1978 में कॉन्ग्रेस पार्टी की वसंतदादा की सरकार से अलग होकर शरद पवार ने कॉन्ग्रेस तोड़ कर सोशलिस्ट कॉन्ग्रेस बना ली थी। कॉन्ग्रेस की सरकार गिरा कर खुद सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। उनके भतीजे अजीत पवार ने वही कड़वी दवा शरद पवार को पिला दी है।
"6 साल पहले राहुल गाँधी के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष बनने से पहले उनकी माँ ने उन्हें चेतावनी दी थी कि 'पवार ज़हर हैं'। लेकिन, राहुल ने उनकी चेतावनी को ठीक से न समझते हुए 'पावर ज़हर है' पर भाषण दिया। लेकिन, अब उन्हें पता चल गया होगा कि..."
1. तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं, कमाल है कि फ़िर भी तुम्हें यक़ीन नहीं 2. हम बुरे ही ठीक हैं, जब अच्छे थे तब कौन सा मेडल मिल गया था… ऐसे ही 17 शायरी-नुमा ट्वीट कर संजय राउत ने रायता फैला दिया था। लोग कह रहे हैं कि आज रायता महक गया 🙂
शनिवार को शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के नेताओं की ओर से महाराष्ट्र में नई सरकार का ऐलान होना था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि शुक्रवार को ही महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी तीन दिवसीय दिल्ली यात्रा रद्द कर दी थी क्योंकि...
महाराष्ट्र में अब तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP), कॉन्ग्रेस और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर कोशिशें की जा रही थी। इसके लिए 22 नवंबर को तीनों पार्टियों के बीच दो घंटे तक बैठक भी हुई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी लेकिन...
“हम किसानों की समस्या को हल करने के लिए साथ आए हैं। नतीजे आने के दिन से लेकर आज तक कोई भी पार्टी सरकार बनाने में सक्षम नहीं थी, महाराष्ट्र किसान मुद्दे सहित कई समस्याओं का सामना कर रहा था, इसलिए हमने एक स्थिर सरकार बनाने का फैसला किया।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर भरोसा जताया है।
सौरभ द्विवेदी के गाइड वहीं हैं जो इस मामले में अभी फोकस में है साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर उमाकांत चतुर्वेदी। सौरभ जी से ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने उनसे फिरोज काण्ड पर विस्तृत चर्चा की। पेश है उसी इंटरव्यू के मुख्य अंश जो इस पूरे मामले में आपकी ऑंखें खोलने के लिए ज़रूरी है।
गृह मंत्रालय के इस क़दम से ये हिन्दू शरणार्थी भारत में रह पाएँगे। पाकिस्तान में हिन्दुओं व सिखों की स्थिति काफ़ी बदतर है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। वहाँ अल्पसंख्यकों पर फ़र्ज़ी ईशनिंदा क़ानून लगा कर उन्हें सज़ा देने की कई घटनाएँ...