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6 महीने में आग लगने की 565 घटनाएँ, 690 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित: उत्तराखंड में इस साल भी गर्मियों में वही समस्या, काफी ज्वलनशील होती है चीड़ की पत्तियाँ

उत्तराखंड सुलग रहा है। कारण – गर्मियों में आग की समस्या फिर से उठ खड़ी हुई है। अब नैनीताल के भवाली रोड पर पाइन्स के जंगलों में भीषण आग लग गई है। सिर्फ जंगल का एक बड़ा हिस्सा ही नहीं, बल्कि ITI भवन भी इसकी चपेट में आ गया। नैनीताल में ही लड़ियाकाँटा क्षेत्र के जंगलों में भी आग फैली हुई है। भवाली जाने वाली सड़क पर धुआँ छाया हुआ है। वाहनों की आवाजाही रुक गई है। दमकल विभाग को आग को काबू करने के लिए लगाया गया है, लेकिन तेज़ हवाओं के कारण इसमें भी मुश्किलें आ रही हैं।

भारतीय सेना जहाँ तैनात है, वहाँ भी आग की लपटें पहुँच सकती हैं। सेना के जवान तत्परता से आग बुझाने के काम में लग गए हैं। नैनीताल और भीमताल झील से पानी लेकर हेलीकॉप्टर के जरिए आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। कुमाऊँ के जंगल भी अछूते नहीं हैं। बलदियाखान, ज्योलिकोट, मंगोली, खुरपाताल, देवीधुरा, भवाली, पाईनस और भीमताल मुक्तेश्वर समेत कई इलाके इसकी चपेट में आ गए हैं। बड़ी बात ये है कि पाइन्स क्षेत्र स्थित हाईकोर्ट कॉलोनी के लोगों को भी खतरा है।

चूँकि आग जिला मुख्यालय के पास ही लगी है, शहर में यातायात बाधित है। ‘द पाइन्स’ के पास स्थित एक घर भी जल गया। वो घर खाली पड़ा हुआ था। हालाँकि, हाईकोर्ट कॉलोनी को फ़िलहाल कोई नुकसान नहीं हुआ है। नैनी झील में फ़िलहाल नौकायन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। नैनीताल के प्रभागीय वन अधिकारी चन्द्रशेखर जोशी ने बताया कि आग बुझाने के लिए मनोरा रेंज के 40 कर्मियों एवं 2 वन रेंजरों को भी तैनात किया गया है।

पिछले 24 घंटों में कुमाऊँ क्षेत्र में आग लगने की 26 घटनाएँ हुई हैं। गढ़वाल के 5 इलाके भी इसका शिकार बने हैं। वहाँ 33.34 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। अगर 1 नवंबर, 2023 से अब तक की घटनाओं को लें तो 6 महीने से भी कम समय में आग लगने की 565 घटनाओं ने उत्तराखंड को दहलाया है। 689.89 हेक्टेयर क्षेत्र के जंगल प्रभावित हुए हैं। राज्य को 14 लाख रुपए से भी अधिक का नुकसान हुआ है। जखोली और रुद्रप्रयाग में 2 अलग-अलग क्षेत्रों में जंगल में आग लगाने के आरोप में 3 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा है, साथ ही विभिन्न विभागों को आपस में समन्वय कर के आग बुझाने का निर्देश दिया है। कुछ लोगों ने अपने भेड़ों को चराने के लिए घास उगाने हेतु भी जंगल में आग लगाई थी। ताज़ा आग के कारण 2 लोगों के झुलसने की भी खबर है। कालागढ़ टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में आग लगने से जंगली जानवरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता खड़ी हो गई है।

वन विभाग ने अपने मुख्यालय में इन घटनाओं पर काबू पाने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है। आग लगने की सूचना देने के लिए 18001804141 और 01352744558 फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। 9389337488 व 7668304788 पर व्हाट्सएप्प भी किया जा सकता है। देहरादून स्थित आपदा कंट्रोल रूम के नंबर 9557444486 और पुलिस के 112 पर भी ऐसी घटनाओं को लेकर आमजन सूचित कर सकते हैं। देहरादून की डीएम ने विभिन्न विभागों की बैठक की है।

आग लगने की घटनाओं को लेकर लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। मॉनसून को देखते हुए नगर निकायों को नालियों की सफाई का निर्देश दिया गया है। बारिश के मौसम से पहले रिवर ड्रेजिंग, चैनलाइजेशन व ड्रेनेज कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया। बिजली विभाग को जर्जर विद्युत पोलों को चिह्नित कर बदलने के लिए कहा गया है। इन्स्युलेटर भी चेक करने को कहा गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों पर क्रैश बैरियर भी लगाए जाएँगे। अन्य तरह की भी तमाम तैयारियाँ की जा रही हैं।

वैसे उत्तराखंड में आग लगने की घटनाएँ कोई नई नहीं हैं। 2021 में भी ये समस्या भयावह हो गई थी। तब Mi-17 हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई थी। वहाँ चीड़ के पेड़ ज्यादा हैं, उनकी पत्तियाँ ‘पिरूल’ अत्यधिक ज्वाललशील होती है, ऐसे में हिमालय की संपदा नष्ट होती है। 2021 में भी पहले साढ़े 3 महीनों में 1400 के करीब ऐसी घटनाएँ दर्ज हुई थीं। एक अध्ययन में पता चला था कि जंगल की आग से निकला स्मॉग और राख ‘ब्लैक कार्बन’ बना रहा है, जो ग्लेशियरों को कवर कर रहा है, जिससे उन्हें पिघलने का खतरा है।

गंगोत्री, मिलम, सुंदरडुंगा, नयाला और चेपा जैसे अपेक्षाकृत कम ऊँचाई पर स्थित ग्लेशियर सबसे अधिक खतरे में हैं और यही ग्लेशियर बहुत सी नदियों के स्रोत भी हैं। चीड़ के पेड़ औषधीय गुण रखते हैं, उन्हें काट देना समाधान नहीं है। उससे कोयला बनता है, बिजली उत्पादन होता है। ये भी माँग की जा रही है कि वन विभाग से लेकर जंगली क्षेत्रों का नियंत्रण वापस लेकर वन पंचायतों को अधिक सदृश किया जाए। अक्सर जनजातीय समाज जंगलों का संरक्षण करता रहा है।

