Monday, March 1, 2021
Home बड़ी ख़बर इस्लाम बनाम ईसाई: श्री लंका बम धमाके, चर्च, 200 लाशें, जाहरान हाशिम, अबु मुहम्मद…

इस्लाम बनाम ईसाई: श्री लंका बम धमाके, चर्च, 200 लाशें, जाहरान हाशिम, अबु मुहम्मद…

दो मज़हब, जिनका इतिहास आक्रमण, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, हिंसा, युद्धों और आतंकी वारदातों से सना हुआ है, अब एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े दिखते हैं। आज भी इनका केन्द्रीय उद्देश्य लोगों को ईसाई और मुस्लिम बनाना ही है।

जुम्मे की नमाज़ पढ़ी जा रही थी, और न्यूज़ीलैंड में एक ईसाई आतंकवादी ने मस्जिदों को निशाना बनाया। बात लगभग एक महीने पहले की है। उसके बाद इंग्लैंड के बर्मिंघम इलाके के कुछ मस्जिदों पर कुछ लोगों ने हथौड़े चला दिए। बयान आया कि समुदाय विशेष की जनता डर कर जी रही है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2016-17 में कुल 80,393 हेट क्राइम, यानी घृणाजन्य अपराध, के मामले सामने आए जो कि 2015-16 में 62,518 थे।

न्यूज़ीलैंड के ईसाई आतंकी ने साफ शब्दों में लिखा था, “मुस्लिम शरणार्थी हमारी भूमि पर अतिक्रमण कर रहे हैं। यह भूमि श्वेतों की है।” उसने यह चिंता जताई थी कि बाहर से आए मुस्लिम अधिक प्रजनन करके पश्चिमी देशों की धार्मिक जनसांख्यिकी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं और पश्चिमी देशों की संस्कृति व शांति भंग कर रहे हैं। उसने इस्लामी आतंक द्वारा यूरोप में मची तबाही का भी ज़िक्र किया था।

जब मार्च में यह हमला हुआ और 50 लोग मरे, तब से यह एक शुरुआत की तरह देखा जाने लगा। हमें पोलिटिकली करेक्ट होकर स्वीकारने में भले ही अनंत काल लग जाए, लेकिन सत्य यही है कि बड़े आतंकी हमलों के केन्द्र में इस्लामी विचारधारा और आईसिस का झंडा है। विचारधारा से मतलब यह नहीं है कि पूरा मज़हब और हर मुस्लिम ही आतंकवादी हो गया, बल्कि यह कि जितनी भी ऐसी आतंकी घटनाएँ होती हैं, उसका सूत्रधार एक ही मज़हब का होता है। मैं मजहबी आतंक की बात कर रहा हूँ, न कि आतंक की परिभाषा में जाकर नक्सली और स्थानीय हिंसक झड़पों को इसमें शामिल कर रहा हूँ।

क्राइस्टचर्च की घटना के तुरंत बाद बर्मिंघम के मस्जिदों पर हमला और आज श्री लंका के चर्चों को निशाना बनाकर 200 जानें ले लेना, यह बताता है कि जो साम्राज्यवादी मज़हब, अब खुल कर सामने आ गए हैं। भले ही तमाम मीडिया हाउस और अतंरराष्ट्रीय संस्थाएँ श्री लंका की घटना को कवर करते हुए अंत में ‘लिट्टे’ आतंकी संगठन की बात कर देते हैं, लेकिन जाहरान हाशिम और अबु मुहम्मद नाम के आत्मघाती हमलावर, इसे मजहबी बात ही बनाते दिखते हैं। बाकी हमलावरों के नाम भी धीरे-धीरे सामने आएँगे, लेकिन अभी तक की सूचना के हिसाब से ये मसला इस्लाम बनाम ईसाई का ही लग रहा है।

दो मज़हब, जिनका इतिहास आक्रमण, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, हिंसा, युद्धों और आतंकी वारदातों से सना हुआ है, अब एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े दिखते हैं। आज भी इनका केन्द्रीय उद्देश्य लोगों को ईसाई और मुस्लिम बनाना ही है। भारत जैसा देश इन दोनों मज़हबों के लिए फ़ाइनल फ़्रंटियर रहा है जहाँ सैकड़ों सालों के शासन और अत्याचार के बाद भी इन दोनों मज़हबों के शासकों को यहाँ की हिन्दू आबादी को कन्वर्ट करा कर पूरी तरह से ईसाई या इस्लामी बनाने में बहुत ज़्यादा सफलता नहीं मिली।

