सुप्रीम कोर्ट ने सदन में वोटिंग की विडियोग्राफी कराने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है वोटिंग ओपन बैलेट से होगा। सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य प्रोटेम स्पीकर होंगे।
जिस उद्धव ठाकरे के विधायक आज सोनिया गाँधी के नाम पर शपथ ले रहे हैं, उन्होंने ही कभी जवानों के अपमान का आरोप लगा कर राहुल गाँधी से पूछा था कि वो 26/11 के वक़्त कहाँ थे? 26/11 के बाद चर्चित रही थी राहुल गाँधी की 'पार्टी ऑल नाइट' और प्रियंका के बेतुके बयान।
आजतक और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों का अलावा नेशनल हेराल्ड जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स तक, सबने झूठ फैलाया। पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी नहीं चूके।
ये कहानी है उस योद्धा की, जिसकी गाथा मारवाड़ में आज भी सुनाई जाती है। वो राठौड़, जिसके प्रताप से भयभीत होकर शाहजहाँ नंगे-पाँव अपने ही दरबार से भाग खड़ा हुआ। जिसकी वीरता देख मुगलों ने छल का सहारा लिया और प्रपंच की आड़ ली।
एक ज़माने में फ़िरोज़शाह तुगलक जब शिकार पर निकलते थे तो इसी महल में ठहरते थे। 1993 के बाद इस मालचा महल को लेकर कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हुईं, जिनमे कहा गया कि इस महल में रहने वाली विलायत बेग़म ने हीरे को पीसकर निगल लिया और आत्म-हत्या कर ली।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 154 विधायकों के समर्थन का दावा किया। वहीं, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने बताया कि गवर्नर को 162 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा गया है। संजय राउत 175 का दावा करते रहे हैं।
वामपंथियों की पैदल सेना में सबसे ज्यादा लोग दिल्ली जैसी जगहों के कॉलेजों के नए बच्चे होते हैं। व्यवस्थित तरीके से उनके दिमाग में झूठ का सहारा ले कर खास धर्म और विचार के खिलाफ जहर भरा जाता है। रवीश और केजरीवाल से ले कर कामरा, राठी, बनर्जी, पीईंग ह्यूमन आदि इसकी पूरी योजना बनाते हैं।
कॉन्ग्रेस और शिवसेना के भीतर लड़ाई चल रही है। कॉन्ग्रेस का एक खेमा शुरुआत से ही शिवसेना के साथ जाने के हक में नहीं रहा है। पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने अजित पवार को बताया है कि पार्टी में 30-35 ऐसे विधायक हैं, जो उनकी अनुपस्थिति में असहज महसूस कर रहे हैं। ये आँकड़ा बढ़ भी सकता है।
वह सरकार कितनी अनैतिक थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जो डिप्टी सीएम बना था, उसने सीएम की पार्टी से बगावत कर ही चुनाव जीता था। वे सीएम के बेटे को ही हराकर विधानसभा पहुॅंचे थे।
सिंधिया के नए ट्विटर बॉयो में उनके कॉन्ग्रेस से जुड़े होने का कोई संकेत नहीं है। इससे पहले, उनके प्रोफाइल में गुना से 2002-2019 तक सांसद रहने का जिक्र था। साथ ही उन महकमों का भी जिक्र था जिसकी जिम्मेदारी मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने सॅंभाली थी।