अमेरिका में मानवाधिकार हनन के साथ-साथ नस्लीय भेदभाव: अश्वेत फ्रैंक टायसन को पुलिस ने गिराकर गर्दन दबाया, अस्पताल में मौत

सारी दुनिया को मानवाधिकार का ज्ञान देने वाले अमेरिका में इन दिनों लोगों का उत्पीड़न जारी है। साल 2020 में सामने आए जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के वीडियो की तरह ही एक और अश्वेत अमेरिकी का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह व्यक्ति जमीन पर गिरा हुआ है और उसके ऊपर चढ़े हुए लोगों से वह कह रहा कि ‘मैं साँस नहीं ले पा रहा हूँ’। आखिरकार अस्पताल में उसकी मौत हो गई है।

अमेरिका में अहियों के कैंटन पुलिस विभाग द्वारा गुरुवार (25 अप्रैल 2024) को एक वीडियो जारी किया गया। यह वीडियो पुलिस के बॉडी कैमरा से लिया गया है। इस वीडियो में अधिकारी 53 साल के फ्रैंक टायसन नाम के एक व्यक्ति को पकड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अधिकारी उसे जमीन पर गिराकर अपने घुटनों से दबाए हुए हैं। उसके हाथ में हथकड़ी लगी है।

दरअसल, टायसन को लेकर पुलिस को संदेह था कि 18 अप्रैल 2024 को वह एक कार दुर्घटना में वह शामिल था और एक्सीडेंट के बाद मौके से फरार हो गया था। 36 मिनट लंबे इस वीडियो क्लिप की शुरुआत एक गश्ती करने वाले अधिकारी के एक कार पर आने से होती है। यह कार बिजली के एक खंभे से टकरा गई थी। एक प्रत्यदर्शी ने बताया कि वाहन का चालक पास के एक बार में भाग गया है।

इसके बाद अधिकारी वहाँ जाते हैं तो टायसन बार में मिलता है। अधिकारी उसकी बाँह पकड़ने की कोशिश करते हैं तो विवाद हो जाता है। इसके बाद टायसन चिल्लाने लगता है, “वे मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं। शेरिफ को बुलाओ।” अधिकारियों ने टायसन को ज़मीन पर गिरा दिया और उसे हथकड़ी लगा दी। वीडियो में लगभग 30 सेकंड तक उसकी गर्दन के पास पीठ पर अधिकारी घुटना रखे हुए दिखते हैं।

इस दौरान टायसन यह बार-बार कहता है, “मैं साँस नहीं ले पा रहा हूँ। मैं अपनी गर्दन नहीं हिला सकता।” हालाँकि, एक अधिकारी खड़े होने से पहले ‘शांत हो जाओ’ और ‘तुम ठीक हो’ चिल्लाता है। अगले वीडियो में टायसन को लगभग छह मिनट तक फर्श पर औंधे मुँह लेटे हुए और शांत दिखाया गया है। वहीं, अधिकारी बार के अधिकारियों से बात कर रहे हैं।

जब अधिकारी टायसन की जाँच करते हैं तो वह कोई जवाब नहीं देता है। उस दौरान एक अधिकारी कहता है, “क्या वह साँस ले रहा है? क्या उसकी नाड़ी चल रही है?” इसके बाद अधिकारियों ने टायसन की हथकड़ी खोल दी और सीपीआर शुरू कर दिया। वीडियो में दिखाया गया है कि कुछ देर में पैरामेडिक्स घटनास्थल पर पहुँचते हैं और टायसन को स्ट्रेचर पर एम्बुलेंस में लेकर जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, टायसन की एक स्थानीय अस्पताल में मृत्यु हो गई है। हालाँकि, मौत का आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर इस घटना की तुलना साल 2020 में हुए अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत से कर रहे हैं।

फ्लॉयड को भी इसी तरह जमीन पर गिराकर उसके ऊपर घुटने रख गए थे। फ्लॉयड ने भी अधिकारियों से कहा था कि ‘वह साँस नहीं ले पा रहा’ है। दरअसल, कानून का पालन करने वाले नागरिक की तरह फ्लॉयड ने पुलिस के निर्देशों का अनुपालन किया और फिर भी उनके साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया था। इसके कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। इस मामले में कोर्ट ने तीन अधिकारियों को दोषी पाया था।

बताते चलें कि अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ किए गए नस्लीय अपराधों का एक बड़ा एवं वीभत्स इतिहास रहा है। जॉर्ज फ्लॉयड अमेरिकी पुलिस द्वारा संस्थागत अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ संस्थागत नस्लीय अत्याचार का शिकार था, जिसका अफ्रीकी अमेरिकी मूल के लोगों के खिलाफ बर्बरता बरतने का एक लंबा इतिहास रहा है। अब उसी अत्याचार का शिकार टायसन बना है।

रिचार्ज करवाने गई नाबालिग हिंदू लड़की को दुकानदार अतहरुद्दीन भेजने लगा गंदे-गंदे मैसेज, सबके सामने उठा ले जाने की धमकी: लोगों ने दम भर कूटा

सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ लोग एक दुकानदार को घसीट कर बाहर लाते हैं और उसकी बीच सड़क पर पिटाई करते हैं। घटना की वजह से आसपास भीड़ जमा हो गई, जिसमें महिलाएँ भी दिख रही हैं। पिट रहे युवक पर लव जिहाद का आरोप लगाया जा रहा है। बाद में सभी लोग आरोपित को पकड़ कर पुलिस स्टेशन ले जाने की बात करते दिख रहे हैं। घटना गुरुवार (25 अप्रैल 2024) की है।

सोशल मीडिया के X यूजर अनिल शर्मा ने 1 मिनट 39 सेकेंड के इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “उत्तराखंड हल्द्वानी की घटना है यह। मुसलमान को दुकान किराए पर दे देते हैं हिंदू किराए की लालच में और यह अपना जिहाद करना शुरु कर देते हैं। इसकी मोबाइल की दुकान थी, जो भी लड़की इससे रिचार्ज करवाने आती थी, उनको यह मैसेज करना शुरू कर देता था।”