लेकिन, कोशिशें जारी हैं। आतंकी वारदातों के आलोक में, आज आलम यह है कि यूरोप जैसे महादेश के लगभग हर बड़े शहर में इस्लामी आतंक की छाप पड़ चुकी है, और पोलिटिकली करेक्ट होने के चक्कर में ये देश न सिर्फ इस्लामी आतंक को इस्लामी कहने में शर्माते रहे बल्कि सीरिया जैसे मुल्कों के शरणार्थियों को अमेरिकी स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंक के बाद अपने देश में जगह देते रहे।

हालात ऐसे बिगड़े कि जर्मनी में नए साल पर इन शरणार्थियों ने महिलाओं के साथ रेप किया, छेड़छाड़ किया और स्वीडन को विश्व का रेप कैपिटल बना दिया। स्वीडन दुनिया के शांत जगहों में से एक था, फिर उन्होंने मानवतावश शरणार्थियों को जगह दी, और आज की तारीख़ में हर एक लाख की आबादी पर बलात्कार के प्रतिशत में यह दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है।

पैटर्न वही रहा, पहले शरण माँगी, फिर अपने इलाके बनाए, फिर इलाकों में दूसरों को आने से मना किया, फिर अपने अधिकारों की बात करने लगे, और फिर अपराध अचानक से बढ़ गए। फ़िलहाल, स्वीडन ने अब इन्हें स्किल ट्रेनिंग देकर कहीं और भेजने की नीति अपनाई है ताकि वो कहीं और जाकर रोजगार कर सकें, उन्हें स्वीडन की नागरिकता या रेज़िडेंसी नहीं दी जाती।

ज़ाहिर है कि यूरोप अपने ख़ूनी इतिहास के दौर से बाहर आने के बाद, पूरी दुनिया को लूटने और ग़ुलाम बनाने के बाद, आज स्वयं क़रीब-क़रीब निगेटिव ग्रोथ का शिकार है, जहाँ हर देश अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहा है। लूट का माल ब्रिटेन और स्पेन जैसों को पचास साल से ज्यादा मदद नहीं कर पाया। ग्रीस, इटली, स्पेन और बाकी कई देशों में बेरोज़गारी चरम पर है, लोग सरकारों से नाराज हैं।

और इन्हीं मौक़ों पर बेल्जियम से लेकर फ़्रांस तक, मैड्रिड, बार्सीलोना, मैन्चेस्टर, लंदन, ग्लासगो, मिलान, स्टॉकहोम, फ़्रैंकफ़र्ट एयरपोर्ट, दिजों, कोपेनहेगन, बर्लिन, मरसाई, हनोवर, सेंट पीटर्सबर्ग, हैमबर्ग, तुर्कु, कारकासोन, लीज, एम्सटर्डम, अतातुर्क एयरपोर्ट, ब्रुसेल्स, नीस, पेरिस में या तो बम धमाके हुए या लोन वूल्फ अटैक्स के ज़रिए ट्रकों और कारों से लोगों को रौंद दिया गया। हर बार आईसिस या कोई इस्लामी संगठन इसकी ज़िम्मेदारी लेता रहा और यूरोप का हर राष्ट्र अपनी निंदा में ‘इस्लामोफोबिक’ कहलाने से बचने को लिए इसे सिर्फ आतंकी वारदात कहता रहा।

पिछले पाँच सालों में यूरोप में 20 से ज़्यादा बड़े आतंकी हमले हुए हैं, जिसमें महज़ 18 महीने में 8 हमले सिर्फ फ़्रान्स में हुए। इस्ताम्बुल में तीन बार बम विस्फोट और शूटिंग्स हुईं। बेल्जियम, जर्मनी, रूस और स्पेन इनके निशाने पर रहे। यूरोपोल द्वारा 2017 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार आईसिस ने यूरोप में आतंकी हमलों के लिए वहाँ शरण पाने वाले मुस्लिमों की मदद ली। स्वीडन की न्यूज एजेंसी टिडनिन्गारनास टेलिग्रामबायरा के अनुसार पश्चिमी यूरोप में हुए 37 हमलों में दो तिहाई हमलावर (68 में से 44) घृणा फैलाने वाले लोगों के प्रभाव में आकर हमला करने को तैयार हुए। उनका रेडिकलाइजेशन ऑनलाइन नहीं था, बल्कि उन्हें निजी तौर पर मिलने के बाद ऐसा करने को कहा गया, और वो तैयार हुए।

