उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल, पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार तक। दुर्गा पूजा से लेकर दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन तक - पिछले 2 दिनों में ऐसी 8 घटनाएँ हुई हैं, जहाँ मूर्ति तोड़ने से लेकर उग्र भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाया है।
आरिफ अजाकिया ने कहा, "इमरान ने सत्ता में आने के लिए अपनी पूरी साख को दाँव पर लगा दी। बाजवा इससे जो कहता है, ये करता है और जब ये बजवा के कहने चुपचाप पर चल रहा है तो फिर ये इसको क्यूँ हटाएँगे? उन्होंने कहा कि बाजवा जब इसे भीख माँगने के लिए भेजता है तो ये कभी सऊदी चला जाता है, तो कभी कहीं और। बाजवा ने कश्मीर पर हल्ला मचाने के लिए कहा तो कर दिया। खुद बाजवा, जिसने 70 साल तक इस कौम को कश्मीर के नाम पर लूटा, वो चुप है।"
कोतवाली थानाध्यक्ष ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान जामा मस्जिद के पास कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। साथ ही थानाध्यक्ष ने 12 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की। सभी को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया।
एडीजी हेडक्वार्टर जीतेंद्र कुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता, सबूत उपलब्ध करा पाने में नाकाम रहा। इतना ही नहीं, वह उस पत्र को दिखाने में अक्षम रहा जिसके आधार पर उसने इन हस्तियों पर केस करवाया था।
मृतक शिक्षक संघ से जुड़े थे। मुर्शिदाबाद समुदाय विशेष के अपराध के लिए कुख्यात रहा है। साथ ही बंगाल में भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाली राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में भी हाल में काफी तेजी देखने को मिली है।
दूसरे समुदाय के कुछ लोग दुर्गा पूजा के जुलूस में सुबह शामिल भी हुए। वे जुलूस के साथ चलते हुए मस्जिद वाली गली तक भी आए और बाद में पथराव करने वाले अन्य लोग भीड़ का हिस्सा बन गए। पत्थरबाज़ी में “मोहम्मडन” मर्दों के अलावा औरतें और बच्चे भी शामिल थे।
जेएनयू में हजार वोट पाकर विद्यार्थी संघ का वाइस प्रेसिडेंट बनना किसी को यह अधिकार दे देता है कि वो लोकतान्त्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सके? इनके हिसाब से वो मुट्ठी भर आतंकी कश्मीर घाटी के लाखों लोगों का भविष्य तय करेंगे क्योंकि उनको 'आजादी' चाहिए।
समय के फेर देखिए। जब सुनील दत्त को अनसुना कर संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाया गया तब सोनिया गॉंधी पार्टी की अध्यक्ष हुआ करती थीं। सुनील दत्त के जाने के 14 साल बाद जब वही निरुपम पार्टी को आँखें दिखा रहे हैं तो सोनिया ही पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं!
खुर्शीद ने सोनिया के अंतरिम अध्यक्ष बनने पर नाखुशी जताते हुए कहा था कि पार्टी को करारी हार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल के इस्तीफे के कारण पार्टी जनादेश का विश्लेषण नहीं कर पाई। इससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।
हाँ, हमें मौलिक आराधना करनी होगी, शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, शिव और शक्ति को एक साथ साधना ही होगा, तभी इन म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी। जब तक सिद्धि न हो, समर को टाल कर सिद्धि करनी होगी…