कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन की अटकलों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने सिरे खारिज दिया है। पीएमओ ने कहा था कि पीएम मोदी आज रात आठ बजे अपने संबोधन में लॉकडाउन जैसी कोई घोषणा नहीं करने वाले हैं।
मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट को लेकर मचे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट में आज बृहस्पतिवर को तीसरे दिन भी सुनवाई शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कल यानी शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को सत्र बुलाकर फ्लोर टेस्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाथ उठाकर बहुमत परिक्षण करवाने के भी निर्देश दिए।
कॉन्ग्रेस को मजबूत करना लोकतंत्र के लिए जरूरी है, जैसे तर्क बेमानी हैं। असल में कॉन्ग्रेस एक बीमारी है। इससे देश को जितनी जल्दी निजात मिल जाए उतना बेहतर। देश रहेगा तो लोकतंत्र भी बचेगा और संविधान भी।
लिबरल-सेकुलरों ने तुरंत कहना शुरू किया कि इटली में लॉकडाउन था, गुरुग्राम में नहीं हैं। इसलिए लाउड स्पीकर लगाकर हिंदू मंत्रो का उच्चारण केवल एक स्टंट हैं। जबकि कुछ ने ये शिकायत की कि ये लोग सिर्फ़ हिंदू मंत्रों को लाउड स्पीकर पर बोलकर लोगों को तंग कर रहे हैं।
केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि 'मस्जिद' के भीतर रखा गया 11वीं शताब्दी का शिलालेख भी इस बात को संदर्भित करता है कि पहले ये 'मस्जिद' इंद्रनारायण का मंदिर था। लेकिन राज्य सरकार की तुष्टिकरण वाली ऐसी क्या मजबूरी कि वो सच बोलने से बचती है?
"अनाज की न कोई कमी है और न इसको लेकर कोई घबराहट है। इसके अलावा खुले बाजार में भी OMSS के माध्यम से बिक्री हो रही है, जिसमें चावल का भाव 22.50 रुपए प्रति किलो है। किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है।"
उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की जनसंख्या 20% के आसपास है। यानी लिबरलों व मीडिया के गिरोह विशेष के पास वहाँ के मुस्लिमों को भड़काने के ज्यादा मौके थे और इसके लिए पूरा प्रयास किया गया। लेकिन एक व्यक्ति, सिर्फ़ एक आदमी ने सभी साजिशों को ध्वस्त कर दिया।
जिनके बच्चे मरे, जिनकी बेटियों को नग्न करके दुराचार किया गया, जिनकी शादी में सिलिंडरों को उड़ाने की योजना थी, जिनके बच्चों को छः कट्टरपंथियों ने दो-दो घंटे चाकू मारे... उन्हें अब आर्थिक मदद से भी महरूम किया जाएगा? क्या मार डाले गए हिन्दुओं के परिवारों को सहायता करना पाप है? शेखर गुप्ता को दिक्कत किससे है?
बीबीसी कहता है कि रंजन गोगोई ने 'अलिखित सिद्धांतों' का पालन नहीं किया। वही बीबीसी, जो मीडिया के लिखित व अलिखित, सभी सिद्धांतों की रोज अनगिनत बार धज्जियाँ उड़ाता है। बीबीसी के इस लेख से पता चलता है कि असली घाव तो राम मंदिर से हुआ है।
यह दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि भारत जैसे विकासशील देशों में आज भी किसी बड़े पुनर्जागरण के लिए कई जिंदगियाँ दाँव पर लगानी होती हैं। स्वच्छता और बेहतर हाइजिन जैसे मुद्दों को हर गली-गाँव और अखबारों की हेडलाइन बनने तक चाइनीज वायरस कोरोना एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर चुका था। लेकिन देर से ही सही, लोग इस ओर जागरूक हुए और शायद इसके बाद इन सब बातों का महत्व समझना शुरू कर देंगे।