मोशी शहर की एक चर्च। सामने खुला मैदान और वहाँ धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन। भीड़ खचाखच। तभी खुद को ईश्वर कहने वाले पादरी मवामपोसा ने कहा - जमीन पर 'पवित्र तेल' पड़ा हुआ है। बस, रोग ठीक होने की आस में सभी लोग तेल को छूने लगे। भगदड़ मची और...
सोशल मीडिया पर लोगों ने अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि वे जहाँ कहीं भी हों, पीड़ित के रुपए दे दें क्योंकि वो बेरोजगार है और उसने जॉब की उम्मीद में ये काम करना स्वीकार किया था।
"हमें इनके प्रदर्शन से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सड़क खाली होनी चाहिए। ये लोग रामलीला मैदान, जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन कर लें। लेकिन धरना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खुलवाई जाए।"
"वायरस से मृत लोगों के शवों को दफनाया नहीं जाना जाहिए और न ही इनके शवों को किसी भी प्रकार से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस जानलेवा वायरस के कारण मारे गए लोगों को दफनाने की जगह उन्हें जलाया जाना चाहिए।"
“ये भारतीय छात्र हैं, इन्हें एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी चले जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”
पुलिस रंजीत बच्चन के सोशल मीडिया अकाउंट्स खँगाल रही है। कमलेश तिवारी हत्याकांड के 3 आरोपित हाल ही में जमानत पर बाहर निकले हैं। कमलेश को सोशल मीडिया के जरिए फँसाया गया था। रंजीत के हत्या की भी इस कोण से जाँच हो रही है।
इस रैली में न सिर्फ़ शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए बल्कि जम्मू कश्मीर की 'आज़ादी' की भी बात कही गई। 'राजीव तेरे सपनों को, रावण तेरे सपनों को, पायल तेरे सपनों को- हम मंज़िल तक पहुँचाएँगे' जैसे भड़काऊ नारे लगाए गए।
सज्जाद ने शरजील इमाम का भी बचाव किया था। देशद्रोह के आरोपित शरजील को राष्ट्रवादी बताया था। कश्मीरी छात्र नेता सज्जाद ने पुलवामा आतंकी हमले के समय पूछा था कि कहीं इसके पीछे अपनी ही एजेंसियों का तो हाथ नहीं?