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला हल्द्वानी के कोतवाली क्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली एक महिला ने 25 अप्रैल (गुरुवार) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया कि उनकी 17 साल की नाबालिग बेटी कुछ दिनों पहले एक मोबाइल की दुकान पर रिचार्ज करवाने गई थी। ‘दिल्ली मोबाइल शॉप’ नाम की इस दूकान को अतहरुद्दीन ऑपरेट करता है। अतहरुद्दीन ने यहाँ पीड़िता का नंबर ले लिया। बाद में वह पीड़िता को गंदे-गंदे मैसेज करने लगा। ऑपइंडिया के पास अतहरुद्दीन द्वारा भेजे गए कुछ मैसेज के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं।

इन मैसेजों में नाबालिग लड़की बार-बार अतहरुद्दीन को ‘भैया’ बोल रही है। हालाँकि अतहरुद्दीन खुद को भाई बोलने से मना कर रहा है। वह पीड़िता को जबरन दोस्ती करने का दबाव बना रहा है। कई मैसेज उसने डिलीट भी कर लिए हैं। एक मैसेज में अतहरुद्दीन ने पीड़िता को अपने सपने में देखने की भी बात कही। नाबालिग की माँ ने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि अतहरुद्दीन ने खुद को सिख (सरदार) बता कर लड़की को गुमराह करने की भी कोशिश की।

शिकायत के मुताबिक अतहरुद्दीन यहीं नहीं रुका। वह लड़की का पीछा उसके कॉलेज स्टॉप तक जा कर करने लगा। रास्ते में वह नाबालिग से छेड़खानी करता था और हाथ पकड़ने की भी कोशिश कर रहा था। पीड़िता ने अपने एक परिचित से अतहरुद्दीन की करतूत बताई। पीड़िता का परिचित उलाहना लेकर अतहरुद्दीन की दुकान पर गया। यहाँ अतहरुद्दीन उससे झगड़ने और हाथापाई करने लगा। आरोप है कि उलाहना देने पर अतहरुद्दीन बोला, “जो करना है कर लो। मुझे किसी का डर नहीं लगता। मैं लड़की को सबके सामने उठा कर ले जाऊँगा।”

आरोपित ने पीड़िता के परिचित को भी जान से मार डालने की धमकी दी। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि उनकी बेटी अतहरुद्दीन की इस धमकी से बेहद डरी हुई है। पीड़िता ने खाना-पीना छोड़ दिया है और मानसिक अवसाद की हालत में पहुँच गई है। लड़की की माँ ने अपनी बेटी के साथ किसी तरह की अनहोनी की आशंका जताई है।

पुलिस को दी गई शिकायत में अतहरुद्दीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने अतहरुद्दीन को हिरासत में ले लिया है। मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में जब नैनिताल पुलिस से ऑपइंडिया ने संपर्क किया तो उनकी ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है। जवाब आने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा।

हल्द्वानी के बजरंग दल कार्यकर्ता जोगिंदर सिंह राणा उर्फ़ जोगी से ऑपइंडिया ने बात की। जोगिंदर ने बताया कि आरोपित अतहरुद्दीन हल्द्वानी के मुखानी रोड पर पूरे परिवार के साथ रहता है। वह उम्र में पीड़िता से लगभग 10 साल बड़ा है। जोगिंदर राणा ने यह भी बताया कि अतहरुद्दीन के पास दुकान चलाने का वैध कागजात भी नहीं है। उन्होंने अतहरुद्दीन के मोबाइल में कई अन्य हिन्दू लड़कियों के नंबर और उनसे आपत्तिजनक चैटिंग मिलने का भी दावा किया।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने 4 पत्रकारों से की मारपीट… क्योंकि वो दिखा रहे थे फर्जी मतदान की खबर, CPM विधायक से भी धक्का-मुक्की: केरल में मामला दर्ज

केरल के कासरगोड में शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को फर्जी मतदान की रिपोर्टिंग करने गए चार पत्रकारों पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के संदिग्ध कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। इस दौरान पत्रकारों से मारपीट की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने पिटाई करने के बाद पत्रकारों को वहाँ से भगा दिया।

घटना कासरगोड के चेंगला स्थित सरकारी हाई स्कूल के बूथ की है। यहाँ पर फर्जी मतदान की खबर मिलते ही कैराली न्यूज के रिपोर्टर शिजू कन्नन, चैनल के कैमरामैन शैजू पिलाथारा, मातृभूमि न्यूज के रिपोर्टर सारंग और मातृभूमि अखबार के रिपोर्टर प्रदीप जीएन बूथ पर पहुँचे और रिपोर्टिंग की कोशिश की। इसी दौरान IUML कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की।

दरअसल, मतदान के दिन दोपहर में मार्क्सवादी पार्टी के एजेंटों ने स्कूल में बूथ संख्या 113, 114 और 115 में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदान की सूचना अपने पार्टी के अधिकारियों को दी। उन्होंने यह भी बताया कि IUML के कार्यकर्ता उन्हें मतदान केंद्र पर बैठने नहीं दे रहे हैं। इसके बाद CPM चुनाव प्रबंधक कासरगोड विधानसभा क्षेत्र में IUML के गढ़ चेंगला के स्कूल पहुँचे।

एलडीएफ चुनाव समिति के संयोजक केपी सतीश चंद्रम ने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता उन लोगों के वोट डाल रहे थे, जो केरल में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, “हमने जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है।” सतीश चंद्रम ने इसकी जानकारी मीडिया को भी दी। इसके साथ ही उदमा के विधायक और सीपीएम के जिला सचिव को भी इसके बारे में बताया।

जब मीडिया घटना की रिपोर्टिंग के लिए पहुँची तो IUML के कार्यकर्ताओं ने रिपोर्टिंग नहीं करने के लिए कहा और वहाँ से तुरंत भागने के लिए धमकाया। उसी समय उदमा विधायक और कार्यवाहक सीपीएम जिला सचिव कुन्हाम्बु स्कूल पहुँचे। उन्होंने कहा, “IUML कार्यकर्ताओं ने विधायक के साथ मारपीट करने की कोशिश की, लेकिन कासरगोड विधायक एनए नेल्लिकुन्नु ने हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाया।”

इधर, हमले के शिकार पत्रकारों ने इसकी शिकायत पुलिस और जिला कलेक्टर से की है। कलेक्टर इनबासेकर ने एक बयान में कहा कि उन्होंने बूथ संख्या 115 पर फर्जी मतदान पर कार्रवाई की है। हालाँकि, उन्होंने की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से नहीं बताया।

