महिला प्रदर्शनकारी बार-बार खुद को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जब पत्रकार उससे बढ़ते संक्रमण पर सवाल करता है तो कहती है कि इन्हें हमारी हाय लगेगी।
“कोरोना वायरस के बढ़ने के कारण लोगों से अपील की जा रही थी। स्थानीय भी हमसे माँग कर रहे थे। आज सुबह हमने इस कार्रवाई की शुरुआत की 7 बजे। शुरुआत में कुछ शरारती तत्व माहौल को बिगाड़ना चाहते थे। वे नहीं माने, तो उन्हें हिरासत में लिया गया है।”
मध्य प्रदेश के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुआ है। शिवराज सिंह ने अकेले ही शपथ ली और उनके साथ आज कोई मंत्री शामिल नहीं हुआ।
राज्य में जितने भी पेंशनधारक हैं, उन्हें अगले तीन महीने की पेंशन राशि अभी ही दे दी जाएगी ताकि वो अपना और परिवार का ख्याल रख सकें। राशन कार्ड धारकों को 1000 रुपए भी दिए जाएँगे।
रेलवे ने सारी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के आवागमन पर पहले ही रोक लगा दी है। केवल सामान ढोने वाले ट्रेनें ही चल रही हैं, जिन्हें गुड्स ट्रैन कहा जाता है। अब फ्लाइट सेवाओं पर भी पाबन्दी लगा दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना था कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ में छिपाया गया। इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई और बिहार में घूम-घूमकर इस्लाम का प्रचार करते रहे।
हरियाणा आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और आईटी एवं सोशल मीडिया प्रमुख सुधीर यादव ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के घंटा बजाने को लेकर घटिया बयानबाजी करते हुए ट्विटर पर लिखा, “इसे देखकर मुझे मेरे स्कूल का चपरासी का याद आ गया और आपको?”
दिल्ली के जामिया नगर इलाके में एक कॉलोनी है- अबुल फजल। ये कॉलोनी रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान चर्चा में रही। कारण यहाँ की गलियों में गूँजे ‘आजादी’ के नारे! ये वैसे ही आजादी के नारे थे, जिन्हें कभी कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा गला फाड़ चिल्लाया जाता था और जिनका समर्थन पाकिस्तान के आतंकी...
आयोजकों ने एक साजिश के तहत 21 मार्च की रात से ही मैसेज वायरल कर हजारों लोगों को इकट्ठा किया। इसके बाद रविवार सुबह जहाँ पूरा शहर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए घरों में कैद था, वहीं ईदगाह मैदान में प्रदर्शनकारी धरने पर थे। इन सभी लोगों पर दूसरों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में FIR दर्ज किया गया है।
"मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव है। इसलिए वे सभी भारतीयता के महत्व को नहीं समझते हैं और अरबी एवं फारसी लिपि को पसंद करते हैं। पूरे भारत की एक भाषा होनी चाहिए और वह भी हिंदी। जिसे वे कभी नहीं समझते हैं, इसलिए वे अपनी उर्दू की प्रशंसा करते रहते हैं और एक तरफ बैठते हैं।"