कई देशों में 'National day of mourning', अर्थात शोक का दिवस मनाया जाता है। फिर भारत के हिन्दू/सिख अपने साथ हुई त्रासदी व इसके गुनहगारों को क्यों न याद करें?
रविवार को तालिबानी लड़ाकों ने राजधानी काबुल को चारों ओर से घेर लिया था जिसके बाद अंततः अफगान प्रेसिडेंसियल पैलेस (ARG) में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पर बातचीत चल रही है। सूत्रों के मुताबिक अली अहमद जलाली अंतरिम सरकार के प्रमुख हो सकते हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के लिए हमेशा स्थान रहेगा और परंपरा के अनुसार विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण को एक निरुत्साह वाला भाषण भी बता सकता है पर एक आम भारतीय के लिए उनका संबोधन आशा देता है और उसे प्रेरित भी करता है।
हमें एक ऐसा संगठन दिखाई देता है जिसके लिए स्त्री एक योनि से अधिक कुछ है ही नहीं! वो इस बात की पैरोकारी करते हैं कि लड़कियों को शिक्षा भी नहीं दी जानी चाहिए।