ज़ाहिर है कि जो लोग सताए गए हैं, वो एक समय पर इन सबसे पक जाएँगे। शायद बड़ी संस्थाएँ भी पक जाएँगी क्योंकि दोनों में होड़ लगी है कि किसके मज़हब को सबसे ज़्यादा लोग अपनाएँ। ऐसे में पीड़ित आबादी का एक व्यक्ति व्हाइट सुप्रीमेसिज्म या ‘श्वेतों की धरती’ के लिए हथियार उठा कर, अगर न्यूज़ीलैंड के मस्जिदों पर हमला कर देता है, तो ज़ाहिर है कि वैसे लोगों को बल मिलेगा जो ऐसा करना चाहते थे।

कल को यह पता चले कि जैसे आईसिस एक आतंकी समूह की तरह दुनिया हर गैरमुस्लिम आबादी को निशाना बना रहा है, वैसे ही ईसाई भी इस्लामी मुल्कों की आबादी को अपना निशाना बनाने लगें। ऐसी स्थिति कोई नहीं चाहता लेकिन बर्मिंघम में पाँच मस्जिदों पर लोगों ने क्यों हमला किया? आखिर एक साल में हेट क्राइम में लगभग 30% की बढ़ोतरी क्यों हो गई?

आज श्री लंका में चर्चों को निशाना बनाया गया। यहाँ तो उद्देश्य स्पष्ट है कि ईसाई निशाने पर थे। कुछ बड़े होटलों को भी निशाना बनाया गया जहाँ ईस्टर की प्रार्थनाएँ हो रही थीं, और कुछ विदेशी मौजूद थे। श्री लंका के लोग तो बाहर जा कर किसी दूसरे देश में आतंक नहीं मचाते, फिर इनके यहाँ के ईसाईयों को क्यों निशाना बनाया गया?

ज़ाहिर है कि यहाँ देश तो पिक्चर में है ही नहीं, यहाँ दूसरे मज़हब को टार्गेट करना था, वो जहाँ मिला इन्होंने कर दिया। श्री लंका जैसा छोटा देश ऐसी वारदातों के लिए उपयुक्त लगा होगा क्योंकि उन्हें लिट्टे की समाप्ति के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं झेलना पड़ा था, और उन्हें इसकी भनक भी न लगी हो।

इसी समय, एक और बात ज़रूरी है कहनी। वो यह कि हमें हर ऐसी आतंकी घटना के बाद अपने देश की सुरक्षा एजेंसियों को धन्यवाद देना चाहिए कि हमारे यहाँ वैसा हमला नहीं हुआ। ऐसे हमले हर दिन होते हैं, और कहीं न कहीं दसियों लोग मारे जाते हैं। चूँकि हमारी सुरक्षा में हमारे देश का सूचना तंत्र और एजेंसियाँ लगी होती हैं, तो हम ऐसे ख़तरों से बच जाते हैं। दो सालों में एक चूक होती है, और पुलवामा घटित हो जाता है। आतंकियों को एक दिन चाहिए आरडीएक्स का कार लेकर भिड़ जाने में, सरकारों को हर दिन मुस्तैद होना पड़ता है क्योंकि हमले की योजना हर दिन बनती है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

यूपी में सभी को दी जाएगी एक यूनिक हेल्थ आईडी, शहरों में हजारों गरीबों को घर देने की तैयारी में योगी सरकार

जल्द व बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी लोगों के स्वास्थ्य का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) के अंतर्गत प्रदेश सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

सोनिया को राहुल बाबा को PM बनाने की चिंता, स्टालिन को उधयनिधि को CM- 2जी, 3जी, 4जी सब तमिलनाडु में: अमित शाह

