौर पर पलट देगी। इस बात का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक जनसभा में किया है।

मध्य प्रदेश के खरगोन में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (07 मई 2024) को कहा, “पाकिस्तान में आतंकी भारत के खिलाफ जिहाद की धमकी दे रहे हैं। यहाँ कॉन्ग्रेस के लोगों ने भी घोषणा कर दी है कि मोदी के खिलाफ वोट जिहाद करो। यानी मोदी के खिलाफ एक खास धर्म के लोगों को एकजुट होकर वोट करने को कहा जा रहा है। सोचिए, कॉन्ग्रेस किस स्तर पर उतर आई है।’

पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के इरादे कितने भयानक हैं, उसकी साजिशें कितनी खतरनाक हैं। ये समझने के लिए आपको उन लोगों की बातें सुननी होगी, जो 20-20, 25-25 साल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता और नेता रहे हैं और ये लोग अब धमाधम कॉन्ग्रेस छोड़ रहे हैं. अब इनकी बातें सुनिए, एक महिला ने कहा कि मैं राम मंदिर गई, तो उसको इतना टॉर्चर किया गया कि उन्हें कांग्रेस ही छोड़नी पड़ गई। एक और व्यक्ति ने कॉन्ग्रेस की गहरी साजिश से पर्दा उठा दिया, उन्होंने कहा कि ‘कॉन्ग्रेस के शहजादे का इरादा राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का है।”

बता दें कि सोमवार (06 मई 2024) को आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गाँधी कई बार हिंदुत्व, हिन्दू धर्म की शक्ति बदलने की बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता जानते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर राम मंदिर का फैसला बदला जाना था। यह सब अमेरिका में रहने वाले लोगों की सलाह पर होता है। उन्होंने राहुल गाँधी से इस बात की प्रतिक्रिया लेने की बात भी कही है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि यह बात यदि गलत है तो मुझ पर मुकदमा कर दिया जाए, मैं इसे सिद्ध कर दूँगा।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से बातचीत में खुलासा करते हुए कहा, “मैं कॉन्ग्रेस में 32 वर्ष रहा हूँ। जब राम मंदिर का निर्णय आया तो राहुल गाँधी ने अपने नजदीकी लोगों की बैठक में अमेरिका के अपने एक सलाहकार के कहने पर कहा था कि सरकार बनने पर राम मंदिर का फैसला पलट दिया जाएगा। इसके लिए सुपरपावर कमीशन बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस तरह तीन तलाक के मुद्दे को लेकर शाहबानो निर्णय को राजीव गाँधी सरकार ने बदला था तो फिर राम मंदिर का निर्णय क्यों नहीं बदला जा सकता।”

इंडी गठबंधन के दो सबसे बड़े चेहरों के राम मंदिर और हिंदुओं को लेकर अगर ये विचार हैं, तो समझा जा सकता है कि इंडी गठबंधन भारत के मूल निवासियों के कितने खिलाफ हैँ। भारत में रहते हुए भी भारत देश को तोड़ने की बातें की जा रही हैं। इंडी गठबंधन की शीर्ष पार्टियों के नेता कभी राम मंदिर को ही गलत बता रहे हैं, तो राहुल गाँधी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही बदल देना चाहते हैं। ममता बनर्जी की सरकार भी राम मंदिर को लेकर हिंदुओं से अपनी घृण दिखा चुकी है, तो तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी और इंडी गठबंधन की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी डीएमके के नेता और अहम मंत्री उदयनिधि स्टालिन तो सनातन को ही मिटाने की बात कर चुके हैं। हिंदुत्व, सनातन पर इसी खतरे को देखते हुए ही शायद प्रधानमंत्री को ये अपील करनी पड़ रही है कि अब ये लोगों को तय करना है कि देश को कैसे चलाना है, जिहाद से या फिर राम राज्य से।

‘मुस्लिमों को पूरा आरक्षण मिलना चाहिए’: कॉन्ग्रेसी एजेंडे को लालू यादव का खुला समर्थन, MP में जनता से बोले PM मोदी – तय कीजिए ‘वोट जिहाद’ चलेगा या रामराज्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मजहब के आधार पर आरक्षण दिए जाने के खिलाफ मुखर हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मुस्लिमों को पिछड़ों के कोटा में आरक्षण मिल रहा है। दोनों राज्यों में कॉन्ग्रेस ही ये नियम लेकर आई थी। अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने मुस्लिम आरक्षण का समर्थन कर दिया है। मंगलवार (7 मई, 2024) को जब 93 सीटों पर मतदान चल रहा है, इधर लालू यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए पटना में कहा , “रिजर्वेशन तो मिलना चाहिए मुस्लिमों को, पूरा”।

विधान परिषद सदस्यों के शपथग्रहण समारोह में पहुँचे RJD (राष्ट्रीय जनता दल) सुप्रीमो ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को आरक्षण देना ज़रूरी है। इस दौरान लालू यादव के पुराने साथी रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वो आमने-सामने भी हुए, लेकिन दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई। लालू यादव ने ये भी दावा कर दिया कि बिहार में 40 की 40 सीट कॉन्ग्रेस-राजद-लेफ्ट महागठबंधन जीतेगा, वोटिंग के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं।

उधर मध्य प्रदेश के खरगोन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की तरफ से ‘वोट जिहाद’ की अपील, संपत्ति बँटवारे का वादा और राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने की अटकलों को लेकर करारा प्रहार किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत इतिहास के एक अहम मोड़ पर खड़ा है – आपको ये तय करना है कि भारत में वोट जिहाद चलेगा या रामराज्य चलेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकी भारत के खिलाफ जिहाद की धमकी दे रहे हैं, यहाँ कॉन्ग्रेस के लोगों ने भी घोषणा कर दी है कि मोदी के खिलाफ ‘वोट जिहाद’ करो।

सलमान खुर्शीद की भतीजी के बयान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने समझाया कि मोदी के खिलाफ एक खास मजहब के लोगों को एकजुट होकर वोट करने को कहा जा रहा है। राधिका खेड़ा द्वारा कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिए जाने की घटना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक महिला ने कहा कि वो राम मंदिर गई, तो उसको इतना टॉर्चर किया गया कि उन्हें कॉन्ग्रेस ही छोड़नी पड़ गई। उन्होंने इस दौरान मुंबई हमले को लेकर विजय वडेट्टीवार और पुँछ हमले पर चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर भी निशाना साधा।

पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के एक पूर्व सीएम ने कहा कि हमारी सेना आतंकी हमले करती है, पाकिस्तान निर्दोष है। कॉन्ग्रेस के एक और बड़े नेता कि बेशर्मी देखिए, उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले में भी पाकिस्तान का हाथ नहीं था। कॉन्ग्रेस के साथी दल के एक और नेता भारत को धमकी देते हैं, कहते हैं कि पाकिस्तान ने चूड़ियाँ नहीं पहनी हुई हैं। कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन को न हमारी आस्था की परवाह है और न ही देशहित की परवाह है। राष्ट्र विरोधी बात करने में तो कॉन्ग्रेस के लोगों में होड़ लगी है।”