बता दें कि केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) गठबंधन में कॉन्ग्रेस की सहयोगी दल है। इस गठबंधन में और भी कई छोटे-छोटे दल हैं। वहीं, दूसरी तरफ CPM की अगुवाई वाली LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) गठबंधन है। इसमें सीपीएम और सीपीआई सहित कई दल हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री विजयन पिनराई के नेतृत्व में केरल में LDF की सरकार है।

‘देश शरिया से नहीं चलेगा, सरकार बनते ही पूरे देश में लागू होगा समान नागरिक संहिता’: गृहमंत्री अमित शाह बोले- धारा 370 को कॉन्ग्रेस ने बच्चे की तरह पाला

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को कहा कि देश शरिया से नहीं, समान नागरिक संहिता (UCC) चलेगा। उन्होंने कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनते ही पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा। ये ‘मोदी की गारंटी’ है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के अपने घोषणा पत्र में पर्सनल लॉ को फिर से लागू करने की बात कही है।

मध्य प्रदेश के गुना संसदीय क्षेत्र में जनता को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र को ध्यान से पढ़िए। उन्होंने कहा है कि पर्सनल लॉ को फिर से लागू करेंगे। वे देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ लाना चाहते हैं। क्या ये देश शरिया से चल सकता है? राहुल बाबा, आपको तुष्टिकरण के लिए जो करना है वो करो, लेकिन जब तक भाजपा है हम पर्सनल लॉ नहीं लाने देंगे।”

गृहमंत्री ने आगे कहा, “ये देश समान नागरिक संहिता से चलेगा। ये हमारे संविधान की स्पिरिट है। हम उत्तराखंड में यूसीसी लाए हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी है कि हम देश भर में यूसीसी को लागू करेंगे।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस 70 साल तक धारा 370 को अपने बच्चे की तरह पालती रही, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2019 को एक झटके में कश्मीर से धारा 370 को खत्म कर दिया।

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर का मुद्दा 70 सालों तक दबाकर रखा। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश के विकास में सबसे पहली प्राथमिकता एससी, एसटी और ओबीसी को दी है। लेकिन, कॉन्ग्रेस कहती है कि इस देश के संसाधनों पर सबसे पहला अधिकार मुस्लिमों का है। उन्होंने कहा कि भाजपा कॉन्ग्रेस की इस मंशा को पूरी नहीं होने देगी।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश से आतंकवाद और नक्सलवाद को समाप्त किया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ओबीसी विरोधी पार्टी है। उसने वर्षों तक ओबीसी वर्ग के लोगों को केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 साल में देश के करोड़ों गरीबों के लिए ढेर सारे काम किए हैं।

इसके बाद मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भी उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। इस सीट से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में हैं। दिग्विजय सिंह को मध्य प्रदेश का बंटाधार करने वाला व्यक्ति बताते हुए अमित शाह ने कहा, “दिग्विजय सिंह की राजनीति से स्थायी विदाई कर देनी चाहिए। यह आशिक का जनाजा है, जरा धूमधाम से निकालो और बड़ी लीड से हराकर घर बैठाओ।”

‘केजरीवाल के लिए राष्ट्रहित से ऊपर व्यक्तिगत हित’: भड़का हाई कोर्ट, जेल से सरकार चलाने के कारण दिल्ली के 2 लाख+ स्टूडेंट को न किताब मिली, न ड्रेस

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल राष्ट्रहित से ऊपर अपना व्यक्तिगत हित रखते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके जेल में होने के कारण दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में 2 लाख विद्यार्थियों को किताब एवं यूनिफॉर्म मिलने में देरी हो रही है।

दरअसल, ‘सोशल ज्यूरिस्ट’ नाम के एक NGO ने एक जनहित याचिका दाखिल करके कहा है कि नगर निगम के स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अब तक किताबें नहीं मिली हैं। इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली सरकार को सिर्फ सत्ता की चाह है।

बेंच ने कहा, “किताब और यूनिफॉर्म बँटवाना कोर्ट का काम नहीं है। हम ये इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कोई अपना काम नहीं कर रहा है… आपके क्लाइंट (दिल्ली सरकार) को सिर्फ सत्ता में दिलचस्पी है। मैं नहीं जानता कि आप कितनी शक्ति चाहते हैं? समस्या यह है कि आप शक्ति को हथियाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके कारण आपको शक्ति नहीं मिल रही है।”

इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने कोर्ट को बताया कि MCD की स्थायी समिति की गैर-मौजूदगी में किसी अधिकारी को शक्ति देने के लिए मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है। मुख्यमंत्री अभी अभी हिरासत में हैं, इसलिए देरी हो रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ये कोई बहाना नहीं हो सकता।

इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा कि खुद हाई कोर्ट अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग वाली कई याचिकाओं को खारिज कर चुका है। उन्होंने कहा, “आपने कहा है कि मुख्यमंत्री के हिरासत में होने के बावजूद सरकार जारी रहेगी। आप हमें उस रास्ते पर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिस पर हम नहीं जाना चाहते थे। यदि आप चाहते हैं कि हम इस पर टिप्पणी करें, तो हम पूरी सख्ती से करेंगे।”

कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि इस मामले को ऐसे ही छोड़ दिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर स्टैंडिंग कमिटी किसी भी वजह से नहीं बन पा रही है तो दिल्ली सरकार किसी उपयुक्त अथॉरिटी को वित्तीय अधिकार दे। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वो इस मामले में दो दिन के अंदर जरूरी कार्रवाई करे।

भाजपा का दिल्ली सरकार पर हमला

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रामवीर बिधूड़ी ने कहा क‍ि मुख्यमंत्री केजरीवाल की जेल से सरकार चलाने की जिद से संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सिफारिश के अभाव में द‍िल्‍ली नगर न‍िगम में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले 35 दिनों से कैबिनेट की बैठक नहीं हुई है। राजधानी में बिजली और पानी का समर प्लान नहीं बना है। पिछले साल डूबने के बावजूद मॉनसून के दौरान राजधानी को बचाने के लिए कोई मीटिंग नहीं हो रही है। पूरा प्रशासन ठप पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपराज्यपाल को हस्तक्षेप करना चाहिए।

शराब घोटाले में नष्ट किए सबूत

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अपनी बात रखी है। हलफनामे में ED ने कहा, “घोटाले की अवधि में और जब 2021-22 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में घोटाला और अनियमितताएँ सार्वजनिक हो गईं, तब 36 व्यक्तियों (आरोपित और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों) द्वारा कुल 170 से अधिक मोबाइल फोन बदले/नष्ट किए गए।”

हलफनामे में आगे कहा गया है, “घोटाले और धन के लेन-देन के महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों को आरोपियों और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों द्वारा सक्रिय रूप से नष्ट कर दिया गया है। सबूतों के इतने सक्रिय और आपराधिक विनाश के बावजूद एजेंसी महत्वपूर्ण सबूतों को फिर से हासिल करने में सक्षम रही है, जो सीधे तौर पर प्रक्रिया में याचिकाकर्ता का खुलासा करती है।”

लोकसभा चुनाव 2024: बंगाल में हिंसा के बीच देश भर में दूसरे चरण का मतदान संपन्न, 61%+ वोटिंग, नॉर्थ ईस्ट में सर्वाधिक डाले गए वोट

लोकसभा चुनाव 2024 में दूसरे चरण के लिए मतदान समाप्त हो गया है। देश के 13 राज्यों की 88 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। ये मतदान 89 सीटों पर होना था, लेकिन मध्य प्रदेश की बैतूल लोकसभा सीट पर बीएसपी कैंडिडेट के निधन की वजह से मतदान नहीं कराया गया, यहाँ मतदान 7 मई को कराया जाएगा। हालाँकि जिन 88 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ, वहाँ 61.4% प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में सर्वाधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया, तो पश्चिम बंगाल में हिंसा की कभरें आई। वहीं, संदेशखाली में भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए, जिसके बाद एनएसजी तक को तैनात करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन 88 सीटों पर शुक्रवार को वोटिंग हुई है उनमें अभी तक के आँकड़े के अनुसार, त्रिपुरा पूर्व सीट पर सबसे ज्यादा 78.53% मतदान दर्ज किया गया है। वहीं, सबसे कम 45.94% वोटिंग मध्य प्रदेश की रीवा पर सीट पर हुई है। वहीं, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के 102 गाँवों में पहली बार लोकसभा के लिए मतदान हुआ।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में त्रिपुरा में सर्वाधिक 77.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया। इसके अलावा असम में 70.68 प्रतिशत, बिहार में 54.17 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 72.51 प्रतिशत, जम्मू और कश्मीर में 67.22 प्रतिशत, कर्नाटक में 64.57 प्रतिशत, केरल में 65.04 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 55.32 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 53.71 प्रतिशत, मणिपुर में 77.18 प्रतिशत, राजस्थान में 60.06 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 53.17 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 71.84 प्रतिशत मतदान हुआ है।

इन राज्यों में हुआ मतदान

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में केरल की (20) सीटों, कर्नाटक (14), राजस्थान (13), महाराष्ट्र (8), उत्तर प्रदेश (8), मध्य प्रदेश (7), असम (5), बिहार (5) हैं, तो छत्तीसगढ़ (3), पश्चिम बंगाल (3), मणिपुर, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर में 1-1 सीट पर मतदान कराया गया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 88 में से 52 सीटें भाजपा ने जीतीं थीं। वहीं कांग्रेस को 18 और शिवसेना और जदयू को चार-चार सीटों पर सफलता मिली थी। इसके अलावा 10 सीटें अन्य के खाते में गई थी।

लोकसभा चुनाव के इस दूसरे चरण में राहुल गाँधी, हेमा मालिनी, अरुण गोविल, ओम बिरला, एचडी कुमारस्वामी, शशि थरूर और राजीव चंद्रशेखर जैसे नामचीनों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया। इस चरण में 5 केंद्रीय मंत्री चुनाव मैदान में हैं, जिसमें केरल की अटिंगल सीट से वी. मुरलीधरन, केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से राजीव चंद्रशेखर, राजस्थान की जोधपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान के बाड़मेर से केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी और बेंगलुरु उत्तर सीट से केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे चुनाव मैदान में हैं। 

पश्चिम बंगाल में हिंसा, एनएसजी की तैनाती, भारी हथियार बरामद

केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद हुए। बताया जा रहा है कि यहाँ से उसे विदेश में बने हथियार तक बरामद हुए हैं। CBI की टीम केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ यहाँ पहुँची। शाहजहाँ के एक करीबी हफीजुल खान के घर से यह हथियार बरामद किए गए हैं। हफीजुल भी तृणमूल कॉन्ग्रेस का नेता बताया जा रहा है। यहाँ हालात बिगड़ने पर एनएसजी तक को तैनात किया गया। इसके अलावा वोटिंग के दौरान पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर हिंसा की खबरें आईं।

इसके अलावा तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि बंगाल की दो लोकसभा सीटों बालूरघाट और रायगंज में सेंट्रल फोर्सेस ने महिलाओं को वोटिंग से रोका। वहीं, बालूरघाट में बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और तृणमूल कॉन्ग्रेस वर्कर्स के बीच झड़प भी हुई।

मणिपुर में ईवीएम तोड़ा, हंगामा

आउटर मणिपुर में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में उखरुल जिले के मतदान केंद्र 44/36 और 44/41 पर उपद्रवियों ने ईवीएम मशीन और वीवीपैट को नष्ट कर दिया। आउटर मणिपुर (एसटी) संसदीय क्षेत्र के उखरुल के सहायक रिटर्निंग अधिकारी कजलाई गंगमेई ने रिटर्निंग ऑफिसर को सूचना दी कि बदमाशों ने दोपहर करीब 3.40 बजे मतदान केंद्रों 44/36 और 44/41 पर ईवीएम और वीवीपैट को नष्ट कर दिया है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 7 चरणों में मतदान कराया जा रहा है। पहले चरण के लिए 19 अप्रैल को मतदान कराया गया था। दूसरे चरण के लिए शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को संपन्न हो गया। अभी 5 चरणों में मतदान कराया जाना और नतीजे 4 जून को सामने आएँगे।

जानिए कौन है भारत विरोधी पाकिस्तानी पत्रकार जहाँजैब अली: अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी अपनी प्रोपेगेंडा से नहीं आता बाज

अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित जहाँजैब अली नाम के एक ‘पत्रकार’ ने गुरुवार (25 अप्रैल 2024) को अवनी डायस के ‘वीजा नवीनीकरण’ वाले संदिग्ध मुद्दे को उठाकर विवाद खड़ा कर दिया। ऑस्ट्रेलिया की एबीसी न्यूज़ की दक्षिण एशिया प्रमुख डायस ने 23 अप्रैल को कहा था कि मोदी सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने पर उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

बाद में पता चला कि अवनी डायस ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया था। उन्होंने काफी पहले ही अपने देश ऑस्ट्रेलिया जाने की योजना बना चुकी थी। जब जहाँजैब अली को संभावना जगी कि इस मुद्दे से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव आ सकती है तो वे इस मुद्दे को उछालने से अपने आपको रोक नहीं सके।

जहाँजैब अली के नापाक मंसूबों के विपरीत, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, “भारत सरकार अपनी वीज़ा नीति पर बात कर सकती है। यह कोई ऐसी बात नहीं है, जिस पर मैं यहाँ से विचार करूँ।” दरअसल, यह पहली बार नहीं था कि अली को अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा नजरअंदाज किया गया था।

भारत के आंतरिक मामलों से संबंधित मुद्दों पर अमेरिकी सरकार की राय माँगने का उनका कुख्यात इतिहास रहा है। जहाँजैब अली मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के अनुसार, वह अक्टूबर 2014 से पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज़ से जुड़े हुए हैं। ऑपइंडिया ने पाया कि उन्होंने फरवरी और अगस्त 2023 के बीच ‘द फ्राइडे टाइम्स’ के लिए भी लिखा है।

खालिस्तान का मुद्दा उठाने पर पाकिस्तानी पत्रकार की निंदा

इस साल 17 अप्रैल को जहाँजैब अली ने खालिस्तान का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत सरकार द्वारा आतंकवादियों की एक्स्ट्रा टेरिटोरियल हत्याओं की बात कबूल की है। उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता से कड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, लेकिन मैथ्यू मिलर ने उनके प्रश्न पर विचार ही नहीं किया।

मैथ्यू मिलर ने जोर देकर कहा था, “जैसा कि मैंने पहले कहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका इसके बीच में नहीं आने वाला है, लेकिन हम भारत और पाकिस्तान दोनों को तनाव से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

पिछले साल सितंबर में मैथ्यू मिलर ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारत-कनाडा के बीच राजनयिक विवाद को लेकर जहाँजैब अली के भारत विरोधी सवाल पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया था। बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बिना कोई सबूत दिए निज्जर की हत्या में भारत की भूमिका का आरोप लगाया था।

जब जहाँजैब अली ने अमेरिकी हस्तक्षेप की गुहार लगाई

पिछले साल मार्च में पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ ने तत्कालीन अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस से यह गुहार लगाई थी कि भारत सरकार पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करे। उन्होंने नेड से पूछा, “कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के पास दोनों साझेदारों (पाकिस्तान और भारत) के बीच मध्यस्थता करने की शक्ति और अधिकार है… तो आप मध्यस्थता क्यों नहीं करते?”

इस पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, “क्योंकि ये देशों का स्वयं का निर्णय है। यदि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए किसी विशेष भूमिका पर सहमत होते हैं तो संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों देशों के भागीदार के रूप में उस प्रक्रिया का किसी भी तरह से समर्थन करने के लिए तैयार है।”

नेड प्राइस ने अली के सवाल को नजरअंदाज करते हुए ककहा, “हालाँकि, यह संयुक्त राज्य अमेरिका का काम नहीं है कि वह भारत और पाकिस्तान के एक-दूसरे से जुड़ने के तौर-तरीकों को निर्धारित करे। हम भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने के लिए रचनात्मक बातचीत और सार्थक कूटनीति का समर्थन करते हैं।”

अमेरिका-भारत संबंधों में खटास पैदा करने की कोशिश की

जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की राजकीय यात्रा से पहले यह पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास लाना चाहता था। उन्होंने विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल से भारत में कथित ‘लोकतांत्रिक वापसी’ और पीएम मोदी से संबंधित ‘मानवाधिकार मुद्दे’ के बारे में पूछा।

पटेल ने जहाँजैब अली को चुप कराते हुए कहा, “ठीक है, मैंने कल आगामी राजकीय यात्रा के बारे में थोड़ी बात की थी और मैं फिर से दोहराऊँगा कि भारत के साथ हमारी साझेदारी सबसे अहम है। हम अपनी कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर भारत सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं। हम इस महीने के अंत में उनकी मेजबानी करने और अपनी भागीदारी को और गहरा करने के लिए उत्सुक हैं।”

BBC के ऑफिस के सर्वे पर भी फायदा उठाने की कोशिश की

फरवरी 2023 में अमेरिकी विदेश विभाग ने भारतीय कर अधिकारियों द्वारा दिल्ली और मुंबई में बीबीसी कार्यालयों पर छापे पर जहाँजैब अली के सवाल को नजरअंदाज कर दिया था। पाकिस्तानी पत्रकार जानना चाहते थे कि क्या अमेरिका मोदी सरकार के इस कदम से ‘चिंतित’ है। इस पर नेड प्राइस ने कहा, “हम भारतीय कर अधिकारियों द्वारा दिल्ली में बीबीसी कार्यालयों की तलाशी से अवगत हैं।”

अली ने इस पर भी अफसोस जताया कि 2002 के गुजरात दंगों पर बीबीसी द्वारा बनाई गई प्रोपेगैंडा डॉक्यूमेंट्री के आधार पर अमेरिका ने मोदी सरकार की आलोचना नहीं की। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा था, “संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच घनिष्ठ राजनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच बेहद गहरे संबंध हैं। हम उन तत्वों को भी साझा करते हैं, जो अमेरिकी लोकतंत्र और भारतीय लोकतंत्र के लिए सामान्य हैं।”

दरअसल, फरवरी 2023 में टैक्स अधिकारियों ने बीबीसी के कार्यालयों का तीन दिनों तक सर्वेक्षण किया था। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बीबीसी की टैक्स धोखाधड़ी को समझाया था। बीबीसी का नाम लिए बिना बयान में कहा गया था कि दिल्ली और मुंबई में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह की इकाइयों के व्यावसायिक परिसरों पर आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 133A के तहत सर्वे की गई थी।