गृह मंत्री ने कहा कि सोनिया गाँधी को राहुल बाबा को प्रधानमंत्री बनाने की चिंता है और स्टालिन जी को उधयनिधि को मुख्यमंत्री बनाने की चिंता है। इन्हें ना देश की चिंता है और ना तमिलनाडु की, उनको बस अपने परिवार की चिंता है।

कॉन्ग्रेस ने वामपंथी रैली की पुरानी तस्वीरें शेयर कर नींद हराम करने का किया दावा, फर्जीवाड़े की पोल खुलते ही पार्टी सन्नाटे में

कॉन्ग्रेस आईटी सेल और कई अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा झूठे दावे के साथ साझा की गई दोनों तस्वीरें फर्जी निकलीं। जिसे रविवार (फरवरी 28, 2021) को कोलकाता में कॉन्ग्रेस पार्टी और वाम दलों की तथाकथित संयुक्त रैली में लेने का फर्जी दावा किया गया था।

‘किसानों के लिए डेथ वारंट है ये तीनों कृषि कानून, दिल्ली हिंसा में बीजेपी के लोग शामिल’: महापंचायत में केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि किसानों के उपर लाठियाँ बरसाई गई। यह केंद्र सरकार का ही प्‍लान था। भाजपा समर्थक ही दिल्‍ली की घटना में शामिल थे। केंद्र सरकार का प्‍लान था कि किसानों का रुट डायवर्ट कराकर दिल्‍ली में भेजा जाए। ताकि...

‘भैया राहुल आप छुट्टी पर थे, इसलिए जानकारी नहीं कि कब बना मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय’: पुडुचेरी में अमित शाह

“कॉन्ग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने उनकी सरकार को यहाँ गिराया। आपने (कॉन्ग्रेस) मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति बनाया था, जो अपने सर्वोच्च नेता के सामने ट्रांसलेशन में भी झूठ बोले। ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया।"

‘लद्दाख छोड़ो, सिंघू बॉर्डर आओ’: खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू ने सिख सैनिकों को उकसाया, ऑडियो वायरल

“लद्दाख बॉर्डर को छोड़ दें और सिंघू सीमा से जुड़ें। यह भारत के लिए खुली चुनौती है, हम पंजाब को आजाद कराएँगे और खालिस्तान बनाएँगे।"

प्रचलित ख़बरें

कोर्ट के कुरान बाँटने के आदेश को ठुकराने वाली ऋचा भारती के पिता की गोली मार कर हत्या, शव को कुएँ में फेंका

शिकायत के अनुसार, वो अपने खेत के पास ही थे कि तभी आठ बदमाशों ने कन्धों पर रायफल रखकर उन्हें घेर लिया और फायरिंग करने लगे।

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आमिर खान की बेटी इरा अपने हिन्दू नौकर के साथ भाग गई हैं। तस्वीर में इरा एक तिलक लगाए हुए युवक के साथ देखी जा सकती हैं।

‘अल्लाह से मिलूँगी’: आयशा ने हँसते हुए की आत्महत्या, वीडियो में कहा- ‘प्यार करती हूँ आरिफ से, परेशान थोड़े न करूँगी’

पिता का आरोप है कि पैसे देने के बावजूद लालची आरिफ बीवी को मायके छोड़ गया था। उन्होंने बताया कि आयशा ने ख़ुदकुशी की धमकी दी तो आरिफ ने 'मरना है तो जाकर मर जा' भी कहा था।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

मृत पड़ोसी के दिल को लेकर एंडरसन अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया।

जलाकर मार डाले गए 27 महिला, 22 पुरुष, 10 बच्चे भी रामभक्त ही थे, अयोध्या से ही लौट रहे थे

27 फरवरी 2002 की सुबह अयोध्या से लौट रहे 59 रामभक्तों को साबरमती एक्सप्रेस में करीब 2000 लोगों की भीड़ ने जलाकर मार डाला था।

पत्थर चलाए, आग लगाई… नेताओं ने भी उगला जहर… राम मंदिर के लिए लक्ष्य से 1000+ करोड़ रुपए ज्यादा मिला समर्पण

44 दिन तक चलने वाले राम मंदिर निधि समर्पण अभियान से कुल 1100 करोड़ रुपए आने की उम्मीद की गई थी, आ गए 2100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,201FansLike
81,844FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe