NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित खबर को पढ़ते हुए दावा किया कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।
चेन्नई रेलवे डिवीजन के अधिकारियों ने चूहे पकड़ने पर औसत खर्च को लेकर कहा कि इस तरह चूहा मारने पर खर्च का औसत निकालना गलत और अनुचित है। ये गिनती तो मरे हुए उन चूहों की है जिन्हें पकड़ा गया। जो दवा के असर से कहीं और जाकर मरे उनका हिसाब नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एक चूहे को पकड़ने पर 22 हजार रुपए खर्च हुए।
मथुरा पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन करने के बाद फेक न्यूज़ का खंडन करते हुए फैलाए जा रहे वीडियो से सम्बंधित घटना के बारे में अपने ट्वीट में बताया कि वीडियो दरअसल 28 अगस्त 2019 की एक घटना से सम्बंधित है जिसमें.......
थरूर ने नेहरू-इंदिरा की जो फोटो शेयर की वह न अमेरिका की थी और न 1954 की। फोटो मॉस्को की है जिसे 1955 में क्लिक किया गया था। नेहरू को महान और मोदी को नीचा दिखाने का थरूर का दाँव उलटा पड़ गया और उनसे लोगों के सवाल का जवाब देते नहीं बना।
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प द्वारा उपरोक्त अभियान के नारे को याद किया। कॉन्ग्रेस नेताओं और अन्य मीडिया गिरोहों ने मिलकर झूठ फैलाया कि पीएम मोदी ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प का समर्थन किया।
पियूष गोयल के एक बयान पर ट्विटर पर RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के एक फर्जी अकाउंट के ट्वीट को सच मानकर प्रोपगेंडा वेबसाइट The Quint, इकोनॉमिक टाइम्स, और आउटलुक ने खबर प्रकाशित कर दी।
'The Wire' के झूठ की पोल खोलते हुए दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कश्मीर में छप रहे अख़बारों के न केवल नाम गिनाए, बल्कि उनकी तस्वीरें भी दिखाईं।
वामपंथी विचारधारा (हम जो कह दें, वही सत्य है) वाले अविनाश दास ने एक फर्जी नोटिस को ट्विटर पर टाँग तो दिया लेकिन फैक्ट चेक के जमाने में बेचारे खुद टँग गए। 2-4 की-वर्ड अगर गूगल कर लेते तो शायद छीछालेदर से बच जाते। लेकिन ऐसा करते तो फिर वामपंथी कैसे कहलाते!
जब राजदीप कहते हैं कि 19 लाख लोगों को लिस्ट से.... उसी समय सौरभ द्विवेदी ऊँगली उठाकर बेहद दार्शनिक मुद्रा में और पूरे आत्मविश्वास के साथ राजदीप सरदेसाई को 'सही' करते हुए कहते हैं 'इकतालीस लाख..' इतना सुनते ही राजदीप एक कदम और आगे जाते हुए कहते हैं- "हाँ....हाँ वही इकतालीस लाख, उन्नीस लाख को मिलाकर।
क्या रोमिला थापर जेएनयू जैसे बड़े संस्थानों के नियम-क़ायदों से ऊपर हैं? क्या वह किसी संस्था में उसके नियम-क़ानून का पालन किए बिना बने रहना चाहती हैं। आख़िर उनके के पास ऐसा क्या है कि जेएनयू उनके कहे अनुसार अपना काम करे?