दरअसल, एक सच्चे पाकिस्तानी के रूप में जहाँजैब अली भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में खामियों का फायदा उठाने में शामिल रहे हैं। वे अपने पाकिस्तान समर्थक प्रोपेगेंडा को प्रश्नों के रूप में बहुत चतुराई से रखते हैं। वॉशिंगटन में अपने कार्यक्षेत्र और अमेरिकी विदेश विभाग तक आसान पहुँच को देखते हुए अली भारत विरोधी ताकतों की एजेंडा को पूरा करने के लिए मुखौटा के रूप में काम करते हैं।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इस लिंक को क्लिक करके आप विस्तार से पढ़ सकते हैं।)

बेटी से छेड़छाड़ कर रहा था नाबालिग मुस्लिम, माँ सरिता शर्मा ने विरोध किया तो घर में घुसकर मार दी गोली: मौत के बाद 2 साथियों संग हुआ फरार

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में आफताब (नाबालिग, बदला हुआ नाम) और उसके साथियों ने सरिता शर्मा की गोली मार कर हत्या कर दी। सरिता शर्मा की बेटी के साथ आफताब छेड़छाड़ करता था। इस मामले में पुलिस को भी शिकायत दी गई थी। परिजन जब तक कुछ समझ पाते तब तक बदमाश घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। वहीं आनन-फानन में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में स्थित जे ब्लॉक में आफताब और उसके साथियों ने सरिता शर्मा नाम की महिला को घर में घुसकर गोली मार दी और फरार हो गए। परिजन घायल महिला को बाबू जगजीवन राम अस्पताल लेकर पहुँचे, जहाँ डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इस वारदात के पीछे की वजह सरिता शर्मा द्वारा अपनी नाबालिग बच्ची के साथ आफताब के छेड़छाड़ के विरोध को बताया जा रहा है, जिसमें सरिता शर्मा ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

आफताब बार-बार धमकी देता था कि उसके खिलाफ शिकायत वापस ली जाए, वर्ना वो उसे मार डालेगा और उसने इस वारदात को अंजाम भी दे दिया। इस वारदात की सूचना मिलने ही पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी। मौके से कुछ ही दूरी पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में आफताब और उसके साथियों की मूवमेंट कैद हुई है, जिसमें अपराधी मुँह छिपाए और टोपी पहने नजर आ रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रताप दुबे ने घटनास्थल का वीडियो शेयर कर इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दिल्ली के जहाँगीरपुरी क्षेत्र में आरोपित आफताब ने 36 साल की महिला सरिता शर्मा की गोली मारकर हत्या की। हमलावर ने घर में घुसकर मारी गोली। नाबालिग लड़की से एक तरफा प्यार में पागल लड़के ने लड़की की माँ को मार दी गोली। हमलावर अक्सर लड़की का पीछा करता था।”

पुलिस ने कहा है कि आफताब और उसके साथियों को पकड़ने के लिए स्पेशल टीमों का गठन किया गया है, जल्द ही आफताब और उसके साथियों को पुलिस पकड़ लेगी। इस मामले में परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों ने कहा कि सरिता की शिकायत पर अगर पुलिस ने समय से एक्शन लेकर आफताब के खिलाफ कार्रवाई की होती, तो आज ये घटना न घटती।

‘इस्लाम में दूसरे का अंग लेना जायज, लेकिन अंगदान हराम’: पाकिस्तानी लड़की के भारत में दिल प्रत्यारोपण पर उठ रहे सवाल, ‘काफिर किडनी’ पर हो चुका है बवाल

पाकिस्तान के कराची की रहने वाली 19 साल की भावी फैशन डिजाइनर आयशा रशीद को चेन्नई के अस्पताल में एक भारतीय मरीज का दिल प्रत्यारोपित कर नया जीवनदान दिया गया है। आयशा गंभीर हृदय संबंधी रोग से पीड़ित थीं और उन्हें पहली बार 2019 में चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में भर्ती कराया गया था। हालाँकि, दिल का प्रत्यारोपण से परिवार झिझक रहा था, क्योंकि उसके लिए 35 लाख रुपए का खर्च वहन आसान नहीं था।

बाद में बाद में अस्पताल की मेडिकल टीम ने इस पाकिस्तानी परिवार को ऐश्वर्यम ट्रस्ट से संपर्क कराया। इस ट्रस्ट ने दिल के प्रत्यारोपण के लिए इस परिवार को धन उपलब्ध कराया। आख़िरकार उन्हें लगभग छह महीने पहले अस्पताल में जीवनरक्षक सर्जरी मिली और वह भी मुफ़्त। वहीं, दिल देने वाला दाता दिल्ली का 69 वर्षीय ब्रेन-डेड मरीज था।

इस घटनाक्रम से नेटिज़न्स सोच रहे हैं कि 1.2 अरब लोगों के देश में एक पाकिस्तानी लड़की प्रतीक्षा सूची में टॉप पर कैसे पहुँची। भारत में उच्च हृदय रोग दर के लिए कुख्यात है और जिसका राष्ट्रीय स्तर पश्चिमी देशों के औसत से दोगुना है। नेटिजन्स इस बात पर भी आश्चर्यचकित दिखे कि एक मुस्लिम दूसरे का अंग कैसे ले सकता है, जबकि इस्लाम में अंगदान पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट के सह-निदेशक डॉ. केजी सुरेश राव ने कहा, “विदेशियों को एक दिल तभी आवंटित किया जाता है, जब पूरे देश में कोई प्राप्तकर्ता नहीं होता है। चूँकि इस मरीज का दिल 69 साल के व्यक्ति का था, इसलिए कई सर्जन झिझक रहे थे। हमने जोखिम लेने का फैसला किया, क्योंकि आंशिक रूप से दाता के दिल की स्थिति अच्छी थी। हम ये भी जानते थे कि यह आयशा के लिए एकमात्र मौका है।”

हालाँकि, भारतीयों में हृदय रोग की व्यापकता और विशाल आबादी को देखते हुए यूजर्स को ये तर्क गले नहीं उतर रहा है। राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के एक यूजर ने कहा कि विदेशियों, विशेष रूप से बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए लोगों के अंग प्रत्यारोपण पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हर साल हजारों भारतीय हृदय प्रत्यारोपण के इंतजार में मर जाते हैं। हालाँकि, वामपंथी वास्तुकार चित्रा विश्वनाथ के ऐश्वर्यम ट्रस्ट के माध्यम से पाकिस्तानी लड़की ने एक भारतीय हृदय निःशुल्क प्राप्त किया। पाकिस्तानी लड़की के लिए दिल दिल्ली से चेन्नई लाया गया। डॉक्टरों का दावा है कि दिल्ली में कोई भी ऐसा नहीं चाहता था, लेकिन कौन जानता है कि क्या ये डॉक्टर विवाद से बचना चाहते हों।”

एक अन्य यूजर ने लोगों से कॉन्ग्रेस और इंडी गठबंधन को वोट नहीं देने का आग्रह किया। उसने आरोप लगाया, “द्रमुक शासित चेन्नई ने एक पाकिस्तानी लड़की के हृदय प्रत्यारोपण की अनुमति दी, जो कभी अपना अंगदान नहीं करेगी। हजारों भारतीय तमिल लोग सरकारी अस्पताल में कतार में थे, लेकिन एमजीएम हेल्थकेयर ने एक पाकिस्तानी का हृदय प्रत्यारोपण मुफ्त में कर दिया।”

एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, “अब वह पाकिस्तान वापस जाएगी, एक ‘जिहादी’ से शादी करेगी और कम से कम एक दर्जन बच्चों को जन्म देगी, जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या उसे एक भारतीय मरीज की कीमत पर दिल दिया गया? क्या एक भी भारतीय मरीज़ हृदय प्रत्यारोपण के इंतज़ार में नहीं थे? एक पाकिस्तानी लड़की को हृदय प्रत्यारोपण की मंजूरी किसने दी?”

अंग ले सकते हैं, लेकिन अंगदान कर नहीं सकते

कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि मुस्लिम केवल अंग ही क्यों लेते हैं, वे कभी अंगदान क्यों नहीं करते। यूजर्स का कहना है कि मुस्लिम अंगदान इसलिए नहीं करते, क्योंकि उनका मानना है कि यह उनकी धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन है। उन्होंने चुनौती दी कि जो लोग अंगदान नहीं करते, क्या उन्हें अंग लेने का अधिकार होना चाहिए।

यहाँ तक कि 1983 क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम के विकेटकीपर सैयद किरमानी ने 2018 में अपनी आंखें दान करने का अपना वादा वापस ले लिया था। उन्होंने चेन्नई के राजन आई केयर सेंटर में नेत्रदान के बारे में जागरूकता अभियान में भाग लेने के दौरान यह वादा किया था। उन्होंने दावा किया था, “इस्लाम में, हमें किसी मृत शरीर के अंगों को बाहर निकालना या दान करना नहीं चाहिए।”

उसी साल उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक मुस्लिम डॉक्टर अरशद मंसूरी ने खुलासा किया था कि उन्हें धमकी दी जा रही है, क्योंकि उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद अपने अंगदान करने का निर्णय लिया था। डॉक्टर मंसूरी के समुदाय के कुछ लोग उनकी नेक भावना से आहत दिखे और एक ऐसा कार्य करने के लिए उनसे नाराज़ थे जिसे वे ‘इस्लाम विरोधी’ मानते थे।

इतना ही नहीं, कानपुर के एक मदरसे के अरशद मौलवी मुनीफ बरकती ने दावा किया कि डॉक्टर ने उनसे यह सवाल किया था कि चिकित्सा उद्देश्यों के लिए किसी के शरीर या अंगों को दान करना इस्लाम में स्वीकार्य है या नहीं, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि मानव शरीर अल्लाह का एक उपहार है और वह कुरान के अनुसार, कोई व्यक्ति इसका स्वामी नहीं है।

जब किडनी काफिर हो गई

चौंकाने वाली बात यह है कि जो व्यक्ति किसी मुस्लिम को अंग देता है, वह भी कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार होता है। केरल के अलप्पुझा जिले के मावेलिक्कारा निवासी हिंदू महिला लेखा नंबूथिरी ने 2009 में किडनी दाताओं की तलाश में एक व्यक्ति के विज्ञापन पर आईं। उन्होंने 15 लाख रुपये तक के प्रस्तावों को ठुकरा दिया था और अपनी किडनी दान करने के लिए उत्सुक थीं।

साल 2012 में उन्होंने अपनी एक किडनी पट्टांबी के शफी को दे दी। शफी को किडनी रिप्लेसमेंट की गंभीर जरूरत थी। उसने खुद को गरीब बताते हुए मृत्यु शय्या पर होने का नाटक किया था। लेखा ने उसे अपना किडनी देने का निर्णय लिया और 2012 में दान कर दीं। वह खराब वित्तीय स्थिति से भी जूझ रही थीं और एक पट्टे के घर में रहती थीं।

लेखा के पति साजन भी एक मरीज थे। उनके उपचार के कारण घर की वित्तीय स्थिति खराब हो गई थी। इस कपल के दो बेटों का नामांकन कक्षा 8 और 10 में हुआ था। हालाँकि, उन्होंने इन कठिनाइयों के बावजूद मुफ्त अंगदान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और 15 लाख रुपए तक के कई प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया।

साल 2023 में एक स्थानीय अखबार को इस घटना के बारे में पता चला तो इसे हिंदू-मुस्लिम के बीच सद्भाव के प्रतीक के रूप में इस खबर को लिखना चाहा। लेखा चीजों को सार्वजनिक करने से झिझक रही थी, क्योंकि वह अनावश्यक मीडिया का ध्यान नहीं चाहती थी। बाद में एक रिपोर्टर के समझाने के बाद पति-पत्नी इसके लिए सहमत हो गए। इसे ‘सांप्रदायिक किडनी’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया।

लेखा के पति ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपनी कहानी साझा करने से पहले शफी से अनुमति माँगी थी तो वे नाराज हो गए, क्योंकि अंग दाता दूसरे धर्म से था। इससे वे गुस्सा हो गए और सांप्रदायिक घृणा की भावना से भर गए। लेखा के अनुसार, किडनी स्वीकार करने के लिए दोस्तों, परिवार और उसके समुदाय के लोगों ने उसका उपहास किया।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में रूकमा राठौड़ ने लिखा है। इस लिंक पर क्लिक करके इसे विस्तार से पढ़ सकते हैं।)