कामिर खान ने स्वीकार किया है कि उसने दो बार 11 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण किया। उसे गलत तरीके से छुआ, यौन सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाया और अश्लील मैसेज भेजे।
जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?