"शरजील के ख़िलाफ़ असम और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, वो निंदाजनक है। शरजील सिर्फ़ नागरिकता संशोधन कानून का मौख़िक आलोचक है और AMU में जो उसने असम के बारे में बयान दिया, उसे संघ के लोग और भाजपा प्रवक्ता गलत तरह से पेश कर रहे हैं।"
"हम अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर रहे बल्कि अपने तरीके और स्ट्रेटेजी बदल रहे हैं। सभी जाति, धर्म के लोग साथ आएँ। घर पर खूब मजहबी नारे पढ़कर आइए, उनसे आपको ताकत मिलती है। लेकिन सिर्फ मुस्लिम बनकर विरोध मत कीजिए, आप लड़ाई हार जाएँगे।"
"हिन्दू माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि मुस्लिम अपने बच्चों को जिहादी बना रहे हैं। दंगाई मुस्लिम भीड़ ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाते हुए न सिर्फ़ ईंट-पत्थर फेंके बल्कि गोली चलाई और पेट्रोल बम भी दागे। मुस्लिम महिलाएँ मिर्ची पाउडर फेंक रही थीं।"
वे जितने ज्यादा जोर से 'इंकलाब ज़िंदाबाद' बोलेंगे, वामपंथी मीडिया उतना ही ज्यादा द्रवित होगा। कोई रवीश कुमार टीवी स्टूडियो में बैठ कर कहेगा- "क्या तिरंगा हाथ में लेकर राष्ट्रगान गाने वाले और संविधान का पाठ करने वाले देश के टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य हो सकते हैं? नहीं न।"
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल 'द वायर' में कॉलम भी लिखता है। प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम का समर्थन किया है। जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है।
ये धमाके तब हुए हैं, जब शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने असम को शेष भारत से काट कर अलग करने की धमकी दी थी। भारत के 'टुकड़े-टुकड़े' करने की बात करते हुए शरजील ने कहा था कि 'चिकेन्स नेक' वाले क्षेत्र को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग कर देने का लक्ष्य होना चाहिए।
संविधान का मसौदा तैयार करने में अहम किरदार निभाने वाली उन महिलाओं ने क्या सपना देखा था और शाहीन बाग की औरतें कैसी मिसाल पेश कर रही हैं। यह जानने के लिए 26 जनवरी से बेहतर दिन नहीं हो सकता।
19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
उद्योगपति आनंद महिंद्रा और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू सहित 16 को पद्म भूषण सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म श्री पुरस्कारों में कई आम लोगों के नाम भी शामिल हैं।
जनता की भागीदारी के कारण ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल की है। यही भावना अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों में भी दिखाई देती है। चाहे रसोई गैस की सब्सिडी को छोड़ना हो, या फिर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना।